Achira News Logo
Achira News
N
NDTV India
Mar 20, 2026, 08:42 AM
जटामांसी के तनाव-निवारक गुणः आधुनिक जीवन के लिए एक प्राकृतिक उपचार

जटामांसी के तनाव-निवारक गुणः आधुनिक जीवन के लिए एक प्राकृतिक उपचार

Jatamansi Ke Fayde:आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं. ऐसे में लोग प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपायों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. इन्हीं में से एक खास जड़ी-बूटी है जटामांसी (Jatamansi). यह एक औषधीय पौधा है जो पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है. आयुर्वेद (Ayurveda) में जटामांसी को दिमाग (Brain) को शांत करने और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को बेहतर बनाने के लिए उपयोगी माना जाता है. इसका उपयोग लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) में किया जाता रहा है.जटामांसी से शरीर को मिलते हैं ये सब फायदे- (Benefits Of Jatamansi)तनाव और चिंता कम करने में मददजटामांसी को दिमाग को शांत करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है. कई लोग इसका इस्तेमाल तनाव (Tension) और चिंता (Stress) को कम करने के लिए करते हैं. यह मन को शांत करने में मदद कर सकती है.नींद बेहतर करने में सहायकअगर आपको नींद ठीक से नहीं आती है तो जटामांसी फायदेमंद हो सकती है. आयुर्वेद में इसे अच्छी नींद (Good Sleep) लाने में मददगार माना गया है. यह शरीर को रिलैक्स (Relax) करने में मदद कर सकती है.यह भी पढ़ें:मीठा ही नहीं, ये ‘छिपे हुए कारण' भी चुपचाप बढ़ा देते हैं ब्लड शुगर, एक्सपर्ट की चेतावनी सुनकर रह जाएंगे हैरानदिमाग के लिए फायदेमंदजटामांसी को मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है. यह याददाश्त (Memory) और एकाग्रता (Focus) को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.बालों के लिए भी उपयोगीजटामांसी का इस्तेमाल बालों की देखभाल में भी किया जाता है. कई लोग इसका तेल लगाते हैं, जिससे बाल मजबूत और स्वस्थ रह सकते हैं.कैसे किया जाता है इस्तेमाल? (How To Use Jatamansi)जटामांसी का उपयोग पाउडर, तेल और काढ़े के रूप में किया जाता है. बाजार में इसके कैप्सूल भी मिलते हैं. इसे डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना चाहिए. किसी भी जड़ी-बूटी का अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए सही मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है.Watch Video: Gurudev Sri Sri Ravi Shankar on NDTV: Stress, Anxiety, से लेकर Relationship, Spirituality तक हर बात(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
21 shares
😊
NDTV India logo
NDTV India
Mar 20, 2026, 04:50 AM
हिंदू पंचांग में शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन का महत्व

हिंदू पंचांग में शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन का महत्व

Chandra Darshan Kaise Karte Hain:पंचांग के अनुसार आज चैत्र मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि और आज के दिन चंद्र दर्शन का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. हिंदू धर्म में अमावस्या के बाद निकलने वाले इस चांद के दर्शन और पूजन को अत्यधिक पुण्यदायी और फलदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस प्रकार सूर्योदय के समय सूर्य देवता को देखने से आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, उसी प्रकार चंद्रोदय के समय चंद्र देवता का दर्शन करने पर मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है.जिस चंद्रमा के दर्शन को अत्यंत ही शुभ माना गया है, वह आज कितने बजे निकलेगा? चंद्र दर्शन की पूजा कैसे करनी चाहिए? अगर बादलों के कारण चांद न नजर आए तो कैसे यह पूजा करनी चाहिए. आइए चंद्र दर्शन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों को विस्तार से जानते हैं.आज क​ब निकलेगा चांद?पंचांग के आज सुख-सौभाग्य और मन को मजबूती दिलाने वाले चंद्रमा का उदय सायंकाल 07:00 बजे होगा और यह 07:59 अस्त होगा. ऐसे में चंद्रमा के दर्शन और पूजन के लिए साधकों को लगभग डेढ़ घंटे का समय मिलेगा.चंद्र दर्शन की पूजा विधिचंद्र दर्शन की पूजा के लिए स्नान-ध्यान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो सफेद कपड़े पहनकर चंद्र दर्शन की पूजा करें. इसके बाद चंद्रोदय के समय दूर्ध और जल से अर्घ्य दें. इसके बाद चंद्र देवता को चंदन, अक्षत, खीर, सफेद मिठाई आदि अर्पित करें. फिर चंद्र देवता के मंत्र ॐ सों सोमाय नम:' अथवा ‘ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:' का जप करें. पूजा के अंत में चंद्र देवता की आरती करना और अपनी माता का आशीर्वाद लेना बिल्कुल न भूलें.जब चांद न नजर आए तो कैसे करें पूजा?अगर आज आपके शहर में बादलों के कारण चंद्र देवता के दर्शन न हो पाएं तो आप चंद्र देवता की पूजा करने के लिए एक थाली में चावल से द्वितीया के चांद वाली आकृति बनाएं और उसे किसी चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर रखें. आप चाहें तो चावल की जगह थाली में चांदी का सिक्का रखकर भी चंद्रमा की पूजा कर सकते हैं क्योंकि चांदी को चंद्रमा की धातु माना गया है. इसके बाद चंद्र देवता का ध्यान करते हुए उनकी विधि-विधान से पूजा, उनके मंत्रों का जप तथा आरती आदि करें. इसके अलावा आप तकनीक का सहारा लेकर भी चंद्र दर्शन कर सकते हैं. इसके लिए आप जिन शहरों में चंद्र देवता के दर्शन हो रहे हों, वहां पर मोबाइल पर वीडियो काल के जरिए दर्शन करें.चंद्र दर्शन के लाभहिंदू मान्यता के अनुसार चंद्र दर्शन और पूजन करने पर साधक के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है. चंद्र देवता के दर्शन से मानसिक सुख, शांति और स्थिरता प्राप्त होती है. चंद्र देवता के दर्शन से व्यक्ति के जीवन से निगेटिविटी दूर होती है और पाजिटिविटी बढ़ती है. सनातन परंपरा में सुख-समृद्धि की कामनाओं से जुड़े तमाम चंद्र दर्शन से जुड़े हुए हैं. ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है या फिर जो लोग मानसिक तनाव से घिरे हुए हों, उनके लिए यह चंद्र दर्शन अत्यंत ही शुभ और लाभप्रद साबित होता है.(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
66 shares
😊
A
Amar Ujala
Mar 19, 2026, 01:34 PM
आयुष ओ. पी. डी. सेवाएं शुरू करने के लिए सी. आई. एस. एफ. ने आयुष मंत्रालय के साथ साझेदारी की

आयुष ओ. पी. डी. सेवाएं शुरू करने के लिए सी. आई. एस. एफ. ने आयुष मंत्रालय के साथ साझेदारी की

विस्तारAdd as a preferredsource on googleसीआईएसएफ कार्मिकों के स्वास्थ्य, कल्याण और कार्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके जरिए सीआईएसएफ इकाइयों में 'आयुष' ओपीडी सेवाएं शुरू होंगी। जवानों के स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखा जा सकेगा। इससे जवानों की क्षमता और कार्य कुशलता बढ़ाने में मदद मिलेगी। एमओयू पर सीआईएसएफ की ओर से महानिरीक्षक (प्रशासन) प्रतिभा अग्रवाल तथा आयुष मंत्रालय से सलाहकार (आयुष) डॉ. ए रघु ने हस्ताक्षर किए हैं।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंयह समझौता सीआईएसएफ और आयुष मंत्रालय के बीच एक व्यवस्थित सहयोग स्थापित करेगा, जिसके तहत योग, आयुर्वेद और अन्य आयुष पद्धतियों को सीआईएसएफ कार्मिकों एवं उनके परिवारों के दैनिक जीवन में शामिल किया जाएगा। यह पहल उन विशेष स्वास्थ्य चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनका सामना सीआईएसएफ के कार्मिक कठिन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हुए करते हैं।विज्ञापनविज्ञापनस्वास्थ्य और कल्याण के लिए समग्र दृष्टिकोणसीआईएसएफ कार्मिकों के दृष्टिकोण से यह पहल उनके दैनिक जीवन और सेवा स्थितियों में कई व्यावहारिक लाभ प्रदान करेगी।• नियमित योग सत्र और वेलनेस कार्यक्रम• वैज्ञानिक तरीके से तनाव प्रबंधन• आयुष आधारित उपायों से बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता• आयुष परामर्श और पंचकर्म जैसी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच• स्वस्थ जीवनशैली और रोगों की रोकथाम पर जागरूकता अभियान• बेहतर जीवन गुणवत्ता, फिटनेस और समग्र स्वास्थ्यवेलनेस कैंप और कार्यशालाएं आयोजित होंगीआयुष मंत्रालय इस पहल के लिए तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा, जिसमें मानकीकृत वेलनेस मॉड्यूल, उपचार प्रोटोकॉल और प्रशिक्षित मानव संसाधन शामिल हैं। देशभर में सीआईएसएफ इकाइयों में वेलनेस कैंप, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक कार्मिक इसका लाभ उठा सकें। सीआईएसएफ इकाइयां स्वास्थ्य शिविरों और वेलनेस गतिविधियों के आयोजन के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करेंगी, जबकि आयुष मंत्रालय तकनीकी सहायता, विशेषज्ञता और कार्यक्रमों का डिजाइन उपलब्ध कराएगा।क्षमता और कार्य कुशलता बढ़ाने में महत्वपूर्णसीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन ने कहा, यह एमओयू बल के लिए एक ऐतिहासिक शुरुआत है। आने वाले समय में हमारे कार्मिक इसके महत्व को अपने स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के रूप में महसूस करेंगे। आयुर्वेद, जो सदियों के ज्ञान और अनुभव पर आधारित है, निवारक स्वास्थ्य और संतुलित जीवन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। स्वस्थ बल ही सक्षम बल होता है, और यह पहल सीआईएसएफ के कार्मिकों के कल्याण, उनकी क्षमता और कार्य कुशलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में आयुर्वेद ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसे वैज्ञानिक प्रमाणों और व्यापक स्वीकृति का समर्थन मिला है। कोविड-19 के दौरान इसकी प्रभावशीलता स्पष्ट रूप से सामने आई, जहां प्रमाण आधारित उपायों ने रोकथाम, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
89 shares
😊
A
Amar Ujala
Mar 19, 2026, 11:25 AM
ऋषिकेश-बद्रीनाथ राजमार्ग निर्माण गतिविधियों से धूल प्रदूषण से ग्रस्त

ऋषिकेश-बद्रीनाथ राजमार्ग निर्माण गतिविधियों से धूल प्रदूषण से ग्रस्त

फोटोऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंश्रीनगर। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर इन दिनों धूल की समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। रेलवे परियोजना में लगे डंपर और ट्रकों से सड़क पर गिर रही मिट्टी लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। श्रीकोट पुल से गैस गोदाम तक के मार्ग पर यह समस्या ज्यादा बनी हुई है।हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण जगह-जगह मिट्टी गिर रही है जो सूखकर धूल में तब्दील हो जाती है। डंपर चलने से धूल उड़ रही है। स्थानीय निवासी विभोर बहुगुणा ने बताया कि मिट्टी से कपड़े तो खराब होते ही हैं अब यह धूल स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी इससे प्रभावित हो रहे हैं। रेलवे कार्य की देखरेख कर रही ऋत्विक कंपनी के सेफ्टी मैनेजर मलकीत सिंह ने बताया कि पानी के छिड़काव की अनुमति नहीं है। इसलिए सड़क पर झाड़ू लगाकर सफाई कराई जा रही है। यदि समस्या बनी रहती है तो टीम को मौके पर भेजकर उचित समाधान किया जाएगा। संवादविज्ञापनविज्ञापन
89 shares
😢
TV9 Hindi logo
TV9 Hindi
Mar 19, 2026, 11:15 AM
साबूदाना मिलावट नवरात्रि समारोहों के लिए खतराः सुरक्षित उपवास के लिए प्रामाणिकता की पुष्टि करें

साबूदाना मिलावट नवरात्रि समारोहों के लिए खतराः सुरक्षित उपवास के लिए प्रामाणिकता की पुष्टि करें

Adulteration in Sabudana:19 मार्च से नवरात्रि के पावन अवसर की शुरुआत हो गई है. इन 9 दिन में भक्त व्रत रखते हैं और मां दूर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं. इस दौरान लोग सात्विक और हल्का भोजन करते हैं, जिसमें साबूदाना एक अहम हिस्सा बन जाता है।य साबूदाना खिचड़ी, वड़ा या खीर, ये सभी व्रत के दौरान सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले व्यंजन हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो साबूदाना आप खा रहे हैं, वह असली है या नकली? आजकल बाजार में मिलावट का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और खाद्य पदार्थ भी इससे अछूते नहीं हैं. खासकर त्योहारों के समय जब मांग ज्यादा होती है, तो कुछ लोग मुनाफा कमाने के लिए घटिया या नकली साबूदाना बेचने लगते हैं. यह नकली साबूदाना न सिर्फ स्वाद खराब करता है, बल्कि सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में जरूरी है कि हमे ये पता हो कि हम जो साबूदाना खा रहे हैं वो असली है या नकली. इसके लिए कुछ आसान तरीके भी हैं, जिनकी मदद से आप नकली साबूदाने का पता लगा सकते हैं. चलिए जानते हैं उन 5 तरीकों के बारे में. ये भी पढ़ें:इस दिन शुरू हैं चैत्र नवरात्रि, व्रत के लिए साबूदाना से बनाएं ये 5 टेस्टी चीजें साबूदाना आमतौर पर टैपिओका (कसावा) के स्टार्च से बनाया जाता है, लेकिन ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसमें कई तरह की मिलावट की जाती है. कुछ व्यापारी घटिया क्वालिटी के स्टार्च या दूसरे सस्ते आटे जैसे मैदा या सिंथेटिक स्टार्च का इस्तेमाल करते हैं, जिससे साबूदाने का असली पोषण खत्म हो जाता है. इसके अलावा कुछ मामलों में साबूदाने को ज्यादा चमकदार और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल पॉलिश भी की जाती है. कई बार पुराने या खराब स्टॉक को भी दोबारा प्रोसेस करके बाजार में बेच दिया जाता है. ऐसी मिलावट न सिर्फ स्वाद को खराब करती है, बल्कि पेट से जुड़ी समस्याएं और एलर्जी जैसी दिक्कतें भी पैदा कर सकती है. चलिए जानते हैं नकली साबूदाने का पता लगाने के तरीके. पानी में भिगोकर जांच करें-साबूदाने को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगो दें. असली साबूदाना फूलकर नरम हो जाता है और अपनी शेप बनाए रखता है, जबकि नकली साबूदाना या तो पूरी तरह घुलने लगता है या बहुत ज्यादा चिपचिपा हो जाता है. रंग और चमक पर ध्यान दें-असली साबूदाना हल्का सफेद और नेचुरल नजर आता है. अगर साबूदाना बहुत ज्यादा चमकदार या एकदम सफेद दिखे, तो इसमें केमिकल पॉलिश होने की संभावना हो सकती है. इस तरह के साबूदाने को खाने से बचें. हाथ से दबाकर देखें-सूखे साबूदाने को उंगलियों से दबाने पर असली दाना आसानी से नहीं टूटता, जबकि नकली या मिलावटी साबूदाना जल्दी चूरा बन जाता है. पकाने के बाद टेक्सचर जांचें-असली साबूदाना पकने के बाद दाने-दाने अलग और मुलायम रहता है. वहीं नकली साबूदाना बहुत ज्यादा चिपचिपा या गाढ़ा पेस्ट जैसा बन सकता है. स्वाद और गंध से पहचानें-असली साबूदाना स्वाद में हल्का और सामान्य होता है. अगर इसमें अजीब सी गंध आए या स्वाद अलग लगे, तो समझ लें कि इसमें मिलावट हो सकती है. ये भी पढ़ें:Navratri 2026: इस दिन से शुरु हो रहे नवरात्रि, व्रत की थाली में सजाएं न्यूट्रिशन से भरपूर ये चीजें
63 shares
😢
TV9 Hindi logo
TV9 Hindi
Mar 19, 2026, 08:24 AM
कुट्टू आटाः एक पौष्टिक उपवास विकल्प या संभावित एलर्जी ट्रिगर?

