भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़े अर्थव्यवस्था बन चुका है और पीडब्ल्यूसी की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होगा. Goldman Sachs जैसी संस्थाएं भी भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर ऐसे दावे कर चुकी हैं. इस बीच देश की जनसंख्या को लेकर एक रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा गया कि 2050 तक हर पांच में से एक व्यक्ति की आयु 60 साल या उससे अधिक होगी, जबकि लगभग 10 में से सात बुजुर्ग ग्रामीण भारत में निवास करेंगे, शुक्रवार (7 अगस्त, 2026) को ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ (TRI) ने एक रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट के अनुसार, भारत विकसित देश बनने से पहले ही वृद्ध होती आबादी वाले देश की श्रेणी में पहुंच रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि कई विकसित देशों ने समृद्धि हासिल करने के बाद वृद्ध होती आबादी की चुनौती का सामना किया, जबकि भारत में यह स्थिति उससे पहले ही बन रही है. रिपोर्ट में बताया गया कि हर बुजुर्ग को सहारा देने वाले कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की संख्या 2001 में 8.4 थी, जो 2026 तक घटकर औसतन 5.2 रहने का अनुमान है और 2050 तक देश में करीब 34.7 करोड़ लोग 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के होंगे. वहीं, 10 में से करीब सात बुजुर्ग ग्रामीण इलाकों में रहेंगे. टीआरआई ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया, जनगणना के अनुमान और अन्य राष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की पारंपरिक पारिवारिक देखभाल व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है यानी परिवार छोटे हो रहे हैं, युवा रोजगार के लिए घर से दूर रहे हैं और लोगों की औसत आयु में वद्धि इसके मुख्य कारण हैं. हालांकि, देश में करीब 94 प्रतिशत बुजुर्गों की देखभाल अब भी परिवारों के साथ रहकर ही हो रही है. इसकी वजह से परिवार के कम सदस्यों पर बुजुर्गों की बढ़ती और पहले से अधिक जटिल देखभाल की जिम्मेदारी आ रही है. रिपोर्ट में बताया गया कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा समय देखभाल के कार्यों में बिताती हैं. जहां महिलाएं हर दिन 305 मिनट बिना किसी वेतन के देखभाल कार्यों में लगाती हैं, वहीं पुरुषों का समय सिर्फ 56 मिनट है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. लू और बाढ़ जैसी घटनाओं के कारण महिलाओं के काम का बोझ काफी बढ़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था मुख्य रूप से प्रसव, टीकाकरण और गंभीर बीमारियों जैसी तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित की गई थी और अगले चरण में लंबे समय से चली आ रही बीमारियों, दिव्यांगता और बढ़ती उम्र से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहे लोगों की सहायता करना शामिल है. टीआरआई के कार्यक्षेत्र निदेशक श्यामल सांतरा ने कहा कि भारत ने लोगों को जीवित रखने में प्रगति की है. अब अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि लोग अधिक समय तक बेहतर जीवन जी सकें. उन्होंने कहा, 'हमारे जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए देखभाल व्यवस्था में नए सिरे से बदलाव की जरूरत है. यह सिर्फ स्वास्थ्य केंद्रों पर आधारित व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसे साझा सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना होगा और टिकाऊ जीवन स्थितियों को बेहतर बनाना होगा.'
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या एक चुनौती है
DNA Hindi•
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