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Aug 6, 2026, 06:17 PM
कॉकरोच जनता पार्टी अगले महीने राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगी

कॉकरोच जनता पार्टी अगले महीने राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगी

जंतर-मंतर पर सफलता पूर्वक स्टूडेंट प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज करने के बाद अब सीजेपी एंड टीम राजनीतिक मुद्दों को लेकर एक्टिव नजर आ रही है. जल्द ही सीजेपी ऐसा कैंपेन लॉन्च करने जा रही है, जिससे सीधा संवाद जनता से किया जा सके. सीजेपी के संस्थापक ने इस कैंपेन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. अभिजीत दिपके ने गुरुवार 6 अगस्त 2026 को कहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी अगले महीने पूरे भारत में लोगों से बातचीत करने और उनके मुद्दों को जानने के लिए क्या बोलती है पब्लिक नाम से कैंपेन शुरू करेगी. दिपके ने यह बयान महाराष्ट्र में अपने गृह जिले छत्रपति संभाजीनगर में सीजेपी की कोर टीम की मीटिंग खत्म होने के बाद दिया. वह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस संबोधित कर रहे थे. VIDEO | Chhatrapati Sambhajinagar: CJP Chief Abhijeet Dipke says, "Around 65% of India's population is under the age of 35. They are the country's future. They are the ones who will lead this nation and take it forward. If you ignore them, do not speak to them, and do not engage… pic.twitter.com/PvjO7HB6BM कोर टीम बुधवार से दिपके के घर पर मौजूद है. उन्होंने कहा, हम जानेंगे कि लोग देश के मौजूदा हालात के बारे में क्या सोचते हैं और उन्हें किन मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद स्टूटेंड प्रोटेस्ट की सबसे बड़ी कामयाबी बताते हुए दिपके ने कहा, 'इस सरकार ने पिछले 10-12 सालों में लोगों के मन में जो डर पैदा किया था, वह अब खत्म हो गया है. लोक अब सड़कों पर उतरेंगे. आज उन्होंने एक व्यक्ति का इस्तीफा मांगा है. कल वे दूसरों के इस्तीफे लेंगे.' दिपके ने कहा, 'सीजेपी बाबा साहेब अंबेडकर, महात्मा गांधी और पंडित नेहरू के विकसित भारत के विजन के हिसाब से काम करेगी. नीट पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों की वजह से प्रधान को केंद्रीय शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा देना पडा. दिपके ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि बेरोजगार युवा भी शामिल थे. बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है. हम इसे देश भर का मुद्दा बनाएंगे. हम शिक्षा सुधारों पर काम करेंगे.' उन्होंने कहा, 'स्कूली शिक्षा के बाद से ही शिक्षा सस्ती नहीं रही है. शिक्षा का इस्तेमाल मुनाफ़ा कमाने के लिए किया जाता है. लेकिन हम इसे बदलना चाहते हैं. देश में 60 प्रतिशत लोग 35 साल से कम उम्र के हैं. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों में भी ऐसे ही लोग शामिल थे.' नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.
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Aug 6, 2026, 05:38 PM
भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने राजनीतिक भविष्य और सार्वजनिक समर्थन पर चर्चा की

भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने राजनीतिक भविष्य और सार्वजनिक समर्थन पर चर्चा की

गोंडा के नंदिनी नगर महाविद्यालय, नवाबगंज में आयोजित सत्यमेव जयते रैली के बाद पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी के नेता बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने सांसद बनने की संभावना, अदालत के फैसले, यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून की समीक्षा, विपक्ष की राजनीति और पहलवानों के आंदोलन पर अपने विचार व्यक्त किए. सांसद बनने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर पार्टी विचार करेगी तो जनता उन्हें जरूर भेजेगी. उन्होंने कहा कि वह खुद को सांसद बनने के योग्य मानते हैं, लेकिन पार्टी से ऊपर नहीं हैं. उनके मुताबिक अंतिम फैसला पार्टी का होगा. बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह सुबह अयोध्या पहुंचे और सबसे पहले हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन किए. इसके बाद एयरपोर्ट से लेकर नंदिनी नगर तक बड़ी संख्या में समर्थकों ने उनका स्वागत किया. उन्होंने कहा कि उनके स्वागत में प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों से लोग पहुंचे थे और बड़ी संख्या में उनका समर्थन देखने को मिला. उन्होंने कहा कि अदालत से बरी होना खुशी का विषय नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं थे. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उनका कहना था कि यदि आरोप सही साबित हुए तो वह फांसी की सजा स्वीकार करेंगे. उन्होंने बताया कि इस मामले में 127 तारीखें पड़ीं और करीब साढ़े तीन साल तक सुनवाई चली. उन्होंने कहा कि उन्होंने अदालत की एक भी तारीख नहीं छोड़ी और पूरी न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया. उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ताओं की ओर से कई बार सुनवाई टालने की कोशिश की गई और कुछ गवाह भी अदालत में पेश नहीं हुए. उनके अनुसार, इस मामले में कुल 27 गवाह पेश हुए. बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि अदालत ने उन्हें 'बाइज्जत बरी' किया. उन्होंने कहा कि यदि फैसला केवल सबूतों के अभाव में राहत देने वाला होता तो उन्हें दुख होता. उन्होंने यह भी कहा कि फैसले में 'बाइज्जत' और 'षड्यंत्र' जैसे शब्दों का उल्लेख हुआ है. उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में कुल 42 बड़े लोग शामिल थे. उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर इतना बड़ा आंदोलन दुनिया के किसी भी देश में नहीं हुआ. उनके अनुसार, आंदोलन कई महीनों तक चला और आरोप लगाने वालों में विश्व और ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी शामिल थे, जिससे पूरे देश में इस मामले को लेकर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों और उनके परिवारों को भी राहत मिली है जो कुश्ती से जुड़े हैं. उनके मुताबिक शुरुआत में इस मामले के कारण कई परिवारों के मन में खेल व्यवस्था को लेकर डर पैदा हो गया था. रैली के दौरान उठी कानून की समीक्षा की मांग पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अयोध्या के संतों ने इस कानून की समीक्षा करने और इसके दुरुपयोग को रोकने की मांग की है. उन्होंने कहा कि उनका भी यही मत है कि कानून की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह मांग उनके लिए नहीं है, क्योंकि वह बाइज्जत बरी हो चुके हैं, बल्कि उन लोगों के लिए है जो कथित दुरुपयोग के कारण परेशान होते हैं. उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में परिवार बर्बाद हो रहे हैं और कुछ लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि कानून महिलाओं की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब इसका राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल होने का आरोप भी सामने आ रहा है. उनके अनुसार, इसकी समीक्षा की जरूरत है. पहलवानों की ओर से हाई कोर्ट जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि यह उनका कानूनी अधिकार है. अगर उन्हें लगता है कि न्याय नहीं मिला तो वे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने दी जाए, उसके बाद वह तय करेंगे कि उन्हें आगे कोई कानूनी कदम उठाना है या नहीं. विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि विरोधी दल कभी अपने एजेंडे के साथ आंदोलन नहीं करते. उन्होंने कहा कि कभी किसानों, कभी शाहीन बाग, कभी महिलाओं और अब बच्चों के मुद्दे के सहारे राजनीति की जाती है. उनके अनुसार, विपक्ष सीधे राजनीतिक मुकाबला करने के बजाय दूसरे मुद्दों का सहारा लेकर सरकार और विरोधियों पर हमला करता है.
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Aug 6, 2026, 05:35 PM
भारतः समीक्षा या वापसी की मांग के बीच एफ. सी. आर. ए. विधेयक विवाद जारी

भारतः समीक्षा या वापसी की मांग के बीच एफ. सी. आर. ए. विधेयक विवाद जारी

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 को लेकर विवाद जारी है. इस बीच मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद बताया कि ये बिल 12 अगस्त को संसद में पारित कराने के लिए लाया जा सकता है. हालांकि ये कानून इस तारीख से लागू नहीं होगा. बिल के प्रावधानों को लेकर ईसाई समुदाय और NGOs में चिंता बनी हुई है. इसी सिलसिले में राज्यसभा सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में ईसाई धर्मगुरुओं के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा कि FCRA बिल को या तो वापस लिया जाए या फिर इसे समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए. ये दूसरी बार है जब कैथोलिक विशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने अमित शाह से मुलाकात की है. इससे पहले 10 जुलाई को भी CBCI ने गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस बिल को वापस लेने और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही नया मसौदा तैयार करने की अपील की थी. सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह ने सभी प्रतिनिधियों की बातों को ध्यान से सुना और उनकी चिंताओं को नोट किया. सरकार ने भरोसा दिया है कि इस कानून से ईसाई मिशनरियों और सोशल ग्रुप्स पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. इससे पहले, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा, 'मिजोरम कोहरान ह्रुआइतु कमेटी' (MKHC) के अध्यक्ष जॉन राल्डोसंगा और 'काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम' (CCM) के महासचिव लालहमांगईहा ने भी अमित शाह को एक मसौदा सौंपा था. मुख्यमंत्री और चर्च प्रतिनिधियों ने मांग की कि इस कानून को आगे की तारीख से लागू किया जाना चाहिए. लालदुहोमा ने कहा कि अगर इसे पुरानी तारीख से लागू किया गया, तो दशकों से चल रहे स्कूल, अस्पताल, अनाथालय और पुनर्वास केंद्र प्रभावित हो सकते हैं. 25 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए FCRA संशोधन विधेयक, 2026 में विदेशी फंड से संपत्ति बनाने वाली संस्थाओं पर निगरानी बढ़ाने का प्रावधान है. अगर किसी संस्था का लाइसेंस रद्द होता है, वो खुद लाइसेंस सरेंडर करती है या उसे रेन्यू नहीं किया जाता, तो उसकी विदेशी फंडिंग और उससे बनाई गई संपत्तियां सरकार के 'नामित प्राधिकारी' के पास आ जाएंगी.
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Aug 6, 2026, 05:26 PM
पंजाब सरकार को महँगाई भत्ता भुगतान और पुरानी पेंशन योजना को लेकर दबाव का सामना करना पड़ रहा है

पंजाब सरकार को महँगाई भत्ता भुगतान और पुरानी पेंशन योजना को लेकर दबाव का सामना करना पड़ रहा है

पंजाब में कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए की अदायगी अब भगवंत मान सरकार के सामने विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. शुक्रवार (7 अगस्त) को पंजाब सरकार के कर्मचारी और पेंशनर डीए की अदायगी और ओल्ड पेंशन स्कीम के मुद्दे पर बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं. कर्मचारियों संगठनों के नेताओं के मुताबिक तकरीबन एक लाख कर्मचारी जिनमें आउटसोर्स कर्मचारी जो नौकरी पक्की करने की मांग कर रहे हैं और पेंशनर भी प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को सारा डीए अदा करने का आदेश दिया है और इसके लिए सरकार को 15 दिन का समय दिया गया है. सरकार को इसके लिए 14191 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे और पहले ही कर्ज के बोझ तले दबी सरकार के लिए ये टेढ़ा काम है. सरकार हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती है. फिलहाल पंजाब सरकार पर कर्जा चार लाख करोड़ से ज्यादा है. हालांकि विपक्ष और कर्मचारी संगठन लगातार सरकार को इस मुद्दे पर घेर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि सरकार हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए डीए अदा करे. कांग्रेस नेता और नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि असल में सरकार डीए देना ही नहीं चाहती और सिर्फ समय व्यतीत कर रही है ताकि इस सरकार के बचे हुए कार्यकाल के चार पांच महीने निकल जाएं और डीए अदायगी का बोझ अगली सरकार पर पड़े. उन्होंने कहा है कि आम आदमी पार्टी यह कह कर नहीं बच सकती कि पिछली सरकारों के कारण यह बोझ उन पर पड़ा है क्योंकि आम आदमी पार्टी ने जब विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे पर वोट मांगे थे तब भी उन्हें पता था कि उन्हें डीए देना पड़ेगा. हालांकि बाजवा ने कहा है कि बेशक इतनी बड़ी रकम का डीए देना मुश्किल काम है खासकर राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पर अगर कांग्रेस की सरकार राज्य में बनती है तो वे कर्मचारियों को उनका हक देंगे. वहीं वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि राज्य सरकार कर्मचारियों को उनका हक देगी, लेकिन साथ ही उन्होंने पिछली सरकारों पर इल्जाम लगाया है कि उनकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई है. उन्होंने कहा है कि शिरोमणि अकाली दल- बीजेपी गठबंधन सरकार के वक्त 2016 में कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग को लागू करने का फैसला लिया गया था, जिसे कांग्रेस सरकार के वक्त 2021 में लागू किया गया और इसे 2016 से लागू किया गया. अब उसी तनख्वाह के आधार पर कर्मचारियों को डीए दिया जाना है. उन्होंने कहा है कि पंजाब में कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों और अन्य राज्यों के कर्मचारियों के मुकाबले सबसे अधिक तनख्वाह दी जाती है. उन्होंने कहा है कि अगर केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन के आधार पर डीए की अदायगी करनी हो तो यह राज्य सरकार के लिए बड़ा काम नहीं है.
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Aug 6, 2026, 05:22 PM
भारत के वित्त मंत्रालय ने बड़े यू. पी. आई. लेनदेन पर एम. डी. आर. शुल्क लागू करने के लिए विधेयक पेश किया

भारत के वित्त मंत्रालय ने बड़े यू. पी. आई. लेनदेन पर एम. डी. आर. शुल्क लागू करने के लिए विधेयक पेश किया

वित्त मंत्रालय ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 बीते मंगलवार को संसद में पेश किया है. इस बिल को लेकर लगातार विपक्ष मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है. इस बिल के तहत मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) लागू करने की बात कही गई है. यह चार्ज 2000 रुपये से ज्‍यादा की यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू किया जा सकता है. यानी अगर 2000 रुपये से ज्‍यादा का पेमेंट एकबार में किया जाता है, तो MDR चार्ज देना होगा. संसद में विधेयक पेश होने के बाद से ही कन्फ्यूजन इस बात का है कि आखिर ये चार्ज किसपर लागू होगा. विपक्ष लगातार सरकार पर इसे लेकर निशाना साधता नजर आया. अब सरकार ने खुद साफ-साफ बता दिया है कि ये MDR Charge किस पर लागू होगा. वित्त मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए तस्वीर साफ की है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश के इस दावे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी कि सरकार सभी UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ कर रही है. MDR पर उठ रहे सवालों और विपक्ष के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता झूठी अफवाह फैला रहे हैं. वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि गलत जानकारी फैलाने से पहले, @Jairam_Ramesh जी, कृपया इस पर विचार करें. Before spreading a canard, @Jairam_Ramesh ji, please consider this: 1. Merchant Discount Rate (MDR) applies only on the merchants and not on the end users/customers. It will support the Banks & Fintech to invest more on infrastructure, innovation & security. All users of UPI… https://t.co/sleUX4ztWe अपनी पोस्ट में FM ने तस्वीर साफ करते हुए कहा, 'अगर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू की जाती है, तो वह सिर्फ और सिर्फ व्यापारियों पर लागू होगी, ग्राहकों पर नहीं. इसका अंतिम उपयोगकर्ताओं या ग्राहकों पर असर नहीं होता. इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे, इनोवेशन और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी. यूपीआई के सभी उपयोगकर्ता इस निवेश का लाभ उठाएंगे.' बता दें कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन को संसाधित करने के लिए बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य मध्यस्थों को भुगतान करते हैं. निर्मला सीतारमण ने अपनी पोस्ट में आगे एक और बात साफ की है. उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनपीसीआई (NPCI) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने अभी तक एमडीआर पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. यह संसद द्वारा कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित करने के बाद ही होगा, जिसमें पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं या छोटे व्यापारियों को प्रभावित करना नहीं है. बल्कि चर्चाओं में मुख्य रूप से MDR केवल बड़े व्यापारियों पर लगाने पर जोर दिया गया है, जिनमें प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां और निर्धारित सालाना कारोबार लिमिट से अधिक वाले बिजनेस शामिल हैं. छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन और व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई पेमेंट प्रस्तावित ढांचे से बाहर रहने की उम्मीद है. उन्होंने ये भी कहा कि MDR को फिर से लागू करने पर करीब दो सालों से चर्चाएं चल रही हैं.
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Aug 6, 2026, 05:20 PM
सीजेपी के अभिजीत दीपक ने भारत में युवा आंदोलन के बीच लोकप्रियता हासिल की

