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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 02:20 PM
धनत्रयोदशी 2026: समृद्धि और स्वास्थ्य के आनंदमय उत्सव की शुरुआत

धनत्रयोदशी 2026: समृद्धि और स्वास्थ्य के आनंदमय उत्सव की शुरुआत

Dhanteras 2026: दीपोत्सव का उल्लास शुरू हो गया है। समृद्धि और आरोग्य का पर्व धनतेरस शुक्रवार को परंपरागत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी शनिवार को मनाई जाएगी। इस बार धनतेरस पर खरीदारी के लिए दो दिन का शुभ संयोग बन रहा है। पं. शरदचंद्र मिश्र के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी शुक्रवार को सुबह 11 बजकर सात मिनट के बाद शुरू होकर शनिवार को सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसे में शुक्रवार को 11:07 बजे के बाद से शनिवार को सुबह 10:43 बजे तक खरीदारी की जा सकती है। धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर लोग स्वस्थ और निरोगी जीवन की कामना करते हैं। मान्यता है कि धनतेरस (Dhanteras 2026) पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि प्राणियों के प्राण हरते समय क्या उन्हें दुख होता है। इस पर दूतों ने एक नवविवाहित राजकुमार की मृत्यु का प्रसंग सुनाया। विवाह के चौथे दिन ही राजकुमार के प्राण लेने के दौरान परिवार का करुण विलाप सुनकर वे भी विचलित हो गए थे। दूतों ने यमराज से अकाल मृत्यु से बचने का उपाय पूछा। इस पर यमराज ने बताया कि धनतेरस के दिन उनके निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु व नरक का भय दूर होता है। तभी से धनतेरस पर यमदीप जलाने की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी, इसे रूप चतुर्दशी और छोटी दीपावली भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:31 बजे होगा। त्रयोदशी तिथि सुबह 10:43 बजे तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। चित्रा नक्षत्र शाम 6:20 बजे तक रहेगा, इसके बाद स्वाती नक्षत्र और प्रीति योग का प्रभाव रहेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि प्रातःकाल अभ्यंग स्नान करने से नरक की यातना से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। नरक से मुक्ति की कामना से नरक चतुर्दशी की शाम प्रदोष काल में चार बत्तियों वाला दीपक जलाने का विधान है। इस दिन मंदिर, रसोईघर, घर के मुख्य द्वार, आंगन, बगीचे, देववृक्षों के नीचे तथा नदी और सरोवरों के किनारे दीपक जलाए जाते हैं। यम तर्पण और दीपदान कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 11:35 AM
सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल ने पेंग गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया

सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल ने पेंग गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया

ज्योतिर्मठ।राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय तपोवन की ओर से पेंग गांव में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। सड़क से करीब पांच किमी पैदल दूरी पर स्थित गांव में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. कैलाश चंद्र ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कर उचित दवा और परामर्श दिया। शिविर में ग्रामीणों को योग, स्वस्थ दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी गई। इस मौके पर ग्राम प्रधान दीपक सिंह राणा, योग अनुदेशक नंदन सिंह राणा, नंदी देवी, प्रदीप डुंगरियाल, विनीता पैन्यूली, भगवती देवी आदि मौजूद रहे। संवाद
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 11:15 AM
विशेषज्ञों ने अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रकृति के साथ आधुनिकता को संतुलित करने के महत्व पर जोर दिया

विशेषज्ञों ने अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रकृति के साथ आधुनिकता को संतुलित करने के महत्व पर जोर दिया

लखनऊ। खुनखुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का बृहस्पतिवार को समापन हुआ। मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में मनुष्य प्रकृति से दूर होता जा रहा है। यह बीमारियों का बड़ा कारण है। स्वस्थ रहने के लिए सात्विक भोजन, नियमित व्यायाम और व्यसनों से दूरी जरूरी है।उन्होंने कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ मानवीय मूल्यों व सामाजिक उत्तरदायित्व को भी महत्व देना होगा। उन्होंने छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।विज्ञापनसमापन सत्र में आईआईटीआर के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. वीपी शर्मा ने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सुधीर मेहरोत्रा ने कहा कि जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली से जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है।विज्ञापनइस दौरान शोधपत्र और पोस्टर प्रस्तुति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्राचार्या प्रो. अंशु केडिया सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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Nov 5, 2026, 10:59 AM
सुबह की कठोरता को नजरअंदाज न करेंः गठिया के शुरुआती संकेतों का पता चला

सुबह की कठोरता को नजरअंदाज न करेंः गठिया के शुरुआती संकेतों का पता चला

सुबह सोकर उठने के बाद हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होना, उंगलियों को मोड़ने में परेशानी होना या जोड़ों में दर्द रहना आर्थराइटिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। आमतौर पर लोग इसे उम्र बढ़ने, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार ऐसा होना जोड़ों से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में निदेशक एवं प्रमुख, ऑर्थोपेडिक्स, डॉक्टर एच.एस. छाबड़ा बता रहे हैं कि किन संकेतों को आपको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। डॉक्टर एच.एस. छाबड़ा कहते हैं कि आर्थराइटिस कई प्रकार का होता है, जिसमें रूमेटाइड आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस प्रमुख हैं। रूमेटाइड आर्थराइटिस में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है, जिससे उनमें सूजन, दर्द और अकड़न होने लगती है। इसमें सुबह उठने के बाद अकड़न आमतौर पर 30 मिनट से अधिक समय तक रह सकती है। : वहीं, ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है, जिससे चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने या कोई सामान उठाने पर दर्द हो सकता है। इसके अलावा जोड़ों में सूजन, गर्माहट, लालिमा, उंगलियों की पकड़ कमजोर होना और घुटनों में दर्द भी इसके लक्षण हो सकते हैं। डॉक्टर के अनुसार, सुबह उठने पर हाथ-पैरों या जोड़ों में लंबे समय तक रहने वाली अकड़न, सूजन, लालिमा और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए । अगर आपको यह समस्या कई दिनों तक रहे तो फौरन डॉक्टर से मिले डॉक्टर कहते हैं कि अगर ये परेशानियां लगातार बनी रहती हैं या धीरे-धीरे बढ़ रही हैं तो इन्हें सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज करने की बजाय डॉक्टर से मिलें। समय पर डॉक्टर से परामर्श लेकर जरूरी जांच कराना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही नियमित हल्का व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित खानपान और जोड़ों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से बचना भी फायदेमंद हो सकता है।
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 08:44 AM
धनत्रयोदशः धन और स्वास्थ्य का त्योहार

धनत्रयोदशः धन और स्वास्थ्य का त्योहार

स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है। इसका संदेश सनातन संस्कृति में मिलता है। इसलिए धनतेरस (Dhanteras 2026) के दिन कीमती धातुओं के साथ-साथ आरोग्य रूपी धन भी अनमोल उपहार है। दीपावली के पांच-दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। धनतेरस का नाम धन और त्रयोदशी शब्दों से मिलकर बना है। सनातन परंपरा के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। इसलिए धनतेरस केवल सोना, चांदी, बर्तन और अन्य कीमती वस्तुओं की खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य और निरोगी जीवन के महत्व को समझने का भी विशेष अवसर है। आज के आधुनिक दौर में जहां लोग भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-दौलत को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानने लगे हैं, वहीं भारतीय संस्कृति का यह पर्व याद दिलाता है कि मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी उसका स्वास्थ्य है। स्वस्थ शरीर के बिना धन-दौलत और तमाम सुख-सुविधाओं का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। यही कारण है कि भगवान धन्वंतरि की पूजा को आरोग्य, दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना से भी जोड़कर देखा जाता है। धनतेरस के दिन लोग शुभ मुहूर्त में सोना, चांदी, बर्तन और अन्य वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। हालांकि, इस पर्व का एक गहरा संदेश यह भी है कि धन के साथ स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जाए। बीमारियों से मुक्त शरीर और स्वस्थ मन ही वास्तविक संपत्ति है। भगवान धन्वंतरि की आराधना हमें नियमित दिनचर्या, संतुलित खानपान, स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा देती है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सी.एन. पांडे के अनुसार, भगवान धन्वंतरि से जुड़ी आयुर्वेद परंपरा का मूल उद्देश्य मनुष्य को स्वस्थ रखना और रोगों से बचाव करना है। आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को शरीर के प्रमुख दोष माना गया है। इनके संतुलन को स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। इसमें ऋतुचर्या, दिनचर्या, संतुलित आहार, योग और प्राकृतिक जीवनशैली को विशेष महत्व दिया गया है। आज जब बदलती जीवनशैली के कारण मधुमेह, रक्तचाप, मोटापा और तनाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, तब आयुर्वेद की पारंपरिक जीवनशैली का महत्व और भी बढ़ जाता है। सहजौली गांव के आचार्य पंडित मनोज चौबे ने बताया कि भारतीय चिकित्सा परंपरा के प्राचीन ग्रंथों में भगवान धन्वंतरि का विशेष स्थान है। सुश्रुत संहिता में काशीराज दिवोदास को धन्वंतरि के रूप में वर्णित किया गया है। महर्षि सुश्रुत ने उन्हें अपना गुरु मानते हुए शल्य चिकित्सा संबंधी ज्ञान प्राप्त किया था। सुश्रुत संहिता को प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा का महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसके अलावा चरक संहिता, काश्यप संहिता और धन्वंतरि निघंटु जैसे ग्रंथ भी भारतीय चिकित्सा एवं औषधीय ज्ञान की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं। धन्वंतरि निघंटु में औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों से संबंधित जानकारियां संकलित हैं। देखा जाए तो धनतेरस का पर्व हमें केवल धन अर्जित करने और नई वस्तुएं खरीदने का संदेश नहीं देता, बल्कि स्वस्थ जीवन के महत्व का भी बोध कराता है। भगवान धन्वंतरि की आराधना के साथ यदि हम अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य, स्वच्छता, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को स्थान दें, तो यही इस पर्व की सार्थकता होगी। आखिरकार धन खोने पर दोबारा अर्जित किया जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य की अनदेखी जीवन को कई तरह से प्रभावित कर सकती है। दीपावली पर स्वाति नक्षत्र और सौभाग्य योग का महासंयोग, जानिए लक्ष्मी-गणेश पूजा का सटीक मुहूर्त
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 06:42 AM
हिमाचल प्रदेश सरकार नए स्वास्थ्य बीमा मॉडल के साथ हिमकेयर योजना में सुधार करेगी

हिमाचल प्रदेश सरकार नए स्वास्थ्य बीमा मॉडल के साथ हिमकेयर योजना में सुधार करेगी

हिमाचल प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी एक बड़ी खबर है। अगर आपके परिवार का भी हिमकेयर कार्ड बना हुआ है तो आने वाले समय में आपको नया कार्ड बनवाना पड़ सकता है। प्रदेश सरकार हिमकेयर योजना को पुराने तरीके से चलाने के बजाय एक नए स्वास्थ्य बीमा मॉडल में बदलने जा रही है। इस नई व्यवस्था की जिम्मेदारी आदित्य बिरला इंश्योरेंस कंपनी को मिलने जा रही है।
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Nov 5, 2026, 06:02 AM
दिवाली नेत्र स्वास्थ्य जोखिमः विशेषज्ञों ने संभावित नुकसान की चेतावनी दी

दिवाली नेत्र स्वास्थ्य जोखिमः विशेषज्ञों ने संभावित नुकसान की चेतावनी दी

दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार है। घरों की सजावट, रंग बिरंगे दीये और लाइट की जगमगाहट रहती है। लेकिन त्योहार की खुशी में आंखों की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पटाखों का धुआं और बुरादा आंखों में जलन और परेशानी पैदा कर सकता है। कई बार लोग इसे हल्की परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि ये ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों का शुरुआती लक्षण हो सकता है। जिससे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंच सकता है। प्रोफेसर डॉक्टर महिपाल सिंह सचदेव (चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली ) के मुताबिक दिवाली के दौरान आंखों की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। पटाखों का धुआं और धूल आंखों में जलन और एलर्जी की परेशानी बढ़ा सकते हैं। वहीं त्योहारों में इस्तेमाल होने वाला मेकअप और कॉन्टैक्ट लेंस भी सही तरीके से इस्तेमाल न करने पर आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए आंखों की नियमित जांच कराना जरूरी है, खासकर डायबिटीज से पीड़ित लोगों को इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। आंखों की सेहत पर रोजमर्रा की आदतों का भी असर पड़ता है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टीवी की स्क्रीन को लंबे समय तक देखने से आंखों में थकान और सूखापन हो सकता है। बीच-बीच में स्क्रीन से नजर हटाना, बार-बार पलकें झपकाना और स्क्रीन को उचित दूरी पर रखना फायदेमंद है। त्योहारों के दौरान देर रात तक जागने और व्यस्त दिनचर्या के बीच पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। आंखों की साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बिना हाथ धोए आंखों को छूने, मेकअप का सामान दूसरों के साथ शेयर करने या एक्सपायर हो चुके कॉस्मेटिक सामानों का इस्तेमाल करने से जलन और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए सोने से पहले आंखों का मेकअप हटा देना चाहिए। कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करने वालों को उनकी सफाई का ध्यान रखना चाहिए। आंखों में परेशानी होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। आंखों में लालिमा, दर्द, लगातार पानी आना या नजर में बदलाव होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लोग घरेलू नुस्खे अपनाते रहते हैं या इस उम्मीद में डॉक्टर के पास जाने में देर कर देते हैं कि परेशानी अपने आप ठीक हो जाएगी। हालांकि, अचानक नजर धुंधली होना या चली जाना, तेज दर्द या आंख में चोट लगना गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों के साथ-साथ पहले से आंखों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को नियमित जांच का ध्यान रखना चाहिए। डायबिटीज की वजह से आंखों के पर्दे यानि रेटिना की नसों को नुकसान पहुंच सकता है और शुरुआती दौर में इसके लक्षण भी दिखाई नहीं देते। डॉक्टर की सलाह के अनुसार आंखों की जांच कराना और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रण में रखना नजर से जुड़ी गंभीर जटिलताओं का खतरा कम करने में मदद कर सकता है। Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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Nov 5, 2026, 05:15 AM
मीठे व्यंजनः पाचन स्वास्थ्य के लिए समय ही सब कुछ है

