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Feb 4, 2026, 04:26 AM
प्राकृतिक घरेलू उपचारों के साथ मासिक धर्म चक्रों को विनियमित करना

प्राकृतिक घरेलू उपचारों के साथ मासिक धर्म चक्रों को विनियमित करना

पीरियड्स का समय पर ना आना महिलाओं के लिए शारीरिक ही नहीं, मानसिक तनाव का कारण भी बन जाता है। जब लगातार दो महीने तक पीरियड्स मिस हो जाएं, तो सबसे पहले डर और घबराहट होना स्वाभाविक है। हालांकि, हर बार इसका मतलब कोई गंभीर बीमारी नहीं होता। डॉ. रमिता ठाकुर के अनुसार, कई बार लाइफस्टाइल बदलाव, स्ट्रेस, हार्मोनल असंतुलन या पोषण की कमी के कारण पीरियड्स रुक सकते हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ प्राकृतिक घरेलू उपाय शरीर को जरूरी सपोर्ट देकर मासिक धर्म चक्र को फिर से नियमित करने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में - KHETIKAKhetika Turmeric Powder 400g | Toxin Free Haldi | Traditional Stone Ground | High Curcumin & Natural Oils | No Artificial Colours | Authentic Taste & Aroma OrikaOrika Turmeric Powder | Pure & Natural Haldi Powder | Quality, Rich Aroma & Natural Golden Color | Perfect for Cooking Professional (500 Gm) Pure OrganioPure Organio Organic Lakadong Turmeric Powder- 7 to 10% High Curcumin Certified 250g NPOP India Organic certified Spices (250 Gm) BLISS OF EARTHBliss of Earth Lakadong Turmeric Powder From Meghalaya, Organic Haldi Powder, High Curcumin Turmeric Powder 250gm Pure OrganioPure Organio Organic Turmeric Powder, Haldi Powder Organic, Ideal for Eating, Drinking, Cooking - Natural, Fresh Turmeric Root Powder Indian Organic NPOP Certified (350 Gm) Pushp BrandPushp Brand Turmeric Powder Pouch (1kg pack) (Pack of 5) ZoffZoff Turmeric Powder | Haldi Powder | Rich in Curcumin, Antioxidant & Anti-inflammatory Benefits | Net Weight 100 g ZoffZoff Powder Masala Spice Combo - Chilli Powder, Turmeric Powder, Coriander Powder & Garam Masala Pack of 4-100g Each Orgrain IndiaOrgrain India Organic Turmeric Powder 300g (Pack of 2 * 150g) with high Curcumin Content | Immunity Booster | Company-Owned Farmlands | Freshly Ground Haldi Powder | Lab Tested | डॉ. रमिता ठाकुर साफ कहती हैं कि अगर 2 महीने या उससे ज्यादा समय तक पीरियड्स लगातार मिस हो रहे हैं, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर ना रहें। यह PCOS, थायरॉइड, प्रेग्नेंसी, अत्यधिक तनाव या हार्मोनल डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। सही जांच और इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
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Feb 4, 2026, 03:45 AM
फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने आई. पी. ओ. मूल्य सीमा निर्धारित की; शेयर पहले से ही प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं

फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने आई. पी. ओ. मूल्य सीमा निर्धारित की; शेयर पहले से ही प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं

Fractal Analytics IPO:एंटरप्राइज AI और एनालिटिक्स कंपनी फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) का प्राइस बैंड तय कर दिया है। कंपनी का IPO ₹857 से ₹900 प्रति शेयर के दायरे में आएगा, जिसमें हर शेयर का फेस वैल्यू ₹1 होगा। फ्रैक्टल एनालिटिक्स का IPO सोमवार, 9 फरवरी को खुलेगा और बुधवार, 11 फरवरी को बंद होगा। वहीं, एंकर निवेशकों को शेयरों का अलॉटमेंट शुक्रवार, 6 फरवरी को किया जाएगा। IPO का एक लॉट 16 शेयरों का होगा और निवेशक इसके बाद 16 के गुणक में बोली लगा सकेंगे। बता दें कि ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर अभी से ही ₹180 प्रीमियम पर उपलब्ध हैं। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड से यह 20 पर्सेंट का मुनाफा मिल सकता है। इस पब्लिक इश्यू में शेयरों का बंटवारा भी साफ कर दिया गया है। कुल इश्यू का कम से कम 75% हिस्सा QIB यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए आरक्षित है। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए अधिकतम 15% और रिटेल निवेशकों के लिए अधिकतम 10% शेयर रखे गए हैं। इसके अलावा, कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए भी करीब ₹600 करोड़ के शेयर रिजर्व किए हैं। अलॉटमेंट की प्रक्रिया 12 फरवरी को पूरी होने की संभावना है, जबकि 13 फरवरी को रिफंड और डिमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट किए जाएंगे। फ्रैक्टल एनालिटिक्स के शेयरों की लिस्टिंग 16 फरवरी को BSE और NSE पर हो सकती है। फ्रैक्टल एनालिटिक्स का यह IPO कुल ₹2,834 करोड़ का होगा, जिसमें ₹1,023.5 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,810.4 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। खास बात यह है कि कंपनी ने अपने IPO साइज को पहले के ₹4,900 करोड़ से घटाकर करीब 42% कम कर दिया है। IPO से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा कंपनी अपनी सब्सिडियरी को देगी, ताकि कुछ कर्ज चुकाया जा सके। इसके अलावा, कंपनी लैपटॉप खरीदने, नए ऑफिस स्पेस लेने, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सेल्स और मार्केटिंग के साथ-साथ संभावित इनऑर्गेनिक अधिग्रहण पर भी पैसा खर्च करेगी। साल 2000 में शुरू हुई फ्रैक्टल एनालिटिक्स आज एक ग्लोबल एंटरप्राइज AI कंपनी बन चुकी है, जो बड़ी कंपनियों को बेहतर और स्मार्ट फैसले लेने में मदद करती है। कंपनी दो प्रमुख सेगमेंट में काम करती है— Fractal.ai और Fractal Alpha। Fractal.ai अपने एजेंटिक AI प्लेटफॉर्म कॉजेंटिक के जरिए AI सॉल्यूशंस और प्रोडक्ट्स देता है, जबकि फ्रैक्टल अल्फा अलग-अलग इंडस्ट्री और मार्केट्स के लिए स्वतंत्र AI बिजनेस को बढ़ावा देता है। कंपनी के मुताबिक, उसके बिजनेस मॉडल जैसा कोई भी पब्लिकली लिस्टेड कॉम्पिटिटर फिलहाल भारत या दुनिया में मौजूद नहीं है। आईपीओ को कोटक कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, एक्सिस कैपिटल और गोल्डमैन सैक्स मैनेज कर रहे हैं, जबकि रजिस्ट्रार की भूमिका एमयूएफजी इनटाइम इंडिया निभाएगा।
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Feb 4, 2026, 02:13 AM
भारत के बजट में सुसंगत नियमों के लिए भविष्य निधि न्यासों में सुधार का प्रस्ताव है

भारत के बजट में सुसंगत नियमों के लिए भविष्य निधि न्यासों में सुधार का प्रस्ताव है

नई दिल्ली:बजट में उन 'प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों' के नियमों में सुधार का प्रस्ताव रखा गया है जिन्हें इनकम टैक्स नियम के तहत छूट मिलती थी। अब इन ट्रस्टों को पूरी तरह से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के बराबर लाया जाएगा। EPFO ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विभिन्न नियमों को एक-दूसरे के अनुरूप बनाने और तालमेल बिठाने से स्टेकहोल्डर्स के हितों को मजबूती मिलेगी। अभी तक समस्या यह थी कि प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों को टैक्स छूट मिलने की शर्तों में इनकम टैक्स कानून और पीएफ एक्ट (1952) की धारा 17 के बीच अंतर था।निवेश करने के तरीकों में भी काफी फर्क रहता था। यहां तक कि कंपनी (एम्प्लॉयर) द्वारा किए जाने वाले योगदान की सीमा भी दोनों कानूनों में एक जैसी नहीं थी। अब मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड (PF ट्रस्ट) इनकम टैक्स ऐक्ट, 2025 की अनुसूची (Schedule) XI के हिसाब से चलेंगे। निवेश के नियमों को भीईपीएफके हिसाब से कर दिया गया है और कंपनी के योगदान की सीमा को इनकम टैक्स एक्ट के साथ जोड़ दिया गया है।₹1,000 से ₹7,500 रुपये हो जाएगी पीएफ की पेंशन! सरकार ने संसद में क्या जवाब दिया?क्या होगा फायदा?इनकम टैक्स ऐक्ट, 2025 के तहत मान्यता अब उन्हीं प्रोविडेंट फंड्स को मिलेगी, जिन्होंने EPF ऐक्ट, 1952 की धारा 17 के तहत छूट ली हुई है। धारा 17 के तहत, कंपनियां अपने कर्मचारियों के पीएफ खातों और पैसों को खुद मैनेज करने के लिए मासिक ईपीएफ रिटर्न फाइल करने से छूट मांग सकती हैं। श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा कि बजट 2026-27 में मान्यता-प्राप्त भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े आयकर ढांचे को कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के वैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप कर दिया गया है।फिलहाल निजी पीएफ ट्रस्ट को आयकर अधिनियम और ईपीएफ अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट की पात्रता में अंतर है। इसके अलावा, आयकर प्रावधानों और ईपीएफओ के तहत अधिसूचित निवेश के तरीके भी अलग हैं, जबकि नियोक्ता के अंशदान की सीमा दोनों कानूनों में समान नहीं है। इन भिन्नताओं से भ्रम की स्थिति पैदा होती है और अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ती है। मान्यता-प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्ट का नियमन आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची-11 के तहत होता है।₹12 लाख है CTC तो बजट के बाद कितनी रह जाएगी इन हैंड सैलरी, देखिए पूरी कैलकुलेशननिवेश की अनिवार्य सीमी हटीनए प्रावधानों के तहत आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत पीएफ की मान्यता केवल उन्हीं ट्रस्ट को मिलेगी जिन्हें ईपीएफ अधिनियम, 1952 की धारा 17 के तहत छूट मिली हुई है। धारा 17 के तहत नियोक्ता अपने कर्मचारियों के पीएफ खातों के प्रबंधन और मासिक ईपीएफ रिटर्न दाखिल करने से छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं। ईपीएफओ ने निवेश के मोर्चे पर कहा कि निवेश मानदंड अभी मौजूदा ईपीएफ ढांचे और अधीनस्थ विधानों के तहत ही नियंत्रित रहेंगे। साथ ही, सरकारी प्रतिभूतियों में 50 प्रतिशत निवेश की अनिवार्य सीमा को हटा दिया गया है।एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन के संबंध में कहा गया कि अब यह 7.5 लाख रुपये प्रति वर्ष की मौद्रिक सीमा के अधीन होगा। इस सीमा से अधिक अंशदान पर परिलाभ के रूप में कर लगाया जाएगा। ईपीएफओ ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में आयकर प्रणाली को युक्तिसंगत बनाना हितधारकों के हितों को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे स्पष्ट हो गया है कि अब ईपीएफ से जुड़ी छूट कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 से ही नियमित होगी। साथ ही, निवेश मानदंडों और नियोक्ता अंशदान की सीमाओं को भी आयकर अधिनियम के अनुरूप कर दिया गया है।
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Feb 4, 2026, 01:34 AM
बिहार सरकार ने दरभंगा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास के लिए धन आवंटित किया

बिहार सरकार ने दरभंगा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास के लिए धन आवंटित किया

बिहार सरकार ने मंगलवार को वार्षिक बजट में दरभंगा के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को जल्द मूर्त रूप देने के लिए सरकार की ओर से राशि का प्रावधान कर दिया है। इससे एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आवश्यक रनवे और आधुनिक सिविल एनक्लेव बनाने के काम में और तेजी आएगी। साथ ही दरभंगा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास लॉजिस्टिक पार्क एवं कार्गो हब का भी निर्माण कराया जाएगा। दरभंगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए 89.75 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार ने प्रावधान कर 244.60 करोड़ राशि का भुगतान जिला प्रशासन को कर दिया है। वहीं, एयरपोर्ट पर रनवे के एक्टेंशन और शानदार सिविल एनक्लेव के निर्माण के लिए 5.79 करोड़ रुपए का भुगतान जिला भू अर्जन अधिकारी को कर दिया गया है। सरकार की इस पहल से लोगों में हर्ष का माहौल है। दरभंगा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास लॉजिस्टिक पार्क एवं कार्गो हब का भी निर्माण कराया जाएगा। इससे मिथिला एवं उत्तर बिहार के कृषि एवं कृषि आधारित उत्पादों के एयर कार्गो परिवहन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा आर्थिक विकास एवं समग्र समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। दरभंगा में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत होने के बाद एक दर्जन से अधिक जिलों के लोगों को इसका लाभ पहुंचेगा।दरभंगा और उसके पड़ोसी जिलों के अलावा बिहार से सटे उत्तर बंगाल के लोग भी यहां से सीधे विदेशों तक की यात्रा कर सकेंगे। रक्सौल में हवाई अड्डा खुलने की प्रक्रिया में अब तेजी आएगी। बिहार सरकार के बजट में रक्सौल हवाई अड्डा के विकास के लिए उठाये गये कदमों की चर्चा की गयी है। हवाई अड्डा के पास पूर्व से 153 एकड़ जमीन है। इसके लिए अतिरिक्त 139 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। वित्त मंत्री ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण के लिए 207.70 करोड़ रुपये का भुगतान जिला भूअर्जन पदाधिकारी को किया गया है। इसके बाद अब भू अर्जन की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
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Feb 4, 2026, 12:33 AM
बिहार सरकार का लक्ष्य बड़े पैमाने पर ग्रामीण हाटों के विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है

बिहार सरकार का लक्ष्य बड़े पैमाने पर ग्रामीण हाटों के विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है

बिहार के विभिन्न जिलों में स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए गांवों में बड़े पैमाने पर ग्रामीण हाट विकसित की जाएगी। राज्य सरकार के सात निश्चय-3 की प्राथमिकताओं में भी इसे शामिल किया गया है। इसका मुख्य मकसद है ‘ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय को दोगुनी करना। इसके तहत एक तरफ रोजगार और उद्यम को बढ़ावा देने के लिए सरकार मदद देगी, वहीं स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार भी उपलब्ध होगा। बिहार विधानसभा में मंगलवार को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा पेश बजट भाषण पुस्तिका में इसका विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण हाट विकसित की जाएंगी। इसके लिए प्रखंडों में कृषि विभाग की जमीन भी चिह्नित की गई हैं। इन कार्यों के लिए राशि कहां से आएगी, इसका प्रबंध भी राज्य सरकार ने अपने बजट में किया है। यही कारण है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण विकास विभाग के बजट में साढ़े सात हजार करोड़ का इजाफा किया है। बजट आकार में शिक्षा के बाद दूसरे सबसे बड़ा विभाग बन गया है ग्रामीण विकास। पिछले वित्तीय वर्ष में यह विभाग चौथे नंबर पर था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग का बजट 16 हजार 93 करोड़ था, जिसे बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 में 23 हजार 701 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सीएम महिला रोजगार योजना में अगले वित्तीय वर्ष में महिलाओं को दो-दो लाख दिये जाने हैं। मालूम हो कि इस योजना में जीविका से जुड़ीं एक करोड़ 56 लाख महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये दिये गए हैं। इनमें जिन महिलाओं का रोजगार बेहतर चलेगा, उन्हें दो लाख रुपये तक सरकार देगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पांच लाख नए परिवारों अथवा छूटे परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक लाख 29 हजार स्वयं सहायता समूहों को बैंकों ने अब तक 7052 करोड़ से अधिक के लोन दिये हैं। वित्तमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि महिलाओं को उद्योग लगाने के प्रयास के लिए 10-10 हजार रुपये अनुदान दिये गए हैं। यह राशि किसी से भी वापस नहीं ली जाएगी। आगे उद्योग लगाने के लिए दो-दो लाख दिये जाएंगे। राज्य में ग्रामीण हाट के विकास के लिए कृषि विभाग, पंचायती राज विभाग और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। कृषि विभाग जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के बाजार के लिए इसे विकसित करेगा। ग्रामीण कृषि हाट के विकास के लिए कृषि विभाग ने बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्तमान में कतरनी चावल, मर्चा धान, जर्दालु आम, शाही लीची, मगही पान, मिथिला मखाना, हाजीपुर का चीनिया केला आदि को जीआई टैग मिला हुआ है।
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Feb 3, 2026, 11:49 PM
भारत के व्यापार सौदेः अर्थव्यवस्था और क्षेत्रों के लिए एक बढ़ावा

भारत के व्यापार सौदेः अर्थव्यवस्था और क्षेत्रों के लिए एक बढ़ावा

विस्तारFollow Usभारत ने हाल में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए, फिर यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स पर मुहर लगाई। माना जा रहा है कि इसके बाद ही अमेरिका पर भारत के साथ व्यापार समझौते का दबाव बढ़ा, क्योंकि करीब छह महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारी-भरकम टैरिफ लगाने के दौरान ही भारत को मृत अर्थव्यवस्था करार दिया था। लेकिन, विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण भारत को नजरअंदाज करना उनके लिए मुमकिन नहीं था।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंईयू के साथ सबसे बड़े करार के बाद अमेरिका के साथ समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को और जानदार बनाने वाला साबित होगा।आइए, एक नजर में जानें कि यह समझौता क्या है और भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा....विज्ञापनविज्ञापनकालीन एवं हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावाकपड़े, चमड़े और गैर-चमड़े के जूते, रत्न-आभूषण, कालीन एवं हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा मिल सकता है क्योंकि उच्च टैरिफ के कारण इनके निर्यात में बाधा आ रही थी। कपड़ा और परिधान, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, आभूषण व झींगा जैसे खाद्य पदार्थों के निर्यात में तेजी आएगी। भारत वियतनाम व बांग्लादेश जैसे एशियाई देशों से प्रतिस्पर्द्धी स्थिति में आ जाएगा। अगस्त अंत में अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से कपड़ा, आभूषण और झींगा जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ा था।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-नवंबर में अमेरिका को निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 15.9% की वृद्धि हुई और यह 85.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात 46.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।अमेरिकी सरकार के अनुमान के अनुसार, 2024 में दोतरफा वस्तुओं व सेवाओं का व्यापार 212.3 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें अमेरिकी वस्तुओं के व्यापार में 45.8 बिलियन डॉलर का घाटा और सेवाओं के व्यापार में मामूली अधिशेष रहा।ये भी पढ़ें:-India-US Trade Deal: दोनों देशों की बातचीत अंतिम चरण में, सूत्रों का दाव इस हफ्ते जारी हो सकता है संयुक्त बयानभारत इन चिजों की बढ़ाएगा खरीदअमेरिका से भारत पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार उत्पाद एवं विमानों की खरीद बढ़ाएगा। साथ ही, कुछ ऐसे कृषि उत्पादों के लिए पहुंच भी मिल सकती है, जिनसे भारतीय किसानों को नुकसान न हो। 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था।तेल खरीद पर असरसमझौते के तहत अमेरिका-वेनेजुएला से भारत तेल खरीद बढ़ाएगा। भारतीय तेल शोधक कंपनियां रूस से तेल खरीद घटा रही हैं और अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका से आपूर्ति बढ़ा रही हैं। हालांकि, मौजूदा रूसी अनुबंधों से बाहर निकलने में कंपनियों को समय लगेगा। फिलहाल, सरकार ने पूरी तरह से रोक का आदेश नहीं दिया है।इस्पात-एल्युमीनियम पर कितना शुल्कपारस्परिक टैरिफ कम होंगे, पर इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स और कुछ अन्य वस्तुओं पर अमेरिका धारा 232 के तहत शुल्क लागू रख सकता है। ऐसे में समझौते के बावजूद भारत के अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले कुछ सामानों पर उच्च शुल्क लगता रहेगा या उनमें कृमिक रूप से कमी होगी।ये भी पढ़ें:-अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से भारत को कितना लाभ?: देश का विकास दर 6.9% होने का अनुमान, जानें दावा2024 में किन वस्तुओं और सेवाओं का रहा सबसे बड़ा योगदान?2024 में भारत के अमेरिका को होने वाले मुख्य निर्यातों में दवा निर्माण और जैविक उत्पाद (8.1 अरब अमेरिकी डॉलर), दूरसंचार उपकरण (6.5 अरब अमेरिकी डॉलर), कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर (5.3 अरब अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 अरब अमेरिकी डॉलर), वाहन और ऑटो पुर्जे (2.8 अरब अमेरिकी डॉलर), सोने और अन्य कीमती धातुओं के आभूषण (3.2 अरब अमेरिकी डॉलर), सूती कपड़े (सहायक उपकरण सहित) (2.8 अरब अमेरिकी डॉलर), और लोहा और इस्पात उत्पाद (2.7 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल थे।आयात में कच्चा तेल (4.5 अरब अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब डॉलर), कोयला, कोक (3.4 अरब डॉलर), तराशे व पॉलिश्ड हीरे (2.6 अरब डॉलर), विद्युत मशीनरी (1.4 अरब अमेरिकी डॉलर), विमान, अंतरिक्ष यान और पुर्जे (1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) और सोना (1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल थे। अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को सेवाओं का आयात 40.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें कंप्यूटर/सूचना सेवाओं का आयात 16.7 अरब अमेरिकी डॉलर और व्यवसाय प्रबंधन/परामर्श सेवाओं का आयात 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर था।विज्ञापनविज्ञापनरहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें AndroidHindi News apps, iOSHindi News appsऔरAmarujala Hindi News appsअपने मोबाइल पे|Get allIndia Newsin Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and morenews in Hindi.
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Feb 3, 2026, 08:47 PM
एन. आर. एल. एम. के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महाराजगंज की महिलाओं को सशक्त बनाया गया

