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May 5, 2026, 05:19 PM
चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से किया इनकार

चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से किया इनकार

पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद मंगलवार (5 मई) को अपना पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इसके साथ ही दावा किया कि यह चुनाव परिणाम जनता का वास्तविक जनादेश नहीं, बल्कि एक साजिश का नतीजा है। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई निर्वाचन आयोग से थी, जिसने भाजपा के लिए काम किया। उन्होंने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है।… मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।'' ममता के इस ऐलान से सियासी खलबली मच गई है। बंगाल से कोलकाता तक इस बात के चर्चे हैं कि अगर चुनाव हारकर भी कोई मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देता है तो आगे क्या हो सकता है और संविधान में ऐसे हालात से निपटने के लिए गवर्नर को कौन सी शक्तियां दी गई हैं? दरअसल, भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई मुख्यमंत्री हार के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर रहा है। ऐसे में अगर ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्य के राज्यपाल के पास उन्हें बर्खास्त करने का संवैधानिक अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और यही अनुच्छेद उन्हें बहुमत खोने की स्थिति में मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने का अधिकार भी देता है। हालांकि, इस शक्ति का इस्तेमाल करने से पहले गवर्नर ममता से इस्तीफा मांग सकते हैं और इनकार करने पर तुरंत विधानसभा भंग कर सकते हैं। वैसे भी मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 7 मई के बाद स्वत: पुरानी विधानसभा भंग हो जाएगी। ऐसे में ममता को स्वत: ही मुख्यमंत्री पद से विमुक्त माना जा सकता है लेकिन एक परंपरा बनी हुई है कि चुनाव में हारने के बाद मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा देते हैं, ताकि अगले मुख्यमंत्री की नियुक्ति का रास्ता साफ हो सके। संविधान विशेषज्ञ मानते हैं कि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तब भी नई विधान सभा के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बगैर भी नई विधानसभा में नई सरकार का नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं। मौजूदा हालात में अगर तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों द्वारा या किसी के भी द्वारा नई सरकार बनने में अड़चन पैदा की जाती है या किसी भी तरह का कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा होता है तो राज्यपाल किसी भी संवैधानिक संकट या कानून-व्यवस्था से संबंधित संकट से बचने के लिए राज्य में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की भी सिफारिश कर सकते हैं। बता दें कि ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव में 100 सीटें चोरी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट पर जनादेश को 'लूट' लिया गया और उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई। उन्होंने कहा, ''इतिहास में एक काला अध्याय जुड़ गया है।''तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए 10 सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति के गठन की भी घोषणा की है। उन्होंने 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा के आरोपों को निराधार बताया। इससे इतर बनर्जी ने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस) के कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ''विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने मुझे फोन करके एकजुटता व्यक्त की। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी मुझसे बात की है।''
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May 5, 2026, 04:44 PM
भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया, पीएम मोदी और एच. एम. शाह को श्रेय दिया

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया, पीएम मोदी और एच. एम. शाह को श्रेय दिया

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा और राष्ट्रीय महामंत्री तरूण चुघ ने इसे ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति और लाखों कार्यकर्ताओं के संघर्ष का परिणाम बताया. वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "बंगाल में बीजेपी की जीत के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गंगोत्री से गंगा सागर तक कमल खिलाने का सपना पूरा हो गया है." सचदेवा ने कहा कि यह जीत श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष में बंगाल की जनता द्वारा उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है. उन्होंने इसे विचारधारा की जीत बताते हुए कार्यकर्ताओं के समर्पण को सराहा. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को विभिन्न राज्यों में मिली सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि केरल में बीजेपी का खाता खुलना, बंगाल में सरकार बनना और असम और पुडुचेरी में एनडीए की वापसी पार्टी के बढ़ते जनाधार का संकेत है. वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया कि इस चुनाव के बाद भारत अब कम्युनिस्ट प्रभाव से मुक्त हो गया है और यह बदलाव देश की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत है. बंगाल में जीत के बाद दिल्ली में भी जश्न का माहौल देखने को मिला. तरूण चुघ के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर विजय जुलूस निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए और उत्सव का माहौल बना. जुलूस के दौरान तरूण चुघ खुद ढपली बजाते नजर आए. सैकड़ों कार्यकर्ता बीजेपी मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए और जुलूस के रूप में आगे बढ़ते हुए दीनदयाल उपाध्याय उपवन तक गए और फिर वापस मुख्यालय पहुंचे. तरूण चुघ ने कहा कि बंगाल में मिली जीत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक है और अब पार्टी का अगला लक्ष्य पंजाब है. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का मनोबल इस जीत से और मजबूत हुआ है. तरुण चुघ ने ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन की हार का जिक्र करते हुए अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान किए गए दावे गलत साबित हुए हैं और अब केजरीवाल को पंजाब में अपनी हार के लिए तैयार रहना चाहिए.
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May 5, 2026, 04:17 PM
पश्चिम बंगाल चुनाव में टी. एम. सी. को करारी हार का सामना करना पड़ा

पश्चिम बंगाल चुनाव में टी. एम. सी. को करारी हार का सामना करना पड़ा

पश्चिम बंगाल में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। बीजेपी ने 207 सीटों के साथ रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल की है जबकि टीएमसी केवल 8 सीटों पर सिमट गई। विपक्ष ममता बनर्जी की हार का एक कारण एसआईआर को भी माना रहा है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लिए चुनाव प्रचार करने के लिए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने भी यही आऱोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जैसे दिल्ली में कई सीटों पर वोट काट कर आप को हराया, वहीं रणनीति पश्चिम बंगाल में भी अपनाई गई। कई सीटों पर एसआईआर का असल भले बी देखा गया हो लेकिन जिन 20 सीटों पर सबसे ज्यादा वोट काटे गए, उनमें से अधिकतर पर टीएमसी ने बाजी मारी है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे। तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग पर राज्य के मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाते हुए उनके नाम हटाने का आरोप लगाया था। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है। इस बीच इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल की जिन 20 सीटों पर सबसे ज्यादा वोट काटे गए, उनमें से ज्यादातर सीटें टीएमसी के खाते में ही गई हैं। समसेरगंज में 74775 वोट काटे गए और ये सीट टीएमसी के खाते में गई। इसी तरह लालगोला में 55 हजार से ज्यादा वोट काटे गए थे और इश सीट पर भी टीएमसी ने जीत दर्ज की है। भागाबंगोला और रघुनाथगंज में जहां 45 हजार से ज्यादा वोट काटे गए, वहां भी टीएमसी ने ही बाजी मारी है। 1.तृणमूल कांग्रेस (TMC) - कुल 13 सीटें इन सीटों पर सबसे अधिक नाम हटाए जाने के बावजूद TMC ने जीत दर्ज की। समसेरगंज- 74,775 वोट काटे गए, लालगोला- 55,420 भागाबंगोला- 47,493, रघुनाथगंज- 46,100 , मेटियाबुर्ज़- 39,579, सुति- 37,965 , मोथाबारी- 37,255 , गोलपोखर- 31,384 , मालतीपुर: 29,489 , चोपड़ा- 27,898, सुजापुर-26,829, राजारहाट न्यू टाउन-24,132, बशीरहाट उत्तर- 23,900 वोट काटे गए। 2. -बीजेपी ने जीती 6 सीटें जंगीपुर- 36,581, रतुआ- 35,573, करणदिघी- 31,562, केतुग्राम: 26,780, मानिकचक: 23,726, मोंटेश्वर: 23,423 वोट काटे गए। 3.कांग्रेस के खाते में गई एक सीट फरक्का में 38,222 वोट काटे गए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के एक दिन बाद ममता बनर्जी ने मंगलवार को इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि चुनावी नतीजों में हेरफेर की गई है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 293 सीटों में से 207 पर जीत हासिल कर दो-तिहाई बहुमत प्राप्त कर लिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटें मिली हैं। हार के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुश्री बनर्जी ने व्यापक अनियमितताओं का दावा किया और कहा कि उनकी पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में वास्तव में नहीं हारी है। ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सोमवार को एक मतगणना केंद्र के भीतर उनके साथ मारपीट की गई। जब उनसे इस्तीफे के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट मना करते हुए मतगणना प्रक्रिया में 'पूर्ण हेरफेर' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "चुनाव में कोई हारता है और कोई जीतता है, हम सभी इसे स्वीकार करते हैं, लेकिन यहाँ हम हारे नहीं हैं। मतगणना में पूरी तरह धांधली हुई है। बनर्जी ने आरोप लगाया, एजेंटों को जबरन बाहर निकाल दिया गया और फॉर्म 17सी छीन लिया गया। अगर वे ईमानदारी से जीतते, तो मुझे कुछ नहीं कहना था। मैं इस्तीफा क्यों दूँ? आयोग ने सीधे तौर पर भाजपा के इशारे पर काम किया है। उन्होंने दावा किया कि जब वह मतगणना केंद्र में दाखिल हुईं, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और शारीरिक हमला किया गया। वार्ता से इनपुट
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May 5, 2026, 04:12 PM
बिहार के मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर लोक सेवक आवास किया गया

बिहार के मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर लोक सेवक आवास किया गया

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास का नाम बदल दिया गया है। पटना के एक, अणे मार्ग स्थित सीएम हाउस को अब लोक सेवक आवास के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने यह अहम फैसला लिया है। इसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नई दिल्ली में पीएम आवास का नाम 7 रेसकोर्स रोड से बदलकर 7 लोक कल्याण मार्ग कर चुके हैं। वहीं, विभिन्न राज्यों में राज्यपालों के आवासों का भी पूर्व में नाम राजभवन से बदलकर लोक भवन किया गया था। पटना का एक, अणे मार्ग स्थित सरकारी बंगला दशकों से सीएम आवास के रूप में जाना जाता था। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगभग 20 सालों तक इस आवास में रहे। पिछले महीने सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद नीतीश ने एक अणे मार्ग वाला सीएम आवास खाली कर दिया, जिसे सम्राट को आवंटित किया गया है। सीएम आवास की ओर से मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार, अब मुख्यमंत्री आवास को लोक सेवक आवास के रूप में जाना जाएगा। इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। वहीं, भवन निर्माण विभाग ने पटना में मुख्यमंत्री आवास का दायरा भी बढ़ा दिया है। एक अणे मार्ग के साथ ही पटना के 5 देशरत्न मार्ग स्थित बंगले को भी सीएम आवास में शामिल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अभी इसी आवास में रह रहे हैं, जो उन्हें बतौर डिप्टी सीएम रहते 2024 में आवंटित किया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर ही सीएम आवास का नाम बदला गया है। बताया जा रहा है कि जनता से सीधे जुड़ाव और जनसेवा के उद्देश्य को पूरा करने की नीयत से मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर लोक सेवक आवास किया गया है। सम्राट इस तरह खुद को बिहार के लोगों का सेवक होने का संदेश जनता को देना चाह रहे हैं। पटना के एक अणे मार्ग स्थित बंगला, जिसे लोक सेवक आवास के रूप में नामित किया गया है। उसमें अभी मुख्यमंत्री शिफ्ट नहीं हुए हैं। पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने 1 मई को यह आवास खाली किया था। बताया जा रहा है कि नए सीएम सम्राट चौधरी शुभ मुहूर्त पर यहां शिफ्ट होंगे। तब तक वह 5 देशरत्न मार्ग स्थित अपने पुराने आवास में ही रहेंगे। यहीं से मुख्यमंत्री का आवासीय सचिवालय अभी चलाया जा रहा है।
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May 5, 2026, 04:08 PM
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावः राजनीतिक दलों की वापसी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावः राजनीतिक दलों की वापसी

West Bengal Assembly Parties Independents Representation:पश्चिम बंगाल चुनाव ने राज्य की विधानसभा में थोड़ा रंग भर दिया है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल के शासनकाल में विधानसभा में राजनीतिक दलों और निर्दलीयों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा था। 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समेत कुल 4 दल के ही विधायक जीतकर सदन पहुंच पाए थे। निर्दलीय साफ हो गए थे। इस बार भी नहीं जीत पाए हैं। ममता पहली बार 2011 में सत्ता में आई थीं, तब 294 विधायकों में 10 दल और निर्दलीय थे। सदन में तमाम राजनीतिक रंग था। इस चुनाव में भाजपा की जीत के साथ सदन में 6 पार्टियों के विधायक पहुंचे हैं। भले कांग्रेस और सीपीएम के गिनती भर एमएलए ही जीते हैं, लेकिन सदन में अब पार्टी की आवाज उठाने वाला कोई होगा। सरकार चलाने का ममता का डेढ़ दशक का सफर टीएमसी के बेस्ट प्रदर्शन पर पहुंचकर ब्लास्ट हो गया। सांप-सीढ़ी के खेल की तरह 215 को छूकर 5 ही साल में सीधे 80 पर। ममता 2011 के बाद से लगातार ज्यादा सीट जीतकर अगली सरकार बनाती आ रही थीं। 2011 में 184, 2016 में 211 और 2021 में 215 सीटें ममता को मिली थीं। 1972 में बंगाल में पहली बार 294 सीटों के चुनाव में कांग्रेस को 216 विधायक मिले थे। उसके बाद से आज तक सीपीएम समेत किसी भी दल को 215 सीट पर जीत नहीं मिली। 3 विधायक से 2 तिहाई बहुमत; 46 साल इंतजार; कैसे 10 साल में ही मोदी-शाह बंगाल में लाए BJP सरकार? भाजपा को इस चुनाव में दो तिहाई बहुमत मिला है, लेकिन वह टीएमसी के 2016 और 2021 की जीत से कम है। ये जरूर है कि भाजपा की जीत के साथ विधानसभा में थोड़ा रंग लौटा है। 1998 में टीएमसी बनने के बाद से विधानसभा चुनाव में कितनी पार्टियां या निर्दलीय और किस दल के कितने विधायक जीते, इसका हिसाब नीचे पढ़िए। 2001 के चुनाव में सीपीएम 143, फारवर्ड ब्लॉक 25, आरएसपी 17, सीपीआई 7, वेस्ट बंगाल सोशलिस्ट पार्टी 4, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट 3, टीएमसी 60, कांग्रेस 26 और निर्दलीय 9 सीपीएम 176, फारवर्ड ब्लॉक 23, आरएसपी 20, सीपीआई 8, वेस्ट बंगाल सोशलिस्ट पार्टी 4, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट 3, टीएमसी 30, कांग्रेस 21, राजद 1, झारखंड पार्टी 1, डीएसपी 1 और निर्दलीय 6 टीएमसी- 184, कांग्रेस 42, सीपीएम 40, फारवर्ड ब्लॉक 11, आरएसपी 7, सीपीआई 2, एसपी 1, डीएसपी 1, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा 3, एसयूसीआई 1 और निर्दलीय 2 एक वोट की ताकत समझ गए स्टालिन के मंत्री, पहले भी 2 नेता 1 मत से हारे, एक तो राजस्थान CM बनते टीएमसी 211, कांग्रेस 44, सीपीएम 26, आरएसपी 3, फारवर्ड ब्लॉक 2, सीपीआई 1, बीजेपी 3, जीजेएम 3 और निर्दलीय 1 टीएमसी 215, बीजेपी 77, जीजेएम 1, आईएसएफ 1 बीजेपी 207, टीएमसी 80, कांग्रेस 2, एजेयूपी 2, सीपीएम 1, आईएसएफ 1
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May 5, 2026, 04:08 PM
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है, जबकि 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 77 सीटों वाली भाजपा ने दो तिहाई सीटें यानी कुल 207 सीटें हासिल कर ली हैं। 15 साल बाद ममता की इस चुनावी हार के बाद सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं और कहानियां सुनाई दे रही हैं। इन्हीं में से एक चर्चा ऐसी है जिसमें कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी को बंगला नंबर 77 का श्राप लग गया है। भबानीपुर से ही ममता खुद भी चुनाव हार गई हैं। हालांकि, चुनावी हार जीत किसी एक फैक्टर या किसी के श्राप से नहीं होता बल्कि उसके कई फैक्टर होते हैं लेकिन भद्रलोक में यह किस्सा आम है कि ममता को उस घर का श्राप लगा है जिसका कनेक्शन भाजपा से है। दरअसल, यह बंगला भाजपा के संस्थापक रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उनके परिवार से जुड़ा तो है ही अपने साथ यह बंगला भारतीय इतिहास को समेटे हुए है। यह बंगला दक्षिणी कोलकाता के भवानीपुर इलाके में स्थित है। इस इलाके के अशुतोष मुखर्जी रोड 77 नंबर का बंगला एक ऐतिहासिक पता है जिसका नाता महान शिक्षाविद् आशुतोष मुखर्जी और उनके पुत्र श्यामा प्रसाद मुखर्जी से है। यह उनका पैतृक घर रहा है। यह वही मकान है जो अपने साथ विशाल इतिहास समेटे हुए हैं। यहां ईश्वर चंद विद्यासगर से लेकर रवीन्द्र नाथ टैगोर जैसी महान हस्तियाँ आ चुकी हैं। आजकल यह बंगला 'अशुतोष मुखर्जी मेमोरियल इंस्टीट्यूट' के रूप में संरक्षित है और कोलकाता नगर निगम द्वारा ग्रेड-1 हेरिटेज का दर्जा प्राप्त है। दरअसल, जिस श्यामा प्रसाद मुखर्जी का यह पैतृक आवास है, वह भारतीय राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं। उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी बनी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी अपने उस विचार के लिए ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं, जिसमें उन्होंने “एक देश, एक विधान, एक निशान” का विचार दिया था। आज भी उनकी यह विचारधारा BJP की विचारधारा के केंद्र में हैं। बंगाल चुनाव 2026 में BJP ने इसी विरासत को जोर-शोर से उठाया और “हाउस नंबर 77” को एक प्रतीक के रूप में पेश किया। इसलिए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि TMC की हार इसी “राजनीतिक श्राप” का नतीजा है, जिसे उसने वर्षों तक दबाने का काम किया है। ऐसा कहा जाने लगा कि यह वही घर है जिसे वर्षों तक नजरअंदाज किया गया, जबकि यह बंगाल की जड़ों और विरासत का प्रतीक है और जब इसकी विरासत को चुनावी मुद्दा बनाया गया, तो जनता ने उसे झटके से स्वीकार कर लिया और ममता को करारी हार दे दी। कुछ स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह तक कहा जा रहा है कि इस घर की आत्मा को अब शांति मिली है। हालांकि, यह पूरी तरह से भावनात्मक और प्रतीकात्मक व्याख्या है। ममता की हार की असली वजह सत्ता विरोधी लहर, संगठनात्मक कमजोरी, विपक्ष की मजबूत रणनीति और अहंकार की धारणा है जिसे बाद में “हाउस नंबर 77” की कहानी से जोड़ दिया गया और उसे श्राप बताया गया। आरोप है कि ममता बनर्जी ने इस बंगला को गिराने की भी साजिश रची थी।
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TV9 Hindi
May 5, 2026, 04:03 PM
भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए विधेयक को मंजूरी दी

भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए विधेयक को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनमें सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक, 2026 भी शामिल हैं. केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक, 2026 को प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर 34 से 38 करने का प्रावधान किया गया है. सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 जज हैं. केंद्रीय कैबिनेट द्वारा सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्ताव को मंजूरी के बाद जजों की संख्या बढ़ जाएगी. अब इस संख्या को बढ़ाकर 38 करने का लक्ष्य रखा गया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान में शीर्ष अदालत में 33 जज और एक सीजेआई हैं. जजों की संख्या में चार की बढ़ोतरी करने के लिए संसद के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा.’ संसद से मंजूरी मिलते ही सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश समेत कुल 38 जज हो जाएंगे. बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का यह निर्णय बढ़ते न्यायिक बोझ को देखते हुए लिया गया है. आंकड़ों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न्याय मिलने में देरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. जजों की संख्या में इस बढ़ोतरी से विशेष रूप से ‘संविधान पीठ’के मामलों और महत्वपूर्ण संवैधानिक अपीलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है. जब अधिक जज उपलब्ध होंगे, तो अधिक संख्या में मामलों का निपटारा भी समय पर हो पाएगा. सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ानेदेश की न्याय प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने की दिशा में आज मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले संशोधन विधेयक (Amendment Bill) को स्वीकृति दे दी है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों कीpic.twitter.com/ZKezz1MTj7 — Amit Shah (@AmitShah)May 5, 2026 जानकारी के मुताबिक, साल 2009 में दोबारा कानून में संशोधन हुआ। तब जजों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई. सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या आखिरी बार साल 2019 में बढ़ाई गई थी. तब मूल अधिनियम में संशोधन कर जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33, मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर की गई थी. अब 2026 में इसे फिर से बढ़ाने की तैयारी है. सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की संख्या अधिनियम 1956 के मूल स्वरूप में मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 10 जजों का प्रावधान था. समय के साथ इसमें कई संशोधन हुए. 1960 में यह संख्या बढ़ाकर 13 की गई। बाद में एक अन्य संशोधन के जरिए इसे 17 कर दिया गया. 1986 में जजों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 की गई थी. प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.
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Amar Ujala
May 5, 2026, 03:41 PM
निषाद समुदाय ने उचित व्यवहार की मांग की, भाजपा और निषाद पार्टी पर विश्वासघात का आरोप लगाया

निषाद समुदाय ने उचित व्यवहार की मांग की, भाजपा और निषाद पार्टी पर विश्वासघात का आरोप लगाया

गोसाईगंज। प्रदेश में 10 प्रतिशत आबादी होने के बाद भी निषाद समाज के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया जा रहा है। सपा ने निषाद समाज को मान-सम्मान, पहचान व अधिकार दिया जिसे भाजपा ने छीन लिया है। निषाद आरक्षण मुद्दे पर भाजपा ने वादाखिलाफी की है। निषाद पार्टी ने सिर्फ लूटपाट किया है।और पढ़ेंTrending Videosयह आरोप निषाद जनजागृति सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि समाजवादी पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौ. लौटन राम निषाद ने लगाए हैं। मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में लौटनराम निषाद ने कहा कि निषाद समाज को राजपाट दिलाने का झूठा सपना दिखाकर एक नेता अपने परिवार के हित के लिए ही जुटा हुआ है। यह कार्यक्रम आलापुर केवटहिया में विश्राम निषाद के संयोजकत्व में आयोजित किया गया था। मंच से मुख्य अतिथि चौ. लौटनराम ने कहा कि याचक नहीं शासन-सत्ता का हिस्सेदार बनकर समाज की भलाई के लिए काम करने के लिए निषाद समाज को अपने वोट की ताकत को पहचानना होगा। कहा कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली, ओडिशा में निषाद जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण मिलता है, तो उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड के निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, गोंडिया आदि को क्यों नहीं। उन्होंने मझवार, तुरैहा, गोंड, बेल्दार, खैरहा, खोरोट की तरह निषाद मछुआरा जातियों के आरक्षण व परंपरागत पुश्तैनी पेशों की बहाली की मांग की। सम्मेलन को श्रीनाथ निषाद, वेदप्रकाश निषाद, राम अवध निषाद, राजकुमार निषाद महाराज, शारदा प्रसाद निषाद आदि ने संबोधित किया।विज्ञापनविज्ञापन
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May 5, 2026, 03:39 PM
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के विरोध में योगी सरकार बैकफुट पर

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के विरोध में योगी सरकार बैकफुट पर

उत्तर प्रदेश में सड़कों पर पड़े स्मार्ट मीटर और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तस्वीरें लगभग सभी जिलों से सामने आईं. इन तस्वीरों ने योगी आदित्यनाथ सरकार की बेचैनी बढ़ा दी. यह साफ होने लगा कि विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है और मामला धीरे-धीरे जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है. इसके बाद सरकार ने एक के बाद एक फैसले लिए और स्मार्टप्रीपेड मीटरको पोस्टपेड में बदलने का निर्णय किया. आइए जानते हैं कि योगी सरकार स्मार्ट मीटर पर बैकफुट पर कैसे आ गई, हालांकि अभी भी प्रीपेड मीटर को लेकर लोगों में मन में संशय क्यों है? दरअसल, तीन साल पहले सरकार ने प्रदेश में बड़े स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने की योजना शुरू की थी. इसका उद्देश्य रियल-टाइम खपत की जानकारी, ऑनलाइन बिलिंग और बिजली चोरी पर रोक लगाना था. करीब 70 लाख घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए और नए कनेक्शन पर इसे अनिवार्य किया गया. इस व्यवस्था में उपभोक्ता पहले रिचार्ज करता था और फिर बिजली का उपयोग करता था. हालांकि, जैसे ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर के बिल आने शुरू हुए, उपभोक्ताओं को लगा कि उनसे ज्यादा वसूली हो रही है. कई जिलों में शिकायतें बढ़ीं और ज्यादा बिल आने के आरोप लगे. बैलेंस खत्म होते ही बिजली कटने की शिकायतें भी तेजी से सामने आईं. उपभोक्ताओं का कहना था कि बैलेंस निगेटिव होते ही बिजली काट दी जाती है और भुगतान के बाद भी 24 से 72 घंटे तक आपूर्ति बहाल नहीं होती. कई जगह लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मीटर उखाड़कर फेंक दिए. उपभोक्ताओं का आरोप था कि जहां पहले महीने का बिल करीब 600 रुपये आता था, वहीं अब हर हफ्ते इतना खर्च हो रहा है. जनाक्रोश को देखते हुए सरकार ने अप्रैल में राहत देने की घोषणा की. इसके तहत बैलेंस खत्म होने पर अधिकतम तीन दिन या माइनस 200 रुपये तक बिजली न काटने और पांच स्तर के SMS अलर्ट सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया गया. इसके बावजूद विरोध जारी रहने पर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड मोड में बदलने की घोषणा कर दी. अब उपभोक्ता पहले की तरह बिजली इस्तेमाल करने के बाद बिल का भुगतान करेंगे. बकाया राशि को 10 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी गई है. साथ ही, बिल हर महीने की 10 तारीख तक जारी होगा और भुगतान के लिए 15 दिन का समय मिलेगा. सरकार ने प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता भी खत्म कर दी है. नए कनेक्शन पोस्टपेड में भी दिए जा सकेंगे और पहले से लगे प्रीपेड मीटर को भी पोस्टपेड में बदला जाएगा. करीब 70 लाख घरों में लागू इस व्यवस्था से 3 से 4 करोड़ लोग प्रभावित हो रहे थे. प्रीपेड स्मार्ट मीटर का मुद्दा इतना गरमाया कि योगी सरकार को लोगों की नाराजगी का डर सताने लगा. इस साल के अंत तक राज्य में विधानसभा चुनाव का ऐलान होने हैं. ऐसे में योगी सरकार ने लोगों की नाराजगी को समाप्त करने फैसला किया. हालांकि अब देखना होगा कि योगी सरकार ने स्मार्ट मीटर का फैसला तो वापस ले लिया है, लेकिन लोगों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर जो संशय और आशंका है, वह दूर कर पाती है या नहीं. ये भी पढ़ें-UP के बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी! स्मार्ट मीटर अब पोस्टपेड की तरह काम करेंगेयूजर्स को राहत पंकज चतुर्वेदी पिछले 11 साल से देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुवात हुई.दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अदंर की खबर को बाहर लाने का हुनर के साथ ही यूपी के ब्यूरोकेसी में खास पकड़ रखते हैं.इनकी पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही आप तक पहुंचाना है.
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May 5, 2026, 03:30 PM
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के लिए पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के लिए पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleअखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा की अध्यक्षता में मंगलवार को महिला कांग्रेस ने शिमला में चलो संसद अभियान के तहत पोस्ट कार्ड अभियान की शुरुआत की। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में महिला कांग्रेस और नगर निगम की महिला पार्षदों के साथ बैठक के बाद औपचारिक तौर पर अभियान की शुरुआत की गई। इस मौके पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अलका लांबा ने कहा कि अभियान के तहत देश भर की महिलाएं प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को तुरंत लागू करने, ओबीसी, एससी और एसटी महिलाओं को आरक्षण देने तथा व्यापक महिला भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाएंगी। हस्ताक्षर अभियान चला कर 10 लाख महिलाओं के हस्ताक्षर प्रधानमंत्री को भेजे जाएंगे। साथ ही मिस्ड कॉल अभियान भी चलाया जाएगा। अलका लांबा ने बताया कि जुलाई में मानसून सत्र के दौरान महिला कांग्रेस संसद का घेराव करेगी।और पढ़ेंTrending Videosअलका लांबा ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की। लांबा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक को 543 सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए, साथ ही ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो 2014 में ही महिलाओं को उनका हक मिल चुका होता। जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए, उसके बाद ही सामान्य जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने महंगाई के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा। लांबा ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही कमर्शियल सिलेंडर के दाम में करीब एक हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई, जबकि पेट्रोल और डीजल के दाम भी 100 रुपये के पार पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर देशभर में आंदोलन चलाया जाएगा।विज्ञापनविज्ञापनदीदी बिहार में राहुल गांधी के साथ खड़ी होतीं तो परिणाम अलग होतेपश्चिम बंगाल में कांग्रेस की हार को लेकर पूछे गए प्रश्न पर अलका लांबा ने कहा कि चार राज्यों में से दो में भाजपा और दो में गैर भाजपा की जीत हुई है। केरलम में हमें जनादेश मिला है। दीदी अगर बिहार में हमारे नेता राहुल गांधी के साथ खड़ी होती तो पश्चिम बंगाल में परिणाम कुछ और होते। चुनाव आयोग भाजपा की जीत की मशीन बन गया है। भाजपा को जब लगा कि ईवीएम का खेल कभी भी खुल सकता है तो अब वोटर लिस्ट में खेल शुरू कर दिया। एसआईआर और वाेटर लिस्टों में गड़बड़ी कर चुनाव जीते जा रहे हैं। अलका लांबा ने कहा कि भाजपा के विधायक हंसराज नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी हैं। उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। महिलाओं की हिमायती होने का दावा करने वाली भाजपा आरोपी विधायक को पार्टी सदस्यता से मुक्त क्यों नहीं करती। यह भाजपा के चाल, चरित और चेहरे को उजागर करता है। अलका लांबा ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने भी महिला आरक्षण विधेयक पर काला रिबन बांध कर लोगों को गुमराह किया।30 विधानसभा और दो लोकसभा सीट पर महिला कांग्रेस कार्यकर्ता को टिकट की पैरवीमहिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू होने के बाद प्रदेश की 68 में से 30 विधानसभा सीटों और चार में से दो लोकसभा सीटों पर महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को टिकट के लिए पैरवी की जाएगी। महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित होंगे। इसके लिए टैलेंट हंट और इंटरव्यू कर प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा, ताकि योग्य महिलाओं को राजनीति में आगे लाया जा सके। अलका लांबा ने बताया कि जल्द ही महिला कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी गठित कर दी जाएगी। बूथ से लेकर जिला तक महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिम्मेवारी सौंपी जाएगी। राज्य सरकार की 1500 रुपये मासिक सहायता योजना पर उन्होंने कहा कि कबायली क्षेत्रों की महिलाओं को यह राशि मिलनी शुरू हो गई है और अन्य महिलाओं को भी जल्द इसका लाभ दिया जाएगा। चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करते हुए लांबा ने विभिन्न राज्यों के परिणामों का जिक्र किया और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को सदन से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाती रहेगी। इस मौके पर महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष जैनब चंदेल, नव नियुक्त अध्यक्ष तृप्ता ठाकुर, नगर निगम की उप महापौर उमा कौशल, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक उमंग बांगा सहित शिमला नगर निगम की सभी महिला पार्षद मौजूद रहीं।
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May 5, 2026, 03:26 PM
तमिल अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए तैयार

तमिल अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए तैयार

तमिलनाडु में इतिहास रचने वाले ऐक्टर विजय सात मई, गुरुवार को शपथ ले सकते हैं। विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा जुटाने के उद्देश्य से टीवीके की कोर टीम ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) गठबंधन के संभावित सहयोगियों, विशेष रूप से कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) और वामपंथी दलों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।कांग्रेस का बड़ा दावाटीवीके सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में होगा और पार्टी 108 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में अपना दावा पेश करने के लिए राज्यपाल से समय मिलने का इंतजार कर रही है। इससे पहले दिन में, टीवीके विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद श्री विजय ने राज्यपाल वीआर अर्लेकर को एक मेल भेजकर सदन में बहुमत साबित करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। इस कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बयान जारी किया है। इसके मुताबिक टीवीके चीफ विजय ने कांग्रेस से तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा है। किन दलों का है झुकावविधानसभा चुनाव के नतीजों में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और टीवीके को 234 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए कम से कम 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। टीवीके नेताओं को कांग्रेस और अन्य द्रमुक सहयोगियों से आवश्यक समर्थन मिलने का भरोसा है। जहां कांग्रेस विजय को समर्थन देने में गहरी रुचि दिखा रही है, वहीं वीसीके का झुकाव भी टीवीके के साथ जाने की ओर दिख रहा है। कांग्रेस और वीसीके जैसे दलों की प्राथमिकता टीवीके को भाजपा के पाले में जाने से रोकना है। तमिलनाडु कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडनकर ने कहा कि उन्होंने चुनाव के बाद की स्थिति पर पार्टी आलाकमान को विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। एक विश्लेषक के अनुसार, यदि धर्मनिरपेक्ष दल विजय को समर्थन नहीं देते हैं, तो इससे टीवीके को भाजपा की शरण में जाने का मौका मिल सकता है। पार्टियों के बीच क्या बन रही रायवीसीके के संस्थापक-अध्यक्ष और लोकसभा सांसद थोल थिरुमावलवन ने संवाददाताओं से कहाकि जनता ने गठबंधन सरकार का समर्थन किया है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न देकर तमिलनाडु के लोगों ने यही संदेश दिया है। हम वामपंथी दलों के साथ चर्चा करेंगे और टीवीके को समर्थन देने के मुद्दे पर फैसला लेंगे। उन्होंने यह भी कहाकि चुनाव परिणाम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली सांप्रदायिक और जातिवादी ताकतों के खिलाफ है। इस बीच, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के पूर्व मंत्री और टीवीके नेता के.ए. सेंगोट्टइयन एवं उनके सहयोगी आधाव अर्जुना विश्वास मत से पहले समर्थन जुटाने के लिए अन्नाद्रमुक के निर्वाचित विधायकों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं।
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May 5, 2026, 03:24 PM
ट्रम्प ने मोदी को ऐतिहासिक चुनावी जीत पर बधाई दी, बंगाल की राजनीति में बदलाव को चिह्नित किया

ट्रम्प ने मोदी को ऐतिहासिक चुनावी जीत पर बधाई दी, बंगाल की राजनीति में बदलाव को चिह्नित किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleभारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक जीत के बाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत की बधाई दी है।और पढ़ेंTrending Videosव्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसका नेतृत्व आप जैसे नेता के हाथों में है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को इस हालिया ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत के लिए बधाई दी है।विज्ञापनविज्ञापनबंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलावभाजपा की इस जीत के साथ पहली बार पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है। यह राज्य लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस चुनाव परिणाम के साथ ही राज्य में बनर्जी का करीब 15 साल का शासन समाप्त हो गया है। इसे पीएम मोदी के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कद और मजबूत हुआ है।'यह नए युग की शुरुआत'जीत की घोषणा के बाद नई दिल्ली में समर्थकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इसे पश्चिम बंगाल के लिए नए युग की शुरुआत बताया था। उन्होंने कहा कि यह जनादेश भयमुक्त, विकासशील और विश्वास से भरे बंगाल की दिशा में एक निर्णायक कदम है। पीएम मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा “अब दशकों का इंतजार खत्म हुआ है और जनता ने उस विजन को साकार करने का अवसर भाजपा को दिया है।”अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भारत का प्रभावइस ऐतिहासिक जीत और ट्रंप की बधाई को भारत की बढ़ती वैश्विक साख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूती मिलेगी और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका और प्रभावशाली होगी।अन्य वीडियो:-विज्ञापनविज्ञापनरहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें AndroidHindi News App, iOSHindi News AppऔरAmarujala Hindi News APPअपने मोबाइल पे|Get latestWorld Newsheadlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latestHindi news.
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May 5, 2026, 03:08 PM
पश्चिम बंगाल में 9 मई को पहली सरकार बनाने की शपथ लेगी भाजपा

