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मध्यावधि चुनाव में हार के बीच राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग चलाने की तैयारी में डेमोक्रेट

Dainik Bhaskar•
मध्यावधि चुनाव में हार के बीच राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग चलाने की तैयारी में डेमोक्रेट
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मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद अब राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके जरिए उन्हें पद से हटाया जा सकता है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक डेमोक्रेट्स आरोप लगा रहे हैं कि ट्रम्प ने अपने पद का इस्तेमाल कर अपने करीबियों को फायदा पहुंचाया और संपत्ति जुटाई। इससे आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। डेमोक्रेटिक सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने कहा है कि वे यह पता लगाएंगे राष्ट्रपति रहते हुए ट्रम्प और उनके परिवार की संपत्ति कैसे बढ़ी। उनका फोकस ट्रम्प के बेटों और दामाद जेरेड कुशनर के कारोबारी सौदों पर है। गार्सिया ने जांच के लिए पांच मुद्दे तय किए हैं। इनमें ट्रम्प परिवार के कारोबारी सौदे, जेफ्री एपस्टीन मामले की जांच में ट्रम्प प्रशासन की भूमिका और अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) की छापेमारी और कार्रवाई शामिल हैं। हाउस में कुल 435 सीटें हैं। सभी सीटों पर चुनाव हुए। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 242 और ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 151 सीटें जीती हैं। 42 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। डेमोक्रेट्स को जरूरी बहुमत मिल चुका है। सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए हैं। अब तक 33 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। बाकी 2 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। इन नतीजों को मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं। कुल 36 सीटों में से 34 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। 22 डेमोक्रेट्स और 12 रिपब्लिकन ने सीटें जीती हैं। 2 राज्यों में वोटों की गिनती जारी है। मिडटर्म चुनाव में हार के बाद भी चीन ट्रम्प के साथ रिश्ते बनाए रखना चाहता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसी महीने ट्रम्प से मिलेंगे। उनकी कोशिश व्यापार समझौता करने की है। जिनपिंग की नजर व्यापार समझौते के साथ ताइवान पर भी है। अमेरिका ताइवान को अरबों डॉलर के हथियार दे चुका है। ट्रम्प ने हथियारों की बिक्री पर सवाल उठाए हैं और 14 अरब डॉलर की बिक्री टाल भी दी है। अब सवाल है कि क्या जिनपिंग व्यापार समझौते के बदले ताइवान पर अमेरिकी रुख नरम करने की मांग करेंगे? चीन इस बातचीत में सावधानी बरत रहा है। उसे पता है कि एक राष्ट्रपति के साथ हुआ समझौता अगली सरकार बदल सकती है। जानकारों का मानना है कि जिनपिंग ट्रम्प पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहेंगे, क्योंकि इससे बातचीत बिगड़ सकती है। डोनाल्ड ट्रम्प पर उनके पहले राष्ट्रपति कार्यकाल (2017-2021) के दौरान दो बार महाभियोग चलाया गया था। अमेरिकी इतिहास में वे ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ दो बार महाभियोग की कार्रवाई हुई। हालांकि, दोनों ही बार सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। आरोप था कि ट्रम्प ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर दबाव डाला था कि वे जो बाइडेन और उनके बेटे हंटर बाइडेन के खिलाफ जांच का ऐलान करें। ऐसा न करने पर ट्रम्प ने यूक्रेन को मिलने वाली करीब 40 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद रोक दी थी। 6 जनवरी 2021 को ट्रम्प के समर्थकों ने अमेरिकी संसद भवन कैपिटल पर हमला कर दिया था। ट्रम्प पर अपने भाषण और बयानों से समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा था। रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ट्रम्प को ईरान पर हमले के लिए उकसाया, लेकिन युद्ध खत्म करने की कोई योजना नहीं बनाई थी। केंटकी से रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने बुधवार को हेगसेथ से इस्तीफा मांगा। अगले हफ्ते प्रतिनिधि सभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग भी हो सकती है। यह मामला ऐसे समय उठा है, जब मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल किया है। चुनाव में ईरान जंग भी वोटरों की नाराजगी की बड़ी वजह रही। रूसी अखबार 'कोमर्सेंट' ने गुरुवार को लिखा कि अमेरिकी संसद पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण रहने के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले दो महीनों में यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश तेज कर सकते हैं। अखबार के एक लेख में रूसी सरकार को सलाह दी गई कि वह इस मौके का पूरा फायदा उठाए। हालांकि, रूस ने कहा है कि वह यूक्रेन को लेकर अपनी रणनीति अमेरिका की घरेलू राजनीति के हिसाब से तय नहीं करता। कोमर्सेंट के मुताबिक, जनवरी में जब अमेरिकी संसद का नियंत्रण डेमोक्रेट्स के हाथ में चला जाएगा, तो वे ट्रम्प पर रूस से बातचीत रोकने का दबाव बढ़ा सकते हैं। वे यूक्रेन को अमेरिका की सीधी सैन्य मदद फिर शुरू करने और रूस के साथ-साथ उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग भी कर सकते हैं। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके करीबियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि ट्रम्प और उनके परिवार ने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया है। कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रम्प पर तीसरी बार महाभियोग चलाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। डेमोक्रेट्स ट्रम्प परिवार के कारोबार, क्रिप्टोकरेंसी सौदों, सरकारी खर्च और जेफ्री एपस्टीन मामले में सरकार की भूमिका की जांच करना चाहते हैं। इसके अलावा इमिग्रेशन एजेंसी ICE की छापेमारी, सरकारी खर्च में कटौती के लिए बनाई गई एजेंसी DOGE और ट्रम्प के व्हाइट हाउस में बन रहे बॉलरूम की भी जांच हो सकती है। अमेरिका के मिसिसिपी में सीनेट चुनाव की गिनती अभी जारी है। यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार स्कॉट कोलम रिपब्लिकन सांसद सिंडी हाइड स्मिथ से करीब 1,000 वोट आगे चल रहे हैं। अब तक 96% वोटों की गिनती हो चुकी है। इस चुनाव का नतीजा करीब 15 हजार ऐसे वोटों पर निर्भर है, जिन्हें अभी गिनती में शामिल नहीं किया गया है। इन वोटों को गिनने में अगले हफ्ते तक का समय लग सकता है। कुछ लोगों को फोटो पहचान पत्र न होने के कारण ऐसे वोट डालने पड़े। उनके वोट तभी गिने जाएंगे, जब वे 10 नवंबर तक जरूरी पहचान पत्र जमा करेंगे। कुछ वोटरों के नाम मतदाता सूची में नहीं मिले, क्योंकि उन्हें गलती से निष्क्रिय वोटर मान लिया गया था। इसके अलावा, जिन लोगों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म अधूरे थे, उनके वोट भी गिने जाने पर विवाद हो सकता है। अलास्का में करीब 20 साल से डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई गवर्नर नहीं बना है। आखिरी बार 2002 में टोनी नोल्स गवर्नर पद से हटे थे। अब डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोनाथन क्राइस टॉमकिन्स और रिपब्लिकन उम्मीदवार बर्नाडेट विल्सन के बीच कड़ा मुकाबला है। जोनाथन अपने विरोधी से करीब 20 पॉइंट आगे चल रहे हैं। हालांकि, उन्हें अभी आधे से ज्यादा वोट नहीं मिले हैं। अगर वे चुनाव जीतते हैं, तो 37 साल की उम्र में अलास्का के अब तक के सबसे कम उम्र के गवर्नर बन जाएंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स की प्रोफेसर नताशा लिंडस्टेड के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कई वजहें थीं। इनमें शामिल है: ईरान जंग के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं। आम अमेरिकी नाराज थे। ट्रम्प के लगाए टैक्स से किसान, ग्रामीण इलाकों के लोग और कई कारोबार प्रभावित हुए। इमिग्रेशन एजेंसी की छापेमारी से भी बड़ी संख्या में अमेरिकी नाराज थे। एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का मुद्दा भी चुनाव में रिपब्लिकन के खिलाफ गया। लिंडस्टेड के मुताबिक, ट्रम्प अपनी गलतियां नहीं मानते। वे अपने गलत फैसलों के लिए माफी भी नहीं मांगते। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स की ताकत बढ़ने से ताइवान को हथियार मिलने का रास्ता खुल सकता है। अमेरिका का कानून है कि वह चीन के हमले के खतरे से बचने के लिए ताइवान को हथियार और अपनी रक्षा करने में मदद देगा। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने करीब 1.33 लाख करोड़ रुपए के हथियार बेचने के समझौते को कई महीनों से टाल रहे हैं। जबकि अमेरिकी संसद इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है। सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ ड्रू थॉम्पसन का कहना है कि, चुनाव के बाद अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर ट्रम्प पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वे हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे सकते हैं। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। इस बार हाउस की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। 42 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। डेमोक्रेट्स ने 20 सीटें जीती हैं। