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बिहार गैंगरेप मामलाः कार्रवाई में देरी को लेकर आलोचनाओं के बीच पुलिस अधिकारी निलंबित

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बिहार गैंगरेप मामलाः कार्रवाई में देरी को लेकर आलोचनाओं के बीच पुलिस अधिकारी निलंबित
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बिहार के बेगूसराय में महिला से गैंगरेप और हैवानियत के बाद आज तक की खबर का असर हुआ और डीआईजी शैलेश कुमार ने चकिया थाना अध्यक्ष राजीव रंजन को तत्काल निलंबित कर दिया है। दरअसल,आरोप है कि 11 जून की रात पांच लोगों ने एक महिला के घर में घुसकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था. पीड़िता ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान उसके साथ मारपीट भी की गई. बाद में तबीयत बिगड़ने और दर्द बढ़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के दौरान उसके गुप्तांग में कारतूस, पत्थर, लकडी डालने की पुष्टि हुई थी. हालांकि 13 जून को इस मामले में एफआईआप दर्ज कर ली गई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस की ओर से समय पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई.इसी को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी शैलेश कुमार ने चकिया थानाध्यक्ष की भूमिका की समीक्षा की और प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर उन्हें निलंबित कर दिया. इसके अलावा डीआईजी खुद सदर अस्पताल पहुंचे और पीड़िता से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली.उन्होंने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जो लगातार कार्रवाई कर रहा है. महिला के आवेदन पर रामू महतो , सूरज कुमार और नीतीश कुमार समेत दो अज्ञात पर FIR हुई है. आरोप है कि इन्हीं पांचों ने पीड़िता के पति के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर पीड़िता को शौचालय के पास से खींचकर बरामदे में गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था. बदमाशों की हैवानियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिला के प्राइवेट पार्ट में कारतूस पत्थर और लकड़ी तक डाल दिया गया था. आरोपियों के बारे में बताया जाता है कि राजू महतो कुग्यात बदमाश है. उस पर रेलवे में तीन से चार मामले जबकि लोकल चकिया थाना में भी एक मामला दर्ज है, वहीं नीतीश कुमार पर एक आर्मस एक्ट का मामला दर्ज है जबकि सूरज कुमार पर किसी तरह का कोई आपराधिक मामला थाने में दर्ज नहीं है. इधर, महिला के साथ गैंग रेप और हैवानियत की रात की पूरी कहानी जानकर तो रोंगेट ही खड़े हो जाते हैं. 11 जून की रात की खौफनाक वारदात के दिन पीड़िता के पति के कमरे का दरवाजा खोलने वाली उसकी देवरानी ने पूरी दास्तान आज तक संवाददाता सौरभ कुमार से बताई है . देवरानी ने बताया कि 11 जून की रात करीब 12:00 बजे उसके जेठ दरवाजा पीट रहे थे. हल्ला होने पर वह पहुंची और दरवाजा खोला. उसके बाद उनके जेठ अपनी पत्नी को खोजने लगे तो बाथरूम में महिला को नग्न अवस्था में देखा गया जिसके बाद दोनों ने मिलकर उसे बाहर निकाला. देवरानी ने बताया कि जेठानी के शरीर पर कई जगह ब्लेड से काटने का जख्म दिखा और उसका हाथ पीछे कर बांधा हुआ था. इसके अलावा उसका मुंह भी कपड़ा से बंधा हुआ था. उसके बाद हम लोग उसको बेहोशी की हालत में थाने ले गए जहां पुलिस ने गाली गलौज करते हुए डांट फटकार कर हमें भगा दिया और कहा पहले जाकर इलाज कराओ .उसके बाद हम लोग बरौनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गए. यहां दो सुई देकर हमें सदर अस्पताल भेज दिया गया. सदर अस्पताल में इलाज हुआ और सुबह 7:00 बजे करीब जेठानी को होश आया. उसके बाद उन्होंने अपने साथ हुई इस खौफनाक वारदात की जानकारी परिवार वालों को दी. देवरानी ने अनुसार उसकी जेठानी ने बताया कि रामू महतो, संजय कुमार और नीतीश कुमार के साथ दो अन्य बदमाश उसे बाथरूम से खींच कर बाहर ले गए और उसके साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया.परिवार ने बताया कि इससे पहले भी मार्च महीने में इन्हीं बदमाशों के द्वारा घर में घुसकर पीड़िता को नग्न कर पिटाई की गई थी और दुष्कर्म का प्रयास भी किया गया था जिसमें मामला दर्ज करवाने के बावजूद चकिया थाना पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और तीनों आरोपियों को थाना से ही जमानत दे दी.

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