भारत की सबसे युवा ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने युवाओं के बीच बढ़ती अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा है कि "गाली देना कूल नहीं है." Gen-Z की अभद्र भाषाओं पर बहस के बीच उन्होंने लोगों से अपनी भाषा और शब्दों का चयन सोच-समझकर करने की अपील की. मनु भाकर की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. हालांकि, मनु भाकर ने किसी घटना या संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को इसी बहस से जोड़कर देखा जा रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मनु भाकर ने लिखा, "हम जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वही हमारी सोच और व्यक्तित्व को दर्शाती है. अपने शब्द सोच-समझकर चुनिए, क्योंकि समय के साथ आप वही बन जाते हैं जो सोचते हैं, बोलते हैं और करते हैं." The language we choose reflects our personality and the kind of person we are. Choose your words wisely, because over time, you become what you think, what you speak, and what you practice. Using bad language is not cool. Abusing is not cool. Let’s keep the definition of cool… pic.twitter.com/8LN53t4V0h मनु भाकर कहा कि आज के समय में गाली-गलौज को आत्मविश्वास या आधुनिकता की निशानी मान लिया गया है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. उन्होंने लिखा, "गाली देना कूल नहीं है. अभद्र भाषा का इस्तेमाल कभी कूल नहीं हो सकता." मनु भाकर ने युवाओं के लिए 'कूल' होने की अपनी परिभाषा भी साझा की. उन्होंने कहा कि मेहनती होना, दूसरों और खुद का सम्मान करना, ईमानदारी से सफलता हासिल करना और अपने माता-पिता और देश का नाम रोशन करना ही असली 'कूलनेस' है. बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह मुद्दा इसलिए उठाया क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में अभद्र भाषा सामान्य होती जा रही है. उनके मुताबिक, कई लोग बिना सोचे-समझे रोजमर्रा की बातचीत में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने लगे हैं और इसे सामान्य या फैशन समझने लगे हैं. इस मुद्दे पर कई अन्य सार्वजनिक हस्तियों ने भी अपनी राय रखी है. अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि लोकतंत्र असहमति का अधिकार देता है, लेकिन किसी का अपमान करने का नहीं. वहीं अभिनेता आशुतोष राणा ने कहा कि इंसान की पहचान उसके शब्दों से होती है और भाषा ही सम्मान या अपमान तय करती है. इससे पहले भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत भी आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर तीखी टिप्पणी कर चुकी हैं.
भारत के सबसे कम उम्र के ओलंपिक पदक विजेता ने युवाओं से समझदारी से शब्द चुनने का आग्रह किया
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