नई दिल्ली:अमेरिका और ईरान में तनाव किसी से छिपा नहीं है। रूस-यूक्रेन में पहले ही जंग जारी है। इस तरह दुनिया के कई देशों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच भी बीते साल सैन्य संघर्ष सामने आ चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को घुटनों पर आना पड़ा था। इस बीच भारतीय सेना लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है। इंडियन आर्मी सैन्य क्षमता में इजाफे के लिए नए हथियारों को बेड़े में शामिल कर रही। ऐसे में दुश्मनों के खिलाफ एक्शन के लिए नए 'बाहुबली' की एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हम बात कर रहे दुनिया की पहली 4x4 ट्रक पर सवार 155mm 52-कैलिबर आर्टिलरी गन की, जिसके एक्शन से दुश्मनों को संभलने का मौका भी नहीं मिले।नए आर्टिलरी गन से जुड़ा बड़ा अपडेटकल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (केएसएसएल) ने ये अहम हथियार बनाया है। उन्होने 4×4 पहियों वाले चेसिस पर लगी 155mm/52-कैलिबर आर्टिलरी गन के सफल निर्माण की पुष्टि की है। दुनिया में ऐसा पहली बार है, जब इंजीनियरिंग उपलब्धि के लिए लंबी दूरी की हेवी होवित्जरतोप की मारक क्षमताको कॉम्पैक्ट गाड़ी के साथ जोड़ा गया है। ये ऐसा कॉम्बिनेशन है जिसे पहले स्ट्रक्चर के हिसाब से संभव नहीं माना जाता था।कैसे 4x4 ट्रक पर सवार हुई ये तोपकेएसएसएल ने हाइब्रिड रिकॉइल टेक्नोलॉजी के साथ इस तोप के वजन की बाधा को तोड़ने का प्रयास किया गया। इसमें हल्के 4×4 ट्रक पर 52-कैलिबर गन लगाने में मुख्य चुनौती फायरिंग के दौरान पैदा होने वाले भारी रिकॉइल फोर्स को मैनेज करना था। ऐसा इस पावर की गन को स्थिरता बनाए रखने के लिए भारी 6×6 या 8×8 प्लेटफॉर्म या ट्रैक वाली गाड़ियों की जरूरत होती है।दुनिया की पहली 4x4 ट्रक पर सवार आर्टिलरी गनकल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड ने एक खास हाइब्रिड रिकॉइल सिस्टम विकसित करके इस कमी को दूर किया है। यह एडवांस्ड मैकेनिज्म फायरिंग एनर्जी को प्रमुखता से सोखता है, जिससे प्लेटफॉर्म बिना किसी भारी चेसिस पर स्थिर और सुरक्षित रहता है। एडवांस्ड मटीरियल और ऑटोमेशन सिस्टम को 4×4 प्लेटफॉर्म के लिए और भी बेहतर बनाने के लिए, इंजीनियरों ने वजन कम करने पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया।जानें नए 'बाहुबली' की खास बातें4x4 ट्रक पर सवार 155mm 52-कैलिबर आर्टिलरी गन कैरिज को लेकर अहम बदलाव किए गए हैं।पारंपरिक स्टील के बजाय हाई-स्ट्रेंथ एल्यूमीनियम से इस गन को बनाया गया है, जिससे इसका वजन काफी कम हो गया।अब इसका वजन लगभग 24 टन है, जो इस क्लास की आर्टिलरी के लिए बहुत हल्का है।ऑपरेशनल एक्शन को एक ऑटोमैटिक गोला-बारूद हैंडलिंग सिस्टम से बढ़ाया गया हैइस कदम से क्रू पर शारीरिक तनाव कम पड़ता है।ये गन हर मिनट पांच राउंड तक की तेज फायरिंग स्पीड की अनुमति देता है।हल्के निर्माण और ऑटोमेशन का यह कॉम्बिनेशन सिस्टम को ग्लोबल डिफेंस मार्केट में एक खास जगह देता है।डिजिटल इंजीनियरिंग और टेस्टिंग भी की गई है। अब इसे ओडिशा के बालासोर फील्ड फायरिंग रेंज में परीक्षण के लिए निर्धारित किया गया है।ये आने वाले ट्रायल लाइव-फायर स्थितियों में बंदूक की सटीकता, संरचनात्मक मजबूती और रिकॉइल मैनेजमेंट का कड़ाई से मूल्यांकन करेंगे।
भारत ने लंबी दूरी के संचालन के लिए 4x4 ट्रक पर दुनिया की पहली 155 मिमी तोप का अनावरण किया
Navbharat Times•
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