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Mar 20, 2026, 10:34 AM
ब्राजील के राष्ट्रपति ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों को लेकर ट्रंप की आलोचना की

ब्राजील के राष्ट्रपति ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों को लेकर ट्रंप की आलोचना की

ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद पश्चिम एशिया में भीषण जंग छिड़ गई है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के धुर विरोधी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने उन पर जबरदस्त तंज कसा है। लूला ने डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की कड़ी आलोचना करते हुए दुनिया के अन्य देशों के प्रति उनके रवैए पर सवाल उठाए हैं। साओ पाउलो में आयोजित एक कार्यक्रम में लूला ने कहा कि दुनिया में किसी को भी यह सोचने की इजाजत नहीं दी जा सकती कि वह पूरी दुनिया का मालिक है। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से भी अपील की कि वह बढ़ते वैश्विक संघर्षों को रोकने के लिए हस्तक्षेप करे। लूला दा सिल्वा ने अपने बयान में ट्रंप का नाम लिए बिना कहा, “मैं खुद ईरानी शासन से समर्थक नहीं हूं, और ना ही मैंने कभी किसी और से इससे सहमत होने के लिए कहा है। लेकिन हमें देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना सीखना चाहिए।” इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आगे कहा, “हम किसी को भी यह सोचने की इजाजत नहीं दे सकते कि पूरी दुनिया उनकी है।” लूला ने ट्रंप प्रशासन पर कई देशों के साथ अनुचित तरीके से आक्रामक रवैया अपनाने का आरोप लगाया। लूला ने ग्रीनलैंड, पनामा नहर, वेनेजुएला और क्यूबा जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका इन क्षेत्रों में नियंत्रण और दबाव की नीति अपना रहा है। लूला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से अपील की कि वे एक साथ बैठकर युद्ध रोकने और शांतिपूर्ण विदेश नीति को बढ़ावा देने के उपाय करें। उन्होंने कहा कि दुनिया में संतुलन बनाए रखने के लिए मजबूत देशों के सामने खड़ा होना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अचानक हमला बोला दिया, जिसके बाद से युद्ध जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों पर भी मिसाइलें और ड्रोन बरसाई हैं। युद्ध में अब तक सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी हैं। वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है जिससे कई देशों में ईंधन आपूर्ति पर संकट पैदा हो गया है। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार सत्ता में लौटने के बाद से अमेरिका अब तक कई देशों पर या तो आक्रमण कर चुका है या इसकी धमकियां दी हैं। ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में तेल संपन्न देश वेनेजुएला पर हमला कर वहां से राष्ट्रपति को बंदी बना लिया। बीते दिनों ट्रंप ग्रीनलैंड, क्यूबा और कनाडा जैसे देशों पर कब्जा करने की चेतावनी दे चुके हैं। ग्रीनलैंड को लेकर विवाद तब सामने आया, जब ट्रंप ने जनवरी में कहा था कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस द्वीप की जरूरत है और अमेरिका किसी भी हाल में इसे लेकर रहेगा। वहीं पनामा नहर को लेकर ट्रंप ने 1977 के समझौते की आलोचना करते हुए इसे गलती बताया और आरोप लगाया कि अमेरिकी जहाजों से ज्यादा शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इसके अलावा क्यूबा को लेकर भी ट्रंप के बयान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई। क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे मुद्दों को गंभीरता और संवेदनशीलता से संभालना चाहिए।
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Mar 20, 2026, 09:52 AM
टी. एम. सी. ने चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में अधिकारियों के तबादले को लेकर चुनाव आयोग से अदालत में गुहार लगाई

टी. एम. सी. ने चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में अधिकारियों के तबादले को लेकर चुनाव आयोग से अदालत में गुहार लगाई

कोलकाता:पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग में तनाव लगातार जारी है। टीएमसी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर अब कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी द्वारा दायर याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रतिवादी बनाया गया है।अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर कोर्ट पहुंची टीएमसीइस याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले पर सवाल उठाया गया है, जिसमें उसने राज्य सरकार से सलाह लिए बिना अधिकारियों का तबादला कर दिया। इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते की शुरुआत में हो सकती है। चुनाव आयोग ने 15 मार्च को विधानसभा चुनावों की घोषणा करने के कुछ ही घंटों के भीतर, मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित बड़ी संख्या मेंसीनियर अधिकारियों का तबादलाकर दिया था।सीएम ममता बनर्जी बोलीं- अघोषित आपातकालपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जीने गुरुवार को इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे ‘अघोषित आपातकाल’ बताया। उन्होंने इसे संस्थागत हेरफेर के जरिए बंगाल पर कब्जा करने की एक सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि हम जो देख रहे हैं, वह अघोषित आपातकाल से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों से नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। ममता बनर्जी ने बाद में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर चुनाव आयोग से ऐसे ‘मनमाने, एकतरफा और पक्षपातपूर्ण’ कदमों से परहेज करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने शालीनता और संवैधानिक मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। उन्होंने कहा कि तथाकथित 'विशेष गहन पुनरीक्षण' की शुरुआत के बाद से चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और जमीनी हकीकतों या लोगों की भलाई की जरा भी परवाह नहीं की है।इंटर-स्टेट ट्रांसफर पर चुनाव आयोग ने लगाई रोकचुनाव आयोग ने गुरुवार को सीनियर पुलिस अधिकारियों के कुछ इंटर-स्टेट ट्रांसफर के आदेशों पर रोक लगा दी। बिधाननगर के सीपी मुरलीधर शर्मा और सिलीगुड़ी के सीपी सैयद वकार रजा, जिन्हें पहले तमिलनाडु जाने के लिए कहा गया था, उन्हें अब इंतजार करने को कहा गया है। बैरकपुर के सीपी प्रवीण त्रिपाठी और हावड़ा के सीपी आकाश मघारिया के तमिलनाडु ट्रांसफर के आदेश के साथ ही बीरभूम के एसपी अमनदीप के कर्नाटक ट्रांसफर के आदेश भी रोक दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे और वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
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Mar 20, 2026, 09:45 AM
बिहार सतर्कता विभाग ने मुख्यमंत्री के गृह जिले में बड़ी भ्रष्टाचार रोधी कार्रवाई की

बिहार सतर्कता विभाग ने मुख्यमंत्री के गृह जिले में बड़ी भ्रष्टाचार रोधी कार्रवाई की

बिहार में भ्रटाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत निगरानी विभाग की टीम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र नालंदा में बड़ी कार्रवाई की है। ज़िले के नगरनौसा प्रखंड के पंचायती राज पदाधिकारी(BPRO)अनुष्का कुमारी को 12 हज़ार रुपए घुस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है जिससे प्रशासनिक महकमों में हड़कंप मच गया है। एक योजना की फाइल बढ़ाने के लिए अनुष्का ने घूस की मांग की थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रखंड क्षेत्र के खपुरा गांव निवासी अजय कुमार से रिश्वत की मांग की गयी थी। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को बताया कि गांव में छठ घाट की सीढ़ी निर्माण से संबंधित योजना शुरू करने और फ़ाइल आगे बढ़ाने के नाम पर BPRO अनुष्का कुमारी ने रिश्वत मांगी थी। बार बार आग्रह करने के बाद भी वह मानने को तैयार नहीं थी। मजबूर होकर इसकी शिकायत इन्होंने विजलेंस ऑफिस में किया। अजय कुमार के आवदेन पर केस दर्ज कर जांच की गयी तो मामला सत्य पाया गया। शिकायत की जांच निगरानी विभाग की टीम ने विशेष टीम का गठन किया गया। निगरानी टीम ने अपना जाल बिछाया। योजना के अनुसार शिकायतकर्ता अजय कुमार पैसा लेकर अनुष्का के पास पहुंचे। जैसे ही हाथ में दिया कि पहले से घात लगाकर बैठे निगरानी की टीम के अफसरों ने उन्हें दबोच लिया। अनुष्का कुमारी चिल्लाने लगी और हाथ छुड़ाकर भागने का प्रयास कर रही थी। लेकिन महिला अफसरों और जवानों के आगे एक नहीं चली। निगरानी टीम अनुष्का को लेकर नालंदा से निकल गई। किसी स्थान पर उनसे पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस कार्रवाई से नालंदा जिले में हड़कंप मच गया। निगरानी टीम आरोपी पदाधिकारी के कार्यालय में भ्रष्टाचार के अन्य मामलों की भी जांच करेगी। कार्रवाई के बाद कई लोग सामने आए और खुलकर कहने लगे कि अनुष्का कुमारी हर काम के लिए पैसों की डिमांड करती है। घूसखोर अफसर के खिलाफ निगरानी की यह पहली कार्रवाई नहीं है। राज्य में अब तक दर्जनों अफसरों को एक साल के अंदर गिरफ्तार किया गया है। सीएम नीतीश कुमार का साफ कहना है कि सरकारी काम के लिए पैसों की मांग करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। आरोप सिद्ध होने पर ऐसे लोगों की नौकरी भी जा सकती है।
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Mar 20, 2026, 09:43 AM
भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस के अंदरूनी कलह के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री में बदलाव की भविष्यवाणी की

भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस के अंदरूनी कलह के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री में बदलाव की भविष्यवाणी की

विस्तारAdd as a preferredsource on googleकर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने शुक्रवार को दावा किया कि राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष और अंदरूनी कलह चरम पर पहुंच गई है और मुख्यमंत्री बदलना अब तय है। विजयेंद्र ने यह भी विश्वास जताया कि 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनावों में भाजपा बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण, दोनों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है और जनता में नाराजगी भी है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं'कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान चरम पर पहुंची'बी वाई विजयेंद्र ने कहा, 'कांग्रेस में सत्ता संघर्ष और अंदरूनी खींचतान अब चरम पर पहुंच चुकी है। अगर उपचुनाव घोषित नहीं होते, तो स्थिति मौजूदा विधानसभा सत्र के तुरंत बाद अंतिम चरण में पहुंच जाती। उपचुनावों के कारण इसमें करीब पंद्रह दिन की देरी हो सकती है।' पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, 'कांग्रेस सरकार में चल रहे संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री बदलना अब तय है।'विज्ञापनविज्ञापन'अगले मुख्यमंत्री पर फैसला होना बाकी'कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष ने कहा, 'हाल ही में विधानसभा में मेरी बातचीत कुछ सत्तारूढ़ दल के विधायकों से हुई, उन्होंने बताया कि जल्द ही कुछ परिणाम सामने आएंगे और मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे। लेकिन अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका जवाब उन्हें खोजना होगा।' विजयेंद्र ने कहा कि गरीब, किसान और युवा सभी सरकार से नाराज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की नीतियां जनविरोधी हैं।ये भी पढ़ें-Karnataka: सामाजिक बहिष्कार-उत्पीड़न से तंग आकर महिला ने भीमा नदी में कूदकर दी जान, पांच आरोपियों पर केस दर्ज'उपचुनाव में भाजपा को मिलेगी जीत'उन्होंने कहा, 'गरीब परेशान हैं, किसान संकट में हैं और युवा भी असंतुष्ट हैं। इसी कारण मुझे पूरा विश्वास है कि दोनों सीटों के मतदाता भाजपा को जीत का आशीर्वाद देंगे।' भाजपा ने केंद्रीय चुनाव समिति की मंजूरी के बाद बागलकोट से वीरभद्रय्या चारंतिमठ और दावणगेरे दक्षिण से श्रीनिवास टी दासकरियप्पा को उम्मीदवार बनाया है। ये उपचुनाव कांग्रेस के मौजूदा विधायकों एच वाई मेटी और शामनूर शिवशंकरप्पा के निधन के बाद हो रहे हैं।
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Amar Ujala
Mar 20, 2026, 09:41 AM
बढ़ती मांग के बीच महाराष्ट्र ने समान नागरिक संहिता कानून पर विचार किया

बढ़ती मांग के बीच महाराष्ट्र ने समान नागरिक संहिता कानून पर विचार किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleउत्तराखंड के बाद गुजरात में हाल ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून के विधेयक पेश हुआ। गोवा में भी कुछ इस तरह का कानून पहले से ही है। इस कड़ी में अब महाराष्ट्र का नाम भी जुड़ गया है। अब महाराष्ट्र में भी यूसीसी जैसे कानून की मांग उठ रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह समान नागरिक संहिता के संबंध में हितधारकों के साथ परामर्श कर रही है। यह कदम भाजपा के एक एमएलसी की और से राज्य विधानसभा में उत्तराखंड के समान एक कानून की मांग के बाद उठाया गया है। यह कानून सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कानूनों को बढ़ावा देता है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंयह भी पढ़ें-Shashi Tharoor: 'खामेनेई की मौत पर समय पर जताना चाहिए था शोक', भारत सरकार के रुख पर थरूर ने कही बड़ी बातविज्ञापनविज्ञापनपरिणय फुके ने क्या कहा?भाजपा के परिणय फुके ने बुधवार को विधान परिषद में यह मुद्दा उठाया। संयोग से उसी दिन गुजरात में भाजपा सरकार ने भी राज्य में यूसीसी लाने के लिए एक विधेयक पेश किया। हालांकि, परिषद को सूचित किया गया कि सरकार को फुके के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होगी, क्योंकि वह विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श कर रही है। परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने कहा, "हमें मंत्री जी से एक पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि यह मुद्दा कई विभागों से संबंधित है। चूंकि यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी विभागों को एक महीने के भीतर लिखित जवाब देना चाहिए। यदि आपको जवाब नहीं मिलता है, तो अध्यक्ष या हमें (अध्यक्ष को) सूचित करें, और हम एक बैठक आयोजित करेंगे।"यह भी पढ़ें-Kerala Elections: केरल में राहुल गांधी बोले- जनता को यूडीएफ पर पूरा भरोसा, जनता बदलाव के लिए तैयारमहाराष्ट्र को भी इसी तरह के कानून की जरूरतउन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर कानून और न्यायपालिका, महिला एवं बाल विकास और सामान्य प्रशासन विभागों से परामर्श की आवश्यकता है। एक व्यापक समाधान की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, "यह एक महत्वपूर्ण कानून है। सरकार इस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देना चाहती है, इसीलिए इसे कई विभागों को भेजा गया है।" फुके ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि एक समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक और गोद लेने के लिए अलग-अलग कानून हैं। उन्होंने सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की मांग की।एमएलसी ने कहा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कानून है और महाराष्ट्र को भी इसी तरह के कानून की जरूरत है।
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Mar 20, 2026, 09:34 AM
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान में वृद्धि देखी जा रही है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान में वृद्धि देखी जा रही है

मेरठ।2027 के विधानसभा चुनाव की आहट अब वेस्ट यूपी में साफ सुनाई देने लगी है। मौसम भले बदल रहा हो, लेकिन सियासी पारा तेजी से चढ़ चुका है। इसकी शुरुआत नरेंद्र मोदी की 22 फरवरी की मेरठ जनसभा से मानी जा रही है, जहां नमो भारत ट्रेन और मेट्रो के लोकार्पण ने चुनावी माहौल को नई दिशा दी है। इसके बाद अब सभी दल रैली,सभा सम्मेलन करने में तेजी दिखाने में जुट गए हैं। सियासी जानकारों के मुताबिक, आने वाले समय में यह सियासी गतिविधियां और तेज होने के संकेत हैं।विकास के एजेंडे पर बीजेपीमेरठ के बाद अब वेस्ट यूपी के मेगा प्रोजेक्टजेवर एयरपोर्ट का उद्घाटनकरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां 28 मार्च को बड़ी जनसभा करेंगे। वहीं, मेरठ से प्रयागराज तक बने गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण को भी बड़े राजनीतिक आयोजन से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा इन परियोजनाओं के जरिए विकास का संदेश देने में जुटी है।अखिलेश यादव की 29 मार्च को दादरी में दस्तकपीएम मोदी की 28 मार्च को रैली के अगले ही दिन, वेस्ट यूपी के दादरी में 29 मार्च को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की जनसभा प्रस्तावित है। सपा नेता राजकुमार भाटी यहां गुर्जर सम्मेलन करने जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यूपी की 140 विधानसभा सीटों पर गुर्जर समाज का असर है। वह इन 140 सीटों से दादरी रैली में गुर्जरों की भागीदारी का दावा कर रहे हैं। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिनेश गुर्जर का कहना है कि दादरी सम्मेलन यूपी में 2027 की सरकार बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। यह आयोजन सूबे की सियासत की दशा और दिशा तय करेगा।चौधरी जयंत ने भी सियासी हलचल बढ़ाईइसी सियासी हलचल के बीच राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया जयंत चौधरी भी बीते 14 मार्च को दादरी (ग्रेटर नोएडा) में स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक की जयंती पर आयोजित समारोह में भाग लेकर गुर्जर समाज को साधने की कोशिश कर चुके हैं। इसी कड़ी में अब जेडीयू छोड़ने वाले पूर्व सांसद केसी त्यागी को 22 मार्च को पार्टी में शामिल कर जयंत चौधरी आरएलडी को वेस्ट यूपी में नई सियासी ताकत की तरफ मोड़ेंगे और कुनबा बढ़ाओ अभियान को रफ्तार देंगेदलितों के दिल में उतरने की तैयारी में बसपा और आसपाबीएसपी प्रमुख मायावतीने नोएडा और चंद्रशेखर आजाद की आसपा ने भी कांशीराम की जयंती पर अलग अलग जनसभाएं कर अपने समर्थकों को सक्रिय किया है। आगे भी मायावती के भतीजे आकाश आनंद अप्रैल से वेस्ट यूपी में कई आयोजन करने जा रहे हैं। खुद मायावती का भी मंडलीय सम्मेलन करना प्रस्तावित हैं। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर अगले महीने से चुनावी सभाएं शुरू करेंगे।वेस्ट यूपी में जाट राजनीति भी सक्रियदूसरी तरफ जाट राजनीति भी वेस्ट यूपी में सक्रिय हो रही है। मेरठ में मुजफ्फरनगर सीमा से सटे सकौती गांव में इंटरनेशनल जाट पार्लियामेंट ने महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के लिए 29 मार्च को जनसभा रखी है। इसमें बड़ा सैलाब जुटाने की कोशिश है। कार्यक्रम के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान जुटे हुए हैं। इसके पीछे जाट समाज के दिग्गजों का जुड़ाव कर 2027 से पहले सियासी दलों को ताकत दिखाने का मकसद माना जा रहा हैं। हालांकि वेस्ट यूपी में जाट समाज के सियासी दल के तौर पर पहचान रखने वाले रालोद के नेता चौधरी जयंत सिंह संसद में रहने के कारण शामिल नहीं होगे।सुरक्षित सियासी ठौर को दल बदल भी शुरू2027 की आहट के चलते सुरक्षित सियासी ठौर हासिल करने के लिए दलबदल का दौर भी वेस्ट यूपी में शुरू हो गया है। जेडीयू छोड़कर आए पूर्व सांसद केसी त्यागी 22 मार्च को दिल्ली के मावलंकर हॉल में जयंत चौधरी की मौजूदगी में आरएलडी जॉइन करने जा रहे हैं। 'खुशहाल किसान-मजबूत भारत' के नाम से हो रहे इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि चौधरी जयंत सिंह होंगे। उनकी उपस्थिति में केसी त्यागी की जॉइनिंग रालोद के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने वाली कोशिश मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केसी त्यागी के आने से रालोद को वैचारिक मजबूती मिलेगी। किसान राजनीति में नई ऊर्जा का संचार होगा।दिलचस्प मानी जा रही 2027 की जंगदरअसल, वेस्ट यूपी में जिस तरह से जनसभाएं, सामाजिक समीकरण और दलबदल एक साथ आगे बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि 2027 की लड़ाई अभी से दिलचस्प और बहुकोणीय होती जा रही है। इसके लिए हर दल जिताऊ, जनाधार वाले, जनता के बीच लोकप्रिय और उनकी पसंद के कैंडिडेट की तलाश में जुट गए हैं।
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Dainik Jagran
Mar 20, 2026, 09:27 AM
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष का दावा, कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी समर्थित उम्मीदवार के संपर्क में हैं

