दक्षिण कोरिया की ऑटोमोबाइल कंपनियां Hyundai Motor Company और Kia Corporation ने हाल ही में एक नई ड्राइवर सेफ्टी टेक्नोलॉजी लॉन्च की है, जो सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाने का दावा करती है. यह टेक्नोलॉजी रडार की मदद से लोगों और वाहनों को तब भी पहचान सकती है, जब वे ड्राइवर की नजर से छिपे हों या ब्लाइंड स्पॉट में हों. आमतौर पर ब्लाइंड स्पॉट एक्सीडेंट का बड़ा कारण बनते हैं, लेकिन इस नए सिस्टम के आने से ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है. कंपनियों का कहना है कि यह सिस्टम रियल टाइम में लगभग 99 प्रतिशत सटीकता के साथ आसपास की चीजों का पता लगा सकता है. क्या है Vision Pulse सिस्टमइस नई तकनीक का नाम Vision Pulse रखा गया है. यह सिस्टम उन लोगों और वाहनों को भी पहचान सकता है जो सीधे दिखाई नहीं देते. इसके लिए यह अल्ट्रा-वाइडबैंड यानी UWB रेडियो सिग्नल्स का इस्तेमाल करता है. ये सिग्नल आसपास मौजूद ऑब्जेक्ट्स की लोकेशन को तुरंत ट्रैक करते हैं. UWB आधारित यह तरीका काफी सटीक है. यह लगभग चार इंच यानी 10 सेंटीमीटर तक की सटीक पोजिशनिंग दे सकता है और करीब 100 मीटर यानी 330 फीट की दूरी तक काम करता है. खास बात यह है कि यह सिस्टम तब भी ठीक से काम करता है जब विजुअल रुकावटें हों, जैसे धुंध, बारिश या अंधेरा. खराब मौसम और रात में भी असरदारHyundai के अधिकारियों के अनुसार, यह टेक्नोलॉजी खराब मौसम या रात के समय भी 99 प्रतिशत से ज्यादा डिटेक्शन सटीकता बनाए रखती है. साथ ही इसकी कम्युनिकेशन स्पीड एक से पांच मिलीसेकंड के बीच है, जिससे रियल टाइम में तुरंत अलर्ट मिल जाता है. इसका मतलब है कि ड्राइवर को खतरे की जानकारी बहुत तेजी से मिलती है, जिससे समय रहते ब्रेक या स्टेयरिंग कंट्रोल किया जा सकता है और एक्सीडेंट टाला जा सकता है. कैमरा नहीं, सीधे डिवाइस से कनेक्शनआमतौर पर ब्लाइंड स्पॉट या प्रॉक्सिमिटी सिस्टम कैमरा, रडार या किसी फिक्स्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहते हैं. लेकिन Vision Pulse अलग तरीके से काम करता है. यह सीधे आसपास मौजूद UWB डिवाइस से कनेक्ट हो जाता है. गाड़ियों में लगे UWB मॉड्यूल सिग्नल भेजते हैं. अगर आसपास की दूसरी गाड़ियों, साइकिल, पैदल चलने वाले या किसी व्यक्ति के स्मार्टफोन, वियरेबल या ट्रैकर में भी UWB मॉड्यूल मौजूद है, तो सिस्टम सिग्नल के समय को मापकर उनकी सटीक लोकेशन पता कर लेता है. जब संभावित टक्कर का खतरा दिखता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे दुर्घटना की संभावना काफी कम हो जाती है. तेज रफ्तार ऑब्जेक्ट्स भी होंगे ट्रैककंपनियों का कहना है कि Vision Pulse एक साथ कई तेज रफ्तार ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक कर सकता है. इसके लिए खास एल्गोरिद्म तैयार किए गए हैं, जो गाड़ी के आसपास तेजी से चल रही चीजों की पोजिशन का सही अनुमान लगाते हैं. इससे भीड़भाड़ वाले चौराहों, खराब मौसम या रात में भी सिस्टम बेहतर परफॉर्मेंस देता है, जहां सामान्य कैमरे अक्सर फेल हो जाते हैं. कम लागत और ज्यादा फायदाइस सिस्टम का एक बड़ा फायदा इसकी कम लागत और आसान इस्तेमाल है. Hyundai और Kia की कुछ गाड़ियों में पहले से ही Digital Key 2 के जरिए UWB हार्डवेयर मौजूद है. यह वही फीचर है जिससे स्मार्टफोन से कार को लॉक, अनलॉक और स्टार्ट किया जा सकता है. इसी वजह से इस टेक्नोलॉजी को बिना अतिरिक्त सेंसर लगाए भी एक्टिव किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि इससे महंगे LiDAR और रडार जैसे सेंसर पर निर्भरता कम होती है. साथ ही UWB सिग्नल अन्य वायरलेस सिग्नल से कम प्रभावित होते हैं. कार से बाहर भी होगा इस्तेमालHyundai और Kia का मानना है कि Vision Pulse सिर्फ ड्राइवर असिस्टेंस तक सीमित नहीं रहेगा. इसे इंडस्ट्रियल एरिया जैसे वेयरहाउस में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां फोर्कलिफ्ट और वर्कर्स के बीच टक्कर का खतरा रहता है. इसके अलावा आपदा या रेस्क्यू ऑपरेशन में मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने में भी यह मददगार हो सकता है. कंपनियों ने इस टेक्नोलॉजी की लाइव टेस्टिंग शुरू कर दी है और भविष्य में बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल करने की योजना है.
हुंडई और किआ का विजन पल्स सिस्टम रियल-टाइम ऑब्जेक्ट डिटेक्शन के साथ ड्राइवर की सुरक्षा को बढ़ाता है।
Zee News Hindi•
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