प्रदेश में बढ़ती गर्मी और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जलदाय विभाग के सभी फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, ताकि गर्मियों के दौरान कहीं भी पानी की कमी की स्थिति न बने। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस अवधि में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फील्ड अधिकारियों की मौके पर उपस्थिति अनिवार्य की गई है और केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही उच्च स्तर की अनुमति से अवकाश दिया जाएगा। पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरकार ने राज्य स्तर के साथ-साथ सभी जिलों में नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित कर दिए हैं। इन कंट्रोल रूम के माध्यम से जल आपूर्ति की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी और शिकायतों का तुरंत समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार ने प्रदेश के 41 जिलों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर बजट स्वीकृत किया है। शहरी क्षेत्रों के लिए 55.88 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 154.83 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इस राशि का उपयोग पाइपलाइन मरम्मत, नई लाइनें बिछाने और जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण में किया जाएगा। गर्मी के चरम समय में पानी की कमी को देखते हुए जल परिवहन की भी व्यवस्था की गई है। 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकरों के माध्यम से सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए शहरी क्षेत्रों हेतु 23 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों हेतु 82.37 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए सरकार ने अतिरिक्त संसाधनों की भी व्यवस्था की है। मार्च महीने के लिए 500 श्रमिक और 100 किराये के वाहन प्रतिमाह स्वीकृत किए गए हैं। अप्रैल में यह संख्या बढ़ाकर 2000 श्रमिक और 400 वाहन प्रतिमाह कर दी जाएगी, जबकि मई से जुलाई तक 2500 श्रमिक और 450 वाहन प्रतिमाह उपलब्ध रहेंगे। इससे जल आपूर्ति से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी। सरकार ने जल आपूर्ति से जुड़े आपात कार्यों के लिए प्रत्येक जिले को 1-1 करोड़ रुपए तक खर्च करने की अनुमति दी है। जिला कलेक्टर की अनुशंसा पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता तत्काल आवश्यक कार्य करा सकेंगे, जिससे किसी भी समस्या का तुरंत समाधान हो सके। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए जल जीवन मिशन के तहत पूर्ण हो चुकी योजनाओं के संचालन के लिए प्रत्येक जिले को 25-25 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों में पानी की सप्लाई बाधित न हो। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि गर्मियों के दौरान जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं और पूरे सिस्टम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। कुल मिलाकर, राज्य सरकार ने इस बार गर्मी से पहले ही पेयजल संकट से निपटने के लिए व्यापक और बहुस्तरीय रणनीति तैयार कर ली है, जिससे आमजन को राहत मिल सके।
भारत राज्य सरकार गर्मी की गर्मी के बीच सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है
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