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भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बजट प्राथमिकताओं और व्यापार सौदे की संभावनाओं को रेखांकित किया

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भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बजट प्राथमिकताओं और व्यापार सौदे की संभावनाओं को रेखांकित किया
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि वर्ष 2026-27 का बजट विकसित भारत के लक्ष्य पर केंद्रित है। आम आदमी, किसानों, कारोबारियों, निवेशकों का ध्यान रखा गया है। आर्थिक सुधारों पर जोर दिया गया है। वित्त मंत्री मानती हैं कि अमेरिका से ट्रेड डील होने से निवेश में भी तेजी आएगी। बजट, व्यापार समझौते और मौजूदा वैश्विक माहौल से जुड़े मुद्दों पर हिन्दुस्तान के राजनीतिक संपादकमदन जैड़ाऔर विशेष संवाददाताअरुण चट्ठाने उनसे विस्तृत बातचीत की है। पेश हैं उसके प्रमुख अंश... ● अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने जा रहा है। आप इस समझौते को किस रूप में देखती हैं? यह बहुत ही अच्छी खबर है। अब आयात शुल्क घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों, उद्यमियों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे बजट को बहुत बल मिलेगा। खास तौर पर भारत के निर्यातक सस्ती दरों पर अपने सामान अमेरिकी बाजार में बेच पाएंगे, जिससे उन्हें वहां प्रतिस्पर्धा कर अपने उत्पाद बेचने में मदद मिलेगी। हम लगातार मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ (ईयू), न्यूजीलैंड, कतर समेत अन्य देशों के साथ एफटीए किए हैं। आयात शुल्क में भी कटौती हुई है, जिसका लाभ भारत को निर्यात में भी मिल रहा है। ● आप वित्तीय वर्ष 2026-27 के आम बजट को किस तरह से देखती हैं? अब हमारा ध्यान आर्थिक विकास को गति देने पर केंद्रित है। हम वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसी लक्ष्य के तहत हमने कोरोना के बाद के बजटों में उन सभी प्रावधानों को हटाने पर जोर दिया है, जो गैर-जरूरी हैं और निर्यात व कारोबार करने में बाधा उत्पन्न करते हैं। इसलिए आप देख रहे हैं कि हम लगातार हर बजट में कोई न कोई सुधार कर रहे हैं। हम खोज-खोज कर गैर-जरूरी प्रावधानों को खत्म कर रहे हैं। अब हमारा बजट विनिर्माण, निर्यात, रोजगार और करदाताओं को सुविधा प्रदान करने पर केंद्रित है, जिससे भारत दुनिया में सबसे पसंदीदा निवेश स्थल बनेगा। कारोबार करने में सुगमता लाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर इस बार के बजट में भी कई सुधार से जुड़े एलान किए गए हैं। ● बजट में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए कमेटी गठित करने का एलान हुआ है। हम किन सुधारों की उम्मीद कर सकते हैं? भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसके लिए देश के पास मजबूत और पारदर्शी बैंकिंग सिस्टम होना चाहिए। ऐसा सिस्टम, जो हर क्षेत्र की मदद करने में सक्षम हो। इसके लिए हमने फैसला लिया है कि पूरे बैंकिंग क्षेत्र का अध्ययन किया जाए और फिर सुधार को लेकर एक गहन रिपोर्ट तैयार हो, जिसके आधार पर विकसित भारत का एक मजबूत और पारदर्शी बैंकिंग सिस्टम तैयार हो। इसलिए कमेटी हर नजरिए से बैंकिंग क्षेत्र का अध्ययन करेगी, जिसमें एनबीएफसी भी शामिल हैं। कमेटी बैंकिंग क्षेत्र में सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी, उसी रिपोर्ट के आधार पर बदलाव किए जाएंगे। ● आयकर विभाग में भी फेस-लेस सिस्टम लाया गया। सुधार तय उद्देश्य के अनुरूप लागू हों, यह कैसे किया जाएगा? हर विभाग के काम की समीक्षा की जाती है, जो हर