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भारतीय उच्च न्यायालय ने हत्या की सजा बरकरार रखी, सजा कम की

Amar Ujala•
भारतीय उच्च न्यायालय ने हत्या की सजा बरकरार रखी, सजा कम की
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न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक और न्यायमूर्ति संदीप पाटिल की खंडपीठ ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने वर्ष 2016 में विशेष अदालत की ओर से दिए गए फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई की। विशेष अदालत ने जितेंद्र राणा समेत चार आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने जितेंद्र राणा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी मानने का फैसला बरकरार रखा। हालांकि, उसकी उम्र को देखते हुए सजा में बदलाव किया। अब उसे बिना वैधानिक छूट के 20 साल जेल में रहना होगा। अपील लंबित रहने के दौरान चौथे आरोपी सतीश दुल्हाज की पिछले साल मौत हो गई थी।विज्ञापनयह घटना अक्टूबर 2011 की है। 24 वर्षीय कीनन सैंटोस और 29 वर्षीय रूबेन फर्नांडिस अपनी तीन महिला मित्रों के साथ अंधेरी पश्चिम के अंबोली इलाके में एक रेस्तरां गए थे। आरोप था कि वहां कुछ लोगों ने महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की। इसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। बाद में पान की दुकान के पास कीनन और रूबेन पर चाकू से हमला किया गया। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। कीनन की 20 अक्टूबर 2011 को मौत हो गई, जबकि रूबेन ने 30 अक्टूबर 2011 को अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना ने मुंबई में महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।विज्ञापनहाई कोर्ट ने सह-आरोपी सुनील भोट और दीपक तिवाल के खिलाफ हत्या के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं पाए। इसी आधार पर दोनों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया। हालांकि, उनकी अन्य सजाएं बरकरार रखी गई हैं। इसका मतलब है कि अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से पूरी तरह बरी नहीं किया है। मामले में दोषी ठहराए गए चारों आरोपियों ने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि कथित छेड़छाड़ की घटना साबित नहीं हुई और अभियोजन पक्ष हत्या के पीछे का मकसद भी साबित नहीं कर पाया।बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटना अचानक हुए विवाद और उकसावे का नतीजा थी। इसलिए इसे हत्या नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, विशेष सरकारी वकील आबाद पोंडा ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फॉरेंसिक जांच और दूसरे सबूत हमले की गंभीरता साबित करते हैं। उन्होंने बताया कि विवाद के बाद आरोपियों में से एक ने जान से मारने की धमकी दी और फिर हथियारों के साथ लौटकर हमला किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कीनन के शरीर पर धारदार हथियार से कई गंभीर घाव थे। अत्यधिक खून बहने के कारण उसकी मौत हुई। हाई कोर्ट ने जितेंद्र राणा की दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन उसकी सजा को 20 साल के सश्रम कारावास में बदल दिया।

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Publisher: Amar Ujala

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