एन. आर. एल. एम. के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महाराजगंज की महिलाओं को सशक्त बनाया गया

महराजगंज। जनपद में महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के प्रयासों से तरक्की के सफर पर हैं। सदर के बड़हरा खास की गंगा सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) दूध उत्पादन के जरिये आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही है। यह सफलता देख सदर के दो अन्य ग्रामीण आजीविका समूह ने दूध व्यवसाय को अपना लिया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसदर ब्लॉक के बीएमएम शेष नाथ व मनोज मौर्या ने बताया कि उनके यहां कुल 1077 समूह पंजीकृत हैं। यह समूह बेहतर कमाई के व्यवसाय को अपनाकर आत्मनिर्भर हो रहे हैं।विज्ञापनविज्ञापनइनमें सबसे अधिक बकरी पालन से जुड़ी हैं। कई समूह मसाला, ब्यूटी प्रोडक्ट, सफाई में प्रयुक्त फिनायल, टॉयलेट क्लीनर जैसे उत्पाद के जरिये आय बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा बेहतर आय के लिए कुछ समूह दूध उत्पादन से भी जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि सदर ब्लॉक की तीन एसएचजी (सेल्फ हेल्प ग्रुप) दूध उत्पादन के जरिये आत्मनिर्भर होकर प्रति माह आठ से 10 हजार रुपये महीना कमाई कर रही हैं।
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Feb 3, 2026, 08:28 PM
एच. आर. पोर्टल पर न भरे गए संपत्ति के विवरण के कारण रामपुर के कर्मचारियों को वेतन में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

एच. आर. पोर्टल पर न भरे गए संपत्ति के विवरण के कारण रामपुर के कर्मचारियों को वेतन में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

रामपुर। मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का विवरण नहीं भरने के कारण 12 विभागों के दो हजार कर्मचारी-अधिकारियों को जनवरी का वेतन नहीं मिलेगा। कोषाधिकारी ने सभी विभागों को पत्र भेजकर जल्द संपत्ति का विवरण भरने के लिए कहा है। आहरण-संवितरण अधिकारी ट्रेजरी में बिल नहीं लगा पा रहे हैं। इसलिए वेतन भी नहीं बन रहा है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंहर साल वित्तीय वर्ष खत्म होने के दो माह पहले ही सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर भरना होता है। इसके बाद उनका इनकम टैक्स वेतन से काटा जाता है। इसे वार्षिक आयकर विवरणी कहा जाता है।विज्ञापनविज्ञापन12 विभागों के कई कर्मचारियों ने अभी तक मानव संपदा पोर्टल में संपत्ति विवरण नहीं भरा है। तनख्वाह में टैक्स काटना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं करने पर वेतन बिल पास ही नहीं होता। ऐसे में अधिकारी वेतन बिल नहीं बना पा रहे हैं।इस कारण 12 विभागों के दो हजार कर्मचारियों का जनवरी का वेतन अभी तक नहीं निकला है। कोषाधिकारी रनजीत सिंह ने बताया कि सभी विभागों को पत्र भेजकर तुरंत संपत्ति का ब्योरा देने और आयकर रिटर्न भरने को कहा है।इन विभागों का रुका है वेतन -सिंचाई विभाग, राम गंगा कमांड, जिला उद्योग केंद्र, कार्यालय जिला पिछड़ा वर्ग एवं कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, सामाजिक वानिकी, जिला क्रीडा अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, जिला कार्यक्रम, श्रम आयुक्त, परिवहन विभाग, सूचना विभाग।
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Feb 3, 2026, 07:43 PM
राजपूत महासभा जिला इकाई ने हमीरपुर में सामान्य श्रेणी के मुद्दों के लिए लड़ने का संकल्प लिया

राजपूत महासभा जिला इकाई ने हमीरपुर में सामान्य श्रेणी के मुद्दों के लिए लड़ने का संकल्प लिया

हमीरपुर। राजपूत महासभा जिला इकाई कार्यकारिणी की बैठक मंगलवार को मझोट में हुई। बैठक में सामान्य वर्ग के सभी मुद्दों के प्रति संघर्ष और यूजीसी गाइडलाइन के विरोध का प्रण लिया गया।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंबैठक में मुख्यातिथि के रूप में सेवानिवृत्त मेजर जनरल और पूर्व अध्यक्ष लोक सेवा आयोग धर्मवीर सिंह राणा ने शिरकत की, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल वर्मा ने की। इस मौके पर एचपीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष धर्मवीर सिंह राणा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर जिला के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी के सदस्यों को पहचान पत्र भी प्रदान किए गए।विज्ञापनविज्ञापनइसके साथ ही आर्थिक आधार पर आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करने की मांग को लेकर चर्चा की, ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके, राज्य सरकार द्वारा अंतरजातीय विवाह पर दी जाने वाली राशि का विरोध, चयन आयोग द्वारा किसी भी परीक्षा के लिए लिए जाने वाले आवेदन शुल्क में भेदभाव को समाप्त करने तथा सभी वर्गों के लिए एक समान शुल्क वसूलने, स्कूलों में जातीय आधार पर सामग्री वितरित करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की तथा सभी वर्गों को एक समान सुविधा प्रदान करने की मांग की गई।बैठक में उपस्थित लोगों को मुख्यातिथि के अलावा अनिल वर्मा, सामान्य वर्ग संयुक्त मंच के जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर, महासभा के महासचिव जोगिंदर ठाकुर ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि सामान्य वर्ग के साथ अन्याय सहन नहीं किया जाएगा तथा सामान्य वर्ग के हितों के लिए लड़ाई तब तक लड़ी जाएगी, जब तक न्याय नहीं मिलता है।
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Feb 3, 2026, 07:28 PM
शाहजहांपुर जिला भारत में जी. एस. टी. संग्रह में सबसे आगे

शाहजहांपुर जिला भारत में जी. एस. टी. संग्रह में सबसे आगे

शाहजहांपुर। जनवरी माह में जीएसटी संग्रह में जनपद ने मंडल में पहला और प्रदेश में छठवां स्थान प्राप्त किया है। पिछले वर्ष जनवरी के मुकाबले इस वर्ष 38.23 फीसदी की वृद्धि हुई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में चार पहिया, केमिकल, खाद्य तेल, कोयला, लोहा, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कॉस्मेटिक में वृद्धि दर्ज की गई है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंजीएसटी संग्रह में जनपद पिछले तीन माह से मंडल में पहले स्थान पर चल रहा है। लगातार जीएसटी संग्रह में वृद्धि हो रही है। सहालग और त्योहार का सीजन आने वाला है। इसमें और इजाफा होने की संभावना है। व्यापारी जीएसटी के प्रति जागरूक हुए हैं। लोगों की खरीद क्षमता बढ़ रही है। इसके अलावा जीएसटी के दो स्लैब रह जाने से भी खरीदारी में इजाफा हुआ है। इस वजह से जीएसटी संग्रह में वृद्धि हो रही है।विज्ञापनविज्ञापन--इन वस्तुओं की खरीद में हुई गिरावटदो पहिया वाहन, सीमेंट, उवर्रक, एफएमजीसी, रेडीमेड गारमेंट्स, ठेकेदारों से प्राप्त कर में कमी आई है। इस वजह से पिछले वर्ष जनवरी की तुलना में इस वर्ष जनवरी में इन सेक्टरों से जीएसटी संग्रह में गिरावट आई है।--जीएसटी संग्रह की जनवरी माह की स्थिति करोड़ मेंजिला जनवरी 2026 जनवरी 2025 प्रतिशतबदायूं 781.36 851.94 - 8.29बरेली 10934.94 10114.52 8.11शाहजहांपुर 3420.13 2474.20 38.23--पिछले वर्ष जनवरी माह की तुलना इस वर्ष जनवरी में जीएसटी संग्रह में 38.23 फीसदी का इजाफा हुआ है। जीएसटी संग्रह के मामले में जनपद मंडल में पहले और प्रदेश में छठे स्थान पर है।- प्रवेश तोमर, उपायुक्त, राज्यकर
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Feb 3, 2026, 07:07 PM
पालमपुर के किसानों से फरवरी तक कृषि-बागवानी कार्यों को पूरा करने का आग्रह किया गया

पालमपुर के किसानों से फरवरी तक कृषि-बागवानी कार्यों को पूरा करने का आग्रह किया गया

पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश में फरवरी के प्रथम पखवाड़े में होने वाले कृषि-बागबानी कार्यों के लिए विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह जारी की है जिससे किसानों की फसल और सब्जी उत्पादन अच्छा हो सके। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि वैज्ञानिकों की ओर से जारी की गई सलाह में कहा गया है कि गेहूं की बुआई के 30 से 35 दिन बाद जहां संकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार में 2-3 पत्तियां आ गई हों, उसके नियंत्रण के लिए खरपतवारनाशी वेस्टा (मेटसल्फयूरॉन मिथाइल 20 डव्ल्यूपी + क्लोडिनाफॉप प्रोपार्जिल 15 डब्ल्यूपी 16 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी में घोलकर एक कनाल में छिड़काव करें। जहां फसल में सिर्फ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार हों, उसके नियंत्रण के लिए 2,4-डी की 50 ग्राम मात्रा अथवा मेटसल्फयूरॉन मिथाइल (20 डब्ल्यूपी) की 0.8 मिली प्रति 30 लीटर पानी में घोलकर एक कनाल में छिड़काव करें।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंगेहूं के साथ चौड़ी पत्ती वाली फसल की खेती की गई हो तो 2,4-डी या मेटसल्फयूरॉन मिथाइल का प्रयोग न करें। छिड़काव से दो-तीन दिन पहले हल्की सिंचाई करें। छिड़काव के बाद एक सप्ताह सिंचाई न करें। कृषि विवि के प्रसार निदेशक डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि गोभी सरसों में फूल आने से पहले यूरिया प्रयोग करें। पौधे की संख्या अगर खेत में अधिक हो तो यूरिया प्रयोग से पहले फालतू पौधे को निकालें, जबकि मूली की सुधरी किस्म पूसा हिमानी की बीजाई समतल खेतों में या मेढ़ें बनाकर 20-25 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। फूलगोभी, बंदगोभी, प्याज और लहसुन आदि में निराई-गुड़ाई करें व यूरिया दें। इस समय लहसुन एवं प्याज की निराई गुड़ाई के बाद ही सिंचाई करें।विज्ञापनविज्ञापनलहसुन में बीमारी के नियंत्रण के लिए यह करेंउन्होंने कहा कि प्याज में डाउनी मिल्डयू व परपल ब्लोच तथा लहसुन में बीमारी के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब या रिडोमिल एमजैड का छिड़काव करें। गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग के प्रबंधन के लिए टिल्ट (प्रापिकोनाजोल 25 ईसी) या फॉलीक्योर टैवुकोनाजोल 25 ईसी या बेलाटान 25 डब्ल्यूपी का 0.1 का छिड़काव करें और 15 दिन के बाद फिर करें। तिलहनी फसलों में तेला एफिड के नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट (30 ईसी) या ऑक्सीडेमेटोन मिथाइल (25 ईसी) दवा का छिड़काव करें। चने में फली-छेदक सुंडी के आक्रमण के प्रति सावधान रहें तथा इसका अधिक प्रकोप होने की स्थिति में वैज्ञानिकों या कृषि अधिकारियों से संपर्क करें।
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Feb 3, 2026, 06:55 PM
ऊर्जा निगम ने समस्याओं के समाधान के लिए उपभोक्ता शिविरों का आयोजन किया

ऊर्जा निगम ने समस्याओं के समाधान के लिए उपभोक्ता शिविरों का आयोजन किया

जसपुर। ऊर्जा निगम की ओर से उपभोक्ताओं की समस्या के समाधान के लिए नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र में चार फरवरी यानी आज से एक माह के लिए शिविर आयोजित होंगे। इसमें मौके पर ही समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंऊर्जा निगम के ईई गोविंद सिंह कार्की ने बताया कि विद्युत वितरण खंड के प्रथम एवं द्वितीय उपखंड के नगर एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 4 से 28 फरवरी तक सुबह 9 बजे से अलग-अलग तिथियों में शिविरों का रोस्टर तैयार किया गया है। इसमें उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण के साथ ही बकाया बिल भी जमा करा सकते हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं से बिजली चोरी नहीं करने की अपील की।विज्ञापनविज्ञापन
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Feb 3, 2026, 06:47 PM
भारत के बिजली और परिवहन मंत्री ने नए ताप विद्युत संयंत्र के लिए कोयला आवंटन को मंजूरी दी

भारत के बिजली और परिवहन मंत्री ने नए ताप विद्युत संयंत्र के लिए कोयला आवंटन को मंजूरी दी

हिसार। खेदड़ थर्मल पावर प्लांट की तीसरी यूनिट के लिए कोल आवंटन की अनुमति मिल गई है। इसके साथ ही यूनिट के लिए आगे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। यह जानकारी प्रदेश के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज ने हिसार दौरे के दौरान दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी बिजली घरों को जमीन से कुछ ऊंचाई पर बनाया जाएगा, ताकि बारिश के दिनों में जलभराव होने पर बिजली आपूर्ति बंद न करनी पड़े। इस संबंध में बिजली निगमों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंमंगलवार को हिसार अर्बन एस्टेट-2 स्थित भाजपा नेता योगेश बिदानी के आवास पर पहुंचे मंत्री अनिल विज ने कहा कि खेदड़ थर्मल प्लांट की तीसरी यूनिट को लेकर कोल आवंटन की स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही काम शुरू होगा। प्रदेश में पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया गुरुग्राम से शुरू हो चुकी है और अन्य जिलों में भी जल्द मीटर बदलने का कार्य शुरू किया जाएगा। स्मार्ट मीटर में उपभोक्ताओं को मोबाइल के माध्यम से प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प मिलेंगे, जिन्हें वे अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकेंगे।विज्ञापनविज्ञापनअनिल विज ने कहा कि बाजारों में बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा, जिससे हादसों की आशंका कम होगी और बाजार अधिक सुंदर नजर आएंगे। सड़क से बिजली के खंभे हटने पर बाजारों की चौड़ाई भी बढ़ेगी। साथ ही ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता को लोड के अनुसार बढ़ाया जा रहा है।बस ट्रैकिंग सिस्टम लागू होगाऊर्जा मंत्री ने कहा कि जल्द ही बस ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके तहत यात्रियों को मोबाइल एप और बस स्टैंड पर लगे पैनलों के माध्यम से यह जानकारी मिलेगी कि कौन-सी बस कहां है, किस समय पहुंचेगी और अपने निर्धारित रूट पर चल रही है या नहीं। इसका प्रेजेंटेशन जल्द उनके सामने आएगा। इसके लागू होने से यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा। रोडवेज के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल की जाएंगी। रोडवेज पास को सहकारी समिति की बसों में लागू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है।हुड्डा साहब न देखते हैं, न सुनते हैं : अनिल विजपूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के किसानों को लेकर बजट पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अनिल विज ने कहा कि केंद्र बजट में किसानों के लिए कई योजनाएं और प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हुड्डा साहब न तो देखते हैं और न ही सुनते हैं। उनकी पार्टी में अब उनकी कोई पूछ नहीं रह गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पार्टी का आंतरिक मामला है।बस अड्डा शिफ्ट करने की जानकारी नहींहिसार रोडवेज बस स्टैंड को शहर से बाहर शिफ्ट किए जाने के सवाल पर मंत्री अनिल विज ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। स्थिति का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्राओं की समस्याओं के समाधान के लिए वहां बस स्टॉपेज बनाने के निर्देश दिए जाएंगे। हिसार के बस अड्डे को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग लंबे समय से चली आ रही है।
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Feb 3, 2026, 04:46 PM
बिहार में डॉक्टरों की भारी कमीः रिपोर्ट में रिक्तियों की खतरनाक दर का खुलासा

बिहार में डॉक्टरों की भारी कमीः रिपोर्ट में रिक्तियों की खतरनाक दर का खुलासा

पटना:बिहार चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहा है. सोमवार को जारी बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के आंकड़ों से यह साफ हुआ है. प्रदेश में 1 लाख की आबादी पर सिर्फ 7 सरकारी डॉक्टर हैं. प्रदेश में चिकित्सकों के 21 हजार 821 पद स्वीकृत हैं. इनमें सिर्फ 9658 चिकित्सक ही कार्यरत हैं. यानी डॉक्टरों के करीब 56 फीसदी पद खाली हैं. अरवल में प्रति 1 लाख की आबादी पर 16 से अधिक डॉक्टर हैं तो किशनगंज में 1 लाख की आबादी पर महज 3.9 डॉक्टर ही हैं. आंकड़े बताते हैं कि बिहार में मगध के इलाके में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और सीमांचल में बदतर.प्रति लाख की आबादी पर सबसे अधिक डॉक्टर वाले जिलेअरवल - 16.4शेखपुरा - 14.8जहानाबाद - 14.6शिवहर - 13.8पटना - 12.4प्रति लाख की आबादी पर सबसे कम डॉक्टर वाले जिलेकिशनगंज - 3.9अररिया - 4कटिहार - 4.6पश्चिमी चंपारण - 5.1जमुई - 5.5ग्रेड ए नर्स की संख्या घटी, 58 फीसदी पद खालीग्रेड ए नर्सके 26 हजार 107 पद स्वीकृत हैं. 2024-25 में 10 हजार 926 ग्रेड ए नर्स कार्यरत हैं. जबकि 2023-24 में यह संख्या 11 हजार 462 थी. यानी एक साल में नर्सों की संख्या 536 घट गई. जबकि राज्य में पहले से नर्सों की संख्या कम है. राज्य में एक लाख की आबादी पर सिर्फ 8.4 ग्रेड ए नर्स कार्यरत हैं. पटना में यह संख्या सबसे अधिक है और किशनगंज में सबसे कम.प्रति लाख की आबादी पर सबसे अधिक ग्रेड ए नर्स वाले जिलेपटना - 29.7दरभंगा -17.7भागलपुर -16.2मुजफ्फरपुर -12.2गया और मुंगेर - 10.9प्रति लाख की आबादी पर सबसे कम ग्रेड ए नर्स वाले जिलेकिशनगंज -2.0अररिया -3.3कटिहार -3.3सिवान - 4.3सुपौल - 4.5सरकार का दावा, बदले हैं हालातसरकार दावा करती है कि पिछले 20 साल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है. सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण में भी इसका जिक्र किया गया. बताया गया कि 2005 से पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिमाह औसतन 39 मरीज ही आते थे जबकि अब हर महीने औसतन 11 हजार 600 मरीज आते हैं. यह स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति की निशानी है. सरकार के इन दावों पर आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सवाल खड़े करती है.यह भी पढ़ें:बिहार के इस गांव ने मृत्युभोज देने पर क्यों लगा दी पाबंदी, वजह सुनकर आप भी करेंगे सैल्यूट
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Feb 3, 2026, 03:48 PM
संकष्टि चतुर्थी 2026: भगवान गणेश को समर्पित शुभ पूजा का दिन