मीठे व्यंजनः पाचन स्वास्थ्य के लिए समय ही सब कुछ है

1/5Image Source : India Tvअगर मीठा खाना है तो खाने के बाद खाएं। इससे आप ज्यादा खाने से बचते हैं। खाना भरपेट खाएं और उसके बाद थोड़ा मीठा खा लें। इससे आप कम खाकर भी ज्यादा मीठा खाने का अहसास पाएंगे। मिठाई का एक पीस खाने के साथ प्लेट में रखें। डिब्बे से खाते समय गिनती भूल जाते हैं और ज्यादा खाने लगते हैं।2/5Image Source : Magnificजिन लोगों को गैस एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स की समस्या रहती है उन्हें डिनर जल्दी खत्म कर लेना चाहिए। ऐसे लोगों को देर रात मीठा खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा खाने से हल्की वॉक जरूर करनी चाहिए। ट्रायल्स में पाया गया कि खाना खाने के बाद हल्की वॉक करने से खाने के बाद ब्लड ग्लूकोज़ थोड़ा कम होता है। एसिडिटी पर इसका असर कम ही पता चला है।3/5Image Source : Magnificत्योहारों पर शरीर को हाइड्रेट रखना भी जरूरी है। इसलिए मीठा खाएं लेकिन पानी भी पीते रहें। त्योहार के चक्कर में शराब, तेज चाय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम से कम करें। इससे एसिडिटी बढ़ सकती है।4/5Image Source : Magnificदिन में फाइबर वाली चीजें डाइट में शामिल करें। जिसमें फल, दाल, सब्जियां और साबुत अनाज त्योहारों के भारी खाने से होने वाली कब्ज से बचाते हैं। डायबिटीज वाले लोगों को कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए। ध्यान रखें गुड़, शहद और खजूर भी शुगर हैं। शुगर अल्कोहल से बनी मिठाइयां, जिन्हें शुगर-फ्री बताकर बेचा जाता है, आमतौर पर गैस और ढीले स्टूल का कारण बनती हैं।5/5Image Source : Magnificजिन्हें रिफ्लक्स है उन्हें देर शाम तली हुई मिठाइयों को खाने से बचना चाहिए। जिन लोगों को गॉलस्टोन या हाई ट्राइग्लिसराइड्स हैं उन्हें ज़्यादा फैटी खाना खाने से सावधान रहना चाहिए। ऐसे लोगों को दूध और मावा से बनी मिठाई खाने से भी बचना चाहिए।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 04:14 AM
अनुपालन रिपोर्ट की कमी पर उच्च न्यायालय ने प्रशासन को चेताया

अनुपालन रिपोर्ट की कमी पर उच्च न्यायालय ने प्रशासन को चेताया

उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान इस बात पर कड़ा ऐतराज दर्ज कराया कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के तहत प्रशासन को नियमित रूप से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद वर्ष 2019 के बाद से न्यायालय में कोई भी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने तल्ख लहजे में चेतावनी दी कि प्रशासनिक अधिकारियों को जगाना कोर्ट की जिम्मेदारी नहीं है। यदि जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था के सतत अनुपालन का शपथ-पत्र पेश नहीं करते हैं, तो इसे सीधे तौर पर अदालत की अवमानना माना जाएगा। अवधेश सिंह भदौरिया की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों को अपने लिखित सुझाव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।विज्ञापनये भी पढ़ें-टहलने निकले एसडीएम को बाइक ने मारी जोरदार टक्कर, आंख के ऊपर की हड्डी में फ्रैक्चर; अस्पताल में भर्तीविज्ञापनअवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और पुलिस प्रशासन की ओर से संयुक्त स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले 190 चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। इसके अलावा परिवहन विभाग और पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान क्षमता से अधिक बच्चे बैठाने, बिना परमिट, बिना फिटनेस प्रमाणपत्र तथा बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे 87 वाहनों के चालान काटे गए हैं। इस विशेष अभियान से पहले भी प्रशासन ने 83 और 38 वाहनों के चालान बनाए थे। प्रशासन ने शहर के चारों ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों को सख्त हिदायत दी है कि जिस ऑटो या वाहन में अतिरिक्त सीट अथवा फट्टी लगी पाई जाए, उसे किसी भी हाल में फिटनेस प्रमाणपत्र जारी न किया जाए। इसके साथ ही नियम तोड़ने वाले ऐसे वाहनों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा रहा है।अदालती सुनवाई के दौरान ग्वालियर के प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत किया। हाल ही में पदभार ग्रहण करने का हवाला देते हुए प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने अदालत से अगली सुनवाई तक का समय मांगा। उन्होंने उच्च न्यायालय को आश्वस्त किया कि वे पूरी निगरानी व्यवस्था को निरंतर खुद देखेंगे और धरातल पर ठोस और प्रत्यक्ष सुधार पेश करेंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने न्यायालय का ध्यान संभाग की व्यापक स्थिति की ओर भी खींचा। उन्होंने बताया कि स्कूली वाहनों की यह खतरनाक स्थिति केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं है, बल्कि संभाग के अन्य नौ जिलों में भी हालात बेहद खराब हैं और वहां प्रशासनिक निगरानी न के बराबर है।
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Nov 5, 2026, 12:30 AM
मसूर दाल की टिक्कीः सर्दियों के लिए एक स्वस्थ नाश्ते का विकल्प

मसूर दाल की टिक्कीः सर्दियों के लिए एक स्वस्थ नाश्ते का विकल्प

जैसे जैसे सर्दियां नजदीक आ रही है वैसे वैसे चटपटा खाने की क्रेविंग लोगों की बढ़ती जा रही है। ब्रेकफास्ट से लेकर डिनर तक हर वक्त कुछ न कुछ चटपटा खाने का मन करता है। ऐसे में ज्यादातर लोग पराठे खाना पसंद करते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी डिश के बारे में बताने जा रहे हैं जो ब्रेकफास्ट के लिए बेस्ट ऑप्शन है। इसके साथ ही ये सेहत के लिहाज से भी बेनिफिशियल है। हम यहां जिस डिश की बात कर रहे हैं उसका नाम है मसूर दाल की टिक्की। इसे बनाना बेहद आसान है। यहां हम आपके लिए इसकी आसान सी लेकर आए हैं। सबसे पहले मसूर दाल को अच्छी तरह धोकर 2-3 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद इसे हल्का नमक डालकर उबाल लें, ताकि दाल गल जाए लेकिन बहुत ज्यादा मैशी न हो। दाल का सारा एक्सट्रा पानी निकाल दें। इसके बाद एक बड़े बाउल में उबली हुई मसूर दाल और उबले हुए मैश किए हुए आलू डालें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरा धनिया मिलाएं। इसके बाद मिश्रण में लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, गरम मसाला, चाट मसाला और स्वादानुसार नमक डालें। क्रिस्पी टेक्सचर और अच्छी बाइंडिंग के लिए इसमें ब्रेड क्रम्ब्स या भुना हुआ बेसन मिलाएं। सभी सामग्री को हाथों से अच्छी तरह मिलाते हुए एक डो की तरह तैयार कर लें। अब हाथों पर थोड़ा सा तेल लगाएं, मिश्रण से थोड़ा सा हिस्सा लें और उसे गोल आकार देकर हथेलियों के बीच दबाकर टिक्की का शेप दें। इसी तरह सभी मिश्रण से टिक्की तैयार कर लें। अब एक नॉन-स्टिक पैन या तवे को मध्यम आंच पर गरम करें और उस पर थोड़ा तेल या घी लगाएं। टिक्कियों को पैन में रखें और दोनों तरफ से सुनहरा भूरा और क्रिस्पी होने तक मध्यम आंच पर अच्छी तरह सेक लें। आपकी गरमा-गरम, क्रिस्पी और हेल्दी मसूर दाल की टिक्की तैयार है। इसे हरी धनिया-पुदीने की चटनी, इमली की खट्टी-मीठी चटनी या अपनी मनपसंद सॉस के साथ सुबह के नाश्ते में सर्व करें। यह स्वाद के साथ-साथ सेहत से भी भरपूर है।
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Amar Ujala
Nov 4, 2026, 08:17 PM
हलिया बाजार में महिला ने की दंत चिकित्सा की मांग

हलिया बाजार में महिला ने की दंत चिकित्सा की मांग

थाना क्षेत्र के गौरवा परसिया गांव निवासी अतिबल प्रजापति की पत्नी कुसुम कली बुधवार को दांत का इलाज कराने हलिया बाजार आई थी। इलाज के बाद दवा लेकर दोनों बाइक से घर जा रहे थे।विज्ञापनजैसे ही हलिया-पिपरा मार्ग पर बड़ौही पानी टंकी के पास पहुंचा कि अचानक रास्ते से गुजर रही बकरी पर बाइक चढ़ गई। बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई।हादसे में मां गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं बाइक चलाकर बेटे बाबूलाल को खरोंच भी नहीं आई। ग्रामीणों की मदद से कुसुम कली को पीएचसी ले जाया गया।जहां चिकित्सक ने महिला को मृत घोषित कर दिया। प्रभारी चिकित्साधिकारी अवधेश कुमार ने बताया कि हादसे में घायल होकर महिला अस्पताल आई तो मौत हो चुकी थी। संवाद
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Nov 4, 2026, 07:59 PM
रायबरेली निवासी की पहचान स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में की गई

रायबरेली निवासी की पहचान स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में की गई

रायबरेली जिले के सरेनी थानाक्षेत्र के हमीरगांव आशिक छिवलहा निवासी मनोज कुमार (50) पीजीआई लखनऊ में स्वास्थ्य कर्मी थे। बुधवार को वह काम से बहन के घर बिहार आए थे। देर शाम घर लौटते समय बिहार-बक्सर मार्ग स्थित सरांय मनिहार गांव के पास बक्सर की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक में सामने से टक्कर मार दी। मनोज की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच की और मोबाइल से परिजनों को सूचना दी है। पति की मौत से पत्नी श्रेजल, बेटी लाडो, मां कमला बेहाल हैं। थानाध्यक्ष प्रभारी राहुल सिंह गौर ने बताया कि घटना स्थल से ट्रक को कब्जे में लिया गया। तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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Nov 4, 2026, 07:57 PM
तपेदिक रोगी को उपचार मिलता है

तपेदिक रोगी को उपचार मिलता है

थानाक्षेत्र के दयाल खेड़ा गांव निवासी कमलेश (26) पुत्र रामभजन लंबे समय से टीबी की बीमारी से पीड़ित थे। उनका इलाज चल रहा था। बीमारी से परेशान होकर मंगलवार रात उन्होंने जहर खा लिया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वह चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया। थानाध्यक्ष संजीव कुशवाहा ने बताया घटना की जानकारी नहीं है।(संवाद)
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Nov 4, 2026, 07:41 PM
विधायक ने ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी

विधायक ने ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी

विधायक ने कहा कि ग्रामीणों को घर-द्वार पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना प्राथमिकता है। नई मशीन से मरीजों को खून की जांच के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा जबकि दंत शल्य कक्ष शुरू होने से दांतों के उपचार की सुविधा भी स्थानीय स्तर पर मिलेगी। इस दौरान रोगी कल्याण समिति की समीक्षा बैठक भी हुई। इसमें अस्पताल में उपलब्ध जांचों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के शुल्क में बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया गया। धुसाड़ा पंचायत के प्रधान सतीश शर्मा ने अस्पताल को यूरिन एनालाइजर मशीन देने की घोषणा की। कार्यक्रम में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शर्मा, एसडीएम अंब पारस अग्रवाल और स्वास्थ्य खंड अधिकारी अंब डॉ. राहुल कतना सहित अन्य अधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।
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Nov 4, 2026, 07:35 PM
बेटी के इलाज के लिए मुजफ्फरनगर गए पिता

