एसीबी के मुताबिक, भागीरथ वर्मा वर्ष 2019 से 2023 के बीच नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में मुख्य अभियंता के पद पर पदस्थ थे। आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों को काम आवंटित करने और निविदाओं से संबंधित आपत्तियां दूर करने के बदले रिश्वत की मांग की। शिकायत के आधार पर 15 जून 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और 11 के तहत अपराध दर्ज किया गया।विज्ञापनजांच के दौरान एसीबी ने रायपुर और बिलासपुर में छह तथा मध्यप्रदेश के उज्जैन में दो ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई में करोड़ों रुपये की कथित अवैध संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और कई महत्वपूर्ण प्रमाण जब्त किए गए। अब एजेंसी आरोपी की वैध आय और अर्जित संपत्तियों के बीच अंतर की भी जांच कर रही है।विज्ञापनएफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार दुर्ग के ठेकेदार राघवेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया है कि 2019 से 2023 के बीच उनसे लगातार रकम वसूली गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने अलग-अलग माध्यमों से 1.68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया। जांच में यह भी सामने आया कि नकद लेन-देन के अलावा घर के लिए एसी, टाइल्स, ग्रेनाइट, एलईडी लाइटें, स्मार्ट फोन और सोने-हीरे की अंगूठियों जैसी वस्तुएं भी ठेकेदार से खरीदवाई गईं।एसीबी के दस्तावेजों के अनुसार शिकायतकर्ता ने बैंक ट्रांजेक्शन, बिल और व्हाट्सएप चैट भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए हैं। इनमें एक परिचित के खाते में दो लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने का भी उल्लेख है। प्रारंभिक जांच के बाद दर्ज एफआईआर के आधार पर अब पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ जारी है और एजेंसी को मामले में और बड़े खुलासों की उम्मीद है।
बहु-करोड़ घोटाले में रिश्वत मांगने का भारतीय अधिकारी पर आरोप
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