ओडिशा की तन्वी पत्री ने 'यूथ ओलंपिक गेम्स' के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया है. बुधवार (4 नवंबर, 2026) को सेनेगल के डकार में खेले गए विमेंस सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में थाईलैंड की काकानिक कुंगकाव को 21-17, 21-13 से शिकस्त देकर वह यूथ ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला शटलर बनीं. इससे पहले तन्वी ने 21-18 और 21-12 से मेक्सिको की सारा गोंजालेज और ऑस्ट्रेलिया की स्मृति आदेपू को 21-4 और 21-12 से शिकस्त दी थी. 39 मिनट तक चले इस मुकाबले में जीत के बाद अब तन्वी को मेडल सुनिश्चित करने के लिए एक और मैच जीतना होगा. तन्वी की उम्र इस समय 16 साल है और उनका बचपन चीन में बीता है. तन्वी के पिता एक आईटी प्रोफेशनल हैं, जिस वजह से पिता की यहां पोस्टिंग के चलते यहां काफी समय तक रहीं. उन्होंने बैटमिंटन की ट्रेनिंग चीन में ही शुरू की थी. पहले तन्वी ने स्केटिंग भी सीखी थी, हालांकि बाद में उन्होंने बैडमिंटन को ही करियर के तौर पर चुना, लेकिन स्केटिंग के दौरान सीखी बैलेंस टेक्नीक से उन्हें बैडमिंटन कोर्ट में भी काफी फायदा मिला है. तन्वी ने हाल ही में चीन में U17 एशियन टाइटल जीता था, जिसके बारे में उन्होंने मीडिया से कहा, 'एशियन अंडर 17 में गोल्ड मेडल चीन के चेंदागू में जीतना मेरे लिए बहुत खास है क्योंकि यहां मेरा बचपन बीता है. जब मैं छोटी थी तो मेरे पापा जॉब के सिलसिले में यहां आए थे. मेरी शुरुआती ट्रेनिंग्स यहीं हुई हैं और जूनियर खिताब भी मैंने यहीं जीते हैं. वापस उसी देश में लौटना जहां से मेरी बैडिमिंटन की जर्नी शुरू हुई थी और वहां कॉन्टिनेंट स्टेज पर भारत को रिप्रेंजेट करना मेरे करियर के लिए फुल सर्कल जैसा है.' तन्वी पत्री ने अंडर-15 बैडमिंटन गेम्स में एक भी मैच नहीं हारा है. हालांकि, अंडर-17 में उनके तीन मैच बेहद रोमांचक रहे, जिनमें उनका मुकाबला चीनी खिलाड़ियों से था. पहले मुकाबले में उन्होंने चीन की झो जिंग ली के खिलाफ बढ़त बनाई और थ्री-गेम सेमीफाइनल में चीन की ही यू यिंग गुई को मात दी. पोंटियानाक इंटरनेशनल चैलेंज में भी तन्वी पत्री ने अपना पहला इंटरनेशनल टाइटल जीता था. इस जीत पर तन्वी पत्री ने कहा कि किसी भी गेम में जूनियर से सीनियर सर्किट में शिफ्ट करना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है, लेकिन इससे आगे के मुकाबलों के लिए मेरा आत्मविश्वास बढ़ेगा. इसके बाद तन्वी पत्री ने सिंगापुर और इंडोनेशिया में एक के बाद एक दो मुकाबले खेले. तन्वी पत्री से पहले सिर्फ तीन भारतीय शटलर ही यूथ ओलंपिक में बैडमिंटन के सेमीफाइनल तक पहुंच पाए हैं. साल 2010 में सिंगापुर में हुए पहले यूथ ओलंपिक में एचएस प्रणॉय ने रजत पदक जीता था, जबकि 2018 में ब्यूनस आयर्स में हुए खेलों में लक्ष्य सेन उपविजेता रहे थे. साल 2014 में आदित्य जोशी लड़कों के सिंगल्स वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें कोई पदक नहीं मिल सका था. अब तन्वी पत्री के पास इतिहास रचने का सुनहरा मौका है. सेमीफाइनल में जीत उन्हें यूथ ओलंपिक में बैडमिंटन पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बना देगी. अगर वह सेमीफाइनल हार जाती हैं, तो भी उनके पास ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला करने का एक और मौका होगा. सेमीफाइनल में तन्वी का सामना जापान की युजुनो वातानाबे से होगा, जिनके खिलाफ वह पहले भी एक बार खेल चुकी हैं. दोनों खिलाड़ी 2024 में थाईलैंड में हुई 'पाथुम थानी जूनियर इंटरनेशनल सीरीज' में आमने-सामने आए थे, जहां तन्वी को 14-21, 10-21 से हार का सामना करना पड़ा. डकार यूथ ओलंपिक गेम्स की बैडमिंटन प्रतियोगिता में पुरुष और महिला सिंगल इवेंट शामिल हैं, जिनमें हर कैटेगरी में 32 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं. यह प्रतियोगिता दो चरणों- ग्रुप स्टेज और उसके बाद नॉकआउट में खेली जा रही है. खिलाड़ियों को चार-चार के आठ ग्रुप में बांटा गया था, जिसमें हर खिलाड़ी को अपने ग्रुप के बाकी तीन खिलाड़ियों का सामना करना था. हर ग्रुप का विजेता नॉकआउट स्टेज में पहुंचा, इसके बाद क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और मेडल मैच होंगे. 5 नवंबर को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल का फैसला होगा.
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पाट्री ने युवा ओलंपिक में इतिहास रचा
DNA Hindi•
&w=3840&q=75)
Full News
Share:
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Achira News.
Publisher: DNA Hindi
Want to join the conversation?
Download our mobile app to comment, share your thoughts, and interact with other readers.