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बुजुर्ग महिलाओं की दुर्दशाः त्याग और दुर्व्यवहार चौंकाने वाली कहानियों में उजागर

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बुजुर्ग महिलाओं की दुर्दशाः त्याग और दुर्व्यवहार चौंकाने वाली कहानियों में उजागर
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सोनीपत के एक वृद्धाश्रम से सामने आई शिवचरण रतन गुप्ता की कहानी ने पूरे समाज को झकझोर दिया. पिता के निधन के बाद बेटियों के अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचने की घटना ने कई सवाल खड़े किए. इसी बीच उसी वृद्धाश्रम में रह रहे दूसरे बुजुर्गों का दर्द भी सामने आया. किसी ने बेटों पर मारपीट का आरोप लगाया तो किसी ने कहा कि लाखों रुपये होने के बावजूद बेटा उन्हें अपने साथ नहीं रखना चाहता था. आज तक ने वृद्धाश्रम में रह रहे इन बुजुर्गों से खास बातचीत की. शिवचरण रतन गुप्ता की कहानी सामने आने के बाद गोहाना के गांव बोहला की पूर्व सरपंच ने भी अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि एक समय वह गांव की सरपंच थीं और पंचायत के महत्वपूर्ण फैसले लिया करती थीं. लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि उन्हें अपना घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है. पूर्व सरपंच का आरोप है कि उनके बेटों ने उनके साथ मारपीट की. इसके बाद उन्होंने घर छोड़ने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि अब उनके बेटे उनसे बात तक नहीं करते. हालांकि उनका भाई और बहन आज भी उनसे मिलने आते हैं और उनका हालचाल पूछते हैं. उन्होंने कहा कि कभी वह पूरे गांव की समस्याओं का समाधान करती थीं, लेकिन आज अपने ही परिवार की बेरुखी का दर्द झेल रही हैं. वृद्धाश्रम में रहने वाली एक अन्य बुजुर्ग महिला की कहानी भी कम भावुक नहीं है. उन्होंने बताया कि उनकी दो शादियां हुई थीं और दोनों पतियों का निधन हो चुका है. उन्होंने कहा कि उनके पास करीब 40 लाख रुपये की जमा पूंजी है. महिला का आरोप है कि बेटा पैसों के लालच में उन्हें अपने साथ नहीं रखना चाहता था. इसी वजह से उन्हें मजबूर होकर वृद्धाश्रम का सहारा लेना पड़ा. हालांकि, अपनों से मिली बेरुखी के बावजूद उनके मन में बेटे के लिए कोई नाराजगी नहीं दिखी. उन्होंने कहा कि उनके निधन के बाद उनकी पूरी संपत्ति बेटे की ही होगी. शिवचरण रतन गुप्ता की कहानी ने जिस तरह लोगों को भावुक किया, उसी तरह वृद्धाश्रम में रह रहे दूसरे बुजुर्गों की बातें भी रिश्तों के बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश करती हैं. कोई अपनों से दूर होकर आश्रम में रहने को मजबूर है तो कोई अपने ही परिवार के व्यवहार से आहत होकर यहां पहुंचा है. इन कहानियों में एक बात समान दिखाई देती है कि उम्र के आखिरी पड़ाव में कई बुजुर्ग अपने परिवार के बजाय वृद्धाश्रम में जीवन बिताने को मजबूर हैं.

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Publisher: Aaj Tak

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