हरियाणा भाजपा अध्यक्ष का दावा, कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी समर्थित उम्मीदवार के संपर्क में हैं

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़।हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में उजागर हुई कांग्रेस की फूट का भाजपा फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने दावा किया कि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे।
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Navbharat Times
Mar 20, 2026, 09:25 AM
नेतन्याहू ने मध्य पूर्व के तेल और गैस को इज़राइल तक पहुँचाने के लिए पाइपलाइन बनाने का सुझाव दिया

नेतन्याहू ने मध्य पूर्व के तेल और गैस को इज़राइल तक पहुँचाने के लिए पाइपलाइन बनाने का सुझाव दिया

तेल अवीव:प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि उनका मानना है कि मध्य-पूर्व के तेल और गैस को अरब प्रायद्वीप से होते हुए इजरायली बंदरगाहों तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइनें बनाई जानी चाहिए। इसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी के अन्य जलक्षेत्रों में ईरान से होने वाले खतरों को हमेशा के लिए खत्म करना है। अगर इजरायली पीएम का प्लान पर काम हुआ तो फिर कई देशों के लिए होर्मुज का महत्व खत्म हो जाएगा। इसके अलावा होर्मुज को लेकर ईरान फिलहाल जिस तरह से देशों को परेशान कर रहा है वो भी खत्म हो जाएगा।इजरायल के पीएम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मॉडल को पेश किया है। इजरायल ने पहले ईरान के गैस क्षेत्र पर हमला किया था जिसके बाज ईरान ने भी कतर और इजरायल में गैस इफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने इजरायल से कहा है कि वो ईरान के गैस और तेल इफ्रास्ट्रक्चर पर हमले ना करे। वहीं नेतन्याहू ने कहा कि तेहरान के पास अब यूरेनियम संवर्द्धन की क्षमता नहीं बची है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।होर्मुज को दरकिनार करने का प्लान क्या है?इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप ने उनसे भविष्य में होने वाले गैस हमलों को रोकने के लिए कहा था। साउथ पार्स हमले के बारे में एक रिपोर्टर के पूछने पर नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने यह कार्रवाई अकेले की थी। उन्होंने कहा कि 'राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए कहा था।' इसी दौरान नेतन्याहू ने कहा कि उनका मानना है किहोर्मुज स्ट्रेटके लिए वैकल्पिक रास्ते खोजने होंगे। ऐसा लग रहा था कि वे इस बात की ओर इशारा कर रहे थे कि इस अहम रास्ते (चोक पॉइंट) के लंबे समय तक बंद रहने से इजरायल को संभावित फायदा हो सकता है।नेतन्याहू ने कहा कि 'बस तेल और गैस की पाइपलाइनें अरब प्रायद्वीप से होते हुए पश्चिम की तरफ सीधे इजराइल तक हमारे भूमध्यसागरीय बंदरगाहों तक ले आइए और इस तरह आप इन अहम रास्तों (चोक पॉइंट्स) की जरूरत को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।" उन्होंने कहा कि "मैं इसे एक ऐसे असली बदलाव के तौर पर देखता हूं जो इस युद्ध के बाद आएगा।"नेतन्याहू ने जो रास्ता सुझाया वो क्या है?नेतन्याहू ने जो मॉडल बताया है अगर वाकई उसपर अहम होता है तो मिडिल ईस्ट का नक्शा ऊर्जा सप्लाई के हिसाब से पूरी तरह बदल जाएगा। मौजूदा स्थिति में तेल के जहाजों कोहोर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंडेबजैसे रास्तों से गुजरना होता है और ये रास्ते काफी संकीर्ण हैं। लेकिन नेतन्याहू ने जो प्लान सुझाया है उसके मुताबिक इन समुद्री रास्तों की अहमियत कम हो जाएगी क्योंकि फिर तेल पाइपलाइनें सीधे जमीन से होकर गुजरेंगी। इस प्लान के तहत एक सीधी रेखा की कल्पना की जाए तो ये सीधा लाइन अरब प्रायद्वीप (खाड़ी देशों) से शुरू होकर पश्चिम की ओर इजरायल तक जाएगी।इसकी शुरुआत सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विशाल तेल क्षेत्र से होगी। यह पाइपलाइन जॉर्डन या सीधे सऊदी रेगिस्तान से होते हुए इजरायल में प्रवेश करेगी। फिर ये इजरायल के हाइफा या अशदोद पोर्ट तक पाइपलाइन पहुंचेगी। इसके बाद भूमध्य सागर के जरिए यह पाइपलाइन नेटवर्क सीधे यूरोप से जुड़ जाएगा। इससे यूरोप को रूस या स्वेज नहर पर निर्भर रहने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन ऐसा करने के बाद फिर इजरायल दुनिया के लिए 'एनर्जी लाइफलाइन' बन जाएगा। फिर इजरायल भी जब चाहे वो इस पाइपलाइन को बंद कर सकता है, जैसा ईरान अभी कर रहा है।
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Dainik Jagran
Mar 20, 2026, 09:24 AM
अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बढ़ने से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा

अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बढ़ने से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा

गरिमा सिंह, नई दिल्ली।अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग अब पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले चुकी है। बुधवार रात ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायली हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है।
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ABP News
Mar 20, 2026, 09:14 AM
भारतीय राजनेता दुष्यंत चौटाला के बहनोई को जान से मारने की धमकी

भारतीय राजनेता दुष्यंत चौटाला के बहनोई को जान से मारने की धमकी

हरियाणा के पानीपत से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जननायक जनता पार्टी (JJP) के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के जीजा देवेंद्र कादियान को जान से मारने की धमकी मिली है. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है. जानकारी के मुताबिक, देवेंद्र कादियान के मोबाइल पर व्हाट्सऐप कॉल और वॉयस रिकॉर्डिंग के जरिए धमकी दी गई. कॉल करने वाले ने खुद को कुख्यात ‘अमित भाऊ गैंग’ का सदस्य बताया. बदमाशों ने सीधे तौर पर 5 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी और पैसे नहीं देने पर गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी. धमकी देने वालों ने सिर्फ दुष्यंत चौटाला के जीजा देवेंद्र कादियान ही नहीं, बल्कि उनके परिवार को भी निशाना बनाया. उन्होंने कादियान के बच्चों और उनके फार्महाउस पर हमला करने की बात कही. इस तरह की धमकी से परिवार में डर का माहौल बन गया है. देवेंद्र कादियान की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कॉल और वॉयस रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है, ताकि आरोपियों तक जल्द पहुंचा जा सके. घटना के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर कादियान के पानीपत स्थित सेक्टर-11 वाले घर की सुरक्षा बढ़ा दी है. आसपास पुलिस की निगरानी भी तेज कर दी गई है, ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके. पुलिस इस मामले को गैंगस्टर एंगल से भी देख रही है. ‘अमित भाऊ गैंग’ का नाम सामने आने के बाद जांच और गंभीर हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा.
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Mar 20, 2026, 09:14 AM
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में एलपीजी की कमी पर केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में एलपीजी की कमी पर केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बेंगलुरु में कमर्शियल एलपीजी की गंभीर कमी को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उन्होंने बताया कि शहर में होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाओं और पीजी आवासों की दैनिक मांग लगभग 50 हजार सिलेंडर की है, लेकिन 1,000 सिलेंडर प्रतिदिन ही मिल पा रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हालिया निर्देश के कारण घरेलू LPG को प्राथमिकता देने से कमर्शियल सप्लाई में भारी कमी आई है। इससे बेंगलुरु के कई व्यवसाय प्रभावित हुए हैं और कुछ होटल-रेस्तरां पहले ही बंद होने लगे हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के कदम उठाए जाने का जिक्र किया, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर अभी बहुत बड़ा है। यह संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ा हुआ है, जहां ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुआ है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम रास्ता है, जिसके बंद होने से भारत में एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। भारतीय ध्वज वाले 2 एलपीजी जहाज एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार किया और 92,712 मीट्रिक टन LPG लेकर भारत पहुंचे। फिर भी, स्थानीय स्तर पर कमर्शियल उपयोगकर्ताओं को राहत नहीं मिल पाई है। बेंगलुरु के होटल एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो सैकड़ों दुकानें बंद हो सकती हैं, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। LPG संकट कितना गंभीर कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं, जिसमें कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के आदेश शामिल हैं। राज्य ने होटलों को बिजली या वैकल्पिक ईंधन पर स्विच करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में केंद्र से कमर्शियल और ऑटो एलपीजी के लिए तत्काल अतिरिक्त आवंटन की मांग की है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे महानगर में कमर्शियल LPG पर निर्भरता बहुत अधिक है और इसकी कमी से शहर की खाद्य सेवा व्यवस्था ठप हो सकती है। केंद्र सरकार ने प्रभावित निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये की राहत पैकेज की घोषणा की है और वैश्विक साझेदारों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है। यह संकट न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक में व्यवसायों, रोजगार और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राज्य सरकार आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन केंद्र से तत्काल समर्थन जरूरी है। अगर स्थिति सुधरती नहीं तो होटल, रेस्तरां और अन्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल से इस समस्या का जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।
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Mar 20, 2026, 09:12 AM
नितीश समृद्धि यात्राः चौथे चरण के समापन के बाद पांचवें चरण का कार्यक्रम जारी

नितीश समृद्धि यात्राः चौथे चरण के समापन के बाद पांचवें चरण का कार्यक्रम जारी

Nitish Samriddhi Yatra 5.0:बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के चौथे चरण की आज 20 मार्च(शुक्रवार) को समाप्ति हो गई। अंतिम दिन सीएम ने गया और औरंगाबाद जिलों में जाकर विकास कार्यों का जायजा लिया और विकास की कई योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया। समाप्ति के साथ ही समृद्धि यात्रा के पांचवें चरण का प्रोग्राम जारी कर दिया गया है। सीएम दो दिनों तक रेस्ट करने के बाद 23 मार्च से समृद्धि यात्रा 5.0 की शुरुआत करेंगे। जारी शेड्यूल के मुताबिक पांचवें चरण की समृद्धि यात्रा 23 मार्च से शुरू होकर 26 मार्च तक चलेगी। पहले दिन यानि 23 मार्च को वे जहानाबाद और अरवल जिलों का दौरा करेंगे। रात्रि विश्राम पटना में करेंगे। अगले दिन 24 मार्च को कैमूर और रोहतास में सीएम का दौरा होगा। 25 मार्च को भोजपुर और बक्सर की बारी है वहीं, 26 मार्च को वे अपने गृह जिला नालंदा जाएंगे और विकास कार्यों का मुआयना करेंगे। उसी दिन पटना में समृद्धि यात्रा का कार्यक्रम है। पटना से इसकी समाप्ति हो जाएगी। मुख्यमंत्री सभी जिलों में जन संवाद भी करेंगे। सभी जिलों के डीएम और एसपी को यात्रा का शेड्यूल भेज दिया गया है। सुरक्षा और अन्य प्रबंधों पर काम शुरू कर दिया गया है। चौथे चरण के अंतिम दिन नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा पर शुक्रवार को औरंगाबाद और गया पहुंचे। गया में सीएम ने 750 करोड़ लागतवाली 553 योजनाओं का उद्घाटन और 140 योजनाओं का शिलान्यास किया। इनमें मगध दुग्ध उत्पादक सरकारी संघ लि. गया डेयरी- चार लाख 68 हजार, जल संसाधन विभाग 88 करोड़ 12 लाख, एलएईओ-01 29 करोड़ 64 लाख, कृषि भूमि संरक्षण विभाग एक करोड़ 69 लाख, लघु जल संसाधन विभाग 109 करोड़ 75 लाख बुडको 37 करोड़ 05 लाख, पथ प्रमंडल-1, गया 81 करोड़ 34 लाख, स्वास्थ्य विभाग 14 करोड़ 70 लाख, भवन निर्माण विभाग 65 करोड़ 50 लाख, ग्रामीण विकास विभाग 18 करोड़ 54 लाख, पंचायती राज (जिला परिषद) 24 करोड़ 36 लाख, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, गया 13 करोड़, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लि. गया 13 करोड़ 57 लाख, बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कं. लिमिटेड 18 करोड़ 29 लाख, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम 80 करोड़ 20 लाख, एलएईओ-02 04 करोड़ 90 लाख, पथ प्रमंडल, शेरघाटी, गया 142 करोड़ 80 लाख की योजनाएं शामिल हैंं। मायापुर में जनसभा को संबोधित किया। औरंगाबाद में मुख्यमंत्री दोपहर 1 बजे शहीद भगत सिंह स्टेडियम स्थित हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर से पहुंचे। यहां से सड़क मार्ग से निकलकर जल जीवन हरियाली अभियान अंतर्गत टर्न की के आधार पर औरंगाबाद, डेहरी तथा सासाराम के लिए पेयजल उपलब्ध कराने के कार्य से संबंधित कार्य स्थल का निरीक्षण किया। यह कार्य स्थल बारूण नगर पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर 3 में है। वहां कार्य प्रगति का निरीक्षण करने के बाद कार्य स्थल पर ही प्रगति यात्रा की घोषणा से संबंधित परियोजनाओं की प्रस्तुति दी गई। मुंशी बिगहा सभा स्थल पर विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन किया गया। इसके अलावा विभिन्न विभागों के द्वारा कार्यान्वित योजनाओं से संबंधित स्टॉल का निरीक्षण भी मुख्यमंत्री ने किया। दोपहर 2 बजे मुंशी बिगहा सभा स्थल पर समीक्षा बैठक और जनसंवाद का कार्यक्रम में संबोधित किया।
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Mar 20, 2026, 08:51 AM
ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने शीर्ष नेताओं को खोने के बाद इजरायल और अमेरिका के खिलाफ धमकी जारी की

ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने शीर्ष नेताओं को खोने के बाद इजरायल और अमेरिका के खिलाफ धमकी जारी की

अमेरिकी और इजरायली हमलों में अपने एक के बाद कई शीर्ष नेताओं को खोने के बाद के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इजरायल और अमेरिका के नाम नई धमकी जारी कर दी है। देशवासियों के नाम नए संदेश में ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा ने देश के दुश्मनों की 'सुरक्षा' छीन लिए जाने का आह्वान किया है। खामेनेई ने यह टिप्पणी इजरायली हमले में खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब की मौत के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को भेजे गए एक बयान में की है। ईरानी सुप्रीम लीडर ने अपने बयान में कहा, “दुश्मनों की सुरक्षा छीन ली जानी चाहिए।” इससे पहले इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने ईरानी खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को मार गिराने की घोषणा की थी। गौरतलब है कि ईरान ने बीते 3 सप्ताह से जारी युद्ध में अपने कई शीर्ष नेताओं को खो दिया है, जिनमें ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के साथ साथ सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी, और बासिज प्रमुख गुलाम रजा सुलेमानी के नाम भी शामिल हैं। वहीं इजरायल ने गुरुवार को ईरान को नया जख्म दे दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' ने शुक्रवार को बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता, ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नईनी इजरायली हमलों में मारे गए। इसके बाद ईरान का खाड़ी देशों पर हमले की तीव्रता बढ़ाना तय है। इससे पहले ईरान ने गुरुवार को खाड़ी देशों में तेल और गैस के प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ा दिए हैं और युद्ध की स्थिति गंभीर होती जा रही है। ईरानी हमले में संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक जहाज में आग लगा दी गई और कतर के पास एक अन्य जहाज क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं एक ईरानी ड्रोन से लाल सागर में स्थित सऊदी अरब की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। इसके बाद कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के हमलों की निंदा की है। अरब लीग के महासचिव अहमद अबूल घीत ने इसे खतरनाक तरीके से उकसावे वाला बताया।
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Mar 20, 2026, 08:35 AM
मतदाता सूची में नाम न होने के कारण वीना नायर का राजनीतिक पदार्पण रुका

