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Jun 19, 2026, 12:36 PM
एशलेशा नक्षत्र में शुक्र का पारगमन कुछ राशियों के लिए चुनौती लाता है

एशलेशा नक्षत्र में शुक्र का पारगमन कुछ राशियों के लिए चुनौती लाता है

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का गोचर और नक्षत्र परिवर्तन जीवन के हर क्षेत्र पर गहरा प्रभाव डालता है. सुख-समृद्धि और वैभव के कारक ग्रह शुक्र जल्द ही अपनी स्थिति में बदलाव करने जा रहे हैं. 22 जून 2026 को शुक्र अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे . 3 जुलाई 2026 तक इसी नक्षत्र में संचार करेंगे. अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध हैं. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, बुध के नक्षत्र में शुक्र का यह गोचर कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. इस दौरान इन चार राशियों के जातकों को करियर, आर्थिक मामलों और स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है. मेष राशि के जातकों के लिए यह समय उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है. आर्थिक मोर्चे पर बेवजह के खर्च आपकी बचत को प्रभावित कर सकते हैं. कार्यस्थल पर सहकर्मियों या उच्चाधिकारियों के साथ मतभेद होने की संभावना है. इस अवधि में वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और कोई भी बड़ा निवेश करने से बचें. मिथुन राशि वालों को अपनी वाणी पर संयम रखना होगा. आपके शब्दों से किसी को ठेस पहुंच सकती है, जिससे रिश्तों में दरार आ सकती है. धन का लेन-देन करते समय पूरी सतर्कता बरतें. अनावश्यक खर्चों के कारण मानसिक तनाव हो सकता है, इसलिए बजट बनाकर चलना ही उचित रहेगा. आर्थिक दृष्टि से यह गोचर सिंह राशि के लिए चुनौतीपूर्ण है. धन की कमी या अधिक खर्चों के कारण आपका बजट बिगड़ सकता है. इस दौरान सेहत का विशेष ध्यान रखें, विशेषकर अनिद्रा या आंखों से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. ऑफिस की राजनीति से दूरी बनाए रखें. कोर्ट-कचहरी के मामलों में कोई भी फैसला जल्दबाजी में न लें. कन्या राशि के जातकों के लिए मेहनत के अनुरूप परिणाम न मिलना मानसिक परेशानी का कारण बन सकता है. व्यापारिक दृष्टिकोण से फिलहाल समय अनुकूल नहीं है. कोई भी नया काम या बड़ी व्यावसायिक योजना शुरू करने के लिए समय के बदलने का इंतजार करना बेहतर होगा. परिवार के सदस्यों के साथ भी वाद-विवाद की स्थिति से बचें. यदि आप इस गोचर के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना चाहते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र में कुछ सरल उपाय बताए गए हैं: : प्रतिदिन ॐ शुं शुक्राय नमः मंत्र का जाप करें. यह शुक्र के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक है. शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें और उन्हें खीर का भोग लगाएं. : शुक्रवार को सफेद मिठाई, चीनी या दूध का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. शुक्रवार का व्रत रखने से कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है. शुक्रवार के दिन सफेद या क्रीम रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.
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Jun 19, 2026, 11:53 AM
ग्रामीण अस्पताल ने नई सुविधाओं और पेशेवरों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाया

ग्रामीण अस्पताल ने नई सुविधाओं और पेशेवरों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाया

चिकित्सालय प्रभारी डॉ. बिपिन कुमार भारद्वाज ने बताया कि अस्पताल में गर्भवती की नियमित जांच, अल्ट्रासाउंड और प्रसव संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. धारा और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पिनांक भी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में राजकीय चिकित्सालय फाटा से सेवानिवृत्त और एएनएम दर्शनी देवी भी अस्पताल से जुड़कर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं। जिला पंचायत सदस्य अमित मैखुरी ने कहा कि अस्पताल का क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल रहा है। पहले छोटी जांच के लिए भी जिला मुख्यालय जाना पड़ता था। अब कई स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं। संवाद
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Jun 19, 2026, 07:59 AM
अकेले घर का खाना खाना काफी नहीं हैः विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य और वजन को प्रभावित करने वाली आम गलतियों के बारे में चेतावनी दी

अकेले घर का खाना खाना काफी नहीं हैः विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य और वजन को प्रभावित करने वाली आम गलतियों के बारे में चेतावनी दी

अगर आप रोज घर का खाना खाते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी फिट नहीं हैं तो कई चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए घर का भोजन करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही कुछ गलतियों से बचना चाहिए. अगर ऐसा नहीं करते हैं तो न तो फिट रहेंगे और न ही वजन कंट्रोल में होगा. इसलिए घर का खाना खाने के साथ ही डॉक्टरों की बताई इन बातों का भी ध्यान रखने की जरूरत है. आजतक. इन से बातचीत में ने इस बारे में बताया है. डॉ घोटेकर बताते हैं कि घर का खाना खाने के बावजूद लोग अनफिट रह सकते हैं. ऐसे कई केस रोज देखने को मिलते भी हैं. इसके कई कारण हैं. यह देखा जाता है कि लोग बहुत ज़्यादा कार्ब्स और फैट खाते हैं, लेकिन उनकी डाइट में प्रोटीन कम होता है. ज्यादा फैट शरीर को नुकसान करता है. घर पर खाना बनाने के दौरान लोग खाने में तेल, मक्खन और घी का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं. इससे कैलोरी की मात्रा काफी बढ़ जाती है. ऐसा हेल्दी खाना भी वज़न बढ़ा सकता है .अगर आपका रोज का कुल कैलोरी इनटेक शरीर से बर्न की जाने वाली कैलोरी से ज़्यादा है तो मोटापा बढ़ता है. कैलोरी बर्न करने के लिए रोज एक्सरसाइज करनी चाहिए, लेकिन आजकल डेस्क पर बैठकर काम करने वाली जीवनशैली है. अब आधुनिक सुविधाओं की वजह से लोग कम ही एक्सरसाइज कर पाते हैं. डॉ घोटेकर कहते हैं कि जब आप कम उम्र के होते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज्म रेट ज्यादा होता है. इसका मतलब है कि आपका शरीर आराम करते समय भी अधिक कैलोरी जलाता है. ऐसे लोगों का वजन बढ़ता नहीं है. जैसे बीस साल की उम्र में बहुत से लोगों का मेटाबॉलिज्म रेट लगभग 2000 कैलोरी प्रति दिन होता है, लेकिन जैसे-जैसे आप 30 की उम्र को पात करते हैं तो यह घटकर लगभग 1700 कैलोरी प्रति दिन हो जाता है. यह बदलाव भले ही छोटा लगे, लेकिन इसका असर बहुत होता है. हर दिन सिर्फ़ 300 कैलोरी कम बर्न होने से 30 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे वजन बढ़ सकता है, भले ही आप घर का खाना खाते रहें, लेकिन वजन बढ़ेगा ही, अगर वजन बढ़ेगा तो बीमारियों के होने का खतरा भी ज्यादा होगा. यही कारण है कि सभी डॉक्टर 30 की उम्र के बाद एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं, ताकि कैलोरी बर्न हों और शरीर में मोटापा न बढ़े. डॉ जुगल किशोर बताते हैं कि लोग अपने घर के खाने में अकसर सिंपल कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल,रोटी और ब्रेड ज़्यादा खाते हैं, लेकिन उनकी डाइट में प्रोटीन व फ़ाइबर कम होता है, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और लगातार भूख लगती रहती है. इससे व्यक्ति बार- बार खाता है और वजन बढ़ता है. कुछ लोग हरी सब्जियां भी कम खाते हैं. इससे भी शरीर में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है. इससे कई बीमारियों का रिस्क होता है. डॉ किशोर बताते हैं कि लोग खाने को ज्यादा पकाते हैं. ज़रूरत से ज़्यादा पकाने या जला देने से उसमें मौजूद विटामिन और मिनरल खत्म हो सकते हैं. कुछ लोग खाना पकाने वाले तेल को बार-बार गर्म करने या उसमें बार-बार तलने से उसका गुण बदल जाता है और उसमें अनचाहे फैट बढ़ सकते हैं. फिट रहने के लिए घर का खाना खाने के साथ- साथ जरूरी है कि आप रोज एक्सरसाइज करें. मानसिक तनाव न लें और देर रात खाना खाने से बचें
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Jun 19, 2026, 06:35 AM
वास्तु टिप्सः खुशी और समृद्धि के लिए अपनी डाइनिंग टेबल से इन 3 चीजों को हटा दें

वास्तु टिप्सः खुशी और समृद्धि के लिए अपनी डाइनिंग टेबल से इन 3 चीजों को हटा दें

घर का डाइनिंग रूम सिर्फ भोजन करने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह स्थान है जहां परिवार के सदस्य एक साथ जुड़ते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, डाइनिंग टेबल का हमारे जीवन, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बहुत गहरा असर पड़ता है. क्या आप जानते हैं कि आपकी डाइनिंग टेबल पर रखी कुछ छोटी-छोटी चीजें आपके घर की बरकत छीन सकती हैं? यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और धन का आगमन हो, तो आज ही अपनी डाइनिंग टेबल से इन चीजों को हटा दें: कभी भी डाइनिंग टेबल पर दवाइयां न रखें. भोजन करने वाली जगह पर दवाओं का होना स्वास्थ्य में सुधार के बजाय नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है. यह घर के सदस्यों के बीमार पड़ने का संकेत हो सकता है. अगर आपकी डाइनिंग टेबल पर रखे प्लेट, कप या चम्मच कहीं से चटके या टूटे हुए हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें. टूटे हुए बर्तन दरिद्रता को आमंत्रित करते हैं. हमेशा साफ और साबूत बर्तनों का ही इस्तेमाल करें. अक्सर लोग डाइनिंग टेबल को ही अपना ऑफिस डेस्क बना लेते हैं. वहां बिखरे पुराने बिल, रसीदें या अखबार न रखें. यह राहु का प्रभाव बढ़ाता है जिससे आर्थिक तनाव भी बढता है. डाइनिंग टेबल पर हमेशा ताजे फूल रखें. सूखे हुए फूल या कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) सकारात्मक ऊर्जा को सोख कर घर में कलह का कारण बनते हैं. वास्तु में नमक को सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है. डाइनिंग टेबल पर रखी नमकदानी को कभी खाली न होने दें. इसे हमेशा भरा रखना घर में धन और खुशहाली का संकेत माना जाता है. : डाइनिंग टेबल के सामने दीवार पर एक बड़ा आईना (Mirror) लगाएं. यह खाने की मेज के प्रतिबिंब को दोगुना दिखाता है, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. मेज के बीच में ताजे फलों की टोकरी रखें. यह घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होने देता. भोजन करने के तुरंत बाद टेबल साफ करें. बची हुई जूठन या गंदगी को रात भर टेबल पर छोड़ना आर्थिक नुकसान का सबसे बड़ा कारण है.
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Jun 19, 2026, 06:03 AM
2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले उपराष्ट्रपति की लुकुंग गांव की यात्रा

2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले उपराष्ट्रपति की लुकुंग गांव की यात्रा

उपराज्यपाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले यह दौरा लोगों को योग के माध्यम से स्वास्थ्य, संतुलन और सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उपराष्ट्रपति का मार्गदर्शन क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को और गति देगा।विज्ञापनअपने दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति 20 जून को लुकुंग गांव का भ्रमण करेंगे, जहां वे स्वयं सहायता समूहों के साथ संवाद करेंगे और वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रही विकासात्मक पहलों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा वे एक युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे एवं सामुदायिक विकास को मजबूत करने के प्रयासों का जायजा लेंगे।
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Jun 19, 2026, 05:44 AM
40 पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हैः विशेषज्ञ