कुट्टू आटाः एक पौष्टिक उपवास विकल्प या संभावित एलर्जी ट्रिगर?

आज से नवरात्रि शुरू हो गए हैं और इस दौरान लोग व्रत में कुट्टू के आटे का खूब सेवन करते हैं. कुट्टू का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है, जो पाचन के लिए हल्का माना जाता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ इम्यूनिटी को भी मजबूत करते हैं. यह दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है. कुट्टू का आटा व्रत के दौरान शरीर को जरूरी पोषण देता है, जिससे कमजोरी महसूस नहीं होती. इसके अलावा यहवजन कंट्रोलकरने में भी सहायक माना जाता है. लेकिन हर चीज हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होती. इसी तरह कुट्टू का आटा भी कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसलिए इसे खाने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. आइए जानते हैं कि किन लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. दिल्ली में जीटीबी हॉस्पिटल में पूर्व डायटिशियन डॉ. अनामिका गौरबताती हैं कि जिन लोगों को एलर्जी की समस्या होती है, उन्हें कुट्टू का आटा खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्किन रैश, खुजली या सूजन हो सकती है. जिनका पाचन तंत्र कमजोर है, उनके लिए यह आटा भारी पड़ सकता है और गैस या पेट दर्द की समस्या बढ़ा सकता है. लो ब्लड प्रेशर वाले लोगों को भी इसका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुट्टू ब्लड प्रेशर को और कम कर सकता है. किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो किडनी पर असर डाल सकते हैं. छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी इसे सीमित मात्रा में ही देना चाहिए, ताकि कोई दिक्कत न हो. अगर पहले कभी इसे खाने के बाद परेशानी हुई हो, तो दोबारा सेवन करने से बचना बेहतर होता है. कुट्टू का आटा खाते समय कुछ जरूरी सावधानियां रखना बेहद जरूरी है. इसे हमेशा ताजा और अच्छी क्वालिटी का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि खराब आटा सेहत बिगाड़ सकता है. ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने से पेट संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं, इसलिए संतुलित मात्रा में ही खाएं. व्रत के दौरान सिर्फ कुट्टू पर निर्भर न रहें, बल्कि फल और अन्य हल्के आहार भी शामिल करें. अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो इसे खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है. पहली बार खाने पर थोड़ी मात्रा से शुरुआत करें, ताकि शरीर की प्रतिक्रिया समझ आ सके. सही तरीके से और संतुलन में खाया गया कुट्टू का आटा ही आपके लिए फायदेमंद साबित होता है.
81 shares
😊
L
Live Hindustan
Mar 19, 2026, 08:02 AM
विशेषज्ञों ने भारी, तैलीय और मसालेदार खाद्य पदार्थों के बजाय संतुलित आहार का आग्रह किया

विशेषज्ञों ने भारी, तैलीय और मसालेदार खाद्य पदार्थों के बजाय संतुलित आहार का आग्रह किया

आज के समय में लोग स्वाद के चक्कर में भारी, तैलीय और मसालेदार खाने को अपनी डाइट का हिस्सा बना लेते हैं और उसे ही कई बार हेल्दी समझ बैठते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली पोषण सादे और संतुलित खाने में होता है। SUPERMOMSUPERMOM Coconut Scraper 1 Pc – Stainless Steel Coconut Scraper with Vacuum Bas, Manual Hand Roller Grater & Crusher Tool for Efficient Crusher in The Kitchen, Durable & Rust-Resistant for Kitchen Use BmadoBmado Traditional Polished Wooden Table-Top Manual Coconut Scraper – Chirava Grater Thengai Thuruvi with Stainless Steel Blade, Comfortable to Use (Weight - 850 Gram) HAZELHAZEL Stainless Steel Coconut Grater | Chirava Coconut Scraper Manual Wooden Handle | Handheld Coconut Peeler Scrapper | Kitchen Accessories Items KomalKomal Stainless Steel Coconut Scrapper with Vaccum Base,Silver AnjaliAnjali Pastel Coconut Scraper Blue – Sleek Stainless Steel Blade with Polypropylene, ABS & Nylon Body, Strong Vacuum Base for Firm, Steady & Sturdy Operation – HCO3(B) Fortis के डॉक्टर शुभम वात्स्य के अनुसार, साउथ इंडियन फूड एक ऐसी डाइट है जो स्वाद और सेहत का बेहतरीन संतुलन होती है। इडली, डोसा और सांभर जैसे व्यंजन नेचुरल तरीके से फर्मेंटेड होते हैं जिनमें प्रोबायोटिक्स, फाइबर और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते हैं। यह ना सिर्फ पाचन को सुधारते हैं बल्कि शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ाते हैं। कम तेल और ज्यादा पोषण के कारण यह खाना वजन कंट्रोल और गट हेल्थ के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। अगर आप सच में हेल्दी लाइफस्टाइल चाहते हैं, तो साउथ इंडियन फूड को अपनी डाइट में शामिल करें। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर को फिट और एक्टिव रखने में भी मदद करता है। इसके अलावा किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।
64 shares
😐
One India logo
One India
Mar 19, 2026, 06:38 AM
फिटनेस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए युजवेंद्र चहल ने आईपीएल 2026 से पहले शराब छोड़ दी

फिटनेस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए युजवेंद्र चहल ने आईपीएल 2026 से पहले शराब छोड़ दी

IPL 2026 Yuzvendra Chahal:आईपीएल इतिहास के सबसे सफल गेंदबाजयुजवेंद्र चहल(Yuzvendra Chahal) ने आईपीएल 2026 सीजन से पहले एक बड़ा खुलासा किया है। चहल ने बताया कि उन्होंने पिछले छह महीनों से शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दिया है। चहल ने यह फैसला खेल की तरफ फोकस को बढ़ाने और साथ ही आईपीएल में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए लिया है। आईपीएल के अपने पूर्व आरसीबी साथी एबी डिविलियर्स के यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए चहल ने अपनी फिटनेस को लेकर कुछ बातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस साल मेरे मन ने कहा कि मुझे अपने शरीर का सबसे पहले ख्याल रखना है। मैं 35 साल का हो चुका हूं और अपनी टीम के लिए 150 प्रतिशत योगदान देना चाहता हूं। एक सीनियर गेंदबाज के तौर पर मैं चाहता हूं कि युवा खिलाड़ी मुझे देखकर कुछ सीखें। पिछले साल (नवंबर 2025) चहल डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से भी जूझें थे। जिसके बाद उन्होंने अपने लाइफस्टाइल में यह बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया। पिछले साल पंजाब किंग्स (PBKS) की टीम आईपीएल खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंच गई थी, लेकिन फाइनल में आरसीबी (RCB) के खिलाफ उसे 6 रन से हार का सामना करना पड़ा। चहल ने इस हार पर दुख जताते हुए बताया कि वे खुद चोटों से जूझ रहे थे। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ मैच के बाद उन्हें (पसली में फ्रैक्चर) हुआ था और बाद में उनकी उंगली में भी चोट आई थी। चहल ने स्वीकार किया कि चोट के कारण वे सेमीफाइनल और फाइनल में अपनी लेग-स्पिन नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज मार्को यानसेन की अनुपस्थिति को भी हार की एक बड़ी वजह बताया।
72 shares
😊
D
Dainik Jagran
Mar 19, 2026, 05:49 AM
वृक्षारोपण के लिए धनराशि का कोई हिसाब नहीं, अधिकारी की निराशा बढ़ी

वृक्षारोपण के लिए धनराशि का कोई हिसाब नहीं, अधिकारी की निराशा बढ़ी

जागरण संवाददाता, कानपुर देहात।हमने आपको करोड़ों रुपये दिए लेकिन उन जगहों पर कहीं कोई पेड़ नहीं दिख रहे हैं। यह सब क्या है? हम पैसे तो दे ही रहे हैं, आप अपनी सेहत बना रहे हो। इसके साथ पेड़ों की भी सेहत ठीक रहे। ऐसे काम नहीं चलेगा।
35 shares
😢
L
Live Hindustan
Mar 19, 2026, 05:20 AM
खुशी का रहस्यः एक स्वस्थ शरीर और मन

खुशी का रहस्यः एक स्वस्थ शरीर और मन

आपने नोटिस किया होगा कुछ लोग हमेशा खुश होते हैं। उनकी लाइफ में बड़ी से बड़ी मुश्किलें आ जाए लेकिन वो उसे भी पार कर लेते हैं। दरअसल, इस हैप्पीनेस का राज उनकी सेहत में छिपा होता है। हेल्दी बॉडी में हेल्दी माइंड होता है जो आपको सही रास्ता दिखाने और नयी चीजों को सीखने, आगे बढ़ने में मदद करता है। तो अगर आप चाहते हैं कि हैप्पी लाइफ जिए तो सबसे पहले सेहत को सुधारें, और सेहत में सुधार एक दिन नहीं बल्कि हर दिन की कोशिश के बाद होता है। जब आप अपनी आदतों में बदलाव करते हैं तो हेल्थ में भी वो चेंज नजर आता है। नतीजा आपका मन खुश रहता है और आप ज्यादा हैप्पी रहते हैं। योगाचार्य हंसा योगेंद्र ने अपनी किताब में हैप्पी लाइफ के 7 सीक्रेट शेयर किए हैं। FOXWHEELFOXWHEEL® 4MM Thick, Light Weight with Anti-Slip Dual Side Embossed Yoga Mat with Carrying Strap For Men aand Women (4MM, Black) LifelongLifelong Yoga Mat for Men & Women | 5mm Thick TPE Cushioning | Non-Toxic & Sweat-Resistant | Lightweight & Portable with Carry Bag | Home & Studio Workout Mat | Made in India (Maroon) LifelongLifelong 6mm Dual Color TPE Material Anti-Slip Yoga Mat for Home, Gym, Yoga, Workout and Exercise for Women & Men (6 Months Warranty,Llym115), Navy Blue/Blue Fitness MantraFitness Mantra® 4mm Anti-Slip Yoga Mat for Yoga Exercise |Qnty.-1 Pcs.| With Carrying Strap| Blue, 4mm| Fitness MantraFitness Mantra® 4mm Marble Design Anti Skid Yoga Mat for Men & Women| Qnty.-1 Pcs.|,Ethylene Vinyl Acetate,Purple YOGARISEYogarise 6mm Anti-Skid Yoga Mat with Carry Bag, Eco-Friendly, Water-Resistant, Non-Toxic, Super Soft, Easy to Fold, Durable, Lightweight, Perfect for Yoga, Pilates, Gym & Outdoor Workouts (Wine) BoldfitBoldfit Yoga Mats For Women yoga mat for men Exercise mat for home workout gym mate Anti Slip gym mats 4mm Steel Grey LifelongLifelong LLYM71 Yoga mat for Women & Men EVA Material 4mm Anti-Slip Mat for Workout|Exercise Mat For Home Gym | Yoga Mat-For Gym-Workout and Yoga Exercise I Green BoldfitBoldfit Yoga Mats For Women Men Exercise Mat For Home Gym Anti Slip 6mm Workout Yoga Mat Gym Mats - Beetle Grey, Ethylene Vinyl Acetate BoldfitBoldfit Yoga Mat Carry Bag - Durable, Lightweight & Stylish with Drawstring Closure and Strap, Premium Carry Bag, Yoga Mat Not Included हैप्पी लाइफ जीना है तो सबसे पहले अपने वर्क लाइफ को बैलेंस करें। काम करना इंसान की जरूरत है लेकिन काम से खुद को बिल्कुल थका लेना ठीक नहीं। इसलिए अपने पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाकर रखें। माइंड में जितना ज्यादा निगेटिव विचार आएंगे वो स्ट्रेस को बढ़ाएंगे। स्ट्रेस कॉर्टिसोल लेवल को बढ़ाता है जिससे बॉडी में इंफ्लेमेशन और क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जाता है। इसलिए अपनी सोच को बदलना जरूरी है। पॉजिटिव माइंटसेट ना केवल हेल्थ को बदलता है बल्कि आपको लाइफ में कई सारे बदलाव देखने को मिलते हैं। हैप्पी रहने में आपकी सोशल लाइफ का भी खास योगदान होता है। योगाचार्य हंसा कहती हैं कि जब आप पर्सनली लोगों से मिलते हैं तो उनसे कनेक्ट हो पाते हैं। जबकि सोशल मीडिया पर या डिजिटली इमोशनली कनेक्ट नहीं हो पाते। इसलिए अगर हैप्पी लाइफ जीना है तो पर्सनली लोगों से कनेक्ट होने की कोशिश करें, डिजीटली नहीं। हैप्पी लाइफ का एक मंत्र खुशहाल रिश्ते भी होते हैं। मनुष्य सामाजिक प्राणी है और उसने अपने आसपास बहुत सारे रिश्तों को बुना है। तो अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो प्यार से उन रिश्तों को समझें और निभाएं। कई बार ये रिलेशनशिप ही आपको खुश रहने में मदद करते हैं। हेल्दी और हैप्पी दोनों के लिए नींद अच्छी होना जरूरी है। नींद केवल बॉडी को रिसेट नहीं करती बल्कि ये माइंड को भी रीसेट करती है। जिससे हैप्पी हार्मोंस रिलीज होते हैं और आप ज्यादा खुश महसूस करते हैं। माइंडफुल ईटिंग और सोचसमझ कर खाना। इन दिनों खानपान को लेकर अवेयरनेस फैली है। हमे अपने शरीर की जरूरत के मुताबिक भोजन करना चाहिए। गैर जरूरी,जंकफूड जैसे फूड्स शरीर को बीमार बना रहे हैं। अपनी हैबिट में माइंडफुल ईटिंग को शामिल करें। जिससे आप हेल्दी रह सकें। हैप्पी लाइफ का सबसे लास्ट और सबसे खास सीक्रेट है योगासन, जो आपको हेल्दी रहने में मदद करता है। फिजिकली और मेंटली हेल्दी रहने के लिए अपनी आदतों में योगासन को शामिल करें। ये बॉडी और माइंड का कनेक्शन बनाते हैं और हेल्दी रहने में मदद करते हैं।
26 shares
😐
Navbharat Times logo
Navbharat Times
Mar 19, 2026, 05:04 AM
महिलाओं में हार्मोनल बदलावः योग के साथ तनाव का प्रबंधन