बेटी के इलाज के लिए मुजफ्फरनगर गए पिता

कासिमपुरा रोड स्थित अनवर शाह कॉलोनी निवासी मोहम्मद एजाज बुधवार को अपनी बेटी आयशा (18) का उपचार कराने मुजफ्फरनगर गए थे। देर शाम परिवार कार से लौट रहा था। उपकारागार के निकट उनकी कार आगे चल रहे अज्ञात वाहन से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में कार चालक मुकेश और मोहम्मद एजाज की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एजाज की पत्नी रिजवाना और बेटी आयशा घायल हो गईं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए सरकारी भिजवाया। रिजवाना की हालत खतरे से बाहर बताई गई है, जबकि आयशा की गंभीर हालत को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। सीओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि कार के आगे चल रहे कैंटर जैसे वाहन से टकराने की आशंका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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Nov 4, 2026, 07:33 PM
सीजेएम ने जेल का निरीक्षण किया, स्वच्छता, भोजन और सुरक्षा में सुधार का निर्देश दिया

सीजेएम ने जेल का निरीक्षण किया, स्वच्छता, भोजन और सुरक्षा में सुधार का निर्देश दिया

उन्होंने कैदियों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को साफ-सफाई, पौष्टिक भोजन तथा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की चेयरमैन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह के निर्देशानुसार किए गए निरीक्षण के दौरान सीजेएम ने कैदियों और हवालातियों से उनके मामलों में आ रही दिक्कतों के बारे में जानकारी ली।विज्ञापनसाथ ही उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में बताया। उन्होंने जेल की बैरकों, कानूनी सहायता क्लीनिक और अस्पताल का भी निरीक्षण किया। वहीं रसोई में तैयार हो रहे भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था देखी तथा जेल अधिकारियों को खाना पकाते समय स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए।विज्ञापनइसके बाद सीजेएम पवन कुमार ने पुलिस लाइन परिसर स्थित सेफ हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां साफ-सफाई, रहन-सहन, पेयजल और भोजनालय की व्यवस्था जांची। सेफ हाउस में रह रहे युगल जोड़ों को जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से दी जाने वाली सेवाओं की जानकारी दी।उन्होंने सेफ हाउस प्रभारी को यहां आने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच कराने, पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने और उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। इस दौरान जेल और सेफ हाउस का स्टाफ तथा संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।सीजेएम पवन कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के उपलक्ष्य में 9 नवंबर से सप्ताहभर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचकूला के निर्देशानुसार आयोजित इस अभियान के तहत लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता, हेल्पलाइन, लोक अदालतों और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
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Nov 4, 2026, 07:25 PM
पटाखों का धुआं विभिन्न रोगी समूहों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है

पटाखों का धुआं विभिन्न रोगी समूहों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है

पटाखों की धूम से श्वास रोगियों को सांस फूलने की समस्या हो सकती है। वहीं, हृदय रोगियों की धड़कन बढ़ने का खतरा रहता है। एलर्जी के मरीजों की परेशानी भी इस दौरान बढ़ जाती है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विनय सोनी ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पटाखों के धुएं से अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की सांस फूलने का खतरा अधिक होता है। बच्चे और बुजुर्गों को इससे ज्यादा समस्या हो सकती है। हृदय रोगी और रक्तचाप के मरीजों को पटाखों की तेज ध्वनि से बचना चाहिए। तेज आवाज उनकी धड़कन बढ़ा सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।विज्ञापनबचाव और सावधानी के उपायचिकित्सकों ने लोगों को मास्क पहनने और धुएं से बचाव करने की सलाह दी है। श्वास के मरीजों को नियमित रूप से इन्हेलर का प्रयोग करना चाहिए। शुगर के मरीजों को अपने खान-पान में संयम बरतना आवश्यक है। उन्हें अपनी दवाइयां का सेवन भी नियमित रूप से करते रहना चाहिए। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।विज्ञापन---इस तरह करें बचाव- घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनें।- धुएं से बचाव करें।- दमा के मरीज इन्हेलर लें।- अधिक मात्रा में पानी पिएं।- तेल मसाला व तली-भुनी वस्तुओं के सेवन से बचें।- तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी बनाएं---फोटो- 01अस्थमा व सीओपीडी के मरीज धुएं से बचाव करें। हृदय रोगी तेज ध्वनि से दूरी बनाएं। दवाइयों का नियमित सेवन करें।डॉ. विनय सोनी, सहायक आचार्य, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज
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Nov 4, 2026, 07:01 PM
रायबरेली निवासी की पहचान स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में की गई

रायबरेली निवासी की पहचान स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में की गई

रायबरेली जिले के सरेनी थानाक्षेत्र के हमीरगांव आशिक छिवलहा निवासी मनोज कुमार (50) पीजीआई लखनऊ में स्वास्थ्य कर्मी थे। बुधवार को वह काम से बहन के घर बिहार आए थे। देर शाम घर लौटते समय बिहार-बक्सर मार्ग स्थित सरांय मनिहार गांव के पास बक्सर की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक में सामने से टक्कर मार दी। मनोज की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच की और मोबाइल से परिजनों को सूचना दी है। पति की मौत से पत्नी श्रेजल, बेटी लाडो, मां कमला बेहाल हैं। थानाध्यक्ष प्रभारी राहुल सिंह गौर ने बताया कि घटना स्थल से ट्रक को कब्जे में लिया गया। तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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Nov 4, 2026, 06:56 PM
बुचौली में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

बुचौली में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

महेंद्रगढ़। गांव बुचौली के उप स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को टीकाकरण शिविर और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वास्थ्य कर्मी मुकेश चौहान और महिला स्वास्थ्य कर्मी सोनू ने दो गर्भवती महिलाओं और 10 बच्चों का टीकाकरण किया। इस दौरान महिलाओं को एनीमिया, टीबी, निमोनिया, नशे के दुष्प्रभाव और गर्भावस्था में जरूरी देखभाल की जानकारी दी गई। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को समय पर पंजीकरण, जरूरी जांच और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह दी। साथ ही 14 से 15 वर्ष से कम आयु की किशोरियों को एचपीवी का टीका लगवाने की अपील की। इस मौके पर आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता सहित ग्रामीण महिलाएं मौजूद रहीं। संवाद
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Nov 4, 2026, 03:45 PM
बच्चों का स्वास्थ्य खतरे मेंः अत्यधिक स्क्रीन समय, जंक फूड का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी

बच्चों का स्वास्थ्य खतरे मेंः अत्यधिक स्क्रीन समय, जंक फूड का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी

- घंटों स्क्रीन देखने, मैदान में खेलने से दूरी और जंक फूड का बढ़ता शौक बच्चों की सेहत के लिए चिंता का विषयअमर उजाला ब्यूरोपूर्वी दिल्ली। बच्चों की थाली में पौष्टिक भोजन की जगह पिज्जा-बर्गर और खिलौनों की जगह मोबाइल ने ले ली है। बदलती जीवनशैली बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रही है। घंटों मोबाइल की स्क्रीन देखने, मैदान में खेलने से दूरी और जंक फूड का बढ़ता शौक मोटापे और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। इसका असर भविष्य में दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है। डॉक्टरों ने अभिभावकों को बच्चों के खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देने की सलाह दी है।कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवि प्रकाश के अनुसार, बच्चों में खेलकूद और दौड़भाग के कारण शारीरिक निष्क्रियता का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है, लेकिन खानपान में गड़बड़ी चिंता का विषय है। जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ खाने से मोटापा बढ़ सकता है। मोटापे के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है, जो आगे चलकर दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है।विज्ञापनछोटे बच्चों में हार्ट अटैक के मामले बेहद दुर्लभ-बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती सिन्हा बताती हैं कि एक से तीन साल के टॉडलर और तीन से पांच साल के प्री-स्कूलर बच्चों में हार्ट अटैक होना बेहद दुर्लभ है। हालांकि, जन्मजात हृदय रोग, दिल की बनावट में खराबी, आनुवंशिक बीमारियां और कावासाकी रोग जैसी समस्याएं गंभीर परेशानी पैदा कर सकती हैं।विज्ञापनमोबाइल और टीवी के सामने बीत रहा ज्यादा समय-विशेषज्ञों के मुताबिक, मोबाइल और टीवी पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों का खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों का समय घट रहा है। इससे वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा रहता है। आगे चलकर यह दिल की सेहत को प्रभावित कर सकता है।
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Nov 4, 2026, 03:42 PM
भारतीय रोगियों ने चिकित्सा सलाह को नजरअंदाज किया, जटिलताओं का सामना करना पड़ा

भारतीय रोगियों ने चिकित्सा सलाह को नजरअंदाज किया, जटिलताओं का सामना करना पड़ा

अल्लापुर निवासी 45 वर्षीय महिला को एक महीने से सीने में रह-रहकर दर्द हो रहा था। महिला ने एआई से पूछकर बिना डॉक्टर की सलाह के खून पतला करने व अन्य प्रकार की दवा शुरू कर दी। सोमवार की रात सीने में अधिक दर्द होने की समस्या को लेकर महिला एसआरएन अस्पताल के हृदय रोग विभाग पहुंची, जहां चिकित्सकों ने इसे गैस की समस्या बताई। महिला एआई से मिले ज्ञान के आधार पर एंजियोग्राफी कराने की जिद करने लगी। इसके बाद डॉक्टरों ने सीटी एंजियोग्राफी कराने के लिए महिला को राजी किया। फिलहाल जांच में सब सामान्य निकला।विज्ञापनसोहबतियाबाग निवासी 50 वर्षीय युवक का एसआरएन अस्पताल से टाइप वन मधुमेह का इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने उन्हें इन्सुलिन लेने की सलाह दी थी। वहीं मरीज ने बिना डॉक्टर की सलाह के एआई से पूछकर इन्सुलिन लेना बंद कर दिया। इस दौरान वह दवा लेने लगा। करीब एक महीने पहले मरीज की हालत काफी बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
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Nov 4, 2026, 03:06 PM
धनत्रयोदशी पर्वः सुख और समृद्धि के लिए देवताओं की पूजा और भोग चढ़ाना

धनत्रयोदशी पर्वः सुख और समृद्धि के लिए देवताओं की पूजा और भोग चढ़ाना

धनतेरस का त्योहार हर वर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनतेरस के पर्व में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर इन देवी-देवताओं की पूजा करने से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। धनतेरस 2026 पर देवी-देवताओं की पूजा के साथ ही उनके प्रिय भोग भी उन्हें अर्पित करने चाहिए। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि माता लक्ष्मी, गणेश भगवान, धन्वंतरि देव और कुबेर देव को इस दिन किन चीजों का भोग लगाना चाहिए। ऊपर दी गई भोग सामग्री में से हर देवी-देवता के लिए आप एक-एक भोज्य पदार्थ बना सकते हैं। सामर्थ्य और श्रद्धा से दिया गया थोड़ा सा भोग भी देवी-देवताओं को प्रसन्न कर सकता है और आपके जीवन में सुखद बदलाव आ सकते हैं। बस इस बात का ख्याल रखें कि धनतेरस की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में आपको करनी चाहिए और इसी समय देवी-देवताओं को भोग लगाना चाहिए। देवी-देवताओं को भोग लगाकर हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। भोग इस बात का भी प्रतीक है कि जो भी हमारे पास है वो देवी-देवताओं की अनुकंपा से ही है और इसलिए स्वयं भोजन करने से पहले देवी-देवताओं को भोग लगाया जाता है। भोग लगाने से मानसिक शुद्धि भी होती है और सकारात्मक ऊर्जा भी हमें प्राप्त होती है। देवी-देवताओं को स्वयं भोजन करने से पहले जब हम भोग लगाते हैं तो हम स्वार्थ और अहंकार से भी मुक्त होते हैं। धनतेरस जैसे धार्मिक मौकों पर देवी-देवताओं को भोग लगाने से बरकत आती है और कष्टों से हम मुक्त होते हैं। धनतेरस के दिन 3 में से किसी एक यंत्र को करें घर में स्थापित, करियर और आर्थिक पक्ष में आ सकता है सुधार
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Nov 4, 2026, 02:54 PM
दीपोत्सव उत्सवः समृद्धि और खुशी के लिए अभ्यंग स्नान अनुष्ठान