सीजेपी के अभिजीत दीपक ने भारत में युवा आंदोलन के बीच लोकप्रियता हासिल की

दिल्ली में जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन से मिली कामयाबी के बाद सीजेपी और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की देशभर में चर्चा हो रही है. युवाओं की और खासकर स्टूडेंट्स की बात करने वाली सीजेपी लगातार एजुकेशन रिफॉर्म की बात कर रही है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंस्टाग्राम पर सीधे Gen-Z से बात की. 23 जुलाई को पीएम मोदी ने इंस्टा पर जो वीडियो शेयर किया उसे 24 घंटे में ही 303 मिलियन (30.3 करोड़) से अधिक लोगों ने देखा, जो वर्ल्ड रिकॉर्ड था. युवाओं में पीएम मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सीजेपी के अभिजीत दीपके में से कौन ज्यादा लोकप्रिय हैं इसे लेकर सी-वोटर ने सर्वे किया है. सी-वोटर में पूछा गया- युवाओं में सबसे लोकप्रिय नेता कौन हैं. इसके जवाब में 39.8 फीसदी युवाओं ने पीएम मोदी को सबसे लोकप्रिय नेता बताया. वहीं राहुल गांधी को 27.9 फीसदी और सीजेपी के अभिजीत दीपके को 12.6 फीसदी युवाओं ने लोकप्रिय नेता बताया है. सर्वे में पूछा गया- पेपरलीक रोकने के लिए सरकार के उठाए कदमों से संतुष्ट हैं? इस पर 33.2 फीसदी लोगों ने हां तो 50.7 फीसदी लोगों ने नहीं कहा. वहीं 16.1 फीसदी लोगों ने कहा पता नहीं. पेपरलीक के मुद्दे और छात्र आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस मांग कर रही है कि पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन के भीतर जवाब दें. सर्वे में सवाल किया गया कि क्या पेपरलीक पर संसद में संतोषजनक चर्चा हुई? इस पर ज्यादातर 39 फीसदी लोगों ने नहीं कहा. वहीं 35.6 फीसदी लोगों का मानना है कि सदन में संतोषजनक चर्चा हुई. 25.3 फीसदी लोगों ने पता नहीं जवाब दिया. इस बीच संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने 6 अगस्त 2026 को अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया, जिसमें संस्थापक अभिजीत दीपके (30) को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया गया है. सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका संगठन के सह-संयोजक होंगे. शहर में स्थित दीपके के आवास पर सीजेपी की मुख्य टीम की दो दिवसीय बैठक के समापन के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की गई. इसके पदाधिकारियों ने कहा कि सीजेपी को फिलहाल राजनीतिक दल में नहीं बदला जाएगा, बल्कि यह जमीनी स्तर पर काम करेगी.
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Aug 6, 2026, 05:10 PM
कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता अवधेश नायक को मध्य प्रदेश राज्य महासचिव नियुक्त किया

कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता अवधेश नायक को मध्य प्रदेश राज्य महासचिव नियुक्त किया

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत के बाद कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर पहला बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. पार्टी ने दतिया के वरिष्ठ नेता अवधेश नायक को प्रदेश कांग्रेस का महासचिव नियुक्त कर यह संकेत दिया है कि अब 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति संगठन को केंद्र में रखकर तैयार की जाएगी. राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि दतिया और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है. मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की सहमति से गुरुवार को अवधेश नायक की नियुक्ति का आदेश जारी किया. आदेश में उनसे पार्टी की नीतियों और संगठनात्मक अनुशासन के अनुरूप प्रदेशभर में संगठन को मजबूत करने की अपेक्षा की गई है. 2026 के दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक कांग्रेस टिकट के सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल थे. हालांकि पार्टी ने अंततः कुंवर घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया. टिकट नहीं मिलने के बावजूद अवधेश नायक ने नाराजगी सार्वजनिक नहीं होने दी और पूरे चुनाव अभियान में संगठन के साथ सक्रिय रहे. बूथ प्रबंधन से लेकर कार्यकर्ताओं के समन्वय और चुनावी रणनीति तक उनकी भूमिका को कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण माना गया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में केवल चुनाव लड़ने वालों को ही नहीं, बल्कि संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं को भी उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिलेगी. दतिया की राजनीति में यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उपचुनाव के बाद जिले में कांग्रेस का नेतृत्व नए सिरे से आकार ले रहा है. पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के सक्रिय राजनीतिक परिदृश्य से अलग होने के बाद संगठन में नेतृत्व के नए चेहरे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। ऐसे में अवधेश नायक की नियुक्ति को कांग्रेस के भविष्य की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि प्रदेश नेतृत्व दतिया में संगठन को किसी एक चेहरे पर निर्भर रखने के बजाय मजबूत टीम के रूप में विकसित करना चाहता है और अवधेश नायक को उसी रणनीति के प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। अवधेश नायक का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से शुरू हुआ. अयोध्या श्री राम मंदिर आंदोलन के दौरान वे जिले में सक्रिय चेहरों में शामिल रहे. इसके बाद भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालते हुए वे नगर पालिका पार्षद बने और वर्ष 2003 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा. राजनीति का एक रोचक संयोग यह भी है कि वर्ष 2003 में जिन कुंवर घनश्याम सिंह से वे चुनाव हारे थे, वर्ष 2026 के उपचुनाव में उन्हीं की जीत सुनिश्चित कराने के लिए कांग्रेस के पक्ष में पूरी ताकत से मैदान में उतरे. बाद में वे उमा भारती के साथ भारतीय जनशक्ति पार्टी (BJSP) में गए। शिवराज सिंह चौहान सरकार में उन्हें मध्यप्रदेश पथ्य पुस्तक निगम का उपाध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी मिला. भाजपा छोड़ने के बाद वर्ष 2023 में अवधेश नायक कांग्रेस में शामिल हुए। उस समय पार्टी ने उन्हें दतिया विधानसभा सीट से उम्मीदवार भी घोषित किया था, लेकिन अंतिम समय में टिकट बदलकर पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बनाया गया. 2026 के उपचुनाव में भी उनका नाम टिकट की दौड़ में प्रमुखता से रहा. इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के निर्णय को स्वीकार किया और पूरी ताकत से चुनाव अभियान में जुटे रहे. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यही अनुशासन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता उनकी नई जिम्मेदारी का सबसे बड़ा आधार बनी. दतिया उपचुनाव की जीत ने कांग्रेस को ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में नया राजनीतिक आत्मविश्वास दिया है. ऐसे में अवधेश नायक को प्रदेश महासचिव बनाना केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों की शुरुआत माना जा रहा है. दतिया में संगठन पर उनकी पकड़, विभिन्न राजनीतिक वर्गों में उनकी स्वीकार्यता और लंबे प्रशासनिक एवं राजनीतिक अनुभव को देखते हुए कांग्रेस उन्हें क्षेत्रीय संगठन विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है.आने वाले समय में यह भी देखने वाली बात होगी कि उनकी भूमिका केवल दतिया तक सीमित रहती है या उन्हें ग्वालियर-चंबल अंचल की चुनावी रणनीति में भी प्रमुख जिम्मेदारी मिलती है. प्रदेश महासचिव बनाए जाने पर अवधेश नायक ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और 2028 में कांग्रेस की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे. भानु प्रकाश शर्मा मध्य प्रदेश के दतिया की खबरों पर नजर रखते हैं. सामाजिक, राजनीतिक और क्राइम की खबरों पर खास पकड़ है.
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Aug 6, 2026, 05:10 PM
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण के बीच पी. एन. सी. इन्फ्राटेक भ्रष्टाचार घोटाले में फंसा

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण के बीच पी. एन. सी. इन्फ्राटेक भ्रष्टाचार घोटाले में फंसा

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी PNC इंफ्राटेक एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है. कंपनी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं. एक्सप्रेसवे के निर्माण में गुणवत्ता की धज्जियां उड़ने की तस्वीरें सामने आई हैं. साथ ही कंपनी पर संभावित ब्लैकलिस्टिंग का खतरा भी मंडरा रहा है. इन सबके बावजूद, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया NHAI ने कंपनी पर मेहरबानी दिखाते हुए उसे 3,500 करोड़ रुपये से अधिक के नए प्रोजेक्ट्स सौंप दिए हैं. इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी BJP के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का पुराना और प्रत्यक्ष कनेक्शन भी सामने आ रहा है, जिससे यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी तूल पकड़ चुका है. गौरतलब है, PNC इंफ्राटेक की शेयरहोल्डिंग और इतिहास में बीजेपी के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का नाम प्रमुखता से जुड़ा रहा है. नवीन जैन खुद इस कंपनी में व्होल-टाइम डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं. समय के साथ वह राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो गए और वर्तमान में भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं, जबकि कंपनी के दैनिक संचालन और नियंत्रण की कमान उनके भाइयों के हाथों में है. कंपनी के प्रमोटर समूह में नाम शामिल होने के कारण अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या राजनीतिक रसूख और प्रभाव के चलते ही विवादों और जांच के घेरे में रहने के बावजूद कंपनी को लगातार नए प्रोजेक्ट्स का तोहफा मिलता रहा है? PNC इंफ्राटेक का विवादों से पुराना नाता रहा है. कंपनी और उसके अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं. 2024 में CBI ने हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित रिश्वत मामले में एक बड़ी FIR दर्ज की थी. इस मामले में NHAI के एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी भी हुई थी. जांच की आंच PNC से जुड़े अधिकारियों तक भी पहुंची थी. वहीं उत्तर प्रदेश में अवैध खनन से जुड़े एक अन्य मामले में कंपनी पर लगभग ₹104 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना लगाए जाने का मामला भी सामने आ चुका है. इससे पहले लखनऊ -आगरा एक्सप्रेसवे के करीब 56 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के दौरान भी घटिया सामग्री के इस्तेमाल और गुणवत्ता संबंधी गंभीर शिकायतें मिली थीं, जिसकी जांच कराई गई थी. कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खोलने वाली एक बेहद अजीबोगरीब तस्वीर सामने आई थी. एक्सप्रेसवे पर सड़क निर्माण के दौरान नमी को सुखाने के लिए पारंपरिक या तकनीकी उपकरणों की बजाय घरेलू टेबल फैन का इस्तेमाल किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इन तस्वीरों को शेयर करते हुए सरकार और निर्माण कंपनी पर तीखा तंज कसा था. सड़क निर्माण की इस हास्यास्पद व्यवस्था ने देश भर में प्रोजेक्ट की इंजीनियरिंग और गुणवत्ता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा… कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल किया जा रहा है ये भी हास्यास्पद है। 2-3 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है उस पर चलने का जोखिम… pic.twitter.com/zfoydUzRAL एक तरफ जहां कंपनी के पुराने कामों की गुणवत्ता जांच के घेरे में है. उस पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, वहीं दूसरी तरफ NHAI ने उसे बड़े प्रोजेक्ट्स से नवाज दिया है. NHAI ने PNC इंफ्राटेक को करीब ₹3,483 करोड़ के दो बड़े हाईवे प्रोजेक्ट सौंपे हैं. इसमें बाराबंकी-मुस्तफाबाद फोर लेन प्रोजेक्ट (तकरीब ₹1,728 करोड़) और मुस्तफाबाद-बिसवां फोर लेन प्रोजेक्ट (तकरीब ₹1,755 करोड़) शामिल हैं. ये दोनों महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में NH-927 पर बनाए जाने हैं. अब सवाल ये उठता है कि जब कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे और अन्य प्रोजेक्ट्स में कंपनी के लचर प्रदर्शन, घटिया निर्माण और सीबीआई जांच के रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं, तो क्या नए ठेके देने से पहले कंपनी के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया? यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है जो देश के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर उंगली उठाता है.
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Aug 6, 2026, 05:05 PM
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव, तीन सांसद एनसीपीआई में शामिल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव, तीन सांसद एनसीपीआई में शामिल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुर्शिदाबाद के तीन सांसदों अबू ताहिर खान, खलीलु्र रहमान और यूसुफ पठान की वजह से एक छोटा लेकिन अहम बदलाव देखने को मिल रहा है. ये तीनों पहले TMC से अलग हुए एक बड़े गुट के साथ 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' (NCPI) में शामिल हुए थे. इसके बाद इन सांसदों का सत्ताधारी BJP के नेतृत्व वाले केंद्रीय गठबंधन NDA के साथ औपचारिक रूप से न जुड़ने का फैसला एक गहरी रणनीतिक तैयारी को दिखाता है. केंद्रीय गठबंधन में शामिल होने के बजाय इन तीनों ने सोच-समझकर दूरी बनाए रखने का रुख अपनाया है. वे नई दिल्ली में NDA की उच्च-स्तरीय संसदीय बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं, बल्कि राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के साथ सिर्फ़ प्रशासनिक मुद्दों पर ही बातचीत कर रहे हैं. जानबूझकर चुप्पी साधे रखने की यह रणनीति तब साफ़ दिखी जब इन नेताओं से उनके भविष्य के राजनीतिक सफ़र के बारे में सवाल पूछे गए. आजतक से बात करते हुए अबू ताहिर खान और खलीलु्र रहमान दोनों ने ही राजनीतिक गठबंधनों पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने कहा, "हमें गृह मंत्री के साथ दो मुद्दों पर चर्चा करनी थी हम किसी और मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकते." इससे पता चलता है कि वे पार्टी के बड़े गठबंधनों के बजाय खास मुद्दों पर बातचीत को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं. NCPI के तीनों सांसदों ने पश्चिम बंगाल की मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. सिर्फ़ विकास और अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े मामलों जैसे वोटर लिस्ट में सुधार और स्थानीय प्रशासन पर चर्चा करके ये सांसद खुद को विचारधारा से समझौता करने के आरोपों से बचाने की कोशिश कर रहे हैं. इन तीनों सांसदों का केंद्रीय गठबंधन में पूरी तरह शामिल होने से इनकार करना राज्य के राजनीतिक भविष्य पर कई तरह का असर डाल सकता है. मुर्शिदाबाद बंगाल के सबसे संवेदनशील डेमोग्राफिक इलाकों में से एक बना हुआ है. अल्पसंख्यक बहुल सीटों के प्रतिनिधियों के लिए BJP को औपचारिक रूप से अपनाने का मतलब है ज़मीनी स्तर पर समर्थकों और मतदाताओं को खो देने का खतरा मोल लेना. इसलिए ये तीन सांसद केंद्र के सभी फैसलों का आंख बंद कर सपोर्ट नहीं कर रहे हैं. इसका मैसेज यह है कि स्थानीय डेमोग्राफिक हालात राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन बनाने की कोशिशों पर असर डाल सकते हैं. 20 सदस्यों वाले NCPI ग्रुप के अंदर एक स्वतंत्र छोटे ग्रुप का उभरना बंगाल में बागी गुट को एकजुट बनाए रखने की चुनौतियों को दिखाता है. जहां राष्ट्रीय पार्टियां अक्सर अलग-अलग गुटों को एक वोट बैंक में बदलने की कोशिश करती हैं, वहीं अलग-अलग सांसद पार्टी के सामूहिक फैसलों के बजाय अपने खास चुनावी क्षेत्रों के समीकरण को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं. नीतिगत मांगों के लिए केंद्रीय मंत्रालयों और स्थानीय विकास कार्यों के लिए राज्य के प्रशासनिक तंत्र के साथ बातचीत बनाए रखकर, ये नेता मुद्दों पर आधारित तटस्थता का एक नया तरीका अपना रहे हैं। यह तरीका बंगाल की राजनीति के पारंपरिक दो-पक्षीय ढाँचे को चुनौती देता है और राज्य व केंद्र के बड़े नेताओं को पार्टी के प्रति मानी जाने वाली वफ़ादारी पर निर्भर रहने के बजाय खास नीतिगत मुद्दों पर बातचीत करने के लिए मजबूर करता है। नीतिगत मांगों के लिए केंद्र सरकार और स्थानीय विकास कार्यों के लिए राज्य के प्रशासनिक तंत्र के साथ बातचीत बनाए रखकर ये नेता मुद्दों पर आधारित तटस्थता का एक नया तरीका अपना रहे हैं. यह तरीका बंगाल की राजनीति के पारंपरिक दो-पक्षीय ढांचे को चुनौती देता है और राज्य और केंद्र के बड़े नेताओं को पार्टी की वफ़ादारी पर निर्भर रहने के बजाय खास नीतिगत मुद्दों पर बातचीत करने के लिए मजबूर करता है. जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल भविष्य के चुनावी चक्र की ओर बढ़ रहा है, मुर्शिदाबाद के इन तीन सांसदों की रणनीतिक स्थिति एक संकेत का काम करती है. उनकी रणनीति राज्य की राजनीति की एक अहम सच्चाई को उजागर करती है. मजबूत स्थानीय पहचान और संवेदनशील डेमोग्राफिक संतुलन वाले इलाकों में संसदीय गठबंधन शायद ही कभी पूरी तरह पक्का होता है और जमीनी स्तर की मजबूती ही केंद्रीय रणनीति का आधार बनती है.
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Aug 6, 2026, 05:05 PM
दतिया उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचे

दतिया उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचे

दतिया उपचुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद बीजेपी के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा गुरुवार (6 अगस्त) को दिल्ली पहुंचे. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी नेता से मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा है और अभी मिलने का भी कोई विचार नहीं है. उन्होंने कहा कि वो अपने दोस्त आसाराम अहिरवार जो दतिया जिले से विधायक रहे हैं, उनसे मुलाकात हुई और उनके स्वास्थ्य का हाल चाल जाना. बता दें कि दतिया उपचुनाव में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था और पार्टी हार गई. इस सीट से नरोत्तम मिश्रा तीन बार विधायक रह चुके हैं. 2023 का विधानसभा चुनाव वो हार गए थे. ऐसे में उपचुनाव नतीजों के बाद नरोत्तम मिश्रा के दिल्ली दौरे ने सियासी हवा गरम कर दी. कहा गया कि पार्टी के बड़े नेताओं से उनकी मुलाकात हो सकती है और आगे के सियासी भविष्य पर भी चर्चा हो सकती है. हालांकि, ऐसे दावों को नरोत्तम मिश्रा ने खारिज कर दिया. क्या संगठन में किसी बदलाव की आहट है, इस पर उन्होंने कहा, "मेरी जानकारी में इस तरह की कोई बात नहीं है." सीएम मोहन यादव की संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात पर उन्होंने कहा, "बिल्कुल मिले होंगे, मेरी जानकारी में नहीं है." क्या आपकी किसी बड़े नेता से मुलाकात होने वाली है, इस पर उन्होंने कहा, "मांगा ही नहीं है (समय) तो मिलेगा कहां से." बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की संभावना पर उन्होंने कहा, "न मुलाकात की है और न समय मांगा है." जब उनसे सवाल किया गया कि कल (7 अगस्त) की आपकी क्या योजना है तो इस पर उन्होंने कहा, "कल भोपाल जाने की योजना है. जैसे ही टिकट मिल जाएगा, चला जाऊंगा." अगर टिकट नरोत्तम मिश्रा को मिलता तो दतिया में बीजेपी की जीत होती, ऐसी चर्चा पर उन्होंने कहा, "अगर और मगर का कोई जवाब नहीं होता और संभावनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की जाती. पार्टी ने जो सोचा है सही सोचा है. मैं ऐसा मानता हूं." आगे का पड़ाव क्या है, इस पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा, "एक कार्यकर्ता के रूप में पिछले ढाई साल से हूं, आगे भी कार्यकर्ता के रूप में रहना चाहता हूं. पार्टी काम देती रही. महाराष्ट्र चुनाव में महाराष्ट्र भेज दिया था, दिल्ली चुनाव में दिल्ली भेजा था, बिहार चुनाव में बिहार भेजा था, ऐसे प्रदेशों में चुनाव में काम पर भेजते रहे. बाकी किसी पद की इच्छा नहीं है." सनातन कुमार 10 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. साल 2016 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं और मौजूदा वक्त में एसोसिएट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. अपने एक दशक के अनुभव में उन्हें टीम लीड और डिजिटल मीडिया की बारीक समझ है. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज से 2015 में हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति, चुनाव, सामाजिक विषयों और साहित्य में रुचि है. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर जोर देते हैं. राजनीति से जुड़ी खबरों पर लगातार लिख रहे हैं. संपर्क करें: Email: sanatank@abpnetwork.com
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Aug 6, 2026, 05:04 PM
पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड को एक्सप्रेसवे निर्माण और राजनीतिक संबंधों को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा

पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड को एक्सप्रेसवे निर्माण और राजनीतिक संबंधों को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवाद जारी है. इस बीच अब निर्माण कंपनी PNC Infratech Limited के राजनीतिक और कारोबारी कनेक्शन की भी चर्चा तेज हो गई है. कंपनी जहां एक तरफ एक्सप्रेसवे निर्माण में खामियों और जांच का सामना कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी के प्रमोटर ग्रुप और बीजेपी के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के संबंधों को लेकर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है. सवाल ये है कि क्या कंपनी को अपने राजनीतिक प्रभाव के चलते अलग-अलग मामलों में राहत मिलती रही? क्या जांच और विवादों के बावजूद कंपनी को लगातार बड़े सरकारी प्रोजेक्ट मिलते रहे? PNC Infratech की शेयरहोल्डिंग में राज्यसभा सांसद नवीन जैन का नाम प्रमोटर ग्रुप से जुड़े शेयरहोल्डर्स में शामिल रहा है. नवीन जैन कंपनी में व्होल टाइम डायरेक्टर रह चुके हैं. बाद में सक्रिय राजनीति में आने के बाद उन्होंने कंपनी के पद से दूरी बनाई. इसके बाद कंपनी के ऑपरेशंस और प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके परिवार के दूसरे सदस्यों के पास रही. साल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए अपने चुनावी हलफनामे में नवीन जैन ने PNC Infratech में अपनी हिस्सेदारी और कंपनी के कई करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की जानकारी दी थी. अब सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक प्रभाव के चलते कंपनी को अलग-अलग मामलों में राहत मिलती रही? क्या कंपनी के खिलाफ हुई जांचों में मिली क्लीन चिट सिर्फ विभागीय और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रही या इसके पीछे कोई और प्रभाव भी काम करता रहा? PNC Infratech पहले भी विवादों में रह चुकी है. साल 2024 में CBI ने हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़े रिश्वत मामले में केस दर्ज किया गया था. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि NHAI अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके प्रोजेक्ट से जुड़े काम और भुगतान को प्रभावित करने की कोशिश की गई. इस मामले में एक NHAI जनरल मैनेजर-कम-प्रोजेक्ट डायरेक्टर को गिरफ्तार किया गया था. PNC Infratech से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई थी. तब कंपनी से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. इस मामले में कंपनी से जुड़े योगेश जैन का नाम भी सामने आया था. सीबीआई ने अधिकारियों के साथ सांठगांठ और प्रोजेक्ट से जुड़े कामों में गड़बड़ियों के आरोपों की जांच की थी. हालांकि किसी भी आरोपी की अंतिम जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के नतीजों के आधार पर ही तय होगी. PNC Infratech का नाम इससे पहले भी कई मामलों में सामने आ चुका है. उत्तर प्रदेश में अवैध खनन से जुड़े मामले में कंपनी पर करीब 104 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाए जाने का मामला सामने आया था. इसके अलावा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के करीब 56 किलोमीटर हिस्से के निर्माण को लेकर भी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद जांच कराई गई थी. इन मामलों में कंपनी को अलग-अलग जांच प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ा और कई मामलों में उसे राहत भी मिली. कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर कंपनी के प्रदर्शन पर सवाल उठने और जांच के बीच ही PNC Infratech को NHAI से करीब 3,483 करोड़ के दो बड़े हाईवे प्रोजेक्ट मिले हैं. इनमें बाराबंकी-मुस्तफाबाद फोर लेन हाईवे प्रोजेक्ट (1,728 करोड़ रुपए) और मुस्तफाबाद–बिसवां फोर लेन हाईवे प्रोजेक्ट (1,755 करोड़) शामिल हैं. दोनों प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में NH-927 पर बनाए जाने हैं. अब सवाल ये उठ रहा है कि जब कंपनी के प्रदर्शन और पुराने मामलों को लेकर जांच और समीक्षा चल रही है, तो क्या नए ठेके देने से पहले उसके रिकॉर्ड और मौजूदा कार्रवाई को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखा गया? PNC Infratech को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कंपनी पर लगे आरोपों, जांच और विवादों के बावजूद उसे लगातार बड़े प्रोजेक्ट और राहत कैसे मिलती रही. कंपनी के राजनीतिक कनेक्शन, पुराने मामलों और नए ठेकों के बीच अब ये चर्चा तेज है कि क्या प्रभावशाली संपर्कों ने कंपनी को फायदा पहुंचाया या फिर हर मामले में उसे सिर्फ कानूनी और विभागीय प्रक्रिया के तहत राहत मिली?
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Aug 6, 2026, 04:41 PM
भाजपा विधायक ने कांवरिया की विवादित टिप्पणी पर राजनेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

भाजपा विधायक ने कांवरिया की विवादित टिप्पणी पर राजनेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कांवड़ियों पर कथित विवादित टिप्पणी को लेकर सियासत मौलाना साजिद रशीदी पर कार्रवाई की मांग की है.उन्होंने लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में तहरीर देकर मौलाना पर रासुका लगाने की मांग की है. विधायक नंद किशोर गुर्जर ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले हैं और ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. तहरीर में नंद किशोर गुर्जर ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोग कांवड़ियों के वेश में उपद्रव फैलाकर कांवड़ यात्रा को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं. इसकी जांच होनी चाहिए. और जो भी दोषी हो उसके ऊपर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. ताकि कोई आस्था से खिलवाड़ ना कर सके. बीजेपी विधायक ने पुलिस से साजिद रशीदी के खिलाफ रासुका के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हुए कहा कि इससे भविष्य में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयान देने वालों पर रोक लगेगी और प्रदेश में कानून-व्यवस्था व सामाजिक सौहार्द बना रहेगा. उन्होंने इस मामले की शिकायत हज़रतगंज थाने में और उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी भेजी है. हज़रतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि तहरीर दी गई है. मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल यह मामला अब तूल पकड़ता हुआ नजर आ रहा है. विधायक नंद किशोर गुर्जर अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं. एक बार फिर उन्होंने मौलाना के खिलाफ मोर्चा खोलकर कार्रवाई की मांग कर दी है. जबकि मौलाना साजिद रशीदी भी विवादित बयान देकर सुर्ख़ियों में रहते हैं. निखिल साहू (Nikhil sahu) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते 8 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं. पत्रकारिता में स्नातक किया है. 6 वर्षों का प्रिंट मीडिया का अनुभव है. जिसमें दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम, 4पीएम और स्वतंत्र प्रिंट शामिल है. डिजिटल मीडिया में गहरी पकड़ है, राजनीति, क्राइम, डेवलपमेंट और स्वास्थ की खबरों पर खास पकड़ है. ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग का अनुभव है.
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Aug 6, 2026, 04:29 PM
राहुल गांधी ने रांची में जे. पी. एस. सी. मेस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन का आश्वासन दिया

राहुल गांधी ने रांची में जे. पी. एस. सी. मेस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन का आश्वासन दिया

रांची में JPSC गड़बड़ी को लेकर 12 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फोन पर बात की. उन्होंने मंच पर मौजूद छात्रों से बात की और हर संभव मदद करने की बात कही है. उन्होंने छात्रों से कहा, 'आपकी लड़ाई मेरी लड़ाई है. छात्रों की हक के लिए मैं खड़ा हूं.' राहुल गांधी ने छात्रों से कहा कि वह उनकी मांगों के साथ हैं और इसे लेकर झारखंड सरकार से बात करेंगे. राहुल गांधी ने ये भी आश्वासन दिया है कि डेलिगेशन स्तर की जो वार्ता होगी उसमें छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना जाए. छात्र नेता रवींद्र पासवान ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से फोन पर बात की और वहां हालातों का जानकारी दी. रवींद्र पासवान ने कहा, 'मैंने राहुल गांधी को बताया कि कैसे परीक्षा माफिया फल-फूल रहा है. मैंने उनसे कहा कि कांग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है इसलिए उसे अपना रुख साफ करना चाहिए. राहुल गांधी जी ने मुझसे कहा कि अपनी मांगें मुझे WhatsApp पर भेजें. हम इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं और जो कुछ भी कर सकते हैं वो करेंगे. उन्होंने (राहुल गांधी) ये भी कहा कि वह सरकार से बात करेंगे.' छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा, 'मैं राहुल गांधी जी से अपील करता हूं कि अगर आप सच में छात्रों के साथ खड़े हैं तो तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट करें और सुनिश्चित करें कि सरकार जल्द से जल्द हमारी मांगें मान लें. अगर आपके दखल के बावजूद सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आपके लिए इस गठबंधन का हिस्सा बने रहने का कोई नैतिक आधार नहीं रह जाता. नैतिक आधार पर आपको छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए. हमें भरोसा दिलाया जा रहा है कि हमारी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, लेकिन हम सिर्फ ज़ुबानी आश्वासन स्वीकार नहीं करेंगे.' उन्होंने कहा, 'कांग्रेस भी इस सरकार का उतना ही हिस्सा है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरह ही इसकी भी उतनी ही जिम्मेदारी है. जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाते रहेंगे.' कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इससे पहले रांची में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर कहा कि झारखंड समेत सभी सरकारों को छात्रों की बात सुननी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा, ‘चाहे कांग्रेस की सरकार हो, केंद्र सरकार हो या झारखंड की सरकार, हर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.’ कांग्रेस झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की सहयोगी है. अवधेश कुमार मिश्र की पत्रकारिता 2009 में पोस्ट प्रोडक्शन एसिस्टेंट के तौर पर दूरदर्शन से शुरू हुई. जनवरी 2010 से साधना न्यूज़ में रिपोर्टर के तौर पर अवधेश ने मेनस्ट्रीम न्यूज़ मीडिया में एंट्री ली करियर के नए पायदान पर पहुंचने लगे. रिपोर्टिंग और स्टिंग ऑपरेशन्स के बाद अवधेश मिश्रा ने साधना न्यूज़ उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड में एंकरिंग शुरु की. साधना न्यूज़ के बाद न्यूज़ 24 और ज़ी मीडिया में अवधेश ने कार्य किया. जी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ और जी उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड में अवधेश ने अपने 7 साल के दौर में हर विधा पर काम किया. एंकरिंग के साथ ही साथ अवधेश की रिपोर्टिंग सराही भी गई और कई बार चर्चा का विषय बनी. बीते 5 साल से अवधेश एबीपी नेटवर्क में एंकर कम प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं. Abp गंगा में 'उत्तर मांगे प्रदेश ' नाम का टॉप रेटिंग डिबेट शो किया। बीते 2 वर्ष से अवधेश ABP News में एंकरिंग और रिपोर्टिंग कर रहें हैं. 2010 के बाद से अवधेश ने सभी महाकुम्भ कवर किये हैं. अवधेश कुमार मिश्र संस्कृत और मॉस कम्युनिकेश से एम.ए किया है साथ ही साथ वो बीएड और एमएड के भी डिग्रीधारक हैं. अवधेश मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले हैं.
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Aug 6, 2026, 04:18 PM
पारिवारिक कलहः संतोष गौड़ ने अपने परिवार पर हमलों के पीछे विधायक प्रकाश गौड़ का आरोप लगाया

पारिवारिक कलहः संतोष गौड़ ने अपने परिवार पर हमलों के पीछे विधायक प्रकाश गौड़ का आरोप लगाया

संतोष गौड़ ने गुरुवार को आरोप लगाया कि रूपा रेड्डी की बेटी से शादी करने का फैसला करने के बाद राजेंद्रनगर में उनके परिवार पर लगातार हमले और दबाव डाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि ये घटनाएं शादी को रोकने के लिए रची गई थीं और इसके लिए MLA प्रकाश गौड़ को जिम्मेदार ठहराया. संतोष ने बताया कि कुछ लोग मणिकोंडा में रूपा रेड्डी के घर गए थे और वहां हाथापाई हुई. उन्होंने इस घटना के पीछे अपने पिता का हाथ होने का भी आरोप लगाया. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उनके पारिवारिक घर पर हमला हुआ और 'डायल-100' पर सूचना देने के बावजूद पुलिस ने उनकी शिकायत ठीक से दर्ज नहीं की. संतोष ने आगे आरोप लगाया कि नरसिंगी पुलिस राजनीतिक दबाव में उनके खिलाफ गैर-कानूनी मामले दर्ज कर रही है. उन्होंने कहा कि वे मीडिया के पास इसलिए आए क्योंकि उनकी जान को खतरा है. मीडिया से बात करते हुए रूपा रेड्डी ने कहा कि उनके खिलाफ मामले दर्ज करने और उन्हें जेल भेजने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ये सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है. वे रंगारेड्डी जिले के राजेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं. वर्तमान में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भारत राष्ट्र समिति पार्टी से जीत हासिल की. वे 2009 से लगातार राजेंद्रनगर से निर्वाचित विधायक हैं.
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Aug 6, 2026, 04:07 PM
देहरादून में अग्निवीर योजना के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

देहरादून में अग्निवीर योजना के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

देहरादून में गुरुवार (6 अगस्त) को अग्निवीर योजना के खिलाफ कांग्रेस का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला. तेज बारिश के बावजूद सैकड़ों पूर्व सैनिक, कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. कांग्रेस कार्यालय से शुरू होकर लैंसडाउन चौक तक निकाली गई इस आक्रोश रैली में केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. यह रैली उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस की पूर्व सैनिक इकाई की ओर से कांग्रेस पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी की अध्यक्षता में आयोजित की गई. इस दौरान चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे. रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी शुरुआत से ही अग्निवीर योजना के खिलाफ रही है. नेताओं ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही सबसे पहले इस योजना को खत्म किया जाएगा और सेना में पहले की तरह स्थायी भर्ती प्रक्रिया को बहाल किया जाएगा. कर्नल राम रतन सिंह नेगी ने उत्तराखंड के सैन्य इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही धरती है जिसने देश को दो सेना प्रमुख और वीर चक्र से सम्मानित जसवंत सिंह रावत जैसे वीर सपूत दिए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे गौरवशाली प्रदेश में 4 साल जैसी अस्थायी भर्ती थोपना सरासर अन्याय है. उनके मुताबिक, अग्निवीर योजना दशकों पुरानी सैन्य परंपरा को खत्म कर रही है और जवानों को महज चार साल बाद अनिश्चित भविष्य की दहलीज पर छोड़ देती है. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उनका कहना था कि अग्निवीर योजना के खिलाफ और बेरोजगार युवाओं के हितों की लड़ाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी. साथ ही सरकार को चेतावनी देते हुए कांग्रेस ने कहा कि यदि अग्निवीर योजना पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो प्रदेश के कोने-कोने में इसी तरह के आंदोलन आयोजित किए जाएंगे. आलोक सेमवाल उत्तराखंड के देहरादून की खबरों पर नजर रखते हैं. एबीपी लाइव के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन BA hons मास कम्यूनिकेशन HNB गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की हैं.
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Aug 6, 2026, 03:36 PM
पीएम मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाने पर विवाद के बीच भारत ने मेटा अमेरिकी कानूनों से कहा कि वे स्थानीय स्तर पर काम नहीं कर सकते

पीएम मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाने पर विवाद के बीच भारत ने मेटा अमेरिकी कानूनों से कहा कि वे स्थानीय स्तर पर काम नहीं कर सकते

