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Nov 5, 2026, 05:36 PM
पार्टी में अशांति के बीच नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं ने संकटकालीन बैठक की

पार्टी में अशांति के बीच नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं ने संकटकालीन बैठक की

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शुक्रवार (6 नवंबर) को श्रीनगर में पार्टी के बागी विधायकों के साथ आमने-सामने की एक अहम बैठक करेंगे. यह बैठक सुबह 10:30 बजे श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित फारूक अब्दुल्ला के आवास पर होगी. इस महत्वपूर्ण पहल का मकसद पार्टी के भीतर तेजी से बढ़ रहे असंतोष को थामना है. यह असंतोष 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल फेरबदल और उसके बाद श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के पार्टी छोड़ने की घटना के बाद पैदा हुआ है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुद को दरकिनार महसूस कर रहे हैं- जिनमें सात बार के विधायक मुबारक गुल और वरिष्ठ विधायक नजीर अहमद गुरेजी शामिल हैं. बागी गुट ने अपनी शिकायतों का एक मसौदा तैयार किया है, जिसे पार्टी अध्यक्ष को भेज दिया गया है. नेताओं का यह गुट हाल ही में गठित मंत्रिपरिषद में बड़े बदलाव की मांग कर रहा है. उनकी मांग है कि मौजूदा मंत्री इस्तीफा दें, ताकि उन वरिष्ठ नेताओं के लिए जगह बन सके जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया गया था. ये विधायक मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकारों- खास तौर पर नासिर असलम वानी और शम्मी ओबेरॉय को तुरंत हटाने की भी मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि इन लोगों की वजह से फैसले लेने की प्रक्रिया एक छोटे, बिना चुने हुए 'इनर सर्कल' (भीतरी दायरे) तक ही सीमित होकर रह गई है. विधायक पार्टी नेतृत्व पर इस बात के लिए भी जोर डाल रहे हैं कि वे 2024 के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए एक तय समय-सीमा के साथ ठोस कदम उठाएं. इनमें मुख्य रूप से अनुच्छेद 370 की बहाली, राज्य का दर्जा वापस पाना, और रोजगार व बिजली जैसी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, असंतुष्ट विधायकों की संख्या 18 से 25 के बीच बताई जा रही है. इस गुट ने एक ठोस रणनीति बनाने और एकजुट होकर अपनी बात रखने के लिए कई बार बंद कमरे में बैठकें की हैं. खबरों के मुताबिक, गुरुवार (05 नवंबर) को विधायक मुबारक गुल के आवास पर इन विधायकों की चौथी बैठक हुई, जिसमें बागी विधायकों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया. इससे पहले, पार्टी और मुख्यमंत्री पर दबाव बनाने के लिए विधायकों ने 30 अक्टूबर को विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर, 2 नवंबर को विधायक फारूक शाह के आवास पर और 4 नवंबर को विधायक नजीर गुरेजी के आवास पर बैठकें कीं. इसलिए, यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इसका नतीजा NC और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार का भविष्य तय करेगा. हालांकि मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन के पास विधानसभा की 90 में से 54 सीटों का मजबूत बहुमत है, लेकिन अगर असंतुष्ट गुट के कई विधायक एक साथ इस्तीफा दे देते हैं, तो सदन में बहुमत का आंकड़ा काफी कम हो सकता है. इससे उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट और शीर्ष सलाहकारों को लेकर काफी मतभेद हैं, लेकिन उम्मीद है कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला अपने राजनीतिक अनुभव और कद का इस्तेमाल करके कोई आपसी समझौता करा लेंगे, ताकि पार्टी में कोई सार्वजनिक फूट न पड़े.
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Nov 5, 2026, 05:30 PM
यू. जी. सी. नियमों के विवाद पर भाजपा को राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है

यू. जी. सी. नियमों के विवाद पर भाजपा को राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है

UGC के नए नियमों को लेकर जारी विवाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इन नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने की तैयारी की जानकारी दी है. सरकार की तरफ से अदालत को बताया गया कि नियमों पर पुनर्विचार किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इनके लागू होने के बाद किसी भी छात्र को लेकर कोई आशंका न रहे. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. UGC विवाद का राजनीतिक असर भी दिखाई देने लगा है. हाल ही में हुए MLC चुनाव में BJP को अपने गढ़ में झटका लगा. इसके पीछे सवर्ण समाज की UGC के नए नियमों को लेकर नाराजगी को भी एक वजह बताया जा रहा है. उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह घटनाक्रम BJP के लिए काफी अहम माना जा रहा है. पार्टी को आशंका है कि इस मुद्दे का असर नौजवानों और नए मतदाताओं पर पड़ सकता है. UGC विवाद को लेकर BJP की परेशानी का अंदाजा 2 नवंबर को प्रयागराज के परेड ग्राउंड में हुए एक कार्यक्रम से लगाया जा सकता है. यहां डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भाषण दे रहे थे, तभी कुछ नौजवान UGC को लेकर नारेबाजी करने लगे. नारेबाजी कर रहे युवाओं ने केशव प्रसाद मौर्य से UGC के बारे में जवाब मांगा. इस पर मौर्य ने कहा कि वह हर मुद्दे पर बात करेंगे और किसी भी विषय पर बोलने से पीछे नहीं हटते. कार्यक्रम में विवाद की स्थिति बनने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और नारेबाजी कर रहे रोहित तिवारी को अपने साथ ले गई. आरोप है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट भी हुई. इस घटना ने उत्तर प्रदेश में UGC के नए नियमों को लेकर BJP के कोर वोटर की नाराजगी को फिर सामने ला दिया. पार्टी को आशंका है कि इस तरह के वीडियो वायरल होने से उसे राजनीतिक नुकसान हो सकता है और उसे जनता के सवालों का जवाब देना पड़ेगा. UGC पर यूटर्न लेती मोदी सरकार UGC को लेकर BJP टेंशन में क्यों? #UGC #BJP #CasteDiscrimination #HigherEducation #EducationPolicy #UGCCommittee #Khabardar | @SwetaSinghAT | @abhishek6164 https://t.co/iy0xJKhXzn UGC के नए नियमों को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि नियमों पर पुनर्विचार के लिए कमेटी बनाने की तैयारी की जा रही है. सरकार ने भरोसा दिलाया कि नियमों को इस तरह लागू किया जाएगा कि किसी भी छात्र को लेकर कोई आशंका न रहे. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. याचिकाकर्ता की तरफ से भी इस पहल को सराहनीय बताया गया, हालांकि सवाल उठाया गया कि जब इन नियमों को लेकर इतनी गंभीर आशंकाएं थीं तो इन्हें लाया ही क्यों गया. दरअसल, शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से UGC के नए नियम लागू किए गए थे. लेकिन इनके लागू होने के बाद ही विवाद शुरू हो गया. सवर्ण समाज के लोगों की नाराजगी को देखते हुए अब इनमें बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं. UGC को लेकर BJP के कोर वोटर की नाराजगी का मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तक भी पहुंचा. संघ को लगातार फीडबैक मिल रहा था कि यह मुद्दा काफी गहराई तक पहुंच चुका है और उत्तर प्रदेश के चुनाव में BJP को नुकसान पहुंचा सकता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भी इस नाराजगी को लेकर चिंता जाहिर की थी. उनके मुताबिक, UGC को लेकर BJP के कोर वोटर में नाराजगी थी और इस पर लगातार फीडबैक मिल रहा था. केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम में हुए हंगामे ने पार्टी की चिंता और बढ़ा दी. BJP को लगा कि अगर इस तरह के वीडियो लगातार वायरल होते रहे तो उसे जवाब देना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में पार्टी की कोशिश इस मामले को सीधे राजनीतिक टकराव में लाने के बजाय अदालत के जरिए समाधान निकालने की दिखाई दी. इसी बीच BJP ने उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले अपने वोटरों की नाराजगी दूर करने के लिए अपने प्रकोष्ठों को विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की जिम्मेदारी भी दी. इन प्रकोष्ठों के जरिए UGC के मुद्दे पर जनता से संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है. UGC का मुद्दा BJP के लिए दोधारी तलवार बन गया है. अगर पार्टी नए नियमों को वापस लेती है तो OBC वर्ग की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, अगर नियमों को लेकर अपना रुख नहीं बदलती तो उसे अपने कोर वोटर का गुस्सा झेलना पड़ सकता है. उत्तर प्रदेश में सवर्ण समाज BJP का एक अहम वोट बैंक माना जाता है. राज्य में सवर्णों की आबादी करीब 27.6 फीसदी बताई जाती है. इसमें ब्राह्मणों की आबादी 13.3 फीसदी, क्षत्रियों की 9.6 फीसदी और वैश्यों की 4.7 फीसदी है. 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP को करीब 41 फीसदी वोट मिले थे. माना जाता है कि इसमें सवर्ण मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही. पिछले दो विधानसभा चुनावों में ब्राह्मणों का बड़ा हिस्सा BJP के साथ रहा. 2017 में ब्राह्मणों के 83 फीसदी और 2022 में 89 फीसदी वोट BJP को मिलने का दावा किया गया था. क्षत्रिय और वैश्य मतदाताओं का समर्थन भी पार्टी को मिलता रहा है. BJP की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी के वोट प्रतिशत में करीब 10 फीसदी का उछाल देखने को मिला था. ऐसे में अगर BJP के कोर वोटर का समर्थन कम होता है तो पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है. UGC विवाद को लेकर BJP के अंदर की नाराजगी के संकेत पार्टी नेताओं के बयानों से भी मिल रहे हैं. केशव प्रसाद मौर्य के प्रयागराज कार्यक्रम में हुए हंगामे के बाद मौजूदा विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि UGC का विरोध करना हर ब्राह्मण और सवर्ण का अधिकार है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने अपना नंबर बढ़ाने के लिए अपनों पर हिंसा की, उन्हें समझना चाहिए कि कोई अपने बच्चे का नाम विभीषण नहीं रखता. दरअसल, ऐसी चर्चा है कि केशव प्रसाद मौर्य इस बार अपनी विधानसभा सीट बदलना चाहते हैं. उनकी नजर प्रयागराज की शहर उत्तरी सीट पर है, जहां से हर्षवर्धन वाजपेयी विधायक हैं. इसी क्षेत्र में केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम के दौरान UGC को लेकर सवाल उठे थे. आरोप लगा कि नारेबाजी करने वाले युवक की पिटाई BJP पार्षद विनय मिश्रा सिंटू ने की. इसके बाद हर्षवर्धन वाजपेयी की पोस्ट को लेकर सवाल उठे कि उनका निशाना BJP पार्षद थे या केशव प्रसाद मौर्य. हालांकि, इस पोस्ट का निशाना कौन था, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. लेकिन UGC विवाद ने BJP के भीतर नेताओं को एक-दूसरे पर निशाना साधने का मौका जरूर दे दिया है. पार्टी को डर है कि नाराज नेता इस मुद्दे के बहाने उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं. UGC के नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाना और किसी भी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना है. नए नियमों के मुताबिक, सरकारी कॉलेजों से लेकर निजी विश्वविद्यालयों तक हर संस्थान में एक इक्विटी सेल बनाना जरूरी होगा. यह सेल शिकायतों पर सुनवाई करेगी. अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है तो वह यहां शिकायत दर्ज करा सकता है. कमेटी की सिफारिश के आधार पर संस्थान को कार्रवाई करनी होगी. विवाद की मुख्य वजह जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC को शामिल करना है. इससे पहले ड्राफ्ट में जातिगत भेदभाव से सुरक्षा के दायरे में केवल SC और ST वर्ग को रखा गया था, लेकिन नए नियमों में OBC को भी शामिल कर लिया गया. इन नियमों का विरोध करने वालों का तर्क है कि इससे सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं, जो उनके करियर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं. UGC को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी के बीच हाल ही में हुए विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक कोटे के चुनाव भी चर्चा में हैं. दावा किया जा रहा है कि इस नाराजगी का खामियाजा BJP को अपने गढ़ में उठाना पड़ा. आगरा, वाराणसी और लखनऊ की सीटों पर पार्टी को झटका लगा. इसके बाद BJP ने इस मामले में डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज कर दी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े ने भी एक्स पर पोस्ट कर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से कमेटी गठित करने की जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि नियमों में किसी तरह के असंतुलन के कारण किसी भी वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव न हो. हर विद्यार्थी का सम्मान और हित सर्वोपरि है. राजनीतिक लिहाज से BJP के सामने चुनौती यह है कि अगर वह UGC के नियमों का खुलकर समर्थन करती है तो 17-18 फीसदी सवर्ण वोट बैंक के छिटकने का डर है. वहीं, अगर इन नियमों का खुलकर विरोध करती है तो गैर-यादव OBC और दलित वोटों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में नियमों की समीक्षा के संकेतों से BJP को राहत जरूर मिली होगी, लेकिन राजनीतिक नुकसान की चिंता अभी बनी हुई है. इसी वजह से उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले BJP ने संघ के साथ मिलकर जमीन पर काम करने की रणनीति बनाई है. UGC विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी अपने कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नियमों में बदलाव किया है. नए बदलावों के तहत अब बैठकों का एजेंडा पहले से साझा किया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही यानी मिनट्स का ब्योरा भी जारी किया जाएगा. पहले ऐसा नहीं होता था. इसके अलावा अधिकारियों को विदेश यात्रा पर जाने के लिए मंजूरी लेनी होगी, जबकि पहले इसके लिए ऐसी मंजूरी जरूरी नहीं थी. नए IT मॉड्यूल को भी पहले अधिकारियों की एक कमेटी के पास भेजा जाएगा. वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही उसे आयोग के सामने रखा जाएगा. पहले यह मुद्दा चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच विवाद की वजह बना था.
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Nov 5, 2026, 05:21 PM
तुर्की के एर्दोगन ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद जताई

तुर्की के एर्दोगन ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद जताई

तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने अमेरिका में हुए मिड-टर्म चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण स्थिति के खत्म होने की उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे इलाके में जल्द से जल्द शांति आए. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव के नतीजे इलाके में लंबे समय तक शांति और स्थिरता लाने में मदद करेंगे. अंकारा इस उद्देश्य के साथ अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस के लगातार संपर्क में बना रहेगा. तुर्किए के राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से गुरुवार (5 नवंबर, 2026) को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, दक्षिण कोरिया से लौटते समय राष्ट्रपति एर्दोगन ने विमान में पत्रकारों से कहा, ‘हमारी सबसे बड़ी उम्मीद है कि चुनाव के नतीजे हमारे क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता में योगदान देंगे. इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हम अमेरिकी प्रशासन, प्रतिनिधि सभा और सीनेट, तीनों के साथ लगातार संवाद बनाए रखेंगे.’ एर्दोगन ने कहा, ‘अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का तुर्किए-अमेरिका संबंधों और पश्चिम एशिया को लेकर वाशिंगटन की नीति पर क्या असर पड़ेगा, इसके बारे में अभी कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. मैं चाहता हूं कि चुनाव के नतीजे अमेरिकी जनता के लिए फायदेमंद हों. मुझे यह भी उम्मीद है कि हमारे क्षेत्र और वैश्विक राजनीति पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा. हालांकि, अभी इस बारे में कोई ठोस बयान देना जल्दबाजी होगी. तुर्किए और अमेरिका के संबंध गहरे हैं और मजबूत नींव पर आधारित हैं. हम दोनों देश नाटो के सहयोगी हैं और कई सालों से हमारे बीच रणनीतिक संबंध रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं कि हमारा इलाका लंबे समय से बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है. दुर्भाग्य से हमारे आसपास युद्ध, संघर्ष और दमन लगातार जारी हैं. हम चाहते हैं कि हमारे क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति स्थापित हो. हमारी सबसे बड़ी इच्छा है कि चुनाव के नतीजे हमारे इलाके में स्थायी शांति और स्थिरता लाने में योगदान दे. इसी मकसद से हम अमेरिकी प्रशासन, प्रतिनिधि सभा और सीनेट के साथ करीबी संवाद बनाए रखेंगे.’ विजय कुमार बिट्ठल ABP न्यूज में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर भूमिका निभा रहे हैं. पिछले 2 सालों से ABP न्यूज में कार्यरत हैं और नेशनल-इंटरनेशनल न्यूज टीम का हिस्सा हैं. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, चुनाव और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरें विशेष रूप से लिखते रहे हैं. ब्रेकिंग न्यूज पर फोकस रखते हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश करते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 5 सालों का अनुभव है. एबीपी न्यूज से पहले प्रिंट मीडिया में दैनिक जागरण में बतौर सब-एडिटर कार्यरत रहे. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में बैचेलर्स डिग्री हासिल की है. संपर्क करें- Mail ID: vijaybitthal99@gmail.com | LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/vijay-kumar-bitthal-47ab7a1a3/ | X: https://x.com/Vijaybitthal99
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Nov 5, 2026, 04:35 PM
संयुक्त सूची ने गादी आइजेनकोट को इज़राइल के अगले प्रधान मंत्री के रूप में समर्थन दिया

संयुक्त सूची ने गादी आइजेनकोट को इज़राइल के अगले प्रधान मंत्री के रूप में समर्थन दिया

इजरायल में अरब के राजनीतिक गुटों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट और अरब नेतृत्व वाली राआम पार्टी ने देश के अगले पीएम के रूप में यशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइसेनकोट का सपोर्ट किया है. द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉइंट लिस्ट ने गुरुवार को अपना समर्थन देने की घोषणा की. सरकार गठन को लेकर होने वाली बातचीत के दौरान वे राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने औपचारिक रूप से आइसेनकोट के नाम की सिफारिश करेंगे. राआम पार्टी के 8 सांसदों ने पहले ही अपना समर्थन देने का वादा कर दिया था. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने एक बयान में बताया कि जाइंट लिस्ट ने गुरुवार को घोषणा की है कि वे आज शाम राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को अपने फैसले के बारे में बताएंगे. वे राष्ट्रपति से सिफारिश करेंगे कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी गादी आइसेनकोट को सौंपी जाए. अब आइसेनकोट को 120 सीटों वाली संसद के 67 सदस्यों का समर्थन मिलने की उम्मीद है. इस तरह वे मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आगे निकल गए हैं. इनके लिकुड पार्टी गठबंधन के पास 58 सीटें हैं. इस आंकड़े में अरब- नेतृत्व वाली राआम पार्टी के आठ सांसद और जॉइंट लिस्ट के 11 सदस्य शामिल हैं. पिछले हफ्ते हुए आम चुनाव में इजरायल के 120 सीटों वाली संसद में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने रिकॉर्ड 19 सीटें जीती हैं. यह समर्थन ऐसे वक्त आया है, जब इससे पहले आइसेनकोट ने अपनी सरकार में अरब पार्टियों को शामिल करने को लेकर रुख अपनाया था. 26 सितंबर को चैनल 12 को दिए एक इंटरव्यू में याशर नेता ने कहा था कि राआम उनकी अगली सरकार का हिस्सा नहीं होगी. उन्होंने तर्क दिया था कि उस समय कोई भी अरब या अति रुढ़िवादी पार्टी गठबंधन में शामिल होने के लिए उनकी शर्तों को पूरा नहीं करती थी. आइसेनकोट ने पहले कहा था कि फिलहाल मुझे ऐसी कोई अरब या हारेदी पार्टी नहीं दिखती, जो इन सिद्धांतों को नहीं मानती हो. इसमें मंसूर अब्बास भी शामिल हैं. इसलिए वे मेरी अगली सरकार हिस्सा नहीं होंगे. नेतन्याहू को समर्थन को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है. नेतन्याहू गुट के पास 53 सीटें हैं, लेकिन हो सकता है कि उन्हें अपने सभी सदस्यों का समर्थन न मिल पाए. यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म के भीतर देगे हातोराह गुट ने कहा है कि वह किसी भी उम्मीदवार के नाम की सिफारिश नहीं करेगा. अति रूढ़िवादी गुट ने नेतन्याहू से दूरी बना ली है. इसका कारण यह है कि उनकी सरकार हारेदी पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने वाला कानून पारित करने में विफल रही है. इधर, राष्ट्रपति ने बातचीत का सिलसिला जारी कर दिया है. उन्होंने पिछले हफ्ते आए संसदीय चुनावों के आधिकारिक परिणामों को स्वीकार कर लिया है. राजनीतिक दलों के साथ परामर्श शुरू कर दिया है. ताकि यह तय किया जा सके, कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए. इससे पहले हर्जोंग ने सभी दलों से आग्रह किया था कि वे एक और चुनाव की नौबत आने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा कि कोई भी समझदार व्यक्ति अगर हमारे सामने मौजूद सुरक्षा और कूटनीनितक चुनौतियां हमारे आसपास बदलते क्षेत्रीय हालात और हमें भीतर से बांटने वाले मुद्दों पर गौर करें, तो वह समझ जाएगा कि हमारे कंधों पर कितनी ब ड़ी जिम्मेदारी है. हर्जोग ने रिलिजियस जायोनिज्म, जेहुत, शास और इजरायल बेतेनु पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि इन प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी सिफारिशें सौंपी हैं कि किस नेसेट सदस्य को सरकार बनाने का जनादेश दिया जाना चाहिए. हर्जोग ने कहा है कि गुरुवार को भी बातचीत का दौर जारी रहेगा. इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद ही राष्ट्रपति की तरफ से उम्मीदवार को चुना जाएगा. कार्तिक सागर समाधिया, ABP न्यूज में बतौर कंसल्टेंट सेवाएं दे रहे हैं. नेशनल और इंटरनेशनल खबरों पर लगातार नजर रखते हैं. कई राज्यों के विधानसभा चुनाव के अलावा साल 2019 में हुए लोक चुनावों से जुड़ी खबरों को कवर किया. एबीपी न्यूज से पहले दैनिक भास्कर, एशियानेट न्यूज, ईटीवी भारत, इंडिया टुडे से जुड़े रहे हैं. इस दौरान एडिटोरियल, टीवी-डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े कार्य किए. इंडिया टुडे के यूट्यूब, सोशल मीडिया पर कैप्सूल और लॉन्ग फॉर्मेट वीडियो बनाने से जुड़ा अनुभव शामिल है. मीडिया का करीबन साढ़े 8 साल का अनुभव है. कोरोना और एमपी चुनाव के समय ग्राउंड से एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. मध्यप्रदेश के सीहोर शहर से ताल्लुक रखते हैं. कार्यक्षेत्र भोपाल, दिल्ली और हैदराबाद रहा है. Contact: K.sehore@gmail.com Twitter: https://x.com/kartiksamadhiya Linkdin: https://www.linkedin.com/in/kartik-sagar-samadhiya-01327b410/
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Nov 5, 2026, 04:27 PM
असमान नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर जनसुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं में झड़प

