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Feb 3, 2026, 01:37 PM
उपायुक्त का प्राकृतिक कृषि प्रयोग स्वस्थ जीवन शैली को प्रेरित करता है

उपायुक्त का प्राकृतिक कृषि प्रयोग स्वस्थ जीवन शैली को प्रेरित करता है

बोले, जहर-मुक्त खेती के लिए प्राकृतिक खेती से उगा भोजन बेहतर विकल्पऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसंवाद न्यूज एजेंसीऊना। ऊना के उपायुक्त जतिन लाल ने अपने सरकारी आवास की क्यारी में प्राकृतिक खेती से उगी सब्जियों के माध्यम से एक सशक्त संदेश दिया है। जतिन लाल ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सोच को न केवल अमल में उतारा, बल्कि अपने घर की मिट्टी में बोकर इसे एक जीवंत उदाहरण में बदल दिया। उनके आवास परिसर में गोभी, चुकंदर, टमाटर, मूली, प्याज, शलगम, लहसुन, हरा धनिया, आलू सहित कई सब्जियां पूरी तरह प्राकृतिक विधि से उगाई गई हैं। उपायुक्त जतिन लाल का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली की असली शुरुआत थाली से होती है और ज़हर-मुक्त खेती इसका सबसे बेहतर विकल्प है। प्राकृतिक खेती से उगा भोजन स्वास्थ्य के लिए बेहतर होने के साथ स्वाद में भी कहीं अधिक समृद्ध होता है। मिट्टी में बसी ताजगी और क्यारियों से उठती सौंधी खुशबू यह संकेत देती है कि यह पहल केवल व्यक्तिगत प्रयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक नेतृत्व के माध्यम से समाज को दिशा देने का प्रेरक प्रयास है।आत्मा परियोजना निदेशक प्यारो देवी ने बताया कि ऊना जिले में 1,907 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। जिले के 48,006 किसानों में से 14,240 किसान प्रशिक्षण लेकर इस पद्धति से जुड़े हैं और अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय किया है। प्राकृतिक गेहूं का एमएसपी 60 रुपये प्रति किलो और मक्की का 40 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को सीधे लाभ पहुंच रहा है।विज्ञापनविज्ञापन
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Feb 3, 2026, 01:34 PM
विश्व कैंसर दिवसः जीवन शैली में बदलाव और कैंसर की रोकथाम के लिए जागरूकता पर जोर

विश्व कैंसर दिवसः जीवन शैली में बदलाव और कैंसर की रोकथाम के लिए जागरूकता पर जोर

विश्व कैंसर दिवस...और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंबदलती जीवनशैली बढ़ा रही कैंसर, जागरूकता ही बचाव की पहली सीढीसौम्या गुप्तागुरुग्राम। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और तनाव के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आज विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर उन लोगों की कहानियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने समय पर इलाज और मजबूत इच्छाशक्ति और हौसलों के दम पर कैंसर को मात दी और आज सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू, शराब, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी कैंसर का खतरा बढ़ा रही है। ऐसे में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं जागरूकता अभियान चलाकर मरीजों की मदद के लिए आगे आ रही हैं। समय पर जांच और सकारात्मक सोच से कैंसर को हराया जा सकता है।विज्ञापनविज्ञापनसंस्था कर रहीं मददराइट टू लाइफ फाउंडेशन हरियाणा उच्चतर माध्यमिक शिक्षा विभाग और केंद्रीय विद्यालय संगठन के साथ एमओयू के तहत कार्य कर रही है। इस पहल के अंतर्गत अब तक एक लाख से अधिक छात्रों और माताओं को कैंसर जागरूकता से जोड़ा है। एचपीवी वैक्सीनेशन ड्राइव के जरिए सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम पर जोर दिया जा रहा है।----भरोसे और हिम्मत ने बनाया मजबूतमुझे ओरल कैंसर था, जिसका पता कुछ देरी से चला था। बीमारी के कठिन दौर में मेरे परिवार ने मेरा पूरा साथ दिया। उनके भरोसे और हिम्मत ने मुझे मजबूत बनाया। परिवार से मिली उम्मीद और सकारात्मक सोच के कारण ही मैं कैंसर को मात दे सका और आज सामान्य जीवन जी रहा हूं। -आलोक कुमारमुझे वर्ष 2016 में ब्रेस्ट कैंसर हुआ था, जिसकी पहचान गंभीर स्थिति में हुई। उस कठिन समय में मैंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार इलाज कराती रही। डॉक्टरों और परिवार के सहयोग से आज मैं कैंसर को मात देकर एक सामान्य और स्वस्थ जिंदगी जी पा रही हूं। -सुमन-----हमारी संस्था राइट टू लाइफ कैंसर पीड़ितों को जागरूक करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। जागरूकता अभियानों के साथ जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है ताकि वे समय पर इलाज करा सकें।-डाॅ. रतनालाल तुलसी, प्रीवेंटिव आनकोलाॅजिस्टआज के समय में बदलती जीवनशैली के कारण पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर हो गया है। वैसे प्रोस्टेट कैंसर में मृत्यु दर कम होती हैं लेकिन फिर भी समय पर जांच कर थेरेपी के जरिये ठीक किया जा सकता है।--डाॅ. पुनीत अहलूवालिया, यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट
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Feb 3, 2026, 12:54 PM
मूक हत्याराः मधुमेह के लक्षणों और परिणामों को समझना