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स के पास 54 सीटें हो गई हैं। अभी 2 सीटों पर फैसला आना बाकी है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जुआरी बताया। उन्होंने कहा कि वे ऐसे जुआरी हैं जो हारने के बाद भी खेल छोड़ने को तैयार नहीं होता। वेंस के बॉस (ट्रम्प) जंग का अगला दौर शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए वेंस को ये बातें अपने बॉस से कहनी चाहिए। BBC के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दोस्त रॉड ड्रेहर का कहना है कि 2028 में राष्ट्रपति बनने का वेंस का मौका अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन तेजी से कम हो रहा है। अगर ईरान के साथ जंग जल्द खत्म नहीं हुई तो रिपब्लिकन पार्टी और वेंस को इसका नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि ट्रम्प को वोट देने वाले लोग इस जंग को अपने साथ धोखे की तरह देख रहे हैं। इससे आम अमेरिकी भी परेशान हैं। जंग के कारण ईरान की सरकार तो नहीं बदली, लेकिन अमेरिका की राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत से यूक्रेन को ज्यादा मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स यूक्रेन को समर्थन देने और अमेरिका-यूरोप के रिश्ते मजबूत करने की बात साफ तौर पर करते हैं। इसका फायदा यूक्रेन को मिलेगा। जेलेंस्की के मुताबिक, इससे रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर भी दबाव पड़ेगा। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सरकार पर भी अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों का असर पड़ सकता है। इस बारे में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सोमवार को कहा, उनके बयान से साफ संकेत मिला कि चुनाव के नतीजे चाहे जो हों, रूस को अमेरिका की नीति में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। ट्रम्प ने रूस की हर मांग नहीं मानी है। खासकर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूस अपनी शर्तों पर जिस समझौते की उम्मीद कर रहा था, वह अब तक नहीं हुआ है। इसके बावजूद ट्रम्प की विदेश नीति से रूस को कई फायदे मिले हैं। हाल ही में ट्रम्प ने रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों को रोक दिया था। उन्होंने रूस से डीजल खरीदने पर भी सहमति जताई थी। इसके अलावा, वे यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की ज्यादा आलोचना करते रहे हैं, जबकि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को लेकर उनका रुख नरम रहा है। भारतीय मूल के डॉक्टर अमीश शाह ने एरिजोना से अमेरिकी संसद के निचले सदन का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस राज्य से जीतने पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। इसके साथ ही वे इस साल के मिडटर्म इलेक्शन में जीतने वाले छठे भारतवंशी बन गए हैं। शाह ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जे फेली को हराया। फेली नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के पूर्व खिलाड़ी हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। शाह को 52.49% वोट मिले, जबकि फेली को 45.45% वोट हासिल हुए। अमीश शाह का जन्म शिकागो में हुआ था। उनके माता-पिता गुजराती हैं और 1960 के दशक में अमेरिका जाकर बस गए थे। उनके पिता जैन धर्म को मानते हैं, जबकि मां हिंदू हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने माना है कि ईरान के साथ जंग के कारण मिडटर्म चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। हालांकि, उन्होंने इसका बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यही एक रास्ता था। CNBC के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, रिपब्लिकन पार्टी के टेक्सास से पूर्व कार्यकारी निदेशक चैड विलबैंक्स ने आरोप लगाया कि ट्रम्प के फैसलों से पार्टी को नुकसान हुआ। इसमें ईरान जंग, व्यापार नीति और रूस के राष्ट्रपति पुतिन का पक्ष लेने जैसे फैसले शामिल है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प के कुछ करीबी रिपब्लिकन नेताओं ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को भी इस हार का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि हेगसेथ ने ट्रम्प को ईरान जंग में उलझा दिया, लेकिन इसे खत्म करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बनाई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी कह चुके हैं कि ईरान जंग के कारण 2024 में ट्रम्प को वोट देने वाले कई मतदाता इस बार रिपब्लिकन पार्टी से दूर हो गए। इसके अलावा, मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि चुनाव नतीजों के बाद ईरान के साथ जंग खत्म हो सकती है। एशियाई बाजार में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 0.9% गिरकर 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 1.5% गिरकर 86.83 डॉलर प्रति बैरल रही। मिडटर्म में बड़ी जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने अब अपने चुनावी वादे पूरे करने की चुनौती है। पार्टी नेताओं ने महंगाई कम करने और ईरान के साथ जंग खत्म करने को अपनी प्राथमिकता बताया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि उनकी पार्टी आम लोगों के लिए काम करेगी। उनके अगले हाउस स्पीकर बनने की संभावना है। ऐसा होने पर वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। 