Achira News Logo
Achira News
D
Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 02:22 PM
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानहानिकारक ऑनलाइन पोस्ट को लेकर आप नेताओं के खिलाफ अवमानना का मामला जारी रखा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानहानिकारक ऑनलाइन पोस्ट को लेकर आप नेताओं के खिलाफ अवमानना का मामला जारी रखा

अवमामना मामले में सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया गया कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ अदालत की अवमानना करने वाले इंटरनेट मीडिया पोस्ट अभी तक डिलीट नहीं किए हैं। याचिकाकर्ता अशोक चैतन्य ने यह जानकारी न्यायमूर्ति नवीन चावला व न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की पीठ को दी। इस पर अदालत ने चैतन्य को हलफनामा दाखिल करने और संबंधित सामग्री को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया। साथ ही पीठ ने केजरीवाल सहित अन्य को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। मामले पर अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। अदालत इंटरनेट मीडिया पर न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ अवमाननापूर्ण सामग्री पोस्ट करने वाले लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। यह स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना की कार्यवाही तब शुरू की गई थी जब जस्टिस शर्मा ने आबकारी घोटाला मामले में खुद को मामले से अलग करने की कार्यवाही के संबंध में प्रतिवादियों द्वारा शेयर की गई विभिन्न इंटरनेट मीडिया पोस्ट और वीडियो पर ध्यान दिया था। केजरीवाल सहित अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए उन्होंने आबकारी घोटाला मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। चैतन्य ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि आबकारी घोटाला मामले की सुनवाई के दाैरान न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ एक सुनियोजित और संगठित अभियान शुरू गंभीर, निराधार और अपमानजनक आरोप लगाने वाली सामग्री प्रसारित की गई थी। केजरीवाल-सिसोदिया समेत AAP नेताओं को दिल्ली HC का नोटिस, जस्टिस स्वर्णकांता के खिलाफ चले कैंपेन पर मांगा जवाब
32 shares
😢
Dainik Jagran logo
Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 02:17 PM
हरियाणा भाजपा ने'सेवा संकल्प अभियान'के तहत मोटरसाइकिल यात्रा की तैयारी तेज की

हरियाणा भाजपा ने'सेवा संकल्प अभियान'के तहत मोटरसाइकिल यात्रा की तैयारी तेज की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर तक निकल रही मोटरसाइकिल यात्रा को लेकर हरियाणा भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने प्रदेश में यात्रा के लिए दो प्रमुख रूट तय किए हैं। महेंद्रगढ़, अटेली और रेवाड़ी से होते हुए यात्रा गुरुग्राम की ओर बढ़ेगी, जबकि दूसरे रूट में बावल, सोहना और पलवल को जोड़ा गया है। हरियाणा में यात्रा का राजनीतिक महत्व इस लिहाज से भी देखा जा रहा है कि भाजपा इसे महज मोटरसाइकिल रैली के बजाय सेवा गतिविधियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों से सीधे संवाद के अभियान के रूप में पेश कर रही है। पार्टी की तैयारी है कि रास्ते में होने वाले स्वागत कार्यक्रमों में किसानों, युवाओं, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इन कार्यक्रमों में स्वच्छता, पौधरोपण, जल संरक्षण, नशामुक्ति और टीबी मुक्त भारत जैसे अभियानों की जानकारी भी साझा की जाएगी। यात्रा के हरियाणा चरण की तैयारियों की समीक्षा पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जयप्रकाश ने की। हरियाणा में निर्धारित पहले रूट के तहत यात्रा महेंद्रगढ़ से अटेली होते हुए रेवाड़ी पहुंचेगी। रेवाड़ी में रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है। इसके बाद जत्था जमालपुर रिंग रोड के रास्ते आगे बढ़ते हुए गुरुग्राम पहुंचेगा। दूसरे रूट में बावल, सोहना और पलवल को शामिल किया गया है, जहां पलवल में पड़ाव और रात्रि विश्राम की विशेष व्यवस्था रहेगी। महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम और पलवल में भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। इनमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता, कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहभागिता प्रस्तावित है। इसका राष्ट्रीय समापन सात अक्टूबर को किया जाएगा। अभियान में भाजपा युवा मोर्चा की भूमिका भी अहम रखी गई है। युवा मोर्चा के नेता कर्ण प्रताप सिंह को यात्रा के राजस्थान चरण की जिम्मेदारी दी गई है।
40 shares
😐
A
ABP News
Sep 21, 2026, 01:39 PM
शी जिनपिंग की अमेरिका यात्राः हवाई अड्डे पर चीनी राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे ट्रम्प

शी जिनपिंग की अमेरिका यात्राः हवाई अड्डे पर चीनी राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे ट्रम्प

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर के दौरान यूएस दौरे पर होंगे. करीब 11 साल बाद उनका पहला US दौरा है. 24 सितंबर को उनकी व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से शिखर वार्ता होगी. इस दौरान ट्रंप वो करने वाले हैं, जो पहले कम ही हुआ है. ट्रंप उन्हें जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर खुद रिसीव करने वाले हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए असामान्य कदम माना जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति का एयरपोर्ट पर खुद जाकर विदेशी नेता का स्वागत करना बहुत रेयर रहा है. सामान्य प्रोटोकॉल यह है कि जॉइंट बेस एंड्रयूज पर प्रोटोकॉल अधिकारी या वाइस प्रेसिडेंट रिसीव करते हैं. राष्ट्रपति व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर औपचारिक सेरेमनी में उनका स्वागत करते हैं. हालांकि, पोप इसका अपवाद रहे हैं. आखिरी अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी माने जाते हैं, जो किसी विदेशी राष्ट्रध्यक्ष को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे. केनेडी ने 1961 और1962 के आसपास कई विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों का जॉइंट बेस एंड्रयूज पर खुद स्वागत किया था. जिसमें ब्राजील के जोआओ गौलार्ट, सूडान के इब्राहिम अब्बूद, पाकिस्तान के अयूब खान और भारत के जवाहरलाल नेहरू शामिल थे. उसके बाद प्रोटोकॉल बदल गया. केनेडी के कार्यकाल के बाद एयरपोर्ट के बजाय व्हाइट हाउस के साउथ लॉन को मुख्य स्वागत स्थल बना दिया गया. इससे पहले 2008 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश पोप बेनेडिक्ट सोलहवें को एंड्रयूज पर रिसीव करने गए थे. 2015 में बराक ओबामा पोप फ्रांसिस का वहीं स्वागत करने गए. इससे पहले भी पोप जॉन पॉल द्वितीय के दौरे पर कुछ राष्ट्रपति एयरपोर्ट गए थे. ये धार्मिक और प्रतीकात्मक सम्मान के रूप में माने जाते हैं. पुराने दौर में कुछ उदाहरण हैं. 1959 में ड्वाइट आइजनहावर सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव को एंड्रयूज पर रिसीव करने गए थे. जॉन एफ. केनेडी के शुरुआती कार्यकाल में कुछ स्वागत समारोह एयरपोर्ट पर ही होते थे, बाद में प्रोटोकॉल बदलकर व्हाइट हाउस कर दिया गया. 1961 में राष्ट्रपति कैनडी में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु को एयरपोर्ट पर रिसीव किया था. 1949 में राष्ट्रपित ट्रूमैन ने नेहरु को एयरपोर्ट पर रिसीव किया था. स्टेट डिपार्टमेंट और व्हाइट हाउस का प्रोटोकॉल साफ है. विदेशी राष्ट्राध्यक्ष आमतौर पर जॉइंट बेस एंड्रयूज पर उतरते हैं. वहां उन्हें यूएस चीफ ऑफ प्रोटोकॉल, सीनियर मिलिट्री अधिकारी, संबंधित राजदूत या कभी-कभी वाइस प्रेसिडेंट रिसीव करते हैं. राष्ट्रपति खुद व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर औपचारिक स्वागत समारोह में उनका इंतजार करते हैं. मुलाकात में जिन मुद्दों पर बात होगी उसका फोकस मौजूदा ईरान युद्ध और व्यापारिक हितों पर चर्चा होगी. दोनों नेताओं के बीच व्यापार और टैरिफ पर भी बात होगी. AI साइबर खतरे और दोनों देशों के लैब्स के बीच कुछ सहयोग की चर्चा होने की संभावना है. टेक सीईओ भी स्टेट डिनर में शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स पर भी बात होगी. मीटिंग में ताइवान का मुद्दा भी उठ सकता है. अमेरिकी अधिकारी बड़े समझौतों की उम्मीद नहीं जता रहे हैं. ज्यादातर बात पिछले समझौतों को लागू करने और तनाव न बढ़ने देने तक सीमित रहने की संभावना है. चीन की तरफ से व्यापारिक सौदों और स्थिरता का संदेश देने पर जोर होगा, खासकर घरेलू राजनीति के लिहाज से.
30 shares
😐
I
India TV
Sep 21, 2026, 01:39 PM
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर विवादों में घिर गए हैं।

भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों को लेकर विवादों में घिर गए हैं।

मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों अपनी एक टिप्पणी को लेकर विवादों के घेरे में घिर चुके हैं। उनकी इस टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और सियासी पारा हाई हो चुका है। वार्ड नंबर 6 में करीब 7 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने सार्वजनिक मंच से वार्ड की महिला पार्षद संध्या यादव की शारीरिक बनावट पर टिप्पणी की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। कार्यक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है और AICC मीडिया कोऑर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने मंत्री की टिप्पणी को निंदनीय बताया है। दरअसल इंदौर में रविवार को इंदौर के वार्ड नंबर 6 में करीब 7 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। इसी दौरान सार्वजनिक मंच से वार्ड नंबर 6 की महिला पार्षद संध्या यादव को लेकर मंत्री की एक टिप्पणी सामने आई, जिसमें उन्होंने कहा कि 'संध्या दीदी की भी चौड़ाई बढ़ गई है थोड़ी सी।' यह टिपण्णी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तब दी जब पार्षद संध्या यादव उन्हीं के पास से गुजरकर माइक स्टैंड के पास आ रही थी, जिनके पीछे मंत्री जी के एक कार्यकर्ता थे, जिनके दिखाई ना देने पर मंत्री जी ने यह टिप्पणी कर दी। वहीं मंत्री की इस टिप्पणी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे लेकर आपत्ति जताई है। AICC मीडिया कोऑर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी को निंदनीय बताया। शुक्ला ने कहा कि भाजपा अक्सर महिला सम्मान की बात करती है, लेकिन अपनी ही पार्टी की महिला पार्षद की शारीरिक बनावट को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना भाजपा और उसके नेताओं की परंपरा बन चुकी है। कैलाश विजयवर्गीय की इस टिप्पणी के बाद अब इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी दल इस बयानबाजी को लेकर उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि आगे क्या रुख भाजपा और कांग्रेस अपनाती है। 'छात्रों की गूंज' को सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया 'झूठ की गूंज', कहा-'तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी'
54 shares
😢
A
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 01:38 PM
राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान ने इमरान खान की बहनों को किया गिरफ्तार

राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान ने इमरान खान की बहनों को किया गिरफ्तार

पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीनों बहनों को गिरफ्तार कर लिया है. लाहौर पुलिस ने पहले इमरान खान की बहन अलीमा को गिरफ्तार किया था अब पुलिस ने डॉ उजमा खान और नौरीन नियाजी को गिरफ्तार कर लिया है. पाकिस्तान पुलिस ने ये कदम 27 सितंबर को इमरान की पार्टी के देशव्यापी प्रदर्शन से पहले उठाया है. PTI के प्रवक्ता शेख़ वक़ास अकरम ने सोमवार सुबह X पर लिखा, "उन्हें एक बख्तरबंद गाड़ी में बिठाया गया है और किसी अज्ञात जगह ले जाया जा रहा है." उन्होंने बताया कि महिलाओं के बच्चों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है. इमरान खान की पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तान पुलिस और एजेंसियों ने इमरान खान के पूरे कुनबे को ही गिरफ्तार कर लिया है. लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने रविवार को पंजाब प्रांत के 'मेंटेनेंस ऑफ़ पब्लिक ऑर्डर' (सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी) कानून के तहत इन तीनों बहनों को 30 दिनों तक हिरासत में रखने के लिए दो अलग-अलग आदेश जारी किए. इमरान खान की बहनों को गिरफ्तार की प्रक्रिया काफी हैरान करने वाली है. डॉन ने इमरान खान के बेटे कासिम खान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी बुआ (इमरान की बहनों) और कजिन्स के घरों में जबरन घुसकर उन्हें वाहनों में बैठाया. उन्होंने लिखा कि अधिकारी घर में जबरन घुस गए और परिवार के लोगों को ले गए. चर्चित ऑनलाइन पत्रकार मारियो नवाफल ने फाइनेंशियल टाइम्स के हवाले से इमरान खान के परिवार की एक सदस्य ने बताया कि 200 से ज़्यादा पुलिस अफसरों ने लाहौर में उनकी बहनों के घरों पर छापा मारा और बेडरूम का दरवाज़ा तोड़ दिया, जबकि तब इमरान बहन डॉ. उज़मा खान बिस्तर पर ही थीं. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों घरों के स्टाफ़ को उनके क्वार्टर से खींचकर बाहर निकाला गया, अलीमा खान के स्टाफ़ को पुलिस वैन में डाल दिया गया, और पुलिस ने दूसरे लोगों को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी. नरीन नियाज़ी और डॉ. उज़मा को 'मेंटेनेंस ऑफ़ पब्लिक ऑर्डर' ऑर्डिनेंस के तहत 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया और कोट लखपत जेल भेज दिया गया. अधिकारियों ने उन्हें सार्वजनिक शांति के लिए संभावित ख़तरा बताया, जबकि इन बहनों का कोई राजनीतिक या पार्टी से जुड़ा रोल नहीं है. इत्तेफ़ाक से यह सब PTI के 27 सितंबर को इस्लामाबाद में होने वाले मार्च से कुछ दिन पहले हो रहा है, जिसे रोकने के लिए सरकार ने हज़ारों पुलिसकर्मियों को तैनात करने का फ़ैसला किया है. इमरान के भांजे शेरशाह खान ने एक्स पर लिखा कि हमारे घर को घेरे में ले लिया गया है. हमारी गली के दोनों सिरों को सील कर दिया गया है, जिससे असल में हमारा पूरा परिवार नज़रबंद हो गया है. शेरशाह ने लिखा है कि मेरी मां अलीमा खान को कुछ घंटे पहले अगवा कर लिया गया. हमें अभी तक कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें कहां रखा गया है. उनके परिवार को उनके ठिकाने के बारे में अंधेरे में रखना बिल्कुल गलत है. अगर बुज़दिली का कोई चेहरा होता, तो यह राजनीतिक-सैन्य सरकार ही वह चेहरा होती. इमरान खान के पूर्व चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ शहबाज गिल ने इन गिरफ़्तारियों को 'हिटलर जैसी क्रूरता' बताया. उन्होंने X पर लिखा, पाकिस्तानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता मरियम नवाज़ खान ने भी इससे सहमति जताई. "महिलाओं से डरने वाला सिस्टम ऐसी कायरतापूर्ण हरकत से क्या हासिल कर सकता है? अगर इमरान खान की तीनों बहनों को गिरफ़्तार भी कर लिया जाए, तो एक राजनीतिक मार्च को रोकने की कोशिश के अलावा इससे क्या हासिल होगा? यह सरासर अन्याय है। इससे लोगों के दिलों में नाराज़गी और नफ़रत ही बढ़ेगी. भगवान के लिए, इस देश पर रहम करें." पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान 3 साल से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. उनकी रिहाई के लिए उनकी बहनों ने लंबा अभियान चलाया हुआ है.
77 shares
😐
Dainik Jagran logo
Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 01:37 PM
बिहार के मुख्यमंत्री ने ग्राम चुनावों की चुनौतियों और पंचायती राज प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला

बिहार के मुख्यमंत्री ने ग्राम चुनावों की चुनौतियों और पंचायती राज प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला

होटल ताज में आयोजित "ग्राम संसद, बिहार चैप्टर-5 मुखिया संवाद" को संबोधित करते हुए सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत चुनावों की जटिलता का जिक्र करते हुए कहा कि सांसद या विधायक का चुनाव लड़ना आसान हो सकता है, लेकिन वार्ड या मुखिया का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर के इन चुनावों में यह भी पता नहीं चलता कि सगा भाई या पट्टीदार किसे वोट दे रहा है; और यही हमारे लोकतंत्र की असली परीक्षा है। पंचायती राज व्यवस्था की अहमियत को रेखांकित उन्होंने कहा कि आम धारणा है कि देश में पीएम, राज्य में सीएम और जिले में डीएम के पास सबसे अधिक शक्ति होती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि सबसे अधिक ताकत और कार्यभार एक मुखिया के पास ही होता है। सीएम ने कहा कि ग्राम संसद के माध्यम से गांवों के विकास के लिए ठोस सुझाव सामने आने चाहिए। पंचायतों में विकास कार्यों के लिए धन की कमी न होने का भरोसा दिलाते हुए सीएम ने कहा कि यह पैसा सीधे जनता के टैक्स से आता है। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत भारत सरकार अगले पांच वर्षों में बिहार की पंचायतों को लगभग 52 हजार करोड़ रुपये देगी। इसके अतिरिक्त, योजनाओं के तहत लगभग 47 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसमें 40 प्रतिशत राशि राज्य और 60 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी। कुल मिलाकर अगले पांच वर्षों में पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से विकास कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योग के उत्पादों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जाएगी। छड़, सीमेंट सहित बिहार में निर्मित उत्पादों की खरीद कम से कम 30 प्रतिशत करना होगा जिसे टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। बहराइच के कैसरगंज में 3.14 करोड़ से बिछेगा सड़कों का जाल, नगर पंचायत ने तैयार किया मास्टर प्लान मधुबनी के बाबूबरही में पीएम आवास योजना की सूची तैयार, 27 और 28 को ग्राम सभा बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए CM सम्राट ने दिए 2.70 लाख, HAM ने सौंपा 11 लाख का चेक यूपी में बेहतर काम करने वाली ग्राम पंचायतों को मिलेंगे 50 लाख रुपये, 30 सितंबर तक करें आवेदन 12 लाख लोग जा रहे बाहर मजदूरी करने, अब बिहार में लगेंगे 10 हजार उद्योग; CM सम्राट ने बताया लक्ष्य PM मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया पूरा पटना, 'आशीर्वाद के दीये' से रोशन हुआ गंगा पथ; CM ने जलाया दीप 'नए भारत का श‍िल्‍पकार'; CM सम्राट ने PM मोदी के जन्‍मद‍िन पर द‍िया खास संदेश, आज से ‘सेवा संकल्प अभियान’ शहरों जैसी चमकेगी गांवों की किस्मत! पीपलसाना मॉडल से बदलेंगे 132 से ज्यादा गांव, DPRO आलोक शर्मा ने दिए सीधे समाधान उच्च शिक्षा व विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि देश एवं राज्य का विकास गांव से ही हो सकता है। इसके लिए नीति और नेतृत्व बेहतर होना चाहिए। सरकार से नागरिकों की साझेदारी होनी चाहिए। तकनीक के साथ वित्तीय प्रबंधन की क्षमता विकसित करनी होगी। हर गांव की आवश्यकता के हिसाब से योजना बनानी होगी। गांव के विकास से शहर का दबाव कम होगा। खेल व उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि देश की समृद्धि की कल्पना बिहार के विकास के बिना नहीं की जा सकती। अपना प्रदेश कई विकसित राज्यों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। हमें बेहतर कल के लिए जनप्रतिनिधियों की नई छवि बनानी होगी। आने वाले समय में 10 हजार नए उद्योग राज्य में उतारने होंगे। युवाओं को यह बताने की जरूरत है कि वह भी उद्योग कर सकते हैं। इसके लिए सरकार सहयोग करेगी। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि हमारी 85 प्रतिशत लोग गांव में बसते हैं। गांव के सहयोग के बिना मंत्रालय नहीं चल सकता। यह आयोजन तब सार्थक होगा, जब आगे की योजनाओं का खाका खींचा जाए। सबसे जरूरी यह है कि ग्राम सभा सही तरीके से हो। सभा होगी तो समस्या का समाधान निकलेगा। विधान पार्षद व ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख ने कहा कि राज्य के विकास के लिए जनता और सरकार को साथ-साथ चलना होगा। बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों को विकास की मजबूत इकाई बनाने तथा आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कि राज्य के गांवों की ताकत ही बिहार के विकास की असली शक्ति है। जब पंचायतें मजबूत होंगी, गांवों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तभी विकसित बिहार का सपना जमीन पर साकार होगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों को विकास की मजबूत इकाई बनाकर आत्मनिर्भर गांव, सक्षम युवा और मजबूत स्थानीय लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ना होगा। गांवों में ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल और मोबाइल टावरों पर लगेगा टैक्स, CM सम्राट चौधरी ने पंचायतों को दिया फॉर्मूला राहुल गांधी को CM सम्राट ने पढ़ाया मर्यादा का पाठ, इंदौर के कार्यक्रम को बताया 'झूठ की गूंज'
70 shares
😐
Aaj Tak logo
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 01:25 PM
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाता सूची अधिसूचनाओं का उद्देश्य स्पष्ट किया

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाता सूची अधिसूचनाओं का उद्देश्य स्पष्ट किया

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अगला चरण शुरू हो गया है. अब लोगों की आपत्तियां ली जा रही हैं, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट आने के बाद जिन लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं. उस पर बहुत बवाल हो रहा है. इसी बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि वोटर लिस्ट में मतदाताओं का नाम, पता उम्र का रिकॉर्ड सही रखने के लिहाज से मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने आजतक से खास बातचीत में स्पष्ट किया है कि वोटरों को जारी किया गया नोटिस मतदाता सूची से नाम काटने के लिए नहीं, बल्कि मतदाताओं के नाम, पता और उम्र के रिकॉर्ड को बिल्कुल सटीक और सही रखने के उद्देश्य से भेजा गया है. अशोक कुमार ने बताया कि नोटिस की दो कैटेगरी हैं. पहली उन मतदाताओं की है जो 2002 के डेटा के साथ मैप नहीं हो पाए. दूसरी उन लोगों की है जो मैप तो हुए लेकिन उनके नाम, मिडल नेम, स्पेलिंग, जन्मतिथि या रिश्तेदार से संबंध में पुराने और नए डेटा के बीच विसंगतियां पाई गईं. उन्होंने कहा कि इसे लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी कहा जाता है और नोटिस में स्पष्ट कारण लिखा होता है. इसका मकसद सिर्फ रिकॉर्ड को सुधारना है, किसी का नाम काटना नहीं है. उन्होंने ने प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. मतदाता नोटिस के जवाब में अपने जरूरी डॉक्यूमेंट्स ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों में से किसी भी माध्यम से जमा कर सकते हैं फिर बीएलओ को भी मुहैया करा सकते हैं. हालांकि, गाइडलाइंस के अनुसार अंतिम सुनवाई के लिए मतदाता को ईआरओ के पास जाना होता है. नोटिस के साथ दस्तावेजों की एक इंडिकेटिव लिस्ट दी गई है, लेकिन मतदाता अपनी संतुष्टि के लिए अन्य दस्तावेज भी ईआरओ को दिखा सकते हैं. लोगों के आरोपों और वीआईपी ट्रीटमेंट के दावों पर उन्होंने कहा कि आयोग के सामने सभी समान हैं और कोई भेदभाव नहीं किया जाता . उन्होंने साफ किया कि पार्टी या किसी खास शख्सियत के आधार पर काम नहीं होता. जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आया है. वह फॉर्म 6 ऑनलाइन या ऑफलाइन भरकर बीएलओ के पास जमा करा सकते हैं. उन्होंने अपील की कि लोग भ्रांतियों में न आएं, क्योंकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं छूटेगा. पिता की जगह पत्नी का नाम आने जैसी मानवीय भूलों पर उन्होंने कहा कि सिस्टम में दर्ज पुरानी गलतियों को प्यूरिफाई करने के लिए ही ये पूरी कवायद चल रही है. दस्तावेजों के अभाव पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकता, 18 वर्ष की आयु और स्थानीय निवासी होना मुख्य क्राइटेरिया हैं. इनके लिए कोई न कोई दस्तावेज सबके पास होता है. उन्होंने आश्वासन दिया कि घबराने की जरूरत नहीं है, नोटिस का मतलब कोई सजा नहीं है. आपको बता दें कि दिल्ली में SIR अभियान के तहत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 31.63 लाख से अधिक लोगों को नोटिस भेजे गए थे.
88 shares
😐
A
ABP News
Sep 21, 2026, 01:23 PM
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इंदौर में विद्यार्थी की गूंज कार्यक्रम में भाग लिया

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इंदौर में विद्यार्थी की गूंज कार्यक्रम में भाग लिया

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी हाल ही में 'छात्रों की गूंज' नाम के कार्यक्रम के लिए मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर आए थे. यहां मंच पर उन्होंने कई स्टूडेंट्स से बातचीत की. हालांकि ये कार्यक्रम उस वाकये को लेकर विवाद में तब्दील हो गया जब राहुल गांधी के साथ मंच पर स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करते हुए उनके एक बयान का मजाक उड़ाया था. इसे लेकर पुलकित मणि, कांग्रेस और राहुल गांधी पर बॉलीवुड अभिनेता रणवीर शौरी भी भड़क गए और उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. 19 सितंबर को राहुल गांधी के कार्यक्रम में हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. स्टैंडअप कॉमेडियन पुलकित मणि भी इस कार्यक्रम में पहुंचे थे. हालांकि मंच से उन्होंने एक ऐसी हरकत कर दी कि उन्हें लोग जमकर खरी-खरी सुना रहे हैं. वहीं राहुल द्वारा मंच पर पुलकित का साथ दिए जाने पर राहुल गांधी भी निशाने पर आ गए हैं. बता दें कि पीएम मोदी ने अपनी एक जनसभा में एक बुजुर्ग महिला के खड़े रहने पर उन्हें कुर्सी देने के लिए कहा था. पीएम मोदी के इस सराहनीय काम को पुलकित ने उनकी मिमिक्री करते हुए उनका जमकर मजाक उड़ाया. इस दौरान राहुल गांधी भी उनके साथ खूब हंस रहे थे और दोनों मंच पर पीएम का मजाक उड़ाते हुए एक दूसरे को बार-बार गले लगा रहे थे. रणवीर शौरी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर इस मामले को लेकर जोरदार निशाना साधा है. बॉलीवुड अभिनेता ने अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट में लिखा, 'वे 'मां को कुर्सी दो' का मज़ाक उड़ा रहे हैं, जबकि उनकी पूरी पार्टी का मकसद ही 'बेटे को कुर्सी' दिलाना है.' वो लोग “माँ को कुर्सी दो” का मज़ाक़ उड़ा रहें हैं जिनकी पूरी पार्टी का अस्तित्व “बेटे को कुर्सी” दिलाना है। 😏 pic.twitter.com/EclVrw322a 54 वर्षीय रणवीर शौरी ने अपना करियर बतौर वीजे शुरू किया था. बॉलीवुड में उनका आगाज साल 2002 में फिल्म 'एक छोटी सी लव स्टोरी' से हुआ था. वो 'सिंह इज किंग', 'एक था टाइगर', 'टाइगर 3', 'खोसला का घोसला', 'चांदनी चौक टू चाइना', 'प्यार के साइड इफेक्ट्स' और 'हैप्पी एंडिंग' सहित कई फिल्मों में नजर आ चुके हैं. संदीप मेहरा ABP LIVE की एंटरटेनमेंट टीम में बतौर कंसलटेंट कंटेंट राइटर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं. इससे पहले वे एबीपी न्यूज़, टीवी9 भारतवर्ष, न्यूज़ट्रेंड और न्यूजट्रैक लाइव में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
2 shares
😐
Aaj Tak logo
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 01:23 PM
गूगल ने उपयोगकर्ताओं के स्थान डेटा को अवैध रूप से एकत्र करने के लिए €403 मिलियन का जुर्माना लगाया

गूगल ने उपयोगकर्ताओं के स्थान डेटा को अवैध रूप से एकत्र करने के लिए €403 मिलियन का जुर्माना लगाया

स्मार्टफोन पर हम जो सर्च करते हैं, उससे लेकर फोन की लोकेशन तक, Google की कई सेवाएं हमारी डिजिटल गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाती हैं. इसी डेटा को लेकर Google पर 403 मिलियन यूरो यानी करीब 463 मिलियन डॉलर (लगभग 4,432 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगा है. यूरोपीय संघ के डेटा प्राइवेसी नियामक ने कहा कि कंपनी ने यूजर्स के लोकेशन डेटा को कानूनी, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से प्रोसेस नहीं किया. यह पूरा मामला आयरलैंड की राजधानी डबलिन से सामने आया है. यूरोपीय यूनियन के 27 देशों में गूगल का हेडक्वार्टर डबलिन में होने के चलते आयरलैंड की एजेंसी ही इस पूरे मामले की कमान संभाल रही थी. छह साल पहले शुरू हुई इस पड़ताल में देखा गया कि कंपनी ने यूरोपीय यूनियन के सख्त प्राइवेसी कानून जीडीपीआर (GDPR) के नियमों का सही से पालन किया या नहीं. 2018 से 2020 के बीच के डेटा को खंगालने के बाद यह कार्रवाई की गई है. जांच में Google की तीन सेवाएं खास तौर पर जांच के दायरे में रहीं. इनमें सर्च और ब्राउजिंग से जुड़ी जानकारी रखने वाला वेब एंड ऐप एक्टिविटी (Web & App Activity), फोन से यूजर की लोकेशन का रिकॉर्ड रखने वाला लोकेशन हिस्ट्री (Location History) और एंड्रॉयड का लोकेशन एक्यूरेसी (Location Accuracy) फीचर शामिल हैं. नियामक के मुताबिक, इन सेवाओं में लोकेशन डेटा को इस्तेमाल करने का तरीका प्राइवेसी नियमों के अनुरूप नहीं था. भारी जुर्माने के बाद गूगल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह मामला पुरानी नीतियों से जुड़ा है, जिन्हें अब पूरी तरह बदला जा चुका है. 2019 के बाद से नियमों में कई बड़े सुधार किए गए हैं और यूजर्स को अपनी लोकेशन डेटा मैनेज करने के लिए आसान टूल्स दिए गए हैं. इस पर आयरलैंड के नियामक ने कहा कि लोकेशन डेटा से किसी व्यक्ति की जगह का अनुमान लगाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल ऑनलाइन सेवाओं को बेहतर बनाने में हो सकता है, लेकिन इससे किसी की निजी जिंदगी से जुड़ी जानकारी भी सामने आ सकती है. यह यूरोपीय यूनियन के इतिहास में किसी टेक कंपनी पर लगा चौथा सबसे बड़ा प्राइवेसी जुर्माना है. इससे पहले टिकटॉक और मेटा जैसी बड़ी कंपनियों पर भी भारी जुर्माने लग चुके हैं, जिसमें अकेले मेटा पर 1.2 अरब यूरो का जुर्माना शामिल था. आयरलैंड की यह संस्था अभी भी गूगल से जुड़े तीन अन्य मामलों की गहराई से जांच कर रही है.
99 shares
😐
A
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 01:22 PM
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे, पारिवारिक विरासत में शामिल होंगे

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे, पारिवारिक विरासत में शामिल होंगे

बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान जल्द ही एक तरह का रिकॉर्ड बनाने वाले हैं. वे अपनी परिवार के तीसरे सदस्य होंगे जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की महासभा को संबोधित करने का गौरव हासिल होगा.प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान सोमवार को न्यूयॉर्क के पांच दिन के दौरे पर रवाना हुए. तारिक रहमान न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली को संबोधित करेंगे. 24 सितंबर को 81वें सत्र में अपना पहला भाषण देते ही रहमान अपने परिवार के तीसरे सदस्य बन जाएंगे जो UNGA को संबोधित करेंगे; उनसे पहले पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया ऐसा कर चुके हैं. उनके पिता ज़ियाउर रहमान ने 1980 में UNGA को संबोधित किया था, जबकि उनकी मां खालिदा ज़िया ने 1993 में इस मंच को संबोधित किया था. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि पीएम तारिक रहमान, उनकी पत्नी डॉ जुबैदा रहमान और दौरे में शामिल दूसरे लोग तुर्की के एक विमान से 5 दिनों के लिए न्यूयॉर्क रवाना हुए हैं. प्रधानमंत्री के प्रेस सेक्रेटरी सालेह शिबली ने बताया कि इस्तांबुल में तीन घंटे रुकने के बाद PM रहमान के शाम 5:55 बजे (न्यूयॉर्क समय) न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट पहुंचने की उम्मीद है. इससे पहले विदेश सचिव असद आलम सियाम ने कहा कि प्रधानमंत्री रहमान 22 सितंबर को राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के लिए UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा आयोजित स्वागत नाश्ते में शामिल होंगे और उसके बाद UNGA के उद्घाटन सत्र में अन्य विश्व नेताओं के साथ जुड़ेंगे. शाम को रहमान अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्राध्यक्षों, सरकार के प्रमुखों के सम्मान में आयोजित स्वागत समारोह में शामिल होंगे, और अगले दिन वह नाश्ते पर एक बैठक में अंतरराष्ट्रीय चैरिटेबल और मानवीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करेंगे. उसी दिन, वह ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे और स्पेन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वैश्विक असमानता संकट से निपटने पर एक बैठक को संबोधित करेंगे और UN महासचिव की पहल पर बुलाई गई "क्लाइमेट एक्शन एंड द जस्ट ट्रांजिशन" (जलवायु कार्रवाई और न्यायपूर्ण बदलाव) नामक उच्च-स्तरीय बैठक में शामिल होंगे. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री 24 सितंबर को UNGA में अपना भाषण देंगे, और उसी दिन वह समुद्र के जलस्तर में वृद्धि से उत्पन्न अस्तित्व के खतरों पर एक उच्च-स्तरीय बैठक में शुरुआती संबोधन देंगे. विदेश सचिव ने कहा, "वह बांग्लादेश द्वारा आयोजित दो महत्वपूर्ण साइड इवेंट्स में भी शामिल होंगे." सरकारी समाचार एजेंसी BSS ने बताया कि UNGA के दौरान, रहमान पाकिस्तान, भूटान, थाईलैंड, क्रोएशिया, हैती के अपने समकक्षों और कुवैत के क्राउन प्रिंस के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे. वह UN महासचिव, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष, विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष, म्यांमार पर UN महासचिव के विशेष दूत और कई अन्य लोगों से भी मुलाकात करेंगे.
86 shares
😐
I
India TV
Sep 21, 2026, 01:15 PM
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने दलित वोट जीतने के प्रयास तेज किए

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने दलित वोट जीतने के प्रयास तेज किए