संकष्टि चतुर्थी 2026: भगवान गणेश को समर्पित शुभ पूजा का दिन

Sankashti Chaturthi 2026:सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि बहुत पावन और विशेष मानी जाती है.हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. ये व्रत विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित किया गया है. फरवरी या कहें कि फाल्गुन माह में जो संकष्टी चतुर्थी पड़ती है उसको द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धा भाव से गणेश जी की पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा-अर्चना और व्रत करने से विघ्नहर्ता भगवान गणेश बहुत प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. गणेश जी हर मनोकामना पूरी करते हैं. इस दिन पूजा के दौरान सच्चे मन से ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ किया जाता है. माना जाता है कि ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करने से कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलती है. साथ ही आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है. घर में धन समृद्धि बढ़ती है. वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 9 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 6 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 22 मिनट पर हो जाएगा. सनातन धर्म में उदयाति​थि मानी जाती है. ऐसे में उदयाति​थि के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा. साथ ही भगवान गणेश का पूजन किया जाएगा. ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्। षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥ महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्। एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥ एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्। महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥ शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्। सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥ रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्। रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥ कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्। कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥ पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्। पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥ सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्। सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥ एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः। षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥ सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥ ये भी पढ़ें:Shani Ke Kamkor Hone Ke Lakshan: अगर कुंडली में कमजोर है शनि देव की स्थिति, तो करें ये उपाय Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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Feb 3, 2026, 03:30 PM
RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकः विशेषज्ञों ने दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया

RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकः विशेषज्ञों ने दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मॉनेटरी पॉलिसी समिति (एमपीसी) की तीन दिन की मॉनेटरी पॉलिसी की समीक्षा बैठक बुधवार से शुरू होगी. यह बैठक उस समय हो रही है जब इकोनॉमी में वृद्धि पर केंद्रित केंद्रीय बजट पेश किया गया है, महंगाई कम है और हाल ही में लंबे समय से प्रतीक्षित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बाहरी अस्थिरता समाप्त हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई पिछले साल फरवरी से अब तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है और फिलहाल न तो वृद्धि और न ही महंगाई को लेकर कोई बड़ी चिंता है, ऐसे में ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखी जा सकती है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लोन को और सस्ता करने के लिए एक और दर कटौती संभव है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति का फैसला शुक्रवार को घोषित किया जाएगा. क्या कह रहे हैं जानकार? बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि एमपीसी के रेपो दर पर कायम रहने की संभावना है और यह दर-कटौती चक्र का अंत भी हो सकता है. इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि एजेंसी के अनुसार इस समय विराम उचित है ताकि जनवरी, 2026 की खुदरा महंगाई (सीपीआई) और वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त 2025-26 तक के जीडीपी आंकड़ों का आकलन किया जा सके. क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि कम महंगाई आरबीआई को दर कटौती पर विचार करने की गुंजाइश देती है. बजट भी राजकोषीय अनुशासन के कारण महंगाई बढ़ाने वाला नहीं है और अर्थव्यवस्था की स्थिति भी ठीक है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बार दरें स्थिर रखने की संभावना अधिक है ताकि भविष्य के लिए विकल्प खुले रखे जा सकें. कितनी कम हुई लोन ईएमआई? जब से आरबीआई गर्वनर के पद पर संजय मल्होत्रा आए हैं. उसके बाद से आरबीआई रेपो रेट में लगातार कटौती देखने को मिली है. सिर्फ अगस्त और अक्टूबर के महीने में आरबीआई गवर्नर ने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया. वर्ना फरवरी के महीने में 25 बेसिस प्वाइंट, अप्रैल में 25 बेसिस प्वाइंट, जून के महीने में हुई बैठक 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती देखने को मिली थी. उसके बाद सीधे दिसंबर के महीने में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है. इसका मतलब है कि साल 2025 में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती हुई है, जोकि एक अच्छी कटौती है. जिसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी पर आ गया है. अब शुक्रवार को पता चलेगा कि आरबीआई गवर्नर आम लोगों को लोन ईएमआई पर राहत देते हैं, या फिर ब्याज दरों पर पॉज बटन दबाने का काम करते हैं.
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Feb 3, 2026, 03:25 PM
फतेहाबाद मुख्य बाजार में भीड़भाड़ः बढ़ती चिंता

फतेहाबाद मुख्य बाजार में भीड़भाड़ः बढ़ती चिंता

फतेहाबाद। शहर के मुख्य बाजार में थाना रोड से जवाहर चौक तक यातायात व्यवस्था दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। पार्किंग उपलब्ध होने के बावजूद वाहन चालक गाड़ियों को गलत तरीके से सड़क पर खड़ा कर देते हैं, जिससे आने-जाने वाले वाहनों को परेशानी होती है। कई बार यह स्थिति पैदल चलने वालों के लिए भी मुश्किल पैदा कर देती है। यह समस्या खासकर दोपहर से शाम तक अधिक दिखाई देती है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंगाड़ियों के अलावा रेहड़ी भी जाम का कारणसड़क जाम केवल गाड़ियों की वजह से नहीं, बल्कि रेहड़ी चालकों की वजह से भी होता है। रेहड़ी चालक बीच सड़क पर सामान लगाकर बेचने लगते हैं, जिससे दोनों तरफ से आने वाले वाहनों के लिए रास्ता बाधित हो जाता है। कई जगहों पर रेहड़ी चालकों ने अपनी जगह तय कर रखी है, जिससे दुकानदारों और आम जनता दोनों को परेशानी होती है।विज्ञापनविज्ञापनपुलिस की लापरवाही पर नाराजगीअग्रसेन चौक, थाना रोड पार्किंग और जवाहर चौक में पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगी हुई है। दुकानदारों का कहना है कि पुलिस कर्मी वाहन जाम होने के बाद दुकानदार या वाहन चालक को ढूंढते हैं और फोटो खींचकर चालान अधिकारियों को भेजते हैं। अगर पुलिस कर्मी पैदल गश्त करते और सड़क पर वाहन रोकते, तो जाम जैसी स्थिति नहीं बनती।---बाजार में यातायात व्यवस्था को लेकर कर्मचारी तैनात हैं। यदि तैनाती के बावजूद जाम होता है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - जय सिंह, प्रभारी यातायात पुलिस, फतेहाबाद
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Feb 3, 2026, 03:18 PM
बिहार में कुत्तों के काटने से सबसे बड़ी बीमारी बनीः सर्वेक्षण

बिहार में कुत्तों के काटने से सबसे बड़ी बीमारी बनीः सर्वेक्षण

बिहार में कुत्तों का काटना सबसे बड़ी बीमारी बनकर उभरा है. 2024-25 में पूरे राज्य में 2.83 लाख कुत्तों के काटने के मामले सामने आए हैं. इसकी जानकारी बिहार सरकार के एक सर्वे में हुई. इस सर्वे में पता चला कि बिहार में प्रतिदिन करीब 776 लोगों को कुत्तों ने काटा है. यानी बिहार की सबसे बड़ी बीमारी कुत्तों का काटना है. दरअसल, बिहार सरकार के द्वारा बजट सत्र में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 को पेश की गई. इस रिपोर्ट में ही यह मामला भी सामने आया. सर्वेक्षण के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में कुत्तों के काटने के 2.83 लाख से भी ज्यादा मामले दर्ज किए गए. यह संख्या 2023-24 की तुलना में लगभग 39000 ज्यादा है. आर्थिक सर्वे में कुत्ते के काटने को राज्य की सबसे व्यापक बीमारी के रूप में चिन्हित किया गया. ये भी पढ़ें-पति बोला- जा मर जा, गोद में बच्ची को लेकर गंगा में छलांग लगाने वाली थी महिला, दारोगा ने फिल्मी स्टाइल में बचाई जान आर्थिक सर्वे के अनुसार, 2023-24 में 2,44,367 लोगों को कुत्ते ने काटा था, जबकि 2024-25 में कुल 2,83,274 लोगों को कुत्ते ने काटा. इन आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में औसतन हर दिन 776 लोग कुत्तों के काटने का शिकार बने. गौर करने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट में रेबीज के मामलों की संख्या को उल्लेखित नहीं किया गया है. आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की दूसरी सबसे बड़ी व्यापक बीमारी एक्यूट रेस्पिरेट्री इनफेक्शन यानी एआरआई या इन्फ्लूएंजा जैसी लक्षण वाली बीमारी हैं. 2024-25 में पूरे राज्य में इस तरह के 31,000 से भी ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं. आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में राजधानी टॉप पर है, जहां कुत्तों के काटने के मामले सामने आए हैं. इस अवधि में सबसे ज्यादा 29,280 कुत्तों के काटने का मामला पटना में सामने आया. इसके बाद पूर्वी चंपारण जिला है, यहां पर 24,452 कुत्तों के काटने के मामले सामने आए. तीसरे नंबर पर नालंदा है, यहां पर 19,637 लोगों को कुत्तों ने काटा है. चौथे नंबर पर गोपालगंज जिला है, यहां 18,879 लोगों को कुत्तों ने काटा है. ये भी पढ़ें-पटना नहीं तो क्या जहानाबाद में हुई दरिंदगी? NEET छात्रा के कपड़े से मिले स्पर्म से 25 DNA रिपोर्ट मैच नहीं, अब CBI करेगी जांच इसी प्रकार पश्चिमी चंपारण में 17,820, जहानाबाद में 12,900, गयाजी में 10,794, भोजपुर में 10,496, पूर्णिया में 10,373 और वैशाली जिले में 10,155 लोगों को कुत्तों ने काटा है. जिन जिलों में 2024-25 में दो हजार से भी कम कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें रोहतास, सुपौल, खगडिया और औरंगाबाद शामिल है. रोहतास में 1967, सुपौल में 1878, खगड़िया में 1565 और औरंगाबाद में 467 लोगों को कुत्तों द्वारा काटने का मामला सामने आया है. आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में सांपों के द्वारा काटने पर हुई मौत का आंकड़ा भी पेश किया गया है. वर्ष 2024-25 में पूरे राज्य में 138 लोगों की मौत सांप के काटने से हुई है.
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Feb 3, 2026, 02:46 PM
अमेरिका और भारत व्यापार समझौते, शुल्क कम करने और भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने पर सहमत हुए

अमेरिका और भारत व्यापार समझौते, शुल्क कम करने और भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने पर सहमत हुए

भारत और अमेरिका के बीचट्रेड जीलपर सहमति बन गई है. इस डील की अभी डिटेल्स सामने नहीं आई है, लेकिन अमेरिका ने भारत पर लगाए 50 फीसदी टैरिफ को कमकर 18 फीसदी करने का ऐलान कर दिया है. ये कितनी बड़ी बात है, इसे समझने के लिए पहले अपने आसपास के देशों पर अमेरिका के लगाए टैरिफ को जान लें.हाई टैरिफ झेल रहे देशअमेरिका के सबसे हाई टैरिफ का सामना करने वाले कुछ देशों में ब्राजील (50 प्रतिशत), म्यांमार (40 प्रतिशत), लाओस (40 प्रतिशत), चीन (37 प्रतिशत) और दक्षिण अफ्रीका (30 प्रतिशत) शामिल हैं. वहीं भारत के पड़ोसी देशों में वियतनाम (20 प्रतिशत), बांग्लादेश (20 प्रतिशत), पाकिस्तान (19 प्रतिशत), मलेशिया (19 प्रतिशत), कंबोडिया (19 प्रतिशत) और थाईलैंड (19 प्रतिशत) पर अमेरिका टैरिफ लगा रहा है. मतलब भारत का सामान इन सब देशों से अमेरिका में सस्ता मिलेगा. जाहिर है सस्ता होगा तो बिकेगा भी ज्यादा.कम टैरिफ वाले देशवहीं अगर बात करें कि अमेरिका ने सबसे कम टैरिफ किन देशों पर लगाए हैं तो उनमें यूनाइटेड किंगडम (10 प्रतिशत), यूरोपीय संघ (15 प्रतिशत), स्विट्जरलैंड (15 प्रतिशत), जापान (15 प्रतिशत) और दक्षिण कोरिया (15 प्रतिशत) शामिल हैं. जाहिर है ये सब अमेरिका के सबसे क्लोज सहयोगी हैं. मगर अगर इनसे भी तुलना करें तो भारत को कोई खतरा नहीं है. कारण भारत से जाने वाले सामान अलग तरह के हैं और ये अलग तरह के सामान अमेरिका को बेचते हैं. इसके साथ ही इनके यहां लेबर कॉस्ट महंगा होने से वैसे भी इनके सामान महंगे होते हैं, तो टैरिफ कम होने के बावजूद ये भारतीय सामानों से कंपटिशन नहीं कर सकते.भारत से भेजा जाना वाला सामानभारत दुनिया में सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट अमेरिका को करता रहा है. भारत के लिए वो सबसे बड़ा बाजार है. भारत इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक सामान, रत्न और आभूषण, दवा निर्माण सामान, जैविक पेट्रोलियम उत्पाद, एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स जैसे चाय, कॉफी, मसाले, आदि, टेक्सटाइल और कपड़े जैसे कपास, रेशम, आदि, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे कार, ट्रक, आदि, फार्मा उत्पाद जैसे दवाएं, वैक्सीन, आदि, आईटी सेवाएं जैसे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी सपोर्ट, आदि अमेरिका को एक्सपोर्ट करता है. इसके अलावा भी कई और सामान भारत की तरफ से अमेरिका को एक्सपोर्ट किया जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा मांग इन्हीं की रहती है. भारत का अमेरिकी बाजार में असली कंपटिशन चीन, बांग्लादेश और वियतनाम से होता है. कारण है कि इन देशों में लेबर कॉस्ट बेहद कम है और इस कारण अगर इनका टैरिफ भारत से कम हो तो भारत का सामान महंगा हो जाता है.डिप्लोमेटिक जीत कैसेभारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर सहमति बनना दुनिया के लिए अच्छी खबर है. कारण ये है कि भारत और अमेरिका रणनीतिक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं. व्यापार को लेकर अमेरिका और भारत में बहुत पहले से असहमति रही है, मगर ट्रंप के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद ये विवाद में बदल गया. ट्रंप ने चीन सहित दुनिया के तमाम देशों पर टैक्स लगाया. अभी सबसे ज्यादा टैक्स ब्राजील और चीन ही झेल रहे हैं. कारण वो ट्रंप के टैरिफ का सार्वजनिक जवाब देने के चक्कर में फंस गए. ये दोनों देश भी अमेरिका को सामान बेच ज्यादा रहे थे और खरीद कम रहे थे. ठीक भारत की तरह. मगर भारत चुप रहा. वो व्यापार को लेकर अपनी असहमति दोनों देशों की मीटिंग में तो रखता रहा, लेकिन खुलकर अमेरिका की आलोचना से बचता रहा. शुरू में लगा चीन और ब्राजील की तरह भारत का जवाब नहीं देना उसकी कमजोरी है, लेकिन आज लग रहा है कि भारत सही रास्ते पर चला और आज नतीजा सामने है.यूरोप-अमेरिका संग भारत का महत्वहाल में भारत ने यूरोप के साथ ट्रेड डील की घोषणा की है. इसके बाद अमेरिका से भी ट्रेड डील तय हो गई है. जाहिर है अमेरिका और यूरोप के बाजारों में भारत का एक्सपोर्ट बढ़ेगा. वहीं तीनों मिलकर लाइफलाइन बन चुके चीन को दुनिया में अलग-थलग कर सकते हैं. भारत को इन दोनों डील से न सिर्फ बड़ा बाजार मिलेगा बल्कि तकनीक और निवेश भी मिलने की संभावना है. चीन का रेयर अर्थ मैटेरियल पर लगभग कब्जा है. भारत, यूरोप और अमेरिका मिलकर उसके इस वर्चस्व को तोड़ सकते हैं. अभी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका में ही हैं. दोनों देश रेयर अर्थ मैटेरियल पर भरोसेमंद और अलग-अलग सप्लाई चेन स्थापित करना चाहते हैं.इसके साथ ही यूरोप और अमेरिका की बड़ी चिंता सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत है. ताइवान के बाद वो ही सबसे ज्यादा सेमीकंडक्टर बनाता है. ताइवान पर चीन की घेराबंदी को देखते हुए यूरोप और अमेरिका के साथ दुनिया के लिए ये जरूरी है कि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में अलग सप्लाई चेन बने. सेमीकंडक्टर बनाने की सभी बड़ी मशीनें और तकनीक तो अमेरिका ही सप्लाई करता है, लेकिन इनको बनाने में लगने वाला रेयर अर्थ मैटेरियल चीन से आता है. साथ ही सेमीकंडक्टर सबसे ज्यादा संख्या में बनाते भी चीन और ताइवान ही हैं. अमेरिका और यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए चाहते हैं कि भारत में सेमीकंडक्टर हब बने, जिससे सप्लाई चेन सुरक्षित रहे. एआई के क्षेत्र में भी चीन अमेरिका और यूरोप से आगे निकलता दिख रहा है. ऐसे में भारत, अमेरिका और यूरोप का 'ब्रेन' एकसाथ मिलकर चीन को चुनौती दे सकता है.चुनौती क्या हैएक्सपर्ट्सका मानना है कि अमेरिका भारत ट्रेड डील को लेकर चुनौती सबसे बड़ी ट्रंप की घोषणाएं ही हैं. ट्रंप ने सोमवार को जब इस समझौते की घोषणा की तब उन्होंने लिखा कि भारत रूस से तेल खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है. साथ ही भारत अमेरिका से पहुंचने वालों सामानों पर जीरो फीसदी तक टैक्स कर देगा. इसके अलावा उन्होंने बताया कि भारत 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान खरीदेगा. इन तीन बातों ने दुनिया भर में इस ट्रेड डील को लेकर असमंजस वाली स्थिति में डाल दिया है. चीन से लेकर यूरोप और यहां तक की अमेरिका के भी एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत रूस से पूरी तरह दूर नहीं हो सकता. रूस और भारत के संबंधों को हल्के में नहीं लिया जा सकता.भारत भले ही रूस से तेल खरीद कम कर दे पर पूरी तरह बंद करने का ऐलान किसी से नहीं पच रहा. यहां तक की भारत ने भी अब तक इस पर कुछ नहीं कहा है. ट्रंप की जीरो फीसदी करने वाली दूसरी घोषणा पर इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत कभी ऐसा नहीं करेगा. खासकर कृषि के क्षेत्र में तो भारत कभी बाजार नहीं खोलेगा. हां, एक-दो सामानों पर भारत ऐसा कर सकता है. वहीं अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक के सामान भारत खरीदेगा ये भी बात लोगों को हजम नहीं हो रही है. चूकि अब तक इस डील के डिटेल्स सामने नहीं आए हैं, इसलिए संदेह बना हुआ है कि क्या और विवाद बाकी हैं. मगर अगर ये हो गया तो दोनों देशों के संबंधों में मील का पत्थर होगा. केंद्रीय पीयूष गोयल ने मंगलवार को भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कहा कि हो सकता है कि भारत और अमेरिका इसी सप्ताह ट्रेड डील को लेकर एक साझा बयान भी दें.रूस को ट्रंप की बात पर यकीन नहीं,बोला- भारत ने तेल की खरीद रोकने की बात नहीं कही
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Feb 3, 2026, 02:31 PM
भारतीय सांसद ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया

भारतीय सांसद ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया

चंडीगढ़। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर कृषि क्षेत्र में अमरीकी निर्यात के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। यह समझौता भारतीय किसानों के हितों पर सीधा हमला और आत्मनिर्भर भारत के नारे का खुला मजाक है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि देश पहले से ही खाद्यान्न सरप्लस है। ऐसे में आयात से किसान और अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान होगा।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंहुड्डा ने कहा कि यह समझौता दोतरफा नहीं, बल्कि एकतरफा आत्मसमर्पण है। अमेरिकी कृषि उत्पादों को छूट देने से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था कमजोर होगी, सरकारी खरीद पर दबाव बढ़ेगा और किसान और गहरे संकट में फंसेंगे। डेयरी सेक्टर पर भी सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जहां अमेरिकी औद्योगिक कंपनियां छोटे दुग्ध किसानों को बाजार से बाहर कर देंगी।विज्ञापनविज्ञापनउन्होंने आरोप लगाया कि यह सौदा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में किया गया है। किसान हित में पहले भी तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ी गई और अब इस समझौते के खिलाफ भी संघर्ष किया जाएगा।
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Feb 3, 2026, 02:12 PM
अमेरिकी व्यापार समझौते और शुल्क में कमी के बाद रुपये में ऐतिहासिक उछाल

