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May 5, 2026, 05:37 AM
अधूरी नींद अस्थमा और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़ीः अध्ययन

अधूरी नींद अस्थमा और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़ीः अध्ययन

Health News:मोबाइल और टीवी की लत के कारण रात-रात भर जागने वालों के लिए एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। अब तक अधूरी नींद को केवल थकान या चिड़चिड़ेपन से जोड़ा जाता था, लेकिन अब एक्स्पर्ट्स ने इसे अस्थमा और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों का एक प्रमुख कारण माना है। भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JLNMCH) के डॉक्टरों द्वारा हजारों मरीजों पर की गई एक क्रॉस स्टडी में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले पांच सालों में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल की ओपीडी में स्लीप डिसऑर्डर यानि नींद की बीमारी का इलाज कराने आ रहे मरीजों में बड़ी संख्या में एलर्जी और अस्थमा के लक्षण भी मिल रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों को मरीजों का स्लीप डिसऑर्डर के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी का भी एक साथ इलाज करना पड़ रहा है। यह समस्या अब केवल अधेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा, किशोर और यहां तक कि छोटे बच्चे भी इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं। JLNMCH के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी और टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीरेंद्र कुमार शर्मा की संयुक्त अगुवाई में एक खास स्टडी की गई है। जनवरी से जून 2026 के बीच ओपीडी में इलाज के लिए आए 6753 मरीजों की गहन जांच की गई। इन मरीजों को स्लीप डिसऑर्डर और अस्थमा-एलर्जी की दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया था। जांच के बाद रिपोर्ट में पता चला कि 63 प्रतिशत मरीजों में स्लीप डिसऑर्डर के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी की भी बीमारी मौजूद है। एक्स्पर्ट्स का स्पष्ट कहना है कि मोबाइल और टीवी के शौक के कारण युवाओं और बच्चों की नींद का टाइमिंग पूरी तरीके से बिगड़ रहा है। जब नींद पूरी नहीं होती है, तो शरीर में सूजन बढ़ाने वाले सेल्स की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जो सीधे तौर पर अस्थमा और एलर्जी को जन्म देते हैं। विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 36 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, और अब बिगड़ती लाइफस्टाइल व अधूरी नींद इस खतरे को और भी बढ़ा रही है।
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May 5, 2026, 04:30 AM
हर कोई लस्सी का आनंद नहीं ले सकताः इसके लाभों और सीमाओं को समझना

हर कोई लस्सी का आनंद नहीं ले सकताः इसके लाभों और सीमाओं को समझना

गर्मियों में लस्सी को एक हेल्दी और ठंडक देने वाला ड्रिंक माना जाता है। दही से बनी लस्सी पाचन को बेहतर बनाने, शरीर को ठंडा रखने और हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करती है। यही वजह है कि कई लोग इसे अपनी रोज की डाइट में शामिल करते हैं। लेकिन क्या लस्सी हर किसी के लिए फायदेमंद होती है? सच यह है कि कुछ लोगों के लिए लस्सी नुकसानदायक भी साबित हो सकती है, खासकर अगर इसे गलत समय, ज्यादा मात्रा या गलत तरीके से पिया जाए। जिन लोगों को कुछ खास हेल्थ समस्याएं होती हैं, उन्हें लस्सी पीने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी बॉडी की जरूरत और स्थिति को समझकर ही इसका सेवन करें। नोट:लस्सी एक हेल्दी ड्रिंक है, लेकिन हर किसी के लिए नहीं। अगर आपको कोई हेल्थ समस्या है, तो इसे पीने से पहले सावधानी जरूर रखें। सही समय और सही मात्रा में लस्सी पीने से ही इसके फायदे मिल सकते हैं। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह लें।
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May 5, 2026, 03:55 AM
किण्वित बांस अंकुर अचारः भारत में लोकप्रियता हासिल करने वाला एक प्रोबायोटिक-समृद्ध खाद्य विकल्प

किण्वित बांस अंकुर अचारः भारत में लोकप्रियता हासिल करने वाला एक प्रोबायोटिक-समृद्ध खाद्य विकल्प

Probiotic Rich Food: भारतीय खाने में अचार का खास महत्व होता है, जो खाने का स्वाद और मजा दोनों बढ़ा देता है. लेकिन अब लोग ऐसे अचार की तलाश में हैं जो स्वाद के साथ सेहत के लिए भी अच्छा हो. इसी में फर्मेंटेड बांस की कोंपल का अचार एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आया है. यह अचार हल्का खट्टा होता है और खाने में ताजगी लाता है. खास बात यह है कि यह अचार पूर्वोत्तर भारत में काफी पसंद किया जाता है और अब धीरे धीरे बाकी जगहों पर भी लोकप्रिय हो रहा है. बांस की कोंपल बांस के पौधे का नरम हिस्सा होता है जिसे खाया जा सकता है. इसका स्वाद हल्का और मिट्टी जैसा होता है और इसका टेक्सचर कुरकुरा होता है. इस अचार को बनाने के लिए बांस की कोंपल को नमक और मसालों के साथ कुछ समय के लिए रखा जाता है, जिससे यह अपने आप फर्मेंट हो जाती है. इस प्रक्रिया में अच्छे बैक्टीरिया बनते हैं जो इसे प्रोबायोटिक बनाते हैं. इसी वजह से यह अचार सिर्फ स्वाद ही नही बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. यह फर्मेंटेशन ही इस अचार को सामान्य अचार से अलग बनाता है. सामान्य अचार में ज्यादा तेल और सिरका डाला जाता है, जिससे वह भारी हो जाता है. लेकिन बांस की कोंपल का यह अचार हल्का होता है और इसमें बहुत कम तेल का इस्तेमाल होता है. यह प्राकृतिक तरीके से तैयार होता है, इसलिए इसे पचाना भी आसान होता है. इसका स्वाद खट्टा और हल्का होता है, जो रोज के खाने के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है। फर्मेंटेड बांस की कोंपल का अचार एक हल्का और हेल्दी विकल्प है, जिसे बनाने में लगभग 20 मिनट की तैयारी और 10 मिनट का पकाने का समय लगता है, इसके बाद इसे 2 से 3 दिन तक फर्मेंट होने के लिए रखा जाता है. यह रेसिपी करीब 1 जार के लिए होती है और हर सर्विंग में लगभग 40 से 60 कैलोरी मिलती है, जिससे यह वजन को ध्यान में रखने वालों के लिए भी सही माना जाता है. साथ ही यह अचार पेट के लिए फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक तत्व होते हैं. ये पाचन को बेहतर बनाते हैं और आंतों को स्वस्थ रखते हैं. साथ ही यह कम कैलोरी वाला होता है और इसमें फाइबर भी होता है, जो वजन कम करने वालों के लिए अच्छा माना जाता है. खासकर गर्मी के मौसम में यह शरीर को हल्का और स्वस्थ रखने में मदद करता है.
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May 5, 2026, 12:42 AM
दुर्लभ संयोगः 2026 के ज्येष्ठ महीने में मंगलवार को आठ'बड़ा मंगल'

दुर्लभ संयोगः 2026 के ज्येष्ठ महीने में मंगलवार को आठ'बड़ा मंगल'

Bada Mangal 2026 Date:पंचांग गणना के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व है. इस बार ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा. धार्मिक दृष्टि से इस महीने के मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाता है. साल 2026 का पहलाबड़ा मंगल5 मई को पड़ रहा है. इस साल एक बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है. 17 मई से 15 जून तक अधिक मास होने के कारण मुख्य ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ दोनों के मंगलवार मिलकर कुल 8 बड़े मंगल होंगे. ऐसा अद्भुत संयोग लगभग 19 साल के लंबे अंतराल के बाद बन रहा है. आइए जानते हैं इस दिन किन गलतियों से बचना चाहिए और घर पर पूजा कैसे करें. तामसिक भोजन से दूरी:इस दिन घर में मांस, मदिरा, प्याज या लहसुन का प्रयोग बिल्कुल न करें. बजरंगबली की पूजा में सात्विकता अनिवार्य है. अपशब्द और क्रोध का त्याग:हनुमान जी सेवा और विनम्रता के प्रतीक हैं. इस दिन किसी पर क्रोध न करें, न ही किसी के लिए अपशब्दों का प्रयोग करें. लोहे और काले रंग का परहेज:पूजा के दौरान काले वस्त्र न पहनें. साथ ही लोहे की वस्तुओं के दान या उपयोग से बचें. लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है. नमक का सेवन:यदि आप बड़े मंगल का व्रत रख रहे हैं, तो इस दिन नमक का सेवन करने से बचें. केवल मीठा भोजन ग्रहण करना उत्तम माना जाता है. यदि आप किसी कारणवश मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर ही हनुमान जी की कृपा पाने के लिए इस विधि का पालन करें. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद हाथ में जल लेकर हनुमान जी का ध्यान करते हुए व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें. पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. हनुमान जी के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमा भी जरूर रखें, क्योंकि राम जी के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी है. हनुमान जी को गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें. चोला चढ़ाना संभव न हो, तो सिंदूर का तिलक जरूर लगाएं. बजरंगबली को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू या शुद्ध घी में बना चूरमा अर्पित करें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भोग में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) जरूर रखें, तभी हनुमान जी भोग स्वीकार करते हैं. दीपक जलाकर ‘हनुमान चालीसा बजरंग बाण’ या सुंदरकांड का पाठ करें. आखिर में हनुमान जी की आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें. बड़े मंगल के दिन प्यासे को पानी पिलाने और भूखे को भोजन कराने का विशेष पुण्य है. 2026 के इन 8 बड़े मंगलों पर जगह-जगह भंडारे और शरबत के स्टाल लगाना बहुत शुभ माना जाता है. यदि संभव हो, तो पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था भी करें. ये भी पढ़ें:21 दिन बाद क्यों बदलना चाहिए कलावा? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल TV9 नेटवर्क का प्रमुख हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म है. इस वेबसाइट पर देश-विदेश की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग से पाठकों को रूबरू कराया जाता है. टीवी9 की वेबसाइट tv9hindi.com प्रमुख हिंदी वेबसाइटों में अपना स्थान रखती है. टीवी9 हिंदी का अपना मोबाइल ऐप भी है, जहां टेक्स्ट और वीडियो दोनों माध्यम से खबरें पढ़ीं और देखी जा सकती हैं. टीवी9 वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य, टेक और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसी विविध श्रेणियों में खबरें कवर की जाती हैं. यहां एक्सप्लेनर्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज, वीडियो रिपोर्ट्स और लाइव अपडेट्स मिलते हैं. TV9 नेटवर्क का डिजिटल सेगमेंट तेजी से बढ़ा है और मिलियंस की संख्या में यूनिक यूजर्स तक पहुंचता है.
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Amar Ujala
May 4, 2026, 09:23 PM
कठुआ जिले में बच्चों में बढ़ रहे मधुमेह के मामलेः विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की

कठुआ जिले में बच्चों में बढ़ रहे मधुमेह के मामलेः विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की

कम उम्र बच्चों की सेहत पर असर को लेकर जीएमसी कठुआ के विशेषज्ञों ने जताई चिंताऔर पढ़ेंTrending Videosकहा-बदलती जीवनशैली, जंक फूड और स्क्रीन टाइम बने बड़ी वजहसंवाद न्यूज एजेंसीकठुआ। जिले में डायबिटीज (मधुमेह) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में ओपीडी के दौरान 100 में से दाे से तीन बच्चे मोटापे या फिर डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं।राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. बद्री नाथ भोगल के अनुसार अब यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। यह बच्चों और किशोरों में भी तेजी से फैल रही है। मौजूदा स्थिति यह है कि इलाज के लिए आने वाले हर 100 मरीजों में दो से तीन किशोर हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।भोगल के अनुसार पहले टाइप-2 डायबिटीज को वयस्कों की बीमारी माना जाता था लेकिन अब कम उम्र में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। वहीं टाइप-1 डायबिटीज, जो ऑटोइम्यून कारणों से होती है, उसके मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यह बदलाव बच्चों की बदलती दिनचर्या और खानपान से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।विज्ञापनविज्ञापनविशेष रूप से बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन इस बीमारी की मुख्य वजह बन रहा है। पारंपरिक और संतुलित आहार की जगह फास्ट फूड ने ले ली है, जिससे शरीर में शुगर और फैट का स्तर असंतुलित हो रहा है।इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों में आई कमी भी एक बड़ा कारण है। बच्चे अब खेलकूद की बजाय मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम्स में अधिक समय बिता रहे हैं। इससे मोटापे के मामले बढ़ रहे हैं और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक कारण भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा तनाव, पढ़ाई का दबाव और पर्याप्त नींद की कमी भी शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।भोगल के अनुसार बच्चों में बार-बार प्यास लगना, पेशाब की आवृत्ति बढ़ना, अचानक वजन कम होना, थकान और अधिक भूख लगना डायबिटीज के प्रमुख लक्षण हैं। कई मामलों में ये संकेत स्पष्ट नहीं होते, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है। स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की दिनचर्या और खानपान पर विशेष ध्यान दें। समय-समय पर जांच करवाना और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।इस बीमारी से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार आवश्यक है। बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार देना, रोजाना शारीरिक गतिविधि सुनिश्चित करना और स्क्रीन टाइम को सीमित करना जरूरी है। इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और वजन नियंत्रण पर ध्यान देना भी आवश्यक है।
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Amar Ujala
May 4, 2026, 09:13 PM
कुरावली में मेडिकल स्टोर में इंजेक्शन लगने से मरीज की मौत

कुरावली में मेडिकल स्टोर में इंजेक्शन लगने से मरीज की मौत

कुरावली। कस्बा में मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन लगने के बाद मरीज की मौत के मामले को जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की दो टीमें कुरावली भेजीं। सीएमओ कार्यालय से भेजी गई टीम ने मेडिकल पर अवैध रूप से क्लीनिक का संचालन पाया। मेडिकल को तत्काल सील कर दिया गया है। जनपद कासगंज के नगला गलफत निवासी 40 वर्षीय दिनेश कुमार करीब आठ साल से अपनी ससुराल नगला जमुनिया में रह कर मजदूरी का काम करता था। शनिवार शाम को परिजन घिरोर रोड स्थित वर्मा मेडिकल स्टोर पर ले गए। मेडिकल स्टोर पर मौजूद एक व्यक्ति ने इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद दिनेश की मौत हो गई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद डीएम ने सीएमओ को मामले की जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर जांच करने पहुंचे झोलाछाप के नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने बताया कि मेडिकल पर अवैध रूप से क्लीनिक का संचालन हो रहा था। क्लीनिक संचालन के संबंध में जब मेडिकल संचालक से जानकारी जुटाई गई तो वे पंजीकरण संंबंधी कोई अभिलेख नहीं दिखा सके। मेडिकल को सील कर नाेटिस जारी किया गया है। तीन दिन में क्लीनिक संचालन के अभिलेख मांगे गए हैं। नोडल अधिकारी ने कहा कि यदि क्लीनिक से पंजीकरण संबंधी कोई अभिलेख नहीं मिलते हैं तो संबंधित के विरुद्ध एफआईआर कराई जाएगी। साथ ही डीएम के आदेश पर औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने भी वर्मा मेडिकल स्टोर कुरावली का निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय यहां पंजीकृत फार्मासिस्ट उपस्थित नहीं मिला। इस पर औषधि निरीक्षक ने मेडिकल पर दवा वितरण पर रोक लगाई है। यहां उपलब्ध करीब 45 हजार रुपये कीमत के पैनफ्री टैबलेट की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है।और पढ़ेंTrending Videos
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May 4, 2026, 08:34 PM
भीषण गर्मी और आर्द्रता के बीच बस्ती में त्वचा से संबंधित रोगों में वृद्धि

