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भारतीय पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया, क्रेडिट कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए

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भारतीय पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया, क्रेडिट कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए
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के दक्षिणी हिस्से में साइबर थाना पुलिस ने APK फाइल के जरिए साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अहमदाबाद से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 क्रेडिट कार्ड और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को अलग-अलग क्रेडिट कार्ड के जरिए आगे भेजा जाता था और इसके बदले आरोपियों को कमीशन मिलता था। मामला एक व्यक्ति से 6.57 लाख रुपये की ठगी से जुड़ा है। पीड़ित विकास कुमार को एक मैसेज के जरिए लिंक भेजा गया था। लिंक पर जाने के बाद उसके साथ साइबर ठगी हुई। शिकायत के आधार पर साइबर थाना साउथ में 21 मई 2026 को ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने ठगी की रकम का बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी जानकारी खंगाली। जांच के दौरान 6.57 लाख रुपये में से करीब 4 लाख रुपये की रकम का ट्रेल दो ट्रांजेक्शन के जरिए आरोपियों से जुड़े दो क्रेडिट कार्ड तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने अहमदाबाद में कार्रवाई करते हुए मोहम्मद इस्माइल अंसारी, शेख मोहम्मद नुरेन और तारिक अहमद को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि आरोपी साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग क्रेडिट कार्ड के जरिए इधर-उधर भेजने का काम करते थे। पुलिस के मुताबिक, इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। इनमें से मोहम्मद इस्माइल अंसारी IDBI बैंक में संविदा कर्मचारी है। उस पर ठगी की रकम को आगे भेजने के लिए कई क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस को जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी WhatsApp और Telegram ग्रुप के जरिए दूसरे हैंडलरों के संपर्क में थे। इनमें कुछ नंबर अमेरिका से जुड़े पाए गए हैं। ठगी की रकम को आगे चलकर USDT (क्रिप्टो करेंसी) में बदलने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह का तरीका भी सामने आया है। ठग लोगों को मैसेज के जरिए फर्जी लिंक भेजते थे और उसके जरिए APK फाइल डाउनलोड करवाते थे। इस तरह के खतरनाक ऐप मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद फोन और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने में मदद कर सकते हैं। इसके बाद पीड़ित के खाते से रकम निकाल ली जाती थी। पुलिस अब अमेरिका से जुड़े नंबरों के पीछे मौजूद लोगों और गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। यह भी जांच की जा रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक कितनी रकम को इस तरीके से आगे भेजा और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।

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