मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि प्रदेश के विद्यार्थी घर में ही बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें, इसके लिए 400 से अधिक और डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। नौ अगस्त तक इन महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूर्ण कर ली जाएगी। शिक्षकों के नौ हजार पदों का सृजन किया गया है। संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जन्मतिथि वर्ष पर ज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने मठ-मंदिर से अपील की कि वे एक-एक स्कूल एवं कॉलेजों को गोद लें। इस दौरान मंत्री मिथिलेश तिवारी, मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन, मंत्री नंदकिशोर राम, मंत्री रामकृपाल यादव, मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता और मंत्री संजय टाइगर मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास के विचारों और उनके बताए समरसता, सेवा एवं मानवता के मार्ग को बिहार के गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। बिहार सरकार उनके संदेश को समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए काम करेगी। सीएम ने कहा कि संत रविदास की जन्मभूमि की मिट्टी को जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाएगा। यदि कोई मठ, मंदिर, धार्मिक स्थल, टोला या परिवार संत रविदास जी के गांव की मिट्टी चाहता है तो वहां भी यह मिट्टी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को किसी एक वर्ग तक सीमित कर नहीं रखा जा सकता। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। सीएम ने कहा कि अनुसूचित जातियों की बेटियों को शिक्षा के लिए गांव से बाहर जाने में कठिनाई होती थी। इसे ध्यान में रखते हुए बिहार के सभी जिलों में माता सावित्रीबाई फुले के नाम पर आवासीय छात्रावास के साथ विद्यालय खोले खोले जाएंगे। सीएम ने स्पष्ट किया कि मदरसों पर जितना ध्यान दिया जाता है, उससे कम ध्यान किसी भी कीमत पर संस्कृत शिक्षा पर नहीं दिया जाएगा। किशनगंज में बड़ी आबादी को देखते हुए वहां उर्दू विद्यालय खोलने की आवश्यकता है, सरकार इस दिशा में काम करेगी। सीएम कहा कि अगले एक-दो वर्षों में ऐसी व्यवस्था बनाने का लक्ष्य है जिससे मंत्री, विधायक और जिला पदाधिकारियों के बच्चे भी सरकारी विद्यालयों में पढ़ें। जब सक्षम परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगेंगे, तभी यह माना जाएगा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को रात 11 बजे भी आनलाइन शिक्षक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इस व्यवस्था को 15 अगस्त से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में पूज्यनीय साधु-संत बैठे हैं। मैं आग्रह करूंगा कि जितने मठ और मंदिर हैं, तय करके एक-एक स्कूल और एक कॉलेज को गोद लें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी। 10 तारीख तक डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। टीआरई-4 के तहत करीब 32 हजार शिक्षकों की बहाली की जा रही है। भागलपुर में प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पुनर्स्थापित किया जाएगा। इसके लिए करीब 220 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है और अगले एक वर्ष में इसे धरातल पर उतारने का काम शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसा दूसरा कोई नाम नहीं है। इसलिए बेगूसराय में उनके नाम पर साहित्य के क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। देश की एकता और अखंडता के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को देखते हुए उनके नाम पर भागलपुर में एआई और कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया गया है। भागलपुर में स्थापित होने वाला यह विश्वविद्यालय तकनीक के क्षेत्र में काम करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा साहनी के नाम पर मुजफ्फरपुर में आर्किटेक्चर और सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में भी काम शुरू किया गया है। कार्यक्रम में भाजपा के संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, विधायक संजीव चौरसिया, विधायक रत्नेश कुमार, विधान पार्षद जनक राम, धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन आदि मौजूद रहे।
बिहार सरकार नए कॉलेज खोलेगी, शिक्षकों की रिक्तियों को भरेगी
Dainik Jagran•

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