मूक हत्याराः मधुमेह के लक्षणों और परिणामों को समझना

Diabetes Symptoms:आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ते लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज एक बेहद आम लेकिन गंभीर समस्या बन गई है। इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि कई बार इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें पहचान ही नहीं पाते। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी, आंखों और दिल को नुकसान पहुंचा सकती है। अब ऐसे में डायबिटीज के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और डायबिटीज मरीजों को क्या खाना चाहिए? आइए जानते हैं। जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित होने लगता है, तो हमारा शरीर कुछ खास संकेत देने लगता है। यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डायबिटीज के मरीजों को मीठे और हाई कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से दूरी बनानी चाहिए। ये भी पढ़ें -Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण से पहले जरूर करें ये 4 काम, वरना होगा भारी नुकसान; जान लें नियम
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Feb 3, 2026, 12:49 PM
कांग्रेस ने सेवनिया गोंड निर्वाचन क्षेत्र में पुराने मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया

कांग्रेस ने सेवनिया गोंड निर्वाचन क्षेत्र में पुराने मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया

विस्तारFollow Usराजधानी भोपाल के दक्षिण‑पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के सेवनिया गोंड में कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि फॉर्म‑7 का दुरुपयोग कर कुछ पुराने मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में कांग्रेस नेताओं ने टीटी नगर एसीपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाई। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम मतदाता अधिकार पर हमला है और सभी नागरिकों के मतदान अधिकार की रक्षा करना जरूरी है। शिकायत के माध्यम से कांग्रेस ने अधिकारियों से कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंलोकतंत्र की रक्षा की लड़ाईपूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि हमने बूथ क्रमांक 12 और 13 के मतदाताओं के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। यह लड़ाई सिर्फ कुछ नाम बचाने की नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है। किसी भी कीमत पर जनता की आवाज दबाने नहीं दी जाएगी।विज्ञापनविज्ञापनयह भी पढ़ें-मोबाइल-लाइफस्टाइल से बिगड़ रही बच्चों की थायराइड ग्रंथि, युवाओं में तेजी से बढ़ा हाइपोथाइरॉएडिज्मवैधानिक अधिकारों का उल्लंघनजिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। हम निगरानी करेंगे कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। कांग्रेस पार्षद योगेन्द्र सिंह गुड्डू चौहान: “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि मतदाता अधिकारों को कोई भी प्रभावित न कर सके। हर नागरिक को अपने मतदान अधिकार का इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है। इस अवसर पर विधानसभा क्षेत्र के कई अन्य कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो कांग्रेस सभी लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष जारी रखेगी और मतदाता अधिकारों की रक्षा करेगी।यह भी पढ़ें-एक माह बाद भी जांच ठप, SIT कार्यालय पहुंचे कांग्रेसी, आरोप-महापौर और अफसरों को बचाया जा रहा
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Feb 3, 2026, 12:11 PM
बच्चों और युवाओं में थायराइड स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँः आधुनिक जीवन शैली का प्रभाव

बच्चों और युवाओं में थायराइड स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँः आधुनिक जीवन शैली का प्रभाव

