अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाली भारतीय छात्रों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है. दरअसल 2025 के पीक एडमिशन सीजन के दौरान भारतीय छात्रों को जारी किए जाने वाले एफ-1 स्टूडेंट वीजा की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. सीआईएस रिपोर्ट के अनुसार इस कमी का असर अमेरिकी यूनिवर्सिटी में एडमिशन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की संख्या और पढ़ाई के बाद मिलने वाले रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है. सेंटर ऑफ इमीग्रेशन स्टडीज के आंकड़ों के अनुसार मई से अगस्त 2025 के बीच भारतीय छात्रों को कुल 22,149 एफ-1 स्टूडेंट वीजा जारी किए गए. यह संख्या पिछले साल इस अवधि में जारी 58,694 वीजा की तुलना में 62 प्रतिशत कम है. वहीं 2017 से 2019 और 2021 से 2024 की समान अवधि के औसत की तुलना में भी इसमें करीब 60 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मई से अगस्त का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. क्योंकि इसी दौरान नए शैक्षणिक स्तर सत्र से पहले सबसे ज्यादा स्टूडेंट वीजा जारी किए जाते हैं. ऐसे में यह आंकड़ा आने वाले एडमिशन सीजन का बड़ा संकेत माना जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में चीनी छात्रों को 40,034 एफ-1 वीजा जारी किए गए. यह 2024 की तुलना में 34 प्रतिशत कम है, जबकि पिछले वर्षों के औसत की तुलना में इसमें 46 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. भारतीय और चीनी छात्रों के वीजा में आई इस गिरावट पर अमेरिकी यूनिवर्सिटी और अंतरराष्ट्रीय छात्र दोनों नजर बनाए हुए हैं. 2024-25 शैक्षणिक क्षेत्र के दौरान अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीय सबसे बड़ी संख्या में रहे. इस दौरान अमेरिकी यूनिवर्सिटी में 3,63,019 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे थे, जबकि 2,65,919 चीनी छात्र नामांकित थे. दोनों देशों के छात्र मिलकर अमेरिका के कुल 11.77 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करीब 53 प्रतिशत हिस्सा रहे. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टूडेंट वीजा की संख्या में लगातार गिरावट का असर ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भी पड़ सकता है. यह प्रोग्राम अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने का अवसर देता है. 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में 2,94,253 अंतरराष्ट्रीय छात्र ओपीटी के तहत काम कर रहे थे. इनमें एक 1,43,740 भारतीय और 61,981 चीनी छात्र शामिल है. यानी इस कार्यक्रम का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा केवल भारतीय और चीन के छात्रों का था. रिपोर्ट के अनुसार वीजा जारी होने में आई कमी ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए जांच प्रक्रिया को पहले से ज्यादा सख्त किया है. छात्र वीजा आवेदनों की अतिरिक्त स्क्रीनिंग, सोशल मीडिया जांच और कुछ नए इमीग्रेशन नियम लागू किए गए हैं. इसके अलावा पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने से जुड़े ओपीटी प्रोग्राम में भी बदलावों पर विचार किया जा रहा है. कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.
भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी छात्र वीजा जारी करने में 2025 में बड़ी गिरावट देखी गई
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