पश्चिम बंगाल में 9 मई को पहली सरकार बनाने की शपथ लेगी भाजपा

नई दिल्ली :पश्चिम बंगाल में पहली बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा। इस दिन रवीद्र नाथ टैगोर की जयंती है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इसकी जानकारी दी। चुनाव के नतीजों के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी हेडक्वॉर्टर में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, तब उन्होंने भी टैगोर के आदर्शों का जिक्र किया था।क्या सुवेंद्र अधिकारी सबसे आगेअगले एक- दो दिन में बीजेपी विधायक दल की मीटिंग होगी, जिसमें सीएम का नाम तय किया जाएगा। बीजेपी ने इसके लिएगृह मंत्री अमित शाहको पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बंगाल में बीजेपी का पहला सीएम कौन होगा, इसे लेकर चर्चाओं और मीटिंग्स का दौर भी चल रहा है। बीजेपी के पहले सीएम के लिए सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वजह ये कि उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हराया और इस बार फिर भवानीपुर से ममता बनर्जी को मात दी। सुवेंदु राज्य में बीजेपी का आक्रामक चेहरा हैं।टीएमसी की सरकार में मंत्री भी रहे हैं सुवेंदुचुनाव प्रचार के दौरान लगातार हिंदू वोटर्स को एकजुट करने की बात की और अब तक राज्य में नेता प्रतिपक्ष रहे। टीएमसी से बीजेपी में शामिल हुए सुवेंदु टीएमसी के काम करने के तरीके से लेकर पूरे सिस्टम को समझते हैं।ममता सरकारमें मंत्री भी रहे। हालांकि बीजेपी का पुराना कैडर ना होना उनकी उम्मीद को थोड़ा कम कर सकता है। ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी ने दूसरे पार्टी से आए नेताओं पर भरोसा नहीं किया। असम इसका एक उदाहरण है, जहां बीजेपी ने हेमंत बिस्व सरमा को सीएम बनाया, वो भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। वैसे असम और बंगाल की स्थिति में थोड़ा फर्क भी है, क्योंकि बंगाल में बीजेपी के पास और भी चेहरे हैं।संघ बैकग्राउंड वाले नेताबीजेपी ने पिछले कुछ महीनों में जब राज्यों में संगठन की नई टीम का चयन किया तोराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघबैकग्राउंड वाले नेताओं को तरजीह दी गई। इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में भी टीएमसी से लोगों को नहीं लिया गया, जैसा पिछले चुनाव में किया था। इसलिए ये भी एक संभावना है कि बीजेपी राज्य में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद अपना पहला सीएम किसी ऐसे नेता को बनाए जो शुरू से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा हो और संघ बैकग्राउंड का हो।संघ के ये नेता भी रेस मेंबीजेपी के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि संघ एंगल देखने पर मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष का नाम सामने आता है। दिलीप घोष ने राज्य में बीजेपी का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि पिछले चुनाव से इस चुनाव के बीच वह कुछ नाराज भी चल रहे थे। वह अपने आक्रामक राजनीतिक शैली और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। सामिक भट्टाचार्य को बूथ स्तर के प्रबंधन में माहिर माना जाता है। सामिक 1974 से ही संघ से जुड़े रहे और बीजेपी युवा मोर्चा में भी रहे। पश्चिम बंगाल बीजेपी में संघ बैकग्राउंड के और नेता भी हैं।क्या राजस्थान, एमपी वाला प्रयोग हो सकता हैये भी चर्चा है कि क्या बीजेपी बंगाल में मध्य प्रदेश या राजस्थान जैसा प्रयोग कर बड़े चेहरे की जगह किसी कम जानेपहचाने चेहरे को सामने कर सकती है? हालांकि बंगाल जैसे राज्य में इसकी संभावना कम लगती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान में बीजेपी पहले से ही मजबूत रही है और सरकार में भी रही है। लेकिन बंगाल में अपनी पहली सरकार में बीजेपी शायद इस तरह का प्रयोग ना करे।सीएम को लेकर क्या है पार्टी का माननाजब ओडिशा में बीजेपी की पहली बार सरकार बनी तो बीजेपी ने मोहन चरण माझी को सीएम बनाया। इन्हें सरप्राइज सीएम फेस माना गया। हालांकि माझी छात्र जीवन से ही संघ से जुड़े रहे। इंडस्ट्री फ्रेंडली फेस बीजेपी ने बंगाल में टीएमसी को ये कहकर घेरा कि न वहां रोजगार है न इंडस्ट्री, इसलिए युवा पलायन कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि सरकार का चेहरा इंडस्ट्री फ्रेंडली हो, जिससे राज्य में बीजेपी अपने वादे पूरे कर सके।
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May 5, 2026, 03:05 PM
झारखंड में मंत्री ने राज्य के नेतृत्व पर उठाए सवाल

झारखंड में मंत्री ने राज्य के नेतृत्व पर उठाए सवाल

रांचीःदेश में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद झारखंड में भी खलबली मची हुई है। कांग्रेस कोटे से सरकार में मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने महिला आरक्षण बिल पर प्रदेश नेतृत्व की शिथिलता के साथ ही भाषा के मुद्दे पर भी सवाल उठा कर अपनी ही सरकार को कठघरे में करने का प्रयास किया है।सात बिंदुओं पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की कोशिशकांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य केवित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोरने पहले प्रदेश कांग्रेस की नई जंबो कमेटी पर निशाना साधा। इसके साथ ही पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से निकाले जाने और रांची की पूर्व मेयर रमा खलखो को कमेटी में शामिल किये जाने पर सवाल उठाये। अब मंगलवार को राधा कृष्ण किशोर एक के बाद एक सात बिंदुओं पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की कोशिश की।महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर घेराबंदीराधा कृष्ण किशोर की ओर सेप्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजूको लिखे गए पत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर घेराबंदी करते हुए लिखा कि राज्य स्तर पर मुद्दा नहीं बनाया गया और कांग्रेस भवन में सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस करने से राज्य भर की महिलाओं तक संदेश पहुंचाना मुश्किल है।मगही और भोजपुरी विषय कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर सवालमंत्री राधाकृष्ण किशोर नेजेटेट में मगही और भोजपुरी विषयको शामिल नहीं करने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद और अनुसूचचित जाति आयोग को पुनर्जीवित करने की मांग पर कांग्रेस नेतृत्व का मौन होने पर भी उन्होंने निशाना साधा।विधि व्यवस्था के मुद्दे पर एक्शन नहीं लेने पर सवालराधाकृष्ण किशोर ने हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में कांग्रेस प्रदेश कमिटी से किसी नेता के हजारीबाग नहीं जाने और हजारीबाग में तीन अल्पसंख्यकों की निर्मम हत्या पर प्रदेश नेतृत्व की ओर से कोई एक्शन नहीं लेने को लेकर भी सवाल उठाये।
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May 5, 2026, 03:01 PM
केरल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में राज्यसभा के सांसद हार गए

केरल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में राज्यसभा के सांसद हार गए

भोपाल:पश्चिम बंगाल और असम के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को बंपर जीत मिली। वहीं, केरल और तमिलनाडु में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। इस मध्य प्रदेश से दो राज्यसभा सांसद केरल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार गए हैं। इन दोनों नेताओं की हार से मध्य प्रदेश के स्थानीय नेताओं को झटका लगा है। ऐसा कहा जा रहा था कि अगर यह दोनों नेता विधानसभा का चुनाव जीत जाते तो राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देते और उनकी जगह किसी स्थानीय नेता को मौका मिल सकता था।केंद्र सरकार में मंत्री एल मुरुगनको तमिलनाडु और जॉर्ज कुरियन को केरलम विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। दोनों नेता मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। दोनों नेता मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं। इनकी हार का असर मध्य प्रदेश की सियासत में भी देखने को मिल रहा है।केरलम से आते हैं जार्ज कुरियनमध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन को बीजेपी ने केरलम की कांजीरापल्ली विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन उन्हें यहां हार का सामना करना पड़ा। जॉर्ज कुरियन तीसरे नंबर पर रहे। उन्हें कुल 26984 के करीब वोट मिले।मोदी कैबिनेट के दो मंत्री विधानसभा चुनाव हारेजॉर्ज कुरियन को केरलम में मिली हारतमिलनाडु से चुनाव लड़े थे एल मुरुगनदोनों नेता मध्य प्रदेश से हैं राज्यसभा सांसदएल मुरुगन भी चुनाव हारेमध्य प्रदेश से एक और राज्य सभा सांसद और केंद्रीय सूचना-प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन भी चुनाव हार गए हैं। तमिलनाडु की अविनाशी विधानसभा सीट से बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था। वे तमिलनाडु में बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। एल मुरुगन को एक्टर विजय की पार्टी TVK के उम्मीदवार ने हराया। उन्हें 56,200 से ज्यादा वोट मिले। उन्हें करीब 15 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा।दोनों के रिजल्ट को लेकर एमपी में थी उत्सुकतादोनों नेताओं के चुनाव परिणाम को लेकर मध्य प्रदेश में अच्छी रुचि थी। जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल जून 2026 और एल मुरुगन का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक है। जॉर्ज कुरियन को ज्योतिरादित्य सिंधिया की सीट से राज्यसभा भेजा गया था। लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
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May 5, 2026, 02:58 PM
पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों पर विपक्षी दलों ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों पर विपक्षी दलों ने उठाए सवाल

पटना:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया और परिणामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बंगाल चुनाव परिणाम को लेकर कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने क्षेत्रीय दलों को नसीहत दे दी। अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि अब माथा पीटने से हम लोगों का कुछ नहीं होगा। बीजेपी ने सरकार बना ली है। जनता ने जो निर्णय दिया है, उसको स्वीकार करना पड़ता है।जनता के जनादेश को स्वीकार करना चाहिए: अखिलेश सिंहपटना में बंगाल के चुनाव परिणाम पर आश्चर्य जताते हुए कांग्रेस सांसद अखिलेश सिंह ने कहा कि जमीनी स्तर पर माहौल ममता बनर्जी के पक्ष में दिखाई दे रहा था, लेकिनभवानीपुर सीटसे उनकी हार ने लोगों के मन में संदेह पैदा किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के जनादेश को स्वीकार करना और उसका सम्मान करना जरूरी है।'बीजेपी के खिलाफ अकेले नहीं जीत सकते' अखिलेश सिंह की नसीहतवहीं बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने पर अखिलेश सिंह ने निशाना साधा।कांग्रेस सांसद अखिलेश सिंहने कहा कि बंगाल में बीजेपी के खिलाफ सबको एक साथ लड़ना चाहिए था। उन्होंने ममता बनर्जी को नसीहत देते हुए कहा कि ममता बनर्जी हों या जो भी पार्टी है, जो अपने आप को समझती है कि हम अकेले जीत जाएंगे। उन्हें ये बात समझ लेनी चाहिए कि बीजेपी के खिलाफ अकेले नहीं जीत सकते हैं।रीजनल पार्टियों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा: अखिलेश सिंहकांग्रेस सांसद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ सभी पार्टी को एकजुट होना चाहिए, खास करके रीजनल पार्टियों को। रीजनल पार्टियों के अस्तित्व पर संकट है। उन्हें इस बात को समझना चाहिए कि वो बीजेपी का अकेले मुकाबला नहीं कर सकती हैं।कांग्रेस बीजेपी से टक्कर नहीं ले पा रही है? इस सवाल पर अखिलेश सिंह ने कहा कि केरल में बीजेपी नहीं जीत पाई। जीरो पर भेज दिया। यह दिखाई नहीं पड़ रहा है।बिहार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर भी बोले अखिलेश सिंहवहीं बिहार सरकार के 7 तारीख को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार पर अखिलेश सिंह ने कहा कि अच्छे-अच्छे मंत्री बने, जो जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर सके। लॉयन ऑर्डर खराब है, उसे ठीक किया जा सकता है। सरकार बेहतर की प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार की इमेज बहुत खराब है।
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May 5, 2026, 02:50 PM
एनडीए सरकार पटना में मंत्रिमंडल विस्तार और शपथ ग्रहण के लिए तैयार

एनडीए सरकार पटना में मंत्रिमंडल विस्तार और शपथ ग्रहण के लिए तैयार

विस्तारवॉट्सऐप चैनल फॉलो करेंपटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक बार फिर एक बड़े सियासी फेरबदल का गवाह बनने जा रहा है। एनडीए की नई सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार और शपथ ग्रहण 7 मई को होना है जिसकी तैयारी की जा रही है। पटना के गांधी मैदान में जहां एक ओर शपथ ग्रहण और कैबिनेट विस्तार की तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था भी की जा रही है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से गांधी मैदान में आमलोगों की इंट्री बंद कर दी गई है।और पढ़ेंTrending Videosयह खबर भी पढ़ें-BPSC 72th Exam: बीपीएससी 72वीं में राजस्व अधिकारी के 365 पद, DSP-SDO के कितने पदों पर निकली वैकेंसी?विज्ञापनविज्ञापनगृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी।- फोटो : ANIयह खबर भी पढ़ें-Vikramshila Setu News : भागलपुर जाने का उपाय क्या बचा? विक्रमशिला सेतु गिरने के बाद नवगछिया का रास्ता बंदनए चेहरों को मिलेगी जगहमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनने जा रहे इस नए मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को जगह मिलने की चर्चा चल रही है। राज्यपाल सय्यद अता हसनैन नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। लेकिन इस समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने वाले हैं। इनके अलावे इस समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार भी शामिल होंगे। कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए तीन बड़े-बड़े मंच बनाए जा रहे हैं। मुख्य मंच पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ-साथ मंत्रीमंडल में शामिल होने वाले वह सभी विधायक मौजूद होंगे। दूसरे मंच पर एनडीए के विधायक और एमएलसी के साथ अन्य बड़े-बड़े नेता रहेंगे, जबकि तीसरे मंच पर संगीत का आयोजन किया जाएगा।हेलीपैड का हो रहा निर्माण- फोटो : अमर उजालातीन हेलीपेड का हो रहा निर्माणतीन बड़े-बड़े पंडाल के साथ-साथ तीन हेलीपेड भी बनाए जा रहे हैं। यानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के अलावे अन्य बड़े नेता सीधे गाँधी मैदान में ही उतरेंगे। इसके लिए तीन बड़े-बड़े हेलीपैड बनाए जा रहे हैं। तीनों हेलीपैड सौ-सौ फीट डायामीटर का होगा। इसके अलावे ट्रैफिक रूट में भी बदलाव किए जाएंगे। साथ ही ख़ास मार्ग पर परिचालन प्रतिबंधित रहेंगे।
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May 5, 2026, 02:49 PM
भूपेंद्र यादव के रणनीतिक नेतृत्व में भाजपा ने बंगाल में बहुमत की सरकार जीती

भूपेंद्र यादव के रणनीतिक नेतृत्व में भाजपा ने बंगाल में बहुमत की सरकार जीती

जयपुर:बीजेपी के कुशल रणनीतिकार माने जाने वाले भूपेंद्र यादव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी चुनावी इंजीनियरिंग कितनी मजबूत है। बंगाल में बीजेपी ने इसके चलते जीत का नया चैप्टर लिख दिया है। 2011 में कभी 0 सीट पर रही बीजेपी , यहां अब बहुमत वाली सरकार बनाने जा रही है। बताया जाता है कि भूपेंद्र यादव 2021 से बंगाल में बिना किसी पद के जीत की रणनीति पर काम कर रहे थे। इसके बाद : बीजेपी आलाकमान ने 25 सितंबर 2025 को आधिकारिक रूप से उन्हें बंगाल का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया, जिसके बाद आज यहां बीजेपी ने 207 सीट जीतकर इतिहास रच दिया है।कैसे मिली नया अध्याय लिखने वाली जीतराजनीति के जानकारों का कहना है कि बंगाल के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव लगभग दो दशक से यहां संगठन को मजबूत करने का काम कर रहे थे। उन्होंने माइक्रो लेवल बूथ लेवल तक बंगाल बीजेपी के संगठनत्मक ढांचे को समझा। बंगाल के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को समझकर पार्टी की रणनीति बनाई। स्थानीय नेताओं के बीच अंदरूनी मतभेदों को सुलझाया और उम्मीदवारों के चयन में मुख्य भूमिका निभाई। कैंडिडेट सिलेक्शन और भूपेंद्र यादव का बीजेपी के अन्य नेताओं के साथ बेहतरीन समन्वय जीत का सूत्र बन गया।जिस चुनाव में मिला जिम्मा, जीत दर्ज करवाईभूपेंद्र यादव बीजेपी के उन नेताओं में शुमार है, जो चुनावी एक्सपर्ट के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं। यादवबंगाल से पहले मणिपुर, मध्य प्रदेश, और महाराष्ट्र का चुनाव प्रभार संभाल चुके हैं।केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को कब-कब मिला बड़ा जिम्मा2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रभारी2023 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रभारी2022 में मणिपुर विधानसभा चुनाव प्रभारी2020 में बिहार विधानसभा चुनाव प्रभारी2014 में झारखंड में विधानसभा चुनाव प्रभारी
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May 5, 2026, 02:48 PM
तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, कहा'अध्याय खत्म'

तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, कहा'अध्याय खत्म'

भारत के पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के निवर्तमान विधायक मनोज तिवारी ने मंगलवार को कहा कि उनके लिए 'तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अध्याय अब खत्म हो गया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट देने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्होंने पांच करोड़ रुपये देने से इनकार कर दिया था। भारत के 40 वर्षीय पूर्व बल्लेबाज और बंगाल क्रिकेट के इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी (10,195 प्रथम श्रेणी रन) ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में खेल राज्य मंत्री थे। ममता का 15 साल का कार्यकाल हालिया विधानसभा चुनावों में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत के साथ समाप्त हो गया। तिवारी ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ''इस करारी हार से मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई है। जब पूरी पार्टी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ हो तो ऐसा होना ही था।'' उन्होंने कहा, ''सिर्फ वही लोग टिकट खरीद पाए जो भारी-भरकम रकम दे सकते थे। इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए। मेरे से भी पैसे मांगे गए थे लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। यह तो देखिए कि जिन लोगों ने पैसे दिए उनमें से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं।'' तिवारी ने कहा, ''जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है।'' तिवारी ने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था, भले ही 2019 में तृणमूल ने उन्हें लोकसभा का टिकट देने की पेशकश की थी। आखिरकार 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने शिबपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने कहा, ''उस समय मैं आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी में खेलने को लेकर गंभीर था जब दीदी (ममता) चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं।'' तिवारी ने कहा, ''मैंने विनम्रता से मना कर दिया था लेकिन 2021 के चुनावों से पहले दीदी ने एक बार फिर मुझे बुलाया और कहा, 'मनोज मेरे पास तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें वह संदेश देगा।' मुझे शिबपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया और मैंने सोचा कि मैं कुछ सार्थक बदलाव ला सकता हूं।'' तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है। उन्होंने कहा, ''मैंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया है जहां तृणमूल के सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था। मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक 'लॉलीपॉप' थमा दिया गया था, जिसका असल में कोई मतलब ही नहीं था। अगर मैं खड़ा होकर कहता कि दीदी मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं। तो वह बीच में ही हमें रोक देतीं और कहतीं कि मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है।'' तिवारी ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली के खराब होने की पुरानी समस्या को उनके बार-बार प्रयास करने के बावजूद कभी हल नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ''मौजूदा विधायक होने के नाते मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में ड्रेनेज के काम के लिए हर जगह दौड़-भाग करता रहा लेकिन जिन लोगों ने वर्षों तक हावड़ा नगर पालिका पर कब्जा जमाए रखा और चुनाव नहीं होने दिए उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की।'' इस पूर्व क्रिकेटर ने कहा, ''वे बस विकास कार्यों में अड़ंगा डालते रहते थे जबकि वे बहुत ही बुनियादी काम थे। मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने जो कुछ काम करवाए वे सिर्फ विधायक कोष से ही नहीं बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मैंने अपनी जेब से भी पैसे दिए।'' तिवारी ने कहा, ''हर साल दीदी भूमिगत ड्रेनेज प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एक 'मास्टर प्लान' की घोषणा करती थीं लेकिन बात बस घोषणा तक ही सीमित रहती थी- यानी सिर्फ कोरे वादे।'' तिवारी को अपनी छवि को लेकर भी कई लड़ाइयां लड़नी पड़ी जिसमें उन पर यह आरोप भी शामिल है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में बिल्डरों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने हालांकि इस आरोप को हंसी में उड़ा दिया। उन्होंने कहा, ''मैं आपको बता दूं कि जब मैंने 2021 के चुनावों से पहले अपना आय का हलफनामा जमा किया था तो मैंने यह बताया था कि मेरे पास 20 करोड़ रुपये नकद हैं। मैंने 10 साल तक आईपीएल खेला है, 20 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला है और काफी वर्षों तक भारतीय टीम का हिस्सा रहा हूं।'' तिवारी ने कहा, ''मुझे जबरन वसूली के पैसों की कोई जरूरत नहीं है। सात-आठ ऐसे स्थानीय पार्षद थे जो नियमित रूप से दीदी को चिट्ठियां लिखते रहते थे। मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए थे।'' जाने-माने क्रिकेटर तिवारी को राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बिस्वास ने अपनी असुरक्षा के कारण उन्हें अपने मंत्री पद के कर्तव्य निभाने की अनुमति नहीं दी। तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा, ''अरूप दा किसी भी खेल के बारे में क, ख, ग भी नहीं जानते। ऐसे कई कार्यक्रम होते थे जहां अरूप दा और मुझे दोनों को बुलाया जाता था लेकिन मुझे मंच पर नहीं बुलाया जाता था। एक बार डूरंड कप के अनावरण के मौके पर खेल के पन्नों में मेरी तस्वीरें छपी थीं और उसके बाद अगले डूरंड कप से मुझे कोई न्योता ही नहीं मिला।'' तिवारी इस बात से खुश हैं कि उन्होंने कोलकाता में महान फुटबॉल लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया जो अंत में एक 'बड़ी गड़बड़' साबित हुआ। इस खराब तरीके प्रबंधित कार्यक्रम की वजह से मशहूर सॉल्ट लेक स्टेडियम में तोड़फोड़ हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्टेडियम में खचाखच भरी भीड़ को मेस्सी की एक झलक भी ठीक से देखने को नहीं मिली क्योंकि राजनेता और स्थानीय प्रशासक इस स्टार फुटबॉलर के चारों ओर जमा हो गए थे जिसे सुरक्षा कारणों से जल्दी ही वहां से ले जाया गया। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की लेवल दो की कोच परीक्षा पास करने के बाद तिवारी बंगाल की रणजी टीम के मुख्य कोच बनना चाहते हैं। तिवारी ने कहा, ''बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) ने मुख्य कोच के पद के लिए आवेदन मंगाए थे। मैंने अपनी बीसीसीआई लेवल दो परीक्षा पास की है और आने वाले समय में मैं कोचिंग को गंभीरता से लेना चाहता हूं।''
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May 5, 2026, 02:41 PM
विधानसभा चुनावः केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन

विधानसभा चुनावः केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन

4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ है. पुडुचेरी और असम में सरकार नहीं बदली है. जिन तीन राज्यों में सरकारें बदली हैं, वहां सत्ताधारी दल ने अपनी कई सीटें गंवाई हैं. इसका असर इन राज्यों के आगामी राज्यसभा चुनाव पर पड़ सकता है. चलिए जानते हैं कि इन नतीजों से राज्यसभा की तस्वीर कैसे बदलेगी. ये भी पढ़ेंःकैसे तय होता है बहुमत का आंकड़ा? ये फॉर्मूला जान लेंगे, तो कभी नहीं होंगे कन्फ्यूज़ LATEST Attention passengers! Mumbai train services to be affected b GST 2.0 boosts big Navratri sales for Hyundai, Maruti Suzuki Kartik Aaryan makes HUGE investment in Mumbai, buys property PM Modi dials Russian PM Putin over Ukraine strategy amid Tr BAD news for India Pharma, US President Donald Trump slaps 1 Attention passengers! Mumbai train services to be affected b GST 2.0 boosts big Navratri sales for Hyundai, Maruti Suzuki Kartik Aaryan makes HUGE investment in Mumbai, buys property PM Modi dials Russian PM Putin over Ukraine strategy amid Tr BAD news for India Pharma, US President Donald Trump slaps 1 केरल में 2027, 2028 और 2030 में राज्यसभा चुनाव होने हैं. तीनों साल तीन-तीन राज्यसभा सांसद रिटायर हो रहे हैं. केरल राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिए 36 वोट की ज़रूरत होगी. UDF के पास 102 सीटें हैं. LDF के पास 35 सीट. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस की लीडरशिप वाली UDF के तीन-तीन सांसद तीनों साल चुने जाएंगे. कांग्रेस UDF की सबसे बड़ी पार्टी है, ऐसे में संभावना है कि 2030 तक वो राज्यसभा में केरल से अपने 4 से 5 सांसद भेज सकती है. अन्य सांसद UDF के अन्य सहयोगी दलों से भेजे जाएंगे. साल 2028 में तमिलनाडु के 6 राज्यसभा सांसद रिटायर होंगे. इनमें से एक कांग्रेस, तीन DMK और 2 AIADMK कोटे से राज्यसभा गए हैं. 2028 में एक सीट के लिए 34 वोट की ज़रूरत होगी.TVK के पास 108 सीटेंहैं, वह तीन सीटों के साथ राज्यसभा में जा सकती है. AIADMK की एक सीट कम हो सकती है. DMK अपनी एक सीट बचा सकती है, वहीं एक सीट के लिए DMK और TVK को समझौता करना पड़ सकता है. 2028 के बाद तमिलनाडु में राज्यसभा चुनाव 2031 के विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे. पश्चिम बंगाल में 2029 से 2032 तक सभी 16 सीटों पर चुनाव होंगे. बंगाल के 16 में 13 राज्यसभा सीटों पर TMC के सांसद हैं. वहीं, केवल 3 सीटों पर बीजेपी ने अपने सांसद राज्यसभा भेजे हैं. 2029 के राज्यसभा चुनाव में 6 सीटों पर चुनाव होंगे, एक सीट के लिए 43 वोटों की ज़रूरत होगी. TMC अपनी एक राज्यसभा सीट आसानी से बचा लेगी, वहीं बीजेपी चार सीटें कम्फर्टेबली जीत लेगी. बची एक सीट के लिए दोनों को जोड़-तोड़ भिड़ाने की ज़रूरत पड़ेगी क्योंकि उस सीट के लिए दोनों के पास पूरे 43 वोट नहीं हैं. यही स्थिति 2030 के राज्यसभा चुनाव में भी होगी. बंगाल में 2032 का राज्यसभा चुनाव अगले विधानसभा चुनाव के बाद होगा. असम की बात करें तो 2028 के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी अपनी दोनों सीट बचा लेगी. वहीं, 2027 के पुडुचेरी राज्यसभा चुनाव में भी बीजेपी अपनी एक सीट बचा लेगी.
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May 5, 2026, 02:41 PM
तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद वोट चोरी का आरोप लगाया

तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद वोट चोरी का आरोप लगाया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की पराजय के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने वोट चोरी का आरोप लगाया और साफ कहा कि हम हारे नहीं है, बल्कि हमें लूटकर हराया गया है.अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ममता जी ने साफ कहा है कि जिस तरह से चुनाव में लूट हुई, हम हारे नहीं बल्कि हमें लूटकर हारा गया. अभिषेक बनर्जीने कहा कि मैं फिर कहता हूं कि शायद EVM से डाले गए वोट हैक नहीं हो सकते, लेकिन EVM को बदला जा सकता है. हमें कई जगहों से फीडबैक मिला है और काउंटिंग के दिन रिटर्निंग ऑफिसर के साथ भी शेयर किया गया था. उन्होंने कहा कि EVM के सीरियल नंबर 17C से मैच नहीं कर रहे थे. कल्याणी, मेमारी से 10 ऐसी EVM आईं. ऐसे 100 काउंटिंग सेंटर हैं, 100 ऐसी असेंबली सीटें हैं, जहां दोपहर 2 बजे के बाद सभी काउंटिंग एजेंट हटा दिए गए थे. यह CCTV में रिकॉर्ड है. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि दोपहर 2 बजे तक 80-90% काउंटिंग पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन टाइम स्टैम्प देखिए, कल दोपहर 2-2.30 बजे तक सिर्फ 3-4 राउंड की काउंटिंग हुई थी. ऐसा माहौल बनाया गया जैसे बीजेपी पहले ही जीत चुकी हो. राज्य से कोई नहीं था. काउंटिंग ऑब्जर्वर और माइक्रो ऑब्जर्वर केंद्र के आदमी थे. चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर तैनात किया था. पैरामिलिट्री फोर्स पहरा दे रही है…तो, लूट हुई…” बता दें कि ममता बनर्जी ने पहले ही वोट चोरी का आरोप लगाया है और सीएम पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. दूसरी ओर, टीएमसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी. ऐसे मुकाबले से नहीं जो कभी निष्पक्ष नहीं था, कभी स्वतंत्र नहीं था, और कभी होना ही नहीं था. उन्होंने कहा कि यह दिल्ली में रची गई एक साजिश थी जिसे एक मिलीभगत वाले चुनाव आयोग ने अंजाम दिया, अपने आकाओं के लिए पहले से तय नतीजा बनाने के लिए पहले दिन से ही धांधली की गई. Smt.@MamataOfficialhas made it clear that she will not resign. Not from a contest that was never fair, never free, and never meant to be. This was a conspiracy scripted in Delhi and executed by a complicit Election Commission, rigged from the very first day to manufacture apic.twitter.com/N8wLBHdBNX — All India Trinamool Congress (@AITCofficial)May 5, 2026 उन्होंने कहा कि हर संस्था को लामबंद किया गया, हर नियम को तोड़ा गया, हर सुरक्षा को खत्म किया गया, और फिर भी, हमने हर कदम पर, हर मोर्चे पर, बिना डरे उनसे लड़ाई लड़ी और अगर इस लड़ाई में कोई नैतिक रूप से जीतने वाला है, तो वह हम हैं. उन्होंने कहा कि दीदी ने वादा किया है कि वह उन सड़कों पर वापस आएंगी, जहां वह राजनीतिक रूप से पैदा हुईं, जहां उन्होंने लोगों का प्यार और भरोसा कमाया, अपनी मां, माटी, मानुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होंगी. उन्हें चुप नहीं कराया है. उन्हें सिर्फ लड़ने की और वजह दी है. ये भी पढ़ें-सुबह 6 बजे राहुल गांधी के घर गयाअभिषेक बनर्जी ने बताया आखिर क्यों नहीं हो पाया कांग्रेस-TMC का गठबंधन टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल TV9 नेटवर्क का प्रमुख हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म है. इस वेबसाइट पर देश-विदेश की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग से पाठकों को रूबरू कराया जाता है. टीवी9 की वेबसाइट tv9hindi.com प्रमुख हिंदी वेबसाइटों में अपना स्थान रखती है. टीवी9 हिंदी का अपना मोबाइल ऐप भी है, जहां टेक्स्ट और वीडियो दोनों माध्यम से खबरें पढ़ीं और देखी जा सकती हैं. टीवी9 वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य, टेक और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसी विविध श्रेणियों में खबरें कवर की जाती हैं. यहां एक्सप्लेनर्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज, वीडियो रिपोर्ट्स और लाइव अपडेट्स मिलते हैं. TV9 नेटवर्क का डिजिटल सेगमेंट तेजी से बढ़ा है और मिलियंस की संख्या में यूनिक यूजर्स तक पहुंचता है.
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May 5, 2026, 02:40 PM
तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक की हार से राजनीतिक उथल-पुथल

तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक की हार से राजनीतिक उथल-पुथल

नई दिल्ली:पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम की करारी हारने ने देश में सियासी हलचल को कई गुना बढ़ा दिया है। इस बीच महाराष्ट्र से पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 'इंडिया अलायंस' पर नाराजगी जताई है।पूर्व सांसद ने INDI अलायंस पर बोला हमलामहाराष्ट्र से पूर्वराज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदीने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर INDI गठबंधन पर निशाना साधा है। सांसद ने एक्स पोस्ट में लिखा कि TMC और DMK की नाकामी पर 'इंडिया अलायंस' के अंदर से ही जिस तरह की खुशी जाहिर की जा रही है, उसे देखना शर्मनाक है।पूर्व सांसद ने पिछली घटनाओं का किया जिक्रशिवसेना यूबीटी से पूर्व राज्यसभा सांसद ने आगे लिखा कि ऐसी ही शेखी तब भी देखने को मिली थी, जबअरविंद केजरीवालऔरतेजस्वी यादव(जो 'इंडिया अलायंस' का ही हिस्सा हैं) चुनाव हारे थे, और AAP में हाल ही में हुई फूट के दौरान भी।सांसद ने INDI गठबंधन को दी सलाहपूर्व महिला सांसद ने आगे कहा कि और अब, आने वाले UP चुनावों के लिए उन्होंनेअखिलेश यादवको अपना निशाना बनाया हुआ है। वोटर ठीक इसी तरह की फूट को नकारते हैं, और BJP इसी का फायदा उठाती है। उन्होंने आगे लिखा कि 2024 में विपक्ष की अगुवाई किसी एक पार्टी ने नहीं की थी, बल्कि यह सभी पार्टियों का एक साझा और मिलकर किया गया प्रयास था। इसलिए, कृपया पीछे हटें और उस भावना को याद रखें, जिसके चलते'इंडिया अलायंस'का गठन किया गया था।
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May 5, 2026, 02:40 PM
भाजपा और टी. एम. सी. के सांसद आपस में भिड़े

भाजपा और टी. एम. सी. के सांसद आपस में भिड़े

नई दिल्ली:भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर तंस कसा है। इस बार की बहस किसी सियासी मुद्दे पर नहीं बल्कि बांग्लादेशी साड़ी को लेकर हुई है। निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा के एक पुराने पोस्ट पर करारा जवाब दिया है। दरअसल, महुआ मोइत्रा ने निशिकांत दुबे की पत्नी की साड़ी को लेकर बिना नाम लिए निशिकांत दुबे पर हमला बोला था। फिर क्या था निशिकांत दुबे भी कहां मौका छोड़ने वाले हैं, उन्होंने भी इस पोस्ट पर पलटवार कर दिया।सबसे पहले जानिए महुआ मोइत्रा ने क्या कहा था?महुआ मोइत्रा ने तीन दिन पहले सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा था कि भाजपा के पेशेवर उपद्रवी सांसद हमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहते हैं, जबकि उनकी पत्नी उनके साथ बंगाल में चुनाव प्रचार करती हैं और लोगों को फोन करके पूछती हैं कि उन्हें "असली ढाकाई जामदानी" साड़ियां कहां मिल सकती हैं। भाजपा का असली चेहरा है यह।फिर निशिकांत दुबे ने किया पलटवारफिर निशिकांत दुबे ने भी अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मैंने महुआ जी के इस ट्वीट पर गहन चिंतन किया । पिनाकी मिश्रा जी मेरे पुराने दोस्त हैं इसलिए महुआ मोइत्रा जी मेरी अब भाभी हैं,बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव हारने के बाद मैंने बांग्लादेश के नव नियुक्त राजदूत से आग्रह किया है कि महुआ भाभी के लिए ढाका में जमदानी साडी का शोरूम या साड़ी का बुनकर केंद्र खुलवा दें। किसी को भी किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी,सीधे महुआ जी के दुकान से साड़ी मिलेगी।महुआ मोइत्रा कौन हैं?महुआ मोइत्रा अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की एक जानी मानी भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व इनवेस्टमेंट बैंकर हैं।वह पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में कृष्णानगर से जीत हासिल की थी।इससे पहले, वह 2016 से 2019 तक करीमपुर निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्य रह चुकी हैं।वह संसद में अपने आक्रामक और जोशीले भाषणों के लिए जानी जाती हैं।वह अक्सर संसद में केंद्र सरकार को अलग-अलग संवेदनशील मुद्दों पर घेरती नजर आती हैं।
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May 5, 2026, 02:30 PM
स्टालिन सरकार को हार का सामना करना पड़ा क्योंकि प्रमुख मंत्रियों को सीटें गंवानी पड़ीं

स्टालिन सरकार को हार का सामना करना पड़ा क्योंकि प्रमुख मंत्रियों को सीटें गंवानी पड़ीं

पेरियाकरुप्पन 20 वर्षों से इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनकी यह पराजय देश के चुनावी इतिहास में शायद सबसे करीबी और चौंकाने वाले उलटफेरों में से एक के रूप में दर्ज होगी। इस चुनाव में स्टालिन सरकार के 15 प्रमुख मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है।
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May 5, 2026, 02:28 PM
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यसभा के बागी सदस्यों के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात की, भाजपा की आलोचना की

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यसभा के बागी सदस्यों के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात की, भाजपा की आलोचना की

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के बागी राज्यसभा सदस्यों के मुद्दे पर मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री मान और अरविंद केजरीवाल ने कपूरथला विधानसभा में अपने विधायकों को संबोधित किया. इस दौरान दोनों ने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा. मुख्यमंत्री मान ने कहा कि भाजपा में शामिल हुए इन 7 बागी विधायकों को कोई सुरक्षा नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि इन्होंने पंजाब के साथ विश्वासघात किया है और जनता गद्दारों को पसंद नहीं करती. उन्होंने कहा किआम आदमी पार्टीएक राष्ट्रीय पार्टी है, इसे तोड़ना आसान नहीं है. वहीं केजरीवाल ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र का अपहरण कर रही है और सभी राज्यों पर कब्जा कर रही है. लेकिन आम आदमी पार्टी उसका विजय रथ रोक देगी. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पिछले कई दिनों से आम आदमी पार्टी पर हमले हो रहे हैं. पार्टी के अस्तित्व को मिटाने की कोशिश की जा रही है. पार्टी नेताओं को लुभाया गया, सौ-सौ सपने दिखाए गए, यहां तक ​​कि डराया-धमकाया भी गया, लेकिन वे अडिग रहे. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सिकंदर ने पूरे भारत को जीत लिया था, लेकिन जब वह पंजाब पहुंचा, तो उसे रोकने वाला एक पंजाबी व्यक्ति था, जिसका नाम पोरस था. उसने उसके विजय रथ को रोक दिया था. ठीक उसी तरह, अब आम आदमी पार्टी भाजपा के रथ को रोकेगी. वहीं अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चार साल बाद सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर उठ रही है, लेकिन लोग अब भी आम आदमी पार्टी की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं. सरकार पंजाब में लगातार विकास कार्य कर रही है, जिसे देखकर जनता प्रसन्न है. गांवों में 250 शानदार खेल मैदान बनाए गए हैं, जिनसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल रहे हैं. उन्होंने कहा कि भगवंत मान की सरकार ने लोगों को कृषि के लिए पानी उपलब्ध कराया है, मुफ्त पानी दिया है, महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये देना शुरू किया है और स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया है. केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र का अपहरण कर लिया है. भाजपा पार्टियां तोड़ती है, वोट काटती है, वोट जोड़ती है. बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली और कई अन्य राज्यों में भाजपा ने धांधली करके सरकार बनाई है. यही अराजकता पूरे देश में चल रही है. उन्होंने कहा कि आज देश की आजादी और स्वतंत्रता संकट में है. टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल TV9 नेटवर्क का प्रमुख हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म है. इस वेबसाइट पर देश-विदेश की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग से पाठकों को रूबरू कराया जाता है. टीवी9 की वेबसाइट tv9hindi.com प्रमुख हिंदी वेबसाइटों में अपना स्थान रखती है. टीवी9 हिंदी का अपना मोबाइल ऐप भी है, जहां टेक्स्ट और वीडियो दोनों माध्यम से खबरें पढ़ीं और देखी जा सकती हैं. टीवी9 वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य, टेक और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसी विविध श्रेणियों में खबरें कवर की जाती हैं. यहां एक्सप्लेनर्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज, वीडियो रिपोर्ट्स और लाइव अपडेट्स मिलते हैं. TV9 नेटवर्क का डिजिटल सेगमेंट तेजी से बढ़ा है और मिलियंस की संख्या में यूनिक यूजर्स तक पहुंचता है.
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May 5, 2026, 02:27 PM
झारखंड में पहली बार सत्ता गंवाने जा रही है भाजपा

