यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड के शोधकर्ताओं ने पाया कि फैटी लिवर का एक संभावित इलाज असल में कैंसर का कारण बन सकता है। अभी तक नॉन-ऐल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज को रिवर्स करने के लिए कैस्पेस-2 एंजाइम को ब्लॉक करना फायदेमंद माना जा रहा था। लेकिनसाइंस एडवांसेज पर छपी नई रिसर्चमें देखा गया कि इस एंजाइम को ब्लॉक करके रखने पर उम्र बढ़ने के साथ क्रोनिक लिवर इंजरी, स्कारिंग और कैंसर के खतरे में भी बढ़ोतरी होती है।दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी के डायरेक्टर डॉक्टर गुरवंत एस लांबा ने कैस्पेस-2 एंजाइम की जरूरत और इसकी कमी से होने वाले खतरे के बारे में विस्तार से समझाया है। उन्होंने फैटी लिवर को शुरुआती स्टेज में रिवर्स करने के कुछ नेचुरल उपाय भी शेयर किए हैं।स्टडी से क्यों बढ़ी चिंता?कैस्पेस-2 एंजाइम की कमी से खतरा (सांकेतिक तस्वीर)रिसर्चर्स की टीम ने कुछ चूहों को जेनेटिकली मोडिफाई करके अध्ययन किया ताकि यह समझा जा सके कि शरीर में कैस्पेस-2 एंजाइम के ना रहने या काम ना करने से क्या फर्क पड़ता है। वक्त बीतने के साथ इन चूहों में लिवर इंफ्लामेशन, हेपेटाइटिस जैसी लिवर डिजीज, स्कारिंग, ऑक्सीडेटिव डैमेज और इंफ्लामेशन से जुड़ी एक तरह के सेल की डेथ देखी गई। उम्र बढ़ने पर इन चूहों के अंदर लिवर कैंसर की ज्यादा संभावना भी दिखी।जवानी से ज्यादा बुढ़ापे में खतराशोधकर्ताओं ने इस एंजाइम के काम ना करने से जवान चूहों के मुकाबले बूढ़े चूहों में लिवर ट्यूमर के मामले 4 गुना तक देखे। यह दिखाता है कि कम उम्र में फैटी लिवर का यह इलाज प्रभावी जरूर हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने पर इसके संभावित खतरों का सामना भी करना पड़ सकता है। यह ट्यूमर हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा से मिलता-जुलता था, जो कि इंसानों में लिवरकैंसर का सबसे आम प्रकारहै। इस रिसर्च ने कैस्पेस-2 एंजाइम की गैरहाजिरी से लिवर सेल्स को पहुंचने वाले नुकसान पर जोर दिया है।क्या हो सकता है कारण?रिसर्च की लीड रिसर्चर Dr. Loretta Dorstyn ने बताया कि लिवर सेल्स के अंदर पोलिप्लोइडी नाम के जेनेटिक मटेरियल की एक अतिरिक्त कॉपी होती है, जो लिवर को तनाव से उबरने में मदद करती है। कैस्पेस-2 एंजाइम की गैर-मौजूदगी में पोलिप्लोइडी का बढ़ा हुआ लेवल लिवर को डैमेज कर सकता है। क्योंकि यह एंजाइम-2 लिवर की हेल्दी सेल्स के बने रहने और डैमेज सेल्स के हटने वाले बैलेंस के लिए जरूरी है।फैटी लिवर ट्रीटमेंट में कैस्पेस-2 का रोलहेपेटोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर गुरवंत एस लांबा ने समझाया कि कैस्पेस-2 लिवर के अंदर फैट बनने और स्टोर होने के प्रोसेस से जुड़ा होता है। इसलिए कुछ रिसर्च में इस एंजाइम की एक्टिविटी को कम करने से लिवर में अतिरिक्त फैट जमने और फैटी लिवर की बीमारी में कमी देखी गई है। लेकिन इस एंजाइम का काम लिवर में केवल फैट स्टोरेज से जुड़ा नहीं होता।कैस्पेस-2 एंजाइम का काम क्या है?कैस्पेस-2 एंजाइम का फंक्शन (सांकेतिक तस्वीर)डॉक्टर लांबा के अनुसार, कैस्पेस-2 एक जरूरी एंजाइम है, जो शरीर में सेल्स की क्लीनिंग और कंट्रोलिंग में मदद करता है। यह पुरानी या डैमेज्ड सेल्स को पहचानकर उसे खत्म कर देता है ताकि वह आगे चलकर नुकसान ना पहुंचा सकें। लिवर के मामले में इसका रोल काफी अहम है, क्योंकि यह अंग लगातार शरीर के टॉक्सिन और फैट को मेटाबॉलाइज करता है। ऐसे में अगर इसके अंदर डैमेज सेल्स जमा होने लगें तो शरीर में विषाक्त पदार्थ और वसा बढ़ने का खतरा रहता है। यह एंजाइम शरीर के लिए खतरनाक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, मेटाबॉलिज्म को बैलेंस रखने और सेल्स को स्टेबलाइज रखने में महत्वपूर्ण होता है।कैस्पेस-2 की कमी और लिवर कैंसर में कनेक्शनजब कैस्पेस-2 की कमी से लिवर की डैमेज्ड सेल्स के हटने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है तो यह खराब कोशिका खत्म होने की जगह लिवर में जमा होने लगती हैं। डॉक्टर गुरवंत लांबा ने बताया कि धीरे-धीरे ये कोशिकाएं ट्यूमर या कैंसर का रूप ले लेती हैं। इससे आसपास के टिश्यू में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और डैमेज बढ़ने लगती है और धीरे-धीरे लिवर डैमेज होने लगता है। मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं के मरीजों में कैस्पेस-2 की कमी के ज्यादा गंभीर परिणाम दिख सकते हैं।फैटी लिवर को रिवर्स करने के नेचुरल तरीकेडॉक्टर एस लांबा के मुताबिक, खासकर शुरुआती स्टेज में दवा के बिना भी निम्नलिखित नेचुरल तरीकों से फैटी लिवर रिवर्स किया जा सकता है।पेट के आसपास फैट जमने से लिवर पर फैट का खतरा बढ़ता है, इसलिए वजन को कंट्रोल रखें।कम तेल-मीठा, ताजे फल-सब्जियां और फाइबर वाली संतुलित डाइट लें।प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और ज्यादा शुगर से दूरी बनाकर रखें।हर दिन कम से कम 30 से 40 मिनट फिजीकल एक्सरसाइज करें। इसके लिए वॉकिंग, योग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर सकते हैं।शराब को पूरी तरह से बंद करें।अच्छी नींद लें और तनाव कम करें।कैस्पेस-2 एंजाइम को पूरी तरह से दबाने वाली किसी भी थेरेपी से दूर रहना स्वस्थ विकल्प है। क्योंकि यह फैटी लिवर के मामले में कुछ फायदा जरूर दे सकती है, लेकिन लंबे समय में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकती है। इसके अलावा, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को जरूर अपनाएं। यह फैटी लिवर से बचने का सबसे बढ़िया तरीका है।
संभावित फैटी लिवर उपचार कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है
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