मेटा को भारत सरकार ने स्पष्ट कह दिया है कि भारत में अमेरिकी कानून नहीं चल सकता है. यह बयान तब दिया है, जब एल्गोरिदम पर मेटा और सरकार के बीच चर्चा छिड़ गई है. यह पूरा विवाद पीएम नरेंद्र मोदी के फेसबुक पोस्ट को थोड़ी देर के लिए हटाने जाने के मामले से जुड़ा है. ऐसे में सरकार ने मेटा के अधिकारियों से पूछा है कि आईटी कंपनी भारतीय कानूनों का पालन कर रही है या नहीं. अधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि गुरुवार 6 अगस्त 2026 सरकार और मेटा की वैश्विक टीम के बीच इस मुद्दे पर बातचीत अब भी जारी है. इस दौरान मेटा के अधिकारियों से कंपनी के एल्गोरिद्म, अनुपालन व्यवस्था में पर्याप्त संतुलन एवं नियंत्रण और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों (Legality) को पूरा करने के लिए सुरक्षा उपायों के बारे में भी सवाल किए जाएंगे. सूत्रों ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव गुरुवार को मेटा की वैश्विक टीम से मुलाकात कर रहे हैं. इसके बाद मंत्रालय की टेक्निकल टीमों के साथ बातचीत आगे भी जारी रहेगी. इससे पहले अमेरिका स्थित इस प्रौद्योगिकी कंपनी ने मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने की घटना पर माफी मांगी थीं. साथ ही, बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री, डीपफेक और भुगतान के बदले कुछ सामग्री को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भी चूक स्वीकार की थी. मेटा के Global Affairs Chief जोएल कैपलन ने एक लिखित बयान में भी दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट पर लगे बैन की गलती के लिए मंत्री से माफी मांगी. सूत्रों का कहना है, 'मेटा की तरफ से यह माफी कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग की ओर से आई थी. प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पर साझा की गई एक पोस्ट को कुछ देर के लिए हटा दिया गया था. हालांकि, कुछ समय बाद ही मेटा ने इस पोस्ट को तकनीकी चूक बताते हुए बहाल कर दिया था.' सरकारी सूत्रों ने जानकारी दी कि मेटा टीम के साथ मीटिंग का दौर 3 से 4 दिन चलेगा. मेटा की ग्लोबल टीम कुछ और दिन भारत में रहेगी. तीन से चार और मीटिंग होने की उम्मीद है. बातचीत के अगले दौर में व्हाट्सएप से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी. इन बैठकों का मुख्य एजेंडा यह पता लगाना है कि क्या मेटा के प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों का पालन कर रहे हैं. यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने दी है. सरकारी सूत्रों की मानें तो भारत में प्लेटफॉर्म्स को अमेरिकी कानूनों के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता. ये तकनीकी मामले हैं. हर पहलू को समझना जरूरी है. मकसद कानून का इस्तेमाल समाज के भले के लिए करना है. नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.
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Aug 6, 2026, 03:32 PM
ईसाई विरोध के बीच भारत विदेशी दान को विनियमित करने वाला विधेयक पेश करने के लिए तैयार

ईसाई विरोध के बीच भारत विदेशी दान को विनियमित करने वाला विधेयक पेश करने के लिए तैयार

केंद्र सरकार अगले सप्ताह लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill 2026) पेश कर सकती है। इस बीच देश के कई चर्च और ईसाई संगठन इस प्रस्तावित कानून का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह बिल उनके संस्थानों को निशाना बनाता है और उनके अधिकारों पर असर डाल सकता है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। ईसाई संगठनों की सबसे बड़ी चिंता बिल के उस प्रावधान को लेकर है, जिसमें सरकार को एक 'डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी' या नामित प्राधिकरण नियुक्त करने का अधिकार दिया जाएगा। अगर किसी संस्था का FCRA लाइसेंस रद्द हो जाता है, वह स्वयं लाइसेंस छोड़ देती है या उसका नवीनीकरण नहीं होता, तो यह प्राधिकरण उस संस्था के प्रबंधन और विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकेगा। देश में कई ईसाई संस्थाएं स्कूल, अस्पताल, अनाथालय और सामुदायिक केंद्र चलाती हैं। इन संस्थाओं का कहना है कि उनके कई सामाजिक सेवा कार्य विदेशी सहायता पर निर्भर हैं। उनका मानना है कि यदि यह बिल लागू हुआ तो इन सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है और लोगों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने भी इस बिल के प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि प्रस्तावित कानून के तहत सरकार उन संपत्तियों पर भी स्थायी नियंत्रण कर सकती है, उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित कर सकती है या बेच सकती है, जिन्हें वर्षों से विदेशी और घरेलू दोनों तरह के फंड से विकसित किया गया है। वहीं, केरल लैटिन कैथोलिक एसोसिएशन (KLCA) ने कहा कि इस बिल में बिना संबंधित पक्षों से पर्याप्त चर्चा किए संशोधन किए गए हैं। संगठन का कहना है कि इससे उन संस्थाओं में अनिश्चितता बढ़ेगी, जो लंबे समय से कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से काम कर रही हैं। ईसाई समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात कर बिल को वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग की। गृह मंत्री ने उनकी बातें ध्यान से सुनीं और आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा तथा सरकार के अन्य सदस्यों से भी इस विषय पर चर्चा की जाएगी। वहीं, गृह मंत्रालय का कहना है कि यह बिल किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। सरकार के अनुसार यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक समान कानून है, जिसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग की बेहतर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि जो धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं नियमों का पालन करेंगी, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है और वे पहले की तरह अपना काम जारी रख सकेंगी। अमेरिका के कुछ सांसदों ने भी इस प्रस्तावित कानून पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इससे भारत और अमेरिका के संबंधों पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने दावा किया कि यह संशोधन भारतीय सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अधिकार देगा और इसे उन्होंने ईसाइयों के खिलाफ स्पष्ट कदम बताया। प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल सरकार को ऐसी संस्थाओं के विदेशी फंड और उनसे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन के लिए 'डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी' बनाने का अधिकार देता है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो जाए, समाप्त हो जाए या नवीनीकृत न किया जाए। हालांकि बिल में यह भी कहा गया है कि यदि किसी संपत्ति का उपयोग पूजा स्थल के रूप में होता है तो उसके धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना नामित प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा, कानून के उल्लंघन पर अधिकतम सजा को पांच साल की जेल से घटाकर एक साल करने का भी प्रस्ताव है। FCRA पोर्टल के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 तक देश में 14,449 सक्रिय FCRA प्रमाणपत्र, 22,498 रद्द और 15,212 प्रमाणपत्र नवीनीकरण नहीं होने के कारण समाप्त हो चुके हैं।
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Aug 6, 2026, 03:30 PM
गढ़चिरौली पुल ढहने से मूसलाधार बारिश, कोठी-कोरानेर पुल का हुआ उद्घाटन

गढ़चिरौली पुल ढहने से मूसलाधार बारिश, कोठी-कोरानेर पुल का हुआ उद्घाटन

महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में पिछले एक सप्ताह से जारी मूसलाधार बारिश के कारण बांदिया नदी में भीषण बाढ़ आ गई है. इस बाढ़ के कारण दक्षिण गडचिरोली के कोठी-कोरणार पुल का बड़ा हिस्सा गिरकर पानी में बह गया. खास बात ये है कि इस पुल का उद्घाटन महज तीन साल पहले ही तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और जिले के पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों हुआ था. पहले ही बड़े बाढ़ में पुल के ढहने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है. इस घटना के चलते गडचिरोली से छत्तीसगढ़ के बीच का यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है. इस पुल के निर्माण के लिए साल 2019 में 4 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था और ठेकेदार मिथिलेश मिश्रा को ये काम सौंपा गया था. बाद में पुल की लंबाई बढ़ाए जाने के कारण 2022-2023 के दौरान इसका निर्माण पूरा हुआ. 15 अगस्त 2023 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और जिले के पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों और तत्कालीन खाद्य और औषधि प्रशासन मंत्री धर्मराव बाबा आत्राम की प्रमुख मौजूदगी में इस पुल का 'क्रांतिवीर बाबुराव शेडमाके पुल' के रूप में उद्घाटन किया गया था. उद्घाटन के महज तीन के भीतर ही पुल का बाढ़ में बह जाना लोक निर्माण विभाग की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली, तकनीकी निगरानी और ठेका प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है. करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस पुल के इतने कम समय में ही ध्वस्त हो जाने से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और आजाद समाज पार्टी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है. इन दलों ने मांग की है कि इस मामले में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षक अभियंता, तत्कालीन कार्यकारी अभियंता, दूसरे जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए.
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 03:23 PM
राजनेताओं ने भारत में कथित रूप से अवैध क्रशर संयंत्र का निरीक्षण किया

राजनेताओं ने भारत में कथित रूप से अवैध क्रशर संयंत्र का निरीक्षण किया

विधायक विक्रम मंडावी और सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी ने बीजापुर-सुकमा सीमा पर स्थित ग्राम तुमलपाड़ पहुंचकर वहां संचालित कथित अवैध गिट्टी क्रेशर प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में स्थापित क्रेशर प्लांट के लिए न तो ग्राम सभा की सहमति ली गई और न ही पंचायत से विधिवत अनुमति प्राप्त की गई। उनका कहना है कि प्लांट बिना अनुमति के संचालित हो रहा है। दिन-रात मशीनों के संचालन से धूल प्रदूषण बढ़ रहा है, जंगलों की कटाई हो रही है और गिट्टी निकालने के लिए बारूद से ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे आसपास के ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों ने नेताओं से प्लांट को तत्काल बंद कराने की मांग की। विधायक विक्रम मंडावी ने आरोप लगाया कि बस्तर में अवैध उत्खनन सरकारी संरक्षण में हो रहा है और नियम-कानूनों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सवाल किया कि क्या आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना क्रेशर प्लांट संचालित किया जा सकता है? क्या वन क्षेत्र में वन विभाग की एनओसी के बिना ऐसा प्लांट चल सकता है? साथ ही उन्होंने पूछा कि बिना पुलिस विभाग की अनुमति या जानकारी के ब्लास्टिंग कैसे की जा रही है। मंडावी ने कहा कि यदि संबंधित विभागों से अनुमति नहीं है तो यह प्लांट किसकी अनुमति और संरक्षण में संचालित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद से बस्तर के खनिज संसाधनों का दोहन बढ़ा है और सरकार इस पर कार्रवाई नहीं कर रही है। सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरीश कवासी ने भी आरोप लगाया कि तुमलपाड़ में कथित तौर पर अवैध रूप से गिट्टी का उत्खनन कर बिक्री की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्राम सभा और पंचायत कानूनों की अनदेखी कर रही है तथा बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को उद्योगपतियों के हवाले करने का काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्रेशर प्लांट बंद नहीं किया गया तो कांग्रेस आंदोलन तेज करेगी। निरीक्षण के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर के अध्यक्ष लालू राठौर, जिला पंचायत सुकमा की अध्यक्ष सोयम मंगम्मा, जिला पंचायत सदस्य नीना रावतीया उद्दे, जनपद सदस्य मनोज अवलम, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम, महामंत्री पुरुषोत्तम सल्लुर, वेणुगोपाल राजू, प्रवीण डोंगरे, बब्बू राठी, मुन्ना कुरसम, रामलू सोढ़ी, गुड्डू कोरसा, विनोद तालुकदार, वीरेंद्र वासम, कोसा अवलम, शंकर खटबिना, सुकदास, लक्ष्मण कोरसा, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बबिता माडवी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अदम्मा मड़कम, ब्लॉक अध्यक्ष सुरेश पोंदी, वरिष्ठ कांग्रेसी रंजू कश्यप सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, ग्रामीण और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 03:21 PM
कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में कार्यकारी विभागों का पुनर्गठन किया

कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में कार्यकारी विभागों का पुनर्गठन किया

हाल ही में नई दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व की बैठक में संगठन को मजबूत और सक्रिय बनाने पर मंथन हुआ था। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों की कार्यकारिणियों को भंग कर पुनर्गठन का निर्णय लिया गया। डॉ. संजय कामले की नियुक्ति इसी प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।विज्ञापनदतिया जीत के बाद कांग्रेस का दिल्ली में मंथन, कई जिलाध्यक्षों पर गिर सकती है गाजविज्ञापनप्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में सभी विभागों और प्रकोष्ठों की नई कार्यकारिणियों की चरणबद्ध घोषणा की जाएगी। संगठन को अधिक प्रभावी, सक्रिय और जनसरोकारों से जोड़ने के उद्देश्य से यह पुनर्गठन किया जा रहा है।कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि दतिया उपचुनाव की जीत ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा किया है। अब इसी ऊर्जा को संगठनात्मक मजबूती में बदलने की रणनीति बनाई जा रही है। कांग्रेस कमेटी से लेकर ब्लॉक, मंडल और जिला स्तर तक संगठन को अधिक सक्रिय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 03:18 PM
जिला अस्पताल में निर्विरोध चुनाव, नई कार्यकारी समिति का चुनाव

जिला अस्पताल में निर्विरोध चुनाव, नई कार्यकारी समिति का चुनाव

जिला चिकित्सालय के रेडक्रॉस भवन में दोपहर दो बजे चुनाव अधिकारियों ने निर्वाचित पदाधिकारियों की घोषणा की। चुनाव अधिकारी डॉ. रामकिशोर ने बताया कि केंद्रीय कार्यकारिणी के निर्देश पर कराई गई चुनाव प्रक्रिया में सभी पदों पर केवल एक-एक नामांकन पत्र मिले। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।विज्ञापननई कार्यकारिणी में जिला महिला चिकित्सालय की डॉ. प्रियंका जैन महिला उपाध्यक्ष बनी हैं। सामान्य उपाध्यक्ष के पद पर सीएचसी खंडासा के डॉ. मदन कुमार बरनवाल और 50 बेड संयुक्त चिकित्सालय देवगांव के डॉ. आलोक कुमार यादव चुने गए हैं। जिला चिकित्सालय (पुरुष) के डॉ. विजय हरि आर्या केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य, डॉ. मोहम्मद शादिक वित्त सचिव और श्रीराम चिकित्सालय के डॉ. राकेश कुमार राय संपादक निर्वाचित हुए हैं। जिला चिकित्सालय के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद अकरम रिटर्निंग अधिकारी रहे। इस मौके पर प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 03:05 PM
विवादित विधेयक पर मिजोरम के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री से मुलाकात की

विवादित विधेयक पर मिजोरम के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री से मुलाकात की

संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस मुलाकात की पूरी जानकारी दी। वह मिजोरम के प्रमुख चर्च नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री से मिलने पहुंचे थे। प्रतिनिधिमंडल ने नए बिल के सख्त प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं। गृह मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को बहुत ध्यान से सुना। अमित शाह ने कहा कि विधेयक पर 12 अगस्त को सदन में बहस होगी और इसे पारित कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिया कि किसी भी संगठन पर पुराने मामलों को लेकर कार्रवाई नहीं होगी। यह कानून केवल आगे की तारीखों से लागू होगा।विज्ञापनगृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि इस बिल पर 12 अगस्त को संसद में बहस होगी। यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था।विज्ञापननया कानून भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। इससे वर्षों से चल रहे पुराने सेवा संस्थानों की संपत्तियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।विदेशी धन और उससे बनी संपत्तियों की देखरेख व प्रबंधन के लिए एक नया 'नामित प्राधिकरण' बनाया जाएगा।धारा 14, 14A और 14B के तहत लाइसेंस रद्द होने, सरेंडर करने या समाप्त होने पर संपत्ति अस्थायी रूप से सरकार के अधीन चली जाएगी।यदि कोई संस्थान तय समय में नया प्रमाण पत्र नहीं लेता या नवीनीकरण नहीं कराता, तो उसकी संपत्ति हमेशा के लिए सरकार के प्राधिकरण में निहित हो जाएगी।विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में बदलाव के लिए यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य विदेशी फंडिंग पाने वाली गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) पर सरकारी निगरानी को ज्यादा मजबूत बनाना है।विधेयक के नियमों के अनुसार, अगर किसी संस्था का लाइसेंस समाप्त होता है, तो उसकी संपत्ति सरकार के पास चली जाएगी। धारा 14 के तहत लाइसेंस रद्द होने, धारा 14A के तहत सरेंडर करने या धारा 14B के तहत लाइसेंस समाप्त होने पर संपत्ति पर सरकार का कब्जा हो जाएगा। सामाजिक संगठनों को डर था कि अगर यह नियम पुरानी तारीखों से लागू हुआ, तो वर्षों से बने स्कूल, अस्पताल और अनाथालय बंद हो जाएंगे। इससे जनसेवा का काम बुरी तरह प्रभावित हो सकता था।:'आंदोलन करना राष्ट्रविरोधी नहीं': Gen Z को मोहन भागवत का समर्थन, कहा-हर बात का तार्किक जवाब चाहते हैं युवामिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के साथ 'मिजोरम कोहरान ह्रैतु कमेटी' के अध्यक्ष जॉन राल्डोसंगा और 'काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम' के महासचिव लालहमांगाइहा ने गृह मंत्री को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। यह समिति मिजोरम के प्रमुख चर्चों का प्रतिनिधित्व करती है।ज्ञापन में कहा गया कि नए कानून और उसके नियमों को भविष्य की तारीखों से ही लागू किया जाना चाहिए। इससे उन संस्थाओं पर बेवजह का जुर्माना नहीं लगेगा, जो दशकों से समाज सेवा में लगी हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जो संस्थाएं खुद अपनी इच्छा से विदेशी फंडिंग बंद करना चाहती हैं, उन्हें नियम तोड़ने वाला न माना जाए। यह उनका एक पारदर्शी और जिम्मेदार फैसला है।यह भी मांग की गई है कि ऐसी संस्थाओं की संपत्ति की सुरक्षा होनी चाहिए। इससे स्कूल, अस्पताल, अनाथालय और पुनर्वास केंद्र बिना किसी रुकावट के चलते रहेंगे। इससे पहले 10 जुलाई को 'कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया' ने भी अमित शाह को ज्ञापन दिया था। सीबीसीआई ने बिल को वापस लेने और सभी हितधारकों से परामर्श करके नया मसौदा तैयार करने की मांग की थी।
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ABP News
Aug 6, 2026, 02:58 PM
अनुच्छेद 370 की मांगों के बीच श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन में पी. डी. पी. नेता इल्तिजा मुफ्ती घायल हो गईं।