मतदाता सूची में नाम न होने के कारण वीना नायर का राजनीतिक पदार्पण रुका

तिरुवंतपुरम: केरल में 9 अप्रैल विधानसभा चुनावों के लिए वोट डाले जाएंगे। इसके लिए सत्तारूढ़ एलडीएफ, विपक्षी गठबंधन यूडीएफ के साथ बीजेपी ने अपने तमाम कैंडिडेट के नाम घोषित कर दिए हैं लेकिन इस सब के बीच केरल में Twenty20 पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने चुनावों में ग्लैमर का तड़का लगाने की प्लानिंग की थी। लेकिन एक्ट्रेस लक्ष्मी प्रिया के बाद अब मलयालयम फिल्मों की अभिनेत्री वीना नायर भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगी, क्योंकि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। वीना नायर ने Twenty20 पार्टी से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। वह मलयालम फिल्म और टेलीविजन उद्योग की लोकप्रिय अभिनेत्री मुख्य रूप से कॉमेडी और चरित्र भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं। उनका नाम मतदाता सूची से गायब होने पर फैंस में निराशा फैल गई है।एक्ट्रेस ने चुन ली थी सीटएक्ट्रेस वीना नायर ने राजनीति में कदम रखने के लिए पूरी तैयारी कर ली थी। वह एट्टुमानूर से चुनाव लड़ना चाहती थीं लेकिन जब अधिकारियों को पता चला कि वोटर लिस्ट से उनका नाम गायब है। मौजूदा चुनावी नियमों के तहत, नाम न होने की वजह से वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गईं। यह मामला तब सामने आया जब Twenty20 समर्थित उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल करने की तैयारी कर रही थीं। इसके बाद चुनाव अधिकारियों और राजनीतिक जानकारों ने तुरंत इसकी जांच शुरू कर दी। इस घटना से Twenty20 को एक बड़ा झटका लगा है। यह एक कॉर्पोरेट-समर्थित राजनीतिक संगठन है, जो किझक्कम्बलम में अपने स्थापित आधार से बाहर भी अपना विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। वीना के रेस से बाहर होने के बाद Twenty20 को दोहरा झटका लगा है। लक्ष्मी प्रिया पेरुम्बावूर सीट से लड़ना चाहती थीं।सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फालोइंगवीना नायर की सोशल मीडिया पर तगड़ी फैन फालाेइंग है। वीना नायर ने पार्टी नेतृत्व को बताया था कि उन्होंने चंगनास्सेरी में एक वोटर के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाया हुआ है। वीना रियलिटी शो 'बिग बॉस मलयालम' के दूसरे सीजन में अपनी भागीदारी के लिए भी चर्चित रही हैं। फेसबुक पर वीना नायर के आठ लाख से अधिक फॉलोअर हैं, जबकि इंस्टाग्राम भी वह काफी सक्रिय हैं। यहां भी उनके ढ़ाई लाख से अधिक फॉलोअर हैं। 21 मई, 1989 को जन्मीं वीना नायर काेयाट्‌टम से ताल्लुक रखती हैं। वह 2014 में विवाद बंधन में बंधी थीं। वीना नायर से पहले केरल की अभिनेत्री लक्ष्मी प्रिया को भी झटका लगा था। उनका नाम भी वोट लिस्ट में नहीं मिला था।
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Mar 20, 2026, 08:33 AM
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने पुष्कर सिंह धामी को फिर से मुख्यमंत्री चुना

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने पुष्कर सिंह धामी को फिर से मुख्यमंत्री चुना

उत्तराखंड में धामी सरकार के पांचवें वर्ष में मंत्रिमंडल विस्तार से यह स्पष्ट हो गया है कि बीजेपी ने अगले साल होने वाली विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पुनर्निर्वाचन कर संकेत दे दिया है कि पार्टी प्रयोग करने के मूड में नहीं है। पार्टी ने उन्हीं के नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल विस्तार किया। पुष्कर धामी के नेतृत्व वाली सरकार अपने अंतिम साल में प्रवेश कर रही है। मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की राजनीति में आमतौर पर देखे जाने वाले नेतृत्व परिवर्तन के चलन को दरकिनार करते हुए उत्तराखंड में पहली बार मुख्यमंत्री का पुनर्निर्वाचन किया। पार्टी के इस कदम से लोगों को निरंतरता और स्थिरता का सशक्त संदेश मिला। धामी कैबिनेट के इस महत्वपूर्ण विस्तार के साथ बीजेपी सरकार ने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक विचारों के बीच संतुलन बनाने का भी प्रयास किया है। शपथ लेने वाले मंत्रियों में 2 ठाकुर, 1 ब्राह्मण, एक पंजाबी और एक एससी हैं। शपथ ग्रहण करने वाले नेताओं में भीमताल से राम सिंह कैड़ा, राजपुर रोड (देहरादून) से खजान दास, रुड़की से प्रदीप बत्रा, रुद्रप्रयाग से भरत सिंह चौधरी और हरिद्वार से मदन कौशिक शामिल हैं। नए मंत्रियों में खजान दास अनुसूचित जाति से हैं। बाकियों की बात करें तो पंजाबी समाज से प्रदीप बत्रा, ब्राह्मण वर्ग से मदन कौशिक, जबकि ठाकुर समाज से राम सिंह कैड़ा और भरत चौधरी को मंत्री बनाया गया है। इनके अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक क्षमता से न केवल मंत्रिमंडल को मजबूती मिलेगी, बल्कि धामी सरकार की विकास की प्राथमिकताओं को भी गति मिलेगी। यह मंत्रिमंडल विस्तार एक सशक्त राजनीतिक संदेश भी है जो नेतृत्व में विश्वास, संगठन के भीतर संतुलन और भविष्य के लिए एक स्पष्ट रणनीति को दर्शाता है। शायद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धामी ने न केवल राज्य में अपनी स्थिति मजबूत की है, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व का पूरा विश्वास भी हासिल कर लिया है। यह मंत्रिमंडल विस्तार यह स्पष्ट संकेत भी देता है कि उत्तराखंड में नेतृत्व के मामले में भाजपा अब प्रयोग करने के मूड में नहीं है। धामी न केवल वर्तमान मुख्यमंत्री हैं बल्कि भविष्य की राजनीति के केंद्रबिंदु के रूप में उभरे हैं। यही कारण है कि भाजपा संभवतः 2027 के विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ेगी। यह उत्तराखंड की राजनीति में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है, जहां अस्थिरता की जगह स्थिरता आई है और परंपरा की जगह प्रदर्शन ने ले ली है। अब सरकार के अंतिम साल में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि यह प्रशासन पारंपरिक राजनीतिक तौर-तरीकों के बजाय विश्वास और प्रदर्शन के आधार पर कार्य करता है।
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Mar 20, 2026, 08:26 AM
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर लक्षित हमलों में आई. आर. जी. सी. के प्रवक्ता की हत्या कर दी

अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर लक्षित हमलों में आई. आर. जी. सी. के प्रवक्ता की हत्या कर दी

Iran War Updates:मिडिल ईस्ट में अघोषित युद्ध जारी है। लगातार हमले हो रहे हैं। इस बीच बड़ी खबर ईरान की राजधानी तेहरान से आ रही है। ईरानी सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को पुष्टि की कि IRGC के मुख्य प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे टारगेट स्ट्राइक में मारे गए हैं। IRGC ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य और आर्थिक संस्था है, जो सीधे सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करती है। आपको बता दें कि अली मोहम्मद नैनी की मौत इस सप्ताह ईरानी नेतृत्व के लिए चौथा सबसे बड़ा नुकसान है। पिछले कुछ दिनों में ईरान ने अपने तीन अन्य अत्यंत प्रभावशाली अधिकारियों को खो दिया है। पूर्व संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ सलाहकार अली लारीजानी, 'बासिज' स्वयंसेवी बल के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी और ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब की जान इन हमलों में जा चुकी है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान के रणनीतिक ठिकानों और नेतृत्व को लगातार निशाना बना रही हैं। इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि ईरानी नौसेना के दर्जनों जहाज और माइन-लेयर्स को नष्ट कर दिया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई ने कमान संभाली है, लेकिन उनके भी घायल होने की खबरें आ रही हैं। इसके कारण ईरान की सत्ता की शून्यता का खतरा बढ़ गया है। इस सबके बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने देशवासियों के नाम नए संदेश में अपने देश के दुश्मनों की ''सुरक्षा'' छीन लिए जाने का शुक्रवार को आह्वान किया। खामेनेई ने इजराइल के हमले में खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब की मौत के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को भेजे गए एक बयान में यह टिप्पणी की। खामेनेई को सर्वोच्च नेता नामित किए जाने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा नहीं गया है। युद्ध के पहले दिन 28 फरवरी को अमेरिका एवं इजराइल के हवाई हमले में सर्वोच्च नेता एवं मुजतबा खामेनेई के पिता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। मुजतबा खामेनेई को अली खामेनेई के मारे जाने के बाद सर्वोच्च नेता बनाया गया। आपको बता दें कि IRGC न केवल ईरान की प्राथमिक सैन्य शक्ति है, बल्कि यह क्षेत्र में हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों के साथ समन्वय का मुख्य केंद्र भी है। प्रवक्ता नैनी की मौत से ईरान के प्रचार तंत्र और आधिकारिक संवाद को बड़ा धक्का लगा है।
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Mar 20, 2026, 08:24 AM
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए दिग्विजय सिंह को मैदान में उतार सकती है कांग्रेस

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए दिग्विजय सिंह को मैदान में उतार सकती है कांग्रेस

राज्यसभा चुनाव के लिए दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश से कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं. यह सभावना कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जताई है. उन्होंने कहा कि मुझे छोड़कर कोई भी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार हो सकता है, मैं खुद राज्यसभा नहीं जाऊंगा. उन्होंने कहा- दिग्विजय सिंह उम्मीदवार हो सकते है, यह निर्णय पार्टी हाईकमान को लेना है.इसके अलावा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पास होगी. उन्होंने कहा कि हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है, यह देश के लिए गंभीर संकट का विषय है. भाजपा सभी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सोच राजतंत्र जैसी है, लेकिन कांग्रेस को चिंतित होने की जरूरत नहीं है. पटवारी ने कहा कि जैसे हर बार कांग्रेस मजबूत होकर आगे बढ़ी है, वैसे ही इस बार भी राज्यसभा चुनाव में पार्टी पास होगी.Indore Fire: घर जला... 'चिराग' बुझा, इंदौर आग में मां के साथ अजन्मे बच्चे की भी मौत, गर्भवती थी पुगलिया परिवार की बहू सिमरनतीसरी बार नहीं जाना चाहते दिग्विजय सिंहबता दें कि इससे पहले खुद दिग्विजय सिंह राज्यसभा नहीं जाने की बात कह चुके हैं. उन्होंने कहा था कि 'कांग्रेस नेतृत्व से यह अनुरोध किया है कि राज्यसभा का उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें तीसरी बार उम्मीदवार नहीं बनाया जाए. राजनीति से संन्यास के फैसले पर उन्होंने कहा था कि इस तरह की चर्चा होती रहती है, आप जानते हैं कि यह कहां से आती है. बात इतनी ही है कि मैं तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाना चाहता.''सिंधिया परिवार निगम का कर्जदार, 33.32 लाख का कर बकाया, 'माधवराव' के जन्मदिन पर आई सूची ने बढ़ाई हलचल
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Mar 20, 2026, 08:18 AM
गुजरात सरकार ने संशोधित बिजली खरीद समझौते को मंजूरी दी, टाटा पावर के शेयर की कीमत बढ़ी

गुजरात सरकार ने संशोधित बिजली खरीद समझौते को मंजूरी दी, टाटा पावर के शेयर की कीमत बढ़ी

Tata Power Share Price:शेयर बाजार में टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा पावर के स्टॉक का भाव 52 वीक हाई पर पहुंच गया। कंपनी के शेयरों की कीमतों में आज 5 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। टाटा पावर के शेयरों की कीमतों में इस उछाल के पीछे की वजह गुजरात सरकार से जुड़ी एक खबर है। रिपोर्ट्स के अनुसार गुजरात सरकार ने संशोधित पावर परेचज एग्रीमेंट को मंजूरी दे दी। इस आदेश के बाद अब टाटा पावर 4 गीगावाट की मुंद्रा फैसिलिटी से लॉन्ग टर्म सप्लाई फिर से शुरू कर सकेगी। इस मुंद्रा फैसिलिटी के बंद होने के वजह से टाटा पावर को 1000 करोड़ रुपये का घाटा वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीने में हुआ है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार आयात किए हुए कोयेल से चलने वाला पावर प्लांट पिछले 6 महीने से बंद पड़ा है। इसकी वजह से सरकार का फैसला है। बीते साल सरकार ने इमरजेंसी क्लॉज को वापस ले लिया था, जिसके अनुसार कंपनियों को ऊंची दरों पर इंपोर्ट किए हुए कोयले पर बिजली बनाने के लिए मुआवजा दिया जाता था। सीएनबीसी टीवी18 को दिए टाटा पावर के सीईओ और एमडी प्रवीर सिन्हा ने कहा कि मुंद्रा के लिए मिली मंजूरी एक अतिरिक्त पावर परजेज़ एग्रीमेंट से जुड़ी है। सीईओ ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इसका पालन हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र भी करेंगे। ब्रोकरेज हाउस आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस PPA के डीटेल्स का इंतजार है। लेकिन उम्मीद है कि इसकी वजह से 700 से 800 करोड़ रुपये का फायदा होगा। वहीं, अगर अन्य राज्य भी इसी मॉडल की मंजूरी दे देते हैं तो प्रत्येक वर्ष 1200 करोड़ रुपये से 1400 करोड़ की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बीएसई में आज शुक्रवार को टाटा पावर के शेयरों का भाव 402 रुपये के लेवल पर खुला था। दिन में टाटा पावर के शेयरों का भाव 5 प्रतिशत की तेजी के साथ 418.40 रुपये के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया था। यह कंपनी का बीएसई में 52 वीक हाई है। बता दें, टाटा पावर का 52 वीक लो लेवल 332.10 रुपये है। बीते एक साल में टाटा पावर के शेयरों की कीमतों में 9.95 प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं, तीन साल में इस स्टॉक का भाव 100 प्रतिशत बढ़ा है। (यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)
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Mar 20, 2026, 08:12 AM
मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने नौसेना की उपस्थिति बढ़ाई