40 पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हैः विशेषज्ञ

40 की उम्र को अक्सर लोग सिर्फ एक संख्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यही वह दौर है जब शरीर धीरे-धीरे बदलावों का संकेत देना शुरू कर देता है. पहले जहां देर रात तक जागना, अनियमित खानपान और तनाव का असर जल्दी नहीं दिखता था, वहीं 40 के बाद शरीर इन आदतों का हिसाब मांगने लगता है. ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में पकड़ने का सबसे प्रभावी तरीका बन सकती है. डॉ. शेली महाजन ने TOI को बताया कि 40 की उम्र के बाद पुरुषों के शरीर में कई जैविक बदलाव शुरू हो जाते हैं. मेटाबॉलिज्म की गति कम होने लगती है, हार्मोनल परिवर्तन होते हैं और वर्षों से चली आ रही लाइफस्टाइल का असर स्वास्थ्य पर दिखने लगता है. भारतीयों में जैनेटिक जोखिम और शहरी जीवन से जुड़ा तनाव इन चुनौतियों को और बढ़ा देता है. डायबिटीज भी ऐसी ही एक बीमारी है जो लंबे समय तक बिना लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. बढ़ता वजन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और तनाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं. डॉ. महाजन बताती हैं कि केवल फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. एचबीए1सी जांच पिछले दो से तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर की जानकारी देती है, जिससे प्रीडायबिटीज और डायबिटीज के जोखिम को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है. हार्ट हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है. कई बार दिल से जुड़ी समस्याएं बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक विकसित होती रहती हैं. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिसर्च के अनुसार भारत में हार्ट रोग वयस्कों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं. डॉ. शेली महाजन के अनुसार भारतीयों में पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में कम उम्र में हार्ट संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं. इसलिए लिपिड प्रोफाइल और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच भविष्य के जोखिमों का समय रहते पता लगाने में मदद कर सकती है. इसके अलावा विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी भी भारतीय पुरुषों में आम समस्या बन चुकी है. लगातार थकान, मसल्स में कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसे लक्षण अक्सर उम्र या तनाव का असर समझ लिए जाते हैं, जबकि इनके पीछे पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है. डॉ. शेली महाजन के अनुसार विटामिन डी की कमी हड्डियों को कमजोर कर सकती है और कैल्शियम के ऑब्जर्व को प्रभावित करती है. 40 की उम्र के बाद प्रोस्टेट, लिवर और किडनी की नियमित जांच भी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए. प्रोस्टेट से जुड़ी कई समस्याएं शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखातीं. वहीं नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज और किडनी से जुड़ी बीमारियां भी लंबे समय तक चुपचाप बढ़ती रहती हैं. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.
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Jun 19, 2026, 05:30 AM
कॉफीः समय से पहले बाल सफेद होने के लिए एक प्राकृतिक हेयर डाई

कॉफीः समय से पहले बाल सफेद होने के लिए एक प्राकृतिक हेयर डाई

पहले उम्र बढ़ने के साथ बाल सफेद हुआ करते थे लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल के कारण कम उम्र के लोग भी बाल सफेद होने की समस्या का सामना कर रहे हैं. बाजार में मिलने वाले केमिकल हेयर कलर्स में अमोनिया जैसी चीजें होती हैं जो बालों को ड्राई और डैमेज कर देती हैं. इंटरनेशनल हेल्थ वेबसाइट हेल्थलाइन के मुताबिक, कॉफी नेचुरल हेयर डाई की तरह काम करती है. यह आपके बालों को एक या 2 शेड डार्क करने में मदद करती है और ग्रे हेयर्स (सफेद बालों) को आसानी से कवर कर लेती है. कॉफी नेचुरल होती है इसलिए इसके इस्तेमाल से बालों के टूटने या स्कैल्प में एलर्जी होने का खतरा नहीं रहता. कॉफी का डार्क कलर बालों पर एक नेचुरल स्टेन (दाग या रंग) की तरह चढ़ जाता है. जब आप इसे नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं तो सफेद बाल धीरे-धीरे ब्राउन और डार्क शेड में बदलने लगते हैं. मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, कॉफी न सिर्फ बालों को कलर करती है बल्कि यह नेचर में एसिडिक भी होती है. हमारा स्कैल्प और हेयर फाइबर्स स्वभाव से एसिडिक होते हैं. हाई पीएच वाले केमिकल प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने से बाल बेजान और रूखे हो जाते हैं. ऐसे में कॉफी का इस्तेमाल बालों और स्कैल्प के पीएच लेवल को रीबैलेंस करता है जिससे बालों की नेचुरल चमक वापस आ जाती है. कॉफी से नेचुरल हेयर डाई बनाना बेहद आसान है. इसके लिए आपको किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं है. आपको बस कुछ बेसिक स्टेप्स फॉलो करना होते हैं. सबसे पहले एक कप डार्क-रोस्टेड स्ट्रॉन्ग कॉफी उबाल लें और उसे ठंडा होने दें. फिर 1 बाउल में आधा कप उबली हुई ठंडी कॉफी, 2 बड़े चम्मच कॉफी पाउडर (कॉफी ग्राउंड्स) और एक कप अपना रेगुलर लीव-इन कंडीशनर मिक्स करें. फिर इस मिक्चर को अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. अपने साफ और गीले बालों पर इस पेस्ट को अच्छी तरह लगाएं और करीब एक घंटे के लिए छोड़ दें. इसके बाद बालों को नॉर्मल पानी से धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए आप इस प्रोसेस को दोहरा सकते हैं. कॉफी सिर्फ कलर ही नहीं बदलती बल्कि बालों को जड़ों से मजबूत भी बनाती है. रिसर्च के मुताबिक, कॉफी में मौजूद कैफीन बालों की ग्रोथ को बढ़ाने और हेयर लॉस को रोकने में मदद करता है. कैफीन स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को तेज करता है जिससे बालों की जड़ों तक जरूरी न्यूट्रिएंट्स पहुंचते हैं. इसके अलावा, कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बालों के टेक्सचर को सुधारते हैं जिससे बाल सॉफ्ट और सिल्की नजर आते हैं.
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Jun 19, 2026, 05:13 AM
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का लक्ष्य राज्य को योग, आयुर्वेद और कल्याण का केंद्र बनाना है

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का लक्ष्य राज्य को योग, आयुर्वेद और कल्याण का केंद्र बनाना है

सीएम ने राज्य सरकार उत्तराखंड को योग, आयुर्वेद और वेलनेस का केंद्र बनाने के लिए काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज दुनिया के 190 से अधिक देशों में लोग योग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से नियमित योग और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की अपील की।विज्ञापनविज्ञापनमुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से प्रतिदिन योग को अपनाने, स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने, नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने और योग के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा योग को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनेंगे।
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Jun 19, 2026, 05:05 AM
उम्र-पुरानी विधि के साथ बालों के झड़ने को रोकनाः तेल की शक्ति

उम्र-पुरानी विधि के साथ बालों के झड़ने को रोकनाः तेल की शक्ति

आजकल बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ी है। गलत खानपान और खराब जीवनशैली इसके पीछे मुख्य रूप से ज़िम्मेदार है। ऐसे में बालों को हेल्दी बनाए रखने के लिए लोग कई तरह के जतन करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं एक सदियों पुराना नुस्खा आपके बालों को जड़ से मजबूत बनाकर हेयर फॉल से बचाता है। जी, हम बात कर रहे हैं हेयर ऑयलिंग की। डॉ. अरिका बंसल, बता रही हैं कि हेल्दी हेयर के लिए ऑयलिंग क्यों ज़रूरी है और किस ऑयल से बालों की चंपी करनी चाहिए? स्कैल्प मसाज करने से सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचने में मदद मिलती है। इससे बाल मजबूत बन सकते हैं और उनका टूटना कम हो सकता है। स्कैल्प मसाज से तनाव कम होता है। दरअसल, बहुत ज़्यादा स्ट्रेस लेने की वजह से भी हेयर फॉल की समस्या बढ़ जाती है। अच्छी मसाज न केवल मानसिक तनाव को दूर करती है बल्कि इसे हेयर फॉल की समस्या भी रुक जाती है। स्कैल्प मसाज करने से नींद अच्छी आती है। खराब नींद भी हेयर फल का एक मुख्य वजह है। नींद अच्छी आने से पूरी होती है जिसका असर सिर्फ सेहत पर ही नहीं बल्कि आपके हेयर में भी देखने को मिलता है। स्कैल्प का अच्छी तरह से मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन तो बेहतर होता ही है साथ ही आपके स्कैल्प में जमी गन्दगी का भी सफाया होता है। दरअसल, ऑइलिंग करने से जड़ों में जमी रुसी ढीली पड़ती है और आसानी से निकलती है। बालों को जड़ों से मजबूत बनाने में नारियल तेल, प्याज का तेल और बादाम का तेल बेहद फायदेमंद माना जाता है। इन ऑयल से चप्मी करने से बालों को कई फायदे मिलते हैं। नारियल के तेल में मौजूद लॉरिक एसिड बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है और हेयर फॉल को रोकता है। प्याज के तेल की खुशबू शायद बहुत अच्छी न हो, लेकिन बालों की ग्रोथ के लिए इसके फायदे बेजोड़ हैं। इसमें मौजुद डाइटरी सल्फर केराटिन बनाते हैं। अगर पोषण की कमी की वजह से बाल झड़ रहे हैं, तो बादाम का तेल एक बेहतरीन उपाय है। इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम और जिंक भरपूर मात्रा में होते हैं, जो स्कैल्प को हेल्दी रखने के लिए ज़रूरी मिनरल हैं।
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Jun 19, 2026, 04:57 AM
बारिश के मौसम में स्वास्थ्य युक्तियाँः प्रतिरक्षा को बढ़ावा दें और बीमारियों से बचें

बारिश के मौसम में स्वास्थ्य युक्तियाँः प्रतिरक्षा को बढ़ावा दें और बीमारियों से बचें

1/5Image Source : Magnificमानसून में संक्रमण, पाचन संबंधी विकार और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं काफी बढ़ जाती है। डॉक्चर मिथुन मजूमदार के अनुसार, खान-पान, साफ-सफाई और लाइफस्टाइल में कुछ आदतों को शामिल कर लिया जाए तो बारिश में होने वाली स्वस्थ समस्याओं को काफी कम किया जा सकता है।2/5Image Source : Magnificमानसून में अक्सर पानी और खाने से होने वाली बीमारियां ज्यादा होती हैं। ऐसे में आपको शुद्ध, उबला हुआ पानी पीना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखे खाने से बचना चाहिए। ताजा घर का बना खाना खाएं और बासी रखे हुए खाने से बचें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही स्टोर करें।3/5Image Source : Magnificबरसात के मौसम में आपको ओवरऑल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए फल और सब्जियों का सेवन करें। ऐसे फल सब्जियां खाएं जिनमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा पाए जाते हैं। इस मौसम में सूप, खिचड़ी और ताजी सब्जियों से बना हल्का खाना खाएं। तले हुए भोजन और ठंडे ड्रिंक से बचें।4/5Image Source : Magnificइस मौसम में साफ-सफाई का बहुत ख्याल रखें। खाना खाने से पहले और बाहर से लौटने के बाद साबुन से हाथ धोएं। साबुन न हो तो आप हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें। आसपास भी स्वच्छता बनाए रखें। पानी को जमा होने से बचाएं और मच्छर से बचने की लिए उचित उपाय जरूर करें।5/5Image Source : Magnificमानसून में भले ही प्यास कम लगे लेकिन दिनभर में भरपूर पानी पीएं। भरपूर आराम करें, तनाव कम करें और घर के अंदर की जाने वाली शारीरिक गतिविधियां या कोई व्यायाम करें। घर का बना खाना खाएं और खुद को फिजिकली एक्टिव रखने की कोशिश करें।
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Jun 19, 2026, 04:22 AM
पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य जांच शिविर ने आश्चर्यजनक जटिलताओं का खुलासा किया

पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य जांच शिविर ने आश्चर्यजनक जटिलताओं का खुलासा किया

हमारे द्वारा पिछले दिनों 35-40 आयु वर्ग से ऊपर के पुलिसकर्मियों की स्वास्थ्य जांच के लिए विशेष शिविर लगवाकर फुल बॉडी जांच कराई थी। जिसमें 2350 में से 967 को अलग अलग तरह की परेशानी सामने आई हैं, जिनमें ईसीजी जांच में 259 पुलिसकर्मियों की बीमारी चिंताजनक है। इनके विशेष उपचार व्यवस्था कराई जा रही है।
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Jun 19, 2026, 01:47 AM
अशुभ व्यतिपत योग 4 राशियों के करियर और वित्त को प्रभावित करेगा