अनुच्छेद 370 की मांगों के बीच श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन में पी. डी. पी. नेता इल्तिजा मुफ्ती घायल हो गईं।

श्रीनगर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता इल्तिजा मुफ्ती घायल हो गईं. पार्टी का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से इल्तिजा को चोटें आईं. फिलहाल उनका श्रीनगर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है. PDP के प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन पुलिस के साथ हुई झड़प में कई कार्यकर्ताओं को चोटें आईं. उनका आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनावश्यक बल प्रयोग किया. पार्टी का कहना है कि इसी कार्रवाई में इल्तिजा मुफ्ती भी घायल हुईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा. इस मामले में श्रीनगर पुलिस ने कोठीबाग पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 63/2026 दर्ज की है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक, हाथापाई के दौरान इल्तिजा मुफ्ती ने एक पुलिस अधिकारी पर हमला किया और उनकी बांह पर काट लिया, जिससे अधिकारी घायल हो गए. इसी मामले में उन्हें जांच में शामिल होने के लिए भी बुलाया गया है. PDP ने पुलिस के इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है. पार्टी का कहना है कि इल्तिजा मुफ्ती ने किसी पुलिस अधिकारी पर हमला नहीं किया. पार्टी के अनुसार, पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है. PDP ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है. यह पूरा विवाद अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान सामने आया. बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी तय सीमा से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई. अब इस घटना को लेकर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है, जहां पुलिस और PDP दोनों एक-दूसरे के दावों को गलत बता रहे हैं.
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ABP News
Aug 6, 2026, 02:56 PM
आर. एल. एम. अध्यक्ष ने बिहार के मंत्री को विधान परिषद में नामित करने में देरी का बचाव किया

आर. एल. एम. अध्यक्ष ने बिहार के मंत्री को विधान परिषद में नामित करने में देरी का बचाव किया

बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश के MLC के तौर पर नॉमिनेट होने पर RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि ये फैसला तो उसी वक्त तय कर लिया गया था. इसे अब लागू किया गया है. इसमें कुछ भी नया नहीं है. फैसला पहले ही हो चुका था और अब उस पर अमल किया गया है." जब उनसे पूछा गया कि इसमें बहुत लेट हो गया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. इस सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, ''इसमें लेट का क्या मामला है, इसमें कोई लेट नहीं हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ले जाने वाले जानें, उनसे जाकर पूछिए.'' Patna, Bihar: On Minister Deepak Prakash being nominated as an MLC, RLM National President and MP Upendra Kushwaha says, "This decision had already been taken at that time. It has only been implemented now. There is nothing new in it; the decision was made earlier and has now… pic.twitter.com/ifly7GlLG0 बिहार की सम्राट चौधरी सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने बुधवार (05 अगस्त) को पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत किया. इस संबंध में निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया. निर्वाचन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (ङ) तथा खंड (5) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को नॉमिनेट किया. बीजेपी विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार ने हाल में इस्तीफा दिया था, जिसके बाद ये सीट खाली हुई थी और फिर दीपक प्रकाश को MLC के लिए नॉमिनेट किया गया. दीपक प्रकाश का कार्यकाल 16 मार्च, 2027 तक रहेगा. बता दें कि बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए थे. शीर्ष कोर्ट ने बिहार सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि किसी सदन का सदस्य नहीं होने के बावजूद दीपक प्रकाश मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं. संविधान के प्रावधानों के मुताबिक मंत्री नियुक्त किए जाने के 6 महीने के अंदर संबंधित व्यक्ति का विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है.
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Aug 6, 2026, 02:52 PM
कॉकरोच जनता पार्टी ने अभिजीत दीपके के नेतृत्व में राष्ट्रीय टीम की घोषणा की

कॉकरोच जनता पार्टी ने अभिजीत दीपके के नेतृत्व में राष्ट्रीय टीम की घोषणा की

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी पहली राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है. इसमें 12 लोग शामिल हैं. अभिजीत दीपके को सीजेपी का फाउंडर और नेशनल कन्वीनर नियुक्त किया गया है. जंतर-मंतर आंदोलन के साथी सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है. नई टीम की घोषणा के बाद अभिजीत दीपके ने सभी को बधाई दी. अपने एक्स पोस्ट में अभिजीत दीपके ने कहा, "CJP के सभी नए नियुक्त पदाधिकारियों को बधाई! भारत की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है, इसलिए युवाओं की आवाज को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. ये युवा टीम देश की राजनीतिक चर्चा को बदलने और युवाओं को केंद्र में लाने की दिशा में काम करेगी. आइए हम विनम्र और जमीन से जुड़े रहें, क्योंकि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम वही न बन जाएं जिसके खिलाफ हम लड़ रहे हैं." Congratulations to all the newly appointed office bearers of CJP! With 65% of India’s population under the age of 35, youth voices can no longer be ignored. This young team will work toward changing the country's political discourse to place youth at the center. Let’s remain… https://t.co/9GgZnnoyOB सीजेपी ने अपनी पहली नेशनल टीम की जो घोषणा की है उसके सभी पदाधिकारियों की उम्र 26 से 35 साल के बीच है. खुद दीपके 30 साल के हैं. सीजेपी ने अजिंक्य शिंदे (35) को संगठन का प्रभारी बनाया है. दीपक बालियान (26) सह-प्रभारी होंगे. आफरीन नवाज (34) राष्ट्रीय सचिव, विजय रेड्डी मल्लांगी (30) मीडिया लीड, रत्ना सिंह (31) लीगल अफेयर्स लीड, वैष्णवी गौड़ (29) रिसर्च एंड पॉलिसी लीड, रोहन देशपांडे (31) टेकनॉलजी लीड और योगेश इंगाले (33) फाइनेंशियल लीड नियुक्त किए गए हैं. सीजेपी ने जोनल लीडरशिप की भी घोषणा की है. दीपक बालियान को नॉर्थ जोन, विजय को साउथ जोन, अंकित भारद्वाज को ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट जोन और योगेश को वेस्ट जोन की जिम्मेदारी दी गई है. सनातन कुमार 10 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. साल 2016 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं और मौजूदा वक्त में एसोसिएट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. अपने एक दशक के अनुभव में उन्हें टीम लीड और डिजिटल मीडिया की बारीक समझ है. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज से 2015 में हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति, चुनाव, सामाजिक विषयों और साहित्य में रुचि है. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर जोर देते हैं. राजनीति से जुड़ी खबरों पर लगातार लिख रहे हैं. संपर्क करें: Email: sanatank@abpnetwork.com
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Aug 6, 2026, 02:37 PM
बिहार प्रदेश राजद ने कार्यालय आदेश रद्द किया, संगठनात्मक इकाइयों को भंग किया

बिहार प्रदेश राजद ने कार्यालय आदेश रद्द किया, संगठनात्मक इकाइयों को भंग किया

जारी आदेश के अनुसार, राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से हुए परामर्श के बाद बिहार प्रदेश राजद का 22 जनवरी 2025 को जारी कार्यालय आदेश (पत्रांक-101) निरस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रदेश, जिला, प्रखंड, पंचायत तथा विभिन्न प्रकोष्ठों समेत सभी स्तरों की संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग करने का निर्णय लिया गया है।विज्ञापनकार्यालय आदेश में मंगनी लाल मंडल की ओर से कहा गया है कि राज्यभर में सभी स्तरों की स्थापना समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। माना जा रहा है कि आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति के तहत यह फैसला लिया गया है।
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ABP News
Aug 6, 2026, 02:35 PM
मध्य पूर्व में तनाव के बीच इजरायल के नेतन्याहू ने भारत के मोदी को फोन किया

मध्य पूर्व में तनाव के बीच इजरायल के नेतन्याहू ने भारत के मोदी को फोन किया

एक तरफ मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच तनाव बना हुआ है, तो वहीं इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत कॉल किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कॉल कर दोनों देशों के रिश्तों पर बातचीत की है. साथ ही रणनीतिक साझेदारी को लेकर भी चर्चा हुई है. 28 फरवरी 2026 को हुए ईरान पर इजरायल-यूएस के संयुक्त हमले के बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव गहरा गया था. भारत लगातार दोनों देशों से शांति की मांग करता रहा है. दोनों देशों राष्ट्राध्यक्ष नरेंद्र मोदी और बेंजामिन ने पश्चिमी एशिया यानी मिडिल ईस्ट में हालिया घटनाओं पर चर्चा की. वे एक दूसरे से संपर्क में बने रहने के लिए सहमत हुए. फोन पर हुई बातचीत में पीएम मोदी और नेतन्याहू ने अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराया. पीएम मोदी को गुरुवार 06 अगस्त 2026 को पीएम नेतन्याहू का फोन आया. उन्होंने भारत-इजरायल स्पेशनल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में लगातार हो रहे डेवलपमेंट का रिव्यू किया. भारत और इजरायल के बीच स्पेशल स्ट्रैटेजिक साझेदारी के स्तर पर रिश्ते हैं. यह मुख्य रूप से रक्षा, उच्च तकनीक, कृषि और गहरे रणनीतिक विश्वास पर आधारित रिश्ते हैं. दोनों देशों के बीच 1992 में औपचारिक तौर पर राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे. कहा जाता है कि पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान इन देशों के रिश्तों को और ऊंचाई मिली है. इसी रणनीतिक साझेदारी को लेकर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच फोन पर चर्चा हुई. दोनों देशों के बीच 1992 में एक व्यापक रणनीतिक और सैन्य साझेदारी की शुरुआत हुई थी. इसमें बड़े पैमाने पर रक्षा सहयोग, संयुक्त हाई-टेक और एआई रिसर्च समेत 3.75 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार शामिल है. नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.
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India TV
Aug 6, 2026, 02:34 PM
गुजरात सरकार एनालॉग चीज और डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कार्यबल का गठन करेगी

गुजरात सरकार एनालॉग चीज और डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कार्यबल का गठन करेगी

गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी ने आज (गुरुवार को) कहा कि गुजरात की सरकार जल्द 'एनालॉग' यानी कृत्रिम पनीर, 'चीज' और बटर पर लगी रोक को धरातल पर लागू करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाएगी। हर्ष सांघवी ने वॉर्निंग दी कि नियमों को तोड़ने वालों के प्रतिष्ठान भी बंद किए जा सकते हैं। यह निर्णय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की तरफ से 'Food Safety and Standards Act 2006' के अंतर्गत एक दिन पहले बुधवार को रिलीज किए गए उस नोटिफिकेशन के बाद लिया गया है, जिसमें पूरे गुजरात में 'बिना मानक वाले' 'एनालॉग' डेयरी प्रोडक्ट्स पर रोक लगाई गई है। जान लें कि 'एनालॉग' पनीर दूध की वसा की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च, 'इमल्सीफायर' और दूसरे 'एडिटिव्स' का प्रयोग कर बनाया जाने वाला एक गैर-डेयरी ऑप्शन है। आम पनीर के मुकाबले इसे बनाना सस्ता होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा आमतौर पर कम होती है। डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी बोले कि सीएम भूपेंद्र पटेल ने सभी डिपार्टमेंट्स को निर्देश दिया है कि वे गुजरात में इस प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू करना सुनिश्चित करें। सांघवी ने कहा,'मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट, जिसमें एनालॉग पनीर भी है, को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।' हर्ष सांघवी ने कहा कि इस नोटिफिकेशन को सख्ती से लागू करने के लिए जल्द कई विभागों के अफसरों को शामिल करते हुए एक खास टास्क फोर्स का ऐलान किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'इस टास्क फोर्स के गठन को लेकर हाई लेवल पर मीटिंग्स चल रही हैं। जल्द इसकी आधिकारिक घोषणा होगी।' उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर केवल आर्थिक जुर्माना लगाना काफी नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमारी टास्क फोर्स कड़े कदम उठाएगी, जिसमें दुकानों को सील करना भी है। हम ऐसे लोगों को गंभीर अपराधी के तौर पर देखते हैं और उन्हें लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की सजा भुगतनी होगी।' जान लें कि बीते बुधवार को गुजरात सरकार ने 'मानक के अनुरूप नहीं' पाए जाने पर 'एनालॉग' पनीर,'चीज' और बटर के प्रोडक्शन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, वितरण और बिक्री पर पूरे गुजरात में प्रतिबंध लगा दिया था ।
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Dainik Jagran
Aug 6, 2026, 02:28 PM
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक अपरिहार्य कारणों से फिर से स्थगित

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक अपरिहार्य कारणों से फिर से स्थगित

हिमाचल कांग्रेस कमेटी की राजनीति मामलों (पॉलिटिकल अफेयर्स) की बैठक फिर से टल गई है। यह दूसरा मौका है जब बैठक को अपरिहार्य कारणों से टालना पड़ा है। पहले बैठक धर्मशाला में प्रस्तावित थी। हाईकमान के निर्देशानुसार ही बैठक का स्थान चंडीगढ़ के नजदीक कसौली में तय किया गया था। यहां पर बैठक के लिए बाकायदा सारी तैयारियां पूरी कर दी थी। वीरवार सुबह ही बैठक को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। दिल्ली में संसद का सत्र चला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल बैठक के लिए समय नहीं निकाल पाए। ऐसे में उन्होंने अभी यह बैठक स्थगित कर दी है। अब बैठक की अगली तारीख संसद सत्र के बाद तय की जाएगी। इससे पहले धर्मशाला में पिछले महीने 16 जुलाई को यह बैठक रखी गई थी। तब पंजाब में कांग्रेस के बीच सियासी घमासान मचा हुआ था लिहाजा केसी वेणुगोपाल वहां रुके थे। अब लोकसभा का सत्र चल रहा है और वहां पर भी सियासत काफी ज्यादा गरमाई हुई है। ऐसे में वेणुगोपाल इस बैठक के लिए समय नहीं निकाल पाए हैं। अब देखना होगा कि आगे आने वाले दिनों में कौन सी तारीख इस बैठक के लिए निर्धारित होती है। बैठक टलने से मंत्रिमंडल विस्तार व मंत्रियों के विभागों में फेरबदल का मामला भी लटक सकता है। इस बैठक में सरकार और संगठन की समीक्षा की जानी है। बैठक अहम है क्योंकि इसमें हाईकमान न केवल सरकार की साढ़े तीन साल की परफार्मेंस का आकलन करेगा। वहीं भविष्य में क्या कुछ करना है, इसके लिए रणनीति तैयार की जाएगी। यह रणनीति आने वाले साल के लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि कांग्रेस को वापस सत्ता में लाने का लक्ष्य तय किया जाएगा। संगठन के लिए भी यह बैठक अहम रहेगी। संगठन विस्तार के साथ सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जानी है। क्योंकि अब चुनाव के लिए केवल एक साल कुछ महीने का समय ही शेष बचा है इसलिए नाराजगी को दूर करने की कोशिश भी कांग्रेस हाईकमान करेगा। ऐसे में इस बैठक का सभी इंतजार कर रहे हैं, जो दूसरी बार टल गई है।
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Aaj Tak
Aug 6, 2026, 02:18 PM
बिहार उपचुनाव में हार के बाद राजद ने संगठनात्मक इकाइयों को भंग किया

बिहार उपचुनाव में हार के बाद राजद ने संगठनात्मक इकाइयों को भंग किया

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बड़ी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. पार्टी ने बिहार में जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर समेत सभी सांगठनिक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. इसके साथ ही अलग-अलग प्रकोष्ठों और अन्य संबद्ध संगठनात्मक इकाइयों को भी समाप्त कर दिया गया है. RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की ओर से इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी किया गया है. आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से हुए परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया. इसके तहत 22 जनवरी 2025 को जारी कार्यालय आदेश संख्या 101 को निरस्त कर दिया गया है. पार्टी के इस कदम को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद संगठन में बड़े बदलाव की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है. RJD अब पुराने ढांचे को खत्म कर नई टीम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी. कार्यालय आदेश के मुताबिक, बिहार में RJD की सभी स्तरों की सांगठनिक संरचनाओं को तत्काल प्रभाव से भंग किया गया है. इसमें सभी जिला स्तरीय कमेटियां, प्रखंड इकाइयां और पंचायत स्तर के संगठन शामिल हैं. पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों से जुड़ी समितियां भी अब प्रभावी नहीं रहेंगी. प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने आदेश में स्पष्ट किया है कि संगठन की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने के बाद सभी स्तरों पर नई समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. यानी आने वाले समय में पार्टी के जिला अध्यक्षों से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर तक नई जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं. ​ RJD के इस फैसले से पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव की संभावना बन गई है. नई टीम में किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर अब पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की नजरें शीर्ष नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं. पार्टी की ओर से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के सभी स्तरों की स्थापना समितियों के पुनर्गठन की कार्रवाई शीघ्र शुरू की जाएगी. इसके तहत अलग-अलग स्तरों पर संगठन को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. तेजस्वी यादव से परामर्श के बाद लिए गए इस फैसले में पार्टी की मौजूदा सांगठनिक इकाइयों को पूरी तरह भंग करने का निर्देश दिया गया है. RJD अब नए संगठनात्मक ढांचे के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद आया यह फैसला पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब देखना होगा कि नए पुनर्गठन में किन चेहरों को जगह मिलती है और RJD बिहार में अपने संगठन को किस तरह मजबूत करने की रणनीति अपनाती है.
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Dainik Jagran
Aug 6, 2026, 02:16 PM
कांग्रेस नेताओं ने राज्य नेतृत्व का विरोध किया, दिल्ली तक मार्च करने और धरना देने की योजना बनाई