भीषण गर्मी और आर्द्रता के बीच बस्ती में त्वचा से संबंधित रोगों में वृद्धि

बस्ती। तेज गर्मी और बढ़ी हुई उमस का असर अब लोगों की सेहत पर साफ तौर पर दिखने लगा है। मौसम के बदलते मिजाज के कारण त्वचा संबंधी बीमारियों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। घमौरियां, फंगल इंफेक्शन, खुजली और एलर्जी जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की संख्या ओपीडी में लगातार बढ़ रही है।और पढ़ेंTrending Videosसोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में कुल 1006 मरीज त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंचे। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुग्रह ने सभी मरीजों का परीक्षण किया और उन्हें आवश्यक दवाएं दीं। डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में पसीना अधिक आने और साफ-सफाई में कमी होने से त्वचा संक्रमण तेजी से फैलता है। कहा कि लोग इस मौसम में ढीले और सूती कपड़े पहनें, शरीर को साफ और सूखा रखें, दिन में दो बार स्नान करें और ज्यादा पसीना आने पर तुरंत कपड़े बदलें।विज्ञापनविज्ञापनफंगल संक्रमण से बचने के लिए दूसरों के कपड़ों का उपयोग न करें और किसी भी समस्या होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। वहीं, ओपीडी के बाल रोग विभाग में डायरिया, उल्टी-दस्त, पेट में मरोड़ के साथ संक्रमण वाले बच्चों की संख्या अधिक रही। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि गलत खानपान के चलते डायरिया की शिकायतें बढ़ी हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। वार्ड में अधिकांश बच्चे बुखार, वायरल संक्रमण व पेट संबंधित रोग के हैं। इमरजेंसी वार्ड में भी संख्या बढ़ी है। चिल्ड्रेन वार्ड में 24 बेड पर 30 मरीज भर्ती किए गए हैं।
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May 4, 2026, 12:05 PM
पौड़ी जिला 7 मई को राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस मनाएगा

पौड़ी जिला 7 मई को राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस मनाएगा

पौड़ी। जनपद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सात मई को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत सरकारी, अर्धसरकारी, निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के कुल 1,12,027 बच्चों, किशोरों एवं किशोरियों को कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजॉल खिलाई जाएगी। छूटे हुए पात्र लाभार्थियों के लिए 14 मई को मॉप-अप डे निर्धारित किया गया है।और पढ़ेंTrending Videosसीएमओ डॉ. शिव मोहन शुक्ला ने बताया कि अभियान के सफल संचालन हेतु सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। विकासखंड स्तर पर दवा वितरण के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा चुका है।विज्ञापनविज्ञापनटीबी से बचाव व उपचार की दी जानकारीपौड़ी। स्वास्थ्य विभाग पौड़ी जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए 100 दिवसीय अभियान चला रहा है। इसी क्रम में सोमवार को दूरस्थ गांवों में विशेष जागरूकता और एक्सरे स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए गए।ये शिविर ल्वाली, गगवाड़ा, डांग तमलाग, सुमेरपुर और नौटियाल गांव में लगाए गए। इनमें ग्रामीणों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी दी गई। जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी और एसीएमओ विनय कुमार त्यागी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों तक टीबी की जांच पहुंचाना है। सोमवार के शिविरों में 32 एक्सरे और चार स्पूटम सैंपल लिए गए। जनपद में 24 मार्च से अब तक विभिन्न विकास खंडों में कुल 4708 टीबी एक्सरे किए जा चुके हैं। इस दौरान एसटीएस नीरज भंडारी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
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May 4, 2026, 11:38 AM
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय ने वैकल्पिक और प्राकृतिक चिकित्सा पर सात दिवसीय कार्यशाला का समापन किया

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय ने वैकल्पिक और प्राकृतिक चिकित्सा पर सात दिवसीय कार्यशाला का समापन किया

बहादराबाद। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय वैकल्पिक और प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला का समापन हुआ। 27 अप्रैल से 04 मई तक चली कार्यशाला में विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ हिमाचल विश्वविद्यालय, शिमला और हरिद्वार विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।और पढ़ेंTrending Videosकार्यशाला के संयोजक व योग विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने बताया कि सात दिनों के इस आयोजन में प्राकृतिक चिकित्सा, पंचकर्म, योग चिकित्सा, आहार चिकित्सा, जल चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, प्राणायाम और ध्यान जैसी विभिन्न विधाओं पर विशेषज्ञों की ओर से व्याख्यान व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।विज्ञापनविज्ञापनसमापन कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडेय ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग व प्राकृतिक चिकित्सा की प्रासंगिकता अत्यधिक बढ़ गई है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योग एक सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय की ओर इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस मौके पर गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, डॉ.अर्पिता जोशी,डॉ. अर्पिता जोशी,राजेंद्र नौटियाल, क्रीड़ाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, डॉ. मोहित कुमार, शोधार्थी दिशांत शर्मा, गौरीसंजय आदि मौजूद रहे।
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May 4, 2026, 11:34 AM
राजस्थान के एस. एम. एस. अस्पताल ने जटिल सर्जरी में महिला के सिर से 4 किलो का ट्यूमर निकाला

राजस्थान के एस. एम. एस. अस्पताल ने जटिल सर्जरी में महिला के सिर से 4 किलो का ट्यूमर निकाला

राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एक जटिल और हाई-रिस्क ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 30 वर्षीय महिला के सिर से करीब 4 किलो वजनी ट्यूमर निकाल दिया। इस सफल सर्जरी के बाद महिला को नया जीवन मिला है। रविवार को अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम ने इस ऑपरेशन की जानकारी साझा की। जानकारी के अनुसार, कृष्णा नाम की महिला लंबे समय से इस असामान्य और भारी ट्यूमर से पीड़ित थी। सिर पर 4 किलो वजन का यह ट्यूमर उसके लिए किसी बोझ से कम नहीं था। इसके चलते उसे चलने-फिरने, संतुलन बनाए रखने और रोजमर्रा के सामान्य कार्य करने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। धीरे-धीरे उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वह सामान्य जीवन जीने में पूरी तरह असमर्थ हो गई। परिजन जब उसे इलाज के लिए जयपुर लेकर पहुंचे, तब उसे सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती जांच के बाद न्यूरोसर्जरी विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्लास्टिक सर्जरी विभाग को रेफर कर दिया, ताकि सर्जरी को अधिक सटीक और सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया जा सके। डॉक्टरों के अनुसार, यह सर्जरी बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण थी। ट्यूमर का आकार बड़ा होने के साथ-साथ उसका मस्तिष्क की नसों से जुड़ा होना ऑपरेशन को और भी जोखिम भरा बना रहा था। सर्जरी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती ट्यूमर को इस तरह हटाना था कि मस्तिष्क की महत्वपूर्ण नसों को कोई नुकसान न पहुंचे। विशेषज्ञों की टीम ने वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जैन के नेतृत्व में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान आधुनिक तकनीकों, सटीक योजना और डॉक्टरों के बीच बेहतर समन्वय का अहम योगदान रहा। कई घंटों तक चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों ने धैर्य और कुशलता का परिचय देते हुए ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। सर्जरी के बाद मरीज को गहन निगरानी में रखा गया, जहां उसकी स्थिति स्थिर बनी रही। डॉक्टरों के मुताबिक अब मरीज खतरे से बाहर है और उसके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। कुछ ही दिनों में उसे सामान्य वार्ड में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के बड़े और जटिल ट्यूमर के मामलों में समय पर इलाज और विशेषज्ञ टीम का सहयोग बेहद जरूरी होता है। यदि इलाज में देरी होती, तो यह ट्यूमर मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। इस सफल ऑपरेशन के साथ ही सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञता उपलब्ध है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है, बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण भी है।
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May 4, 2026, 10:02 AM
कम-कैलोरी दही बूंदी चाट के साथ शांत रहेंः एक ताज़ा ग्रीष्मकालीन नाश्ता

कम-कैलोरी दही बूंदी चाट के साथ शांत रहेंः एक ताज़ा ग्रीष्मकालीन नाश्ता

गर्मियों में तापमान बढ़ते ही सभी लोगों को कुछ ठंडा खाने का मन बार-बार करता है. अगर ये चीड ठंडी होने के साथ ही हल्की और चटपटी हो तो मजा दोगुना हो जाता है. अगर आप भी चिलचिलाती गर्मी में किसी ऐसी ही चीज की तलाश कर रहे हैं तो आज हम आपके लिए एक बढ़िया ऑप्शन लाए हैं. ये कुछ ऐसा है जो आपको स्ट्रीट फूड जैसा स्वाद चटपटा स्वाद देने के साथ ही आपकी सेहत का भी ख्याल रखता है. हम बात कर रहे हैं दही बूंदी चाट की, जो स्वाद में जबरदस्त और बनाने में बेहद आसान है. खास बात ये है कि थोड़े से बदलाव करके इसे लो-कैलोरी और हेल्दी स्नैक में बदला जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे बनाते हैं लो-कैलोरी दही बूंदी चाट, जो शरीर को ठंडक देती है और वो भी स्वाद के साथ. दही बूंदी चाट बनाने के लिए एक बाउल में फेंटी हुई दही लें और उसमें आधी बूंदी डाल दें. अब इसमें नमक और भुना जीरा पाउडर मिलाकर हल्के हाथ से मिक्स करें. इससे बूंदी, दही का स्वाद अच्छी तरह सोख लेगी. इस दही-बूंदी मिक्शचर को एक प्लेट में फैलाएं. उसके ऊपर से पापड़ी को हल्का तोड़कर डालें. अब उबले चने और आलू के टुकड़े डालें. अगर आप तीखा खाना पसंद करते हैं तो इसमें हल्का सा लाल मिर्च पाउडर छिड़ सकते हैं. अब इसके ऊपर एक बार फिर दही डालें. बची हुई बूंदी डालकर भुना जीरा पाउडर छिड़कें, जिससे फ्लेवर और बढ़ जाए. दही डालने के बाद हरी चटनी और इमली की चटनी डालें. ऊपर से चाट मसाला छिड़कें. फिर बारीक कटा धनिया और सेव डालकर सजाएं. अगर चाहें तो अनार के दाने डालकर इसे और रिफ्रेशिंग बना सकते हैं. आपकी दही बूंदी चाट तैयार है. अगर आप दही बूंदी चाट को लो-कैलोरी वाली बनाना चाहते हैं तो
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May 4, 2026, 08:58 AM
तंबाकू-पान मसाला का उपयोग मौखिक स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हैः विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं

तंबाकू-पान मसाला का उपयोग मौखिक स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हैः विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं

विस्तारAdd as a preferredsource on googleतंबाकू-पान मसाला और लंबी चलने वाली दवाओं से लार कम बन रही है। इससे मुंह में संक्रमण बढ़ने के साथ दांत-मसूड़े कमजोर हो रहे हैं। पेट के विकार बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ रहा है। एमजी रोड स्थित होटल में एंडोडोंटिस्ट एक्सीलेंस फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यशाला एंडो रेस्टो कॉन्क्लेव के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।और पढ़ेंTrending Videosमुख्य वक्ता चेन्नई के डॉ. गोपी कृष्ण ने बताया कि 60-70 फीसदी लोगों में दांतों की परेशानी मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू, पान-मसाला और फास्टफूड है। रोजाना 600 एमएल लार बनती है। मसाला, गुटका, तंबाकू में केमिकल होने से लार बनने में 30 फीसदी की कमी आई है। इससे मसूड़ों की पकड़ कमजोर हो रही है, जिससे दांत हिलने लगते हैं। तंबाकू के रसायन दांत और मसूड़ों से चिपक जाते हैं, जिससे संक्रमण होने लगता है। ऐसे युवाओं में मुख के कैंसर का तीन गुना खतरा भी अधिक है। मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग समेत अन्य मर्ज की लंबे समय तक दवा खाने वालों में भी ये परेशानी मिल रही है। इससे मुंह का सूखापन, अपच, अल्सर और पेट के विकार भी पनप रहे हैं।विज्ञापनविज्ञापनदंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल वर्मा और डॉ. मालिनी भौमिक ने बताया कि बच्चों और युवाओं का खानपान बिगड़ गया है। इससे पायरिया, दांतों में दर्द, मसूड़ों में जख्म समेत अन्य परेशानी मिल रही है। समापन पर अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता ने सभी को स्मृति चिह्न दिए। कार्यशाला में आयोजन सचिव डॉ. विपुल अरोरा, डॉ. असीम शिरोमणि, डॉ. भरत चौहान, डॉ. सुषमा प्रतिहार, डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव, डॉ. चकित माहेश्वरी, डॉ. राहुल तेहरिया, डॉ. जया पंबू, डॉ. विवेक शाह, डॉ. जाह्नवी पटनी, डॉ. अभिषेक भार्गव आदि मौजूद रहे।इन बातों का रखें ध्यान:- तंबाकू, पान मसाला व गुटका खाने से बचे।- अंगुली से मंजन न करें, तंबाकू वाले मंजन से बचे।- सुबह नाश्ता करने के बाद ब्रश फायदेमंद है।- दांतों में दर्द, ठंडा-गर्म लगने पर डॉक्टर को दिखाएं।
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May 4, 2026, 05:05 AM
चेतावनी जारीः फास्ट फूड की आदतें बच्चों में कमजोर दांतों से जुड़ी हैं

चेतावनी जारीः फास्ट फूड की आदतें बच्चों में कमजोर दांतों से जुड़ी हैं

Health News:आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और आधुनिक लाइफस्टाइल के बीच बच्चों और युवाओं के खानपान की आदतें पूरी तरह से बदल गई हैं। पौष्टिक घर के खाने की जगह अब फास्ट फूड ने ले ली है। इसका सीधा और सबसे बुरा असर नई पीढ़ी के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खासकर, दांतों की सेहत को लेकर एक बेहद चिंताजनक बात सामने आई है। पिज्जा, बर्गर और चाउमीन जैसे मुलायम और बिना चबाए निगले जाने वाले जंक फूड्स के कारण बच्चों के दांत न सिर्फ कमजोर हो रहे हैं, बल्कि टेढ़े-मेढ़े भी निकलने लगे हैं। पटना डेंटल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल और जाने-माने दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. तनोज कुमार ने 'हिन्दुस्तान' अखबार कार्यालय में आयोजित 'डॉक्टर की सलाह' कार्यक्रम के दौरान राज्यभर के लोगों को यह अहम चेतावनी दी है और कई जरूरी सुझाव साझा किए हैं। डॉ. तनोज कुमार के अनुसार, किसी भी खाद्य पदार्थ को दांतों से अच्छी तरह चबाकर खाने से दांतों की प्राकृतिक रूप से सफाई होती है। लेकिन आजकल के बच्चे और युवा चबाने वाली चीजें बहुत कम खाते हैं। पिज्जा, बर्गर और चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थों को खाते समय दांतों का बिल्कुल भी अभ्यास नहीं हो पाता है। अनाज या सख्त चीजों को चबाने की आदत कम होने से बच्चों में जबड़े का विकास ठीक से नहीं हो पाता है। जबड़े का पूरा विकास न होने के कारण ही दांत टेढ़े-मेढ़े निकलने लगते हैं और धीरे-धीरे उनमें कैविटीज की गंभीर परेशानी शुरू हो जाती है। डॉ. तनोज कुमार ने बताया कि दांतों की ठीक से सफाई नहीं होने के कारण ही युवाओं और युवतियों में पायरिया की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। पायरिया का मुख्य कारण दांतों पर प्लाक की परत का जम जाना है। इसके लक्षण बताते हुए उन्होंने कहा कि मसूड़ों में सूजन आना, ब्रश करते समय खून निकलना और मुंह से बदबू आना पायरिया की शुरुआत है। एक बार पायरिया पकड़ लेने के बाद यह दांतों को जड़ से कमजोर करने लगता है। बता दें कि रविवार को ‘हिन्दुस्तान’ अखबार के कार्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में डॉ. तनोज ने फोन पर पाठकों की समस्याओं का भी समाधान किया।
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May 4, 2026, 04:25 AM
इस गर्मी में स्वस्थ आहार के बावजूद आपका वजन बढ़ने के 5 कारण