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने नौसेना की उपस्थिति बढ़ाई

नई दिल्ली:मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात अब इतने गंभीर हो चुके हैं कि टकराव का दायरा स्टेट ऑफ होर्मूज से आगे बढ़कर ओमान की खाड़ी तक फैल गया है. बदलते भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए भारतीय नौसेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है. तेल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे, इसके लिए नौसेना ने स्टेट ऑफ होर्मूज से लेकर ओमान की खाड़ी तक अपने युद्धपोतों की तैनाती को और मजबूत कर दिया है. हालांकि, भारतीय युद्धपोत इस क्षेत्र में पहले से ही लगातार पेट्रोलिंग करते रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए निगरानी और सुरक्षा उपायों को और तेज कर दिया गया है.स्टेट ऑफ होर्मूज में संकट बढ़ने के बाद इस इलाके में नौसेना के तीन युद्धपोत की मौजूदगी देखी गई, जो होर्मूज के बाद भारतीय झंडा वाले जहाजों को आगे तक सुरक्षित जाने में एस्कार्ट करते थे. अब एनडीटीवी को जानकारी मिली है कि अब इस इलाके नौसेना के कम से 6 से 8 युद्धपोत मौजूद है, जो यह सुनिश्चित कर रहे है कि भारतीय तेल टैंकर और कार्गो जहाज पर कोई हमला न हो.इसकी बड़ी वजह है कि भारत किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नही हैं. इस जंग में वह न तो अमेरिका और इजरायल के साथ खड़ा दिखना चाहता है और न ही ईरान की तरफ. ऐसे में भारत की कोशिश है कि उसके एलपीजी और क्रूड ऑयल खाड़ी देशों से होकर सुरक्षित आ जाए. इसके लिए वह युद्धपोत के साथ-साथ ड्रोन और निगरानी विमान का भी इस्तेमाल कर रहा है. ताकि आने वाले खतरे को टाला जा सके. इस इलाके में अतिरिक्त युद्धपोतों की तैनाती भी एहतियात के तौर पर उठाया गया कदम है.सूत्रों की मानें तो पहले यहां 3 युद्धपोत तैनात थे. वहीं, अब उनकी तादाद बढ़ाकर 6 से 8 कर दी गई है. इसमें डिस्ट्रायर से लेकर फ्रिगेट भी शामिल है. इन युद्धपोतों को अपने रडार, सैटेलाइट और अन्य निगरानी सिस्टम से लगातार जानकारी मिलती रहती है. ये युद्धपोत हर तरह के हथियार से लैस है.ब्रह्मोस से लेकर बराक मिसाइल के अलावा ये टारपीडो और गन के साथ 24 घंटे तैनात रहते है. ये होर्मूज के बाहर से उत्तर पश्चिम अरब सागर के खतरनाक इलाकों में जहाजों को एस्कार्ट कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. एक और बड़ी वजह यह भी है कि नौसेना अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिये अकेले ऑपरेशन चला रही है. इस वजह से वह कोई रिस्क लेने के मूड में नही है.हालांकि, नौसेना के सूत्रों का यह भी कहना है कि नौसेना के युद्धपोतों की इस इलाके में तैनाती 2019 से ही है. नौसेना अपने युद्धपोतों की मिशन बेस्ड तैनाती करती रहती है. नौसेना ने एंटी पायरेसी के खिलाफ रेड सी में भी अपने युद्धपोत 2018 से ही तैनात कर रखे है. वहीं, ओमान की खाड़ी में भी भारत ने 2019 से ही अपने युद्धपोत तैनात किए है, जो इलाके में भारतीय व्यापारिक जहाजों की निगरानी और सुरक्षा में लगे है. पहले भी ऑपरेशन संकल्प के तहत 14 दिसंबर 2023 से 23 मार्च तक समुद्री सुरक्षा अभियान के तहत अदन की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक ऑपरेशन चलाया था. एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक होर्मूज स्टेट के पूरब में ओमान की खाड़ी के पास नौसेना के ज्यादा युद्धपोतों की तैनाती है. नौसेना की निगरानी में अब तक तीन भारतीय जहाज आ चुके है पर अभी भी करीब दो दर्जन जहाज फंसे हुए है.20 दिन से जारी इस जंग में भारत के जहां इजरायल से सामरिक तौर पर मजबूत रिश्ते है वही ईरान के साथ भी पुराने रणनीतिक संबंध हैं. भारत किसी के साथ रिश्ते दांव पर लगाना नहीं चाहता है. यही वजह है कि ईरान और इजरायल दोनों भारत को अपना दोस्त बताते है.ये भी पढ़ें :IDF ने पहली बार कैस्पियन सागर में ईरानी नौसेना के मिसाइल लगे जहाजों को बनाया निशाना
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Mar 20, 2026, 08:10 AM
भाजपा के रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा ने धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली

भाजपा के रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा ने धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली

विस्तारAdd as a preferredsource on googleकांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने के बाद रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा की किस्मत खुली। शुक्रवार को पांच मंत्रियों के साथ उन्होंने धामी कैबिनेट में मंत्रिमंडल की शपथ ली। बत्रा ने 2007 में पहली बार रुड़की नगर पालिका चुनाव जीता।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंरुड़की विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस के टिकट से विधायक बनने के बाद 2022 में भाजपा में शामिल हुए प्रदीप बत्रा पहली बार कैबिनेट मंत्री बने हैं।ये भी पढे़ं...धामी कैबिनेट में नए मंत्री: रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी को मिली जगह, ग्राम प्रधान से मंत्री तक ऐसा रहा सफरविज्ञापनविज्ञापनबत्रा 2012 के चुनाव में पहली बार कांग्रेस के टिकट से विधायक बने। इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए और 2017 में भाजपा विधायक चुने गए। 2022 में तीसरी बार विधायक बने। पहली बार हरिद्वार को दो कैबिनेट मंत्री मिले। अब कैबिनेट में गढ़वाल के आठ और कुमाऊं के चार मंत्री हैं। तीन विधायक पहली बार कैबिनेट मंत्री बने। दो पुराने मंत्रियों को भी मौका दिया गया।
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Mar 20, 2026, 07:41 AM
मंत्रिमंडल विस्तार से तराई की राजनीतिक उम्मीदें प्रभावित

मंत्रिमंडल विस्तार से तराई की राजनीतिक उम्मीदें प्रभावित

विस्तारAdd as a preferredsource on googleकैबिनेट विस्तार में तराई की राजनीतिक उम्मीदों को झटका लगा है। पांच नए मंत्रियों के नामों की घोषणा के बावजूद तराई क्षेत्र से किसी भी नए विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। पहले से शामिल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सौरभ बहुगुणा के अलावा इस बार तराई की सियासी जमीन सूखी रह गई।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंनौ सीटों वाले जिले में भाजपा के चार विधायकऊधम सिंह नगर कुमाऊं में सबसे अधिक नौ विधानसभा सीटों वाला जिला है। जहां भाजपा के चार विधायक हैं। इनमें रुद्रपुर से शिव अरोरा, सितारगंज से सौरभ बहुगुणा, गदरपुर से अरविंद पांडेय और काशीपुर से त्रिलोक सिंह चीमा शामिल हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास गृह, वित्त, राजस्व, कार्मिक, सतर्कता, सूचना, नीति एवं योजना, औद्योगिक विकास, श्रम, ऊर्जा, पेयजल, पर्यावरण, नागरिक उड्डयन, और आपदा प्रबंधन सहित 23 से अधिक विभाग हैं। सौरभ बहुगुणा पशुपालन, मत्स्य पालन, कौशल विकास और रोजगार, प्रोटोकॉल और गन्ना विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री हैं। उम्मीद की जा रही थी कि इस विस्तार में तराई से किसी अन्य विधायक को भी मंत्री पद से नवाजा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।विज्ञापनविज्ञापनसियासी टकराव बना पांडेय के मंत्रीमंडल में जगह न पाने की वजहगदरपुर के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडेय के मंत्रिमंडल में शामिल न होने के पीछे कई राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं। हाल ही में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में उनके खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई को एक प्रमुख वजह के तौर पर देखा जा रहा है। इस घटना के बाद पांडेय ने अपनी ही सरकार को घेरने का प्रयास किया था, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी देखी गई। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनसे मिलने के लिए गूलरभोज का दौरा भी किया था। इसके बाद, पांडेय ने देहरादून से लेकर दिल्ली तक अपनी पैरवी की। उनके समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और मदन कौशिक के यहां पहुंचने के कार्यक्रम भी तय हुए थे, लेकिन अंतिम क्षणों में इन कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया। यह घटनाक्रम पांडेय के मंत्रीमंडल में जगह न पाने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
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Mar 20, 2026, 07:38 AM
दो साल के कार्यकाल के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं पीएम मोदी

दो साल के कार्यकाल के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं पीएम मोदी

मुंबई:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष 9 जून को पूरे करेंगे। चर्चा है कि बीजेपी संगठन के चुनाव पूरे होने के बाद प्रधानमंत्री पांच राज्यों के चुनावों को मद्देनजर रखते हुए अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं। लंबे वक्त से मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा हो रही है। राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि महाराष्ट्र से अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। एनडीए के सहयोगी एनसीपी से अभी कोई मंत्री नहीं है। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि पीएम मोदी मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव हो सकता है।क्याें लग रही हैं मंत्री बनने की अटकलेंमहाराष्ट्र में सभी चुनाव संपन्न हो चुके हैं। अगले महीने बारामती और राहुरी विधानसभा सीट के भी चुनाव हो जाएंगे। अजित पवार की मौत के बाद उनकी पत्नीसुनेत्रा पवार एनसीपी अध्यक्ष के साथ DCM की कुर्सीसंभाल चुकी हैं। ऐसे में चर्चा है कि मुश्किल वक्त में पार्टी के लिए स्तंभ बने प्रफुल्ल पटेल का इंतजार खत्म हो सकता है। उधर, शिवसेना के कोटे से श्रीकांत शिंदे का नाम चर्चा में है। अगर शिंदे अपने बेटे को मंत्री नहीं बनाते हैं तो दूसरा नाम श्रीरंग बारणे का हो सकता है। बारणे मावल से सांसद हैं। हाल ही में एकनाथ शिंदे ने दिल्ली दौरे में पीएम मोदी से खास मुलाकात की थी। यह भी दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से तोड़फोड़ हो सकती है।'ऑपरेशन टाइगर' की राज्य में चर्चाराजनीतिक हलकों में यह दावा यह भी किया जा रहा है शिंदे गुट अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिएउद्धव ठाकरे गुट के सांसदों में सेंध लगाने की तैयारीकर रहा है। इसके चलते राज्य में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा हो रही है। शिंदे की कोशिश ज्यादा से ज्यादा सांसदों को साथ लेकर केंद्र में अपना वजन बढ़ाने की हो सकती है। अभी बुलढाणा से आने वाले प्रतापराव जाधव केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। उनका प्रमोशन हो सकता है। पार्टी को एक राज्यमंत्री की बर्थ और मिल सकती है। अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के विलय होने की चर्चा काफी जोरों पर हुई थी लेकिन प्रफुल्ल पटेल ने नाजुक वक्त पर भी एनसीपी को एनडीए में बनाए रखा। ऐसी संभावना है कि अब उनकी मोदी सरकार में एंट्री हो सकती है। यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगर उथल-पुथल हुई तो उद्धव ठाकरे के साथ शरद पवार की एनसीपी को कुछ सांसद खाेने पड़ सकते हैं।
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Mar 20, 2026, 07:30 AM
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ महिला की शिकायत खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ महिला की शिकायत खारिज की

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने महिला से कहा है कि अपनी लड़ाई कोर्ट में न लड़ें। साथ ही कहा है कि इस केस को उच्च न्यायालय में लेकर जाएं। महिला की तरफ से मांग की जा रही थी कि उन्हें सुरक्षा दी जाए। उन्होंने आरोप लगाए थे वह कर्नाटक से बाहर रहने के लिए मजबूर हैं। बार एंड बेंच के अनुसार, महिला की तरफ से कोर्ट पहुंचे वकील ने कहा, 'मुझे धमकियां मिल रहीं हैं। मैं कर्नाटक में प्रवेश नहीं कर पा रहीं हूं। मेरी सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। मैं दिल्ली में रहने के लिए मजबूर हूं। मुझे बार-बार धमकियां मिल रहीं हैं।' उन्होंने कहा कि वह कर्नाटक में अपने ही घर में रहना चाहती हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहीं हैं। उन्होंने संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। वकील ने कहा, 'मैं वापस जाना चाहती हूं और अपने आवास में रहना चाहती हूं। मैंने शिकायतें दर्ज कराईं हैं, अपने पक्ष में कोर्ट के आदेश भी हासिल किए हैं, लेकिन इसके बाद भी धमकियां दी जा रहीं हैं। मेरे घर पर पत्थरबाजी हुई, गुंडे आए थे और तोड़फोड़ करके गए हैं। वो मेरी संपत्ति को हथियाना चाहते हैं।' कोर्ट ने कहा, 'कर्नाटक के मुख्यमंत्री आपके पीछे लोगों को दिल्ली भेज रहे हैं?' कोर्ट ने कहा, 'आप भी राजनेता हैं। आप अपनी लड़ाइयां कोर्ट में न लड़ें।' इसपर वकील ने जवाब दिया, 'मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं।' सुप्रीम कोर्ट ने महिला को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है। वकील ने मांग की, 'कम से कम मेरी सुरक्षा की जाए।' इसपर कोर्ट ने अगले केस को सुनवाई के लिए बुलाया। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म 'कहानी 2' को लेकर फिल्मकार सुजॉय घोष के खिलाफ कथित कॉपीराइट उल्लंघन के एक मामले में झारखंड की एक अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही को शुक्रवार को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने घोष की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें झारखंड उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने घोष के खिलाफ लंबित कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने घोष की याचिका स्वीकार करते हुए कहा, 'मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा सात जून, 2018 को पारित समन आदेश और उच्च न्यायालय द्वारा 22 अप्रैल, 2025 को पारित आदेश को रद्द किया जाता है तथा निरस्त किया जाता है।'
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Mar 20, 2026, 07:19 AM
नेतन्याहू ने ईरान संघर्ष में अमेरिका पर इजरायल के दबाव को नकारा

नेतन्याहू ने ईरान संघर्ष में अमेरिका पर इजरायल के दबाव को नकारा

ईरान और इजरायल के बीच तेज होती जंग के बीच एक नया विवाद सामने आया है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ युद्ध में धकेला या फिर अमेरिका पहले से ही इस टकराव के लिए तैयार था. ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा है कि इजरायल ने अमेरिका पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का दबाव बनाया. उन्‍होंने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को लेकर कहा कि ट्रंप अपने फैसले खुद लेते हैं, हमने उन्हें जबरदस्ती युद्ध में नहीं धकेला है.इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू गुरुवार की रात को एक बार फिर सबके सामने आए. इस बार नेतन्‍याहू ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की और ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर अपनी बात रखी. इस दौरान उन्‍होंने कहा कि ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन या बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की क्षमता नहीं है. साथ ही अमेरिका को युद्ध में घसीटने के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया.ये भी पढ़ें: 'ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता', अटकलों के बीच Live आए इजरायली PM नेतन्याहू बोले- अभी मैं जिंदा हूंकोई ट्रंप को बता सकता है कि क्‍या करना है?: नेतन्‍याहूनेतन्‍याहू ने कहा कि मैं एक फेक न्यूज को खत्म करना चाहता हूं और वो ये है कि इजरायल ने किसी तरह अमेरिका को ईरान के साथ लड़ाई में घसीटा. नेतन्‍याहू ने कहा कि क्या कोई सच में समझता है कि कोई प्रेसिडेंट ट्रंप को बता सकता है कि क्या करना है?अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि उन्हें दक्षिण पार्स पर इजरायल के हमले की पूर्व सूचना नहीं थी, जो ईरान की घरेलू जरूरतों का करीब 70 फीसदी आपूर्ति करता है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू को कहा कि वे ईरानी गैस क्षेत्रों पर दोबारा हमला न करें.हालांकि नेतन्‍याहू ने जोर देकर कहा कि इजरायल ने ईरान के असलूयेह शहर के नजदीक दक्षिण पार्स इलाके में हमला अकेले ही किया.ये भी पढ़ें: ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड, कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमले, ट्रंप ने दी धमकी, कतर का भी गुस्‍सा फूटावो ऐसा कुछ कर बैठते हैं कि... : डोनाल्‍ड ट्रंपअमेरिकी राष्‍ट्रपति ने इजरायल और अमेरिका के संबंधों को लेकर कहा कि हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं. यह कॉर्डिनेटेड है, लेकिन कभी-कभी वह कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिसका अमेरिका विरोध करता है.साउथ पार्स दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस क्षेत्र का हिस्सा है, जो 9,700 वर्ग किलोमीटर के विशाल इलाके में फैला हुआ है और ईरान और कतर के बीच है. यह ईरान के तटीय शहर असलूयेह के पास स्थित है.ईरान जंग को लेकर नेतन्याहू ने गिनाए अपने 3 लक्ष्यइसके साथ ही नेतन्याहू ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि हम शेरों के समान हैं. हम शेरनियों के समान भी हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि हमारा ध्यान तीन लक्ष्यों पर केंद्रित है-ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कुचलना.ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कुचलना.ऐसी परिस्थितियां बनाना जिससे ईरान की जनता अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथों में ले सके.
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Mar 20, 2026, 07:15 AM
बिहार पंचायत चुनाव 2026: नवंबर-दिसंबर चुनाव की तैयारी जारी

बिहार पंचायत चुनाव 2026: नवंबर-दिसंबर चुनाव की तैयारी जारी

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Panchayat Election 2026 :बिहार में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। संभावना है कि यह चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराए जाएंगे। इस बार चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार मल्टी पोस्ट ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा।
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Mar 20, 2026, 07:06 AM
कनाडा ने भारत के खिलाफ आरोपों को खारिज किया, संबंधों में सुधार किया