महिलाओं में हार्मोनल बदलावः योग के साथ तनाव का प्रबंधन

महिलाओं के शरीर में हर उम्र में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। पीरियड्स शुरू होने से लेकर मेनोपॉज तक महिलाओं का शरीर कई तरह के हार्मोनल बदलाव से गुजरता है। जब महिलाएं 30 की उम्र में होती हैं तो शरीर में हार्मोन्स के कारण होने वाले बदलावों के साथ ही उन्हें एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।30 की उम्र में ज्यादातर महिलाओं को घर, परिवार, बच्चों के साथ करियर भी संभालना होता है। इतनी सारी जिम्मेदारियां निभाते हुए हार्मोन्स का असंतुलन उनका तनाव बढ़ा देता है। इससे बचने के लिए महिलाओं को 7 योगासन करने चाहिए। ये 7 योगासन ऊर्जा, स्थिरता और मानसिक शांति में सहायक हैं।1. हीलिंग वॉकहीलिंग वॉक (सांकेतिक तस्वीर)हीलिंग वॉक एक लाभकारी प्रैक्टिस है। इसमें कंधों के स्तर तक हाथों को उठाकर चलना होता है। हीलिंग वॉक किसी भी समय किया जा सकता है। शुरुआत में हीलिंग वॉक को 30 सेकंड से शुरू करके पांच बार दोहराया जा सकता है। धीरे-धीरे इसे इसे एक मिनट और फिर पांच मिनट तक बढ़ाया जा सकता है।हीलिंग वॉक से गर्दन, कंधों और फेफड़ों की सक्रियता बढ़ती है। हाथों को ऊपर उठाए रखने से सांस लेने की क्षमता बढ़ती है, ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार मजबूत होता है, जिससे विचारों में स्पष्टता आती है। नियमित रूप से हीलिंग वॉक करने से एनर्जी लेवल बढ़ता है, भावनात्मक संतुलन बना रहता है और सोच सकारात्मक होती है।2. सिद्ध वॉक (इन्फिनिटी वॉक)इन्फिनिटी वॉक (सांकेतिक तस्वीर)सिद्ध वॉक को इन्फिनिटी वॉक भी कहा जाता है। इसमें आठ के आकार में चलना होता है। यह लयबद्ध गति शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करती है। सिद्ध वॉक से ब्लड सर्कुलेशन और मेटबॉलिज्म बढ़ता है।जिन महिलाओं को पीसीओएस या पीसीओडी जैसी हार्मोनल समस्याएं हैं उनके लिए सिद्ध वॉक फायदेमंद है। इससे तनाव कम होता और एकाग्रता बढ़ती है। नियमित रूप से सिद्ध वॉक करने से धैर्य, भावनात्मक स्थिरता और मानसिक स्पष्टता विकसित करने में मदद मिलती है।3. बद्धकोणासन (Butterfly Pose)बद्धकोणासन (सांकेतिक तस्वीर)बद्धकोणासन बैठने की ऐसी मुद्रा है जिसमें पैरों के तलवों को आपस में मिलाकर धीरे-धीरे घुटनों को तितली के पंखों की तरह ऊपर-नीचे हिलाया जाता है। यह कूल्हों और श्रोणि क्षेत्र यानी पेल्विक एरिया को लचीला बनाने वाला आसान योगासन है। बद्धकोणासन शरीर के निचले हिस्से में रक्त संचार में सुधार करता है।लंबे समय तक बैठे रहने से कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से में कभी-कभी अकड़न आ जाती है। बद्धकोणासन तनाव को कम करता है, प्रजनन स्वास्थ्य यानी रिप्रोडक्टिव हेल्थ को बढ़ाता है और आराम प्रदान करता है। नियमित रूप से बद्धकोणासन करने से शरीर हल्का महसूस होता है और आराम मिलता है।4. विपरीतकरणी आसन (Legs-Up-the-Wall Pose)विपरीतकरणी आसन (सांकेतिक तस्वीर)यह आसन विशेषकर महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है। विपरीतकरणी आसन में पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को दीवार के सहारे ऊपर उठाया जाता है। इस दौरान कंधे और सिर जमीन पर तथा हथेलियां दोनों तहफ फैली हुई होती हैं।यह आसन लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने के कारण पैरों में होने वाली सूजन और भारीपन को कम करने में सहायक है। विपरीतकरणी आसन ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है, नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और थकान दूर करता है। दिन भर के तनाव से राहत पाने के लिए यह आसन शाम के समय करना फायदेमंद है।5. वज्रासन (Thunderbolt Pose)वज्रासन (सांकेतिक तस्वीर)वज्रासन घुटनों के बल बैठकर किया जाने वाला आसन है। इसमें पैरों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है। एड़ियों पर सहारा लेकर रीढ़ की हड्डी को सीधा किया जाता है। वज्रासन भोजन के बाद आराम से किया जा सकता है।यह आसन पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। मेहनती और व्यस्त दिनचर्या वाली महिलाओं के लिए वज्रासन आराम करने और गहरी सांसें लेने का बेहतरीन अवसर है। यह आसन शरीर की मुद्रा को मजबूत करता है, पीठ को सहारा देता है और मन को शांत करता है। वज्रासन करने से शारीरिक और मानसिक स्थिरता दोनों में मदद मिलती है।6. बालासन (Child's Pose)बालासन (सांकेतिक तस्वीर)यह ऐसा आसन है जिसमें व्यक्ति शिशु के समान विश्राम मुद्रा में होता है। इसमें दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाते हुए शरीर को आगे की तरफ मोड़ा जाता है, जिससे माथा और दोनों हथेलियां जमीन को छूती हैं। यह आसन पीठ, कंधों और गर्दन के तनाव को दूर करता है, नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को आराम देता है और भावनाओं को शांत करता है। कुछ मिनट बालासन में रहने से तनाव दूर होता है और सुरक्षा का अनुभव होता है।7. भुजंगासन (Cobra Pose)भुजंगासन (सांकेतिक तस्वीर)भुजंगासन में पेट के बल लेटकर छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है और रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर मोड़ा जाता है। इस आसन में नाभि का हिस्सा जमीन पर टिका रहता है। भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। छाती और फेफड़ों को खोलकर सांस लेने की क्षमता को सुधारता है।डेस्क जॉब करने वाले लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं। इससे उनका बॉडी पोस्चर बिगड़ जाता है। भुजंगासन गलत बॉडी पोस्चर को सुधारने में सहायक है। यह आसन करने से एनर्जी लेवल बढ़ता है, सांस लेने की क्षमता सुधरती है, ताजगी का अनुभव होता है।महिलाओं के लिए योग क्यों जरूरी ?योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर महिलाएं शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव को कंट्रोल कर सकती हैं। 30 की उम्र में महिलाओं को ऊपर बताई गई 7 योग तकनीकों को अपने रूटीन में शामिल करना चाहिए। इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
61 shares
😐
Navbharat Times logo
Navbharat Times
Mar 19, 2026, 05:04 AM
महिलाओं के हार्मोनल परिवर्तन और योगः मध्य-जीवन में संतुलन खोजना

महिलाओं के हार्मोनल परिवर्तन और योगः मध्य-जीवन में संतुलन खोजना

महिलाओं के शरीर में हर उम्र में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। पीरियड्स शुरू होने से लेकर मेनोपॉज तक महिलाओं का शरीर कई तरह के हार्मोनल बदलाव से गुजरता है। जब महिलाएं 30 की उम्र में होती हैं तो शरीर में हार्मोन्स के कारण होने वाले बदलावों के साथ ही उन्हें एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।30 की उम्र में ज्यादातर महिलाओं को घर, परिवार, बच्चों के साथ करियर भी संभालना होता है। इतनी सारी जिम्मेदारियां निभाते हुए हार्मोन्स का असंतुलन उनका तनाव बढ़ा देता है। इससे बचने के लिए महिलाओं को 7 योगासन करने चाहिए, जो ऊर्जा, स्थिरता और मानसिक शांति में सहायक हैं।1. हीलिंग वॉकहीलिंग वॉक (सांकेतिक तस्वीर)हीलिंग वॉक एक लाभकारी प्रैक्टिस है। इसमें कंधों के स्तर तक हाथों को उठाकर चलना होता है। हीलिंग वॉक किसी भी समय किया जा सकता है। शुरुआत में हीलिंग वॉक को 30 सेकंड से शुरू करके पांच बार दोहराया जा सकता है। धीरे-धीरे इसे इसे एक मिनट और फिर पांच मिनट तक बढ़ाया जा सकता है।हीलिंग वॉक से गर्दन, कंधों और फेफड़ों की सक्रियता बढ़ती है। हाथों को ऊपर उठाए रखने से सांस लेने की क्षमता बढ़ती है, ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार मजबूत होता है, जिससे विचारों में स्पष्टता आती है। नियमित रूप से हीलिंग वॉक करने से एनर्जी लेवल बढ़ता है, भावनात्मक संतुलन बना रहता है और सोच सकारात्मक होती है।2. सिद्ध वॉक (Infinity Walk)इन्फिनिटी वॉक (सांकेतिक तस्वीर)सिद्ध वॉक को इन्फिनिटी वॉक भी कहा जाता है। इसमें आठ के आकार में चलना होता है। यह लयबद्ध गति शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करती है। सिद्ध वॉक से ब्लड सर्कुलेशन और मेटबॉलिज्म बढ़ता है।जिन महिलाओं को पीसीओएस या पीसीओडी जैसी हार्मोनल समस्याएं हैं उनके लिए सिद्ध वॉक फायदेमंद है। इससे तनाव कम होता और एकाग्रता बढ़ती है। नियमित रूप से सिद्ध वॉक करने से धैर्य, भावनात्मक स्थिरता और मानसिक स्पष्टता विकसित करने में मदद मिलती है।3. बद्धकोणासन (Butterfly Pose)बद्धकोणासन (सांकेतिक तस्वीर)बद्धकोणासन बैठने की ऐसी मुद्रा है जिसमें पैरों के तलवों को आपस में मिलाकर धीरे-धीरे घुटनों को तितली के पंखों की तरह ऊपर-नीचे हिलाया जाता है। यह कूल्हों और श्रोणि क्षेत्र यानी पेल्विक एरिया को लचीला बनाने वाला आसान योगासन है। बद्धकोणासन शरीर के निचले हिस्से में रक्त संचार में सुधार करता है।लंबे समय तक बैठे रहने से कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से में कभी-कभी अकड़न आ जाती है। बद्धकोणासन तनाव को कम करता है, प्रजनन स्वास्थ्य यानी रिप्रोडक्टिव हेल्थ को बढ़ाता है और आराम प्रदान करता है। नियमित रूप से बद्धकोणासन करने से शरीर हल्का महसूस होता है और आराम मिलता है।4. विपरीतकरणी आसन (Legs-Up-the-Wall Pose)विपरीतकरणी आसन (सांकेतिक तस्वीर)यह आसन विशेषकर महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है। विपरीतकरणी आसन में पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को दीवार के सहारे ऊपर उठाया जाता है। इस दौरान कंधे और सिर जमीन पर तथा हथेलियां दोनों तहफ फैली हुई होती हैं।यह आसन लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने के कारण पैरों में होने वाली सूजन और भारीपन को कम करने में सहायक है। विपरीतकरणी आसन ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है, नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और थकान दूर करता है। दिन भर के तनाव से राहत पाने के लिए यह आसन शाम के समय करना फायदेमंद है।5. वज्रासन (Thunderbolt Pose)वज्रासन (सांकेतिक तस्वीर)वज्रासन घुटनों के बल बैठकर किया जाने वाला आसन है। इसमें पैरों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है। एड़ियों पर सहारा लेकर रीढ़ की हड्डी को सीधा किया जाता है। वज्रासन भोजन के बाद आराम से किया जा सकता है।यह आसन पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। मेहनती और व्यस्त दिनचर्या वाली महिलाओं के लिए वज्रासन आराम करने और गहरी सांसें लेने का बेहतरीन अवसर है। यह आसन शरीर की मुद्रा को मजबूत करता है, पीठ को सहारा देता है और मन को शांत करता है। वज्रासन करने से शारीरिक और मानसिक स्थिरता दोनों में मदद मिलती है।6. बालासन (Child's Pose)बालासन (सांकेतिक तस्वीर)यह ऐसा आसन है जिसमें व्यक्ति शिशु के समान विश्राम मुद्रा में होता है। इसमें दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाते हुए शरीर को आगे की तरफ मोड़ा जाता है, जिससे माथा और दोनों हथेलियां जमीन को छूती हैं। यह आसन पीठ, कंधों और गर्दन के तनाव को दूर करता है, नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को आराम देता है और भावनाओं को शांत करता है। कुछ मिनट बालासन में रहने से तनाव दूर होता है और सुरक्षा का अनुभव होता है।7. भुजंगासन (Cobra Pose)भुजंगासन (सांकेतिक तस्वीर)भुजंगासन में पेट के बल लेटकर छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है और रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर मोड़ा जाता है। इस आसन में नाभि का हिस्सा जमीन पर टिका रहता है। भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। छाती और फेफड़ों को खोलकर सांस लेने की क्षमता को सुधारता है।डेस्क जॉब करने वाले लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं। इससे उनका बॉडी पोस्चर बिगड़ जाता है। भुजंगासन गलत बॉडी पोस्चर को सुधारने में सहायक है। यह आसन करने से एनर्जी लेवल बढ़ता है, सांस लेने की क्षमता सुधरती है, ताजगी का अनुभव होता है।महिलाओं के लिए योग क्यों जरूरी ?योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर महिलाएं शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव को कंट्रोल कर सकती हैं। 30 की उम्र में महिलाओं को ऊपर बताई गई 7 योग तकनीकों को अपने रूटीन में शामिल करना चाहिए। इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
50 shares
😐
Navbharat Times logo
Navbharat Times
Mar 19, 2026, 04:55 AM
युजवेंद्र चहल ने 35 साल की उम्र में शराब छोड़ी, आईपीएल 2026 से पहले क्रिकेट पर दिया ध्यान

युजवेंद्र चहल ने 35 साल की उम्र में शराब छोड़ी, आईपीएल 2026 से पहले क्रिकेट पर दिया ध्यान

नई दिल्ली:भारतीय क्रिकेट के सबसे चुलबुले और चतुर स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जो उनके फैंस के लिए गुड न्यूज से कम नहीं है। 35 साल की उम्र में पंजाब किंग्स के इस सीनियर गेंदबाज ने शराब से पूरी तरह तौबा कर ली है, ताकि वे मैदान पर अपना 100 प्रतिशत दे सकें।शरीर पहले, शराब बाद में, चहल का बड़ा फैसलाआईपीएल 2026के आगाज से पहले चहल ने एक इंटरव्यू में अपनी नई जीवनशैली के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'इस साल मेरे मन ने कहा कि मुझे सबसे पहले अपने शरीर का ध्यान रखना है। मैं आपको एक अच्छी खबर देना चाहता हूं, मैंने शराब पीना छोड़ दिया है। अब छह महीने से ज्यादा का समय हो गया है। मैं 35 साल का हूं और अब मैं और अधिक सक्रिय होना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि जब मैं आईपीएल में जाऊं, तो युवा खिलाड़ी मुझे देखकर कुछ सीखें।'मुश्किल दौर से उबरकर वापसी की तैयारीपिछले कुछ सालयुजवेंद्र चहलके लिए मैदान के अंदर और बाहर काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। पिछले साल चहल और धनश्री वर्मा के बीच चले महीनों के विवाद के बाद आधिकारिक तौर पर उनका तलाक हो गया। वे 2023 से टीम इंडिया से बाहर हैं। वे भारत के लिए 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन सकते थे, लेकिन 96 पर ही अटक गए, जबकि अर्शदीप, बुमराह और हार्दिक इस आंकड़े को पार कर गए। पिछले साल पंजाब किंग्स के लिए उन्होंने 14 मैचों में 16 विकेट लिए थे और टीम को 11 साल बाद प्लेऑफ में पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी, हालांकि टीम फाइनल हार गई थी।क्या पंजाब का खिताबी सूखा खत्म करेंगे चहल?पंजाब किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स ऐसी दो पुरानी टीमें हैं जिन्होंने 2008 से अब तक एक बार भी आईपीएल ट्रॉफी नहीं जीती है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पंजाब की टीम इस बार काफी मजबूत दिख रही है। 28 मार्च से शुरू हो रहे आईपीएल में पंजाब अपना पहला मैच 31 मार्च को गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेलेगा। चहल, जो अब लीग के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं, अपनी नई ऊर्जा और अनुशासन के साथ पंजाब को पहली बार चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
18 shares
😢
L
Live Hindustan
Mar 19, 2026, 03:41 AM
युजवेंद्र चहल ने आईपीएल 2026 से पहले शराब पीना छोड़ दिया, पंजाब किंग्स के लिए प्रयास करने का लक्ष्य रखा