असमान नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर जनसुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं में झड़प

बिहार के समस्तीपुर में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र बांटने को लेकर जमकर हंगामा हो गया. जिला कार्यकारिणी सम्मेलन में पहुंचे कार्यकर्ताओं को संगठन में पद और नियुक्ति पत्र देने की बात कही गई थी, लेकिन कुछ चुनिंदा लोगों को ही सूची में जगह मिलने से नाराजगी फैल गई. कार्यक्रम खत्म होते ही कार्यकर्ता दो गुटों में बंट गए और आपस में विरोध जताने लगे. दरअसल, यह सम्मेलन समस्तीपुर शहर के यूएन पैलेस में आयोजित किया गया था. इसमें पार्टी के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए थे. कार्यक्रम के दौरान संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के नाम की सूची मंच से घोषित करने और कुछ लोगों को प्रशांत किशोर के हाथों नियुक्ति पत्र देने की योजना थी. इसके लिए नामों की एक सूची उन्हें सौंपी गई थी, लेकिन आरोप है कि उसमें कुछ ही लोगों के नाम शामिल किए गए. कार्यक्रम खत्म होने के बाद जैसे ही लोग बाहर निकले, नाराज कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया. उनका आरोप था कि संगठन में पद देने के मामले में भेदभाव किया गया है. जिला स्तर पर जिम्मेदारी संभालने वाले कई लोगों को नियुक्ति पत्र नहीं मिला, जबकि कुछ लोगों को प्रखंड स्तर पर पद दिए गए. नाराज कार्यकर्ता राजेश कुमार सिंह ने बताया कि सम्मेलन में प्रशांत किशोर ने समस्तीपुर जिला संगठन की घोषणा करने और कुछ लोगों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र देने की बात कही थी. हालांकि, ऐसा नहीं हो सका. कुछ लोगों को प्रखंड स्तर पर नियुक्ति पत्र दिए गए, लेकिन वे भी प्रशांत किशोर के हाथों नहीं बांटे गए. मंच से नाम बोलकर उन्हें पत्र सौंपे गए. ​ राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, जिला संगठन के कई पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिला. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने इस पर सफाई देते हुए माना कि जिला संगठन की ओर से घोषणा कराने में गलती हुई है. अब नाराज कार्यकर्ताओं को इंतजार है कि जिला संगठन के पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र कब दिया जाएगा. हंगामे के बाद प्रशांत किशोर नाराज कार्यकर्ताओं को समझाने और स्थिति संभालने में जुट गए. उन्होंने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की. हालांकि, जब उनसे इस पूरे विवाद को लेकर सवाल पूछा गया तो वह भड़क गए. कार्यक्रम में हुए घटनाक्रम को लेकर उनसे जवाब मांगा जा रहा था. वहीं, जनसुराज के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण सहनी ने भी माना कि सभी लोगों को एक साथ नियुक्ति पत्र बांटना संभव नहीं हो पाया था. इसी वजह से कुछ कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की. उन्होंने बताया कि प्रशांत किशोर ने नाराज लोगों को समझाकर स्थिति संभालने की कोशिश की. इस पूरे घटनाक्रम ने समस्तीपुर में जनसुराज पार्टी के भीतर संगठनात्मक मतभेद और अंतर्कलह को उजागर कर दिया है. नियुक्ति पत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जिला संगठन में कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की वजह बन गया है.
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Nov 5, 2026, 04:26 PM
उत्तर प्रदेश में भाजपा विधायक ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड, समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश में भाजपा विधायक ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड, समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल अभी से गर्म होने लगा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है. इसी बीच बाराबंकी की हैदरगढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक दिनेश रावत ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए बीजेपी सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए ‘27 में कृष्ण आएंगे’ पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक दिनेश रावत ने सपा पर सनातन धर्म का अपमान करने और प्रदेश में उपद्रव व दंगा-फसाद की राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक कार्यशैली के कारण ही पिछले कई वर्षों से सत्ता से बाहर है और 2027 में भी सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी. विधायक ने किसानों के मुद्दे पर बीजेपी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पिछली सरकारों में प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर किसानों को दो, पांच और छह रुपये तक के मुआवजे के चेक दिए जाते थे. इसके विपरीत बीजेपी सरकार ने फसल नुकसान पर शिविर लगाकर किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया. उन्होंने दावा किया कि हाल में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को करीब 20 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है. फसल बीमा योजना का लाभ भी पात्र किसानों को मिल रहा है. दिनेश रावत ने कहा कि बीजेपी सरकार में प्रदेश के साथ बाराबंकी में भी विकास कार्य हुए हैं. एक्सप्रेसवे कॉरिडोर, सड़कें, पुल और परगामी सेतुओं का निर्माण कराया गया है. उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र हैदरगढ़ में पांच पुल और दो परगामी सेतु बनाए जाने की बात कही. विधायक ने उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि, पेंशन और बेटियों के लिए संचालित योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अब सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में एक करोड़ 89 लाख महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर दिए गए हैं. साथ ही युवाओं को पुलिस समेत विभिन्न विभागों में बिना रिश्वत और भेदभाव के नौकरियां मिली हैं. विधानसभा चुनाव 2027 में बीजेपी कितनी सीटें जीतेगी, इस सवाल पर विधायक ने कहा कि सीटों की संख्या चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगी. हालांकि, उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिले जनसमर्थन का हवाला देते हुए पार्टी की जीत का भरोसा जताया. महंगाई, बेरोजगारी और वोट चोरी जैसे विपक्ष के मुद्दों को उन्होंने जनता को गुमराह करने वाला बताया. अब सवाल यह है कि बीजेपी विधायक द्वारा गिनाई जा रही विकास की उपलब्धियां 2027 के विधानसभा चुनाव में कितना असर डालेंगी? क्या जनता विकास और सरकारी योजनाओं के आधार पर फिर बीजेपी को मौका देगी या विपक्ष के सवाल चुनावी माहौल बदलेंगे?
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Nov 5, 2026, 04:24 PM
मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए भाजपा के उम्मीदवार मनदीप सिंह पुरी

मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए भाजपा के उम्मीदवार मनदीप सिंह पुरी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. गुरुवार को नामांकन वापसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर उमेश शर्मा ने उन्हें निर्वाचित घोषित किया और निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपा. पुरी इस उपचुनाव में अकेले उम्मीदवार रह गए थे. जांच के दौरान दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए थे. ऐसे में 12 नवंबर को प्रस्तावित मतदान की जरूरत नहीं पड़ी. राज्यसभा उपचुनाव में कान्ते सयान्ना और राजकुमार लोहानी ने भी नामांकन दाखिल किया था. राजकुमार लोहानी को विपक्षी कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था. हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दोनों उम्मीदवारों के पर्चे खारिज कर दिए गए. इसके बाद हरदीप सिंह पुरी मैदान में अकेले उम्मीदवार रह गए. नामांकन वापसी की अंतिम तारीख पूरी होने पर उनका निर्विरोध निर्वाचन घोषित कर दिया गया. मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी विधायक रामेश्वर शर्मा समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में रिटर्निंग ऑफिसर से पुरी का निर्वाचन प्रमाण पत्र प्राप्त किया. खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी राज्यसभा की खाली सीट के लिए हुए उपचुनाव में निर्विरोध चुने गए हैं. उन्होंने पुरी के निर्वाचन पर पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई भी दी. प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद हेमंत खंडेलवाल और भाजपा के प्रदेश संगठन महासचिव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से उनके आवास पर मुलाकात की और उन्हें निर्वाचन की जानकारी दी. मध्य प्रदेश से राज्यसभा की यह सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. मुरुगन का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था. उनके इस्तीफे के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा. इसके बाद भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया. अब उनके निर्विरोध निर्वाचन के साथ उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है.
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Nov 5, 2026, 04:21 PM
अमित शाह ने राहुल गांधी पर लगाया अराजकता फैलाने का आरोप

अमित शाह ने राहुल गांधी पर लगाया अराजकता फैलाने का आरोप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को हरियाणा के करनाल में बीजेपी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के समापन पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बौखलाए हुए हैं, इसलिए हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ते हैं. उन्होंने कहा कि चुनावों में लगातार मिल रही हार की हताशा में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी अब खुलकर अराजकता पर उतर आई है, लेकिन देश की जनता इन्हें करारा जवाब देने के लिए एकजुट है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'लोकतंत्र में संसद चर्चा का सर्वोपरि स्थान है. राहुल गांधी जी आप संसद चलने नहीं देते हो, मुद्दों पर चर्चा नहीं करते हो. संसद में शोर-शराबा, बहिष्कार करने को आपने कांग्रेस का कल्चर बना दिया है. संसद चलने नहीं देनी है और रोड पर भीड़ इकट्ठा करके अराजकता फैलाने वाले की तरह अराजकता फैलानी है. देश की जनता को तय करना है कि देश की कानून बनाने की प्रक्रिया, देश की समस्याओं पर चर्चा, देश की जनता की भलाई के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं पर चर्चा रोड पर नहीं, बल्कि संसद में होगी.' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अगर सड़क पर चर्चा करने का इतना ही शौक है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा, ‘आप पीएम मोदी को कहते हो स्थान बताओ, वो तो बाद में आएंगे. आप हमें हरियाणा के किसी चौराहे का स्थान बताओ, मेरा युवा मोर्चा का अध्यक्ष आकर आपसे चर्चा करेगा. राहुल गांधी जानते हैं कि वह हारने वाले हैं, इसलिए वह अपनी हार के लिए चुनाव आयोग और एसआईआर की प्रक्रिया को दोष देते हैं. राहुल गांधी बौखलाए हुए हैं, हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ते हैं.’ अमित शाह ने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा, 'आप पीएम नरेंद्र मोदी को चर्चा के लिए चुनौती देते हो? अगर चर्चा करनी है तो बस पीएम मोदी को पत्र लिख दो. हम एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार हैं. राहुल गांधी की पार्टी घुसपैठियों के नाम दर्ज कराने के लिए एसआईआर का विरोध कर रही है. बीजेपी का संकल्प है, हम घुसपैठियों को ढूंढेंगे, मतदाता सूची से निकालेंगे. इसके बाद चुन-चुनकर देश से बाहर निकालने का काम करेंगे. कांग्रेस वालों की रैली वोट बचाने के लिए नहीं, घुसपैठिया बचाने की रैली है.' विक्रम कुमार एबीपी न्यूज़ में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं और डिजिटल टीम का हिस्सा हैं. एबीपी लाइव के नेशनल डेस्क पर विक्रम देश और विदेश की राजनीति से जुड़ी खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ पर इनका विशेष फोकस रहता है. देश-विदेश के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर लिखते रहते हैं. यूएस-ईरान युद्ध के दौरान इन्होंने कई इन-डेप्थ खबरें की हैं जिन पर कई मिलियन व्यूज आए. साल 2023 में प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मास मीडिया हिंदी में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद एबीपी लाइव के साथ करियर की शुरुआत की. Email: vikramk@abpnetwork.com
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Nov 5, 2026, 03:56 PM
इजरायल की संयुक्त सूची और राम दलों ने प्रधानमंत्री के लिए गदी आइजेनकोट का समर्थन किया

इजरायल की संयुक्त सूची और राम दलों ने प्रधानमंत्री के लिए गदी आइजेनकोट का समर्थन किया

इजरायल में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होता दिख रहा है. इजरायल की अरब पार्टी जॉइंट लिस्ट ने बेंजामिन नेतन्याहू के प्रतिद्वंदी गादी आइसेनकोट को समर्थन देने की घोषणा की है. 11 सीटें जीतने वाली जॉइंट लिस्ट का कहना है कि वह राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग से अगले प्रधानमंत्री के रूप में याशार पार्टी के चेयरमैन गादी आइसेनकोट के नाम की सिफारिश करेगी. राआम पार्टी पहले ही गादी को सपोर्ट करने की घोषणा कर चुकी है. द टाइम्स ऑफ इजरायल की 4 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक राआम के चीफ मंसूर अब्बास ने बयान जारी कर कहा था कि वह राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने आइसेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की सिफारिश करेगी. इस पार्टी के पास 8 सीटें हैं. टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार जॉइंट लिस्ट का कहना है कि उसके तीनों गुटों के बीच लिया गया यह फैसला नेतान्याहू और उनकी सरकार को सत्ता में लौटने से रोकने की जनता की मांग के जवाब में लिया गया है. उनका कहना है कि आइसेनकोट का समर्थन करना ज़रूरी है, भले ही विपक्षी गुट ने अब तक नेतान्याहू की नीतियों का विरोध करने, अरब नागरिकों के खिलाफ भड़काऊ बयानों से लड़ने पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है. जॉइंट लिस्ट का कहना है कि गादी की सरकार मजबूती से बननी चाहिए. उनका तर्क है कि इस कदम से सरकार बदलने की संभावना मज़बूत हो सकती है और एक ऐसी 'यूनिटी गवर्नमेंट' (मिली-जुली सरकार) बनने का खतरा कम हो सकता है, जिसमें नेतान्याहू सत्ता में बने रहें. जॉइंट लिस्ट का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द राष्ट्रपति हर्जोग के सामने यह सिफारिश पेश करेगा. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तुलना में आइसेनकोट को इजरायली संसद के ज्यादा सदस्यों का समर्थन हासिल है. गादी आइसेनकोट जिस गठबंधन की अगुआई कर रहे हैं उसे 48 सीटें मिली हैं. जबकि जॉइंट लिस्ट के पास 11 सीटें हैं. और राआम पार्टी के पास 8 सीटें हैं. इस तरह से कुल मिलाकर इस गठबंधन के पास 67 सीटें हो जाती हैं. 120 सीटों वाली इजरायली संसद में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 61 है. इस नए घटनाक्रम के बाद गुरुवार शाम को सभी दलों के साथ बातचीत पूरी होने पर आइसेनकोट ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बजाय राष्ट्रपति हर्ज़ोग से सरकार बनाने का न्योता मिल सकता है. वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी और राअम दोनों ने आइसेनकोट के नाम की सिफारिश की है. द जेरुशलम पोस्ट के अनुसार बातचीत के दौरान राअम के नेता मंसूर अब्बास ने कहा कि उनकी पार्टी हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण का समर्थन करती है. यह उन चार सिद्धांतों में से एक है जिन्हें आइसेनकोट ने अपने गठबंधन में शामिल होने के लिए शर्त के तौर पर रखा है. हमास को एक आतंकवादी संगठन करार देने के सवाल के जवाब में अब्बास ने कहा, "अरब समाज, एक व्यक्ति के तौर पर मैं खुद, और कुल मिलाकर सभी अरब नागरिक हम एक पुल की तरह हैं. आइए, इस पुल को न तोड़ें. हमें आतंकवाद का समर्थक या देशद्रोही न बनने दें." बता दें कि इजरायल में हुए चुनाव में किसी गठबंधन को सरकार बनाने का बहुमत नहीं मिला है.
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Nov 5, 2026, 03:51 PM
विवाद के बीच राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए केंद्रीय मंत्री प्रदीप पुरी

विवाद के बीच राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए केंद्रीय मंत्री प्रदीप पुरी

ये भी पढ़ें-भोपाल: हरदीप सिंह के निर्विरोध निर्वाचन पर कोर्ट जाएगी कांग्रेस, हेमंत कटारे और आतिफ अकील ने उठाए सवालविज्ञापनभोपाल-मंदसौर 258 किमीसागर-सतना 227 किमीजबलपुर-आशापुर 358 किमीभोपाल-ग्वालियर 320 किमीकटनी-सिंगरौली 235 किमीकुल 1398 किमीये भी पढ़ें-मध्य प्रदेश: राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, दो उम्मीदवारों का नामांकन रद्दविज्ञापनपरियोजनाओं की मौजूदा स्थिति देखें तो भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना और जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर के लिए डीपीआर कंसल्टेंट फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इन मार्गों के अलग-अलग अलाइनमेंट विकल्प सामने आए हैं। सड़क विकास निगम इनमें से बेहतर विकल्प का चयन करेगा। वहीं भोपाल-ग्वालियर और कटनी-सिंगरौली कॉरिडोर के लिए डीपीआर कंसल्टेंट नियुक्त करने की निविदा प्रक्रिया चल रही है। संचालक मंडल ने पांचों परियोजनाओं की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने और व्यवहारिक पाए जाने पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने की अनुमति दे दी है। यानी अभी इन सड़कों के निर्माण की अंतिम प्रक्रिया बाकी है।ये भी पढ़ें-एसआईआर पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला: खंडेलवाल बोले- राहुल गांधी के नेतृत्व में देश को अस्थिर करने की कोशिशबैठक में मुख्यमंत्री ने राजमार्ग निधि का नाम बदलकर 'विकसित मध्य प्रदेश संकल्प पथ' करने का निर्णय लिया। इसके अलावा जावरा-नयागांव फोरलेन परियोजना में शत-प्रतिशत इक्विटी विनिवेश को मंजूरी दी गई। सड़क विकास निगम में दो मुख्य अभियंता, तीन महाप्रबंधक और पांच उप महाप्रबंधक के नए पद भी स्वीकृत किए गए। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को निगम के टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके अलावा निगम के लिए अरेरा हिल्स स्थित पीएएम भवन के अधिग्रहण, स्वतंत्र संचालक की नियुक्ति और विभिन्न सड़क परियोजनाओं का स्वामित्व निगम को सौंपने के प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह सहित मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और वित्त, नगरीय विकास, वन तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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Nov 5, 2026, 03:47 PM
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों ने वैश्विक बाजारों को बढ़ावा दिया क्योंकि ट्रम्प की शक्ति कम हो रही है

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों ने वैश्विक बाजारों को बढ़ावा दिया क्योंकि ट्रम्प की शक्ति कम हो रही है

अमेरिका में हुए मिड-टर्म चुनाव के रिजल्ट ने पूरा खेल ही पलट दिया है. इस रिजल्ट से अमेरिका में ट्रंप की पार्टी कमजोर हुई और अब संसद में भी उनकी ताकत घटने वाली है. इस नतीजे के बाद वैश्विक बाजारों और निवेशकों को यह उम्मीद जगी कि अब ट्रंप की आक्रामक और मनमानी नीतियों खासकर टैरिफ और आयात शुल्क से जुड़े फैसलों पर लगाम लगेगी. दरअसल, मिड-टर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है. डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. इस राजनीतिक बदलाव का असर पूरी दुनिया के शेयर बाजारों पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है. ट्रंप की पार्टी की हार और अमेरिकी नीतियों में नरमी की संभावनाओं के बीच दुनिया के तमाम बड़े देशों के शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई. खासकर उन देशों के शेयर बाजारों में जश्न जैसा माहौल है, जो ट्रंप की नीतियों से सबसे ज्यादा परेशान हैं. इनमें मुख्य रूप से चीन , भारत, ऑस्ट्रेलिया, हॉन्ग-कॉन्ग, ब्राजील और स्पेन शामिल हैं. गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स में 2.60 फीसदी की दर्ज की गई. इससे पहले बुधवार को भी तगड़ी देखी गई थी. जब कि चीन के मार्केट में बुधवार को करीब 2 फीसदी की तेजी आई थी. इसके अलावा हॉन्ग-कॉन्ग के मार्केट में 3.66 फीसदी की तेजी, ऑस्ट्रेलिया के बाजार में 2.63 फीसदी, स्पेन के बाजार में 1.37 फीसदी, जर्मनी के बाजार में करीब 1 फीसदी और फ्रांस के बाजार में 1.17 फीसदी की तेजी देखी गई. स्पेन के शेयर बाजार समेत यूरोपीय बाजारों में भी इसके बाद तेज उछाल देखा गया, क्योंकि ट्रांस-अटलांटिक व्यापारिक तनाव कम होने की उम्मीद जगी है. एक तरह से अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर और कड़े टैरिफ नियमों से जूझ रहे इनमें से अधिकतर देशों के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि अब अमेरिकी दबाव कम होने की उम्मीद है. डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का मुख्य आधार 'अमेरिका फर्स्ट' रहा है, जिसके तहत उन्होंने विभिन्न देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाया है. इस वजह से चीन, भारत और यूरोपीय देशों जैसे प्रमुख निर्यातक देशों की कंपनियों पर दबाव बढ़ा है. अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से ट्रेड वॉर चल रहा है. अमेरिकी टैरिफ के कारण चीन के निर्यात पर बुरा असर पड़ा है, जिससे उसकी मैन्युफैक्चरिंग आधारित अर्थव्यवस्था को झटका लगा है. भारत के लिए भी अमेरिकी बाजार एक बड़ा निर्यातक केंद्र है. कड़े आयात शुल्क और व्यापारिक नियमों के कारण भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा और रुकावटों का सामना करना पड़ता है. इससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ गया है. मजेदार बात यह है कि ट्रंप को झटका लगने से सबसे ज्यादा तेजी अमेरिकी शेयर मार्केट में ही देखने को मिल रही है. डाऊ जोन्स (Dow Jones) में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद पिछले 18 महीनों की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई. बुधवार को डाउ जोंस में 3 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला. अमेरिकी सरकार के बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में गिरावट और कर्ज के बोझ से जुड़ी चिंताओं के कम होने से वॉल स्ट्रीट के निवेशकों ने इसका सकारात्मक स्वागत किया. ट्रंप की नीतियों और वैश्विक उथल-पुथल के कारण अमेरिका में भी महंगाई लगातार बढ़ रही है. महंगाई को काबू में रखने के लिए फेड रिजर्व को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ी हैं, जिससे आम लोगों के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो गए हैं. अमेरिका में भी डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से आम जनता का बजट बिगड़ गया है. परिवहन महंगा होने से दैनिक उपयोग की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे अमेरिकी कंजूमर मार्केट में असंतोष देखा गया है. ट्रंप की नीतियों से परेशान वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को अब व्यापार समझौतों में अधिक लचीलेपन की उम्मीद है. इसके अलावा चुनाव के नतीजे आते हैं, कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. कच्चा तेल फिसलकर 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. जबकि हाल के दिनों में ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, जिससे भारत सहित दुनिया भर में डीजल-पेट्रोल और महंगाई बढ़ गई थी. हालांकि, राजनीतिक बदलाव के बाद बाजार में यह उम्मीद भी जगी कि भू-राजनीतिक तनावों को सुलझाने की दिशा में कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिससे आम जनता को भी महंगाई से कुछ राहत मिल सके.
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Nov 5, 2026, 03:31 PM
जम्मू-कश्मीर में बढ़ते असंतोष के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने की बैठक