झारखंड में पहली बार सत्ता गंवाने जा रही है भाजपा

रांचीःपश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की पहली बार सरकार बनने जा रही है। इसके साथ ही पूर्वी भारत में सिर्फ झारखंड ही एक राज्य होगा, जहां भाजपा की सरकार नहीं होगी। इन राज्यों में कांग्रेस का लगभग पूरी तरह से सफाया हो गया है। ऐसे में कांग्रेस पर सत्ता में वापसी का दबाव बढ़ गया है। जबकि भाजपा के खिलाफ लड़कर सत्ता को बरकरार रखना सीएम हेमंत सोरेन के लिए बड़ी चुनौती होगी।पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर दिखेगा सीधा असरझारखंड के पड़ोसी राज्य बिहार, छत्तीसबढ़ और ओडिशा के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई है। कल तक पूर्वी भारत में झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल में भाजपा और एनडीए की सरकार नहीं थी, लेकिन अबपश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह से बदलगई है। आने वाले समय में झारखंड पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।पश्चिम बंगाल और असम चुनाव को लेकर कांग्रेस-जेएमएम में दूरियां दिखींदेश की इन नई राजनीतिक परिस्थितियों मेंहेमंत सोरेन सरकार पर दबाव बढ़ गया है। हेमंत सोरेन की हाल के महीनों में दिल्ली यात्राओं, गठबंधन की अंदरूनी अटकलों और केंद्र से फंड रिलीज में देरी की शिकायतों ने सुगबुगाहट तेज कर दी है। हालांकि कांग्रेस ने बार-बार कहा है कि इंडिया गठबंधन 'रॉक-सॉलिड' है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जारी हैं। कांग्रेस और झामुमो के बीच पश्चिम बंगाल और असम चुनाव को लेकर दूरियां भी दिखीं। दोनों राज्यों में कांग्रेस और जेएमएम के नेता एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आए।असम में जेएमएम के कारण कांग्रेस को 12 सीटों पर सीधा नुकसानअसम विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने गठबंधन के प्रस्ताव को ठुकरा कर अकेले 16 सीटों पर चुनाव लड़कर कांग्रेस को सीधा नुकसान पहुंचाने का काम किया। वोट बंटवारे के बीजेपी उम्मीदको कम से कम 12 सीटों पर सीथा नुकसान उठाना पड़ा। यदि इन सीटों पर जेएमएम उम्मीदवार खड़ा नहीं होते तो भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता था।पश्चिम बंगाल में जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी का दिया साथअसम की तरह ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी का साथ देने का काम किया। पश्चिम बंगाल में जेएमएम ने उम्मीदवार उतारने की जगह न सिर्फ ममता बनर्जी की पार्टी को टीएमसी को समर्थन दिया, बल्कि टीएमसी उम्मीदवारों के पक्ष में कई चुनावी सभाएं भी की।राज्यसभा चुनाव को लेकर भी जेएमएम-कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेजझारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावतय है। इसे लेकर भी जेएमएम और कांग्रेस के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। जेएमएम नेताओं की ओर से दोनों सीटों पर जीत का दावा किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस की ओर से भी एक सीट पर हक जताया जा रहा है।भाषा और कानून व्यवस्था को लेकर भी सवालकांग्रेस नेताओं की ओर से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा की लिस्ट में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस के दो मंत्रियों राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह की ओर से कैबिनेट की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया गया। इसके अलावा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद समेत अन्य नेताओं की ओर से कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं।इन राजनीतिक परिस्थितियों में भी झारखंड में भी भाजपा की ओर हेमंत सोरेन सरकार को चारों ओर से घेरने की राजनीति शुरू की गई है। भाजपा की ओर से झारखंड में इंडिया गठबंधन सरकार की 'राजनीतिक घेराबंदी' शुरू होने की चर्चा के बीच झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य झारखंड की तुलना कीवी फल से कते हैं। वे कहते हैं कि जब शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है तो कीवी सबसे ज्यादा असरदार होता है। कीवी का रंग बाहर से भूरा होता है और अंदर से हल्का हरा होता है। यही हरा रंग प्लेटलेट्स बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों से घिरे होने के बावजूद झामुमो कीवी फल की तरह विपक्ष का प्लेटलेट्स को बढ़ाने का काम करेगा।
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May 5, 2026, 02:20 PM
भाजपा ने जगत प्रकाश नड्डा को असम के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया

भाजपा ने जगत प्रकाश नड्डा को असम के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया

पार्टी ने जगत प्रकाश नड्डा को असम का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त कियाऔर पढ़ेंTrending Videosचंडीगढ़। असम में भाजपा की जीत के बाद नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है। पार्टी को अब विधायक दल का नेता चुना जाना है। इसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का अहम रोल होने जा रहा है। पार्टी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को असम भाजपा का विधायक दल का नेता चुनने के लिए केंद्रीय सह पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को असम का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। ये नियुक्तियां असम में बीजेपी विधायक दल के नेता के चयन की प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए की गई हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि इन पर्यवेक्षकों की देखरेख में असम में भाजपा विधायक दल का नेता चुना जाएगा। सैनी की यह भूमिका भाजपा के भीतर उनकी बढ़ती राजनीतिक अहमियत को दर्शाती है।विज्ञापनविज्ञापन
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May 5, 2026, 02:17 PM
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की, सफलता का श्रेय संगठनात्मक ताकत को दिया

पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की, सफलता का श्रेय संगठनात्मक ताकत को दिया

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ अपनी सीटों में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मुकाबले दोगुनी सीटों पर जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए। इस जीत के पीछे जहां एक ओर बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा और चुनावी रणनीति रही, वहीं पर्दे के पीछे दो प्रमुख नेताओं केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। बीजेपी की पूरी चुनावी रणनीति के केंद्रीय स्तंभ के रूप में भूपेंद्र यादव सामने आए। चुनाव प्रभारी की भूमिका निभाते हुए उन्होंने उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ स्तर तक की संरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी ने जिस “पन्ना प्रमुख” मॉडल को करीब 40 हजार बूथों पर लागू किया, उसका सीधा असर वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिला। भूपेंद्र यादव की रणनीति का फोकस केवल बड़े प्रचार अभियानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया। हर बूथ पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई और स्थानीय स्तर पर फीडबैक सिस्टम विकसित किया गया, जिससे चुनावी गतिविधियों की लगातार निगरानी संभव हो सकी। जहां भूपेंद्र यादव ने रणनीति की रूपरेखा तैयार की, वहीं सुनील बंसल ने उसे जमीन पर लागू करने का काम किया। संगठन विस्तार और माइक्रो लेवल मैनेजमेंट में बंसल की भूमिका को “साइलेंट गेम चेंजर” के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने हजारों छोटी बैठकों, स्थानीय कार्यकर्ता संवाद और बूथ स्तर की मीटिंग्स के जरिए चुनावी माहौल को पूरी तरह सक्रिय रखा। उनकी रणनीति का उद्देश्य हर बूथ तक पार्टी की पहुंच सुनिश्चित करना था। इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी गई। बीजेपी की इस जीत में सबसे बड़ा बदलाव बूथ मैनेजमेंट को लेकर देखने को मिला। पार्टी ने चुनाव को केवल रैलियों और बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि डेटा आधारित रणनीति, स्थानीय मुद्दों और माइक्रो टारगेटिंग पर ध्यान केंद्रित किया। करीब 40 हजार बूथों पर सक्रिय नेटवर्क तैयार किया गया, जहां “पन्ना प्रमुख” प्रणाली के माध्यम से हर वोटर तक पहुंचने की कोशिश की गई। इस मॉडल ने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती दी और कई क्षेत्रों में वोट शेयर में सुधार दर्ज किया गया। इस पूरी रणनीति में राजस्थान के नेताओं की भूमिका भी अहम रही। सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव के साथ-साथ जोनल स्तर पर कैलाश चौधरी जैसे नेताओं ने भी संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में सहयोग किया। माना जा रहा है कि हिंदी पट्टी के इन नेताओं की समझ और संगठन पर पकड़ ने बंगाल जैसे जटिल राजनीतिक राज्य में बीजेपी को बढ़त दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
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May 5, 2026, 02:17 PM
कांग्रेस नेता ने नैतिकता और जवाबदेही पर राज्य नेतृत्व की आलोचना की

कांग्रेस नेता ने नैतिकता और जवाबदेही पर राज्य नेतृत्व की आलोचना की

अखिल भारतीय कांग्रेस सदस्य आनंद माधव ने मंगलवार को बयान जारी करते हुए प्रदेश नेतृत्व और प्रभारी पर सीधा हमला बोला है। आनंद माधव ने कहा कि राजनीति में नैतिकता खत्म होने की बात अक्सर कही जाती है, लेकिन भंवर जितेंद्र सिंह के इस्तीफे से यह साबित होता है कि आज भी कुछ लोग जिम्मेदारी और शुचिता को महत्व देते हैं। माधव ने प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पर निशाना साधते हुए उन्हें लापरवाह और कुर्सी से चिपके रहने वाला बताया है।
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May 5, 2026, 02:13 PM
भाजपा अध्यक्ष ने भविष्यवाणी की है कि 2027 के चुनावों में महिलाएं कांग्रेस को'साफ'कर देंगी

भाजपा अध्यक्ष ने भविष्यवाणी की है कि 2027 के चुनावों में महिलाएं कांग्रेस को'साफ'कर देंगी

- प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- बंगाल, असम के बाद महिलाएं 2027 में कांग्रेस का करेंगी सूपड़ा साफऔर पढ़ेंTrending Videosअमर उजाला ब्यूरोदेहरादून। भाजपा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाली पार्टियों को देश की जनता ने सबक सिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, इसकी शुरुआत बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनाव से हुई है। अब देवभूमि भी महिला विरोधी कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए बेसब्री से 2027 के चुनावों का इंतजार कर रही है। इस बार कांग्रेस का प्रदेश से पूरी तरह सूपड़ा साफ होना तय है।उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों के महिला सशक्तीकरण के प्रयासों में रोड़े अटकाने से उत्तराखंड की मातृशक्ति में भी भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की जागरूक महिलाएं कांग्रेस के महिला विरोधी चरित्र को पहचान चुकी हैं। अब राज्यों के हालिया चुनाव परिणाम से उनका ये मत मजबूत हुआ है कि महिला विरोधी पार्टियां स्वीकार नहीं। भट्ट ने कहा कि बंगाल और असम जैसे राज्यों के परिणाम ये भी बताते हैं कि जनता अब केवल विकास, सुशासन और जनकल्याण के लिए ही वोट देती है। तुष्टिकरण और राष्ट्रविरोधी राजनीति को जनता पूरी तरह से नकार चुकी है।विज्ञापनविज्ञापनभट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार 100 फीसदी क्षमता और ईमानदारी के साथ जन-आकांक्षाओं को पूरा कर रही है। भाजपा अंत्योदय के मंत्र के साथ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
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May 5, 2026, 02:13 PM
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के रिसॉर्ट में भाजपा नेता के साथ पकड़ा गया शिक्षक

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के रिसॉर्ट में भाजपा नेता के साथ पकड़ा गया शिक्षक

बालोद:छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक रिसॉर्ट में जमकर हंगामा हुआ। यहां एक महिला टीचर एक भाजपा नेता के साथ पकड़ी गई है। महिला टीचर को उसके पति ने रंगे हाथ पकड़ा है। इसके बाद महिला ने जमकर हंगामा किया। महिला के पति का आरोप है कि उसकी पत्नी का कई पुरुषों के साथ अवैध संबंध है।पति ने आरोप लगाया कि जब वह पत्नी के कामों का विरोध करता है तो उसकी पत्नी बच्चों और उसके साथ मारपीट करती है। घर से निकालने और खाने में जहर देने की धमकी देती है। पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत कराई है। वहीं, पत्नी ने कहा कि पति ने जो आरोप लगाए हैं वह पूरी तरह से झूठे हैं।बदनाम करने के लिए पति ने की शिकायतपति ने मामले की शिकायत एसपी से करते हुए कार्रवाई की मांग की है। पत्नी ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि पति के द्वारा लगाए गए सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं। उसे बदनाम करने औरमानसिक तौर पर प्रताड़ितकरने के लिए आरोप लगाए हैं। जानकारी के अनुसार, पति भी बीजेपी नेता है। जिस बीजेपी पदाधिकारी के साथ उसकी पत्नी रिसॉर्ट में पकड़ी गई है वह महिला के पति का दोस्त है।बीजेपी नेता के साथ रिसॉर्ट में भी पत्नीतभी पुलिस को लेकर पहुंचा पतिरिसॉर्ट में दोनों के बीच जमकर हुआ हंगामापति का आरोप प्रताड़ित करती है उसकी पत्नीमामला बालोद के टिकरापारा का है। यहां रहने वाले अब्दुल ताहिर ने अपनी पत्नी के खिलाफ शितायत दर्ज कराई है। उसने बताया कि उसकी शादी 2006 में मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी। पत्नी प्राथमिक शाला में प्रधान पाठिका है, उनके एक बेटी और एक बेटा है। शादी के 17 साल तक सब ठीक था लेकिन बीते दो सालों से उसका व्यवहार बदल गया है। पत्नी के व्यवहार के कारण बच्चे और हम परेशान हैं।दोनों को पुलिस थाने लाया गया है। समझाने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है। पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जांच जारी है।मोनिका ठाकुर, ASP, बालोदनशे का आदी है पतिमहिला ने पति के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि उसका पति नशे का आदी है। नशे में आकर आए दिन घर में मारपीट करता है और प्रताड़ित करता है। मैंने रिसॉर्ट में बीजेपी नेता को मदद के लिए बुलाया था। जिसकी जानकारी पति को हुई और उसने साजिश के तहत मुझे बदनाम करने के इरादे से वहां आकर हंगामा करने लगा।
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May 5, 2026, 02:11 PM
सरकार गठन की बातचीत के बीच राज्यपाल से मिलेंगे तमिलगा वेट्ट्री कड़गम के नेता विजय

सरकार गठन की बातचीत के बीच राज्यपाल से मिलेंगे तमिलगा वेट्ट्री कड़गम के नेता विजय

विस्तारAdd as a preferredsource on googleतमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। इस बीच तमिलगा वेट्ट्री कजगम (टीवीके) ने सरकार गठन की प्रक्रिया के तहत राज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, टीवीके प्रमुख विजय जल्द ही राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सकते हैं।और पढ़ेंTrending Videosविजय बन सकते हैं नए मुख्यमंत्रीसूत्रों के मुताबिक, टीवीके प्रमुख विजय 7 मई को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। चुनाव में टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की है और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का बहुमत जरूरी है और टीवीके अभी इससे 10 सीटें पीछे है।विज्ञापनविज्ञापनतमिलनाडु चुनाव नतीजों को विजय ने बताया चमत्कारतमिलनाडु की राजनीति में आए हालिया चुनावी नतीजों को विजय ने बड़ा बदलाव बताते हुए चमत्कार करार दिया है। तमिलगा वेट्ट्री कझगम (टीवीके) के संस्थापक विजय ने कहा कि इस परिणाम ने न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है। विजय ने तमिलनाडु की जनता का आभार व्यक्त करते हुए इसे ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी जनादेश बताया। उन्होंने कहा कि लोगों ने बदलाव के लिए खुलकर मतदान किया और नई दिशा तय की।खासतौर पर युवाओं की भागीदारी को लेकर विजय ने कहा कि इस चुनाव में युवा मतदाताओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। उनके अनुसार, युवाओं की सोच और उनके वोट ने ही इस चुनाव के परिणाम को आकार दिया है। विजय ने आगे कहा कि यह जनादेश सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक शुरुआत का संकेत है, जो आने वाले समय में तमिलनाडु की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है।गठबंधन और समर्थन की कोशिशें जारीपार्टी सूत्रों ने बताया कि सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने को लेकर टीवीके अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत कर रही है। पार्टी अब कांग्रेस, वाम दलों, VCK और अन्य छोटे दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है, ताकि सरकार गठन के लिए जरूरी बहुमत हासिल किया जा सके। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि टीवीके का यह प्रदर्शन तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।कांग्रेस नेतृत्व तय करेगा आगे की रणनीतिकांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरिश चोडणकर ने सोमवार को बताया कि उन्होंने इस पूरे चुनावी परिदृश्य पर अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंप दी है और अब इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान करेगा। कांग्रेस, जो डीएमके गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरी थी, राज्य में लगभग पांच सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। चोडणकर के अनुसार, इस चुनाव में युवा और महिला मतदाताओं ने बड़ी संख्या में टीवीके के पक्ष में मतदान किया है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोगों ने बदलाव के लिए वोट दिया है और खासकर युवाओं व महिलाओं का झुकाव टीवीके की ओर अधिक रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल को सौंप दी है।विज्ञापनविज्ञापनरहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें AndroidHindi News apps, iOSHindi News appsऔरAmarujala Hindi News appsअपने मोबाइल पे|Get allIndia Newsin Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and morenews in Hindi.
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May 5, 2026, 02:08 PM
भारतीय मंत्री एक वोट से विधायक चुनाव हार गए

