रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित और गारंटीड फंड तैयार करने के मामले में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आज भी भारत के सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय निवेश विकल्पों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश की गई राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी(Maturity)पर मिलने वाला पूरा पैसा पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है। अगर आप हर वित्तीय वर्ष में पीपीएफ में अधिकतम ₹1.50 लाख (यानी करीब ₹12,500 प्रति महीना) का निवेश करते हैं, तो अगले 20 सालों में आप अपने लिए ₹66 लाख से अधिक का बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। अगर कोई निवेशक हर साल 1 से 5 अप्रैल के बीच पीपीएफ खाते में ₹1.50 लाख जमा करता है, तो 20 सालों में कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) की ताकत से एक बड़ा फंड तैयार होता है। वर्तमान में पीपीएफ पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। इस गणित से साफ है कि 20 साल बाद आपके द्वारा जमा की गई मूल राशि से भी अधिक पैसा आपको केवल ब्याज के रूप में वापस मिलता है। पीपीएफ खाते की मूल मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है। लेकिन, अगर आप अपने निवेश को जारी रखना चाहते हैं, तो आप इसे 5-5 साल के ब्लॉक में अनगिनत बार बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आपको खाता मैच्योर होने के एक साल के अंदर बैंक या पोस्ट ऑफिस में फॉर्म जमा करना होता है। अगर आप बिना नया पैसा जमा किए भी इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो आप बिना योगदान के भी इसे 5 साल के लिए एक्सटेंड कर सकते हैं, जिस पर आपको ब्याज मिलता रहेगा। पीपीएफ खाता देश के किसी भी प्रमुख बैंक (जैसे SBI) या पोस्ट ऑफिस में खोला जा सकता है। आप एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.50 लाख का निवेश कर सकते हैं। खाता खोलने के लिए मुख्य पहचान पत्र के रूप में सरकारी नियमों के अनुसार वैलिड दस्तावेज देना अनिवार्य है। अगर खाता खोलते समय मुख्य दस्तावेज उपलब्ध न हो, तो पंजीकरण की रसीद दी जा सकती है, लेकिन खाता चालू रखने के लिए निर्धारित समय सीमा (आमतौर पर 6 महीने) के अंदर इसे लिंक कराना जरूरी होता है, अन्यथा खाता ब्लॉक किया जा सकता है। सुरक्षित निवेश और बिना किसी टैक्स की चिंता के करोड़पति बनने का सफर शुरू करने के लिए पीपीएफ एक बेहतरीन और भरोसेमंद जरिया है।
सार्वजनिक भविष्य निधिः भारत में एक सुरक्षित और गारंटीकृत सेवानिवृत्ति निवेश विकल्प
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