जम्मू-कश्मीर में बढ़ते असंतोष के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने की बैठक

जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से नाराज पार्टी के विधायकों ने गुरुवार को श्रीनगर में एक बार फिर बंद कमरे में बैठक की. सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को पार्टी संरक्षक फारूक अब्दुल्ला के साथ होने वाली अहम मुलाकात से पहले असंतुष्ट विधायकों ने अपनी सामूहिक रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए यह बैठक बुलाई. इस बैठक की तस्वीरें भी सामने आई हैं. सूत्रों के अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता हसनैन मसूदी के आवास पर हुई बैठक में करीब 15 विधायक मौजूद होने की जानकारी सामने आई है. हालांकि, अन्य सूत्रों के मुताबिक, बैठक में 10 से 12 असंतुष्ट NC विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल हुए. जम्मू-कश्मीर में हालिया कैबिनेट फेरबदल के बाद नाराज विधायकों की यह चौथी बैठक बताई जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला के साथ होने वाली बातचीत से पहले अपनी मांगों और आगे की रणनीति पर चर्चा की. असंतुष्ट विधायकों का दावा है कि वे अब तक एकजुट हैं और अपनी मांगों पर कायम हैं. उनका कहना है कि उनका मकसद पार्टी को बचाना है और इसी वजह से वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. नाराज विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके करीबी सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. विधायकों का दावा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री सार्वजनिक तौर पर उनका अपमान करते रहे हैं. असंतुष्ट विधायकों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक अपमान सहने के बावजूद धैर्य बनाए रखा, लेकिन अब वे अपनी शिकायतों को पार्टी नेतृत्व के सामने मजबूती से उठाना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक को मीडिया की नजरों से दूर रखने के लिए खास सावधानी बरती गई. विधायकों ने अपने वाहन बैठक स्थल की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर अलग-अलग जगह खड़े किए. कुछ विधायक एक ही गाड़ी में बैठक में पहुंचे, जबकि कुछ बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट के आए. सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार (6 नवंबर) को असंतुष्ट विधायक श्रीनगर में पार्टी संरक्षक फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात करेंगे. इस दौरान अपनी मांगों और शिकायतों को उनके सामने रखेंगे. इसके अलावा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शुक्रवार को श्रीनगर में कुछ नाराज विधायकों से बातचीत कर सकते हैं.
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Nov 5, 2026, 03:28 PM
आप सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस प्रमुख के'बी टीम "वाले बयान पर पलटवार किया है।

आप सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस प्रमुख के'बी टीम "वाले बयान पर पलटवार किया है।

आप आदमी पार्टी को बीजेपी की बी टीम बताए जाने संबंधी कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का गुस्सा फूटा है. उन्होंने कहा कि पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक कितनी बार कांग्रेस ने बीजेपी की सरकार बनाने का काम किया है. आप सांसद ने कहा कि 2016 में अरुणाचल प्रदेश में जनता ने कांग्रेस को जिताया, पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी और उसके विधायक बीजेपी में चले गए और सरकार बनवा दी. 2016 में उत्तराखंड के अंदर 9 कांग्रेस की विधायक बीजेपी में शामिल हो गए और बीजेपी की सरकार बनवा दी. संजय सिंह ने कहा कि 2017 गोवा में 13 कांग्रेस के विधायक बीजेपी में शामिल हो गए, कांग्रेस ने बीजेपी की सरकार बनवा दी. 2019 में 13 कांग्रेस के विधायक कर्नाटक चुनाव के बाद बीजेपी में शामिल हो गए और बीजेपी की सरकार बनवा दी. 2020 में 22 कांग्रेस के विधायक उत्तर प्रदेश में बीजेपी में चले गए और बीजेपी की सरकार बनवा दी. अभी 8 कांग्रेस के विधायक गोवा में बीजेपी में शामिल हो गए और बीजेपी की सरकार बनवा दिया. उन्होंने कहा कि पूरे देश में कांग्रेस पार्टी के विधायक टूट-उठ कर बीजेपी में चले जाते हैं. पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी बीजेपी में चली जाती है और बीजेपी की सरकार बनवाते हैं. उन्होंने कहा कि 'आम आदमी पार्टी' वह पार्टी है जिसके सबसे बड़े नेता सीएम रहते अरविंद केजरीवाल बीजेपी से लड़ते हुए जेल चले गए, शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और मैं बीजेपी से लड़ते लड़ते जेल चला गया. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन जेल में गए. टीएमसी और डीएमके के नेता जेल गए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के चार नेताओं का नाम बताइए जो जेल गए. संजय सिंह ने कहा, "यूपी में 37 साल, बिहार में 36 साल से , बंगाल में 54 साल से, तमिलनाडु में 59 साल से, एमपी में 23 साल से बीच में केवल देश की सरकार बनी. महाराष्ट्र में 12 साल , हरियाणा में 12 साल, उड़ीसा में 36 साल, आंध्र में 12 साल,असम में 11, उत्तराखंड में 10 साल से , गोवा में 14, सिक्किम से 47 साल, त्रिपुरा में 38 साल से मणिपुर में 10 साल, अरुणाचल 10 साल से कांग्रेस हारती चली आ रही है." संजय सिंह ने कहा कि, "आप हारते चले आ रहे हैं और आम आदमी पार्टी आपको हरवाती चली आ रही है. अपनी कमियों का मूल्यांकन करिए, अपने अंदर झांक कर देखिए पूरे देश में आप लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को मजबूत सशक्त करने और उनकी सरकार बनवाने का अपराध किया. संजय सिंह ने कहा, "आप आम आदमी पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं, इसलिए पूरा देश यह देख रहा है और जान रहा है कि कौन भारतीय जनता पार्टी की बी टीम है." नीरज श्रीवास्तव करीब 20 सालों से बतौर संवाददाता सुल्तानपुर में कार्यरत हैं. नीरज सुल्तानपुर की राजनीतिक गतिविधियों पर खास पकड़ रखते हैं. अमेठी की राजनीति पर भी खास नजर रखते हैं. देश के सबसे हॉट राजनीतिक जिलों में शुमार अमेठी में नीरज साल 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव को कवर कर चुके हैं. वह राहुल गांधी से लेकर कुमार विश्वास और स्मृति ईरानी तथा केएल शर्मा की राजनीति को बेहद करीब से देख चुके हैं. यूपी के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में शामिल हैं.
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India TV
Nov 5, 2026, 03:25 PM
अमित जोगी ने पीएम मोदी और सीईसी ज्ञानेश कुमार के व्यंग्यात्मक वीडियो पर पुलिस के नोटिस का विरोध किया

अमित जोगी ने पीएम मोदी और सीईसी ज्ञानेश कुमार के व्यंग्यात्मक वीडियो पर पुलिस के नोटिस का विरोध किया

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी ने उनके आवास पर भेजे गए पुलिस नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह नोटिस एक विवादित व्यंग्यात्मक वीडियो को लेकर दर्ज की गई FIR के सिलसिले में भेजा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुखौटे पहने लोग दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में अमित जोगी ने इन दावों को खारिज कर दिया कि वह अधिकारियों से बच रहे हैं। साथ ही, उन्होंने नोटिस देने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। यह विवाद अमित जोगी द्वारा बनाए गए एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे दिखने वाले मुखौटे पहने लोग एक प्रतीकात्मक शादी और हनीमून के दृश्य में नजर आते हैं। अमित जोगी के अनुसार, इस वीडियो का मकसद राजनीतिक व्यंग्य के जरिए चुनाव प्रक्रिया और वोटों में कथित हेरफेर को लेकर चिंताएं जताना था। हालांकि, रायपुर जिला भाजपा अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर और पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक राजेश मूणत की शिकायतों के आधार पर सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 196, 352, 353(2) और 356(2) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया है। इसके बाद पुलिस ने 4 नवंबर को नोटिस नंबर 569/2026 जारी किया और अमित जोगी की पत्नी और उनकी मां को इसकी प्रतियां देने के बाद, नोटिस को उनके आवास पर चस्पा कर दिया। जोगी ने तर्क दिया कि पुलिस को अच्छी तरह पता था कि जब नोटिस दिया गया, तब वह न तो घर पर थे और न ही छत्तीसगढ़ में। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय ने 30 अक्टूबर को ही पुलिस महानिदेशक (DGP) और रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को सूचित कर दिया था कि वह 2 नवंबर से 8 नवंबर के बीच गुजरात की पूर्व-निर्धारित यात्रा पर रहेंगे। जोगी के मुताबिक, यह यात्रा दोस्तों के निमंत्रण पर की गई है और इस कार्यक्रम के दौरान उन्हें गुजरात पुलिस की सुरक्षा मिल रही है। इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए, जोगी ने आरोप लगाया कि यह नोटिस और FIR न केवल उन्हें, बल्कि उनके परिवार को भी परेशान करने के इरादे से की गई है। उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि शिकायत करने वाले दोनों व्यक्ति प्रमुख भाजपा नेता हैं, और छत्तीसगढ़ में भाजपा ही सत्ताधारी पार्टी है। उनके अनुसार, यह मामला किसी वैध कानूनी शिकायत के बजाय विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक उत्पीड़न को दर्शाता है। अपनी आपत्तियों के बावजूद, जोगी ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और राज्य लौटने के बाद अधिकारियों के सामने पेश होंगे। उन्होंने कहा, "मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि नकाबपोश राजनीतिक किरदारों वाले एक व्यंग्यात्मक वीडियो को सांप्रदायिक अपराध कैसे माना जा सकता है। उन्होंने पूछा कि अधिकारियों को इस सामग्री में कौन सा धार्मिक या जातीय पहलू दिखा? उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक व्यंग्य पर एक बहुत ही बढ़ा-चढ़ाकर दी गई प्रतिक्रिया है। अपने खिलाफ लगाए गए कानूनी प्रावधानों पर बात करते हुए जोगी ने कहा कि इनमें से कोई भी आरोप उन पर लागू नहीं होता। BNS की धारा 196 (जो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित है) पर उन्होंने तर्क दिया कि वीडियो में किसी धर्म, जाति या समुदाय का न तो जिक्र है और न ही उन्हें निशाना बनाया गया है। BNS की धारा 352 (जो शांति भंग करने के इरादे से किए गए अपमान से संबंधित है) के बारे में उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी प्राप्त है और यह किसी व्यक्ति विशेष के बजाय सार्वजनिक आचरण पर केंद्रित होता है। BNS की धारा 353(2) (जो सार्वजनिक अशांति पैदा कर सकने वाले बयानों से संबंधित है) पर जोगी ने कहा कि इस सामग्री को स्पष्ट रूप से व्यंग्य और कॉमेडी के रूप में पेश किया गया था, इसलिए इसे किसी तथ्य या दावे के रूप में नहीं देखा जा सकता। मानहानि से जुड़ी BNS की धारा 356(2) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वीडियो में कोई तथ्यात्मक आरोप नहीं हैं, बल्कि यह केवल किरदारों और प्रतीकों के माध्यम से की गई एक राजनीतिक टिप्पणी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत लगे आरोपों पर जोगी ने कहा कि वीडियो में न तो कोई नग्नता है, न ही कोई यौन गतिविधि या अश्लीलता। उन्होंने कहा कि व्यंग्य के लिए 'हनीमून' के माहौल का इस्तेमाल करना कानून की नजर में अश्लील नहीं माना जा सकता। जोगी ने राजनीतिक व्यंग्य को अपराध की श्रेणी में डालने को लोकतांत्रिक मूल्यों और असहमति जताने के अधिकार पर हमला बताया। प्राचीन ग्रीस की व्यंग्य परंपराओं और भरत मुनि के 'नाट्यशास्त्र' में मौजूद 'विदूषक' परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक हास्य लंबे समय से सार्वजनिक टिप्पणी का एक वैध रूप रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह वीडियो समकालीन राजनीतिक चिंताओं को एक ऐसी भाषा में व्यक्त करने का प्रयास था, जो आज की युवा पीढ़ी से जुड़ सके। बता दें कि अमित जोगी, छत्तीसगढ़ के दिवंगत मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे हैं। (रिपोर्टः सिकंदर खान और IANS इनपुट के साथ) ये भी पढ़ेंः श्मशान घाट पर शराब पी रहा था व्यक्ति, तांत्रिक होने के शक में ग्रामीणों ने जय श्रीराम नारों के साथ पीट-पीटकर किया लहूलुहान
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Aaj Tak
Nov 5, 2026, 03:24 PM
निवाड़ी जिले की जेरोन खालसा नगर परिषद में राइट-टू-रिकॉल के तहत मतदान हुआ

निवाड़ी जिले की जेरोन खालसा नगर परिषद में राइट-टू-रिकॉल के तहत मतदान हुआ

मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की जेरोन खालसा नगर परिषद में अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए राइट-टू-रिकॉल के तहत मतदान कराया गया. इस दौरान कुल 61.52 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले. अब सभी की नजरें 6 नवंबर को होने वाली मतगणना पर हैं. इसके नतीजे से तय होगा कि नगर परिषद अध्यक्ष कुसुम पस्तोर पद पर बनी रहेंगी या उन्हें हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि नगर परिषद अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के लिए हुए मतदान में 61.52 प्रतिशत वोट पड़े. साल 2022 के आम चुनाव में कुसुम पस्तोर नगर परिषद अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं. जेरोन खालसा नगर परिषद में कुल 15 वार्ड हैं. इनमें निर्वाचित 12 पार्षदों ने मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 47 के तहत अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने का प्रस्ताव कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किया था. इसी प्रस्ताव के आधार पर अध्यक्ष को पद से हटाने के सवाल पर मतदान कराया गया. अब मतगणना के बाद साफ होगा कि मतदाताओं ने अध्यक्ष को पद पर बनाए रखने के पक्ष में फैसला दिया है या उन्हें वापस बुलाने के पक्ष में. नगर परिषद क्षेत्र में कुल 7,799 मतदाता पंजीकृत थे. इनमें 4,031 पुरुष और 3,768 महिला मतदाता शामिल हैं. मतदान के दिन शाम 5 बजे तक कुल 4,798 लोगों ने वोट डाले. इनमें 2,635 पुरुष और 2,163 महिलाएं शामिल रहीं. इस तरह कुल मतदान प्रतिशत 61.52 दर्ज किया गया. पुरुषों का मतदान प्रतिशत 65.37 और महिलाओं का 57.40 रहा. इससे पहले कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी जमुना भिड़े ने एसपी डॉ. राय सिंह नरवरिया के साथ जेरोन खालसा पहुंचकर मतदान व्यवस्थाओं का जायजा लिया था. नगर में सरकारी अवकाश घोषित किया गया था. इस दौरान पृथ्वीपुर एसडीएम विनीता जैन सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे. जिला निर्वाचन प्रशासन के अनुसार, मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. अब 6 नवंबर को होने वाली मतगणना के बाद अध्यक्ष के पद पर बने रहने को लेकर स्थिति साफ होगी.
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 03:24 PM
बिहार में एनडीए सरकार एक साल पूरा करेगी; पीएम मोदी 21 नवंबर को करेंगे दौरा

बिहार में एनडीए सरकार एक साल पूरा करेगी; पीएम मोदी 21 नवंबर को करेंगे दौरा

बैठक के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बताया कि 20 नवंबर को बिहार में एनडीए सरकार का एक साल पूरा हो रहा है। इस अवसर पर सरकार के कामकाज और आगे की रणनीति को लेकर गठबंधन के नेताओं ने विचार-विमर्श किया। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 नवंबर को बिहार आएंगे। उनके दौरे के दौरान वैशाली के जाफरपट्टी औद्योगिक क्षेत्र में जनसभा का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसे ऐतिहासिक बनाने के लिए कार्यकर्ताओं और आम लोगों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। ' संजय सरावगी ने बताया कि बैठक में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता भगाओ' कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। उन्होंने एनडीए में किसी तरह की नाराजगी या मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन के सभी घटक दल एकजुट हैं। बिहार सरकार विकास के एजेंडे पर काम कर रही है और आगे भी इसी मजबूती के साथ काम जारी रहेगा। बैठक में निशांत कुमार के डिप्टी सीएम बनने को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि इस मामले को लेकर किसी ने कुछ भी नहीं कहा लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि जदयू कोटे से जो दो डिप्टी सीएम है उनमें से एक की जगह निशांत कुमार को दी जाएगी। इसको लेकर भी बैठक में बातचीत हुई है। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही निशांत कुमार के डिप्टी सीएम बनने को लेकर सारी बातें स्पष्ट शीर्ष नेतृत्व की ओर से कर दी जाएगी। बैठक के बाद जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी गठबंधन में किसी तरह के मतभेद की बात को खारिज किया। उन्होंने भाजपा के साथ जेडीयू के संबंधों को दो दशक पुराना बताते हुए कहा कि दोनों दलों का रिश्ता फेविक्विक से भी ज्यादा गहरा और मजबूत है। उन्होंने कहा कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है और सभी सहयोगी दल साथ हैं। विधान परिषद चुनाव में तीन सीटों पर एनडीए को मिली हार के सवाल पर उमेश कुशवाहा ने कहा कि पार्टी ने हार के कारणों को लेकर फीडबैक लिया है। उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि हर चुनाव के बाद समीक्षा होती है। पार्टी प्लेटफॉर्म पर इस संबंध में फीडबैक लिया गया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक है और नेताओं को सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। उमेश कुशवाहा ने यह भी बताया कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 नवंबर के कार्यक्रम को ऐतिहासिक और यादगार बनाना है। इसके लिए एनडीए के सभी घटक दल मिलकर तैयारी कर रहे हैं।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 03:17 PM
मुख्यमंत्री ने वादा पूरा किया, चंबा जिले में महिला की नौकरी हस्तांतरित की

मुख्यमंत्री ने वादा पूरा किया, चंबा जिले में महिला की नौकरी हस्तांतरित की

पांचवीं कक्षा की छात्रा वंशिका की आंखों में आए आंसू और मां से दूर रहने की पीड़ा आखिरकार रंग लाई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चुराह दौरे के दौरान छात्रा वंशिका से किया अपना वादा पूरा करते हुए उसकी मां नारो देवी का करीब 700 किलोमीटर दूर शिमला जिले के नेरवा से चंबा जिले के तीसा शिक्षा खंड में तबादला कर दिया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने वीरवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के इस फैसले से लंबे समय से मां से दूर रह रही वंशिका और उसके परिवार ने राहत की सांस ली है।
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Nov 5, 2026, 03:17 PM
प्रशांत किशोर ने नितीश कुमार की जद (यू) पार्टी के लिए अनिश्चित भविष्य की भविष्यवाणी की

प्रशांत किशोर ने नितीश कुमार की जद (यू) पार्टी के लिए अनिश्चित भविष्य की भविष्यवाणी की

जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को लेकर सनसनीखेज दावा किया है. गुरुवार (05 नवंबर, 2026) को समस्तीपुर में प्रशांत किशोर मीडिया से बात कर रहे थे. प्रशांत किशोर से सवाल किया गया कि एमएलसी चुनाव के बाद जेडीयू दो गुटों में बंट गई है. इस पर पीके ने कहा, "दो गुट में है कि कितने गुट में है ये तो आप ही बता सकते हैं… लेकिन हम लोगों का पिछले कई महीने से… या ये कहें कि चुनाव के पहले से मेरा और जन सुराज का मानना है कि नीतीश कुमार के राजनीतिक पारी के अंत होने के साथ ही जेडीयू का कोई लंबा भविष्य नहीं है…" प्रशांत किशोर ने कहा कि दल के तौर जेडीयू का भविष्य नहीं हो सकता है. जेडीयू की पूरी ताकत नीतीश कुमार थे, उनका व्यक्तित्व था, अब वहां न तो कोई नेता है, न कोई नेतृत्व और न ही कोई नीति है. अभी सत्ता में हैं तो जेडीयू एक दल के तौर पर दिख रहा है, लेकिन धीरे-धीरे खंड-खंड होकर कुछ लोग बीजेपी में जाएंगे, कुछ लोग जन सुराज में आएंगे और कुछ दूसरे दलों में जाएंगे, लेकिन जेडीयू का आने वाले समय में दल के तौर पर भविष्य नहीं है. समस्तीपुर में पत्रकारों ने पीके से पूछा कि जिस तरह से एमएलसी चुनाव का रिजल्ट आया, दो निर्दलीय एमएलसी बीजेपी में चले गए, इस पर कहा, "देखिए जो लोग बीजेपी में शामिल हुए हैं उन पर संवैधानिक और न्यायिक स्तर पर जो कुछ भी कार्रवाई होनी है वो होगी… लोग प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये कहीं न कहीं ये बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की नासमझी और अपरिपक्वता को भी दिखाता है. आप (मीडिया) लोगों को पूछना चाहिए कि जो बीजेपी दुनिया का सबसे बड़ा दल होने का दावा करती है उनको ये नियम नहीं पता था कि कोई निर्दलीय किसी दल की सदस्यता नहीं ले सकता है? …तो कहीं न कहीं ये नासमझी को दिखाता है या अहंकार को दिखाता है कि हम गलत-सही कुछ भी करेंगे हम इससे बच जाएंगे." दूसरी ओर प्रशांत किशोर ने सीएम सम्राट चौधरी पर भी तंज कसा. कहा कि समस्तीपुर या अन्य जिलों में जो घटनाएं हो रही हैं वो अपराध है या क्राइम ये विवेचना आप लोग खुद कर लीजिए. सक्रिय पत्रकारिता में अजीत कुमार लगभग 10 वर्षों से कार्यरत हैं. वर्ष 2016 में दैनिक जागरण समाचार-पत्र से इन्होंने ट्रेनी सब-एडिटर के रूप में अपनी पारी की शुरुआत पटना से की. देश के कई बड़े मीडिया संस्थानों में इन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं, जिनमें दैनिक जागरण, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर आदि शामिल हैं. वर्तमान में इनका कार्यक्षेत्र बिहार है और ये एबीपी लाइव में 'चीफ कॉपी एडिटर' के पद पर कार्यरत हैं. एबीपी डिजिटल के बिहार सेक्शन को लीड करते हैं. बिहार की खबरों पर इनकी पैनी नजर रहती है चाहे वह राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी हुई खबरें हों या फिर अपराध या अन्य सामाजिक सरोकार की. खबरों को एंगल देने में और हेडिंग बनाने में महारथ हासिल है. सही समय पर निष्पक्ष रूप से कई समाचार इनके प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज भी शामिल हैं. पत्रकारिता में इन्होंने स्नातक के साथ परास्नातक तक की पढ़ाई की है. इनसे ajeetk@abpnetwork.com पर संपर्क किया जा सकता है.
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 03:15 PM
डेमोक्रेट कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल करने के लिए तैयार; रिपब्लिकन सांसद के इस्तीफे की मांग बढ़ी

