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बिहार सरकार का लक्ष्य बड़े पैमाने पर ग्रामीण हाटों के विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है

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बिहार सरकार का लक्ष्य बड़े पैमाने पर ग्रामीण हाटों के विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है
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बिहार के विभिन्न जिलों में स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए गांवों में बड़े पैमाने पर ग्रामीण हाट विकसित की जाएगी। राज्य सरकार के सात निश्चय-3 की प्राथमिकताओं में भी इसे शामिल किया गया है। इसका मुख्य मकसद है ‘ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय को दोगुनी करना। इसके तहत एक तरफ रोजगार और उद्यम को बढ़ावा देने के लिए सरकार मदद देगी, वहीं स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार भी उपलब्ध होगा। बिहार विधानसभा में मंगलवार को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा पेश बजट भाषण पुस्तिका में इसका विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण हाट विकसित की जाएंगी। इसके लिए प्रखंडों में कृषि विभाग की जमीन भी चिह्नित की गई हैं। इन कार्यों के लिए राशि कहां से आएगी, इसका प्रबंध भी राज्य सरकार ने अपने बजट में किया है। यही कारण है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण विकास विभाग के बजट में साढ़े सात हजार करोड़ का इजाफा किया है। बजट आकार में शिक्षा के बाद दूसरे सबसे बड़ा विभाग बन गया है ग्रामीण विकास। पिछले वित्तीय वर्ष में यह विभाग चौथे नंबर पर था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग का बजट 16 हजार 93 करोड़ था, जिसे बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 में 23 हजार 701 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सीएम महिला रोजगार योजना में अगले वित्तीय वर्ष में महिलाओं को दो-दो लाख दिये जाने हैं। मालूम हो कि इस योजना में जीविका से जुड़ीं एक करोड़ 56 लाख महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये दिये गए हैं। इनमें जिन महिलाओं का रोजगार बेहतर चलेगा, उन्हें दो लाख रुपये तक सरकार देगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पांच लाख नए परिवारों अथवा छूटे परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक लाख 29 हजार स्वयं सहायता समूहों को बैंकों ने अब तक 7052 करोड़ से अधिक के लोन दिये हैं। वित्तमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि महिलाओं को उद्योग लगाने के प्रयास के लिए 10-10 हजार रुपये अनुदान दिये गए हैं। यह राशि किसी से भी वापस नहीं ली जाएगी। आगे उद्योग लगाने के लिए दो-दो लाख दिये जाएंगे। राज्य में ग्रामीण हाट के विकास के लिए कृषि विभाग, पंचायती राज विभाग और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। कृषि विभाग जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के बाजार के लिए इसे विकसित करेगा। ग्रामीण कृषि हाट के विकास के लिए कृषि विभाग ने बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्तमान में कतरनी चावल, मर्चा धान, जर्दालु आम, शाही लीची, मगही पान, मिथिला मखाना, हाजीपुर का चीनिया केला आदि को जीआई टैग मिला हुआ है।

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