अमेरिकी व्यापार समझौते और शुल्क में कमी के बाद रुपये में ऐतिहासिक उछाल

अमेरिका के साथ ट्रेड डील का ऐलान औ टैरिफ में कटौती के बाद मंगलवार को रुपए में ऐतिहासिक छलांग देखी गई. खास बात तो ये है कि इस तरह की दमदार तेजी बीते 12 बरस में सिर्फ 10 बार ही देखने को मिली है. आंकड़ों को देखें तो कारोबारी सत्र के दौरान डॉलर के मुकाबले में रुपए में 1.5 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. खास बात तो ये है कि साल 2014 के बाद किसी भी एक दिन में रुपए में आई ये तीसरी सबसे बड़ी तेजी है. जिसके बाद डॉलर के मुकाबले में रुपया 90 के लेवल पर आकर मजबूत हो गया है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिपों में रुपए में इस तरह की तेजी लगातार देखने को मिल सकती है. आपको बता दें कि जनवरी महीने के आखिरी हफ्तों में रुपए 92 के लेवल को पार कर गया था. उसके बाद आए बजट और अब टैरिफ में कटौती और अमेरिका के साथ ट्रेड के बार रुपए में जबरदस्त तेरीके से तेजी आई. वैसे पिछले साल 2025 में डॉलर के मुकाबले में रुपए में 5 फीसदी से ज्यादा तेजी देखने मिली है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बाद, भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 122 पैसे या 1.33 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 90.27 (अस्थायी) पर बंद हुआ और यह एशियाई मुद्राओं में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनकर उभरा. विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के चलते भारतीय रुपया ढाई सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया और इसमें लगभग 1.5 प्रतिशत की तेजी आई. घरेलू सूचकांकों में भी लगभग 2.75 प्रतिशत की तेजी आई, जिससे घरेलू बाजार की भावनाएं मजबूत हुईं. इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी और अपेक्षित विदेशी निवेश ने भी निवेशकों के मनोबल को बढ़ाया. भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं जिसके तहत वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा, जो चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के लिए लागू शुल्क से कम है. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.30 पर खुला, फिर इसमें कुछ सुधार हुआ और यह दिन के दौरान 90.05 के उच्चतम स्तर और 90.52 के न्यूनतम स्तर तक पहुंचा. मंगलवार को कारोबार सत्र के अंत में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.27 (अस्थायी) पर था, जो पिछले बंद भाव से 122 पैसे की बढ़त दर्शाता है. केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के एक दिन बाद, सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 44 पैसे की बढ़त के साथ 91.49 पर बंद हुआ. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से रुपये में सबसे बड़ी अंतरदिवसीय वृद्धि 18 दिसंबर, 2018 को दर्ज की गई थी, जब इसमें 1.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जिसके बाद 11 नवंबर, 2022 को 1.51 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. 3 फरवरी, 2026 को हुई 1.48 प्रतिशत की रैली अब इस सूची में शामिल हो गई है, जो 2 नवंबर, 2018 (1.40 प्रतिशत) और 20 मई, 2019 (1.29 प्रतिशत) सहित कई अन्य उल्लेखनीय घटनाओं को पीछे छोड़ देती है. अन्य बड़े एक दिवसीय उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से वैश्विक अस्थिरता के चरम दौर में केंद्रित थे, जैसे कि मार्च 2020, जब महामारी से प्रेरित बाजार में उथल-पुथल के कारण मुद्राओं में तीव्र उतार-चढ़ाव आया. विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से विदेशी निवेशकों (FII) की भागीदारी के द्वार खुलेंगे और यदि चालू वर्ष 2026 में पूंजी प्रवाह में सुधार होता है, तो रुपये पर कुछ दबाव कम होगा. गोल्डमैन सैक्स ने एक रिसर्च नोट में कहा कि अमेरिका को भारत के निर्यात पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ कम होने के बाद, हमारा अनुमान है कि चालू खाता घाटा करंट अकाउंट डेफिसिट में कमी आएगी और जीडीपी के लगभग 0.25 प्रतिशत से घटकर 0.8 प्रतिशत हो जाएगा. इसके अलावा, यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संपन्न होने पर चालू खाता घाटा बढ़ता है, तो इससे रुपये पर कुछ दबाव कम होगा और हमारे मौजूदा USD/INR के 12 महीने के पूर्वानुमान (94) में गिरावट का जोखिम होगा. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि रुपये के लिए स्थिति पूरी तरह से अनुकूल नहीं होगी. नोट में कहा ​गया है कि इस ट्रेड डील में कुछ बाधाएं आ सकती हैं – उदाहरण के लिए, भारत के लिए रूस से तेल की खरीद को तुरंत मोड़ना आसान नहीं हो सकता है. RBI की विदेशी मुद्रा नीति भी स्थिति को जटिल बना सकती है. एचएसबीसी ने एक शोध नोट में कहा कि आरबीआई पिछले कुछ महीनों से भारतीय रुपए में एकतरफा सट्टेबाजी की स्थिति – चाहे वह अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक – को रोकने के लिए अप्रत्याशित तरीके से हस्तक्षेप कर रहा है. नोट में आगे कहा गया है कि यूएसडी-आईएनआर के लिए हमारा 2026 के अंत का पूर्वानुमान 90 है. कोटक सिक्योरिटीज के मुद्रा एवं कमोडिटी अनुसंधान प्रमुख अनिंद्या बनर्जी ने कहा कि हालिया व्यापार समझौते और टैरिफ में 18 फीसदी की कमी से मामूली वृद्धि की संभावना है, लेकिन इसकी गति और सीमा आरबीआई के हस्तक्षेप की सीमा पर निर्भर करेगी, क्योंकि निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखना प्राथमिकता है. विदेशी निवेश में मामूली सुधार हो सकता है, हालांकि तीव्र बदलाव की संभावना नहीं है क्योंकि वैश्विक निवेशक एआई, क्वांटम, मेमोरी और डेटा सेंटर जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. मुद्रा विशेषज्ञों का मानना ​​है कि स्थानीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89-91 के दायरे में रहने की उम्मीद है.
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Feb 3, 2026, 01:55 PM
उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी निर्माण परियोजनाओं के लिए भूमि-उपयोग परिवर्तनों को सुव्यवस्थित किया

उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी निर्माण परियोजनाओं के लिए भूमि-उपयोग परिवर्तनों को सुव्यवस्थित किया

योगी सरकार यूपी के शहरी क्षेत्रों में निर्माण के लिए भूमि उपयोग बदलने को लेकर आने वाली बाधाओं को दूर करने जा रही है। सरकार फीस में संशोधन करेगी। लगने वाले शुल्क की दरों को भी तर्कसंगत बनाया जाना है। इसके लिए देश के अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन कराया जाएगा और यह देखा जाएगा कि उनके यहां भूमि उपयोग की क्या व्यवस्था है। देश के जिस राज्य का मॉडल सबसे अच्छा होगा उसे अपनाते हुए नीति में संशोधन किया जाएगा। प्रदेश में भूमि के उपयोग के आधार पर नक्शा पास करने की व्यवस्था है। राज्य सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डालर करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए नीतियों में संशोधन किया जा रहा है, जिससे उद्योग लगाने के साथ ही रियल स्टेट सेक्टर और देश की नामचीन विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। शहरी क्षेत्रों में भूमि कम होती जा रही है। इसलिए भूमि का उपयोग बदलकर उस पर निर्माण कार्य की अनुमति दी जा रही है। मौजूदा समय भूमि उपयोग परिवर्तन में कठिनायां आ रही हैं। इसके चलते विकास प्राधिकरणों में आने वाले आवेदनों पर काफी समय तक विचार नहीं हो पा रहा है। शासन स्तर पर हुई बैठक में पाया गया कि इसके लिए मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के यहां प्रस्ताव भेजा जा रहा है और उस पर त्वरित फैसला नहीं हो पा रहा है। इसलिए भूमि उपयोग परिवर्तन के लंबित मामलों की समीक्षा तथा भू-उपयोग प्रक्रिया को सरलीकृत करने पर विचार-विमर्श किया गया। भूमि-उपयोग परिवर्तन के मामलों को विकास प्राधिकरण बोर्ड के माध्यम से भेजे जाने की अनिवार्यता का भी विधिक परीक्षण कराया जाएगा और देखा जाएगा क्या इसकी जरूरत है। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की दरों का अन्य राज्यों से तुलनात्मक अध्ययन किए जाएगा और इसे युक्तिसंगत बनाने पर विचार होगा।
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Feb 3, 2026, 01:51 PM
दिल्ली के कैबिनेट मंत्री ने आर्थिक विकास और विकास पर जोर देते हुए केंद्रीय बजट 202627 को'अगली पीढ़ी का बजट'बताया

दिल्ली के कैबिनेट मंत्री ने आर्थिक विकास और विकास पर जोर देते हुए केंद्रीय बजट 202627 को'अगली पीढ़ी का बजट'बताया

दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय बजट 202627 को नेक्स्ट जेनरेशन बजट बताते हुए कहा कि यह बजट भारत की आर्थिक नींव को और मजबूत करने के साथ-साथ दिल्ली के विकास को नई रफ्तार देगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में भारत आज एक विश्वसनीय वैश्विक आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है. इसका प्रमाण अंतरराष्ट्रीय व्यापार फैसलों और निवेशकों के बढ़ते भरोसे में साफ दिखाई देता है. अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% किए जाने के फैसले पर प्रवेश ने इसे भारत के लिए बड़ी आर्थिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि यह भारत की मजबूती, स्थिरता और विकास क्षमता पर बढ़ते विश्वास को दिखाता है. यह साफ दिखाता है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आज एक मजबूत और भरोसेमंद वैश्विक आर्थिक शक्ति बन चुका है. इससे हमारे निर्यातकों को लाभ मिलेगा, निवेश बढ़ेगा और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे. इस वैश्विक सकारात्मक माहौल को केंद्रीय बजट 202627 से जोड़ते हुए मंत्री ने कहा, सरकार की आर्थिक सोच तात्कालिक लाभ नहीं बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित है. यह बजट आज के फायदे के लिए नहीं बल्कि आने वाले भारत के निर्माण के लिए है. यह 2047 तक विकसित भारत और उसके साथ विकसित दिल्ली का रोडमैप तैयार करता है. दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विस्तार पर प्रवेश ने बताया, चालू वित्त वर्ष में लोक निर्माण विभाग को सड़क विकास के लिए ₹805 करोड़ मिले हैं. जबकि 202627 के लिए विभाग केंद्र सरकार से लगभग ₹1,200 करोड़ की केंद्रीय सहायता और आवंटन प्राप्त करने की दिशा में प्रयास करेगा. इससे बड़े पैमाने पर सड़कों के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के काम किए जाएंगे. इस बढ़ी हुई केंद्रीय मदद से राजधानी में सड़कों की गुणवत्ता सुधरेगी, यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी. मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण अब केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर समन्वय से परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं. कई वर्षों से लंबित इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य अब पूरी गति से पूरे हो रहे हैं. शासन व्यवस्था में सुधारों पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले 11 महीनों में स्थिरता, जवाबदेही और कार्यकुशलता आई है, जिससे रुकी हुई विकास योजनाएं फिर से शुरू हो सकी हैं. प्रवेश ने कहा कि पहले राजनीतिक टकराव के कारण दिल्ली का विकास बार-बार रुकता था. आज काम फोकस, पारदर्शिता और गति के साथ आगे बढ़ रहा है. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है. मजबूत नेतृत्व, बढ़ता वैश्विक विश्वास और दूरदर्शी नीति मिलकर भारत और दिल्ली दोनों का एक शक्तिशाली भविष्य गढ़ रहे हैं.
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Feb 3, 2026, 01:47 PM
मुख्यमंत्री शहरी आवास योजनाः गुरुग्राम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए फ्लैट बुक करने की अंतिम तिथि

मुख्यमंत्री शहरी आवास योजनाः गुरुग्राम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए फ्लैट बुक करने की अंतिम तिथि

गुरुग्राम। मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पात्र परिवारों के लिए फ्लैट बुकिंग की अंतिम तिथि 4 फरवरी है। योजना के तहत पात्र परिवारों को मात्र 1.50 लाख की राशि में फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। एडीसी सोनू भट्ट ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के अंतर्गत निगम क्षेत्र से कुल 12,384 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से पहले चरण की वेरिफिकेशन प्रक्रिया में 4,728 आवेदन पात्र पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि केवल वही परिवार फ्लैट बुकिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो पहले चरण की जांच में पात्र पाए गए हैं। संवादऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
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Feb 3, 2026, 01:46 PM
अमेरिका-भारत व्यापार समझौताः शर्तों में रूसी तेल आयात पर रोक भी शामिल

अमेरिका-भारत व्यापार समझौताः शर्तों में रूसी तेल आयात पर रोक भी शामिल

नई दिल्ली:भारत और अमेरिका के बीच सोमवार को ट्रेड डील हुई। कई शर्तों के साथ यह डील पूरी हुई है। इसमें एक शर्त है कि भारत को रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद करना होगा। हालांकि यह अभी पूरी तरह संभव नहीं होगा। मूडीज रेटिंग्स ने कहा है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना तुरंत बंद नहीं करेगा। मूडीज का मानना है कि अचानक सेरूस से तेल खरीदनाबंद करने से भारत की आर्थिक वृद्धि पर बुरा असर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।मूडीज ने कहा कि हाल के महीनों में भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। लेकिन, वे तुरंत पूरी तरह से खरीदना बंद नहीं करेंगे। ऐसा करने से भारत की आर्थिक वृद्धि में रुकावट आ सकती है। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि अगर भारत पूरी तरह से गैर-रूसी तेल की ओर मुड़ता है, तो इससे दूसरी जगहों पर तेल की आपूर्ति कम हो सकती है। इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई भी बढ़ेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। यह दिखाता है कि भारत के लिए अपनी ऊर्जा आपूर्ति को जल्दी से बदलना कितना मुश्किल है।India US Trade Deal: भारत के साथ टैरिफ के खेल में अमेरिका 18-0 से आगे! ट्रेड डील में क्या ट्रंप मार ले गए बाजी?निर्यात को मिलेगा बढ़ावाऊर्जा आयात पर अपनी राय देने के साथ-साथ, मूडीज ने कहा किव्यापार समझौतेके तहत अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ में कमी से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। खासकर अमेरिका को होने वाले निर्यात में वृद्धि होगी, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सामान निर्यात बाजार है।मूडीज ने कहा कि अमेरिका द्वारा ज्यादातर भारतीय सामानों पर टैरिफ दर कम करने से अमेरिका को भारत के सामानों के निर्यात में फिर से जान आ जाएगी। अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा सामान निर्यात बाजार है। साल 2025 के पहले ग्यारह महीनों में अमेरिका भारत के कुल सामान निर्यात का लगभग 21% हिस्सा था।भारत क्या-क्या खरीदेगा अमेरिका से?एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को रॉयटर्स को बताया कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिका से पेट्रोलियम, रक्षा सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार उपकरण और विमानों की खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है।अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंपने सोमवार को इस समझौते की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करेगा। इसके बदले में भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और व्यापार बाधाओं को कम करेगा। ट्रंप ने कहा था कि भारत ने 'BUY AMERICAN' (अमेरिकी खरीदें) को बहुत ऊंचे स्तर पर करने पर सहमति जताई है।
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Feb 3, 2026, 01:43 PM
अमेरिका-भारत व्यापार समझौताः भारत ने रूस से तेल खरीद रोकी, रूस ने दावे को किया खारिज

अमेरिका-भारत व्यापार समझौताः भारत ने रूस से तेल खरीद रोकी, रूस ने दावे को किया खारिज

Top News Today:राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत पर लगे टैरिफ को कम करते हुए कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है। लेकिन रूस ने इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा है कि उसे भारत की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संदेश या जानकारी नहीं मिली है। दूसरी ओर, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका के साथ हुई यह ट्रेड डील किसानों, एमएसएमई (MSME), उद्यमियों और कुशल श्रमिकों के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। पढ़ें आज की बड़ी खबरें... राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में आज (मंगलवार) दूसरे दिन भी हंगामा जारी रहा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फिर से जनरल नरवणे के संस्मरण का जिक्र किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। इस दौरान सदन में अफरा-तफरी मच गई। तभी कुछ विपक्षी सांसदों ने आसन की ओर कागज फेंक दिए। अब उन सांसदों पर सख्त कार्रवाई हुई है। संसदीय कार्य मंत्री द्वारा पेश प्रस्ताव के बाद लोकसभा ने उन 8 विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया है।पढ़ें पूरी खबर... केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील किसानों, एमएसएमई, उद्यमियों और कुशल श्रमिकों के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा करेगी। गोयल ने बताया कि इससे 'मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड', 'डिजाइन इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड' और 'इनोवेट इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में तेजी आएगी। अमेरिका से तकनीक हासिल होगी, जो विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को गति देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की दूरदर्शिता की प्रशंसा की।पढ़ें पूरी खबर... उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों की व्यापक जांच की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों को न सिर्फ बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनसे अब तक ली गई सैलरी भी वसूल की जाए। जांच छह महीने के अंदर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।पढ़ें पूरी खबर... अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के बाद भारत-रूस संबंधों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, और इसके बदले टैरिफ घटाए जाएंगे। लेकिन रूस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को को भारत की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को बहुत महत्वपूर्ण मानता है और इसे और मजबूत करना चाहता है।पढ़ें पूरी खबर... ईरान की राजधानी तेहरान के पश्चिमी इलाके जन्नत आबाद में एक बाजार (जन्नत बाजार) में भीषण आग लग गई। आग का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। सूचना मिलते ही बचाव कार्य शुरू हो गया। कई दमकल टीमें मौके पर पहुंची हैं और आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं। तेहरान आपातकालीन सेवाओं के ऑपरेशन कमांडर मोहम्मद बेहनिया ने बताया कि अब तक आग से किसी की जान नहीं गई है और कोई हताहत नहीं हुआ है। मोटी धुएं की परतें शहर में फैल गई हैं।पढ़ें पूरी खबर...
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Feb 3, 2026, 12:51 PM
कीमती धातुओं में तेजीः सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट के बाद उछाल

कीमती धातुओं में तेजीः सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट के बाद उछाल

आज कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिली। इससे पहले लगातार दो दिनों तक भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जो दशकों में सोने और चांदी की कीमतों में सबसे खराब गिरावटों में से एक थी। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में लगभग 6% की तेजी आई और यह $4,935 पर पहुंच गया। इसके साथ ही यह नवंबर 2008 के बाद से सबसे बड़ा एक दिवसीय उछाल है। वहीं, स्पॉट सिल्वर की कीमतों में 10% की वृद्धि हुई और यह $87.40 प्रति औंस पर पहुंच गई। सोने-चांदी का अनुपात (Gold Slver Ratio) इन दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्य को मापता है। यह दिखाता है कि सोने का एक औंस खरीदने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। आप सोने के एक औंस की कीमत को चांदी के एक औंस की कीमत से भाग देकर इस अनुपात की गणना कर सकते हैं। मौजूदा कीमतों से सोने-चांदी का अनुपात 56 दर्शाया गया है। ऐतिहासिक रूप से, 10-वर्षीय अनुपात औसतन 80:1 के करीब रहा है। व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब यह अनुपात 50:1 से नीचे गिर जाता है, तो चांदी सस्ती नहीं रह जाती। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साइकिल में, इतना कम अनुपात एक माध्य पुनरावृत्ति (mean reversion) से पहले रहा है, जहां चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में काफी तेजी से सुधार हुआ - यही प्रवृत्ति पिछले सप्ताह देखने को मिली। विश्लेषकों के अनुसार, सोने-चांदी का अनुपात पिछले सप्ताह लगभग 44 पर सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था और इसके इन स्तरों को फिर से टेस्ट करने की संभावना नहीं है। चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी विश्लेषक आमिर मकदा ने कहा कि अनुपात में यह उछाल बाजार के रुख में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है, विशेष रूप से 2026 की शुरुआत में चांदी के शानदार प्रदर्शन के बाद एक "कूलिंग ऑफ" अवधि की शुरुआत होने का। INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी ने कहा कि यह लेटेस्ट गेन मुख्य रूप से अस्थायी कारकों से प्रेरित रही है - तेज रैली के बाद चांदी में प्रॉफिट बुकिंग, वायदा बाजार में मार्जिन संबंधी स्थिति खोलना, और वैश्विक जोखिम-विरोधी संकेतों के बाद कथित सुरक्षा की ओर संक्षिप्त पलायन। वर्तमान बाजार के माहौल में, विश्लेषकों का मानना है कि चांदी निकट से मध्यम अवधि में बेहतर प्रदर्शन जारी रखेगी। PACE 360 के मुख्य वैश्विक रणनीतिकार अमित गोयल ने कहा कि उनकी समझ है कि निकट अवधि में चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन करेगी। चांदी के लिए उनका निकट का लक्ष्य $100 है, जो यहां से लगभग 15% की बढ़त है। जबकि, सोने में लगभग 6-7% की बढ़त की संभावना है, जिसका लक्ष्य $5200-$5400 है। परिभाषा के अनुसार, उन्होंने कहा कि सोने-चांदी का अनुपात लगभग 10% गिर सकता है, संभवतः 50 की ओर। INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी का भी मानना है कि व्यापक मैक्रो लेंस से देखें तो अंतर्निहित सेटअप मध्यम अवधि में चांदी का पक्ष लेता है। उन्होंने कहा, "चांदी आमतौर पर कीमती धातुओं के चक्र के अंतिम चरणों में बेहतर प्रदर्शन करती है। ब्याज दरों में कटौती, बेहतर औद्योगिक डिमांड आउटलुक और निरंतर निवेश रुचि के साथ, चांदी नेतृत्व पुनः प्राप्त करने के लिए बेहतर स्थिति में है।" उन्होंने यह भी कहा कि निवेशकों के लिए, इस चरण को सोने की तलाश में भागने के संकेत के बजाय, चांदी को अगले चरण में वापसी की तैयारी के अवसर के रूप में देखना चाहिए। वहीं, गोयल ने कहा कि हालांकि एक उछाल की उम्मीद है, निवेशकों को यह जानना चाहिए कि कीमती धातुओं के लिए एक साल का आउटलुक अभी के लिए बेहद नकारात्मक है। आदर्श आवंटन पर टिप्पणी करते हुए, मकदा ने कहा कि चांदी एक उच्च जोखिम, उच्च यील्ड वाली "स्प्रिंट" धातु है, और दूसरी ओर, सोना एक "मैराथन" धावक है, जो स्थिरता प्रदान करता है। उन्होंने सलाह दी, "चूंकि अनुपात वर्तमान में 55 पर है, इसलिए एक संतुलित, सामरिक दृष्टिकोण की सिफारिश की जाती है, जहां कोई 60% सोना और 40% चांदी रख सकता है। साथ ही, एक ही बार में 'ऑल इन' न करने और निवेश करने के लिए एसआईपी जैसी विधि का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।"
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Feb 3, 2026, 12:41 PM
स्वदेशी जागरण मंच स्व-रोजगार और उद्यमिता के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाता है