डेमोक्रेट कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल करने के लिए तैयार; रिपब्लिकन सांसद के इस्तीफे की मांग बढ़ी

अमेरिका के 2026 मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करने की स्थिति में पहुंच गई है। अमेरिकी मीडिया संस्थानों के अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल कर सकते हैं। इस नतीजे से ट्रंप प्रशासन के सामने राजनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया, 'पीट हेगसेथ अब तक पद पर क्यों हैं?' कोलोराडो से सांसद और हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्य जेसन क्रो ने हेगसेथ को अक्षम बताया। उन्होंने कहा कि पेंटागन में उनका हर दिन अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ाता है। न्यूयॉर्क के सांसद और पूर्व सैन्य खुफिया अधिकारी पैट्रिक रयान ने भी कहा कि डेमोक्रेट्स के बहुमत में आने के बाद पहला काम हेगसेथ को हटाना होना चाहिए।विज्ञापनहेगसेथ को हटाने की मांग केवल डेमोक्रेटिक पार्टी तक सीमित नहीं है। रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने भी उनके इस्तीफे की मांग की है। मैसी ने कहा है कि अगर हेगसेथ तुरंत पद नहीं छोड़ते हैं तो संसद का अगला सत्र शुरू होने पर वह उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दोबारा पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि केवल हेगसेथ के इस्तीफे की स्थिति में ही वह महाभियोग प्रस्ताव नहीं लाएंगे। मैसी इससे पहले भी 34 पन्नों का महाभियोग प्रस्ताव पेश कर चुके हैं। इसमें ईरान, यमन और वेनेजुएला समेत कई जगहों पर सैन्य अभियानों, नागरिकों की मौत और सैन्य कार्रवाई के दौरान संसद की निगरानी को दरकिनार करने जैसे आरोप लगाए गए थे। ये मैसी की ओर से लगाए गए आरोप हैं, इन्हें आधिकारिक तौर पर साबित किए गए कदाचार के निष्कर्ष नहीं माना गया है। उनका पिछला प्रस्ताव सदन में औपचारिक मतदान तक नहीं पहुंच पाया था।विज्ञापनउपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे ईरान युद्ध को प्रमुख वजह बताया है। सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने कहा कि पार्टी की हार का असली कारण कम मतदान नहीं, बल्कि युद्ध है। वेंस के मुताबिक, आंतरिक सर्वेक्षणों से पता चला कि 2024 में ट्रंप-वेंस का समर्थन करने वाले कई मतदाताओं ने 2026 के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण मतदाताओं में नाराजगी बढ़ी। ट्रंप ने भी वेंस के आकलन को काफी हद तक सही बताया। उन्होंने माना कि युद्ध के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं और इससे लोगों पर आर्थिक दबाव पड़ा। हालांकि, ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह कदम जरूरी था। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें फिर से फैसला लेने का मौका मिले, तब भी वह यही कदम उठाएंगे।ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से हेगसेथ को पद पर बनाए रखने की बात कही है, लेकिन प्रशासन के भीतर उनके भविष्य को लेकर चर्चा जारी होने की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने करीबी सलाहकारों से फोन पर बातचीत और विचार-विमर्श के दौरान इस मुद्दे को उठाया है। हालांकि, उन्हें पद से हटाने या बनाए रखने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ईरान युद्ध को लेकर शीर्ष सैन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच और सवालों के घेरे में आ सकती है। इनमें अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन शामिल हैं। हेगसेथ के संभावित विकल्पों को लेकर फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस का नाम भी चर्चा में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनका कार्यकाल 5 जनवरी को समाप्त होने के बाद उन्हें रक्षा विभाग की जिम्मेदारी देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।मध्यावधि चुनाव के बाद डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में बहुमत मिलने के अनुमान से ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेट्स सरकार के फैसलों की जांच, सुनवाई और पूछताछ तेज कर सकते हैं। सीनेट में नियंत्रण मिलने से विधेयकों और राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली नियुक्तियों पर भी उनका प्रभाव बढ़ेगा। ट्रंप ने अपने खिलाफ संभावित महाभियोग की चर्चा को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कदम डेमोक्रेटिक पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने दावा किया कि देश पहले से ज्यादा सफल है। वहीं, मैसी पहले ही हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दोबारा लाने की चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में चुनावी नतीजों के बाद ईरान युद्ध, सैन्य नेतृत्व और हेगसेथ के पद को लेकर अमेरिकी संसद में टकराव बढ़ने की संभावना है।
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Nov 5, 2026, 03:08 PM
मध्यावधि चुनाव में हार के बाद वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में उछाल

मध्यावधि चुनाव में हार के बाद वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में उछाल

अमेरिका की राजनीति में हुए बड़े बदलाव का असर अब हजारों किलोमीटर दूर भारत के सर्राफा बाजार में भी दिखाई देने लगा है. अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को मिली हार के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है. इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है. सोने-चांदी के बढ़ते भाव ने उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके घरों में शादी-ब्याह की तैयारियां चल रही हैं. खासकर महिलाओं के लिए पसंदीदा आभूषण खरीदना अब जेब पर भारी पड़ सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट के चलते सोने-चांदी की चमक बढ़ी है. 4 नवंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत ों में करीब 2.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव 4 प्रतिशत से अधिक उछल गए. 5 नवंबर को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी का रुख बना रहा. भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि परंपरा, भावनाओं और पारिवारिक बचत का अहम हिस्सा है. शादी में बेटी के लिए गहने खरीदने हों या दीपावली जैसे त्योहारों पर सोने-चांदी की खरीदारी करनी हो, कीमतों में बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करती है. ऐसे में अचानक आई तेजी ने खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले राजनीतिक और आर्थिक बदलावों का असर भारत के सर्राफा बाजार पर भी पड़ता है. डॉलर की चाल, ब्याज दरों की संभावनाएं और निवेशकों का रुख सोने-चांदी के भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अब खरीदारों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सोने- चांदी की कीमतें और बढ़ेंगी या बाजार में राहत मिलेगी. फिलहाल तेजी ने त्योहारों और शादी के सीजन में गहने खरीदने की योजना बना रहे परिवारों का बजट जरूर बिगाड़ने की आशंका पैदा कर दी है.
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Nov 5, 2026, 02:51 PM
पीएम मोदी पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर भड़के नितिन गड़करी

पीएम मोदी पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर भड़के नितिन गड़करी

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी गुरुवार (5 नवंबर, 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणियों को लेकर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ पूरी कांग्रेस पार्टी पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के नेताओं की तरफ से पीएम मोदी के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वो उनको शोभा नहीं देता है. खरगे जैसे नेता प्रधानमंत्री मोदी के बाप (पिता) को निकालने की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वो बौखला गए हैं. इसकी वजह यह है कि जनता लगातार कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने से इनकार कर रही है. कांग्रेस पार्टी बार-बार चुनावों में हारी है और इसी की वजह से कांग्रेस के नेता पूरी तरह से बौखला गए हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार (5 नवंबर, 2026) को महाराष्ट्र के नागपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ रैली में हिस्सा लिया. इस दौरान रैली को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा, ‘इसी हताशा की वजह से कांग्रेस के नेता लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आघात कर रहे हैं.’ VIDEO | Maharashtra: Addressing the 'Loktantra Bachao, Arajakta Hatao' rally in Nagpur, Union Minister Nitin Gadkari says, "The language being used by Rahul Gandhi and leaders of the Congress party is unbecoming. A leader like Kharge even speaks of invoking the Prime Minister’s father; they have become unhinged. This is because the public has consistently withheld its support from the Congress party; the party has faced repeated defeats, and it is this that has left its leaders frustrated and desperate. Consequently, they are launching attacks on our democratic system and institutions. They are maligning the Election Commission and preventing Parliament from functioning. Parliament is meant for debate and the expression of diverse viewpoints; yet, by repeatedly bringing parliamentary proceedings to a halt, the Congress party has demonstrated that it holds no respect for the institution of Parliament." (Source: Third Party) (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd) उन्होंने कहा, ‘वे चुनाव आयोग को बदनाम कर रहे हैं. संसद की कार्यवाही को चलने नहीं देते हैं, कामकाज होने नहीं देते हैं. संसद बहस के लिए है और अपनी-अपनी बातों को रखने के लिए है, लेकिन बार-बार संसद की कार्यवाही बंद करके कांग्रेस पार्टी ने ये साबित कर दिया है कि उसे संसद जैसी संस्था के प्रति भी कोई सम्मान नहीं है.’ नितिन गडकरी ने कहा, ‘विपक्ष, कांग्रेस और INDI गठबंधन की तरफ से लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने और जनता को भ्रमित करने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है. इन सबसे कांग्रेस की हताश और निराश मनस्थिति दिखाई देती है, लेकिन हमें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर देश की जनता का आशीर्वाद और विश्वास कायम है. विपक्ष के इस झूठ का देश की जनता आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी.’ विजय कुमार बिट्ठल ABP न्यूज में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर भूमिका निभा रहे हैं. पिछले 2 सालों से ABP न्यूज में कार्यरत हैं और नेशनल-इंटरनेशनल न्यूज टीम का हिस्सा हैं. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, चुनाव और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरें विशेष रूप से लिखते रहे हैं. ब्रेकिंग न्यूज पर फोकस रखते हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश करते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 5 सालों का अनुभव है. एबीपी न्यूज से पहले प्रिंट मीडिया में दैनिक जागरण में बतौर सब-एडिटर कार्यरत रहे. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में बैचेलर्स डिग्री हासिल की है. संपर्क करें- Mail ID: vijaybitthal99@gmail.com | LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/vijay-kumar-bitthal-47ab7a1a3/ | X: https://x.com/Vijaybitthal99
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Nov 5, 2026, 02:46 PM
एलजेपी ने सीट बंटवारे की बातचीत विफल होने पर अकेले चुनाव लड़ने की धमकी दी

एलजेपी ने सीट बंटवारे की बातचीत विफल होने पर अकेले चुनाव लड़ने की धमकी दी

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने साफ किया है कि अगर 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में दूसरी पार्टियों के साथ सीटों को लेकर बात नहीं बनी, तो उनकी पार्टी (लोजपा) अकेले ही यूपी की सभी 403 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर देगी। हालांकि वे केंद्र और बिहार में सरकार के साथ गठबंधन में हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे अकेले चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे, जैसा उन्होंने पहले नागालैंड में भी किया था। वाराणसी में बातचीत करते हुए चिराग पासवान ने साफ किया कि केंद्र और बिहार में उनकी पार्टी एनडीए (गठबंधन) के साथ है और वे झारखंड में भी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ चुके हैं, जहां उनकी पार्टी के विधायक भी जीते हुए हैं। चिराग पासवान ने कहा कि भले ही केंद्र और बिहार में वे एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं और झारखंड में भी गठबंधन के साथ चुनाव लड़कर उनके विधायक जीते हैं। नागालैंड में बिना गठबंधन के भी उनकी पार्टी के दो विधायक हैं। लेकिन अगर उत्तर प्रदेश में बात नहीं बनी, तो उनकी पार्टी यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले अपने उम्मीदवार खड़े कर सकती है। चिराग पासवान ने कहा कि भले ही केंद्र और बिहार में वे एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं और झारखंड में भी गठबंधन के साथ चुनाव लड़कर उनके विधायक जीते हैं, और नागालैंड में बिना गठबंधन के भी उनकी पार्टी के दो विधायक हैं। लेकिन अगर उत्तर प्रदेश में बात नहीं बनी, तो उनकी पार्टी (लोजपा-रामविलास) यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले अपने उम्मीदवार खड़े कर सकती है। चिराग पासवान के इस बयान से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है, और माना जा रहा है कि उनकी पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा, वाराणसी में उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी को देश के सबसे ऊंचे पद तक पहुंचाने का आशीर्वाद दिया है। चिराग पासवान ने कहा कि वाराणसी की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी को यहां से जिताकर अपना आशीर्वाद दिया है। जो लोग बनारस आकर विकास करने का दावा करते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि यूपी की जनता ने उन्हें भी कई पीढ़ियों तक राज करने का मौका दिया था; अगर उनकी विकास की सोच सच में मजबूत होती, तो आज प्रधानमंत्री मोदी को ये सारे विकास के काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। वाराणसी से अश्विनी त्रिपाठी की रिपोर्ट हापुड़ में बड़ी कार्रवाई, पकड़ी गई नकली खोये की फैक्ट्री, 16 क्विंटल मिलावटी खोया हुआ बरामद मिर्जापुर: सपा नेता ने पहले शादी के मंत्रों को बताया गाली, विवाद बढ़ा तो कहा- "मैं इस तरह का कहीं बोला ही नहीं", Video
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Nov 5, 2026, 02:41 PM
कांग्रेस पर लोकतांत्रिक नियंत्रण के बावजूद विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर ट्रम्प की छूट

कांग्रेस पर लोकतांत्रिक नियंत्रण के बावजूद विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर ट्रम्प की छूट

अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन के रिजल्ट के बाद वहां रहने वाले भारतीय लोगों की भूमिका पर एक्सपर्ट्स ने अपनी राय रखी. ओरआरएफ अमेरिका के कार्यकारी डायरेक्टर ध्रुव जयशंकर ने कहा है कि भारतीय अमेरिकी चुनावी रूप से भले ही छोटे ग्रुप में हों, लेकिन राजनीतिक रूप से उनका प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है. वहीं, अमेरिका के कांग्रेस मैन थानेदार ने कहा है कि ट्रंप की इमीग्रेशन नीतियों और टैरिफ ने भारतीय अमेरिकियों और भारत के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचाया है. पूरे न किए गए वादों की वजह से यह कम्युनिटी डेमोक्रेट्स की ओर झुक गया. VIDEO | Washington: Democratic control of US Congress to constrain Trump, but he has lot of leeway on foreign policy, national security, says Dhruva Jaishankar, Executive Director, ORF America. #USMidTermElections2026 #USMidTermPoll2026 #PTIVideos (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd) ध्रुव जयंशकर ने माना, कि भारतीय वोटर्स की संख्या कुछ इलाकों में काफी कम है. करीबन 1 से 2 प्रतिशत लेकिन इनका प्रभाव अधिक है. इन्होंने डेमोक्रेट्स को वोट किया है. MAGA आंदोलन के चलते भारत विरोधी बयानों के चक्कर में रिपब्लिकन पार्टी को भारतीय अमेरिकी मतदाताओं का समर्थन खोना पड़ सकता है. ऐसा खासकर टेक्सास जैसे राज्यों में देखने को मिला है. 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स को अप्रत्याशित बढ़त मिली है. उन्होंने बताया है कि भारतीय अमेरिकियों के मतदान के तरीकों में चेंज आया है. भारतीय-अमेरिकी कुल मतदाताओं का केवल 1 से 1.5 प्रतिशत हिस्सा है. पारंपरिक रूप से, वे दोनों ही पार्टियों - खासकर डेमोक्रेटिक पार्टी - को काफी चंदा देते रहे हैं. उन्होंने बताया कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान विशेष रूप से युवा भारतीय और अमेरिकी पुरुषों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप की ओर झुकाव में बदलाव दिखा है. हालांकि, डेमोक्रेट्स को वोट देने वालों की संख्या अभी भी बहुमत में थी. दोनों ग्रुप के बीच लगभग 30 प्रतिशत का अंतर देखने को मिला है. जयशंकर ने कहा है कि हालिया चुनावी दौर में डेमोक्रेट्स का सपोर्ट करने वाले और रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करने वाले भारतीय-अमेरिकी वोटर्स के बीच अंतर देखने को मिला है. पिछले राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन वोटर्स के बीच 30 प्रतिशत का अंतर था. इस साल चुनाव से पहले जो आंकड़े आए थे, उसमें अंतर बढ़कर 45 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. इससे पता चलता है कि भारतीय अमेरिकियों के बीच 10 प्रतिशत का बड़ा स्विंग हुआ है. इधर, थानेदार ने कहा कहा कि कई भारतीय अमेरिकियों ने शुरुआत में 2024 के ट्रम्प का समर्थन किया था. उन्हें उम्मीद थी कि उनकी आर्थिक नीतियों से उनके परिवारों को फायदा होगा, लेकिन रोजमर्रा के खर्चों में भारी बढ़ोतरी और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें फैसले पर पछतावा हुआ है. इसके अलावा वोटर्स को लगा कि भारतीय पीएम मोदी के साथ ट्रंप के रिश्ते और मजबूत होंगे, लेकिन ट्रंप ने भारतीय सामानों पर ही भारी टैरिफ लगा दिए. VIDEO | Michigan, USA: Congressman Sri Thanedar said, "Trump's immigration policies, tariffs hurt Indian-Americans and India ties; 'unfulfilled promises' shifted community towards Democrats." (Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) https://t.co/TNaBykMJhZ उन्होंने बताया कि इससे दोनों व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव पैदा हो गया. इसके अलावा इमीग्रेशन को लेकर एच-1बी वीजा की लिमिट और ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग में भारी देरी शामिल है. इस कम्युनिटी के लिए बहुत निराशजनक था. अमेरिका की आर्थिक वृद्धि और नवाचार के लिए आज भी विदेशी टेक्निकल प्रतिभाओं की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में जो ब्लू वेव दिखी, वह मुख्य रूप से ट्रंप के आक्रमक कदमों, इनमें ईरान से युद्ध और कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र से जाकर टैरिफ लगाना एक व्यापक असंतोष का नतीजा थी. इसे डेमोक्रेटिक पार्टी के एजेंडे के पूर्ण समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.' कार्तिक सागर समाधिया, ABP न्यूज में बतौर कंसल्टेंट सेवाएं दे रहे हैं. नेशनल और इंटरनेशनल खबरों पर लगातार नजर रखते हैं. कई राज्यों के विधानसभा चुनाव के अलावा साल 2019 में हुए लोक चुनावों से जुड़ी खबरों को कवर किया. एबीपी न्यूज से पहले दैनिक भास्कर, एशियानेट न्यूज, ईटीवी भारत, इंडिया टुडे से जुड़े रहे हैं. इस दौरान एडिटोरियल, टीवी-डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े कार्य किए. इंडिया टुडे के यूट्यूब, सोशल मीडिया पर कैप्सूल और लॉन्ग फॉर्मेट वीडियो बनाने से जुड़ा अनुभव शामिल है. मीडिया का करीबन साढ़े 8 साल का अनुभव है. कोरोना और एमपी चुनाव के समय ग्राउंड से एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. मध्यप्रदेश के सीहोर शहर से ताल्लुक रखते हैं. कार्यक्षेत्र भोपाल, दिल्ली और हैदराबाद रहा है. Contact: K.sehore@gmail.com Twitter: https://x.com/kartiksamadhiya Linkdin: https://www.linkedin.com/in/kartik-sagar-samadhiya-01327b410/
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 02:40 PM
भारत ने चिकित्सा स्नातकों के लिए 10-वर्षीय लोक सेवा आवश्यकता की शुरुआत की

भारत ने चिकित्सा स्नातकों के लिए 10-वर्षीय लोक सेवा आवश्यकता की शुरुआत की

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि सरकार के इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। हालांकि पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को दस साल तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देनी होगी।विज्ञापनशर्त पूरी नहीं करने पर एक करोड़ रुपये का बांड भरना होगा। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पीजी डिग्री और डिप्लोमा वाले डॉक्टर नीट या समकक्ष प्रवेश परीक्षा के जरिए उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकेंगे।विज्ञापनइसके लिए विभाग से इजाजत लेनी होगी। डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, सतर्कता जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए। प्रोबेशन अवधि पूरी होनी चाहिए। साथ ही स्थायीकरण आदेश जारी होना भी आवश्यक है। सेवा रिकॉर्ड भी संतोषजनक होना चाहिए। प्रोबेशन पूरा होने के बावजूद स्थायीकरण आदेश जारी नहीं होने पर विशेष परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है।
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Nov 5, 2026, 02:40 PM
पीएम मोदी बिहार के दौरे पर, एनडीए नेता उनके आगमन की तैयारी कर रहे हैं

पीएम मोदी बिहार के दौरे पर, एनडीए नेता उनके आगमन की तैयारी कर रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार दौरे पर आने वाले हैं. इसको लेकर एनडीए के नेता तैयारी में जुट गए हैं. आज (गुरुवार) मुख्यमंत्री आवास पर सीएम सम्राट चौधरी ने बैठक की. बैठक में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित बिहार दौरे को लेकर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री का बिहार दौरा 21 नवंबर को है. 20 नवंबर को बिहार में मौजूदा एनडीए सरकार के कार्यकाल का एक साल पूरा हो रहा है. इसी मौके पर 21 नवंबर को प्रधानमंत्री बिहार आएंगे. सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई एनडीए बैठक में प्रधानमंत्री के बिहार दौरे की समीक्षा की गई. इसके अलावा 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता भगाओ' आंदोलन की भी समीक्षा की गई. बैठक के बाद बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री के दौरे की समीक्षा हुई है. इसके अलावा 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता भगाओ' आंदोलन की भी समीक्षा हुई है. एमएलसी चुनाव के बाद बीजेपी और जेडीयू के रिश्ते पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हमारा गठबंधन फेविकोल की जोड़ की तरह मजबूत है. उधर, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि बिहार में मौजूद एनडीए सरकार का एक साल पूरा होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार आ रहे हैं. हम लोगों ने उनके बिहार दौरे की तैयारी की समीक्षा की है. उमेश सिंह कुशवाहा ने भी संजय सरावगी की बातों को दोहराया. बीजेपी और जेडीयू के रिश्ते को फेविकोल वाला मजबूत जोड़ बताया. उन्होंने एमएलसी चुनाव के प्रदर्शन को लेकर कहा कि हमने हार के कारणों की समीक्षा पार्टी के अंदर की है. रणनीति का खुलासा हम मीडिया के सामने नहीं करेंगे. आर्यन आनंद एबीपी न्यूज़ में बतौर रिपोर्टर काम कर रहे हैं. बिहार की राजधानी पटना में होने राजनीतिक गतिविधियों के साथ अन्य हलचलों पर लगातार नजरें रखते हैं. आर्यन आनंद ने 2015 में पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2016 में दिल्ली में पॉलिटिकल कैंपेनिंग टीम के साथ डिजिटल जर्नलिज्म से कैरियर की शुरुआत की. 2018 में पटना लौटकर बिहार के प्रतिष्ठित डिजिटल चैनल फर्स्ट बिहार में हुआ रिपोर्टर काम किया. फर्स्ट बिहार में 5 साल काम करने के बाद एबीपी से साल 2024 में जुड़े. आर्यन आनंद ने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हरियाणा से BMC और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा किया है. फेसबुक- https://www.facebook.com/share/19cyjN7pLc/ | इंस्टाग्राम- https://www.facebook.com/share/19cyjN7pLc/ | एक्स- https://x.com/The_AryanAnand | मेल आईडी- aryana@abpnetwork.com
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 02:34 PM
हिमकेयर योजना मानहानि के आरोपः विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा

हिमकेयर योजना मानहानि के आरोपः विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू हुई हिमकेयर योजना को बदनाम कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को योजना पर तथ्यहीन टिप्पणियां करने के बजाय उन परिवारों से माफी मांगनी चाहिए, जिन्हें कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिमकेयर कार्ड होने के बावजूद मुफ्त उपचार की सुविधा नहीं मिल पाई। उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से भरमौर में हिमकेयर योजना को लेकर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई। हिमकेयर योजना हिमाचल के करीब 80 लाख लोगों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा सहारा बनी थी। पांच लाख रुपये तक मुफ्त उपचार की सुविधा दी जाती थी।
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Nov 5, 2026, 02:33 PM
यूट्यूबर मनीष कश्यप ने अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के साथ रिश्ते की पुष्टि की

यूट्यूबर मनीष कश्यप ने अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के साथ रिश्ते की पुष्टि की

बिहार के चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप ने 5 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया पर अनुष्का शर्मा के साथ तस्वीर शेयर कर अपने रिश्ते को ऑफिशियल कर दिया है. उन्होंने अनुष्का को ‘हमसफर’ कहा, जबकि अनुष्का ने उन्हें ‘मेरी दुनिया’ लिखा. इस पोस्ट के बाद दोनों की शादी की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, अब तक दोनों में से किसी ने भी शादी या सगाई पर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है. अनुष्का शर्मा बिहार के औरंगाबाद जिले के दाउदनगर क्षेत्र की रहने वाली हैं. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन यानी पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पटना वीमेंस कॉलेज से जुड़ी छात्रा बताई जाती हैं. अनुष्का केवल एक छात्रा नहीं हैं. वो छात्र राजनीति में भी एक्टिव रही हैं. वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ी हुई हैं और पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में ABVP की ओर से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार भी रहीं. पर चुनाव नहीं जीत पाईं और तीसरे स्थान पर रहीं. चुनाव के दौरान उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो अपने चरित्र पर उठाए गए सवालों से बेहद दुखी दिख रही थीं. दूसरी ओर मनीष की बात की जाए, तो वो बिहार के पश्चिम चंपारण से हैं. उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और पेशे यूट्यूबर हैं. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है. हाल ही में वो ' राइज एंड फॉल सीजन-2' में नजर आए. शो में उन्होंने अपने तेवर दिखाकर खूब लाइमलाइट लूटी. मनीष कश्यप ने रियलिटी शो राइज एंड फॉल के दौरान पहली बार खुलासा किया था कि उनकी 21 साल की एक गर्लफ्रेंड है. पर उस समय उन्होंने उनका नाम नहीं बताया था. अब उनकी सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह माना जा रहा है कि वह अनुष्का शर्मा ही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार अनुष्का के पिता नहीं हैं और उनकी परवरिश मां ने की है. फिलहाल दोनों ने रिश्ते का हिंट दिया है, पर शादी की तारीख या आधिकारिक घोषणा नहीं की है.
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Aaj Tak
Nov 5, 2026, 02:32 PM
राजस्थान की राजनीतिः सीएम भजनलाल शर्मा ने अशोक गहलोत के साथ जुबानी जंग छेड़ दी

राजस्थान की राजनीतिः सीएम भजनलाल शर्मा ने अशोक गहलोत के साथ जुबानी जंग छेड़ दी

राजस्थान की सियासत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. गहलोत की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उठाए गए सवालों पर सीएम भजनलाल ने तीखे अंदाज में पलटवार किया. गहलोत का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने कहा, 'जब मैंने जोधपुर की सभा में कहा था तो ये तिलमिला गए, अभी तो और तिलमिलाओगे. मैंने कहा था कि एक-एक सवाल का जवाब पूरी ताकत से मिलेगा. मैंने जो कहा, उसमें से एक भी बात गलत साबित कर दीजिए.' मुख्यमंत्री ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को लेकर कई सवाल दागे. उन्होंने पूछा कि क्या आरपीएससी में सदस्य नियुक्त नहीं किया गया था और क्या वह सदस्य जेल में नहीं है? क्या जल जीवन मिशन में घोटाला नहीं हुआ था और क्या आपका मंत्री जेल में नहीं था? जो अब बाहर आया हैं. सीएम ने अधिकारियों की गिरफ्तारी, पीएसओ के पकड़े जाने और ओएसडी की भाषा को लेकर भी गहलोत पर निशाना साधा. भजनलाल शर्मा ने पूर्व डीजीपी क्राइम और डीजी एसीबी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि उसे भी देख लेना चाहिए, उसमें उन्होंने क्या-क्या कहा था. सीएम ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर आप सही हैं तो अपने आरोपों के प्रमाण दीजिए और बताइए कि झूठा कौन है और सच्चा कौन है. उन्होंने कहा कि हम 24 घंटे राजनीति करने वाले नहीं हैं, बल्कि जनता के बीच जाकर काम करने वाले लोग हैं. जोधपुर में गहलोत पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जमकर हमला बोला था. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था की मैं भजनलाल शर्मा को 24 घंटे के समय देता हूँ या तो वो सुबूत और तथ्य रखें या फिर माफ़ी मांगे.मगर माफ़ी मांगने की जगह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने फिर से आरोपों को दुहराया और कहा कि हमारे पास सारे सबूत हैं अगर वो इसी तरह से आरोप लगाएं तो और भी कारनामे खोल दूंगा.
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 02:32 PM
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की आलोचना की, 1975 के आपातकाल का संदर्भ दिया

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की आलोचना की, 1975 के आपातकाल का संदर्भ दिया

गडकरी ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस चाहे कितनी भी ताकत लगा ले, लोगों को गुमराह करे या लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करे, देश की जनता उस पर भरोसा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस सत्ता में आती है, जनता कुछ समय बाद उसे सत्ता से बाहर कर देती है। गडकरी ने मल्लिकार्जुन खरगे सहित कांग्रेस नेताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही भाषा पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग की छवि खराब करने और संसद की कार्यवाही बाधित करने में लगी है।विज्ञापनगडकरी ने 1975 के आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत लोगों को जेल में डाला गया और कई लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पाबंदियां लगाई गई थीं। उन्होंने दावा किया कि जनता पार्टी के गठन और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोकतंत्र बचाने के संघर्ष में जनसंघ और भाजपा ने अहम भूमिका निभाई थी। गडकरी के मुताबिक, जनता पार्टी की सरकार ने बाद में आपातकाल के दौरान लागू किए गए अलोकतांत्रिक प्रावधानों को खत्म किया। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा मौलिक अधिकारों को भारतीय लोकतंत्र का जरूरी हिस्सा मानती है।विज्ञापनपश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी भाजपा के इसी अभियान के तहत कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी हार के बाद विपक्षी दल जनता का फैसला स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग, ईवीएम और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। सोनोवाल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में भी मतदाता सूची का दस बार पुनरीक्षण कराया गया था। उनके मुताबिक, एसआईआर का उद्देश्य वास्तविक भारतीय नागरिकों के नाम मतदाता सूची में रखना और अवैध प्रवासियों के नाम हटाना है।पश्चिम बंगाल: पूर्व मंत्री उज्ज्वल बिस्वास की हालत गंभीर, फेफड़े और किडनी की बीमारी से जूझ रहे, कहां है भर्ती?सर्बानंद सोनोवाल ने पश्चिम बंगाल की पिछली ममता बनर्जी सरकार पर अवैध घुसपैठ रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इस मुद्दे पर कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ साहस और पेशेवर क्षमता का परिचय दिया, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी आलोचना में लगे रहे।सोनोवाल ने दावा किया कि मोदी सरकार के 12 वर्षों में 50 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। उन्होंने आयुष्मान भारत, आवास, बिजली, स्वच्छता, रसोई गैस, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण सड़कों से जुड़ी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को 2014 से 2025 के बीच 56 विधानसभा चुनावों में हार मिली। साथ ही उन्होंने पूर्वोत्तर में रेलवे, बिजली और करीब सात लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का जिक्र किया।
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 02:25 PM
अमेरिका ने पहली बार मुस्लिम सीनेटर का चुनाव कियाः भारतीय परिवार के लिए बड़े गर्व का क्षण

अमेरिका ने पहली बार मुस्लिम सीनेटर का चुनाव कियाः भारतीय परिवार के लिए बड़े गर्व का क्षण

अमेरिका में हुए चुनावों के नतीजों का जश्न जहां वाशिंगटन से लेकर पूरे अमेरिका में मनाया जा रहा है, वहीं इस जश्न की गूंज भारत में कर्नाटक के शहर भटकल तक सुनाई दे रही हैं। भटकल के एक परिवार के पास खुस होने की बेहद खास और निजी वजह है। अमेरिका में राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए अब्दुल अल-सैयद देश के पहले मुस्लिम सीनेटर चुने गए हैं। भारत में उनकी पत्नी सारा के रिश्तेदारों के लिए यह ऐतिहासिक जीत बेहद गर्व और आत्मीयता का पल है। अब्दुल अल-सैयद अमेरिका में भले ही एक चर्चित और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा हों, लेकिन भटकल में रहने वाले उनके रिश्तेदारों के लिए वे एक बेहद विनम्र, सहज और मिलनसार इंसान हैं। सारा के चचेरे भाई-बहन, जुकाकू शम्सुद्दीन जिया और बीबी हुस्ना ने इस शानदार जीत पर बेहद खुशी जताई। हुस्ना ने बताया कि वोटों की गिनती और पूरे चुनाव अभियान के दौरान परिवार काफी तनाव में था। वे अमेरिका में मौजूद अपने अंकल के साथ लगातार संपर्क में थे, जो उन्हें चुनावी गतिविधियों की जानकारी देते रहते थे। हुस्ना के मुताबिक, नतीजे आने के बाद जब उन्होंने अपने अंकल को फोन किया, तो पता चला कि उनके घर पर जश्न का माहौल है, जहां परिवार के कई सदस्य और मेहमान मौजूद थे। परिवार के लोग दुनिया भर में अलग-अलग जगहों पर रहते हैं, इसलिए इस जीत का जश्न मुख्य रूप से व्हाट्सएप ग्रुप्स और वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन मनाया गया। अब्दुल का भटकल से नाता कई साल पुराना है। सारा के पिता, डॉ. सैयद, अपने बच्चों को इस तटीय शहर में जरूर लाते थे ताकि वे अपनी पारिवारिक जड़ों और रिश्तेदारों से जुड़े रहें। लगभग एक दशक से भी ज्यादा समय पहले अब्दुल अपनी पत्नी सारा के साथ एक चचेरे भाई की शादी में शामिल होने भटकल आए थे। उस दौरान वे रिश्तेदारों के साथ तीन-चार दिन रुके थे। रिश्तेदारों के पास उनकी यादें आज भी तरोताजा हैं। हुस्ना ने उन्हें कर्नाटक का दामाद कहकर संबोधित किया और बताया कि वे बेहद ज्ञानवान, संस्कारी और तमीजदार इंसान हैं जो कभी किसी को नीचा नहीं दिखाते। वहीं ज़िया ने याद किया कि अब्दुल को भटकली खाना बहुत पसंद आया था। उन्हें यहां की खास बिरयानी, स्थानीय व्यंजन और यहां का प्रसिद्ध मिर्च का पेस्ट लोनमिरी बहुत पसंद था, जो व्यंजनों को एक अनोखा स्वाद देता है। बेंगलुरु में रहने वाले जिया के लिए यह जीत केवल राजनीतिक सफलता नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार की जनसेवा की विरासत से भी जुड़ी है। जिया के दादाजी, जे.एच. शम्सुद्दीन, तत्कालीन मैसूर राज्य में मंत्री रह चुके थे और अपनी निष्ठा व ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। जिया को अपने दादाजी और अब्दुल अल-सैयद के बीच काफी समानताएं नजर आती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच दो सबसे बड़ी समानताएं हैं, उनकी बेदाग ईमानदारी और सच्चाई के साथ जनता की सेवा करने की गहरी इच्छा। जिया ने कहा, अब्दुल बहुत सीधे-सादे इंसान हैं और उनके स्वभाव में कोई दोमुंहापन नहीं है। वे सिद्धांतों पर टिके रहने वाले व्यक्ति हैं। परिवार इस ऐतिहासिक उपलब्धि को केवल एक व्यक्तिगत जीत के रूप में नहीं देख रहा है। हुस्ना ने इसे दुनिया भर में फैले इस्लामफोबिया, डराने-धमकाने की ताकतों और दुष्प्रचार अभियानों के खिलाफ एक करारा जवाब बताया। उन्होंने कहा कि तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों और नफरत के अभियानों के बावजूद अब्दुल ने जो सफलता हासिल की है, वह भ्रष्टाचार और नकारात्मक राजनीति के खिलाफ एक बड़ी जीत है। वहीं, जिया ने अल-सैयद के राजनीतिक विजन और चुनावी वादों पर बात की। अब्दुल के मुख्य मुद्दों में राजनीति से पैसे का प्रभाव खत्म करना, जनता की जेब में सीधे लाभ पहुंचाना और सभी के लिए मुफ्त व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा शामिल हैं। जिया के अनुसार, ये ऐसी बातें हैं जो केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारत जैसे विकासशील देशों के आम नागरिकों के दिलों को भी छूती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी लोग ऐसे ही साफ-सुथरी छवि और जन कल्याण के प्रति समर्पित नेताओं की आकांक्षा रखते हैं। हुस्ना ने कहा कि वे जानते हैं कि अब्दुल की इस नई और बड़ी भूमिका से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। पूरा परिवार ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि अब्दुल अपने सभी चुनावी वादों को सफलतापूर्वक पूरा करें। इसके साथ ही, अमेरिकी राजनीति के चुनौतीपूर्ण माहौल को देखते हुए परिवार को अब्दुल और उनके पूरे परिवार की सुरक्षा को लेकर भी थोड़ी चिंता बनी रहती है। हुस्ना ने कहा कि जब हजारों मील दूर मिली किसी ऐतिहासिक जीत का संबंध आपके अपने घर से होता है, तो पूरी दुनिया बहुत छोटी महसूस होने लगती है। परिवार को भरोसा है कि अब्दुल का सीनेटर के रूप में कार्यकाल अमेरिकी समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगा और भटकल के साथ अमेरिका का यह खूबसूरत रिश्ता हमेशा अच्छे कारणों से याद रखा जाएगा।
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Aaj Tak
Nov 5, 2026, 02:22 PM
बिहार चुनाव में हार के बाद जद (यू) ने समीक्षा बैठक की

बिहार चुनाव में हार के बाद जद (यू) ने समीक्षा बैठक की

बिहार की राजधानी पटना में जेडीयू ने विधान परिषद चुनाव यानी एमएलसी चुनाव में मिली हार को लेकर समीक्षा बैठक की. बैठक के बाद पार्टी ने आधिकारिक बयान जारी किया. राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि हार के कारणों पर फीडबैक लिया गया है और पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी. उधर मुख्यमंत्री आवास पर एनडीए की बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री के 21 नवंबर के प्रस्तावित बिहार दौरे पर चर्चा हुई. समीक्षा बैठक के लिए पार्टी ने एमएलसी चुनाव में जिन चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, उन सभी उम्मीदवारों को बुलाया था. उनके साथ जिलाध्यक्षों और चुनाव प्रभारी को भी बुलाया गया. सभी से हार के कारणों पर राय ली गई. राजीव रंजन के मुताबिक समीक्षा के बाद ही पार्टी आगे का फैसला करेगी. बैठक के लिए जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार भी पार्टी दफ्तर पहुंचे. नीरज कुमार ने पार्टी की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि यह बैठक कार्यकारी अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के निर्देश पर बुलाई गई थी. इसमें संगठन, सरकार और उम्मीदवारों के चयन समेत कई पहलुओं पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि पार्टी मेहनत करती है, लेकिन इसके बावजूद वोट नहीं मिलते तो दुख और निराशा होती है. जेडीयू के एमएलसी उम्मीदवार अभिषेक झा बैठक खत्म होने के बाद बाहर निकले. अभिषेक झा को निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर बृजवासी से हार मिली थी. बाद में बृजवासी ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया. इसके बाद जेडीयू और बीजेपी के रिश्तों में खटास की खबरें आने लगीं. इन खबरों के बीच राजीव रंजन से पूछा गया कि बीजेपी की तरफ से गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया गया. इस पर उन्होंने कहा कि पार्टी को सभी तथ्यों की जानकारी है. हार के कारणों की समीक्षा हो चुकी है और आगे जो भी निर्णय होगा, लिया जाएगा. साथ ही यह बात भी कही गई कि हमारा गठबंधन फेविकोल की जोड़ की तरह मजबूत है. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री आवास पर चल रही एनडीए की बैठक खत्म हो गई. बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की. इसमें प्रधानमंत्री के दौरे की समीक्षा की गई. 20 नवंबर को मौजूदा एनडीए सरकार का एक साल पूरा हो रहा है और इसी मौके पर प्रधानमंत्री 21 नवंबर को बिहार आएंगे. इसके अलावा लोकतंत्र बचाओ, अराजकता भगाओ आंदोलन की भी समीक्षा हुई. बैठक के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जानकारी दी कि दौरे और आंदोलन की समीक्षा हुई. उनसे एमएलसी चुनाव के बाद बीजेपी और जेडीयू के रिश्ते को लेकर भी सवाल पूछा गया.
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Dainik Bhaskar
Nov 5, 2026, 02:15 PM
मध्यावधि चुनाव में हार के बीच राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग चलाने की तैयारी में डेमोक्रेट

मध्यावधि चुनाव में हार के बीच राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग चलाने की तैयारी में डेमोक्रेट

मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद अब राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके जरिए उन्हें पद से हटाया जा सकता है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक डेमोक्रेट्स आरोप लगा रहे हैं कि ट्रम्प ने अपने पद का इस्तेमाल कर अपने करीबियों को फायदा पहुंचाया और संपत्ति जुटाई। इससे आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। डेमोक्रेटिक सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने कहा है कि वे यह पता लगाएंगे राष्ट्रपति रहते हुए ट्रम्प और उनके परिवार की संपत्ति कैसे बढ़ी। उनका फोकस ट्रम्प के बेटों और दामाद जेरेड कुशनर के कारोबारी सौदों पर है। गार्सिया ने जांच के लिए पांच मुद्दे तय किए हैं। इनमें ट्रम्प परिवार के कारोबारी सौदे, जेफ्री एपस्टीन मामले की जांच में ट्रम्प प्रशासन की भूमिका और अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) की छापेमारी और कार्रवाई शामिल हैं। हाउस में कुल 435 सीटें हैं। सभी सीटों पर चुनाव हुए। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 242 और ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 151 सीटें जीती हैं। 42 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। डेमोक्रेट्स को जरूरी बहुमत मिल चुका है। सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए हैं। अब तक 33 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। बाकी 2 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। इन नतीजों को मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं। कुल 36 सीटों में से 34 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। 22 डेमोक्रेट्स और 12 रिपब्लिकन ने सीटें जीती हैं। 2 राज्यों में वोटों की गिनती जारी है। मिडटर्म चुनाव में हार के बाद भी चीन ट्रम्प के साथ रिश्ते बनाए रखना चाहता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसी महीने ट्रम्प से मिलेंगे। उनकी कोशिश व्यापार समझौता करने की है। जिनपिंग की नजर व्यापार समझौते के साथ ताइवान पर भी है। अमेरिका ताइवान को अरबों डॉलर के हथियार दे चुका है। ट्रम्प ने हथियारों की बिक्री पर सवाल उठाए हैं और 14 अरब डॉलर की बिक्री टाल भी दी है। अब सवाल है कि क्या जिनपिंग व्यापार समझौते के बदले ताइवान पर अमेरिकी रुख नरम करने की मांग करेंगे? चीन इस बातचीत में सावधानी बरत रहा है। उसे पता है कि एक राष्ट्रपति के साथ हुआ समझौता अगली सरकार बदल सकती है। जानकारों का मानना है कि जिनपिंग ट्रम्प पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहेंगे, क्योंकि इससे बातचीत बिगड़ सकती है। डोनाल्ड ट्रम्प पर उनके पहले राष्ट्रपति कार्यकाल (2017-2021) के दौरान दो बार महाभियोग चलाया गया था। अमेरिकी इतिहास में वे ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ दो बार महाभियोग की कार्रवाई हुई। हालांकि, दोनों ही बार सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। आरोप था कि ट्रम्प ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर दबाव डाला था कि वे जो बाइडेन और उनके बेटे हंटर बाइडेन के खिलाफ जांच का ऐलान करें। ऐसा न करने पर ट्रम्प ने यूक्रेन को मिलने वाली करीब 40 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद रोक दी थी। 6 जनवरी 2021 को ट्रम्प के समर्थकों ने अमेरिकी संसद भवन कैपिटल पर हमला कर दिया था। ट्रम्प पर अपने भाषण और बयानों से समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा था। रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ट्रम्प को ईरान पर हमले के लिए उकसाया, लेकिन युद्ध खत्म करने की कोई योजना नहीं बनाई थी। केंटकी से रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने बुधवार को हेगसेथ से इस्तीफा मांगा। अगले हफ्ते प्रतिनिधि सभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग भी हो सकती है। यह मामला ऐसे समय उठा है, जब मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल किया है। चुनाव में ईरान जंग भी वोटरों की नाराजगी की बड़ी वजह रही। रूसी अखबार 'कोमर्सेंट' ने गुरुवार को लिखा कि अमेरिकी संसद पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण रहने के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले दो महीनों में यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश तेज कर सकते हैं। अखबार के एक लेख में रूसी सरकार को सलाह दी गई कि वह इस मौके का पूरा फायदा उठाए। हालांकि, रूस ने कहा है कि वह यूक्रेन को लेकर अपनी रणनीति अमेरिका की घरेलू राजनीति के हिसाब से तय नहीं करता। कोमर्सेंट के मुताबिक, जनवरी में जब अमेरिकी संसद का नियंत्रण डेमोक्रेट्स के हाथ में चला जाएगा, तो वे ट्रम्प पर रूस से बातचीत रोकने का दबाव बढ़ा सकते हैं। वे यूक्रेन को अमेरिका की सीधी सैन्य मदद फिर शुरू करने और रूस के साथ-साथ उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग भी कर सकते हैं। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके करीबियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि ट्रम्प और उनके परिवार ने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया है। कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रम्प पर तीसरी बार महाभियोग चलाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। डेमोक्रेट्स ट्रम्प परिवार के कारोबार, क्रिप्टोकरेंसी सौदों, सरकारी खर्च और जेफ्री एपस्टीन मामले में सरकार की भूमिका की जांच करना चाहते हैं। इसके अलावा इमिग्रेशन एजेंसी ICE की छापेमारी, सरकारी खर्च में कटौती के लिए बनाई गई एजेंसी DOGE और ट्रम्प के व्हाइट हाउस में बन रहे बॉलरूम की भी जांच हो सकती है। अमेरिका के मिसिसिपी में सीनेट चुनाव की गिनती अभी जारी है। यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार स्कॉट कोलम रिपब्लिकन सांसद सिंडी हाइड स्मिथ से करीब 1,000 वोट आगे चल रहे हैं। अब तक 96% वोटों की गिनती हो चुकी है। इस चुनाव का नतीजा करीब 15 हजार ऐसे वोटों पर निर्भर है, जिन्हें अभी गिनती में शामिल नहीं किया गया है। इन वोटों को गिनने में अगले हफ्ते तक का समय लग सकता है। कुछ लोगों को फोटो पहचान पत्र न होने के कारण ऐसे वोट डालने पड़े। उनके वोट तभी गिने जाएंगे, जब वे 10 नवंबर तक जरूरी पहचान पत्र जमा करेंगे। कुछ वोटरों के नाम मतदाता सूची में नहीं मिले, क्योंकि उन्हें गलती से निष्क्रिय वोटर मान लिया गया था। इसके अलावा, जिन लोगों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म अधूरे थे, उनके वोट भी गिने जाने पर विवाद हो सकता है। अलास्का में करीब 20 साल से डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई गवर्नर नहीं बना है। आखिरी बार 2002 में टोनी नोल्स गवर्नर पद से हटे थे। अब डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोनाथन क्राइस टॉमकिन्स और रिपब्लिकन उम्मीदवार बर्नाडेट विल्सन के बीच कड़ा मुकाबला है। जोनाथन अपने विरोधी से करीब 20 पॉइंट आगे चल रहे हैं। हालांकि, उन्हें अभी आधे से ज्यादा वोट नहीं मिले हैं। अगर वे चुनाव जीतते हैं, तो 37 साल की उम्र में अलास्का के अब तक के सबसे कम उम्र के गवर्नर बन जाएंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स की प्रोफेसर नताशा लिंडस्टेड के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कई वजहें थीं। इनमें शामिल है: ईरान जंग के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं। आम अमेरिकी नाराज थे। ट्रम्प के लगाए टैक्स से किसान, ग्रामीण इलाकों के लोग और कई कारोबार प्रभावित हुए। इमिग्रेशन एजेंसी की छापेमारी से भी बड़ी संख्या में अमेरिकी नाराज थे। एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का मुद्दा भी चुनाव में रिपब्लिकन के खिलाफ गया। लिंडस्टेड के मुताबिक, ट्रम्प अपनी गलतियां नहीं मानते। वे अपने गलत फैसलों के लिए माफी भी नहीं मांगते। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स की ताकत बढ़ने से ताइवान को हथियार मिलने का रास्ता खुल सकता है। अमेरिका का कानून है कि वह चीन के हमले के खतरे से बचने के लिए ताइवान को हथियार और अपनी रक्षा करने में मदद देगा। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने करीब 1.33 लाख करोड़ रुपए के हथियार बेचने के समझौते को कई महीनों से टाल रहे हैं। जबकि अमेरिकी संसद इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है। सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ ड्रू थॉम्पसन का कहना है कि, चुनाव के बाद अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर ट्रम्प पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वे हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे सकते हैं। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। इस बार हाउस की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। 42 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। डेमोक्रेट्स ने 20 सीटें जीती हैं। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स के पास 54 सीटें हो गई हैं। अभी 2 सीटों पर फैसला आना बाकी है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जुआरी बताया। उन्होंने कहा कि वे ऐसे जुआरी हैं जो हारने के बाद भी खेल छोड़ने को तैयार नहीं होता। वेंस के बॉस (ट्रम्प) जंग का अगला दौर शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए वेंस को ये बातें अपने बॉस से कहनी चाहिए। BBC के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दोस्त रॉड ड्रेहर का कहना है कि 2028 में राष्ट्रपति बनने का वेंस का मौका अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन तेजी से कम हो रहा है। अगर ईरान के साथ जंग जल्द खत्म नहीं हुई तो रिपब्लिकन पार्टी और वेंस को इसका नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि ट्रम्प को वोट देने वाले लोग इस जंग को अपने साथ धोखे की तरह देख रहे हैं। इससे आम अमेरिकी भी परेशान हैं। जंग के कारण ईरान की सरकार तो नहीं बदली, लेकिन अमेरिका की राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत से यूक्रेन को ज्यादा मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स यूक्रेन को समर्थन देने और अमेरिका-यूरोप के रिश्ते मजबूत करने की बात साफ तौर पर करते हैं। इसका फायदा यूक्रेन को मिलेगा। जेलेंस्की के मुताबिक, इससे रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर भी दबाव पड़ेगा। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सरकार पर भी अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों का असर पड़ सकता है। इस बारे में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सोमवार को कहा, उनके बयान से साफ संकेत मिला कि चुनाव के नतीजे चाहे जो हों, रूस को अमेरिका की नीति में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। ट्रम्प ने रूस की हर मांग नहीं मानी है। खासकर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूस अपनी शर्तों पर जिस समझौते की उम्मीद कर रहा था, वह अब तक नहीं हुआ है। इसके बावजूद ट्रम्प की विदेश नीति से रूस को कई फायदे मिले हैं। हाल ही में ट्रम्प ने रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों को रोक दिया था। उन्होंने रूस से डीजल खरीदने पर भी सहमति जताई थी। इसके अलावा, वे यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की ज्यादा आलोचना करते रहे हैं, जबकि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को लेकर उनका रुख नरम रहा है। भारतीय मूल के डॉक्टर अमीश शाह ने एरिजोना से अमेरिकी संसद के निचले सदन का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस राज्य से जीतने पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। इसके साथ ही वे इस साल के मिडटर्म इलेक्शन में जीतने वाले छठे भारतवंशी बन गए हैं। शाह ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जे फेली को हराया। फेली नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के पूर्व खिलाड़ी हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। शाह को 52.49% वोट मिले, जबकि फेली को 45.45% वोट हासिल हुए। अमीश शाह का जन्म शिकागो में हुआ था। उनके माता-पिता गुजराती हैं और 1960 के दशक में अमेरिका जाकर बस गए थे। उनके पिता जैन धर्म को मानते हैं, जबकि मां हिंदू हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने माना है कि ईरान के साथ जंग के कारण मिडटर्म चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। हालांकि, उन्होंने इसका बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यही एक रास्ता था। CNBC के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, रिपब्लिकन पार्टी के टेक्सास से पूर्व कार्यकारी निदेशक चैड विलबैंक्स ने आरोप लगाया कि ट्रम्प के फैसलों से पार्टी को नुकसान हुआ। इसमें ईरान जंग, व्यापार नीति और रूस के राष्ट्रपति पुतिन का पक्ष लेने जैसे फैसले शामिल है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प के कुछ करीबी रिपब्लिकन नेताओं ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को भी इस हार का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि हेगसेथ ने ट्रम्प को ईरान जंग में उलझा दिया, लेकिन इसे खत्म करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बनाई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी कह चुके हैं कि ईरान जंग के कारण 2024 में ट्रम्प को वोट देने वाले कई मतदाता इस बार रिपब्लिकन पार्टी से दूर हो गए। इसके अलावा, मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि चुनाव नतीजों के बाद ईरान के साथ जंग खत्म हो सकती है। एशियाई बाजार में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 0.9% गिरकर 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 1.5% गिरकर 86.83 डॉलर प्रति बैरल रही। मिडटर्म में बड़ी जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने अब अपने चुनावी वादे पूरे करने की चुनौती है। पार्टी नेताओं ने महंगाई कम करने और ईरान के साथ जंग खत्म करने को अपनी प्राथमिकता बताया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि उनकी पार्टी आम लोगों के लिए काम करेगी। उनके अगले हाउस स्पीकर बनने की संभावना है। ऐसा होने पर वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। 'अगर तुम ब्लैक या यहूदी हो और अब्दुल को वोट देते हो, तो तुम पागल हो। वो एक जिहादी है। वो खतरनाक और हिंसक जिहादी है।' ये शब्द अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैं, जो उन्होंने अब्दुल अल-सैयद के बारे में कहे थे। मिडटर्म चुनाव नतीजों में 52% से ज्यादा मतों के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। अमेरिका के अलास्का राज्य में सीनेट चुनाव के नतीजे का इंतजार है। यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार मैरी पेल्टोला, रिपब्लिकन उम्मीदवार और मौजूदा सीनेटर डैन सुलिवन से करीब 600 वोटों से आगे हैं। मिडटर्म चुनाव के नतीजों को कनाडा के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है। डेमोक्रेट्स की जीत को अमेरिकी वोटरों की ट्रम्प के टैरिफ के खिलाफ नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। कनाडा के ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने बुधवार को कहा, ‘मैं खुशी से सड़कों पर उछल रहा था। यह कनाडा की जीत है।’ हालांकि, चुनाव नतीजों से कनाडा को तुरंत टैरिफ से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता फिर शुरू हो गई है। ऐसे में कनाडा को अमेरिका के साथ बेहतर समझौते की उम्मीद है। हालांकि, संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति का टैरिफ पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह है कि ट्रम्प ने ज्यादातर टैरिफ संसद की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति के आदेश से लगाए हैं। जनवरी में नई संसद शुरू होने के बाद डेमोक्रेट्स कमान संभालेंगे। वे ट्रम्प प्रशासन के कामकाज की जांच कर सकेंगे। राष्ट्रपति मंत्रियों, बड़े अधिकारियों और जजों के नाम तय करते हैं, लेकिन सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। अब सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत होगा। ऐसे में वे ट्रम्प के चुने हुए लोगों की नियुक्तियों को रोक सकते हैं। ट्रम्प किसी कानून को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। इसे वीटो कहते हैं। संसद के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से इसे पलट सकते हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स के पास इतना बहुमत नहीं है। अमेरिका के मिसिसिपी राज्य में सीनेट चुनाव की गिनती जारी है। करीब 96% वोटों की गिनती हो चुकी है। BBC के नए आंकड़ों के मुताबिक, डेमोक्रेट उम्मीदवार स्कॉट कोलम रिपब्लिकन उम्मीदवार सिंडी हाइड-स्मिथ से 1138 वोटों से आगे हैं। करीब एक घंटे पहले कोलम की बढ़त सिर्फ 65 वोट थी। अब उनकी बढ़त करीब 0.1% हो गई है। मिडटर्म चुनाव में हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी में सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के नेता हार की वजह तलाश रहे हैं और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। BBC के मुताबिक, वोटर्स ने ईरान जंग को लेकर राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले पर नाराजगी जताई। अब उनके करीबी नेता भी इस जंग से दूरी बनाने लगे हैं। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हैं। वेंस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हमारी हार की वजह जंग है। आगे क्या करना है, इस पर कोई भी चर्चा इसी बात से शुरू होनी चाहिए।’ NBC न्यूज के अनुमान के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 258 सीटें मिल सकती हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो पार्टी 1992 के बाद पहली बार इतनी सीटें हासिल करेगी। 1992 में हुए चुनाव में डेमोक्रेट्स को 258 सीटें मिली थीं। इसके बाद 2008 के चुनाव में पार्टी ने 257 सीटें जीती थीं। इन चुनावों के बाद बिल क्लिंटन और बराक ओबामा 1993 और 2009 में राष्ट्रपति बने थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार से पल्ला झाड़ लिया है। चुनाव प्रचार के दौरान वे बार-बार खुद को चुनाव का चेहरा बता रहे थे और वोटर्स से उन्हें उम्मीदवार मानकर वोट देने की अपील कर रहे थे। उन्होंने 47 बार खुद के नाम पर लोगों से वोट देने के लिए कहा। लेकिन नतीजे आने के बाद ट्रम्प ने कहा कि वे खुद चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने नहीं पहुंचे। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में 5 भारतवंशी नेताओं ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनाव में जीत हासिल की है। जबकि एक उम्मीदवार अमीष शाह आगे चल रहे हैं। ये सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं। जीतने वालों में रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया शामिल हैं। इससे पहले 2024 के चुनाव में 6 भारतवंशी इस सदन के लिए चुने गए थे।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 02:13 PM
कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आप ने पार्टी पर भाजपा की'बी-टीम'होने का आरोप लगाया

कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आप ने पार्टी पर भाजपा की'बी-टीम'होने का आरोप लगाया

अमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पार्टी को भाजपा की बी-टीम बताए जाने वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ही भाजपा की असली बी-टीम है, जिसने कई राज्यों में अपने विधायकों के दल-बदल के जरिये भाजपा की सरकारें बनवाईं। उन्होंने कांग्रेस को अपनी कमियों का मूल्यांकन करने की नसीहत भी दी।प्रेसवार्ता में बृहस्पतिवार को संजय सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायकों ने भाजपा में शामिल होकर उसकी सरकार बनवाने में भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि 2016 में अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के विधायक भाजपा में चले गए। इसी साल उत्तराखंड में नौ विधायक टूटे। 2017 में गोवा में 13,2019 में कर्नाटक में 13 और वर्ष 2020 में मध्य प्रदेश में 22 कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हुए। वर्ष 2022 में भी गोवा में आठ विधायक भाजपा में चले गए। संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात समेत कई राज्यों में कांग्रेस दशकों से चुनाव हार रही है। गुजरात में 31 साल, उत्तर प्रदेश में 37 साल और बिहार में 36 साल से पार्टी सत्ता से बाहर है। उस समय आम आदमी पार्टी का अस्तित्व भी नहीं था। ऐसे में कांग्रेस को अपनी हार के लिए दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए।
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 02:10 PM
जद (यू) के नेताओं ने चुनाव से पहले उम्मीदवारों से मुलाकात की

जद (यू) के नेताओं ने चुनाव से पहले उम्मीदवारों से मुलाकात की

विधान परिषद चुनाव (Bihar MLC Election) में चार सीटों में तीन पर हार व एक सीट पर जीत में आए व्यवधान को केंद्र में जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने गुरुवार को सभी चार सीटों से चुनाव लड़े प्रत्याशियों से अलग-अलग बात की। जदयू नेतृत्व ने सभी उम्मीदवारों को कहा कि अगर उन्हें किसी के खिलाफ शिकायत है और उसके प्रमाण भी हैं उनके पास तो इस बारे में पार्टी को लिखित शिकायत करें। दल के स्तर पर इसे एनडीए के फोरम पर रखा जाएगा। वहीं, पार्टी नेतृत्व ने दो टूक कहा कि जिसने भी पार्टी में रहकर दल के प्रत्याशी का विरोध किया उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीतकर आए नीरज की बारी सबसे आखिर में थी। तीन सीटों पर हार गए प्रत्याशियों के बाद उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिला। नीरज ने कहा कि उनका पार्टी के ही विधायक ने किस तरह से विरोध किया यह सार्वजनिक है। इस विरोध के बाद भी वह चुनाव जीतकर आए। पार्टी नेतृत्व ने यह कहा कि दल के स्तर इस प्रकरण में कार्रवाई हो चुकी है। तिरहुत स्नातक क्षेत्र से जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा काे 15 मिनट अपनी बात रखने को मिला। जदयू नेतृत्व ने उन्हें कहा कि भले ही वह हार गए पर बहुत अच्छे तरीके से चुनाव लड़ा। अभिषेक ने अपनी बात में षड्यंत्र की बात कही। इस पर उन्हें भी लिखित रूप से शिकायत करने को कहा गया। अभिषेक ने कहा कि चुनाव हारने के बाद उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। बैठक में इस पर भी विमर्श हुआ कि विधान परिषद चुनाव में संगठन के स्तर पर किस तरह की कमजोरी रही। जदयू के स्थानीय नेताओं की किस तरह की सक्रियता रही इसका भी आकलन किया जा रहा है। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू प्रत्याशी घनश्याम राय चुनाव हार गए थे। जनसुराज के प्रत्याशी ने उन्हें हराया था। इसी तरह सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र आनंद पुष्कर चुनाव हार गए थे। उनका आरोप है कि एनडीए के नेताओं ने उनके पक्ष में बैठक नहीं की। समीक्षा बैठक में उन जिलों के जदयू जिलाध्यक्षों को भी बुलाया गया था जिनके यहां विधान परिषद चुनाव को लेकर मतदान हुआ। वहां के विधायक भी आमंत्रित किए गए थे। जदयू की समीक्षा बैठक में विधान परिषद की सीटों के जदयू प्रत्याशियों ने गुस्से में यह कहा कि भाजपा का उन्हें चुनाव में सहयोग नहीं मिला। वहीं, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि भाजपा के साथ उनका जोड़ फेविकाेल की जोड़ की तरह है। जो शिकायतें की गयी हैं उन्हें देखा जाएगा। बिहार MLC चुनाव रिजल्ट के बाद NDA में रार, सांसद राजीव प्रताप रूडी के बयान से गरमाई बिहार की सियासत JDU प्रत्याशी को हराने वाले राहुल राज की BJP में वापसी, उमेश कुशवाहा ने उठाए तीखे सवाल
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 02:05 PM
आई. आर. जी. सी. ने होर्मुज जलडमरूमध्य में घटनाओं की सूचना दी, अमेरिकी सरकार पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया

आई. आर. जी. सी. ने होर्मुज जलडमरूमध्य में घटनाओं की सूचना दी, अमेरिकी सरकार पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया

आईआरजीसी ने अपने आधिकारिक मीडिया प्लेटफॉर्म सेपाह न्यूज पर बताया कि एक तेल टैंकर कथित तौर पर नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकरा गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई। दूसरी घटना में जलडमरूमध्य से बाहर निकल रहे एक अन्य तेल टैंकर में पूर्वी हिस्से में आग लग गई और उसे रोकना पड़ा। आग बुझाने के लिए पहुंचे एक टगबोट में भी आग लग गई।विज्ञापनआईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि उसकी नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाई ने एक अलग अभियान में दो घुसपैठ करने वाले कम लागत के मानवरहित लड़ाकू ड्रोन पर नियंत्रण कर लिया। इसके बाद दोनों ड्रोन को बिना किसी नुकसान के नीचे उतार लिया गया।विज्ञापनसमाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, आईआरजीसी ने अमेरिकी सरकार पर जहाजों को नियमों का उल्लंघन कर बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुजरने के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया। संगठन का कहना है कि इससे अमेरिकी करदाताओं और पश्चिम एशिया में उसके सहयोगियों को भारी बीमा लागत का सामना करना पड़ रहा है।इस बीच, अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध खत्म करेगा। उन्होंने दावा किया कि इस कोशिश में कुछ रिपब्लिकन सांसद भी उनका साथ देंगे। वॉशिंगटन डीसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शूमर ने कहा कि अमेरिकी संविधान में बजट पर संसद के अधिकार को ऐसे राष्ट्रपति को रोकने के लिए रखा गया है, जो जनता की सहमति के बिना युद्ध करता है।शूमर का यह बयान अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में मतदान के कुछ घंटे बाद आया। शुरुआती अनुमानों में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल करने की संभावना जताई गई है।
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Nov 5, 2026, 02:03 PM
भाजपा नेता ने मिशन 2027 की सफलता के लिए एकता और संगठन पर जोर दिया

भाजपा नेता ने मिशन 2027 की सफलता के लिए एकता और संगठन पर जोर दिया

पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक में नितिन नवीन ने कहा कि भाजपा के लिए संगठन सर्वोपरि है। कार्यकर्ताओं के परिश्रम और निस्वार्थ सेवा के कारण ही पार्टी ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मिशन 2027 को लक्ष्य बनाकर एकजुटता के साथ काम करने का आह्वान किया। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, प्रदेश सह-प्रभारी प्रदीप वर्मा, राष्ट्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद संगीता यादव, प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा और क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय सहित प्रदेश, क्षेत्र और जिला स्तर के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का संचालन क्षेत्रीय महामंत्री डॉ. बच्चा पांडेय नवीन ने किया। इससे पहले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी के पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मिशन 2027 की सफलता के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने पूर्व जनप्रतिनिधियों से अपने राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन के माध्यम से संगठन को मजबूत बनाने में सहयोग करने का आग्रह किया। नितिन नवीन ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और कार्यकर्ताओं के उत्साह से पार्टी आगामी चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में फिर से डबल इंजन सरकार बनाने का भरोसा जताया। भाजपा अध्यक्ष ने एनडीए के घटक दलों के जनप्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की। इस दौरान गठबंधन की एकजुटता और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी घटक दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे और प्रदेश में फिर सरकार बनाने के लिए काम करेंगे।
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Nov 5, 2026, 01:51 PM
कॉकरोच जनता पार्टी कोच्चि में एस. आई. आर. प्रक्रिया का विरोध करेगी