कांग्रेस नेताओं ने राज्य नेतृत्व का विरोध किया, दिल्ली तक मार्च करने और धरना देने की योजना बनाई

प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व से नाराज चल रहे समर्पित कांग्रेस नेताओं ने घोषणा की है कि संगठनात्मक मुद्दों को लेकर नाराज नेता-कार्यकर्ता दिल्ली कूच करेंगे और कांग्रेस मुख्यालय पर चरणबद्ध धरना-प्रदर्शन करेंगे। गुरुवार को इन कांग्रेसियों की कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसकी जानकारी एआईसीसी सदस्य आनंद माधव ने दी। बैठक में तय कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण में 12 अगस्त को सिवान, दूसरे चरण में 16 अगस्त को औरंगाबाद तथा तीसरे चरण में 19 अगस्त को नालंदा में कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। अन्य जिलों के कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। नेताओं का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित उपेक्षा और भेदभाव के मामलों को पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाया जाएगा। उनका दावा है कि आंदोलन का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान कराना है। आंदोलन के संचालन के लिए मो. जमाल अहमद भल्लू और नागेंद्र पासवान विकल को संयोजक बनाया गया है। इसके साथ ही 24 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल का भी गठन किया गया है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कृष्णा अल्लावरू हटाओ, कांग्रेस बचाओ अभियान के समर्थन में पूरे बिहार में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। नेताओं ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा। दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत प्रखंड कांग्रेस कमेटी का काम अंतिम चरण में है। मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की पहल शुरू हो चुकी है जिसके बाद पार्टी पंचायत और वार्ड में मजबूती पर पार्टी फोकस करेगी। बिहार प्रदेश कांग्रेस की जिलाध्यक्षों की मासिक समीक्षा बैठक गुरुवार को सदाकत आश्रम में प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावारू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की मौजूदगी में हुई। बैठक में संगठन विस्तार के साथ जनहित के मुद्दों पर आंदोलन तेज करने की रणनीति तय की गई। जिसमें कई आवश्यक निर्देश जिलाध्यक्षों को दिए गए। अल्लावारू ने कहा कि जिलों में सभी प्रखंड अध्यक्षों के साथ आवश्यक रूप से मासिक बैठक के साथ प्रखंड और पंचायतों में छोटे समूहों के साथ संवाद का कार्यक्रम आवश्यक रूप से संचालित करें। घर कांग्रेस का झंडा और चलो पंचायत चलो वार्ड कार्यक्रम को लेकर भी आवश्यक निर्देश भी दिए गए। राजेश राम ने कहा कि जिलाध्यक्ष स्थानीय जनसमस्याओं पर मुखर होकर आंदोलन करें और जनता के सुख-दुख में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने पेपर लीक, शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स वसूली और अन्य जनहित के मुद्दों पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाने पर जोर दिया। बैठक में सुशील पासी, शाहनवाज आलम, लालाभाई पटेल, जितेन्द्र गुप्ता, मिन्नत रहमानी, प्रेमचंद सिंह, स्नेहाशीष वर्धन सहित सभी जिलाध्यक्ष मौजूद थे। बांकीपुर हार के बाद तेजस्वी का बड़ा एक्शन, बिहार में RJD का पूरा संगठन भंग; अब बनेगी नई टीम बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश बने MLC: 2027 तक रहेगा कार्यकाल, पिता उपेंद्र की मौजूदगी में ली शपथ
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Dainik Jagran
Aug 6, 2026, 02:13 PM
भारत ने 2021 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर 550 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए

भारत ने 2021 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर 550 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश यात्राओं पर कितना खर्च हुआ इसे लेकर संसद में खुलासा किया गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि 2021 के बाद से पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च पांच गुना बढ़ गया है। विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने एक लिखित जवाब में बताया कि 2021 से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल खर्च 550 करोड़ रुपये से ज्यादा है। साल 2026 में अब तक खर्च 74।58 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है, हालांकि कुछ आंकड़े अभी अस्थायी हैं और जून में हुई फ्रांस यात्रा का खर्च अभी तय होना बाकी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस साल जिन दौरों का खर्च जोड़ा गया है, उनमें मई में प्रधानमंत्री के पांच देशों के दौरे के दौरान नॉर्वे यात्रा पर सबसे ज्यादा 17।46 करोड़ रुपये खर्च हुए। विदेश मंत्रालय (MEA) के आंकड़ों के मुताबिक, पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर खर्च 2021 में 36 करोड़ रुपये से ज्यादा, 2022 में 55 करोड़ रुपये, 2023 में 93 करोड़ रुपये, 2024 में 109 करोड़ रुपये और 2025 में 180 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। इस खर्च का बचाव करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि जुलाई 2021 से विदेश यात्राओं के दौरान 316 MoU और समझौते किए गए हैं। इनमें रक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी, हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि, अंतरिक्ष सहयोग, मोबिलिटी और माइग्रेशन, क्लाइमेट एक्शन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे सेक्टर शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत को अप्रैल 2021 और दिसंबर 2025 के बीच 381.8 अरब डॉलर का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) मिला।
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Aug 6, 2026, 02:10 PM
केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में प्रतिबंधितः सरकार विरोधी आवाजों को दबाने का दावा

केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में प्रतिबंधितः सरकार विरोधी आवाजों को दबाने का दावा

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मेटा इंडिया की ओर से उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में सीमित करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के दबाव में मेटा पेपर लीक और ई-20 पेट्रोल के खिलाफ उठ रही हर आवाज को दबा रहा है। मेरी तरह ही केंद्र सरकार के खिलाफ बोलने वाले बहुत सारे लोगों के अकाउंट को सीमित कर दिया गया है। उन्होंने देश भर के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिनका अकाउंट सीमित किया गया है, वे मुझे डीएम करें या कमेंट में लिखकर भेजे, ताकि हम सब मिलकर मेटा और इंस्टाग्राम पर दबाव डाल सकें कि वह ऐसी बदमाशी न करें और केंद्र के सामने इस तरह से घुटने न टेकें। अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर एक वीडियो जारी कर कहा कि इंस्टाग्राम वालों ने मुझे नोटिस भेजा है कि मेरे अकाउंट को भारत में सप्रेस और सीमित कर दिया गया है। मैंने वहां फोन करके पता करने की कोशिश की कि ऐसा क्यों किया गया, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। मैंने पूछा कि इसे कैसे ठीक कराएं, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। मैंने ईमेल भेजा, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर ये लोग मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं, तो आम लोगों के साथ पता नहीं क्या कर रहे होंगे। जैसे ही मैंने इस बात को उठाया, बहुत सारे लोगों के मैसेज और फोन आ रहे हैं कि उनका अकाउंट भी सप्रेस कर दिया गया है। पता चला है कि केंद्र सरकार मेटा और इंस्टाग्राम पर दबाव डाल रही है कि जो भी उनके खिलाफ कुछ बोले, जो एथेनॉल पर कुछ बोले या जो पेपर लीक पर कुछ बोले, उनके अकाउंट को सप्रेस कर दिया जाए। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मेरी सब लोगों से गुजारिश है कि अगर किसी का अकाउंट भी इस तरह से सप्रेस किया जा रहा है या ऐसा लग रहा है, तो मुझे डीएम करके या कमेंट में लिखकर भेजें। मैं एक साथ मिलकर लोगों के मुद्दे को भी उठाऊंगा। सब एक साथ मिलकर मेटा और इंस्टाग्राम को फोर्स करेंगे कि वे इस तरह की बदमाशी न करें और मोदी जी के सामने इस तरह से घुटने न टेकें। अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर मेटा और मेटा इंडिया को टैग करते हुए पूछा कि आपने मेरा अकाउंट क्यों रिस्ट्रिक्ट कर दिया है? भारत स्थित मेटा के दफ्तर में मौखिक पूछताछ से पता चला है कि मेरा अकाउंट भारत में रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया है और भारत में उपलब्ध नहीं है। आखिर ऐसा क्यों किया गया है? मेटा के दफ्तर में कोई भी इसका कारण नहीं बता रहा है और न ही कोई यह बता रहा है कि यह रिस्ट्रिक्शन कैसे हटाया जा सकता है। भेजे गए सभी ईमेल का रूटीन एकनॉलेजमेंट के अलावा कोई जवाब नहीं मिला है। यह बहुत ही खराब सर्विस है।
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Dainik Jagran
Aug 6, 2026, 02:09 PM
बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद में शामिल हुए

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद में शामिल हुए

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने गुरुवार को लंबी राजनीतिक प्रतीक्षा के उपरांत बिहार विधान परिषद के विधिवत सदस्य बन गए। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद की पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह बिहार विधान परिषद वेश्म में संपन्न हुआ। इस मौके पर राज्यपाल निर्गत मनोनयन की अधिसूचना बिहार विधान परिषद के प्रभारी सचिव शंकर कुमार ने पढ़ी। नव मनोनीत सदस्य का कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक होगा। कार्यक्रम में विधान परिषद के उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा एवं भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा एवं विधान परिषद के उपनेता (सत्तारूढ़ दल) संजीव कुमार सिंह उपस्थित थे। कार्यक्रम के उपरांत सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दीपक प्रकाश को सदस्यता एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण करने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दीपक प्रकाश सदन की गरिमा एवं मर्यादा को बनाए रखते हुए अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करेंगे। 'RJD का दौर खत्म, बांकीपुर में PK की जीत BJP को झटका', 80 साल के Ex-MLA ने समझाया सियासी गुना-भाग 'प्रशांत किशोर से लेंगे हर दिन के काम का हिसाब'; रामकृपाल यादव बोले- बांकीपुर की जनता हमारी ही रहेगी
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Aug 6, 2026, 02:09 PM
बिहार उपचुनाव में हार के बाद राजद ने संगठनात्मक इकाइयों को भंग किया

बिहार उपचुनाव में हार के बाद राजद ने संगठनात्मक इकाइयों को भंग किया

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने बिहार में बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने आदेश जारी कर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी ने केवल जिला और प्रखंड इकाइयों ही नहीं, बल्कि सभी प्रकोष्ठों की संगठनात्मक इकाइयों और अन्य संबद्ध समितियों को भी भंग कर दिया है। यह फैसला पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आरजेडी के आदेश में कहा गया है कि सभी स्तरों पर नई समितियों के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। नए पदाधिकारियों और संगठनात्मक ढांचे को तैयार करने के लिए आवश्यक कार्रवाई शीघ्र की जाएगी। हाल के दिनों में पार्टी के भीतर मतभेद और बयानबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। बांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद कई नेताओं ने संगठन और नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। ऐसे में इस फैसले को बड़े संगठनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी कर रही है। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सक्रिय और प्रभावी संगठन खड़ा करने पर जोर दिया जाएगा। फिलहाल पार्टी ने पुनर्गठन की समय-सीमा घोषित नहीं की है। हालांकि, संगठन में व्यापक फेरबदल के बाद अब नए पदाधिकारियों और समितियों की घोषणा पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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Aug 6, 2026, 01:57 PM
भारत और इज़राइल ने क्षेत्रीय विकास के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया

भारत और इज़राइल ने क्षेत्रीय विकास के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि बातचीत के दौरान भारत और इस्राइल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देश आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।विज्ञापनबातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिति को लेकर अपने-अपने विचार साझा किए। हाल के समय में पश्चिम एशिया में बदलते घटनाक्रमों के बीच यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, बातचीत के संबंध में किसी विशेष मुद्दे या निर्णय का अलग से उल्लेख नहीं किया गया।विज्ञापनप्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-इस्राइल विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, नवाचार, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों का मानना है कि इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के साझा हितों और विकास के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।बातचीत के अंत में प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि दोनों नेता आपसी हितों और क्षेत्रीय मुद्दों पर लगातार संवाद जारी रखेंगे। भारत और इस्राइल के बीच वर्षों से विकसित रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने सहयोग को नई गति देने की इच्छा जताई।तीन दिन पहले, ईरान से जुड़े तनाव और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इस्राइल भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे सबसे बड़े मित्रों में से एक हैं। नेतन्याहू ने कहा था कि हमें नए गठबंधनों को मजबूत करना होगा। यही वजह है कि मैं भारत के साथ अपने संबंधों में भारी निवेश कर रहा हूं। मेरे मित्र नरेंद्र, जो हमारे सबसे बड़े मित्रों में से एक हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि लोग कहते हैं कि इस्राइल अलग-थलग पड़ गया है, लेकिन भारत में इस्राइल और मुझे व्यक्तिगत रूप से जो समर्थन मिलता है, वह अविश्वसनीय है।
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Aug 6, 2026, 01:53 PM
मुख्यमंत्री का लखनऊ में सम्मानित स्वागत किया गया

मुख्यमंत्री का लखनऊ में सम्मानित स्वागत किया गया

लखनऊ में मुख्यमंत्री से पैक्सपेड अध्यक्ष प्रेमसिंह शाक्य, भाजपा जिलामंत्री भरत गुप्ता, अनिल राजपूत और पूर्व जिलाध्यक्ष भाजयुमो शिवप्रताप राजावत ने बुधवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात की। किशनी विधानसभा क्षेत्र और तहसील मुख्यालय के विकास के लिए शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए मॉडल स्कूल बनाने की मांग की।विज्ञापनउन्होंने किशनी उपमंडी स्थल की बदहाल सड़क के सुदृढ़ीकरण और पुनर्निर्माण सहित विधानसभा क्षेत्र के अन्य मुख्य मार्गों और संपर्क मार्गों को सही कराने की भी मांग की। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी मांगों पर कार्रवाई की जाएगी।विज्ञापन
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Aug 6, 2026, 01:27 PM
जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने विपक्ष से समर्थन मांगा

जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने विपक्ष से समर्थन मांगा

संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और इस दौरान नीट पेपर लीक को लेकर 'जेन-जी' का प्रदर्शन से लेकर राम मंदिर चंदा चोरी तक जैसे मुद्दों को लेकर संसद में हंगामा मचा है. विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि गृह मंत्री अमित शाह इन मुद्दों पर सदन में चर्चा करें. इस बीच सरकार ने दो बेहद अहम विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संपर्क साधा है. ये दो विधेयक हैं- विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में संशोधन और परिसीमन से जुड़ा प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को संसद भवन में राहुल गांधी से लगभग 50 मिनट तक मुलाकात की. इससे कुछ ही दिन पहले दोनों नेताओं के बीच फोन पर भी बातचीत हुई थी. ऐसे में सवाल ये है कि क्या देश भर में चले लंबे युवा आंदोलन ने सरकार को टकराव की नीति छोड़कर सहमति का रास्ता चुनने पर मजबूर कर दिया है? जंतर-मंतर पर चला विरोध प्रदर्शन, संसद का पूरी तरह ठप होना और हाल ही में बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनावों में बीजेपी को मिली हार- ये सभी घटनाएं इशारा करती हैं कि मोदी सरकार अब विधेयकों को पास कराने के लिए लचीला रुख अपना रही है. सरकार का राहुल गांधी से संपर्क सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं है. केंद्र सरकार अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी और एमके स्टालिन की डीएमके सहित दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं से भी चर्चा करने की कोशिश कर रही है. संसद में हुई बैठक के बाद गुरुवार को किरण रिजिजू ने एक बार फिर राहुल गांधी से फोन पर बात की. इस बातचीत का विषय परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक था. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, रिजिजू ने तर्क दिया कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन विधेयक का समर्थन करना बेहद जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने इस पर जवाब दिया कि कांग्रेस इस विषय पर पहले पार्टी में और फिर 'इंडिया' गठबंधन के अपने सहयोगी दलों के साथ चर्चा करेगी, उसके बाद ही अपना आखिरी रुख सरकार के सामने रखेगी. सरकार की इस पहल के बावजूद संसद में जारी बवाल पूरी तरह थम नहीं पाया है. कांग्रेस इस बात पर अड़ी हुई है कि संसद की कार्यवाही तभी सही से चल सकती है, जब गृह मंत्री अमित शाह छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर अपना जवाब दें और अयोध्या में राम मंदिर की 'चंदा चोरी' पर चर्चा कराई जाए. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान दो विधेयकों- प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का रुख जानना चाहा. इस बैठक में कांग्रेस की ओर से वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई भी शामिल थे. जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार का ये नया लचीला रुख हाल के सालों के सबसे बड़े राजनीतिक संकट का नतीजा है. नीट धांधली को लेकर 'जेन-जी' के उग्र प्रदर्शन और दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई के कारण धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था. वहीं, विश्लेषकों का ये भी कहना है कि बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी के हाथों बीजेपी को मिली हार ने भी सरकार को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है. रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के साथ उनकी बैठक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद को बहाल करने की एक कोशिश थी. हालांकि, उन्होंने बताया कि जारी सत्र की अवधि बढ़ाने या 16 से 18 अगस्त के बीच कोई विशेष सत्र बुलाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है. केंद्र सरकार के लिए संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का समर्थन हासिल करना इस समय बेहद जरूरी हो गया है. परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी. इस साल के शुरू में विस्तारित बजट सत्र के दौरान सरकार जरूरी संख्या बल जुटाने में नाकाम रही थी, जिससे मोदी सरकार को पहली बार किसी संविधान संशोधन विधेयक पर हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के NCPI में शामिल होने और शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय के बाद एनडीए का संख्या बल सुधरा है, लेकिन सरकार के पास अभी भी संविधान संशोधन के लिए जरूरी पूर्ण दो-तिहाई बहुमत नहीं है.
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 01:22 PM
विशेषज्ञ डॉक्टरों और अधिकारियों का एमपी का'अकाल': शुक्रवार की बैठकें क्षेत्र के दौरे के लिए स्थगित