अशुभ व्यतिपत योग 4 राशियों के करियर और वित्त को प्रभावित करेगा

: व्यतिपात योग 10 जुलाई 2026 को सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक सक्रिय रहेगा। आमतौर पर ये योग अशुभ माना जाता है, जो करियर, पैसा और हेल्थ को प्रभावित करता है। इस योग के बनने से 4 राशियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इन राशियों की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी और खासतौर से करियर में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। चलिए जान लेते हैं ये कौन सी राशियां हैं। इस राशि वालों के लिए व्यतिपात योग काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अचानक से खर्चों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। आर्थिक स्थिति में काफी उतार-चढ़ाव आ सकता है। किसी बात को लेकर लव पार्टनर के साथ वाद-विवाद होने की संभावना रहेगी। आपको अपनी वाणी पर संयम बरतना होगा। आंखों और पेट से जुड़े समस्या हो सकती है। मिथुन राशि वालों का बजट इस योग के कारण बिगड़ सकता है। अचानक से आर्थिक नुकसान होने की संभावना दिखाई दे रही है। परिवार में कलह का माहौल रहेगा। प्रेमिका से किसी बात को लेकर भयंकर झगड़ा हो सकता है। अपने बोलने के तरीके पर संयम बरतना होगा। गले से संबंधी रोग परेशान कर सकता है। सिंह राशि वालों के लिए व्यतिपात योग परेशानियां बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। करियर में काफी दिक्कतें आ सकती हैं। कोई बड़ी डील हाथ से निकल सकती है। सेहत को लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी होगी। किसी करीबी से धोखा मिल सकता है। कुंभ राशि वालों के बनते काम अटक सकते हैं। मानसिक तनाव काफी ज्यादा रह सकते हैं। बिजनेस में भी कोई बड़ा नुकसान होने की संभावना है। 10 जुलाई को कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचें। बेवजह की यात्राओं पर जाने से भी बचना होगा। व्यतिपात योग के बुरे प्रभाव से बचने के लिए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का मन ही मन जाप करते रहें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और भोजन का दान जरूर करें। जितना हो सके शांत रहें। योग-ध्यान से आपको लाभ मिलेगा। सूर्य को जल अर्पित करें। किसी से लड़ाई-झगड़ा न करें।
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Jun 19, 2026, 01:29 AM
काली मिर्च के साथ प्रतिरक्षा को बढ़ावा देंः एक मौसमी सुपरफूड

काली मिर्च के साथ प्रतिरक्षा को बढ़ावा देंः एक मौसमी सुपरफूड

अगर आप बहुत जल्दी बीमार होते हैं। मौसम बदलते ही सर्दी, जुकाम की समस्या परेशान करने लगती है, आपकी पाचन क्रिया कमज़ोर है, तो आपको खाने में काली मिर्च का इस्तेमाल बढ़ा देना चाहिए। काली मिर्च में 'पाइपेरिन' नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और दवा की तरह काम करता है। रोज के खाने में आप आसानी से काली मिर्च का उपयोग बढ़ा सकते हैं। खासतौर से बदलते मौसम में काली मिर्च का सेवन अधिक करना चाहिए। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार काली मिर्च एक ऐसा पदार्थ है जिसका सेवन आपके शरीर में वात, पित्त और कफ के दोषों को नेचुरली बैलेंस करता है। काली मिर्च शरीर में ऊर्जा बनाए रखने, बीमारियों को दूर रखते हैं में मदद करती है। हालांकि इसका सेवन मौसम के हिसाब से करना फायदेमंद होता है। सर्दी में हल्की ज्यादा मात्रा में भी काली मिर्च का सेवन नुकसान नहीं देगा लेकिन गर्मी में ज्यादा काली मिर्च खाने से परेशानी हो सकती है। खाने में काली मिर्च का इस्तेमाल आपको भरपूर फायदे देता है। सर्दियों के दिनों में काली मिर्च का इस्तेमाल काफी ज्यादा किया जाता है। लड्डू, सूप, काढ़ा और कई दूसरे व्यंजनों में लोग काली मिर्च डालते हैं। जिससे ठंड के असर को कम किया जा सके। सर्दी जुकाम होने पर लोग काली मिर्च का सेवन करते हैं जिससे गले को आराम मिल सके। काली मिर्च खाने से पुरुषों में नपुंसकता कम होती है। अगर किसी को पीरियड्स देरी से आते हैं तो काली मिर्च का सेवन किया जा सकता है। जिन्हें चर्म रोग, बुखार और कुष्ठ रोग है उनके लिए काली मिर्च फायदेमंद है। आंखों के लिए काली मिर्च का काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। जोड़ों का दर्द, गठिया, लकवा और खुजली में काली मिर्च से बना तेल बहुत फायदा करता है। काली मिर्च में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो पेट को साफ रखने और पाचन को तेज करने में मदद करते हैं। काली मिर्च ऐसा मसाला है जिसका सेवन करने से शरीर में त्रिदोष सही तरीके से काम करता है। काली मिर्च गर्म तासीर की होती है और ये वात और कफ को शांत करती है। काली मिर्च लिवर से हानिकारक पदार्थों यानि जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करती है, इससे लिवर अधिक बेहतर तरीके से काम करता है। आयुर्वेद में काली मिर्च का उपयोग पेट के कीडे़ मारने के लिए भी किया जाता है। इसे खाने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं। चूंकि काली मिर्च गर्म तासीर की होती है तो ये अस्थमा के मरीज के लिए फायदेमंद मानी जाती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं छाती में जमे कफ को बाहर निकालने और पुरानी खांसी और सांस की तकलीफ में राहत पहुंचाने का काम करते हैं। काली मिर्च की तासीर गरम होती है अगर आप ज्यादा मात्रा में गर्मियों में काली मिर्च का सेवन करते हैं तो इससे शरीर में गरमी पैदा हो सकती है। आप सीमित मात्रा में काली मिर्च खा सकते हैं। गर्मियों में 1- 2 चुटकी काली मिर्च खाने से आपको कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि इसके फायदे मिलेंगे। कोई भी चीज चाहे कितनी भी फायदेमंद हो लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान दायक हो सकता है। काली मिर्च भी एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका सही मात्रा में सेवन करना ही सेहतमंद होगा। ज्यादा खाने से शरीर को नुकसान हो सकता है। ज्यादा काली मिर्च खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। कई बार लोगों को पेट में जलन की समस्या होने लगती है। कमजोर पाचन तंत्र या अल्सर के रोगियों को सीने में जलन और पेट में दर्द की शिकायत हो सकती है। इससे चेहरे पर दाने, फुंसियां या मुहांसे हो सकते हैं। Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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Jun 19, 2026, 01:00 AM
ताड़ासन योगः पीठ दर्द के लिए एक सरल समाधान

ताड़ासन योगः पीठ दर्द के लिए एक सरल समाधान

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डेस्क जॉब के कारण शरीर का पोस्चर बिगड़ना और पीठ में दर्द होना एक आम समस्या बन चुका है। ऐसे में इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए लोग दवाओं का सहारा लेते हैं। लेकिन शायद आपको मालूम नहीं है कि योग की मदद से आप इसे आसानी से ठीक कर सकते हैं। योग सिर्फ शरीर को फिट रखने का तरीका नहीं है, बल्कि दिमाग को शांत करने का भी बेहतरीन तरीका है। ऐसे में ताड़ासन योग सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि रोजाना सिर्फ 10 मिनट ताड़ासन करने से क्या क्या फायदे होते हैं। लगातार कंप्यूटर या फोन का इस्तेमाल करने से हमारी रीढ़ की हड्डी झुकने लगती है। ताड़ासन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी सीधी होती है, कंधे पीछे की ओर खिंचते हैं और पूरे शरीर का अलाइनमेंट सुधरता है। जब आप ताड़ासन में अपने हाथों को ऊपर की ओर खींचते हैं और पंजों पर खड़े होते हैं, तो यह आपके पूरे शरीर जैसे पीठ, पेट, जांघों और पैरों की मांसपेशियों को एक बेहतरीन स्ट्रेच देता है। इससे मांसपेशियों की जकड़न दूर होती है और शरीर लचीला बनता है। यह आसन बच्चों और किशोरों दोनों के लिए बेहद फायदेमंद है। नियमित रूप से ताड़ासन करने से रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है और ग्रोथ हार्मोन्स सक्रिय होते हैं, जिससे लंबाई बढ़ने में मदद मिलती है। इस आसन को करते समय जब पेट की मांसपेशियों पर खिंचाव आता है, तो पेट के अंदरूनी अंगों की मसाज होती है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और कब्ज की समस्या से राहत मिलता है। ताड़ासन करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। फिर गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और उंगलियों को आपस में फंसा लें। अब हथेलियों को आसमान की तरफ पलटें। इसके बाद धीरे-धीरे अपने पैरों की एड़ियों को ऊपर उठाएं और पूरे शरीर का वजन पंजों पर ले आएं। इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं। इस प्रक्रिया को 10 मिनट में 8 से 10 बार दोहराएं। जल्द फर्क दिखेगा।
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Jun 19, 2026, 12:59 AM
टाइप-2 मधुमेह का बढ़नाः दुनिया भर में बढ़ती चिंता

टाइप-2 मधुमेह का बढ़नाः दुनिया भर में बढ़ती चिंता

अच्छी बात यह है कि इनमें से कई बदलाव खानपान, व्यायाम और वजन नियंत्रण जैसी स्वस्थ आदतों से बदले भी जा सकते हैं। शोध करने वाली एम्स की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में शामिल है। यह तब होती है जब शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर किडनी, आंखों, नसों, हृदय और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है।विज्ञापनडॉ. रीमा ने बताया कि डायबिटीज का खतरा केवल माता-पिता से मिले जीन पर निर्भर नहीं करता। शरीर में कुछ ऐसे रासायनिक बदलाव भी होते हैं जो यह तय करते हैं कि कोई जीन कितना सक्रिय रहेगा। इन्हें एपिजेनेटिक बदलाव कहा जाता है। रिसर्च में पाया गया कि शरीर के फैट, लिवर, मांसपेशियों और अग्न्याशय की कोशिकाओं में डीएनए पर होने वाले ये बदलाव इंसुलिन और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले जीनों को प्रभावित करते हैं।विज्ञापनभारत को दुनिया की डायबिटीज कैपिटल कहा जाता है। अनुमान है कि देश में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि करोड़ों लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। ऐसे में बीमारी के लक्षण आने से पहले ही खतरे की पहचान करने वाली तकनीक लाखों लोगों को गंभीर जटिलताओं से बचा सकती है।डॉ. रीमा के अनुसार, शोध में पाया गया कि कुछ खास जीनों में होने वाले एपिजेनेटिक बदलाव डायबिटीज के शुरुआती संकेतक (बायोमार्कर) बन सकते हैं। यानी भविष्य में एक साधारण जांच से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी व्यक्ति को आने वाले वर्षों में डायबिटीज होने का कितना खतरा है।
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Jun 19, 2026, 12:24 AM
सोनीपत जिले ने सार्वजनिक भागीदारी के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन किया

सोनीपत जिले ने सार्वजनिक भागीदारी के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन किया

सोनीपत। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को जिलास्तरीय योग कार्यक्रम का आयोजन पुलिस लाइन में किया जाएगा। इसमें राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। इसके अलावा गोहाना, गन्नौर व खरखौदा में कायक्रम आयोजित किए जाएंगे।उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि गोहाना के कार्यक्रम में राई विधायक कृष्णा गहलावत, गन्नौर में विधायक देवेंद्र कादियान तथा खरखौदा में विधायक पवन खरखौदा बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे।विज्ञापनयोग कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, स्वयंसेवी संगठन, सामाजिक संस्थाएं एवं बड़ी संख्या में आमजन भाग लेंगे। इस दौरान सामूहिक योगाभ्यास कराया जाएगा। इससे स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया जाएगा।विज्ञापनउपायुक्त ने बताया कि जिलास्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए 19 जून को सुबह 6 बजे पुलिस लाइन में पायलट रिहर्सल आयोजित की जाएगी। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों से निर्धारित समय पर उपस्थित होकर योगाभ्यास करेंगे।उन्होंने जिलावासियों का आह्वान किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में योग कार्यक्रमों में भाग लेकर योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं तथा स्वस्थ, निरोग और विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनें।
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Jun 18, 2026, 10:28 PM
ब्रह्माकुमारी और रोटरी क्लब योग और आयुर्वेद के माध्यम से सक्रिय दीर्घायु के लिए एकजुट हुए

ब्रह्माकुमारी और रोटरी क्लब योग और आयुर्वेद के माध्यम से सक्रिय दीर्घायु के लिए एकजुट हुए

समारोह में डॉ. समिधा शर्मा ने आयुर्वेद और योग के माध्यम से सक्रिय दीर्घायु के महत्वपूर्ण गुर सिखाए। वहीं, अंबाला सबजोन निर्देशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने अपने आशीर्वचन में आध्यात्मिक जीवन और सकारात्मक सोच को जीवन का आधार बताया। कार्यक्रम के दौरान बीके राकेश मेहता, बीके सुनील, सोनिया और रजनी ने विभिन्न योगाभ्यास कराए, जबकि राजयोगिनी बीके शैली दीदी ने राजयोग ध्यान के जरिए मानसिक शांति का अनुभव कराया।विज्ञापनरोटेरियन नरेश भारद्वाज और अध्यक्ष डॉ. विवेक मल्होत्रा ने योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। अंत में डॉ. आरआर सूरी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन बीके प्रीति दीदी ने किया। इस अवसर पर रोटरी और ब्रह्माकुमारीज परिवार के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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Jun 18, 2026, 07:57 PM
डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर का खुलासाः नेत्र रोग विशेषज्ञ और हड्डी रोग विशेषज्ञ कैंप ड्यूटी पर

डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर का खुलासाः नेत्र रोग विशेषज्ञ और हड्डी रोग विशेषज्ञ कैंप ड्यूटी पर

बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन मपवाल और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके मेहता कैंप ड्यूटी पर तैनात थे। फिजिशियन डॉ. हरीश आर्या वीआईपी ड्यूटी पर गए थे। इनके अलावा चेस्ट फिजिशियन डॉ. एके जोशी और एक अन्य हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश अवकाश पर रहे।विज्ञापनमहत्वपूर्ण विभागों के डॉक्टरों के न होने से हवालबाग, धौलादेवी, भैंसियाछाना, लमगड़ा और ताकुला जैसे दूरस्थ विकासखंडों से आए मरीजों को भारी परेशानी हुई। उन्हें मजबूरी में जिला अस्पताल से पांच किलोमीटर दूर बेस अस्पताल के चक्कर काटने पड़े। हालांकि बेस अस्पताल में भी मरीजों की भारी भीड़ होने के कारण कई लोगों को क्लिनिक में महंगा इलाज कराना पड़ा जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। देर तक नंबर न आने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों की बसें और गाड़ियां छूट गईं जिससे उन्हें घर वापसी में भी परेशानी झेलनी पड़ी।विज्ञापनक्या बोले भुक्तभोगी मरीजमैं आंख दिखाने जिला अस्पताल आया था लेकिन यहां आकर पता चला कि डॉक्टर साहब कैंप ड्यूटी पर गए हैं। अब मजबूरी में दूसरे अस्पताल जाना पड़ रहा है। समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। - सुंदर राम, स्थानीय निवासी, अल्मोड़ा- हड्डी का उपचार कराने के लिए सुबह ही आ गया था लेकिन यहां आकर मालूम हुआ कि एक डॉक्टर अवकाश पर हैं और दूसरे कैंप ड्यूटी पर। बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ रहा है। - मनोज बिष्ट, पीड़ित मरीज, अल्मोड़ा
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Jun 18, 2026, 07:50 PM
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए तैयारी जारी

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए तैयारी जारी

योगाचार्य राकेश छिल्लर और उनकी टीम ने प्रतिभागियों को योग दिवस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए योगाभ्यास और प्रोटोकॉल की विस्तृत रिहर्सल कराई।इस दौरान योग की विभिन्न क्रियाओं और उन्हें सही तरीके से करने की जानकारी भी दी गई ताकि कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।विज्ञापनएसडीएम सुरेश कुमार ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से नियमित योग करने का आह्वान किया।जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. बसंत कुमार ने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योग दिवस के कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के सहयोग से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
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Jun 18, 2026, 07:49 PM
गर्मी की लहरः बुजुर्ग और हृदय रोगी रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और निर्जलीकरण से पीड़ित होते हैं

गर्मी की लहरः बुजुर्ग और हृदय रोगी रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और निर्जलीकरण से पीड़ित होते हैं

चिकित्सकों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इससे रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की समस्या बढ़ रही है। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों और हृदय रोगियों पर पड़ रहा है। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आर.आर. यादव ने बताया कि उमस और गर्मी के कारण बुजुर्गों में बीपी तथा हृदय संबंधी शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि बुजुर्ग नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराते रहें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने कहा कि तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी को नजरअंदाज न करें।विज्ञापनगंभीर स्थिति, विशेषकर लकवा जैसे मामलों में मरीजों को चंदौली या वाराणसी स्थित बीएचयू रेफर किया जा रहा है। जिला संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. आर.बी. सिंह ने बताया कि भीषण गर्मी और तापमान में उतार-चढ़ाव के दौरान रक्तचाप एवं हृदय रोगियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव, दोपहर की धूप से परहेज और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन बेहद जरूरी है।
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Jun 18, 2026, 07:33 PM
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले हीरानगर में योग शिविर का आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले हीरानगर में योग शिविर का आयोजन

संवाद न्यूज एजेंसीकठुआ। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आयोजित कार्यक्रम की शृंखला के तहत हीरानगर स्थित भारत-पाक सीमा से सटे गांव कडयाल में योग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।वीरवार को शिविर का आयोजन हाईस्कूल कडयाल के परिसर में किया गया। इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, ग्रामीणों, बीएसएफ जवानों, गृह विभाग के कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की निगरानी उपमंडल मजिस्ट्रेट हीरानगर फुलैल सिंह तथा जिला आयुष अधिकारी कठुआ डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने की।विज्ञापनएसडीएम फुलैल सिंह ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने लोगों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि योग स्वास्थ्य संरक्षण और रोगों की रोकथाम का एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित रूप से योग करने तथा 21 जून को आयोजित होने वाले 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में सक्रिय भागीदारी निभाने की सामूहिक शपथ ली।विज्ञापनकार्यक्रम में तहसीलदार हीरानगर अनूप सिंह, बीडीओ मढीन जावेद, सीडीपीओ प्रिया लक्ष्मी, नोडल अधिकारी योग डॉ. बोध पॉल, चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीत कुमार और डॉ. रितु बाला, सरकारी हाईस्कूल कडयाल के प्रधानाचार्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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Jun 18, 2026, 07:09 PM
जिला अस्पताल परिसर में सार्वजनिक शौचालय जल्द ही खुलेगा

जिला अस्पताल परिसर में सार्वजनिक शौचालय जल्द ही खुलेगा

इसके साथ ही जिला अस्पताल परिसर में नगर पालिका द्वारा निर्मित सार्वजनिक शौचालय भी शीघ्र शुरू होने जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. रमाशंकर सिंह ने बताया कि शौचालय के संचालन एवं नियमित साफ-सफाई के लिए नगर पालिका और जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र भेजकर आवश्यक व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है।विज्ञापनसभी औपचारिकताएं पूरी होते ही शौचालय का उद्घाटन कर इसे मरीजों और उनके परिजनों के लिए खोल दिया जाएगा। सीएमएस डॉ. रमाशंकर सिंह ने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर विभिन्न वार्डों, ओपीडी, बाल रोग विभाग और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डॉक्टरों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। शासन की मंशा के अनुरूप सभी स्वास्थ्य सेवाएं पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित की जाएं।विज्ञापनउन्होंने बताया कि वर्तमान में भीषण गर्मी और बदलते मौसम के कारण सर्दी, जुकाम, बुखार, एलर्जी, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए सभी चिकित्सकों को सतर्क रहने तथा मरीजों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।सीएमएस ने कहा कि दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए जिला अस्पताल में आवश्यक दवाएं, जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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Jun 18, 2026, 07:08 PM
अमेठी जिले में विभिन्न स्थानों पर योग सत्र आयोजित किए जाएंगे

अमेठी जिले में विभिन्न स्थानों पर योग सत्र आयोजित किए जाएंगे

योग दिवस के तहत ब्लॉक अमेठी, गौरीगंज वृद्धाश्रम, जामों, सिंहपुर, गायत्री शक्ति पीठ अमेठी, नगर पालिका परिषद जायस, बाबा गुरु गोरखनाथ धाम, टीकरमाफी परमहंस आश्रम, अहोरवा भवानी समरौता तथा रिजर्व पुलिस लाइन सहित विभिन्न स्थानों पर योग सत्र आयोजित होंगे। प्रशिक्षित योगाचार्य प्रतिभागियों को योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराएंगे। नोडल अधिकारी डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है।
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Jun 18, 2026, 06:50 PM
योग प्रशिक्षक ने सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल में सुबह के सत्र का नेतृत्व किया

योग प्रशिक्षक ने सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल में सुबह के सत्र का नेतृत्व किया

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बैरौना की योग प्रशिक्षक डॉ. शाहीन फातमा ने सुबह छह से सात बजे तक योगाभ्यास कराया। उन्होंने सूक्ष्म व्यायाम कराकर योगाभ्यास सत्र की शुरुआत की। इसके बाद ताड़ासन, त्रिकोणासन, मकरासन, मंडूक-आसान, प्राणायाम व ऋतुचर्या आदि योगासनों का अभ्यास कराया।विज्ञापनउन्होंने लोगों से योगासनों को अपने जीवनचर्या में शामिल करने की अपील की। इस दौरान बीडीओ/ डीडीओ सुशील कुमार सिंह, ब्लॉक प्रमुख रामाशीष गुप्ता, एडीओ पंचायत प्रवीण राय, एडीओ पंचायत कृषि मदन यादव आदि मौजूद रहे।
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Jun 18, 2026, 03:46 PM
पपीता के बीजों के स्वास्थ्य लाभों को खोलेंः एक शक्तिशाली डिटॉक्स एजेंट

पपीता के बीजों के स्वास्थ्य लाभों को खोलेंः एक शक्तिशाली डिटॉक्स एजेंट

सुबह के ब्रेकफास्ट में पपीता खाना सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है. हम बड़े चाव से इसका मीठा और नारंगी पल्प तो खा लेते हैं, लेकिन इसके अंदर मौजूद काले और चिपचिपे बीजों को डस्टबिन के हवाले कर देते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स और आयुर्वेद की मानें तो पपीते के बीज असल में एक पावरफुल डिटॉक्स एजेंट हैं. इनमें भरपूर मात्रा में फैटी एसिड्स, फाइबर और पेपेन नाम का एंजाइम पाया जाता है जो कई तरह से हमारे काम आ सकते हैं. हालांकि इसके सेवन से पहले आपको एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. आइए जानते हैं कि कैसे आप पपीते के बीजों को साफ करके अपनी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बना सकते हैं. पपीते के बीजों को फल से अलग करके पानी में अच्छी तरह धो लें. इसके बाद इन्हें धूप में सुखा लें. सूखने के बाद ये बिल्कुल काली मिर्च जैसे दिखने लगते हैं. इन्हें मिक्सी या क्रशर में दरदरा पीस लें और सलाद, सूप या पास्ता के ऊपर सीजनिंग की तरह छिड़क कर खाएं. पपीते के 4-5 सूखे बीजों को पीसकर गुनगुने पानी में मिलाएं. इसमें आधा नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं. यह ड्रिंक मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और शरीर से एक्स्ट्रा फैट बर्न करने में बहुत असरदार है. अगर आप सुबह फ्रूट स्मूदी, मैंगो शेक या ग्रीन जूस पीते हैं तो उसमें 4-5 फ्रेश या सूखे पपीते के बीजों को डालकर ब्लेंड कर लें. इसका तीखापन स्मूदी के मीठे स्वाद के साथ आसानी से बैलेंस हो जाता है और आपको भरपूर न्यूट्रिशन मिलता है. अगर आपको अक्सर पेट में कीड़े होने या अपच की समस्या रहती है तो एक चम्मच शहद के साथ 4-5 ताजे पपीते के बीजों को चबाकर खाएं. इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण पेट के इन्फेक्शन को तुरंत ठीक करने में मदद करते हैं.
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Jun 18, 2026, 03:09 PM
थकान महामारीः विशेषज्ञ ऊर्जा की निरंतर कमी के लिए खराब जीवन शैली, स्क्रीन समय को जिम्मेदार ठहराते हैं

थकान महामारीः विशेषज्ञ ऊर्जा की निरंतर कमी के लिए खराब जीवन शैली, स्क्रीन समय को जिम्मेदार ठहराते हैं

संवाद न्यूज एजेंसीनई दिल्ली। पर्याप्त नींद लेने के बावजूद दिनभर थकान, सुस्ती और ऊर्जा की कमी महसूस होना आजकल आम समस्या बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे खराब जीवनशैली, मानसिक तनाव, बढ़ता स्क्रीन टाइम और शारीरिक निष्क्रियता मुख्य कारण है।विशेषज्ञों के अनुसार लगातार मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके अलावा अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और काम का बढ़ता दबाव भी शरीर को पूरी तरह आराम नहीं करने देता। ऐसे में व्यक्ति पूरी रात सोने के बाद भी खुद को थका हुआ महसूस करता है।विज्ञापनगुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि कई बार लगातार थकान महसूस होना शरीर में पोषण की कमी, तनाव, एनीमिया, थायरॉयड संबंधी समस्याओं या खराब नींद की गुणवत्ता का संकेत भी हो सकता है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, समय पर सोना और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करके इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य पर।
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Jun 18, 2026, 02:50 PM
कच्चा केला कोफ्टाः आपके दैनिक दोपहर के भोजन के लिए एक शाही मोड़