कॉकरोच जनता पार्टी कोच्चि में एस. आई. आर. प्रक्रिया का विरोध करेगी

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आगामी 7 नवंबर को केरल के कोच्चि में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. यह प्रदर्शन एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है, जिसके जरिए इसे तुरंत रद्द करने की मांग दोहराई गई. इस विरोध प्रदर्शन का नाम ‘कोच्चि में जंतर-मंतर’ रखा गया है. यह प्रदर्शन 7 नवंबर को शाम 4 बजे से कोच्चि के 'राझेंद्र मैदान' में आयोजित किया जाएगा. इस विरोध प्रदर्शन में सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, दक्षिण क्षेत्र के प्रमुख विजय मल्लांगी और राष्ट्रीय सचिव आफरीन नवाज शामिल होंगे. यह प्रदर्शन दिल्ली में पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सीजेपी का पहला बड़ा कदम है. पिछले महीने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कई सीजेपी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ बिना अनुमति के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जा रहे थे. सरकार ने बाद में जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से डीनोटिफाई कर दिया था. हालांकि, इसके बावजूद सौरव दास और आशुतोष रांका ने इस फैसले का विरोध करने के लिए वहां पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और एक हफ्ते जेल में रहना पड़ा. बाद में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) को यह अंडरटेकिंग देने पर उन्हें रिहा किया गया कि जब तक जंतर-मंतर पर रोक लगी है, वे वहां कोई प्रदर्शन आयोजित नहीं करेंगे. सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पिछले महीने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'तिरंगा कार्यक्रम' का ऐलान किया था. उन्हें भी दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बाद में SEM द्वारा सशर्त जमानत पर रिहा किया गया. इस जमानत की एक प्रमुख शर्त यह है कि वे अगले एक साल तक किसी भी तरह से शांति भंग नहीं होने देंगे. इसके अलावा, सीजेपी ने 1 नवंबर को दिल्ली में हुए इंडिया गठबंधन के मार्च का समर्थन तो किया था, लेकिन राहुल गांधी की अगुवाई में रामलीला मैदान में हुई रैली में वे शामिल नहीं हुए थे. विक्रम कुमार एबीपी न्यूज़ में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं और डिजिटल टीम का हिस्सा हैं. एबीपी लाइव के नेशनल डेस्क पर विक्रम देश और विदेश की राजनीति से जुड़ी खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ पर इनका विशेष फोकस रहता है. देश-विदेश के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर लिखते रहते हैं. यूएस-ईरान युद्ध के दौरान इन्होंने कई इन-डेप्थ खबरें की हैं जिन पर कई मिलियन व्यूज आए. साल 2023 में प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मास मीडिया हिंदी में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद एबीपी लाइव के साथ करियर की शुरुआत की. Email: vikramk@abpnetwork.com
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 01:44 PM
भोपाल में कचरा जमा होने के बीच स्वच्छता हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

भोपाल में कचरा जमा होने के बीच स्वच्छता हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

भोपाल में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का गुरुवार को दूसरा दिन रहा। घरों, दुकानों और बाजारों से कचरा नहीं उठा। शहर में रोजाना करीब 850 से 900 टन कचरा निकलता है। हड़ताल के कारण न्यू मार्केट, बिट्टन मार्केट, एमपी नगर, चौक बाजार और बैरागढ़ समेत कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं। कर्मचारी 25 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण और ठेका प्रथा खत्म करने सहित 18 सूत्रीय मांगें उठा रहे हैं। कोटरा में व्यापारी खुद सफाई करने उतरे और दुकानदारों से कचरा बोरियों में रखने की अपील की।समसगढ़-मित्तूखेड़ी के बीच पश्चिमी भोपाल बायपास के पास केरवा डैम की मुख्य नदी में कोपरा और मिट्टी डालकर रास्ता बनाने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता राशिद नूर खान ने सरकारी जमीन के खसरा नंबर 112 पर अतिक्रमण, नदी का प्राकृतिक बहाव रोकने और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की शिकायत की है। कलेक्टर, एसडीएम हुजूर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।विज्ञापनकेंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मध्यप्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद कांग्रेस ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विधायक हेमंत कटारे और आतिफ अकील ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी की है। कांग्रेस ने नामांकन और शपथपत्र में कथित कमियों को लेकर आपत्तियां उठाई थीं। दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त होने के बाद पुरी निर्विरोध निर्वाचित हुए।विज्ञापनधनतेरस और दीपावली को लेकर भोपाल के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इस बार ग्राहक हल्के आभूषण, सोने-चांदी के सिक्के, डिजाइनर दीये, एलईडी झालरें और सजावटी सामान खरीद रहे हैं। गिफ्टिंग में ड्राई फ्रूट्स के आकर्षक पैक भी पसंद किए जा रहे हैं। चौक बाजार, न्यू मार्केट, दस नंबर, बिट्टन मार्केट और सड़क किनारे की दुकानों पर खरीदारी के विकल्प हैं। वहीं, दाल, चावल और सूखे मेवों की कीमतों में बढ़ोतरी से त्योहार का बजट भी बढ़ा है।भोपाल में कचरे से पटी सड़कें: आठ सौ गाड़ियां खड़ी, सफाईकर्मियों की हड़ताल के बीच व्यापारी खुद उतरे मैदान मेंमध्यप्रदेश में तूफान अर्नब और मुरासु का असर कमजोर पड़ने के बाद मौसम साफ रहने का अनुमान है। पांच से आठ नवंबर तक प्रदेश में बारिश का अलर्ट नहीं है। भोपाल और इंदौर में धूप खिली रहेगी। नवंबर के दूसरे सप्ताह से रात के तापमान में करीब दो डिग्री तक गिरावट आने और ठंड बढ़ने की संभावना है।
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 01:38 PM
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को ऐसा बड़ा झटका लगा है, जिसने न सिर्फ अमेरिका की राजनीति को हिला दिया है, बल्कि पार्टी के अंदर भी भारी उथल-पुथल मचा दी है। डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों पर कब्जा कर लिया है। टेक्सास, कंसास, साउथ कैरोलिना, आयोवा, नॉर्थ कैरोलिना और ओहायो जैसे मजबूत रिपब्लिकन गढ़ों में मिली हार ने पार्टी के सामने नेतृत्व का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि ट्रंप सरकार संसद में कैसे काम करेगी, बल्कि यह भी कि उनके बाद रिपब्लिकन पार्टी की कमान किसके हाथों में जाएगी। चुनावी नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी के अंदर कई नए शक्ति केंद्र उभरते दिख रहे हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और सीनेटर टेड क्रूज के बयानों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। वेंस को काफी समय से ट्रंप का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है, जबकि क्रूज ने हार को पार्टी के लिए गंभीर चेतावनी करार दिया है। इस तरह ट्रंप के रहते हुए ही उनके बाद की राजनीति की तैयारी शुरू हो गई लगती है। वेंस के सामने अपनी राजनीतिक छवि बचाने की भी चुनौती है। उन्हें ट्रंप के सबसे मजबूत संभावित उत्तराधिकारियों में गिना जाता रहा है। उन्होंने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए सक्रिय प्रचार किया और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के फंड जुटाने की प्रमुख जिम्मेदारी भी संभाली। लेकिन पार्टी की भारी हार के बाद उनकी अपनी स्थिति भी कमजोर पड़ गई है। ट्रंप प्रशासन की अलोकप्रियता से जुड़े रहने का असर उनकी भविष्य की दावेदारी पर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ट्रंप के बाद रिपब्लिकन पार्टी के संभावित भावी नेताओं की सूची में काफी आगे माने जा रहे हैं। फ्लोरिडा के रॉन डेसेंटिस और टेक्सास के सीनेटर टेड क्रूज के नाम भी पार्टी के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चा में प्रमुखता से आ रहे हैं। इससे साफ है कि पार्टी के अंदर सिर्फ एक उत्तराधिकारी पर बात नहीं हो रही, बल्कि कई नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। ट्रंप की इस हार के बाद ‘ब्लू सुनामी’ की चर्चा काफी तेज हो गई है। टेक्सास के सीनेटर टेड क्रूज ने रिपब्लिकन पार्टी की हार को ‘ब्लू सुनामी’ और ‘वॉटरगेट स्तर की अस्वीकृति’ करार दिया है। उनका कहना है कि पार्टी इसलिए नहीं हारी क्योंकि उसके समर्थक वोट डालने नहीं गए, बल्कि इसलिए हारी क्योंकि पहले रिपब्लिकन को वोट देने वाले मतदाता अब डेमोक्रेट्स के पाले में चले गए। क्रूज ने महंगाई, भ्रष्टाचार, ईरान युद्ध और टैरिफ को मतदाताओं की नाराजगी की मुख्य वजह बताया। ट्रंप के बाद रिपब्लिकन पार्टी में नए शक्ति केंद्र उभरने के संकेत मिल रहे हैं। कुछ रणनीतिकार ट्रंप की विवादित शैली से दूरी बनाकर पारंपरिक रूढ़िवाद की ओर लौटना चाहते हैं, जबकि अन्य मानते हैं कि उनका प्रभाव आसानी से नहीं खत्म होगा। क्रिस बस्किर्क द्वारा स्थापित रॉकब्रिज नेटवर्क अमीर दानदाताओं और कार्यकर्ताओं को जोड़कर MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) आंदोलन को ट्रंप के बिना भी जिंदा रखने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप 2029 तक राष्ट्रपति रहेंगे, लेकिन 2027 से डेमोक्रेट्स कांग्रेस को नियंत्रित कर सकते हैं। वेंस, क्रूज, रुबियो और डेसेंटिस जैसे नेताओं के बीच उत्तराधिकार की लड़ाई तेज होगी, जो मैगा का भविष्य तय करेगी।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 01:36 PM
भाजपा नेता बांसुरी स्वराज ने कार्यालय दौरे के दौरान पार्टी की ताकत की सराहना की

भाजपा नेता बांसुरी स्वराज ने कार्यालय दौरे के दौरान पार्टी की ताकत की सराहना की

बृहस्पतिवार को भाजपा कार्यालय पहुंचीं बांसुरी स्वराज का पार्टी कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। जिलाध्यक्ष उदय रावत ने उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की जानकारी दी। इसके बाद कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए बांसुरी स्वराज ने कहा कि भाजपा का मजबूत संगठन और समर्पित कार्यकर्ता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी पूरी सक्रियता और समर्पण से निभानी होगी।विज्ञापनउन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं को जनता के बीच रहकर काम करना होगा।विज्ञापनबैठक में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा आगामी विधानसभा चुनाव में जिले की सभी छह सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया। टिहरी जिले के सह प्रभारी सत्येंद्र सिंह राणा ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों, बूथ सशक्तीकरण और पार्टी नेतृत्व की ओर से दिए जाने वाले कार्यक्रमों को शत-प्रतिशत पूरा करने पर जोर दिया। इस मौके पर टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, घनसाली विधायक शक्तिलाल शाह, देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी, प्रदेश मंत्री नलिन भट्ट, दायित्वधारी विनोद सुयाल, सोना सजवाण, गीता रावत, जोत सिंह बिष्ट, खेम सिंह चौहान, पूर्व मंत्री दिनेश धनाई, पूर्व विधायक डॉ. धन सिंह नेगी, विजय सिंह पंवार, ब्लॉक प्रमुख राजेश नौटियाल, मनीषा पंवार, सुमन सजवाण, राजीव कंडारी, सुरेंद्र भंडारी, विनोद बिष्ट, राजेश्वर पैन्यूली, जयेंद्र सेमवाल, बलवंत रावत आदि मौजूद रहे।
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India TV
Nov 5, 2026, 01:34 PM
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप को लगा बड़ा झटका

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप को लगा बड़ा झटका

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों ने डोनाल्ड ट्रम्प को उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका मिला है। इन चुनावों में डेमोक्रेट्स की लहर देखने को मिली है, जिसने वाशिंगटन में सत्ता के संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है। इस चुनाव को ट्रंप एक तरह का 'निजी जनमत संग्रह' बनाना चाहते थे, वह असल में उनके राष्ट्रपति कार्यकाल को पूरी तरह से खारिज किए जाने में बदल गया है और ट्रम्प के बाद क्या होगा, इसे लेकर जंग पहले ही शुरू हो चुकी है। इस हार के बाद अब ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के नेता अलग-अलग गुट बनाने में जुट गए हैं और अब ट्रम्प के बाद के अमेरिका के लिए खुद को तैयार करने में लगे हैं। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही ट्रंप के खिलाफ माहौल बन गया है। हालांकि, ट्रम्प अभी कहीं नहीं जा रहे हैं। वे जनवरी 2029 तक व्हाइट हाउस में बने रहेंगे, और संविधान के अनुसार वे तीसरा कार्यकाल नहीं ले सकते। लेकिन मध्यावधि चुनाव के नतीजे रिपब्लिकन पार्टी के भीतर उनके उस राजनीतिक प्रभाव के अंत की शुरुआत हो सकते हैं, जिस पर अब तक उन्हें घमंड था। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और सीनेटर टेड क्रूज़ जैसे नेता भी उनके खिलाफ हो गए हैं।सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो एक संभावित प्रतिद्वंद्वी बने हुए हैं, जिनकी छवि अधिक पारंपरिक है। फ्लोरिडा के रॉन डेसेंटिस और टेक्सास के सीनेटर टेड क्रूज़ जैसे अन्य नेता भी 'ट्रंप के बाद के दौर' की चर्चाओं में पहले से ही अपनी जगह बनाए हुए हैं। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, जिन्हें लंबे समय से ट्रंप के मुख्य उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था, ने एक प्रतिनिधि के तौर पर और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी (RNC) के वित्त अध्यक्ष के रूप में आक्रामक प्रचार किया था। लेकिन अब, एक अलोकप्रिय प्रशासन और पार्टी को मिली ऐतिहासिक हार से जुड़े होने के कारण, उनकी स्थिति जटिल हो गई है। इस बीच, टेड क्रूज़ ने रिपब्लिकन पार्टी की हार का कड़ा आकलन करते हुए नतीजों को "ब्लू सुनामी" और "वाटरगेट-स्तर का अस्वीकार" करार दिया। चुनाव के बाद अपने एक लंबे संबोधन में, टेक्सास के सीनेटर ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी इसलिए नहीं हारी क्योंकि उनके समर्थक घर पर ही रह गए, बल्कि इसलिए हारी क्योंकि जो मतदाता पहले पार्टी का समर्थन करते थे, वे अब डेमोक्रेट्स की ओर चले गए हैं। ये हार केवल अल्पमत में आने तक सीमित नहीं है। ये रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मौजूद दरारों और सत्ता के नए केंद्रों के उभार को उजागर करती हैं। ऐसे केंद्र जो पिछले एक दशक से ट्रंप के व्यक्तिगत दबदबे के नीचे दबे हुए थे। ट्रंप ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए खुद को इससे दूर रखने की कोशिश की। 'ट्रुथ सोशल' पर उन्होंने लिखा कि वे "चुनाव मैदान में नहीं थे, और अगर होते, तो हम भारी बहुमत से जीतते।" यह उनके उस पहले के आग्रह के बिल्कुल उलट है, जिसमें उन्होंने मतदाताओं से कहा था कि वे मध्यावधि चुनावों को उनके लिए एक तरह का 'प्रॉक्सी' (प्रतिनिधि) मुकाबला मानें। दोनों सदनों में बहुमत मिलने से, डेमोक्रेट्स के पास अब समन जारी करने की शक्ति और समितियों पर नियंत्रण आ गया है। वे ट्रम्प द्वारा नामित लोगों (जिसमें सुप्रीम कोर्ट के खाली पद और कैबिनेट नियुक्तियां शामिल हैं) को रोकने या उनकी प्रक्रिया को धीमा करने की स्थिति में आ गए हैं। प्रशासन की नीतियों, ईरान युद्ध और पारिवारिक व्यावसायिक सौदों की जांच होने की उम्मीद है। ट्रंप के भविष्य में हटने के बाद, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती शायद किसी विरोधी राष्ट्रपति उम्मीदवार से नहीं, बल्कि उनके आंदोलन के इर्द-गिर्द खड़े किए जा रहे राजनीतिक ढांचे से आएगी। मिडटर्म चुनाव 2028 के राष्ट्रपति पद के मुकाबले को तेज़ कर देते हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प इतनी आसानी से और चुपचाप गायब नहीं होने वाले हैं। उनके पास अभी भी अपनी बात रखने का एक बड़ा मंच है, कार्यकारी कदम उठाने की क्षमता है, और ऐसे निजी समर्थक हैं जिन्होंने बार-बार पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दी है। 2026 की 'ब्लू वेव' (डेमोक्रेट्स की लहर) ने उस दौर को खत्म कर दिया है, जिसमें ट्रम्प का राष्ट्रपति कार्यकाल बिना किसी ठोस संसदीय विरोध के चला, और जिसमें रिपब्लिकन पार्टी पूरी तरह से एक व्यक्ति की इच्छा के अनुसार काम करती थी। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के बचे हुए समय में डोनाल्ड ट्रम्प भले ही व्हाइट हाउस में बने रहें, लेकिन वे धीरे-धीरे एक 'लेम-डक' (कमज़ोर और प्रभावहीन) राष्ट्रपति बनकर रह जाएंगे।
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Nov 5, 2026, 01:32 PM
ईरानी संसद के अध्यक्ष ने मध्यावधि चुनाव में हार को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति की आलोचना की

ईरानी संसद के अध्यक्ष ने मध्यावधि चुनाव में हार को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति की आलोचना की

ईरानी संसद के अध्यक्ष एमबी गालिबाफ ने गुरुवार (5 नवंबर, 2026) को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर निशाना साधा है. दरअसल, जेडी वेंस ने अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान के साथ युद्ध को जिम्मेदार ठहराया था. इसके बाद ईरानी नेता ने अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर युद्ध के नतीजों को स्वीकार करने से बचने का आरोप लगाया. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की तरफ से चुनावी हार को लेकर X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर किया गया था, जिस पर पलटवार करते हुए ईरानी संसद के स्पीकर एमबी गालिबाफ ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘हारने वाले जुआरी की सोच ऐसी होती है कि वह दांव छोड़ नहीं पाता है.’ गालिबाफ ने कहा, ‘बॉस युद्ध के अगले चरण की तैयारी कर रहा है, जबकि अमेरिका इजरायल फर्स्ट की नीति की वजह से खतरनाक मोड़ पर खड़ा है. टेड टॉक्स छोड़िए. आप यह बात अपने बॉस से क्यों नहीं करते?’ Losing gambler energy, can't walk away from the table. Boss is prepping the next war phase while America teeters on an Israel-First cliff. Skip the TED talk. Why not say this to your boss? उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर उनके प्रशासन की रणनीति पर तंज माना जा रहा है. इजरायल फर्स्ट का जिक्र करते हुए गालिबाफ का संकेत था कि तेहरान को लेकर वाशिंगटन की नीति अमेरिकी हितों की कीमत पर इजरायल के हितों को प्राथमिकता दे रही है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनावों के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के बाद आई थी. डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया. यह नतीजा ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. इसके अलावा, डेमोक्रेटिक कैंडिडेट्स ने कई ऐसे राज्यों में भी जीत दर्ज की, जहां पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा है. विजय कुमार बिट्ठल ABP न्यूज में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर भूमिका निभा रहे हैं. पिछले 2 सालों से ABP न्यूज में कार्यरत हैं और नेशनल-इंटरनेशनल न्यूज टीम का हिस्सा हैं. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, चुनाव और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरें विशेष रूप से लिखते रहे हैं. ब्रेकिंग न्यूज पर फोकस रखते हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश करते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 5 सालों का अनुभव है. एबीपी न्यूज से पहले प्रिंट मीडिया में दैनिक जागरण में बतौर सब-एडिटर कार्यरत रहे. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में बैचेलर्स डिग्री हासिल की है. संपर्क करें- Mail ID: vijaybitthal99@gmail.com | LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/vijay-kumar-bitthal-47ab7a1a3/ | X: https://x.com/Vijaybitthal99
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Aaj Tak
Nov 5, 2026, 01:28 PM
ए. एम. यू. एस. यू. चुनावः मतदान से पहले नोमान अशरफ के भाषण ने छात्रों को प्रभावित किया

ए. एम. यू. एस. यू. चुनावः मतदान से पहले नोमान अशरफ के भाषण ने छात्रों को प्रभावित किया

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का ऐतिहासिक यूनियन हॉल इन दिनों फिर से छात्र राजनीति के नारों, तालियों और बहसों से गूंज उठा है. 8 साल के लंबे अरसे बाद आयोजित हो रहे छात्र संघ चुनाव (AMUSU Election 2026-27) में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मोहम्मद नोमान अशरफ रातों रात सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाले चेहरे बन गए हैं. चुनाव की परंपरा के मुताबिक आयोजित 'प्रेसिडेंशियल स्पीच' या ड‍िबेट के दौरान नोमान अशरफ ने जिस बेबाकी, आक्रामकता और अंदाज के साथ अपनी बात रखी, उसने कैंपस के छात्रों को काफी प्रभावित किया है. अब जब वोटिंग का समय करीब है, तो हर किसी की निगाहें चुनाव नतीजों और नोमान अशरफ के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं. एएमयू की आधिकारिक प्रत्याशी सूची से म‍िली जानकारी के अनुसार मोहम्मद नोमान अशरफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में पीएच.डी. के तीसरे वर्ष के शोध छात्र हैं. वो AMUSU चुनाव 2026-27 में अध्यक्ष (प्रेसीडेंट) पद के लिए चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. कैंपस राजनीति में नोमान को एक प्रखर वक्ता और छात्रों के अधिकारों के लिए मुखर होकर बोलने वाले शोधार्थी के रूप में देखा जाता है. यूनियन हॉल से दिए गए अपने अंतिम भाषण यानी प्रेस‍िडेंश‍ियल स्पीच में नोमान अशरफ ने कैंपस के बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी. आइए जानते हैं कि उनके भाषण के क‍िन हिस्सों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. A post shared by Mohd Jamal Ashraf (@jamalashraf23) अपने भाषण में उन्होंने जेल में बंद शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे पूर्व छात्रों के विधिक अधिकारों का मुद्दा उठाया और कहा कि बिना अदालती फैसले के किसी को 'आतंकवादी' करार नहीं दिया जा सकता. नोमान ने गाजा, फिलीस्तीन, सूडान और ईरान के नागरिकों के प्रति सहानुभूति जताई, जिसके बाद उनका भाषण सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया. A post shared by Mohd Jamal Ashraf (@jamalashraf23) नोमान अशरफ ने केवल जुबानी भाषण ही नहीं दिया, बल्कि 21 पन्नों का एक मैनिफेस्टो भी जारी किया. इसमें उन्होंने नॉन-नेट शोधार्थियों के स्टाइपेंड को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹15,000 करने, महिला सुरक्षा के लिए विमेंस सेल बनाने और एएमयू के ऑफ-कैंपस सेंटर्स (किशनगंज, मुर्शिदाबाद, मल्लापुरम) के छात्रों को प्रतिनिधित्व देने जैसे ठोस वादे किए हैं. 8 साल बाद हो रहे इस चुनाव में नोमान अशरफ का यह अंदाज कुछ छात्रों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है, तो वहीं विरोधी उम्मीदवार इसे 'राजनीतिक ध्रुवीकरण' की कोशिश बता रहे हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या नोमान अशरफ की यह 'प्रेसिडेंशियल स्पीच' और उनका 21 पन्नों का मैनिफेस्टो उन्हें एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद की कुर्सी तक पहुंचा पाता है या नहीं.
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Nov 5, 2026, 01:27 PM
आगरा ग्रामीण सीटः उत्तर प्रदेश के 2027 के विधानसभा चुनावों में एक महत्वपूर्ण लड़ाई का मैदान

आगरा ग्रामीण सीटः उत्तर प्रदेश के 2027 के विधानसभा चुनावों में एक महत्वपूर्ण लड़ाई का मैदान