दीपोत्सव उत्सवः समृद्धि और खुशी के लिए अभ्यंग स्नान अनुष्ठान

6 नवंबर से पंचदिवसीय दीपोत्सव शुरू हो रहा है. इस दौरान अभ्यंग स्नान की परंपरा निभाई जाती है. मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान न करने वाले व्यक्ति को नरक की प्राप्ति होती है. इस बार अभ्यंग स्नान 8 नवंबर को सुबह होगा. मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और अलक्ष्मी से मुक्ति मिलती है. इस परंपरा के पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ, ऊर्जावान और दीर्घायु बनाए रखने का आयुर्वेदिक विज्ञान भी छिपा हुआ है. धार्मिक मान्यता है कि तिल के तेल में मां लक्ष्मी और जल में मां गंगा का वास होता है. इसलिए दीपावली के पंचदिवसीय पर्व में सूर्योदय से पहले तिल के तेल से शरीर की मालिश करके स्नान करना विशेष फलदायी माना गया है. अभ्यंग स्नान का अर्थ है- शरीर पर तेल लगाकर विधिपूर्वक स्नान करना. ऐसा करने से व्यक्ति के शरीर की नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. स्नान के बाद यमराज के 14 नामों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करने और संध्या काल में यमराज के नाम का दीपक जलाने की भी परंपरा है. इसे अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. आयुर्वेद में अभ्यंग यानी तेल मालिश को स्वस्थ शरीर रखने के लिए महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है. तिल का तेल वात दोष को शांत करने वाला होता है. आयुर्वेदिक दृष्टि से नियमित तेल मालिश थकान, रूखापन और वात संबंधी परेशानियों को कम करने में सहायक मानी जाती है. इससे त्वचा में नमी बनी रहती है. शरीर को आराम मिलता है और मांसपेशियों को पोषण मिलता है. नियमित अभ्यंग करने से शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है. नींद अच्छी आती है और त्वचा कोमल रहती है. चरक संहिता में अभ्यंग के लाभों का उल्लेख करते हुए इसे जरा यानी बुढ़ापे के प्रभाव को कम करने, श्रम से उत्पन्न थकान दूर करने और वात को शांत करने वाला बताया गया है. इसी कारण नियमित तेल मालिश को शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के प्रभावों से बचाव का एक पारंपरिक उपाय माना गया है. ज्योतिषीय मान्यताओं में जरा, श्रम और वात को शनि से संबंधित माना जाता है. शनि को उम्र, परिश्रम, हड्डियों, जोड़ों और दीर्घकालिक परेशानियों का कारक ग्रह कहा जाता है. शरीर में रूखापन, जकड़न, थकान और समय से पहले आने वाली कमजोरी को भी प्रतीकात्मक रूप से शनि के प्रभाव से जोड़ा जाता है. वहीं तिल का तेल शनि से संबंधित प्रमुख पदार्थों में गिना जाता है. यही कारण है कि शनि की शांति के लिए तिल के तेल का दान, दीपदान और शरीर पर तेल लगाने से लाभ होता है. धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से नरक को केवल मृत्यु के बाद मिलने वाली यातना के रूप में नहीं देखा गया है. शरीर में अत्यधिक रूखापन, जकड़न, थकान, असहजता और समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण भी जीवन को कष्टमय बना सकते हैं. इस दृष्टि से अभ्यंग स्नान शरीर को स्वस्थ रखने और जीवन में सुख का अनुभव कराने वाली परंपरा है. शास्त्रों में यम के भय से मुक्ति के लिए अभ्यंग का विधान इसी धार्मिक और स्वास्थ्य संबंधी सोच से जुड़ा हुआ है. इस प्रकार दीपावली के दौरान अभ्यंग स्नान की परंपरा हमें धार्मिक आस्था के साथ शरीर की देखभाल का भी संदेश देती है. तिल के तेल से मालिश, स्नान, यम के नामों का स्मरण और दीपदान के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में स्वास्थ्य, दीर्घायु, मानसिक शांति और समृद्धि की कामना करता है.
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Nov 4, 2026, 01:11 PM
हरियाणा सरकार ने विशेष नवजात देखभाल इकाइयों को मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों में विलय करने की योजना बनाई है

हरियाणा सरकार ने विशेष नवजात देखभाल इकाइयों को मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों में विलय करने की योजना बनाई है

अमर उजाला ब्यूरोचंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज के दौरान मां को उनसे अलग नहीं रहना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) को मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) में बदलने की तैयारी कर रहा है। इसमें इलाज के साथ मां की मौजूदगी, स्तनपान और बच्चे की देखभाल में परिवार की भागीदारी सुनिश्चित होगी। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।डॉ. मिश्रा के मुताबिक प्रदेश की 29 एसएनसीयू में पहले से 54 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को सांस लेने में मदद देने के लिए करीब सात करोड़ रुपये से 19 और वेंटिलेटर खरीदे जाएंगे। नई व्यवस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीरो सेपरेशन सिद्धांत पर आधारित है। इसमें समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों को भी चिकित्सकीय स्थिति अनुकूल होने पर मां के साथ रखा जाएगा। कंगारू मदर केयर के तहत बच्चे को मां के सीने से लगाकर त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया जाएगा। इससे शरीर का तापमान बनाए रखने, स्तनपान और मां-बच्चे के जुड़ाव में मदद मिलती है। माताओं को पोषण, स्वच्छता और बीमारी के शुरुआती संकेत पहचानने का प्रशिक्षण भी मिलेगा।विज्ञापनअंबाला और कुरुक्षेत्र से मिली सीखअंबाला सिटी में देश की पहली जिलास्तरीय एमएनसीयू स्थापित की गई थी। इसके बाद कुरुक्षेत्र में भी ऐसी इकाई शुरू हुई। दोनों जगह के अनुभव के आधार पर प्रदेश के अन्य जिलों में व्यवस्था के विस्तार की तैयारी है। 21 अगस्त को अधिकारियों को सभी एसएनसीयू को एक नवंबर 2026 तक अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि अभी कितनी इकाइयां पूरी तरह अपग्रेड हुई हैं, इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
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Nov 4, 2026, 12:07 PM
5 नवंबर, 2026 को रंभा एकादशी और गोवत्स द्वादशी समारोह

5 नवंबर, 2026 को रंभा एकादशी और गोवत्स द्वादशी समारोह

5 नवंबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की उदया तिथि एकादशी और गुरुवार का दिन है। कल एकादशी तिथि सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी, उसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी। कल पूरा दिन पूरी रात पार कर के अगले दिन सुबह 5 बजकर 10 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। साथ ही कल 5 नवंबर को देर रात 3 बजकर 56 मिनट तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। । इसके साथ ही गोवत्स द्वादशी भी मनायी जायेगी। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए गुरुवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय। कल कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रम्भा एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु यानी श्री केशव की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं। साथ ही मन की एकाग्रता बढ़ती है और काम में मन लगता है। इसके अलावा विवाह में हो रही देरी से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। वहीं, कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गोवत्स द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गाय-बछड़े की पूजा करने से व्यक्ति को हर सुख प्राप्त होता है। विशेष रूप से संतान सुख की कामना रखने वालों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि श्रीकृष्ण के जन्म के बाद मां यशोदा ने पहली बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी को ही गौमाता के दर्शन कर विधि-विधान से उनका पूजन किया था। इसलिए संतान सुख की कामना रखने वाले लोगों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।
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India TV
Nov 4, 2026, 11:32 AM
आंतों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखना-विशेषज्ञ मूंग दाल, लौकी और केले की सलाह देते हैं

आंतों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखना-विशेषज्ञ मूंग दाल, लौकी और केले की सलाह देते हैं

1/5Image Source : UNSPLASHखराब खानपान और बिगड़ी लाइफस्टाइल के कारण कई लोग गैस, कब्ज, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। ऐसे में पुणे स्थित इनामदार हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंखे बता रही हैं कि पेट की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए किन चीजों का सेवन करें?2/5Image Source : UNSPLASHमूंग दाल: मूंग दाल प्रोटीन से भरपूर होती है और आसानी से पच जाती है इसलिए यह पेट के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। यह अन्य दालों की तुलना में बहुत हल्की होती है इसलिए इससे गैस या एसिडिटी की समस्या कम होती है।3/5Image Source : UNSPLASHलौकी: लौकी फाइबर से भरपूर है जो गट हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें लगभग 90% से 96% पानी होता है, जो पाचन तंत्र और गट हेल्थ के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।4/5Image Source : UNSPLASHकेला: केला फाइबर और पोटेशियम से भरपूर है जो ओवरऑल गट हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद पोटेशियम पाचन तंत्र को बेहतर करने के साथ हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है।5/5Image Source : UNSPLASHओट्स: ओट्स का सेवन पेट के अच्छे बैक्टीरिया के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें बीटा-ग्लूकन नामक घुलनशील फाइबर होता है, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है।
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Nov 4, 2026, 11:01 AM
सुहास सुब्रमण्यमः एक अद्वितीय राजनीतिज्ञ जिनका जीवन बचाने का जुनून है

सुहास सुब्रमण्यमः एक अद्वितीय राजनीतिज्ञ जिनका जीवन बचाने का जुनून है

अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के कई चेहरे अपनी चमक बिखेर रहे हैं, लेकिन अगर बात एक ऐसे राजनेता की करें जिसकी लाइफस्टाइल और काम करने का तरीका सबसे अलग और बहुमुखी है, तो सुहास सुब्रह्मण्यम का नाम सबसे आगे आता है. ओबामा प्रशासन में नीति निर्माता से लेकर वर्जीनिया के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने वाले सुहास की जिंदगी में कई ऐसे पहलू हैं जो आमतौर पर किसी राजनेता में एक साथ देखने को नहीं मिलते. आइए जानते हैं सुहास सुब्रह्मण्यम के बारे में कुछ बेहद दिलचस्प और अनोखे तथ्य... सुहास सुब्रह्मण्यम की सबसे अनूठी बात यह है कि वे सिर्फ फाइलों और भाषणों तक सीमित नहीं रहते. वर्जीनिया में वे लाउडौन मेडिकल रिजर्व कॉर्प के तहत एक सक्रिय वॉलंटियर इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और फायर फाइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. यानी जरूरत पड़ने पर वे तुरंत दमकल की वर्दी पहनकर आग बुझाने और आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए मैदान में उतर जाते हैं. जब सुहास प्रतिष्ठित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से कानून (Law) की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने 'सेंटर ऑन रॉन्गफुल कन्विकशंस' के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति के केस पर रात-दिन मेहनत की जिसे गलत तरीके से उम्रकैद की सजा सुना दी गई थी. सुहास की कानूनी दलीलों और सबूतों के दम पर उस निर्दोष व्यक्ति को जेल से रिहा कराया जा सका. व्हाइट हाउस में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष सलाहकार के रूप में काम करते हुए सुहास ने अमेरिका की राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी नीतियों को आकार दिया. उन्होंने AI, साइबर सुरक्षा और आईटी क्षेत्र में रोजगार सृजन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण टास्क फोर्स का नेतृत्व किया. ओबामा प्रशासन के बाद उन्होंने खुद की एक आईटी और कंसल्टिंग फर्म भी स्थापित की. राजनीति में आने के बाद सुहास ने साल 2019 में वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलिगेट्स का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसी के साथ वे वर्जीनिया जनरल असेंबली के इतिहास में चुने जाने वाले पहले दक्षिण एशियाई और पहले हिंदू/भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधि बने. इसके बाद वे वर्जीनिया स्टेट सीनेट पहुंचे और अब अमेरिकी संसद के सदस्य हैं. सुहास के माता-पिता 1970 के दशक में भारत (चेन्नई/दक्षिण भारत) से अमेरिका जाकर बस गए थे. सुहास का जन्म ह्यूस्टन, टेक्सास में हुआ. उनकी पत्नी मिरांडा सुब्रह्मण्यम एक कम्युनिटी वॉलंटियर हैं और उनकी दो छोटी बेटियां हैं. सुहास अक्सर अपनी भारतीय-अमेरिकी विरासत और संस्कृति को अपनी सफलता का मुख्य आधार बताते हैं.
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India TV
Nov 4, 2026, 05:44 AM
एक स्वस्थ गर्भावस्था के लिए तैयारीः एक सहज प्रसव के लिए युक्तियाँ