कच्चा केला कोफ्टाः आपके दैनिक दोपहर के भोजन के लिए एक शाही मोड़

दोपहर के खाने में अक्सर वही रोज की तोरई, भिंडी या लौकी खाकर हर कोई बोर हो जाता है. खासकर बच्चे हरी और सादी सब्जियां देखकर मुंह बनाने लगते हैं. अगर आप आज के लंच को कुछ ऐसा ट्विस्ट देना चाहते हैं जो देखने में बिल्कुल शाही लगे और स्वाद में मलाई कोफ्ते जैसा रिच हो तो कच्चे केले का कोफ्ता बेस्ट ऑप्शन है. कच्चा केला सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है और इसका कोफ्ता इतना सॉफ्ट और जूसी बनता है कि मुंह में जाते ही घुल जाता है. जब इसके कोफ्तों को टमाटर, प्याज और काजू-मसालों की गाढ़ी, मखमली ग्रेवी में पकाया जाता है तो इसका स्वाद नॉन-वेज और कड़ाही पनीर को भी फेल कर देता है. आइए जानते हैं इसे घर पर परफेक्ट और सॉफ्ट बनाने की सबसे आसान विधि. कच्चे केले: 4 (उबले हुए) उबला आलू: 1 (बाइंडिंग के लिए) बेसन: 2-3 बड़े चम्मच (भुना हुआ) ग्रेवी के लिए: 2 बड़े प्याज (पेस्ट), 3 टमाटर (प्यूरी), 1 चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, 6-7 काजू (भिगोए हुए). खड़े मसाले: 1 तेजपत्ता, 1 बड़ी इलायची, 2 लौंग, 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी. पिसे मसाले: 1 छोटी चम्मच हल्दी, 1 छोटी चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च, 1 चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 छोटी चम्मच गरम मसाला, 1/2 चम्मच कसूरी मेथी. तेल: कोफ्ते तलने और ग्रेवी पकाने के लिए नमक और फ्रेश क्रीम/मलाई: स्वादानुसार व गार्निशिंग के लिए उबले हुए कच्चे केलों का छिलका उतारकर उन्हें एक बाउल में अच्छी तरह मैश कर लें. अब इसमें एक उबला आलू कद्दूकस करके डालें. साथ में भुना हुआ बेसन, बारीक कटी हरी मिर्च, थोड़ा सा हरा धनिया, नमक, थोड़ी सी लाल मिर्च और हल्दी डालकर बिना पानी के एक गाढ़ा डो तैयार कर लें. हथेलियों पर थोड़ा सा तेल लगाएं और इस मिक्स्चर की छोटी-छोटी गोलियां बना लें. एक कढ़ाई में तेल गर्म करें और कोफ्तों को मध्यम आंच पर दोनों तरफ से अलट-पलट कर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तल लें. तलने के बाद इन्हें टिशू पेपर पर निकाल लें. एक दूसरी कढ़ाई में 2 चम्मच तेल गर्म करें. इसमें तेजपत्ता, दालचीनी, लौंग और बड़ी इलायची डालें. अब प्याज का पेस्ट डालकर उसे सुनहरा होने तक भूनें. इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर 1 मिनट भूनें. अब इसमें हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालें. तुरंत टमाटर की प्यूरी और काजू का पेस्ट (काजू को थोड़े पानी के साथ पीस लें) डालकर मसाले को तब तक पकाएं जब तक कि वह कढ़ाई से तेल न छोड़ने लगे. मसाले के भुनते ही इसमें आवश्यकतानुसार (लगभग 1 से डेढ़ कप) गुनगुना पानी डालें और ढककर ग्रेवी को 5 मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें. आखिरी में इसमें गरम मसाला और हाथों से क्रश की हुई कसूरी मेथी मिलाएं. ध्यान रहे कि कोफ्तों को कभी भी उबलती हुई ग्रेवी में सीधे न डालें, नहीं तो वो टूट सकते हैं. सर्व करते समय कोफ्तों को सर्विंग बाउल में रखें और ऊपर से गरमा-गरम गाढ़ी ग्रेवी डालें. ऊपर से फ्रेश मलाई और हरे धनिए से गार्निश करके इसे तंदूरी रोटी, लच्छा पराठा या जीरा राइस के साथ लंच में परोसें.
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Jun 18, 2026, 02:48 PM
कलौंजी सीड्सः मधुमेह, वजन घटाने और हृदय स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक उपचार

कलौंजी सीड्सः मधुमेह, वजन घटाने और हृदय स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक उपचार

1/5Image Source : magnificडायबिटीज के मरीजों के लिए कलौंजी किसी वरदान से कम नहीं है। कई शोध बताते हैं कि खाली पेट कलौंजी का सेवन करने से फास्टिंग ब्लड शुगर और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद मिलती है।2/5Image Source : magnificअगर आप बढ़ते वजन से परेशान हैं, तो कलौंजी आपकी मदद कर सकती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है और फैट को बर्न करने में सहायक है। गुनगुने पानी में कलौंजी का पाउडर और शहद मिलाकर पीना वजन घटाने का बेहतरीन तरीका है।3/5Image Source : magnificकलौंजी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और हेल्दी फैटी एसिड्स शरीर से बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।4/5Image Source : magnificबढ़ती उम्र के साथ भूलने की बीमारी या कमजोर याददाश्त की समस्या को दूर करने में कलौंजी फायदेमंद है। इसे शहद के साथ चबाकर खाने से ब्रेन फंक्शन बेहतर होता है और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है।5/5Image Source : magnificकलौंजी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, जिससे आप सर्दी-खांसी, वायरल इन्फेक्शन और अन्य मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं।
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Jun 18, 2026, 12:22 PM
समय से पहले होने वाली बीमारियों में वृद्धि भोजन की आदतों और जीवन शैली में बदलाव से जुड़ी हुई है

समय से पहले होने वाली बीमारियों में वृद्धि भोजन की आदतों और जीवन शैली में बदलाव से जुड़ी हुई है

अब बीमारियां कम उम्र में हो रही हैं. 30 पार करते ही लोगों को घुटनों में दर्द से लेकर कैंसर तक हो रहा है. समय से पहले बीमारियां होने के कई कारण हैं, लेकिन कुछ ऐसी आदतें भी हैं जो बीमारी होने का खतरा दोगुना कर सकती हैं. वह आदतें कौन सी हैं. इस बारे में जानने के लिए हमने एक्सपर्ट से बातचीत की है. हमारे एक्सपर्ट हैं डॉ जुगल किशोर बताते हैं कि अगर आप दो दशक पीछे जाएं तो डायबिटीज, बीपी की बीमारी, हार्ट डिजीज, फैटी लिव और आर्थराइटिस जैसी बीमारियां 50 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखने में आती थी. लेकिन अब 30 की उम्र के बाद ही ये हो रही हैं. अब खानपान से लेकर लाइफस्टाइल सब बदल गया है. पहले लोग दिन में दो से तीन बार खाना खाते थे, लेकिन अब बीच- बीच में कुछ न कुछ खाने की आदत बन गई है. अब लोग खाते तो ज्यादा हैं, लेकिन उसके हिसाब से एक्सरसाइज नहीं करते हैं. डॉ. किशोर के मुताबिक, अब तो जरूरत का कोई सामान खरीदने के लिए बाहर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती है. इस कारण फिजिकल एक्टिविटी बिलकुल खत्म हो रही है. खानपान का पैटर्न इतना बदल गया है कि रोटी- चावल की जगह अब लोगों को फास्ट फूड खाना ज्यादा पसंद आता है. कुछ लोग तो हफ्ते में कई बार इसको खाते हैं. डॉ किशोर कहते हैं कि हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी उसको मानसिक तनाव होता ही है. ऐसा होना आम बात है, लेकिन अगर ये हर दिन हो रहा है तो फिर इसका सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ता है. मानसिक तनाव के कारण कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है. अभी तक हुई कई रिसर्च बताती हैं कि मेंटल स्ट्रेस के कारण मोटापा, हाई बीपी, बालों का झड़ना जैसी समस्याएं होने लगती हैं. अगर आप रोज तनाव में रहते हैं तो शरीर में हार्मोन के फंक्शन भी बिगड़ने लगते हैं. जो हार्मोन कम बनने चाहिए वो ज्यादा बनते हैं. इसका शरीर पर गंभीर असर पड़ता है. अगर आप एक्सरसाइज नहीं करते हैं तो ये मान लें कि 30 के बाद कई बीमारियां आपको घेर सकती हैं. नियमित एक्सरसाइज करने से आप मोटापा, हाई बीपी और हार्ट की बीमारियों से बच सकते हैं. फिजिकल एक्टिविटी करने से एंडोर्फिन (दिमाग में अच्छा महसूस कराने वाले केमिकल) निकलते हैं, जिससे स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा कम होता है. रेगुलर मूवमेंट से आपकी याददाश्त सुरक्षित रहती है, सीखने की क्षमता बढ़ती है और उम्र बढ़ने के साथ आपकी सोचने-समझने की क्षमता तेज़ बनी रहती है. एक्टिव रहने से आपको जल्दी और गहरी नींद आती है, और जागने पर आप ज़्यादा ताजा महसूस करते हैं. एक्सरसाइज़ से दिल की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं, ब्लड प्रेशर कम होता है और पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. सिगरेट और शराब की लत आपके शरीर को अंदर ही अंदर बीमार बना रहीं हैं. हालांकि शुरुआत में इसका पता नहीं चलता है लेकिन ये आदत लंग्स कैंसर से लेकर लिवर के खराब होने का भी कारण बन सकती है. तंबाकू के धुएं में टार, कार्बन मोनोऑक्साइड और कई कैंसर कारक तत्व होते हैं. स्मोकिंग से फेफड़ों को सीधे नुकसान होता है, जिससे क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसी बीमारियां होती हैं. इस बारे में डॉ सुभाष गिरि बताते हैं कि अगर आपको किसी भी बीमारी से बचना है तो सबसे पहले अपना खानपान ठीक करें. सोने और जागने का समय निर्धारित करे. कोशिश करें कि 11 बजे से पहले सो जाएं. देर रात भोजन न करें.रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज करें. मानसिक तनाव न लें. रोज योग और ध्यान करें.
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Jun 18, 2026, 10:00 AM
जिला प्रशासन और आयुष विभाग ने योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया

जिला प्रशासन और आयुष विभाग ने योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया

योग दिवस का आयोजन जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। सुचारु संचालन के लिए एक दिन पूर्व ही ढालपुर मैदान में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी। मैदान में दरी-पट्टी सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी वर्गों से स्वस्थ जीवन के लिए योग अपनाने तथा बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर योगाभ्यास करने की अपील की। इस दौरान जिला आयुष अस्पताल प्रभारी डॉ. मनुबाला आदि उपस्थित रहे। संवाद
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Jun 18, 2026, 09:20 AM
खराब आहार और जीवन शैली के कारण ग्रामीण पीसीओएस के मामले बढ़ रहे हैंः योग अभ्यास उम्मीद जगाता है

खराब आहार और जीवन शैली के कारण ग्रामीण पीसीओएस के मामले बढ़ रहे हैंः योग अभ्यास उम्मीद जगाता है

खराब खानपान और लाइफस्टाइल के कारण महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. अब इस बीमारी को पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कहा जाने लगा है. यह महिलाओं में बांझपन होने का भी कारण बन सकती है. हालांकि इसको आसानी से कंट्रोल भी किया जा सकता है. एम्स नई दिल्ली में हुई रिसर्च से पता चला है कि नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान से PMOS को काबू में किया जा सकता है. . के नेतृत्व में यह रिसर्च हुई है. इसमें पता चला है कि नियमित योग करने से PMOS से संबंधित सभी लक्षणों में कमी आती है. डॉ रीमा आजतक. इन से बातचीत में बताती हैं कि देश में PMOS के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. यह समस्या अब शहर की नहीं बल्कि गांव की महिलाओं को भी हो रही है. खराब खानपान और बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल इसका कारण है. PMOS की बीमारी के कारण महिलाओं में बांझपन का रिस्क होता है. उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ने लगता है. इस वजह से चेहरे पर बाल आने लगते हैं. कुछ महिलाओं में वजन भी तेजी से बढ़ता है. रिसर्च में यह पता चला है कि योग, प्राणायाम और ध्यान से PMOS के इन सभी लक्षणों को काबू में किया जा सकता है. योग करने से महिलाओं को क्या- क्या फायदा हुआ डॉ. रीमा बताती हैं कि एम्स में हुई रिसर्च में 100 से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया था. इन महिलाओं ने 12 सप्ताह तक हफ्ते में पांच दिन तक हर दिन 90 मिनट योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया था. डॉ. रीमा दादा ने बताया कि जिन महिलाओं ने योग, ध्यान और प्राणायाम किया उनके शरीर में कई महत्वपूर्ण हार्मोनल बदलाव देखने को मिले. योग से महिलाओं के पीरियड समय पर आए. वजन कंट्रोल में आया, उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का लेवल कम हुआ. इससे उनके चेहरे और शरीर पर बालों की वृद्धि कम हुई मुंहासों जैसी समस्याओं में भी कमी देखी गई. कई महिलाओं ने यह भी बताया कि योग करने के बाद उनके बच्चा भी कंसीव हुआ. रिसर्च से यह भी पता चला कि योग करने से महिलाओं का मेटाबॉलिक रेट भी अच्छा हुआ. उनके शरीर में इंसुलिन का फंक्शन बेहतर होने लगा. इससे उनके वजन और ब्लड शुगर लेवल में काफी कमी देखी गई. योग से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भी मदद मिली. योग और ध्यान करने वाली महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण भी कम हुए हैं. डॉ रीमा दादा ने बताया कि रोज योग, ध्यान और प्राणायाम करने से शरीर को काफी फायदा मिलता है. चूंकि PMOS जैसी बीमारियां महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है तो उनको योग रोज करना चाहिए. आप ये योग कर सकते हैं. बद्ध कोणासन सेतु बंधासन कोबरा मुद्रा नौकासन मलासन सूर्य नमस्कार
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Jun 18, 2026, 08:48 AM
दिल के रोगियों में वृद्धिः क्यों तुरंत ओट्स आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं

दिल के रोगियों में वृद्धिः क्यों तुरंत ओट्स आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं

आजकल देश दुनिया में हार्ट के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हार्ट से जुड़ी बीमारियों के पीछे की वजह शरीर में बढ़ता बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल है। हालांकि, कई लोग बेहतर हार्ट हेल्थ के लिए अपनी डाइट और जीवनशैली में बदलाव भी किए हैं। बावजूद इसके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल कम होने का नाम नहीं लेता है। ऐसे में जानी-मानी चिकित्सक और बता रही हैं कि आखिर हेल्दी खाने के बाद भी बैड कोलेस्ट्रॉल क्यों कंट्रोल नहीं हो रहा है? फाइबर से भरपूर ओट्स एक हेल्दी सुपरफूड है। लेकिन, ओट्स खरीदते समय अक्सर लोग इंस्टेंट या मसाला ओट्स खरीदकर लाते हैं। ओट्स में बीटा ग्लूटेन फाइबर होता है लेकिन इंस्टेंट या मसाला ओट्स में ये फाइबर नहीं होते हैं क्योंकि इसमें बहुत ज़्यादा शुगर और साल्ट का इस्तेमाल होता है जो हार्थ हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए हमेशा प्लेन ओट्स खरीदें। प्लेन ओट्स में भी मीठा बिल्कुल भी न डालें। ओट्स को ओवरनाइट सोक करने की बजाय उसे सुबह पकाकर खाएं। : अलसी के बीज में ALA, ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है जो बैड कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है लेकिन अगर आप इसे कच्चा सेवन करते हैं तो यह पेट में पचता नहीं है जिससे शरीर में ALA नहीं बनता है तो बैड कोलेस्ट्रॉल कैसे कंट्रोल होगा। इसे आप रात में पानी में भिगोकर सुबह सेवन करें, इसका पाउडर बनाकर तुरंत सेवन करें, हफ्ते तक स्टोर न करें। चिया सीड्स कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद सोल्यूबर फाइबर बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कर हार्ट की हेल्थ को बेहतर करता है। चिया सीड्स का पाउडर बनाकर सूखा सेवन करने से कोई फायदा नहीं होगा। कई लोग चीनी वाले स्मूदी, पुडिंग, फालूदा या ड्रिंक में चिया सीड्स का इस्तेमाल करते है। इससे कोई फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि अगर किसी भी चीज में चीनी डालकर आप चिया सीड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो शुगर बढ़ेगा जो ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ने के लिए ज़िम्मदार है। : लहसुन बीपी और बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करने में कारगर है। लेकिन अगर आप सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करते हैं तो कोई फायदा नहीं मिलेगा। दरअसल, लहुसन को हमेशा हाई फ्लेम पर पकाया जाता है जिस वजह से इसके फायदे नहीं मिल पाते हैं। इसको छीलकर उसे क्रश करने के बाद जब खाना 80 प्रतिशत तक बन जाए तभी उसे सब्जी या दाल में डालें तभी यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में कारगर है।
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Jun 18, 2026, 07:58 AM
मधुमेह से बचावः स्वस्थ जीवन शैली की आदतें अपनाएं

मधुमेह से बचावः स्वस्थ जीवन शैली की आदतें अपनाएं

1/5Image Source : India Tvडायबिटीज लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है। इससे बचना है तो अपनी लाइफस्टाइल में सुधार जरूर कर लें। खाने में मैदा वाली चीजों से एकदम दूरी बना लें। बाहर के खाने में मैदा का ज्यादा इस्तेमाल होता है। इससे आपको बचना चाहिए।2/5Image Source : India Tvशुगर के लिए तेल भी खतरनाक हो सकती है। बाहर एक ही तेल को बार-बार गर्म किया जाता है, जिससे वो तेल शरीर के लिए जहर समान हो जाता है। इसलिए बाहर तली हुई ऑयली चीजें जैसे समोसा, कचौड़ी, भटूरे और पूरी पराठे खाने से बचें।3/5Image Source : Magnificडायबिटीज से बचने के लिए आपको खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम करनी चाहिए। इसकी बजाय आप प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीजों का सेवन करें। इससे आपको लंबे समय में शुगर का खतरा कम रहेगा और बढ़ा हुआ शुगर भी कम होगा।4/5Image Source : Magnificमार्केट में बिकने वाले जूस, पैक्ड फ्लेवर्ड मिल्क और दही, कोल्ड ड्रिंक, सोडा और मीठे चीजों से सेवन से परहेज करें। आपको ज्यादा मिठाई खाने से भी बचना चाहिए। इससे शुगर का खतरा काफी बढ़ जाता है।5/5Image Source : Magnificखाने के बाद बैठने की आदत से भी दूरी बना लें। दिनभर में कोई न कोई एक फिटनेस एक्टिविटी जरूर करें। इसके साथ ही आपको हर मील के बाद कुछ कदम टहलने की आदत बना लेनी चाहिए। इससे शुगर का खतरा कम होता है।
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Jun 18, 2026, 06:15 AM
40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएँः कोमल व्यायाम के साथ ताकत हासिल करना

40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएँः कोमल व्यायाम के साथ ताकत हासिल करना

अगर आप 40 साल से ज्यादा उम्र की हैं और बिना किसी हैवी वर्कआउट के भी थकान महसूस करती हैं, तो आप अकेली नहीं हैं। ऐसा ज्यादातर महिलाओं को महसूस होता है। ऐसा बढ़ती उम्र की वजह से होता है। आपकी हड्डियों की डेंसिटी कमजोर होने लगती है और स्टैमिना घटने लगता है। ऐसी स्थिति में आपको दिनभर थकान, कमजोरी और बिस्तर पर लेटे रहने का मन करता है। अगर आपको भी ये लक्षण महसूस हो रहे हैं तो ये बिल्कुल सामान्य है। इसके लिए जरूरी है कि आप थोड़ा व्यायाम करें और अपनी मांसपेशियों को मजबूत बनाने पर काम करें। इससे आपको खोई हुई ताकत वापस मिलने लगेगी। आशा आयुर्वेद की डायरेक्टर डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि 40 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को सेहतमंद रहने या शरीर को एक्टिव रखने के लिए भारी वर्कआउट की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, उन्हें बस सही एक्सरसाइज की जरूरत है जो उनके शरीर के हिसाब से हो और उन्हें दिन भर एक्टिव रखे। आप इन हल्के व्यायाम को लाइफस्टाइल का हिस्सा बना सकते हैं। हर बार बाहर जाते समय गाड़ी का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। तेज चलने की कोशिश करें, बस आपको टारगेट ध्यान में रखना है। शुरुआत में खुद पर ज्यादा जोर न डालें। अगर वॉक करते हुए सांस फूलने लगे तो रुक जाएं। थोड़ा रिलेक्स करें और आराम करें क्योंकि यह कोई रेस नहीं है। आपको दिन में 15 मिनट चलने से शुरुआत करनी है और इसे 45 मिनट तक करें। सुनने में यह भले ही थका देने वाला लगे, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। मसल्स को हेल्दी रखने के लिए आपको भारी वजन उठाने की जरूरत नहीं है। आपको बस सही वजन की जरूरत है। इसके लिए आप हल्के डंबल के साथ चेस्ट प्रेस एक्सरसाइज कर सकते हैं। इसके अलावा बेंट ओवर रोज, ग्लूट ब्रिजेज, लंजेज, डेडलिफ़्ट्स जैसे व्यायाम खुद से घर पर या जिम में आसानी से कर सकते हैं। गर्मियों के लिए बेस्ट है स्विमिंग करना, लेकिन आपको सिर्फ पानी में उतरना नहीं है बल्कि अच्छी स्विमिंग करने के लिए मेहनत करनी है। आप इसके लिए स्विमिंग क्लास जॉइन कर लें। इससे आपको हाथ और पैर दोनों का तालमेल बिठाकर मूवमेंट करना आसान होगा। स्विमिंग से आपके पूरे शरीर की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है। एक स्टडी के अनुसार बढ़ती उम्र की महिलाओं के लिए वॉटर एरोबिक एक्टिविटी अच्छी है इससे शरीर की चर्बी और ब्लड प्रेशर कम होता है और ताकत आती है। अगर आपको डांस पसंद है, तो ज़ुम्बा आपके लिए बेस्ट है। ये कोई बॉलीवुड डांस नहीं बल्कि एक सिंक्रोनाइज्ड रूटीन है जो काफी मजेदार होता है। इससे वजन कम होता है और शरीर में एनर्जी आती है। कैलोरी कम करने के लिए ज़ुंम्बा काफी असरदार व्यायाम है। ये एक ऐसी फिजिकल एक्टिविटी जो आपकी हार्ट रेट बढ़ाती है, सांस लेने की गति तेज़ करती है और आपके दिल, फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को सक्रिय करती है। कार्डियो में मुख्य रूप से एरोबिक एक्सरसाइज़ होती हैं, जिससे आपका स्टैमिना बढ़ता है, कैलोरी बर्न होती हैं और दिल की सेहत को बेहतर बनती है। अगर आपको साइकिलिंग पसंद है तो ये बेहतरीन विकल्प है। सुबह-सुबह साइकिलिंग करने का मजा ही कुछ और है। साइकिलिंग से सांस फूल सकती है, लेकिन सुबह-सुबह साइकिलिंग करना अच्छा व्यायाम है। इससे फेफड़े मजबूत होते हैं और वजन भी कम होता है। दिन में 5 से 10 मिनट की कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज़ दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी कम कर सकती है, मानसिक स्वास्थ्य में सुधार कर सकती है और लंबे समय तक वज़न को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है। घर में रोजाना सीढ़ियां चढ़ने और उतरने की आदत बनाएं। कार्डियोवैस्कुलर एंड्योरेंस बढ़ाने, ज्यादा से ज्यादा कैलोरी बर्न करने और शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों जैसे ग्लूट्स, क्वाड्स और काव्स को मजबूत करने का सबसे आसान तरीका है। अच्छी नींद कोई वर्कआउट नहीं है, बल्कि एक जरूरी शारीरिक प्रक्रिया है जो एक्सरसाइज के साथ डबल फायदा देती है। जहां एक्सरसाइज शरीर और दिमाग को ऊर्जा देती है, वहीं नींद मांसपेशियों को दोबारा बनाने, चर्बी बर्न करने और दिमाग को तरोताज़ा करके रिकवर करने के लिए जरूरी है।
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Jun 18, 2026, 04:48 AM
आम की गुठली की शक्ति को खोलेंः आपके स्वास्थ्य और सुंदरता के लिए एक पौष्टिक बढ़ावा

आम की गुठली की शक्ति को खोलेंः आपके स्वास्थ्य और सुंदरता के लिए एक पौष्टिक बढ़ावा

