इस साल सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हो चुकी है, वहीं सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए श्रावण मास सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि इस दौरान भगवान शिव अपने परिवार समेत पृथ्वी पर निवास करते हैं। जिस कारण वे भक्तों की इच्छाओं को जल्दी पूरा करता है। सावन आते ही लोग पूजा-पाठ के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते हैं, साथ ही खान-पान से जुड़े नियमों का भी पालन करते हैं। माना जाता है कि, श्रावण मास में दही नहीं खाना चाहिए। आइए जानते हैं धार्मिक और आयुर्वेदिक नजरिए से इसके पीछे का कारण? हिंदू धर्म और शिव पुराण के अनुसार, सावन का महीना पूजा, पाठ, जप, तप, संयम और सात्विक जीवन का प्रतीक होता है। इस दौरान व्यक्ति को तामसिक भोजन और आदतों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कई परंपराओं में लोगों का मानना है कि, श्रावण मास के दौरान दही, कड़ी या खट्टी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। बताया जाता है कि, सावन के महीने में भगवान शिव के शिवलिंग पर ठंडी और सात्विक चीजें अर्पित करनी चाहिए और खुद भी भोजन में हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन खाना चाहिए। हरिद्वार से कांवड़ उठाने वाले भक्तों में पहले नंबर पर हरियाणवी 'भोले', इसके बाद यूपी और दिल्ली का नंबर भक्ति की पिच पर 55 नॉट आउट, बाबा वैद्यनाथ धाम के धावक मुजफ्फरपुर के डॉ.गिरि बने युवाओं के प्रेरणा स्रोत महादेव को पाने के लिए माता पार्वती का कठिन तप: पढ़ें सावन सोमवार व्रत की पूरी महिमा 51 किलो की कांवड़ का वजन भी पड़ा हल्का! बुलंदशहर के शिवभक्तों की अनोखी तपस्या देख हर कोई हैरान सावन में स्थापित कर रहे हैं शिवलिंग? तो अभी जान लें ये जरूरी नियम, वरना नहीं मिलेगा महादेव का आशीर्वाद आयुर्वेद में श्रावण मास को वर्षा ऋतु का समय माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी काफी ज्यादा होती है, जिस कारण पाचन शक्ति आम दिनों से कमजोर हो जाती है। बात की दही के सेवन करने की तो, दही स्वभाव से भारी और कफवर्धक माना जाता है। सावन में अधिक मात्रा में दही खाने से गले से जुड़ी समस्या कफ, सर्दी जुकाम या पाचन संबंधी परेशानियां सता सकती हैं। इसी वजह से आयुर्वेद में बरसात के मौसम में विशेषकर रात के समय दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है। सावन मास के दौरान ताजे फल, हरी-भरी सब्जियां, मूंग की दाल, लौकी, तोरी, परवल, घी का सेवन करना सबसे सही माना जाता है। धार्मिक जानकार बताते हैं कि, सावन के महीने में खान-पान के नियमों का असल उद्देश्य सिर्फ धार्मिक अनुशासन नहीं, बल्कि सेहत की रक्षा करना भी है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी सेहत, धार्मिक नियम, परंपरा और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार संतुलित और सात्विक भोजन खाना चाहिए। ऐसा करने से सावन महीने के दौरान शरीर स्वस्थ्य और ऊर्जावान रहता है। मनचाहा जीवनसाथी और अखंड सौभाग्य देने वाले 'सावन सोमवार व्रत' की शुरुआत किसने की थी? शिवपुराण में छिपा है जवाब महादेव को पाने के लिए माता पार्वती का कठिन तप: पढ़ें सावन सोमवार व्रत की पूरी महिमा
सावनः हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए एक पवित्र महीना
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