इस गर्मी में स्वस्थ आहार के बावजूद आपका वजन बढ़ने के 5 कारण

अगर आप हेल्दी डायट फॉलो करते हैं लेकिन फिर भी आपका वजन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है तो ये गर्मी की कुछ आदतों के कारण हो सकता है। दरअसल गर्मियों के मौसम में खानपान की आदतें पूरी तरह से बदल जाती हैं, जो कई बार वेट गेन का कारण बनती हैं। यहां हम गर्मी में वजन बढ़ने के 5 कारणों के बारे में बता रहे हैं। जानिए- FabeatoFabeato Cumin Seeds Whole 200g - Premium Jeera- 100% Natural, No Added Colors or Preservatives, Gluten-Free Sabut Jeera - Flavorful Spice for Cooking & Seasoning - Fresh, Aromatic, Hygienically Packed HIMALAYAN ORGANICSHimalayan Organics Plant Based Collagen Builder Powder For Skin Regeneration, Anti-Aging Beauty & Repair, 250gm SkahaSkaha Methi Saunf Detox Tea - Pack of 12 Dips |100% Natural Herbal Wellness Drink | Methi saunf - helps in regulating blood sugar and promotes weight management | Skaha Fenugreek leaves | Fenugreek tea bag | In individual pouches | Easy to use and travel-friendly packing | Natural ingredients | Non-Caffeine Tea Vaidya Narayana MurthyVaidya Narayana Murthy Narasipura Shimoga Cancer Care Call 9777758756 Ayurvedic Natural Mix Powder | Plant-Based Multi-Ingredient Food Preparation Mix | 300 g boosterBooster Black Alkaline Drink | Superior Hydration With Infused Essential Minerals | 8+ pH Alkaline (500 ML Each Can) Better than Bottled Water & Mineral water(Pack of 12) DaburReal Activ Coconut Water (Pack of 6, 200ml Each) | Hydrating & Refreshing Drink with Coconut Flavour | Good for Skin Health Paper BoatPaper Boat Coconut Water, Refreshing Coconut Flavour, Vital Minerals (Pack of 6, 200ml Each) MaproMapro Lemon Gluten Free Barley Water, 750Ml, Pack Of 1 गर्मियों के मौसम में आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजों का सेवन बढ़ जाता है। जिसकी वजह से दिमाग भी हमेशा ठंडी मीठी चीजों को खाने की डिमांड करता है। आइसक्रीम में 300 कैलोरी होती हैं ऐसे में ये बिना पेट भरे ही कैलोरी की मात्रा बढ़ाने का काम करती हैं। कोल्ड ड्रिंक भी शरीर में फैट स्टोर करती हैं। इन दोनों चीजों की जगह आप ठंडी छाछ या बिना चीनी वाला आम पन्ना पी सकते हैं। गर्मियों के मौसम में एक्टिविटी कम हो जाती है जिसकी वजह से फैट ज्यादा बढ़ जाता है। एक्सरसाइज न करने पर मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। अगर आप रोजाना रूटीन वाली डायट ले रहे हैं और कैलोरी बर्न नहीं कर रहे हैं तो वजन बढ़ेगा। कोशिश करें कि आप सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच कम से कम 30 मिनट की वॉक करने जाएं। गर्मी के मौसम में प्यास लगने और भूख लगने पर एक जैसा फील होता है। ऐसे में आप पानी की जगह खूब कैलोरी खा सकते हैं। डिहाईड्रेशन की वजह से मेटाबॉलिज्म 3 प्रतिशत तक कम हो जाता है। कोशिश करें कि दिनभर में 3 लीटर पानी रोज पिएं। गर्मी में नींद की कमी से कोर्टिसोल लेवल बढ़ जाता है। जिसकी वजह से भूख बढ़ जाती है। देर रात में खाना खाने से फैट शरीर में जमा होने लगता है। इसलिए राज में 8 बजे के बाद खाना बंद करें। गर्मियों में बॉडी ओवरहीट हो जाती है। इस हीट को मैनेज करने के लिए एनर्जी लगती है और खाना नहीं पचता। जिसकी वजह से फैट जमा होने लगता है। इस मौसम में ब्लोटिंग भी बहुत ज्यादा होती है जो स्लो मेटाबॉलिज्म का साइन है। इसलिए सुबह जीरा पानी पिएं और हल्का खाना खाएं। डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का ऑप्शन नहीं है। किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम से जुड़े सवालों के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।
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May 4, 2026, 02:16 AM
हँसी सबसे अच्छी दवा हैः आपके दिन को रोशन करने के लिए 10 मजेदार चुटकुले

हँसी सबसे अच्छी दवा हैः आपके दिन को रोशन करने के लिए 10 मजेदार चुटकुले

जिंदगी की भागदौड़ आखिरी सांस तक कभी खत्म नहीं होगी। बचपन खत्म के बाद जैसे जिंदगी की डोर तेजी से भागती है, वैसे ही टेंशन और स्ट्रेस के साथ आपकी उम्र भी भाग रही है। थोड़ा सा सांस लीजिए, पानी पीजिए और टेंशन को अलविदा कीजिए। काम, परिवार, खर्चों की चिंता कभी पीछा नहीं छोड़ेगी लेकिन इन सभी के साथ आपको अपनी सेहत का भी ख्याल रखना है और इसके लिए आपको हंसना पड़ेगा। आपकी आज की मंडे वाली हंसी की डोज के लिए हम लेकर आए हैं 10 मजेदार चुटकुले। इन्हें पढ़ते ही आप ठहाका मारकर हंसने लगेंगे। 1-पति: आज सब्जी बिल्कुल भी अच्छी नहीं बनी है! पत्नी: चुपचाप खा लो... इसी सब्जी को फेसबुक पर 600 लोगों ने लाइक किया है और 500 लोगों ने यम्मी लिखा है... आपके नखरे ही अलग हैं! 2- बीवी ने शराबी पति को सुधारने के लिए रात को काले कपड़े पहने। पति: कौन हो तुम? पत्नी: चुड़ैल! पति: चल हाथ मिला... मैं तेरी बहन का पति! 3- पत्नी: सुनो, पड़ोस वाली भाभी कितनी अच्छी हैं, अपने पति को कभी ऊंची आवाज में नहीं बोलतीं! पति: तो मैं क्या करूं? पत्नी: उनसे सीखो! पति: ठीक है, तुम भी उनके पति से सीखो… वो बोलते ही नहीं! 4- पत्नी: चोर मेरे सारे गहने चोरी करके ले गया और तुम चुपचाप देखते रहे! शर्म नहीं आई? पति: अरे बावली, वो रिवाल्वर लिए हुए था! जरा सी आवाज करता तो गोली मार देता। पत्नी: तो क्या हुआ? तुम्हारा तो बीमा (Insurance) करवा रखा है! 5- पति - तुम हर बात में मेरे मायके वालों को बीच में क्यों लाते हो ? पति- देखो जब टीवी में खराबी आती है तो कोई टीवी को थोड़े ही बोलता है.... गाली तो कंपनी वाले ही खाते हैं. पति की बात सुनकर पत्नी गुस्से से लाल हो गई। 6- पति: (सीने में दर्द होने पर) अरे, मुझे लगता है मुझे हार्ट अटैक आ रहा है! जल्दी से एम्बुलेंस बुलाओ और मेरा फोन दो, मुझे किसी को कॉल करना है! पत्नी: (शांत भाव से) "हां, फोन ले लो, लेकिन पहले इसका पासवर्ड बताओ ताकि मैं एम्बुलेंस बुला सकूं। पति: (दर्द भूलकर तुरंत) "अरे, छोड़ो! मुझे बेहतर महसूस हो रहा है, अब कोई एम्बुलेंस नहीं चाहिए! 7- पत्नी: सुनो जी, अगर मैं मर गई तो तुम क्या करोगे? पति: मैं भी मर जाऊंगा… पत्नी: क्यों? पति: क्योंकि इतनी खुशी मैं सह नहीं पाऊंगा! 8- पत्नी: शादी से पहले तुम मुझे होटल, सिनेमा और ना जाने कहां-कहां ले जाते थे… अब क्या हो गया? पति: कभी चुनाव के बाद भी प्रचार होता है क्या? 9- पति 'लौंडियाबाज बाबा' नाम से मशहूर बाबा से पत्नी को वश मे करने के लिए एक ताबीज लिया। एक महीने बाद... पति: लौंडियाबाज बाबा की जय हो, बाबा, पत्नी पर तो कोई असर नही हुआ, पर पड़ोसन वश मे आ गई, लौंडियाबाज बाबा: चल इफेक्ट न सही, साइड इफेक्ट तो हुआ। 10- दुकानदार: क्या चाहिए? ग्राहक: मुझे अपनी बीवी से लड़ने के लिए ताकत चाहिए, हिम्मत चाहिए और अक्ल चाहिए, दुकानदार: अरे छोटू, साहब को एक क्वार्टर, दो सोडा और मूंगदाल का पैकेट दो पांच वाला दे।
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May 4, 2026, 12:45 AM
आर माधवन ने बढ़ती उम्र और प्रासंगिक बने रहने के बारे में खुलकर बात की

आर माधवन ने बढ़ती उम्र और प्रासंगिक बने रहने के बारे में खुलकर बात की

आर माधवन ने बढ़ती उम्र, जीवन की प्लानिंग और तेजी से बदलती दुनिया में रिलेवेंट बने रहने की चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की है। अपने मौजूदा काम और सोच के बारे में बात करते हुए एक्टर ने कहा कि हालांकि आज लोग अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद आने वाली चुनौतियों के लिए बहुत कम लोग तैयार हैं।वरुण दुआ के साथ एक बातचीत में,माधवनने बताया कि वह ऐसे रोल कर रहे हैं जो उनकी असल जिंदगी से मेल खाते हैं। अपनी वेब सीरीज 'लेगेसी' के बारे में बात करते हुए, उन्होंने बढ़ती उम्र के बारे में बात की, 'मैं एक ऐसे रोल कर रहा हूं जो मेरी उम्र के हिसाब से बिल्कुल सही है... पिछली बार की तुलना में अब मेरे बाल पहले से कहीं ज्यादा सफेद हो गए हैं।'अब कोई भी जी सकता लंबी उम्रचिकित्सा विज्ञान में हुए विकास पर एक्टर ने बताया कि लंबी उम्र अब सामान्य बात होती जा रही है। उन्होंने कहा, 'यदि आप स्वस्थ रहें और अपनी लाइफस्टाइल का ध्यान रखें, तो 90 साल तक जीवित रहना अब कोई बड़ी बात नहीं है... बल्कि 90 से 100 साल तक जीना भी अब संभव हो रहा है।'View this post on InstagramA post shared by Padma Shri_Dr_R Madhavan_Maddy (@actormaddygram)आपके जीवन के पहले 30 साल प्लान्ड होते हैं। अगले 30 साल करियर और परिवार बनाने के बारे में होते हैं। लेकिन 60 साल की उम्र में एक ठहराव आ जाता है। अगले 30 साल का कोई भविष्य तय नहीं होता। कोई योजना नहीं होती।आर माधवन, एक्टरकिसी पर निर्भर होना सबसे बड़ी दिक्कतजब उनसे उनके सबसे बड़े डर के बारे में पूछा गया, तो एक्टर ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने स्वीकार किया, 'मेरा सबसे बड़ा डर किसी पर निर्भर होना है, शारीरिक या आर्थिक रूप से। यह मेरे लिए नरक से भी बदतर है। उन्होंने बुढ़ापे में गरिमा और योगदान के महत्व के बारे में भी बात की।'गरिमा का हनन मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। मुझे योगदान देने में सक्षम होना चाहिए, अन्यथा मैं इसका हिस्सा नहीं बनना चाहूंगा।आर माधवन, एक्टररिटायरमेंट प्लानिंग पर बोले माधवनरिटायरमेंट पर बात करते हुए, माधवन ने इस बात पर भी बात की कि जीवन कितना अचानक बदल सकता है, खासकर ऐसे करियर में। उन्होंने समझाया, 'एक सोमवार आप ‘सर’ होते हैं, अगले दिन आप सिर्फ एक नागरिक होते हैं। आप वह प्रासंगिकता, वह अधिकार खो देते हैं।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोग अक्सर इस बदलाव के भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को कम आंकते हैं।View this post on InstagramA post shared by Sarita Birje Madhavan (@msaru15)आर माधवन का परिवारवैसे तो माधवन ने रिटायरमेंट के बाद की बात की है, लेकिन उनकी उम्र फिलहाल 55 साल है। उनकी प्यारी सी पत्नी हैं जिनका नाम सरिता है। बेटावेदांतएक स्विमर है और देश के लिए कई मेडल जीत चुके हैं।
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May 3, 2026, 07:33 PM
ज्येष्ठ मास की शुरुआतः भव्य धार्मिक आयोजनों और आध्यात्मिक प्रथाओं का समय

ज्येष्ठ मास की शुरुआतः भव्य धार्मिक आयोजनों और आध्यात्मिक प्रथाओं का समय

कंदवा। ज्येष्ठ का महीना शुरू हो गया है। अधिकमास होने पर ज्येष्ठ महीना इस बार 59 दिनों का होगा। अधिकमास में मंदिरों में भव्य धार्मिक आयोजन होंगे। हिंदू पंचांग के तीसरे ज्येष्ठ महीने में जप, तप, साधना व दान का विशेष महत्व है। इस महीने में भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा-आराधना करने से सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य राधेश्याम चौबे ने बताया कि हर तीन साल में एक बार अधिकमास आता है। इस बार ज्येष्ठ महीने में अधिकमास का संयोग बन रहा है। ऐसे में ज्येष्ठ महीना 30 नहीं बल्कि 59 दिनों का होगा। उनके अनुसार दो मई से शुरू ज्येष्ठ महीना 29 जून तक रहेगा। इस बीच 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा। जिसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। ज्येष्ठ महीना में वट अमावस व्रत 16 मई को व निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को होगा। ज्येष्ठ महीने में आठ मंगलवार पड़ेंगे। बताया कि ज्येष्ठ महीने में तीर्थयात्रा करना और पवित्र नदियों में स्नान का काफी महत्व है। इस महीने में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जल व फल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पानी की बचत करने से देवता प्रसन्न होते हैं। जीवन में आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।और पढ़ेंTrending Videos
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May 3, 2026, 03:53 PM
एक सुंदर और लाभकारी घर के लिए वास्तु युक्तियाँ

एक सुंदर और लाभकारी घर के लिए वास्तु युक्तियाँ

अपने घर को हर कोई साफ और सुंदर बनाकर रखना चाहता है. इस मामले में ड्रॉइंग रूम का लोग बहुत ख्याल रखते हैं. कोई मोटा खर्चा करवा कर प्रोफेशनल से इंटीरियर डिजाइन करवाता है तो कोई खुद ही अपनी समझ से घर को सजा लेता है. लेकिन इस साज-सज्जा में यदि वास्तु के कुछ नियमों को भी शामिल कर लिया जाए तो आप घर को सुंदर और आकर्षक बनाने के साथ जीवन में कई तरह के लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं. अन्यथा अनजाने में हुई एक छोटी सी गलती आपकी मुश्किल बढ़ा सकती है. घर के ईशान कोण और ब्रह्म स्थान में कोई भारी सामान नहीं होना चाहिए. बेहतर है कि यह स्थान बिल्कुल खाली हो. ब्रह्म स्थान में किसी प्रकार का भारीपन या कोई भारी सामान आपके स्वास्थ्य और जीवन में आने वाले सुनहरे अवसरों को खत्म कर सकता है. वहीं, ईशान कोण में मंदिर और हरियाली का होना अच्छा है. हरियाली के रूप में भी बहुत भारी गमले नहीं होने चाहिए. घर को सजाने के लिए लोग तरह-तरह की पेंटिंग्स लगाते हैं. वास्तु के अनुसार, उत्तर दिशा में बड़े और ऊंचे पहाड़ों की पेंटिंग की बजाए बहते जल, हरियाली, खुले मैदान और नीले आकाश की तस्वीर जीवन में नए अवसर और उम्मीदों को बढ़ाती है. इन तस्वीरों में लाल या पीला रंग नहीं होना चाहिए. जल तत्व की इस दिशा में किसी भी रूप में भारीपन नहीं होना चाहिए. वहीं, पश्चिम से उत्तर-पश्चिम की दिशा में ऊंची इमारतों की तस्वीर लगाना जीवन में स्थिरता प्रदान करता है. ऊंचे पहाड़ों से बहते झरने की तस्वीर पश्चिम दिशा में लगाने से आपकी इच्छाओं की पूर्ति होती है. यहां हरा रंग नहीं होना चाहिए. पीले, नीले और दूधिया सफेद रंग की तस्वीरें लगाना यहां शुभ है. परिवार के लोगों में एकता और खुशी बनी रहे, इसके लिए दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम दिशा में परिवार की संयुक्त फोटो लगानी चाहिए. इससे परिवार के लोगों में प्रेम बना रहता है. परिवार के बच्चों की खिलखिलाती फोटो ईस्ट-नॉर्थ-ईस्ट दिशा में लगाने से घर में खुशियां बनी रहती हैं. घर में दक्षिण से पश्चिम की दिशा में गलती से भी हरियाली या पेड़-पौधे नहीं होने चाहिए. इस दिशा में किसी भी रूप में हरा रंग परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव पैदा कर सकता है. पश्चिम से लेकर पूर्व दिशा में हरियाली का होना अच्छा होता है. यदि आप घर में आर्टिफिशियल फूल लगा रहे हैं तो संबंधित दिशा तत्व का ध्यान रखते हुए फूलों के रंगों का चुनाव करें. जैसे- उत्तर से लेकर पूर्व दिशा तक मनीप्लांट या पत्तेदार और नीले फूल लगाए जा सकते हैं. पूर्व से लेकर दक्षिण दिशा तक हरे रंग के साथ लाल, गुलाबी व नारंगी रंग के फूलों का प्रयोग किया जा सकता है. दक्षिण से लेकर पश्चिम तक पीले और सफेद रंग के फूलों का प्रयोग कर सकते हैं. पश्चिम से लेकर उत्तर दिशा तक नीले, सफेद रंग के फूलों का प्रयोग करना अच्छा है. रंगों के आधार पर आप घर के पर्दे, पायदान आदि का प्रयोग कर सकते हैं. जिस तत्व की दिशा हो, उसी तत्व के रंग का प्रयोग करना लाभकारी होता है.
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May 3, 2026, 02:15 PM
बेल का शरबत के साथ गर्मी को हराएँः एक स्वस्थ ग्रीष्मकालीन पेय

