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मोबाइल की लत'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम'से जुड़ीः गर्दन के स्वास्थ्य के लिए बढ़ती चिंता

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मोबाइल की लत'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम'से जुड़ीः गर्दन के स्वास्थ्य के लिए बढ़ती चिंता
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आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके हाथ में दिनभर मोबाइल न रहता हो. सुबह उठते ही फोन देखना, घंटों सोशल मीडिया चलाना, ऑनलाइन काम करना, वीडियो देखना और चैटिंग करना अब लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है. यही आदत धीरे-धीरे हमारी सेहत पर भारी पड़ रही है. लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर झुक कर देखने की वजह से गर्दन पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे एक ऐसी समस्या तेजी से बढ़ रही है जिसे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम कहा जाता है. विशेषज्ञ इसे डिजिटल दौर की ऐसी परेशानी मानते हैं, जो समय से पहले गर्दन और रीढ़ की हड्डी को कमजोर बना सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मोबाइल की लत कैसे गर्दन को बूढ़ा बना रही है, टेक्स्ट नेक सिंड्रोम क्या है और इसके लक्षण क्या हैं टेक्स्ट नेक सिंड्रोम गर्दन और सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी एक समस्या है, जो लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन देखने के लिए सिर को आगे झुकाकर रखने से होती है. लगातार गलत पोश्चर में रहने से गर्दन की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और कंधों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने लगता है. सामान्य स्थिति में इंसान के सिर का वजन लगभग 10 से 12 पाउंड माना जाता है, लेकिन जैसे-जैसे सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन पर पड़ने वाला दबाव तेजी से बढ़ जाता है. केवल 15 डिग्री झुकने पर यह दबाव लगभग 27 पाउंड तक पहुंच जाता है, जबकि 60 डिग्री तक सिर झुकाने पर गर्दन को लगभग 60 पाउंड तक का भार महसूस हो सकता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर की बनावट और रीढ़ की हड्डी पर भी असर पड़ सकता है. लगातार मोबाइल देखने की आदत के कारण लोग घंटों तक गर्दन झुकाकर बैठे रहते हैं. इससे गर्दन की मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं और धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. समय के साथ यह दबाव रीढ़ की हड्डी की सामान्य स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है. इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे डिजिटल एजिंग या गर्दन के समय से पहले बूढ़ा होने की समस्या भी मानते हैं. अगर किसी व्यक्ति को टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की समस्या हो रही है तो उसे कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं. जैसे गर्दन में लगातार दर्द और अकड़न, कंधों में दर्द या जकड़न, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, सिरदर्द, गर्दन को घुमाने में परेशानी, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन, हाथों और उंगलियों में सुन्नपन, शरीर के पोश्चर में बदलाव, जैसे झुके हुए कंधे या आगे निकली गर्दन. अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो समस्या और गंभीर हो सकती है. Seasonal Flu: सीजनल फ्लू हो जाए तो क्या खाना चाहिए, किससे होगी फास्ट रिकवरी? विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह मॉडर्न लाइफस्टाइल है. लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करना, घंटों लैपटॉप पर गलत तरीके से बैठकर काम करना, बिना ब्रेक लिए लगातार स्क्रीन देखना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना इस समस्या का मुख्य कारण माना जाता है. खराब एर्गोनॉमिक्स यानी सही बैठने की व्यवस्था न होना भी गर्दन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा देता है. इस समस्या से बचने के लिए सबसे पहले मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करना जरूरी है. मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन को आंखों के बराबर रखने की कोशिश करें. बैठते समय रीढ़ सीधी रखें और कंधों को पीछे की ओर रखें. हर 20 मिनट बाद कुछ सेकंड का ब्रेक लें .गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग भी फायदेमंद हो सकते हैं. Sleeping With Earplugs: कान में ईयरप्लग लगाकर सोते हैं तो हो जाएं सावधान, बढ़ सकता है खतरा

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