युजवेंद्र चहल ने आईपीएल 2026 से पहले शराब पीना छोड़ दिया, पंजाब किंग्स के लिए प्रयास करने का लक्ष्य रखा

IPL 2026 का आगाज होने में कुछ ही दिनों का समय रह गया है, ऐसे में अधिकतर खिलाड़ियों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। 2 महीने तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ी अपनी फिटनेस पर भी पूरी तरह ध्यान दे रहे हैं। पंजाब किंग्स के स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी निजी जिंदगी में आए एक बड़े बदलाव के बारे में बात की है। चहल के लिए पिछला कुछ समय अच्छा नहीं रहा है, वह काफी उतार-चढ़ाव से गुजरें हैं। इस दौरान उन्होंने कुछ गलत चीजों का भी सेवन शुरू कर दिया था। हालांकि उन्होंने बताया कि वह 6 महीने से इन सबसे दूर हैं और आईपीएल में अपनी टीम के लिए 100 नहीं बल्कि 150 प्रतिशत देने के लिए तैयार हैं। एबी डी विलियर्स के यूट्यूब पर बात करते हुए चहल ने बताया कि उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया है। इसके जवाब में, साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान ने जोर से खुशी जाहिर की और भारतीय स्पिनर के इस फैसले की तारीफ की। युजवेंद्र चहल ने कहा "मैंने शराब पीना छोड़ दिया है, और इसे छह महीने से ज़्यादा हो गए हैं। अब मैं 35 साल का हूं, इसलिए मैं ज्यादा एक्टिव रहना चाहता हूं और अपनी टीम के लिए अपना 150% देना चाहता हूं। एक सीनियर खिलाड़ी के तौर पर, मैं चाहता हूं कि IPL में लोग मुझसे कुछ सीखें।" पंजाब किंग्स का दिल पिछली बार फाइनल में आरसीबी ने तोड़ा था, जब 6 रनों से खिताबी मुकाबला जीतकर बेंगलुरु ने पहली बार ट्रॉफी उठाई थी। चहल का कहा कि फाइनल में उन्हें एक गेंदबाज की कमी खली थी, अगर वह होता तो नतीजा कुछ और होता। चहल ने कहा, “फाइनल में हमें जानसेन की कमी खली, क्योंकि वह वहां मौजूद नहीं थे। अगर वह वहां होते, तो हम निश्चित रूप से चैंपियनशिप जीत जाते। पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह से उन्होंने गेंदबाजी की, वह शानदार थी; और बल्लेबाज़ी में भी, वह आखिर में दो-तीन छक्के लगाने में सक्षम थे। जिस तरह से वह अब गेंदबाजी कर रहे हैं, उससे हमारा आत्मविश्वास और भी बढ़ गया है। विरोधी टीम के ओपनर्स के लिए यह आसान नहीं होने वाला है।”
11 shares
😢
Dainik Jagran logo
Dainik Jagran
Mar 19, 2026, 01:30 AM
महिलाओं में थायराइड कैंसर होने का खतरा अधिकः अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़ों का खुलासा

महिलाओं में थायराइड कैंसर होने का खतरा अधिकः अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़ों का खुलासा

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं आजकल आम हो गई हैं, लेकिन जब बात थायरॉइड कैंसर की आती है, तो इसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। क्या आप जानते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड कैंसर होने का खतरा लगभग 3 से 4 गुना ज्यादा होता है?
65 shares
😢
T
TV9 Hindi
Mar 19, 2026, 01:28 AM
चैत्र नवरात्रि 2026: मां शैलपुत्री की पूजा शुभ प्रसाद के साथ शुरू

चैत्र नवरात्रि 2026: मां शैलपुत्री की पूजा शुभ प्रसाद के साथ शुरू

Chaitra Navratri 2026 Day 1:पंचांग के अनुसार, शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि आज यानी 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो गया है.नवरात्रिके नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. उत्सव के पहले दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री के पूजन का विधान है. मान्यता है कि मां शैलपुत्री की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को यश, कीर्ति और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए उनके पसंदीदा भोग का बहुत महत्व है? आइए जानते हैं मां को क्या अर्पित करें. मां शैलपुत्री को घी का भोग बेहद प्रिय है. पूजा में घी अर्पित करने से शरीर निरोगी रहता है और घर में सुख-समृद्धि आती है. ऐसा माना जाता है कि घी का दान करने से भी विशेष पुण्य मिलता है. मां को सफेद रंग की मिठाइयां जैसे बर्फी, पेड़ा या खीर चढ़ाना शुभ माना जाता है. सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है, जो मां को प्रसन्न करता है. दूध, दही और उनसे बनी चीजें मां को अर्पित करने से घर में शांति और सौभाग्य बढ़ता है. मिश्री का भोग लगाने से जीवन में मिठास बनी रहती है और रिश्तों में मधुरता आती है. नवरात्रि का पहला दिन नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह दिन चंद्रमा से जुड़ा होता है, इसलिए मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन के लिए भी यह पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है. ये भी पढ़ें:Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के 9 दिनों में बन रहे हैं ये दुर्लभ शुभ योग, जानें आपकी राशि पर क्या होगा असर Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.
56 shares
😊
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Mar 19, 2026, 01:27 AM
चैत्र नवरात्रिः भक्ति और आध्यात्मिक विकास का नौ दिवसीय उत्सव

चैत्र नवरात्रिः भक्ति और आध्यात्मिक विकास का नौ दिवसीय उत्सव

विस्तारAdd as a preferredsource on googleChaitra Navratri 1st Day:आज, 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है। धर्म ग्रंथों के अनुसार नवरात्रि माता भगवती की आराधना, संकल्प, साधना और सिद्धि का दिव्य समय है। यह तन-मन को निरोग रखने का सुअवसर भी है। देवी भागवत के अनुसार देवी ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं। भगवान महादेव के कहने पर रक्तबीज, शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटभ आदि दानवों का संहार करने के लिए माँ पार्वती ने असंख्य रूप धारण किए, किंतु देवी के प्रमुख नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी मां के विशिष्ट रूप को समर्पित होता है और हर स्वरूप की उपासना करने से अलग-अलग प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानी चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ मां के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-आराधना होती है। आइए जानते हैं संपूर्ण पूजन विधि और महत्व।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रथम दिन का आरंभ और शैलपुत्री पूजननवरात्रि पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के पहले स्वरूप ‘शैलपुत्री’ का पूजन किया जाता है। चैत्र नवरात्रि 19 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो रहे हैं और इसी दिन से साधना का शुभारंभ होता है। यह दिन साधक के लिए आस्था और संकल्प का प्रतीक होता है, जहां से पूरे नौ दिनों की आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ होती है।विज्ञापनविज्ञापनशैलपुत्री का स्वरूप और आध्यात्मिक महत्वपर्वतराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है। वृषभ पर विराजमान इस माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित हैं। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इनका पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और यहीं से योग साधना का आरंभ होता है, जो साधक के जीवन में स्थिरता और संतुलन स्थापित करता है।Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में रखने जा रहे हैं पूरे नौ दिन के व्रत ? जानें इससे जुड़े जरूरी नियमशैलपुत्री की पूजा विधिप्रथम नवरात्रि के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।इसके बाद विधिपूर्वक कलश स्थापना करें। माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें।इसके पश्चात रोली, अक्षत, पुष्प और विशेष रूप से सुगंधित फूल अर्पित करें।माता को सफेद वस्त्र, घी का दीपक और नैवेद्य के रूप में शुद्ध घी या उससे बने प्रसाद का भोग लगाना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का जप करें और श्रद्धा भाव से आरती करें।अंत में अपनी मनोकामना के साथ देवी का ध्यान करें।Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में मां की स्थापना करते समय न करें ये गलती, जानें इससे जुड़े नियमपूजा का फल और कृपा का प्रभावमाँ शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं, जो सहज भाव से पूजन करने पर शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। इनकी कृपा से जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया उनका पूजन साधक के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है।Chaitra Navratri 2026: माता रानी को खुश करने के लिए करें ये उपाय, प्रसन्न होंगी देवी और बरसेगी कृपाआत्मबल और मानसिक स्थिरता का आधारयदि मन विचलित रहता हो या आत्मबल में कमी महसूस होती हो, तो शैलपुत्री की आराधना विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। उनकी उपासना से व्यक्ति के भीतर साहस, धैर्य और आत्मविश्वास का विकास होता है। यह साधना जीवन के आरंभिक आधार को मजबूत करती है और व्यक्ति को आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।विज्ञापनविज्ञापनसबसे विश्वसनीयहिंदी न्यूज़वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ेंआस्था समाचारसे जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसेपॉज़िटिव लाइफ़फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभीधर्मऔरत्योहारआदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करेंअमर उजाला हिंदी न्यूज़ APPअपने मोबाइल पर।
76 shares
😐
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Mar 18, 2026, 09:32 PM
यमुनानगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जांच की गई

यमुनानगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जांच की गई

यमुनानगर। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का स्वास्थ्य विभाग (एडमिन) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव के नेतृत्व में पहुंची नौ सार्थक टीमो ने निरीक्षण किया। इस दौरान कई खामियां सामने आईं। मंगलवार की रात करीब 10 बजे से लेकर देर रात एक बजे तक टीम ने मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान इमरजेंसी, ब्लड बैंक और लैब जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में कई तरह की कमियां उजागर हुईं।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंस्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, जवाबदेही और प्रदर्शन को सुधारने के उद्देश्य से गठित इस निगरानी टीम ने जिला नागरिक अस्पताल से लेकर उप जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी तक व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव, विभिन्न विभागों में पहुंचे और वहां मौजूद स्टाफ से बातचीत कर व्यवस्था की जानकारी ली। सबसे चिंताजनक पहलू स्टाफ की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आया। कई कर्मचारियों को यह तक नहीं पता था कि जरूरी दस्तावेजों को किस क्रम में और कैसे फाइल में लगाया जाना चाहिए। वहीं लैब में मौजूद स्टाफ को उपकरणों को सही तरीके से संचालित करना भी नहीं आता था। इस स्थिति पर संबंधित नोडल अधिकारियों के पास भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।विज्ञापनविज्ञापनदवाओं, उपकरणों और सफाई की स्थिति संतोषजनक नहींसार्थक टीम ने मंगलवार की शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक उप जिला अस्पताल जगाधरी का निरीक्षण किया। अस्पतालों में कई स्थानों पर दवाओं, उपकरणों और साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन टीम ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए। बुधवार सुबह भी टीम ने अपना निरीक्षण जारी रखा और जगाधरी अस्पताल के साथ-साथ शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह सहित जिले के कई वरिष्ठ चिकित्सक भी टीम के साथ मौजूद रहे। टीम द्वारा चिह्नित की गई खामियों की रिपोर्ट जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सौंपा जाएगा। टीम वीरवार को भी जिले में ही मौजूद रहेंगी। संवाद
36 shares
😐
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Mar 18, 2026, 08:20 PM
बढ़ते तापमान के बीच रामपुर जिला अस्पताल में डायरिया के मामले बढ़े

बढ़ते तापमान के बीच रामपुर जिला अस्पताल में डायरिया के मामले बढ़े

रामपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में डायरिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज डायरिया की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ गई है। इनमें से आठ मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंचिकित्सकों के अनुसार, मौसम में बदलाव, दूषित पानी का सेवन और खानपान में लापरवाही डायरिया फैलने के प्रमुख कारण हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में यह बीमारी तेजी से असर कर रही है। अस्पताल में ओपीडी से लेकर वार्ड तक मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही है।विज्ञापनविज्ञापनडॉक्टरों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि उबालकर या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। इसके अलावा दस्त और उल्टी की शिकायत होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई, ताकि समय रहते इलाज मिल सके और स्थिति गंभीर न हो।--------------------------गर्मी शुरू होते ही अस्पताल में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। मरीजों को उपचार के साथ बचाव की सलाह दी जा रही है। अस्पताल में इस समय आठ मरीज भर्ती हैं, जिनका उपचार चल रहा है। -डॉ. बीसी सक्सेना, सीएमएस
48 shares
😢
Navbharat Times logo
Navbharat Times
Mar 18, 2026, 06:37 PM
अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी कंपनियों ने 100,000 डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क का विरोध किया

अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी कंपनियों ने 100,000 डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क का विरोध किया

H-1B Visa Fees Waiver:अमेरिका में जब से H-1B वीजा की 1 लाख डॉलर वाली नई फीस का ऐलान हुआ है, तब से ही टेक, फाइनेंस समेत हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियां परेशान हैं। उनके लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करना महंगा हो चुका है। इसी बीच अमेरिका में मंगलवार को सदन में एक द्विदलीय बिल पेश किया गया। इसमें डॉक्टर और नर्स समेत विदेशी हेल्थकेयर वर्कर्स को H-1B पर हायर करने के लिए 1 लाख डॉलर की जो फीस देनी है, उससे छूट देने की मांग की गई है।H-1B Visa Fees बढ़ोतरी: US Court Ruling और Legal Challenge का Impact समझेंराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल सितंबर मेंH-1Bकी नई फीस का ऐलान किया। इस वजह से उन अस्पतालों से लिए हायरिंग महंगी हो चुकी है, जो विदेशी हेल्थकेयर वर्कर्स को नौकरी देते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, विदेशी मेडिकल रेजिडेंट भी H-1B पर ही आते हैं, उन्हें लाना भी महंगा हो चुका है। आमतौर पर अमेरिका के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्थानीय डॉक्टर्स काम करने से बचते हैं। ऐसे में ज्यादातर विदेशी डॉक्टर्स यहां मरीजों का इलाज करते हैं। ये इलाके विदेशी डॉक्टर्स पर काफी निर्भर हैं।ट्रंप के खिलाफ पक्ष-विपक्षन्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 'अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन' (AMA) के अधिकारियों ने द्विदलीय बिल का स्वागत किया है। द्विदलीय बिल का मतलब है कि इसे ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों का समर्थन मिला है। एक तरह से ट्रंप के फीस वाले फैसले के खिलाफ पक्ष-विपक्ष दोनों साथ आ गए हैं। बिल को माइक लॉलर, सैनफर्ड डी बिशप, मारिया एल्विरा सालाजार और येवेट क्लार्क जैसे सांसदों ने स्पांसर किया है।AMA के अध्यक्ष डॉ. बॉबी मुक्कामाला ने कहा, 'मैं फ्लिंट,मिशिगनमें रहता हूं, जो मेडिकल सेवाओं के मामले में काफी पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां लोग विदेशी डॉक्टर्स के भरोसे हैं। अगर ये (फीस) फिक्स नहीं होता है, तो इसकी वजह से मेरे शहर और अन्य ग्रामीण इलाकों के पास अपने लोगों का इलाज करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर्स नहीं होंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'इनमें से ज्यादातर इलाकों में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि यहां रहने वाले मरीज जरूरत पड़ने पर डॉक्टर्स को दिखा सकें।' AMA ने गुजारिश की है कि कांग्रेस इस पर जल्दी फैसला ले।भारतीयों को बिल पास होने से होगा फायदाAMA के मुताबिक, अमेरिका को 2036 तक 86 हजार डॉक्टरों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। भारत अमेरिका में विदेशी डॉक्टर्स का सबसे बड़ा सोर्स है। नर्स के मामले में भी वो दूसरा सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है। इंडिया हाउस फाउंडेशन के मुताबिक, अमेरिका में 25 फीसदी डॉक्टर्स विदेशी हैं, जिसमें से लगभग 60 हजार भारत से हैं। इसी तरह से विदेशी नर्सों की संख्या 5.50 लाख के आसपास है, जिसमें से भारत की 32 हजार नर्सें भी शामिल हैं।इस तरह अगर ये बिल पास हो जाता है, तो फिर भारतीय डॉक्टर्स और नर्सों के लिए अमेरिका में जॉब पाना आसान हो सकता है। इसका फायदा उन MBBS स्टूडेंट्स को भी मिलेगा, जो अमेरिका में रेजिडेंसी करना चाहते हैं। इसके अलावा अगर किसी को नर्स की जॉब चाहिए, तो उनके लिए भी अमेरिका में दरवाजे खुल जाएंगे। H-1B वीजा की फीस की वजह से नर्सों की भी बड़े पैमाने पर कमी हो गई है। भारतीय नर्सें इस कमी को पूरा कर सकते हैं।
33 shares
😢
L
Live Hindustan
Mar 18, 2026, 01:22 PM
नवरात्रि उपवासः स्वस्थ उपवास के लिए साबूदाना के लाभ और नुकसान

