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वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल में चंद्रमा के साथ अद्वितीय त्रिकोणीय क्षुद्रग्रह की खोज की

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वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल में चंद्रमा के साथ अद्वितीय त्रिकोणीय क्षुद्रग्रह की खोज की
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स्पेस साइंस की दुनिया में वैज्ञानिक लगातार नई-नई खोजों में जुटे हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसे एस्टेरॉयड की पहचान की है, जिसकी बनावट, अब तक के देखे गए अधिकतर ऐस्टेरॉयड्स से अलग है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हमारे सौर मंडल का पहला ज्ञात त्रिलोबेट यान तीन उभरे हुए हिस्सों वाला ऐस्टेरॉयड हो सकता है. खास बात यह है कि इस एस्टेरॉयड का एक चंद्रमा भी है. यह चंद्रमा इसके चारों ओर परिक्रमा कर रहा है. यह एस्टेरॉयड (44) Nysa है. यह मंगल और बृहस्पति के बीच मेन एस्टेरॉयड बेल्ट में सूर्य की परिक्रमा कर रहा है. इस ऐस्टेरॉयड की नई तस्वीरें चिली में लगे वेरी लार्ज टेलिस्कोप और अमेरिका के एरिजोना में लगे लार्ज बाइनोकुलर टेलीस्कोप की मदद से ली गई हैं. Nysa की खोज सबसे पहले साल 1857 में हुई थी, लेकिन उस वक्त टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस नहीं थी कि इस एस्टेरॉयड की असली बनावट को समझा जा सके. अब सामने आई नई तस्वीरों से पता चला है कि यह एस्टेरॉयड लगभग 75 किलोमीटर चौड़ा है. इसकी आकृति तीन जुड़े हुए उभारों जैसी दिखाई देती है. इसकी बीच की दो पतली 'गर्दन' इसे अनोखा त्रिलोब वाला आकार देती हैं. यह आकार ही इसे दूसरे एस्टेरॉयड से अलग बनाता है. वैज्ञानिकों ने इसके एक किलोमीटर चौड़े चंद्रमा की भी गुत्थी सुलझा ली है. इस छोटे से चंद्रमा का नाम S/2026 (44) 1 है. यह करीब 170 किलोमीटर की दूरी से इस एस्टेरॉयड के चक्कर लगा रहा है. वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि अब तक देखे गए अधिकतर एस्टेरॉयड गोल या अंडाकार रहे हैं, लेकिन इस एस्टेरॉयड की संरचना काफी अलग है. लोवेल ऑब्जर्वेटरी के एस्ट्रोनॉमर केट मिंकर के मुताबिक, इस एस्टेरॉयड के आकार के पीछे सभी बड़ी संभावना यह हो सकती है कि यह आपस में जुड़े हुए पिंडों से बना हुआ एक कॉन्टैक्ट ट्रिपल हो. दूसरी थ्योरी के मुताबिक, यह एक ही ठोस लेकिन अनोखे आकार वाला एस्टेरॉयड हो. वैज्ञानिकों का मानना है कि नायसा जैसे एस्टेरॉयड की स्टडी से हमारे सौर मंडल के शुरुआती इतिहास के बारे में समझने में मदद मिल सकती है. वैज्ञानिक उस कैटिगरी के एस्टेरॉयड में इसे शामिल मान रहे हैं, जिनका निर्माण सौर मंडल के अंदरूनी हिस्से के पास हुआ था. ऐसे में इस एस्टेरॉयड की संरचना उन चट्टानी पदार्थों की जानकारी दे सकती है, जिनसे अरबों साल पहले बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल जैसे ग्रहों का निर्माण हुआ था. इसके साथ ही इस एस्टेरॉयड की अनोखी बनावट यह समझने में भी मदद कर सकती है कि छोटे-छोटे पिंड आपस में जुड़कर कैसे समय के साथ बड़े पिंडों का आकार ले लेते हैं.

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