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ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाने वाले नफरत भरे भाषणों के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाने वाले नफरत भरे भाषणों के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
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ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाने वाले नफरती भाषणों के खिलाफ दायर याचिका को सुनने सेसुप्रीम कोर्टने मना कर दिया है. जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि किसी भी वर्ग के खिलाफ नफरती बयान देना गलत है, लेकिन कोर्ट सिर्फ एक वर्ग के बारे में दाखिल याचिका को नहीं सुन सकता. सुप्रीम कोर्ट ने महालिंगम बालाजी नाम के याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनते हुए यह टिप्पणी की. अपनी याचिका की पैरवी के लिए खुद पेश हुए बालाजी का कहना था कि उन्होंने 9 साल तक शोध किया है. उसके बाद यह याचिका दाखिल की है. उन्होंने आरोप लगाया कि ब्राह्मण समुदाय को सोच-समझ कर निशाना बनाया जा रहा है. इसके पीछे विदेशी तत्व भी शामिल हैं. स्कूल की पाठ्यपुस्तको में भी ऐसी बातें डाली जा रही हैं जो ब्राह्मणों की नकारात्मक छवि बनाती हैं. बालाजी ने कहा कि ब्राह्मणों को सामाजिक रूप से अछूत बनाने की कोशिश हो रही है. ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे हर सामाजिक बुराई के लिए ब्राह्मण दोषी हैं. इन सभी बातों का असर आम ब्राह्मणों पर पड़ रहा है. ब्राह्मणों की उपेक्षा सामान्य बात बनती जा रही है. सरकार ठीक-ठीक यह तक नहीं बता सकती कि कश्मीर से कितने पंडितों का पलायन हुआ है. ब्राह्मणों के नरसंहार तक को भुला दिया गया है. जजों ने कहा कि ऐसी शिकायतों के लिए न्यायपालिका सही मंच नहीं है. इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और अलग-अलग मंत्रालयों से संपर्क किया. अब सुप्रीम कोर्ट ही उनका अंतिम सहारा है. इसके बाद जस्टिस नागरत्ना ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह स्कूलों और कॉलेजों में जाकर भाईचारे का प्रचार करें. याचिकाकर्ता ने कहा कि नफरत फैलाने वाले लोगसुप्रीम कोर्टतक को ब्राह्मणों की कोर्ट कह कर निशाना बनाते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा वह इस तरह की नफरत से प्रभावित हुए बिना अपना काम कर रहा है. याचिकाकर्ता को भी ऐसा ही करना चाहिए. जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'अगर आप प्रतिक्रिया देंगे, तो यह दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया को जन्म देगा. इस तरह यह चलता रहेगा. नजरअंदाज करने पर कई बातें अपने आप खत्म हो जाती हैं.' जजों ने याचिका में लिखे गए शब्द 'ब्रह्मोफोबिया' पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक नया शब्द ढूंढ लिया है. कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका किसी विशेष वर्ग के बजाय सब के लिए समान नजरिया रखती है. किसी भी समुदाय के खिलाफ हेट स्पीच नहीं होनी चाहिए. सब को धैर्य रखना चाहिए और सामाजिक भाईचारे के लिए काम करना चाहिए. यह भी पढ़ें:-फिल्म 'कहानी 2' के निर्देशक को राहत, स्क्रिप्ट चोरी के आरोप में दर्ज केस सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया

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