स्वदेशी जागरण मंच स्व-रोजगार और उद्यमिता के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाता है

बोले, महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो पूरा परिवार और समाज होता है सशक्तऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसंवाद न्यूज एजेंसीऊना। स्वदेशी जागरण मंच जिला ऊना की ओर से युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार, स्वावलंबन और आत्मनिर्भर भारत की भावना से जोड़ने के उद्देश्य से जिले में दो कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्वदेशी विचारधारा को व्यवहार में उतारते हुए समाज के विभिन्न वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का संदेश दिया गया। मंच जिला पूर्णकालिक सत्य देव शर्मा सहोड़ ने बताया कि कार्यक्रमों की शृंखला में प्रथम आयोजन जिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) ऊना में किया गया। जहां स्वरोजगार, स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भर बनने विषय पर एक विस्तृत कार्यशाला आयोजित हुई। इस कार्यशाला में आईटीआई के लगभग 70 प्रशिक्षु विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विनय शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।मुख्य वक्ता विनय शर्मा ने युवाओं को तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उद्यमिता, स्टार्टअप संस्कृति, लघु एवं कुटीर उद्योगों तथा स्वरोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने की सोच विकसित करनी चाहिए। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो पूरा परिवार और समाज सशक्त होता है।विज्ञापनविज्ञापन
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Feb 3, 2026, 12:34 PM
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गयाः अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए शुल्क कम किए गए

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गयाः अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए शुल्क कम किए गए

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल हो गई है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को इस डील का औपचारिक ऐलान किया. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने सोमवार को एक बड़ा व्यापार समझौता किया है. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. इससे चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय निर्यात प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को बढ़त मिली है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कदम भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और देश के नागरिकों के लिए कई नए अवसर लेकर आएगा. यह डील भारत के मजबूत भविष्य को और सशक्त बनाएगी. गौरतलब है कि सोमवार देर शाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ऐलान किया था. इस डील को लेकर लंबे समय से दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. इसमें वह 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल था, जो रूस से तेल खरीदने को लेकर पेनल्टी के तौर पर लगाया गया था. ट्रंप ने बताया कि भारत अब अमेरिका-वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए तैयार हो गया है और रूस से तेल की खरीद भी बंद करेगा. पीयूष गोयल ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखते हुए लंबे समय से प्रतीक्षित यह व्यापार समझौता कल पूरा किया गया. उन्होंने कहा, मैं सभी को बधाई देता हूं क्योंकि इससे भारत के 1.4 अरब लोगों को फायदा होगा. गरीबों, किसानों, मछुआरों, युवाओं और महिलाओं सभी को इस समझौते से लाभ मिलेगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह ऐतिहासिक भारत-अमेरिका समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच व्यापार और विकास में सहयोग के एक नए दौर की शुरुआत करता है. इससे व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत को विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी.” पीयूष गोयल ने कहा, अमेरिका के साथ हुआ यह व्यापार समझौता हमारे पड़ोसी देशों और हमारे साथ दौड़ में शामिल सभी देशों के मुकाबले सबसे बेहतर है. पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में डेयरी और कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखा गया है. यह समझौता राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखता है. अमेरिका-भारत व्यापार समझौता सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह इस बात का बड़ा संकेत है कि भारत तेजी से आगे बढ़ेगा. ये भी पढ़ें- Explained: टैरिफ पर ट्रंप का यू-टर्न! वो 5 बड़े कारण जिसके चलते भारत के सामने नरम पड़े अमेरिकी तेवर Explained: मजबूत होगा रुपया, उछलेगा बाजार! टैरिफ पर ट्रंप के फैसले से भारत को होंगे ये 5 फायदे
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Feb 3, 2026, 12:28 PM
अन्य शहरों को पीछे छोड़ते हुए पटना बिहार का सबसे अमीर जिला बना

अन्य शहरों को पीछे छोड़ते हुए पटना बिहार का सबसे अमीर जिला बना

Bihar Interesting Facts:बिहार की गिनती भारत के गरीब राज्यों में की जाती है। बड़ी आबादी के साथ ये राज्य वर्तमान में देश के कई राज्यों के मुकाबले आर्थिक व अन्य विकास के मामले में पीछे है। पर क्या आप जानते हैं कि बिहार का सबसे अमीर जिला कौन सा है। बिहार सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 जारी किया है जिसमें इस बात की जानकरी दी गई है। आपको बता दें कि आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, बिहार का सबसे समृद्ध यानी अमीर जिला इसकी राजधानी पटना है। बिहार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में दी गई जानकारी के मुताबिक, अमीरी के मामले में बिहार की राजधानी पटना पहले नंबर पर है। पटना की प्रति व्यक्ति आय 1,31,332 रुपये दर्ज की गई है। पटना के बाद सबसे अमीर शहरों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर बेगूसराय और तीसरे नंबर पर मुंगेर जिले को रखा गया है। बेगूसराय में प्रति व्यक्ति आय 61,566 रुपये और मुंगेर में प्रति व्यक्ति आय 54,469 रुपये है। आपको बता दें कि बिहार में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों में जिलों की संपन्नता का अंदाजा वहां पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की खपत और इसके साथ ही प्रति व्यक्ति लघु बचत के आधार पर किया जाता है। सर्वेक्षण में प्रति व्यक्ति आय के आधार पर जिलों को रैंकिंग दी गई है। सर्वे में ये भी बताया गया है कि बिहार की औसत प्रति व्यक्ति आय 76,490 रुपये है। बिहार सरकार ने जानकारी दी है कि बिहार की विकास दर 10 प्रतिशत से अधिक की है। ये राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। वृद्धि दर के मामले में बिहार दूसरे नंबर पर है और तमिलनाडु पहले नंबर पर है। बिहार की आर्थिक वृद्धि दर 13.1 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय दर 7.3 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। बिहार में प्रति व्यक्ति आय 69 हजार रुपये से बढ़कर 76 हजार रुपये हो गई है। बिहार सरकार ने अगले 5 साल में बिहार की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।(इनपुट: भाषा) ये भी पढ़ें-क्या जनरल टिकट लेने पर रेलवे देता है इंश्योरेंस? अच्छे-अच्छों को नहीं पता होगा जवाब भाई ने बनाई दुनिया की सबसे अनोखी मैगी, उसी कारण Video भी हुआ वायरल
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Feb 3, 2026, 12:27 PM
भारत ने क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए सख्त नियम लागू किए

भारत ने क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए सख्त नियम लागू किए

बिजनेस डेस्कः अगर आप क्रिप्टोकरेंसी या किसी भी तरह के डिजिटल एसेट में निवेश करते हैं, तो अब सतर्क हो जाना जरूरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में क्रिप्टो को लेकर सख्त नियमों का ऐलान किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। नए नियमों का मकसद क्रिप्टो इकोसिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।सरकार ने साफ कर दिया है कि अब रिपोर्टिंग में लापरवाही या गलत जानकारी देने पर भारी जुर्माना और रोजाना पेनाल्टी लगेगी। ये नियम निवेशकों के साथ-साथ क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और कंपनियों पर भी लागू होंगे।यह भी पढ़ें:Gold Price को लेकर JP Morgan की ताजा रिपोर्ट, कहा- इस लेवल तक जाएगा रेटक्या है नया पेनाल्टी फ्रेमवर्कनए नियमों के तहत अगर कोई निवेशक, संस्था या क्रिप्टो प्लेटफॉर्म अपने डिजिटल एसेट की जानकारी समय पर साझा नहीं करता है, तो उस पर ₹200 प्रतिदिन की पेनाल्टी लगेगी। यह जुर्माना तब तक चलता रहेगा, जब तक जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करा दी जाती।और ये भी पढ़ेBudget Settlement Holiday: निवेशक के लिए अलर्ट, बजट डे पर ट्रेडिंग से पहले जान लें सेटलमेंट हॉलिडे...Crypto Market Crash: बिटकॉइन-इथेरियम धड़ाम, $83,000 से फिसला Bitcoin, निवेशकों के डूबे ₹15.62 लाख...क्रिप्टो मार्केट में भूचाल, 75,000 डॉलर से नीचे फिसला Bitcoin, अप्रैल 2025 के बाद निचले स्तर परवहीं, अगर कोई गलत, अधूरी या भ्रामक जानकारी देता है, तो उस पर ₹5 लाख तक का एकमुश्त जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी अब सिर्फ देरी ही नहीं, बल्कि गलत जानकारी देना भी भारी पड़ सकता है।सरकार ने क्यों लिया सख्त रुखसरकार का मानना है कि फिलहाल क्रिप्टो सेक्टर में रिपोर्टिंग के अलग-अलग मानक हैं, जिससे निगरानी मुश्किल हो जाती है। नए नियमों के जरिए एक समान रिपोर्टिंग सिस्टम लाकर पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे क्रिप्टो बाजार को लंबे समय में स्थिरता और भरोसा मिलने की उम्मीद है।यह भी पढ़ें:Gold Baggage Rules Changed: बढ़ी ड्यूटी फ्री लिमिट, ज्वेलरी पर भी बदले नियमइंडस्ट्री का क्या कहना हैक्रिप्टो इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Mudrex के सीईओ एडुल पटेल के मुताबिक, यह कदम डिजिटल एसेट सेक्टर के लिए सकारात्मक है। इससे साफ होता है कि सरकार क्रिप्टो को रेगुलेट करके उसे मेनस्ट्रीम फाइनेंशियल सिस्टम के करीब लाना चाहती है। बेहतर निगरानी और जवाबदेही से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
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Feb 3, 2026, 12:25 PM
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के बाद मंगलवार को शेयर बाजार में 2.5 फीसदी की तेजी देखने को मिली. इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ मौजूदा 25 फीसदी से घटकर 18 फीसदी कर दिया गया है. साथ ही व्हाइट हाउस से ये भी आश्वासन मिलता है कि रूसी टैरिफ भी हटा दिया जाएगा. इसका मतलब है कि भारत पर जो 50 फीसदी टैरिफ लगा था, वो कम होकर 18 फीसदी हो जाएगा. इस ऐलान के बाद मंगलवार को शेयर बाजार में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला. कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 4,205.27 अंक या 5.14 प्रतिशत बढ़कर 85,871.73 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. बाद में यह 2,072.67 अंक या 2.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83,739.13 पर बंद हुआ. अगर बात निफ्टी की करें तो 639.15 अंक या 2.55 फीसदी बढ़कर 25,727.55 पर बंद हुआ. दिन भर में इसमें 1,252.8 अंक या 4.99 प्रतिशत की तेजी आई और यह 26,341.20 अंकों के साथ दिन के हाई पर भी पहुंचा. रिलायंस और दिग्गज वित्तीय कंपनियों के नेतृत्व में घरेलू शेयरों में उछाल आया और नौ महीनों में सबसे अच्छी बढ़त दर्ज की गई. वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद निर्यात-उन्मुख शेयरों में व्यापक तेजी देखी गई, जिससे बाजार पर मंडरा रहा एक अहम दबाव दूर हो गया. निफ्टी50 में अडानी इंटरप्राइजेज, अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज शीर्ष लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल थे, जिनमें 11 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई, जबकि ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन और आईटीसी में 1 प्रतिशत तक की गिरावट आई. बाजार का रुख सकारात्मक रहा, क्योंकि लगभग 2911 शेयरों में बढ़त, 435 शेयरों में गिरावट और 123 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ. सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. ब्रॉडर मार्केट में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते निफ्टी स्मॉल-कैप100 और मिड-कैप100 सूचकांकों में 3.5 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई. 1) भारत-अमेरिका ट्रेड डील:ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका ने भारत के साथ एक व्यापार समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले की घोषणा की. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि बहुप्रतीक्षित अमेरिका-भारत ट्रेड डील की नाटकीय घोषणा और भारत पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 प्रतिशत करने का अमेरिकी निर्णय भारतीय इकोनॉमी और शेयर बाजारों के लिए गेमचेंजर साबित होगा. अमेरिका-भारत ट्रेड डील, यूरोपीय यूनियन-भारत ट्रेड डील और विकासोन्मुखी बजट का संयोजन बाजार की भावनाओं और इकोनॉमी में तेजी लाएगा. इन घटनाक्रमों का अनुमान लगाते हुए और उन्हें ध्यान में रखते हुए शेयर बाजार में उछाल आएगा. 2) रीजनल एक्सपोर्ट कंप्टीटर्स को बढ़त:भारत को अब 18 प्रतिशत की टैरिफ दर का सामना करना पड़ेगा है, जो कई क्षेत्रीय समकक्षों की तुलना में कम या उनके बराबर है. बांग्लादेश, श्रीलंका, ताइवान और वियतनाम को 20 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ता है, जबकि पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस पर 19 प्रतिशत टैरिफ लागू है. कंबोडिया को भी 19 प्रतिशत की टैरिफ दर का सामना करना पड़ता है. 3) रुपए में इजाफा:3 फरवरी, 2026 को भारतीय रुपये में दिन के दौरान लगभग 1.5 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि ने करेंसी को उन दुर्लभ सत्रों में शामिल कर दिया है, जिनमें पिछले 12 वर्षों में केवल 10 बार ही ऐसी वृद्धि देखी गई है. 4) मजबूत वैश्विक संकेत:एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5 प्रतिशत उछला. जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी हाई लेवल पर कारोबार करते हुए दिखाई दिए. अमेरिकी बाजार सोमवार को उच्च स्तर पर बंद हुए. 5) कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट:वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.51 प्रतिशत गिरकर 65.96 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई. कच्चे तेल की कम कीमतें महंगाई के दबाव को कम करती हैं और भारत के व्यापार संतुलन को बेहतर बनाती हैं, जिससे शेयर बाजारों को समर्थन मिलता है. शेयर बाजार में आई इस तेजी की वजह से निवेशकों को काफी मोटा फायदा हुआ. निवेशकों का फायदा और नुकसान बीएसई के मार्केट कैप पर डिपेंड करता है. आंकड़ों को देखें तो सोमवार को बीएसई का मार्केट कैप 4,55,03,877.32 करोड़ रुपए देखने को मिला था. जो मंगलवार को बढ़कर 4,67,14,754.77 करोड़ रुपए पर आ गया. इसका मतलब है कि मंगलवार को शेयर बाजार में 12,10,877.45 करोड़ रुपए की तेजी देखने को मिला है. जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और भी तेजी देखने को मिल सकती है. अगर बात दोनों दिनों की तेजी की करें तो शेयर बाजार निवेशकों को 16.60 लाख करोड़ रुपए का फायदा हो चुका है.
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Feb 3, 2026, 12:24 PM
बिहार सरकार ने 2026-27 के लिए बजट पेश किया, ऊर्जा विभाग को 18,737 करोड़ रुपये आवंटित किए

बिहार सरकार ने 2026-27 के लिए बजट पेश किया, ऊर्जा विभाग को 18,737 करोड़ रुपये आवंटित किए

विस्तारFollow Usबिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दोपहर 2 बजे विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया। यह चुनाव के बाद नीतीश कुमार सरकार का पहला पूर्ण बजट है। सरकार ने इस बजट में ऊर्जा विभाग के लिए 18,737.06 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंबिजली की मांग में लगातार बढ़ोतरीराज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ विद्युत की मांग में भी लगातार वृद्धि हो रही है। वर्तमान में राज्य में 23 से 24 घंटे विद्युत की आपूर्ति की जा रही है। वर्ष 2025-26 में 23 जुलाई 2025 को बिजली की अधिकतम मांग (Peak Demand) बढ़कर 8,752 मेगावाट हो गई थी। वहीं वर्ष 2026-27 में राज्य की अधिकतम मांग 9,600 मेगावाट से अधिक होने का आकलन किया गया है।विज्ञापनविज्ञापनकम हो रही बिलिंग की त्रुटियांअब बिजली का बिल बनाने में होने वाली गलतियां लगातार कम हो रही हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन तकनीक से मीटर की सही रीडिंग लेकर वहीं बिल बनाने से सिस्टम पहले से ज्यादा सटीक और पारदर्शी हो गया है। इससे उपभोक्ताओं को सही बिल समय पर मिल रहा है और परेशानी कम हो गई है।जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत राज्य के 12,971 सरकारी भवनों जैसे उच्चतर माध्यमिक स्कूल, ई-किसान भवन, पॉलिटेक्निक और अभियंत्रण महाविद्यालय, औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र वगैरह की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इन भवनों में कुल 119 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जाना था। अब तक 12,131 सरकारी भवनों पर कुल 112 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लग चुके हैं। सरकार ने अगले पांच साल में इन सरकारी भवनों पर कुल 500 मेगावाट की सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य तय किया है।अब तक 15,900 निजी भवनों पर सोलर प्लांटप्रधानमंत्री सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना के तहत आवासीय भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं। इस योजना में 1 किलोवाट क्षमता के लिए 30,000 रुपये, 2 किलोवाट के लिए 60,000 रुपये और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के लिए 78,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है। पहले की छत पर सौर ऊर्जा योजना और इस योजना को मिलाकर अब तक 15,900 निजी भवनों पर कुल 57.20 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लग चुके हैं। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 58 लाख उपभोक्ताओं के घरों पर 1.1 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र पूरी तरह मुफ्त लगाने की योजना है। इसके पहले चरण में 10 लाख परिवारों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रक्रिया चल रही है।12 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट का लक्ष्यमुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत सभी पंचायतों में 12 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 8.44 लाख लाइट लग चुकी हैं। भागलपुर के पीरपैंती क्षेत्र में 3x800 मेगावाट क्षमता का नया थर्मल पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। यह परियोजना 2029-30 तक पूरी करने का लक्ष्य है।किसानों को बड़ी राहतमुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध योजना के तहत राज्य के 8.55 लाख कृषि पंप सेट को सितंबर 2026 तक बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 7.66 लाख किसानों को कनेक्शन मिल चुका है। वर्तमान में योजना-2 के तहत 4.80 लाख का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 3.91 लाख कनेक्शन दे दिए गए हैं। जुलाई 2025 से मुख्यमंत्री विद्युत सहायता योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिल रही है। 125 यूनिट से अधिक खपत पर भी सब्सिडी जारी है।स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बिहार सबसे आगेराज्य में अब तक 83 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। इन उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की अतिरिक्त छूट भी दी जा रही है। राज्य सरकार की नीतियों के कारण विद्युत वितरण कंपनियों ने 2022-23 में 215 करोड़, 2023-24 में 1,274 करोड़ और 2024-25 में 2,004 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया।ऊर्जा विभाग के लिए भी हुए थे कई बड़े एलान- फोटो : अमर उजालाजानें ऊर्जा विभाग के लिए पिछले बजट में क्या था?बिहार सरकार ने ऊर्जा विभाग के लिए बजट 2025 में कई बड़ी योजनाओं की घोषणा की थी। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत 10,433 सरकारी भवनों पर 94.34 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 1–3 किलोवाट तक के सोलर प्लांट पर 30,000 से 78,000 रुपये तक का अनुदान दिया गया और 5,683 निजी भवनों पर 21 मेगावाट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए गए। किसानों को अतिरिक्त अनुदान के साथ बिजली मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध कराई गई।
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Feb 3, 2026, 12:22 PM
वैश्विक शुल्कः व्यापार नीतियों और असंतुलन का एक जटिल जाल