एक स्वस्थ गर्भावस्था के लिए तैयारीः एक सहज प्रसव के लिए युक्तियाँ

1/5Image Source : Magnificएक्टिव रहें- अगर प्रेग्नेंसी में कोई दिक्कत न हो, तो रोज हल्की सैर करें और प्रीनेटल योग करें। फिजिकली एक्टिव रहने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे डिलीवरी के समय मदद मिलती है।2/5Image Source : Magnificनियमित वजन- बहुत ज़्यादा वजन बढ़ने से बच्चा बड़ा हो सकता है और जेस्टेशनल डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थितियां जिनमें सिजेरियन सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है। दो लोगों के लिए खाने के बजाय, बैलेंस्ड और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट पर ध्यान दें।3/5Image Source : Magnificहाइड्रेटेड रहें- पक्का करें कि आपके शरीर में पानी की कमी न हो। सही हाइड्रेशन लेबर के दौरान एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद करता है। बहुत ज़्यादा चिंता या डर लेबर प्रोसेस पर असर डाल सकता है। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज (जैसे लामाज़ तकनीक) और मेडिटेशन से मानसिक मजबूती बढ़ाएं।4/5Image Source : Magnificआयुर्वेद में माना गया है की जितना जरूरी आपका शारीरिक स्वास्थ्य है उससे कई ज़्यादा आपका मानसिक स्वास्थ्य जरूरी है, क्योंकि मन शांत रहेगा तभी आपका शरीर भी संतुलित रहेगा। प्रेग्नेंसी के आठवें महीने में जितना हो सके सोना चाहिए, क्योंकि यह एक उत्कृष्ट समय होता है। इस दौरान 'ओजस' नाम का सूक्ष्म तरल पदार्थ माँ से बच्चे तक पहुँचता है, जो ऊर्जा और इम्यून सिस्टम के काम करने के लिए जरूरी होता है।5/5Image Source : Magnificरेगुलर चेक अप और अल्ट्रासाउंड- अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें, नौवें महीने में अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि बच्चा सिर-नीचे पोज़िशन में है या नहीं और डिलीवरी के लिए पेल्विक बोन की स्थिति कैसी है। सही समय पर सही जानकारी होने से जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
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Aaj Tak
Nov 4, 2026, 05:00 AM
आंतों के स्वास्थ्य के मामलेः पेट की गैस, फटना और पेट फूलना को समझना।

आंतों के स्वास्थ्य के मामलेः पेट की गैस, फटना और पेट फूलना को समझना।

पेट में गैस बनना, बार-बार डकार आना या पेट फूलना आम समस्याएं हैं. कई लोग इन्हें मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार ये खानपान, मानसिक तनाव और खराब लाइफस्टाइल से जुड़ी हो सकती हैं. गट यानी आंतों की सेहत सिर्फ खाना पचाने तक सीमित नहीं है. इसका संबंध शरीर के मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम से भी है. ऐसे में पेट को स्वस्थ रखने के लिए खानपान के साथ रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है. ऐसे में पेट की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. इस बारे में नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर डॉ. एस.के. सरीन ने बताया है. डॉ सरीन कहते हैं कि डकार आना, पेट में भारीपन महसूस होना और पेट फूलना गैस से जुड़ी आम शिकायतें हैं. जल्दी-जल्दी खाना, खाते समय बात करने से ज्यादा हवा निगली जा सकती है. इससे डकार और पेट फूलने की परेशानी बढ़ सकती है. मानसिक तनाव भी पेट की परेशानी को बढ़ा सकता है. चूंकि आंतों और दिमाग के बीच गहरा संबंध होता है. इसलिए मानसिक तनाव के दौरान कुछ लोगों को पेट में ऐंठन, भारीपन या गैस ज्यादा महसूस हो सकती है. डॉ.सरीन का कहना है कि अच्छी गट हेल्थ के लिए आप घर का खाना खाएं. घर के बने ताजा खाना खाएं. नाश्ते में फल शामिल करें. बिना चीनी वाली छाछ भी डाइट का हिस्सा हो सकती है, बशर्ते वह आपको सूट करे. बाहर के तले-भुने और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड को न खाएं, रोजाना एक जैसा खाना खाने के बजाय फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को अपनी डाइट में शामिल करें. डॉक्टर ने दिन में एक बार भोजन करने यानी 'वन मील ए डे' की सलाह भी दी. हालांकि, यह हर व्यक्ति के लिए जरूरी या बेहतर तरीका नहीं है, खासकर डायबिटीज, दूसरी बीमारियों, कमजोरी या दवाएं लेने वाले लोगों को ऐसा डाइट पैटर्न अपनाने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर ने एक्सरसाइज और पसीना आने को भी सेहत के लिए फायदेमंद बताया. हालांकि, पसीने के जरिए शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलने का दावा सही नहीं है. शरीर से टॉक्सिन निकालने का काम लिवर और किडनी करते हैंय. पसीने का का काम शरीर के तापपान को मेंटेन करना है.
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Amar Ujala
Nov 4, 2026, 03:44 AM
महिला ने पिछले सिजेरियन सेक्शन के बाद छापरा सदर अस्पताल में तीन बच्चों को जन्म दिया

महिला ने पिछले सिजेरियन सेक्शन के बाद छापरा सदर अस्पताल में तीन बच्चों को जन्म दिया

जानकारी के अनुसार, सारण जिले के मशरक प्रखंड के तेजपुरवा गांव निवासी पंकज कुमार की पत्नी निशा कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला का पहले सिजेरियन प्रसव हो चुका था। ऐसे में इस बार प्रसव के दौरान विशेष चिकित्सकीय सतर्कता बरतना जरूरी था। चिकित्सकों की टीम ने महिला की स्थिति का आकलन किया और लगातार निगरानी के बीच सामान्य प्रसव कराया। इस दौरान महिला ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया। प्रसव के बाद नवजातों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। इनमें से दो बच्चों को विशेष निगरानी के लिए एसएनसीयू में रखा गया है। इस जटिल प्रसव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा सिंह, डॉ. रेहाना अंजुम और डॉ. शैलेश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, स्टाफ नर्स नेहा कुमारी और नेहा रानी ने भी प्रसव के दौरान सहयोग किया। पूरी प्रक्रिया चिकित्सकीय टीम की निगरानी में संपन्न हुई। छपरा सदर अस्पताल में हर महीने औसतन 600 से 650 महिलाओं का प्रसव कराया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का जोर सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के साथ मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर है। इसके लिए प्रसव कक्ष में जरूरी उपकरणों, दवाओं और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच से लेकर प्रसव के दौरान चिकित्सकीय निगरानी और प्रसव के बाद मां एवं नवजात की देखभाल तक की व्यवस्था उपलब्ध है। जटिल प्रसव की स्थिति में जरूरत के अनुसार ऑपरेशन थिएटर और विशेष नवजात देखभाल इकाई की सुविधा भी दी जाती है। गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सदर अस्पताल के लेबर रूम को जरूरी उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। प्रसव के दौरान मां और गर्भस्थ शिशु की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि प्रसव के दौरान किसी भी तरह की जटिलता से निपटा जा सके। अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि प्रसव के बाद अस्पताल में भर्ती महिलाओं को नियमित रूप से भोजन, चाय और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। मरीजों के बेड पर नियमित रूप से साफ चादर और कंबल उपलब्ध कराए जाते हैं।
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Amar Ujala
Nov 4, 2026, 02:21 AM
भारत विधानसभा चुनाव से पहले तीन नए शहरों का शुभारंभ करेगा

भारत विधानसभा चुनाव से पहले तीन नए शहरों का शुभारंभ करेगा

सुल्तानपुर रोड स्थित आईटी सिटी और वेलनेस सिटी के साथ आगरा एक्सप्रेसवे के पास वशिष्ठपुरम योजना विधानसभा चुनाव से पहले लॉन्च की जाएगी। उधर, सीतापुर रोड पर प्रबंधनगर योजना को भी लॉन्च करने की तैयारी है। इसकी राह में हाईकोर्ट का स्टे है जिसके खारिज होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।विज्ञापनअफसरों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट की जमीन को योजना में शामिल करने पर स्टे है। ऐसे में यदि एलडीए इसे छोड़ भी देता है तो भी योजना आएगी। इससे पहले एलडीए 24 सितंबर को दो योजनाएं वरुण विहार और नैमिष नगर को लॉन्च कर चुका है।
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Amar Ujala
Nov 3, 2026, 08:53 PM
रेटिना रोग के लिए प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्णः विशेषज्ञों ने नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर जोर दिया

रेटिना रोग के लिए प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्णः विशेषज्ञों ने नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर जोर दिया

रेटिना विशेषज्ञ डॉ. मंगत राम डोगरा के अनुसार, फंडस फोटोग्राफी और ओसीटी (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी) से रेटिना में होने वाले सूक्ष्म बदलावों की पहचान की जा सकती है। ओसीटी से पर्दे की परतों और उनमें मौजूद सूजन की विस्तृत तस्वीर मिलती है। इससे इलाज का सही समय तय करने में मदद मिलती है। डॉ. मनप्रीत बराड़ के मुताबिक, आंखों के सामने तैरते काले धब्बे, अचानक धुंधलापन या नजर में पर्दा आने जैसी शिकायत को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये रेटिना में रक्तस्राव या गंभीर बदलाव के संकेत हो सकते हैं।विज्ञापनडॉ. एसपीएस ग्रेवाल ने कहा कि निष्क्रिय जीवनशैली और असंतुलित खानपान के बीच नियमित स्वास्थ्य जांच की आदत जरूरी है। वहीं, विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव और मधुमेह के कारण रेटिना की बीमारी बढ़ सकती है। इसलिए गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं को भी आंखों की जांच नहीं टालनी चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को याद रखना चाहिए कि चश्मे का नंबर जांचना और रेटिना की जांच अलग-अलग हैं। सामान्य दृष्टि होने पर भी आंखों के पर्दे की जांच जरूरी है।विज्ञापन
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Amar Ujala
Nov 3, 2026, 07:29 PM
टी. बी. मुक्त भारत अभियान के तहत दुलाना गांव में टी. बी. जागरूकता शिविर का आयोजन

टी. बी. मुक्त भारत अभियान के तहत दुलाना गांव में टी. बी. जागरूकता शिविर का आयोजन

महेंद्रगढ़। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मंगलवार को गांव डुलाना में निशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता शिविर लगाया गया। पीएचसी मालड़ा बास की प्रभारी डॉ. पिंकी जांगड़ा के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में सरपंच मुकेश देवी भी मौजूद रहीं। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल बस टीम ने 148 लोगों की स्क्रीनिंग की। इनमें टीबी के संभावित 12 मरीजों के बलगम के नमूने जांच के लिए नागरिक अस्पताल कनीना भेजे गए। वहीं, खांसी-जुकाम और छाती में दर्द की शिकायत वाले 57 लोगों के एक्स-रे किए गए। स्वास्थ्य कर्मी मुकेश चौहान ने कहा कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। पूरा दवा कोर्स लेने से मरीज ठीक हो सकता है। सरकार की ओर से दवाइयां निशुल्क दी जाती हैं। साथ ही इलाज के दौरान मरीज को प्रतिमाह 1000 रुपये पोषण भत्ता भी मिलता है। संवाद
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Amar Ujala
Nov 3, 2026, 06:32 PM
बाढ़ और स्थायी भवन की कमी के बीच किराचन गांव में होम्योपैथिक अस्पताल को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा

बाढ़ और स्थायी भवन की कमी के बीच किराचन गांव में होम्योपैथिक अस्पताल को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा

राजेपुर विकास खंड के किराचन गांव में 1984 से संचालित होम्योपैथिक अस्पताल भवन को 42 वर्ष बाद भी अपना भवन नहीं मिल पाया। पहले यह अस्ताल पूर्व प्रधान स्व. बाबू सिंह यादव के मकान में चलता रहा। पिछले साल अधिकारियों ने वहां से हटाकर पंचायत घर में अस्पताल संचालित कराया। इस बार बाढ़ आने से डॉ. फरहा दीवा ने दवाइयां व अन्य सामान भरकर गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर सीएचसी राजेपुर में रखवा दीं। गांव में होम्योपैथिक अस्पताल संचालित होने से आसपास के ग्रामीणों को भी इलाज की सुविधा मिल रही थी। अब यह अस्पताल बंद होने से मरीजों को होम्योपैथिक इलाज नहीं मिल पा रहा है। जरूरतमंद कुछ मरीज किराया खर्च कर सीएचसी से दवा लाने को मजबूर हैं। गांव के अनिल कुमार यादव, राकेश कुमार, पातीराम, देवेंद्र, किशोर, शैलेंद्र यादव आदि का कहना है कि डॉक्टर दवाइयां लेकर 15 किलो मीटर दूर चली गईं। जबकि पांच किलो मीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य अमृतपुर में बना है। इस अस्पताल में दवा रखी होती तो भी मरीजों को लाभ मिल सकता था। होम्योपैथिक जिला प्रभारी डॉ. दीप्ति त्रिवेदी ने बताया कि गंगा में बाढ़ आने से दवाईयां सीएचसी राजेपुर पहुंचाई गई थीं। सीएमओ से बात कर अमृतपुर पीएचसी में होम्योपैथिक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
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Dainik Jagran
Nov 3, 2026, 02:08 PM
दिवाली समारोहः मीठे व्यंजनों और स्वस्थ आदतों के बीच एक संतुलन