विस्तारFollow Usमोबाइल पर घंटों बिताया जाने वाला समय, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लगातार मानसिक तनाव अब बच्चों और युवाओं की थायराइड सेहत पर भारी पड़ने लगा है। शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल की नोडल अधिकारी डॉ. जूही गुप्ता ने बताया कि बच्चों में थायराइड ग्रंथि की अस्मिता और अनियमितताएं तेजी से सामने आ रही हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले हाइपोथाइरॉएडिज्म के हैं। इसी बढ़ती चुनौती को देखते हुए आयुष मंत्रालय भारत सरकार और शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल द्वारा हाइपोथाइरॉएडिज्म का विशेषज्ञ उपचार केंद्र शुरू किया गया है। यहां होम्योपैथी के साथ योग, आहार चिकित्सा और प्राकृतिक पद्धतियों के जरिए रोग की जड़ पर काम किया जा रहा है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंविज्ञापनविज्ञापनथायराइड हार्मोन में असंतुलन की यह है बड़ी वजहडॉ. जूही गुप्ता के अनुसार आज का युवा वर्ग शारीरिक रूप से निष्क्रिय होता जा रहा है। बैठे-बैठे काम करना, लगातार मोबाइल में लगे रहना और दिमाग को पर्याप्त आराम न मिलना थायराइड हार्मोन में असंतुलन की बड़ी वजह बन रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे सोते समय भी मानसिक रूप से मोबाइल से जुड़े रहते हैं, जिससे हार्मोनल वेरिएशन बढ़ रहा है और धीरे-धीरे कई बीमारियां शरीर में स्थापित हो रही हैं।यह भी पढ़ें-मोहन यादव ने कहा- केंद्रीय बजट में है भविष्य की संभावनाएं, 18 को आएगा एमपी का बजटपहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए तो कंट्रोल संभवउपचार से पहले प्रत्येक मरीज का बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस किया जाता है, जिससे व्यक्ति-विशेष के अनुसार उपचार योजना बनाई जा सके। यही कारण है कि बड़ी संख्या में मरीज इस केंद्र से लाभ ले रहे हैं।डॉ. जूही गुप्ता ने बताया कि यदि हाइपोथाइरॉएडिज्म की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए तो केवल होम्योपैथी उपचार से ही बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में एलोपैथिक दवाओं को सहायक रूप में शामिल किया जाता है, लेकिन पहले से चल रही दवाओं को बिना विशेषज्ञ सलाह के बंद नहीं किया जाता।यह भी पढ़ें-एक माह बाद भी जांच ठप, SIT कार्यालय पहुंचे कांग्रेसी, आरोप-महापौर और अफसरों को बचाया जा रहामहिलाओं में भी बढ़ी बीमारीविशेषज्ञों के अनुसार हाइपोथाइरॉएडिज्म केवल वजन बढ़ने की समस्या नहीं है। महिलाओं में यह अनियमित माहवारी के रूप में सामने आता है, जबकि बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास पर इसका सीधा असर पड़ता है। लंबे समय तक अनदेखी करने पर डायबिटीज, मोटापा और अन्य हार्मोनल रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बीमारी का इलाज कम उम्र में शुरू कर दिया जाए तो इसके दीर्घकालिक और अनुवांशिक प्रभावों को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।
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Feb 3, 2026, 11:55 AM
एक संतुलित जीवन के लिए एक प्राकृतिक दैनिक दिनचर्या को अपनाना

एक संतुलित जीवन के लिए एक प्राकृतिक दैनिक दिनचर्या को अपनाना

Natural Lifestyle Benefits:भागदौड़ भरी जिंदगी में हम खुद का ख्याल रखना ही भूल जाते हैं और अक्सर अपने शरीर और मन की जरूरतों को इग्नोर कर देते हैं. साथ ही अनजाने में अनहेल्दी आदतों को अपना लेते हैं. इनमें देर रात तक जागना, इरेगुलर ईटिंग हैबिट्स, घंटों तक मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल करना और लगातार स्ट्रेस शामिल है, इन सारी बुरी आदतें धीरे-धीरे हमारी सेहत पर असर डालती है. हालांकि अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव कर आप खुद में बदलाव कर सकते हैं. ऐसे समय में नेचुरल डेली रूटीन हमें फिर से बैलेंस्ड लाइफ जीने में मदद कर सकती है. आपको बता दें, 'प्राकृतिक दिनचर्या' में कोई कठिन नियम नहीं आते, बल्कि यह नेचर की लय के साथ जीने का एक तरीका है. नेचुरल डेली रूटीन की शुरुआत कब और कैसे होती है?प्राकृतिक दिनचर्या की शुरुआत सुबह से होती है. सूरज उगने से पहले उठना तन और मन दोनों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. इस समय वातावरण शांत और शुद्ध होता है, जिससे मन एकाग्र रहता है. सुबह उठकर कुछ देर टहलना, योग करना, प्राणायाम या ध्यान करना पूरे दिन के लिए ऊर्जा और सकारात्मकता देता है. यह समय खुद से जुड़ने और दिन की योजना बनाने के लिए भी सबसे अच्छा होता है. नेचुरल डेली रूटीन के अहम हिस्से क्या-क्या हैं?शरीर की प्राकृतिक जरूरतों का सम्मान करना भी प्राकृतिक दिनचर्या का अहम हिस्सा है. भूख लगे तो खाना, नींद आए तो सोना और शौच-मूत्र को न रोकना जैसी छोटी-छोटी बातें दिखने में साधारण लगती हैं, लेकिन इन्हीं से अच्छा स्वास्थ्य बनता है. इन्हें बार-बार रोकने से शरीर में कई तरह की परेशानियां पैदा हो सकती हैं. स्वस्थ शरीर और मन के लिए कौन सी नेचुरल डेली रूटीन अपनाना जरूरी हैं?साफ-सफाई पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है. रोज सुबह और रात दांत साफ करना, जीभ की सफाई करना, नहाना और साफ कपड़े पहनना न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को भी तरोताजा करता है. तेल से हल्की मालिश करने से शरीर की थकान दूर होती है और रक्तसंचार बेहतर होता है. यह एक तरह से खुद को समय देने का सुंदर तरीका है. हेल्दी रहने के लिए कैसे और कब भोजन करना चाहिए?भोजन के मामले में प्राकृतिक दिनचर्या हमें सादगी सिखाती है. समय पर, जरूरत के अनुसार और पौष्टिक भोजन करना चाहिए. बहुत ज्यादा तला-भुना, जंक फूड या देर रात खाना शरीर को भारी और सुस्त बना देता है. मौसम और अपनी क्षमता के अनुसार भोजन चुनना ही समझदारी है. पानी भी समय-समय पर पीते रहना चाहिए, न बहुत कम और न ही जरूरत से ज्यादा. एक्सरसाइज और अच्छी नींद का बैलेंस क्यों जरूरी है?शारीरिक गतिविधि और विश्राम, दोनों का संतुलन बहुत जरूरी है. रोज थोड़ा-बहुत व्यायाम शरीर को मजबूत बनाता है, वहीं रात में 6 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर और दिमाग को पूरी तरह आराम देती है. दिन में बार-बार सोने की आदत से बचना चाहिए, जब तक कि शरीर इसकी मांग न करें.--आईएएनएस Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत या स्किन से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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Feb 3, 2026, 11:54 AM
पी. एफ. आर. डी. ए. ने एन. पी. एस. अभिदाताओं के लिए'स्वास्थ्य पेंशन योजना'शुरू की

