अथॉरिटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच से आग्रह किया कि जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली स्पेशल बेंच ने उन्हें शेल्टर बनाने का निर्देश दिया था, जबकि ये शेल्टर स्थानीय अधिकारियों को बनाने चाहिए।विज्ञापनसॉलिसिटर जनरल ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को देश भर में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर होम बनाने का निर्देश दिया गया था, जिस पर अथॉरिटी के अनुसार लगभग 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने कहा, 'हमारा कहना है कि यह काम स्थानीय जिला-स्तरीय प्रशासन को करना चाहिए। हम इसे पूरे देश में नहीं कर सकते।'विज्ञापनउन्होंने एनएचएआई की याचिका पर सुनवाई के लिए जस्टिस नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया वाली स्पेशल बेंच के पुनर्गठन की भी मांग की। सॉलिसिटर जनरल ने बेंच से कहा,' आवारा कुत्तों से जुड़ा एक मामला है। मैं एनएचएआई की ओर से एक याचिका दायर कर रहा हूं।'उन्होंने कहा कि जब तक सीजेआई विशेष रूप से निर्देश न दें, तब तक स्पेशल बेंच का गठन नहीं किया जा सकता। इस पर सीजेआई ने कहा, 'हम गठन करेंगे।' यह घटनाक्रम आवारा कुत्तों और मवेशियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान हुआ, जिसमें उनके प्रबंधन के उपाय और विभिन्न सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारियां शामिल थीं।
भारतीय सॉलिसिटर जनरल ने आश्रय निर्माण पर पहले के निर्देश को चुनौती दी
Amar Ujala•

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