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भोपाल की मेट्रो रेल परियोजना कंक्रीट और मौन की विरासत छोड़ती है

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भोपाल की मेट्रो रेल परियोजना कंक्रीट और मौन की विरासत छोड़ती है
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भोपाल:झीलों के शहर भोपाल में विकास की रफ्तार अब पेड़ों पर भारी पड़ने लगी है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के ब्लू लाइन एलिवेटेड कॉरिडोर का रास्ता साफ करने के लिए ऐतिहासिक मिंटो हॉल यानी पुरानी विधानसभा के ठीक सामने लगे दशकों पुराने छायादार पेड़ों को काट दिया गया है।मुसाफिरों का आसरा खत्मये पेड़ महज हरियाली का हिस्सा नहीं थे, बल्कि पास के व्यस्त बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों के लिए तपती गर्मियों में कुदरती छतरी का काम करते थे। अब वहां सिर्फ सन्नाटा और कंक्रीट का मलबा नजर आता है।इन पेड़ों के नीचे खड़े होकर हम बस का इंतजार करते थे। अब यहां सिर्फ धूप बची है। मेट्रो आए यह अच्छी बात है, लेकिन सरकार को ये भी देखना चाहिए कि नए पेड़ कब और कहां लगेंगे?स्थानीय बस यात्री'सब नियमों के तहत हुआ'पेड़ों की कटाई को लेकरमेट्रो रेल कॉर्पोरेशनके अधिकारियों का कहना है कि यह काम जरूरी था। एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए खाली जगह की जरूरत होती है। अफसरों के मुताबिक, पेड़ों को काटने के लिए सभी जरूरी कानूनी अनुमतियां ली गई थीं। नुकसान की भरपाई के लिए अब कैपिटल प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेशन को दोबारा पौधारोपण की जिम्मेदारी दी गई है।ब्लू लाइन प्रोजेक्ट: एक नजर मेंयह कटाई 12.9 किलोमीटर लंबेब्लू लाइन प्रोजेक्टका हिस्सा है। यह लाइन भदभदा चौराहे से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहे तक जाएगी।कॉरिडोर का नामब्लू लाइन (Blue Line)कुल दूरी12.9 किलोमीटरस्टेशनों की संख्या13 एलिवेटेड स्टेशनसमय सीमा2025 में काम शुरू, 3 साल का लक्ष्यरूटभदभदा से रत्नागिरी तिराहाविकास बनाम पर्यावरणपर्यावरणविदों का मानना है कि भले ही काटे गए पेड़ों की संख्या कम हो, लेकिन ऐतिहासिक इमारतों के पास से हरियाली का गायब होना चिंताजनक है। यह मामला एक बार फिर शहर के बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच के तनाव को उजागर करता है। जहां एक ओर मेट्रो शहर में यातायात को आधुनिक बनाएगी, वहीं दूसरी ओर पुराने पेड़ों के कटने से भोपाल की ग्रीन सिटी वाली छवि पर सवाल उठ रहे हैं।

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