आम के आम और गुठलियों के दाम.... यह कहावत हम सबने कई बार सुनी है लेकिन क्या आपने कभी असल जिंदगी में इसे आजमाया है. गर्मियों में हम सभी आम खाने के बाद गुठली सीधे डस्टबिन में डाल देते हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स और आयुर्वेद की मानें तो आम की गुठली कोई फालतू चीज नहीं बल्कि आपकी सेहत और सुंदरता का पावरहाउस है. अंग्रेजी वेबसाइट हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, आम की गुठलियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं जिनमें विटामिन A, C और E जैसे एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैट् होते हैं. आम की गुठली का पाउडर पेट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देकर दस्त और अपच जैसी पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है. ये स्किन और बालों की ग्रोथ में भी बेहद असरदार हैं. ऐसे में फिर इस सीजन में आम के स्वाद के साथ गुठली का भी पूरा फायदा क्यों न उठाया जाए. आइए जानते हैं कि आम की गुठली को साफ करके आप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं. आम की गुठली को सुखाकर उसके ऊपरी कड़े हिस्से को तोड़ लें. अंदर से निकले सफेद बीज को धूप में अच्छी तरह सुखाकर मिक्सी में पीस लें. इस पाउडर में थोड़ा सा भुना जीरा, हींग और काला नमक मिलाएं. गैस, एसिडिटी और दस्त होने पर आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ पी लें. ऐसा कहा जाता है कि इस चूरण से काफी आराम मिलता है. हालांकि आप पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. गुठली के अंदर के सफेद हिस्से को पतले-पतले टुकड़ों में काट लें. इन्हें हल्के से नमक वाले पानी में उबालें और फिर सुखा लें. इसके बाद थोड़े से घी में इन्हें हल्का भून लें. यह एक बेहतरीन, क्रंची और पाचक माउथ फ्रेशनर बन जाता है जिसे आप खाना खाने के बाद चबा सकते हैं. आम की गुठली के सूखे पाउडर को थोड़े से सेंधा नमक और मंजन की तरह उंगली की मदद से दांतों पर रगड़ें. इससे दांतों का पीलापन दूर होता है, मसूड़े मजबूत होते हैं और मुंह की बदबू से हमेशा के लिए छुटकारा मिलता है. गुठली के अंदर के बीज के पाउडर को नारियल के तेल या सरसों के तेल में मिलाकर धूप में कुछ दिनों के लिए रख दें. इस तेल से स्कैल्प की मालिश करने से डैंड्रफ खत्म होता है, बालों का झड़ना रुकता है और सफेद बाल भी नैचुरली काले होने लगते हैं. इसके पाउडर में थोड़ा सा गुलाब जल या दही मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा का एक्स्ट्रा ऑयल साफ होता है. यह ओपन पोर्स को सिकोड़ने और पिंपल्स के दाग-धब्बों को दूर करने में बेहद मददगार है.
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Jun 17, 2026, 08:29 PM
गर्मी की मारः तापमान बढ़ने से रक्तचाप बढ़ने की शिकायतें

गर्मी की मारः तापमान बढ़ने से रक्तचाप बढ़ने की शिकायतें

तापमान बढ़ने और लगातार गर्म हवा चलने से रक्तचाप से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सीएचसी में प्रतिदिन ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि गर्म मौसम में शरीर से अत्यधिक पसीना निकलने के कारण पानी और जरूरी खनिज तत्वों की कमी हो जाती है। इससे रक्तचाप में उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा हो सकती है। कई लोगों को अचानक कमजोरी महसूस होने के साथ सिर घूमने और बेचैनी की शिकायत भी हो रही है। हर रोज 40 से 50 के बीच ऐसे मरीज सीएचसी पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को ढककर निकलें और समय-समय पर पानी, नींबू पानी, छाछ, ओआरएस या अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।विज्ञापन
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Jun 17, 2026, 08:06 PM
गर्मियों में पसीना आनाः वरिष्ठ चिकित्सक का कहना है कि यह एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है

गर्मियों में पसीना आनाः वरिष्ठ चिकित्सक का कहना है कि यह एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है

जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा ने बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है। इससे शरीर से जरूरी लवण पसीने के रूप में बाहर निकल जाते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसका असर रक्तचाप पर पड़ता है। कई लोगों का ब्लड प्रेशर अचानक कम हो जाता है, जबकि पहले से उच्च रक्तचाप के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।विज्ञापनइन दिनों ओपीडी में हर दिन 40 से 50 मरीज आ रहे हैं। इनमें चक्कर, कमजोरी, बेचैनी, ज्यादा पसीना आने और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव की शिकायत रहती है। उन्होंने बताया कि गर्मी में यदि पर्याप्त पानी नहीं पीया जाए तो डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है। इससे रक्तचाप प्रभावित होता है। व्यक्ति को चक्कर आने, आंखों के सामने अंधेरा छाने या बेहोशी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।विज्ञापनबुजुर्ग, हृदय रोगी, उच्च रक्तचाप के मरीज और बाहर काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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Jun 17, 2026, 08:05 PM
भारत ने मोटापे से निपटने के लिए मुफ्त योग शिविर शुरू किया

भारत ने मोटापे से निपटने के लिए मुफ्त योग शिविर शुरू किया

गन्नौर। भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में किशनपुरा के पास रेलवे पार्क में पांच दिवसीय निशुल्क मोटापा रोग निवारण योग शिविर का शुभारंभ किया गया। योग आचार्य छबीलदास ने योग का शुभारंभ किया। जिला प्रधान ओमप्रकाश प्रजापति ने बताया कि मोटापा वर्तमान समय की गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है जिससे अनेक बीमारियां जन्म लेती हैं। शिविर में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की ओर से योगासन, प्राणायाम और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने लोगों से शिविर का लाभ उठाने की अपील की। संवाद
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Jun 17, 2026, 07:36 PM
मृगशिर नक्षत्र भारत में गर्मी की लहरें और निर्जलीकरण के जोखिम लाता है

मृगशिर नक्षत्र भारत में गर्मी की लहरें और निर्जलीकरण के जोखिम लाता है

हिंदी महीने के हिसाब से 8 जून को मृगशिरा नक्षत्र की शुरूआत हुई है और 22 जून को इसका समापन होगा। इस तरह मृगशिरा का अंतिम चरण चल रहा है। ऐसे में तापमान लगातार बढ़ रही है। बुधवार की सुबह भी तीखी धूप खिली। दिन चढ़ने के साथ ही तापमान में बढ़ोतरी होती गई। दिन भर 6 किलोमीटर की रफ्तार से लू चली। लस्सी, आम का पना, बेल के शरबत की दुकानों पर भीड़ रही। वहीं शाम की छह बजे तेज हवा चलने लगी। मौसम विभाग ने भी तेज हवा चलने से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है।विज्ञापनदिनभर में 10 लीटर पानी पिएंशिकारगंज। तीखी धूप व उमस ने लोगों को बेचैन कर दिया। दोपहर में गांव की गली चट्टी चौराहे पर आवागमन काफी कम हो जा रहा है। जिला संयुक्त चिकित्सालय के नवागत डॉ पवन कश्यप ने बताया कि गर्मी के मौसम में जरा सी लापरवाही जानलेवा है। शरीर में पानी की कमी होने पर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को दिनभर में कम से कम 10 लीटर पानी पीना चाहिए। पानी की बोतल हमेशा साथ रखना चाहिए। नेत्र चिकित्सक डॉ अभिषेक विश्वकर्मा ने कहा कि वाहन चलाते समय काले चश्मे का प्रयाेग करना चाहिए।
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Jun 17, 2026, 07:23 PM
आयुर्वेदिक चिकित्सा ने अस्पताल की ओ. पी. डी. को बढ़ावा दिया, विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से राहत प्रदान की

आयुर्वेदिक चिकित्सा ने अस्पताल की ओ. पी. डी. को बढ़ावा दिया, विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से राहत प्रदान की

थेरेपी शुरू होने के बाद अस्पताल की ओपीडी भी बढ़कर प्रतिमाह करीब 800 तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह संख्या 600 से 700 के बीच रहती थी। अस्पताल में उपलब्ध अक्षि तर्पण थेरेपी से आंखों से संबंधित समस्याओं, जबकि शिरोधारा थेरेपी से मानसिक तनाव, अनिद्रा और चिंता जैसी परेशानियों में लाभ मिल रहा है।विज्ञापनवहीं, कपिंग थेरेपी मांसपेशियों के दर्द, शरीर में जकड़न, रक्त संचार में सुधार तथा अन्य शारीरिक समस्याओं के उपचार में सहायक साबित हो रही है। आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकुश ने बताया कि अक्षि तर्पण एक विशेष आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें औषधीय घृत की सहायता से आंखों का उपचार किया जाता है।विज्ञापनइससे आंखों में जलन, सूखापन, थकान और दृष्टि संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। वहीं, शिरोधारा थेरेपी से अनिद्रा, मानसिक तनाव, चिंता और उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों को लाभ मिल रहा है।अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में भी आयुर्वेदिक चिकित्सा की नई एवं प्रभावी उपचार पद्धतियां शुरू कर क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। संवाद
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Jun 17, 2026, 07:20 PM
निर्जलीकरण के छिपे हुए खतरेः उचित स्वच्छता के साथ अपने दांतों की रक्षा करें

निर्जलीकरण के छिपे हुए खतरेः उचित स्वच्छता के साथ अपने दांतों की रक्षा करें

डॉ. पाठक ने बताया कि मुंह का लार्वा प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली है, जो भोजन के कणों और हानिकारक बैक्टीरिया को साफ करने का काम करती है। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो मुंह सूखने लगता है और बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप दांतों में सड़न, कैविटी, मसूड़ों की सूजन और मुंह से दुर्गंध जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।विज्ञापनउन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में लोग कोल्ड ड्रिंक, सोडा और अधिक मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जो दांतों के लिए और अधिक नुकसानदायक हैं। ऐसे पेय पदार्थ दांतों की ऊपरी परत को कमजोर कर देते हैं, जिससे संवेदनशीलता बढ़ जाती है और ठंडा या गर्म खाने-पीने पर दर्द महसूस हो सकता है।विज्ञापनडॉ. अनुराग पाठक ने सलाह दी कि लोग दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, नियमित रूप से सुबह-शाम ब्रश करें और अत्यधिक मीठे व कार्बोनेटेड पेय पदार्थों से बचें। उन्होंने कहा कि यदि दांतों में लगातार दर्द, मसूड़ों से खून आना, सूजन या संवेदनशीलता की समस्या हो तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत दंत चिकित्सक से परामर्श लें।उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी सावधानी बरतकर दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखा जा सकता है तथा कई गंभीर दंत रोगों से बचाव संभव है।
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Jun 17, 2026, 07:19 PM
बचाव प्रयासों ने गंगा नदी में नहाते समय फिसलने के बाद दो लोगों को बचाया

बचाव प्रयासों ने गंगा नदी में नहाते समय फिसलने के बाद दो लोगों को बचाया

संवाद न्यूज एजेंसीविंध्याचल। थाना क्षेत्र के पक्का घाट पर बुधवार सुबह नौ बजे गंगा स्नान करते समय पैर फिसलने गहरे पानी में डूब रहे गोरखपुर से आए आशीष कुमार मिश्रा (30) , अनमोल पांडेय (25) को घाट पर मौजूद नाविकों ने नाव और बांस के सहारे बचा लिया।आशीष , अनमोल सुबह में विंध्याचल धाम आए। बंगाली चौराहे पर स्थित वाहन स्टैंड में वाहन पार्क कर गंगा स्नान करने पहुंचे। पक्का घाट पर स्नान करते समय पैर फिसलकर गहरे पानी में चले जाने से दोनों डूबने लगे। दो लोगों को डूबते देख घाट पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया। आनन-फानन में घाट पर मौजूद चानिका निषाद, गोताखोर अर्जुन निषाद ने नाव लेकर डूब रहे युवकों के पास पहुंचे बांस के सहारे बाहर निकला। थानाध्यक्ष अजित सिंह ने कहा कि पक्का घाट पर स्नान करते समय दो लोगों को डूबने से बचाया गया।
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Jun 17, 2026, 07:17 PM
संघ ने मृत्यु योजना को फिर से खोलने सहित लंबित मुद्दों को पूरा करने की मांग की

संघ ने मृत्यु योजना को फिर से खोलने सहित लंबित मुद्दों को पूरा करने की मांग की

यूनियन के सदस्यों ने कहा कि हमारी कई मांगें लंबित हैं, जिन्हें पूरा किया जाना आवश्यक है। यूनियन के अध्यक्ष राजहंस ने ज्ञापन में बताया कि पुत्री विवाह योजना में मेरिट सर्टिफिकेट हटाकर पुराने आधार पर किया जाए। पंजीकृत श्रमिकों के लिए आयुष्मान कार्ड जारी हों, आधार सत्यापन जिला स्तर पर किया जाए।मृत्यु योजना लगभग दो वर्ष से बंद पड़ी है, उसे तत्काल लागू किया जाए। अटल आवासीय योजना का लाभ तीन वर्ष की अवधि समाप्त करते हुए एक वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाए। पंजीकृत श्रमिकों को आवास योजना का लाभ दिलाया जाए।विज्ञापन
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Jun 17, 2026, 07:14 PM
गर्मी की मारः तापमान बढ़ने से अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या बढ़ी

