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स्थानांतरण में देरी के कारण भारतीय शिक्षकों को अन्याय का सामना करना पड़ रहा है

Amar Ujala
स्थानांतरण में देरी के कारण भारतीय शिक्षकों को अन्याय का सामना करना पड़ रहा है
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शिक्षा विभाग में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरोथा चकराता में सहायक अध्यापक सोहन लाल भी 22 साल की दुर्गम की सेवा के बावजूद सुगम में आने के लिए तरस गए हैं। सोहन लाल बताते हैं कि उनकी पहली नियुक्ति 2003 में जीआईसी मोतियापाथर अल्मोड़ा में हुई। इस स्कूल में 11 साल की सेवा के बाद मंडल परिवर्तन कर गढ़वाल मंडल के बरोथा स्कूल में आ गए। जब सभी विभागों में हर साल कर्मचारियों के अनिवार्य तबादले किए जा रहे हैं, तो केवल शिक्षकों के साथ अन्याय क्यों किया जा रहा है। तय समय पर तबादले न होने से कई शिक्षक 25 से 30 साल से दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्र में हैं। जो सुगम में नहीं आ पा रहे हैं, इसका कही न कही उनके मनोबल पर असर पड़ रहा है। रमेश पैन्यूली, पूर्व प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ प्रदेश में इस साल शिक्षकों के तबादला एक्ट के तहत अनिवार्य तबादले नहीं होंगे, लेकिन अनुरोध के आधार पर विभाग की ओर से तबादलों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। ऐसे में पात्र शिक्षक तबादलों की आस लगाए हैं।

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Publisher: Amar Ujala

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