बेल का शरबत के साथ गर्मी को हराएँः एक स्वस्थ ग्रीष्मकालीन पेय

Bael Sherbet Recipe:गर्मियों का मौसम अपने साथ तेज धूप और लू का खतरा लेकर आता है. ऐसे में शरीर को ठंडा रखना औरडिहाइड्रेशनसे बचना बेहद जरूरी हो जाता है. बाजार में मिलने वाले ठंडे पेय भले ही तुरंत राहत दें, लेकिन उनमें मौजूद केमिकल्स और ज्यादा शुगर शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं. ऐसे में हमारे ट्रेडिशनलदेसी ड्रिंक्सजैसे बेल का शरबत एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प बनकर सामने आते हैं. बेल का फल न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पाचन को दुरुस्त करता है और लू से बचाव में भी मदद करता है. अच्छी बात यह है कि इसे घर पर बहुत आसानी से तैयार किया जा सकता है.बेल का शरबत क्यों है खास?बेल (वुड एप्पल) एक ऐसा फल है जो आयुर्वेद में कूलिंग सुपरफूड माना जाता है. इसमें नेचुरल कूलिंग गुण होते हैं जो शरीर के टेंपरेचर को बैलेंस रखते हैं. इसके अलावा:यह पेट को ठंडा रखता है.डिहाइड्रेशन से बचाता है.कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत देता है.शरीर को तुरंत एनर्जी देता है.गर्मियों में रोजाना एक गिलास बेल का शरबत पीना आपको लू के असर से काफी हद तक बचा सकता है.ये भी पढ़ें:आप भी है स्ट्रीट फूड लवर्स? जानें फूड प्वाइजनिंग से बचने के 10 गोल्डन रूल्स, हर बाहर खाने वाले को होने चाहिए पताघर पर बेल का शरबत बनाने की आसान विधिसामग्री:पका हुआ बेल फल - 1ठंडा पानी - 2-3 गिलासचीनी या गुड़ - स्वाद अनुसारकाला नमक - आधा चम्मचभुना जीरा पाउडर - आधा चम्मचपुदीना पत्ते (वैकल्पिक)बनाने की विधि:1. सबसे पहले बेल को तोड़कर उसका गूदा निकाल लें.2. गूदे में थोड़ा पानी डालकर 10-15 मिनट के लिए भिगो दें.3. अब हाथ से मसलकर या चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं.4. इस मिश्रण को छान लें ताकि बीज और रेशे अलग हो जाएं.5. अब इसमें स्वाद अनुसार चीनी या गुड़ मिलाएं.6. काला नमक और भुना जीरा डालकर अच्छी तरह मिक्स करें.7. चाहें तो पुदीना पत्ते डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें.ये भी पढ़ें:मई की तपिश में खराब हो सकती है तबीयत, जानें मौसम विभाग और डॉक्टरों की जरूरी सलाहलू से बचने में कैसे मदद करता है बेल का शरबत?बेल का शरबत शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक फाइबर और मिनरल्स शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है.ध्यान रखने वाली बातेंज्यादा मीठा न डालें, वरना फायदे कम हो सकते हैं.हमेशा पका हुआ बेल ही इस्तेमाल करें.शरबत ताजा बनाकर ही पिएं.अगर आप गर्मियों में खुद को हेल्दी और ठंडा रखना चाहते हैं, तो बेल का शरबत आपके लिए एक परफेक्ट देसी ड्रिंक है. यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि आपके शरीर को लू और गर्मी के दुष्प्रभाव से भी बचाता है.(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)मैं सुन रहा हूँ, क्या जानना चाहेंगे?
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May 3, 2026, 12:40 PM
पौष्टिक सत्तू बर्फी के साथ शांत रहेंः एक चीनी-मुक्त ग्रीष्मकालीन व्यंजन

पौष्टिक सत्तू बर्फी के साथ शांत रहेंः एक चीनी-मुक्त ग्रीष्मकालीन व्यंजन

गर्मी में जब कुछ मीठा खाने का मन होता है तो ज्यादातर लोग आइसक्रीम ही खाते हैं लेकिन चीनी और कैलोरी से भरपूर आइसक्रीम की जगह अगर आप कुछ हेल्दी खाना चाहते हैं तो सत्तू से बनी बर्फी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है. भुने हुए चने का सत्तू न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाता है बल्कि यह प्रोटीन और ऊर्जा का भी पावरहाउस है. इस रेसिपी की सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में न तो चीनी का इस्तेमाल किया गया है और न ही खोया (मावा) का, जिससे यह पूरी तरह से पौष्टिक और हल्की रहती है. केवल सत्तू और ड्राई फ्रूट्स के संगम से तैयार यह बर्फी स्वाद में इतनी लाजवाब होती है कि मेहमान भी इसकी रेसिपी पूछे बिना नहीं रह पाएंगे. 1 कप सत्तू (भुने चने का आटा), 1/2 कप गुड़ का पाउडर या खजूर का पेस्ट, 1/2 कप बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स (बादाम, काजू, अखरोट), 2-3 बड़े चम्मच शुद्ध देसी घी और आधा चम्मच इलायची पाउडर. एक कड़ाही में देसी घी गरम करें और इसमें सत्तू डालकर मध्यम आंच पर 3-4 मिनट तक भूनें जब तक कि अच्छी खुशबू न आने लगे. अब इसमें बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालें और सत्तू के साथ एक मिनट तक और भूनें. गैस बंद कर दें और मिश्रण को हल्का ठंडा होने दें. जब मिश्रण हल्का गुनगुना रहे, तब इसमें गुड़ का पाउडर या खजूर का पेस्ट और इलायची पाउडर अच्छी तरह मिला लें. एक थाली को घी लगाकर चिकना करें और तैयार मिश्रण को उसमें फैलाकर मनचाहे आकार में काट लें. आधे घंटे के लिए सेट होने दें. आपकी एनर्जी से भरपूर सत्तू-ड्राई फ्रूट बर्फी तैयार है.
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May 3, 2026, 12:26 PM
शाहजहांपुर में पुलिस परिवारों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

शाहजहांपुर में पुलिस परिवारों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

शाहजहांपुर। पुलिस परिवारों के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए पुलिस लाइन में वामा सारथी की ओर से आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा जागरूकता कार्यक्रम व मासिक होम्योपैथी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।और पढ़ेंTrending Videosडाॅ. मोहम्मद आलम खान, डॉ. उदय कुमार कौशिक, डॉ. मानवेंद्र सिंह, डॉ. केपी सक्सेना ने पुलिस कर्मियों एवं उनके परिजनों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हुए विभिन्न सामान्य एवं मौसमी बीमारियों के संबंध में चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया।विज्ञापनविज्ञापनऔषधियों का वितरण किया गया। साथ ही चिकित्सकों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित योग एवं व्यायाम करने, संतुलित आहार लेने, तनाव प्रबंधन, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ रहने के उपाए बताए। संवाद
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May 3, 2026, 09:59 AM
चेट्टीनाड अदाई डोसाः एक त्वरित, स्वस्थ और स्वादिष्ट नाश्ता विकल्प

चेट्टीनाड अदाई डोसाः एक त्वरित, स्वस्थ और स्वादिष्ट नाश्ता विकल्प

अगर आप नाश्ते में कुछ हेल्दी, टेस्टी और प्रोटीन से भरपूर खाना चाहते हैं तो चेट्टीनाड अडई डोसा एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. यह डोसा तमिलनाडु के चेट्टीनाड क्षेत्र की एक प्रसिद्ध और पारंपरिक डिश है. यह नॉर्मल डोसे से थोड़ा अलग होता है, क्योंकि इसमें चावल के साथ कई तरह की दालों का इस्तेमाल किया जाता है और इसे बनाने के लिए घोल को फर्मेंट करने की जरूरत भी नहीं होती. यही वजह है कि यह जल्दी बन जाता है और काफी हेल्दी भी होता है. आइए जानते हैं कि चेट्टीनाड अडई डोसा कैसे बनाया जाता है और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. 1 कप चावल (इडली चावल या कच्चा चावल) ½ कप चना दाल ½ कप तुअर दाल 2 बड़े चम्मच उड़द दाल 2 बड़े चम्मच मूंग दाल 4-5 सूखी लाल मिर्च 1 छोटा चम्मच सौंफ 1 इंच अदरक का टुकड़ा एक चुटकी हींग 8-10 कढ़ी पत्ते नमक स्वादानुसार 1 मीडियम साइज प्याज (बारीक कटा) थोड़ा सा कटा हरा धनिया तेल या घी डोसा सेकने के लिए 2 बड़े चम्मच कद्दूकस किया हुआ नारियल
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May 3, 2026, 09:17 AM
तांबे की शक्तिः भाग्य और आत्मविश्वास को खोलना

तांबे की शक्तिः भाग्य और आत्मविश्वास को खोलना

ज्योतिष शास्त्र में धातुओं का अपना एक अलग ही असर होता है, और जब बात तांबे की आती है, तो इसे सबसे शुद्ध और पावरफुल माना जाता है. इसे सिर्फ एक साधारण धातु न समझें, तांबा सीधे तौर पर ग्रहों के राजा सूर्य और जोश के प्रतीक मंगल से जुड़ा है. इसी वजह से तांबे का कड़ा पहनना केवल सेहत के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि यह आपकी सोई हुई किस्मत को भी जगाने का दम रखता है. अगर आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है या मंगल की स्थिति ठीक नहीं है, तो हाथ में तांबा पहनना किसी जादुई उपाय से कम नहीं है. यह न केवल आपके शरीर में पॉजिटिव एनर्जी भरता है, बल्कि आपके मान-सम्मान और कॉन्फिडेंस को भी सातवें आसमान पर ले जाता है तांबा केवल दिखावे की चीज़ नहीं है, इसके पीछे ठोस ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण हैं: यह कुंडली में सूर्य को बल देता है, जिससे मान-सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ता है. तांबा पहनने से क्रोध पर नियंत्रण रहता है . मंगल के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. इसे पहनने से मानसिक शांति मिलती है . बुरी नजर से सुरक्षा होती है. इस समय ग्रहों की चाल इन राशियों के लिए तांबे के कड़े को वरदान बना रही है. आपके लिए तांबा करियर में नई ऊंचाइयां लाने वाला है. रुके हुए काम बनेंगे. समाज में आपका रसूख बढ़ेगा. : क्योंकि सूर्य आपका स्वामी है, तांबा पहनने से आपकी लीडरशिप क्वालिटी और चमक दोगुनी हो जाएगी. धन आगमन के नए रास्ते खुलेंगे. मंगल का प्रभाव होने के कारण तांबा आपके साहस में वृद्धि करेगा. कार्यक्षेत्र में चल रही बाधाओं को दूर करेगा. तांबे के कड़े का पूरा फल तभी मिलता है जब इसे नियम से पहना जाए: इसे रविवार या मंगलवार की सुबह पहनना सबसे उत्तम माना जाता है. पहनने से पहले कड़े को गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध कर लें. : ध्यान रखें कि कड़ा शुद्ध तांबे का हो और उसमें कोई जोड़ न हो.
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May 3, 2026, 07:48 AM
आर. माधवन ने बढ़ती उम्र, सेवानिवृत्ति की योजना और प्रासंगिक बने रहने के बारे में बात की

आर. माधवन ने बढ़ती उम्र, सेवानिवृत्ति की योजना और प्रासंगिक बने रहने के बारे में बात की

आर माधवन ने बढ़ती उम्र, जीवन की प्लानिंग और तेजी से बदलती दुनिया में रिलेवेंट बने रहने की चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की है। अपने मौजूदा काम और सोच के बारे में बात करते हुए एक्टर ने कहा कि हालांकि आज लोग अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद आने वाली चुनौतियों के लिए बहुत कम लोग तैयार हैं।वरुण दुआ के साथ एक बातचीत में,माधवनने बताया कि वह ऐसे रोल कर रहे हैं जो उनकी असल जिंदगी से मेल खाते हैं। अपनी वेब सीरीज 'लेगेसी' के बारे में बात करते हुए, उन्होंने बढ़ती उम्र के बारे में बात की, 'मैं एक ऐसे रोल कर रहा हूं जो मेरी उम्र के हिसाब से बिल्कुल सही है... पिछली बार की तुलना में अब मेरे बाल पहले से कहीं ज्यादा सफेद हो गए हैं।'अब कोई भी जी सकता लंबी उम्रचिकित्सा विज्ञान में हुए विकास पर एक्टर ने बताया कि लंबी उम्र अब सामान्य बात होती जा रही है। उन्होंने कहा, 'यदि आप स्वस्थ रहें और अपनी लाइफस्टाइल का ध्यान रखें, तो 90 साल तक जीवित रहना अब कोई बड़ी बात नहीं है... बल्कि 90 से 100 साल तक जीना भी अब संभव हो रहा है।'View this post on InstagramA post shared by Padma Shri_Dr_R Madhavan_Maddy (@actormaddygram)आपके जीवन के पहले 30 साल प्लान्ड होते हैं। अगले 30 साल करियर और परिवार बनाने के बारे में होते हैं। लेकिन 60 साल की उम्र में एक ठहराव आ जाता है। अगले 30 साल का कोई भविष्य तय नहीं होता। कोई योजना नहीं होती।आर माधवन, एक्टरकिसी पर निर्भर होना सबसे बड़ी दिक्कतजब उनसे उनके सबसे बड़े डर के बारे में पूछा गया, तो एक्टर ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने स्वीकार किया, 'मेरा सबसे बड़ा डर किसी पर निर्भर होना है, शारीरिक या आर्थिक रूप से। यह मेरे लिए नरक से भी बदतर है। उन्होंने बुढ़ापे में गरिमा और योगदान के महत्व के बारे में भी बात की।'गरिमा का हनन मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। मुझे योगदान देने में सक्षम होना चाहिए, अन्यथा मैं इसका हिस्सा नहीं बनना चाहूंगा।आर माधवन, एक्टररिटायरमेंट प्लानिंग पर बोले माधवनरिटायरमेंट पर बात करते हुए, माधवन ने इस बात पर भी बात की कि जीवन कितना अचानक बदल सकता है, खासकर ऐसे करियर में। उन्होंने समझाया, 'एक सोमवार आप ‘सर’ होते हैं, अगले दिन आप सिर्फ एक नागरिक होते हैं। आप वह प्रासंगिकता, वह अधिकार खो देते हैं।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोग अक्सर इस बदलाव के भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को कम आंकते हैं।View this post on InstagramA post shared by Sarita Birje Madhavan (@msaru15)आर माधवन का परिवारवैसे तो माधवन ने रिटायरमेंट के बाद की बात की है, लेकिन उनकी उम्र फिलहाल 55 साल है। उनकी प्यारी सी पत्नी हैं जिनका नाम सरिता है। बेटावेदांतएक स्विमर है और देश के लिए कई मेडल जीत चुके हैं।
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May 3, 2026, 06:11 AM
दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी के जोखिम को कम करने में आहार संबंधी विकल्प महत्वपूर्ण हैं

दीर्घकालिक गुर्दे की बीमारी के जोखिम को कम करने में आहार संबंधी विकल्प महत्वपूर्ण हैं