महीने होती है। जिला स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर के कार्य की समीक्षा करने के लिए पूरा सिस्टम है। अगर कोई सुधार किया गया है, तो उसका अनुपालन अनिवार्य तौर पर हो, यह हर विभाग केंद्रीय स्तर पर सुनिश्चित करता है। सुधार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए समीक्षाओं के माध्यम से देखा जाता है कि जो सुधार किए गए हैं, वह लागू हो रहे हैं या नहीं। इसी तरह से बाकी सुधारों पर भी नियमित नजर रखी जाती है। ● बजट में आम आदमी के लिए क्या कुछ शामिल है? विपक्ष कह रहा है कि बजट में आम आदमी शामिल नहीं है? बजट में आम आदमी का पूरा ख्याल रखा गया है। प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आम आदमी को लाभ होगा। हमने सीमा शुल्क से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं, जिसका लाभ एमएसएमई और अन्य उद्योग संचालित करने वाले आम व्यक्ति को ही मिलेगा। हमने सीमा शुल्क को कम किया है। उससे जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाया है। इसके साथ ही, पहले नियम था कि अगर कोई उद्योग विदेश से कच्चा माल आयात करता है, तो उसे छह महीने के अंदर तैयार करके निर्यात कर कागजी कार्रवाई पूरी करनी होती थी। अब हमने यह अवधि बढ़ाकर एक वर्ष कर दी है, जिससे आम निर्यातक एवं कारोबारी को लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए शी-मार्ट का एलान किया गया है, जो उनके लिए बाजार उपलब्ध कराएगा। हर जिले में एक महिला हॉस्टल बनाया जाएगा, जो कामकाजी महिलाओं को सुरक्षा के साथ बेहतर माहौल देगा। लड़के-लड़कियां उद्यमी बनें, इसके लिए एआई ट्रेनिंग से जुड़ी सुविधा दी जाएगी। इसके लिए हर जिले में एक आईटीआई में एआई की ट्रेनिंग दी जाएगी। हर तीन से पांच जिलों में एक हब बनाया जाएगा, जहां खेती-किसानी, प्रसंस्करण, इलेक्ट्रिक उपकरण बनाने व अन्य तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन सभी का लाभ आम आदमी, युवा और महिलाओं को ही मिलेगा। ● रोजगार के लिहाज से नए बजट में क्या खास प्रावधान हैं? देश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) का 40 प्रतिशत योगदान है, जो रोजगार और निर्यात क्षेत्र के लिहाज से काफी अहम है। हमने बीते तीन बजट में लगातार एमएसएमई क्षेत्रों को वित्तीय सहायता मुहैया कराने का काम किया है। इस बार हमने तय किया है, जो मध्यम आकार की एमएसएमई है, उन्हें आगे बढ़ने के लिए ज्यादा मदद दी जाए। पहले से प्रोजेक्ट लिंक्ड स्कीम (पीएलआई) भी चल रही है, जिससे देश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक क्षेत्र के विनिर्माण में तेजी आई है। इन सभी क्षेत्रों के तेजी से बढ़ने की वजह से रोजगार के अवसर भी तेजी से पैदा हो रहे हैं। इस बजट में भारत की क्रिएटिव इंडस्ट्री को ऑरेंज इकोनॉमी के तौर पर विकसित करने का भी एलान किया गया है, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसी तरह बजट में नए जलमार्ग बनाने का एलान किया गया है। साथ ही, इन जलमार्गों के किनारे औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिसमें पोत-नाव की मरम्मत से प्रशिक्षण देने तक का काम किया जाएगा। इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ● बजट में उच्च मूल्य कृषि उत्पादों के लिए बड़ा एलान किया गया है। क्या इसके पीछे कोई विशेष कारण है? एक समय था कि जब भारत नारियल का निर्यात करता था, लेकिन अब हम आयात के कगार पर खड़े हैं। जबकि हमारे पास इतना बड़ा समुद्र तटीय क्षेत्र है, पर धीरे-धीरे नारियल का क्षेत्र कम हो रहा है। नारियल के पेड़ पुराने हो गए हैं और नए पेड़ लगाए नहीं जा रहे