कनाडा ने भारत के खिलाफ आरोपों को खारिज किया, संबंधों में सुधार किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleIndia-Canada Relations:कनाडा और भारत के बीच लंबे समय से चली आ रही तल्खी अब पूरी तरह खत्म होती नजर आ रही है। हाल ही में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के बाद अब कनाडा की सुरक्षा एजेंसी 'रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस' के कमिश्नर का एक बड़ा बयान सामने आया है। इसे अब भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंपिघल चुकी है भारत-कनाडा के रिश्तों में जमी बर्फभारत और कनाडा के रिश्तों में जमी बर्फ अब पूरी तरह पिघल चुकी है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सफल भारत यात्रा के ठीक बाद अब कनाडा की राष्ट्रीय पुलिस सेवा ने भारत पर लगे गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस कमिश्नर माइक डुहेम ने साफ-साफ कहा है कि वर्तमान में कनाडा में रहने वाले लोगों को भारत सरकार के किसी भी एजेंट से कोई खतरा नहीं है।विज्ञापनविज्ञापनपुलिस कमिश्नर माइक डुहेम ने कहा कि अभी हमारे पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जो किसी भी विदेशी संस्था की भूमिका का प्रमाण देता हो। संबंधित फाइलों में ऐसे कई लोगों के नाम हैं जो लोगों को डराने और परेशान करने में शामिल हैं। हालांकि, ये लोग किसी विदेशी संस्था या किसी देश से संबंधित हैं, इसका हमारे पास कोई सबूत नहीं है।कनाडाई अधिकारियों के अचानक बदले सुरएक समय था जब पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान कनाडा ने सीधे तौर पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के तार भारतीय एजेंसियों से जोड़े थे। लेकिन अब कमिश्नर माइक डुहेम के सुर बदले हुए हैं। अब उन्होंने कहा कि फिलहाल जो कड़ियां हमारे सामने हैं, वे किसी विदेशी संस्था या भारत सरकार से नहीं जुड़ रही हैं। उन्होंने यह भी माना कि 2024 में उन्होंने जो बयान दिए थे, वे उस समय की सीमित जांच पर आधारित थे, लेकिन आज की स्थिति और साक्ष्य बिल्कुल अलग हैं।यह भी पढ़ें:Exclusive: 'ईरान के पास दो-तीन साल तक जंग जारी रखने की ताकत...': सर्वोच्च नेता के भारत में विशेष प्रतिनिधिबिश्नोई गैंग और उगाही के सच पर बड़ा खुलासाकनाडा के सरे, ब्रैम्पटन और कैलगरी जैसे शहरों में पिछले काफी समय से हो रही उगाही की घटनाओं में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम उछाला जा रहा था। इस पर कमिश्नर ने कहा कि हर मामले को सीधे बिश्नोई गैंग से जोड़ना गलत है। कई अपराधी केवल खौफ पैदा करने के लिए इस नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह कि कनाडा के जांच एजेंसियों को ऐसे कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं जो इन आपराधिक गतिविधियों का संबंध भारत सरकार से जोड़ते हों।भारतीय राजनयिकों की कनाडा वापसी को लेकर पुलिस कमिश्नर ने आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर तरह की धमकी पर बारीकी से नजर रख रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना डरे पुलिस को रिपोर्ट करें। कनाडा की टॉप पुलिसिंग बॉडी का यह बयान इस बात की तस्दीक करता है कि दोनों देशों के रिश्तों में अब नया सवेरा हो चला है।
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Mar 20, 2026, 06:57 AM
पंजाब के शिरोमणि अकाली दल को अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत के बाद चुनौती का सामना करना पड़ रहा है

पंजाब के शिरोमणि अकाली दल को अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत के बाद चुनौती का सामना करना पड़ रहा है

विस्तारAdd as a preferredsource on googleसाल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनाव में पंजाब की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) गठबंधन के साथ ही चुनाव लड़ती आई है। इस दौरान शिअद गठबंधन ने तीन बार सूबे में सरकार भी बनाई।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंअब साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी गठबंधन चाहती है मगर मोगा रैली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत के बाद शिअद का भाजपा से गठबंधन का गणित गड़बड़ा गया है। इसके चलते पार्टी के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।विज्ञापनविज्ञापनपार्टी सूत्रों के अनुसार शिअद इस बार अपने पुराने सहयोगी दल भाजपा से गठबंधन करना चाहती थी। इसके लिए शिअद ने प्रयास भी किए थे। शिअद के वरिष्ठ नेता भी 2027 में जीत के लिए इस गठबंधन को दबी जुबान से जरूरी बता रहे थे मगर सूत्र बताते हैं कि मामला सीटों के बंटवारे और सीएम व डिप्टी सीएम के पद पर अटका हुआ है।शिअद भी फिलहाल झुकने को तैयार नहीं था और भाजपा भी। इसी बीच अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेतों के बाद शिअद अब नए समीकरणों की संभावनाओं को खंगालने में जुट गया है।वहीं शिअद से गठबंधन के मुद्दे पर भाजपा में भी दो धड़े हैं। वरिष्ठ नेताओं का एक धड़ा गठबंधन की पैरवी करता है तो दूसरा अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दम भरता है। शिअद को इस बात का आभास है कि पिछले कुछ समय से गिरते जा रहे पार्टी के ग्राफ को उठाने के लिए उन्हें एक मजबूत सहयोगी सियासी दल की जरूरत है।दलित वोट बैंक पर भी शिअद की नजरशिरोमणि अकाली दल पंथक मतदाताओं को अपना कोर वोट बैंक मानता है, इसके लिए वे पूरा जोर भी लगा रहा है। ग्रामीण अंचलों के मतदाताओं पर भी शिअद ने अपना फोकस बढ़ाया है।इसके अलावा शिअद की नजर दलित वोट बैंक पर भी है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में इसके लिए शिअद ने बहुजन समाज पार्टी से हाथ भी मिलाया था मगर इसका खास सियासी फायदा नहीं हुआ। शिअद इस बार भी बसपा को साथ लेकर चल सकता है।शिअद के लिए फायदेमंद रहा भाजपा से गठजोड़साल 2022 के विधानसभा चुनाव में शिअद ने बसपा से गठबंधन किया। शिअद को 3 व बसपा को 1 सीट मिली।साल 2017 में शिअद ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। शिअद को 15 व भाजपा को 3 सीटें मिलीं।साल 2012 का चुनाव शिअद ने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा। शिअद ने 56 और भाजपा ने 12 सीटें जीतकर सरकार बनाई।साल 2007 में भाजपा ही शिअद की सियासी साथ बनी। शिअद ने 48 और भाजपा ने 19 सीटों पर कब्जा जमाकर सत्ता पाई।साल 2002 के विधानसभा चुनाव के दौरान शिअद ने भाजपा के साथ-साथ डेमोक्रेटिक बहुजन समाज मोर्चा के साथ गठबंधन किया। शिअद को 41 व भाजपा को 3 सीटें मिलीं। मोर्चा का खाता तक नहीं खुला।साल 1997 के चुनाव में शिअद ने 75 सीटें और सहयोगी दल भाजपा ने 18 सीटें जीती और सरकार बनाई।
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Mar 20, 2026, 06:54 AM
पंचायत सीजन 5 की घोषणाः प्राइम वीडियो ने आगामी किश्त के लिए रिलीज की तारीख का खुलासा किया

पंचायत सीजन 5 की घोषणाः प्राइम वीडियो ने आगामी किश्त के लिए रिलीज की तारीख का खुलासा किया

प्राइम वीडियो ने लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत के पांचवें सीजन की आधिकारिक घोषणा कर दी है. यह नया सीजन 2026 में रिलीज होगा. फैंस के लिए यह खुशखबरी है, क्योंकि चौथा सीजन रिलीज होने के बाद रिकॉर्ड तोड़ व्यूज पाकर काफी लोकप्रिय हुआ था. सीरीज में मुख्य किरदार अभिषेक त्रिपाठी यानी सचिव जी के रूप में जीतेंद्र कुमार फिर से नजर आएंगे. नीना गुप्ता मंजू देवी (प्रधान जी) के किरदार में, रघुबीर यादव बृज भूषण दुबे (प्रधान पति) के रूप में, फैसल मलिक प्रह्लाद पांडे, चंदन रॉय विकास, सन्विका रिंकी और अन्य कलाकार भी वापस लौट रहे हैं. पूरी पुरानी टीम के साथ नया सीजन बन रहा है.ये भी पढ़ें:Dhurandhar 2 Spoiler: आदित्य धर ने इस एक्टर को चुपचाप बना डाला 'बड़े साहब', दानिश इकबाल को नहीं दी कोई जानकारीफुलेरा में फिर होगी राजनीतिकहानी फुलेरा गांव की ही रहेगी, जहां गांव की राजनीति, रोजमर्रा की जिंदगी और हास्य से भरे किस्से दिखाए जाते हैं. पिछले सीजन में अभिषेक ने अपना एमबीए का सपना देखा था और गांव में कई मुश्किलें आई थीं. अब पांचवें सीजन में अभिषेक एक नए और सख्त बॉस के नीचे काम करेगा, जो उससे बदला लेने की सोचता है. साथ ही वह अपने एमबीए के सपने को पूरा करने और फुलेरा के बाकी मामलों को निपटाने की कोशिश करेगा. फैंस को उम्मीद है कि सचिव जी और रिंकी की जोड़ी के रिश्ते में भी कुछ नया विकास होगा.View this post on InstagramA post shared by prime video IN (@primevideoin)पंचायत की शुरुआत 2020 में हुई थी. पहले सीजन ने लोगों का दिल जीता, फिर दूसरे, तीसरे और चौथे सीजन ने इसे और बड़ा बना दिया. चौथा सीजन जून 2025 में आया था, जो भारत और दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सीरीज बन गई. यह सीरीज टीवीएफ (द वायरल फीवर) द्वारा बनाई गई है, जिसमें दीपक कुमार मिश्रा क्रिएटर हैं और चंदन कुमार ने लेखन किया है.
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Mar 20, 2026, 06:52 AM
मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग-46 को दुर्घटनाओं और यातायात के दबाव को कम करने के लिए चार लेन का बनाने की मंजूरी दी गई

मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग-46 को दुर्घटनाओं और यातायात के दबाव को कम करने के लिए चार लेन का बनाने की मंजूरी दी गई

विस्तारAdd as a preferredsource on googleमध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बरेठा घाट से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के महत्वपूर्ण हिस्से को अब फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल गई है। यह वही इलाका है, जहां पिछले दो साल में सड़क हादसे हुए और 18 लोगों की जान चली गई। लगातार बढ़ते हादसों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस सड़क को चौड़ा और सुरक्षित बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह सड़क ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर लंबा एक अहम हाईवे है, जो पूरी तरह मध्यप्रदेश के अंदर आता है। यह राज्य के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाला बड़ा मार्ग है और भोपाल से नागपुर जाने वाले कॉरिडोर का भी हिस्सा है। इस पर ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, लेकिन बरेठा घाट समेत करीब 21 किलोमीटर का हिस्सा बाकी था।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंये भी पढ़ें-MP News: मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां शुरू, राज्य वित्त आयोग का गठन, जयपाल सिंह पवैया बने अध्यक्षविज्ञापनविज्ञापनहाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू होगा कामदरअसल, यह इलाका टाइगर कॉरिडोर में आता है, यानी यहां से जंगली जानवरों की आवाजाही होती है। इसी कारण 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़ी कई मंजूरियां लेनी पड़ीं। अब वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी अनुमति मिल चुकी है। जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटाने का अंतिम आदेश आएगा, निर्माण काम शुरू कर दिया जाएगा।ये भी पढ़ें-MP Weather Today: मध्य प्रदेश में मौसम ने बदली करवट, इन 34 जिलों में अलर्ट; ओले-बारिश और तेज आंधी का खतरासंकरी और घुमावदार सड़क, लगता है जामबरेठा घाट का यह हिस्सा अभी केवल दो लेन का है, जो बहुत संकरा और घुमावदार है। यहां भारी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। साथ ही, दो जगह ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां बार-बार हादसे होते हैं। कम चौड़ाई, तेज मोड़, ढलान और कम विजिबिलिटी इस रास्ते को और खतरनाक बनाते हैं।ये भी पढ़ें-MP News: जयपुर में शनिवार को उद्योगपतियों से संवाद, सीएम मोहन यादव मध्य प्रदेश में निवेश के अवसर बताएंगेब्लैक स्पॉट को ठीक करने भी बनाया प्लानपुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच यहां 51 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और करीब 62 लोग घायल हुए। कई छोटे हादसे तो रिकॉर्ड में भी नहीं आ पाते, जिससे असली स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब इस पूरे हिस्से को 4 लेन में बदला जाएगा, जिससे सड़क चौड़ी होगी और ट्रैफिक आसानी से चल सकेगा। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करने के लिए खास प्लान बनाया गया है। यहां 3 छोटे पुल (माइनर ब्रिज), 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे ट्रैफिक सुचारू होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।ये भी पढ़ें-MP Weather Today: MP में मौसम का यू-टर्न, कई जिलों में बारिश-ओलावृष्टि, फसलें बर्बाद, तापमान में आई गिरावटवन्य जीवों की सुरक्षा का ख्याल, बनेंगे 10 अंडरपास, 1 ओवरपाससबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जानवरों की आवाजाही के लिए 10 अंडरपास और 1 ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि वे बिना खतरे के सड़क पार कर सकें। इसके अलावा सड़क पर क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड, रंबल स्ट्रिप, नॉइज बैरियर और फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी लगाई जाएंगी, जिससे यात्रियों और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा हो सके।ये भी पढ़ें-Bhopal News: अयोध्या बायपास पर झुग्गियां हटाने के विरोध में सड़क जाम, लट्ठ लेकर दौड़े लोग, घंटेभर थमा ट्रैफिकपर्यटन स्थलों पर पहुंच भी बेहतर होगीइस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सड़क हादसे कम होंगे, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आवागमन भी आसान हो जाएगा। सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। साथ ही, उद्योगों और व्यापार को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर, बरेठा घाट का यह फोरलेन प्रोजेक्ट आम लोगों के लिए सुरक्षित और आसान सफर की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
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Mar 20, 2026, 06:50 AM
नस्लवादी टिप्पणियों और फिलिस्तीन समर्थक पदों के लिए एनवाईसी की प्रथम महिला की आलोचना

नस्लवादी टिप्पणियों और फिलिस्तीन समर्थक पदों के लिए एनवाईसी की प्रथम महिला की आलोचना

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी की पत्नी और शहर की प्रथम महिला रमा दुवाजी जांच के दायरे में आ गई हैं। रमा दुवाजी पर नस्लीय टिप्पणी और फलिस्तीनी उग्रवादी नेताओं के समर्थन में पोस्ट करने के आरोप लगे हैं।
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Mar 20, 2026, 06:45 AM
उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया

उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleलंबे समय से प्रदेश में रिक्त चल रहे कैबिनेट मंत्री के पदों का शुक्रवार को दूसरी नवरात्र पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.वि) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विस्तार कर दिया गया। कुमाऊं से नैनीताल जिले के भीमताल विधानसभा क्षेत्र के विधायक राम सिंह कैड़ा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। कैड़ा के कैबिनेट मंत्री बनने के बाद से भीमताल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसाल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार ने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए पांच चेहरों को जगह दी है। इस बार कुमाऊं से केवल भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा को मंत्री बनाया गया है। अब मंत्रिमंडल में कुमाऊं से सीएम धामी सहित चार विधायकों का प्रतिनिधित्व हो गया है।विज्ञापनविज्ञापनआइए जानते हैं वे पांच कारण जिनकी वजह से राम सिंह कैड़ा को कालाढूगी विधायक बंशीधर भगत, गंगोलीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल, गदरपुर विधायक अरविंद पांडे पर जैसे बड़े नेताओं पर तरजीह दी गई।मंत्री बनाने के पांच प्रमुख कारण- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा कायम करना।- युवा चेहरा होने के नाते कुमाऊं से कैड़ा को मंत्री का दायित्व सौंपा जाना।- भीमताल विधानसभा क्षेत्र में मजबूत पकड़ होने के चलते कैबिनेट मंत्री बनना।- ओखलकांडा में वर्ष 2025 में ब्लॉक प्रमुख चुनाव में विधायक की पत्नी कमलेश कैड़ा के द्वारा बागी होकर निर्दलीय ब्लॉक प्रमुख का नामांकन करने के बाद भाजपा हाईकमान के आदेश पर नामांकन से नाम वापस लेना।- भीमताल विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना भी कैड़ा को मंत्री बनाने की मुख्य वजह बताई जा रही है।
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Mar 20, 2026, 06:33 AM
मध्य पूर्व युद्ध के बीच भारत ने ऊर्जा सूचना को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले के रूप में वर्गीकृत किया

मध्य पूर्व युद्ध के बीच भारत ने ऊर्जा सूचना को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले के रूप में वर्गीकृत किया

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच छिड़े जंग की वजह से भारत में ऊर्जा संकट गहराने के बाद सरकार ने बड़ा आदेश जारी किया है। गुरुवार को केंद्र सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी सभी जानकारी को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले के रूप में वर्गीकृत कर दिया है। इसके साथ ही अब कंपनियों के लिए तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी सारी जानकारी सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026 के तहत सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की रिफाइनरी कंपनियों, एलएनजी आयातकों, पाइपलाइन संचालकों, शहरी गैस वितरकों और पेट्रोरसायन कंपनियों को पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) को नियमित रूप से विस्तृत जानकारी देनी होगी। मंत्रालय की 18 मार्च को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस आदेश में उत्पादन, आयात, भंडार स्तर और खपत के प्रतिरूप से संबंधित आंकड़े और जानकारी शामिल है। यह आदेश मौजूदा गोपनीयता प्रावधानों को निरस्त करता है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस और एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के बाद ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं में वृद्धि के बीच यह कदम उठाया गया है। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है। युद्ध शुरू होने से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था। एलपीजी का 85 से 95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत हिस्सा भी इसी जलडमरूमध्य से आता था। हालांकि युद्ध के कारण यह जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस बीच भारत कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है। लेकिन खाड़ी देशों से आपूर्ति में कमी के कारण औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति सीमित हुई है। मंत्रालय के इस आदेश का मकसद आपूर्ति में आने वाली रुकावटों पर त्वरित कदम उठाने, बिजली, उर्वरक और घरेलू एलपीजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और खरीद संबंधी बेहतर निर्णय लेने के लिए एक केंद्रीकृत, वास्तविक समय पर उपलब्ध आंकड़ा रूपरेखा तैयार करना है। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल से भारत की आपूर्ति श्रृंखलाओं की निगरानी करने, बचे भंडार का प्रबंधन करने और वैश्विक झटकों के प्रति जोखिम को कम करने की क्षमता मजबूत होगी। नियामक ढांचे के सख्त होने के साथ ही कंपनियों को अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए 'डेटा रिपोर्टिंग' प्रणाली को अत्याधुनिक बनाना होगा। अधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा ना केवल स्रोत पर बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में वास्तविक समय की पारदर्शिता पर भी निर्भर करेगी। मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत शक्ति का उपयोग करते हुए आदेश जारी किया। यह अधिनियम केंद्र सरकार को किसी भी आवश्यक वस्तु का भंडार रखने, उत्पादन करने, आयात करने, निर्यात करने या व्यापार करने वाले किसी भी व्यक्ति से उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, स्टॉक या उपयोग से संबंधित ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने की मांग करने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार ने कहा कि जनहित में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आपूर्ति श्रृंखला की प्रभावी निगरानी के लिए इस प्रकार की सूचनाओं के व्यवस्थित संग्रह, संकलन और विश्लेषण को लेकर एक केंद्रीकृत संस्थागत प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है।
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Mar 20, 2026, 06:29 AM
चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में व्यक्तिगत रूप से प्रचार करेंगे मोदी

चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में व्यक्तिगत रूप से प्रचार करेंगे मोदी

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का किला फतह करने के लिए बीजेपी इस बार पूरी ताकत झोंक रही है। दो चरणों में होने वाले विधानसभा के चुनाव के लिए बीजेपी के शीर्ष नेताओं का आवागमन शुरू हो गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में अगले महीने 14 रैलियां और रोडशो करेंगे। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने इन कार्यक्रमों की पुष्टि की है। गृह मंत्री अमित शाह के भी कम कार्यक्रम नहीं हैं। वह कम से कम 8 रैलियां और रोडशो करेंगे। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन पश्चिम बंगाल में कम से कम सात सभाओं को संबोधित करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के छह कार्यक्रम रखे गए हैं। इसके अलावा पीयूष गोयल, किरण रिजिजू समेत अन्य केंद्रीय मंत्री भी चुनाव प्रचार में उतर सकते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ जनसभाएं करेंगे। अब तक की जानकारी के मुताबिक उनके 8 कार्यक्रम फिक्स किए गए हैं। इसमें जनसभाएं और रोडशो दोनों शामिल हैं। अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती राज्य में कम से कम 10 सभाओं का हिस्सा होंगे। इसके अलावा कई रोडशो और पब्लिक मीटिंग भी केरंगे। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि लोगों के उत्साह से ही पता लग रहा है कि पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने जा रही है। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने मन बना लिया है कि इस बार राज्य में सत्ता परिवर्तन होना है। बता दें कि बंगाल में पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होंगे। इसके बाद 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान करवाए जाएंगे। 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। बीजेपी ने गुरुवार को 111 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची जारी की, जिसमें 'संदेशखलि आंदोलन' का चेहरा मानी जाने वाली रेखा पात्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ अधिकारी को शामिल किया गया है। सूची में अन्य प्रमुख नेताओं में पूर्व सांसद अर्जुन सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष तपस रॉय और अभिनेत्री से नेता बनीं रूपा गांगुली भी शामिल हैं। रूपा गांगुली सोनारपुर दक्षिण सीट से तृकां की लवली मैत्रा के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी, जबकि एक अन्य अभिनेता और खड़गपुर सदर के मौजूदा विधायक हिरण चटर्जी को हावड़ा के श्यामपुर से तृणमूल कांग्रेस (तृकां) के नदबासी जना के खिलाफ उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने अधिवक्ता प्रियंका तिब्रेवाल को एंटाली से उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने कोलकाता उच्च न्यायालय में तृणमूल सरकार के खिलाफ कई मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तिब्रेवाल ने 2021 में भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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Mar 20, 2026, 06:22 AM
नेपाल के पौड़ी में घर के पास घायल पाया गया बच्चा

नेपाल के पौड़ी में घर के पास घायल पाया गया बच्चा

विस्तारAdd as a preferredsource on googleकोटद्वार पोखड़ा रेंज में एक बच्चे को गुलदार घर से उठाकर 20-25 मीटर दूर ले गया। परिजनों के शोर मचाने पर गुलदार बच्चे को छोड़ भागा।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंये भी पढे़ं...Uttarakhand: धामी कैबिनेट का हुआ विस्तार, विधायक खजान दास, भरत सिंह चौधरी सहित इन पांच मंत्रियों ने ली शपथविज्ञापनविज्ञापनदीपक सिंह पुत्र सतेंद्र सिंह (11 ) ग्राम धस्माणी को घायल अवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव खाल लाया गया। यहां से उसे जिला चिकित्सालय पौड़ी और पौड़ी से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
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Mar 20, 2026, 06:12 AM
प्रशासनिक फेरबदल के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा

प्रशासनिक फेरबदल के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा

विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही पश्चिम बंगाल में सियासत गरमा गई है. चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया. इस मामले में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इस तरह के व्यापक तबादले केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों में और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में ही होते हैं, लेकिन इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है. पश्चिम बंगाल एक बार फिर वही साबित करेगा, जो मैं हमेशा से मानता आया हूं. दरअसल, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जेपी मीना का तबादला कर दिया गया. इसके अलावा, पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों (पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त समेत) को उनके पदों से हटा दिया गया था. इसके बाद से कई राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है.अब्दुला बोले- ममता दीदी भारी बहुमत से जीतेंगीउमर अब्दुला ने कहा, "राजनीतिक दलों के लिए चुनाव, अधिकारी नहीं बल्कि उनके नेता जीतते हैं. चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचन क्षेत्रों में हेरफेर करने के किसी भी प्रयास से परिणाम नहीं बदलेंगे. मतगणना के दिन ममता दीदी भारी बहुमत से जीतेंगी." इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि जिस तरह से चुनाव आयोग ने बंगाल को निशाना बनाया है, वह न केवल अभूतपूर्व है, बल्कि बेहद चिंताजनक भी है.ममता बनर्जी ने जताई थी आपत्तिउन्होंने कहा था कि चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों सहित 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से उनके पदों से हटा दिया गया है. यह प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप है.चुनाव आयुक्त को भी लिख चुकी हैं लेटरममता बनर्जी ने 16 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले पर चिंता भी जताई थी. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद बिना किसी ठोस कारण और बिना किसी आरोप के प्रशासनिक अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं.
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Mar 20, 2026, 06:06 AM
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की आलोचना की

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की आलोचना की

विस्तारAdd as a preferredsource on googleपश्चिम बंगाल में अगले महीने दो चरणों में चुनाव होने वाले हैं। अब राज्य में सियासी राजनीति तेज हो रही है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनर्जी को सलाह देने या सवाल पूछने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग को देशभर का भरोसा हासिल है। इसके साथ ही निष्पक्ष चुनाव के बाद राज्य सरकार में बदलाव की भविष्यवाणी की।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंपत्रकारों से बात करते हुए घोष ने कहा, "ममता बनर्जी को सलाह देने या सवाल पूछने का कोई अधिकार नहीं है। हर कोई जानता है कि उन्होंने 15 साल तक किस तरह की सरकार चलाई, यहां के अधिकारियों के साथ उनका व्यवहार कैसा था... पूरा देश चुनाव आयोग पर भरोसा करता है। उन्होंने बिहार में भी सफलतापूर्वक चुनाव कराए हैं। यहां भी सफल चुनाव होंगे और बदलाव आएगा।विज्ञापनविज्ञापनयह भी पढ़ें-तमिलनाडु चुनाव: CM स्टालिन ने ई पलानीस्वामी की दिल्ली यात्रा पर उठाए सवाल, कहा- अन्नाद्रमुक का ध्यान कहीं औरममता ने पत्र में क्या लिखा?उनकी यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र के बाद आई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत के चुनाव आयोग ने शिष्टाचार और संवैधानिक औचित्य की सभी सीमाओं को पार कर लिया है।" अपने पत्र में, बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत के बाद से आयोग की कार्रवाइयों पर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही दावा किया कि इसने स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया है और जमीनी हकीकतों और जन कल्याण की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के समक्ष बार-बार इन चिंताओं को उठाया था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, जिसके कारण उन्हें लोकतांत्रिक और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ा।यह भी पढ़ें-Assam Election: हिमंत बिस्वा सरमा ने रोड शो कर दिखाई ताकत, आज ही जलुकबारी सीट से दाखिल करेंगे अपना नामांकनपक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया का लगाया आरोपपत्र में लिखा है "भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के कामकाज से मैं बेहद आहत हूं, जिसने मेरी राय में मर्यादा और संवैधानिक मर्यादा की सभी सीमाओं को पार कर दिया है। तथाकथित विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत से ही, ईसीआई ने स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और जमीनी हकीकत या जनता के कल्याण की कोई परवाह नहीं की है। मैंने बार-बार आयोग के ध्यान में ये चिंताएं लाईं, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। मुझे जनता के मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा। ईसीआई की मनमानी कार्रवाइयों के कारण आम जनता को हो रही परेशानियों और उठाई गई चिंताओं को स्वीकार करते हुए, न्यायालय ने हस्तक्षेप किया और कुछ निर्देश जारी किए, जिनका वर्तमान में कार्यान्वयन किया जा रहा है।"ममता बनर्जी ने आगे लिखा कि चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद बिना कोई वैध कारण बताए या आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किए बिना वरिष्ठ राज्य अधिकारियों के बड़े पैमाने पर और अचानक तबादले किए हैं।उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों सहित प्रमुख अधिकारियों को हटाने और उनका स्थानांतरण करने से राज्य प्रशासन बाधित हो गया है, जबकि नियमों में कहा गया है कि चुनाव के दौरान ऐसे अधिकारियों को चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाता है।कब है चुनाव?इस बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल, 2026 को आयोजित किए जाएंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को निर्धारित है।भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के अनुसार, 152 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने वाले पहले चरण का मतदान 30 मार्च, 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगा। इस चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 7 अप्रैल को होगी। उम्मीदवारों को 9 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस लेने की अनुमति होगी। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा।दूसरे चरण के लिए, जिसमें 142 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं, राजपत्र अधिसूचना 2 अप्रैल, 2026 को जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 9 अप्रैल है और नामांकन पत्रों की जांच 10 अप्रैल को होगी। उम्मीदवार 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। इस चरण के लिए मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित है।
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Mar 20, 2026, 05:56 AM
ईरान हमले की गोपनीयता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति और जापानी प्रधानमंत्री के बीच तनाव

ईरान हमले की गोपनीयता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति और जापानी प्रधानमंत्री के बीच तनाव

वॉशिंगटन:अमेरिका के व्हाइट हाउस में जापानी पीएम के सामने हालात उस समय बहुत असहज हो गए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को गुप्त रखने के फैसले का बचाव करते हुए पर्ल हार्बर हमले का हवाला दिया. ट्रंप की इस टिप्पणी से जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची एकदम से असहज हो गईं. हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कुछ कहा नहीं. लेकिन उसके चेहरे के हावभाव से उनकी असहजता साफ नजर आ रही थी. इससे दोनों देशों के बीच सहयोग के गर्मजोशी भरे प्रदर्शन के बीच एक अटपटा क्षण पैदा हो गया. ये सब उस समय हुआ जब ट्रंप से पूछा गया कि जापान समेत यूरोप और एशिया के सहयोगी देशों को ईरान पर हमले से पहले क्यों नहीं बताया गया.पत्रकारों के सवाल का ट्रंप ने दिया दो टूक जवाबदरअसल दोनों विश्व नेता पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे, तभी एक जापानी पत्रकार ने पूछा कि अमेरिका ने ईरान पर हमला करने से पहले जापान समेत यूरोप और एशिया में अपने सहयोगियों को क्यों नहीं बताया. इस परट्रंपने जवाब दिया, “देखिए, एक बात यह है कि आप बहुत ज्यादा संकेत नहीं देना चाहते. जब हम गए, तो हम बहुत जोरदार तरीके से गए, और हमने किसी को इसके बारे में नहीं बताया क्योंकि हम उन्हें चौंकाना चाहते थे."इसके बाद ट्रंप ने जापान के 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र किया. ट्रंप ने कहा, “सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है, ठीक है? आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया.” आप सरप्राइज में हमसे कहीं ज्यादा विश्वास रखते हैं, और हमें उन्हें चौंकाना था, और हमने ऐसा किया.पर्ल हार्बर हमले के बारे में जानेंबता दें कि ट्रंप जिस पर्ल हार्बर हमले का जिक्र कर रहे थे वह घटना 7 दिसंबर, 1941 घटी थी.पर्ल हार्बर स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर जापान ने अचानक हवाई हमला किया था, जिसमें 2,390 अमेरिकी मारे गए थे.अगले ही दिन अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया था, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध में उसकी एंट्री हुई थी.अगस्त 1945 में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने के साथ ही युद्ध खत्म हो गया था.उसके बाद अमेरिका और जापान ने सितंबर 1951 में एक शांति संधि पर हस्ताक्षर किए और तब से दोनों सहयोगी हैं.अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने इसे एक ऐसी तारीख कहा था, जो हमेशा एक कलंक के रूप में याद की जाएगी.हमले के बारे में सहयोगियों को क्यों नहीं बताया? ट्रंप का जवाबउन्होंने तर्क दिया कि सहयोगियों को पहले से जानकारी न देने का फैसला सैन्य बढ़त बनाए रखने के लिए था. “इसी सरप्राइज की वजह से, पहले दो दिनों में हमने शायद 50 प्रतिशत लक्ष्य को खत्म कर दिया और जितना हमने अनुमान लगाया था उससे भी ज्यादा. तो अगर मैं पहले ही सबको बता देता, तो फिर सरप्राइज नहीं रहता, है ना?”PTI फोटो.पर्ल हार्बर के जिक्र से जापानी पीएम हुईं असहजविदेशी मीडिया पूल रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की इस तुलना पर ताकाइची ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. उनके चेहरे के भाव छोड़े अलग थे और मुस्कान गायब हो गई और वह पीछे की ओर झुक गईं, अपने हाथ समेटते हुए, पर्ल हार्बर का अचानक जिक्र होने से स्पष्ट रूप से चौंक गईं. हालांकि उन्होंने इस पर कुछ कहा नहीं. ट्रंप की यह टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बाकी दौरे के दौरान दोनों नेताओं की भाषा असामान्य रूप से दोस्ताना रही थी. ट्रंप ने बार-बार ताकाइची की तारीफ करते हुए उन्हें “महान महिला” बताया और कहा कि उनके बीच “बहुत अच्छे संबंध” हैं. डिनर के दौरान ट्रंप ने उन्हें “शानदार महिला” कहा और कहा, “व्हाइट हाउस में आपका हमारे साथ होना सम्मान की बात है.”ये भी पढ़ें-गहराने वाला है युद्ध? ब्रिटेन, फ्रांस समेत 6 देश ईरान के खिलाफ करेंगे अमेरिका की मदद| LIVE अपडेट्सजापान को ट्रंप का स्पष्ट संदेशताकाइची ने भी इस व्यक्तिगत तालमेल को आगे बढ़ाया. उन्होंने ट्रंप से कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि डोनाल्ड और मैं इस साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे अच्छे साथी हैं,” और बाद में कहा, “जापान वापस आ गया है.” फिर भी, पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी ने कुछ समय के लिए इस सावधानीपूर्वक बनाए गए माहौल को तोड़ दिया.ट्रंप का जापान के लिए व्यापक संदेश यह था कि जब अपने हित सीधे जुड़े हों, तो सहयोगी देशों को “आगे आना चाहिए”, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में. उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि जापान आगे आएगा क्योंकि हमारे बीच ऐसा संबंध है. ट्रंप ने कहा कि मैंने सुना है कि जापान अपना 90 प्रतिशत से अधिक तेल इसी जलडमरूमध्य से प्राप्त करता है.
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Mar 20, 2026, 05:54 AM
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने जलुकबाड़ी सीट से नामांकन दाखिल किया

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने जलुकबाड़ी सीट से नामांकन दाखिल किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleHimanta Biswa Sarma Roadshow:असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को जलुकबारी सीट से अपना नामांकन दाखिल किया है। इस दौरान उनकी पत्नी समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। नामांकन से पहले उन्होंने कामरूप मेट्रो से विधानसभा कार्यालय की ओर अपना रोड शो किया। रोड शो के दौरान हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने कहा कि यह हमाने लिए खुशी का मौका है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंविज्ञापनविज्ञापनसुबह से ही रोड शो का इंतजार कर रहे थे लोगबता दें कि बारिश के बावजूद रोड शो में हिमंत के हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए। सुबह से ही खानापारा के वेटरनरी कॉलेज फील्ड पर जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। महिलाओं की टोली ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। बीहू की धुनों पर ठुमके लगते देखकर लग रहा था जैसे पूरा गुवाहाटी उत्सव मना रहा हो।यह भी पढ़ें:Bengal Election:'भाजपा का हथियार बन गया है चुनाव आयोग', ममता के समर्थन में उतरे केजरीवालआपकी कृपा ही मेरी ताकत है- हिमंत बिस्वा सरमाहिमंत बिस्वा सरमा 2001 से लगातार जलुकबारी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पहले कांग्रेस से तीन बार जीते। 2015 में भाजपा में आने के बाद भी यहां से लगातार पांचवीं बार जीत हासिल की। सरमा ने X पर पोस्ट करते हुए कहा था, "जलुकबारी के लोगों के आशीर्वाद से मैं नामांकन दाखिल करने जा रहा हूं। आपकी कृपा ही मेरी ताकत है।"बारिश में भी भीड़ देखकर उन्होंने कहा, "बारिश का मौसम है, फिर भी इतने लोग आए, ये असम की जनता का प्यार है।" कल ही भाजपा ने 89 में से 88 सीटों के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें सरमा का नाम जलुकबारी से सबसे ऊपर था। असम में 9 अप्रैल को मतदान और 4 मई को नतीजे सामने आएंगे। सरमा की ये ताकत दिखाने वाली रैली से साफ है कि भाजपा यहां अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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Mar 20, 2026, 05:23 AM
मध्य पूर्व में तनाव के बीच वैश्विक शक्तियां अमेरिका के साथ एकजुटः ऊर्जा सुरक्षा और अस्थिरता अभियान का समर्थन