वैश्विक शुल्कः व्यापार नीतियों और असंतुलन का एक जटिल जाल

अमेरिका ने साल 2025 में एक बेसलाइन 10% टैरिफ लागू किया, जो अधिकांश देशों पर लागू होता है। कुछ देशों पर विशेष बड़े आयात शुल्क लगाया गया है, जो उस देश के ट्रेड डिस्बैलेंस, व्यापार नीतियों और द्विपक्षीय समझौतों पर निर्भर करता है। आज से पहले भारत पर भी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लागू था जो अब घटकर 43 प्रतिशत पर आ गया है। भारत के साथ-साथ अमेरिका ने ब्राज़ील पर भी 50% टैरिफ लागू किया था।, जबकि कई अन्य विकसित देशों पर 10–20% के बीच दरें हैं। आइए, यहां देखते हैं कि किन देशों पर अब कितना टैरिफ लागू है। किसी देश पर ज्यादा टैरिफ लगाने का अर्थ है कि उस देश से आयात होने वाले सामान पर अधिक शुल्क लगाया जा रहा है। इसका सीधा असर उत्पादों की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दो देशों के आपसी संबंधों पर पड़ता है। जब अमेरिका या कोई अन्य देश किसी खास देश पर ऊंचा टैरिफ लागू करता है, तो उस देश से आने वाले उत्पाद महंगे हो जाते हैं। इससे आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिसका बोझ अक्सर उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है। आमतौर पर टैरिफ बढ़ाने का कदम व्यापारिक दबाव बनाने, घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने या रणनीतिक कारणों से उठाया जाता है। कई बार इसका उद्देश्य दूसरे देश को व्यापारिक नीतियों में बदलाव के लिए मजबूर करना भी होता है। ज्यादा टैरिफ लगाने से कम समय में घरेलू उद्योग को राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में व्यापार महंगा, महंगाई और वैश्विक तनाव बढ़ सकता है। Latest Business News
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Feb 3, 2026, 12:20 PM
भारत ने अमेरिकी आयात पर शुल्क घटाया,'मेक इन इंडिया'उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया

भारत ने अमेरिकी आयात पर शुल्क घटाया,'मेक इन इंडिया'उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया

मेक इन इंडिया उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देगा यह कदम, बाजार विस्तार का लाभ भी मिलेगाऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसंवाद न्यूज एजेंसीगुरुग्राम। अमेरिका द्वारा भारत पर लगे 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने के फैसले से जिले के उद्योगपतियों और व्यापारियों में उत्साह का माहौल है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत यह कदम मेक इन इंडिया उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देगा, जिससे स्थानीय कारोबारियों को लागत में कमी और बाजार विस्तार का लाभ मिलेगा।जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय व्यापारियों का मानना है कि यह फैसला निर्यात-आधारित इकाइयों के लिए वरदान साबित होगा। पहले ऊंचे टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन हो रही थी, लेकिन अब 7 प्रतिशत की कमी से मुनाफे में इजाफा होगा।विज्ञापनविज्ञापन-----------------------छोटे-मध्यम उद्योगों के लिए गेम-चेंजर है कटौती25 से 18 प्रतिशत टैरिफ कट ने हमारे निर्यातकों में नई जान फूंकी है। जिले के कारोबारियों को अब अमेरिका में ज्यादा सस्ते दामों पर सामान बेचने का मौका मिलेगा, जिससे रोजगार बढ़ेंगे। - सुमित राव, अध्यक्षयह राहत हमारे जैसे छोटे-मध्यम उद्योगों के लिए गेम-चेंजर है। पहले 25 प्रतिशत टैरिफ से मार्जिन घट रहा था, अब लागत बचत से हम उत्पादन बढ़ा सकेंगे और नए ऑर्डर हासिल करेंगे। - हरीश शर्मा, उद्योगपतिमहिलाओं के परिधान और होम फर्निशिंग निर्यात में बड़ा उछाल आएगा। 18 प्रतिशत टैरिफ से अमेरिकी रिटेल चेन हमसे ज्यादा खरीदेंगी। गुरुग्राम की महिलाओं को इससे रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। - कमल गुप्ता, उद्योगपतिइलेक्ट्रॉनिक्स और कंपोनेंट्स क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। ऊंचे टैरिफ से हम पिछड़ रहे थे, लेकिन अब प्रतिस्पर्धा आसान होगी। यह फैसला पूरे हरियाणा के उद्योग को गति देगा। - कपिल, उद्योगपति
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Feb 3, 2026, 12:17 PM
भारत का बजटः विकास और आर्थिक विकास के लिए एक रोडमैप

भारत का बजटः विकास और आर्थिक विकास के लिए एक रोडमैप

विस्तारFollow Usप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस बार पेश किया गया बजट देश को अगले 25 वर्षों तक दिशा प्रदान करने का काम करेगा। उन्होंने इसे देश को विकसित बनाने का एक रोड मैप बताया। एनडीए सांसदों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट देश के आम आदमी के सपनों को आर्थिक मजबूती देने वाला है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे इस बजट के बारे में जनता को जागरूक करें।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंऔद्योगिक संगठन फिक्की की महासचिव ज्योति विज ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने वह बजट पेश किया है जो भारत को दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनाएगा। उन्होंने कहा कि कई बार सरकारें जनता का समर्थन हासिल करने के लिए लोकलुभावन योजनाएं पेश करने की कोशिश करती हैं, लेकिन इस बजट में सरकार ने जनहितकारी योजनाओं में कोई कटौती किए बिना देश को एक 'विजन' देने वाला बजट पेश किया है। इसमें सरकार की 'निर्माण, निवेश और रोजगार' को बढ़ाने वाली सोच साफ दिखाई पड़ती है। यह देश को आर्थिक मजबूती देने का काम करेगा।विज्ञापनविज्ञापनज्योति विज ने कहा कि यह बजट भी ठीक उसी दिशा में है जिस दिशा में वर्तमान सरकार पिछले 11 वर्षों से ले जाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल के पहले दिन से ही 'ईज ऑफ डूइंग, ईज ऑफ लिविंग, स्टार्ट अप इंडिया और मेक इन इंडिया' की बात करते रहे हैं। उनकी सोच में हमेशा से महिला, युवा और किसान प्राथमिकता के साथ शामिल रहे हैं। इस बजट में भी इसी वर्ग को मजबूत करने की कोशिश की गई है। सरकार ने बजट के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के उपाय किए हैं तो अलग-अलग सेक्टर में भारी संख्या में रोजगार निर्माण कराने की कोशिश की गई है।उन्होंने कहा कि सरकार लगातार देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए राजकोषीय घाटे को कम करने की कोशिश करती रही है। इस बार बजट में इसे और कम करने का एक मजबूत संकल्प दिखाई दे रहा है। बड़ी बात यह है कि राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए जनहित की कल्याणकारी योजनाओं में कोई कटौती भी नहीं की गई है। निःसंदेह यह सरकार की मजबूत इरादों वाली छवि को मजबूत करता है।ज्योति विज का मानना है कि केंद्र सरकार ने लगातार मूलभूत ढांचे को मजबूत करने, सड़क-रेल और वायु परिवहन को मजबूत बनाने और देश के अंदर सभी प्रकार की वस्तुओं के निर्माण को बढ़ावा देने का काम किया है। कोरोना काल जैसी आपात स्थिति में भी यदि देश की सप्लाई चेन प्रभावित नहीं होने पाई तो इसके पीछे सरकार की इसी कोशिश को श्रेय दिया जा सकता है।सरकार ने देश के कृषि, चमड़ा, पशुपालन जैसे पारंपरिक व्यवसायों को आगे बढ़ाने का काम किया है, एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने का काम किया है तो साथ ही साथ क्लाउड स्टोरेज, चिप निर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देकर भविष्य के बाजार पर भी अपनी दृष्टि जमा कर रखी है। पर्यटन और स्वास्थ्य सेक्टर को सरकार ने जिस तरह प्राथमिकता से लिया है और इन सेक्टरों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने की सोच दिखाई है, उससे आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलना तय है।
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Feb 3, 2026, 12:13 PM
आई. ई. एस. और आई. टी. एस. अधिकारियों ने गुरुग्राम में निगमित प्रशासन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया

आई. ई. एस. और आई. टी. एस. अधिकारियों ने गुरुग्राम में निगमित प्रशासन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया

गुरुग्राम। भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान की ओर से आईएमटी मानेसर में आईईएस और आईटीएस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारतीय आर्थिक सेवा और भारतीय व्यापार सेवा के 21 अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण 2 से 6 फरवरी 2026 तक चलेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों की कॉर्पोरेट नियामकीय ढांचे, नीति-निर्माण तथा सुशासन संबंधी समझ को और अधिक सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को कॉर्पोरेट शासन से जुड़ी प्रक्रियाओं, नियामकीय तंत्र और वास्तविक मामलों की जानकारी दी गई। ब्यूरोऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
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Feb 3, 2026, 12:06 PM
मानवीय और विकास सहायता में कटौती से विनाशकारी परिणामों की उम्मीद

मानवीय और विकास सहायता में कटौती से विनाशकारी परिणामों की उम्मीद

नई दिल्ली:उच्च आय वाले राष्ट्रों द्वारा मानवीय एवं विकास सहायता राशि में कटौती के ‘‘भयावह’’ परिणाम हो सकते हैं और इसके चलते 2030 तक निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में 54 लाख बच्चों सहित 2.26 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। ‘द लांसेट ग्लोबल हेल्थ’ पत्रिका में प्रकाशित एक विश्लेषण में यह दावा किया गया है।इन देशों से आती है सबसे ज्यादा सहायतास्पेन के बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (आईएसग्लोबल) के शोधार्थियों के अनुसार, 2023 में कुल 250 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता में से लगभग 70 प्रतिशत योगदान अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, जापान और ब्रिटेन से आया था। इस राशि को सरकारी विकास सहायता कहा जाता है,2026 तक इतनी कटौती का अनुमानशोधार्थियों के एक समूह ने कहा कि 2024 लगभग तीन दशकों में ऐसा पहला साल था, जब जापान को छोड़कर प्रमुख दानदाता देशों ने अपनी वित्तीय सहायता में कमी की तथा 2025 के लिए भी कटौती की योजना बनाई। शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रारंभिक अनुमान प्रमुख दानदाता देशों द्वारा और भी कटौती किए जाने की ओर इशारा करते हैं और 2025 से 2026 तक इसमें कुल 11 प्रतिशत से अधिक की कमी किए जाने का अनुमान है।इन कामों में लगता है पैसाअध्ययन में पाया गया कि अधिक मात्रा में वित्तीय सहायता सभी कारणों से होने वाली मृत्यु की दर में 23 प्रतिशत और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 39 प्रतिशत की कमी से जुड़ी हुई है। उच्च आय वाले देशों से मिलने वाली धनराशि एचआईवी/एड्स, मलेरिया और उष्णकटिबंधीय रोगों सहित प्रमुख संक्रामक रोगों से संबंधित मृत्यु दर में भारी गिरावट तथा तपेदिक, दस्त संबंधी रोगों और प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में कमी से भी जुड़ी हुई है।मृत्यु दर को कम करने में निभाई बड़ी भूमिकाशोधकर्ताओं ने लिखा कि पिछले दो दशकों में निम्न और मध्यम आय वाले देशों में टाली जा सकने वाली मृत्यु दर को कम करने में सरकारी विकास सहायता (ओडीए) निधि ने निर्णायक भूमिका निभाई है, और इस सहायता राशि को अचानक रोके जाने से लाखों लोगों की मौत होने का खतरा है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य में दशकों में हासिल की गई प्रगति अत्यधिक प्रभावित होगी।2030 तक होंगी मौतेंजुलाई 2025 में ‘द लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में उल्लेख किया गया कि मानवीय और विकास सहायता के लिए दुनिया की सबसे बड़ी वित्त पोषण एजेंसी, यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) को भंग करने से 2030 तक दुनिया भर में 1.4 करोड़ टाली जा सकने वाली मौतें हो सकती हैं, जिनमें से एक तिहाई मौतें पांच साल से कम उम्र के बच्चों की हो सकती हैं।शोधकर्ताओं ने कहा कि हमारे अनुसार, अत्यधिक वित्तीय कटौती की स्थिति में 2030 तक सभी आयु वर्ग में 2.26 करोड़ मौतें होंगी जिनमें पांच साल से कम आयु के 54 लाख बच्चे भी शामिल हैं।
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Feb 3, 2026, 12:04 PM
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और इसके आर्थिक लाभों पर चर्चा की

भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और इसके आर्थिक लाभों पर चर्चा की

विस्तारFollow Usभारत-अमेरिका व्यापार समझौते और राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से टैरिफ को लेकर लिए गए एलान के बाद आज वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसका ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला है। हम इस बारे में संसद में बोलना चाहते थे, लेकिन हम सबने देखा वो भद्दा दृश्य, जिस तरह विपक्ष, राहुल गांधी जी के नेतृत्व में, उनके साथी- डीएमकी, समाजवादी पार्टी, उन्होंने कितना भद्दा व्यवहार संसद में किया। आसन तक पहुंचकर उनका अपमान किया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंयह ट्रेड डील देशवासियों के लिए शुभ संकेत लाती हैगोयल ने बताया कि इस वजह से हम संसद की जगह यहां जानकारी दे रहे हैं। पीएम मोदी ने अपनी मित्रता के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप के साथ ट्रेड डील तय की है। यह हमारे सभी पड़ोसी देश और जो देश हमारे साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, उनमें सबसे अच्छी डील हमें मिली है। यह देशवासियों के लिए शुभ संकेत लाती है। हम जानते हैं महीनों से हमारी नेगोशिएटिंग टीम कई दिनों से अमेरिका के अधिकारियों और मंत्रियों के साथ बात कर रही थी। कई जटिल विषय थे, कई समस्याएं थीं। भारत के ऊपर 50 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगा था। उद्योग जगत को , हमारे किसानों को सभी को तकलीफ हो रही थी। वस्त्र क्षेत्र के लिए रेट कम होने की जरूरत थी। कुछ दिन पहले तक विपक्ष के नेता भी हमसे यही पूछ रहे थे कि कब आयात शुल्क कम होंगे।विज्ञापनविज्ञापनभारत के संवदेशील क्षेत्रों को संरक्षित किया गयाउन्होंने कहा कि हमने देखा की आरसीईपी, जिसमें कांग्रेस ने देश को झोंक दिया था, चीन के साथ फ्री ट्रेड डील करने जैसा, उससे भी प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को बचाया। इसके बाद भारत में चारों और से राहत की सूचना आई थी। पीएम मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी के हितों को संभाला है। इस क्षेत्र में लोगों को उज्ज्वल भविष्य मिले और मौके मिलें, उसके लिए लगातार काम किया है। कभी उनके हितों के साथ पीएम ने समझौता नहीं होने दिया और अमेरिकी ट्रेड डील में भी भारत के संवेदनशील सेक्टर्स- कृषि और डेयरी को संरक्षित किया गया है।उद्योग मंत्री ने कहा कि मैं मानता हूं कि इस ट्रेड डील से हमारे एमएसएमई सेक्टर, इंजीनियरिंग सेक्टर को (एयरक्राफ्ट, पार्ट्स, आदि), हमारे टेक्सटाइल क्षेत्र, जेम-ज्वैलरी सेक्टर, लेदर सेक्टर, मरीन गुड्स सेक्टर को इस ट्रेड डील के माध्यम से मिलेंगे।संसद में बयान नहीं दें सके गोयल, विपक्ष पर बरसेइससे पहले खबर आई थी कि गोयल संसद में जानकारी दे सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक मुंबई से दिल्ली लौट रहे गोयल मंगलवार को संसद में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान देने वाले थे। लेकिन लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के कारण वे मंगलवार को संसद में बयान नहीं दे सके। गोयल ने अपनी प्रेस वार्ता में संसद में विपक्षीय दलों के हंगामे की कड़ी निंदा की।विपक्षी पार्टियों पर नकारात्मक सोच फैलाने का आरोपअमेरिका से जो हम इतने अवसर ला सकते हैं, राहुल गांधी जी को क्या इससे मिर्ची लगती है। उन्हें क्या हमारे युवाओं से कोई नाराजगी है। उन्हें देश की जनता को जवाब देना पड़ेगा। राहुल गांधी जी, उनकी पार्टी के नेता और उनके मित्र पार्टियों के नेता नकारात्मक सोच फैलाने का काम कर रहे हैं। वे भारत का उज्ज्वल भविष्य नहीं चाहते। वे राजनीतिक अराजकता फैलाने का काम करते हैं।स्पर्धा वाले देशों में भारत की रही सबसे अच्छी ट्रेड डीलगोयल ने कहा कि विपक्ष के एक नेता ने पूछा कि ट्रेड डील के बारे में राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले क्यों पोस्ट किया। मैं बता देना चाहता हूं कि जब टैरिफ अमेरिका ने लगाया तो टैरिफ कम करने की जानकारी भी वहीं से आएगी। इसकी जानकारी उनके राष्ट्रपति ट्रंप जी देंगे। मैं ट्रंप जी का भी धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने पीएम मोदी की मित्रता का सम्मान किया। उन्होंने पीएम मोदी को विश्व का, हमारी स्पर्धा वाले देशों में सबसे अच्छा ट्रेड डील दिया। आगे चलकर भारत-अमेरिका के संबंध और मजबूत हों, दोनों देशों के लोगों का सहयोग सुनिश्चित करें, उसकी शुभेच्छा दी।दोनों देश जारी करेंगे संयुक्त बयानउद्योग मंत्री ने कहा कि दोनों देश जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी करेंगे। जैसे ही समझौते पर अंतिम सहमति बन जाती है। तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, वैसे ही पूरी जानकारी साझा की जाएगी। मैं 140 करोड़ लोगों को आश्वासन देना चाहता हूं कि यह समझौता सभी भारतीयों को गौरवान्वित करेगा और देश के लोगों को नए मौके उपलब्ध कराएगा। हमारे संवेदनशील सेक्टर जैसे- कृषि और डेयरी सेक्टर को संरक्षित रखेगा और लेबर इंटेसिव सेक्टर और निर्यात आधारित सेक्टर की मदद करेगा।अमेरिकी ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कियाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। इसके तहत वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि उन्हें इस बात की खुशी है कि मेड इन इंडिया उत्पादों पर अब 18 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा। उन्होंने कहा कि इस शानदार घोषणा के लिए भारत की 140 करोड़ जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप को बहुत-बहुत धन्यवाद।विज्ञापनविज्ञापनसबसे विश्वसनीयHindi Newsवेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ेंकारोबार समाचारऔरUnion Budgetसे जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसेपर्सनल फाइनेंस, लाइवप्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्टबैंकिंग बीमाइन हिंदी,ऑनलाइन मार्केटन्यूज़, लेटेस्टकॉरपोरेट समाचारऔरबाज़ारआदि से संबंधितब्रेकिंग न्यूज़।रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करेंअमर उजाला हिंदी न्यूज़ APPअपने मोबाइल पर।
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Feb 3, 2026, 11:53 AM
रूस ने तेल खरीद रोकने के भारत के अनुरोध को अस्वीकार किया

