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मनोज पुगलिया का वायरल वॉट्सऐप स्टेटस जीवन की अनिश्चितता की याद दिलाता है

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मनोज पुगलिया का वायरल वॉट्सऐप स्टेटस जीवन की अनिश्चितता की याद दिलाता है
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7 परिजनों के साथ अग्निकांड का शिकार हुए मनोज पुगलिया को क्या कुछ घंटे पहले ही काल की क्रूरता का अहसास हो गया था? इंदौर के भीषण हादसे के बाद मनोज पुगलिया के वॉट्सऐप स्टेटस को देखकर लोग ऐसी ही चर्चा कर रहे हैं। मौत से कुछ घंटे पहले मनोज ने वक्त की ताकत का जिक्र किया था, जिसकी पहली लाइन थी कि ‘वह सबकुछ छीन सकता है।’ आगे उन्होंने कहा था कि यह सबकुछ छीन सकता है पर पहचान नहीं। इंदौर के बृजेश्वरी (एनएक्स) में हुए खौफनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया, जहां मनोज पुगलिया समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद मनोज का आखिरी वॉट्सऐप स्टेटस तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने वक्त की इस ताकत का जिक्र करते हुए लिखा था, 'वक्त सबकुछ छीन सकता है, मगर हुनर और मेहनत से मिली पहचान नहीं छीन सकता।' इन शब्दों को देखकर जहां मनोज के परिजन और रिश्तेदार भावुक हो जाते हैं तो उन्हें उनके लिए यह हौसला भी बन गया है, जिसे परिवार ने सहेजकर रख लिया है। एक दिन पहले दोपहर 1.04 बजे मनोज ने दो स्टेट्स लगाए थे। एक में लिखा था, 'वक्त सब कुछ छीन सकता है, मगर हुनर और मेहनत से मिली पहचान कभी नहीं छीन सकता है। एक अन्य स्टेट्स में उन्होंने लिखा था, ‘कभी फुरसत में अपनी कमियों पर भी गौर करना चाहिए। दूसरों को आईना दिखाने की आदत अपने आप छूट जाएगी।’ मौत की इस भयावह रात का मंजर किसी डरावने सपने से कम नहीं था। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके का मुआयना किया, जहां पूरा घर जलकर खाक हो चुका था। नीचे किचन, डायनिंग हॉल और बेडरूम था, जिसमें गैस गीजर, फ्रिज, एसी और भारी फर्नीचर मौजूद था- जो आग को और भी भड़काने का कारण बने। रिश्तेदारों के मुताबिक, मनोज अपनी पत्नी सुनीता, साले विजय और सुमन के साथ नीचे ही सो रहे थे। हादसे की शुरुआत एक जोरदार धमाके जैसी आवाज से हुई- जैसे बाइक का टायर फटा हो। मनोज सबसे पहले जागे, लेकिन जैसे ही दरवाजा खोला, आग की विकराल लपटें भीतर घुस पड़ीं। हालात बिगड़ते देख उन्होंने सुनीता को बालकनी की ओर धकेला। बेटे सौरभ, सौमिल और हर्षित किसी तरह जाली तोड़कर बाहर निकलने में कामयाब हुए, लेकिन हर कोई इतना खुशकिस्मत नहीं था। मासूमों की चीखें उस रात गूंजती रहीं। रुचिका के बच्चे 11 साल की राशि और 8 साल का तनय, अपने नाना-नानी को बचाने के लिए नीचे दौड़े, लेकिन खुद ही आग के शिकंजे में फंस गए। सिमरन ने भी बाहर निकलने की कोशिश की, पर वह आग की भेंट चढ़ गई। बाद में उसका जला हुआ शव मिला। बचे हुए सौरभ की जुबानी उस रात की दहशत रोंगटे खड़े कर देती है, 'मैं मां और भाइयों को लेकर बाहर आ गया, लेकिन पापा और बाकी लोग अंदर ही फंस गए। मैंने बार-बार चिल्लाकर कहा- पापा, सिमरन, कार्तिक बाहर आ जाओ... लेकिन धुएं ने सबको निगल लिया।' इस हादसे ने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया। इधर, हादसे के बाद अफवाहों का बाजार भी गर्म हो गया। गैस टंकियों, इलेक्ट्रिक लॉक और अन्य कारणों को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। परिवार ने साफ किया कि घर में इलेक्ट्रिक लॉक नहीं था और कई दावे बेबुनियाद हैं। गीजर, एसी और फ्रिज जैसे उपकरण फटने से आग और भयानक हो गई।

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