मध्य पूर्व में तनाव के बीच वैश्विक शक्तियां अमेरिका के साथ एकजुटः ऊर्जा सुरक्षा और अस्थिरता अभियान का समर्थन

नई दिल्ली:मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के साथ कई देशों का खड़ा होना सिर्फ कूटनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, सैन्य निर्भरता और क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा असर है. विशेषज्ञ मानते हैं कि हालात अगर बिगड़े, तो यह संघर्ष सीमित नहीं रहेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका लग सकता है.US के सपोर्ट में इतने देशदरअसल कल ही ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने एकसंयुक्त बयान जारीकिया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मिलकर प्रयास करने और ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए कदम उठाने की बात कही है. इन देशों ने ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों की निंदा की और उससे तुरंत ऐसी गतिविधियां बंद करने को कहा.ऐसे में सवाल उठता है कि ये देश आखिर US के समर्थन में क्यों खड़े होते दिख रहे हैं, जबकि कुछ दिनों पहले तक कई देश इस जंग से किनारा करते नजर आ रहे थे. आइए इस बदलाव के कारणों को समझते हैं.यह भी पढ़ें-होर्मुज को मुट्ठी में करने की कोशिश में जुटा अमेरिका, ईरानी जहाजों पर हमला, ड्रोन्स को ठिकाने लगायाऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ा कारणअंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों और विश्लेषकों (जैसे International Energy Agency) के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र से दुनिया की बड़ी तेल-गैस सप्लाई होती है. खासतौर पर Strait of Hormuz से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. यूरोप, जो पहले ही रूस से ऊर्जा निर्भरता कम कर चुका है, इस रूट पर ज्यादा निर्भर है. इसी वजह से यूरोपीय देश अमेरिका के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. यह रणनीतिक मजबूरी है, न कि केवल राजनीतिक समर्थन.NATO की भूमिका पर ट्रंप के सवालNATO पश्चिमी देशों की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य आधार है. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप पहले NATO को बेकार बता चुके हैं, लेकिन यूक्रेन युद्ध और मौजूदा तनाव ने यह साफ कर दिया है कि यूरोप की सैन्य क्षमता अभी भी अमेरिका पर निर्भर है.बड़े युद्ध की स्थिति में NATO का ढांचा ही सबसे अहम सुरक्षा कवच रहेगा.क्या जंग फैलने का खतरा है?अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक (जैसे Council on Foreign Relations) और सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, तीन बड़े जोखिम हैं:यह भी पढ़ें-दुनिया की कमर तोड़ रहा ईरान-इजरायल युद्ध, तेल, गैस और ट्रांसपोर्ट की कीमतों में भारी उछाल; समुद्री रास्तों से लेकर हवाई किराए तक असर1. होर्मुज बंद होने का खतराअगर ईरान इस जलमार्ग को पूरी तरब बंद करता है तो तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित होगी. वैश्विक कीमतों में तेज उछाल आ सकता है.2. क्षेत्रीय शक्तियों की एंट्रीखाड़ी देश (सऊदी अरब, UAE) सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं. इससे संघर्ष रीजनल वॉर में शिफ्ट हो सकता है.3. रूस के फायदे से भी पश्चिमी देशों में चिंतारूस को इस संकट से फायदा मिल सकता है क्योंकि ऊंची कीमतों पर उसका तेल बिकेगा. हालांकि चीन फिलहाल संतुलन बनाकर चल रहा है, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर उसकी भूमिका भी अहम हो सकती है.यह भी पढ़ें-VIDEO: मौत बस छूकर निकल गई... लेबनान में रिपोर्टिंग कर रहा था पत्रकार, पीछे धमाके के साथ गिरी इजरायली मिसाइलरूस को कैसे फायदा?ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ने से सप्लाई कम होगी. कीमतें बढ़ेंगी. ऐसे में रूस, जो पहले प्रतिबंधों से जूझ रहा था, ऊंचे दाम पर तेल बेच सकेगा.मजबूरी है ये गठजोड़!ऐसे में आसान भाषा में समझें तो अमेरिका के साथ देशों का आना 'ब्लॉक पॉलिटिक्स' नहीं, बल्कि 'क्राइसिस मैनेजमेंट' है. ऊर्जा सप्लाई का डर, सैन्य सुरक्षा की जरूरत और क्षेत्रीय अस्थिरता इन तीन वजहों ने इस गठजोड़ को मजबूती दी है. हालांकि अभी स्थिति पूर्ण युद्ध की नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर होर्मुज पर असर पड़ा या कोई बड़ा देश सीधे टकराव में आया, तो यह संघर्ष तेजी से वैश्विक संकट में बदल सकता है.
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Mar 20, 2026, 05:20 AM
ईरान ने मध्य पूर्व में बड़े हमले में नई नसरुल्ला मिसाइल दागी

ईरान ने मध्य पूर्व में बड़े हमले में नई नसरुल्ला मिसाइल दागी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर(IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत 65वीं वेव में बड़ा मिसाइल हमला किया. इस हमले की सबसे खास बात थी कि इसमें पहली बार नसरल्लाह बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया. जिसे ईरान ने अपनी नई सैन्य क्षमता के तौर पर पेश किया है. यह हमला इज़राइल के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमले के जवाब में किया गया बताया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में ऊर्जा और सैन्य टकराव और तेज हो गया है. ईरान ने इस नई मिसाइल का नाम मारे गए हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के नाम पर रखा है, जिसे प्रतीकात्मक बदला माना जा रहा है. नसरल्लाह मिसाइल को ईरान की पुरानी Qadr (Ghadr) सीरीज का एडवांस संस्करण बताया जा रहा है. यह एक प्रिसीजन-गाइडेड बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे खास तौर पर हाई-वैल्यू टारगेट्स को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है ईरान की यह मिसाइल प्रिसीजन + मल्टी-वारहेड + लॉन्ग रेंज का कॉम्बिनेशन है. ऊर्जा ठिकानों (oil/gas) को निशाना बनाने की क्षमता के साथ क्षेत्रीय युद्ध को और व्यापक बना सकती है. यह मिसाइल Middle East में सैन्य संतुलन बदल सकती है और भविष्य में बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है. नसरल्लाह मिसाइल ईरान की बढ़ती सैन्य ताकत दिखाती है. यह सिर्फ एक नया हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है कि ईरान अब लंबी दूरी और सटीक हमले करने में पहले से ज्यादा सक्षम हो चुका है. मौजूदा हालात में इस मिसाइल की एंट्री ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है. अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की मजबूती को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. हालांकि इस तरह के मिशन को लगातार जारी रखना बता रहा है कि ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता अभी भी एक्टिव है. मोबाइल लॉन्चर और अंडरग्राउंड फैसिलिटी सुरक्षित हैं. R&D लगातार जारी है और IRGC ने साफ कहा है कि ऑपरेशन पूरी जीत तक जारी रहेगा. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यान्हू ने पहले दावा किया था कि ईरान की मिसाइल और न्यूक्लियर क्षमता को काफी हद तक खत्म कर दिया गया है. लेकिन 65 वेव तक लगातार हमले और नई नसरल्लाह मिसाइल का इस्तेमाल इन दावों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं. ईरान का नसरल्लाह मिसाइल अटैक सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता और राजनीतिक संदेश दोनों है. वेव-65 ने यह साफ कर दिया है कि संघर्ष अब सिर्फ सीमित जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि लंबे और व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदलता जा रहा है.
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Mar 20, 2026, 04:49 AM
राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर कांग्रेस ने विधायक को कारणदर्शक नोटिस जारी किया

राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर कांग्रेस ने विधायक को कारणदर्शक नोटिस जारी किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleकांग्रेस में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग का मामला गरमाता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने क्रॉस वोटिंग मामले में रतिया के विधायक जरनैल सिंह को कारण बताओं नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन पर एंटी पार्टी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इसके साथ ही आरोपी पर रतिया विधायक को 7 दिनों के भीतर जवाब देना। अभी तक क्रॉस वोटिंग के मामले में चार विधायकों का नाम सामने आया था।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंइसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस अन्य विधायकों के नाम भी खोलेगी। रतिया विधायक का नाम सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर से गर्म आ गई है। अब देखना होगा कि उनकी तरफ से क्या जवाब आता है। इसके साथ-साथ ऐसा ही कारण बताओं नोटिस नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी को भी दिया गया है उनका जवाब भी अभी लंबित है।विज्ञापनविज्ञापन
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Mar 20, 2026, 04:49 AM
राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर कांग्रेस ने दो विधायकों को कारणदर्शक नोटिस जारी किया

राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर कांग्रेस ने दो विधायकों को कारणदर्शक नोटिस जारी किया

विस्तारवॉट्सऐप चैनल फॉलो करेंकांग्रेस में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग का मामला गरमाता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने क्रॉस वोटिंग मामले में रतिया के विधायक जरनैल सिंह को कारण बताओं नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन पर एंटी पार्टी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इसके साथ ही आरोपी पर रतिया विधायक को 7 दिनों के भीतर जवाब देना। अभी तक क्रॉस वोटिंग के मामले में चार विधायकों का नाम सामने आया था।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंइसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस अन्य विधायकों के नाम भी खोलेगी। रतिया विधायक का नाम सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर से गर्म आ गई है। अब देखना होगा कि उनकी तरफ से क्या जवाब आता है। इसके साथ-साथ ऐसा ही कारण बताओं नोटिस नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी को भी दिया गया है उनका जवाब भी अभी लंबित है।विज्ञापनविज्ञापनजरनेल सिंह ने तोड़ी चुप्पी, कहा- मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूंरतिया से विधायक जरनेल सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को पार्टी के प्रति वफादार बताया है। विधायक जरनेल सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें अभी तक पार्टी की ओर से कोई कारण बताओ नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में कोई नोटिस मिलता है, तो वे उसका उचित जवाब पार्टी आलाकमान को देंगे।जरनेल सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए कहा कि उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना गलत है क्रॉस वोटिंग के दावों पर विराम लगाते हुए विधायक ने दावा किया कि उन्होंने कोई क्रॉस वोटिंग नहीं की है। उन्होंने कहा, मैंने अपना वोट भूपेंद्र सिंह हुड्डा को दिखाकर डाला था जरनेल सिंह ने अन्य विधायकों का बचाव करते हुए यह भी कहा कि उनकी जानकारी में किसी ने भी क्रॉस वोट नहीं किया है और पूरी पार्टी एकजुट है मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि मैंने पूरी पारदर्शिता के साथ पार्टी के पक्ष में मतदान किया है।हालांकि इस दौरान विधायक जरनैल सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उनके द्वारा कई बार तारीफ करने के सवाल उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अच्छे व्यक्ति के मालिक है और हमेशा विपक्ष के विधायक को भी पूरा मान सम्मान देते हैं क्षेत्र के काम के लिए वह कई बार मुख्यमंत्री से मिले हैं और उनसे काम भी करवाए हैं विधायक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हैं। अब देखना यह होगा कि इस स्पष्टीकरण के बाद पार्टी आलाकमान का अगला कदम क्या होता है।
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Mar 20, 2026, 04:37 AM
इजरायल-ईरान संघर्ष के ऊर्जा सुविधाओं तक फैलने से वैश्विक तनाव बढ़ा

इजरायल-ईरान संघर्ष के ऊर्जा सुविधाओं तक फैलने से वैश्विक तनाव बढ़ा

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को तीन हफ्ते हो गए हैं. कम होने के बजाय युद्ध विकरात रूप लेता जा रहा है. अब निशाने पर गैस और तेल के ठिकाने हैं. इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स पर हमला किया, तो पलटवार करते हुए ईरान ने कुवैत, सऊदी और यूएई में गैस प्लांट पर ड्रोन दाग दिए. इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी. कच्चे तेल और गैस के दाम अचानक बढ़ गए, शेयर मार्केट में गिरावट आ गई. दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष आपस में बातचीत करने लगे. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरेआम ये कहा कि उन्हें इजराइल के इस हमले की जानकारी नहीं है और वो इजराइल से कहेंगे कि वो अब एनर्जी ठिकानों पर अटैक न करे. ट्रंप के इस बयान का इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सही बताया है. उन्होंने कहा कि ईरान के गैस क्षेत्र पर इजराइल ने अकेले ही कार्रवाई की और अब वो हमले नहीं करेंगे क्योंकि ट्रंप ने अनुरोध किया है कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले न किए जाएं. नेतन्याहू के इस बयान ने ट्रंप के दावे को गलत साबित होने से बचा लिया. हाल में कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जिनसे ये साबित हुआ है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों को लेकर कई तरह के झूठ बोले. ताजा बयान में अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने कहा है कि ईरान पर हमले का अमेरिका और इजराइल का मकसद अलग-अलग था. उन्होंने ये भी कहा कि वहां के नेताओं को मारना उनका मकसद नहीं था बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और नेवी को टारगेट करना था. जबकि ईरान पर हमला करने के बाद जब सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हुई तो ट्रंप ने इस पर जश्न मनाया. वो अब भी कह रहे हैं कि ईरान में नया सुप्रीम लीडर उनके हिसाब से बनेगा. जबकि ईरान ने मुज्तबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बना दिया है. दुनिया में 5वां हिस्सा तेल ट्रांसपोर्ट का होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से किया जाता है. इस रास्ते को सीमित करने की वजह से वैसे ही दुनिया के कई देशों के बीच तेल का संकट गहराया हुआ है. ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस साउथ पार्स पर इजराइल की तरफ से किए गए हमले ने दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ा दी. इस हमले ने ऊर्जा बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है. इजराइल के हमले के बाद इस्लामिक गणराज्य की जवाबी कार्रवाई से ईंधन की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ गईं. ब्रेंट क्रूड ऑयल का अंतरराष्ट्रीय मानक कुछ समय के लिए 119 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 60 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोतरी है. यहां इस बात का भी खतरा पैदा हो गया कि ईरान के अरब पड़ोसी भी सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं. इस हमले के बाद दुनिया के कई देशों के पास फोन बजने लगे. पीएम मोदी ने कतर, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया और ओमान के नेताओं से बात की. पीएम मोदी ने बताया कि मैंने अपने प्रिय मित्र, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से पश्चिम एशिया की स्थिति और तनाव कम करने की तत्काल जरूरत के साथ ही बातचीत और कूटनीति की ओर लौटने के विषय पर बात की. विदेश मंत्रालय (MEA) ने 19 मार्च को खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों को बेहद चिंताजनक बताया. MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन हमलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने की नई दिल्ली की अपील को फिर से दोहराया. उन्होंने कहा कि इस तरह के हमलों से विश्व के ऊर्जा प्रवाह की स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है. उन्होंने कहा कि भारत ने पहले भी इस पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढ़ांचे को निशाना न बनाने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों के खिलाफ हाल ही में हुए हमले काफी परेशान करने वाले हैं. रणधीर जयसवाल ने स्वीकार किया कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट का असर अब सप्लाई पर पड़ने लगा है. ईरान ने बुधवार को अपने ‘साउथ पार्स’ गैस क्षेत्र पर हुए इजराइल हमले के जवाब में दुनिया की सबसे बड़ी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सुविधा ‘रास लफ़ान रिफाइनरी’ पर हमला किया. रास लफान और दूसरी ऊर्जा सुविधाओं पर हुए इन हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक समय 10% से भी ज्यादा बढ़कर $119 प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं, जिसमें बाद में कुछ गिरावट देखी गई. दुनिया में अमेरिका ने ईरान पर हमले की वजह बताई कि वो परमाणु हथियार बना रहा है, जिसकी वजह से वैश्विक शांति को खतरा है. वहीं 19 मार्च को अमेरिका की मौजूदा डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गबार्ड ने कहा कि जून 2025 में अमेरिका के हमलों में ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था.
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Mar 20, 2026, 03:35 AM
धामी मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार, पांच नए मंत्रियों ने ली शपथ

धामी मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार, पांच नए मंत्रियों ने ली शपथ

विस्तारवॉट्सऐप चैनल फॉलो करेंधामी मंत्रिमंडल में पांच नए मंत्रियों की ताजपोशी की गई। राजपुर विधायक खजान दास, भरत सिंह चौधरी, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह केड़ा ने आज धामी मंत्रिमंडल में मंत्रिपद की शपथ ली। प्रदेश में लंबे समय से कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं थी, जिन पर आज विराम लगा।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंआज नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को लोकभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने सबसे पहले राजपुर विधायक खजान दास को शपथ दिलाई। इसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ ली। फिर विधायक मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह केड़ा ने भी मंत्रिपद की शपथ ली।विज्ञापनविज्ञापनवर्तमान में कैबिनेट में पांच मंत्रियों के पद खाली हैं, जिनमें नए मंत्रियों की ताजपोशी की गई। ताजपोशी के लिए नए चेहरों का चयन विधायकों के पिछले चार साल के कामकाज का रिकॉर्ड देखकर किया गया है। नई कैबिनेट में क्षेत्रीय व जातीय समीकरण के बीच संतुलन बनाया गया। राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ कैबिनेट विस्तार पर कई दौर की वार्ता हो चुकी थी। सरकार व संगठन के बीच कैबिनेट विस्तार के लिए होमवर्क पूरा होने के बाद इसके लिए नवरात्र का शुभ मुहूर्त चुना गया।ये भी पढ़ें...Uttarakhand: यूपी ही नहीं, छह और राज्यों के पूर्व कर्मी ले रहे थे दोहरी पेंशन; बड़ा सवाल, अब कैसे होगी वसूली?मैदान से लेकर पहाड़ तक संतुलन बनायाधामी मंत्रिमंडल में मैदान से लेकर पहाड़ तक संतुलन बनाया है। पहली बार हरिद्वार को दो कैबिनेट मंत्री मिले। अब कैबिनेट में गढ़वाल के आठ और कुमाऊं के चार मंत्री हैं। तीन विधायक पहली बार कैबिनेट मंत्री बने। दो पुराने मंत्रियों को भी मौका दिया गया।
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Amar Ujala
Mar 20, 2026, 03:11 AM
भाजपा एक सप्ताह के भीतर जिला इकाई गठन प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार

भाजपा एक सप्ताह के भीतर जिला इकाई गठन प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार

विस्तारAdd as a preferredsource on googleभाजपा के प्रदेश संगठन के गठन की प्रक्रिया के तहत जिला इकाइयों के गठन की कार्यवाही एक सप्ताह के भीतर पूरी कर ली जाएगी। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने तय किया है एक सप्ताह के भीतर जिला टीम की घोषणा कर दी जाएगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह शुक्रवार से लगातार तीन दिन बैठकें करके प्रक्रिया पूरी करेंगे। दोनों नेता जिला पर्यवेक्षकों, क्षेत्रीय प्रभारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष व जिलाध्यक्षों के साथ बैठकें करेंगे।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रदेश से लेकर जिला स्तर तक भाजपा संगठन की नए सिरे से गठन की प्रक्रिया चल रही है। जिला इकाइयों के लिए सभी जिलों में पर्यवेक्षक भेजकर संभावित नामों का पैनल मंगवाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बृहस्पतिवार को नई दिल्ली से गोरखपुर पहुंचकर तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल के यहां एक कार्यक्रम में शिरकत की। देर रात वे लखनऊ पहुंच गए। शुक्रवार, शनिवार व रविवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर मैराथन बैठकों का सिलसिला चलेगा।विज्ञापनविज्ञापनये भी पढ़ें -योगी सरकार के नौ साल: यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बोले- विध्वंस के रहे हैं ये 9 वर्ष, अखिलेश ने कहा- मुक्ति का समयये भी पढ़ें -लखनऊ: शनिवार को मनाई जाएगी ईद, पुराने लखनऊ में बदला रहेगा यातायात; खबर पढ़कर निकलें घर सेयोगी की मौजूदगी में होगी कोर कमेटी की बैठकजिला इकाइयों के गठन की प्रक्रिया के बीच पार्टी की कोर कमेटी की बैठक भी होनी है। आरएसएस के सह सरकार्यवाह व भाजपा से समन्वय का काम देख रहे अरुण कुमार भी शुक्रवार को लखनऊ पहुंचेंगे। वे भाजपा कोर कमेटी के साथ बैठक में शामिल हो सकते हैं। बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे।
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Mar 19, 2026, 07:07 PM
जापान के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में पर्ल हार्बर का हवाला देकर ट्रम्प ने विवाद खड़ा कर दिया

जापान के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में पर्ल हार्बर का हवाला देकर ट्रम्प ने विवाद खड़ा कर दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री को 1941 में हुए पर्ल हार्बर हमले का जिक्र करके चौंका दिया. देखने में तो यह टिप्पणी हल्की-फुल्की लग रही थी, लेकिन निश्चित रूप से जापान में बेचैनी पैदा कर दी, जो अब अमेरिका का एक मजबूत सहयोगी है. ट्रंप ने प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ एक सौहार्दपूर्ण मुलाकात में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि उन्होंने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले से पहले सहयोगियों को सूचित क्यों नहीं किया.ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा, "हमने किसी को इसके बारे में नहीं बताया, क्योंकि हम अचानक हमला करना चाहते थे. जापान से बेहतर अचानक हमला कौन कर सकता है, ठीक है?"कराह उठीं जापानी पीएमताकाइची की ओर देखते हुए 79 वर्षीय राष्ट्रपति ने कहा, "आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया, ठीक है?" दुभाषिए पर निर्भर रहने वाली ताकाइची ने कुछ नहीं कहा, लेकिन अपनी कुर्सी पर थोड़ा हिलते हुए उन्होंने एक हल्की सी आह को दबाने की कोशिश की, जिससे अमेरिकी और जापानी पत्रकारों से भरे कमरे में कम से कम एक कराहने की आवाज सुनाई दी.7 दिसंबर, 1941 को, साम्राज्यवादी जापान ने हवाई के पर्ल हार्बर स्थित महत्वपूर्ण अमेरिकी प्रशांत सैन्य अड्डे पर पूर्व-नियोजित हमला किया, ताकि द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका के संभावित प्रवेश से पहले निर्णायक प्रहार किया जा सके. इस हमले में 2,400 से अधिक अमेरिकी मारे गए, जिसे राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने "कलंक" के रूप में याद किया जाने वाला हमला बताया. संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान पर दो परमाणु बम गिराकर द्वितीय विश्व युद्ध का अंत किया, जो इतिहास में परमाणु हथियारों का एकमात्र उपयोग था.मंगल ग्रह पर थी झील, नासा को मिले सुबूत, खबर के साथ चलिए दूसरी दुनिया के रोमांचक सफर परजापान के लिए संवेदनशील मसलायुद्धकालीन इतिहास जापानियों के लिए आज भी संवेदनशील बना हुआ है, जिन्होंने दशकों से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं और संघर्ष की यादों से आगे बढ़ने की उम्मीद की है. ताकाइची स्वयं राष्ट्रवादी विचारों के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने अतीत में कहा था कि जापान ने रक्षात्मक युद्ध लड़ा और उसने पीड़ित एशियाई देशों से बहुत अधिक माफी मांगी है.पिछले साल जब ट्रंप जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से मिले, तो उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का एक और चौंकाने वाला जिक्र किया, जिसमें उन्होंने मर्ज से कहा कि नाजी-कब्जे वाले फ्रांस में मित्र देशों की सेनाओं का डी-डे लैंडिंग "आपके लिए सुखद दिन नहीं था." तब मर्ज ने जवाब दिया कि जर्मन लोग अमेरिकियों के ऋणी हैं, क्योंकि अंततः "इसी ने मेरे देश को नाजी तानाशाही से मुक्ति दिलाई."ट्रंप ने ईरान पर अपने हमले को यह कहकर उचित ठहराया है कि वह परमाणु हथियार बनाने वाला था - एक ऐसा दावा जिसका संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय और अधिकांश पर्यवेक्षकों ने समर्थन नहीं किया है - और ईरानियों से अपने धार्मिक शासन को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है, हालांकि उन्होंने सत्ता परिवर्तन को अपना लक्ष्य नहीं बनाया है.ये भी पढ़ें-कितने तेल और गैस भंडारों को अब तक जला चुके ईरान-अमेरिका-इजरायल? समझिए क्यों संकट में भारत समेत पूरी दुनियाउत्तर कोरिया में हुआ चुनाव, जानिए किम जोंग उन का अब क्या हुआ, कितने वोट मिलेईरान से लेकर पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग तक भारत का क्या रुख, विदेश मंत्रालय ने किया क्लियर
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Mar 19, 2026, 06:30 PM
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा क्योंकि ईरान ने इजरायल के हमले का जवाब ऊर्जा युद्ध के साथ दिया

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा क्योंकि ईरान ने इजरायल के हमले का जवाब ऊर्जा युद्ध के साथ दिया

मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब महज मिसाइल हमलों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह भीषणएनर्जी वॉरकी तरफ बढ़ती नजर आ रही है. अपने सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स पर इजरायली हमले से ईरान भड़क गया है. उसने एक तरफ खाड़ी देशों में तेल और गैस के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल के खिलाफ वैश्विक मोर्चा बनाने के लिए कूटनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी हैं.पाकिस्तान-तुर्की-इजिप्ट से ईरान की बातईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को पाकिस्तान, तुर्की और इजिप्ट के विदेश मंत्रियों से फोन पर अलग-अलग बातचीत की. ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने अमेरिका-इजरायल पर भड़काऊ कार्रवाई करके क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाया. उन्होंने साफ कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा और सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. अराघची ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में शांति बहाली के लिए इनके खिलाफ एकजुट होना जरूरी है.सऊदी अरब ने भी संभाला मोर्चाएक तरफ ईरान पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों को साथ लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सऊदी अरब ने भी मोर्चा संभाल लिया है. सऊदी अरब ने भी खाड़ी में तनाव और ईरान के हमलों के मद्देनजर तुर्की, इजिप्ट और पाकिस्तान से बात की है. गुरुवार को रियाद में अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार, तुर्की के हाकान फिदान और मिस्र के बद्र अब्देलाती के साथ ईरान के हमलों पर चर्चा की.सऊदी सब्र का बांध टूट रहा?सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस बैठक का मकसद क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्थिरता बहाल करने के लिए प्रयासों को बढ़ावा देना था. ईरानी हमलों से अब सऊदी अरब के सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है. प्रिंस फैसल ने साफ कह दिया है कि सऊदी अरब का संयम असीमित नहीं है. वह अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा.ऊर्जा भंडारों पर हमले का खतरनाक ट्रेंडबहरहाल, इस जंग का सबसे खतरनाक पहलू ईंधन भंडारों पर शुरु हुए हमले हैं. इजरायल की तरफ से साउथ पार्स प्राकृतिक गैस भंडार पर हमले के जवाब में ईरान ने कतर में दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी केंद्र रास लाफान को निशाना बनाकर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को हिला दिया है. ईरान ने इजरायल के हाइफा और अशदोद की तेल रिफाइनरियों पर हमले कर जता दिया है कि वह अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है. इससे पहले अमेरिका ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर की गई मिसाइल स्ट्राइक ने आग में घी डालने का काम किया था.ईरान इस वक्त दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है. एक तरफ वह अमेरिका-इजरायल के तेल-गैस के आर्थिक ढांचे को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की जैसी क्षेत्रीय ताकतों को यह समझाने का प्रयास कर रहा है कि इस जंग के लिए अमेरिका जिम्मेदार है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश ईरान के इस एंटी अमेरिका मोर्चे का हिस्सा बनेंगे?ये भी देखें-कितने तेल और गैस भंडारों को अब तक जला चुके ईरान-अमेरिका-इजरायल? समझिए क्यों संकट में भारत समेत पूरी दुनियाईरान ने इजरायल के हाइफा तेल रिफाइनरी पर मिसाइल हमला किया: रिपोर्टईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड, कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमले, ट्रंप ने दी धमकी, कतर का भी गुस्‍सा फूटा
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Mar 19, 2026, 05:12 PM
पश्चिम बंगाल सरकार ने सिविल स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों के लिए तदर्थ बोनस बढ़ाया

पश्चिम बंगाल सरकार ने सिविल स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों के लिए तदर्थ बोनस बढ़ाया

West Bengal:पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने नागरिक स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों बड़ा तोहफा दिया है. पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सरकार का यह फैसला बड़ा दांव माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार (19 मार्च) को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नागरिक स्वयंसेवकों और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों के एड-हॉक बोनस को बढ़ाकर इसे 7,400 रुपये करने के संबंध में अधिसूचना जारी की. बताया जा रहा है कि सरकार ने इसकी घोषणा पहले ही कर दी थी.600 रुपये बढ़ाया गया बोनसएक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि राज्य सरकार ने 27 फरवरी को अपने कर्मचारियों के लिए तदर्थ बोनस में बढ़ोतरी की घोषणा की थी जिसे अब नागरिक और ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों तक भी बढ़ा दिया गया है. संशोधित राशि पहले के 6,800 रुपये के बोनस से 600 रुपये अधिक है.बोनस राशि वित्त वर्ष से प्रभावी कर दी गई हैराज्य सचिवालय ‘नबान्न' द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि संशोधित बोनस राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस के अंतर्गत कार्यरत नागरिक स्वयंसेवकों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल पुलिस के अंतर्गत कार्यरत ग्राम पुलिस स्वयंसेवकों पर भी लागू होगा. राज्य के वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘सरकार की पूर्व घोषणा के अनुरूप बढ़ी हुई एड-हॉक बोनस राशि चालू वित्त वर्ष से प्रभावी कर दी गई है.''पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे. मतों की गिनती चार मई को होगी.वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, उत्पादकता से जुड़े बोनस योजना के अंतर्गत नहीं आने वाले और 31 मार्च, 2026 तक 46,000 रुपये तक का संशोधित मासिक वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारी 7,400 रुपये के बोनस के पात्र हैं.अधिकारी ने कहा, इस कदम का उद्देश्य पात्र कर्मियों की श्रेणियों के बीच समानता सुनिश्चित करना और उनके योगदान को मान्यता देना है.(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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Mar 19, 2026, 04:50 PM
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के अधिकारी के तबादले की निंदा की

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के अधिकारी के तबादले की निंदा की

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के लगातार तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया जाना “सबसे बड़े स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप” है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है.चुनाव आयोग की कार्रवाई पर हमला जारी रखते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले संस्थाओं के “सुनियोजित राजनीतिकरण” का हिस्सा हैं और यह सीधे-सीधे संविधान की भावना पर चोट है. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इस तरह बड़े पैमाने पर तबादले करना प्रशासनिक स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश है.चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद Election Commission of India ने राज्य में कई वरिष्ठ अधिकारियों का फेरबदल किया है. इनमें मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती का तबादला, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को हटाना, साथ ही डीजीपी पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को पद से हटाने जैसे फैसले शामिल हैं.इसके अलावाचुनाव आयोगने हाल ही में एक और बड़े प्रशासनिक फेरबदल का आदेश दिया, जिसमें दो सचिव स्तर के अधिकारियों को दूसरे चुनावी राज्यों में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया, जबकि 13 आईएएस और 5 आईपीएस अधिकारियों को चुनाव प्रबंधन से जुड़े अहम पदों पर तैनात किया गया है.ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार से बिना पर्याप्त चर्चा के इस तरह लगातार फैसले लेना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के दबाव में चुनाव आयोग काम कर रहा है, जिससे निष्पक्ष चुनाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.राज्य में चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और इसे लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं..ये भी पढ़ें :मुलायम-अखिलेश जिस नोएडा से डरते थे, योगी वहां 25 बार गए; जानिए क्या था वो 'कुर्सी जाने' का अंधविश्वास
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Mar 19, 2026, 04:33 PM
ए. जी. पी. ने असम विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की

ए. जी. पी. ने असम विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की

असम विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी असम गण परिषद ने 26 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। इन उम्मीदवारों में 13 मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। इसके अलावा इन 13 लोगों में से 2 उम्मीदवार ऐसे हैं, जो कि पहले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक रह चुके हैं। एजीपी द्वारा घोषित की गई लिस्ट में असम की हिमंत सरकार में मंत्री अतुल बोरा को एक बार फिर से बोकाखाट सीट से उम्मीदवार बना गया है, वहीं उनके कैबिनेट सहयोगी केशव महंत को कालीआबोर सीट से दोबारा टिकट मिला है। इसके अलावा विधायक दीप्तिमोयी चौधरी और पृथ्वीराज राभा को क्रमशः बोंगाईगांव और तेजपुर से एक बार फिर टिकट दिया गया है। परीसीमन के दौरान बदली गई सीट के आधार पर अमगुरी से विधायक प्रदीप हजारिका को शिवसागर सीट पर भेजा गया है। एआईयूडीएफ से असम गण परिषद में आए दो विधायकों को भी पार्टी ने टिकट दिया है। इनमें सोनाई सीट से विधायक करीमउद्दीन बरभुइया को टिकट मिला है, जिन्होंने कुछ समय पहले ही एआईयूडीएफ का साथ छोड़ा था। इसके अलावा हैलाकांडी सीट से विधायक जाकिर हुसैन लास्कर को भी उनकी पुरानी पार्टी ने निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उनकी नजदीकी गण परिषद के साथ बढ़ी। अब पार्टी ने उन्हें हैलाकांडी से ही उम्मीदवार बनाया है। इन सब के अलावा रामेंद्र नारायण कलिता को कामालपुर, फणी भूषण चौधरी को धुबरी, उत्पल दत्ता को चायगांव, बिनंदा सैकिया को नौगांव, नारायण डेका को बारपेटा, रंजीत कुमार दास को सरभोग, हितेश बसुमातारी को तामुलपुर, वृंदावन गोस्वामी को जोरहाट, विरेंद्र प्रसाद वैश्य को लखीमपुर, करुणा कांता स्वर्गियारी को उदालगुड़ी, सिराजुद्दीन अजमल को दक्षिण सलमारा, साहेब अली अहमद को गोलपारा पूर्व, रफीकुल इस्लाम को मंगलदोई, अब्दुल बासित को करीमगंज दक्षिण, हाफिज राशिद अहमद को बराकपुर, तपन दास को धोलाई, जयंत दास को पटारकुची,दुलाल चंद्र गोस्वामी को पलाश बाड़ी और प्रमोद कलिता को बारपेटा रोड से उम्मीदवार बनाया गया है। आपको बता दें, असम में एनडीए के सीट बंटवारे के मुताबिक भाजपा को 89 सीट, एजीपी को 26 सीट और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को 11 सीटों पर उम्मीदवारी मिली है। 126 सदस्यों वाली इस विधानसभा के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
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