Achira News Logo
Achira News

रूस में युद्ध और आर्थिक दबाव के बीच संयुक्त रूस ने चुनाव का नेतृत्व किया

Amar Ujala
रूस में युद्ध और आर्थिक दबाव के बीच संयुक्त रूस ने चुनाव का नेतृत्व किया
Full News
Share:

यूनाइटेड रशिया के पास चुनाव में मजबूत स्थिति थी और उसके सामने राष्ट्रपति की नीतियों का विरोध करने वाले विकल्प सीमित थे। इन परिस्थितियों में शुरुआती नतीजों में पार्टी का आगे रहना अप्रत्याशित नहीं माना गया। क्रेमलिन ने चुनाव को यूक्रेन में युद्ध और आर्थिक मुश्किलों के बीच लोगों को अपनी राय रखने के मौके के तौर पर पेश किया था। हालांकि, युद्ध का विरोध करने वाले ज्यादातर उम्मीदवारों को मतपत्र से बाहर रखा गया। उदारवादी याब्लोको पार्टी से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों ने भी अपनी स्वतंत्रता को लेकर डर जताया था। एनईएसटी के मुताबिक, रूस के भीतर युद्ध के प्रभाव अब लोगों को ज्यादा महसूस हो रहे हैं। इसके साथ आर्थिक दबाव भी मौजूद है। थिंक टैंक का कहना है कि लोगों में जमा होती चिंता और निराशा का असर उन सिस्टम विपक्षी दलों को मिले वोटों में दिखाई दे सकता है, जिन्हें क्रेमलिन ने चुनाव लड़ने की अनुमति दी। यहां सिस्टम विपक्ष का मतलब उन राजनीतिक दलों से है जो चुनावी व्यवस्था में मौजूद हैं, लेकिन राष्ट्रपति को ज्यादातर प्रमुख मुद्दों पर सीधी चुनौती नहीं देते। 2021 के स्टेट ड्यूमा चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 450 सदस्यीय निचले सदन में पूर्ण बहुमत बरकरार रखा था। पार्टी के पास उस चुनाव के बाद 326 सीटें थीं। कम्युनिस्ट पार्टी 57 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इस बार भी शुरुआती आंकड़ों में कम्युनिस्ट पार्टी दूसरे स्थान पर है। हालांकि, इस चुनाव के अंतिम नतीजे आने के बाद ही सीटों की अंतिम तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। 90.43 फीसदी मतों की गिनती के आंकड़ों के अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी को 13.84 फीसदी वोट मिले हैं। एलडीपीआर को 8.9 फीसदी, न्यू पीपल को 7.94 फीसदी और ए जस्ट रशिया को 4.95 फीसदी वोट मिले हैं। ये सभी दल यूनाइटेड रशिया से पीछे हैं, लेकिन शुरुआती नतीजों में इनके स्टेट ड्यूमा में सीटें हासिल करने की स्थिति में होने की बात कही गई है। खास बात यह है कि एनईएसटी ने कम्युनिस्ट पार्टी और न्यू पीपल को मिले वोटों को कुछ मामलों में मौन विरोध से जोड़कर देखा है। चुनाव से पहले ज्यादातर युद्ध-विरोधी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। याब्लोको पार्टी के कुछ उम्मीदवारों ने चुनाव में हिस्सा लिया, लेकिन उन्होंने अपनी स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं को रूस-यूक्रेन युद्ध पर की गई टिप्पणियों के कारण चुनाव से पहले लंबी जेल की सजा सुनाई गई थी। याब्लोको के नेता निकोलाई रिबाकोव ने अपना मतपत्र जानबूझकर अमान्य किया और उस पर अपनी पार्टी का नाम तथा शांति के लिए नारा लिखा। यूक्रेन ने उन क्षेत्रों में मतदान कराए जाने को लेकर रूस के चुनाव की निंदा की, जिन्हें मॉस्को ने अपने कब्जे में लिया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने इसे अवैध बताया। दूसरी ओर, मॉस्को ने रविवार को रूस के कई हिस्सों में हुए यूक्रेनी ड्रोन हमलों को चुनाव को बाधित करने की कोशिश बताया। तास के अनुसार, इन हमलों को फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद सबसे बड़े हमलों में से एक बताया गया। मॉस्को क्षेत्र में तीन लोगों और रूस के नियंत्रण वाले खेरसॉन हिस्से में दो लोगों की मौत की जानकारी दी गई। मृतकों में एक चुनाव अधिकारी भी शामिल था। रविवार को हुए ड्रोन हमलों में मॉस्को क्षेत्र और रूस के अन्य इलाकों को निशाना बनाया गया। एक चुनाव अधिकारी समेत कई लोगों की मौत की जानकारी सामने आई। मॉस्को की तेल रिफाइनरी में भी एक जगह को नुकसान पहुंचा, जिसे पहले भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा सोमवार सुबह रूस के ब्रायंस्क क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए। क्षेत्र के कार्यवाहक गवर्नर येगोर कोवालचुक के अनुसार यह घटना सोमवार सुबह हुई। रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से सोमवार को शुरुआती नतीजे और मतदान प्रतिशत की घोषणा की जानी थी। हालांकि, अंतिम नतीजे तुरंत आने की उम्मीद नहीं है। तास के अनुसार अंतिम नतीजे शुक्रवार से पहले आने की संभावना कम है। इसकी वजह सभी मतपत्रों की गिनती और कानून के तहत जरूरी दूसरी प्रक्रियाओं का पूरा होना है। इसलिए अभी सामने आए आंकड़ों को शुरुआती नतीजे माना जा रहा है।

Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Achira News.
Publisher: Amar Ujala

Want to join the conversation?

Download our mobile app to comment, share your thoughts, and interact with other readers.