'अगर तुम ब्लैक या यहूदी हो और अब्दुल को वोट देते हो, तो तुम पागल हो। वो एक जिहादी है। वो खतरनाक और हिंसक जिहादी है।' ये शब्द अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैं, जो उन्होंने अब्दुल अल-सैयद के बारे में कहे थे। मिडटर्म चुनाव नतीजों में 52% से ज्यादा मतों के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। अमेरिका के अलास्का राज्य में सीनेट चुनाव के नतीजे का इंतजार है। यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार मैरी पेल्टोला, रिपब्लिकन उम्मीदवार और मौजूदा सीनेटर डैन सुलिवन से करीब 600 वोटों से आगे हैं। मिडटर्म चुनाव के नतीजों को कनाडा के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है। डेमोक्रेट्स की जीत को अमेरिकी वोटरों की ट्रम्प के टैरिफ के खिलाफ नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। कनाडा के ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने बुधवार को कहा, ‘मैं खुशी से सड़कों पर उछल रहा था। यह कनाडा की जीत है।’ हालांकि, चुनाव नतीजों से कनाडा को तुरंत टैरिफ से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता फिर शुरू हो गई है। ऐसे में कनाडा को अमेरिका के साथ बेहतर समझौते की उम्मीद है। हालांकि, संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति का टैरिफ पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह है कि ट्रम्प ने ज्यादातर टैरिफ संसद की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति के आदेश से लगाए हैं। जनवरी में नई संसद शुरू होने के बाद डेमोक्रेट्स कमान संभालेंगे। वे ट्रम्प प्रशासन के कामकाज की जांच कर सकेंगे। राष्ट्रपति मंत्रियों, बड़े अधिकारियों और जजों के नाम तय करते हैं, लेकिन सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत होगा। ऐसे में वे ट्रम्प के चुने हुए लोगों की नियुक्तियों को रोक सकते हैं। ट्रम्प किसी कानून को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। इसे वीटो कहते हैं। संसद के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से इसे पलट सकते हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स के पास इतना बहुमत नहीं है। अमेरिका के मिसिसिपी राज्य में सीनेट चुनाव की गिनती जारी है। करीब 96% वोटों की गिनती हो चुकी है। BBC के नए आंकड़ों के मुताबिक, डेमोक्रेट उम्मीदवार स्कॉट कोलम रिपब्लिकन उम्मीदवार सिंडी हाइड-स्मिथ से 1138 वोटों से आगे हैं। करीब एक घंटे पहले कोलम की बढ़त सिर्फ 65 वोट थी। अब उनकी बढ़त करीब 0.1% हो गई है। मिडटर्म चुनाव में हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी में सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के नेता हार की वजह तलाश रहे हैं और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। BBC के मुताबिक, वोटर्स ने ईरान जंग को लेकर राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले पर नाराजगी जताई। अब उनके करीबी नेता भी इस जंग से दूरी बनाने लगे हैं। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हैं। वेंस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हमारी हार की वजह जंग है। आगे क्या करना है, इस पर कोई भी चर्चा इसी बात से शुरू होनी चाहिए।’ NBC न्यूज के अनुमान के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 258 सीटें मिल सकती हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो पार्टी 1992 के बाद पहली बार इतनी सीटें हासिल करेगी। 1992 में हुए चुनाव में डेमोक्रेट्स को 258 सीटें मिली थीं। इसके बाद 2008 के चुनाव में पार्टी ने 257 सीटें जीती थीं। इन चुनावों के बाद बिल क्लिंटन और बराक ओबामा 1993 और 2009 में राष्ट्रपति बने थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार से पल्ला झाड़ लिया है। चुनाव प्रचार के दौरान वे बार-बार खुद को चुनाव का चेहरा बता रहे थे और वोटर्स से उन्हें उम्मीदवार मानकर वोट देने की अपील कर रहे थे। उन्होंने 47 बार खुद के नाम पर लोगों से वोट देने के लिए कहा। लेकिन नतीजे आने के बाद ट्रम्प ने कहा कि वे खुद चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने नहीं पहुंचे। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में 5 भारतवंशी नेताओं ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनाव में जीत हासिल की है। जबकि एक उम्मीदवार अमीष शाह आगे चल रहे हैं। ये सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं। जीतने वालों में रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया शामिल हैं। इससे पहले 2024 के चुनाव में 6 भारतवंशी इस सदन के लिए चुने गए थे।

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Publisher: Dainik Bhaskar

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