शोधकर्ताओं ने तैयार नैनोकणों की संरचना, आकार और रासायनिक विशेषताओं का विश्लेषण करने के लिए कई आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। इनमें यूवी-विजिबल, एक्सआरडी, एसईएम-ईडीएस, टीईएम और एफटी-आईआर जैसी तकनीकें शामिल रहीं। एक्सरे विवर्तन (एक्सआरडी) विश्लेषण में नैनोकणों की षट्कोणीय वर्टजाइट संरचना सामने आई। इनके क्रिस्टलाइट का आकार लगभग 28.4 नैनोमीटर पाया गया। इसके अलावा आरएसएम अनुकूलन और आणविक डॉकिंग के माध्यम से नैनोकणों की जैविक सक्रियता और संभावित क्रियाविधि को समझने का प्रयास किया गया। इस शोध का नेतृत्व बेरीनाग पीजी कॉलेज के डॉ. महेश चंद्र विश्वकर्मा, एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के डॉ. बालम सिंह बिष्ट और पंतनगर विश्वविद्यालय के डॉ. रविंद्र कुमार ने किया। शोध दल में शोध छात्र मनोज प्रसाद टम्टा और पूजा बर्गली के साथ हेमंत कुमार जोशी, दीपशिखा आर्य, राजेश कुमार और विशाल कुमार सहित अन्य शोधकर्ता शामिल रहे। नन्ही परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान पिथौरागढ़, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान रानीखेत और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के शोधकर्ताओं ने भी इसमें योगदान दिया। इस शोध की खासियत यह है कि इसमें उत्तराखंड की स्थानीय जैव-विविधता का उपयोग आधुनिक नैनो प्रौद्योगिकी के साथ किया गया है। वनस्पति आधारित हरित संश्लेषण के जरिये तैयार किए गए जिंक ऑक्साइड नैनोकण भविष्य में कृषि क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण के विकल्प विकसित करने में मददगार हो सकते हैं। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म कण संरचना और जैविक गतिविधि का विश्लेषण किया
Amar Ujala•

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