क्योंकि केवल 10 से 15 प्रतिशत मामले ही आनुवंशिक होते हैं, इसलिए हमारी डाइट इस बीमारी के जोखिम को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। आइए जानें इस बारे में। रिसर्च से पता चला है कि पार्किंसंस से पीड़ित कुछ लोगों के पाचन तंत्र में अल्फा-सिन्यूक्लिन नाम का गलत तरीके से मुड़ा हुआ प्रोटीन जमा हो जाता है। इसलिए बीमारी का पता लगने से सालों पहले क्रॉनिक कब्ज जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
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May 3, 2026, 04:59 AM
ग्रीष्मकालीन कूलिंगः लौकी की रोटी के स्वादिष्ट और स्वस्थ लाभों की खोज करें

ग्रीष्मकालीन कूलिंगः लौकी की रोटी के स्वादिष्ट और स्वस्थ लाभों की खोज करें

गर्मियों के मौसम में ऐसे खाने की जरूरत होती है जो हल्का हो, आसानी से पच जाए और पेट को भी ठंडा रखें. ऐसे में लौकी एक बेहतरीन ऑप्शन है. आपने लौकी की सब्जी या कोफ्ता तो कई बार खाया होगा लेकिन क्या कभी लौकी की रोटी ट्राई की है. यह रोटी टेस्टी होने के साथ-साथ गर्मियों के लिए एक हेल्दी ऑप्शन भी है, जिसे आप आसानी से घर पर बना सकते हैं. इसका स्वाद इतना लाजवाब होगा कि एक बार खाने के बाद आप बार-बार बनाना पसंद करेंगे. आइए जानते हैं कि लौकी की रोटी कैसे बनती है और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी 1 कप आटा लौकी की रोटी टेस्टी होने के साथ-साथ काफी हेल्दी भी होती है. लौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है जो शरीर को ठंडक देने और हाइड्रेट रखने में मदद करती है, खासकर गर्मियों में. यह डाइजेशन के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और वजन कंट्रोल करने में मदद करता है. साथ ही, लौकी में मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर को जरूरी पोषण देते हैं, जिससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है.
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May 3, 2026, 01:58 AM
फैशन से लड़ाई तकः टीबी और कैंसर के खिलाफ ललिता की प्रेरणादायक यात्रा

फैशन से लड़ाई तकः टीबी और कैंसर के खिलाफ ललिता की प्रेरणादायक यात्रा

मैं ललिता हूं और हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हूं। कभी मेरी पहचान एक फैशन डिजाइनर के तौर पर थी। रसूखदार परिवारों से कपड़ों के ऑर्डर मिलते थे। रंग, कपड़े, डिजाइन और ग्लैमर की दुनिया में मेरी पहचान थी। मेरे पति अपना बिजनेस संभालते थे। जिंदगी आराम से ग मुझे लगता था कि जिंदगी ने मुझे सब कुछ दे दिया है, लेकिन सिर्फ 15 साल की उम्र में मुझे दो बार टीबी हुई। बड़ी मुश्किल से उससे उबरी, लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी थी। आगे चलकर कैंसर ने मुझे तीन बार अपनी चपेट में लिया और एक बार मेरे पति को भी। साल 1995। मेरी उम्र थी 19 साल। दिल्ली में पढ़ाई कर रही थी, तभी एक दिन ब्रेस्ट में तेज दर्द उठा। पहले लगा नॉर्मल समस्या होगी, लेकिन दर्द बढ़ता गया। घबराकर मैंने पापा को बताया और उन्होंने तुरंत मुझे रोहतक बुला लिया। जांच में डॉक्टरों ने बताया कि ब्रेस्ट में गांठ है। उस दौर में मैमोग्राफी जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। 19 साल की उम्र में पहली बार ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़ी मैं डर से कांप रही थी, लेकिन सर्जरी सफल रही और गांठ निकाल दी गई। मेरे ऑपरेशन के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि घर पर एक और तूफान आ गया। पिता को लिवर कैंसर होने का पता चला। वह रिटायर्ड अफसर थे, मजबूत इंसान थे, लेकिन कुछ ही महीनों में बीमारी ने उन्हें मुझसे छीन लिया। पिता मेरे लिए पैसा और प्रॉपर्टी छोड़ गए थे, इसलिए भविष्य की चिंता नहीं थी, लेकिन जिस इंसान के भरोसे मैं खड़ी थी, वही चला गया। मां से मुझे कभी वह अपनापन नहीं मिला। बचपन से घर में काम करने वाली अम्मा ने मुझे पाला, जिन्हें मैं आज भी‘हंसो मां’कहती हूं। पापा के जाने के बाद खुद को संभालना मेरी जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाइयों में से एक था। 1997 में मैंने सोचा था कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है। मैं पढ़ाई के लिए दोबारा दिल्ली आ गई थी, लेकिन तभी नाभी के पास तेज दर्द शुरू हुआ। जांच में पता चला कि मुझेबार्थोलिन ग्लैंडकैंसर है, जो वजाइना के हिस्से में होता है। दूसरी बार‘कैंसर’शब्द सुनते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। पापा अब इस दुनिया में नहीं थे और मां ने साफ कह दिया- ‘मैं ऑपरेशन के लिए नहीं आऊंगी।’ यह सुनकर मुझे दुख कम, खालीपन ज्यादा महसूस हुआ। आखिर में मैंने दोस्तों को सब बताया। वही मेरे परिवार की तरह खड़े रहे। उन्होंने अस्पताल के चक्कर लगाए, हिम्मत दी और सर्जरी करवाई। लगा कि लड़ाई खत्म हो गई… लेकिन सिर्फ छह महीने बाद उसी जगह फिर दर्द शुरू हो गया, जहां कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। जैसे ही लगा कि जिंदगी फिर सामान्य हो रही है, डॉक्टरों ने बताया कि बार्थोलिन ग्लैंड में कैंसर दोबारा लौट आया है। मुझे फिर ऑपरेशन थिएटर में जाना पड़ा। सर्जरी हुई। धीरे-धीरे संभल रही थी कि छह महीने के भीतर मेरी तबीयत फिर बिगड़ गई। जांच रिपोर्ट ने एक और झटका दिया- इस बार कैंसरफैलोपियन ट्यूबके हिस्से तक पहुंच चुका था। इलाज लंबा, दर्दनाक और थका देने वाला था, लेकिन डॉक्टर किसी तरह मेरी फैलोपियन ट्यूब बचाने में कामयाब रहे। मैं बार-बार कैंसर को हराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर अस्पताल के कमरे में मुझे पापा की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चुभती थी। कैंसर की लंबी लड़ाई लड़कर जब घर लौटी, तो घर में मां रोज शादी के लिए दबाव बनाने लगीं। मैं मानसिक रूप से इतनी थक चुकी थी कि बस उस माहौल से बाहर निकलना चाहती थी। तब मेरी उम्र 28 साल थी। एक जाट लड़के को पसंद करती थी। मैंने उससे शादी करने का फैसला कर लिया। उसे और उसके परिवार को साफ बता दिया था कि मैं कैंसर सर्वाइवर हूं। मुझे लगा था कैंसर सर्वाइवर होना उनके लिए सबसे बड़ा सवाल होगा, लेकिन उन्हें मेरे कैंसर से नहीं, मेरी उम्र से परेशानी थी- मैं उनके बेटे से पांच साल बड़ी थी। आखिरकार शादी हो गई। लेकिन ससुराल पहुंचते ही एक नई लड़ाई शुरू हो गई। मुझसे घूंघट करने को कहा जाता, हर बात पर रोक-टोक होती। हॉस्टल में पली मेरी आजाद जिंदगी अचानक परंपराओं के घेरे में कैद की जाने लगी। घूंघट न करने पर अक्सर झगड़े होते। आखिरकार रोज के तनाव से तंग आकर मैं पति के साथ अलग रहने लगी। किराए के छोटे से घर में नई शुरुआत की और फैशन डिजाइनिंग सीखी। मैंने बीएएमएस की पढ़ाई की थी। इसलिए शौक में आयुर्वेद की प्रैक्टिस करती थी और साथ ही कपड़े डिजाइन कर अच्छी कमाई भी हो रही थी। शादी को छह साल हो चुके थे और हमारा एक साल का बेटा था। जिंदगी आखिरकार सामान्य लगने लगी थी। फिर एक दिन सब बदल गया। मैं रोहतक से बाहर थी, तभी पति का फोन आया- ‘मेरा मुंह खुलना बंद हो गया है, डॉक्टर के पास जा रहा हूं।’ मैं घबरा गई। तुरंत वापस लौटी और उन्हें अस्पताल लेकर गई। जांच में पता चला कि उन्हें गले का कैंसर है। पति एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे। 45 बार कीमोथेरेपी हुई। पैसों की कमी नहीं थी, लेकिन अपनों का साथ नहीं था। मेरी सास अपने बेटे को देखने तक नहीं आईं। उनकी सर्जरी 12 घंटे चली- सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक। बाहर मैं एक साल के बच्चे को गोद में लेकर बैठी थी और अंदर पति जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे थे। तीन महीने बाद उनकी हालत सुधरने लगी। उन दिनों मैं अपनी आयुर्वेद की पढ़ाई के भरोसे जड़ी-बूटियों का काढ़ा बनाती थी, जिससे उनकी रिकवरी में सहारा मिला। पति के ठीक होने के बाद भी हमारे भीतर का डर खत्म नहीं हुआ। हम दोनों मौत को इतने करीब से देख चुके थे कि पैसा, बिजनेस और भाग-दौड़ अचानक बहुत छोटे लगने लगे। हमने तय किया- अब जिंदगी सिर्फ कमाने के लिए नहीं, सुकून से जीने के लिए होगी। मेरे पति ने अपना एग्रीकल्चर प्रोडक्ट बिजनेस छोड़ दिया। मैं फैशन डिजाइनिंग कर रही थी, लेकिन जिंदगी मुझे एक बिल्कुल नए रास्ते की ओर ले जा रही थी। एक दिन मुझे रेडियो के टॉक शो में बुलाया गया। वहां डायरेक्टर ने एक कपड़ा मेरी तरफ बढ़ाया और पूछा- बताओ, यह किस धागे से बना है? मैं जवाब नहीं दे पाई। उन्होंने कहा- तुम फैशन डिजाइनर हो और इसे नहीं पहचानतीं? यह रेजा कपास है। उनकी बात मेरे दिल पर लग गई। मैंने तुरंत कहा- मुझे 15 दिन दीजिए, मैं इसके बारे में सब जानकर लौटूंगी। मैंने इंटरनेट खंगाला, लोगों से पूछा, रिकॉर्ड ढूंढ़े- लेकिन कुछ नहीं मिला। आखिरकार पुरानी किताबों में इसका जिक्र मिला। कबीरदास और गरीबदास की रचनाओं में रेजा कपास पर बातें मिलीं, जिसे पढ़कर लगा कि मैं किसी भूली हुई विरासत के पीछे चल पड़ी हूं। रेजा सूत की कहानी ने मुझे भीतर तक बेचैन कर दिया। मैंने तय किया कि सिर्फ इसके बारे में पढ़ना नहीं, इसे अपने हाथों से समझना है। हरियाणा में एक पुराने मुस्लिम परिवार का पता चला, जो पीढ़ियों से चरखा चलाना सिखाता था। मैं उनके पास गई, चरखा सीखा और फिर एक चरखा अपने घर लेकर आई। मैंने अपने पति को भी यह सिखाया। हैरानी की बात यह थी कि जिस मन ने सालों तक अस्पताल, कैंसर और मौत का डर झेला था, उसे चरखे की आवाज में शांति मिलने लगी। धीरे-धीरे चरखा हमारे लिए सिर्फ हुनर नहीं, मानसिक इलाज जैसा बन गया। फिर मुझे लगा कि अगर इसने हमें सुकून दिया है, तो शायद उन लोगों को भी दे सकता है, जिनकी जिंदगी दुखों से भरी है। मैं जेलों में गई और कैदियों को चरखा सिखाना शुरू किया। उनके हाथों से निकला सूत कपड़ों में बदलता और उन्हें यह एहसास देता कि वे अब भी किसी काम के हैं। बाद में हमने हैंडलूम की मशीन पर धागों को कातना शुरू किया। अब तक मेरी सोच नहीं बदली थी। मेरा काम भी बदल गया था। मैंने हरियाणा में 1970 में खत्म हो चुकीरेजा कपासकी खेती को फिर से जिंदा करने की ठानी। बड़ी मशक्कत से इसके बीज खोज पाई। आज मैं किसानों को रेजा कपास का बीज देती हूं और उनसे इसकी खेती करवाती हूं। उसी कपास से खादी के कपड़े बनाती हूं। उन कपड़ों पर डिजाइन खुद तैयार करती हूं। आज ये कपड़े देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रहे हैं। मेरी जानकारी में पूरे भारत में सिर्फ मैं ही रेजा कपास से डिजाइनर कपड़े बना रही हूं। लेकिन मेरी असली कमाई कपड़े नहीं। यह धागा है। जब यह घूमता है, तो मेरे भीतर का शोर धीमा पड़ जाता है। हर धागे के साथ लगता है कि मैं अपने टूटे हिस्सों को फिर से जोड़ रही हूं। हमने जिंदगी बहुत तेज भागकर जी थी- बीमारी, पैसा, बिजनेस, अस्पताल… सब देखा। अब हमने धीरे जीना सीखा है। आज भी मेरे पास घर, पैसा और सुविधाएं हैं, लेकिन सबसे बड़ी दौलत शांति है। पहले मैं सिर्फ कपड़े बुनती थी, अब अपनी जिंदगी को फिर से बुन रही हूं। (ललिता ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-हम अधेड़ कुंवारे कौवों जैसे अपशकुन माने जाते हैं:सरकार हमें देती है पेंशन, जाने कितने जानवरों से रेप करते पकड़े गए लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं।पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था।पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
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May 3, 2026, 01:33 AM
गर्मी को मात देंः गर्मियों में हाइड्रेशन के लिए 5 किफायती देसी पेय

गर्मी को मात देंः गर्मियों में हाइड्रेशन के लिए 5 किफायती देसी पेय

Best Summer Drinks For Hydration: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और ऊपर से ये आसमान छूती महंगाई! बाजार जाओ तो जेब खाली होना पक्का है. गर्मी के मौसम में खुद कोहाइड्रेटेडरखने के लिए हम सबसे पहलेनारियल पानीकी तरफ भागते हैं. लेकिन भाई साहब, नारियल पानी के दाम तो पूछो मत, कहीं 60 रुपये तो कहीं 80 रुपये का एक नारियल! एक आम आदमी के लिए रोज इतना खर्च करना मुश्किल हो गया है. अगर हम आपसे कहें कि कई ऐसी चीजें हैं जो नारियल पानी की तरह हीफायदेमंदऔर सस्ती हैं. जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा, तो चलिए जानते हैं वो ड्रिंक, जो गर्मी में आपको सेहतमंद रख सकते हैं.नारियल पानी को भूल जाइए, ये 5 देसी ड्रिंक्स हैं सेहत का खजाना-1.नींबू-शिकंजी-नींबू-पानी (शिकंजी) सबसे बेहतरीन ऑप्शन है गर्मियों के लिए. इसमें थोड़ा सा काला नमक और भुना हुआ जीरा मिला लें. यह कॉम्बिनेशन आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को वैसे ही पूरा करता है जैसे नारियल पानी करता है. विटामिन-C होने की वजह से यह आपकी इम्यूनिटी भी बढ़ाता है.कैसे बनाएं-इसे बनाना बहुत आसान है. एक गिलास ठंडा पानी लें, उसमें आधा नींबू निचोड़ें, थोड़ा सा काला नमक, बारीक कटा हुआ पुदीना और जीरा पाउडर डालें. इसे अच्छे से घोलें और पी जाएं. विश्वास मानिए, यह आपको नारियल पानी से ज्यादा रिफ्रेशिंग महसूस कराएगा.​2. छाछ या मट्ठा-​दही को मथकर बनी छाछ इलेक्ट्रोलाइट्स का सबसे बड़ा नेचुरल सोर्स है. इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया डाइजेशन सुधारते हैं और पेट की गर्मी को शांत करते हैं. भुना हुआ जीरा और काला नमक डालकर यह स्वादिष्ट और सेहतमंद बन जाता है और बेहद सस्ता.​3. बेल का शरबत-​बेल का फल गर्मियों में किसी वरदान से कम नहीं है. यह पेट की कई बीमारी, जैसे कब्ज और डायरिया के लिए रामबाण है. यह शरीर को अंदर से ठंडा करता है और लू लगने से बचाता है.​4. आम पन्ना-​कच्चे आम को उबालकर बनाया गया 'आम पन्ना' विटामिन-सी से भरपूर होता है. यह न सिर्फ आपको हाइड्रेटेड रखता है, बल्कि शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है. इसका खट्टा-मीठा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सबका फेवरेट है.​5. गन्ने का जूस-​घर पर बना गन्ने का जूस सीधे तौर पर ग्लूकोज का काम करता है. इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटेशियम होता है, जो थकान मिटाने में दूर करता है.नोटःएक बात का ध्यान रखें गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर होती है इसलिए डायबिटीज के मरीज इसका सेवन डॉक्टर की परामर्श से ही करें.ये भी पढ़ें-क्या आप भी फ्रिज में रखे हुए आटे की रोटी खाते हैं? जान लें कितनी देर बाद गूंथा आटा हो जाता है खराबकैसे करें असली और नकली आम की पहचान? (How to identify if the mango is naturally or artificially ripened?)(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)मैं सुन रहा हूँ, क्या जानना चाहेंगे?
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May 3, 2026, 12:42 AM
एयर कंडीशनिंग के छिपे हुए स्वास्थ्य जोखिमः विशेषज्ञ अंतर्दृष्टि