आगरा जिले की आगरा ग्रामीण सीट यूपी की हॉट सीटों में शुमार है। आगरा ग्रामीण सीट, फतेहपुर सीकरी लोकसभा का हिस्सा है और 2008 में परिसीमन के बाद वजूद में आई। आगरा ग्रामीण सीट की विधानसभा क्षेत्र संख्या 90 है और यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। आगरा ग्रामीण सीट पर पहली जीत BSP को मिली थी और उसके बाद से लगातार दो बार से BJP को बंपर जीत मिल रही है। आगरा ग्रामीण सीट से विधायक बेबी रानी मौर्य यूपी में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग है। 2027 के चुनाव में आगरा ग्रामीण सीट पर बीजेपी के सामने जीत की हैट्रिक लगाने का मौका है, जबकि सपा यहां अभी तक पहली जीत की तलाश में है। जानिए आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट का सियासी इतिहास क्या है और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में आगरा ग्रामीण सीट पर क्या राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। 2008 में परिसीमन के बाद आगरा ग्रामीण सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 2012 में हुआ था। इस चुनाव में बीएसपी के काली चरण सुमन के सामने चुनौती देने के लिए थीं सपा की हेमलता दिवाकर, कांग्रेस के उपेंद्र सिंह और बीजेपी के ओमप्रकाश चलनीवाले खटीक। काली चरण सुमन ने यह चुनाव 18,846 वोटों के अंतर से जीत लिया था। बीएसपी के काली चरण सुमन को 69,969 वोट मिले थे, जबकि सपा की हेमलता दिवाकर 51,123 वोट हासिल कर पाई थीं। आगरा ग्रामीण सीट पर हुए 3 आम विधानसभा चुनावों में यह सबसे कम अंतर की जीत थी। इस चुनाव में कांग्रेस और RLD का गठबंधन था। कांग्रेस के उपेंद्र सिंह 38,832 वोट पाकर तीसरे नंबर रहे थे। वहीं, बीजेपी के ओमप्रकाश चलनीवाले खटीक 22,750 वोट ही पा सके थे और बीजेपी को चौथे स्थान के साथ संतोष करना पड़ा था। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले सपा नेता और पिछले चुनाव की रनरअप हेमलता दिवाकर बीजेपी में शामिल हो गईं। बीजेपी ने उन्हें चुनाव में आगरा ग्रामीण सीट से प्रत्याशी भी बना दिया। हेमलता दिवाकर ने 2012 के चुनाव में 1,29,887 वोट पाकर बीएसपी के काली चरण सुमन को 65,296 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया था। काली चरण सुमन की पारी 64,591 वोटों पर सिमट गई थी। कांग्रेस के उपेंद्र सिंह इस बार भी तीसरे नंबर पर रहे थे और 31,312 वोट ही जुटा सके थे। इस चुनाव में कांग्रेस और सपा का गठबंधन था। इसके बावजूद, उपेंद्र सिंह रनरअप भी नहीं बन पाए थे। RLD ने इस बार अलग चुनाव लड़ा था और उसके कैंडिडेट नारायण सिंह सुमन को 17,446 वोट मिले थे। 2022 में बीजेपी ने नया दांव चला और हेमलता दिवाकर का टिकट काटकर उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेब रानी मौर्य को उम्मीदवार बना दिया। प्रत्याशी बदलने की बीजेपी की चाल कामयाब रही और वह पहले से भी बड़े अंतर से चुनाव जीती। बेबी रानी मौर्य ने 1,37,310 वोट हासिल किए, जबकि बीएसपी प्रत्याशी किरण प्रभा केसरी 60,702 वोटों पर ही सिमट गईं। बेबी रानी मौर्य ने यह चुनाव 76,608 वोटों के अंतर से जीत लिया था। इस चुनाव में RLD और सपा का गठंबधन था। सपा ने यह सीट RLD के लिए छोड़ दी थी। लेकिन यह दांव काम नहीं किया और गठबंधन की तरफ से उतरे RLD के उम्मीदवार महेश कुमार 52,731 वोट ही पा सके। वह तीसरे स्थान पर रहे थे। आगरा ग्रामीण सीट के सामाजिक समीकरण की बात करें तो यहां SC वर्ग के मतदाताओं का प्रभुत्व है। इसमें भी जाटव समाज के लोग ज्यादा डॉमिनेंट हैं। इसके अलावा, आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में जाट और लोधी वोटर भी निर्णायक संख्या में हैं। साथ ही, ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य और मुस्लिम मतदाताओं की गोलबंदी करना भी यहां प्रत्याशियों व पार्टियों के लिए अहम होता है। 2027 के विधानसभा चुनाव में एक पाले में बीजेपी और RLD एक साथ हो सकते हैं और दूसरे पाले में सपा और कांग्रेस साथ में दिख सकते हैं। इसके अलावा, तीसरे प्लेयर के रूप में BSP का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि BSP पिछले दो चुनावों में रनरअप और 2012 के चुनाव में विजेता रही थी। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में आगरा ग्रामीण सीट पर उम्मीदवारों का चयन, जातीय गोलबंदी और गठबंधन की राजनीति नतीजे पर असर डाल सकती है।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 01:26 PM
आसियन शिखर सम्मेलनः चीन के प्रधानमंत्री ली चांग को भेजने की उम्मीद, राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नहीं

आसियन शिखर सम्मेलनः चीन के प्रधानमंत्री ली चांग को भेजने की उम्मीद, राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नहीं

फिलीपींस इस साल 49वें आसियान शिखर सम्मेलन और उससे जुड़ी बैठकों की मेजबानी कर रहा है। फिलीपींस के विदेश मंत्रालय के सहायक सचिव और आसियान मामलों के प्रवक्ता डैक्स इम्पीरियल ने कहा कि चीन की ओर से आमतौर पर राष्ट्रपति नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री आसियान सम्मेलनों में शामिल होते हैं। उनके मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों से ली च्यांग ही चीन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि फिलीपींस को अभी तक ली च्यांग के दौरे की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। यह पुष्टि सम्मेलन के करीब आने पर मिलने की उम्मीद है।विज्ञापनफिलीपींस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन की यह सामान्य प्रक्रिया रही है कि आसियान से जुड़ी बैठकों में प्रधानमंत्री ली च्यांग प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हैं। इसलिए इस बार भी उनके शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल नहीं होने को लेकर चीन की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने भी अभी केवल चीन के प्रतिनिधित्व की परंपरा का जिक्र किया है। ऐसे में ली च्यांग की मौजूदगी को फिलहाल संभावित माना जा रहा है। सम्मेलन में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते, वियतनाम और मेजबान फिलीपींस के नेता शामिल होंगे।विज्ञापनफिलीपींस की विदेश मंत्री मारिया टेरेसा लाजारो ने मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों ने आगामी बैठकों और अपने नेताओं की भागीदारी पर चर्चा की। फिलीपींस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, लाजारो ने बताया कि राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर मनीला में होने वाले 49वें आसियान शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ली च्यांग की भागीदारी की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, वांग यी ने चीन में होने वाली 33वीं एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) नेताओं की बैठक में मार्कोस की भागीदारी को लेकर चीन की उत्सुकता जताई। यह बैठक 18 और 19 नवंबर को चीन के शेनझेन शहर में होनी है। दोनों देशों ने यह भी भरोसा दिया कि बैठकों के दौरान एक-दूसरे के नेताओं को उचित सम्मान और जरूरी सहायता दी जाएगी।आसियान सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के भी शामिल होने की उम्मीद है। फिलीपींस के राष्ट्रपति कार्यालय ने 14 अक्टूबर को ट्रंप की भागीदारी की पुष्टि की थी। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप 16 नवंबर को फिलीपींस जाएंगे। इसके बाद वह एपेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के शेनझेन पहुंचेंगे। उनकी इस यात्रा को दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिकी सहयोगियों के प्रति वाशिंगटन की प्रतिबद्धता दिखाने और आर्थिक तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।ट्रंप के चीन दौरे के दौरान उनकी शी जिनपिंग से मुलाकात भी प्रस्तावित है। यह दोनों नेताओं के बीच एक और अहम बातचीत होगी। इससे पहले शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर गए थे। उस यात्रा के बाद चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि दोनों नेताओं ने आपसी सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिक लाभ के आधार पर रचनात्मक संबंध बनाने पर सहमति जताई थी। वांग के मुताबिक, बातचीत में दोनों देशों के बीच रणनीतिक मुद्दों और व्यापक वैश्विक हालात पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा था कि आपसी सम्मान का मतलब एक-दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और विकास के रास्ते को स्वीकार करना है। निष्पक्षता का अर्थ ऐसा सहयोग है, जिसमें किसी एक पक्ष का फायदा दूसरे के नुकसान पर आधारित न हो। वहीं, पारस्परिकता का मतलब दोनों देशों को संप्रभुता के लिहाज से बराबर मानना है।49वें आसियान सम्मेलन में दक्षिण-पूर्व एशिया के 11 देशों के नेता हिस्सा लेंगे। इसके अलावा आसियान प्लस थ्री और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन से जुड़े देशों के नेताओं के भी शामिल होने की उम्मीद है। आसियान प्लस थ्री में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। वहीं, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और रूस जैसे आठ संवाद साझेदार देश भी शामिल होते हैं। फिलीपींस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कुछ देशों की भागीदारी को लेकर औपचारिक सूचनाओं का इंतजार है। ऐसे में सम्मेलन में अलग-अलग देशों के नेताओं की मौजूदगी और उनके बीच होने वाली बातचीत पर क्षेत्रीय सहयोग के साथ वैश्विक कूटनीति की भी नजर रहेगी।
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Aaj Tak
Nov 5, 2026, 01:22 PM
शरद पवार को सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया

शरद पवार को सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार को सीने में संक्रमण के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 85 वर्षीय वरिष्ठ नेता की हालत फिलहाल स्थिर है और उनका इलाज जारी है. अस्पताल के एक डॉक्टर ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. शरद पवार को बुधवार को पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक से छुट्टी मिलने के कुछ घंटों बाद ही आगे की जांच के लिए मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल के एक डॉक्टर ने पत्रकारों को बताया, ' शरद पवार को बुधवार को सांस और सीने में संक्रमण के कारण भर्ती कराया गया था. उनकी हालत स्थिर है और उनका इलाज जारी है.' डॉक्टर के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारी से पीड़ित हैं. इससे पहले शरद पवार को 2 नवंबर को पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया था. बुधवार को उन्हें वहां से छुट्टी दे दी गई थी. रूबी हॉल क्लिनिक के मुख्य हृदय रोग विशेषज्ञ, चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. पुरवेज ग्रांट ने बताया था कि शरद पवार को प्ल्यूरिटिक पेन (Pleuritic Pain) की शिकायत के बाद सामान्य स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय निगरानी के लिए भर्ती कराया गया था. बता दें कि एक दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन करके शरद पवार का हालचाल जाना था. शरद पवार के बेहद करीबी और पारिवारिक मित्र विट्ठल मनियार ने पीएम मोदी के इस फोन कॉल की पुष्टि की थी. उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार को फोन कर उनका हाल-चाल पूछा और उन्हें अपनी सेहत को तरजीह देते हुए पूरा आराम करने की सलाह दी. विट्ठल मनियार के मुताबिक, पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान शरद पवार से कहा, 'सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे. आप अपनी सेहत का ध्यान रखें और आराम करें. आपका आशीर्वाद हमारे साथ बना रहे.'
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Nov 5, 2026, 01:19 PM
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा हैः मिसाइल अवरोधन, भीषण लड़ाई और नौसेना की घटना

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा हैः मिसाइल अवरोधन, भीषण लड़ाई और नौसेना की घटना

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सऊदी अरब, यमन और ईरान से जुड़ी कई अहम घटनाएं सामने आई हैं. सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस ने मदीना की ओर दागी गई हूतियों की बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया. वहीं, यमन में सरकारी बलों और हूतियों के बीच भीषण लड़ाई की खबर है. दूसरी ओर, ईरान की नौसेना ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक तेल टैंकर नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गया. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि गठबंधन की एयर डिफेंस ने हूतियों की ओर से मदीना क्षेत्र की तरफ दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया. इससे पहले सऊदी अरब की सिविल डिफेंस ने लाल सागर के पास मदीना प्रांत के यानबू गवर्नरेट के लिए कुछ समय के लिए चेतावनी जारी की थी. यमन के लाहिज गवर्नरेट में अल-मकतरा मोर्चे पर सरकारी बलों और हूतियों के बीच भीषण लड़ाई शुरू होने की खबर है. सरकारी बलों ने दावा किया है कि उन्होंने इस संघर्ष में हूतियों के सैन्य वाहनों और लड़ाकों को निष्क्रिय कर दिया है. यमन के ताइज में भी हालात बिगड़ने की खबर है. यहां गोलाबारी और हूतियों की घेराबंदी के चलते मानवीय संकट गहराता जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में महिलाओं और बच्चों समेत कई आम नागरिकों की मौत हुई है. यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बलों ने ताइज के अल-अकुरुद मोर्चे पर हूतियों के बड़े हमले को नाकाम करने का दावा किया है. सरकारी बलों के मुताबिक, लड़ाई हमाह, अल-कुरैफ, रास अल-नकील और अल-कहफा समेत कई इलाकों तक फैल गई. उन्होंने दावा किया कि इसमें हूती लड़ाके मारे गए या घायल हुए. साथ ही काहलान और साब्र मोर्चों पर आगे बढ़ने की बात भी कही गई है. हूतियों की ओर से इन दावों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. ईरान की नौसेना ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक तेल टैंकर नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गया. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, नौसेना ने कहा कि टैंकर होर्मुज के पूर्व में एक असुरक्षित इलाके से गुजर रहा था. ईरानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि जहाज ने अपने डिटेक्शन और नेविगेशन सिस्टम बंद कर रखे थे. ईरान ने जहाज मालिकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज असुरक्षित है और बिना समन्वय के गुजरने की कोशिश करने वाले गैरकानूनी जहाजों के लिए बंद है.
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Aaj Tak
Nov 5, 2026, 01:14 PM
कल्याण सिंह परिवार की दोहरी खुशीः दो शादियां, एक दिन

कल्याण सिंह परिवार की दोहरी खुशीः दो शादियां, एक दिन

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कल्याण सिंह परिवार का अपना एक नाम है. अब इसी परिवार में शादी की तैयारियां चल रही हैं. पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पोते और योगी सरकार में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह जल्द ही मेघना चौधरी के साथ नए रिश्ते की शुरुआत करने जा रहे हैं. आखिर कौन हैं मेघना, उनका परिवार कहां रहता है और संदीप सिंह से उनकी मुलाकात कैसे हुई थी? जानिये पूरी कहानी. इस कहानी में अलीगढ़ , गाजियाबाद और दिल्ली तीनों शहरों का कनेक्शन है. मेघना का परिवार मूल रूप से अलीगढ़ के एक गांव से जुड़ा है, फिलहाल गाजियाबाद में रहता है और संदीप सिंह से उनकी पहली मुलाकात दिल्ली के एक स्कूल में हुई थी. दोनों की सगाई 14 नवंबर को अलीगढ़ में होगी. इसी दिन संदीप सिंह के छोटे भाई सौरभ सिंह की सगाई भी अंतरा त्यागी से होगी. यानी एक ही दिन परिवार में दोहरी खुशियां मनाई जाएंगी. मेघना चौधरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के गोंडा ब्लॉक के रुदायन उर्फ तारापुर गांव की रहने वाली हैं. हालांकि, उनका परिवार लंबे समय से गाजियाबाद में रह रहा है. परिवार का गांव से भी रिश्ता बना हुआ है. मेघना के दादा राधेश्याम चौधरी अपनी पत्नी सावित्री देवी के साथ तारापुर गांव में रहते हैं. राधेश्याम चौधरी भारतीय नौसेना से रिटायर हुए हैं. वहीं, मेघना के पिता अरुण चौधरी ठेकेदारी के कारोबार से जुड़े हैं. परिवार के दूसरे सदस्य भी गाजियाबाद में रहते हैं. मेघना के एक छोटे भाई करन चौधरी हैं. इस तरह मेघना के परिवार की जड़ें अलीगढ़ में हैं, जबकि परिवार का मौजूदा ठिकाना गाजियाबाद है. मेघना की सगाई की खबर से गांव में भी खुशी का माहौल है. परिवार के सदस्य और गांव के कुछ लोग 14 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं. संदीप सिंह और मेघना चौधरी की कहानी की शुरुआत किसी राजनीतिक कार्यक्रम या पारिवारिक मुलाकात से नहीं, बल्कि स्कूल से हुई थी. दोनों दिल्ली पब्लिक स्कूल यानी डीपीएस में पढ़ते थे. इसी दौरान उनकी पहली मुलाकात हुई. संदीप सिंह, मेघना से सीनियर थे. साल 2012 में संदीप सिंह ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्कूल छोड़ दिया. दूसरी तरफ मेघना ने आगे की पढ़ाई जारी रखी. बाद में वह कानून की पढ़ाई करने के लिए विदेश चली गईं. दोनों की पढ़ाई और आगे की जिंदगी के रास्ते अलग-अलग रहे, लेकिन स्कूल के दिनों की पहचान बनी रही. धीरे-धीरे यह जान-पहचान शादी के रिश्ते तक पहुंच गई. साल 2024 में दोनों परिवारों के बीच शादी को लेकर बातचीत शुरू हुई थी. संदीप सिंह के परिवार के लोग मेघना के परिवार से मिलने गाजियाबाद भी पहुंचे थे. हालांकि, शुरुआती दौर में कुछ पारिवारिक मतभेदों की वजह से बात आगे नहीं बढ़ पाई. बाद में दोनों परिवारों के बीच सहमति बनी और रिश्ता तय हो गया. अब 14 नवंबर को होने वाली सगाई के साथ स्कूल के दिनों से शुरू हुई पहचान एक नए रिश्ते में बदलने जा रही है. संदीप सिंह और मेघना चौधरी की सगाई 14 नवंबर को अलीगढ़ में होगी. इसी कार्यक्रम में संदीप सिंह के छोटे भाई सौरभ सिंह वर्मा की सगाई भी होगी. सौरभ का रिश्ता अंतरा त्यागी के साथ तय हुआ है. दोनों भाइयों की सगाई एक ही दिन और एक ही मंच पर होगी. परिवार की ओर से मेहमानों को इनविटेशन भेजे जा रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी परिवार की तरफ से निमंत्रण दिया गया है. सगाई के बाद संदीप सिंह और मेघना चौधरी की शादी 27 नवंबर को दिल्ली में होनी है. संदीप सिंह के छोटे भाई सौरभ की शादी भी इसी दिन होगी. संदीप सिंह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र हैं. वह अलीगढ़ की अतरौली विधानसभा सीट से विधायक हैं और योगी सरकार में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उनके पिता राजवीर सिंह भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं और एटा से सांसद रह चुके हैं. दिल्ली के स्कूल में शुरू हुई दोस्ती अब सगाई तक पहुंच गई है. 14 नवंबर को अलीगढ़ में दोनों की सगाई होगी और 27 नवंबर को दिल्ली में दोनों शादी के बंधन में बंधेंगे.
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 01:10 PM
राज्य के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक सभा में रोजगार, विरोध समाचार पर सरकार से सवाल किए

राज्य के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक सभा में रोजगार, विरोध समाचार पर सरकार से सवाल किए

प्रदेश अध्यक्ष ने युवाओं को संबोधित करते हुए रोजगार के मुद्दे पर सरकार से सवाल किए। उन्होंने 24 साल में नौकरी देने के दावों पर भी निशाना साधा। इसके साथ ही धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा को लेकर विरोध जताया। जनसभा में भी कथा के विरोध का मुद्दा उठाया गया। श्यामलाल पाल ने समय से पंचायत चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर भी प्रदेश सरकार पर निशाना साधा और कार्यकर्ताओं से मिशन 2027 की सफलता के लिए एकजुट होकर जुटने का आह्वान किया।
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India TV
Nov 5, 2026, 01:06 PM
मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए निर्विरोध चुने गए मनदीप सिंह पुरी

मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए निर्विरोध चुने गए मनदीप सिंह पुरी

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। उनके अलावा 2 अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्र मंगलवार को खारिज हो गए थे, जिसके बाद जिसके बाद हरदीप पुरी मैदान में अकेले बचे थे। उनका चुना जाना लगभग पहले से ही तय हो गया था। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पार्टी के कई नेता मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे थे। पुरी के नाम की घोषणा के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनका सर्टिफिकेट लिया है। नाम वापसी की गुरुवार (05 नवंबर) को आखिरी तारीख थी। ऐसे में रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के अंतिम दिन निर्दलीय उम्मीदवार कांते सयन्ना और कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी के नामांकन पत्र खारिज हो गए थे। हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार 31 अक्तूबर को अपना नामांकन दाखिल किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई नेता मौजूद रहे थे। इस बीच, दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों और कांग्रेस नेता हेमंत कटारे ने पुरी के नामांकन पत्रों पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि उनके द्वारा दाखिल किया गया फॉर्म-26 में दिया गया हलफनामा अमान्य और अधूरा है। निर्वाचन अधिकारी उमेश शर्मा ने आपत्तियों की जांच की और कहा कि पुरी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है। शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि पुरी के नामांकन पत्रों में कोई खामी नहीं पाई गई। कटारे और कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा था कि वे इस आदेश के खिलाफ कोर्ट का रुख करेंगे। उन्होंने एक बयान में कहा, ''यह भारतीय लोकतंत्र पर हमला है। इतनी महत्वपूर्ण खामियों के बावजूद नामांकन पत्र खारिज नहीं किया गया।'' राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मौजूदा वक्त में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। उनका कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण राज्यसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार की जीत की राह आसान मानी जा रही थी। बता दें कि राजनीति में आने से पहले हरदीप पुरी का करीब 39 साल का राजनयिक करियर रहा है। वह विदेश सेवा में कार्यरत थे। वे भारतीय विदेश सेवा के 1974 बैच के अधिकारी थे। वे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में भी काम कर चुके हैं। फरवरी 2013 में 39 साल की सेवा के बाद विदेश सेवा से रिटायर हुए थे। हरदीप सिंह पुरी ने 2 जनवरी 2014 को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उन्हें मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया। रामलीला मैदान की रैली में शामिल नहीं हुए तो गिरी गाज, यूथ कांग्रेस के 200 से अधिक पदाधिकारी निलंबित 'बहस के लिए संसद आएं', SIR पर डिबेट की चुनौती का अमित शाह ने राहुल गांधी को दिया जवाब
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