भाजपा नेता नितिन नवीन का मेरठ में विशिष्ट स्वागत किया गया
दिल्ली से 70 किलोमीटर दूर देश के ऐतिहासिक शहर मेरठ... इस शहर ने 1857 में देश का पहला गदर आंदोलन देखा था. आज उसी सरजमीन पर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कही जाने वाली BJP के मुखिया नितिन नवीन का स्वागत बुलडोजर से फूल बरसाकर किया जा रहा है. 21 सितंबर 2026 को BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर मेरठ पहुंचे. काशी टोल प्लाजा पर करीब 40 बुलडोजर लाइन से खड़े किए गए और इनसे करीब पांच क्विंटल फूल बरसाए. क्रेन के जरिए नितिन नवीन को माला पहनाई गई. बुलडोजरों पर चढ़कर कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़े बजाए और 'जय श्री राम' के नारे लगाए. मेरठ और सहारनपुर मंडल की 71 विधानसभा सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत का दिल हैं. इसमें मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के 14 जिले आते हैं. इनमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, बिजनौर, संभल, मुरादाबाद और रामपुर शामिल हैं. इसे यूपी की राजनीति में 'सत्ता का प्रवेश द्वार' माना जाता है. 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने पश्चिमी यूपी में 15 सीटें खोईं, लेकिन फिर भी करीब 70 प्रतिशत सीटों पर बढ़त बनाए रखी. समाजवादी पार्टी और रालोद के गठबंधन ने BJP को कड़ी टक्कर दी थी. इस बार BJP पश्चिमी यूपी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. इस वजह से नितिन नवीन, योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की तिकड़ी को मैदान में उतारा गया है. मेरठ दौरे में सिर्फ बुलडोजर वाला स्वागत ही नहीं हुआ. नवीन ने पश्चिमी यूपी के पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, जिलाध्यक्षों और कोर कमेटी के सदस्यों के साथ गहन समीक्षा बैठकें कीं. इनका मुख्य एजेंडा पन्ना प्रमुखों और बूथ समितियों को एक्टिव करना था. पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर मजबूती ही बड़े अंतर से जीत सुनिश्चित करती है. सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित युवा सम्मेलन में नवीन ने युवाओं से 'रील' की दुनिया छोड़कर 'रियल' जिंदगी जीने की अपील की. उन्होंने नशे और शॉर्टकट के रास्ते से दूर रहने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया. मंच पर नेताओं के साथ केवल छात्र बैठे थे. मेरठ के अलावा गाजियाबाद , हापुड़, नोएडा और बुलंदशहर से करीब ढाई हजार छात्र मौजूद रहे. फिर भी समझ नहीं आया कि मेरठ में बुलडोजर ही क्यों? आगे समझते हैं... यह समझने के लिए कि बुलडोजर BJP के लिए महज एक निर्माण मशीन से 'चुनावी ब्रह्मास्त्र' कैसे बन गया, जुलाई 2020 में लौटना पड़ेगा. कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे ने पुलिस पर बुलडोजर से हमला किया था, जिसके बाद उसके ठिकानों पर बुलडोजर चलाए गए. योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे एक प्रशासनिक मॉडल के रूप में पहचान दे दी. यानी अपराधियों और भू-माफियाओं के अवैध निर्माणों को गिराना, जिससे 'कानून का डर' पैदा हो. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह मॉडल BJP के लिए चुनावी ब्रांड बन गया. योगी आदित्यनाथ खुद रैलियों में बुलडोजर का जिक्र करते थे, और उन्हें 'बुलडोजर बाबा' कहा जाने लगा. BJP का दावा है कि इस मॉडल के तहत लगभग 2 हजार करोड़ रुपए की अवैध कब्जे वाली संपत्ति छुड़ाई गई और उस पर गरीबों के लिए घर बने. साथ ही, पिछले 6 सालों में 10 हजार से ज्यादा पुलिस एनकाउंटर हुए. इससे कई अपराधियों ने थानों में सरेंडर किया. हालांकि, इस मॉडल का दूसरा चेहरा भी है, जिसे विपक्ष और मानवाधिकार संगठन उठाते रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि 'बुलडोजर जस्टिस' का इस्तेमाल अक्सर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सामूहिक दंड के रूप में किया गया. हरियाणा के नूंह में अगस्त 2023 में चार दिनों में 50 किलोमीटर के दायरे में 500 से 1,250 मकान-दुकानें गिराई गईं. उत्तर प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के फैसले के बावजूद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में पाया कि राज्य में दंडात्मक विध्वंस जारी है. बुलडोजर सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहा. पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में योगी आदित्यनाथ की रैलियों में लोग 'बुलडोजर बाबा जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे. असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को बुलडोजरों ने फूल बरसाकर 'बुलडोजर सलाम' दिया गया. कोलकाता पुलिस को जीत के जुलूसों में बुलडोजर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाना पड़ा. यानी बुलडोजर अब सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई का औजार नहीं, बल्कि BJP की राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है. बंगाल चुनाव में BJP ने योगी को शुरुआती चरणों में नहीं उतारा. पार्टी की 'सीक्रेट रणनीति' के मुताबिक, योगी को बाद के निर्णायक चरणों में 'ब्रह्मास्त्र' के रूप में तैनात किया जाना था, ताकि ध्रुवीकरण और हिंदुत्व के मुद्दों का ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके. मेरठ का यह आयोजन 2027 के चुनाव के लिए BJP का पहला बड़ा संकेत है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके तीन मायने हैं: बुलडोजर को चुनावी प्रतीक बनाने की रणनीति BJP के लिए फायदेमंद रही है, लेकिन इसके जोखिम भी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोजर जस्टिस' को असंवैधानिक करार दिया है और कहा है कि यह संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है. अगर चुनाव के दौरान विपक्ष इसे 'सामूहिक दंड' और 'अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई' के रूप में पेश करता है, तो यह BJP के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है. मेरठ में 40 बुलडोजरों की कतार, पांच क्विंटल फूलों की बारिश और क्रेन से पहनाई गई माला दिखाता है कि BJP अपनी सबसे बड़ी ताकत को ही अपना सबसे बड़ा चुनावी चेहरा बनाने में जुट गई है. 2027 में यह 'ब्रह्मास्त्र' कितना कारगर होता है, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन मेरठ से जो संदेश गया है, वह साफ है कि लड़ाई अब शुरू हो चुकी है. ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.