दिवाली समारोहः मीठे व्यंजनों और स्वस्थ आदतों के बीच एक संतुलन

दीवाली के अवसर पर बनने वाले मीठे और नमकीन बहुत स्वादिष्ट लगते हैं, लेकिन इनका अधिक सेवन सेहत के लिए कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न कर देता है। ऐसे में जरूरी है थोड़ी सी समझदारी, ताकि सेहत को न हो किसी भी प्रकार से नुकसान। ओवरईटिंग के कारण होने वाली समस्याओं का हम घरेलू उपायों निदान कर सकते हैं। घरेलू नुस्खे एक प्रकार से फर्स्ट एड का काम करते हैं और शरीर में मौजूद हानिकारक तत्वों को भी आसानी से बाहर निकाल देते हैं। डिटाक्स से पाचन में सुधार भी होता है। यह अच्छे गट बैक्टीरिया को ठीक करता है, जिससे आपका पेट हल्का रहता है। वैद्य अच्युत कुमार त्रिपाठी, सदस्य एवं गुरु, राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के मुताबिक शरीर में पानी की कमी भी कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकती है। शरीर को आप डिटाक्स तो करें ही, साथ ही पोषक तत्वों और पानी की कमी भी न होने पाए। शरीर को डिटाक्स करने के लिए डिटाक्स वाटर ले सकते हैं। रेगुलर चाय और अन्य ड्रिंक्स की जगह ग्रीन-टी या ब्लैक टी या नारियल पानी ले सकते हैं। इसके साथ ही ताजे और मौसमी फल खाएं, पानी अधिक मात्रा में पिएं, मौसमी हरी सब्जियों का सूप लें। आप मौसमी फलों और हरी सब्जियों से तैयार स्मूदी ले सकते हैं। घर का बना ताजा और हल्का सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। इससे शरीर को डिटाक्स होगा, साथ ही आप ऊर्जावान भी महसूस करेंगे। पोषक तत्व और हाइड्रेटेड शरीर अंदरूनी सिस्टम को पूरी तरह से और प्राकृतिक रूप से रिसेट कर देता है। इसका सकारात्मक असर त्वचा पर भी पड़ता है। दीवाली के अवसर पर शरीर में तरह-तरह के पदार्थ पहुंचते हैं। ये अगर शरीर में लंबे समय तक एकत्र रहे तो स्वास्थ्य के लिए हो सकते हैं हानिकारक। इसलिए इन हानिकारक तत्वों से जितनी जल्दी हो छुटकारा पा लेना ही श्रेयस्कर रहता है। इसका सबसे आसान तरीका है शरीर को डिटाक्स करना। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त त्योहारों के दौरान लिवर को न चाहते हुए शरीर में अधिक मात्रा में पहुंचे फ्राइड फूड और मिठाइयों को पचाने के लिए आम दिनों से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। डिटाक्सिंग लिवर को सही तरह से काम करने में बहुत मदद करता है और उसे आराम भी देता है। ओवरईटिंग अर्थात ज्यादा खा लेने शरीर में सुस्ती और आप अपने को दिनभर थका हुआ सा महूसस करते हैं। ऐसे में आप दिमागी रूप से भी सुस्त महसूस कर सकते हैं। अगर आप शरीर को डिटाक्स करते हैं तो इससे न केवल आपके शरीर का एनर्जी लेवल सही रहता है, बल्कि यह ब्लड शुगर को भी सही रखने में मदद करता है। सबसे प्रमुख बात डिटाक्सिंग आपको अलर्ट और फ्रेश महसूस कराती है। आंतों का आम बैक्टीरिया कैसे बढ़ा सकता है कोलन कैंसर का खतरा? 20 साल पुरानी गुत्थी सुलझाने में मिली सफलता दीवाली पर मिठाइयां खरीदते समय सावधान! मिलावट से हो सकती है फूड पॉइजनिंग, ये लक्षण दिखते ही भागें डॉक्टर के पास
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Amar Ujala
Nov 3, 2026, 12:01 PM
अचानक बीमारी के बाद अस्पताल ले जाते समय रास्ते में व्यक्ति की मौत हो गई

अचानक बीमारी के बाद अस्पताल ले जाते समय रास्ते में व्यक्ति की मौत हो गई

ग्राम बादकोट देवीखाल निवासी शिव प्रसाद (50) पुत्र स्व. मुकुंदराम अपने मौसी के बेटे के साथ कांडाखाल में जमीन देखने गए थे। वहां से लौटने के बाद दुगड्डा स्थित एक होटल में खाना खाने के लिए रुके। खाने का ऑर्डर देने के बाद वह बाथरूम गए जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।विज्ञापनपरिजन उन्हें गंभीर हालत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुगड्डा ले गए। चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें बेस अस्पताल कोटद्वार रेफर कर दिया। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर आ रहे थे लेकिन दुगड्डा और कोटद्वार के बीच रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
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Amar Ujala
Nov 3, 2026, 11:41 AM
कल्याण केंद्र के प्रमुख ने समग्र स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान की सिफारिश की

कल्याण केंद्र के प्रमुख ने समग्र स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान की सिफारिश की

केंद्र की मुख्य संचालिका बीके अंजना बहन ने साधकों योग व ध्यान का अभ्यास कराया और उसे जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास और पौष्टिक आहार से व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ रख सकता है और व्यक्ति फैटी लीवर की बढ़ती समस्या को रोक सकता है और अन्य बीमारियों से भी बचा जा सकता है। इसलिए सुबह-शाम करीब एक घंटा योगाभ्यास अवश्य करना चाहिए। संवाद
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Amar Ujala
Nov 3, 2026, 10:16 AM
पूर्व सेना अधिकारी रविंदर सिंह की भतीजे ने की पहचान

पूर्व सेना अधिकारी रविंदर सिंह की भतीजे ने की पहचान

सादाबाद के गांव थलूगढ़ी निवासी 60 वर्षीय रवेंद्र सिंह पुत्र सुल्तान सिंह सेना में हवलदार रह चुके थे। उनके भतीजे चंद्रपाल के अनुसार, सोमवार को वह खेत के चारों ओर तारबंदी करने पहुंचे थे। चार-पांच खंभे गाड़ने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह जमीन पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने परिजनों को सूचना दी। परिजन उन्हें तत्काल आगरा ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।विज्ञापनरवेंद्र सिंह अपने पीछे एक पुत्र और तीन पुत्रियों सहित परिवार छोड़ गए हैं। सभी बच्चों की शादी हो चुकी है। पत्नी शकुंतला देवी, पुत्र पंकज कुमार और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। रवेंद्र सिंह के निधन की सूचना पर सेना की जाट रेजीमेंट के अधिकारी भी पहुंचे और सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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India TV
Nov 3, 2026, 07:58 AM
खजूर की पोषण शक्ति को खोलेंः एक प्राकृतिक ऊर्जा संवर्धन और बहुत कुछ।

खजूर की पोषण शक्ति को खोलेंः एक प्राकृतिक ऊर्जा संवर्धन और बहुत कुछ।

1/5Image Source : Magnificएनर्जी का पावरहाउस:खजूर में ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और सुक्रोज जैसे कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है। वर्कआउट करने वालों या फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोगों के लिए यह एक नेचुरल एनर्जी बूस्टर की तरह काम करता है।2/5Image Source : Magnificपाचन तंत्र के लिए:खजूर में डाइटरी फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। खजूर का सेवन करने से कब्ज, गैस और अपच की समस्या भी दूर होती है।3/5Image Source : Magnificहीमोग्लोबिन बढ़ाए:जिन लोगों के शरीर में खून की कमी है या जो हमेशा थकान व कमजोरी से जूझते हैं, उनके लिए खजूर बहुत फायदेमंद है। खजूर हीमोग्लोबिन के लेवल को तेजी से बढ़ाने में मदद करता है।4/5Image Source : Magnificहड्डियों के लिए:खजूर में कैल्शियम, मैग्नीशियम, कॉपर, सेलेनियम और फॉस्फोरस पाए जाते हैं। ये हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।5/5Image Source : Magnificदिमाग और याददाश्त के लिए: खजूर में एंटीऑक्सीडेंट्स और ब्रेन फंक्शन को सुधारने वाले गुण होते हैं। इसके नियमित सेवन से मानसिक तनाव कम होता है, याददाश्त तेज होती है और बढ़ती उम्र में कॉग्निटिव डिक्लाइन जैसी समस्याओं से बचाव होता है।
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ABP News✓
Nov 3, 2026, 07:31 AM
रात में पेट में जलन के कारणों का पता लगाना

रात में पेट में जलन के कारणों का पता लगाना

कई लोगों को रात में सोने के समय पेट या सीने में जलन महसूस होने लगती है. कुछ लोग इसे सामान्य गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, तो इसकी वजह समझना जरूरी है. रात में खाने का समय, भोजन की मात्रा और सोने का तरीका भी पेट की जलन को बढ़ाता है. इसके अलावा कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह बनती हैं. आइए जानते हैं इसके तीन मुख्य कारण. रात में पेट में जलन होने की सबसे आम वजह एसिड रिफ्लक्स है. इसमें पेट का एसिड वापस भोजन नली की तरफ आने लगता है. इससे सीने और गले में जलन महसूस होती है. खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से यह परेशानी बढ़ती है, क्योंकि लेटने पर एसिड को नीचे जाने में मदद नहीं मिलती. इसके अलावा रात में ज्यादा तेल, मिर्च-मसाले और तली हुई चीजें खाने से भी जलन बढ़ती है. ज्यादा मात्रा में भोजन करने से पेट भरा रहता है और एसिड रिफ्लक्स की परेशानी होती है. चाय, कॉफी, चॉकलेट और कुछ खट्टे खाद्य पदार्थ भी कुछ लोगों में जलन बढ़ाते हैं. इसलिए रात का खाना हल्का रखें और सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खा लें. पेट की अंदरूनी परत में सूजन को गैस्ट्राइटिस कहते हैं. इसकी वजह से पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, दर्द, भारीपन और मतली महसूस होती है. वहीं, पेट या छोटी आंत के शुरुआती हिस्से में घाव होने पर पेप्टिक अल्सर की समस्या होती है. कुछ लोगों में अल्सर का दर्द रात में या खाली पेट बढ़ता है. इसकी वजह एच. पाइलोरी नाम का बैक्टीरिया या लंबे समय तक कुछ दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल भी होता है. इसके अलावा हाइटल हर्निया भी रात में जलन की वजह बनती है. इस स्थिति में पेट का ऊपरी हिस्सा डायाफ्राम के एक हिस्से से होकर छाती की तरफ आ जाता है. इससे कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स बढ़ जाता है. इसके कारण सीने में जलन, खट्टी डकार और खाना वापस गले तक आने जैसी परेशानी होती है. रात में पेट की जलन कम करने के लिए सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खाना खा लें. रात का भोजन हल्का रखें और बहुत ज्यादा तली-भुनी या मसालेदार चीजें खाने से बचें. खाना खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर न जाएं, बल्कि थोड़ी देर टहलें. अगर लेटने पर जलन बढ़ती है, तो बिस्तर के सिर वाले हिस्से को थोड़ा ऊंचा रखें. बार-बार होने वाली परेशानी को सिर्फ घरेलू उपायों से दबाने के बजाय डॉक्टर को दिखाएं. अगर पेट या सीने में जलन लगातार बनी रहती है, निगलने में परेशानी होती है, बार-बार उल्टी आती है या बिना वजह वजन घट रहा है, तो जांच करवाएं. निर्जला गौड़ इस वक्त ABP Live की लाइफस्टाइल डेस्क पर इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं. वह मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में अपनी डिग्री कर रही हैं. इससे पहले वह EBNW Stories में कंटेंट राइटर के तौर पर इंटर्नशिप कर चुकी हैं. डिजिटल जर्नलिज्म और कंटेंट क्रिएशन में उनकी खास रुचि है. आसान, आकर्षक और रिलेटेबल अंदाज में कहानियों को पेश करना और पाठकों तक जानकारी को प्रभावी तरीके से पहुंचाना उनकी खासियत है.
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Nov 3, 2026, 07:21 AM
बच्चन ने स्वास्थ्य, नींद और स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात कीः उनकी स्वास्थ्य दिनचर्या की एक झलक

बच्चन ने स्वास्थ्य, नींद और स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात कीः उनकी स्वास्थ्य दिनचर्या की एक झलक