एयर कंडीशनिंग के छिपे हुए स्वास्थ्य जोखिमः विशेषज्ञ अंतर्दृष्टि

आजकलएयरकंडीशनर (AC) हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। घर से लेकर ऑफिस तक, दिन का ज्यादातर हिस्सा एसी में गुजरता है। इसके अपने फायदे हैं, लेकिन कुछ नुकसान भी होते हैं। लगातार ठंडी और ड्राई हवा में रहने से इम्यूनिटी कमजोर पड़ सकती है। साथ ही बंद कमरे का माहौल और टेम्परेचर में बार-बार बदलाव सेहत के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एसी के इस्तेमाल के साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज एसी के हेल्थ रिस्क समझेंगे। साथ ही जानेंगे- किन लोगों को एसी में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? एसी इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. मोहम्मद शाहिद, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर सवाल- एसी की हवा हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करती है? जवाब-एसी की ठंडी-शुष्क हवा स्किन और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को ड्राई कर सकती है। सवाल- क्या लंबे समय तक एसी में रहने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है? जवाब-लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर बाहरी टेम्परेचर के अनुसार एडजस्ट नहीं हो पाता है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है। सवाल- इम्यून सिस्टम कमजोर क्यों होता है? जवाब-गर्मी में लंबे समय तक एसी में रहने से शरीर का टेम्परेचर थर्मल एडैप्टेशन (टेम्परेचर के अनुसर बॉडी एडजस्टमेंट) कमजोर हो जाता है। ग्राफिक में देखिए, एसी में रहने से इम्यूनिटी क्यों और कैसे कमजोर होती है- सवाल- क्या हर वक्त एसी में रहने वाले लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं? जवाब-ऐसा नहीं है, लेकिन लगातार एसी में रहने से बाहरी मौसम के प्रति शरीर की सहनशीलता कम हो सकती है। सवाल- एसी का टेम्परेचर बहुत कम रखने से शरीर के डिफेंस मैकेनिज्म पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब-लो टेम्परेचर से शरीर को हीट कंजर्व करने के लिए लगातार काम करना पड़ता है। इससे ब्लड वेसल्स संकुचित हो सकती हैं और इम्यून रिस्पॉन्स स्लो हो सकता है। सवाल- क्या ज्यादा एसी में रहने से सर्दी-जुकाम, एलर्जी या इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ता है? जवाब-हां ऐसा हो सकता है, इसके कई कारण हैं- सवाल- एसी की ठंडी और ड्राई हवा रेस्पिरेटरी सिस्टम और स्किन बैरियर को कैसे प्रभावित करती है? जवाब-लंग्स पर ये प्रभाव पड़ता है- स्किन पर एसी का प्रभाव सवाल- कौन-से लक्षण बताते हैं कि एसी एक्सपोजर शरीर को सूट नहीं कर रहा? क्या इन्हें नजरअंदाज करना सही है? जवाब-लगातार ठंडे और ड्राई वातावरण में रहने से शरीर की नेचुरल एडैप्टेशन क्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों में एयर-वे सेंसिटिविटी बढ़ने से रेस्पिरेटरी डिस्कम्फर्ट महसूस होता है। सभीसंकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को एसी में रहने से ज्यादा हेल्थ रिस्क होता है? जवाब-कुछ लोगों का शरीर टेम्परेचर और नमी के बदलाव के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होता है। ग्राफिक में देखिए किन लोगों को ज्यादा रिस्क होता है- सवाल- अगर एसी के इतने नुकसान हैं तो क्या एसी बिल्कुल यूज नहीं करना चाहिए? जवाब-ऐसा नहीं है। इसका सही इस्तेमाल फायदेमंद है- सवाल- एसी के इस्तेमाल का सही तरीका क्या है? जवाब-टेम्परेचर 24-26°C के बीच रखना शरीर के लिए आरामदायक माना जाता है। ………………ये खबर भी पढ़िएजरूरत की खबर- क्या आप आउटडोर वर्क करते हैं: हो सकते हैं ये 10 हेल्थ रिस्क, ऐसे करें हीटवेव से बचाव, खाली पेट धूप में न निकलें देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। तेज धूप और लू के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।आगे पढ़िए…
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May 2, 2026, 08:34 PM
तनाव और हृदय रोग से निपटने के लिए हँसी को'जीवन रक्षक दवा'घोषित किया गया

तनाव और हृदय रोग से निपटने के लिए हँसी को'जीवन रक्षक दवा'घोषित किया गया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleहंसी सबसे अच्छी दवा है। यह कहावत पुरानी जरूर है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह किसी लाइफ-सेविंग ड्रग से कम नहीं है। विश्व हास्य दिवस पर जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने कहा है कि सेहतमंद रहने के लिए जिम और डाइट के साथ-साथ खिलखिलाना भी अनिवार्य है।और पढ़ेंTrending Videosउन्होंने बताया कि हंसी सिर्फ एक भाव नहीं, बल्कि एक बायोलॉजिकल टूल है, जो शरीर के सिस्टम को रीसेट करने की ताकत रखता है। चिकित्सा जगत अब लाफ्टर थेरेपी को उपचार का हिस्सा मान रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग दिन भर में 10 से 15 मिनट खुलकर हंसते हैं, उनमें हृदय रोगों और मानसिक तनाव का खतरा 40 प्रतिशत तक कम हो जाता है।विज्ञापनविज्ञापनहंसी के जादुई फायदेहंसने से शरीर में कोर्टिसोल (तनाव देने वाले हार्मोन) का स्तर गिरता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।हंसने से शरीर में एंडोर्फिन का स्राव होता है, जो पेनकिलर है। अवसाद से लड़ने में रामबाण है।सामूहिक रूप से हंसने से आपसी रिश्ते और मजबूत होते हैं, जिससे अकेलापन दूर होता है।यहां के पार्कों में गूंजते हैं ठहाकेशहर के विभिन्न पार्कों और मैदानों में सुबह-शाम बुजुर्गों की टोलियां सामूहिक रूप से एकत्र होती हैं। लाफ्टर क्लबों के माध्यम से बुजुर्ग एक साथ जमा होकर जोर-जोर से हंसते हैं। शनिवार की सुबह एमजी पॉलिटेक्निक के पार्क में बुजुर्ग योगासन करते नजर आए। हल्के-फुल्के आसान के बाद प्राणायाम शुरू करने से पहले बुजुर्ग जोर-जोर से हंस रहे थे। उन्होंने बताया कि उनका यह रोजाना का नियम है। इसी तरह मुरसान गेट व मेंडू रोड स्थित कॉलोनी के खाली मैदान में बुजुर्ग हंसते नजर आए।सभी की मुलाकात पार्क में ही हुई और अब अच्छे दोस्त हैं। रोजाना साथ टहलते हैं, फिर आसन करते हैं। लॉफ्टर योग से हमें मानसिक रूप से शांति मिलती है। योग के बाद भी हम बिना कारण हंसते रहते हैं। इससे पूरे दिन उत्साह बना रहता है।-हीरालाल, आवास विकास कॉलोनी।घुटने के दर्द और अकेलेपन से लड़ने के लिए हंसी ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जब हम पार्क में ठहाके लगाते हैं, तो भूल जाते हैं कि हमें कोई बीमारी भी है। हमारे लिए मनोरंजन और सेहत का यही एकमात्र साधन है।-राजनलाल, हरिवंश विहार कॉलोनी।
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May 2, 2026, 08:12 PM
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बी. सी.-बी. प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए महिला की याचिका खारिज की

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बी. सी.-बी. प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए महिला की याचिका खारिज की

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम संवैधानिक सिद्धांत दोहराते हुए राजस्थान मूल की महिला की हरियाणा में बीसी-बी प्रमाणपत्र के नवीनीकरण की मांग खारिज कर दी।और पढ़ेंTrending Videosअदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद दूसरे राज्य में बसने मात्र से किसी महिला को पति के राज्य की पिछड़ा वर्ग श्रेणी का लाभ नहीं मिल सकता। मूल रूप से राजस्थान की निवासी एकता यादव वर्तमान में रेवाड़ी में रह रही हैं।विज्ञापनविज्ञापनउन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर हरियाणा सरकार को उनका बीसी-बी प्रमाणपत्र नवीनीकृत करने का निर्देश देने और 10 अगस्त 2025 को दिए गए कानूनी नोटिस पर निर्णय लेने की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि विवाह के बाद हरियाणा में निवास करने के कारण वह यहां की आरक्षण नीति का लाभ पाने की पात्र हैं।हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि 22 मार्च 2022 की अधिसूचना के अनुसार यदि कोई व्यक्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित होता है तो वह केवल अपने मूल राज्य में मान्य जाति श्रेणी का ही लाभ ले सकता है। ब्यूरो
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May 2, 2026, 08:08 PM
खज़ानी संस्थान में महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण पर संकाय संवर्धन सत्र आयोजित

खज़ानी संस्थान में महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण पर संकाय संवर्धन सत्र आयोजित

संवाद न्यूज एजेंसीऔर पढ़ेंTrending Videosफरीदाबाद। खजानी महिला व्यावसायिक संस्थान में शुक्रवार को महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण विषय पर संकाय संवर्धन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निजी अस्पताल की डायरेक्टर डॉ. दिव्या कुमार ने मुख्य वक्ता शिरकत कर महिला स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।सेमिनार में संस्थान की फैकल्टी और छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और बढ़ते तनाव का महिलाओं के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है।विज्ञापनविज्ञापनमासिक धर्म स्वच्छता, प्रजनन स्वास्थ्य, हार्मोनल असंतुलन और पोषण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कई बार महिलाएं छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए जागरूकता और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य और कार्य-जीवन संतुलन को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।सेमिनार के दौरान इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्राओं और शिक्षकों ने अपने सवाल विशेषज्ञ के सामने रखे। डॉ. दिव्या कुमार ने सभी प्रश्नों के सरल और व्यावहारिक तरीके से जवाब दिए, जिससे प्रतिभागियों को काफी लाभ मिला।
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May 2, 2026, 07:36 PM
हिमाचल के एस. डी. एम. ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सरकारी कर्मचारियों के लिए बिस्तर विश्राम प्रिस्क्रिप्शन को सीमित करने का निर्देश दिया

हिमाचल के एस. डी. एम. ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सरकारी कर्मचारियों के लिए बिस्तर विश्राम प्रिस्क्रिप्शन को सीमित करने का निर्देश दिया

रंगस(हमीरपुर)। एसडीएम नादौन निशांत शर्मा ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आपातकाल में ही सरकारी कर्मचारियों को बेड रेस्ट लिखें। इसके लिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के प्राचार्य, सीएमओ हमीरपुर, बीएमओ नादौन और गलोड़ को पत्र भेजा है।और पढ़ेंTrending Videosउन्होंने कहा कि सभी चिकित्सा अधिकारी पंचायती राज चुनावों के दौरान किसी भी संबंधित कर्मचारी, अधिकारी को पूरी जांच के बाद ही आपातकाल में मेडिकल सर्टिफिकेट या बेड रेस्ट का परामर्श दें।विज्ञापनविज्ञापनचुनाव ड्यूटी के चलते कई कर्मचारी सामान्य होने पर भी बेड रेस्ट का मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करके ड्यूटी माफ करवाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं हो पाता, इसलिए उपमंडल नादौन के संबंधित कर्मचारियों को पूरी जांच के बाद ही यदि बहुत जरूरी हो, तभी बेड रेस्ट का सर्टिफिकेट जारी करें।महज चुनावी ड्यूटी रद्द करवाने के लिए बेड रेस्ट लेना तर्कसंगत नहीं है। एसडीएम नादौन निशांत शर्मा ने कहा कि शीघ्र ही एक कमेटी का गठन किया जाए, ताकि चुनावी ड्यूटी से संबंधित कर्मचारी जो ड्यूटी माफ करवाने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करेगा, उसकी मौके पर ही जांच की जा सके।
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May 2, 2026, 07:19 PM
डी. ए. वी. स्कूल सुंदरनगर में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई

डी. ए. वी. स्कूल सुंदरनगर में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई

छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बनायाऔर पढ़ेंTrending Videosसुंदरनगर (मंडी)। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर डीएवी विद्यालय सुंदरनगर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, ज्ञान और नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रस्तुतियां देकर सभी को प्रभावित किया। कार्यक्रम की शुरुआत सप्तम-अ की छात्राओं अनिका, ईशानी, पृशा, परीक्षा, आन्या और होम्या द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद अष्टम कक्षा की छात्रा अनन्या ने संस्कृत श्लोकों की प्रस्तुति दी। सप्तम कक्षा की छात्रा मेधा ने बुद्ध पूर्णिमा के महत्व, भारतीय संस्कृति और सद्विचारों पर प्रभावशाली भाषण दिया।सप्तम-स की छात्राओं परिधि, लक्ष्या, नम्रता और कृतिका ने कविता के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन और उनके उपदेशों को प्रस्तुत करते हुए शांति, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान छठी कक्षा की पारूल ने स्वास्थ्य विचार और तनिशा ने सुविचार प्रस्तुत कर सकारात्मक सोच और नैतिक जीवन के महत्व को रेखांकित किया।विज्ञापनविज्ञापन
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May 2, 2026, 07:03 PM
मुजफ्फरनगर में दिल के दौरे के रोगियों के लिए स्टेमी देखभाल सुविधा होगी

मुजफ्फरनगर में दिल के दौरे के रोगियों के लिए स्टेमी देखभाल सुविधा होगी

मुजफ्फरनगर। हृदयघात के मरीजों को उपचार के लिए स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में स्टेमी केयर सुविधा की शुरुआत होगी। मरीज को हायर सेंटर रेफर करने के बजाए एक से डेढ़ घंटे तक मरीज को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर उपचार दिया जाएगा। मुख्य मार्गों पर स्थित सीएचसी और पीएचसी पर 28 ईसीजी मशीन उपलब्ध कराई गई हैं। जिससे मरीज की हालत का अंदाजा शुरुआती जांच से ही लगाया जा सके।और पढ़ेंTrending Videosजिला अस्पताल ओपीडी में प्रतिदिन दिल के 50 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिला चिकित्सालय की हार्ट यूनिट में करीब डेढ़ वर्ष से हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है लेकिन स्टेमी केयर के माध्यम से हृदयघात के गंभीर मरीजों को जिला चिकित्सालय में तुरंत उपचार की सुविधा मिल सकेगी।विज्ञापनविज्ञापनआपातकालीन कक्ष में स्थापित होगा स्टेमी केयर सेंटरसीएमएस डॉ.संजय वर्मा ने बताया कि आपातकालीन कक्ष में स्टेमी केयर सेंटर की स्थापना होगी। स्टेमी (एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन हृदयघात) की वह स्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली मुख्य धमनियों में से एक पूरी तरह से बंद हो जाती है। इसकी वजह से हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति नहीं मिल पाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को काफी नुकसान पहुंचता है। यह एक आपातकालीन स्थिति होती है। ऐसे हालात में मरीज को समय पर उपचार देने के लिए विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है।इंजेक्शन उपलब्ध, इंस्टॉल की गईं 28 ईसीजी मशीनसीएमओ डॉ.सुनील तेवतिया ने बताया कि प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी के चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टॉफ को स्टेमी हार्ट अटैक से पीड़ित मरीज की पहचान के लिए प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। ऐसे मरीज को मृत्यु का जोखिम अधिक होता है। जिला चिकित्सालय में ऐसे मरीजों के उपचार के लिए स्ट्रेप्टोकाइनेज इंजेक्शन उपलब्ध कराया गया है। बाजार में जिसकी कीमत लगभग 40 हजार रुपये होती है। यह शरीर में रक्त के थक्कों को घोलने और रक्त प्रवाह बहाल करने में मदद करता है।
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May 2, 2026, 06:52 PM
योग जागरूकता और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए 5वीं जिला स्तरीय योगासन प्रतियोगिता