नवरात्रि उपवासः स्वस्थ उपवास के लिए साबूदाना के लाभ और नुकसान

नवरात्रि का समय मां दुर्गा की उपासना के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। कहते हैं कि सच्चे मन से देवी की पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। ऐसे में देवी को खुश करने के लिए लोग 9 दिनों तक उपवास रखते हैं। वैसे तो व्रत रखना सेहत के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है, लेकिन नवरात्रि व्रत के दौरान बहुत से लोग ब्लोटिंग या गैस की समस्या का शिकार हो जाते हैं।इससे बचाव के लिए पहले से जानें तरीके। व्रत के खाने में बहुत से लोग साबूदाना को शामिल करते हैं। वैसे तो इसके खाने के कई फायदे हैं लेकिन ये स्टार्च से भरपूर होता है इसलिए बहुत ज्यादा खाने पर इससे गैस की समस्या हो सकती है। इसे दही के साथ खाने पर इससे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। ध्यान रखें कि आप एक बार में इसे बहुत ज्यादा मात्रा में न खाएं। चाय-कॉफी पीने की आदत से व्रत में बचना मुश्किल होता है। कुछ लोग व्रत में खाली पेट बहुत ज्यादा चाय और कॉफी पीते हैं जिसकी वजह से एसिडिटी और गैस की दिक्कत बढ़ सकती है। इसलिए कोशिश करें कि आप पहले कुछ खा लें और फिर चाय पिएं। इसके अलावा दिन में सिर्फ एक ही बार चाय पिएं। व्रत में केला, सेब, पपीता जैसे फलों को खाना अच्छा रहता है। हालांकि, फल और दूध को एक साथ नहीं खाना चाहिए। फल सिर्फ खाली पेट या मील के बीच में ले सकते हैं। व्रत में दही या लस्सी जैसी चीजों को पिएं। ये सेहत के लिए बहुत अच्छी होती हैं, क्योंकि ये पेट के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं और ब्लोटिंग कम करते हैं। व्रत के दौरान लोग एनर्जी सेव करने के लिए एक जगह पर ज्यादा समय बिता देते हैं। हालांकि, व्रत में पूरे दिन बैठने से भी गैस बनती है। इसलिए कम से कम 10–15 मिनट टहलें। पाचन को बेहतर बनाने के लिए हल्का योगाभ्यास भी करें। ब्लोटिंग की समस्या से अक्सर व्रत में परेशान होते हैं तो पानी की मात्रा पर ध्यान दें। कम पानी पीने से भी ब्लोटिंग हो सकती है। आप गुनगुना पानी पी सकते हैं और इसके अलावा नींबू पानी भी आपके लिए अच्छा है, ये पेट हल्का रखता है।
42 shares
😢
A
Amar Ujala
Mar 18, 2026, 12:22 PM
सोनीपत के हिंदू गर्ल्स कॉलेज में स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन

सोनीपत के हिंदू गर्ल्स कॉलेज में स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन

फोटो - 4और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंमाई सिटी रिपोर्टरसोनीपत। हिंदू गर्ल्स कॉलेज के ऑडिटोरियम में बुधवार को राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। फिजिशियन डॉ. दीप्ति अग्रवाल ने स्वास्थ्य जांचने के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. विपाशा अग्रवाल ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर विद्यार्थियों में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाते हैं।विज्ञापनविज्ञापनउप प्राचार्य डॉ. अनीता गोयल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाजसेवा की भावना को सुदृढ़ करते हैं। विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूक बनाते हैं। एनएसएस इकाइयों के प्रोग्राम ऑफिसर्स डॉ. नीलम, डॉ. पूनम रानी ने कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई।
95 shares
😐
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Mar 18, 2026, 12:22 PM
भारतीय पुरुष पर बहस के दौरान गर्भवती पत्नी को लात मारने का आरोप

भारतीय पुरुष पर बहस के दौरान गर्भवती पत्नी को लात मारने का आरोप

मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव नगला बाग रठौरा में गत माह हुए विवाद में सुनील कुमार की गर्भवती पत्नी के पेट पर लात मारने से उसकी तबियत बिगड़ गई थी। पुलिस ने इस मामले में दंपती सहित तीन लोगों के खिलाफ एनसीआर दर्ज की थी। मंगलवार को महिला के पेट में दर्द होने पर सुनील ने डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर की सलाह पर पति ने महिला का अल्ट्रासाउंड कराया। इसमें गर्भस्थ शिशु की मौत होने की पुष्टि हुई। डॉक्टर की सलाह पर ऑपरेशन से प्रसव कराकर महिला की जान बचाई गई। इसके साथ ही पुलिस को सूचना देकर नवजात शिशु के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। परिजन आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
3 shares
😢
T
TV9 Hindi
Mar 18, 2026, 10:03 AM
चेतावनी संकेत आपकी कसरत की दिनचर्या तनाव का कारण बन सकती है

चेतावनी संकेत आपकी कसरत की दिनचर्या तनाव का कारण बन सकती है

आजकल फिट रहने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. लोग जिम, योग और अलग-अलग वर्कआउट रूटीन को अपनी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बना रहे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो वर्कआउट आपको हेल्दी बनाने के लिए किया जा रहा है, वही आपकी सेहत पर उल्टा असर भी डाल सकता है? कई बार जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज या गलत तरीके से किया गया वर्कआउट शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव डालने लगता है, जिसका असर धीरे-धीरे दिखता है. ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि आपका वर्कआउट रूटीन आपको फायदा दे रहा है या तनाव बढ़ा रहा है. शरीर समय-समय पर कुछ संकेत देता है, जिन्हें पहचानना जरूरी है. अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया गया, तो यह आपकी ओवरऑल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है. इसलिए आइए जानते हैं वो 5 संकेत, जो बताते हैं कि आपका वर्कआउट रूटीन आपको स्ट्रेस्ड बना रहा है. ये भी पढ़ें:Detox Water Benefits: डिटॉक्स वॉटर पीने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं ? एक्सपर्ट ने बताया एक्सरसाइज को अक्सर हर समस्या का हल बताया जाता है. यह बेहतर मूड, मजबूत शरीर और लंबे समय तक अच्छी सेहत का वादा करती है और ज्यादातर लोगों के लिए यह सच भी साबित होता है. लेकिन सच तो ये है कि जब वर्कआउट जरूरत से ज्यादा किया जाए तो ये हमे रिलैक्स करने के बजाए स्ट्रेस देता है. ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि हमारा शरीर सिर्फ मेहनत पर ही रिएक्शन नहीं देता, बल्कि उस पर पड़ने वाले दबाव (लोड) पर भी रिएक्ट करता है. जब यह दबाव एक सीमा से आगे निकल जाता है, तो रिकवरी स्लो होने लगती है. हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं और दिमाग उस चीज से भी दूर भागने लगता है जिसे हम कभी पसंद करते थे. यह आलस नहीं होता, बल्कि शरीर का एक संकेत होता है कि अब बैलेंस की जरूरत है. आमतौर पर एक अच्छा वर्कआउट शरीर को थकाता जरूर है, लेकिन साथ ही सुकून भी देता है. सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो जाती हैं, मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं और दिमाग हल्का महसूस करता है.पबमेड के मुताबिक,लेकिन जब एक्सरसाइज जरूरत से ज्यादा या बहुत तेज हो जाती है, तो इसका असर उल्टा पड़ने लगता है. शरीर में एक अजीब सी बेचैनी बनी रहती है, नींद प्रभावित होने लगती है और कई घंटों बाद भी शरीर ऑन एज यानी तनाव की स्थिति में बना रहता है. ऐसा इसलिए होता है कि, क्योंकि ज्यादा समय तक किए वर्कआउट से कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है. नतीजा ये निकलता है कि शरीर रिलैक्स फील करने के बजाए स्ट्रेस फील करता है. मसल्स में हल्का दर्द होना आम बात है, जो 1 से 2 दिन में ठीक भी हो जाता है. लेकिन जब ये दर्द लंबे समय तक रहता है तो समझ जाएं कि शरीर पर दबाव ज्यादा पड़ रहा है. अक्सर लोग रिकवरी को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे मांसपेशियों, जोड़ों और टिश्यूज को ठीक होने का समय नहीं मिल पाता. धीरे-धीरे यह छोटे-छोटे चोट (माइक्रो-इंजरी) का रूप ले लेता है.अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो आगे चलकर लंबे ब्रेक लेने की नौबत आ सकती है. एक्सरसाइज को बेहतर नींद के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. लेकिन जब वर्कआउट रूटीन जरूरत से ज्यादा कठिन हो जाए या गलत समय पर किया जाए, तो इसका असर नींद पर उल्टा पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में लोगों को सोने में दिक्कत होने लगती है, बार-बार नींद खुलती है या फिर पूरी नींद लेने के बाद भी थकान महसूस होती है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण होता है शरीर का ओवरस्टिम्युलेट होना. खासकर रात में देर से किए गए हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट या लगातार बिना ब्रेक के कठिन एक्सरसाइज करने से नर्वस सिस्टम एक्टिव बना रहता है. ऐसे में शरीर गहरी और सुकून भरी नींद के लिए जरूरी शांत अवस्था में नहीं पहुंच पाता. जब नींद सही से नहीं आएगी तो स्ट्रेस भी बढ़ेगा. फिटनेस में प्रोग्रेस के दौरान थकान महसूस होना आम बात है, लेकिन यह थकान कुछ समय के लिए होती है और उसके बाद रिलैक्श फील होता है. लेकिन जब थकान लगातार बनी रहे, तो यह संकेत होता है कि कुछ सही नहीं है. इस तरह की थकान ज्यादा गहरी महसूस होती है. वर्कआउट शुरू करने से पहले ही मांसपेशियां भारी लगने लगती हैं. जो एक्सरसाइज पहले आसान लगती थी, अब वही ज्यादा मुश्किल महसूस होने लगती है. यह स्थिति अक्सर ओवरट्रेनिंग सिंड्रोम से जुड़ी होती है, जिसमें शरीर के पास खुद को ठीक करने और दोबारा मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा और संसाधन नहीं होते. ये भी पढ़ें:Bone Tuberculosis: हड्डियों में टीबी कब होती है? एक्सपर्ट से जानें इससे कैसे बचें
55 shares
😐
India TV logo
India TV
Mar 18, 2026, 08:23 AM
पौष्टिक स्मूदीः वजन कम करने का एक स्वादिष्ट तरीका

पौष्टिक स्मूदीः वजन कम करने का एक स्वादिष्ट तरीका

किसी भी व्रत में फल, मेवा और दूध आसानी से खा सकते हैं। इन सारी चीजों को मिलाकर टेस्टी और ठंडी-ठंडी स्मूदी बना सकते हैं। केला, सेब और दूसरे फलों से आप अलग-अलग स्मूदी बना सकते हैं। इसमें तेल और चीनी बिल्कुल नहीं होता है। यही वजह है स्मूदी वजन घटाने में भी मदद करती हैं। स्मूदी पीने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है।
97 shares
😊
DNA Hindi logo
DNA Hindi
Mar 18, 2026, 06:44 AM
बैठने की आदत रीढ़ की हड्डी की बीमारियों से जुड़ी है; विशेषज्ञों ने पोस्टर सुधारक पट्टों की सुरक्षा पर चेतावनी दी

बैठने की आदत रीढ़ की हड्डी की बीमारियों से जुड़ी है; विशेषज्ञों ने पोस्टर सुधारक पट्टों की सुरक्षा पर चेतावनी दी

लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत ने पीठ और कंधे के दर्द को ही नहीं बल्कि रीढ़ की हड्डियों का भी लोगों को रोगी बना दिया है. साइटिका और टेलबोन के दर्द के साथ स्पोंडिलाइटिस जैसी बीमारियां युवाओं तक में तेजी से बढ़ रही हैं. खासकर आईटी और मीडिया सेक्टर और घर पर लंबे समय तक काम करने वाले लोगों में यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है. इसी के चलते बाजार में पोस्टर करेक्टर बेल्ट जैसे प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है, जिन्हें लोग तुरंत राहत देने वाला समाधान मान लेते हैं. लेकिन क्या यह वाकई सुरक्षित और प्रभावी है, इस पर विशेषज्ञों की राय थोड़ी अलग है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे उपकरण अस्थायी सहारा जरूर दे सकते हैं, लेकिन इन्हें स्थायी इलाज समझ लेना गलत हो सकता है. क्योंकि ये कई बार ब्रेन के कामकाज को तक को प्रभावित करने लगते हैं. क्या करती है पोस्टर करेक्टर बेल्ट? पोस्टर करेक्टर बेल्ट कंधों को पीछे की ओर खींचकर शरीर को सीधा रखने में मदद करती है. इससे कुछ समय के लिए रीढ़ की स्थिति बेहतर दिख सकती है और मांसपेशियों पर दबाव कम महसूस होता है. डॉक्टरों के अनुसार, इसे सीमित समय तक यूज कर सकते हैं. आमतौर पर 1 से 2 घंटे तक इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जाता है. लेकिन इसका असर केवल बाहरी सपोर्ट तक सीमित रहता है, यह मूल समस्या का समाधान नहीं करता. लंबे समय तक इस्तेमाल क्यों हो सकता है नुकसानदायक विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे शरीर की मांसपेशियां खुद ही रीढ़ को सपोर्ट करने के लिए बनी होती हैं. जब हम लगातार बेल्ट पहनते हैं, तो ये मांसपेशियां कम सक्रिय हो जाती हैं. एक फिजियोथेरेपिस्ट के अनुसार, “लंबे समय तक बाहरी सपोर्ट लेने से मसल्स की ताकत घट सकती है, जिससे शरीर खुद को संभालने की क्षमता खोने लगता है.” इसके अलावा, बहुत टाइट बेल्ट पहनने से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है और सांस लेने में भी असहजता महसूस हो सकती है. क्या यह रीढ़ की समस्या को ठीक करता है? यह एक आम गलतफहमी है कि पोस्टर बेल्ट पहनने से रीढ़ की हड्डी स्थायी रूप से सीधी हो जाती है. असल में यह केवल शरीर को एक निश्चित पोजिशन में रखने में मदद करता है, लेकिन रीढ़ से जुड़ी मूल समस्या जैसे मांसपेशियों की कमजोरी या गलत बैठने की आदत जैसी की वैसी ही रहती है. डॉक्टरों का कहना है कि बिना सलाह के इसका उपयोग करने से समस्या बढ़ भी सकती है. मस्तिष्क और मांसपेशियों के तालमेल पर असर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बेल्ट का इस्तेमाल शरीर और मस्तिष्क के बीच प्राकृतिक तालमेल को प्रभावित कर सकता है. जब शरीर को बार-बार बाहरी सहारा मिलता है, तो दिमाग मांसपेशियों को सक्रिय रखने के संकेत कम भेजता है. इससे धीरे-धीरे शरीर की प्राकृतिक मुद्रा नियंत्रण क्षमता कमजोर हो सकती है. बेहतर विकल्प क्या हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, सही पोस्टर बनाए रखने के लिए सबसे प्रभावी तरीका नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सुधार है. हर 30–40 मिनट में उठकर चलना, सही तरीके से बैठना, और योग या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना रीढ़ की सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. सहारा नहीं, आदतों में बदलाव है असली समाधान पोस्टर करेक्टर बेल्ट एक अस्थायी उपाय हो सकता है, लेकिन इसे स्थायी समाधान समझना सही नहीं है.स्वस्थ रीढ़ और सही पोस्टर के लिए जरूरी है कि हम अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें और मांसपेशियों को मजबूत बनाने पर ध्यान दें. अगर समस्या गंभीर है, तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी रास्ता माना जाता है. डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसमें दी गई जानकारी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है. अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारेगूगल,फेसबुक,x,इंस्टाग्राम,यूट्यूबऔरवॉट्सऐपकम्युनिटी से.
31 shares
😢
TV9 Hindi logo
TV9 Hindi
Mar 18, 2026, 06:04 AM
व्यायाम दिनचर्या के लाभः शारीरिक और मानसिक कल्याण की कुंजी