भारतीय मंत्री एक वोट से विधायक चुनाव हार गए

One Vote Victory Loss In Indian Elections:भारत को एक मत से हार-जीत की कीमत को समझने वाला एक और नेता मिल गया है। तमिलनाडु में एमके स्टालिन की सरकार के कद्दावर मंत्री और लगातार चार बार के विधायक पेरियकरुप्पन 1 वोट के अंतर से एमएलए का चुनाव हारने वाले देश के तीसरे नेता बन गए हैं। तमिलनाडु की तिरुपत्तूर सीट पर फिल्मों के स्टार चंद्रशेखरन जोसेफ विजय उर्फ थलापति विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के कैंडिडेट सीनिवासा सेतुपति ने पेरियकरुप्पन को मात्र 1 वोट के मार्जिन से हराकर पहली बार में विधानसभा में सीट पक्की कर ली है। सेतुपति पहले राउंड से 25वें चक्र राउंड तक पीछे चल रहे थे, लेकिन 26वें चक्र के बाद 199 से आगे हो गए। इसके बाद 30वें और आखिरी राउंड की गिनती तक वो लीड बढ़ने-घटने के बाद अंत में 1 वोट से जीत पर सेटल हो गए। भारत में पेरियकरुप्पन से पहले दो नेता विधानसभा के चुनाव में 1 वोट के अंतर से हारे हैं। एक जीत गया होता तो अपने राज्य का मुख्यमंत्री ही बनता। चुनावी इतिहास की जितनी जानकारी मौजूद है, उसके मुताबिक इस तरह 1 वोट से पहली हार कर्नाटक में 2004 के विधानसभा चुनाव में हुई। तब कांग्रेस के रंगास्वामी ध्रुवनारायण ने जनता दल- सेकुलर के विधायक एआर कृष्णमूर्ति को 1 वोट से हराया था। कृष्णमूर्ति इसी सीट से 1994 और 1999 में जनता दल के टिकट पर जीते थे। आजकल वो कांग्रेस में हैं और इस समय कोल्लेगल सीट से एमएलए हैं। कृष्णमूर्ति ने 2004 के चुनाव में समय बचाने के लिए अपने ड्राइवर को वोट देने से रोक दिया था, जो बहुत महंगी पड़ी। प्रशांत किशोर की हार से सीखे विजय; अकेले उतरे, 2 सीट लड़े, PK ने कहा था- TVK जीतेगी एक वोट से अब तक तीन नेता हारे हैं, लेकिन सीपी जोशी विधायिकी के साथ-साथ मुख्यमंत्री बनने का मौका गंवाने वाले इकलौते नेता हैं। राजस्थान कांग्रेस के बड़े नेता और गांधी परिवार के नजदीकी सीपी जोशी 2008 में अपनी पुरानी सीट नाथद्वारा से लगातार तीसरी जीत के लिए लड़ रहे थे, लेकिन भाजपा के कल्याण सिंह चौहान ने 1 वोट से पटक दिया। सीपी जोशी की हार से राजस्थान में पहले एक बार सीएम रह चुके अशोक गहलोत का रास्ता साफ हो गया और वो दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। सीपी जोशी की पत्नी, मां और ड्राइवर ने चुनाव में वोट नहीं डाला था, जिसकी कीमत उनके अलावा कोई और नहीं समझ सकता। सीएम बनने से चूके सीपी जोशी 2009 में भीलवाड़ा से लोकसभा का चुनाव जीतकर दिल्ली गए और तब मनमोहन सिंह सरकार में महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने। एक वोट से विधायक का चुनाव हारने और जीतने के तीन उदाहरण अब हो गए हैं। भारत में एक मत से सरकार गिरने की भी नजीर है। 1999 में जयललिता के समर्थन वापस लेने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। वाजपेयी ने लोकसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उसके समर्थन में 269 वोट पड़े और विरोध में 270। वाजपेयी का लोकसभा में दिया गया वो भाषण आज भी लोग सुनते और याद करते हैं। सरकार गिरने के बाद चुनाव हुए और वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की मजबूत सरकार बनी, जिसे हराकर 2004 में कांग्रेस ने सरकार में वापसी की।
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May 5, 2026, 02:06 PM
थलपति विजय के'यूथ पुश'अभियान ने तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में क्रांति ला दी है

थलपति विजय के'यूथ पुश'अभियान ने तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में क्रांति ला दी है

तमिलनाडु के 2026 विधानसभा चुनावों में जो कुछ हुआ, उसने न सिर्फ राज्य के राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि उसने चुनाव लड़ने का तरीका ही बदल दिया है। बड़ी बात यह है कि इस कहानी में सबसे अनोखा किरदार घर-घर के बच्चे थे, न कि नेता और रणनीतिकार। दरअसल हुआ ये कि इस चुनाव में अभिनेता से नेता बने थलपति विजय और उनकी पार्टी TVK ने बच्चों के जरिए एक अभिनव प्रयोग और प्रचार किया, जिसने पारंपरिक राजनीति की धारा ही मोड़ दी। विजय ने अपने पहले ही चुनाव में राजनीति को पूरी तरह फिल्मी अंदाज में पेश किया। उनकी रैलियां किसी फिल्म के ट्रेलर जैसी लगीं जिसमें पंच डायलॉग, इमोशनल अपील और जबरदस्त फैन एंगेजमेंट रहा लेकिन असली गेम-चेंजर बने “यूथ पुश”। बच्चों और किशोरों को कहा गया कि वे अपने माता-पिता को TVK के ‘व्हिसल’(सीटी) चिन्ह पर वोट देने के लिए मनाएँ। इसके बाद सोशल मीडिया पर रील्स और व्हाट्सऐप वीडियो की बाढ़ आ गई। इन वीडियो में बच्चे अपने परिवार वालों से कहते दिखे कि अगर विजय को वोट नहीं दिया तो "चावल में ज़हर मिला देंगे!" “गोबर फेंक देंगे!” या “बात नहीं करेंगे!” हालांकि यह सब मजाकिया अंदाज़ में था, लेकिन इसका असर गहरा हुआ। ये वीडियो घर-घर तक पहुँचे और बातचीत का हिस्सा बन गए। ये वीडियो स्क्रिप्टेड थे, लेकिन रियलिस्टिक और सहज भी थी इसलिए असरदार रहे। ये हर घर में राजनीतिक चर्चा और डाइनिंग टेबल पर चर्चा का विषय बन गए। TVK का ये कैंपेन पारंपरिक नहीं था। यह ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर फैलने वाला अभियान था। विजय के विशाल फैन क्लब नेटवर्क ने इसे “हाइपरलोकल डिजिटल मशीन” में बदल दिया। इसका नतीजा न सिर्फ TVK की विजय हुई बल्कि DMK की सत्ता से विदाई के रूप में देखने को मिला। पार्टी की करारी हार हुई और विपक्षी AIADMK तीसरे स्थान पर चली गई। जहाँ समर्थकों ने इन वीडियो को “क्यूट” बताया, वहीं आलोचकों ने कई गंभीर सवाल उठाए कि क्या बच्चों को राजनीति में इस तरह शामिल करना सही है? कुछ ने पूछा कि क्या मजाक में भी हिंसात्मक भाषा का इस्तेमाल ठीक है? क्या इससे पारिवारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है? कुछ वीडियो में बच्चे मज़ाक में थप्पड़ मारते या बुजुर्गों से बहस करते दिखे, जिस पर बाल अधिकार समूहों ने भी चिंता जताई। बहरहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि राजनीति के बदलते स्वरूप का संकेत है, जहाँ सोशल मीडिया, मीम्स और पारिवारिक संवाद भी चुनावी हथियार बन गए हैं।तमिलनाडु की राजनीति पहले से ही व्यक्तित्व-आधारित रही है, और अब यह “डिजिटल भक्ति” के नए रूप में सामने आ रही है।
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May 5, 2026, 02:05 PM
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने जीत के लिए मोदी के नेतृत्व को श्रेय दिया, नशीली दवाओं के खिलाफ अभियानों की घोषणा की

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने जीत के लिए मोदी के नेतृत्व को श्रेय दिया, नशीली दवाओं के खिलाफ अभियानों की घोषणा की

विस्तारAdd as a preferredsource on googleग्वालियर में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने पश्चिम बंगाल में मिली जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का परिणाम बताते हुए इसे “मोदी मैजिक” बताया। उन्होंने कहा कि नामुमकिन को मुमकिन बनाना मोदी जी की पहचान है और आने वाले समय में भाजपा पूरे देश में और मजबूत होगी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उसके पास केवल आलोचना करने का काम रह गया है।और पढ़ेंTrending Videosइस दौरान प्रीतम लोधी अपने एक बयान को लेकर भी चर्चा में रहे। उन्होंने कहा कि मैंने नशे में पीएचडी की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब नशे के दुष्प्रभाव को गहराई से समझने से है। उनके अनुसार, नशा केवल बर्बादी की ओर ले जाता है और इसी वजह से अब वे इसके खिलाफ अभियान चलाएंगे। प्रीतम लोधी ने दो अभियानों की घोषणा की, पहला “लोधी मोदी जोड़ो यात्रा” और दूसरा “नशा मुक्ति अभियान”। उन्होंने बताया कि वे इन अभियानों के तहत ग्वालियर से दिल्ली तक पदयात्रा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करना बताया गया।विज्ञापनविज्ञापनपढ़ें:पदभार संभालते ही रात में थानों का औचक निरीक्षण, भोपाल ग्रामीण में सख्ती के संकेतसीएम लोधी समाज से होना चाहिएआजादी से पहले ही लोधी समाज का वीरता से भरा गौरवशाली इतिहास रहा है। रानी अवंती बाई लोधी से लेकर हीरन शाह सहित अनेक वीर योद्धाओं ने अपने साहस और बलिदान से देश का मान बढ़ाया है। वर्तमान की बात करें तो कल्याण सिंह ने राम मंदिर के मुद्दे पर मुख्यमंत्री पद तक छोड़ दिया था। वहीं उमा जी ने भी तिरंगे के सम्मान के लिए मुख्यमंत्री पद का त्याग किया। इसीलिए मैंने यह मांग उठाई है कि देश में कम से कम एक मुख्यमंत्री लोधी समाज से होना चाहिए।पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भारत रत्न की मांगपूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को लेकर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। प्रीतम लोधी ने कहा कि कल्याण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पद तक त्याग दिया। ऐसे में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे अपनी प्रस्तावित यात्रा के दौरान इस मांग को प्रमुखता से उठाएंगे। प्रीतम लोधी ने यह भी कहा कि जनसंघ, जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के लिए लोधी समाज ने हमेशा समर्पण के साथ काम किया है, इसलिए समाज को उचित सम्मान और भागीदारी मिलनी चाहिए।
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May 5, 2026, 02:04 PM
भाजपा नेता ने चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल में तनाव के बीच संयम बरतने की अपील की

भाजपा नेता ने चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल में तनाव के बीच संयम बरतने की अपील की

विस्तारAdd as a preferredsource on googleपश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। इस बीच टीएमसी कार्यालयों पर कथित हमलों की घटनाओं के बाद केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की है।और पढ़ेंTrending Videosसुकांत मजूमदार की पार्टी कार्यकर्ताओं से अपीलसुकांत मजूमदार ने साफ कहा कि भाजपा को अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखनी चाहिए और किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। मजूमदार ने कहा कि लोगों ने टीएमसी को अस्वीकार कर दिया है, इसलिए भाजपा को उनके जैसा आचरण नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार अत्याचार हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कार्यकर्ताओं से धैर्य रखने का आग्रह किया।विज्ञापनविज्ञापनमंत्री ने विश्वास दिलाया कि पुलिस इन मामलों में कार्रवाई करेगी। उन्होंने दोहराया कि रावण हमेशा रावण रहेगा। भाजपा को अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए। मजूमदार ने कहा कि वे भगवान राम के अनुयायी हैं। उन्हें रावण की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। भाजपा को भाजपा ही रहना होगा।टीएमसी कार्यालयों पर हमले के आरोपहाल ही में पश्चिम बंगाल के आसनसोल और हावड़ा में तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों पर तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन घटनाओं में फर्नीचर, पोस्टर और झंडे तक नुकसान पहुंचाया गया। इसके अलावा कूचबिहार में भी राजनीतिक टकराव की स्थिति देखने को मिली, जहां दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ा।राजनीतिक माहौल में बढ़ता तनावपश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक संघर्ष तेज हो गया है। टीएमसी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे कई इलाकों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। मजूमदार ने पत्रकारों से बात करते हुए शपथ ग्रहण समारोह पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में चर्चाएं अभी जारी हैं। समारोह की संभावित तिथि 9 मई है। भाजपा में मुख्यमंत्री का नाम पार्टी की कार्यप्रणाली के अनुसार तय होता है। यह निर्णय उसी कार्यप्रणाली के तहत लिया जाएगा।विज्ञापनविज्ञापनरहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें AndroidHindi News apps, iOSHindi News appsऔरAmarujala Hindi News appsअपने मोबाइल पे|Get allIndia Newsin Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and morenews in Hindi.
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May 5, 2026, 02:02 PM
झारखंड की राजनीति में पलटवार कर सकती है पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत

झारखंड की राजनीति में पलटवार कर सकती है पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत

पश्चिम बंगाल में भाजपा और हिंदुत्व की प्रखर जीत की धमक आने वाले समय में झारखंड की राजनीति पर भी सुनाई पड़ना तय है। खासकर झारखंड के संताल परगना के लोकसभा व विधानसभा क्षेत्रों में लंबे अर्से से भाजपा लगातार हिंदुत्व, बांग्लादेशी घुसपैठ, गो-तस्करी और इन इलाकों में तेजी से बदल रहे डेमोग्राफी के मुद्दों को लगातार धार देती आ रही है।
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May 5, 2026, 02:01 PM
पंचायत निर्वाचक नामावली जारी; निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी

पंचायत निर्वाचक नामावली जारी; निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी

विस्तारवॉट्सऐप चैनल फॉलो करेंजिला निर्वाचन अधिकारियों ने पंचायतों की मतदाता सूचियां जारी कर दी हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। लोग ऑनलाइन में सूचियों में अपना नाम देख सकेंगे। सूचियां जारी होने के बाद अब राजनीतिक दल और प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव आचार संहिता का पालन करने के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।और पढ़ेंTrending Videosसंबंधित थानों में सभा और बैठकों की सूचना देना अनिवार्यराज्य निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को किसी भी प्रकार की सभाएं, बैठकें आयोजित करने से पहले संबंधित पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना देना अनिवार्य किया है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकना है। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। प्रशासन की ओर से इन नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।विज्ञापनविज्ञापनमुख्यालय छोड़कर नहीं जाएंगे कर्मचारीआयोग ने सरकारी कर्मचारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिस परिवार से प्रत्याशी चुनाव मैदान उनके चुनाव प्रक्रिया के दौरान बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। यह व्यवस्था चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए की गई है। इसके साथ ही, सरकारी कर्मचारियों के घरों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक सभा या बैठक आयोजित करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
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May 5, 2026, 01:59 PM
बिहार के मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह के साथ करेंगे मंत्रिमंडल का विस्तार

बिहार के मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह के साथ करेंगे मंत्रिमंडल का विस्तार

पटना:बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 7 मई को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रहे है। पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा। इसे लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित एनडीए के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे। इसके पहले आज मंगलवार की शाम अचानक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जेडीयू दफ्तर पहुंच गए। जेडीयू दफ्तर में नीतीश कुमार ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। नीतीश कुमार जेडीयू दफ्तर में 18 मिनट तक रहे। फिर दफ्तर से बाहर निकल गए।जेडीयू नेताओं, कार्यकर्ताओं से मिल नीतीश ने की बातनीतीश कुमार ने इसके पहले कार्यकर्ताओं से मिले और उनका हाल जाना। साथ ही कार्यालय परिसर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह पूर्व मंत्री डॉ अशोक चौधरी, विधान पार्षद ललन कुमार सर्राफ, मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, रवींद्र प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय सचिव सह प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, रत्नेश सादा, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, डॉ. अमरदीप, जनाब अफजल अंसारी सहित कई नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।बता दें, नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री औरजदयू से विजय कुमार चौधरीऔर बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर था।मंत्रिमंडल विस्तार में BJP-JDU के कितने होंगे मंत्री?इधर, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस बीच, सूत्रों का कहना है कि बिहार में 50-50 के फॉर्मूले पर मंत्रिमंडल का बंटवारा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, 7 मई को भाजपा से 12, जदयू के 11, एलजेपी (आर) के 2, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) पार्टी से एक-एक मंत्री पद की शपथ लेंगे। फिलहाल मंत्रियों की कुछ सीटें खाली रखी जाएंगी।दिल्ली में सीएम सम्राट ने की थी एनडीए नेताओं से मुलाकातइससे पहले मुख्यमंत्रीसम्राट चौधरी दिल्ली दौरेपर रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि इन सभी नेताओं ने कैबिनेट विस्तार को लेकर हरी झंडी दे दी है।
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May 5, 2026, 01:58 PM
भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को शीर्ष अधिकारियों के साथ समारोह में आमंत्रित किया गया

भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को शीर्ष अधिकारियों के साथ समारोह में आमंत्रित किया गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, कई केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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May 5, 2026, 01:55 PM
पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा ने बनाई डबल इंजन सरकार

पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा ने बनाई डबल इंजन सरकार

BJP Electoral Growth in Bengal:कांग्रेस और वाम मोर्चा के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का गढ़ बन गए पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की डबल इंजन सरकार बन रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत से ज्यादा सीटें जीतकर भाजपा अब वहां भी डबल इंजन सरकार बनाती दिख रही है। भाजपा का 3 विधायकों से 207 सीट जीतने का सफर महज 10 साल में पूरा हो गया है, जिसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी को दिया जा रहा है। लोकसभा में बंगाल से भाजपा का सफर तो 1998 में ममता बनर्जी से गठबंधन से शुरू हुआ था, लेकिन विधानसभा में पहला भाजपा विधायक 2016 में पहुंच पाया। 10 साल में भाजपा ने 35 परसेंट वोट बढ़ाकर तीन बार से लगातार सत्ता में काबिज ममता बनर्जी सरकार की विदाई कर दी। ममता खुद अपनी सीट भी नहीं बचा सकीं। बंगाल में भाजपा की जीत नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और अमित शाह के चुनाव प्रबंधन की प्रतीक है। 2016 में विमल गुरुंग के गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से अलायंस में भाजपा के 3 विधायक जीते थे। गुरुंग की पार्टी 3 सीट लड़ी, लेकिन जीरो पर रह गई। भाजपा 10.16 फीसदी वोट के सात 3 सीट जीती थी। 2021 के चुनाव में भी भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन लगभग 38 फीसदी वोट और 77 सीट के साथ दूसरे नंबर पर रह गई। ममता बनर्जी की टीएमसी ने 48 परसेंट वोट के साथ तीसरी बार सरकार बना ली थी। ECI Election Results 2026 live: श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को शांति मिली होगी, बंगाल की जीत पर पीएम मोदी चुनाव आयोग ने इस बार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद चुनाव करवाया, जिससे बड़ी संख्या में नाम कटे। नाम कटे लोग अब भी दावा कर रहे हैं, लेकिन अब उसका कोई फायदा नहीं रहा। भाजपा ने टीएमसी से 2021 के 10 फीसदी के फासले को पाटते हुए 5 फीसदी की बढ़त हासिल कर ली है। भाजपा ने 45.84 फीसदी वोट शेयर और 207 सीट के साथ दो तिहाई बहुमत भी हासिल की है। 2021 के मुकाबले भाजपा का वोट 8 फीसदी बढ़ा और टीएमसी का वोट 8 परसेंट घटकर 48 से 40.80 फीसदी पर पहुंच गया है। बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट का वर्चस्व ममता बनर्जी ने 2011 में तोड़ा और ममता का गढ़ भाजपा ने 2026 में ढहा दिया है। लेकिन यहां तक भाजपा को पहुंचने में 46 साल लग गए। 36 साल तो इसमें ही लग गए कि पार्टी का पहला विधायक बंगाल विधानसभा में पहुंचे। 2016 में भाजपा के तीन नेता विधायक बनकर पहली बार सदन में गए थे। 1971 के चुनाव में जनसंघ के प्रफुल्ल कुमार सरकार जलांगी सीट से जीते थे। कुछ और सीटों पर जनसंघ के कैंडिडेट दूसरे और तीसरे नंबर पर भी आए थे। जनसंघ 23 सीट लड़ी थी और 0.82 फीसदी वोट मिला था। जनसंघ 1972 में 16 सीट लड़ी तो लेकिन एक भी सीट नहीं निकली। वोट शेयर भी 0.19 रह गया। गंगोत्री से गंगासागर तक कमल ही कमल खिला हुआ है, भाजपा की जीत पर बोले मोदी 1977 का विधानसभा चुनाव जनता पार्टी के बैनर तले लड़ा गया। 289 सीटों पर 20 परसेंट वोट के साथ जनता पार्टी ने 29 सीटें निकाली। इस चुनाव के बाद जनसंघ वालों ने जनता पार्टी से निकलकर भाजपा के नाम से नई पार्टी बना ली। बंगाल में 1982 के विधानसभा चुनाव से अब तक भाजपा की चुनाव लड़ी गई सीट, जीती सीट और वोट शेयर का पूरा हिसाब आप नीचे इस चार्ट से समझ सकते हैं और महसूस कर सकते हैं कि कई चुनाव से बंगाल में ठहरी भाजपा की विकास यात्रा नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद तेज हो गई, जिसकी चुनावी परिणति आज मिली जीत से हुई है। भाजपा ने आज भले ममता बनर्जी और टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया है, लेकिन लेफ्ट फ्रंट सरकार के जमाने में बंगाल से लोकसभा चुनाव में भाजपा को शुरुआती जीत टीएमसी गठबंधन के साथ ही मिली। 1998 में टीएमसी बनाने वाली ममता बनर्जी ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से हाथ मिला। 1998 के आम चुनाव में बंगाल की 42 में 9 सीट एनडीए जीती- टीएमसी के 7 और भाजपा के 2 सांसद दिल्ली पहुंचे। 1999 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 42 में 10 सीट मिली, टीएमसी को 8 और भाजपा को 2 सीट। 2004 के चुनाव में एनडीए को भारी नुकसान हुआ। टीएमसी मात्र 1 सीट जीत पाई, जबकि बीजेपी जीरो पर आउट हो गई। ममता दीदी बंगाल ही नहीं हारीं, कई उम्मीदें खो दीं; दिल्ली तक बदल जाएगा गेम 2009 में ममता बनर्जी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन के साथ हो गईं। भाजपा 1 सीट जीती। बाकी सीटें लेफ्ट फ्रंट और यूपीए के बीच बंट गई। 2014 के चुनाव में जब देश में मोदी की लहर थी, तब भी बंगाल ने 42 में 34 सीट ममता को दी। बीजेपी मात्र 2 सीट निकाल पाई। अमित शाह 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले ऑपरेशन बंगाल में जुट गए थे। 2019 के आम चुनाव में भाजपा 18 सीटें जीती और ममता के सांसद 34 से घटकर 22 हो गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता ने ताकत बढ़ाकर 29 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा कुछ कमजोरी के साथ 12 सीटों पर सिमट गई। बंगाल में राहुल गांधी के दोनों हाथ में लड्डू; ममता जीतें या भाजपा, कांग्रेस के लिए गुड न्यूज बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा की विकराल जीत से राजनीति में जमीनी बदलाव आएगा। भविष्य के चुनावों में कांग्रेस और लेफ्ट के बाद अब ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए वापसी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगी। यह संकट भविष्य में भाजपा विरोधी दलों के बीच तालमेल की बुनियाद भी बन सकती है।
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May 5, 2026, 01:53 PM
पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत-चुनावी रणनीति का'राजस्थान मॉडल'

पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत-चुनावी रणनीति का'राजस्थान मॉडल'

पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार जो हुआ, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया। जिस किले को वर्षों से अटूट माना जाता था, उसमें इस बार ऐसी दरार पड़ी कि पूरी तस्वीर बदल गई। भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के पीछे सिर्फ लहर नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति थी जिसे पार्टी अब “राजस्थान मॉडल” के नाम से पहचान दे रही है। यह मॉडल केवल नारों या बड़ी रैलियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और नेतृत्व के बीच तालमेल का एक सटीक मिश्रण बनकर सामने आया। इस पूरी रणनीति के केंद्र में राजस्थान के कई दिग्गज नेता रहे, जिन्होंने बंगाल की जमीन पर रहकर चुनावी बिसात को बारीकी से सजाया। चुनावी रणनीति के इस बड़े प्रयोग में सुनील बंसल, भूपेंद्र यादव और राजेंद्र राठौड़ जैसे नेताओं ने अहम भूमिका निभाई। इन नेताओं ने केवल निर्देश देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि फील्ड में उतरकर स्थानीय समीकरणों को समझा और उसी हिसाब से रणनीति तैयार की। सूत्रों के मुताबिक, हर सीट पर अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का आकलन किया गया। यही वजह रही कि भाजपा ने उन क्षेत्रों में भी बढ़त बनाई, जहां पहले उसका प्रभाव सीमित था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओं और रोड शो को लेकर भी विशेष रणनीति बनाई गई। इसका जिम्मा अरुण चतुर्वेदी ने संभाला, जबकि अशोक परनामी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन नेताओं ने यह सुनिश्चित किया कि हर रैली सिर्फ भीड़ जुटाने का माध्यम न रहे, बल्कि वह वोट में तब्दील हो। नतीजा यह हुआ कि जिन जिलों में प्रधानमंत्री की सभाएं हुईं, वहां लगभग 75 प्रतिशत सीटों पर भाजपा को जीत मिली। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि मैसेज डिलीवरी और ग्राउंड कनेक्ट कितनी प्रभावी रही। इस पूरे अभियान में सबसे अहम कड़ी बने सीपी जोशी। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित किया। यह मॉडल केवल प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें बूथ मैनेजमेंट, रियल टाइम फीडबैक और माइक्रो प्लानिंग जैसे कई स्तर शामिल थे। चुनाव के दौरान हर बूथ पर फीडबैक लिया गया, रणनीति को तुरंत बदला गया और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट दिशा दी गई। यही वजह रही कि भाजपा का संगठन पहली बार इतने व्यापक स्तर पर एकजुट और सक्रिय नजर आया। जमीनी स्तर पर इस रणनीति का असर भी साफ दिखाई दिया। आसनसोल में जितेंद्र गोठवाल के नेतृत्व में भाजपा ने सभी 7 सीटों पर जीत दर्ज कर ली जो पिछले चुनाव के मुकाबले बड़ा उछाल है। इतना ही नहीं, कोलकाता उत्तर और दक्षिण जैसे क्षेत्रों में, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां भी भाजपा ने पहली बार प्रभावी सेंध लगाई। यह बदलाव अचानक नहीं था, बल्कि लंबे समय से तैयार की जा रही रणनीति का नतीजा था। इस पूरे चुनावी प्रयोग ने भाजपा को एक नया फॉर्मूला दिया है जहां स्थानीय नेतृत्व, बाहरी रणनीतिकार और केंद्रीय चेहरों का संतुलन साधा गया। “राजस्थान मॉडल” की असली ताकत इसकी बहुस्तरीय रणनीति में है, जिसमें हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई। अब पार्टी इस मॉडल को केवल बंगाल तक सीमित नहीं रखना चाहती। संकेत साफ हैं कि आने वाले राज्यों के चुनावों में भी इसी रणनीति को दोहराया जा सकता है। बंगाल चुनाव की यह कहानी केवल जीत की नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और संगठन की ताकत की कहानी है। जिस किले को अजेय माना जा रहा था, वहां दरार डालना आसान नहीं था लेकिन राजस्थान के इन ‘धुरंधरों’ ने यह कर दिखाया।
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May 5, 2026, 01:53 PM
आप और पंजाब सरकार पर सत्ता का दुरुपयोग करने और प्रदर्शनकारी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप

आप और पंजाब सरकार पर सत्ता का दुरुपयोग करने और प्रदर्शनकारी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप

चंडीगढ़:राज्यसभा सांसद राघव चड्ढाने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) और पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'आप' की पंजाब सरकार राज्य की मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है और विरोध करने वाले नेताओं को निशाना बना रही है। राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने तीन अन्य सांसदों के साथ भारत की राष्ट्रपति से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि 'आप' की पंजाब सरकार उनके संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। खासकर तब जब दो-तिहाई सांसदों ने बीजेपी में शामिल होने का फैसला लिया।'बदले की राजनीति' का आरोपराघव चड्ढा ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि जिस पार्टी ने कभी 'बदले की राजनीति' का आरोप लगाया था, वही अब सबसे 'विषैला रूप' अपनाकर बदले की राजनीति कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने उन्हें आश्वस्त किया है कि संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक फैसलों का सम्मान होना चाहिए। राघव चड्ढा ने 'आप' पर तंज कसते हुए कहा कि आज पार्टी किसी राजनीतिक संगठन की तरह नहीं, बल्कि एक नाराज और आहत पूर्व साथी की तरह व्यवहार कर रही है, जो कड़वाहट और बदले की भावना से भरी हुई है।'आप' पर गंभीर आरोप लगाएवहीं, दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान भी उन्होंने 'आप' पर गंभीर आरोप लगाए। चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी से असहमति जताने का अपना संवैधानिक अधिकार प्रयोग करने वाले सभी सांसदों, जिन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया, उनके संबंध में और इन सभी घटनाओं व घटनाक्रमों को आज राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। मैं आम आदमी पार्टी को यह भी बताना चाहता हूं कि जब तक हम आज्ञाकारी रहे। हमें संस्कारी माना गया। जैसे ही हमने पार्टी छोड़ी, हमें भ्रष्ट करार दे दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी में शामिल हुए कई पूर्व आप सांसदों को राज्य एजेंसियों द्वारा धमकाया और दबाव डाला जा रहा है।हरभजन सिंह पर किया गया हमलाउन्होंने कहा कि 24 अप्रैल को जब हम आप छोड़कर बीजपी में शामिल हुए तब से हमारे सांसदों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। चड्ढा ने कुछ विशेष उदाहरण देते हुए दावा किया कि पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह पर हमला किया गया है, जबकि उद्योगपति एवं सांसद राजेंद्र गुप्ता के व्यावसायिक कार्यों में कथित तौर पर बाधा डाली गई है। उन्होंने कहा कि हमने 24 अप्रैल, 2026 को आम आदमी पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। तब से हमारे सांसदों को परेशान किया जा रहा है। सबसे पहले, विश्व कप विजेता क्रिकेटर हरभजन सिंह के घर के बाहर ‘गद्दार’ लिखा गया। पंजाब पुलिस की मदद से उनके आवास पर कथित तौर पर पत्थर फेंके गए और उनके परिवार को निशाना बनाकर अपमानजनक नारे लगाए गए।पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र गुप्ता को परेशान कर रही पंजाब सरकारउन्होंने कहा कि हमारे साथी राजेंद्र गुप्ता, जो पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हैं और पंजाब के मालवा क्षेत्र में एक बड़ी फैक्टरी चलाते हैं जिससे लगभग 30,000 लोगों को आजीविका मिलती है, उनकी फैक्टरी को निशाना बनाया गया। पंजाब सरकार ने कथित तौर पर उनकी पानी की आपूर्ति काट दी और प्रदूषण बोर्ड ने फैक्टरी को बंद करने की कार्रवाई शुरू करने के लिए छापे मारे। उन्होंने दावा किया कि सांसद संदीप पाठक के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, जिन्हें उन्होंने दुर्भावनापूर्ण और मनगढ़ंत बताया।खतरनाक खेल कर रही पंजाब सरकारचड्ढा ने कहा कि ये एफआईआर और नोटिस इतने बेबुनियाद हैं कि कागज पर लिखने के भी लायक नहीं हैं। न्यायपालिका इन्हें खारिज कर देगी। उन्होंने आप के नेतृत्व वाली सरकार को चेतावनी दी कि ऐसे कार्यों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध के लिए सतर्कता विभाग, प्रदूषण बोर्ड और पुलिस का इस्तेमाल करना एक खतरनाक खेल है। आपने भले ही इसकी शुरुआत की हो, लेकिन इसका अंत अच्छा नहीं होगा। इसे रोकना होगा। उन्होंने कहा कि आप की एक राज्य में सरकार है और वहां की पुलिस पर उसका नियंत्रण है। भाजपा की 21 राज्यों में सरकार है और उन राज्यों की पुलिस पर उसका नियंत्रण है।आप पर लगाए गंभीर आरोपचड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि मनगढ़ंत मामलों के जरिए उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है और दावा किया कि उन्हें बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया अभियान चलाए जा रहे हैं। पंजाब सरकार के अधिकारियों से अपील करते हुए उन्होंने उनसे राजनीतिक दबाव में काम न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मैं अधिकारियों से कहना चाहता हूं कि आप सम्मानित अधिकारी हैं। तबादलों या निलंबन की धमकियों के आगे न झुकें। कानून के अनुसार और राष्ट्रहित में कार्य करें।आम आदमी पार्टी पर निशाना साधाराज्यसभा सदस्य ने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि महात्मा गांधी के आदर्शों का आह्वान करने वाले अब सरकारी तंत्र का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं। चड्ढा ने कहा कि पंजाब की जनता को यह पता होना चाहिए कि उनकी सरकार का इस्तेमाल राजनीतिक हिसाब-किताब निपटाने के लिए कैसे किया जा रहा है। राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक ने आरोप लगाया कि पार्टी अब डर और दहशत फैलाने के लिए दबाव बनाने की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि हम आम आदमी पार्टी में इसलिए शामिल हुए थे क्योंकि इसने देश को एक सपना दिखाया था - एक नयी तरह की राजनीति, एक ईमानदार राजनीति शुरू करने का सपना। पार्टी में रहते हुए वैचारिक कारणों से और कई विसंगतियों को देखने के बाद हमने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।केस दर्ज करा सकती है आपउन्होंने पत्रकारों से कहा कि डर और दहशत फैलाने के लिए आम आदमी पार्टी अब प्राथमिकी दर्ज कर रही है। वे फैक्टरी में छापे मार रहे हैं और झूठी प्राथमिकी के जरिए लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। मैं कहना चाहता हूं, ‘आगे बढ़ें, प्राथमिकी दर्ज करें’, लेकिन बाद में पीछे मत हटना। हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। आप सरकार को सलाह देते हुए पाठक ने जोर देकर कहा कि शासन ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है, न कि डराना-धमकाना। उन्होंने कहा कि आप ऐसी गंदी चालों से सरकार नहीं बचा सकते। अगर आप सत्ता में बने रहना चाहते हैं, तो आपको ईमानदारी से काम करना होगा। अगर आपको लगता है कि आप झूठी और मनगढ़ंत प्राथमिकी के जरिए हमें रोक सकते हैं, तो यह संभव नहीं है। हम सब कुछ कुर्बान करने के लिए तैयार हैं और देश के हित में जो सही है वही करेंगे।राष्ट्रपति ने सुरक्षा का दिया भरोसापाठक ने बताया कि राष्ट्रपति ने उन्हें आश्वासन दिया कि संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखा जाएगा। पंजाब में सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधते हुए चड्ढा ने कहा कि इस सरकार के पास बस कुछ ही महीने बचे हैं; यह चली जाएगी। वे शताब्दी ट्रेन में सवार होकर दिल्ली लौट जाएंगे। पंजाब में उनका कोई भविष्य नहीं है। बाद में, चड्ढा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने तीन अन्य सांसदों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान बताया कि कैसे आप की पंजाब सरकार संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए उन्हें निशाना बना रही है और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने लिखा कि वह पार्टी जो कभी प्रतिशोध का शिकार होने का रोना रोती थी, अब अपना सबसे खतरनाक रूप दिखा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने हमें आश्वासन दिया है कि संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विकल्पों का सम्मान होगा, जिससे हमें बल मिला है। चड्ढा ने आप के आचरण की तुलना एक ‘कटु और प्रतिशोधी’ पूर्व सहयोगी के आचरण से की।
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Dainik Jagran
May 5, 2026, 01:48 PM
पीएम मोदी ने मतदाताओं को धन्यवाद दिया, जीवन में सुधार के लिए प्रतिबद्धता दोहराई

पीएम मोदी ने मतदाताओं को धन्यवाद दिया, जीवन में सुधार के लिए प्रतिबद्धता दोहराई

पीएम ने एनडीए के कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद देते हुए लिखा, 'तमिलनाडु के उन मतदाताओं का आभार, जिन्होंने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में NDA का समर्थन किया। लोगों की समस्याओं को सुलझाने और उनके जीवन को बेहतर बनाने में हम हमेशा सबसे आगे रहेंगे।'
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May 5, 2026, 01:45 PM
भाजपा के वकीलों ने नई सरकार के खिलाफ विलंबित प्रतिकूल आदेशों की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

भाजपा के वकीलों ने नई सरकार के खिलाफ विलंबित प्रतिकूल आदेशों की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleपश्चिम बंगाल में पंद्रह साल पुराने तृणमूल कांग्रेस के शासन का अंत हो चुका है। इस बीच भाजपा के कानूनी प्रकोष्ठ से जुड़े वकीलों ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वकीलों ने न्यायाधीशों से मौखिक अपील की है कि नई सरकार के कार्यभार संभालने तक राज्य सरकार के खिलाफ कोई भी प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए।और पढ़ेंTrending Videosअदालत से राहत की मांगमंगलवार को अधिवक्ता राजदीप मजूमदार, धीरज त्रिवेदी और सुस्मिता साहा दत्ता ने अलग-अलग अदालतों में यह मामला उठाया। उन्होंने जजों से अनुरोध किया कि चूंकि राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए प्रशासन को संभालने के लिए कुछ दिनों का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक नई भाजपा सरकार कामकाज व्यवस्थित नहीं कर लेती, तब तक राज्य के खिलाफ किसी भी तरह के कड़े निर्देश जारी न किए जाएं।विज्ञापनविज्ञापनयह भी पढ़ें:बंगाल का दंगल: ममता का इस्तीफा देने से इनकार, शुभेंदु अधिकारी ने दी नसीहत, कहा-संविधान में सब लिखा हैमुख्य न्यायाधीश का रुखअधिवक्ता सुस्मिता साहा दत्ता ने मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल की अदालत में यह विषय रखा। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने उनकी इस मौखिक प्रार्थना को गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इस पर विचार करेंगे। कानून के जानकारों का मानना है कि सत्ता हस्तांतरण के दौरान प्रशासनिक शून्यता से बचने के लिए यह अपील की गई है।207 सीटों के साथ भारी बहुमतगौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 294 सदस्यीय सदन में 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ ही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी का 15 साल का निर्बाध शासन समाप्त हो गया है। अब सभी की निगाहें नई सरकार के शपथ ग्रहण और प्रशासनिक सुधारों पर टिकी हैं।अन्य वीडियो-विज्ञापनविज्ञापनरहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें AndroidHindi News apps, iOSHindi News appsऔरAmarujala Hindi News appsअपने मोबाइल पे|Get allIndia Newsin Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and morenews in Hindi.
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May 5, 2026, 01:45 PM
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बहुमत हासिल किया, चुनाव प्रचार के वादों को पूरा करने पर नजर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बहुमत हासिल किया, चुनाव प्रचार के वादों को पूरा करने पर नजर