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब कुछ महीने बाकी रह गए हैं। प्रदेश की करीब 21 फीसदी दलित आबादी के वोटों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस कड़ी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज प्रदेश की आरक्षित (रिज़र्व) विधानसभा सीटों के पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई। उन्होंने इस बैठक के जरिए दलित वोटों पर पार्टी की रणनीति को धार देने की कोशिश की। समाजवादी पार्टी का ध्यान प्रदेश की कुल 86 रिज़र्व सीटों में से उन 65 सीटों पर है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। पार्टी का मुख्य फोकस दलित समाज को अपने साथ जोड़ने पर है। अखिलेश यादव लगातार दलित और संविधान से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के 72 जिलों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 151 मूर्तियां तोड़ी जा चुकी हैं। समाजवादी पार्टी की रणनीति में पार्टी के संगठन को दलित समाज के बीच मजबूत करना भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक बसपा प्रमुख मायावती के पारिवारिक झगड़ो में फंसे होने का फायदा समाजवादी पार्टी उठाना चाहती है। सपा छात्र सभा की नीली ड्रेस और अखिलेश यादव पहले ही नीला गमछा पहन चुके है और छात्र सभा की ड्रेस नीली कर चुके हैं । उधर, बीजेपी भी अखिलेश यादव के इस दांव का काट ढूंढ रही है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का कहना है कि " अखिलेश यादव चाहें अपना पूरा शरीर नीला कर लें, तब भी दलित समाज समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देगा ।" बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों में हुए दलित वोट बैंक के नुकसान की भरपाई में जुट गई है। योगी सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य दलित महापुरुषों की मूर्तियों, स्मारकों और पार्कों के सुंदरीकरण व सुरक्षा के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इसके तहत हर विधानसभा में लगभग 10 स्मारकों व मूर्तियों के आसपास बाउंड्री वॉल और ग्रिल लगाने का काम किया जाएगा। दरअसल, बसपा प्रमुख मायावती दलितों की सबसे बड़ी नेता मानी जाती रही हैं। मायावती चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रहीं। मायावती ने 2017 में बहुमत की सरकार बनाई, लेकिन 2014 से बड़े पैमाने पर दलित वोट मायावती की बीएसपी से बीजेपी में शिफ्ट हो गया। एक सर्वे के मुताबिक 2024 में मायावती को 44 फीसदी जाटव मिला, इंडिया गठबन्धन को 25 फीसदी और एनडीए को 24 फीसदी वोट मिला। गैर जाटव वोट में इंडिया गठबन्धन को 56 फीसदी,एनडीए को 29 फीसदी और बसपा को सिर्फ 15 फीसदी वोट मिले।अब अखिलेश यादव की कोशिश है कि उनके दलित वोट बढ़े और बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में दलित वोट के नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में है। "पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई", राजभर ने फिर बताया PDA का मतलब, अखिलेश पर कसा तंज
29 shares
😐
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 01:11 PM
भाजपा नेता नितिन नवीन का मेरठ में विशिष्ट स्वागत किया गया

भाजपा नेता नितिन नवीन का मेरठ में विशिष्ट स्वागत किया गया

दिल्ली से 70 किलोमीटर दूर देश के ऐतिहासिक शहर मेरठ... इस शहर ने 1857 में देश का पहला गदर आंदोलन देखा था. आज उसी सरजमीन पर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कही जाने वाली BJP के मुखिया नितिन नवीन का स्वागत बुलडोजर से फूल बरसाकर किया जा रहा है. 21 सितंबर 2026 को BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर मेरठ पहुंचे. काशी टोल प्लाजा पर करीब 40 बुलडोजर लाइन से खड़े किए गए और इनसे करीब पांच क्विंटल फूल बरसाए. क्रेन के जरिए नितिन नवीन को माला पहनाई गई. बुलडोजरों पर चढ़कर कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़े बजाए और 'जय श्री राम' के नारे लगाए. मेरठ और सहारनपुर मंडल की 71 विधानसभा सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत का दिल हैं. इसमें मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के 14 जिले आते हैं. इनमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, बिजनौर, संभल, मुरादाबाद और रामपुर शामिल हैं. इसे यूपी की राजनीति में 'सत्ता का प्रवेश द्वार' माना जाता है. 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने पश्चिमी यूपी में 15 सीटें खोईं, लेकिन फिर भी करीब 70 प्रतिशत सीटों पर बढ़त बनाए रखी. समाजवादी पार्टी और रालोद के गठबंधन ने BJP को कड़ी टक्कर दी थी. इस बार BJP पश्चिमी यूपी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. इस वजह से नितिन नवीन, योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की तिकड़ी को मैदान में उतारा गया है. मेरठ दौरे में सिर्फ बुलडोजर वाला स्वागत ही नहीं हुआ. नवीन ने पश्चिमी यूपी के पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, जिलाध्यक्षों और कोर कमेटी के सदस्यों के साथ गहन समीक्षा बैठकें कीं. इनका मुख्य एजेंडा पन्ना प्रमुखों और बूथ समितियों को एक्टिव करना था. पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर मजबूती ही बड़े अंतर से जीत सुनिश्चित करती है. सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित युवा सम्मेलन में नवीन ने युवाओं से 'रील' की दुनिया छोड़कर 'रियल' जिंदगी जीने की अपील की. उन्होंने नशे और शॉर्टकट के रास्ते से दूर रहने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया. मंच पर नेताओं के साथ केवल छात्र बैठे थे. मेरठ के अलावा गाजियाबाद , हापुड़, नोएडा और बुलंदशहर से करीब ढाई हजार छात्र मौजूद रहे. फिर भी समझ नहीं आया कि मेरठ में बुलडोजर ही क्यों? आगे समझते हैं... यह समझने के लिए कि बुलडोजर BJP के लिए महज एक निर्माण मशीन से 'चुनावी ब्रह्मास्त्र' कैसे बन गया, जुलाई 2020 में लौटना पड़ेगा. कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे ने पुलिस पर बुलडोजर से हमला किया था, जिसके बाद उसके ठिकानों पर बुलडोजर चलाए गए. योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे एक प्रशासनिक मॉडल के रूप में पहचान दे दी. यानी अपराधियों और भू-माफियाओं के अवैध निर्माणों को गिराना, जिससे 'कानून का डर' पैदा हो. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह मॉडल BJP के लिए चुनावी ब्रांड बन गया. योगी आदित्यनाथ खुद रैलियों में बुलडोजर का जिक्र करते थे, और उन्हें 'बुलडोजर बाबा' कहा जाने लगा. BJP का दावा है कि इस मॉडल के तहत लगभग 2 हजार करोड़ रुपए की अवैध कब्जे वाली संपत्ति छुड़ाई गई और उस पर गरीबों के लिए घर बने. साथ ही, पिछले 6 सालों में 10 हजार से ज्यादा पुलिस एनकाउंटर हुए. इससे कई अपराधियों ने थानों में सरेंडर किया. हालांकि, इस मॉडल का दूसरा चेहरा भी है, जिसे विपक्ष और मानवाधिकार संगठन उठाते रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि 'बुलडोजर जस्टिस' का इस्तेमाल अक्सर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सामूहिक दंड के रूप में किया गया. हरियाणा के नूंह में अगस्त 2023 में चार दिनों में 50 किलोमीटर के दायरे में 500 से 1,250 मकान-दुकानें गिराई गईं. उत्तर प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के फैसले के बावजूद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में पाया कि राज्य में दंडात्मक विध्वंस जारी है. बुलडोजर सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहा. पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में योगी आदित्यनाथ की रैलियों में लोग 'बुलडोजर बाबा जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे. असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को बुलडोजरों ने फूल बरसाकर 'बुलडोजर सलाम' दिया गया. कोलकाता पुलिस को जीत के जुलूसों में बुलडोजर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाना पड़ा. यानी बुलडोजर अब सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई का औजार नहीं, बल्कि BJP की राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है. बंगाल चुनाव में BJP ने योगी को शुरुआती चरणों में नहीं उतारा. पार्टी की 'सीक्रेट रणनीति' के मुताबिक, योगी को बाद के निर्णायक चरणों में 'ब्रह्मास्त्र' के रूप में तैनात किया जाना था, ताकि ध्रुवीकरण और हिंदुत्व के मुद्दों का ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके. मेरठ का यह आयोजन 2027 के चुनाव के लिए BJP का पहला बड़ा संकेत है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके तीन मायने हैं: बुलडोजर को चुनावी प्रतीक बनाने की रणनीति BJP के लिए फायदेमंद रही है, लेकिन इसके जोखिम भी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 'बुलडोजर जस्टिस' को असंवैधानिक करार दिया है और कहा है कि यह संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है. अगर चुनाव के दौरान विपक्ष इसे 'सामूहिक दंड' और 'अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई' के रूप में पेश करता है, तो यह BJP के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है. मेरठ में 40 बुलडोजरों की कतार, पांच क्विंटल फूलों की बारिश और क्रेन से पहनाई गई माला दिखाता है कि BJP अपनी सबसे बड़ी ताकत को ही अपना सबसे बड़ा चुनावी चेहरा बनाने में जुट गई है. 2027 में यह 'ब्रह्मास्त्र' कितना कारगर होता है, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन मेरठ से जो संदेश गया है, वह साफ है कि लड़ाई अब शुरू हो चुकी है. ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.
96 shares
😐
D
Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 01:09 PM
बिहार की राजनीतिः उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा,'दोहरे इंजन में आग लगी'

बिहार की राजनीतिः उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा,'दोहरे इंजन में आग लगी'

Bihar Politics: बिहार में बाढ़ और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर तेजस्वी यादव के ‘डबल इंजन में आग लग गई’ वाले बयान पर सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी के बयान पर पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक बौखलाहट से जोड़ा। सासाराम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तेजस्वी के कलेजे पर सांप लोट रहा है और इसी वजह से इस तरह के बयान सामने आ रहे हैं। यह कुशवाहा का राजनीतिक आरोप है, जबकि तेजस्वी ने अपने बयान में सरकार पर बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त मदद नहीं मिलने का आरोप लगाया था। तेजस्वी यादव ने हालिया प्रेस वार्ता में बिहार की एनडीए सरकार को ‘डबल इंजन सरकार’ बताते हुए दोनों इंजनों में आग लगने की बात कही थी। उनका यह हमला मुख्य रूप से बाढ़, राहत और केंद्र से सहायता को लेकर था। उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी के बयान को विपक्ष के राजनीतिक आधार से जोड़ते हुए कहा कि जनाधार खिसकने की वजह से इस तरह की बयानबाजी सामने आ रही है। उन्होंने बख्तियारपुर के चुनावी परिणाम का भी जिक्र किया और कहा कि वहां एनडीए की भी हार हुई, लेकिन विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई। यह टिप्पणी कुशवाहा की राजनीतिक व्याख्या है। चुनावी नतीजों और उनके अर्थ को लेकर अलग-अलग दलों की अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं। कुशवाहा सासाराम के एक निजी पैलेस में पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय भाजपा नेता चंद्रशेखर पासवान की ओर से किया गया था। इस दौरान उन्होंने बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति सहित कई मुद्दों पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। JDU के 14 MLA-MLC ने मुख्यमंत्री कोष में दी 1 महीने की सैलरी, बाढ़ पीड़ितों को मिलेगी मदद अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद बदला समीकरण, बिहार विधान परिषद की कुर्सी पर JDU की नजर 'MP-MLA बनना आसान, PM-CM से भी ज्यादा पावरफुल हैं मुखिया'; ग्राम संसद में बोले CM सम्राट चौधरी जमुई कांड पर तेजस्‍वी यादव ने खोला मोर्चा, PM मोदी पर भी निशाना; बोले- बिहार में अराजक स्थिति अनंत सिंह का दांव JDU पर पड़ेगा भारी? पटना स्नातक MLC चुनाव में 'छोटे सरकार' कितना बदलेंगे नीरज कुमार का गणित जमुई की घटना पर गरमाई बिहार की सियासत, रोहिणी आचार्य ने सरकार को घेरा; RJD ने पूछे तीखे सवाल राहुल गांधी को CM सम्राट ने पढ़ाया मर्यादा का पाठ, इंदौर के कार्यक्रम को बताया 'झूठ की गूंज' 'केतना कर्जा खइबअ ए राजा...'; BJP व‍िधायक ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल, बांकीपुर से सीख की दी नसीहत कार्यक्रम में जदयू विधायक नागेंद्र चंद्रवंशी भी मौजूद रहे। ऐसे में तेजस्वी के बयान पर कुशवाहा की प्रतिक्रिया को एनडीए के सहयोगी दल की ओर से आया राजनीतिक पलटवार माना जा रहा है। बिहार में वित्तीय संकट से जुड़े सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि फिलहाल उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्तीय मामलों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और राज्य की समस्याओं पर लगातार काम किया जा रहा है। कुशवाहा ने बाढ़ और सुखाड़ का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इन परिस्थितियों से निपटने के लिए काम कर रही है। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव लगातार बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत और केंद्र से विशेष सहायता दिए जाने की मांग उठा रहे हैं।
75 shares
😢
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 01:02 PM
केंद्रीय मंत्री ने नशीली दवाओं के कथित सेवन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की आलोचना की

केंद्रीय मंत्री ने नशीली दवाओं के कथित सेवन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की आलोचना की

सीएम मान पर हमला बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा पंजाब के मुखिया ही नशा करके विधानसभा में पहुंच जाते हैं जो बड़े दुर्भाग्य की बात है। इस मौके पर पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, राज्यसभा सांसद तरुण चुघ, मनप्रीत बादल, सुनील जाखड़, कंवलजीत सिंह के अलावा अन्य नेता मौजूद थे।विज्ञापनकेंद्रीय मंत्री ने सीएम मान से सवाल किया कि नशे के सौदागरों को संरक्षण कौन दे रहा है। उन्होंने कहा मैं पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का संदेश लेकर पंजाब आया हूं। भाजपा पंजाब में सत्ता में आने के बाद छह माह में नशे के नेटवर्क को ध्वस्त कर देगी। इस दौरान उन्होंने शायरी अंदाज में कहा सुन लें- केजरीवाल और भगवंत सिंह मान नूर की एक किरण जुल्मात पर भारी होगी, रात तुम्हारी है, लेकिन सुबह हमारी होगी।विज्ञापनउन्होंने कहा ये रवानी ये जवानी अब झुकेगी नहीं। पंजाब को बचाना हमारा संकल्प है और हम पंजाब को बचा के ही चैन की सांस लेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य है कि नशे को समाप्त करने के वादे के साथ सरकार में आई आप के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती। आज जब पंजाब में पीड़ित परिवारों से संवाद किया, तो मन पीड़ा से भर गया।
68 shares
😢
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 12:59 PM
जारी तनाव के बीच अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा दिया

जारी तनाव के बीच अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा दिया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने पिछले हफ्ते गुरुवार (17 सितंबर, 2026) को एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान , विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्रसभा (UNGA) के हाई-लेवल वीक में शामिल होने के लिए वीजा देगा. ट्रंप प्रशासन का यह फैसला ऐसे समय पर सामने आया, जब पश्चिम एशिया में पिछले करीब 7 महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच आधिकारिक रूप से युद्ध जारी है और तनाव की स्थिति लगातार बनी हुई है. अमेरिकी विदेश विभाग ने इस मंजूरी को संयुक्त राष्ट्र (UN) के मुख्यालय के मेजबान देश के तौर पर अमेरिका की कानूनी जिम्मेदारियों और दायरों से जोड़ा है. यह जिम्मेदारी साल 1947 के संयुक्त राष्ट्र हेडक्वार्टर एग्रीमेंट के सेक्शन 11 के तहत आती है, जिसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को वीजा स्वतंत्र रूप से और बिना किसी देरी के जारी करने की बात कही गई है. हालांकि, इस बार ईरान से आने वाले प्रतिनिधिमंडल पर पहले के मुकाबले ज्यादा कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे. ईरानी डेलीगेशन को संयुक्त राष्ट्र की बैठकों के लिए जरूरी इलाकों तक ही सीमित रखा जाएगा. इसके सदस्यों को लग्जरी सामान या कोई भी अन्य सामान खरीदने की मंजूरी नहीं दी जाएगी. इसके अलावा, उनकी गतिविधियों पर विशेष रूप से कड़ी निगरानी भी रखी जाएगी. उल्लेखनीय है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान बुधवार (23 सितंबर, 2026) को सुबह के वक्त संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित कर सकते हैं. वहीं, ट्रंप प्रशासन के इस फैसले का एक और पहलू भी है, जो कूटनीतिक तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल, इसी अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार (16 सितंबर) को फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और उनके प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने से इनकार करने का ऐलान किया था. इस वजह से ईरानी राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने का फैसला अमेरिकी वीजा नीति के मामले में विशेष तौर पर चर्चा का विषय बन गया. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह भी संकेत दिया है कि वह UNGA के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ मुलाकात कर सकते हैं. पिछले करीब पांच सालों से भारतीय मीडिया का हिस्सा हैं. अक्टूबर, 2024 से एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर के तौर पर भूमिका निभा रहे हैं. प्रिंट मीडिया के साथ अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत की है और आज डिजिटल मीडिया में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर लेखन कार्य कर रहे हैं. साल 2020 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की. क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, चुनाव और सामाजिक विषयों पर खबरें लिखते रहे हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश है. स्केचिंग, पेटिंग, फिल्में देखना, शायरी-कविताएं लिखना और घूमना बहुत ज्यादा पसंद है.
45 shares
😐
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:53 PM
सेना अकेले राजनीतिक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीः विशेषज्ञ

सेना अकेले राजनीतिक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीः विशेषज्ञ

-विशेषज्ञ बोले सैन्य ताकत से राजनीतिक समस्याओं का समाधान संभव नहींअमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष ने पश्चिम एशिया के साथ वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित किया है। इस संबंध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज की ओर से द ईरान वॉर एंड इट्स इंप्लीकेशंस फॉर वेस्ट एशिया एंड वर्ल्ड पॉलिटिक्स विषय पर आयोजित व्याख्यान में चर्चा हुई।इस दौरान साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धनंजय त्रिपाठी ने कहा कि संघर्ष को केवल सैन्य नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है। इसके रणनीतिक, आर्थिक, वैचारिक और भावनात्मक पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। सैन्य कार्रवाई से राजनीतिक समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी नहीं है।विज्ञापनसवाल-जवाब सत्र में अमेरिका के घोषित उद्देश्यों और संघर्ष के परिणामों, चीन की बढ़ती भूमिका, ईरान की अर्थव्यवस्था के टिके रहने और भारत की संतुलित नीति पर चर्चा हुई। भारत के ऊर्जा, रणनीतिक और कूटनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी विचार हुआ। इस व्याख्यान की अध्यक्षता केंद्र के निदेशक प्रो. एचए नाजमी ने की और संचालन प्रो. अनीसुर रहमान ने की।
49 shares
😢
A
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 12:51 PM
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के एस. आई. आर. को संभालने का बचाव किया, अपीलीय न्यायाधिकरणों में वृद्धि की मांग की

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के एस. आई. आर. को संभालने का बचाव किया, अपीलीय न्यायाधिकरणों में वृद्धि की मांग की