योग जागरूकता और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए 5वीं जिला स्तरीय योगासन प्रतियोगिता

जिला योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन के तत्वाधान में आगामी तीन मई को 5वीं जिला स्तरीय योगासन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता का उद्देश्य जन-जन में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली को प्रोत्साहित करना है।और पढ़ेंTrending Videosएसोसिएशन के सचिव राजन वैदिक ने बताया कि प्रतियोगिता में 10 वर्ष से 55 वर्ष तक के बालक/बालिका एवं पुरुष/महिला प्रतिभाग करेंगे। विभिन्न आयु वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार और सम्मान प्रदान किया जाएगा।विज्ञापनविज्ञापनप्रतिवर्ष जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें विजेता खिलाड़ियों को राज्यस्तरीय और राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलता है। उन्होंने जिले के सभी योग प्रेमियों, खिलाड़ियों और विद्यालयों से अधिक से अधिक प्रतिभाग करने की अपील की।
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May 2, 2026, 06:42 PM
चरखी दादरी जिला स्वास्थ्य विभाग ने नई ऑटोक्लेव मशीनों के साथ संक्रमण नियंत्रण उपायों को उन्नत किया

चरखी दादरी जिला स्वास्थ्य विभाग ने नई ऑटोक्लेव मशीनों के साथ संक्रमण नियंत्रण उपायों को उन्नत किया

चरखी दादरी। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को संक्रमण मुक्त उपचार प्रदान करने के उद्देश्य से दो नई आधुनिक ऑटोक्लेव मशीनें खरीदी गई हैं। इन मशीनों की खरीद पर करीब 10 लाख रुपये की लागत आई है। इनमें से एक मशीन को नागरिक अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर और दूसरी मशीन को स्थानीय एमसीएच यूनिट के लेबर रूम में स्थापित किया जाएगा।और पढ़ेंTrending Videosऑटोक्लेव मशीनों के आने से अस्पताल में किसी भी प्रकार की सर्जरी के दौरान संक्रमण फैलने का खतरा न्यूनतम हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मशीनों को चालू करने के लिए दूसरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।विज्ञापनविज्ञापनबता दें कि अभी तक स्थानीय नागरिक अस्पताल में कम क्षमता वाली ऑटोक्लेव मशीन कार्यरत थी जिसके कारण उपकरणों को कीटाणु मुक्त करने में परेशानी होती थी। वहीं एमसीएच यूनिट में ऑटोक्लेव मशीन नहीं थी। ऐसे में एमसीएच यूनिट के ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को कीटाणु मुक्त करने के लिए बार-बार नागरिक अस्पताल में भेजना पड़ता था। जिससे समय की बर्बादी के साथ-साथ उपकरणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के दौरान उनके दोबारा दूषित होने का भय भी बना रहता था।बता दें कि ऑटोक्लेव मशीन चिकित्सा विज्ञान में उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने के लिए एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती है। यह एक ऐसा उपकरण है जो उच्च दबाव और उच्च तापमान वाली भाप का उपयोग करके सर्जिकल उपकरणों, प्रयोगशाला के बर्तनों और अन्य चिकित्सा उपकरणों पर मौजूद बैक्टीरिया, वायरस, कवक और बीजाणुओं को पूरी तरह नष्ट कर देता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वच्छता का मानक बनाए रखने के लिए मात्र रसायनों से सफाई पर्याप्त नहीं होती, इसलिए ऑटोक्लेव के माध्यम से 121 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर दबाव बनाकर सूक्ष्मजीवों को खत्म किया जाता है। ऑपरेशन में प्रयुक्त उपकरण यदि पूरी तरह कीटाणुरहित होंगे तो संक्रमण की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।बॉक्स :विभाग द्वारा खरीदी गईं ऑटोक्लेव मशीनों के चालू होने के बाद नागरिक अस्पताल और एमसीएच यूनिट इस मामले में आत्मनिर्भर हो जाएंगे। इन मशीनों की क्षमता अधिक होने के कारण बड़े सर्जिकल सेट और विभिन्न प्रकार के इंप्लांट्स को आसानी से और कम समय में कीटाणुमुक्त किया जा सकेगा।वर्सन :विभाग की ओर से 9.96 लाख रुपये की लागत से दो आधुनिक ऑटोक्लेव मशीनें खरीदी गई हैं। एक मशीन को जिला नागरिक अस्पताल तथा दूसरी मशीन को एमसीएच यूनिट के ऑपरेशन थियेटर में स्थापित किया जाएगा। मशीनों को चालू करने के लिए पानी के कनेक्शन आदि की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही दोनों मशीनें काम शुरू कर देंगी। - डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन, दादरी।
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May 2, 2026, 01:30 PM
लेमन वाटरः एक स्वस्थ गर्मियों की आदत

लेमन वाटरः एक स्वस्थ गर्मियों की आदत

(Image Source: AI-Generated) नींबू पानी पीने के अनगिनत फायदे हैं, लेकिन इसका सेवन हमेशा एक सीमित मात्रा में ही करना चाहिए: गर्मियों में रोजाना नींबू पानी पीना बेशक सेहत के लिए एक शानदार विकल्प है। बस चीनी की मात्रा कम रखें और इसे एक सीमित मात्रा में ही पिएं, ताकि आप बिना किसी नुकसान के इसके ढेरों फायदों का पूरा आनंद ले सकें।
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May 2, 2026, 12:42 PM
मिथक को दूर करनाः क्या टमाटर वास्तव में गुर्दे की पथरी का कारण बन सकते हैं?

मिथक को दूर करनाः क्या टमाटर वास्तव में गुर्दे की पथरी का कारण बन सकते हैं?

टमाटर भारतीय किचन का एक जरूरी हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल लगभग हर सब्जी, सलाद और ग्रेवी में किया जाता है। लेकिन अक्सर यह सुनने को मिलता है कि टमाटर खाने से किडनी स्टोन हो सकता है। इसी वजह से कई लोग इसे खाने से डरने लगते हैं, खासकर वे लोग जिन्हें पहले स्टोन की समस्या रह चुकी है। Healthy Nutrition - Just for the Health of itHealthy Nutrition Kidney Detox Veg Capsules with Cranberry Extract | Supports Kidney, Urinary Tract & Fluid Balance | Herbal Detox & Wellness Supplement for Men & Women | 60 Capsules HEALTH VEDA ORGANICS PRIVATE LIMITEDHealth Veda Organics Potassium Citrate 800Mg I 60 Veg Tablets I Support Nerve, Muscle, Joints and Bone Health I Helps Manage Electrolytes | For Both Men & Women AyumcureAyumcure Stoneaway Juice 1L | Ayurvedic Blend with Pashan Bhed, Gokshura, Punarnava & 11+ Herbs | Supports Kidney Stone Removal, Relieves Urinary Irritation & UTI | 100% Natural MERLION NATURALSMerlion Naturals Bhumi Amla Tablets, Phyllanthus niruri, 500mg (120 Tablets) HimalayaHimalaya Punarnava Tablets - 60 count (Pack of 1) InducareInducare GBD Tablets | Ayurvedic Medicine for Gallbladder Stone Relief | Supports Dissolution of Gallstones | Promotes Gallbladder and Liver Health | Pack of 60 Tablets AVP THE ARYA VAIDYA PHARMACY (COIMBATORE) LTDAVP Urojith 100 Capsules, Supports Healthy Urinary System, Relieves Urinary Tract Infections and Urinary Calculi Symptoms दरअसल, टमाटर में ऑक्सलेट नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो कुछ मामलों में किडनी स्टोन बनने से जुड़ा माना जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि टमाटर पूरी तरह नुकसानदायक है। सच यह है कि सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ टमाटर सुरक्षित और फायदेमंद होता है। इसलिए जरूरी है कि इस विषय की सच्चाई को समझा जाए और मिथ और फैक्ट में फर्क किया जाए। ऑक्सलेट एक नेचुरल कंपाउंड है जो कई फूड्स में पाया जाता है, जैसे पालक, चुकंदर और टमाटर। जब शरीर में ऑक्सलेट और कैल्शियम ज्यादा मात्रा में मिलते हैं, तो कुछ लोगों में किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ सकता है। नहीं। ज्यादातर लोगों के लिए टमाटर पूरी तरह सुरक्षित है और हेल्दी भी। अगर आपकी किडनी हेल्दी है और आपको पहले कभी स्टोन की समस्या नहीं हुई है, तो आप सामान्य मात्रा में टमाटर खा सकते हैं। सावधानी का मतलब यह नहीं कि आप टमाटर पूरी तरह छोड़ दें, बल्कि सही मात्रा और सही तरीके से खाएं ताकि फायदा मिले और नुकसान से बचा जा सके। दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं संतुलित डाइट लें ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड से बचें डॉक्टर की सलाह के अनुसार डाइट फॉलो करें नोट:टमाटर खाने से किडनी स्टोन होता है, यह पूरी तरह सही नहीं है। यह सिर्फ एक मिथ है, जब तक कि इसे बहुत ज्यादा मात्रा में या गलत तरीके से नहीं खा रहे। सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ टमाटर आपके लिए फायदेमंद ही है। इसके अलावा किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।
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May 2, 2026, 10:15 AM
वजन घटाने का अवांछित परिणामः ढीली त्वचा

वजन घटाने का अवांछित परिणामः ढीली त्वचा

आज के समय में लोगों के सामने जो सबसे बड़ी समस्या है, उसमें से एक है वजन और इसको कम करना आसान नहीं होता. महीनों की मेहनत, कंट्रोल्ड डाइट और लगातार एक्सरसाइज के बाद जब वजन घटता है, तो यह एक बड़ी उपलब्धि होती है. लेकिन कई लोगों के साथ एक नई परेशानी भी सामने आती है, जैसे ढीली त्वचा. खासकर तब, जब वजन तेजी से कम हुआ हो. पेट, बाजू या जांघों के आसपास त्वचा लटकने लगती है, यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक नैचुरल प्रतिक्रिया है. दरअसल, हमारी त्वचा में कोलेजन और इलास्टिन नाम के प्रोटीन होते हैं. कोलेजन त्वचा को मजबूती देता है, जबकि इलास्टिन उसे खिंचने और फिर वापस अपनी जगह आने की क्षमता देता है. जब वजन बढ़ता है, तो त्वचा लंबे समय तक खिंची रहती है. अगर यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रहे, तो इलास्टिन फाइबर कमजोर पड़ने लगते हैं. ऐसे में जब अचानक वजन कम होता है, तो त्वचा तुरंत सिकुड़ नहीं पाती. डॉ. पंकज चतुर्वेदी, सीनियर कंसल्टेंट और डर्मेटोलॉजिस्ट, मेडलिंक्स बताते हैं कि तेजी से वजन घटने पर त्वचा को अपने पुराने आकार में लौटने का समय नहीं मिल पाता. उम्र, जेनेटिक्स और सूरज की किरणों का असर भी इसमें अहम भूमिका निभाता है. बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कोलेजन बनना कम हो जाता है, जिससे त्वचा की कसावट भी घटती है. कुछ आदतें भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं. जैसे खराब खानपान, स्मोकिंग या शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी. ये सभी चीजें ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करती हैं और त्वचा की रिपेयर प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं. वहीं, बहुत तेजी से वजन कम करना चाहे सर्जरी से हो या एक्सट्रीम डाइट से, यह ढीली त्वचा को ज्यादा दिखने लायक बना देता है. अच्छी बात यह है कि हल्के मामलों में त्वचा समय के साथ खुद भी थोड़ी टाइट हो सकती है, खासकर युवा लोगों में, लेकिन अगर त्वचा लंबे समय तक खिंची रही है या वजन बहुत ज्यादा कम हुआ है, तो सिर्फ प्राकृतिक तरीके काफी नहीं होते. ऐसे में कुछ नॉन-सर्जिकल उपाय मदद कर सकते हैं. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग यानी मसल्स बनाने वाली एक्सरसाइज सबसे असरदार मानी जाती है. इससे शरीर का शेप बेहतर होता है और त्वचा ज्यादा ढीली नहीं दिखती. इसके साथ ही पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना भी जरूरी है, जिससे शरीर कोलेजन बनाने में सक्षम रहे. जो लोग ज्यादा बेहतर और तेज परिणाम चाहते हैं, उनके लिए प्रोफाइलो बॉडी जैसे ट्रीटमेंट एक विकल्प हो सकते हैं. इसमें हाईलूरोनिक एसिड का उपयोग किया जाता है, जो त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है और कोलेजन व इलास्टिन के उत्पादन को बढ़ाता है। इससे त्वचा की कसावट और टेक्सचर में सुधार आता है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.
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May 2, 2026, 09:09 AM
आयकर विवरणी (आई. टी. आर.) 2026 दाखिल करने का महत्वः एक वित्तीय अनुशासन दस्तावेज।