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी सेहत, नींद और फिटनेस को लेकर खुलकर बात की हैं. उन्होंने बताया कि इन दिनों उन्हें कभी-कभी नींद आने में परेशानी होती है. वहीं, वो एक बार फिर नियमित रूप से जिम जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उम्र के साथ शरीर की अपनी सीमाएं भी महसूस होने लगी हैं. अमिताभ ने कहा कि एक्सरसाइज करने के लिए उनका मन तो तैयार रहता है, लेकिन कई बार शरीर उन्हें थोड़ा आराम करने का इशारा देता है. अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर सुबह जल्दी उठने से लेकर लिखने के दौरान आने वाली परेशानियों तक का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि पिछली रात ब्लॉग पूरा न कर पाने की बात उनके मन में चलती रही, जिसके चलते वो सुबह जल्दी उठ गए. उन्होंने लिखा, 'ब्लॉग लिखते समय अभी भी अक्षरों का फॉन्ट साइज बदलने में परेशानी हो रही है. अगर किसी को इसका तरीका पता है तो मुझे समझाएं. मैंने गूगल पर भी देखा, लेकिन वहां दिए गए निर्देश समझ नहीं आए. आज थोड़ी जल्दी उठ गया, क्योंकि मन में यही चल रहा था कि कल रात ब्लॉग लिख लेना चाहिए था. अब उम्मीद है कि दोबारा नींद आ जाएगी, अगर नींद आई तो.' अमिताभ ने आगे बताया कि इंटरनेट पर नींद लाने के लिए कई तरह के शारीरिक व्यायाम और तरीके बताए जाते हैं. उन्होंने इनमें से कई आजमाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उन्होंने लिखा, 'इंटरनेट पर नींद लाने के लिए कई तरह के शारीरिक तरीके बताए जाते हैं. मैंने सब आजमाकर देख लिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इसलिए सबसे अच्छा है कि प्राकृतिक तरीके से सोने की कोशिश की जाए. कंबल में घुसकर उसी तरह सिमटकर सो जाओ, जैसे दुनिया में आने से पहले मां के गर्भ में थे. और बस, नींद आ जाती है. खर्राटे भी शुरू हो जाते हैं. अब जम्हाई आ रही है, जो ऑक्सीजन की कमी का संकेत है. इसलिए अब आराम करने चलता हूं.' अमिताभ ने अपनी फिटनेस को लेकर भी बात की. उन्होंने बताया कि इन दिनों उनका जिम जाना नियमित नहीं हो पा रहा है और वो फिर से अपनी एक्सरसाइज की दिनचर्या पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. बिग बी ने लिखा, 'जिम जाने की दिनचर्या थोड़ी बिगड़ गई है, इसलिए इसे फिर से नियमित करने की कोशिश कर रहा हूं. लगातार काम करने से शरीर और दिमाग दोनों थक जाते हैं और ऐसे में खुद पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. मन कहता है कि हां, एक्सरसाइज करो, लेकिन शरीर कहता है- थोड़ा रुको दोस्त. अपने अंदर के बूढ़े इंसान को हावी मत होने दो. ये कहना आसान है, लेकिन करना मुश्किल. फिर भी कोशिश करनी होगी और मैं करूंगा.' वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन अपकमिंग फिल्म 'कल्कि 2898 AD - पार्ट 2' में नजर आएंगे.
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India TV
Nov 3, 2026, 02:38 AM
बेहतर पाचन और मनोदशा के लिए सुबह की दिनचर्या

बेहतर पाचन और मनोदशा के लिए सुबह की दिनचर्या

1/5Image Source : Magnificसबसे पहले जब उठे तो अपने फोन को चेक किए बिना दिन की शुरुआत करें। कुछ पल उन चीज़ों के बारे में सोचें जिनके लिए आप शुक्रगुज़ार हैं। कुछ देर स्ट्रैचिंग करें।2/5Image Source : Magnificरोजाना उठने के बाद सुबह करीब 10 मिनट धूप लेने से आपका मूड अच्छा होता है, विटामिन D का लेवल बढ़ता है और आपकी बॉडी क्लॉक ट्रैक पर रहती है।3/5Image Source : Magnificखाने के बाद थोड़ी देर टहलने के लिए निकलें, जिससे खाना अच्छी तरह पच सके। इससे ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी और वजन भी कंट्रोल रहेगा।4/5Image Source : Magnificअपने खाने में दही, योगर्ट, केफिर और किमची जैसी चीजें शामिल करने से अच्छे गट बैक्टीरिया को सपोर्ट मिल सकता है। हल्दी, अदरक, जीरा और सौंफ जैसी जड़ी-बूटियों और मसालों का इस्तेमाल भी आपकी पाचन हेल्थ के लिए अच्छा होता है।5/5Image Source : Magnificहेल्थ एक्सपर्ट का सुझाव है कि अपने पहले और आखिरी खाने के बीच 12 घंटे का गैप रखें, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर बेरीज़ खाएं और अपने शरीर की ज़रूरतों के हिसाब से खाना चुनें।
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Dainik Jagran
Nov 3, 2026, 01:30 AM
प्राकृतिक पेय की शक्तिः स्वास्थ्य और हाइड्रेशन को बढ़ावा देना

प्राकृतिक पेय की शक्तिः स्वास्थ्य और हाइड्रेशन को बढ़ावा देना

आज के समय में फिट और हेल्दी रहना केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि हमारी जरूरत बन चुका है। सेहतमंद रहने के लिए छोटी-छोटी आदतें ही लंबे समय में बड़ा बदलाव लाती हैं, और इसमें सबसे अहम यह है कि हम दिनभर में क्या पीते हैं। कोल्ड ड्रिंक भले ही तुरंत राहत दे, लेकिन अपनी डेली लाइफ में नेचुरल ड्रिंक्स को शामिल करना एक बहुत ही स्मार्ट और हेल्दी चॉइस है। ये प्राकृतिक ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ जरूरी पोषण देते हैं, इम्युनिटी बढ़ाते हैं, पाचन सुधारते हैं और आपको दिनभर एनर्जेटिक बनाए रखते हैं। एक हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर कदम बढ़ाते हुए आइए जानते हैं इन बेहतरीन ड्रिंक्स के बारे में। यह एक बेहतरीन नेचुरल ड्रिंक है जो तुरंत शरीर की प्यास बुझाकर उसे हाइड्रेट करता है। नारियल पानी में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स गर्मी में शरीर को ठंडा रखते हैं और आपकी सारी थकान छूमंतर कर देते हैं। नींबू पानी सिर्फ ताजगी ही नहीं देता, बल्कि शरीर को अंदर से डिटॉक्स भी करता है। विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह आपकी इम्युनिटी को बूस्ट करता है और स्किन को भी ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। खान-पान और सेहत पर आपकी कुंडली के संकेत — फ्री जानें छाछ पीने में हल्की और आसानी से पचने वाली होती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आपके पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ गैस और एसिडिटी की समस्या से भी तुरंत राहत दिलाती है। शरीर को ठंडा रखने और पेट की समस्याओं को दूर करने के लिए बेल का शरबत लाजवाब है। गर्मियों के मौसम में यह खासतौर पर फायदेमंद होता है और शरीर को अंदर से स्ट्रॉन्ग बनाता है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ग्रीन टी शरीर को डिटॉक्स करने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने का शानदार विकल्प है। यह वजन कम करने में भी मददगार है और आपको पूरे दिन तरोताजा महसूस कराती है। संतरा, अनार और तरबूज जैसे ताजे फलों का जूस शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। यह शरीर को तुरंत एनर्जी देने के साथ-साथ आपकी त्वचा को भी हेल्दी बनाए रखता है। पुदीना और जीरा मिलाकर बनाया गया पानी पाचन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है और पेट से जुड़ी समस्याओं को कम करता है। कोल्ड ड्रिंक की जगह इन नेचुरल ड्रिंक्स को चुनना सेहत के लिए एक बेहतरीन फैसला है। ये ड्रिंक्स न सिर्फ आपको हाइड्रेटेड रखते हैं, बल्कि अंदर से पोषण देकर आपको पहले से कहीं ज्यादा फिट और एनर्जेटिक बनाते हैं। वेट लॉस वाली ग्रीन टी को बनाएं टेस्टी, कप में मिलाएं ये चीजें; हर घूंट में मिलेगा नया फ्लेवर पेट की सेहत के लिए वरदान है कांजी, चावल और दही से घर पर बनाना है बेहद आसान; नोट करें रेसिपी
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Dainik Bhaskar
Nov 2, 2026, 10:35 PM
गैस्ट्रोपेरिसिस को समझना-कारण और परिणाम

गैस्ट्रोपेरिसिस को समझना-कारण और परिणाम

आपने दोपहर के खाने में दो रोटी खाई थी। शाम होने को आई, लेकिन अभी तक पेट भरा हुआ है। भूख लगने का नाम ही नहीं ले रही। पेट भी फूला-फूला लग रहा है। कई बार खाने के कुछ घंटे बाद भी ऐसा लगता है, जैसे पेट ने खाना पचाने का प्रोसेस शुरू ही नहीं किया। आपको लग सकता है कि शायद ये गैस या अपच की समस्या है। लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार हो, भूख कम लगे, खाने का मन कम हो और वजन भी घटने लगे, तो सवाल उठता है कि आखिर पेट के भीतर चल क्या रहा है? यह स्थिति ‘गैस्ट्रोपेरेसिस’ हो सकती है। इसलिए आज में गैस्ट्रोपेरेसिस के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. दत्तात्रेय सोलंके, कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई गैस्ट्रोपेरेसिस में पेट खाना पचाने के लिए उसे आगे छोटी आंत तक भेजने में सामान्य से ज्यादा समय लगाता है। इसे एक आसान उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए- आसान शब्दों में इसे ‘पेट के धीरे खाली होने की समस्या’ कह सकते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं- पेन किलर और कुछ दूसरी दवाएं पेट के खाली होने की गति धीमी कर सकती हैं। गैस्ट्रोपेरेसिस के सभी कारण ग्राफिक में देखिए- गैस्ट्रोपेरेसिस होने पर पेट से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसके सभी प्रमुख लक्षण ग्राफिक में देखिए- इन लक्षणों की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है। गैस्ट्रोपेरेसिस का पता लगाने के लिए डॉक्टर पहले मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि खाना खाने के बाद पेट कितनी देर तक भरा रहता है, उल्टी होती है या नहीं और वजन तो नहीं घट रहा। इसके बाद जरूरत के अनुसार कुछ टेस्ट कराए जाते हैं। इसका इलाज इसके कारण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। इलाज का मुख्य उद्देश्य पेट से खाना आगे बढ़ने में मदद करना, लक्षणों को कम करना और शरीर में पोषण की कमी नहीं होने देना है। एक बार में ज्यादा खाने की बजाय दिन में 5–6 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना खाएं। भोजन अच्छी तरह चबाएं। डॉक्टर की सलाह से नरम, अच्छी तरह पका हुआ और कम फैट वाला भोजन लें। कुछ लोगों को कम फाइबर वाला भोजन भी लेने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर पेट से खाना आगे बढ़ाने में मदद करने वाली या मतली और उल्टी कम करने वाली दवाएं दे सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा शुगर पेट की गति को धीमा कर सकती है। अगर मरीज पर्याप्त खाना नहीं खा पा रहा है या वजन घट रहा है, तो डॉक्टर डाइट में बदलाव और पोषण संबंधी मदद की सलाह दे सकते हैं। अगर दवाओं और खानपान में बदलाव से फायदा न हो, तो डॉक्टर एंडोस्कोपी या सर्जरी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर विचार कर सकते हैं। गैस्ट्रोपेरेसिस का कोई एक इलाज सभी मरीजों के लिए सही नहीं होता। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं शुरू या बंद न करें। इससे पाचन और शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलने में परेशानी हो सकती है। इसके सभी संभावित कॉम्प्लिकेशंस पॉइंटर्स से समझिए- खाना कम खा पाने या पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन न होने से शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है। बार-बार उल्टी होने से शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। पर्याप्त भोजन न मिल पाने से वजन घट सकता है और शरीर में कमजोरी आ सकती है। डायबिटीज के मरीजों में खाना देर से पचने के कारण ब्लड शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। पेट में बिना पचा खाना जमा होकर ठोस गांठ बना सकता है। इससे पेट से खाना आगे जाने में रुकावट हो सकती है। संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने से पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। इसे ग्राफिक में देखिए- कुल मिलाकर गैस्ट्रोपेरेसिस के लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लें। सही खानपान, ब्लड शुगर पर नियंत्रण और उचित इलाज से इसे मैनेज किया जा सकता है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि बार-बार पानी पीने के बावजूद मुंह सूखा रहता है? खाना निगलने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है या रात में मुंह सूखने से नींद खुल जाती है? अगर हां, तो इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। यह जेरोस्टोमिया यानी ड्राई माउथ का संकेत हो सकता है।
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Amar Ujala
Nov 2, 2026, 09:30 PM
ब्रेकअप के बाद बाल कटनाः एक गहरी मानसिक प्रक्रिया का पता चला