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में अपीलों के निपटारे, नाम हटाए जाने, नाम दोबारा जोड़ने और चुनाव नतीजों पर SIR के कथित असर को लेकर अपना पक्ष रखा है. निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी अपीलों के जल्द निपटारे के लिए मौजूदा 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाई जाए. आयोग ने सुझाव दिया है कि हर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक ट्रिब्यूनल बनाया जाए. पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं, इसलिए कुल 42 ट्रिब्यूनल होने पर लंबित मामलों का निपटारा तेज किया जा सकता है. अब तक SIR से जुड़े ट्रिब्यूनलों के सामने करीब 38.3 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं. लेकिन करीब सवा लाख अपीलों का ही निपटारा हो सका है. दाखिल अपीलों में सिर्फ हटाए गए मतदाताओं की अपीलें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि ऐसे मामले भी हैं जिनमें किसी दूसरे व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने पर आपत्ति की गई है. सुप्रीम कोर्ट के सामने उपलब्ध रिकॉर्ड में भी आयोग ने कहा था कि अपीलों में रॉन्गफुल एक्सक्लूज़न के साथ इन्क्लूज़न के खिलाफ आपत्तियां भी शामिल हैं. आयोग के मुताबिक दाखिल अपीलों में 22.2 लाख से ज्यादा अपीलें हटाए गए नामों को लेकर हैं. आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 24 जिलों में 22.2 लाख से ज्यादा अपीलें ऐसे लोगों की हैं, जिनके नाम SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए थे. यानी जिन लोगों के नाम हटे, उनमें बड़ी संख्या में लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए ट्रिब्यूनल का रुख किया है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक करीब 27.16 लाख नाम हटाए गए थे. उनमें से करीब 22.21 लाख लोगों ने अपील की. आयोग के आंकड़ों में करीब 16.1 लाख अपीलें ऐसे मामलों की हैं, जिनमें किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है. इसलिए ECI का कहना है कि कुल अपीलों को सिर्फ “डिलीट किए गए मतदाताओं की अपील” के रूप में देखना सही तस्वीर नहीं देता. सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी 34 लाख से ज्यादा अपीलों में रॉन्गफुल एक्सक्लूज़न के साथ इन्क्लूज़न पर ऑब्जेक्शन का जिक्र है. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अब तक 1,26,194 अपीलों का फैसला हो चुका है. कुल अपीलों की संख्या करीब 38.3 लाख है. इसका मतलब है कि अभी भी 37 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित हैं. यही लंबित मामलों की बड़ी संख्या ECI के ज्यादा ट्रिब्यूनल बनाने के प्रस्ताव का प्रमुख आधार है. ट्रिब्यूनल ने 1,13,943 लोगों के नाम दोबारा जोड़ने का फैसला सुनाया है. आयोग के अनुसार जिन मामलों का फैसला हुआ, उनमें 1,13,943 लोगों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का फैसला हुआ. यानी अब तक तय किए गए मामलों में करीब 93 फीसदी मामलों में अपील करने वाले मतदाताओं को राहत मिली और उनके नाम दोबारा जोड़े गए. वहीं 8,649 अपीलें खारिज हुईं. आयोग ने कहा कि सिर्फ डिलीशन के आंकड़े से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. आयोग ने SIR के खिलाफ उठाए गए उन सवालों का भी जवाब दिया है, जिनमें बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया था. SIR के दौरान सिर्फ नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं हुई, बल्कि Absent, Shifted, Dead और Duplicate जैसी श्रेणियों को भी देखा गया था. इसलिए केवल नाम हटाए जाने की कुल संख्या को आधार बनाकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी हटाए गए मतदाता वास्तविक और पात्र मतदाता थे. ECI ने उस दावे को भी खारिज किया है कि SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे प्रभावित हुए. यह दावा किया गया था कि कई विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम था, जिनके नाम SIR में हटाए गए. सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले भी इस आधार पर 31 विधानसभा सीटों का हवाला दिया गया था. आयोग का कहना है कि केवल जीत के अंतर बनाम हटाए गए मतदाताओं की संख्या की तुलना करके यह निष्कर्ष निकालना कि SIR ने चुनाव परिणाम बदल दिया, सही तरीका नहीं है. ECI ने इस तरह के आकलन को एक त्रुटिपूर्ण और अनुमान आधारित पैमाना है. ECI ने कहा, डिलीटेड वोटर्स का पूरा आंकड़ा नहीं देखा जा सकता. इस आधार पर आयोग का तर्क है कि अगर किसी विधानसभा सीट पर 10,000 नाम हटे और जीत का अंतर 5,000 रहा, तो सिर्फ इन दोनों आंकड़ों को जोड़कर यह नहीं कहा जा सकता कि हटाए गए 10,000 मतदाताओं की वजह से चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ. इसके लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि हटाए गए लोगों में कितने लोग वास्तव में पात्र मतदाता थे, कितने लोगों ने अपने नाम दोबारा जोड़ने के लिए अपील की और उन अपीलों का परिणाम क्या रहा. आयोग ने SIR प्रक्रिया में अपील का पूरा तंत्र बताया.ECI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी बताया है कि SIR प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों के जरिए ऑब्जेक्शन्स और क्लेम्स का निपटारा किया गया और इसके बाद अपील के लिए ट्रिब्यूनल बनाए गए. सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों के लिए SOP तैयार की गई थी और ट्रिब्यूनलों को पूरे रिकॉर्ड व पहले दिए गए फैसले के कारणों की दोबारा जांच करने को कहा गया था. ECI का मुख्य तर्क है कि बड़ी संख्या में अपीलें दोनों तरह की हैं. आयोग का कहना है कि SIR को लेकर सिर्फ “लाखों नाम काट दिए गए” कहना पूरी प्रक्रिया को नहीं दर्शाता. कुल अपीलों में एक बड़ा हिस्सा नाम दोबारा जोड़ने की मांग से जुड़ा है, जबकि एक अन्य बड़ा हिस्सा वोटर लिस्ट में नाम जोड़े जाने के खिलाफ आपत्तियों से संबंधित है. ECI के अपने आंकड़ों के मुताबिक कुल करीब 38.3 लाख अपीलों में से 1.26 लाख का निपटारा हुआ है, जबकि 37 लाख से ज्यादा मामले अभी लंबित हैं. इसी वजह से आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा ट्रिब्यूनल बनाने की मांग की है. पूरे जवाब का प्रमुख बिंदु यह है कि आयोग ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाकर 42 करने की व्यवस्था चाहता है, ताकि हर लोकसभा क्षेत्र के स्तर पर एक ट्रिब्यूनल अपीलों की सुनवाई कर सके और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से हो.
49 shares
😢
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:51 PM
हरक सिंह रावत ने भाजपा पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया

हरक सिंह रावत ने भाजपा पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया

रविवार को मीडिया से बातचीत में हरक सिंह रावत ने कहा, सहसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा हूं। लेकिन भाजपा मेरे खिलाफ झूठा प्रचार कर रही है। उन्होंने चुनौती दी कि मुख्यमंत्री व भाजपा अध्यक्ष सहसपुर से चुनाव लड़ कर दिखाएं।
46 shares
😢
D
Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 12:46 PM
मायवती ने अखिलेश यादव के यात्रा रथ पर केसरिया होने का आरोप लगाया

मायवती ने अखिलेश यादव के यात्रा रथ पर केसरिया होने का आरोप लगाया

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के समाजवादी पीडीए यात्रा रथ के रंग को लेकर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने तीखा हमला बोला है। बसपा प्रमुख ने सोमवार को एक्स पर लिखा, विधान सभा चुनाव की तैयारी के लिए सपा प्रमुख का प्रचारित ‘पीडीए रथ’ उनके अपने लाल रंग का कम और आरएसएस-भाजपा के ‘भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज्यादा है। ऐसे में लोगों में चर्चा है कि यह उनका वोटों के स्वार्थ की खातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से वोट पाने का भरोसा उठ जाना है? उन्होंने पीडीए की बदलती परिभाषाओं और नीला रंग अपनाने को बताया राजनीतिक स्वार्थ करार दिया है। बसपा प्रमुख ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मुस्लिम समाज को इस हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को एकतरफा वोट देने के बावजूद भी यह पार्टी यूपी व केंद्र में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाती है तो इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना मत खराब क्यों किया जाए। उन्हाेंने दावा किया कि अब मुस्लिम समाज, ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया बसपा के पक्ष में तेजी से बदल रहा है। मायावती ने प्रश्न करते हुए कहा कि सपा को जनता को बताना चाहिए कि इनके ‘पीडीए’ की वास्तविकता क्या है? PDA रथ पर भगवा रंग पर मायावती के सवाल पर अखिलेश यादव का माकूल जवाब, बताया इलाज की जरूरत वाराणसी के पांडेयपुर ओवरब्रिज पर अखिलेश यादव का लगा विवादास्पद पोस्टर, सपाइयों में आक्रोश ‘माफियाराज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश’ पोस्टर वार से गरमाई यूपी की राजनीति, सपा का भाजपा पर आरोप गाजीपुर में लगे फ्लैक्स तो गरमा गई सियासत, ल‍िखा - 'आजम, अतीक व मुख्तार यही चलाते थे सरकार' सपा का 2027 चुनाव के लिए बड़ा प्लान: हर विधानसभा में बढ़ाएंगे 27 हजार वोट, PDA रथ से रायबरेली जाएंंगे अखिलेश 'सपा राज की गुंडागर्दी पर योगी सरकार ने लगाया ब्रेक', मंत्री असीम अरुण का अखिलेश पर तीखा हमला आरक्षण की चोरी करने वाले आज ज्ञान दे रहे हैं, अंबेडकर को अपमानित करने वाले आज सम्मान की बात करते हैं- अनिल राजभर मुजफ्फरनगर में जयन्त चौधरी का सपा पर तीखा हमला, 'गिरा हुआ समाज' वाले बयान पर मांगा जवाब क्योंकि चुनावी स्वार्थ में इन्होंने कभी ‘पीडी’ को ‘पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ‘पीडी’ को ‘पंडित’ बताया है। वहीं, कभी अपने आपको ‘आंबेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बसपा का ‘नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, परंतु इसको लोगाें ने फौरन ही फेक आंबेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया। इसके विपरीत बसपा ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलने वाली पार्टी है।
22 shares
😐
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 12:39 PM
समाजवादी पार्टी ने 2027 के चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं तक पहुंच का विस्तार किया

समाजवादी पार्टी ने 2027 के चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं तक पहुंच का विस्तार किया

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कभी बहुजन समाज पार्टी का मजबूत आधार रहे दलित वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए समाजवादी पार्टी लगातार आउटरीच बढ़ा रही है. अखिलेश यादव की रणनीति अब केवल MY यानी मुस्लिम-यादव समीकरण तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि PDA के जरिए दलित वोटरों तक भी पहुंच बनाने की कोशिश हो रही है. मायावती के उत्तराधिकारी को लेकर समय-समय पर सामने आ रही चर्चाओं और पार्टी के भीतर बदलावों के बीच विपक्षी दल बसपा के कमजोर होते जनाधार को अपने लिए संभावित अवसर के तौर पर देख रहे हैं. इसी बीच अखिलेश यादव ने योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में 151 स्थानों पर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की मूर्तियां टूटने की रिपोर्ट जारी की है. अखिलेश यादव का कहना है कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर बाबा साहब की मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. बताते चलें कि अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से दलित और बहुजन समाज के महापुरुषों को लेकर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं. नीले पटके और नीली टी-शर्ट के जरिए भी उनकी राजनीतिक आउटरीच चर्चा में है. समाजवादी पार्टी इसे PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा बता रही है. समाजवादी पार्टी के नेता आमिक जमाई ने कहा कि 2019 में बसपा-सपा गठबंधन टूटने से दलित समाज में नाराजगी पैदा हुई थी. उनका दावा है कि 2022 और 2024 में दलित समाज के युवाओं का रुझान अखिलेश यादव की ओर बढ़ा है. उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा के लिए अखिलेश यादव ही संघर्ष कर रहे हैं और 2027 में दलित समाज का बड़ा हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर देख रहा है. वहीं कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने मायावती और बसपा के राजनीतिक प्रभाव को लेकर कहा कि बहुजन मिशन अब बीजेपी के खिलाफ और संविधान, आरक्षण तथा लोकतंत्र की रक्षा करने वालों के साथ है. उन्होंने दावा किया कि इंडिया गठबंधन दलित, आदिवासी, महिला, युवा और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े मुद्दों को उठा रहा है. दूसरी तरफ यूपी सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी के आरोपों को खारिज किया. उनका कहना है कि योगी सरकार के कार्यकाल में बाबा साहब आंबेडकर की मूर्तियां स्थापित करने का काम किया गया है. उन्होंने समाजवादी पार्टी पर दलितों के हितों को लेकर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर सपा नेताओं को वास्तव में चिंता है तो उन्हें अपने क्षेत्रों में आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कराने के प्रस्ताव देने चाहिए थे. इस पूरी सियासी कवायद के बीच सवाल यही है कि क्या बसपा के कमजोर होते जनाधार का फायदा समाजवादी पार्टी उठा पाएगी? या फिर दलित वोटर 2027 में अलग-अलग दलों के बीच अपना नया राजनीतिक विकल्प तलाशेगा? वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला के मुताबिक, 90 के दशक में अंबेडकर, कांशीराम और बहुजन आंदोलन उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में थे. अब बसपा के कमजोर होने के बाद दलित वोटरों के बीच यह विमर्श चल रहा है कि उनका राजनीतिक रुख किस ओर जाए. उनके मुताबिक अखिलेश यादव अपने पारंपरिक MY समीकरण से आगे बढ़कर PDA के जरिए दलित वोटरों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और आंबेडकर तथा दलित चेतना से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता इसी रणनीति का हिस्सा है.
58 shares
😢
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:38 PM
द्रमुक नेता स्टालिन ने समुद्र के पास सचिवालय निर्माण का विरोध किया

द्रमुक नेता स्टालिन ने समुद्र के पास सचिवालय निर्माण का विरोध किया

स्टालिन ने कहा कि सचिवालय मुख्यमंत्री के काम करने के लिए होता है, समुद्र देखने के लिए नहीं। उन्होंने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा गया तो डीएमके मछुआरों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी।
7 shares
😢
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:36 PM
कांग्रेस विधायकों ने हिमाचल प्रदेश में सेब के समर्थन मूल्य में वृद्धि की मांग की

कांग्रेस विधायकों ने हिमाचल प्रदेश में सेब के समर्थन मूल्य में वृद्धि की मांग की

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि करीब 14 कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर सेब का मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत समर्थन मूल्य 12 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 20 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है।
93 shares
😐
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:30 PM
ग्रेटर नोएडा के कलेक्टोरेट में किसान संघ का विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन प्रस्तुत करने की मांग की

ग्रेटर नोएडा के कलेक्टोरेट में किसान संघ का विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन प्रस्तुत करने की मांग की

ग्रेटर नोएडा (संवाद)।बारह सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ही ज्ञापन सौंपने की मांग को लेकर उन्होंने नारेबाजी की। बाद में अपर जिलाधिकारी संजय सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। संघ के जिलाध्यक्ष योगेंद्र त्यागी ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान करना तो दूर, उनकी समस्याओं को सुना तक नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि की राशि छह हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये की जाए। यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसानों को सात प्रतिशत आवासीय भूखंड और 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा ब्याज समेत दिया जाए। उन्होंने कहा कि चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि किसानों के गन्ने का मूल्य जस का तस बना हुआ है। इस अवसर पर जिला प्रभारी एवं प्रांत उपाध्यक्ष अनुराग त्यागी, प्रांत सह महिला प्रमुख अर्चना त्यागी, जितेंद्र त्यागी, जिला मंत्री उमेश शर्मा, जिला सहमंत्री पुष्पेंद्र चौहान व भूपेश भाटी, जिला महिला प्रमुख बबीता चौधरी समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
35 shares
😐
A
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 12:28 PM
वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मजबूत हुआ

वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मजबूत हुआ

सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 95.81 पर बंद हुआ है. वहीं, रक्षा मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए ऑक्सिलरी पावर यूनिट खरीदने का ₹586 करोड़ का अनुबंध किया है. इन खबरों के अलावा, पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीनों बहनों को गिरफ्तार कर लिया है. रुपये ने पकड़ी मजबूती... डॉलर के मुकाबले 15 पैसे चढ़ा, आगे क्या रहेगा रुख? भारतीय रुपये ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले गिरावट का सिलसिला थामते हुए मजबूती दर्ज की. पिछले कारोबारी सत्र में 95.96 के स्तर पर बंद हुआ रुपया सोमवार को 95.81 पर पहुंच गया. यानी रुपये में 15 पैसे की बढ़त रही. रुपये की इस मजबूती में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की उम्मीद का भी योगदान रहा है. पूर्व PM इमरान खान की सोती बहन को उठाकर ले गई PAK पुलिस, दरवाजा तोड़ बेडरूम तक पहुंची पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीनों बहनों को गिरफ्तार कर लिया है. लाहौर पुलिस ने पहले इमरान खान की बहन अलीमा को गिरफ्तार किया था अब पुलिस ने डॉ उजमा खान और नौरीन नियाजी को गिरफ्तार किया है. पाकिस्तान पुलिस ने ये कदम 27 सितंबर को इमरान की पार्टी के देशव्यापी प्रदर्शन से पहले उठाया है. T-72 और T-90 टैंक इंजन बंद होने पर भी दागेंगे गोला, सरकार ने की बड़ी डील रक्षा मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए ऑक्सिलरी पावर यूनिट खरीदने का 586 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में यह डील पूरा हुआ. यह खरीद आर्मर्ड प्लेटफॉर्म के महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों के स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा कदम है. सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर लिस्ट विवाद में रिवीजन पिटीशन मंजूर, 29 सितंबर को अगली सुनवाई सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने से जुड़े मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने रिवीजन पिटीशन मंजूर कर ली है. कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मामले में FIR की मांग खारिज की गई थी. राऊज एवेन्यू कोर्ट में अब इस मामले पर 29 सितंबर को फिर सुनवाई होगी. चढ़ावा चोरी केस: 'दो दिन में दाखिल होगी चार्जशीट', सुप्रीम कोर्ट में बोली यूपी सरकार अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की स्वतंत्र जांच की मांग वाली 4 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट को बताया कि इस मामले में दो दिनों में चार्जशीट दाखिल होगी, क्योंकि मामले में पहली गिरफ्तारी को 90 दिन 25 सितंबर को पूरे हो रहे हैं. मामले की स्टेटस रिपोर्ट रजिस्ट्री में भेज दी गई है. बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सेंट्रल रेलवे का शिकंजा, 5 महीने में वसूले ₹140.8 करोड़ सेंट्रल रेलवे ने अप्रैल से अगस्त के बीच बिना टिकट यात्रा करने वाले 18 लाख यात्रियों से ₹140.8 करोड़ वसूल किए हैं. यह रकम पिछले साल के मुकाबले जुर्माने के तौर पर वसूली गई धनराशि से 40% फीसदी ज्यादा है. इस दौरान औसतन हर दिन करीब 11 हजार यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और लगभग ₹92 लाख प्रतिदिन की राशि वसूली गई. रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी का दबदबा, यूनाइटेड रशिया ने जीतीं 450 में 355 सीटें रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समर्थित यूनाइटेड रशिया पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है. केंद्रीय चुनाव आयोग की प्रमुख एला पैमफिलोवा ने कहा कि शुरुआती नतीजों के अनुसार यूनाइटेड रशिया को कुल 450 में से करीब 355 सीटें मिल सकती हैं. यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है. दुबई के शासक के छोटे भाई शेख अहमद का निधन, अमीरात में 10 दिन का शोक दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के छोटे भाई शेख अहमद बिन राशिद अल मकतूम का सोमवार सुबह 76 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन के बाद दुबई में 10 दिन के आधिकारिक शोक की घोषणा की गई है. इस दौरान पूरे अमीरात में झंडे आधे झुके रहेंगे. शेख अहमद दुबई इंटरनेशनल मरीन क्लब की स्थापना से जुड़े थे. बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह देंगे इस्तीफा, बीजेपी से हैं MLC भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी अवधेश नारायण सिंह ने बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दे दिया है. एनडीए गठबंधन में फॉर्मूले के तहत अब विधान परिषद के सभापति का पद JDU के कोटे में जाना है. बताया जा रहा है कि अब जेडीयू एमएलसी रामवचन राय को जिम्मेदारी मिल सकती है. जयशंकर 26 सितंबर को UNGA को करेंगे संबोधित, अमेरिकी टैरिफ पर चर्चा संभव विदेश मंत्री एस. जयशंकर 26 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करेंगे. इस यात्रा के दौरान वो कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे. 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान कर रहे हैं, जिन्हें जून में इस पद के लिए चुना गया था.
74 shares
😐
A
ABP News
Sep 21, 2026, 12:23 PM
बिहार के सांसद ने कथित छेड़छाड़ मामले में सरकार की आलोचना की

बिहार के सांसद ने कथित छेड़छाड़ मामले में सरकार की आलोचना की

बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से कथित छेड़छाड़ और वायरल वीडियो का मामला सियासी तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले को लेकर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बिहार की सम्राट चौधरी सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो शेयर करते हुए सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. पप्पू यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जमुई की घटना का जिक्र करते हुए बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने लिखा कि वीडियो देखकर सरकार को ‘चुल्लू भर पानी में डूब मरना’ चाहिए. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि नाबालिग लड़की के साथ कथित अपराध की कोशिश करने वालों के साथ उसका क्या रिश्ता है और ऐसे तत्वों को कौन संरक्षण देता है. सांसद ने अपने पोस्ट में पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस आम लोगों के खिलाफ सख्ती दिखाती है, लेकिन ऐसे मामलों में अपराधियों को संरक्षण मिलता है. जमुई के टाउन थाना क्षेत्र में 19 सितंबर की शाम एक नाबालिग छात्रा और उसके दोस्त के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो सामने आया था. वीडियो में कुछ लोग दोनों को रोककर उनके साथ अभद्रता करते नजर आए. मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है. जमुई से वीडियो आया है वह देख चुल्लू भर पानी में डूब मरो BJP सरकार कल से मां के नाम पर नौटंकी करने वालों उस बेटी से रेप करने की कोशिश करने वालों से इस सरकार का क्या रिश्ता है? कौन ऐसे तत्वों को संरक्षण देता है, शरीफों का एनकाउंटर करने वाली सरकार और पुलिस इन सबकी संरक्षक है! पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है. मामले में POCSO एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. पुलिस ने लोगों से वायरल वीडियो को शेयर या दोबारा प्रसारित नहीं करने की अपील की है और वीडियो को टेकडाउन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है. नूरनैन अली पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों से सक्रिय हैं. वर्तमान में एबीपी न्यूज़ में कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले उन्होंने ईटीवी, टोटल न्यूज़ और रफ्तार न्यूज जैसे चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया. राज्य की खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है. विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और दिल्ली की राजनीति, विकास और सामाजिक मुद्दों को उन्होंने लगातार कवर किया है. ब्रेकिंग न्यूज और क्राइम रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि है.
16 shares
😢
A
ABP News
Sep 21, 2026, 12:20 PM
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा को गठबंधन की पेशकश करते हैं असदुद्दीन औवैसी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा को गठबंधन की पेशकश करते हैं असदुद्दीन औवैसी

21 सितंबर 2026... AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) को गठबंधन का खुला ऑफर दिया. ओवैसी ने कहा कि जो भी दल BJP को सत्ता से बाहर रखना चाहता है, वह उनसे बात कर सकता है. ओवैसी ने चेतावनी भी दी कि अगर 'सम्मानजनक' सीट शेयरिंग नहीं हुई, तो AIMIM अकेले दम पर 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फौरन पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी '4-5 सीटें जीत सकते हैं, लेकिन BJP सरकार बनवाने में मदद करेंगे. उन 5 विधायकों का क्या करेंगे?' AIMIM के साथ गठबंधन करने पर कांग्रेस और SP दोनों को ही 5 बड़े सियासी नुकसान हो सकते हैं. सबसे बड़ा खतरा है कि AIMIM का गठबंधन विपक्षी वोटों को बांट सकता है और बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है... उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 125 से ज्यादा सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक है. इनमें करीब 70 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 30% से ऊपर है. मुस्लिम आबादी राज्य में करीब 20% है. 2022 के UP विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 97 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. पार्टी का कुल वोट शेयर सिर्फ 0.49% रहा, लेकिन इस छोटे से वोट शेयर ने SP के गणित को बिगाड़ दिया. कम से कम 7 सीटों पर AIMIM को मिले वोट, SP के हार के अंतर से ज्यादा थे. यानी AIMIM अकेले चुनाव लड़े तो SP का मुस्लिम वोट बंटेगा और BJP को सीटें मिलेंगी. अगर गठबंधन कर लिया तो भी नुकसान है- क्यों, वो अगले पॉइंट में. कांग्रेस के लिए ओवैसी सिर्फ एक छोटी पार्टी नहीं हैं. ओवैसी की पूरी राजनीति मुस्लिम हितों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिससे वे कांग्रेस और SP दोनों के लिए सीधे मुकाबले का चेहरा बन जाते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे इमरान मसूद से बात करते हुए 'हैदराबाद प्रॉब्लम' की चेतावनी देते दिख रहे थे. यानी कांग्रेस को डर है कि ओवैसी का असर UP में भी न आ जाए. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह UP में अपना मुस्लिम वोट बैंक खो चुकी है. 2022 में कांग्रेस का वोट शेयर सिर्फ 2.33% था, जबकि AIMIM का 0.49%. यानी कांग्रेस पहले से ही कमजोर है. अगर ओवैसी से गठबंधन किया, तो कांग्रेस अपनी बची-खुची मुस्लिम पहचान भी खो देगी. अगर नहीं किया, तो ओवैसी उसके वोट काटेंगे. SP की राजनीति मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर टिकी है. 2022 में SP और उसके सहयोगियों के 34 मुस्लिम विधायक जीते थे, जो 2017 से 10 ज्यादा थे. इसका मतलब है कि SP के लिए मुस्लिम वोट सिर्फ वोट नहीं, सीट जिताने वाला फैक्टर है. अगर अखिलेश ओवैसी से गठबंधन करते हैं, तो AIMIM को कुछ सीटें देनी पड़ेंगी. ओवैसी की पार्टी का संगठन UP में कमजोर भी है. वे सिर्फ मुस्लिम वोटों के दम पर 4-5 सीटें जीत सकते हैं, लेकिन बदले में SP को उन सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारने पड़ेंगे, यानी SP का अपना विस्तार रुक जाएगा. अगर गठबंधन नहीं होता और ओवैसी अकेले लड़ते हैं, तो SP का मुस्लिम वोट बंटेगा. 2022 में जिन 7 सीटों पर AIMIM ने SP को हरवाया, वहां फिर वही कहानी दोहरा सकती है. यह सबसे बड़ी रणनीतिक चिंता है. अगर कांग्रेस या SP ओवैसी के साथ गठबंधन करते हैं, तो BJP इसे 'मुस्लिम तुष्टिकरण' बताकर हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कर सकती है. बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस के शकील अहमद खान ने खुद माना कि ओवैसी की 'सांप्रदायिक' भाषणबाजी ने हिंदू वोटों को एकजुट किया और महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया. शकील ने कहा कि ओवैसी की बयानबाजी ने 'हिंदू सांप्रदायिकतावादियों को हिंदू भावनाओं पर काम करने का मौका दिया.' बिहार के कदवा सीट से कांग्रेस के शकील अहमद खान 18,368 वोटों से हार गए. उन्होंने खुद कहा कि पहले उन्हें 25,000 हिंदू वोट मिलते थे, लेकिन इस बार हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण से उनका समर्थन घट गया. साथ ही 15,000 मुस्लिम वोट AIMIM और निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवारों को चले गए. इसके अलावा कांग्रेस और SP नेता अक्सर ओवैसी को BJP की 'बी टीम' कहते हैं. अगर वे उनके साथ गठबंधन करते हैं, तो उनपर भरोसा खत्म हो जाएगा. बिहार में ओवैसी ने खुद कहा था कि उन्होंने महागठबंधन से 6 सीटें मांगी थीं, लेकिन नहीं मिलीं. यानी ओवैसी गठबंधन नहीं होने पर भी चुनाव लड़ेंगे और विपक्षी वोट काटेंगे. यह एक जैसी स्थिति है, यानी ऐसी विरोधाभासी स्थिति है जिससे बाहर निकलना नामुमकिन होता है, क्योंकि इसके नियम या शर्तें आपस में एक-दूसरे को काटती हैं. ओवैसी से गठबंधन किया तो BJP को ध्रुवीकरण का मौका मिलेगा. नहीं किया तो मुस्लिम वोट बंटेगा और BJP को सीटें मिलेंगी. अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी AIMIM को गठबंधन में शामिल नहीं करेगी, ताकि उनके PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को नुकसान न पहुंचे. कांग्रेस भी ओवैसी से दूरी बनाए हुए है. अगर ओवैसी 2027 में 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारते हैं, तो क्या कांग्रेस और SP उन सीटों पर अपना वोट बचा पाएंगे? 2022 के आंकड़े बताते हैं कि जवाब 'नहीं' है. AIMIM का 0.49% वोट शेयर भले छोटा दिखे, लेकिन जिन 7 सीटों पर उसने SP को हरवाया, वहां यही 0.49% निर्णायक साबित हुआ. ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.
93 shares
😢
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:17 PM
जेल में बंद राजनेता ने पार्टी अधिकारियों से बैठकों की मांग की

जेल में बंद राजनेता ने पार्टी अधिकारियों से बैठकों की मांग की

दरअसल, शहर के खोखर टोला में एक महिला से विवाद के बाद डक्कू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट पेश किया जहां से जेल भेज दिया गया था। जेल में रहने के दौरान डक्कू ने सपा जिलाध्यक्ष और तीन पार्षदों को पत्र भेजा था।विज्ञापनउन्होंने कहा था कि जिन लोगों के पास उनसे मिलने के लिए दो मिनट का समय नहीं था, वे अब जेल में उनसे मिलने न आएं। डक्कू के इस पत्र पर जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम ने पलटवार करते हुए कहा था कि वह पार्टी के लिए जेल नहीं गए थे, बल्कि निजी जमीन के मामले में जेल गए थे।
84 shares
😢
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 12:10 PM
द्रमुक नेता ने चेन्नई में नए सचिवालय परिसर का विरोध किया

द्रमुक नेता ने चेन्नई में नए सचिवालय परिसर का विरोध किया

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने चेन्नई के मरीना बीच के पास फोरशोर एस्टेट में नए सचिवालय और विधानसभा परिसर के निर्माण के तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार के प्रस्ताव का सोमवार को कड़ा विरोध किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मछुआरों की आजीविका और उनकी बस्तियों को उजाड़कर भीड़भाड़ वाले इलाके में नए सचिवालय की जरूरत नहीं है। DMK प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा परिसर मुख्यमंत्री के काम करने के लिए होता है, समुद्र के नजारे देखने के लिए नहीं। यहां जारी एक बयान में उन्होंने इस परियोजना का विरोध कर रहे मछुआरों के आंदोलन को अपनी पार्टी का पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘हम TVK सरकार के अहंकार को ‘चूर-चूर’ कर देंगे, जिसने अपनी समर्थक पार्टियों के विरोध के बावजूद नए सचिवालय के निर्माण के सरकारी आदेश को वापस नहीं लिया है।’’ सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने भी समुद्र तट के पास इस योजना का कड़ा विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। पार्टी ने कहा है कि इससे मछुआरा समुदाय पर गंभीर असर पड़ेगा और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए भी यह चिंता का विषय है। बता दें कि विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार, चेन्नई के प्रसिद्ध मरीना बीच के किनारे नया विधानसभा भवन और सचिवालय समेत एक प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रही है. जिसकी अनुमानित कीमत 1200 करोड़ से भी अधिक आंकी जा रही है. कुछ समय पहले विधानसभा में बोलते हुए CM विजय ने कहा था कि "वर्तमान सचिवालय 'फोर्ट सेंट जॉर्ज' में संचालित है, जिसका निर्माण 1644 में हुआ था. आधुनिक जरूरतों को देखते हुए नए सचिवालय की आवश्यकता है." यह किला लगभग 400 साल से तमिलनाडु सरकार के प्रशासनिक केंद्र और राज्य की शासन विरासत के प्रतीक के तौर पर खड़ा है. मुख्यमंत्री ने कहा था कि नए कॉम्प्लेक्स में, सभी सरकारी विभागों को एक ही प्रशासनिक छत के नीचे लाने का उद्देश्य है. धर्मेंद्र बैरागी हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में हिन्दी डिजिटल पत्रकारिता पर शोध कर रहे हैं. इनके रुचि के विषय साहित्य, राजनीति एवं खेल आदि है. वर्तमान में एबीपी न्यूज में इंटर्न के रूप में कार्यरत हैं. संपर्क करें- dharmendradasbairagi13@gmail.com
23 shares
😐
A
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 12:07 PM
भाजपा एमएलसी अवधेश नारायण सिंह ने बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

भाजपा एमएलसी अवधेश नारायण सिंह ने बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एमएलसी अवधेश नारायण सिंह मंगलवार को बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दे सकते हैं. एनडीए गठबंधन में फॉर्मूले के तहत अब विधान परिषद के सभापति का पद JDU के कोटे में जाना है. बताया जा रहा है कि जेडीयू एमएलसी रामवचन राय को यह जिम्मेदारी मिल सकती है. जानकारी के मुताबिक अवधेश नारायण सिंह सोमवार को इस्तीफा देने वाले थे लेकिन कुछ कारणों से इस्तीफा नहीं हो पाया.
60 shares
😢
A
ABP News
Sep 21, 2026, 12:07 PM
रवि किशन ने राहुल और अखिलेश पर व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति करने का आरोप लगाया

रवि किशन ने राहुल और अखिलेश पर व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति करने का आरोप लगाया