पी. एफ. आर. डी. ए. ने एन. पी. एस. अभिदाताओं के लिए'स्वास्थ्य पेंशन योजना'शुरू की

विस्तारFollow Usपेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के मौजूदा सब्सक्राइबर्स के लिए 'स्वास्थ्य पेंशन स्कीम' प्रारंभ की है। खास बात है कि सब्सक्राइबर्स के अलावा, कोई भी भारतीय नागरिक अपनी मर्जी से 'स्वास्थ्य पेंशन स्कीम' के साथ जुड़ सकते हैं। इस योजना से उन लोगों को फायदा होगा, जो अपनी सेवानिवृत्ति की बचत के साथ-साथ, मेडिकल खर्च के लिए एक सुरक्षित फंड बनाना चाहते हैं। इस योजना के जरिए, एनपीएस सब्सक्राइबर्स को अस्पताल में भर्ती होने और बिना भर्ती हुए इलाज पर जो राशि खर्च होती है, उसकी भरपाई हो सकेगी। पीएफआरडीए ने 'स्वास्थ्य पेंशन स्कीम' में पैसे जमा करने और निकलवाने के नियमों को सरल बनाया है। इसका मकसद, बीमारी के दौरान, सब्सक्राइबर्स को पैसे के लिए चक्कर न काटने पड़ें। पीएफआरडीए द्वारा इस बाबत गत सप्ताह ही सर्कुलर जारी किया गया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रारंभ में इस योजना को एक छोटे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर विशेष सैंडबॉक्स सिस्टम में टेस्ट किया जा रहा है। इस योजना में लोगों का मेडिकल खर्च, 'नेशनल पेंशन सिस्टम' से जुड़ जाता है। इसमें लोगों को दोहरा फायदा मिलता है। एक, वे इसके जरिए पैसा बचा सकते हैं। दूसरा, बीमारी के दौरान लोगों के लिए इस राशि से अस्पताल के बिलों का भुगतान करना भी आसान हो जाएगा। पीएफआरडीए के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य भारतीय नागरिकों के लिए स्वास्थ्य देखभाल को आसान, सुरक्षित व पारदर्शी बनाना है। एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना को, एनपीएस के अंतर्गत एक विशिष्ट क्षेत्र योजना के रूप में शुरू किया जाएगा। इसका मकसद उद्देश्य बहु-योजना ढांचा (एमएसएफ) के तहत बाह्य रोगी और आंतरिक रोगी के चिकित्सा खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना अंशदायी पेंशन योजना होगी, जो पीएफआरडीए अधिनियम की धारा 12(1)(क) और धारा 20 के प्रावधानों द्वारा शासित होगी। इसे भारत के नागरिकों को स्वैच्छिक आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।विज्ञापनविज्ञापनयह योजना पेंशन निधियों (पीएफ) द्वारा प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के अधीन, केवल एक अवधारणा प्रमाण (प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट) के रूप में, सीमित अवधि के लिए शुरू की जाएगी। ये स्कीम, नियामक सैंडबॉक्स ढांचे के तहत एक नियंत्रित वातावरण में संचालित होगी। पीएफएस इस तरह के पीओसी को पूरा करने के लिए फिनटेक और अन्य ऐसी संस्थाओं के साथ भी सहयोग कर सकते हैं। इस पीओसी के प्रयोजन के लिए, पीएफआरडीए (एनपीएस के तहत निकास और निकासी) विनियम, 2015 के प्रावधानों को नियामक सैंडबॉक्स ढांचे के तहत आसान बनाया गया है। एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना कुछ शर्तों के अनुसार संचालित होगी।यह योजना प्रारंभ में पीएफ द्वारा सीआरए और एचबीए/टीपीए के सहयोग से एक सीमित अवधि और सीमित संख्या में ग्राहक पंजीकरण के साथ अवधारणा के प्रमाण के रूप में शुरू की जाएगी। अवधारणा प्रमाण अवधि पूरी होने पर, यदि योजना की व्यवहार्यता/संभाव्यता स्थापित नहीं हो पाती है, तो अवधारणा प्रमाण अवधि के दौरान नामांकित ग्राहकों को एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना खाते से सामान्य योजना खाते में अपनी संचित राशि स्थानांतरित करने और उसके बाद पीएफआरडीए (एनपीएस के तहत निकासी और निकास) विनियम, 2015 के अनुसार योजना से बाहर निकलने का विकल्प दिया जाएगा।पात्रता:भारत का कोई भी नागरिक, एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना में शामिल होने के लिए पात्र है। यदि पहले से कोई साझा खाता (कॉमन स्कीम अकाउंट) नहीं है, तो एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना खाते के साथ एक साझा खाता (कॉमन स्कीम अकाउंट) खोलना अनिवार्य होगा।