विशेषज्ञ डॉक्टरों और अधिकारियों का एमपी का'अकाल': शुक्रवार की बैठकें क्षेत्र के दौरे के लिए स्थगित

ये भी पढ़ें-MP: विशेषज्ञ डॉक्टरों का 'अकाल',दो दर्जन संचालनालय में अफसरी झाड़ रहे,स्त्री और शिशु रोग विशेषज्ञों की भी कमीविज्ञापनजन-विश्वास अभियान के तहत प्रत्येक शुक्रवार को किसी भी स्तर पर नियमित बैठकें नहीं होंगी। यह दिन पूरी तरह फील्ड विजिट के लिए तय किया गया है। जिला कलेक्टर पहले से भ्रमण क्षेत्र तय करेंगे और जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी देंगे। साथ ही मीडिया के माध्यम से भी इसकी सूचना लोगों तक पहुंचाई जाएगी।विज्ञापनये भी पढ़ें-MP News: दतिया उपचुनाव की जीत का 'इनाम', भाजपा के पूर्व नेता को कांग्रेस ने प्रदेश महासचिव की दी जिम्मेदारीअभियान के तहत जिस क्षेत्र का दौरा किया जाएगा, वहां एक सप्ताह पहले सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई, लोक सेवा गारंटी, नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा की जाएगी। कोशिश रहेगी कि अधिकतम मामलों का पहले ही निराकरण हो जाए। जो शिकायतें बचेंगी या दौरे के दौरान सामने आएंगी, उनका मौके पर समाधान किया जाएगा।ये भी पढ़ें-MP News: दतिया उपचुनाव की जीत का 'इनाम', भाजपा के पूर्व नेता को कांग्रेस ने प्रदेश महासचिव की दी जिम्मेदारीजिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा जन-संवाद और उद्योग संवाद आयोजित किए जाएंगे। एमएसएमई और कुटीर उद्योगों से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं का भी मौके पर समाधान किया जाएगा। किसानों की फार्मर आईडी, आयुष्मान कार्ड, समग्र आईडी ई-केवाईसी, आधार अपडेट और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े मामलों की भी समीक्षा होगी।ये भी पढ़ें-MP News: दतिया हार पर भाजपा में मंथन तेज, आशुतोष तिवारी बोले- नरोत्तम की भूमिका की समीक्षा जांच समिति करेगीअभियान के दौरान अधिकारी जल जीवन मिशन, आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र, राशन दुकान, सड़क, तालाब, अमृत सरोवर, बांध और अन्य सरकारी योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। अस्पतालों में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता भी जांची जाएगी। खाद-बीज की दुकानों, गैस गोदाम, पेट्रोल पंप, निजी स्कूलों और औद्योगिक क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया जाएगा।ये भी पढ़ें-नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बन रहा एमपी, CM बोले- 2030 तक राष्ट्रीय लक्ष्य में निभाएगा बड़ी भूमिकासरकार के अनुसार जन-विश्वास अभियान संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा। अभियान को पूरी तरह सादगी और मितव्ययिता के साथ संचालित किया जाएगा। अनावश्यक खर्च से बचते हुए सरकारी भवनों में ही जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित होंगे और वाहनों की पूलिंग की जाएगी।
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Aug 6, 2026, 01:14 PM
भारत सरकार ने संसद के सुचारू संचालन के लिए कांग्रेस से सहयोग मांगा

भारत सरकार ने संसद के सुचारू संचालन के लिए कांग्रेस से सहयोग मांगा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ उनकी अच्छी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक खास मुद्दे पर अनुरोध किया और अन्य मामलों पर भी चर्चा की। रिजिजू ने बताया कि आज राहुल गांधी जी के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई... हमने एक मुद्दे के बारे में उनसे अनुरोध किया और अन्य मामलों पर भी चर्चा की। हम कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ लगातार बातचीत और तालमेल बिठाकर काम करना चाहते हैं। हम राजनीतिक विरोधी हो सकते हैं, लेकिन दुश्मन नहीं हैं। हमें राष्ट्रीय हित में मिलकर काम करना चाहिए। अमित शाह की सदन में उपस्थिति पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बिल पेश किए हैं और सुबह से शाम तक सदन में मौजूद रहे हैं। स्वाभाविक रूप से जिस मंत्री का बिल विचाराधीन होता है, वही सदन में मौजूद रहता है। रिजिजू की ये टिप्पणियां राहुल गांधी के साथ उनकी कथित मुलाकात के एक दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने मानसून सत्र के बाकी समय में संसद के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए उनका सहयोग मांगा था। दोनों ने परिसीमन और महिला आरक्षण बिलों को फिर से पेश करने की संभावना पर भी चर्चा की, हालांकि कांग्रेस नेता ने कथित तौर पर कोई वादा नहीं किया। बुधवार को हुई लगभग 50 मिनट की बैठक के दौरान, पता चला है कि राहुल गांधी ने रिजिजू से कहा कि NEET पेपर लीक मुद्दे पर विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर अमित शाह का बयान और अयोध्या में राम मंदिर में दान की कथित चोरी पर चर्चा, सदन के कामकाज के लिए अनिवार्य शर्तें थीं। मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। गुरुवार को सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल, जो उसके विधायी एजेंडे के दो प्रमुख मुद्दे हैं, लेकिन चर्चा के लिए 16 से 18 अगस्त तक तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
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Aug 6, 2026, 01:11 PM
कॉकरोच जनता पार्टी ने राष्ट्रीय कार्य समिति की संरचना और विस्तार योजनाओं की घोषणा की

कॉकरोच जनता पार्टी ने राष्ट्रीय कार्य समिति की संरचना और विस्तार योजनाओं की घोषणा की

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी दो दिवसीय बैठक के बाद राष्ट्रीय कार्यसमिति के नाम और संगठनात्मक ढांचे का औपचारिक ऐलान कर दिया है. पार्टी ने संगठनात्मक संरचना और राष्ट्रीय विस्तार की रूपरेखा भी जारी की है. पार्टी के अनुसार, अगले छह महीनों में पूरे देश में राज्य समन्वय समितियां तथा लोकसभा और शहर स्तर की यूनिटें स्थापित की जाएंगी. साथ ही पार्टी ने जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) के संदर्भ में आठ छात्र प्रतिनिधियों की लिस्ट जारी की है. साथ ही बैठक को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं. पार्टी ने 30 वर्षीय अभिजीत दिपके को संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है. संगठन विस्तार और अभियानों के लिए अजिंक्य शिंदे को राष्ट्रीय संगठन प्रभारी और दीपक बालियान को सह-प्रभारी बनाया गया है. पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में आशुतोष रांका और सौरव दास को सह-संयोजक बनाया गया है. आफरीन नवाज को राष्ट्रीय सचिव और विजय मल्लांगी को मीडिया प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है. कानूनी मामलों की कमान रत्ना सिंह संभालेंगी, जबकि वैष्णवी गौर शोध और नीति प्रमुख बनाई गई हैं. रोहन देशपांडे को तकनीक प्रमुख और योगेश इंगले को वित्त प्रमुख नियुक्त किया गया है. सीजेपी ने क्षेत्रीय विस्तार के लिए जोनल नेतृत्व की भी घोषणा की है. उत्तर क्षेत्र का जिम्मा दीपक बालियान, दक्षिण क्षेत्र का विजय मल्लांगी, पूर्व एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र का अंकित भारद्वाज और पश्चिम क्षेत्र का जिम्मा योगेश इंगले को सौंपा गया है. अगले छह महीनों में पार्टी राज्य, लोकसभा और शहर स्तर पर समन्वय यूनिटें स्थापित करेगी. इसके अलावा सीजेपी ने जेएसएससी और जेपीएससी मुद्दों पर वार्ता के लिए आठ छात्र प्रतिनिधियों का चयन किया है. छात्र प्रतिनिधियों का नेतृत्व रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रवीन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह करेंगे. इसके अलावा वार्ता को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं. प्रतिनिधिमंडल में अभिभावक और मार्गदर्शक के रूप में पत्रकारों और कानूनविद को भी जगह दी गई है. पत्रकार प्रतिनिधि के रूप में शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा शामिल हैं, वहीं, कानूनविद के रूप में अजीत कुमार को अभिभावक के तौर पर जोड़ा गया है. पार्टी के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार बैठक के दौरान सभी विषयों, तथ्यों और मांगों को केवल छात्र प्रतिनिधियों द्वारा ही प्रस्तुत किया जाएगा. पत्रकार और कानूनविद किसी भी प्रकार की बातचीत, बयान या तथ्य प्रस्तुत नहीं करेंगे. इसके अलावा मीडिया से जुड़े अभिभावक अंदर प्रवेश करते वक्त कोई भी माइक, कैमरा, रिकॉर्डिंग डिवाइस या साउंड सिस्टम साथ नहीं ले जाएंगे.
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Aug 6, 2026, 01:10 PM
एस. आई. आर. और लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध की चिंताओं को लेकर अमित शाह से मिले टी. एम. सी. सांसद

एस. आई. आर. और लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध की चिंताओं को लेकर अमित शाह से मिले टी. एम. सी. सांसद

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी (टीएमसी) से बगावत करने वाले तीन सांसदों अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान ने गुरुवार (6 अगस्त) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने SIR और लाउडस्पीकर बैन का मुद्दा उठाया. अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव रिजल्ट के बाद टीएमसी में बगावत कर दी थी और एनसीपीआई में शामिल हो गए थे. एनसीपीआई ने एनडीए को समर्थन दिया है. हालांकि एनसीपीआई सांसद के तौर पर स्पीकर से मंजूरी नहीं मिली है. हाल ही में कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अल्पसंख्यक बहुल सीट से जीत कर आए अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान एनडीए में असहज हैं और ममता बनर्जी के साथ लौट सकते हैं. हालांकि इन अटकलों को एनसीपीआई के अन्य सांसदों ने खारिज कर दिया. इस बीच अमित शाह से मुलाकात हुई है. खलीलुर्रहमान ने कहा, ''हमने दो मुद्दों पर बातचीत की. पहला हमने अमित शाह के सामने कहा कि SIR में जो मामले ट्रिबिनल में है उसको लेकर जल्दी समाधान किया जाए.'' उन्होंने कहा, ''दूसरा कोई भी धर्मस्थल हो उस पर लाउडस्पीकर लगा है अगर वो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक है तो उनको बजने देना चाहिए.'' तीनों सांसदों ने इन मांगों से जुड़ी चिट्ठी भी अमित शाह को सौंपी. इसमें लिखा है, ''बड़ी संख्या में ऐसे वास्तविक मतदाता हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और वे ट्रिब्यूनल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. इस देरी के कारण पासपोर्ट सत्यापन, भूमि पंजीकरण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाइयां हो रही हैं. चिट्ठी में लिखा है, ''मैं मंत्रालय से अनुरोध करता हूं कि सभी लंबित वास्तविक मामलों का तेजी से निपटारा किया जाए और उन्हें इस साल के अंत तक पूरा किया जाए. ट्रिब्यूनल की अतिरिक्त बेंच स्थापित की जाएं। शिकायतों की निगरानी के लिए एक तंत्र (मैकेनिज्म) बनाया जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रभावित वास्तविक नागरिकों को उनके मामले लंबित रहने के दौरान आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं से वंचित न किया जाए.'' मीडिया में करियर की शुरुआत CNFC मीडिया के साथ की. उसके बाद साढ़े तीन वर्ष ANI और उसके बाद तकरीबन 8 वर्ष न्यूज 18 नेटवर्क के साथ काम किया. और अब एबीपी न्यूज ज्वाइन किया है. मीडिया में तकरीबन 13 वर्ष का अनुभव है जिसमें राजनीतिक खबरों खासकर बीजेपी से संबंधित खबरों को कवर करता रहा हूं.
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 01:07 PM
मध्य प्रदेश के चिकित्सा निदेशालय में डॉक्टरों की कमी, कांग्रेस ने पूर्व भाजपा नेता को नियुक्त किया

मध्य प्रदेश के चिकित्सा निदेशालय में डॉक्टरों की कमी, कांग्रेस ने पूर्व भाजपा नेता को नियुक्त किया

ये भी पढ़ें-MP: विशेषज्ञ डॉक्टरों का 'अकाल',दो दर्जन संचालनालय में अफसरी झाड़ रहे,स्त्री और शिशु रोग विशेषज्ञों की भी कमीविज्ञापनचुनाव में भीतरघात के सवाल पर आशुतोष तिवारी ने सीधे आरोप लगाने से बचते हुए कहा कि कहीं न कहीं कोई चूक जरूर हुई है। इसकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। समीक्षा पूरी होने से पहले किसी पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।विज्ञापनये भी पढें-MP News: दतिया उपचुनाव की जीत का 'इनाम', भाजपा के पूर्व नेता को कांग्रेस ने प्रदेश महासचिव की दी जिम्मेदारी2028 विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह खुद को पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता मानते हैं। पार्टी नेतृत्व जो भी जिम्मेदारी देगा, उसका पूरी निष्ठा से पालन करेंगे। दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं को उन्होंने महज अटकल बताया और कहा कि यह फैसला पूरी तरह पार्टी नेतृत्व का होता है।ये भी पढ़ें-MP News: भोपाल मेट्रो यात्रियों को बड़ी राहत, अब रविवार और सरकारी छुट्टी पर हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेनपूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से हाल ही में हुई मुलाकात को लेकर भी उन्होंने सफाई दी। तिवारी ने कहा कि यह केवल एक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात थी। इसके कोई राजनीतिक मायने नहीं हैं और इसे किसी अन्य रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बता दें है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया था। इसके बाद भाजपा ने चुनाव परिणाम की समीक्षा शुरू कर दी है और संगठन स्तर पर हार के कारणों का विश्लेषण किया जा रहा है।
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Aug 6, 2026, 01:02 PM
भारत को 74.5 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए 13 देशों की यात्रा की

भारत को 74.5 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए 13 देशों की यात्रा की

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने गुरुवार (6 अगस्त) संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2026 के आधिकारिक विदेश दौरों पर हुए खर्च को लेकर जानकारी दी. सरकार की तरफ से राज्यसभा में बताया गया कि साल 2026 में पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर करीब 74.5 करोड़ रुपये खर्च हुए. इस साल फरवरी से लेकर जुलाई तक पीएम मोदी ने 13 देशों का दौरा किया है. संसद में पेश दस्तावेजों में 2021 से अब तक प्रधानमंत्री की सभी विदेश यात्राओं पर हुए कुल खर्च का भी विवरण दिया गया है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री की ये विदेश यात्राएं अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करने और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी बढ़ाने का एक अहम माध्यम है. इन यात्राओं के दौरान हुए समझौतों से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, ट्रेड, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हुई है. सरकार ने कहा कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ. सरकार ने बताया कि साल 2021 से पीएम मोदी के विदेश दौरे पर कुल 550 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुआ. राज्यसभा में लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने बताया, 'इस साल पीएम मोदी की जिन विदेश यात्राओं पर सबसे ज्यादा खर्च हुआ वो मई 2026 में उनकी पांच देशों की यात्रा थी. इस दौरान 17.46 करोड़ रुपये खर्च हुए.' उन्होंने बताया, 'पीएम मोदी के विदेश दौरे पर साल 2025 में 180 करोड़ से अधिक, 2024 में 109 करोड़, 2023 में 93 करोड़ रुपये, 2022 में 55 करोड़ और 2021 में 36 करोड़ रुपये खर्च हुए.' सरकार की ओर से जारी किए गए खर्चे के ब्योरे में कई देशों के आगे स्टार (*) लगा हुआ है, जिसका मतलब है कि ये आंकड़े बिल्कुल अंतिम नहीं हैं. वहां के बिलों का पूरी तरह से निपटान होने के बाद फाइनल खर्च का सटीक आंकड़ा सामने आएगा. सरकारी आंकड़े में जून में पीएम मोदी के फ्रांस दौरे पर हुए खर्च को शामिल नहीं किया गया है.
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ABP News
Aug 6, 2026, 01:01 PM
तहलका के तरुण तेजपाल को बलात्कार के मामले में 10 साल की जेल की सजा