हैं। समुद्री तूफान में पेड़ टूट गए हैं या खराब हो गए हैं, तो किसान उनकी जगह नए पेड़ नहीं लगा रहे हैं। इसी तरह से कोको, काजू और चंदन जैसे उच्च मूल्य के कृषि उत्पादों की पैदावार भी भारत में तेजी घट रही है, क्योंकि कुछ कृषि उत्पादों की उत्पादन प्रक्रिया काफी खराब व जटिल है। उनके प्रसंस्करण में समय अधिक लगता है और श्रमिकों के हाथ खराब हो जाते हैं। ऐसे में, बजट के माध्यम से हमने उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों की पैदावार बढ़ाने और प्रसंस्करण को प्रोत्साहन देने का एलान किया है, ताकि किसानों को उत्पादन बढ़ाने व नए पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। ● ऐसा माना जा रहा है कि एआई के आने से नौकरियां घटेंगी। वित्त मंत्री के तौर पर आप इसे कैसे देखती हैं? मेरा मानना है कि एआई के जरिए नए अवसर पैदा होंगे। निजी क्षेत्र से जुड़े कुछ मामलों को छोड़ दिया जाए, तो अब एआई रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद कर रही है। एआई की मदद से कारोबारियों को कच्चा माल और बाजार खोजने में मदद मिल रही है। इसी तरह से एआई के चलते कृषि, पर्यटन, तकनीक, विनिर्माण, उद्योग और कारोबार में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसलिए सरकार ने बजट में एआई प्रशिक्षण को लेकर बड़ा प्रावधान किया है, जिससे भारत के युवा एआई का प्रशिक्षण लेकर जीवन में आगे बढ़ सकें। एआई भारत में तेजी से अवसर पैदा कर रहा है। ● सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव है? रुपया कमजोर है। बाजार में गिरावट आ रही है। आप इसे कैसे देखती हैं? वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव है, जिसका असर भारत में भी कीमतों पर दिख रहा है। बाकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमतों को देखा जाए, तो अब समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। मौजूदा समय में भारत के पास विदेश मुद्रा का भंडार 700 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। बाजार की बात करें, तो अनेक निवेशक लाभ लेकर बाहर निकले हैं, वापस नहीं आए हैं। अब समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे बड़े फंड मैनेजरों से बात करेंगे कि वह भारतीय बाजार में निवेश करें। मुझे लगता है कि अमेरिका के साथ भारत की व्यापार वार्ता आगे बढ़ने से भी अब निवेशक लौटेंगे। ● रक्षा बजट में रिकार्ड एक लाख करोड़ से भी अधिक की वृद्धि हुई है, जो ऑपरेशन सिंदूर के आलोक में स्वाभाविक है, पर बजट भाषण में इसका जिक्र नहीं है? जहां तक बजट भाषण की बात है, तो हर राज्य, हर क्षेत्र और हर वर्ग चाहता है कि उसका जिक्र हो। जिसका जिक्र नहीं होता है, तो वह नाराज हो जाता है। दूसरी ओर, जब हम बजट में सबको समाहित करते हैं, तो आप लोग कहते हैं कि बजट भाषण लंबा हो गया। हर आवंटन को बजट में शामिल नहीं किया जा सकता। ● चाबहार पोर्ट के लिए आवंटन नहीं हुआ है, इस पर कई अटकलें चल रही हैं? चाबहार जैसी परियोजना के लिए जरूरत के हिसाब से आवंटन किया जाता है। पहले भी ऐसा कई बार हुआ है, जब इसमें आवंटन नहीं हुआ। अन्य कोई कारण नहीं है। ● आपने मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (निम्हंस) की स्थापना का एलान किया है। क्या यह उत्तर प्रदेश में खुल सकता है? जगह अभी तय नहीं है। इसे हम चैलेंज मोड में स्थापित करेंगे। राज्यों से प्रस्ताव लिए जाएंगे और सबसे अच्छे प्रस्ताव को मंजूरी देंगे। तीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान भी इसी तरह चैलेंज मोड में खोले जाएंगे।

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