4 मई को आए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव नतीजों ने देश को चौंका दिया है. यहां आजादी के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बहुमत मिला और 15 साल से राज कर रही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सत्ता से बाहर हो गई. भले ही यह चुनावी नतीजे पूरे देश के लिए चौंकाने वाले रहे हों, लेकिन BJP इस जीत को लेकर पूरी तरह से कॉन्फिडेंट थी. बहरहाल अब सरकार बनते ही BJP उन वादों को पूरा करना चाहेगी, जो बंगाल की जनता से किए गए थे. BJP ने अपने घोषणा पत्र के जरिए ऐसे कई वादे किए जो जनता को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाएंगे. चुनावी नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात के संकेत भी दिए. उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में ही बंगाल के लिए आयुष्मान योजना को लागू किया जाएगा. इससे साफ संकेत मिलता है कि BJP जल्द अपने अन्य वादों को पूरा करेगी. पार्टी का विजन डॉक्यूमेंट 10 अप्रैल को गृहमंत्री अमित शाह ने जारी किया था. BJP का कहना है कि घोषणापत्र राज्य को विकसित बंगाल बनाने का रोडमैप है. इस संकल्प पत्र में सरकार के कामकाज में सुधार, लोगों के लिए योजनाएं और सामाजिक मुद्दों को शामिल किया गया था. इसमें वैसे तो 15 वादे किए गए थे, लेकिन 7 ऐसे वादे हैं जो आर्थिक रूप से जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं. इतना ही नहीं, BJP की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार की योजनाएं जैसे ग्रामीण रोजगार और औद्योगिक योजनाएं अब बंगाल में तेजी से लागू हो सकती हैं. इससे नौकरियों, गांव की आय और स्थानीय मांग को बढ़ावा मिलेगा. यही वजह से कई उद्योग संगठनों ने इस चुनाव नतीजों का स्वागत किया है और निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई है. पश्चिम बंगाल का फिस्कल डेफिसिट उसके कुल राज्य उत्पादन (GSDP) का लगभग 3% से 3.6% है, यानी सरकार के पास ज्यादा खर्च करने की गुंजाइश कम है. राज्य का कर्ज भी काफी ज्यादा है, जो करीब 38% GSDP के बराबर है. हालांकि, BJP के घोषणापत्र में कई बड़े वादे हैं, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार को राजनीतिक स्थिरता पसंद है, लेकिन असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नीतियां कितनी सही तरीके से लागू होती हैं और वित्तीय अनुशासन कितना बना रहता है. नौकरियांइंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग के बेहतर काम से रोजगार के मौके बढ़ सकते हैं. आर्थिक विकासनिवेश बढ़ने से बंगाल का GDP में योगदान धीरे-धीरे बढ़ सकता है. महंगाईअगर इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पादन बेहतर हुआ, तो समय के साथ कीमतें स्थिर हो सकती हैं. निवेश का माहौलज्यादा कंपनियां यहां निवेश करने या कारोबार बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं, क्योंकि पहले बंगाल बिजनेस करने में पीछे माना जाता था. महिलाओं को हर महीने ₹3,000 की आर्थिक सहायता की बात. 75 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का वादा. गरीब और जरूरतमंद परिवारों की गर्भवती महिलाओं को ₹21,000 और 6 पोषण किट दिए जाएंगे. सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा. इंडस्ट्रियल पॉलिसी में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और निजी कंपनियों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. सभी सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. हर जिले में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे. ग्रेजुएशन में दाखिले के समय लड़कियों को ₹50,000 की मदद दी जाएगी. 40 साल से ज्यादा उम्र की गरीब महिलाओं के लिए मुफ्त ब्रेस्ट कैंसर जांच की सुविधा दी जाएगी, ताकि बीमारी का जल्दी पता चल सके और सही इलाज मिल सके. सरकार व्यापार को आसान बनाने के लिए अच्छा माहौल तैयार करेगी, जहां सभी मंजूरी एक ही जगह से मिल सकेगी. सिंगूर में इंडस्ट्रियल पार्क और राज्य में चार बड़े इंडस्ट्रियल जोन बनाए जाएंगे, जिससे रोजगार बढ़ेगा. हल्दिया को बंदरगाह आधारित विकास का बड़ा केंद्र बनाया जाएगा. MSME सेक्टर को सस्ता कर्ज और नई तकनीक दी जाएगी. प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग होगा और अशोक नगर ऑयल फील्ड का विकास तेज किया जाएगा. जूट उद्योग को आधुनिक बनाकर बंद मिलों को फिर से शुरू किया जाएगा, जिससे रोजगार और आय बढ़ेगी. चाय उद्योग को मजबूत करने के लिए पुराने बागानों को फिर से विकसित किया जाएगा और नई किस्में लगाई जाएंगी. ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ाई जाएगी. मशीनों, सिंचाई और प्रोसेसिंग के लिए सब्सिडी दी जाएगी. दार्जिलिंग चाय की पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सख्त नियम लागू होंगे. निर्यात बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट हब और बेहतर मार्केटिंग की जाएगी. चाय बागानों को पर्यटन से जोड़ा जाएगा. छोटे किसानों को सीधी बाजार तक पहुंच दी जाएगी और रिसर्च सेंटर बनाकर नई तकनीक पर काम किया जाएगा. सरकार अगले 5 साल में 1 करोड़ नई नौकरियां और खुद का काम शुरू करने के मौके देगी, ताकि युवाओं को बाहर न जाना पड़े. बेरोजगार युवाओं को नौकरी ढूंढने के दौरान हर महीने ₹3,000 की मदद दी जाएगी. जिन उम्मीदवारों को पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से नुकसान हुआ है, उन्हें 5 साल तक की उम्र में छूट दी जाएगी. खाली पड़ी सरकारी नौकरियों को फिर से शुरू करके समय पर भरा जाएगा. स्टार्टअप के लिए बांग्लार उद्यम क्रेडिट कार्ड योजना लाई जाएगी, जिसमें युवाओं को ₹10 लाख तक की मदद मिलेगी. स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, AVGC लैब्स और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए ₹15,000 की सहायता भी दी जाएगी. घोषणा पत्र के मुताबिक, सभी किसानों को ₹9,000 की आर्थिक मदद दी जाएगी. MSP बढ़ाकर धान का दाम ₹3,100 किया जाएगा. खाद की कालाबाजारी रोकी जाएगी और सस्ती खाद उपलब्ध कराई जाएगी. खेती के खर्च कम करने के लिए बिजली और ईंधन पर सब्सिडी दी जाएगी. जमीन अधिग्रहण पर किसानों को 4 गुना मुआवजा और नौकरी के मौके मिलेंगे. हर ब्लॉक में कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे. आम की खेती, आलू उत्पाद और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया जाएगा. डेयरी, मछली पालन और पशुपालन को मजबूत किया जाएगा. सिंचाई सुविधा बेहतर की जाएगी और बाढ़ से बचाव होगा. महेंद्र भार्गव एक अनुभवी ऑटोमोबाइल और बिजनेस जर्नलिस्ट हैं, जो 2018 से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. वर्तमान में महेंद्र TV9 Bharatvarsh के साथ जुड़े हुए हैं, जहां ऑटोमोबाइल और बिजनेस से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज़ और इन-डेप्थ एनालिसिस पर काम कर रहे हैं. उन्हें ऑटो सेक्टर, मार्केट ट्रेंड्स, नई कार लॉन्च, इंडस्ट्री एनालिसिस और बिजनेस से जुड़ी खबरों को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने का गहरा अनुभव है. ऑटोमोबाइल और बिजनेस सेगमेंट में 5+ वर्षों के अनुभव के साथ, Mahendra ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. उनके करियर में ETV Bharat, Dainik Bhaskar, News18 और Zee News जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जहां उन्होंने डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में कई भूमिकाओं में काम किया.
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May 5, 2026, 01:44 PM
विजय की राजनीतिक शुरुआत-तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके की शानदार जीत के 5 कारण

विजय की राजनीतिक शुरुआत-तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके की शानदार जीत के 5 कारण

चेन्नई:पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे आश्चर्यजनक रिजल्ट तमिलनाडु का रहा। एक्टर विजय की अगुवाई वाली टीवीके की सरकार बनेगी। यह दावा किया ने नहीं किया था, लेकिन टीवीके छुपा रूस्तम निकली। फिल्मी अंदाज में ही एक्टर विजय तमिलनाडु की राजनीति के 'जननायक' बनकर उभरे। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जोसेफ विजय ने एम के स्टालिन को कैसे हराया? इसके पीछे पांच अहम कारण जिम्मेदार रहे। जिन्होंने फिर वापसी का सपना देखने वाली डीएमके की हार तय कर दी। टीवीके अब छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की उम्मीद है। तमिलनाडु में बीजेपी को सिर्फ 1 सीट मिली है। उसे खाते में सिर्फ 2.97 प्रतिशत वोट आए हैं।Tamil Nadu Politics: एक्टर विजय की 'लहर' में झुलसे स्टालिन, डीएमके ऑफिस से उखड़े टेंट, सब जगह सन्नाटा और रो रहे समर्थकसबसे ज्यादा मुश्किल वक्त में स्टालिनडीएमके नेता स्टालिन की पार्टी को जहां टीवीके से हार मिली है तो वहीं दूसरी तरफ वह उन्हें उत्तरी चेन्नई के कोलाथुर में बड़ा झटका लगा है। यहां से वह खुद चुनाव हार गए हैं। इस सीट को डीएमके का माना जाता है। एम के स्टालिन के लिए 'विजय इफेक्ट' और टीवीके का उदय शायद उनके करियर का सबसे ज्यादा परेशान करने वाला राजनीतिक पल है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार डीएमके ने औद्योगिक विकास और बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के मामले में स्टालिन के शासन के रिकॉर्ड पर भरोसा किया था, लेकिन विजय की टीवीके की सीटी के शोर में यह उपलब्धियां गुम हो गईं।TVK के आगे धराशायी हुई मजबूत कैडर वाली डीएमके, कैसे थलपति विजय बन गए तमिलनाडु के 'जननायक'डीएमके की हार के पांच कारणसुपरस्टार सी जोसेफ विजय की जबरदस्त एंट्री ने उन मतदाताओं में जोश भर दिया जो दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों के बारी-बारी से सत्ता में आने से बदलाव चाहते थे। दूसरा कारण रहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और तीसरी वजह थी सत्ता-विरोधी लहर जिसे डीएमके ने कम आंका। इसके बाद चौथा कारण था डीएमके का बीजेपी से टकराव। इसमें केंद्र बनाम तमिलनाडु की बहस से लोगों को परेशान किया। जिसने स्टालिन का ध्यान स्थानीय मुद्दों से हटा दिया था। पांचवी वजह थी कि मुख्यमंत्री ने विजय को एक गंभीर प्रतिद्वंद्वी मानने में हिचकिचाहट दिखाई। एक फैक्टर उनके बेटे की डिप्टी सीएम के तौर ताजपोशी रही। जिससे विपक्ष को वंशवादी राजनीति के बहाने हमले का मौका मिला।DMK के कभी 'वफादार' रहे वीएस बाबू कौन? कोलाथुर से एमके स्टालिन को हराकर बने तमिलनाडु के सबसे बड़े 'धुरंधर'सहयोगियों से नहीं मिला सपोर्टलगभग सभी एग्जिट पोल में DMK की आसान जीत का अनुमान लगाया गया था, जिससे पार्टी के लिए नतीजे और भी ज्यादा चौंकाने वाले हो गए। जब नतीजे आए तो डीएमके के मुख्यालय में सामने लगाया गया तंबू जल्दी ही उखड़ गया। नतीजों में साफ किया कि 21 पार्टियों का गठबंधन होने के बावजूद वोट बैंक को एकजुट करने में कोई मदद नहीं मिली। सहयोगियों के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल की कमी रही। इसने डीएमके की लुटिया डूबा दी। कांग्रेस के कुछ धड़ों ने सीटों के बंटवारे पर बातचीत से पहले ही सत्ता में हिस्सेदारी की मांग कर दी थी। एक धड़ा TVK के साथ गठबंधन पर जोर दे रहा था। राहुल गांधी ने स्टालिन के साथ प्रचार नहीं किया, जिससे गठबंधन के भीतर दरार के संकेत मिले।तमिलनाडु के एग्जिट पोल में डीएमके से ज्यादा टीवीके को सीटें, क्या MGR और NTR बनने जा रहे एक्टर विजयबहुमत से दूर TVK ऐसे बना सकती है सरकारतमिलनाडु में 108 सीटें जीतने वाली टीवीके के छोटे दलों के सहयोग से सरकार बनाने की उम्मीद है। इसमें कांग्रेस के अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और सीपीआई जैसे दल शामिल है। अगर कांग्रेस, आईयूएमएल और सीपीआई समर्थन देते हैं तो टीवीके 117 तक पहुंच जाएगी। तमिलनाडु की 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 का है। चार सीटें पीएमके ने जीती हैं। राज्य में बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली है। डीएमके को 59 और एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं।
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May 5, 2026, 01:40 PM
नेपाल की यूरेनियम खोजः वैश्विक भू-राजनीति में एक गेम-चेंजर?

नेपाल की यूरेनियम खोजः वैश्विक भू-राजनीति में एक गेम-चेंजर?

काठमांडू:नेपाल में यूरेनियम की खोज उसके लिए जी का जंजाल बनता हुआ दिख रहा है। इसने नेपाल की राजनीति और कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि नेपाल के ऊपरी मुस्तांग क्षेत्र में यूरेनियम और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का विशाल भंडार है। कई सर्वेक्षणों में बताया गया है कि लोमानथांग क्षेत्र में 10 किमी लंबे और 3 किमी चौड़े इलाके में संभावित यूरेनियम भंडार मौजूद हैं। हालांकि, अभी तक यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है कि ये खनिज व्यावसायिक रूप से उत्पादन की मात्रा तक उपलब्ध हैं या नहीं। हालांकि, अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो नेपाल वैश्विक भू-राजनीति में अहम देश बन सकता है।नेपाल के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोजदुर्लभ पृथ्वी तत्वों को लेकर पूरी दुनिया में मारामारी मची हुई है। हर देश ज्यादा से ज्यादा दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर कब्जा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। आधुनिक हाई-टेक स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर उन्नत हथियारों तक, हर चीज में इनके अनिवार्य उपयोग को देखते हुए, इन खनिजों की वैश्विक मांग असाधारण रूप से अधिक है। यूरेनियम की मांग भी किसी से छिपी नहीं है, जो परमाणु ऊर्जा और हथियारों के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है।महाशक्तियों के बीच जंग का मैदान बना नेपालनेपाल में यूरेनियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खोज राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व से गहराई से जुड़ा हुआ है। अगर ये कीमती खनिज पाए जाते हैं तो पारदर्शी तरीके से इनका निष्कर्षण करना होगा। दूसरी बात यह है कि इस खोज के कारण नेपाल अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के बीच संवेदनशील जगह बनता जा रहा है। नेपाल पहले ही कई वैश्विक महाशक्तियों के बीच जंग का मैदान है, जिनमें भारत, चीन और अमेरिका शामिल हैं। ऐसे में खनिजों की खोज से नेपाल की अहमियत और ज्यादा बढ़ जाएगी और हर शक्तिशाली देश अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करेगा।नेपाल में भारत-चीन-अमेरिका में 'जंग'मुस्तांग इलाका नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित है। तिब्बत पर वर्तमान में चीन का कब्जा है। ऐसे में वह नजदीकी का फायदा उठाने की भरपूर कोशिश कर सकता है। चीन दुनिया के लगभग 70-80% दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की आपूर्ति करता है, जिस पर पश्चिमी देशों की भारी और अनिवार्य निर्भरता है। यदि मुस्तांग में व्यावसायिक भंडार पाए जाते हैं, तो यह पश्चिमी राष्ट्रों, विशेष रूप से अमेरिका के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करेगा। ऐसे में अमेरिका भी चाहेगा कि वह नेपाल पर अपना नियंत्रण स्थापित करे। नेपाल और भारत का रिश्ता तो रोटी-बेटी का पहले से ही है। ऐसे में भारत भी नेपाल में बड़ा खिलाड़ी बनने की कोशिश करेगा।
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May 5, 2026, 01:35 PM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा दे दिया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा दे दिया है।

गुरुवार, 7 मई 2026 को 17वीं बंगाल विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में 7 मई के बाद ममता बनर्जी आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री मानी ही नहीं जाएंगी, क्योंकि विधानसभा के कार्यकाल के समाप्त होने के बाद नए मुख्यमंत्री का निर्वाचन जरूरी होता है।
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May 5, 2026, 01:32 PM
शिवसेना नेता संजय राउत ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया

शिवसेना नेता संजय राउत ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों पर शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि ये ममता दीदी का बहुत बड़ा अपराध है कि उन्होंने राहुल गांधी की बात नहीं मानी. अगर राहुल गांधी के साथ ममता दीदी बैठतीं और चर्चा करतीं तो नतीजे कुछ और आते. राहुल गांधी ने जो जो कहा वो सच हुआ. उन्होंने कहा, ''राहुल गांधी दूरदर्शी नेता हैं, उनके पास विजन है. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का चुनाव चोरी कर लिया गया.'' उन्होंने आगे उदाहरण देते हुए ये भी कहा कि जब इंदिरा गांधी और कांग्रेस चुनाव हार गई थीं तो उस दौरान पूरे देश में उनकी सत्ता थी. लगभग सभी राज्यों में उनकी सत्ता आई थी लेकिन लोगों ने इंदिरा गांधी को हरा दिया. यही हाल पीएम नरेंद्र मोदी का और बीजेपी का होने वाला है.'' #WATCH | Mumbai, Maharashtra: Shiv Sena (UBT) leader Sanjay Raut says, "This is a grave crime by Mamata Didi that she did not listen to Rahul Gandhi. If Mamata Didi had sat down with Rahul Gandhi and discussed the matter, the results would have been different. What Rahul Gandhi… pic.twitter.com/ZGYQTaYLfD शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने आगे कहा, ''बीजेपी को लगता है कि पूरे देश में उनकी सत्ता है, अब हम चक्रवर्ती सम्राट हो गए. ऐसा नहीं है. जब-जब दीया बुझता है तो लौ बढ़ जाती है और फिर वो बुझ जाती है. बीजेपी का यही हाल होने वाला है.'' बीजेपी ने सोमवार (04 मई) को पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज पूर्वी भारत के उस अहम गढ़ में एंट्री की, जहां एक दशक से अधिक समय तक वह अपने विस्तार के बावजूद सेंध नहीं लगा पाई थी. बीजेपी ने 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत हो गया. बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 80 सीट पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को महज 2 सीटों से ही संतोष करना पड़ा. इसके अलावा AJUP को 2, CPI(M) को 2 और AISF को एक सीट पर जीत हासिल हुई.
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