गोरखपुर सांसद रवि किशन ने कांग्रेस-समाजवादी पार्टी के साथ राहुल गांधी और अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया है. उन्होंने ओबीसी एक्ट लाने के सवाल पर कहा कि राहुल जी उल्टा पेड़ पर लटक जाएं या अखिलेश जी लटक जाए. कोई भी दांव खेल लें, ये दांव है. यह लोग 'पी' से पंडित खेल रहे थे, लेकिन पूरे पंडितों-ब्राह्मणों को पता है कि 'पी' से परिवारवाद होता है. 'पी' से परिवार के लिए वोट जुटाना होता है. उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव में सपा-कांग्रेस बुरी तरह हार रही हैं. गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने 21 सितंबर (सोमवार) को ये लोग काहें ऐसा सोचते हैं कि ब्राह्मण आसानी से समझ जाएगा. ब्राह्मण को कोई बहला देगा और फुसला देगा. ये त्याग वाला समाज है. पहले ब्राह्मणों को तो जानो. इनका इतिहास तो जानो. पंडित होते क्या है और पंडित थे क्या? पंडितों का काम क्या है? ब्राह्मणों को आप वोट बैंक समझेंगे? ब्राह्मण वोट बैंक नहीं है. ब्राह्मण भारत को बनाने, आध्यात्म-ज्ञान देने आया है. रवि किशन ने कहा कि टिकट, सीट और वोट के लालच में आप कहां पड़े हैं? ब्राह्मण राष्ट्र के लिए सोचता है. ब्राह्मण के चक्कर में न पड़ें. 2027 में सपा-कांग्रेस बुरी तरह हार रहे हैं. पंडित आप लोगों के साथ नहीं हैं. विरोधी अपनी नोचा-नोची करें. हमें उनसे मतलब नहीं है. हमें भाजपा से मतलब है. उनकी क्या खिचड़ी पकती है, इससे हमें मतलब नहीं है. भाजपा को कैसे जितना है. भाजपा 2017 का रिकार्ड कैसे तोड़ेगी? उनका पूरा ध्यान, उद्देश्य लक्ष्य यही है और कुछ नहीं है. भाजपा सांसद रवि किशन ने विपक्ष द्वारा 2027 के पहले तमाम तरह की बयान बाजी को लेकर कहा है कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि इन सबको पता चल गया है कि यह लोग बुरी तरह हार रहे हैं. इन सब की जमानत जब्त होने वाली है. यह बयानबाजी तब आती है. यह एआई के वीडियो तब बनते हैं. यह फ्रस्ट्रेशन तब आता है. इन लोगों की झुंझलाहट और दिमाग का दिवालियापन है. रवि किशन ने कहा कि राहुल गांधी जी अभी प्रधानमंत्री जी की माता जी को लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर में जो कहे थे, वीडियो देखा. इससे पता चलता है कि राजनीतिक स्तर यह विपक्षियों ने इतना ओछा कर दिया इतना गिरा दिया है. सदन चलने नहीं देंगे. विकास की बातों पर कुछ नहीं मिल रहा है, तो प्रधानमंत्री जी पर...भ्रष्टाचार जो उनके जमाने में होता था, वह बंद हो गया है. तो अब यह सबसे ओछापन यानी सी ग्रेड की राजनीति पर आ गए हैं. रवि किशन ने कहा कि इस तरीके से ब्राह्मणों को लुभाना. पिछड़ा वर्ग का एक मोर्चा बनाएंगे. इससे पता चलता है कि यह लोग लाचार हो चुके हैं. इनको पता है कि 2027 में हारेंगे. 2029 में और बुरी तरह हारेंगे. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी 2047 तक भारत में रहेगी. विकसित भारत बनेगा. उसके बाद यह लोग सोचें. फिलहाल उत्तर प्रदेश में तो दूर-दूर तक विपक्ष-विरोधी सपा, कांग्रेस या बसपा आते हुए नहीं दिखाई देगी. रवि किशन ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हिंदुओं को खतरनाक कहे जाने पर कहा कि हामिद अंसारी भी जान रहे हैं कि उनके मन की जो पार्टी है कांग्रेस वह आने वाली नहीं है. उनको शायद किसी आलाकमान ने कहा होगा कि बयानबाजी करें. वह कहना चाहते हैं कि अंसारी साहब ऐसा न करें. वह इतने वरिष्ठ पद पर रहे हैं. आपके समुदाय और पूरे भारत में आप जिस पद पर थे. पूरा भारत आपको सम्मान से देखता था. आपके शब्दों से सब लोग बड़े आघात हुए हैं. ऐसा भी है कि जब आप उम्र के किसी ऐसे दौर में पहुंचते हैं कि जब आपको सब अंधेरा-अंधेरा दिखाई देने लगता है. ऐसे सारे शब्द भी निकालते हैं, शायद यह भी हो सकता है.
40 shares
😢
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:07 PM
भारत में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्वः एक चिंताजनक गिरावट

भारत में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्वः एक चिंताजनक गिरावट

लखनऊ। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मोइन खान ने मुस्लिम समुदाय के घटते राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों की प्रभावी भागीदारी ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद मुस्लिम सांसदों का अनुपात करीब 4.4 प्रतिशत रहा, जबकि 2011 की जनगणना में मुस्लिम आबादी 14.2 प्रतिशत थी। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम विधायकों की संख्या 2013 के 63 से घटकर 31 होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने राजनीतिक दलों से प्रतिनिधित्व में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।
16 shares
😐
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:04 PM
मंत्रिस्तरीय सेवा संघों ने सरकार को प्रस्तुत की मांगें, योजना प्रदर्शन

मंत्रिस्तरीय सेवा संघों ने सरकार को प्रस्तुत की मांगें, योजना प्रदर्शन

फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रियल सर्विसेज एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सोमवार को 12 सूत्री मांगों के लिए कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा को उनके आवास पर ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष सईद अहमद की अध्यक्षता और मंत्री रोहित शर्मा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कनिष्ठ सहायक पद पर ग्रेड वेतन 2800 रुपये करने, प्रधान सहायक एवं प्रशासनिक अधिकारी पद का आवेदन, उपनिदेशक (प्रशासनिक) के लिए 6600 रुपये ग्रेड वेतन और लेवल-11 पद का सृजन करने समेत अन्य मांगें शामिल हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों को लेकर शासन स्तर पर कई बार वार्ता हो चुकी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति भी बनी है लेकिन अब तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं। संगठन ने आंदोलन के अगले चरण में 25 सितंबर को जिला मुख्यालय रोशनाबाद में प्रदर्शन करने और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने की घोषणा की। इस दौरान अनिल चौधरी, कुलदीप बिष्ट, रवि कपूर, ब्रिजेश कुमार, अनिल रवि, ताजवर सिंह गुसाई और सचिन कुमार आदि मौजूद रहे।
98 shares
😐
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 12:04 PM
जारी तनाव के बीच ईरानी नेता के साथ बैठक के संकेत दे रहे हैं ट्रम्प

जारी तनाव के बीच ईरानी नेता के साथ बैठक के संकेत दे रहे हैं ट्रम्प

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह इस हफ्ते ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात करने के लिए तैयार हो सकते हैं. दरअसल, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र की महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राज्य न्यूयॉर्क में रहेंगे. इस दौरान दोनों देशों के राष्ट्रपतियों की मुलाकात होने को लेकर संभावनाएं जताई जा रही हैं. इस संबंध में जब फॉक्स न्यूज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सवाल किया कि क्या वो UNGA के दौरान ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए तैयार हैं? तब उन्होंने इशारों में जवाब दिया कि वह शायद इस हफ्ते न्यूयॉर्क में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात के लिए तैयार हो सकते हैं. उन्होंने यह संकेत ऐसे समय पर दिया है, जब वाशिंगटन ईरान के खिलाफ अपनी अगली सैन्य कार्रवाई की प्लानिंग कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ तेहरान अमेरिका करीब 7 महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए अपनी कई शर्तें सामने रख रहा है. इसके अलावा, ईरानी सेना ने यह धमकी भी दी है कि अमेरिका की तरफ से किसी भी नए हमले का जवाब इलाके में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और हितों पर कार्रवाई के तौर पर दिया जाएगा. न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की उच्च स्तरीय बैठक की मुख्य बहस इस हफ्ते मंगलवार (22 सितंबर) से अगले हफ्ते सोमवार (28 सितंबर) तक होने वाली है और पेजेश्कियान के इसमें शामिल होने की उम्मीद है. ट्रंप प्रशासन ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को इस बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी है, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं. अगर दोनों देशों के नेताओं की भेंट इस बैठक के दौरान हो जाती है, तो आगे चलकर दोनों की मुलाकात के लिए अलग से किसी समिट के आयोजन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दोनों देशों के राष्ट्रपति यूएन की बैठक के लिए एक ही शहर में मौजूद होंगे, जिससे आमने-सामने बातचीत करने का मौका मिल सकता है. उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच बातचीत मुख्य रूप से मध्यस्थों के जरिए हो रहा है. पिछले करीब पांच सालों से भारतीय मीडिया का हिस्सा हैं. अक्टूबर, 2024 से एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर के तौर पर भूमिका निभा रहे हैं. प्रिंट मीडिया के साथ अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत की है और आज डिजिटल मीडिया में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर लेखन कार्य कर रहे हैं. साल 2020 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की. क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, चुनाव और सामाजिक विषयों पर खबरें लिखते रहे हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश है. स्केचिंग, पेटिंग, फिल्में देखना, शायरी-कविताएं लिखना और घूमना बहुत ज्यादा पसंद है.
85 shares
😐
A
ABP News
Sep 21, 2026, 12:03 PM
ब्रिटेन के ऋषि सुनक ने दोहरी पहचान पर जोर देते हुए त्वचा के रंग को नागरिकता से जोड़ने के खिलाफ चेतावनी दी

ब्रिटेन के ऋषि सुनक ने दोहरी पहचान पर जोर देते हुए त्वचा के रंग को नागरिकता से जोड़ने के खिलाफ चेतावनी दी

यूके के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने एक बार फिर रेसिज्म पर बहस छेड़ दी है. उन्होंने देश की नागरिकता हासिल करने के लिए स्कीन के कलर को आधार बनाने और इसका टेस्ट करने को लेकर लेकर चेतावनी दी है. साथ ही अपनी दोहरी पहचान- ब्रिटिश और हिंदू पर जोर दिया है. सुनक ने संडे टाइम्स में लिखे अपने एक कॉलम में इसपर जोर दिया है. साथ लॉर्ड्स में दी अपनी स्पीच का भी जिक्र किया. सुनक ने अपने कॉलम में लिखा है कि मुझे चिंता है कि ब्रिटेन की महान लोकतांत्रिक उपलब्धि दबाव में आ रही है. कुछ चुनौतियों का हमें मिलकर सामना करना होगा. उन्होंने अपने कॉलम में जिन चुनौतियों का जिक्र किया है, उनमें इस्लाम से जुड़ी चुनौतियां, इमिग्रेशन को कंट्रोल न कर पाने से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं. सुनक ने कहा है कि एक जो सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है, वो स्कीन के कलर को नेशनलिज्म से जोड़ना. या हम ब्रिटेन के लोगों के अलग-अलग वर्ग बना दें. हाल ही में आए लोगों को कभी भी उतने ही ब्रिटिश न मानें जितने कि वे लोग थे, जो 1707 में यहां थे. चाहे वे समाज में कितनी भी अच्छी तरह से घुल मिल गए हों. कितने भी देशभक्त क्यों न हों. इसके अलावा उन्होंने टेबिट टेस्ट का भी जिक्र किया. इसे 1990 में टोरी सांसद नॉर्मन टेबिट ने शुरू किया था. उनका मानना था कि अगर प्रवासी इंग्लैड की क्रिकेट टीम की बजाय अपने मूल देश का समर्थन करते हैं, तो यह ब्रिटिश समाज में घुलने मिलने की कमी का प्रतीक है. सुनक ने आगे कहा कि यह एक ऐसा टेस्ट था, जिसे कोई भी पास नहीं कर सकता था. अगर आप इंग्लैंड का समर्थन करते थे, क्योंकि आप इसे अपना घर मानते थे, तो आप टीम का हिस्सा थे. चाहे आपकी त्वचा का रंग कुछ भी हो. 10 साल की उम्र में मैंने बिना जाने यह टेस्ट पास कर लिया था. सुनक ने कहा, 'साउथम्प्टन में जन्मे होने के कारण मेरे लिए इंग्लैंड, हैम्पशायर और सेंट्स (फुटबॉल टीम) का समर्थन न करना अजीब बात होती, ब्रिटेन में हमने दुनिया का सबसे बहु धार्मिक और बहु जातीय लोकतंत्र बनाया है. मैं उसी का फायदा उठाने वाला व्यक्ति रहा हूं. पीएम के तौर पर मुझसे जो शिकायतें थीं, और उनकी कोई कमी नहीं थी, उनमें न तो मेरी नस्ल और न ही मेरा धर्म शामिल था.' सुनक ने कहा कि चर्च ऑफ इंग्लैंड के बिशप की नियुक्ति में मेरी भूमिका से कोई नाराज नहीं हुआ. मैं बिना किसी विवाद के राजा के राज्यभिषेक में पाठ पढ़ सकता था. या अपनी बेटियों के साथ डाउनिंग स्ट्रीट में दिवाली के दीये जला सकता था. नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.
34 shares
😢
A
ABP News
Sep 21, 2026, 12:02 PM
राजद नेता रोहिणी आचार्य ने कथित छेड़छाड़ की घटना को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा

राजद नेता रोहिणी आचार्य ने कथित छेड़छाड़ की घटना को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा

बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से कथित छेड़छाड़ और वायरल वीडियो पर अब सियासत शुरू हो गई है. इसी बीच आरजेडी नेता और लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है. रोहिणी ने सोशल मीडिया पर जमुई की घटना से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए बिहार की मौजूदा सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक है. रोहिणी ने अपने पोस्ट में सरकार को निशाने पर लेते हुए कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग पर सवाल खड़े किए. रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में जमुई की घटना को बेहद शर्मनाक बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना बिहार में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति को उजागर करती है. उन्होंने सरकार के ‘सुशासन’ और ‘बेटी बचाओ’ जैसे नारों का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बावजूद लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं. आरजेडी नेता ने वीडियो में नजर आ रहे आरोपियों को लेकर ‘भगवा गमछे’ का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों ने सड़क पर नाबालिग के साथ छेड़छाड़ और खींचातानी की. रोहिणी ने लिखा- हैवानियत और दरिंदगी की कोशिश यह साबित करती है कि बिहार में अपराधियों के दिल से कानून और पुलिस का खौफ पूरी तरह से खत्म हो चुका है. बिहार में बेशर्म निट्ठलों की सरकार , बहन - बेटियों के साथ हो रहा सरेआम दुराचार .. जमुई (बिहार) की घटना बेहद शर्मनाक और सम्राट सरकार के शासन में बदहाल हो चुकी कानून व्यवस्था , लचर प्रशासनिक प्रभाव व् बेहद कमजोर पुलिसिंग की वस्तुस्थिति को उजागर करने वाली है। सरेराह, बीच सड़क पर… pic.twitter.com/t2Yv60FbZY पुलिस POCSO के साथ कई धाराओं में मामला दर्ज किया है. महिला SDPO दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में SIT गठित की गई है. अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और अन्य आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है. पुलिस ने वायरल वीडियो को टेकडाउन कराने की कार्रवाई शुरू की है और लोगों से वीडियो को शेयर या दोबारा वायरल नहीं करने की अपील की है. नूरनैन अली पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों से सक्रिय हैं. वर्तमान में एबीपी न्यूज़ में कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले उन्होंने ईटीवी, टोटल न्यूज़ और रफ्तार न्यूज जैसे चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया. राज्य की खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है. विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और दिल्ली की राजनीति, विकास और सामाजिक मुद्दों को उन्होंने लगातार कवर किया है. ब्रेकिंग न्यूज और क्राइम रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि है.
47 shares
😢
Aaj Tak logo
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 12:00 PM
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन का ऐलान किया

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन का ऐलान किया

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान दोनों ही पार्टियां कर चुकी हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव कई मौकों पर कह चुके हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनावी किस्मत आजमाएंगे. कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी यही मानता है कि एक साथ जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है. बसपा प्रमुख मायावती पहले ही कांग्रेस या समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के कयास खारिज कर चुकी हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी लगातार अखिलेश यादव से गठबंधन की गुहार लगा रहे हैं. आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी गठबंधन के लिए विकल्प खुला रखे हैं, लेकिन गठबंधन में जाएंगे या नहीं, इस पर अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं हैं. यूपी में चर्चा कांग्रेस और सपा की दोस्ती को लेकर है. क्या कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन में सब कुछ सामान्य है! क्या दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग आसानी से हो जाएगी या फिर कुछ ऐसा पेंच इस गठबंधन में फंस रहा है, जिससे यह गठबंधन अभी सियासी मझधार में है. सपा और कांग्रेस दोनों सभी सीटों पर अपनी-अपनी तैयारी में जुटी हुई हैं. उत्तर प्रदेश में भले ही सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हों, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं है. कांग्रेस पार्टी का एक वर्ग मायावती या चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए इच्छुक है. माना जा रहा है कि राहुल गांधी अखिलेश यादव के साथ ही गठबंधन में जाने का मन तय कर चुके हैं, इसलिए दूसरे दलों के लिए फिलहाल कोई दरवाजा नहीं खुला है. कांग्रेस का दावा है कि वह अखिलेश यादव के साथ ही गठबंधन में जाएगी, लेकिन अपनी शर्तों पर ही मिलकर चुनाव लड़ेगी. इस बार अखिलेश यादव यह नहीं तय करेंगे कि कांग्रेस किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बल्कि कांग्रेस खुद अपनी सीटें तय करेगी. कांग्रेस अपनी सीटें खुद तय करेगी और उम्मीदवार भी. वहीं सपा अपनी तैयारियों को लेकर बिल्कुल साफ कह चुकी है कि अगर गठबंधन में कोई पेंच फंसा तो वह सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार है. कांग्रेस के भीतर जल्दबाजी का माहौल है. कांग्रेस यूपी में सपा के साथ गठबंधन करके ही चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन जल्द से जल्द सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर लेना चाहती है. कांग्रेस के नेता यह जानना चाहते हैं कि पार्टी को किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ना है, उन सीटों के समीकरण क्या हैं और किसे चुनाव लड़ाकर जीता जा सकता है. वहीं, समाजवादी पार्टी सीट बंटवारे में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही है. समाजवादी पार्टी यूपी में अपनी तैयारियों को मुकम्मल कर लेने के बाद सीटों के बंटवारे पर बात करना चाहती है, जबकि कांग्रेस पार्टी को लगता है कि अगर गठबंधन में सीटें फाइनल करने में देरी हुई तो फिर उसकी बार्गेनिंग पावर खत्म हो जाएगी और तब अखिलेश यादव की दया पर ही गठबंधन करना पड़ेगा. कांग्रेस पार्टी के नेता और पार्टी के मुस्लिम चेहरे सांसद इमरान मसूद अक्टूबर तक हर हाल में गठबंधन में सीटों की संख्या और सीटों के नाम तय कर लेना चाहते हैं. इमरान मसूद ने कहा कि अगर गठबंधन में देरी हुई तो कांग्रेस अपनी बढ़त खो देगी. उन्होंने कहा है कि अगर गठबंधन होना है, तो उसे तुरंत अंतिम रूप (फाइनल) दिया जाना चाहिए. सीटों के बंटवारे में हो रही देरी से जमीन पर नुकसान हो रहा है, इससे कोई फायदा नहीं मिलेगा. सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर तैयारी के दावे कर रही हैं, लेकिन सपा और कांग्रेस दोनों को मालूम है कि सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की क्षमता दोनों में से किसी पार्टी की नहीं है. पश्चिमी यूपी में सपा कमजोर है तो बाकी पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का संगठन न के बराबर है. इस तरह सपा और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी सियासी कमजोरियों को भी समझ रही हैं. यूपी में सपा और कांग्रेस दोनों तरफ से दावे और प्रतिदावे हो रहे हैं, लेकिन दोनों को मालूम है कि बगैर एक साथ आए चुनाव में किसी की दाल गलने वाली नहीं है. सभी अपनी-अपनी बार्गेनिंग पावर को मजबूत रखकर गठबंधन की मेज पर बैठना चाहते हैं. इमरान मसूद ने दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी ने डेढ़ सौ से ज्यादा सीटों की सूची समाजवादी पार्टी को सौंप दी है, लेकिन समाजवादी पार्टी की तरफ से गठबंधन की बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है. अखिलेश यादव की तरफ से एक ही बात कही जा रही है कि हमारे लिए सीट शेयरिंग में सीटों की संख्या का मतलब नहीं है, बल्कि जीत की गारंटी मायने रखती है. जो जहां पर जीत सकता है, वहां पर वह चुनाव लड़ेगा. सपा-कांग्रेस में अभी तक अनौपचारिक तौर पर भले ही गठबंधन को लेकर कोई सुगबुगाहट शुरू हुई हो, लेकिन औपचारिक तौर पर कोई बातचीत शुरू नहीं हुई है. समाजवादी पार्टी इसे चुनाव के ऐलान तक ले जाना चाहती है तो कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता गठबंधन के साथ सीट शेयरिंग सब कुछ जल्द तय कर लेना चाहते हैं.
88 shares
😢
Aaj Tak logo
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 11:58 AM
जग्गा सिंह मामले पर पंजाब की राजनीति गरमाईः आप मंत्री ने व्हिसलब्लोअर के दावे पर उठाए सवाल