आयकर विवरणी (आई. टी. आर.) 2026 दाखिल करने का महत्वः एक वित्तीय अनुशासन दस्तावेज।

ITR Filing 2026:वित्तीय वर्ष की समाप्ति के साथ ही नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों के बीच इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को लेकर चर्चाएं तेज हो जाती हैं. अक्सर एक बड़ा वर्ग यह मानकर बैठ जाता है कि यदि उनकी कुल आय टैक्स स्लैब के नीचे है या निवेश के बाद उनकी टैक्स देनदारी शून्य (Zero Tax Liability) हो गई है, तो उन्हें रिटर्न दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है. यदि आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो यह आपकी वित्तीय सेहत के लिए एक बड़ी भूल साबित हो सकती है. असल में, ITR फाइल करना केवल सरकार को टैक्स देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आपके वित्तीय अनुशासन और भविष्य की प्लानिंग का एक मजबूत दस्तावेज है. अक्सर देखा जाता है कि आपकी कुल आय भले ही टैक्स के दायरे में न आती हो, लेकिन अलग-अलग माध्यमों से आपका टीडीएस (TDS) काट लिया जाता है. बैंक में रखी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाला ब्याज हो, आपकी सैलरी हो या फिर फ्रीलांसिंग से होने वाली छोटी कमाई, नियम के मुताबिक बैंक या कंपनियां एक निश्चित सीमा के बाद टैक्स काट लेती हैं. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की FD पर साल भर का ब्याज 50,000 रुपये से अधिक है, तो बैंक 10 प्रतिशत टीडीएस काट लेता है. यदि आपने बैंक को अपना पैन (PAN) नहीं दिया है, तो यह कटौती 20 प्रतिशत तक हो सकती है. अब यदि आपकी कुल सालाना आय टैक्स छूट की सीमा से कम है, तो यह कटा हुआ पैसा आपको तभी वापस मिलेगा जब आप ITR फाइल करेंगे. बिना रिटर्न भरे आप इस रिफंड पर अपना दावा नहीं कर सकते. ITR को केवल टैक्स के नजरिए से देखना गलत है. यह आपकी वित्तीय साख (Creditworthiness) का सबसे प्रामाणिक सबूत होता है. जब भी आप भविष्य में घर या कार के लिए बैंक से लोन लेने जाएंगे, तो बैंक सबसे पहले आपसे पिछले तीन सालों का ITR मांगेगा. यह आपकी आय का वह सरकारी प्रमाण है जिस पर बैंक सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं. इतना ही नहीं, यदि आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो कई देशों के दूतावास वीजा आवेदन के समय आपसे ITR की कॉपियां मांगते हैं. यह इस बात का सबूत होता है कि आप अपने देश में एक जिम्मेदार नागरिक हैं और आपकी आर्थिक स्थिति स्थिर है. इसलिए, जीरो टैक्स होने पर भी रिटर्न भरना आपके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलता है. निवेश की दुनिया में उतार-चढ़ाव आम बात है. कई बार शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर घाटा हो जाता है. आयकर नियमों के तहत, यदि आप समय पर ITR फाइल करते हैं, तो आप इस साल हुए घाटे (Capital Loss) को अगले कई सालों तक कैरी-फॉरवर्ड कर सकते हैं. इसका फायदा यह होता है कि भविष्य में जब आपको उन्हीं निवेशों पर मुनाफा होगा, तो पुराने घाटे को उस मुनाफे से ‘सेट-ऑफ’ कर दिया जाएगा, जिससे आपकी टैक्स देनदारी कम हो जाएगी. लेकिन यह सुविधा केवल उन्हीं को मिलती है जो समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल करते हैं. साल 2026 के टैक्स नियमों को देखें तो नए टैक्स रिजीम को काफी आकर्षक बनाया गया है. अब 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है, जबकि 4 से 8 लाख पर 5 प्रतिशत और 8 से 12 लाख पर 10 प्रतिशत की दर तय है. हालांकि, धारा 87A के तहत मिलने वाली रिबेट के कारण 12 लाख रुपये तक की शुद्ध आय वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होता. सैलरीड क्लास के लिए 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ने के बाद यह प्रभावी सीमा 12.75 लाख रुपये तक चली जाती है. वहीं पुराने टैक्स रिजीम में अभी भी 80C, 80D और HRA जैसी छूट बरकरार हैं. भले ही आपकी टैक्स देनदारी शून्य हो रही हो, लेकिन रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने और सरकारी डेटाबेस में अपनी आय को व्यवस्थित करने के लिए Form 26AS और AIS का मिलान करना न भूलें. ये भी पढ़ें-बेटियों के लिए वरदान है ये सरकारी स्कीम! SSY में निवेश से लेकर टैक्स छूट और बंपर रिटर्न तक, जानें सबकुछ टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल TV9 नेटवर्क का प्रमुख हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म है. इस वेबसाइट पर देश-विदेश की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग से पाठकों को रूबरू कराया जाता है. टीवी9 की वेबसाइट tv9hindi.com प्रमुख हिंदी वेबसाइटों में अपना स्थान रखती है. टीवी9 हिंदी का अपना मोबाइल ऐप भी है, जहां टेक्स्ट और वीडियो दोनों माध्यम से खबरें पढ़ीं और देखी जा सकती हैं. टीवी9 वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य, टेक और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसी विविध श्रेणियों में खबरें कवर की जाती हैं. यहां एक्सप्लेनर्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज, वीडियो रिपोर्ट्स और लाइव अपडेट्स मिलते हैं. TV9 नेटवर्क का डिजिटल सेगमेंट तेजी से बढ़ा है और मिलियंस की संख्या में यूनिक यूजर्स तक पहुंचता है.
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May 2, 2026, 08:39 AM
नोएडा में स्वास्थ्य शिविर, आर. आर. टी. एस. कॉरिडोर को मंजूरी, यूपी में मुद्रास्फीति बढ़ी

नोएडा में स्वास्थ्य शिविर, आर. आर. टी. एस. कॉरिडोर को मंजूरी, यूपी में मुद्रास्फीति बढ़ी

यह भी पढ़ें-नोएडा में CM योगी के निर्देश पर लगा मेगा स्वास्थ्य शिविर, 39848 श्रमिकों ने कराई जांच यह भी पढ़ें-गुरुग्राम–फरीदाबाद–नोएडा नमो भारत RRTS कॉरिडोर को मंजूरी, 40 मिनट में पूरा होगा 2 घंटे का सफर; बनेंगे 18 आधुनिक स्टेशन यह भी पढ़ें-यूपी में महंगाई की तगड़ी मार! नोएडा के 40 हजार लोगों को लगा झटका, कमर्शियल और छोटे LPG सिलिंडर के कितने बढ़े दाम?
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Dainik Jagran
May 2, 2026, 05:58 AM
रूमेटॉइड आर्थराइटिसः भारत में बढ़ती चिंता

रूमेटॉइड आर्थराइटिसः भारत में बढ़ती चिंता

यह एक लंबे समय तक चलने वाली सूजन वाली बीमारी है, जो मुख्य रूप से हमारी रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर असर डालती है। भारत में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस बीमारी का पता बहुत देर से चलता है, जिससे यह गंभीर रूप ले लेती है। आइए जानते हैं कि आखिर इसके डायग्नोसिस में इतनी देरी क्यों होती है।
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Aaj Tak
May 2, 2026, 03:39 AM
लौकी का पराठाः एक स्वस्थ और स्वादिष्ट नाश्ता विकल्प

लौकी का पराठाः एक स्वस्थ और स्वादिष्ट नाश्ता विकल्प

लौकी एक हेल्दी सब्जी है, जिसमें कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. लेकिन अक्सर घर में जब लौकी की सब्जी बनती है तो बच्चे ही नहीं, बड़े भी मुंह बनाने लगते हैं. ऐसे में इसी लौकी से कुछ नया और टेस्टी बना दिया जाए तो यही सब्जी सबकी फेवरेट बन सकती है. लौकी का पराठा ऐसा ही हेल्दी और टेस्टी डिश है, जिसे आप आसानी से सुबह के नाश्ते में बना सकते हैं. यह खाने में तो लाजवाब होता ही है, साथ ही इसे बनाना भी काफी आसान है. तो आइए जानते हैं कि लौकी का पराठा कैसे बनाया जाता है और इसके लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. 1 लौकी 2 कटोरी आटा 1 प्याज 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर 1 छोटा चम्मच जीरा 2 बड़े चम्मच कटी हरी धनिया पत्ती तेल जरूरत के मुताबिक नमक स्वादानुसार
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Aaj Tak
May 2, 2026, 01:30 AM
मोरिंगा डोसाः एक स्वस्थ शुरुआत के लिए एक पौष्टिक नाश्ता विकल्प

मोरिंगा डोसाः एक स्वस्थ शुरुआत के लिए एक पौष्टिक नाश्ता विकल्प

अगर आप सुबह के नाश्ते में कुछ हेल्दी, टेस्टी और अलग ट्राई करना चाहते हैं तो मोरिंगा डोसा आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. मोरिंगा की पत्तियों से बना यह डोसा स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. इसमें विटामिन, मिनरल्स और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि आप इसे सुबह की जल्दबाजी में भी आसानी से तैयार कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि मोरिंगा की पत्तियों से हेल्दी और टेस्टी डोसा कैसे बनाया जाता है और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. 1 कप मोरिंगा की पत्तियां 1 कप चावल ½ कप उड़द की दाल 1 चम्मच मेथी 2 सूखी हुई लाल मिर्च नमक स्वादानुसार
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May 2, 2026, 01:30 AM
कम आत्म-महत्व खराब स्वास्थ्य परिणामों से जुड़ा हुआ है

कम आत्म-महत्व खराब स्वास्थ्य परिणामों से जुड़ा हुआ है

(Image Source: AI-Generated) लंबे समय तक खुद को अहमियत न देने का अंजाम उनकी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित होता है। अपनी अनदेखी करने से महिलाओं में तनाव, हर वक्त की थकान, नींद पूरी न होने और हार्मोन के बिगड़ने जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकती, बल्कि कई बार यह डिप्रेशन का रूप भी ले लेती है।
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May 1, 2026, 11:40 PM
ज्येष्ठ माह की शुरुआतः सेवा और पूजा के लिए शुभ, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह

ज्येष्ठ माह की शुरुआतः सेवा और पूजा के लिए शुभ, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह

आज से ज्येष्ठ माह शुरू हो ग या है. ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा तिथि पर नारद जयंती और शनिवार है. ज्येष्ठ माह में स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि ज्येष्ठ मास में जलदान और प्यासे जीवों की सेवा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. इस महीने में पीपल, बरगद और तुलसी की पूजा का महत्व बढ़ जाता है. प्रतिपदा (1 मई 2026, रात 10.52 - 3 मई 2026, सुबह 12.59) आज उतार-चढ़ाव और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, नया काम शुरू करने से बचें. कार्यक्षेत्र में दिक्कतें और निवेश में नुकसान के संकेत हैं, परिवार में मतभेद बढ़ सकते हैं. आज अधिक मेहनत के कारण थकान और स्वास्थ्य परेशानी हो सकती है, वाणी पर नियंत्रण जरूरी है. व्यवसाय में पार्टनर से सावधान रहें और आर्थिक फैसलों में सतर्कता बरतें. दिन सामान्य रहेगा, लेकिन मानसिक तनाव और थकान परेशान कर सकती है. व्यापार में नुकसान की संभावना है, रिश्तों में विवाद से बचें. आज का दिन शुभ है, यात्रा और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिल सकती है. आय में वृद्धि होगी और परिवार में सम्मान बढ़ेगा. आज कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेन-देन में सावधानी रखें. परिवार में मतभेद और धन हानि के योग हैं, सेहत का ध्यान रखें. आज सफलता के योग हैं, नौकरी या व्यापार में लाभ मिल सकता है. परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और स्वास्थ्य सामान्य रहेगा. महत्वपूर्ण कार्य अटक सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है. आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है, धैर्य रखें. भागदौड़ के कारण थकान हो सकती है, लेकिन किसी खास व्यक्ति से लाभ मिलेगा. निवेश से बचें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें. आज स्वास्थ्य बिगड़ सकता है और कार्यक्षेत्र में सतर्क रहने की जरूरत है. आर्थिक नुकसान और पारिवारिक विवाद के संकेत हैं. दिन सामान्य रहेगा, स्वास्थ्य में सुधार होगा लेकिन व्यापार में नुकसान संभव है. नए काम या खरीदारी से बचें और वाणी पर संयम रखें. दिन अच्छा रहेगा, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर सावधानी जरूरी है. निवेश और उधार देने से बचें, परिवार के साथ समय बिताएं. वाहन चलाते समय सावधानी रखें, दुर्घटना का खतरा है. व्यापार में नुकसान और आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है, परिवार का सहयोग मिलेगा. ज्येष्ठ साल का सबसे गर्म महीना होता है, इसलिए इस महीने जल से भरा घड़ा, छाता, जूते आदि का दान जरुर करना चाहिए. नीला रंग शुभ होगा. Rashifal 2 May 2026: वृश्चिक वाले बिजनेस में रिस्क लेने से बचें, कर्क वालों की सुस्ती पड़ेगी भारी, जानें मेष से मीन तक राशिफल जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं. जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं: उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है. जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे. डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है. जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है. उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे: का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं. जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें. अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है. ज्येष्ठ माह में जल से भरा घड़ा, छाता और जूते जैसी वस्तुओं का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 2 मई 2026 को व्यतीपात और त्रिपुष्कर योग बन रहा है। 2 मई 2026 को राहुकाल सुबह 8:59 बजे से सुबह 10:39 बजे तक रहेगा। 2 मई 2026 को विशाखा नक्षत्र है।
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May 1, 2026, 11:19 PM
विटामिन डी और बी12 की कमीः कारण, लक्षण और सुधार

विटामिन डी और बी12 की कमीः कारण, लक्षण और सुधार

आजकलबिना किसी बड़ी बीमारी के भी लोगों में थकान, कमजोरी और बॉडी पेन जैसी शिकायतें कॉमन हो गई हैं। इसकी बड़ी वजह विटामिन D और B12 की कमी हो सकती है। बदलती लाइफस्टाइल, धूप में कम समय बिताना और डाइट में कमी के कारण ये दोनों न्यूट्रिएंट्स शरीर में धीरे-धीरे घटने लगते हैं। वेजिटेरियन लोगों में आमतौर पर B12 की कमी पाई ही जाती है। ऐसे में जानते हैं इसके लक्षण, सही स्तर, डाइट और कब सप्लीमेंट लेना जरूरी है। डेफिशिएंसी होने पर धूप में बैठें और डाइट में बदलाव करें विटामिन B12 की कमी शाकाहारी लोगों में ज्यादा होती है क्योंकि यह मुख्य रूप से मांस, मछली, अंडे और डेयरी में मिलता है। इसे पूरा करने के लिए दूध, दही, पनीर, चीज खाएं। अगर अंडे खाते हैं तो भोजन में शामिल करें। अगर गंभीर रूप से कमी है तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें। विटामिन D की पूर्ति के लिए सबसे जरूरी सोर्स धूप है। इसलिए रोज थोड़ी देर धूप लें। गंभीर लक्षण और कब सप्लीमेंट लेना जरूरी विटामिन D की कमी से बहुत ज्यादा थकान, मूड खराब, शरीर दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है। गंभीर होने पर हड्डियों की समस्या भी हो सकती है। विटामिन B12 डेफिशिएंसी में कमजोरी, ध्यान की कमी और हाथ-पैर में झनझनाहट होती है। अगर सुन्नपन, संतुलन की दिक्कत या खून की जांच में कमी साबित हो जाए या शरीर पोषक तत्व सही से न सोख पाएं, तो डाइट काफी नहीं होती। डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट या इंजेक्शन लेना पड़ सकता है। सामान्य, कमी और जोखिम वाले स्तर विटामिन D अगर 12 ng/mL से कम हो तो डेफिशिएंसी मानी जाती है। 20–50 ng/mL को आमतौर पर पर्याप्त और सामान्य माना जाता है। 50 ng/mL से ऊपर स्तर बढ़ाने की कोशिश बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करनी चाहिए। हाई-डोज सप्लीमेंट लेने से खासतौर पर बचें। वहीं, विटामिन B12 में 200 pg/mL से कम होने को डेफिशिएंसी माना जाता है। 200–300 pg/mL बीच होने पर जांच और टेस्ट की सलाह दी जाती है। 300 pg/mL से ज्यादा सामान्य माना जाता है। रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं। @consciouslivingtips
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May 1, 2026, 08:14 PM
रोहतक की भीषण गर्मीः हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन के लिए आहार में बदलाव महत्वपूर्ण

रोहतक की भीषण गर्मीः हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन के लिए आहार में बदलाव महत्वपूर्ण

और पढ़ेंTrending Videosरोहतक। जिले में पारा 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। झुलसाती गर्मी व भीषण लू ने जनजीवन को भी प्रभावित किया है। इस मौसम में केवल बाहर निकलने से बचना ही काफी नहीं है बल्कि अपनी डाइट में बड़े बदलाव करना भी बेहद जरूरी है।लापरवाही से पेट में इंफेक्शन व नाक से खून बहने का खतरा रहता है। ये बातें पीजीआई में कार्यरत डायटीशियन डॉ. पूनम कथूरिया ने कहीं।------हाइड्रेशन व इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलनडॉ. पूनम कथूरिया ने बताया कि नमी में शरीर से पसीने के रूप में पानी व जरूरी लवण निकल जाते हैं। ऐसे में शरीर के अंदर इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने के लिए केवल सादा पानी काफी नहीं है। अपनी दिनचर्या में नींबू पानी, ताजी छाछ, पुदीना शरबत व नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों को शामिल करना चाहिए। ये शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ शरीर को अंदरूनी ठंडक भी देंगे।विज्ञापनविज्ञापन----हल्का और सुपाच्य भोजन लेंगर्मियों में पाचन तंत्र संवेदनशील हो जाता है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन ही करें। खीरा, ककड़ी, टमाटर, लौकी, जामुन, तरबूज व खरबूजा। ये फल व सब्जियां पानी से भरपूर हैं। इनका सेवन करें।------चाय व कॉफी से एसिडिटी का खतराडॉ. पूनम कथूरिया ने बताया कि तले हुए, अत्यधिक मसालेदार व बासी भोजन से दूरी बनाएं। चाय व कॉफी का अधिक सेवन एसिडिटी बढ़ा सकता है। इसलिए इनके स्थान पर सत्तू या आम पन्ना का उपयोग करें। ज्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना हीट स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है। इनसे उल्टी, पेट में इंफेक्शन, नाक से खून बहना, दस्त व हीट स्ट्रोक व माइग्रेन का खतरा रहता है।--------संक्रमण से बचाव के लिए नुस्खेडॉ. पूनम कथूरिया ने बताया कि बाजार में पहले से काटकर रखे गए फल व रेडीमेड भोजन पेट के संक्रमण का मुख्य कारण बनते हैं। हमेशा ताजा बना खाना ही खाएं। पाचन शक्ति व इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डाइट में दही, मुनक्का, इलायची, जीरा व सौंफ का प्रयोग करें।
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