तहलका के तरुण तेजपाल को बलात्कार के मामले में 10 साल की जेल की सजा

13 साल पहले गोवा के एक 5 स्टार होटल के लिफ्ट में जो हुआ, उसने भारत के सबसे ताकतवर पत्रकारों में से एक को हमेशा के लिए डुबो दिया. इस वजह से 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के रेप केस में 10 साल की कैद की सजा सुनाई. यह वही तरुण तेजपाल है जिसने एक जमाने में 'ऑपरेशन वेस्ट एंड' स्टिंग के जरिए तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को रिश्वतखोरी में गिराया था. मैच फिक्सिंग की पोल खोली थी, गुजरात दंगों पर चौंकाने वाली रिपोर्ट पब्लिश की थी और जॉर्ज फर्नांडीस को रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. आज वही तेजपाल कोर्ट में कह रहा था, 'मैं 62 साल का हूं, दो बेटियों का पिता हूं, मुझ पर सियासी बदले की कार्रवाई हुई है.' तरुण तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को हुआ. तरुण के पिता भारतीय सेना में थे, इसलिए बचपन देश के कई हिस्सों में बीता. चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 1980 के दशक में द इंडियन एक्सप्रेस से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने कई न्यूज मैगजीन में काम किया. 1998 में उन्होंने RST IndiaInk नाम की पब्लिशिंग कंपनी को-फाउंड किया, जिसने अरुंधति रॉय के बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यास 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' को प्रकाशित किया. पत्रकारिता के अलावा तेजपाल ने एक उपन्यास 'द अल्केमी ऑफ डिजायर' भी लिखा, जो 2006 में प्रकाशित हुआ. यह किताब प्यार, सेक्स और महत्वाकांक्षा के बीच के जटिल रिश्ते पर है. फरवरी 2000 में तेजपाल ने भारत के पहले जर्नलिस्टिक वेबसाइटों में से एक तहलका (Tehelka.com) लॉन्च किया. तहलका का मतलब हिंदी/उर्दू में 'सनसनी' होता है. इसने अपने नाम के मुताबिक ही काम किया. द गार्डियन, बिजनेसवीक और एशियावीक ने तेजपाल को भारत के सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया. वह 'जर्नलिज्म के चे ग्वेवरा' के नाम से मशहूर हुए. तहलका का पहला बड़ा स्टिंग ऑपरेशन 2000 में इंडिया-साउथ अफ्रीका क्रिकेट मैच फिक्सिंग पर था. तहलका ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज प्रभाकर के साथ मिलकर क्रिकेट में सट्टेबाजी और फिक्सिंग के गोल्डन कनेक्शन को उजागर किया. इस एक्सपोज पर 'फॉलन हीरोज' नाम की किताब भी छपी. तहलका का सबसे चर्चित ऑपरेशन 'ऑपरेशन वेस्ट एंड' था. मार्च 2001 में तहलका के जर्नलिस्टों ने आर्म्स डीलर बनकर रक्षा अधिकारियों, राजनेताओं और बिचौलियों के बीच हो रही रिश्वतखोरी को सीक्रेट कैमरे में रिकॉर्ड किया. सबसे बड़ा झटका तब लगा जब स्टिंग में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण रिश्वत लेते नजर आए. इसके बाद हुए हंगामे में बंगारू लक्ष्मण को इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि, यहीं खत्म नहीं हुआ. इसी मामले में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस भी घिर गए. हालांकि स्टिंग में जॉर्ज सीधे नहीं पकड़े गए थे, लेकिन इस रक्षा घोटाले के सार्वजनिक होने के बाद उन्हें रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. सरकार ने वेंकटस्वामी कमीशन बनाया, लेकिन तेजपाल ने सवाल उठाया कि अगर सरकार सच में इस घोटाले की तह तक जाना चाहती है तो कमीशन को खत्म क्यों नहीं कर देती. इस स्टिंग के लिए तहलका को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तहलका ने रक्षा अधिकारियों को वेश्याएं उपलब्ध कराईं. इसके लिए तेजपाल पर 'इम्मोरल ट्रैफिकिंग' का आरोप भी लगा. अक्टूबर 2007 में तहलका ने 2002 के गुजरात दंगों पर एक स्पेशल इश्यू निकाला. तहलका ने दावा किया कि उसके पास अटूट सबूत हैं कि गुजरात में हुई हत्याएं 'आकस्मिक आक्रोश का उबाल नहीं थीं.' तहलका ने 20 से ज्यादा मुख्य खिलाड़ियों के ऑन-कैमरा बयान पेश किए. तेजपाल ने अपने एडिटोरियल में साफ कहा, यह 'सहज दंगे' नहीं थे, बल्कि 'सामूहिक हत्याएं' थीं. 7-8 नवंबर 2013 को तहलका का सालाना आइडियाज फेस्टिवल का थिंकफेस्ट चल रहा था. गोवा के ग्रैंड हयात होटल में हो रहे इवेंट में हॉलीवुड एक्टर रॉबर्ड डी नीरो भी शामिल थे. इस दौरान एक जूनियर महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि तेजपाल ने होटल के लिफ्ट में उसके साथ बलात्कार किया. आरोप था कि तेजपाल ने एडिटर और एम्प्लॉयर के अपने पद का इस्तेमाल करके उस पर जबरदस्ती की. इस पूरे मामले में सबसे अहम सबूत तेजपाल का खुद का ईमेल था. इसमें उसने महिला से माफी मांगी. हालांकि बाद में उसने अपना रुख बदल लिया, लेकिन यह ईमेल पब्लिक हो गया और गोवा पुलिस ने खुद एक्शन लेते हुए FIR दर्ज कर ली. मई 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया. ट्रायल कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का व्यवहार 'सामान्य' नहीं था और पुलिस जांच में चूक थी. इसमें होटल के एक फ्लोर की CCTV फुटेज गायब थी. इस फैसले की महिला अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों ने जमकर आलोचना की. गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की. 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 2021 के बरी होने के फैसले को पलट दिया. कोर्ट ने तेजपाल को IPC की तीन धाराओं के तहत दोषी ठहराया: कोर्ट ने सभी सजाएं एक साथ चलाने का आदेश दिया और 10.21 लाख रुपये का जुर्माना पीड़िता को भरपाई के तौर पर देने का निर्देश दिया. तेजपाल को दो हफ्ते (बाद में बढ़ाकर चार हफ्ते) में सरेंडर करने का समय दिया गया. फैसला सुनने के बाद तेजपाल ने कोर्ट के बाहर मीडिया से बात की. तेजपाल ने इसे 'गलत आदेश' बताया और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का ऐलान किया. तेजपाल ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ 'सियासी बदले की कार्रवाई' हुई है. तेजपाल ने उमर खालिद और शरीफुल इमाम का उदाहरण देते हुए कहा, 'उमर खालिद और शरीफुल इमाम जेल में हैं, मैं भी उन्हीं में से एक हूं.' तेजपाल ने कहा कि तहलका की खोजी पत्रकारिता की वजह से उसे निशाना बनाया गया. जजों के सामने सजा में नरमी की गुहार लगाते हुए तेजपाल ने कहा, 'मैं 62 साल का हूं, दो बेटियों का पिता हूं.' लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जोरदार पैरवी करते हुए कहा, 'यह कोई गलतफहमी या मजाक नहीं था. तेजपाल ने घटना के बाद कोई पछतावा नहीं दिखाया और अगले दिन फिर से वही किया.' ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 12:59 PM
मुख्यमंत्री ने शिमला के कासुमपटी निर्वाचन क्षेत्र में 48 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया

मुख्यमंत्री ने शिमला के कासुमपटी निर्वाचन क्षेत्र में 48 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को शिमला जिला के कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र में करीब 48 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने मशोबरा में नए खंड विकास कार्यालय भवन का उद्घाटन किया। भट्टाकुफर में छह करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले लोक निर्माण विभाग मंडल कार्यालय, मशोबरा के बलदेयां में 3.64 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले उपमंडल कार्यालय, 12 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भवन और लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली संपर्क सड़क का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में सड़क और अन्य सुविधाएं बेहतर होंगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश के लोगों के हितों और राज्य के संसाधनों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने बद्दी में लगभग 5,000 बीघा जमीन उद्योगपतियों को बहुत कम कीमत पर दी थी।
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Aaj Tak
Aug 6, 2026, 12:58 PM
पश्चिम बंगाल के मुस्लिम सांसदों ने सरकार के खिलाफ विद्रोह किया, मस्जिद लाउडस्पीकर मुद्दे पर अमित शाह से मुलाकात की

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम सांसदों ने सरकार के खिलाफ विद्रोह किया, मस्जिद लाउडस्पीकर मुद्दे पर अमित शाह से मुलाकात की

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उफान के संकेत हैं. ममता बनर्जी से बगावत करने वाले तीन मुस्लिम सांसद यूसुफ पठान, अबु ताहिर खान और खलिलुर रहमान लगातार दूसरी NDA की बैठक में शामिल नहीं हुए. इन सांसदों ने बंगाल की बीजेपी सरकार के खिलाफ विरोध के स्वर उठाए हैं. गुरुवार को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से जबरन लाउडस्पीकर उतारने के मुद्दे पर शुभेंदु सरकार का विरोध जताया. बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान, मुर्शिदाबाद से सांसद अबु ताहिर खान और जांगीपुर के एमपी खलिलुर रहमान ने गुरुवार को दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की. मुर्शिदाबाद से सांसद अबु ताहिर खान ने कहा कि उन्होंने अमित शाह से मिलकर कहा कि अगर मुस्लिम कम्युनिटी के साथ कुछ होता है तो उन्हें बहुत दुख होगा. मस्जिद में अजान नहीं होगा तो क्या होगा? इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से जो बोला है उसे मान्यता दी जाए. लेकिन मस्जिद से माइक उतारना अच्छा नहीं है. हमने गृह मंत्री से इस मामले को देखने की अपील की. गृह मंत्री ने इस मामले में आश्वासन दिया है. अबु ताहिर ने कहा कि वे NDA की मीटिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं. खलीलुर रहमान, अबू ताहिर खान और पूर्व क्रिकेटर व सांसद यूसुफ पठान ने संयुक्त रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र सौंपा. पत्र में उल्लेख किया गया है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं. सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे देश के कानून और माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों का पूर्ण सम्मान करते हैं. उन्होंने गृह मंत्री से आग्रह किया कि इन नियमों का कार्यान्वयन बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष, एकसमान और संवेदनशील तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे. सांसदों ने लिखा है कि कि बड़ी संख्या में वैध भारतीय नागरिक अपने अधिकारों की बहाली के लिए ट्रिब्यूनल के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं. न्यायिक प्रक्रिया में हो रहे विलंब के कारण प्रभावित नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. खलीलुर रहमान ने भी कहा उन्होंने मस्जिदों से स्पीकर हटाने और SIR के मु्द्दे पर अमित शाह से दखल देने की मांग की है. ये तीनों मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम-बहुल सीटों से हैं और Nationalist Citizens Party of India (NCPI) का हिस्सा हैं. TMC की पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हार के बाद करीब 20 बागी सांसदों ने NCPI बनाकर NDA से नजदीकी बनाई थी. लेकिन ये तीन सांसद साफ कह रहे हैं कि वे NDA या BJP में शामिल नहीं होंगे. इन तीनों सांसदों ने कहा है कि हमें मतदाताओं को जवाब देना है. हम किसी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के खिलाफ हो. हालांकि विकास संबंधी मुद्दों पर ये तीनों सांसद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समन्वय बैठक में शामिल हुए. इनका तर्क है कि अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए वे बैठक में शामिल हुए. सूत्रों के अनुसार कुछ मतदाताओं द्वारा BJP से कथित नजदीकी पर सवाल उठाने के बाद उन्होंने NDA बैठक स्किप करने का फैसला किया है. उन्हें 'वोटर बैकलैश' का डर सता रहा है. इन तीन सांसदों का NDA की बैठक में मौजूद न होना इसलिए अहम है क्योंकि लोकसभा में 20 सदस्यों वाले NCPI गुट को मान्यता देने का मामला अभी भी स्पीकर ओम बिरला के पास लंबित है. अलग हुआ यह गुट दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा तभी मांग सकता है, जब इसमें TMC के लोकसभा में मौजूद 28 सांसदों की मूल संख्या का कम से कम दो-तिहाई हिस्सा शामिल हो. ये संख्या 19 होती है. बहरामपुर, मुर्शिदाबाद और जांगीपुर, ये तीनों लोकसभा सीटें पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित हैं और मुस्लिम बहुल हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार पूरे जिले में मुस्लिम आबादी लगभग 66-67 प्रतिशत है. मुर्शिदाबाद सीट पर मुस्लिम आबादी करीब दो-तिहाई बताई जाती है, जांगीपुर में भी बहुमत के आसपास है, जबकि बहरामपुर में मुस्लिमों की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है.
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DNA Hindi
Aug 6, 2026, 12:56 PM
चीन के 68 अरब डॉलर के कर्ज के जाल में फंसा पाकिस्तान

चीन के 68 अरब डॉलर के कर्ज के जाल में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान के नेता और सैन्य अधिकारी चीन के साथ दोस्ती को समुद्र से गहरा और हिमालय से ऊंचा बताते हैं. जबकि सच ये है कि चीन ने पाकिस्तान को कर्ज के ऐसे जाल में फंसा लिया है जिससे बाहर निकलना अब मुमकिन नहीं है. चीन और पाक की दोस्ती की पोल पाकिस्तान के ही एक पूर्व नौकर शाह ने खोली है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार के सूचना सचिव पद पर काम कर चुके पूर्व सिविल सर्वेंट ओरिया मकबूल जान ने आंकड़े गिनाते हुए कहा है कि अब इस चीनी फंदे से कभी निकला नहीं जा सकता. यूट्यूब पर आने वाले कार्यक्रम 'हर्फ-ए-राज' में बात करते हुए ओरिया मकबूल जान ने कहा कि चीन का पाकिस्तान पर जो कर्ज है उससे अब शायद बाहर नहीं निकला जा सकता. उन्होंने कहा कि इस समय पाकिस्तान पर सिर्फ चीन का 68 बिलियन डॉलर कर्ज है. ओरिया मकबूल जान ने ये भी कहा कि हमने चीन पाकिस्तान इकोनामिक कोरिडोर का सत्यानाश किया हुआ है. उन्होंने कहा कि सी-पैक योजना में बुनियादी ढांचा बनाना था, पॉवर प्लांट भी लगाने थे, इंडस्ट्रियल जोन और आईटी हब भी बनाने थे. सी-पैक शुरू होता है गिलगित-बाल्टिस्तान से और खत्म होता है ग्वादर में. लेकिन दोनों जगह कुछ नहीं बना. ओरिया मकबूल जान ने आगे कहा, CPEC का पहला प्रोजेक्ट गुंजी डैम था जिसे चीन के साथ मिलकर बनाया जाना था. लेकिन पाकिस्तान ने विवादित क्षेत्र का हवाला देते हुए इस पर काम नहीं किया. पाकिस्तान के नेताओं ने अपने फायदे के लिए इस प्रोजेक्ट पर सही से काम नहीं होने दिया. हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट में कमीशन नहीं है, इसलिए ये लोग ऐसा कुछ बनने ही नहीं देते. ओरिया मकबूल जान ने 3 जुलाई 2026 की एक खबर का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान ने CPEC के तहत बनने वाली एक रेल लाइन की योजना को बंद कर दिया जो ईरान तक जाने वाली थी. उन्होंने आगे कहा कि चीन से कर्ज लेकर लाहौर मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. पेशावर होते हुए ईरान तक जाने वाली रेल लाइन से देश को आर्थिक फायदा होता लेकिन एक खास वर्ग के मजे के लिए लाहौर में मेट्रो चलाई जाएगी. ओरिया मकबूल जान पाकिस्तान के एक पूर्व सिविल सर्वेंट हैं जो अब टीवी कार्यक्रमों में एनालिस्ट के तौर पर हिस्सा लेते हैं. ओरिया मकबूल जान को पाकिस्तान की सत्ता के खिलाफ एक मजबूत आवाज के रूप में जाना जाता है. उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का समर्थक भी माना जाता है और 13 मई 2023 को PTI नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था.
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Dainik Jagran
Aug 6, 2026, 12:51 PM
तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी

तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी

धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दर्ज मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनके मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। हाई कोर्ट ने जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए महुआ को संसद सत्र समाप्त होने के बाद 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने अपने आदेश में कहा था कि पुलिस कानून के अनुसार जांच जारी रख सकती है। साथ ही निर्देश दिया था कि 14 अगस्त को महुआ के थाने पहुंचने पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि उनके साथ किसी प्रकार की अभद्रता, अंडे फेंकने या अन्य तरह की प्रताड़ना की घटना न हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि पांच अक्टूबर या अगले आदेश तक पुलिस उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेगी, हालांकि उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। गौरतलब है कि एक जुलाई को नदिया जिले में विरोध प्रदर्शन के दौरान महुआ मोइत्रा के काफिले पर अंडे और पत्थर फेंके जाने का आरोप लगा था। इसी दौरान बुर्का को लेकर उनकी कथित विवादित टिप्पणी के बाद स्थानीय थाने में उनके खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज किया गया था।
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Amar Ujala
Aug 6, 2026, 12:48 PM
भाजपा ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया

भाजपा ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया

अमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर बृहस्पतिवार को भाजपा ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण भी किया गया।यह कार्यक्रम भाजपा के प्रदेश कार्यालय, वसंत उद्यान और वसंत विहार में आयोजित हुआ। इसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, सांसद बांसुरी स्वराज और मनोज तिवारी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सुषमा स्वराज उनकी आदर्श थीं और उनकी सादगी, संवेदनशीलता तथा नेतृत्व क्षमता हमेशा प्रेरित करती रहेगी। हर्ष मल्होत्रा ने कार्यकर्ताओं से सुषमा स्वराज के राष्ट्र प्रथम, सेवा और महिला सम्मान के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।विज्ञापनविधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने सुषमा स्वराज को संवेदनशील और कर्मशील नेता बताया। सांसद मनोज तिवारी ने अपने राजनीतिक जीवन में सुषमा स्वराज के विशेष योगदान को याद किया। बांसुरी स्वराज ने भावुक होकर कहा कि उनकी मां लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए मां और दीदी समान थीं।
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