वैभव सूर्यवंशी के लिए यह फाइनल सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि उस पहचान को दोबारा मजबूत करने का मौका है, जो उन्होंने अपने बल्ले की ताकत से बनाई थी. जिस उम्र में खिलाड़ी बड़े सपने देखना शुरू करते हैं, उसी उम्र में वैभव ने बड़े मंच पर बड़े कारनामे कर दिखाए. हरारे में 80 गेंदों में 175 रनों (15 चौके, 15 छ्क्के) पारी सिर्फ एक शतक नहीं थी, बल्कि एक ऐलान था कि यह खिलाड़ी दबाव में भी मैच का रुख बदल सकता है. ... लेकिन श्रीलंका दौरे पर दांबुला में अब तक वैभव को उसी लय का इंतजार है. ए-टीम ट्राई सीरीज में उनके बल्ले से 14, 44, 21 और 38 रन आए हैं. इन पारियों में आक्रामक अंदाज की झलक जरूर दिखी, लेकिन वह विस्फोटक पारी नहीं आई, जिसकी उम्मीद उनसे की जा रही थी. आईपीएल में गेंदबाजों पर टूट पड़ने वाले वैभव को श्रीलंका में अलग चुनौती मिली है. यहां सिर्फ शॉट्स की चमक नहीं, बल्कि परिस्थितियों को समझकर बड़ी पारी खेलने की जरूरत है. क्योंकि अब मुकाबला सिर्फ विरोधी टीम से नहीं, बल्कि उम्मीदों से भी है. खास बात यह है कि वैभव के पास बड़े मैचों में खुद को साबित करने का रिकॉर्ड मौजूद है. अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उनकी 175 रन की पारी ने भारत को चैम्पियन बनाया था. उस दिन वैभव ने दिखाया था कि जब मंच बड़ा होता है तो उनका बल्ला और खतरनाक हो जाता है. अब श्रीलंका में होने वाला फाइनल उसी कहानी का अगला अध्याय है. क्योंकि इसके बाद वैभव आयरलैंड दौरे पर जाएंगे, जहां भारत को 26 और 28 जून को दो टी20 मुकाबले खेलने हैं. माना जा रहा है कि वहां उनका इंटरनेशनल डेब्यू लगभग तय है. यानी श्रीलंका का यह फाइनल डेब्यू से पहले वैभव का आखिरी बड़ा टेस्ट है. एक बड़ी पारी उन्हें फिर सुर्खियों में ला सकती है, जबकि एक और छोटी पारी सवाल खड़े कर सकती है.
वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका में मुक्ति चाहते हैं
Aaj Tak•

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