माइनिंग की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड के एल्युमीनियम, बिजली, तेल और गैस के अलावा लौह अयस्क कारोबार का डीमर्जर हो गया है। इस डीमर्जर के बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने शेयरधारकों को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने ना सिर्फ डीमर्जर के बाद का रोडमैप बताया है बल्कि उन सेक्टर्स का जिक्र किया है जिसपर फोकस रहने वाला है। शेयरधारकों को लिखे पत्र में वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने लिखा- हमारे लिए वित्त वर्ष 2026 कंपनी के लिए बहुत खास रहा। इस साल कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक प्रॉफिट कमाया। हमें टैक्स के बाद ₹25,096 करोड़ का प्रॉफिट और ₹1,74,075 करोड़ की कुल आय हुई। यह सब संभव हुआ क्योंकि सभी व्यवसायों ने मिलकर प्रभावशाली प्रदर्शन किया। हमें खुशी है कि इसका सीधा लाभ शेयरधारकों को मिला। कुल शेयरधारक रिटर्न लगभग 50% रहा। इसके साथ वेदांता शेयर पर ₹334 तक डिविडेंड्स दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज की स्थिति भी पहले से बेहतर हुई है, जिससे कंपनी आगे और अच्छे से बढ़ सकती है। अनिल अग्रवाल ने डीमर्जर का जिक्र करते हुए कहा कि अब सभी कारोबार की अपनी स्वतंत्र कंपनियां होंगी। हर कंपनी अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम करेगी और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों पर खरा उतरेगी। इससे हर कारोबार अपने आप में एक अलग वेदांता बनेगा। अनिल अग्रवाल ने बताया कि वेदांता एल्युमीनियम यूरोप, एशिया, मिडिल ईस्ट, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक बने रहने की मजबूत स्थिति में है। हमारा लक्ष्य है कि उत्पादन क्षमता को दोगुना कर 60 लाख टन प्रति वर्ष किया जाए। हम इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिफिकेशन, एयरोस्पेस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रहे हैं। अनिल अग्रवाल ने वेदांता ऑयल एंड गैस को लेकर कहा कि हमारा लक्ष्य है उत्पादन को 3,00,000 से 5,00,000 बैरल प्रति दिन तक ले जाना। पिछले 10 सालों में करीब $14.5 बिलियन का निवेश किया गया है। आज कंपनी की वैल्यू बढ़ चुकी है और उसने नए रिजर्व्स के साथ अपना नेचुरल गैस पोर्टफोलियो भी मजबूत किया है। अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता पावर भारत की तेजी से बढ़ती पावर कंपनियों में से एक बन रही है। अभी 4.2 GW ऑपरेशनल कैपेसिटी है और 12 GW का एक्सपेंशन पाइपलाइन में है। वहीं, वेदांता आयरन एंड स्टील भविष्य के लिए तैयार ग्रीन स्टील और सस्टेनेबल स्टील कंपनी के रूप में विकसित हो रही है। इसका ध्यान कच्चे माल की उपलब्धता, इंटीग्रेशन और विकास पर है। अभी इस्पात उत्पादन क्षमता 40 लाख टन प्रति वर्ष है, जिसे बढ़ाकर 100 लाख टन प्रति वर्ष किया जाएगा। अनिल अग्रवाल ने पत्र में लिखा है-कंपनी भविष्य के लिए निवेश कर रही है। ₹15,000 करोड़ ग्रोथ कैपेक्स में लगाए गए हैं, जिससे एल्युमीनियम, जिंक, ऑयल एंड गैस और नए व्यवसायों में क्षमता बढ़ रही है और आने वाले वर्षों के लिए मजबूत आधार तैयार हो रहा है। हम बड़े स्तर पर कम लागत बनाए रखने, संपत्तियों में निवेश जोड़ने और लगातार आमदनी बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल हर स्तर पर कर रहे हैं।
वेदांता समूह ने अब तक का सबसे अधिक लाभ, शेयर लाभांश दर्ज किया
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