अमर उजाला ब्यूरोचंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज के दौरान मां को उनसे अलग नहीं रहना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) को मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) में बदलने की तैयारी कर रहा है। इसमें इलाज के साथ मां की मौजूदगी, स्तनपान और बच्चे की देखभाल में परिवार की भागीदारी सुनिश्चित होगी। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।डॉ. मिश्रा के मुताबिक प्रदेश की 29 एसएनसीयू में पहले से 54 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को सांस लेने में मदद देने के लिए करीब सात करोड़ रुपये से 19 और वेंटिलेटर खरीदे जाएंगे। नई व्यवस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीरो सेपरेशन सिद्धांत पर आधारित है। इसमें समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों को भी चिकित्सकीय स्थिति अनुकूल होने पर मां के साथ रखा जाएगा। कंगारू मदर केयर के तहत बच्चे को मां के सीने से लगाकर त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया जाएगा। इससे शरीर का तापमान बनाए रखने, स्तनपान और मां-बच्चे के जुड़ाव में मदद मिलती है। माताओं को पोषण, स्वच्छता और बीमारी के शुरुआती संकेत पहचानने का प्रशिक्षण भी मिलेगा।विज्ञापनअंबाला और कुरुक्षेत्र से मिली सीखअंबाला सिटी में देश की पहली जिलास्तरीय एमएनसीयू स्थापित की गई थी। इसके बाद कुरुक्षेत्र में भी ऐसी इकाई शुरू हुई। दोनों जगह के अनुभव के आधार पर प्रदेश के अन्य जिलों में व्यवस्था के विस्तार की तैयारी है। 21 अगस्त को अधिकारियों को सभी एसएनसीयू को एक नवंबर 2026 तक अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि अभी कितनी इकाइयां पूरी तरह अपग्रेड हुई हैं, इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
हरियाणा सरकार ने विशेष नवजात देखभाल इकाइयों को मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों में विलय करने की योजना बनाई है
Amar Ujala•

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