मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार अब भगवान श्रीकृष्ण के जरिए नई पीढ़ी यानी GEN Z से जुड़ने की कोशिश में है. सरकार ने 'भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना' शुरू करने का फैसला किया है. इस योजना के तहत प्रदेश के 102 मेधावी छात्र-छात्राओं को एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी. सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य सिर्फ परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करना नहीं है, बल्कि कला, कौशल, भारतीय ज्ञान परंपरा और बहुआयामी प्रतिभा को भी प्रोत्साहित करना है. योजना के तहत विद्यार्थियों का मूल्यांकन भगवान श्रीकृष्ण की 64 कलाओं और 14 विद्याओं की अवधारणा से प्रेरित मानकों पर किया जाएगा. स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा. योजना की विस्तृत रूपरेखा श्रीकृष्ण पाथेय न्यास तैयार करेगा, जो पात्रता, चयन प्रक्रिया और मूल्यांकन के मानदंड तय करेगा. सरकार का दावा है कि इससे नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ेगी. योजना को लेकर मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी का बयान भी चर्चा में है. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को दुनिया का पहला GEN Z बताते हुए कहा कि यह योजना युवाओं की प्रतिभा को निखारने और उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रयास है. उन्होंने कहा, "अगर GEN Z की भाषा में बात करें तो भगवान श्रीकृष्ण इस दुनिया के पहले GEN Z हैं. कोयले के अंदर छिपे हीरे को तराशकर अनमोल हीरा बनाने की प्रक्रिया ही यह योजना है. भगवान श्रीकृष्ण ने 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान से भारत की तस्वीर और तकदीर बदल दी थी. हमारा लक्ष्य है कि आज की पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास को जाने और उससे सीखकर आगे बढ़े." हालांकि, योजना के ऐलान के साथ ही इस पर सियासत भी शुरू हो गई है. कांग्रेस ने सरकार पर भगवान के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने कहा, "अब सरकार को राम के नाम से डर लगने लगा है. चंदा चोरी के नाम से डर लगता है, इसलिए अब भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर बात कर रहे हैं." वहीं कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस को सनातन परंपरा से ही परेशानी है और वह हर सकारात्मक पहल का विरोध करती है. बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा, "कांग्रेस को सनातन धर्म से ही दिक्कत है. पहले भगवान राम से दिक्कत थी, अब भगवान श्रीकृष्ण से भी होने लगी है. यह योजना प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और भारतीय संस्कृति को सम्मान देने की पहल है." बहरहाल, एक तरफ सरकार इस योजना को नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडा करार दे रहा है. ऐसे में छात्रवृत्ति से ज्यादा चर्चा फिलहाल इसके नाम और उससे जुड़ी सियासत की हो रही है.
मध्य प्रदेश सरकार ने नई पीढ़ी से जुड़ने के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू की
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