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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
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पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है, जबकि 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 77 सीटों वाली भाजपा ने दो तिहाई सीटें यानी कुल 207 सीटें हासिल कर ली हैं। 15 साल बाद ममता की इस चुनावी हार के बाद सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं और कहानियां सुनाई दे रही हैं। इन्हीं में से एक चर्चा ऐसी है जिसमें कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी को बंगला नंबर 77 का श्राप लग गया है। भबानीपुर से ही ममता खुद भी चुनाव हार गई हैं। हालांकि, चुनावी हार जीत किसी एक फैक्टर या किसी के श्राप से नहीं होता बल्कि उसके कई फैक्टर होते हैं लेकिन भद्रलोक में यह किस्सा आम है कि ममता को उस घर का श्राप लगा है जिसका कनेक्शन भाजपा से है। दरअसल, यह बंगला भाजपा के संस्थापक रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उनके परिवार से जुड़ा तो है ही अपने साथ यह बंगला भारतीय इतिहास को समेटे हुए है। यह बंगला दक्षिणी कोलकाता के भवानीपुर इलाके में स्थित है। इस इलाके के अशुतोष मुखर्जी रोड 77 नंबर का बंगला एक ऐतिहासिक पता है जिसका नाता महान शिक्षाविद् आशुतोष मुखर्जी और उनके पुत्र श्यामा प्रसाद मुखर्जी से है। यह उनका पैतृक घर रहा है। यह वही मकान है जो अपने साथ विशाल इतिहास समेटे हुए हैं। यहां ईश्वर चंद विद्यासगर से लेकर रवीन्द्र नाथ टैगोर जैसी महान हस्तियाँ आ चुकी हैं। आजकल यह बंगला 'अशुतोष मुखर्जी मेमोरियल इंस्टीट्यूट' के रूप में संरक्षित है और कोलकाता नगर निगम द्वारा ग्रेड-1 हेरिटेज का दर्जा प्राप्त है। दरअसल, जिस श्यामा प्रसाद मुखर्जी का यह पैतृक आवास है, वह भारतीय राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं। उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी बनी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी अपने उस विचार के लिए ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं, जिसमें उन्होंने “एक देश, एक विधान, एक निशान” का विचार दिया था। आज भी उनकी यह विचारधारा BJP की विचारधारा के केंद्र में हैं। बंगाल चुनाव 2026 में BJP ने इसी विरासत को जोर-शोर से उठाया और “हाउस नंबर 77” को एक प्रतीक के रूप में पेश किया। इसलिए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि TMC की हार इसी “राजनीतिक श्राप” का नतीजा है, जिसे उसने वर्षों तक दबाने का काम किया है। ऐसा कहा जाने लगा कि यह वही घर है जिसे वर्षों तक नजरअंदाज किया गया, जबकि यह बंगाल की जड़ों और विरासत का प्रतीक है और जब इसकी विरासत को चुनावी मुद्दा बनाया गया, तो जनता ने उसे झटके से स्वीकार कर लिया और ममता को करारी हार दे दी। कुछ स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह तक कहा जा रहा है कि इस घर की आत्मा को अब शांति मिली है। हालांकि, यह पूरी तरह से भावनात्मक और प्रतीकात्मक व्याख्या है। ममता की हार की असली वजह सत्ता विरोधी लहर, संगठनात्मक कमजोरी, विपक्ष की मजबूत रणनीति और अहंकार की धारणा है जिसे बाद में “हाउस नंबर 77” की कहानी से जोड़ दिया गया और उसे श्राप बताया गया। आरोप है कि ममता बनर्जी ने इस बंगला को गिराने की भी साजिश रची थी।

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