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स्मार्टफोन अब नई मुद्रण प्रणाली से नकली वस्तुओं की पहचान कर सकते हैं

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स्मार्टफोन अब नई मुद्रण प्रणाली से नकली वस्तुओं की पहचान कर सकते हैं
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दुनियाभर में नकली प्रोडक्ट्स की हजारों करोड़ रुपये की मार्केट है और इसका साइज कुल ग्लोबल ट्रेड का लगभग 2 प्रतिशत है. नकली प्रोडक्ट्स के कारण कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. दूसरी तरफ नकली प्रोडक्ट्स बनाने वाले लगातार एडवांस होते जा रहे हैं और अब ऐसे सामान को पहचान पाना काफी मुश्किल हो गया है. इस कारण कंपनियां महंगी कीमत वाले ऑथेंटिकेशन सिस्टम पर डिपेंड रहती हैं. ऐसे सिस्टम के लिए खास स्कैनर या प्रोपराइटरी हार्डवेयर की जरूरत पड़ती है. इस मुश्किल को दूर करने के लिए रिसर्चर ने एक नया तरीका निकाला है. उनका मानना है कि अब केवल स्मार्टफोन के जरिए ही नकली सामान की पहचान की जा सकती है. आइए जानते हैं कि यह कैसे संभव होगा? रिसर्चर ने एक नया प्रिंटिंग सिस्टम तैयार किया है, जो रिस्पॉन्सिव एंटी-काउंटरफिट लेबल तैयार करेगा. ये लेबल ज्यादा मजबूत होंगे और इन्हें बड़ी संख्या में तैयार करना आसान होगा. रिस्पॉन्सिव होने के कारण इन्हें फोन से स्कैन भी किया जा सकेगा. इसकी खास बात यह है कि यह पूरी प्रोसेस बहुत आसान और किफायती होने वाली है. अगर ऐसे लेबल के लिए महंगे इक्विपमेंट की जरूरत पड़े तो इसे ज्यादा लोग और कंपनियां इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी. दूसरी तरफ इन लेबल को स्मार्टफोन से ही स्कैन किया जा सकता है, जिससे ग्राहकों और रिटेलर्स के लिए सामान की पहचान करना एकदम आसान हो जाएगा. नया प्रिंटिंग सिस्टम कोई सामान्य लेबल तैयार नहीं करेगा. इसके अंदर तीन टेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन काम करेगा. इसके लिए रिसर्चर ने टेंपरेचर और लाइट रिस्पॉन्सिव माइक्रोकैप्सूल तैयार किए हैं, जिन्हें हाई-स्पीड प्रिंटिंग के लिए UV इंक के साथ फॉर्मूलेट किया गया है. लेबल की ऑथेंटिसिटी को वेरिफाई करने के लिए एक पोर्टेबल स्मार्टफोन-बेस्ड डिटेक्शन सिस्टम भी बनाया गया है. अभी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को कॉपी होने से बचाने के लिए होलोग्राम, QR कोड्स और RFID-बेस्ड सिक्योरिटी फीचर्स की मदद ले रही है. इससे कंपनियों की लागत भी बढ़ती है और कई मामलों में उन्हें खास वेरिफिकेशन हार्डवेयर की जरूरत पड़ती है. अब नया सिस्टम स्मार्टफोन की मदद से ही वेरिफिकेशन की प्रोसेस को पूरा कर देगा. इसलिए कंपनियों को अलग से हार्डवेयर पर पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. कंपनियों के साथ-साथ यह ग्राहकों के लिए भी काफी फायदेमंद होगा और वो बिना किसी झंझट के घर बैठे-बैठे अपने फोन की मदद से सामान के असली या नकली होने का पता लगा पाएंगे. रिसर्चर ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी को कई पैकेजिंग इंडस्ट्री में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह टेक्नोलॉजी डिप्लॉयमेंट के लिए तैयार है और कंपनियां इसे प्रोडक्शन लाइन में शामिल कर सकती है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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