रूस ने तेल खरीद रोकने के भारत के अनुरोध को अस्वीकार किया

Moscow:रूस ने स्पष्ट किया है कि उसे भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक संदेश प्राप्त नहीं हुआ है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा कि रूस भारत के साथ अपने संबंधों को हर संभव तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है। पेस्कोव की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल की खरीद रोकने और अमेरिका तथा संभावित रूप से वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, “इस मामले पर नई दिल्ली की ओर से हमें अभी तक कोई बयान नहीं मिला है।” उन्होंने कहा कि रूस अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान करता है, लेकिन भारत-रूस के बीच उन्नत रणनीतिक साझेदारी को भी उतना ही महत्व देता है।Kremlin spox Peskov does NOT confirm that India refused to buy Russian oil'We have not heard any statements from Delhi on this matter yet''We intend to further develop our bilateral relations with Delhi'pic.twitter.com/bpbWSIloHQ— RT (@RT_com)February 3, 2026पेस्कोव ने कहा, “हमारे लिए सबसे अहम बात भारत के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाना है और हम इन्हें हर संभव तरीके से विकसित करना चाहते हैं।”रूसी मीडिया के अनुसार, पेस्कोव ने कहा, “मॉस्को को अभी तक भारत द्वारा तेल खरीद रोकने को लेकर कोई बयान या सूचना नहीं मिली है।” यह बयान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद आया है, जिसके तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है। ट्रंप ने पिछले वर्ष भारत पर कुल 50 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिसमें रूसी ऊर्जा खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल था। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वह रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 88 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है।और ये भी पढ़ेयूक्रेन का रूसी बंदरगाह पर ड्रोन हमला: तेल टैंकों में लगी आग, 3 लोगों की मौतट्रंप के दावों पर डेनमार्क की दो टूक- सौदे की कोई गुंजाइश नहीं, संप्रभुता पर फैसला अटलट्रंप का वेनेजुएला पर कसा शिकंजाः समुद्र में प्रतिबंध तोड़ने की दी सजा, 7वां तेल टैंकर किया जब्तवर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस से दूरी बनाए जाने के चलते भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। हालांकि हाल के महीनों में भारत के रूसी तेल आयात में गिरावट दर्ज की गई है जबकि इराक और सऊदी अरब से आपूर्ति बढ़ी है। व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात दो वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि ओपेक देशों की हिस्सेदारी बढ़कर 53 प्रतिशत से अधिक हो गई। इसके बावजूद रूस मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। इसी बीच, क्रेमलिन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि न्यू स्टार्ट परमाणु संधि की समाप्ति के साथ दुनिया एक “खतरनाक दौर” की ओर बढ़ रही है। पेस्कोव ने कहा कि इस संधि के खत्म होने के बाद दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के पास हथियारों को सीमित करने वाला कोई मूलभूत दस्तावेज नहीं बचेगा।
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Feb 3, 2026, 11:52 AM
बिहार बजटः ₹3,47, ₹7 करोड़ का आवंटन 2026-27 के लिए

बिहार बजटः ₹3,47, ₹7 करोड़ का आवंटन 2026-27 के लिए

पटनाःबिहार विधानसभा में वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने वर्ष 2026-27 के लिए 3,47,589.76 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि एक तरफ जहां भारत विश्व की अर्थव्यवस्था में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिहार की आर्थिक विकास दर भी तेज गति से बढ़ने वाले राज्यों में शामिल है। वर्ष 2025-26 के लिए अनुमान है कि बिहार की अर्थव्यवस्था 14.9 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी। जानें बिहार के बजट की वो 20 बड़ी बातें जो राज्य के लोगों की किस्मत बदल देगी।1. शिक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकतावित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा किबजटमें शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए 68,216 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो भविष्य के बिहार की नींव है।2. स्वस्थ बिहार का संकल्पस्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 21,270 करोड़ दिए गए हैं, ताकि गांव से शहर तक बेहतर इलाज मिले।3. गांव के विकास पर फोकसग्रामीण विकास के लिए 23,701 करोड़ का बजट रखा गया है।4 एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन का गठन कर एक लाख करोड़ का निवेशबिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। राज्य की करीब 89 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है। राज्य सरकार के संकल्प अंतर्गत “बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन” का गठन कर शुरूआत में एक लाख करोड़ रूपये का निवेश किया जाना है। इसके अलावा बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने का रोडमैप तैयार किया गया है।5. मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना 3,000 कि0मी0 ग्रामीण पथों का निर्माणग्रामीण और शहरी सड़कों के लिए 18,716 करोड़ का आवंटन हुआ है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष)- इस योजना अंतर्गत राज्य के सभी जिलों में 100 या इससे अधिक की आबादी के छूटे हुए 13,815 बसावटों (कुल लंबाई 16,652 कि0मी0) में से अब तक कुल 6,083 बसावट के संपर्कता हेतु (कुल लंबाई 8,095 कि0मी0) पथों की स्वीकृति प्रदान करते हुए कुल 1,885 पथ (कुल लम्बाई 1,983 कि0मी0) का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शेष पथ निर्माण के विभिन्न चरणों में है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना अन्तर्गत कुल 3,000 किमी लम्बाई के ग्रामीण पथों का निर्माण कराने का लक्ष्य है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना अंतर्गत अब तक कुल 909 पुलों की स्वीकृति प्रदान करते हुए निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में है।6. बाढ़ प्रभावित परिवारों 680.17 करोड़ रुपये की सहायतावर्ष 2025 के बाढ़ के दौरान 9,71,678 बाढ़ प्रभावित परिवारों को आनुग्रहिक राहत के रूप में 7,000 रुपये प्रति परिवार की दर से लगभग 680.17 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान सीधे लाभुकों के बैंक खाते में किया गया। इसके अलावा राज्य की स्थानीय प्रकृति की आपदाओं यथा, सामूहिक सड़क दुर्घटना, पानी में डूबने से हुई दुर्घटना, वज्रपात, आँधी, तूफान आदि के मद्देनजर वर्ष 2025-26 में विभिन्न जिलों को 159.45 करोड़ रुपये उपलब्ध करायी गयी है।7. एक करोड़ 56 लाख से अधिक महिला सदस्यों को 10,000 रुपये की सहायतावित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादवने कहा कि न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर चलते हुए बिहार सरकार ने सात निश्चय-1 और सात निश्चय-2 के माध्यम से रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आधारभूत संरचना में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अब सात निश्चय-3 (वर्ष 2025-2030) के संकल्प के साथ बिहार को देश के अग्रणी विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 1 करोड़ 56 लाख से अधिक महिला सदस्यों को 10,000 रुपये की सहायता दी जा चुकी है। साथ ही, उनके व्यवसाय को और आगे बढ़ाने में मदद करने के लिए 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।8. 11,45,104 स्वयं सहायता समूहों के लिए 7,052 करोड़ का ऋण1.40 करोड़ से अधिक परिवारों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में ‘जीविका’ की ओर से कार्य किया जा रहा है। महिलाएं विभिन्न जीविकोपार्जन गतिविधियों को अपनाकर उद्यमी बन रही हैं।वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की संख्या 11,03,627 है, जबकि शहरी क्षेत्र में इसकी संख्या 41,477 है। इस प्रकार, वर्तमान में स्वयं सहायता समूहों की कुल संख्या 11,45,104 है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्रामीण क्षेत्र में 39,606 एवं शहरी क्षेत्र में 5,458 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इस प्रकार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 45,064 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 1.29 लाख स्वयं सहायता समूहों को बैंक द्वारा 7,052 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है।9. 23 से 24 घंटे बिजली की आपूर्ति,9,600 मेगावाट मांगऊर्जा क्षेत्रके लिए 18,737 करोड़ का प्रावधान है। राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ बिजली की मांग में भी लगातार वृद्धि हो रही है। वर्तमान में 23 से 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। बिजली की अधिकतम मांग वर्ष 2025-26 में 23 जुलाई 2025 को बढ़कर 8,752 मेगावाट हो गयी। वर्ष 2026-27 में राज्य की अधिकतम माँग 9,600 मेगावाट से अधिक होने का आकलन है।10. बिहार में 31,71,000 जीविका दीदीवित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बताया कि वर्तमान समय में बिहार में 31,71,000 जीविका दीदियों को लखपति दीदी योजनान्तर्गत लखपति घोषित किया जा चुका है। जल.जीवन.हरियाली अभियान अंतर्गत एक लाख से अधिक सार्वजनिक तालाबों, पोखरों, आहरों, पईनों और 38,085 सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है।11. शहरी क्षेत्रों में 4,18,394 आवासों की स्वीकृतिबिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि राष्ट्रीय मानक के अनुरूप राज्य में शहरीकरण को बढ़ावा देते के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। वर्तमान में राज्य में 19 नगर निगम, 89 नगर परिषद एवं 156 नगर पंचायत कार्यरत है, जिन्हें राष्ट्रीय मानक के अनुरूप विकसित करने एवं शहरों को सुन्दर बनाने के लिए सरकार कृत संकल्पित है।प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अब तक कुल 4,18,394 आवासों की स्वीकृति दी गयी है, जिसमें से 1,75,249 परिवारों को पक्का मकान हस्तगत कराया गया है।12. छात्रवृत्ति योजना से 53,52,858 छात्र-छात्राओं को लाभमुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना“, ‘पीएम यशस्वी’ एवं अन्य पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अब तक कुल 53,52,858 छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इसके अलावा “मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना“ के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 369.69 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गयी है। “मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना“ अंतर्गत वर्ष 2025-26 में अब तक 1,16,065 छात्र/छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। “मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना अन्तर्गत“ वित्तीय वर्ष 2025-26 में 73,785 छात्रों को लाभान्वित किया गया है।13. बिहार राज्य पत्रकार बीमा योजना में 664 पत्रकारों को लाभराज्य में कार्यरत संचार प्रतिनिधियों को समूह चिकित्सकीय एवं व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का वित्तीय लाभ एवं अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में 664 पत्रकारों को बीमा से आच्छादित किया गया है। पत्रकार पेंशन योजना- राज्य के 86 वरिष्ठ मीडिया कर्मी वर्तमान में पत्रकार पेंशन योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।14. दलित और आदिवासी कल्याणएससी के लिए ₹19,603 करोड़ और एसटी के लिए 1,648 करोड़ अलग से निर्धारित किये गये हैं।15. इन्फ्रास्ट्रक्चर बराबर रिकॉर्ड निवेशपूंजीगत व्यय 63,455 करोड़ रखा गया है, जो विकास का इंजन है।17. भूमि विवाद का समाधान, जमीन के रिकॉर्ड डिजिटल, सटीक भूमि मानचित्रणभूमि सर्वेक्षण को राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया गया है।जमाबंदी और भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। शुद्ध बिहार में 35 सीओआरएस स्टेशन स्थापित किये जा रहे हैं।18. हरित परिवहन क्रांति,इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसें500 से अधिक ग्रीन बस स्टॉप और 2000 चार्जिंग स्टेशन बनेंगे। जबकि सार्वजनिक परिवहन को सीएनजी और ईवी में परिवर्तित किया जा रहा है।19. पटना, राजगीर और वैशाली में पांच-सितारा होटलबिहार में पीपीपी मोड पर 2 पांच-सितारा होटल राजगीर (नालंदा) में, 1 पांच-सितारा होटल वैशाली में और 2 पांच-सितारा होटल पटना में निर्माण कार्य प्रक्रियाधीन है।20.सरकारी क्षेत्र में 44,088 पदों पर रोजगार का सृजनअप्रैल, 2025 से अब तक राज्याधीन विभिन्न पदों एवं सेवाओं में नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग को 19,213, बिहार कर्मचारी चयन आयोग को 37,076, बिहार तकनीकी सेवा आयोग को 47,098, बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद को 2,718, बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग को 2,212, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग को 2,843 एवं केन्द्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) को 30,815 अर्थात कुल 1,41,975 पदों की अधियाचना भेजी गयी। माह अप्रैल, 2025 से अब तक सरकारी क्षेत्र में 16,086 पुरुष, 22,627 महिला कुल 38,713 नियमित नियुक्ति तथा 5,375 संविदा नियोजन किया गया है। इस प्रकार, इन आयोगों-संस्थानों की ओर से अब तक कुल 44,088 सरकारी क्षेत्र में रोजगार का सृजन किया गया है।
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Feb 3, 2026, 11:51 AM
बिहार सरकार ने बजट प्रस्तुत किया 2026-27: रोजगार और औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित करें

बिहार सरकार ने बजट प्रस्तुत किया 2026-27: रोजगार और औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित करें

विस्तारFollow Usबिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दोपहर 2 बजे विधानसभा में बजट रखा। विधानसभा चुनाव के बाद यह नीतीश कुमार सरकार का पहला पूर्ण बजट है, जिसे रोजगार, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस बजट में उद्योग विभाग को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं और अब तक की प्रगति को सामने रखा गया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंरोजगार केंद्रित औद्योगिक नीति पर जोरसरकार ने बजट में स्पष्ट किया कि राज्य की औद्योगिक नीति का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक रोजगार सृजन है। इसी दिशा में सूक्ष्म और लघु उद्योगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय का गठन किया है, ताकि इस क्षेत्र को संस्थागत समर्थन मिल सके। इसके साथ ही उद्यमियों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बिहार उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग का गठन भी किया गया है।विज्ञापनविज्ञापनबिहार को टेक हब बनाने की दीर्घकालिक योजनासरकार ने बिहार को पूर्वी भारत के नए टेक हब के रूप में विकसित करने की योजना दोहराई है। इसके तहत डिफेन्स कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन पहलों से बिहार को एक ‘वैश्विक बैंक एंड-हब’ और ‘ग्लोबल वर्कप्लेस’ के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही स्टार्ट-अप और न्यू एज इकोनॉमी क्षेत्रों में राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार सृजन के लिए सक्षम बनाने की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।नई नीतियों से निवेश माहौल बनाने की कोशिशऔद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार वस्त्र एवं चमड़ा नीति (संशोधन), 2025 और बिहार बायोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन (संशोधन) नीति, 2025 को लागू किया गया है। इसके अलावा बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज, 2025 की घोषणा के जरिए राज्य में नए निवेश माहौल के निर्माण का दावा किया गया है।उद्यमी योजनाएं और वित्तीय सहायतामुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 209.88 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। गरीब परिवारों के आर्थिक विकास के उद्देश्य से बिहार लघु उद्यमी योजना के अंतर्गत 212.86 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है। कौशल विकास कार्यक्रम के तहत 6,225 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 2,060 आवेदकों को रोजगार भी मिला है।स्टार्ट-अप्स में महिलाओं की बढ़ती भागीदारीस्टार्ट-अप नीति के अंतर्गत राज्य के सभी जिलों से अब तक कुल 1,597 स्टार्ट-अप्स का चयन किया गया है। इनमें 235 स्टार्ट-अप्स महिलाओं द्वारा स्थापित हैं। इन सभी स्टार्ट-अप्स को कुल 84.96 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है, जिससे नवाचार और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।भूमि बैंक और औद्योगिक ढांचे का विस्तारआधारभूत संरचना विकास प्राधिकार के तहत भूमि बैंक रिवॉल्विंग फंड के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 1,550 करोड़ रुपये की राशि भू-अर्जन परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराई गई है। गयाजी के डोभी अंचल में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के अंतर्गत बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड की स्थापना की गई है। इसके साथ ही औद्योगिक विकास के लिए विभिन्न जिलों में 20,767 एकड़ भूमि के भू-अर्जन का प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 693 एकड़ सरकारी भूमि का हस्तांतरण शामिल है।निवेश और रोजगार के आंकड़ेबियाडा द्वारा वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 767 इकाइयों को 1,027 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इसमें 13,438 करोड़ रुपये के निवेश से लगभग 75,518 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। इसके अलावा अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर के तहत गया में आईएमसी के फेज-2 को विकसित किया जाएगा। फतुहा के पास मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और फिनटेक सिटी की स्थापना तथा सारण जिले के अमनौर में फार्मास्यूटिकल पार्क विकसित करने की योजना भी बजट में दोहराई गई है।केंद्र प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयनप्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना बिहार में प्रभावी रूप से लागू है और राज्य इस योजना में देश में अग्रणी स्थान पर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बैंकों ने 2,053 आवेदकों को 200.11 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 1.07 लाख आवेदकों को प्रशिक्षण, 17,647 को ऋण वितरण और 48,988 को टूल किट उपलब्ध कराई गई है।आगे की कौशल विकास योजनासरकार ने बताया कि कौशल विकास कार्यक्रम के तहत आने वाले समय में राज्य के 2,690 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन तैयार किया जा सके।पिछले बजट में उद्योग विभाग की स्थिति- फोटो : अमर उजालापिछले बजट में उद्योग विभाग के लिए सरकार ने कई बड़े एलान किए थे। इनमें पटना, मुजफ्फरपुर व पूर्णिया की तर्ज पर शेष प्रमंडलों में खादी मॉल का निर्माण और मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 39 हजार से अधिक लाभुकों को ₹2,900 करोड़ से अधिक की सहायता आदि शामिल हैं।
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Feb 3, 2026, 11:47 AM
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की घोषणा के बाद रुपया तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंचा

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की घोषणा के बाद रुपया तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंचा

बिजनेस डेस्कः अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को जबरदस्त मजबूती के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में रुपया 124 पैसे की छलांग लगाकर 90.25 रुपए प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। यह रुपए की पिछले तीन सालों की सबसे बड़ी एकदिनी मजबूती मानी जा रही है।करेंसी बाजार में यह तेजी भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील के ऐलान के बाद देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किए जाने की घोषणा से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसके चलते डॉलर के मुकाबले रुपए में चौतरफा खरीदारी देखी गई।फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, ट्रेड डील से भारत के निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे डॉलर की आवक बढ़ेगी और रुपए को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। इसके अलावा घरेलू शेयर बाजारों में आई तेज उछाल और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी रुपए को मजबूती दी।2025 में एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बना था रुपयासाल 2025 में रुपया करीब 5 प्रतिशत टूटकर एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन गया था। वहीं जनवरी 2026 में ही इसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और डॉलर की मजबूती ने रुपए को कमजोर किया था।और ये भी पढ़ेRupee Recovery: रुपए ने डॉलर को दी पटखनी! आज इतना हुआ मजबूतRupee Recovers: रिकॉर्ड लो लेवल से सुधरा रुपया, डॉलर के मुकाबले आज इतना हुआ मजबूतHistoric Fall in Rupee: डॉलर के सामने धराशायी रुपया, आज इतनी कमजोर हुई भारतीय करेंसीट्रेड डील से खत्म हुई अनिश्चिततारुपए में आई मौजूदा तेजी के पीछे भारत-अमेरिका के बीच हुआ ‘गिव एंड टेक’ ट्रेड समझौता अहम वजह माना जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि भारत अब रूस से तेल आयात कम करेगा और इसके बदले अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदेगा।इसके साथ ही भारत ने अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर (लगभग 45 लाख करोड़ रुपए) के एनर्जी, टेक्नोलॉजी और कृषि उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता भी जताई है। इस ऐलान से पिछले साल अगस्त में अमेरिकी टैरिफ के बाद बनी अनिश्चितता काफी हद तक खत्म हो गई है।89 के स्तर तक मजबूत हो सकता है रुपयामार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपए में यह मजबूती आगे भी जारी रह सकती है। एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, निर्यात बढ़ने की उम्मीद से डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपए की मांग मजबूत होगी। शॉर्ट टर्म में रुपया 89.50 से 89.00 के स्तर तक जा सकता है।वहीं कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी का कहना है कि टैरिफ में कटौती से रुपए के लिए मजबूती का रास्ता खुला है, हालांकि आगे की चाल इस बात पर भी निर्भर करेगी कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) किस स्तर पर बाजार में हस्तक्षेप करता है।
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Feb 3, 2026, 11:46 AM
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में क्रांति लाने के लिए तैयार

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में क्रांति लाने के लिए तैयार

