अरबपति एलन मस्क ने अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन में किए गए सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर दिए हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को इन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। मस्क ने चुनाव के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रचार पर कम से कम 458 मिलियन डॉलर यानी करीब 4400 करोड़ रुपए खर्च किए थे। चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद मस्क की संपत्ति में भी बड़ी गिरावट आई है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुमान के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ करीब 2.8 लाख करोड़ रुपए घट गई है। हाउस में कुल 435 सीटें हैं। सभी सीटों पर चुनाव हुए। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 253 और ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 157 सीटें जीती हैं। 25 सीटों पर अंतिम नतीजे आनी बाकी है। डेमोक्रेट्स को जरूरी बहुमत मिल चुका है। सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए हैं। अब तक 33 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। बची हुई 2 सीटों पर अंतिम नतीजे आना बाकी है। इन नतीजों को मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं। कुल 36 सीटों में से 34 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। 22 डेमोक्रेट्स और 12 रिपब्लिकन ने सीटें जीती हैं। 2 राज्यों में अंतिम नतीजे आना बाकी है। सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। डेमोक्रेट्स ने 20 सीटें जीती हैं। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स के पास 54 सीटें हो गई हैं। अभी 2 सीटों पर फैसला आना बाकी है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। इस बार हाउस की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। 25 सीटों पर अंतिम नतीजे आना बाकी है। रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। दरअसल, वेंस 2028 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वे ट्रम्प से नाराज वोटरों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। इन वोटरों में ईरान युद्ध, महंगाई और इजराइल को अमेरिकी समर्थन से नाराज लोग शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वेंस ने चुनाव में हार की वजह ईरान युद्ध को बताया है। वहीं, ट्रम्प अब भी अपने फैसले को सही ठहरा रहे हैं। दूसरी ओर, ट्रम्प फिलहाल वेंस या किसी अन्य नेता को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि पार्टी का अगला राष्ट्रपति उम्मीदवार पार्टी के ही अंदर चुनाव के जरिए चुना जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स की प्रोफेसर नताशा लिंडस्टेड के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कई वजहें थीं। इनमें शामिल है: ईरान जंग के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं। आम अमेरिकी नाराज थे। ट्रम्प के लगाए टैक्स से किसान, ग्रामीण इलाकों के लोग और कई कारोबार प्रभावित हुए। इमिग्रेशन एजेंसी की छापेमारी से भी बड़ी संख्या में अमेरिकी नाराज थे। एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का मुद्दा भी चुनाव में रिपब्लिकन के खिलाफ गया। लिंडस्टेड के मुताबिक, ट्रम्प अपनी गलतियां नहीं मानते। वे अपने गलत फैसलों के लिए माफी भी नहीं मांगते। 28 अक्टूबर न्यूयॉर्क रिपब्लिकन पार्टी के करीब 25 चुनावी रणनीतिकार एक वीडियो कॉल पर जुड़े थे। बातचीत की शुरुआत ही साइनाइड (जहर) की गोली से हुई। पार्टी के लिए चुनावी सर्वे करने वाले टोनी फैब्रिजियो ने पूछा, ''आप पहले सफेद गोली (अच्छी खबर) लेना चाहेंगे या काली (बुरी खबर)?'' इसके बाद रिपब्लिकन पार्टी के बड़े डेटा सलाहकारों में से एक टिम सेलर ने चुनाव के दो संभावित नतीजे बताए। पहला ये कि पार्टी के प्रचार के लिए जुटाए गए 40 करोड़ डॉलर का फंड सही वोटर्स तक पहुंच रहा है और लोग वोट देने भी आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार से पल्ला झाड़ लिया है।
मध्यावधि चुनाव में पार्टी की हार के बाद एलन मस्क ने रिपब्लिकन समर्थक पदों को हटाया
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