शुल्क और प्रभार:योजना के अंतर्गत लागू शुल्क और प्रभार, एमएसएफ द्वारा निर्धारित होंगे। इन्हें पारदर्शी तरीकों से सार्वजनिक किया जाएगा। इन प्रभारों में एचबीए को देय प्रभार भी शामिल होंगे।योगदान:अभिदाताओं को एनपीएस के अंतर्गत गैर-सरकारी क्षेत्र पर लागू मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना में किसी भी राशि का अंशदान करने की अनुमति होगी।अंशदान का निवेश:योजना के अंतर्गत, अंशदान पेंशन निधियों द्वाराएमएसएफ के तहत निर्धारित निवेश दिशानिर्देशों के अनुसार निवेश किया जाएगा।साझा योजना खाते से अंशदान का हस्तांतरण:40 वर्ष से अधिक आयु के ग्राहक (सरकारी क्षेत्र और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों के ग्राहकों को छोड़कर) अपने स्वयं के और/या कर्मचारी अंशदान का 30% तक सामान्य योजना खाते से एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना खाते में स्थानांतरित कर सकते हैं।चिकित्सा व्यय के लिए आंशिक निकासी:ग्राहक, बाह्य रोगी या अस्पताल में भर्ती होने वाले चिकित्सा व्ययों को पूरा करने के लिए अपने एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना खाते से आंशिक निकासी कर सकते हैं। किसी भी परिस्थिति में, पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार, स्कीम में किए गए अभिदाता के अपने अंशदान का25 प्रतिशत तक की निकासी की अनुमति होगी। आंशिक निकासी की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा और कोई न्यूनतम प्रतीक्षा अवधि लागू नहीं होगी। बशर्ते कि पहली आंशिक निकासी, केवल योजना के तहत ₹50,000 के न्यूनतम कोष के संचय होने के बाद ही अनुमति दी जाएगी।गंभीर चिकित्सा उपचार के लिए:यदि किसी रोगी का अस्पताल में भर्ती होने पर चिकित्सा व्यय, ग्राहक के एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना खाते में उपलब्ध कुल राशि के 70% से अधिक हो जाता है, तो ग्राहक को अपनी कुल राशि की परवाह किए बिना, केवल चिकित्सा व्यय की पूर्ति के लिए 100% राशि के साथ समय से पहले निकासी करने की अनुमति दी जाएगी।दावों का निपटान:निकाली गई राशि, वैध दावों और सहायक बिलों के आधार पर, संबंधित एचबीए/टीपीए को सीधे भेजी जाएगी। चिकित्सा व्यय के निपटान के बाद बची हुई कोई भी अतिरिक्त राशि, ग्राहक के सामान्य योजना खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।अन्य मामलों में निकासी:अन्य सभी मामलों में, एनपीएस के तहत सभी नागरिकों पर लागू निकासी प्रावधान, जिनमें सामान्य और समय से पहले निकासी शामिल है, एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना खाते से सामान्य योजना खाते में संचित राशि के हस्तांतरण पर लागू होंगे।शिकायत निवारण तंत्र:ग्राहक सेवा प्रदाता (पीएफ), एचबीए/टीपीए के सहयोग से, ग्राहकों की शिकायतों के समय पर और प्रभावी समाधान को सुनिश्चित करने के लिए एक सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करेंगे। शिकायत निवारण की जिम्मेदारी पीएफ की होगी। ग्राहक सेवा प्रदाता (सीआरए) कुशल सेवा और शिकायत निवारण को सुगम बनाने के लिए आवश्यक ग्राहक-स्तरीय जानकारी प्रदान करेंगे।डेटा साझाकरण और सहमति:दावा प्रक्रिया के लिए आवश्यक ग्राहक-स्तरीय डेटा, लागू होने के अनुसार, एचबीए/टीपीए या अस्पताल के साथ साझा किया जाएगा। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 और उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के अनुपालन में, एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना को सक्रिय करते समय पीएफ या सीआरए द्वारा ग्राहक से स्पष्ट डिजिटल सहमति प्राप्त की जाएगी।
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Feb 3, 2026, 11:25 AM
सूर्य ग्रहण 2026: वलयाकार'रिंग ऑफ फायर'ग्रहण राशि चिन्हों को प्रभावित करता है, ज्योतिषीय नियम लागू होते हैं

