भावनात्मक नियंत्रण का अर्थ मुश्किल भावनाओं से बचना नहीं, बल्कि उन्हें महसूस करना, समझना और धीरे-धीरे संभालना सीखना है। बच्चे निराशा, हताशा, उत्साह और इंतजार जैसे अनुभवों से गुजरकर ये कौशल विकसित करते हैं। इसमें माता-पिता और अन्य भरोसेमंद वयस्कों की भूमिका अहम होती है।विज्ञापनये भी पढ़ें:इस्राइल के राजनीति समीकरण: सरकार गठन पर असमंजस बरकरार, राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा- आंकड़ों से स्थिति स्पष्ट नहींविज्ञापनछोटे बच्चों को 'ना' कहते समय स्पष्ट और आत्मविश्वास से जवाब दें। इसे मोलभाव का विषय न बनाएं, लेकिन उनकी भावनाओं को भी समझें। किताबों और फिल्मों के पात्रों के उदाहरण देकर उन्हें भावनाएं पहचानना और व्यक्त करना सिखाएं। बच्चा गुस्सा हो, तो खुद शांत रहें और गहरी सांस लेकर उसे भी ऐसा करना सिखाएं। अच्छे व्यवहार की सराहना करें। कल्पनाशील खेल भी बच्चों में आत्मनियंत्रण और भावनात्मक प्रबंधन की क्षमता विकसित करते हैं।
भावनात्मक नियंत्रण में निपुणताः बच्चों के लिए एक प्रमुख जीवन कौशल
Amar Ujala•

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