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पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद विपक्ष के एकता अभियान का नेतृत्व करेंगी ममता बनर्जी

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पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद विपक्ष के एकता अभियान का नेतृत्व करेंगी ममता बनर्जी
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पश्चिम बंगाल में मिले बड़े सियासी झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को अब इंडिया गठबंधन के साथ तालमेल बढ़ाकर चलना होगा। विपक्षी खेमे को मजबूत कर केंद्र और बंगाल की सियासत में खुद को प्रासंगिक बनाये रखना शायद उनकी सियासी मजबूरी होगा। ममता ने अपने कदम के बारे में संकेत दे दिया है। ममता ने नतीजों के बाद मंगलवार को मीडिया से रूबरू होकर आक्रामकता और विपक्षी एकता की कोशिश का संदेश दिया है। ममता बनर्जी ने संकेत दिया है कि वे अपनी फाइटर इमेज के साथ लड़ाई जारी रखेंगी। चुनाव में हार को भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता इस तरह की आक्रामकता और लड़ाकू तेवर वाले बयानों से अपने कैडर को संदेश देने का प्रयास कर रही हैं कि सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। ममता के पास सीमित विकल्प हैं। वे आने वाले दिनों में विपक्षी एकता की मुहिम की अगुवाई करती नजर आ सकती हैं। केंद्र में भाजपा के खिलाफ इंडिया गठबंधन को मजबूत करने और दबाव बनाने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस केंद्र में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। साल 2024 के लोकसभा में विपक्षी दलों में उससे ज्यादा कांग्रेस को 99 और समाजवादी पार्टी को 37 सीटें मिली थीं। तृणमूल को आम चुनाव में पश्चिम बंगाल की 42 में से 29 सीटों पर जीत मिली थी। बंगाल बड़ा राज्य है यहां की जीत के बाद भाजपा की नजर निश्चित रूप से अन्य राज्यों में खुद को मजबूत कर केंद्र में अपनी ताकत बढ़ाने पर होगी। महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र की रणनीति विफल करने में ममता की पार्टी की यह संख्या काफी महत्वपूर्ण साबित हुई थी। कांग्रेस ने जिस तरह का रूख चुनाव नतीजों के बाद दिखाया है उससे संकेत मिल रहा है कि एक बार फिर विपक्षी दल मिलकर भाजपा के खिलाफ लामबंद होने की कोशिश करेंगे। ममता राज्य का दौरा भी कैडर को बिखरने से रोकने के लिए कर सकती हैं, पर यह आसान नहीं होगा। प्रचंड जीत के साथ भाजपा बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर सेंधमारी की कोशिश करेगी। इसलिए ममता बनर्जी को अपना घर बचाने के साथ अभी से लोकसभा की तैयारी में जुटना पड़ सकता है। वह बड़ी नेता हैं और उनकी पार्टी की हार से तृणमूल और विपक्ष दोनों की रणनीति को झटका लगा है। बंगाल नतीजों से यूपी को लेकर भी विपक्षी खेमे में चिंता स्वाभाविक है, क्योंकि बंगाल की जीत के बाद भाजपा का उत्साह बहुत बढ़ा है। विपक्ष को अपने समर्थकों कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाना होगा कि भाजपा अजेय नहीं है और वे मिलकर भाजपा को रोक सकते हैं।

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