सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है. द्रिग पंचांग के अनुसार, इस साल हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को रखा जाएगा. इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और घर की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तीज का त्योहार साल में कई बार मनाया जाता है. हरियाली तीज की तरह हिंदू धर्म के कई पवित्र महीनों अलग-अलग नाम से तीज का त्योहार आता है. आइए जानते हैं कि साल में कुल कितनी तीज होती हैं. हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया तिथि को मनाई जाती है. सावन की हरियाली और वर्षा ऋतु के कारण इसका नाम हरियाली तीज पड़ा है. इसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था, जिसकी पूर्णता इसी दिन हुई थी. कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. इसे कजली तीज और सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है. यह त्योहार विशेष रूप से राजस्थान में लोकप्रिय है. इस दिन राजस्थान के बूंदी में माता पार्वती की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव की पूजा का विधान माना जाता है. हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इसे तीज के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह निर्जला रखा जाता है. इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. आखा तीज, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है, हिंदू धर्म की अत्यंत शुभ तिथियों में गिनी जाती है. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं. इसलिए लोग इस अवसर पर सोना खरीदते हैं, विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी. जलदान और पुण्य कार्यों के लिए भी यह तिथि विशेष मानी जाती है. गणगौर तृतीया चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है. 'गण' भगवान शिव और 'गौर' माता पार्वती का प्रतीक है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं. रंभा तीज ज्येष्ठ माह में मनाई जाती है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अप्सरा रंभा और माता पार्वती की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से पति की आयु लंबी होती है. महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात्रि में कथा सुनने के बाद ही जल ग्रहण करती हैं. वराह तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. यह पर्व भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी यानी भूदेवी को मुक्त कराया था. इस दिन भगवान वराह और भूदेवी की पूजा की जाती है. विशेष बात यह है कि यह व्रत केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी श्रद्धापूर्वक इसे कर सकते हैं.
हरियाली तीजः हिंदू धर्म में प्रेम और समृद्धि का उत्सव
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