India US Trade Deal:भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील पर मुहर लगने को इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से एक गेमचेंजर माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित 500 अरब डॉलर के कुल द्विपक्षीय व्यापार में इलैक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की हिस्सेदारी आने वाले वर्षों में करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. हालांकि, उद्योग जगत फिलहाल इस समझौते के विस्तृत प्रावधानों यानी फाइन प्रिंट का इंतजार कर रहा है, क्योंकि इन्हीं से यह साफ होगा कि टैरिफ, नॉन-टैरिफ बैरियर, सप्लाई चेन और निवेश से जुड़े नियम व्यवहार में किस तरह लागू होंगे. कई महीनों तक चली गहन बातचीत के बाद सोमवार देर रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ट्रेड डील का औपचारिक ऐलान किया. उन्होंने कहा कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा और भारत पर लगाए गए कुल 50 प्रतिशत के भारी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है, खासतौर पर उन सेक्टरों को जो पिछले करीब दो वर्षों से ऊंचे शुल्क की वजह से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे. इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग भी इन्हीं क्षेत्रों में शामिल है, जहां लागत बढ़ने से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की स्थिति कमजोर हो गई थी. इलैक्ट्रोनिक्स सेक्टर की बदलेगी तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में भारत का इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग तेजी से उभरा है और यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएलआई स्कीम’ का अहम स्तंभ बन चुका है. स्मार्टफोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर असेंबली और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में भारत की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 38 अरब डॉलर का इलैक्ट्रॉनिक्स निर्यात किया, जिसमें अमेरिका भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा. टैरिफ में कटौती के बाद भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना और वहां की सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनना कहीं आसान हो सकता है. यह ट्रेड डील ऐसे समय पर सामने आई है जब भारत एक व्यापक वैश्विक व्यापार रणनीति पर काम कर रहा है.बजट2026 में जहां घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, वहीं भारत यूके, यूरोपीय यूनियन और अन्य देशों के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ा रहा है. अमेरिका के साथ यह समझौता भारत को वैश्विक वैल्यू चेन में और गहराई से जोड़ सकता है, खासकर इलैक्ट्रॉनिक्स, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन रेजिलिएंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में. अमेरिकी उद्योग जगत और थिंक टैंक्स ने भी इस समझौते का खुलकर स्वागत किया है. यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष और सीईओ सुजैन क्लार्क ने कहा कि अमेरिकी और भारतीय व्यवसाय लंबे समय से इस तरह के कदम का इंतजार कर रहे थे और शुल्क व गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने की घोषणा से दोनों देशों की कंपनियों और श्रमिकों को फायदा होगा. उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदीके साथ-साथ दोनों देशों के अधिकारियों की भूमिका की भी सराहना की. बनेंगे बड़े अवसर वहीं एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि वेंडी कटलर ने कहा कि यह घोषणा भारतीय भागीदारों के लिए निश्चित रूप से राहत लेकर आई है, क्योंकि भारत को किसी भी अन्य देश की तुलना में ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ रहा था. उनके मुताबिक, यह समझौता अमेरिका और भारत को महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन लचीलेपन जैसे अहम मुद्दों पर मिलकर काम करने का रास्ता खोलेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल समझौते का ऐलान सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हुआ है और इसके विस्तृत प्रावधान सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और अन्य सेक्टरों को इससे कितनी और किस तरह की वास्तविक बढ़त मिलेगी. ये भी पढ़ें: वो 4 बड़ी शर्तें! जिसके बाद भारत के साथ ट्रेड डील पर राष्ट्रपति ट्रंप ने लगाई मुहर
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Feb 3, 2026, 11:40 AM
टेस्ला ने विनिमय प्रोत्साहन और किफायती ई. एम. आई. विकल्पों के साथ भारत में बिक्री बढ़ाने के लिए नई योजनाओं का अनावरण किया

टेस्ला ने विनिमय प्रोत्साहन और किफायती ई. एम. आई. विकल्पों के साथ भारत में बिक्री बढ़ाने के लिए नई योजनाओं का अनावरण किया

इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी टेस्ला ने मंगलवार को कहा कि इंडिया में कमजोर बिक्री को बढ़ाने के लिए उसने कई नई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें EMI स्कीम भी शामिल है. पेट्रोल और डीजल कारों से इलेक्ट्रिक कार पर शिफ्ट होने वाले ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी ₹3 लाख तक का एक्सचेंज इंसेंटिव दे रही है. इसके अलावा, अब ग्राहक Tesla Model Y को सिर्फ ₹49,000 की EMI पर खरीद सकते हैं. इसके लिए डाउन पेमेंट केवल ₹6 लाख रखा गया है. इससे टेस्ला प्रीमियम इलेक्ट्रिक कार को खरीदना आसान हो सकता है. टेस्ला ने पिछले साल सितंबर में Model Y की डिलीवरी शुरू की थी. कंपनी के बयान के अनुसार, Tesla Model Y पर शिफ्ट करने से ग्राहकों को कम फ्यूल खर्च और मेंटेनेंस खर्च की वजह से हर महीने ₹20,000 तक की बचत हो सकती है. इससे EV की लंबी अवधि में कम लागत और कम कुल ओनरशिप खर्च का फायदा मिलता है. कंपनी ने यह भी कहा कि मिड-सेगमेंट SUV और सेडान कार के मालिक अब ₹29,000 महीने से शुरू होने वाली ओनरशिप लागत के साथ टेस्ला कार खरीद सकते हैं. FADA के EV बिक्री आंकड़ों के मुताबिक, टेस्ला ने पिछले साल कुल 225 यूनिट्स की बिक्री की है. पिछले साल इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की रिटेल बिक्री बढ़कर 1,76,817 यूनिट्स हो गई, जो 2024 कैलेंडर ईयर में 99,875 यूनिट्स के मुकाबले 77 प्रतिशत ज्यादा है. फिलहाल टेस्ला भारत में बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही है. भारत में Tesla Model Y दो वेरिएंट्स में आती है. रियर-व्हील-ड्राइव वेरिएंट की रेंज 500 किलोमीटर है और इसकी कीमत ₹59.89 लाख (एक्स-शोरूम) है. वहीं, लॉन्ग-रेंज रियर-व्हील-ड्राइव वेरिएंट 661 किलोमीटर की रेंज देता है और इसकी कीमत ₹67.89 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है. स्विच एंड सेव प्रोग्राम लॉन्च करके Tesla भारत के उभरते EV बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है और इलेक्ट्रिक वाहनों को पारंपरिक पेट्रोल-डीजल (ICE) कारों के मुकाबले किफायती विकल्प के रूप में पेश करने का लक्ष्य रखती है. ये भी पढ़ें- इन 2 कारों की जोड़ी ने मचाई तबाही, 42 हजार से ज्यादा ग्राहक समेट ले गईं गाड़ियां
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Feb 3, 2026, 11:35 AM
भारत ने अमेरिकी शुल्क में कमी का स्वागत किया, व्यापार वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

भारत ने अमेरिकी शुल्क में कमी का स्वागत किया, व्यापार वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

विस्तारFollow Usअमेरिका द्वारा टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद भारतीय निर्यात को गति मिलेगी और कारोबार बढ़ेगा। इससे निर्यातकों को सीधा फायदा होगा और व्यापार माहौल मजबूत होगा।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंखबर अपडेट की जा रही है...
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Feb 3, 2026, 11:33 AM
सोना बनाम चांदीः 10,000 रुपये के लिए एक बुद्धिमान निवेश निर्णय

सोना बनाम चांदीः 10,000 रुपये के लिए एक बुद्धिमान निवेश निर्णय

सोने और चांदी की कीमत में बीते कुछ समय से हैरान करने वाला उतार-चढ़ाव जारी है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना काफी चुनौतीपूर्ण है कि वह किसमें निवेश करें। सोना या चांदी। जैसा कि आप जानते हैं अभी चंद रोज पहले ही चांदी 4,00,000 रुपये के लेवल को पार कर गई थी। ऐसे में समझदारी भरा फैसला लेना जरूरी है। उदाहरण के लिए अगर आपके पास ₹10,000 की राशि है और आप तय नहीं कर पा रहे हैं कि सोने में निवेश करें या चांदी में, तो यह फैसला आपकी निवेश रणनीति, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश अवधि पर निर्भर करता है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि किस विकल्प में कितनी समझदारी है। जहां तक सोने में निवेश की बात करें तो सोना लंबे समय से निवेशकों के लिए सेफ हेवन माना जाता रहा है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव चांदी की तुलना में कम होता है, जिससे यह लंबी अवधि में पूंजी संरक्षण के लिए बेहतर विकल्प बनता है। ₹10,000 में निवेश के हैं ये ऑप्शन किसके लिए है सही अगर आप कम जोखिम पसंद करने वाले निवेशकों में से हैं और लंबे समय के निवेश की योजना बनाने वालों में से हैं तो आप इनका चुनाव कर सकते हैं। चांदी की कीमत सोने की तुलना में कम होने के कारण इसमें ज्यादा मात्रा खरीदी जा सकती है। साथ ही सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों में बढ़ती औद्योगिक मांग इसकी कीमतों को सपोर्ट देती है। तेजी के दौर में चांदी बेहतर रिटर्न दे सकती है। ₹10,000 में निवेश के हैं ये विकल्प किसके लिए है ये सहीअगर आप थोड़ा अधिक जोखिम उठाने वाले निवेशकों में से हैं और मध्यम अवधि में बेहतर मुनाफे की तलाश करने वालों में से हैं तो इनमें आप निवेश कर सकते हैं। तो आखिर ₹10,000 का निवेश किसमें करना है समझदारी? इसके लिए आप निम्न बातों को गौर करें: अगर आप बैंलेस चाहते हैं तो इसका सबसे संतुलित तरीका यह भी है कि ₹5,000 सोने में और ₹5,000 चांदी में निवेश करें। एक्सपर्ट की सलाह यह है कि फिजिकल सोना या चांदी खरीदने की बजाय ETF या डिजिटल गोल्ड/सिल्वर में निवेश करने से आपका मेकिंग चार्ज से बचाव होता है। स्टोरेज की चिंता नहीं रहती। खरीद-बिक्री ज्यादा आसान रहती है। यह स्ट्रैटेजी छोटे निवेशकों के लिए ज्यादा व्यावहारिक मानी जाती है। Latest Business News
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Feb 3, 2026, 11:22 AM
उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1: भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के लिए एक नया युग

उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1: भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के लिए एक नया युग

राजधानी लखनऊ में आज, 3 फरवरी को वैश्विक निवेशकों और अद्यमियों के महासंगम उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 का आयोजन हुआ। होटल ताज में कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर राज्य सरकार के साथ 11 कंपनियों ने एमओयू किया है। यूपी फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश ने एक पिछड़े राज्य की अपनी छवि बदल दी है। यूपी फार्मा कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि राज्य एक रेवेन्यू-सरप्लस अर्थव्यवस्था में बदल गया है। हमने अपना पहला इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित किया, जिसने 20,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया। हमें कई सुधार लागू करने पड़े और महत्वपूर्ण बदलाव लाने पड़े, और आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारे पास लैंड बैंक की सुविधा भी है। उत्तर प्रदेश अब पिछड़ा राज्य नहीं रहा; यह अब एक रेवेन्यू-सरप्लस राज्य है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि 2012 और 2017 के बीच, राज्य में 900 से ज्यादा दंगे हुए। उन्होंने दावा किया कि उस समय हर कोई अनौपचारिक 'गुंडा टैक्स' देता था। ऐसा कोई शहर नहीं था जिसने कर्फ्यू का दौर न देखा हो। ऐसा कोई उद्यमी, डॉक्टर या बिजनेसमैन नहीं होगा जिसने उस दौरान 'गुंडा टैक्स' न दिया हो। ऐसी स्थिति में, जब प्रधानमंत्री और हमारी पार्टी ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी, तो हमें इस चुनौती का सामना करना था और हर नागरिक में विश्वास भी जगाना था। सीएम योगी ने आगे कहा, हमने जीरो टॉलरेंस का फैसला किया, और जीरो टॉलरेंस सभी पर समान रूप से लागू होगा। अगर हमारा अपना कोई व्यक्ति गलत करता है, तो उस पर भी वही कानून लागू होगा जो किसी माफिया या अपराधी पर लागू होता है। बीते 9 सालों में बड़े सकारात्मक बदलाव हुए हैं। सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है। कोई भी शांति भंग करने, अराजकता या फिरौती की बात नहीं करता। कोई दंगे नहीं होते, कोई गड़बड़ी नहीं होती, कोई जबरन वसूली नहीं होती। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर लगे टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के फैसले का सीएम योगी ने स्वागत किया है। योगी आदित्यनाथ ने भारतीय सामानों पर टैरिफ कम करने और भारत को एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में पहचानने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद दिया है।
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Feb 3, 2026, 11:15 AM
डिजिटल भुगतान कंपनी के लाभ के बाद मोबिक्विक के शेयरों में 20 प्रतिशत की वृद्धि

डिजिटल भुगतान कंपनी के लाभ के बाद मोबिक्विक के शेयरों में 20 प्रतिशत की वृद्धि

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी मोबिक्विक के शेयर रॉकेट सा उड़ गए हैं। मोबिक्विक के शेयर मंगलवार को BSE में 20 पर्सेंट उछलकर 238.20 रुपये पर बंद हुए हैं। मोबिक्विक घाटे से मुनाफे में आ गई है, इस टर्नराउन्ड की वजह से कंपनी के शेयरों में तेज उछाल आया है। मोबिक्विक को चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में 4 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है। पेमेंट प्रोसेसिंग चार्जेज में कटौती, लेडिंग ऑपरेशनल बिजनेस और कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन की वजह से कंपनी को मुनाफा हुआ है। मोबिक्विक की पैरेंट कंपनी वन मोबिक्विक सिस्टम्स लिमिटेड है। 55 करोड़ रुपये का हुआ था घाटाडिजिटल पेमेंट्स कंपनी मोबिक्विक (Mobikwik) को पिछले वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में 55.2 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मोबिक्विक का रेवेन्यू सालाना आधार पर 7.4 पर्सेंट बढ़कर 289 करोड़ रुपये रहा है। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी का रेवेन्यू 269.4 करोड़ रुपये था। दिसंबर 2025 तिमाही में मोबिक्विक का इबिट्डा 6.8 करोड़ रुपये रहा है, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी का इबिट्डा लॉस 47.6 करोड़ रुपये था। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में मोबिक्विक का इबिट्डा मार्जिन 2.4 पर्सेंट रहा। ऑल टाइम हाई पर पहुंची पेमेंट्स ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यूमोबिक्विक (Mobikwik) ने बताया है कि उसकी पेमेंट्स ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) अपने ऑल-टाइम हाई 48,100 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। साथ ही, प्लेटफॉर्म पर UPI ट्रांजैक्शन सालाना आधार पर 3.2 गुना उछल गया है। एक साल में 41% से ज्यादा टूट गए हैं मोबिक्विक के शेयरडिजिटल पेमेंट्स कंपनी मोबिक्विक के शेयर पिछले एक साल में 41 पर्सेंट से अधिक लुढ़क गए हैं। मोबिक्विक के शेयर 3 फरवरी 2025 को 406.75 रुपये पर थे। कंपनी के शेयर 3 फरवरी 2026 को BSE में 238.20 रुपये पर बंद हुए हैं। कंपनी के शेयरों का 52 हफ्ते का हाई लेवल 418.50 रुपये है। वहीं, कंपनी के शेयरों का 52 हफ्ते का लो लेवल 190.95 रुपये है। मोबिक्विक का आईपीओ दांव लगाने के लिए 11 दिसंबर 2024 को खुला था और यह 13 दिसंबर तक ओपन रहा। आईपीओ में कंपनी के शेयर का दाम 279 रुपये था।
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Feb 3, 2026, 10:51 AM
बिहार बजट 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि को बढ़ावा देना

बिहार बजट 2026: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि को बढ़ावा देना

विस्तारFollow UsBihar Budget 2026:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद 3 फरवरी को वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राज्य का नया बजट पेश किया। इस बजट में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है और इसी को ध्यान में रखकर योजनाओं को और विस्तार दिया गया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंकृषि प्रधान राज्य बिहार और रिकॉर्ड उत्पादनबिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां करीब 89 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और लगभग 76 प्रतिशत लोग कृषि और उससे जुड़े कार्यों से अपनी आजीविका चलाते हैं। कृषि रोडमैप के सफल क्रियान्वयन के कारण वर्ष 2005 से अब तक खाद्यान्न उत्पादन में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम आकलन के अनुसार राज्य में कुल 326.62 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ, जो अब तक का सबसे अधिक है।विज्ञापनविज्ञापनवर्ष 2024-25 में देश में बिहार का स्थान मखाना और लीची उत्पादन में पहला, मक्का में दूसरा, शहद में चौथा, चावल में पांचवां और गेहूं उत्पादन में छठा रहा है। देश में उत्पादित मखाना का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार में होता है। किसानों को समर्थन देने और मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया है।डिजिटल कृषि और जलवायु अनुकूल खेती पर जोरकृषि और संबद्ध क्षेत्रों के डेटा को एकीकृत करने के लिए कृषि विभाग के तहत डिजिटल कृषि निदेशालय का गठन किया गया है। राज्य के सभी 38 जिलों में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत 190 गांवों को जलवायु अनुकूल मॉडल कृषि गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत 3 लाख मिट्टी नमूनों का विश्लेषण कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए गए हैं। इसके अलावा, चालू वित्तीय वर्ष में 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।मशरूम, भंडारण और बाजार व्यवस्था में सुधारबिहार देश में मशरूम उत्पादन में अग्रणी है और वर्तमान में यहां 44,000 मीट्रिक टन मशरूम का उत्पादन हो रहा है। किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए भंडारण, अनुदानित दर पर गोदाम और कोल्ड स्टोरेज, मूल्य संवर्धन, विपणन और प्रसंस्करण को प्राथमिकता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर किसानों को 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि यांत्रिकरण को और मजबूत करने के लिए एआई युक्त यांत्रिक कृषि मिशन के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है।बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन और स्टार्टअप पर फोकसराज्य सरकार ने बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत शुरुआत में 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है। इसके तहत छंटाई और ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन चैम्बर्स, गोदाम और प्रोसेसिंग सेंटर बनाए जाएंगे। सोनाचूर, मोकरी, कतरनी और मर्चा जैसी सुगंधित चावल की किस्मों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित होंगी। श्री अन्न का उत्पादन दोगुना करने और स्ट्रॉबेरी व ड्रैगन फ्रूट जैसे फलों के उत्पादन व निर्यात को बढ़ावा देने की भी योजना है। बिहार को कृषि स्टार्टअप का हब बनाने और GI टैग उत्पादों के लिए समर्पित बाजार देने के उद्देश्य से बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन की प्रक्रिया चल रही है।कृषि बाजार, ई-नाम और ग्रामीण हाटराज्य के 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इनमें से 20 बाजार प्रांगण ई-नाम से जुड़ चुके हैं और 34 को जोड़ा जाना है। ग्रामीण हाटों के विकास के लिए पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।किसान सम्मान निधि और उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्यप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि शुरू की जाएगी, जिसके तहत किसानों को सालाना 3,000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत दलहन, तेलहन, मक्का, फल और सब्जियों के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। दलहन उत्पादन को 3.93 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 11.27 लाख मीट्रिक टन, तेलहन को 1.24 से 4.81 लाख मीट्रिक टन, मक्का को लगभग दोगुना 133.05 लाख मीट्रिक टन, फलों और सब्जियों के उत्पादन को भी दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है।डेयरी, मत्स्य और पशुपालन में तेजीराज्य में दुग्ध उत्पादन 133.98 लाख मीट्रिक टन, अंडा 378.39 करोड़, मांस 4.21 लाख मीट्रिक टन और मत्स्य उत्पादन 9.59 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। बिहार देश में अंडा उत्पादन में पहला, मत्स्य में चौथा, दुग्ध में छठा और मांस में नौवां स्थान रखता है। गोट सीमेन स्टेशन, वन हेल्थ प्लेटफॉर्म, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड मशीन और बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम 2025 जैसे कदमों से पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है।सहकारिता और FPO से किसानों को बाजार से जोड़ने की पहलराज्य के 38 जिलों के 534 प्रखंडों में प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियां बनाई गई हैं। सब्जी प्रसंस्करण, मेगा फूड पार्क, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और तरकारी आउटलेट्स के जरिए किसानों को बेहतर दाम दिलाने की योजना है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों में 100 पंचायत स्तरीय FPO बनाए गए हैं, जिनके जरिए मखाना, मशरूम, चूड़ा और आंवला जैसे उत्पादों का व्यवसाय शुरू हो चुका है।सिंचाई और जल संसाधन पर बड़ा फोकस“जल-जीवन-हरियाली अभियान” के तहत भूजल संरक्षण, तालाब और आहर-पईन के विकास पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत 35,000 नलकूप लगाए गए हैं। “हर खेत तक सिंचाई का पानी” योजना के तहत हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बहाल की गई है। कोशी-मेची लिंक परियोजना, पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली, बरनार जलाशय, गंगा जल आपूर्ति योजना और सोन नदी आधारित पेयजल परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पश्चिमी कोसी नहर परियोजना को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बाढ़ से सुरक्षा के लिए 2026 से पहले 216 कटाव निरोधक और तटबंध सुरक्षा योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, विश्व बैंक की सहायता से बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना (BWSIMP) के लिए 4,415 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है।किसानों को मिला था बड़ा तोहफाकिसानों को मिला था बड़ा तोहफा- फोटो : अमर उजालाबिहार सरकार ने 2025 के बजट में किसानों के लिए कई बड़े ऐलान किए थे। हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए थे। चतुर्थ कृषि रोडमैप के तहत बिहार मिलेट मिशन का गठन किया गया। आम, मशरूम, टमाटर, आलू और प्याज के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आम, लीची, मखाना और मशरूम के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया।
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