जग्गा सिंह मामले पर पंजाब की राजनीति गरमाईः आप मंत्री ने व्हिसलब्लोअर के दावे पर उठाए सवाल

पंजाब के संगरूर में जग्गा सिंह के जहरीला पदार्थ निगलने के मामले पर सियासत गरमा गई है. विपक्ष जग्गा को नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाला बता रहा है. अब आम आदमी पार्टी के मंत्री अमन अरोड़ा ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जग्गा के खिलाफ 9 FIR दर्ज हैं, इसलिए उन्हें सिर्फ नशे के खिलाफ लड़ने वाले व्यक्ति के तौर पर पेश करना सही नहीं है. संगरूर पुलिस भी बता चुकी है कि जग्गा सिंह के खिलाफ 9 FIR दर्ज हैं. पुलिस के मुताबिक इनमें NDPS और आबकारी से जुड़े मामले शामिल हैं. चार मामलों में उन्हें दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि कुछ मामले अभी अदालत में चल रहे हैं. आजतक से बातचीत में अमन अरोड़ा ने कहा कि 'जग्गा को व्हिसलब्लोअर यानी गलत काम की जानकारी सामने लाने वाला व्यक्ति बताना ठीक नहीं है'. उनके मुताबिक, इस पूरे मामले को पंचायत और जग्गा सिंह के बीच विवाद के तौर पर देखना चाहिए. अरोड़ा ने कहा कि गांव की पंचायत इस मामले में एकजुट है. उनका सवाल था कि अगर पंचायत नशे के खिलाफ कार्रवाई की बात उठा रही है तो सिर्फ जग्गा को ही इसका चेहरा क्यों बनाया जा रहा है. जग्गा सिंह के समर्थन में बयान देने वाले बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को लेकर भी अमन अरोड़ा ने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि दोनों एक-दूसरे के पुराने करीबी हैं. इसी संदर्भ में उन्होंने पूछा कि बिट्टू को कैसे पता कि जग्गा पहले ड्रग्स लेता था, लेकिन अब नहीं लेता. इस दौरान अरोड़ा ने जग्गा के लिए 'जग्गू ब्लैकिया' नाम का भी इस्तेमाल किया. यह उनके बयान का हिस्सा है. अमन अरोड़ा ने कहा कि अलग-अलग पार्टियां इस मामले को अपने हिसाब से पेश कर रही हैं. उनका आरोप था कि जग्गा को नशे के खिलाफ लड़ने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें AAP सरकार और पुलिस पर ड्रग्स के कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने इसे गलत बताया. वहीं, संगरूर पुलिस के अनुसार, जग्गा ने 12 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर कार्रवाई की मांग की थी. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच चल रही थी. अमन अरोड़ा ने गुलजार सिंह का भी नाम लिया. उनका कहना था कि असली पीड़ित गुलजार थे, जग्गा नहीं. उन्होंने गुलजार के परिवार से अपने पारिवारिक संबंध होने की बात कही. इस पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है. दूसरी तरफ विपक्ष जग्गा सिंह की घटना को पंजाब में नशे की समस्या से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहा है. ऐसे में अमन अरोड़ा का बयान इसी राजनीतिक बहस के बीच आया है.
63 shares
😢
I
India TV
Sep 21, 2026, 11:47 AM
भाजपा उम्मीदवार विक्रम सिंह चौधरी ने नाटकीय टाईब्रेकर में खैरथल नगर परिषद चुनाव जीता

भाजपा उम्मीदवार विक्रम सिंह चौधरी ने नाटकीय टाईब्रेकर में खैरथल नगर परिषद चुनाव जीता

राजस्थान के खैरथल नगर परिषद के सभापति चुनाव में सोमवार को उस समय बेहद रोमांचक स्थिति बन गई, जब भाजपा प्रत्याशी विक्रम सिंह चौधरी उर्फ विक्की चौधरी और कांग्रेस प्रत्याशी ओमप्रकाश रोघा को बराबर 22-22 मत मिले। एक पार्षद मतदान के लिए उपस्थित नहीं हुआ। ऐसे में दोनों प्रत्याशियों के बीच मुकाबला बराबरी पर अटक गया और निर्वाचन अधिकारी ने नियमानुसार पर्ची के माध्यम से परिणाम तय करने की प्रक्रिया अपनाई। सबकी निगाहें उस समय एक मासूम बच्ची पर टिक गईं, जिसे पर्ची निकालने के लिए बुलाया गया। बच्ची द्वारा निकाली गई पर्ची में भाजपा प्रत्याशी विक्रम चौधरी का नाम सामने आया। इसके साथ ही निर्वाचन अधिकारी ने विक्रम चौधरी को खैरथल नगर परिषद का सभापति निर्वाचित घोषित कर दिया। सभापति निर्वाचित होने के बाद विक्रम चौधरी ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। शपथ के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने नगर परिषद से जुड़े जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था, उन्हें पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में जो विकास कार्य पूरे नहीं हो सके, उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा और खैरथल में विकास की नई रफ्तार देखने को मिलेगी। विक्रम चौधरी के सभापति निर्वाचित होने के बाद समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। नगर परिषद से अपने निवास की ओर रवाना हुए विक्रम चौधरी का रास्ते में विभिन्न स्थानों पर समर्थकों और लोगों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस दौरान समर्थकों ने खुशी जताई और उनके साथ जुलूस के रूप में आगे बढ़े। गौरतलब है कि खैरथल नगर परिषद में इस बार कांग्रेस 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी, जबकि भाजपा के 8 और निर्दलीय 17 पार्षद निर्वाचित हुए थे। 45 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा 23 है। सभापति चुनाव से पहले बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष विक्रम चौधरी भाजपा में शामिल हुए और भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। इसके बाद मुकाबला सीधे विक्रम चौधरी और ओमप्रकाश रोघा के बीच रह गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद खैरथल की राजनीति में एक बार फिर सियासी समीकरणों और दलगत एकजुटता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सभापति पद हासिल नहीं कर सकी और अंततः 22-22 की बराबरी के बाद निकली पर्ची ने खैरथल नगर परिषद की अगली राजनीतिक दिशा तय कर दी। वहीं, पाली और अजमेर के मेयर चुनाव में BJP ने बड़ा उलटफेर किया है। यहां ज्यादा सीटें होने के बावजूद कांग्रेस हार गई है। ( ) 'राजस्थान के पार्षद हरियाणा में हो गए गायब', चुनाव के बीच हाई कोर्ट पहुंची कांग्रेस, लगाए बड़े आरोप राजस्थान हाई कोर्ट में आधी रात तक चली सुनवाई, याचिकाकर्ता पार्षदों को मिली बड़ी राहत, जानें पूरा मामला
45 shares
😐
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 11:42 AM
रूस में युद्ध और आर्थिक दबाव के बीच संयुक्त रूस ने चुनाव का नेतृत्व किया

रूस में युद्ध और आर्थिक दबाव के बीच संयुक्त रूस ने चुनाव का नेतृत्व किया

यूनाइटेड रशिया के पास चुनाव में मजबूत स्थिति थी और उसके सामने राष्ट्रपति की नीतियों का विरोध करने वाले विकल्प सीमित थे। इन परिस्थितियों में शुरुआती नतीजों में पार्टी का आगे रहना अप्रत्याशित नहीं माना गया। क्रेमलिन ने चुनाव को यूक्रेन में युद्ध और आर्थिक मुश्किलों के बीच लोगों को अपनी राय रखने के मौके के तौर पर पेश किया था। हालांकि, युद्ध का विरोध करने वाले ज्यादातर उम्मीदवारों को मतपत्र से बाहर रखा गया। उदारवादी याब्लोको पार्टी से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों ने भी अपनी स्वतंत्रता को लेकर डर जताया था। एनईएसटी के मुताबिक, रूस के भीतर युद्ध के प्रभाव अब लोगों को ज्यादा महसूस हो रहे हैं। इसके साथ आर्थिक दबाव भी मौजूद है। थिंक टैंक का कहना है कि लोगों में जमा होती चिंता और निराशा का असर उन सिस्टम विपक्षी दलों को मिले वोटों में दिखाई दे सकता है, जिन्हें क्रेमलिन ने चुनाव लड़ने की अनुमति दी। यहां सिस्टम विपक्ष का मतलब उन राजनीतिक दलों से है जो चुनावी व्यवस्था में मौजूद हैं, लेकिन राष्ट्रपति को ज्यादातर प्रमुख मुद्दों पर सीधी चुनौती नहीं देते। 2021 के स्टेट ड्यूमा चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 450 सदस्यीय निचले सदन में पूर्ण बहुमत बरकरार रखा था। पार्टी के पास उस चुनाव के बाद 326 सीटें थीं। कम्युनिस्ट पार्टी 57 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इस बार भी शुरुआती आंकड़ों में कम्युनिस्ट पार्टी दूसरे स्थान पर है। हालांकि, इस चुनाव के अंतिम नतीजे आने के बाद ही सीटों की अंतिम तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। 90.43 फीसदी मतों की गिनती के आंकड़ों के अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी को 13.84 फीसदी वोट मिले हैं। एलडीपीआर को 8.9 फीसदी, न्यू पीपल को 7.94 फीसदी और ए जस्ट रशिया को 4.95 फीसदी वोट मिले हैं। ये सभी दल यूनाइटेड रशिया से पीछे हैं, लेकिन शुरुआती नतीजों में इनके स्टेट ड्यूमा में सीटें हासिल करने की स्थिति में होने की बात कही गई है। खास बात यह है कि एनईएसटी ने कम्युनिस्ट पार्टी और न्यू पीपल को मिले वोटों को कुछ मामलों में मौन विरोध से जोड़कर देखा है। चुनाव से पहले ज्यादातर युद्ध-विरोधी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। याब्लोको पार्टी के कुछ उम्मीदवारों ने चुनाव में हिस्सा लिया, लेकिन उन्होंने अपनी स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं को रूस-यूक्रेन युद्ध पर की गई टिप्पणियों के कारण चुनाव से पहले लंबी जेल की सजा सुनाई गई थी। याब्लोको के नेता निकोलाई रिबाकोव ने अपना मतपत्र जानबूझकर अमान्य किया और उस पर अपनी पार्टी का नाम तथा शांति के लिए नारा लिखा। यूक्रेन ने उन क्षेत्रों में मतदान कराए जाने को लेकर रूस के चुनाव की निंदा की, जिन्हें मॉस्को ने अपने कब्जे में लिया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने इसे अवैध बताया। दूसरी ओर, मॉस्को ने रविवार को रूस के कई हिस्सों में हुए यूक्रेनी ड्रोन हमलों को चुनाव को बाधित करने की कोशिश बताया। तास के अनुसार, इन हमलों को फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद सबसे बड़े हमलों में से एक बताया गया। मॉस्को क्षेत्र में तीन लोगों और रूस के नियंत्रण वाले खेरसॉन हिस्से में दो लोगों की मौत की जानकारी दी गई। मृतकों में एक चुनाव अधिकारी भी शामिल था। रविवार को हुए ड्रोन हमलों में मॉस्को क्षेत्र और रूस के अन्य इलाकों को निशाना बनाया गया। एक चुनाव अधिकारी समेत कई लोगों की मौत की जानकारी सामने आई। मॉस्को की तेल रिफाइनरी में भी एक जगह को नुकसान पहुंचा, जिसे पहले भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा सोमवार सुबह रूस के ब्रायंस्क क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए। क्षेत्र के कार्यवाहक गवर्नर येगोर कोवालचुक के अनुसार यह घटना सोमवार सुबह हुई। रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से सोमवार को शुरुआती नतीजे और मतदान प्रतिशत की घोषणा की जानी थी। हालांकि, अंतिम नतीजे तुरंत आने की उम्मीद नहीं है। तास के अनुसार अंतिम नतीजे शुक्रवार से पहले आने की संभावना कम है। इसकी वजह सभी मतपत्रों की गिनती और कानून के तहत जरूरी दूसरी प्रक्रियाओं का पूरा होना है। इसलिए अभी सामने आए आंकड़ों को शुरुआती नतीजे माना जा रहा है।
60 shares
😢
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 11:37 AM
J & K पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख ने नौकरी भर्ती के आंकड़ों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की आलोचना की

J & K पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख ने नौकरी भर्ती के आंकड़ों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की आलोचना की

J&K पीपल्स कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट और हंदवाड़ा के MLA सज्जाद लोन ने सोमवार (21 सितंबर) को नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर तीखा हमला किया. यह हमला तब हुआ जब विधानसभा के आंकड़ों से पता चला कि भर्ती के मामले में चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच बहुत बड़ा अंतर है. विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद बोलते हुए, उन्होंने भर्ती के आंकड़ों पर एक अहम सवाल उठाया. लोन ने कहा कि इन आंकड़ों ने NC सरकार के झूठे वादों की कड़वी सच्चाई को सबके सामने ला दिया है. सरकार ने विधानसभा में माना कि पिछले दो सालों में सिर्फ 899 नई नौकरियां दी गई हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पीपल्स कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट सज्जाद गनी लोन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक लाख नौकरियां देने के चुनावी वादे का मजाक उड़ाया. उन्होंने कहा कि मौजूदा रफ्तार से पार्टी को अपना वादा पूरा करने में 222 साल से ज्यादा का समय लगेगा. X पर एक पोस्ट में लोन ने NC के घोषणापत्र को झूठ का पुलिंदा बताया और विधानसभा में कहा कि 'NC का घोषणापत्र झूठ के पुलिंदे के अलावा और कुछ नहीं है.' उन्होंने कहा, 'अपने चुनावी घोषणापत्र में NC ने 1 लाख नई नौकरियां देने का वादा किया था और अब तक उन्होंने 899 नौकरियां दी हैं. इसका मतलब है कि मौजूदा रफ्तार से उन्हें 1 लाख नौकरियां देने में 222.46 साल लगेंगे, जो कितना बड़ा मजाक है. और इससे भी बड़ा मजाक उन लोगों के साथ है जिन्होंने इस झूठ पर भरोसा किया.' लोन ने कहा कि NC ने सत्ता में आने के 180 दिनों के भीतर सभी खाली पदों को भरने का वादा भी किया था, लेकिन अब तक उन्होंने इसके लिए पहला कदम भी नहीं उठाया है. 'अपने चुनावी घोषणापत्र में NC ने सरकारी विभागों में सभी खाली पदों को 180 दिनों के भीतर भरने का वादा भी किया था. आज पता चला कि पिछले दो सालों में सिर्फ 7,580 खाली पद भरे गए हैं और अभी भी 40,672 पद खाली पड़े हैं.' सज्जाद ने कहा कि डेटा से पता चलता है कि 24,427 नॉन-गजेटेड पद, 3,318 गजेटेड पद और 12,927 मल्टी-टास्किंग स्टाफ पद अभी भी खाली हैं, और इस रफ्तार से, बैकलॉग को खत्म करने में कई दशक लग जाएंगे. बेरोजगारी के मुद्दे पर NC की उमर अब्दुल्ला सरकार पर तंज कसते हुए सज्जाद ने कहा, 'इस रफ्तार से, इन 40,672 पदों को भरने में एक दशक से ज्यादा का समय लगेगा.' लोन ने आगे बताया कि NC ने 180 दिनों के भीतर सभी सरकारी रिक्तियों को भरने का वादा किया था, फिर भी आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि दो वर्षों में केवल 7,580 पद भरे गए हैं. 'आज की तारीख तक, 40,672 पद खाली हैं, जिसमें 24,427 नॉन-गजेटेड, 3,318 गजेटेड और 12,927 मल्टी-टास्किंग स्टाफ के पद हैं.' तीसरा टूटा हुआ वादा सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन शुल्क से जुड़ा है. NC ने सार्वजनिक रूप से इन शुल्कों को माफ करने का वादा किया था ताकि नौकरी के उम्मीदवारों के लिए वित्तीय बोझ बाधा न बने. लोन ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले विधानसभा में इसी मुद्दे पर एक सवाल पूछा था और जो जवाब मिला, वह बेहद चौंकाने वाला और सरकार की पोल खोलने वाला था.
34 shares
😢
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 11:37 AM
महानगर संगठन में की गई नई नियुक्तियाँ

महानगर संगठन में की गई नई नियुक्तियाँ

नवनियुक्त महानगर कोषाध्यक्ष मोहित सक्सेना का माला पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान शेर सिंह गंगवार को समाजवादी अधिवक्ता सभा, दीपक शर्मा को युवजन सभा, राम प्रकाश यादव को पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, दिनेश यादव को व्यापार सभा, मोहम्मद खालिद खान को अल्पसंख्यक सभा का प्रकोष्ठ प्रभारी बनाया गया।विज्ञापनराजेश मौर्य को छात्र सभा, गोविंद सैनी को अनुसूचित जाति एवं जनजाति, समयुन खान को महिला सभा, अनुज गंगवार को मजदूर सभा, डॉ. शफीकउद्दीन को शिक्षक सभा, सिंपल कनौजिया को समाजवादी बाबा साहब आंबेडकर वाहिनी, वसीम को मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड, सैय्यद जमील अहमद को लोहिया वाहिनी प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सौंपी गई।
46 shares
😐
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 11:21 AM
छेड़छाड़ की घटना पर बिहार जे. डी. यू. नेता के बयान पर हंगामा

