नई दिल्ली :पश्चिम बंगाल में पहली बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा। इस दिन रवीद्र नाथ टैगोर की जयंती है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इसकी जानकारी दी। चुनाव के नतीजों के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी हेडक्वॉर्टर में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, तब उन्होंने भी टैगोर के आदर्शों का जिक्र किया था।क्या सुवेंद्र अधिकारी सबसे आगेअगले एक- दो दिन में बीजेपी विधायक दल की मीटिंग होगी, जिसमें सीएम का नाम तय किया जाएगा। बीजेपी ने इसके लिएगृह मंत्री अमित शाहको पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बंगाल में बीजेपी का पहला सीएम कौन होगा, इसे लेकर चर्चाओं और मीटिंग्स का दौर भी चल रहा है। बीजेपी के पहले सीएम के लिए सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वजह ये कि उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हराया और इस बार फिर भवानीपुर से ममता बनर्जी को मात दी। सुवेंदु राज्य में बीजेपी का आक्रामक चेहरा हैं।टीएमसी की सरकार में मंत्री भी रहे हैं सुवेंदुचुनाव प्रचार के दौरान लगातार हिंदू वोटर्स को एकजुट करने की बात की और अब तक राज्य में नेता प्रतिपक्ष रहे। टीएमसी से बीजेपी में शामिल हुए सुवेंदु टीएमसी के काम करने के तरीके से लेकर पूरे सिस्टम को समझते हैं।ममता सरकारमें मंत्री भी रहे। हालांकि बीजेपी का पुराना कैडर ना होना उनकी उम्मीद को थोड़ा कम कर सकता है। ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी ने दूसरे पार्टी से आए नेताओं पर भरोसा नहीं किया। असम इसका एक उदाहरण है, जहां बीजेपी ने हेमंत बिस्व सरमा को सीएम बनाया, वो भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। वैसे असम और बंगाल की स्थिति में थोड़ा फर्क भी है, क्योंकि बंगाल में बीजेपी के पास और भी चेहरे हैं।संघ बैकग्राउंड वाले नेताबीजेपी ने पिछले कुछ महीनों में जब राज्यों में संगठन की नई टीम का चयन किया तोराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघबैकग्राउंड वाले नेताओं को तरजीह दी गई। इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में भी टीएमसी से लोगों को नहीं लिया गया, जैसा पिछले चुनाव में किया था। इसलिए ये भी एक संभावना है कि बीजेपी राज्य में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद अपना पहला सीएम किसी ऐसे नेता को बनाए जो शुरू से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा हो और संघ बैकग्राउंड का हो।संघ के ये नेता भी रेस मेंबीजेपी के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि संघ एंगल देखने पर मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष का नाम सामने आता है। दिलीप घोष ने राज्य में बीजेपी का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि पिछले चुनाव से इस चुनाव के बीच वह कुछ नाराज भी चल रहे थे। वह अपने आक्रामक राजनीतिक शैली और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। सामिक भट्टाचार्य को बूथ स्तर के प्रबंधन में माहिर माना जाता है। सामिक 1974 से ही संघ से जुड़े रहे और बीजेपी युवा मोर्चा में भी रहे। पश्चिम बंगाल बीजेपी में संघ बैकग्राउंड के और नेता भी हैं।क्या राजस्थान, एमपी वाला प्रयोग हो सकता हैये भी चर्चा है कि क्या बीजेपी बंगाल में मध्य प्रदेश या राजस्थान जैसा प्रयोग कर बड़े चेहरे की जगह किसी कम जानेपहचाने चेहरे को सामने कर सकती है? हालांकि बंगाल जैसे राज्य में इसकी संभावना कम लगती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान में बीजेपी पहले से ही मजबूत रही है और सरकार में भी रही है। लेकिन बंगाल में अपनी पहली सरकार में बीजेपी शायद इस तरह का प्रयोग ना करे।सीएम को लेकर क्या है पार्टी का माननाजब ओडिशा में बीजेपी की पहली बार सरकार बनी तो बीजेपी ने मोहन चरण माझी को सीएम बनाया। इन्हें सरप्राइज सीएम फेस माना गया। हालांकि माझी छात्र जीवन से ही संघ से जुड़े रहे। इंडस्ट्री फ्रेंडली फेस बीजेपी ने बंगाल में टीएमसी को ये कहकर घेरा कि न वहां रोजगार है न इंडस्ट्री, इसलिए युवा पलायन कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि सरकार का चेहरा इंडस्ट्री फ्रेंडली हो, जिससे राज्य में बीजेपी अपने वादे पूरे कर सके।
पश्चिम बंगाल में 9 मई को पहली सरकार बनाने की शपथ लेगी भाजपा
Navbharat Times•
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