व्यायाम दिनचर्या के लाभः शारीरिक और मानसिक कल्याण की कुंजी

आजकल फिट रहने के लिए जिम जाना एक आम आदत बन चुकी है. कई लोग पूरे उत्साह के साथ जिम शुरू करते हैं और शुरुआत में नियमित रूप से वर्कआउट भी करते हैं. जिम न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है, बल्कि यह मानसिक रूप से भी व्यक्ति को बेहतर महसूस कराता है. नियमित एक्सरसाइज से मांसपेशियां मजबूत होती हैं, स्टैमिना बढ़ता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है. इसके साथ ही वजन को कंट्रोल रखने, दिल को स्वस्थ रखने और लाइफस्टाइल से जुड़ी कई बीमारियों के खतरे को कम करने में भी जिम अहम भूमिका निभाता है. जब कोई व्यक्ति रोजाना एक तय समय पर वर्कआउट करता है, तो उसकी दिनचर्या भी एक्टिव बनी रहती है. जिम में अलग-अलग तरह कीएक्सरसाइजकरने से शरीर के हर हिस्से पर काम होता है, जिससे ओवरऑल फिटनेस बेहतर होती है. हालांकि, कुछ लोग समय की कमी, आलस या मोटिवेशन की कमी के कारण जिम को बीच में ही छोड़ देते हैं. ऐसे में शरीर को मिलने वाले ये फायदें धीरे-धीरे कम हो सकते हैं और सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. इससे कई समस्याएं भी हो सकती हैं. आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं. आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरिबताते हैं कि जिम शुरू करके बीच में छोड़ देने से शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है. जब व्यक्ति नियमित रूप से वर्कआउट करता है, तो शरीर उसी के अनुसार ढलने लगता है. लेकिन अचानक जिम छोड़ देने पर यह संतुलन बिगड़ सकता है. मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है और स्टैमिना भी घट सकता है. इसके अलावा, मेटाबॉलिज्म की गति धीमी पड़ सकती है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है. शरीर में पहले जो एनर्जी और एक्टिवनेस महसूस होती थी, वह भी कम होने लगती है. लंबे समय तक जिम छोड़ देने से फिटनेस लेवल गिर सकता है और शरीर फिर से पहले जैसी स्थिति में पहुंच सकता है. ऐसे में कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. बीच में जिम छोड़ देने से कई छोटी-बड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं. शरीर में सुस्ती और थकान बढ़ सकती है. वजन बढ़ने की संभावना रहती है और मांसपेशियां ढीली पड़ सकती हैं. इसके अलावा, जो लोग जिम के जरिए तनाव कम करते थे, उन्हें मानसिक रूप से भी फर्क महसूस हो सकता है. नींद का पैटर्न भी प्रभावित हो सकता है और दिनभर एनर्जी की कमी महसूस हो सकती है. कुछ मामलों में शरीर में जकड़न और कमजोरी भी महसूस होती है. इसलिए जिम छोड़ना धीरे-धीरे और प्लानिंग के साथ होना चाहिए. अगर किसी कारण से जिम छोड़ना पड़े, तो पूरी तरह एक्टिविटी बंद न करें. घर पर हल्की एक्सरसाइज, योग या वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल रखें. धीरे-धीरे वर्कआउट की आदत बनाए रखें ताकि शरीर एक्टिव बना रहे. इसके साथ ही संतुलित डाइट लेना भी जरूरी है, ताकि वजन और एनर्जी का स्तर कंट्रोल रहे. अगर समय की कमी है, तो छोटे-छोटे वर्कआउट सेशन भी फायदेमंद हो सकते हैं. सबसे जरूरी है कि शरीर को अचानक एक्टिविटी से दूर न करें और फिटनेस को किसी न किसी रूप में जारी रखें.
33 shares
😐
TV9 Hindi logo
TV9 Hindi
Mar 18, 2026, 05:10 AM
बेहतर स्वास्थ्य के लिए नवरात्रि उपवास के दौरान होने वाली सामान्य गलतियों से बचें

बेहतर स्वास्थ्य के लिए नवरात्रि उपवास के दौरान होने वाली सामान्य गलतियों से बचें

नवरात्रि का पावन पर्व साल में दो बार बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ व्रत रखते हैं और अपने शरीर व मन को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं. व्रत को सिर्फ धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि सही तरीके से किया गया उपवास शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन तंत्र को आराम देने और मानसिक शांति प्रदान करने में मदद करता है. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि लोग व्रत के दौरान खान-पान से जुड़ी कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके स्वास्थ्य पर उल्टा असर डाल सकती हैं. 19 मार्च से चेत्र नवरात्रों की शुरुआत हो रही है. 9 दिन भक्त व्रत रखेंगे. लेकिन अगर व्रत के दौरान खान-पान में संतुलन न रखा जाए, तो कमजोरी, गैस, एसिडिटी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इस आर्टिकल में हम आपको उन आम गलतियों के बारे में बताएंगे, जो लोग अक्सर व्रत के दौरान करते हैं, और साथ ही जानेंगे कि इनसे कैसे बचा जा सकता है. ये भी पढ़ें:इस दिन शुरू हैं चैत्र नवरात्रि, व्रत के लिए साबूदाना से बनाएं ये 5 टेस्टी चीजें व्रत में गिनी-चुनी चीजें ही खाई जाती हैं. लेकिन फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं तो व्रत में पूरा दिन बिना कुछ खाए ही बिता देते हैं. इससे कमजोरी, चक्कर और एसिडिटी की समस्या हो सकती हैं. इससे बचने के लिए आपको हर 2-3 घंटे में मखाना, हल्का व्रत वाला स्नैक या फिर फल खाते रहना चाहिए. इससे शरीर को पर्याप्त एनर्जी मिलती है. व्रत में शरीर को हैवी खाने की आदत नहीं होती है. लेकिन फिर भी कुछ लोग इस दौरान कुट्टू के आटे या फिर सिंघाड़े के आटे की पूड़ी, पकौड़े और चिप्स जैसी चीजें खा लेते हैं. ये सीधा पाचन पर असर डालते हैं और डाइजेशन को बिगाड़ देते हैं. इससे बचने के लिए तली हुई चीजों के बजाए उबली, रोस्ट या फिर स्टीम की हुई हल्की चीजें खाएं. आप चाहें तो आलू और दही खाकर भी अपना पेट भर सकते हैं. व्रत के दौरान कुछ लोग पानी पीना तक भूल जाते हैं, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और थकान हो सकती है, खासकर अगर आप पूरे दिन उपवास कर रहे हैं. इसलिए व्रत में खासतौर पर पानी की मात्रा कम न होने दें. पानी के अलावी नींबू पानी और नारियल पानी का भी सेवन करें. व्रत में लोग मिठाई, शक्कर वाली चाय या ज्यादा शक्कर वाले फलों का सेवन बढ़ा देते हैं, जिससे वजन बढ़ सकता है. ऐसे में व्रत के दौरान इन चीजों को अवॉयड करना चाहिए. इसके बजाए आप नेचुरल शुगर वाले फल खाएं और शक्कर का सेवन सीमित रखें. व्रत खोलते समय कई लोग एक ही बार में बहुत ज्यादा खाना खा लेते हैं, जिससे पाचन बिगड़ सकता है. इसलिए हो सके तो ओवरइटिंग से बचें. व्रत खोलते समय हल्का और बैलेंस फूड लें और धीरे-धीरे खाएं. ये भी पढ़ें:बदलते मौसम में नहीं होना है बीमार तो भूल से भी न करें ये 5 गलतियां
48 shares
😐
Live Hindustan logo
Live Hindustan
Mar 18, 2026, 04:22 AM
शौचालय में फोन के उपयोग के छिपे हुए खतरे

शौचालय में फोन के उपयोग के छिपे हुए खतरे

आज के समय में वॉशरूम में मोबाइल लेकर बैठना एक बहुत आम आदत बन गई है। लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा समय टॉयलेट सीट पर बिताते हैं, खासकर जब वे फोन स्क्रॉल करने में व्यस्त होते हैं। हालांकि यह आदत सामान्य और आरामदायक लग सकती है, लेकिन इसका हमारी सेहत पर धीरे-धीरे नकारात्मक असर पड़ता है। न्यूट्रिशनिस्ट Sonia Narang के अनुसार, लंबे समय तक वॉशरूम में बैठने से शरीर के कई हिस्सों पर दबाव पड़ता है जिससे पाइल्स, कब्ज और पेल्विक मसल्स से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, वॉशरूम में मोबाइल इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया और इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इस आदत को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समझना और सुधारना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपनी सेहत को सुरक्षित रख सकें। टॉयलेट पर ज्यादा देर बैठने से रेक्टम और एनस की नसों पर दबाव बढ़ता है। इससे सूजन और जलन हो सकती है, जो आगे चलकर पाइल्स का कारण बन सकती है। लंबे समय तक बैठने से ब्लड सर्कुलेशन भी धीमा हो जाता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। हमारे शरीर में मल त्याग की एक नेचुरल प्रक्रिया होती है। अगर आप बिना जरूरत लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो यह नेचुरल urge कमजोर पड़ जाती है। इससे मल सख्त हो जाता है और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा ज्यादा जोर लगाने से भी रेक्टल प्रेशर बढ़ता है। ज्यादा देर बैठने से पेल्विक फ्लोर मसल्स कमजोर हो सकती हैं। इससे ब्लैडर पर असर पड़ता है और कभी-कभी उठने के बाद थोड़ा यूरिन लीक हो सकता है। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है अगर इस आदत को नहीं बदला जाए। वॉशरूम में मोबाइल इस्तेमाल करने से फोन पर बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। फ्लश करने या साफ-सफाई के बाद जब आप फोन को छूते हैं, तो ये जर्म्स आपके हाथों और फिर शरीर में जा सकते हैं। साथ ही मोबाइल की गर्मी बैक्टीरिया को बढ़ने के लिए अच्छा माहौल देती है। हेल्थ नोट:वॉशरूम में ज्यादा देर बैठना एक छोटी आदत लग सकती है, लेकिन इसके नुकसान बड़े हो सकते हैं। अगर आप अपनी सेहत को बेहतर रखना चाहते हैं, तो इस आदत को समय रहते बदलना जरूरी है। इसके अलावा किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।
34 shares
😢
L
Live Hindustan
Mar 18, 2026, 03:58 AM
मार्च और अप्रैल में गन्ने का रस पीने के छिपे हुए खतरे

मार्च और अप्रैल में गन्ने का रस पीने के छिपे हुए खतरे

गर्मियां शुरू होते ही कुछ ठंडा-ठंडा पीने की क्रेविंग शुरू हो जाती है। ऐसे में सड़क किनारे मिलने वाला फ्रेश गन्ने का जूस लोगों का फेवरिट बन जाता है। इसका रिफ्रेशिंग टेस्ट तन और मन दोनों को ठंडा कर देता है। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि ये कोल्ड ड्रिंक का एक हेल्दी और टेस्टी विकल्प है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्मियों के दो महीने ऐसी भी हैं, जिनमें गन्ने का जूस बिल्कुल भी नहीं पीना चाहिए? जी हां, योगाचार्य उमंग त्यागी बताते हैं कि चैत्र मास यानी मार्च और अप्रैल के महीने में गन्ने का जूस भूलकर भी नहीं पीना चाहिए। आयुर्वेद में इसके कई कारण बताए गए हैं और इन दो महीने बिल्कुल भी गन्ने के जूस का सेवन ना करने की सलाह दी गई है। दरअसल इसके सेहत पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। आइए विस्तार में जानते हैं। BSD OrganicsBSD Organics Dried Neem Leaves - 50 Grams Jeevan GhuttiJeevan Ghutti Natural Dry Neem Leaves, Veppam Ilai, Dried Neem Leaf, Nimba Patti, Margosa Leaves, Indian Lilac, Neem Patra | Antioxidants Rich, Improves Immune | Skin Health, Face & Hair Care | 100gm THE FOREST HERBS Natural care from natureThe Forest Herbs Natural Care From Nature Neem Leaves Powder 200 Grams (Sun Dried & Stemless) for Eating, Face, Skin and Hair Care Pack NeuwganicNeuwganic - Organic Neem Leaf Powder - Neem Powder for Face Pack, Eating, Hair & Skin Care - 450 Gm - Pack of 1 Cura MahaveerCura Mahaveer Neem Ras II Fresh Neem Leaves II Natural Blood Purifier || 500ml + 500ml Pack of 2 Genius HerbsGenius Herbs Neem Leaf Capsules 500 mg | Natural Detox | Digestive Functions | Boosts Immunity | 90s Capsules 30 Days Supply Genius HerbsGenius Herbs Neem Leaf Tablets -180 Neem 500 mg/Azadirachta Indica/Natural Detox/Skin Care / 30 days Supply HimalayaHimalaya OTC Wellness Organic Neem I For Skin & Body Detox I Reduced Acne Severity Scores by 45%* I Supports Healthy, Clear & Radiant Skin I 60 Veg Caplets चैत्र के महीने में यानी मार्च और अप्रैल में गन्ने का जूस बिल्कुल भी नहीं पीना चाहिए। योगाचार्य कहते हैं कि इसके पीछे का एक कारण यह भी है कि मार्च और अप्रैल आते-आते गन्ना काफी पुराना हो जाता है। ऐसे में लंबे समय तक स्टोर रहने के कारण इसमें फर्मेंटेशन (खमीर उठने) की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसे गन्ने से बना जूस सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। योग एक्सपर्ट बताते हैं कि मार्च-अप्रैल का समय मौसम बदलने का होता है, जब सर्दी से गर्मी की ओर ट्रांजिशन होता है। इस दौरान शरीर में कफ बढ़ने की समस्या ज्यादा रहती है। गन्ने का जूस स्वभाव से ठंडा और मीठा होता है, जो कफ की समस्या को और बढ़ा सकता है। इससे सर्दी-खांसी, आलस और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं ये पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे एसिडिटी और स्किन इश्यूज को भी बढ़ावा दे सकता है। योगाचार्य बताते हैं कि गन्ने के जूस के अलावा आपको इन दो महीनों में ज्यादा फर्मेंटेड चीजें यानी खट्टी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए। उदाहरण के लिए दही बहुत ज्यादा ना खाएं। इसके अलावा बहुत हेवी और तेलयुक्त भोजन खाने से भी परहेज करें। वरना ये पाचन से जुड़ी समस्याएं, आलस और स्किन इश्यूज का कारण बन सकता है। आयुर्वेद के अनुसार आपको चैत्र माह यानी मार्च और अप्रैल में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन खाना चाहिए। उदाहरण के लिए सत्तू, मूंग दाल और हरी सब्जियां। योगाचार्य इस दौरान खासतौर से नीम के पत्ते खाने की भी सलाह देते हैं। उनके मुताबिक ये समय बॉडी को डिटॉक्स करने का अच्छा समय होता है, ऐसे में नीम के पत्ते काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
9 shares
😐
TV9 Hindi logo
TV9 Hindi
Mar 18, 2026, 03:27 AM
टिम कुक ने सेवानिवृत्ति की अफवाहों का खंडन किया, कहा कि वह एप्पल के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं

टिम कुक ने सेवानिवृत्ति की अफवाहों का खंडन किया, कहा कि वह एप्पल के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं

Apple CEO Tim Cook की रिटायरमेंट को लेकर पिछले लंबे समय से चर्चा चल रही है. टिम कुक ने इन अटकलों को पूरी तरह से नकार दिया कि वे पीछे हटने की योजना बना रहे हैं, उन्होंने ऐसे दावों को अफवाह बताया और जोर देकर कहा कि वह कंपनी के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं. ABC न्यूज पर Michael Strahan के साथ एक टेलीविजन इंटरव्यू में Tim Cook ने कहा कि उनका जल्द ही काम धीमा करने का कोई इरादा नहीं है.यह एक अफ़वाह है, टिम कुक ने उन रिपोर्ट्स के बारे में ये कहा जिनमें कहा गया था कि वह अपने रोल से पीछे हट सकते हैं. मनी कंट्रोल के मुताबिक, टिम कुक ने Apple में लगभग तीन दशक बिताए हैं, उन्होंने कहा कि कंपनी के साथ उनका कनेक्शन अभी भी मजबूत है. उन्होंने कहा, मैं जो करता हूं, उससे मुझे बहुत प्यार है. 28 साल पहले, मैं Apple में आया था और तब से मुझे इसका हर दिन पसंद आया है. मैं Apple के बिना जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता. यह बात Apple की 50वीं सालगिरह के जश्न के बीच आई है. उन्होंने स्मार्टफोन को नई परिभाषा देने, क्रिएटिव टूल्स को आगे बढ़ाने और Apple Watch जैसे डिवाइस के जरिए हेल्थ पर ध्यान देने वाले फीचर लाने जैसे माइलस्टोन की ओर इशारा किया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर टिम कुक ने नपे-तुले अंदाज में कहा कि यह टेक्नोलॉजी असल में न्यूट्रल है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कैसे डेवलप और इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही, उन्होंने Apple के उस तरीके पर भी जोर दिया जिसमें ज्यादा से ज्यादा डेटा को डिवाइस पर प्रोसेस किया जाता है और ज्यादा मुश्किल कामों के लिए कंपनी के प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट सिस्टम का सपोर्ट मिलता है. ये भी पढ़ें-क्यों Nithin Kamath फोन में नहीं चलाते नेट बैंकिंग ऐप्स? खोला ये राज
56 shares
😐
India TV logo
India TV
Mar 18, 2026, 03:12 AM
जैतून के तेल और शहद के साथ कोमल त्वचा को पुनर्जीवित करेंः एक सरल ग्रीष्मकालीन समाधान

जैतून के तेल और शहद के साथ कोमल त्वचा को पुनर्जीवित करेंः एक सरल ग्रीष्मकालीन समाधान

गर्मी आते ही त्वचा बेजान होने लगती है। कई बार त्वचा को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं जिससे चेहरे का नूर गायब होने लगता है। अगर आपका चेहरा भी डल नजर आने लगा और ग्लो कम होने लगा है तो इसके लिए कुछ असरदार घरेलू उपाय अपना सकते हैं। आपकी किचन में ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जिन्हें लगाते ही स्किन ग्लोइंग और शाइनी बन जाएगी। इसके लिए असरदार उपाय है कि आप जैतून का तेल और शहद को मिलाकर चेहरे पर लगाएं। कुछ ही दिनों में स्किन में झुर्रियों से लटक रही त्वचा टाइट होने लगेगी और चेहरे पर निखार आने लगेगा। चेहरे पर जैतून का तेल लगाने के फायदे-जैतून यानि ऑलिव ऑयल से कई तरह की स्किन प्रॉब्लम्स को दूर करने में असरदार साबित होता है। जैतून के तेल में विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन डी और ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है। ये स्किन को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। जैतून में पाए गए एंटीऑक्सीडेंट स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। अगर आप रोजाना जैतून के तेल से मालिश करते हैं तो फेस की ड्राईनेस कम होती है। इससे स्किन हाइड्रेटेड रहती है और ये तेल नेचुरल मॉइस्चराइजर का काम करता है जैतून का तेल त्वचा के रोमछिद्रों में जमा गंदगी को साफ करता है। मेकअप हटाने और डेड स्किन को निकालने में मदद करता है और जैतून का तेल फेस को झुर्रियों और फाइन लाइन्स से बचाता है। ऑलिव ऑयल से फेस की मसाज करने से दाग-धब्बों दूर होते हैं और पिगमेंटेशन और टैनिंग को साफ करने में भी जैतून का तेल असरदार है। चेहरे पर शहद लगाने के फायदे-रात में सोने से पहले चेहरे पर शहद लगाने से स्किन साफ होती है और नेचुरली ग्लो करने लगती है। शहद में कई विटामिन, मिनरल, अमीनो एसिड और नेचुरल हीलिंग वाले गुण पाए जाते हैं। जो आपकी त्वचा को रिपेयर करने का काम करते हैं। शहद एक नेचुरल ह्यूमेटकैंट है। जो स्किन के लिए मॉइश्चर का काम करता है। शहद में नेचुरल रेडियंट ग्लो देने वाले गुण पाए जाते हैं जो स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं। शहद में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो गंदगी और ऑयल को साफ करते हैं और ब्लैकहेड्स को खत्म करते हैं। ऑलिव ऑयल में शहद मिलाकर लगाने से त्वचा ग्लोइंग बनती है। इससे चेहरे की झुर्रियां, कील मुंहासे दूर होते हैं। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और नेचुरल शाइन आती है। जैतून का तेल और शहद मिलाकर लगाने से चेहरे पर दिखने वाले दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। कुछ ही दिनों में आपकी त्वचा चमकने लगेगी। आप जैतून का तेल और शहद को मिलाकर चेहरे पर अच्छी तरह से मसाज कर लें। इसे 10-15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें और पानी से मुंह धो लें। आप चाहें तो इससे मसाज करने के बाद रातभर चेहरे को ऐसे ही छोड़ दें और सुबह धो लें। गर्दन के कालेपन को दूर करने के लिए क्या लगाएं, अपनाएं देसी नुस्खे, निकल जाएगा सारा मैल Latest Lifestyle News
32 shares
😐
I
India TV
Mar 18, 2026, 02:45 AM
अंकुरित मूंगः एक स्वस्थ शुरुआत के लिए एक पौष्टिक नाश्ता विकल्प

अंकुरित मूंगः एक स्वस्थ शुरुआत के लिए एक पौष्टिक नाश्ता विकल्प

आपने अक्सर घर के बड़े-बुजुर्गों को ये कहते सुना होगा कि सुबह का नाश्ता हेल्दी और पोषण से भरपूर होना चाहिए। क्योंकि सुबह में किया गया हेल्दी ब्रेकफास्ट आपको दिनभर एनर्जेटिक रखने में मदद करता है। ऐसे में सुबह नाश्ते में अंकुरित मूंग खाना आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। अंकुरित मूंग एक सुपरफूड है,जिसके सेवन से कई स्वास्थ लाभ मिलते हैं। अंकुर‍ित मूंग में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होता है। ऐसे में यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि रोज ब्रेकफास्ट में अंकुरित मूंग खाने से क्या होता है। 1. पाचन तंत्र के लिए अंकुरित होने के बाद मूंग में फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है। यह आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर रखता है। इसमें मौजूद एंजाइम्स भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है। 2. वजन घटाने में मददगारअगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो अंकुरित मूंग का सेवन आपके लिए बेस्ट हो सकता है। इसमें कैलोरी बहुत कम और प्रोटीन व फाइबर बहुत ज्यादा होता है। इसे खाने के बाद काफी देर तक भूख नहीं लगती, जिससे आप फालतू स्नैकिंग से बच जाते हैं। 3. पोषक तत्वों का पावरहाउसअंकुरण की प्रक्रिया मूंग में मौजूद विटामिन और मिनरल्स की शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है। इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यूनिटी बढ़ाता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद आयरन खून की कमी को दूर करता है और प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। 4. दिल की सेहत और ब्लड शुगरअंकुरित मूंग खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही, इसका लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में मददगार साबित होता है। डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है एक्सपर्ट ने बताया अब शुरुआती स्टेज में ही हो सकती है अल्जाइमर की पहचान, कराना होगा ये ब्लड टेस्ट अमृत समान है यह फल, बीमारियों से बचाने में है कारगर, जानें इसके कई फायदे Latest Health News
43 shares
😊
Zee News Hindi logo
Zee News Hindi
Mar 18, 2026, 02:05 AM
नवरात्रि उपवासः सेंधा नमक की अनुमति क्यों है, लेकिन सामान्य नमक निषिद्ध है

नवरात्रि उपवासः सेंधा नमक की अनुमति क्यों है, लेकिन सामान्य नमक निषिद्ध है

Chaitra Navratri Vrat 2026 Niyam:नवरात्र के पावन पर्व पर लोग अपनी परंपराओं के अनुसार व्रत रखते हैं. कुछ लोग फलाहार व्रत रखते हैं तो कुछ लोग दिनभर व्रत रखकर शाम की पूजा के बाद कुछ आहार ले लेते हैं. श्रद्धा अनुसार मातारानी की सेवा करते हुए कुछ लोग जलाहार पर ही व्रत रखते हैं. इसी तरह कुछ लोग शाम में सेंधा नमक में बना भोजन करते हैं. ऐसे में यह एक विशेष नियम है कि नवरात्र का व्रत साधारण या सफेद नमक में बनाना या खाना पूरी तरह से वर्जित है लेकिन सेंधा नमक को उपयोग में लाया जाता है. ऐसे में इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर व्रत में सेंधा नमक खाना क्यों वर्जित नहीं है. इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं और वैज्ञानिक कारण क्या हैं. कैसे यह हमारे स्वास्थ्य और भक्ति दोनों से बड़ी ही गहराई से जुड़ा है. साधारण नमक और सेंधा नमकधार्मिक और स्वास्थ्य कारणों के अनुसार साधारण नमक और सेंधा नमक एक दूसरे से बहुत अलग हैं. साधारण नमक समुद्री होता है जो कई सारे केमिकल प्रक्रियाओं से गुजरता है. यह नमक कई मशीनी प्रक्रियाओं से गुजरता है जिसे व्रत के लिए शुद्ध नहीं माना जाता है. वहीं, सेंधा नमक पूरी तरह प्राकृतिक है जिसे हिमालय की चट्टानों से निकाला जाता है. इसे ‘शुद्ध नमक’ मानकर व्रत के भोजन में उपयोग किया जाता है. सेंधा नमक शुद्ध और सात्विकहिंदू धर्म में व्रत का अर्थ है मन को भगवान की भक्ति में लगाना, सात्विक जीवन जीना और संयमित रहना चाहे वो व्यवहार को लेकर हो या भोजन आदि को लेकर हो. साधारण नमक कृत्रिम माना गया है तो वहीं सेंधा नमक को ‘स्वयं सिद्ध’ और सात्विक कहा गया है. आयुर्वेद के अनुसार, सेंधा नमक से शरीर में शीतलता बनी रहती है और मन शांत रहता है. व्रत में ध्यान आदि करने के लिए शरीर का सात्विक होना जरूरी है ऐसे में जरूरी है कि जो भोजन हम कर रहे हैं वो सात्विक और शुद्ध हों और इसमें सेंधा नमक की भूमिका प्रमुख हो जाती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सेंधा नमक का उपयोगवैज्ञानिक दृष्टिकोण से अनाज या रोज का भोजन न करने से व्रत के दौरान शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो सकते हैं. वहीं सफेद नमक की अपेक्षा सेंधा नमक में मैग्नीशियम, पोटेशियम व कैल्शियम जैसे मिनरल्स ठीक मात्रा में होते हैं जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं और पाचन क्रिया को भी ठीक रखते हैं. ऐसे में व्रत के भोजन में सेंधा नमक का उपायोग किया जाता है. हालांकि व्रत हो या न हो नमक का उपयोग सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है. (Disclaimer- प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए धन्यवाद. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. और पढ़ें-Dream Astrology: पोटली में धन का सपना बार-बार दिख रहा है? जान लें करियर और व्यापार से जुड़े क्या मिल रहे हैं संकेत और पढ़ें-मां दुर्गा के इस प्रभावशाली स्तोत्र का पाठ करना शत्रु का नाश, मिलेगी मानसिक शांति और नजर दोष से मुक्ति!
89 shares
😐
Zee News Hindi logo
Zee News Hindi
Mar 18, 2026, 01:55 AM
कड़वे खीरे की पहचानः खराब गुणवत्ता से बचने के लिए एक गाइड

कड़वे खीरे की पहचानः खराब गुणवत्ता से बचने के लिए एक गाइड

Identify Bitter Cucumbers:गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है और ऐसे में अपनी सेहत का ध्यान रखना काफी ज्यादा जरूरी होता है. बाजारों में खीरे की डिमांड तेजी से बढ़ने लग जाती है और ऐसे में आजकल बाजारों में कई दुकानदार जानबूझकर कड़वे खीरे पकड़ा देते हैं, वो आपको उस समय पता नहीं चलता है लेकिन घर आने के बाद पता लगता है. इसका सेवन आप अपने शरीर को डिटॉक्स करने के लिए रोजाना कर सकते हैं. ये आपकी थाली की शोभा को बढ़ाने के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है. बाजार से लाया गया खीरा स्वाद में कड़वा अगर निकाल जाता है, तो पूरे मुंह का स्वाद बिगाड़ जाता है और फिर उसके बाद कुछ खाने तक का मन नहीं करता है. इसलिए आपको इसकी सही से पहचान करनी बेहद ही जरूरी है. कई लोगों को इसके बारे में सही जानकारी नहीं होती है, जिस वजह से ये समस्या काफी ज्यादा बढ़ने लगती है. खराब क्वालिटी का खीरा खरीदने से बचने के लिए आप कुछ आसान ट्रिक्स को अपनाकर खीरे की क्वालिटी का अंदाजा सही तरीके से लगा सकते हैं. कड़वाहट से भी बचेंगे और स्वाद भी नहीं बिगाड़ पाएगा. आइए आप भी इस खबर में सही से जान लें. कड़वे खीरे की पहचान कैसे करें? 1. रंग और बनावट अगर आप भी कड़वे खीरे लाकर धोखा खा जाते हैं, तो ये आपको बिल्कुल भी अब नहीं करना है. कड़वे खीरे की पहचान आप रंग और बनावट से आसानी से कर सकते हैं. अगर खीरा बहुत गहरे हरे रंग का होता है, तो वो फ्रेश है और अगर हल्का पीला, सफेद या धब्बेदार है, तो ये ना पका है और अंदर से कड़वा हो सकता है. 2. खीरे को हल्के से दबाकर अगर आप कड़वे खीरे की पहचान उसी समय करना चाहते हैं, तो खीरा सख्त और मजबूत होता है, तो वो सही है अगर नरम या स्पंजी लगे तो ये खराब है और कड़वा भी हो सकता है. 3. खीरे का आकार खीरे का आकार देखकर भी आप आसानी से पता लगा सकते हैं. ज्यादा मोटे और पीले पड़ चुके खीरे कड़वे हो सकते हैं. गहरे हरे रंग और सख्त बनावट वाले खीरे को ही आपको चुनना चाहिए. 4. खुशबू आपको बता दें खुशबू से आप आसानी से पता लगा सकते हैं. खीरे में हल्की फ्रेश तो ये ताजा है अगर अजीब या तेज गंध आती है, तो ये बेकार है और अंदर से कड़वाहट भी हो सकती हैं. 5. हल्का रगड़ें डंठल वाले हिस्से को कट करके आपको इसको रगड़ना है और अगर सफेद झाग आता है, तो आपको समझ लेना है कि अंदर काफी ज्यादा कड़वापन है. जिसे रगड़ने से बाहर निकाला जा सकता है. ये भी पढ़ें:गर्मियों में बिना काटे जानें तरबूज मीठा है या नहीं, खरीदते वक्त अपनाएं ये ट्रिक्स Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है.
90 shares
😢
I
India TV
Mar 18, 2026, 01:45 AM
मीठे पानीः स्वास्थ्य और पाचन के लिए एक चमत्कारिक जड़ी बूटी

