चेन्नई:पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे आश्चर्यजनक रिजल्ट तमिलनाडु का रहा। एक्टर विजय की अगुवाई वाली टीवीके की सरकार बनेगी। यह दावा किया ने नहीं किया था, लेकिन टीवीके छुपा रूस्तम निकली। फिल्मी अंदाज में ही एक्टर विजय तमिलनाडु की राजनीति के 'जननायक' बनकर उभरे। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जोसेफ विजय ने एम के स्टालिन को कैसे हराया? इसके पीछे पांच अहम कारण जिम्मेदार रहे। जिन्होंने फिर वापसी का सपना देखने वाली डीएमके की हार तय कर दी। टीवीके अब छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की उम्मीद है। तमिलनाडु में बीजेपी को सिर्फ 1 सीट मिली है। उसे खाते में सिर्फ 2.97 प्रतिशत वोट आए हैं।Tamil Nadu Politics: एक्टर विजय की 'लहर' में झुलसे स्टालिन, डीएमके ऑफिस से उखड़े टेंट, सब जगह सन्नाटा और रो रहे समर्थकसबसे ज्यादा मुश्किल वक्त में स्टालिनडीएमके नेता स्टालिन की पार्टी को जहां टीवीके से हार मिली है तो वहीं दूसरी तरफ वह उन्हें उत्तरी चेन्नई के कोलाथुर में बड़ा झटका लगा है। यहां से वह खुद चुनाव हार गए हैं। इस सीट को डीएमके का माना जाता है। एम के स्टालिन के लिए 'विजय इफेक्ट' और टीवीके का उदय शायद उनके करियर का सबसे ज्यादा परेशान करने वाला राजनीतिक पल है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार डीएमके ने औद्योगिक विकास और बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के मामले में स्टालिन के शासन के रिकॉर्ड पर भरोसा किया था, लेकिन विजय की टीवीके की सीटी के शोर में यह उपलब्धियां गुम हो गईं।TVK के आगे धराशायी हुई मजबूत कैडर वाली डीएमके, कैसे थलपति विजय बन गए तमिलनाडु के 'जननायक'डीएमके की हार के पांच कारणसुपरस्टार सी जोसेफ विजय की जबरदस्त एंट्री ने उन मतदाताओं में जोश भर दिया जो दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों के बारी-बारी से सत्ता में आने से बदलाव चाहते थे। दूसरा कारण रहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और तीसरी वजह थी सत्ता-विरोधी लहर जिसे डीएमके ने कम आंका। इसके बाद चौथा कारण था डीएमके का बीजेपी से टकराव। इसमें केंद्र बनाम तमिलनाडु की बहस से लोगों को परेशान किया। जिसने स्टालिन का ध्यान स्थानीय मुद्दों से हटा दिया था। पांचवी वजह थी कि मुख्यमंत्री ने विजय को एक गंभीर प्रतिद्वंद्वी मानने में हिचकिचाहट दिखाई। एक फैक्टर उनके बेटे की डिप्टी सीएम के तौर ताजपोशी रही। जिससे विपक्ष को वंशवादी राजनीति के बहाने हमले का मौका मिला।DMK के कभी 'वफादार' रहे वीएस बाबू कौन? कोलाथुर से एमके स्टालिन को हराकर बने तमिलनाडु के सबसे बड़े 'धुरंधर'सहयोगियों से नहीं मिला सपोर्टलगभग सभी एग्जिट पोल में DMK की आसान जीत का अनुमान लगाया गया था, जिससे पार्टी के लिए नतीजे और भी ज्यादा चौंकाने वाले हो गए। जब नतीजे आए तो डीएमके के मुख्यालय में सामने लगाया गया तंबू जल्दी ही उखड़ गया। नतीजों में साफ किया कि 21 पार्टियों का गठबंधन होने के बावजूद वोट बैंक को एकजुट करने में कोई मदद नहीं मिली। सहयोगियों के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल की कमी रही। इसने डीएमके की लुटिया डूबा दी। कांग्रेस के कुछ धड़ों ने सीटों के बंटवारे पर बातचीत से पहले ही सत्ता में हिस्सेदारी की मांग कर दी थी। एक धड़ा TVK के साथ गठबंधन पर जोर दे रहा था। राहुल गांधी ने स्टालिन के साथ प्रचार नहीं किया, जिससे गठबंधन के भीतर दरार के संकेत मिले।तमिलनाडु के एग्जिट पोल में डीएमके से ज्यादा टीवीके को सीटें, क्या MGR और NTR बनने जा रहे एक्टर विजयबहुमत से दूर TVK ऐसे बना सकती है सरकारतमिलनाडु में 108 सीटें जीतने वाली टीवीके के छोटे दलों के सहयोग से सरकार बनाने की उम्मीद है। इसमें कांग्रेस के अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और सीपीआई जैसे दल शामिल है। अगर कांग्रेस, आईयूएमएल और सीपीआई समर्थन देते हैं तो टीवीके 117 तक पहुंच जाएगी। तमिलनाडु की 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 का है। चार सीटें पीएमके ने जीती हैं। राज्य में बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली है। डीएमके को 59 और एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं।
विजय की राजनीतिक शुरुआत-तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके की शानदार जीत के 5 कारण
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