संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस मुलाकात की पूरी जानकारी दी। वह मिजोरम के प्रमुख चर्च नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री से मिलने पहुंचे थे। प्रतिनिधिमंडल ने नए बिल के सख्त प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं। गृह मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को बहुत ध्यान से सुना। अमित शाह ने कहा कि विधेयक पर 12 अगस्त को सदन में बहस होगी और इसे पारित कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिया कि किसी भी संगठन पर पुराने मामलों को लेकर कार्रवाई नहीं होगी। यह कानून केवल आगे की तारीखों से लागू होगा।विज्ञापनगृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि इस बिल पर 12 अगस्त को संसद में बहस होगी। यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था।विज्ञापननया कानून भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। इससे वर्षों से चल रहे पुराने सेवा संस्थानों की संपत्तियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।विदेशी धन और उससे बनी संपत्तियों की देखरेख व प्रबंधन के लिए एक नया 'नामित प्राधिकरण' बनाया जाएगा।धारा 14, 14A और 14B के तहत लाइसेंस रद्द होने, सरेंडर करने या समाप्त होने पर संपत्ति अस्थायी रूप से सरकार के अधीन चली जाएगी।यदि कोई संस्थान तय समय में नया प्रमाण पत्र नहीं लेता या नवीनीकरण नहीं कराता, तो उसकी संपत्ति हमेशा के लिए सरकार के प्राधिकरण में निहित हो जाएगी।विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में बदलाव के लिए यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य विदेशी फंडिंग पाने वाली गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) पर सरकारी निगरानी को ज्यादा मजबूत बनाना है।विधेयक के नियमों के अनुसार, अगर किसी संस्था का लाइसेंस समाप्त होता है, तो उसकी संपत्ति सरकार के पास चली जाएगी। धारा 14 के तहत लाइसेंस रद्द होने, धारा 14A के तहत सरेंडर करने या धारा 14B के तहत लाइसेंस समाप्त होने पर संपत्ति पर सरकार का कब्जा हो जाएगा। सामाजिक संगठनों को डर था कि अगर यह नियम पुरानी तारीखों से लागू हुआ, तो वर्षों से बने स्कूल, अस्पताल और अनाथालय बंद हो जाएंगे। इससे जनसेवा का काम बुरी तरह प्रभावित हो सकता था।:'आंदोलन करना राष्ट्रविरोधी नहीं': Gen Z को मोहन भागवत का समर्थन, कहा-हर बात का तार्किक जवाब चाहते हैं युवामिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के साथ 'मिजोरम कोहरान ह्रैतु कमेटी' के अध्यक्ष जॉन राल्डोसंगा और 'काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम' के महासचिव लालहमांगाइहा ने गृह मंत्री को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। यह समिति मिजोरम के प्रमुख चर्चों का प्रतिनिधित्व करती है।ज्ञापन में कहा गया कि नए कानून और उसके नियमों को भविष्य की तारीखों से ही लागू किया जाना चाहिए। इससे उन संस्थाओं पर बेवजह का जुर्माना नहीं लगेगा, जो दशकों से समाज सेवा में लगी हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जो संस्थाएं खुद अपनी इच्छा से विदेशी फंडिंग बंद करना चाहती हैं, उन्हें नियम तोड़ने वाला न माना जाए। यह उनका एक पारदर्शी और जिम्मेदार फैसला है।यह भी मांग की गई है कि ऐसी संस्थाओं की संपत्ति की सुरक्षा होनी चाहिए। इससे स्कूल, अस्पताल, अनाथालय और पुनर्वास केंद्र बिना किसी रुकावट के चलते रहेंगे। इससे पहले 10 जुलाई को 'कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया' ने भी अमित शाह को ज्ञापन दिया था। सीबीसीआई ने बिल को वापस लेने और सभी हितधारकों से परामर्श करके नया मसौदा तैयार करने की मांग की थी।
विवादित विधेयक पर मिजोरम के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री से मुलाकात की
Amar Ujala•

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