सूर्य ग्रहण 2026: वलयाकार'रिंग ऑफ फायर'ग्रहण राशि चिन्हों को प्रभावित करता है, ज्योतिषीय नियम लागू होते हैं

Surya Grahan 2026:ज्येतिष और विज्ञान दोनों की दृष्टि से सूर्य ग्रहण को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं साल 2026 का सबसे पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने जा रहा है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' भी कहा जाता है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, जिससे यहां 'सूतक काल' के कड़े नियम लागू नहीं होंगे, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। अब ऐसे में सूर्य ग्रहण से पहले कुछ ऐसे काम हैं, जिसे करने से उत्तम परिणाम मिल सकते हैं। आइए जानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान निकलने वाली किरणें भोजन और पानी को दूषित कर सकती हैं। ग्रहण शुरू होने से पहले ही घर में रखे दूध, दही, पके हुए भोजन और पीने के पानी में तुलसी के पत्ते डाल दें। माना जाता है कि तुलसी में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है, जिससे भोजन शुद्ध बना रहता है। भले ही ग्रहण भारत में न दिखे, लेकिन गर्भवती महिलाओं को मानसिक शांति और सुरक्षा के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान नुकीली चीजों जैसे– कैंची, चाकू या सुई का प्रयोग न करें। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से पहले ही खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लें और इस दौरान हनुमान चालीसा या अपने इष्ट देव का मंत्र जाप करें। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि में लगने जा रहा है, जहां सूर्य और राहु की युति 'ग्रहण योग' बना रही है। इसका सीधा असर व्यक्ति के स्वभाव और वाणी पर पड़ता है। ग्रहण से पहले और उस दौरान विवादों से बचने का संकल्प लें। किसी भी महत्वपूर्ण निवेश या बड़े व्यावसायिक फैसले को इस समय टाल देना ही समझदारी है, अन्यथा आर्थिक नुकसान हो सकता है। ये भी पढ़ें -Korean Skin Care Secrets: क्या है कोरियन गर्ल्स की बेदाग स्किन का राज, घर बैठे ऐसे पाएं ग्लास स्किन का फॉर्मूला ग्रहण के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए दान का विशेष महत्व है। ग्रहण शुरू होने से पहले दान की जाने वाली वस्तुएं जैसे गुड़, लाल मसूर या काले तिल अलग निकाल कर रख दें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके इन वस्तुओं का दान किसी जरूरतमंद को करें।
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Feb 3, 2026, 10:11 AM
दाल फिरा की खोजः एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक पारंपरिक नाश्ता

दाल फिरा की खोजः एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक पारंपरिक नाश्ता

आज के समय में हेल्दी स्नैक ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। ज्यादातर स्नैक्स या तो डीप फ्राइड होते हैं या फिर ज्यादा तेल और मैदा से बने होते हैं, जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में दाल फरा एक ऐसा पारंपरिक देसी स्नैक है, जो स्वाद और सेहत - दोनों का परफेक्ट बैलेंस देता है। खास बात है कि इसे ना तो डीप फ्राई किया जाता है और ना ही इसमें ज्यादा तेल की जरूरत होती है। PANCAPANCA 15 liter Stainless Steel Multi Purpose Kadai with Steel Lid, Idli Maker 2 Idli Plate 8 Cavity Idli Cooker Stainless Steel Idly Pot with Steamer COOKWELLCookwell Multipurpose Cook Kettle With 1.5L Nonstick Inner Pot, Stainless Steel Mess, Idli Stand, Stainless Steel Steamer, Egg Tray (600W) CELLOCello Magna Stainless Steel Multipurpose Kadai Idli Cooker, Includes 2 Plates & Glass Lid | Perfect for Frying, Sauteing, Roasting, Preparing Sabjis, Idli, Dhokla, Pasta, Momos | Dishwasher Safe | All-in-One Kadhai Cooker The Indus ValleyThe Indus Valley Stainless Steel Idli Maker/Momo Maker/Multi Kadai/Steamer Set|Large, 5 Plates, 2 Idli|2 Dhokla|1 Steamer|29Cm/11.3 Inch, 4.2Ltr, 2.5Kg|3-Layer Thick Bottom|Induction Friendly CELLOCello Stainless Steel Induction Base Idli Cooker and Multi Kadhai Set of 6, Silver, 5 Liter | Compatible with Gas Stove & Induction | Ideal for Dhokla, Patra, Idli and Momos The Indus ValleyThe Indus Valley Stainless Steel Idli Maker/Pot | 2 Plates | 4.5 Litre Nonstick 3-Layer Bottom | Induction Friendly, 100% Pure & Toxin-Free TosaaTOSAA STAINLESS STEEL IDLI 4 * 3 PLATES (12 IDLIS) COMPACT IDLI MAKER - HEALTHY COOKING, STEAM FRESH IDLIS EVERY TIME KomalKomal Stainless Steel Idly Stand Suitable for Outer Lid Cooker,4x3 Plates,Silver छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश की यह लोकप्रिय रेसिपी उबली और पीसी हुई दाल से तैयार की जाती है और इसे तलने के बजाय स्टीम किया जाता है। यही वजह है कि यह पेट पर हल्का, आसानी से पचने वाला और पोषण से भरपूर होता है। चाहे वजन कम करना हो, शाम की भूख को कंट्रोल करना हो या बच्चों के लिए हेल्दी ऑप्शन ढूंढना हो - दाल फरा हर लिहाज से एक बेहतरीन विकल्प है। जानें इसकी सिंपल और स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी - बाहरी परत के लिए:चावल का आटा – 1 कप, नमक – स्वादानुसार, गरम पानी – गूंथने के लिए भरावन (स्टफिंग) के लिए:चना दाल – ½ कप (भिगोई हुई), लहसुन – 4–5 कलियां, अदरक – 1 इंच, हरी मिर्च – 1–2, जीरा – 1 छोटा चम्मच, हल्दी – ½ छोटा चम्मच, नमक – स्वादानुसार, हरा धनिया – बारीक कटा
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Feb 3, 2026, 09:37 AM
ओ + रक्त समूह की 5 विशेषताओं का अनावरणः एक विशिष्ट प्रोफाइल