मीठे पानीः स्वास्थ्य और पाचन के लिए एक चमत्कारिक जड़ी बूटी

मेथी घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक ऐसा मसाला है जो खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ साथ सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। ये डायबिटीज के मरीजों को सबसे ज्यादा फायदे पहुंचाता है। सिर्फ मेथी दाना ही नहीं इसका पानी भी सेहत के लिए किसी चमत्कारी जड़ी बूटी से कम नहीं। इसलिए रोज सुबह खाली पेट मेथी का पानी आपके शरीर में कई सुधार ला सकता है। अगर 15 दिनों तक सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीया जाए, तो शरीर में कई चमत्कारी फायदे देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं 15 दिनों तक सुबह खाली पेट मेथी का पानी से क्या होगा। 1. पाचन में सुधार मेथी का पानी प्राकृतिक रूप से 'लैक्सेटिव' का काम करता है। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज की समस्या को दूर करने और पेट साफ करने में मदद करता है। 15 दिनों के भीतर आप पेट फूलने और भारीपन में कमी महसूस करेंगे। 2. ब्लड शुगर कंट्रोलअगर आप प्री-डायबिटिक हैं या शुगर लेवल फ्लक्चुएट होता है, तो मेथी का पानी इसे स्थिर करने में मदद करता है। यह इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को बढ़ाता है। 3. वजन घटाने में सहायकमेथी का पानी मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। सुबह इसे पीने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती, जिससे आप दिन भर कम कैलोरी खाते हैं। 15 दिनों में आप थोड़ा हल्का महसूस कर सकते हैं। 4. त्वचा और बालों में चमकमेथी का पानी खून को भी साफ करता है। खून साफ होने के कारण चेहरे पर मुंहासे कम हो सकते हैं और चमक बढ़ सकती है। मेथी बालों की जड़ों को भी मजबूती देने के लिए जानी जाती है। डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है लाल-हरी और काली-पीली, कौन सी किशमिश है गुणों की खान, जान लें फायदे 15 मिनट की ब्रिस्क वॉक बचा सकती है आपकी जान, कम होगा 20% मौत का खतरा, स्टडी का दावा Latest Health News
16 shares
😊
India TV logo
India TV
Mar 18, 2026, 01:00 AM
एप्पल साइडर विनेगरः तेज रक्त शर्करा स्पाइक्स के लिए एक प्राकृतिक उपचार

एप्पल साइडर विनेगरः तेज रक्त शर्करा स्पाइक्स के लिए एक प्राकृतिक उपचार

डायबिटीज भारत में तेजी से बढ़ने वाली लाइफस्टाइल डिजीज बन चुकी है। खराब लाइफस्टाइल से टाइप 2 डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में बढ़े हुए ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना जरूरी है। डायबिटीज में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए डाइट से लेकर एक्सरसाइज और कुछ घरेलू उपाय असरदार साबित होते हैं। हालांकि कई बार काफी कोशिश करने के बाद भी शुगर कम नहीं होती, खासतौर से खाना खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है। आयुर्वेद में एक असरदार जूस है जिसका सेवन करने से खाने के बाद तेजी से बढ़ने वाले ब्लड शुगर को कम किया जा सकता है। इस जूस का नाम एप्पल साइडर विनेगर है। शुगर के मरीज को खाने से आधा या 1 घंटे पहले एप्पल साइडर विनेगर यानि सेब का सिरका लेना है। आइये जानते हैं शुगर में सेब का सिरका कैसे काम करता है? इंस्टाग्राम पर डॉक्टर जैदी ने बताया कि एप्पल साइडर विनेगर में एसिटिक एसिड होता है, जो पेट में जाकर पाचन की प्रक्रिया को स्लो कर देता है। जिससे खाने से बनने वाला ग्लूकोज खून में धीरे-धीरे पहुंचता है। यही वजह है कि इससे अचानक से ब्लड शुगर नहीं बढ़ता है। सेब का सिरका लेने से शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में भी सुधार आता है। इस तरह खाने से पहले सेब का सिरका पीने से फायदा मिलता है। खासतौर से जब आपके खाने में कार्बोहाइडेट की मात्रा ज्यादा हो तो आपको सेब का सिरका पी लेना चाहिए। इसके लिए आप 1 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर को 1 गिलास पानी में घोल लें। इस पानी को खाने से करीब आधा घंटे पहले पी लें। अगर पानी में नहीं पीना चाहते तो खाने से पहले सलाद खाएं और उस पर सेब का सिरका डालकर खा लें। सलाद भी आपको खाने से करीब 30 मिनट पहले खा लेना चाहिए। ये टाइप-2 डायबिटीज के मरीज के लिए फायदेमंद उपाय है। हालांकि एक बार अपने डॉक्टर या किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। सेब का सिरका हमेशा पानी में मिक्स करके ही पानी चाहिए। एप्पल साइडर विनेगर को कभी भी सीधा बिना पानी के नहीं पीना चाहिए। आप इसे सलाद में डालकर खा सकते हैं। शुगर के मरीज को खाने से पहले भरपूर सलाद खाना चाहिए। जिसमें खीरा, गाजर, टमाटर खा सकते हैं। इससे फाइबर मिलता है और आप ज्यादा कार्ब्स खाने से बचते हैं। डायबिटीज के मरीज को खाने में प्रोटीन से भरपूर चीजें जैसे दाल, पनीर, चना, सोयाबीन या अंडा जरूर शामिल करना चाहिए। इससे शुगर लेवल कंट्रोल रहता है और भूख कम लगती है। डायबिटीज के रोगियों के लिए सबसे असरदार व्यायाम और डाइट है। रोजाना कुछ देर हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। खाने के बार कुछ देर की गई वॉक शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है। पानी को बनाएं अमृत, इन चीजों को मिलाकर पीने से शरीर को मिलेंगे कई फायदे, बन जाएगा Alkaline Water Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।) Latest Health News
63 shares
😐
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Mar 17, 2026, 11:30 PM
नए दिशानिर्देश हृदय रोग की रोकथाम में शीघ्र पहचान के महत्व पर प्रकाश डालते हैं

नए दिशानिर्देश हृदय रोग की रोकथाम में शीघ्र पहचान के महत्व पर प्रकाश डालते हैं

विस्तारवॉट्सऐप चैनल फॉलो करेंहृदय रोगों को होने से पहले ही रोका जा सकता है, बशर्ते कम उम्र से जांच, सही जीवनशैली, उन्नत परीक्षण और समय पर दवा का इस्तेमाल किया जाए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) ने नए कोलेस्ट्रॉल (डिस्लिपिडेमिया) दिशानिर्देश-2026 में दिल की बीमारियों की रोकथाम के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंजर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इस अपडेट में साफ कहा गया है कि अब केवल 10 साल के जोखिम की बजाय पूरे जीवनकाल के खतरे को ध्यान में रखकर इलाज और रोकथाम की रणनीति तय की जानी चाहिए। नए दिशानिर्देश इस बात पर बल देते हैं कि लगभग 80 फीसदी हृदय रोगों को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि व्यक्ति कम उम्र से ही अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखता है, तो भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।विज्ञापनविज्ञापननए टूल में क्या है खास?यही कारण है कि अब इलाज की शुरुआत बीमारी के लक्षण आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही करने की सलाह दी गई है। पहले जहां जोखिम आकलन के लिए पुराने समीकरणों का उपयोग किया जाता था, वहीं अब एथेरोस्क्लेरोटिक हृदय रोग (एएससीवीडी) प्रिवेंशन टूल को अपनाया गया है। यह नया टूल 10 साल के साथ-साथ 30 साल का जोखिम भी बताता है और व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर अधिक सटीक आकलन करता है।चार श्रेणियों में बांटा जोखिमजोखिम को चार श्रेणियों में बांटा गया है, जिससे डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि मरीज को दवा की जरूरत है या नहीं। नई गाइडलाइन में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। लिपोप्रोटीन (ए) यानी एलपी (ए) की जांच जीवन में कम से कम एक बार कराने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह मुख्यतः आनुवंशिक होता है और उच्च स्तर पर जोखिम बढ़ाता है। इसके अलावा एपीओबी टेस्ट को अधिक सटीक माना गया है, क्योंकि यह शरीर में हानिकारक कणों की वास्तविक संख्या बताता है। वहीं सीएसी स्कोर, जो एक सीटी स्कैन के माध्यम से धमनियों में जमी चर्बी का पता लगाता है, जोखिम की गंभीरता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।युवाओं के लिए विशेष चेतावनीदिशानिर्देशों में 30 से 39 वर्ष के आयु वर्ग पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास है या जो धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे जैसी समस्याओं से ग्रस्त हैं, उन्हें जल्दी जांच शुरू करने की सलाह दी गई है।इसका उद्देश्य बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोकना है।अन्य वीडियोविज्ञापनविज्ञापनरहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें AndroidHindi News apps, iOSHindi News appsऔरAmarujala Hindi News appsअपने मोबाइल पे|Get allIndia Newsin Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and morenews in Hindi.
43 shares
😐
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Mar 17, 2026, 09:10 PM
सी. आर. पी. एफ. का 87वां स्थापना दिवस, मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर के साथ मनाया गया

सी. आर. पी. एफ. का 87वां स्थापना दिवस, मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर के साथ मनाया गया

पुलवामा। सीआरपीएफ के 87वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर 185वीं बटालियन सीआरपीएफ ने मगलवार को सरकारी स्कूल बजनारी में निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया। शिविर के दौरान 107 जरूरतमंद ग्रामीणों को निशुल्क चिकित्सा उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई गई। इस मौके पर बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी विनोद कुमार टंडन, सहायक कमांडेंट मुकेश कुमार और डॉ. सलीम बिलाल स्थानीय गणमान्य लोगों के साथ उपस्थित रहे। संवादऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
16 shares
😐
Amar Ujala logo
Amar Ujala
Mar 17, 2026, 08:53 PM
पिहूवा में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया

पिहूवा में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया

पिहोवा। चैत्र चौदस मेले में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी के निर्देश पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य जांच करते हुए उन्हें दिनचर्या, खानपान और दवाइयां उचित समय पर लेने के लिए प्रेरित किया। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू शर्मा ने बताया कि आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक शिविर में लगभग 145 रोगियों ने स्वास्थ्य लाभ लिया। इनमें आयुर्वेदिक के 85 व होम्योपैथिक के 60 मरीजों को निःशुल्क औषधियां वितरित की गईं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर कलाल माजरा के स्टाफ डॉ. संतोष और धर्मबीर ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शिविर लगाकर दवाइयां बांटी। अशोक ने सहयोग किया। आंगनबाड़ी केंद्र उमरी में डॉ. रीना ने दिनचर्या व ऋतुचर्या का महत्व बताया। सत्यवीर ने दवाइयां बांटी। योग सहायक हरदीप ने लोगों को योगासन व प्राणायाम का अभ्यास कराया। आंगनवाड़ी केंद्र यारा में डॉ. संदीप गुप्ता ने जीवनशैली संबंधी जागरूक किया। नेहा ने दवाइयां दी। दीपक ने योगाभ्यास कराया। गांव भोर सैदां में डॉ. प्रगति भूटानी ने रोग नियंत्रण के उपाय बताए। ब्लड प्रेशर जांचा और आयुर्वेदिक दवाइयां बांटीं। इस अवसर पर पुष्पा, रामनिवास और विक्रम सहित अन्य मौजूद रहे।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
22 shares
😐
A
Amar Ujala
Mar 17, 2026, 07:06 PM
अमेठी शहर में आत्मरक्षा कौशल और स्वच्छता जागरूकता के साथ लड़कियों को सशक्त बनाना

अमेठी शहर में आत्मरक्षा कौशल और स्वच्छता जागरूकता के साथ लड़कियों को सशक्त बनाना

अमेठी सिटी। शाहगढ़ स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता 100 मिलियन स्माइल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष शिविर में विद्यालय की छात्राओं ने न केवल आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर सीखे, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक होने का संकल्प भी लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाकर उनमें स्वावलंबन की भावना जागृत करना था।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रशिक्षण के पहले सत्र में जूडो-कराटे प्रशिक्षक सरिता ने छात्राओं को आत्मरक्षा की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का अर्थ संघर्ष नहीं, बल्कि स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छात्राओं को सिखाया गया कि किसी भी असहज स्थिति में घबराने के बजाय मानसिक सजगता से काम लें। प्रशिक्षक ने सुरक्षित दूरी बनाए रखने, हमलावर की पकड़ से छूटने की तकनीकों का अभ्यास कराया। साथ ही, अनुचित व्यवहार की स्थिति में तुरंत परिवार को सूचित करने और कानूनी मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया।विज्ञापनविज्ञापनदूसरे सत्र में स्वास्थ्य जागरूकता पर चर्चा हुई। डॉ. शिवानी मौर्य ने बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव के तरीके साझा किए। उन्होंने स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, स्वच्छ पानी पीने और संतुलित आहार लेने पर जोर दिया। डॉ. अबरार ने छात्राओं को आगाह किया कि वे कमजोरी या बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सीय सलाह लें। उन्होंने पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या को स्वस्थ जीवन का आधार बताया।सशक्तीकरण की ओर बढ़ते कदमपूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग लेने वाली छात्रा ओं के चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक साफ देखी जा सकती थी। विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बेटियां समाज में निडर होकर आगे बढ़ सकेंगी। यह कार्यक्रम बालिकाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।जागरूकता से मिलेगी सुरक्षावार्डेन कल्पना ने कहा कि बेटियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर बनना समाज के विकास का आधार है। छात्राओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई है। हेल्पलाइन नंबर 1090 और 112 की जानकारी भी दी गई, जिससे जरूरत पड़ने पर त्वरित सहायता मिल सके।दोनों सत्रों में सवाल-जवाबप्रश्न: गर्मी में स्वस्थ कैसे रहें। कोमल, कक्षा-आठउत्तर: पर्याप्त पानी पिएं। धूप से बचें और सिर ढककर निकलें।प्रश्न: राह चलते कोई परेशान करे तो क्या करें। खुशबू, कक्षा-सातउत्तर: आवाज उठाएं, वहां से हटें और तुरंत भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं।प्रश्न: बीमारियों से बचने का तरीका क्या है। सुधा, कक्षा-छहउत्तर: स्वच्छ भोजन करें। कुछ भी खाने पीने से पहले हाथ धोएं। नियमित व्यायाम करें।प्रश्न: बाहर जाते समय क्या ध्यान रखें। आशा, कक्षा-सातउत्तर: सूनसान रास्तों से बचें। परिवार को जानकारी देकर घर से निकलें। सतर्क रहें।प्रश्न: डर लगने पर क्या करें। माधुरी, कक्षा-आठउत्तर: किसी भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लें। अकेले न रहें।प्रश्न: अचानक तबीयत खराब हो जाए तो क्या करें। कंचन, कक्षा-सातउत्तर: तुरंत घरवालों को जानकारी दें। आराम करें और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
89 shares
😐