सिद्धार्थनगर। सरकारी विद्यालयों में मजबूत हो रहे शिक्षा के ढांचा और निजी स्कूलों में बढ़ती फीस और महंगी होती किताबों के बोझ से अभिभावकों का रुझान सरकारी विद्यालयों की ओर बढ़ रहा है। लोग अब परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। 33,985 हजार बच्चों ने इस सत्र में प्रवेश लिया है, जो इस बात की पुष्टि कर रहा है।और पढ़ेंTrending Videosजिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 2266 विद्यालय संचालित हैं, जिनकी व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्कूलों को स्मार्ट क्लास से जोड़ा गया है, जहां डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है। इसके अलावा स्वच्छ पेयजल, अलग-अलग शौचालय, मिड-डे मील की बेहतर गुणवत्ता, यूनिफॉर्म, किताबें और बैग जैसी सुविधाएं भी समय से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन व्यवस्थाओं ने सरकारी स्कूलों की छवि को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। सरकार सुविधाओं में इजाफा करने के साथ ही आउट ऑफ बच्चों को जोड़ने पर जोर दे रही है।विज्ञापनविज्ञापनकोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जनपद में चले जागरूकता कार्यक्रम में 30 अप्रैल तक 33,985 हजार नए बच्चों को प्रवेश दिलाया गया है। जानकारों के मुताबिक बढ़े हुए नामांकन के पीछे कई वजह है। इसमें निजी विद्यालयों की लगातार बढ़ती फीस और अन्य खर्चों ने भी अभिभावकों को पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है। जहां एक ओर निजी स्कूलों में पढ़ाई महंगी होती जा रही है। वहीं, सरकारी विद्यालय मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकल्प बनकर उभर रहे हैं। यही कारण है कि मध्यम वर्गीय परिवार भी अब सरकारी स्कूलों पर भरोसा जताने लगे हैं। इससे नामांकन बढ़े हैं।इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने बताया कि अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की गई। अधिक से अधिक बच्चों के प्रवेश पर जोर था। अभी नामांकन चल रहा है।
सरकारी स्कूलों को लोकप्रियता मिली क्योंकि माता-पिता किफायती शिक्षा विकल्पों की तलाश कर रहे हैं
Amar Ujala•

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