गर्मी की मारः तापमान बढ़ने से अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या बढ़ी

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सुबह और शाम कुल 173 मरीज गंभीर अवस्था में पहुंचे। इनमें से 126 मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर भर्ती किया गया।जनपद में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। उमस और गर्मी के कारण लोगों की नींद प्रभावित हो रही है, जिससे अनिद्रा और सिर दर्द की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। हालात ऐसे हैं कि घरों और कार्यालयों में लगे कूलर और एसी भी गर्मी के सामने बेअसर साबित हो रहे हैं, जबकि पंखे गर्म हवा फेंक रहे हैं। गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। अस्पताल में ओपीडी की तुलना में इमरजेंसी में अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।विज्ञापनसुबह 11 बजे के बाद इमरजेंसी वार्ड में बेड तक उपलब्ध नहीं रह रहे हैं। ऐसे में मरीजों को हड्डी और सर्जिकल वार्ड में शिफ्ट करना पड़ रहा है। एसी युक्त वार्डों में भर्ती कराने को लेकर तीमारदारों के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है।विज्ञापनबुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में कुल 1319 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। फिजिशियन, चर्म रोग, बाल रोग, नेत्र रोग और आर्थो सर्जन की ओपीडी में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। चिकित्सकों के अनुसार इस समय डायरिया के लक्षणों के साथ सिर दर्द, अनिद्रा, हाई बीपी, आंखों में लालिमा, पेट दर्द, गैस, शरीर पर लाल चकत्ते और फुंसियों की शिकायतें बढ़ रही हैं।जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण उल्टी-दस्त, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, अनिद्रा और सिर दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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Jun 17, 2026, 07:13 PM
फतेहाबाद में स्वास्थ्य जांच, विरोध और समाधान शिविर

फतेहाबाद में स्वास्थ्य जांच, विरोध और समाधान शिविर

स्वास्थ्य जांच : फतेहाबाद के पंचायत भवन में आयुष विभाग की तरफ से योग शिविर सुबह साढ़े 7 बजे।विरोधप्रदर्शन : फतेहाबाद के लालबत्ती चौक पर मिड-डे मील वर्कर्स का प्रदर्शन सुबह 10 बजे----समाधान शिविरजनसुनवाई : फतेहाबाद के लघु सचिवालय में आमजन की समस्याओं की समाधान के लिए शिविर सुबह 10 बजे।
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Jun 17, 2026, 06:42 PM
बाल रोग विशेषज्ञ ने माता-पिता को बच्चों को गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाने की चेतावनी दी

बाल रोग विशेषज्ञ ने माता-पिता को बच्चों को गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाने की चेतावनी दी

लू से बचाव ही समझदारीसंयुक्त जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव कुमार मिश्रा ने बताया कि बच्चों को गर्मी से बचने के लिए अभिभावकों को सचेत होना आवश्यक है। सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक बच्चों को घर के बाहर न निकलने दें। थोड़ी-थोड़ी देर में सत्तू का घोल, नींबू पानी, नारियल पानी सहित अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। दिन में कम से कम चार से पांच लीटर पानी अवश्य पिएं। अधिक तेल मसाला वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। उन्होंने कहा कि उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर आदि की समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, जिससे समय पर उपचार शुरू हो सके।विज्ञापन
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Jun 17, 2026, 01:06 PM
बस्तर की लाल चींटी की चटनीः एक पारंपरिक सुपरफूड जो वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहा है

बस्तर की लाल चींटी की चटनीः एक पारंपरिक सुपरफूड जो वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहा है

भारत के अलग-अलग हिस्सों में खान-पान की कई ऐसी अनोखी चीजें मिलती हैं जो पहली नजर में हैरान करती हैं लेकिन सेहत के मामले में फायदेमंद मानी जाती हैं. ऐसा ही एक अनोखा फूड छत्तीसगढ़ के बस्तर रीजन में काफी पॉपुलर है जिसे चापड़ा चटनी (Chapra Chutney) कहा जाता है. यह चटनी किसी फल या सब्जी से नहीं बल्कि पेड़ों पर रहने वाली लाल चींटियों और उनके अंडों से तैयार की जाती है. बस्तर के आदिवासी समाज में इस चटनी को सदियों से बेहद चाव के साथ खाया जा रहा है. आज के समय में जब पूरी दुनिया न्यूट्रिशन के नए ऑपशंस तलाश रही है, तब बस्तर की यह पारंपरिक लाल चींटी की चटनी एक बेहतरीन सुपरफूड मानी जाती है. बस्तर के स्थानीय लोग जंगलों में साल और महुआ के ऊंचे पेड़ों से इन लाल बुनकर चींटियों (Red Weaver Ants) के घोंसलों को इकट्ठा करते हैं. इन चींटियों को पीसकर नमक, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के साथ मिलाकर एक तीखी और खट्टी चटनी तैयार की जाती है. चींटियों के डंक में मौजूद फॉर्मिक एसिड की वजह से इस चटनी का स्वाद काफी चटपटा और खट्टा होता है. न्यूट्रिशन रिपोर्ट के अनुसार, लाल बुनकर चींटियों से बनी यह चटनी प्रोटीन, कैल्शियम, जिंक, आयरन, विटामिन B-12, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होती है. इसे खाने से न सिर्फ शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है, बल्कि यह नर्वस सिस्टम को बेहतर रखने और दिमागी थकान व डिप्रेशन जैसी दिक्कतों को दूर करने में भी काफी मददगार मानी जाती है. आजकल पर्यावरण और सस्टेनेबल डाइट को लेकर दुनिया भर में बड़ी चर्चाएं हो रही हैं. ऐसे में कीड़े-मकोड़ों को प्रोटीन के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. इस ट्रेडिशनल फूड को अब भारत ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी काफी अटेंशन मिल रहा है. एशिया न्यूज नेटवर्क की साइंटिफिक रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि यह लाल चींटी की चटनी वास्तव में एक बेहतरीन सस्टेनेबल सुपरफूड है. पारंपरिक मीट प्रोडक्शन की तुलना में इन कीड़ों से प्रोटीन हासिल करना पर्यावरण के लिए बहुत कम नुकसानदायक होता है क्योंकि इसमें ग्रीनहाउस गैसों का एमिशन बेहद कम होता है. बस्तर और ओडिशा के ट्राइबल इलाकों का यह पारंपरिक फूड अब देश-विदेश के फूड लवर्स और वैज्ञानिकों के बीच अपनी खास पहचान बना चुका है.
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Jun 17, 2026, 12:24 PM
स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान स्वस्थ आदतों का आग्रह किया

स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान स्वस्थ आदतों का आग्रह किया

उन्होंंने भोजन करने के तरीके भी बताए। उन्होंने बच्चों को जंक फूड से दूर रहने की सलाह दी क्योंंकि इससे सभी की पाचन शक्ति खराब हो रही है। लोग रोगों से घिर चुके है। स्वस्थ रहना है तो योग करें। इस दौरान गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं ने उत्साह के साथ शिविर में भाग लिया।
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Jun 17, 2026, 10:33 AM
पेपर कपः एक स्वस्थ विकल्प या छिपे हुए खतरे?

पेपर कपः एक स्वस्थ विकल्प या छिपे हुए खतरे?

घर के बाहर चाय या कॉफी पीने के लिए अब प्लास्टिक का नहीं बल्कि लोग पेपर कप का इस्तेमाल करने लगे हैं। लोगों को ऐसा लगता है कि प्लास्टिक कप की बजाय पेपर कप का इस्तेमाल सेहत के लिए ज़्यादा अच्छा है। लेकिन डॉक्टरों की राय इससे अलग है। जानकारों का मानना ​​है कि पेपर कप बनाने में कई तरह के केमिकल और प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, जो सेहत के लिए खतरनाक हैं। आईआईटी खड़गपुर की रिसर्च के अनुसार, एक पेपर कप में गरम चाय या कॉफ़ी पीना आपके शरीर को बीमार बना सकता है। भोपाल जिले की विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) मनीष शर्मा बता रहे हैं कि पेपर कप सेहत के लिए कितने खतरनाक हैं और इनकी जगह हमें क्या इस्तेमाल करना चाहिए? पेपर कप में लिक्विड से रिसाव न हो इसलिए कप के अंदर पॉलीइथिलीन प्लास्टिक से वाटरफ्रूफ कोटिंग की जाती है। जब इस कप में गरम कॉफी या पानी डालते हैं तो यह प्लास्टिक पिघलकर माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाती है। माइक्रोप्लास्टिक के ये कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें सिर्फ माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। धीरे-धीरे, ये कण कप में मौजूद ड्रिंक में घुलने लगते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं IIT खड़गपुर ने जब कुछ साल पहले रिसर्च की थी तो उसमें पाया गया कि अगर पेपर कप में 15 मिनट तक कोई गरम लिक्विड पदार्थ रखा जाए, तो उसमें माइक्रो प्लास्टिक निकलते हैं जो कैंसर का कारण हो सकता हैं। दरअसल, एक पेपर कप में लगभग 20,000 से 25,000 माइक्रोप्लास्टिक कण हो सकते हैं। ये माइक्रो प्लास्टिक हाई टेंपरेचर में पिघलते हैं और शरीर में जाकर सेल्यूलर लेवल पर सेल्स में जो इसके कण है, DNA स्ट्रक्चर चेंज कर सकते हैं जो आगे जाकर कैंसर बन सकता है। इसके अलावा इन्फोमेट्री बॉयल्ड डिजीज भी हो सकती है, हार्मोनल चेंजेज इम्यूनिटी डाउन होने के चलते भी कैंसर हो सकता है। अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी है कि पेपर या प्लास्टिक के कप का इस्तेमाल करने से बचें। इसकी जगह सिरेमिक, स्टेनलेस स्टील के कप इस्तेमाल करें। अगर आप बाहर चाय या कॉफ़ी पी रहे हैं, तो मिट्टी का कुल्हड़ सबसे अच्छे विकल्प है।
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Jun 17, 2026, 09:08 AM
सफलता की शुरुआत करनाः व्यक्तिगत विकास और नेतृत्व के लिए प्राचीन सूत्र

सफलता की शुरुआत करनाः व्यक्तिगत विकास और नेतृत्व के लिए प्राचीन सूत्र

चाणक्य नीति में जीवन को संवारने के लिए आचार्य चाणक्य ने कई सूत्र बताए हैं। ये सूत्र चाणक्य के समय में जितने प्रासंगिक थे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं। ऐसे में आज हम आपको चाणक्य नीति में बताए गए उन सूत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका अगर आप पालन करें तो जीवन में उन्नति आपको प्राप्त होती है और रंक से राजा बन सकते हैं। चाणक्य कहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा यंत्र इंसान का दिमाग है। इसलिए व्यक्ति को अपने बुद्धि और विवेक को बढ़ाना चाहिए। अगर आप खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखते हैं तो कई तरह की स्किल्स सीख सकते हैं और अमीर बन सकते हैं। चाणक्य के अनुसार, अच्छी संगति में रहना व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी है। आपको ऐसे लोगों का साथ करना चाहिए जो समय की कद्र करते हैं और भविष्य को लेकर सही योजनाएं बनाते हैं। ऐसे लोगों के बीच रहकर आप भी सही विचारों वाले बनते हैं और जीवन में उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हैं। चाणक्य कहते हैं कि अगर व्यक्ति के पास आय का केवल एक स्रोत है तो वो किसी भी कदम पर गरीबी के दलदल में घूस सकता है। इसलिए व्यक्ति को कम उम्र से ही आय के एक से अधिक स्रोत निर्मित करना शुरू कर देना चाहिए। जो लोग ऐसा करते हैं वो अभाव में पैदा होकर भी जीवन में धनवान बन सकते हैं। चाणक्य नीति में बताया गया है कि व्यक्ति को कभी-न-कभी जीवन में रिस्क अवश्य लेना चाहिए। चाणक्य के अनुसार लक्ष्मी बिना साहस के हाथ नहीं आती। इसलिए अगर आप जीवन में धनवान बनने का सपना देख रहे हैं तो एक बार ही सही दुनिया से हटकर आपको रिस्क लेना चाहिए। हालांकि, रिस्क लेने से पहले आपके पास पूरा रोडमैप तैयार होना चाहिए और प्लानिंग के साथ आपको आगे बढ़ना चाहिए। आचार्य चाणक्य के द्वारा बताए गए इन सूत्रों को अगर आप जीवन में उतारते हैं तो सफलता की सीढ़ियां आप चढ़ सकते है। साथ ही आर्थिक उन्नति प्राप्त आपको हो सकती है। Mangal Gochar: 21 जून को वृषभ राशि में गोचर करेंगे मंगल, 4 राशियों के लिए खुलेंगे उन्नति के द्वार
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