प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किए गए मामलों और उनमें हुई कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में अहम जानकारी दी है. वित्त मंत्रालय ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ईडी ने कुल 5,158 मामले दर्ज किए हैं. हालांकि, राज्यवार आंकड़े ED के पास उपलब्ध नहीं हैं. सरकार के मुताबिक, साल-दर-साल ED द्वारा दर्ज मामलों की संख्या इस प्रकार रही:- 31 दिसंबर 2025 तक ED ने कुल 8,391 ECIR (Enforcement Case Information Report) दर्ज की हैं. इनमें से 1,960 मामलों में कोर्ट में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की गई. अब तक विशेष PMLA अदालतों ने 58 मामलों में फैसले सुनाए, जिनमें से 55 मामलों में दोष सिद्ध हुआ. इन मामलों में 123 आरोपियों को सजा दी गई.सरकार के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में सजा की दर 94.82% है, जिसे काफी ऊंचा बताया गया है. 2019 में PMLA में संशोधन के बाद, जिन मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध नहीं बनता, उनमें क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया. संशोधन के बाद अब तक 93 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई. 2005 से 2019 के बीच (संशोधन से पहले) 1,185 मामले बंद किए गए थे. सरकार ने बताया कि 2020-21 से अब तक ED ने 43 मामलों में सजा दिलाई, जिनमें 104 आरोपियों को दोषी ठहराया गया. हर साल का ब्योरा— सरकार ने बताया कि ED कई स्तरों पर जांच करती है. मामले दर्ज करने से पहले अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी, मनी लॉन्ड्रिंग के खतरे और जोखिम का आकलन किया जाता है. जांच को तेज करने के लिए अब ED आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, जैसे— सरकार का दावा है कि इन उपायों से जांच और मुकदमों को जल्दी निपटाने में मदद मिल रही है. कुल मिलाकर, सरकार ने संसद को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ ED की कार्रवाई लगातार तेज हुई है और सजा की दर भी काफी ऊंची बनी हुई है.
भारत के प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन के मामलों में उच्च दोषसिद्धि दर देखी
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