देश में चीतों के पहले घर यानी मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर बुरी खबर आई है. यहां नामीबिया से लाए गए नर चीते गौरव की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई. कूनो पार्क प्रबंधन के मुताबिक, गौरव की उम्र 10 साल से ज्यादा थी. उसे 12 सितंबर को जंगल में कमजोर और सुस्त हालत में पाया गया था. कूनो प्रबंधन के अनुसार, गौरव का रेस्क्यू कर उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ. मेडिकल जांच में उसकी मांसपेशियां कमजोर पाई गईं. वह गंभीर डिहाइड्रेशन से भी जूझ रहा था. सोमवार शाम करीब 4 बजे उसने ने दम तोड़ दिया. इससे पहले गौरव को इलाज के लिए पालपुर स्थित क्वारेंटाइन बोमा में रखा गया था. शुरुआती मेडिकल जांच में उसके किसी पुरानी या गंभीर बीमारी से पीड़ित होने की आशंका जताई गई थी. इसके बाद डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी रहा. अधिकारियों के मुताबिक, गौरव की मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है. मौत के बाद उसका पोस्टमॉर्टम किया जाएगा. जांच के लिए सैंपल भी लिए गए हैं. पोस्टमॉर्टम और सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी. प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने 'आजतक' को फोन कॉल पर बताया कि चीता गौरव को कमजोर हालत में जंगल से रेस्क्यू किया गया था, जिसका पालपुर हॉस्पिटल में इलाज जारी था उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई है. वेटेरियन द्वारा पुरानी बीमारी की आशंका जताई गई है. मौत की असल वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चल सकेगा. यहां बता दें कि गौरव की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में अब 51 चीते बचे हैं. इनमें 36 भारत में पैदा हुए चीते शामिल हैं. कूनो के 16 चीते फिलहाल जंगल में खुले में घूम रहे हैं. वहीं, गांधी सागर अभयारण्य में 4 चीते हैं. इस तरह गौरव की मौत के बाद देश में अब कुल 55 चीते रह गए हैं.
मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में इलाज में विफल रहने के बाद चीता गौरव की मौत हो गई।
Aaj Tak•

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