छेड़छाड़ की घटना पर बिहार जे. डी. यू. नेता के बयान पर हंगामा

जमुई में जिस तरह से एक लड़की के साथ ना सिर्फ छेड़खानी की गई बल्कि प्राइवेट पार्ट तक टच किया गया इस पर जेडीयू की ओर से बेतुका बयान आया है. इस घटना को लेकर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा है कि छिटपुट घटना होती है तो सरकार संवेदनशील है. उन्होंने मीडिया से कहा, "...2005 के समय को याद करिए. कोई घर से निकलता था? किस तरह का बिहार था? आज तो कोई घटना घट रही है तो प्रशासन कार्रवाई कर रहा है. एक्शन लिया जा रहा है. कितना भी बड़ा अपराधी क्यों नहीं हो वो जल्द पुलिस के कब्जे में आएंगे." उमेश कुशवाहा की ओर से आए इस तरह के बयान के बाद विपक्षी दल आरजेडी ने घेरा है. उमेश कुशवाहा के छिटपुट घटना वाले बयान पर शक्ति यादव ने कहा कि ऐसा बयान देने से पहले क्या जीभ नहीं लड़खड़ाई? अस्मत लूटी जाए, प्राइवेट पार्ट पर हाथ दिया जाए, गैंगरेप हो, ऐसा बयान शर्मनाक है. शक्ति यादव ने कहा कि सरकार की आभा गिर गई है और ऐसी घटना पर पर्दा डालने के लिए इसको छिटपुट घटना बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जेडीयू के मुखिया ही 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' की बात करते थे, कहते थे बिहार की सड़कों पर बेटियां सरपट दौड़ रही हैं, बिहार में कानून का राज है, क्या ऐसा ही होता है कानून का राज? हालांकि मीडिया में दिए गए अपने बयान के बाद उमेश कुशवाहा ने देखा कि विवाद होने लगा है तो उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर सफाई दी. कहा कि जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ जिस तरह की शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है, वह बेहद दुखद, निंदनीय और मर्माहत करने वाली है. ऐसी घिनौनी हरकत को किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि मामले में एसआईटी का गठन किया गया है. तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है. अपराधी कान खोलकर सुन लें, बिहार में अपराध और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है. मासूमों की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों से सरकार कानून के तहत सख्ती से निपटेगी. जेडीयू नेता ने दो टूक में कहा कि पीड़ित परिवार को समयबद्ध न्याय दिलाने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी. अपराधियों के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई होगी, जो आगे चलकर नजीर बनेगी. एनडीए सरकार पूरी मजबूती के साथ पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है. आर्यन आनंद ने 2015 में पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2016 में दिल्ली में एक पॉलिटिकल campaining टीम के साथ डिजिटल जर्नलिज्म से कैरियर की शुरुआत की. 2018 में पटना लौटकर बिहार के प्रतिष्ठित डिजिटल चैनल फर्स्ट बिहार में हुआ रिपोर्टर काम किया. फर्स्ट बिहार में 5 साल काम करने के बाद एबीपी से साल 2024 में जुड़ा.
92 shares
😢
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 11:15 AM
राजस्थान नगर निगम चुनावः भाजपा ने कई सीटें जीतीं, सीपीआई (एम) और कांग्रेस ने अपवाद लिया

राजस्थान नगर निगम चुनावः भाजपा ने कई सीटें जीतीं, सीपीआई (एम) और कांग्रेस ने अपवाद लिया

पश्चिमी राजस्थान में भाजपा ने कई निकायों में अध्यक्ष पद हासिल किया। आहोर, बाली, चौहटन, धोरीमन्ना और रायपुर जैसे निकायों में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। नोखा इसका अपवाद रहा। यहां सीपीएम के बजरंग सोनी अध्यक्ष बने। उन्हें 32 वोट मिले। नोखा में माकपा के पास पर्याप्त पार्षद होने के कारण अध्यक्ष चुनाव में दूसरे दलों पर निर्भरता नहीं रही। बड़े नगर निगमों में भी मुकाबला दिलचस्प रहा। अजमेर और पाली में भाजपा ने मेयर पद हासिल किया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस अपना मेयर बनाने में सफल रही। अजमेर में कांग्रेस पार्षदों की संख्या अधिक होने के बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा ने 43 वोट लेकर कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट पर रोक दिया। यहां निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक रहा।
86 shares
😢
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 11:14 AM
उत्तर प्रदेश सपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की आलोचना करने वाले पोस्टर हटाए

उत्तर प्रदेश सपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की आलोचना करने वाले पोस्टर हटाए

इसमें सपा प्रमुख से लेकर स्थानीय नेताओं की फोटो चस्पा करते हुए लिखा गया कि 'अखिलेश के माफिया और माफिया के अखिलेश'। जैसे ही सपा कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी हुई उन्होंने मौके पर पहुंचकर होर्डिंग्स को उतरवाया।विज्ञापन
76 shares
😢
A
ABP News
Sep 21, 2026, 11:13 AM
समाजवादी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है

समाजवादी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले होने विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में शानदार के प्रदर्शन के बाद अब समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुट गई है. इसके लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव मैराथन बैठकें कर रहे हैं. अखिलेश यादव ने यूपी की सुरक्षित सीटों के लिए लखनऊ में बैठक की. साथ ही हारी हुई सीटों पर मंथन किया. अखिलेश ने दावा किया कि वो 2027 में सभी सीटें जीतेंगे. दरअसल यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 86 सीटें सुरक्षित हैं, जिसमें 84 SC और 2 ST के लिए सुरक्षित हैं. साल 2022 के चुनाव में इन 86 आरक्षित सीटों में से एनडीए गठबंधन ने 65 सीटें जीती थी, जिसमें 3 अपना दल सोनेलाल नें जीती थी. जबकि एसटी की दोनों सीटें बीजेपी के खाते में गई थी. इसी तरह समाजवादी पार्टी गठबंधन को 20 सीटें साल 2022 के विधानसभा चुनाव मिलीं थी. सपा अकेले 16 SC आरक्षित सीटें जीतीं, बाकी रालोद और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसी सहयोगी पार्टियों ने जीती थी. अब आरएलडी और राजभर की पार्टी एनडीए के साथ है. अन्य 1 सीट बाबागंज सीट पर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के विनोद सरोज जीते थे. अगर 2017 की बात की जाए तो बीजेपी गठबंधन ने इन आरक्षित सीटों में से 70 सीटें जीती थीं, जबकि सपा गठबंधन को सिर्फ 7 मिली थीं. हालांकि, 2022 में सपा ने आरक्षित सीटों पर अपनी संख्या बढ़ाई थी. अगर लोकसभा की बात करें तो यूपी में 17 लोकसभा सीटें सुरक्षित हैं. इनमें बीजेपी ने 8 सीटें (बुलंदशहर, हाथरस, आगरा, शाहजहांपुर, हरदोई, मिश्रिख, बांसगांव और बहराइच) जीती थी. सपा ने 7 सीटें राबर्ट्सगंज, मछलीशहर, लालगंज, कौशांबी, जालौन, मोहनलालगंज और इटावा जीतीं. कांग्रेस 1 सीट बाराबंकी जीती. आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) 1 सीट नगीना अपने नाम की.
51 shares
😊
A
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 11:11 AM
दिल्ली की अदालत ने सोनिया गांधी मतदाता सूची मामले में पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की

दिल्ली की अदालत ने सोनिया गांधी मतदाता सूची मामले में पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की

सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने से जुड़े मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने रिवीजन पिटीशन मंजूर कर ली है. कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मामले में FIR की मांग खारिज की गई थी. अब मामले पर 29 सितंबर को फिर सुनवाई होगी. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में दर्ज था, जबकि उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी. इसी आधार पर याचिका में सवाल उठाया गया कि नागरिकता मिलने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुआ. याचिका में यह भी कहा गया कि 1980 में नाम दर्ज होने के बाद 1982 में उसे वोटर लिस्ट से हटा दिया गया. इसके बाद 1983 में नाम फिर दर्ज हुआ. याचिकाकर्ता ने इसी क्रम को लेकर दस्तावेजों और नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया की जांच की मांग की थी. ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए हैं. मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में FIR की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी थी. इसके खिलाफ रिवीजन पिटीशन दाखिल की गई. स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में मामले के तथ्यों और शिकायत पर पर्याप्त वजह नहीं बताई गई. कोर्ट ने इसे 'नॉन-स्पीकिंग' यानी ऐसा आदेश बताया जिसमें फैसले के पीछे की वजह ठीक से दर्ज नहीं थी. इसके बाद मामला दोबारा मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेज दिया गया. अब निचली अदालत इस मामले को दोबारा देखेगी. कोर्ट ने कहा है कि शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई और जरूरी जांच के बाद आदेश दिया जाए. अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी. यह आदेश अभी केवल पुराने फैसले को रद्द कर मामले को दोबारा सुनने तक सीमित है. इससे यह साबित नहीं होता कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने में फर्जीवाड़ा हुआ है या सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज हो गई है.
86 shares
😢
A
Amar Ujala
Sep 21, 2026, 11:10 AM
बी. एस. पी. ने सुल्तानपुर विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवार नामित किया

बी. एस. पी. ने सुल्तानपुर विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवार नामित किया

आज दिनांक 21-09-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार जनपद सुल्तानपुर के तिकोनिया पार्क में बहुजन समाज पार्टी द्वारा एक अति महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें विधानसभा सुल्तानपुर से प्रभारी/प्रत्याशी के रूप में इम्तियाज अहमद भुट्टो जी को घोषित किया… pic.twitter.com/oLl6xW2jKL
53 shares
😊
A
Aaj Tak
Sep 21, 2026, 10:57 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन योजना की घोषणा की

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन योजना की घोषणा की

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के ऐलान से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं के लिए नौकरियों की बौछार कर दी है. राज्य सरकार ने अगले 6 महीनों के भीतर 1 लाख सरकारी नौकरियां देने का बड़ा लक्ष्य तय किया है. इतना ही नहीं, सीएम योगी ने ऐलान किया है कि आचार संहिता लागू होने और चुनाव की तारीखों की घोषणा तक हर हफ्ते प्रदेश में अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे. नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और विपक्षी दलों पर तीखा तंज कसा. सीएम योगी ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि "हम नौकरियां देते जाएंगे, आप गिनते जाइए." सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तेजी लाते हुए अब बिना किसी रुकावट के लगातार नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे. यह बड़ा ऐलान लिपिक संवर्ग (Clerical Cadre) की सीधी भर्ती 2023 के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान हुआ. इस कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वयं अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे. इस चरण में कुल 912 अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए, जिनमें शामिल हैं: पुलिस उप-निरीक्षक (Sub-Inspector) सहायक उप-निरीक्षक लिपिक (Assistant Sub-Inspector Clerical) सहायक उप-निरीक्षक लेखा (Assistant Sub-Inspector Accounts) चुनावी माहौल के बीच उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य के बेरोजगार युवाओं को साधने की दिशा में काफी अहम माना जा रहा है. सरकार के नए रोडमैप के मुताबिक, आने वाले 6 महीनों में अलग-अलग विभागों में लंबित पड़ी भर्ती प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा और हर सप्ताह अलग-अलग पदों के लिए राज्य स्तर पर बड़े कार्यक्रम आयोजित कर नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे.
77 shares
😐
ABP News logo
ABP News
Sep 21, 2026, 10:47 AM
भारतीय अदालत ने सोनिया गांधी के मतदाता पंजीकरण के खिलाफ आरोपों की नए सिरे से जांच का आदेश दिया

भारतीय अदालत ने सोनिया गांधी के मतदाता पंजीकरण के खिलाफ आरोपों की नए सिरे से जांच का आदेश दिया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से जुड़े मामले में मुश्किलें बढ़ सकती हैं. राऊज एवेन्यू के स्पेशल कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कांग्रेस नेता का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल होने के आरोप की जांच करने से इनकार कर दिया गया था. कोर्ट ने मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं. स्पेशल कोर्ट ने फैसले में मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से शिकायत के निपटारे की कड़ी आलोचना की है. स्पेशल जज के अनुसार, मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में साफ तौर पर 'विवेचना का अभाव' दिखाई दिया, जिसके चलते कोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के निर्देश के साथ वापस भेज दिया. जज ने कहा कि BNS की धारा 175(3) का पालन न करने, संबंधित पुलिस अधिकारी की दलीलें न सुनने और संबंधित पुलिस स्टेशन से स्थिति रिपोर्ट न मंगवाने के चलते विवादित आदेश में कानून की साफ गलती है. उन्होंने कहा कि आदेश का तर्कहीन स्वरूप साफ है, क्योंकि मजिस्ट्रेट ने कानून के तहत उपलब्ध दो विकल्पों पर विचार नहीं किया. जज ने कहा मजिस्ट्रेट को यह देखना चाहिए था कि कोई गंभीर अपराध हुआ है या नहीं, लेकिन उन्होंने उस बात पर ध्यान देने के बजाय व्यक्ति की नागरिकता के मुद्दे पर रुख किया. न्यायालय ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया है, ताकि वे नए सिरे से दलीलें सुनने के बाद तर्कसंगत आदेश पारित कर सकें. सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका में कहा गया है कि उन्होंने ने 30 अप्रैल 1983 में नागरिकता हासिल की थी, जबकि उनका नाम 1980 की वोटर लिस्ट में शामिल था. याचिका में सवाल उठाया गया था कि 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट मे नाम कैसे शामिल था. याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1982 मे सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से आखिर क्यों डिलीट किया गया. याचिका में सवाल उठाया गया था कि जब 1983 में नागरिकता हासिल की तो किन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर 1980 में वोटर लिस्ट मे नाम शामिल कराया गया क्या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया. कोर्ट ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया ताकि वे नए सिरे से दलीलें सुनने के बाद तर्कसंगत आदेश पारित कर सकें. मामले की आगे की सुनवाई 29 सितंबर को होगी.
89 shares
😢
DNA Hindi logo
DNA Hindi
Sep 21, 2026, 10:43 AM
सऊदी अरब के अनुरोध के बीच ट्रंप ने यमन में हौथियों पर अमेरिकी हमला वापस लिया

सऊदी अरब के अनुरोध के बीच ट्रंप ने यमन में हौथियों पर अमेरिकी हमला वापस लिया

सऊदी अरब ने अमेरिका से हूतियों के खिलाफ मदद मांगी थी, जिसके बाद अमेरिका हूतियों पर हमला करने के लिए तैयार हो गया था. अमेरिकी कमांडरों ने टारगेट लिस्ट को भी मंंजूरी दे दी थी और लड़ाकू विमानों में बम लोड किए जा रहे थे, फिर अचानक से ट्रंप ने यू-टर्न ले लिया और यमन में हूतियों के ठिकानों पर हमलों करने के मिशन से पीछे हटने का फैसला किया. आइए जानते हैं कि ट्रंप अचानक से हूतियों पर हमले के फैसले से पीछे क्यों हटे. 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना ने हमले की पूरी तैयारी कर ली थी. इससे पहले कि अमेरिकी सैनिक यमन में हूती ठिकानों पर हमला करते, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन से पीछे हटने का फैसला किया, जबकि सऊदी अरब ने इसके लिए अमेरिका से मदद मांगी थी. लाल सागर के पास रणनीतिक रूप से अहम इलाके पर यमनी मिलिशिया के लगातार बढ़ते कब्जे से निपटने के लिए सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद मांगी थी. रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि पिछले सप्ताह यह मामला तब अहम हो गया, जब सऊदी अरब के नेता और ईरान के खिलाफ लड़ाई में अहम सहयोगी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप को फोन करके फिर से अपील की थी कि वह तेजी से आगे बढ़ रहे इस हूतियों को रोकने में मदद करें. ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा था कि वह हूतियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं. वहीं बीते गुरुवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के साथ बातचीत के बाद ट्रंप अपनी बात से पलट गए और पेंटागन के अधिकारियों से यमनी मिलिशिया के खिलाफ हवाई हमले की तैयारी करने को कहा. बीते रविवार को ट्रंप ने फिर अपना फैसला बदल दिया और अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि हूतियों के खिलाफ कोई अमेरिकी हवाई हमला नहीं होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने आखिरी समय में अपने प्लान बदल दिए, जबकि कमांडरों ने टारगेट लिस्ट को मंजूरी दे दी थी, सैनिक मिशन के लिए चुने गए अमेरिकी फाइटर जेट में बम लोड कर रहे थे. अभी तक व्हाइट हाउस ने ट्रंप के रुख बदलने पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने एक सीनियर अधिकारी के हवाले से लिखा कि ट्रंप के करीबी लोगों में से ज्यादातर हूतियों के खिलाफ सऊदी की लड़ाई में शामिल होने को लेकर खिलाफ में थे. खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी सेना पहले से ही तनाव का सामना कर रही है. वहीं अमेरिकी राष्टपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि हूती अमेरिका पर हमला न करने पर सहमत हो गए हैं, भले ही ईरान का सहयोगी यह गुट अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज कर रहा है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन, हूती के साथ लगातार संपर्क में है और वह अमेरिका से न लड़ने पर सहमत हो गए हैं. हूती विद्रोहियों ने यमन के भीतर तेजी से हमले किए हैं और सऊदी अरब समर्थित, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के कब्जे वाले बड़े इलाकों पर अपना नियंत्रण कर लिया है. ईरान को लेकर ट्रंप फैसला लेने की स्थिति में हैं. ईरान में अमेरिकी और इजराइली सेनाओं ने 28 फरवरी को बड़े पैमाने पर हवाई बमबारी अभियान चलाया था, जिसके बाद से वहां लगभग सात महीने से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है.
11 shares
😢