ब्रेकअप के बाद बाल कटनाः एक गहरी मानसिक प्रक्रिया का पता चला

लखनऊ। कहते हैं पुरानी यादों से निकलने के लिए सबसे पहले अपने पुराने अवतार को बदलो। इससे खुदबखुद बदलाव महसूस होने लगेगा। कुछ ऐसा ही इन दिनों देखने को मिल रहा है। ब्रेकअप के दर्द से उबरने के लिए आंसू बहाना अब पुरानी बात हो गई है। इन दिनों युवतियों में ब्रेकअप के बाद लंबे बालों को छोटे करवाने का ट्रेंड बढ़ रहा है। इससे वे राहत महसूस कर रही हैं।केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के डॉ. सुजीत कुमार कर और लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रो. रिद्धिमा शुक्ला के अनुसार, ब्रेकअप के बाद बाल कटवाना सिर्फ ''फैशन ट्रेंड'' नहीं है, बल्कि गहरी मानसिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे सेल्फ-रिक्लेमेशन यानी खुद को वापस पाने की कोशिश कहते हैं। जब कोई रिश्ता टूटता है या कुछ बुरा होता है तो व्यक्ति खुद के जीवन को अनियंत्रित महसूस करता है। ऐसे में बाल कटवाना नियंत्रण सा लगता है। लंबे बाल पुरानी यादों को समेटे होते है, जिन्हें काटने से कुछ यादें कम होती हैं।विज्ञापनसदियों पुरानी है बदलाव के लिए बाल कटवाने की परंपरामनोचिकित्सक सुजीत कुमार कर बताते हैं कि बदलाव के लिए बाल कटवाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसका उदाहरण है मुंडन संस्कार और किसी की मौत के बाद बाल मुड़वाने की परंपरा। जहां मुंडन संस्कार एक बच्चे को व्यक्तिगत पहचान का प्रतीक माना जाता है। वहीं, किसी की मौत के बाद बाल मुड़वाना यह व्यक्ति ने पुराने स्वरूप को त्यागने का प्रतीक है, जो उस मृत व्यक्ति से जुड़ा था।विज्ञापनबाल कटवाया, पुरानी यादों से मिली आजादीगोमतीनगर के विपुलखंड की 24 वर्षीय देविका (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि वह एक रिश्ते में थीं। प्रेमी को उनके लंबे बाल बहुत पसंद थे। ब्रेकअप के बाद निधि ने सबसे पहले अपने कमर तक लंबे बालों को कटवाकर बॉब स्टाइल में बदल दिया। वह कहती हैं कि जब उन्होंने आईने में खुद को छोटे बालों में नई देविका के रूप में देखा। हेयर कटिंग एक नई आजादी जैसी महसूस हुई। काफी हद तक पुरानी यादों से आजादी मिली और जिंदगी में बदलाव महसूस किया।बाल कटवाने से बदला जीने का अंदाजइंदिरानगर की अंजली (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि ब्रेकअप के बाद उन्हें अपना चेहरा आईने में देखकर पुराना दुख याद आता था। उन्होंने ''पिक्सी कट'' अपनाया। बाल कटवाने के बाद उन्होंने भावनात्मक बोझ काफी हद तक कम महसूस हुआ। इससे जीने का अंदाज भी बदला गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर देखकर बाल कटवाने का फैसला लिया।आगे बढ़ते रहने का आधुनिक तरीका है हेयर कटसोशल मीडिया पर ''ट्रांसफॉर्मेशन रील्स'' का काफी ट्रेंड दिख रहा है। युवतियां रोते हुए लंबे बालों वाले वीडियो से सीधे एक कॉन्फिडेंट लुक और शॉर्ट हेयरस्टाइल में स्विच करती नजर आती हैं। कुछ युवतियां तो पूरे बाल ही मुड़वाती दिख रही हैं। वे इसे मूविंग ऑन (आगे बढ़ते रहने) का एक आधुनिक और सशक्त तरीका मान रही हैं।
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Amar Ujala
Nov 2, 2026, 09:18 PM
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और नरोरा परमाणु केंद्र ने स्वास्थ्य सर्वेक्षण पर सहयोग किया

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और नरोरा परमाणु केंद्र ने स्वास्थ्य सर्वेक्षण पर सहयोग किया

इस संबंध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के नरौरा परमाणु केंद्र के बीच समझौता हुआ है। स्वास्थ्य सर्वेक्षण के तहत परमाणु केंद्र के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले करीब 2.20 लाख लोगों में से 8,796 परिवारों के 43,983 लोगों को शामिल करने का प्रस्ताव है।विज्ञापनइसमें लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जीवनशैली, चिकित्सा इतिहास, प्रजनन स्वास्थ्य और विभिन्न चिकित्सकीय मानकों की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके अलावा पात्र लोगों में मुंह और स्तन कैंसर की जांच भी होगी। यह अध्ययन जेएन मेडिकल कॉलेज का सामुदायिक चिकित्सा विभाग करेगा।विज्ञापनसमझौते पर हस्ताक्षर के दौरान एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून, कुलसचिव प्रो. आसिम जफर, नरौरा परमाणु केंद्र के स्टेशन निदेशक अमरनाथ ठाकुर, मुख्य अन्वेषक प्रो. मोहम्मद अतहर अंसारी और सह-मुख्य अन्वेषक डॉ. अली जाफर आब्दी मौजूद रहे।तीन मौसम में होगा आहार का अध्ययनपरियोजना के दूसरे हिस्से में परमाणु केंद्र के 30 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली करीब 1.99 लाख आबादी का आहार सर्वेक्षण किया जाएगा। यह सर्वे गर्मी, मानसून और सर्दी में तीन चरणों में होगा। इसमें परिवारों के भोजन और पेयजल की खपत का आकलन किया जाएगा। आयु, लिंग और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर लोगों के आहार सेवन का आंकड़ा तैयार होगा। इससे भोजन और पेयजल के माध्यम से शरीर में पहुंचने वाली विकिरण की मात्रा का आकलन करने में वैज्ञानिक मदद मिलेगी।इस तरह की शोध परियोजनाएं यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक और शैक्षणिक विशेषज्ञता को सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान में उपयोग करने का अवसर देती हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रयासों की सराहना करती हूं।-प्रो. नईमा खातून, कुलपति, एएमयूनरौरा परमाणु केंद्र के आसपास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य और खानपान से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी जुटाने के लिए व्यवस्थित वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। यह परियोजना 16 महीने में पूरी की जाएगी। स्वास्थ्य और आहार सर्वेक्षण की अलग-अलग तकनीकी रिपोर्ट तैयार होंगी। अध्ययन शुरू करने से पहले आवश्यक नैतिक स्वीकृति ली जाएगी।-अमरनाथ ठाकुर, स्टेशन निदेशक, नरौरा परमाणु केंद्र
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Amar Ujala
Nov 2, 2026, 08:17 PM
पंचायतों और स्थानीय निकायों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक उपचार सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है

पंचायतों और स्थानीय निकायों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक उपचार सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है

आयुर्वेद विभाग धर्मशाला के उपनिदेशक डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि पंचायतों की बैठकों के दौरान भी चिकित्सा अधिकारी लोगों को आयुर्वेद के महत्व और उपलब्ध उपचार सुविधाओं की जानकारी देंगे।विज्ञापनशिविरों में आयुर्वेद की विभिन्न उपचार पद्धतियों, जीवनशैली में सुधार और योग की उपयोगिता पर भी जानकारी दी जाएगी। पंचकर्म के लाभों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक उपचार सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।विज्ञापनप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत योगाचार्य और योग प्रशिक्षक स्कूलों, पंचायतों तथा महिला मंडलों को योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पंचकर्म की छोटी-छोटी उपचारात्मक प्रक्रियाएं भी की जा रही हैं। विभाग इन केंद्रों और आरोग्य मंदिरों को और सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयासरत है। आयुर्वेद केवल बीमारियों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और स्वास्थ्य संरक्षण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।डॉ. प्रवीण शर्मा के अनुसार विभाग ग्रामीण क्षेत्रों के साथ जिला अस्पतालों और उपमंडल स्तर पर स्थित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य संस्थानों को भी सुदृढ़ करेगा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार करना है, ताकि लोगों को आयुर्वेदिक उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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Amar Ujala
Nov 2, 2026, 06:32 PM
जीवन शैली के कारकों से जुड़े आयु-संबंधी रोगों की युवावस्था में शुरुआत

जीवन शैली के कारकों से जुड़े आयु-संबंधी रोगों की युवावस्था में शुरुआत

पहले जहां इन बीमारियों को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, वहीं अब कम उम्र के लोगों में भी इनके लक्षण सामने आने लगे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, फास्ट फूड और जंक फूड का अधिक सेवन, असंतुलित आहार, व्यायाम की कमी और तनाव इसके प्रमुख कारक हैं।विज्ञापनमंडलीय जिला अस्पताल के प्रभारी एसआईसी डॉ. रामकेवल ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में विभिन्न बीमारियों के प्रतिदिन 1200 से 1300 मरीज पहुंचते हैं। जांच के बाद इनमें से 80 से 90 मरीजों में बीपी और शुगर की समस्या पाई जाती है।विज्ञापनदवा के साथ मरीजों को एहतियात बरतने की भी सलाह दी जाती है। उन्होंने बताया कि समय रहते इन बीमारियों की पहचान और नियमित जांच से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।00बचाव के उपाय-प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या हल्का व्यायाम करें।हरी सब्जियां, फल, दाल और साबुत अनाज को भोजन में शामिल करें।अधिक नमक, मीठे पेय पदार्थ और मिठाइयों के सेवन से बचें।तली-भुनी चीजों और जंक फूड का सेवन सीमित करें।तनाव से बचें, पर्याप्त नींद लें और दिन चर्चा में योग को शामिल करें।समय-समय पर ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच कराएं।कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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India TV
Nov 2, 2026, 02:09 PM
दैनिक आदतें जो मधुमेह के जोखिम को बढ़ाती हैंः एक जीवन शैली रोग

दैनिक आदतें जो मधुमेह के जोखिम को बढ़ाती हैंः एक जीवन शैली रोग

1/5Image Source : UNSPLASHडायबिटीज लाइफस्टाइल से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जो धीरे धीरे शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है। पुणे स्थित इनामदार हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंखे कहती हैं कि खानपान के आलाव रोजाना की कुछ आदतें इस बीमारी का खतरा बढ़ा सकती हैं। तो चलिए जानते हैं किन आदतों से डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है?2/5Image Source : UNSPLASHसुबह नाश्ता स्किप करना: अगर आप सुबह का नाश्ता स्किप करते हैं तो इससे ब्लड शुगर स्पाइक हो सकता है। साथ ही नाश्ता नहीं करने के बाद बहुत तेज भूख लगती है और लोग हेवी कार्बोहाइड्रेटेड वाला खाना खा लेते हैं।3/5Image Source : UNSPLASHदो तीन घंटे एक ही जगह पर बैठना: अगर आप एक ही जगह पर दो से तीन घंटे बैठे रहते हैं तो इससे शुगर स्पाइक और इंसुलिन रेसिस्टेंस का का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए लंबे समय तक बैठने की आदत को बदलें और हर घंटे में 2 से 3 मिनट के लिए उठकर टहल लें।4/5Image Source : UNSPLASHखराब डाइट: डायबिटीज के पीछे सबसे बड़ी वजह है आपकी खराब डाइट। अगर आप अपनी डाइट में मैदा, सफ़ेद ब्रेड और चीनी से भरपूर खाद पदार्थ का सेवन ज़्यादा करते हैं तो इससे भी ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है5/5Image Source : UNSPLASHरात को लेट डिनर करना: अगर आप रात का खाना बहुत ज़्यादा लेट करते हैं तो यह आदत भी डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ा सकती है।
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Nov 2, 2026, 12:02 PM
क्यों बार-बार सिरदर्द अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है

क्यों बार-बार सिरदर्द अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है

सिरदर्द एक आम समस्या है, जिसे अक्सर लोग थकान, तनाव, नींद की कमी या लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करने से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, बार-बार सिरदर्द कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। गाजियाबाद के यशोदा मेडिसिटी में प्रिंसिपल कंसल्टेंट और न्यूरोसर्जन, डॉक्टर गौरव बत्रा, बता रहे हैं कि बार-बार सिरदर्द होना किन बीमारियों का संकेत हो सकता है और किस स्थिति में आपको जानें डॉक्टर के पास जाना चाहिए? : माइग्रेन में सिर के एक या दोनों तरफ तेज दर्द हो सकता है। इसके साथ मतली, उल्टी और रोशनी या तेज आवाज के प्रति संवेदनशीलता भी महसूस हो सकती है। बहुत अधिक बढ़ा हुआ रक्तचाप कुछ स्थितियों में सिरदर्द के साथ दिखाई दे सकता है। हालांकि, हाई ब्लड प्रेशर के ज्यादातर मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। : डॉक्टर गौरव बत्रा कहते हैं कि अगर आप बहुत ज़्यादा तनाव लेते हैं तो इस वजह से भी यह परेशानी हो सकती हैं। मानसिक तनाव, चिंता, अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद न लेने से सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है। : साइनस में सूजन या संक्रमण होने पर माथे, आंखों के आसपास और चेहरे पर दबाव या दर्द महसूस हो सकता है। इसके साथ नाक बंद होना भी संभव है। कुछ मामलों में बार-बार होने वाला या असामान्य सिरदर्द मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल सिरदर्द के आधार पर किसी गंभीर बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। डॉक्टर गौरव बत्रा कहते हैं कि अगर सिरदर्द बार-बार होता है, धीरे-धीरे बढ़ रहा है या दवाइयों के बावजूद ठीक नहीं हो रहा है, तो न्यूरोसर्जन से परामर्श लेना चाहिए। जांच के दौरान यदि मस्तिष्क या रीढ़ से जुड़ी ऐसी समस्या सामने आती है, जिसमें सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है, तो न्यूरोसर्जन की सलाह ली जा सकती है।
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