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राजस्थान के सरकारी स्कूलः बच्चों के जीवन के लिए खतरा

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राजस्थान के सरकारी स्कूलः बच्चों के जीवन के लिए खतरा
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झुंझुनूं:शेखावाटी अंचल सहित राजस्थान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बड़े-बड़े दावे भले ही कागजों में चमक रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत डराने वाली है। करोड़ों के बजट के बावजूद सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे मासूम बच्चों के सिर पर हर पल मौत मंडरा रही है। हालात ऐसे हैं कि पढ़ाई अब ज्ञान नहीं, बल्कि जोखिम बन चुकी है।44 संस्कृत विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जरदअसल, एक मीडिया रिपोटर्स में ताजा खुलासे में सामने आया है कि राजस्थान प्रदेश के 44 संस्कृत विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इन स्कूलों में बैठकर पढ़ाई करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। इतना ही नहीं, 245 स्कूलों के 776 कमरे इतने खराब हैं कि उनमें बैठना भी खतरे से खाली नहीं, जबकि 3239 कमरों को तत्काल भारी मरम्मत की जरूरत है।एक बार फिर सिस्टम की पोल खुलीआपको बताते चले कि पिछले साल मानसून के दौरान राजस्थान केझालावाड़ इलाके की एक सरकारी स्कूल का भवनलंबे समय कमजोर स्थिति होने के चलते अचानक स्कूल टाइम में भरभराकर गिरा और मौत कई बच्चों की जिंदगी शिकार करके ले गई। तब शिक्षा मंत्री से लेकर मौजूदा सरकार तमाम प्रभारी मंत्रियों ने अपने अपने जिले में सरकारी स्कूलों के भवनों की स्थिति अवगत कराने के निर्देश दिए थे। यहीं नहीं मरम्मत के लिए लाखों करोड़ों का बजट भी जारी किया। अब कितनी स्कूलों की मरम्मत हकीकत में हुई यह तो जांच का विषय है लेकिन एक बार फिर सिस्टम की पोल खुलती हुई सामने आई है।हर दिन मंडरा रहा हादसे का खतरारिपोटर्स पर भरोसा की जाएं तो स्थिति इतनी भयावह है कि किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा पूरे सिस्टम की पोल खोल सकता है। सवाल वही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?शिक्षा के मंदिर बन गए खतरे के अड्डे, अब भी नहीं जागे जिम्मेदार तो अगली खबर किसी हादसे की हो सकती है।झुंझुनूं में भी हालत बदतर, हर दिन बढ़ रहा खतराबात अगर राजस्थान में शेखावाटी अंचल के झुंझुनूं जिले की जाए तो यहा भी तस्वीर और भी चिंताजनक है। यहां 28 संस्कृत विद्यालयों के 144 कक्षा-कक्ष जर्जर हालत में हैं। इनमें से 4 स्कूलों के 25 कमरे इतने खतरनाक हो चुके हैं कि उन्हें कभी भी गिराया जा सकता है। सवाल यह है कि इन कमरों में बैठकर पढ़ रहे बच्चों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?बजट आया, लेकिन काम अभी भी फाइलों में कैदजानकारी के अनुसार, भाजपा शासनकाल में मौजूदा सरकार ने बजट 2026-27 में जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण और मरम्मत की घोषणाएं जरूर कीं। 24 मार्च 2026 को प्रस्ताव भी शासन तक भेजे गए, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते अभी तक जमीन पर कोई काम शुरू नहीं हुआ।3 दिन का अल्टीमेटम, लेकिन खतरा बरकरारअब जानकारी यह भी मिल रही है कि संस्कृत शिक्षा निदेशालय ने मामले को गंभीर मानते हुए सख्ती दिखाई है। उपनिदेशक डॉ. महेन्द्र कुमार शर्मा ने संभागीय अधिकारियों को जर्जर भवनों को तत्काल गिराने के निर्देश दिए हैं और 3 दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रिपोर्ट आने तक बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा कौन उठाएगा?

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