ओ + रक्त समूह की 5 विशेषताओं का अनावरणः एक विशिष्ट प्रोफाइल

5 Speciality of O+ Blood Group : हम सभी का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होता है और यह हमारी फिजिकल स्पेशलिटी और सेहत पर असर डाल सकता है. अलग-अलग ब्लड ग्रुप्स के अपने-अपने फायदे और कमियां होती हैं. आज हम बात करेंगे O+ ब्लड ग्रुप के बारे में, जो दुनिया भर में सबसे आम है. O+ ब्लड ग्रुप के लोगों में कुछ विशेष गुण होते हैं, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाते हैं. आइए आज के इस आर्टिकल में बात करें O+ ब्लड ग्रुप वालों की साथ ही जानें उनकी 5 खासियतें.O+ ब्लड ग्रुप वालों की 5 खासियत (5 Speciality of O+ Blood Group)1. पॉसिटिव एनर्जी से भरे होते हैं O+ ब्लड ग्रुप वाले :O+ ब्लड ग्रुप के लोग आमतौर पर ज्यादा एक्टिव और एनर्जेटिक होते हैं. उनका मेटाबोलिज्म भी काफी तेज होता है, जो उन्हें फिजिकली और मेंटली एक्टिव बनाए रखता है. इस ब्लड ग्रुप के लोग हर काम में उत्साह और जोश से भरपूर रहते हैं. चाहे दिनभर की मेहनत हो या किसी चुनौती का सामना, O+ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में कभी थकान नहीं दिखती. यही कारण है कि ये लोग अक्सर अपने आस-पास के लोगों को प्रेरित करते रहते हैं.2. पाचन तंत्र है बेहद मजबूत :O+ ब्लड ग्रुप के लोगों का पाचन तंत्र काफी मजबूत होता है. उन्हें खाने-पीने में कोई विशेष समस्या नहीं होती और उनका शरीर आसानी से भोजन को पचा लेता है. यह एक महत्वपूर्ण गुण है, क्योंकि एक हेल्दी डाइजेशन सिस्टम न सिर्फ फिजिकली सेहत को बेहतर बनाता है, बल्कि मेंटल स्थिति को भी बेहतर रखता है. O+ ब्लड ग्रुप वाले लोग अक्सर फ्रेश और एक्साइटेड फील करते हैं.3. आत्मविश्वास और ईमानदारी से भरपूर :O+ ब्लड ग्रुप के लोग नैचुरली सेल्फ कॉन्फिडेंट होते हैं. उनका आत्म-विश्वास उन्हें अपने लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करता है. इसके अलावा, ये लोग हमेशा ईमानदार और सच बोलने वाले होते हैं. अपने व्यवहार में सच्चाई और ट्रांसपेरेंसी बनाए रखते हैं, जिससे इन्हें हर जगह सम्मान मिलता है. O+ ब्लड ग्रुप के लोग किसी भी स्थिति में अपनी भावनाओं और विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने से नहीं डरते.4. दिल की बीमारियों से कम प्रभावित :O+ ब्लड ग्रुप के लोगों को दिल की बीमारियों का खतरा दूसरे ब्लड ग्रुपों के मुकाबले कम होता है. यह गुण उन्हें लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से दूर रहने में मदद करता है. इनकी सेहत बेहतर रहती है, क्योंकि इनका शरीर ब्लड सर्कुलेशन और हार्ट एक्टिविटीज को कंट्रोल करने में बेहतर ढंग से काम करता है. यही वजह है कि O+ ब्लड ग्रुप के लोग आमतौर पर जीवन में ज्यादा फिट और एक्टिव रहते हैं.5. दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं :O+ ब्लड ग्रुप वाले लोग बहुत ही हेल्पिंग और दूसरों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. वे न सिर्फ अपनी मदद से, बल्कि ब्लड डोनेशन के जरिए भी दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए तैयार रहते हैं. इस ब्लड ग्रुप के लोग कभी भी किसी की मदद करने में संकोच नहीं करते. इसके साथ ही, ये लोग अपनी पॉजिटिव थिंकिंग और सहानुभूति के कारण हमेशा दूसरों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखते हैं.(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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Feb 3, 2026, 09:30 AM
असम से किण्वित आनंदः आंतों के स्वास्थ्य और पोषण के लिए खोरिसा और गुरमुखी

