नौसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा हालात में यह समझना बेहद जरूरी है कि समुद्र की सुरक्षा किन-किन चीजों से प्रभावित होती है। इसके लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।विज्ञापनएडमिरल स्वामीनाथन ने अपने संबोधन में इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें ईस्ट एशिया समिट के दौरान इस पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सात प्रमुख क्षेत्रों के तहत समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है। इस साल के संवाद की थीम विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक सहयोग भी इसी पहल के एक प्रमुख स्तंभ से जुड़ी है।विज्ञापननौसेना प्रमुख ने कहा कि हिंद-प्रशांत की अवधारणा रणनीतिक चर्चाओं में लोकप्रिय होने से बहुत पहले ही प्रकृति इन दोनों महासागरों को जोड़ चुकी थी। समुद्र की धाराएं और जलवायु दोनों महासागरों के बीच गहरा संबंध बनाते हैं। उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के रास्ते हर सेकंड करीब 1.5 करोड़ घन मीटर पानी प्रशांत महासागर से हिंद महासागर में पहुंचता है। यह दोनों महासागरों के बीच प्राकृतिक जुड़ाव की एक बड़ी मिसाल है।ये भी पढ़ें:सुप्रीम कोर्ट: 'गलत नंबर मिला रहे, धरने का मौसम है, आप भी कीजिए', आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सीजेआई की सलाहएडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि अब जरूरत केवल साझा हितों की बात करने की नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की है। इससे क्षेत्रीय देशों के बीच लंबे समय तक सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संवाद इस दिशा में छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी IPRD 2026 के एक सत्र में हिस्सा लिया।
हिन्द-प्रशांत देशों से समुद्री सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया गया
Amar Ujala•

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