असम से किण्वित आनंदः आंतों के स्वास्थ्य और पोषण के लिए खोरिसा और गुरमुखी

असमिया खोरिसा: असम में बनने वाले व्यंजनों की बात करें तो इसमें खोरिसा एक यूनिक फर्मेंटेड फूड है. इसमें बांस की नरम कोपलों को फर्मेंट किया जाता है, जिससे इसमें तीखा-वाइब्रेंट टेस्ट और अरोमा आ जाता है. पाचन के लिए ये एक बेहतरीन फूड है जो फाइबर के साथ कई विटामिन से भरपूर है. लोग इसे अचार की तरह नॉनवेज के साथ भी खाते हैं. (Image:madaboutmadbatter) गुंदरूक: हेल्दी फर्मेंटेड भारतीय डिश की लिस्ट में गुंदरूक को भी शामिल करना चाहिए जो खासतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से बनाई जाती है. इसे बनाने के लिए सरसों या फिर पत्तेदार सागों को फर्मेंट करके तैयार करते हैं. इसके बाद इसे ड्राई किया जाता है. इसे सूप में एड करते हैं और अचार बनाकर भी परोसते हैं. ये आपकी गट हेल्थ के लिए फायदेमंद होने के साथ ही सेहत को कई और फायदे भी देता है. (Image: ateliersempervivum) कांजी है हेल्दी ड्रिंक: अगर आपको गट हेल्थ सुधारनी है तो अपनी डाइट में आप कांजी शामिल कर सकते हैं. प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर ये एक बेहद हेल्दी फर्मेंटेड ड्रिंक है, जिसमें विटामिन और मिनरल्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं. दरअसल आप इसे कई अलग-अलग सब्जियों से बना सकते हैं. (Image: finefettlecookerys) पांता भात: बंगाल, ओडिशा में पांता भात एक ट्रेडिशनल पॉपुलर फर्मेंटेड डिश है, जिसे बचे हुए चावल से बनाया जाता है. इसके लिए पके हुए चावलों को रात भर पानी में भिगोकर रखा जाता है, जिससे उसमें खमीर उठता है और सुबह इसमें दही एड किया जाता है. हल्के मसाले जैसे नमक, हरी मिर्च एड करते हैं. कच्चे प्याज और इसके अलावा अक्सर लोग आलू के भर्ता के साथ इसे परोसते हैं. (Image:sanjanatries) घर पर बना दही: फर्मेंट किए जाने वाले प्रोबायोटिक फूड्स को डाइट में शामिल करने की बात करें तो सबसे आसान तरीका है कि आप दही खाएं लेकिन ध्यान रखें कि ये दही घर पर बना हुआ होना चाहिए. मार्केट में अब पैकेट में दही आने लगा है जो हेल्थ के लिए सही नहीं होता है, इसलिए इसे घर पर ही बनाएं. (Image: dtzmyjam)
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Feb 3, 2026, 08:31 AM
कम उम्र की महिलाओं में कैंसर के मामलों में वृद्धि ने डॉक्टरों में चिंता पैदा की

कम उम्र की महिलाओं में कैंसर के मामलों में वृद्धि ने डॉक्टरों में चिंता पैदा की

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।कैंसर को अक्सर बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने एक चौंकाने वाला बदलाव देखा है। 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में कैंसर के मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। हालांकि, बुजुर्गों की तुलना में इस आयु वर्ग में जोखिम अब भी कम है, लेकिन बदलता ट्रेंड चिंता का विषय है।
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Feb 3, 2026, 07:41 AM
एक ताज़ा मोड़ः भारतीय त्योहारों के लिए लौकी की बर्फी रेसिपी

एक ताज़ा मोड़ः भारतीय त्योहारों के लिए लौकी की बर्फी रेसिपी

Lauki ki Barfi Recipe:भारतीय त्योहारों और खास मौकों पर मिठाइयों का खास महत्व होता है। आमतौर पर लोग मावे या बेसन से बनी मिठाइयां पसंद करते हैं, लेकिन अगर आप इस बार कुछ अलग और थोड़ा हेल्दी ट्राई करना चाहते हैं, तो लौकी की बर्फी एक सबसे बेस्ट ऑप्शन होता है। लौकी की बर्फी पारंपरिक मिठाइयों से अलग होती है। इसमें लौकी का इस्तेमाल होने की वजह से यह हल्की और पचने में आसान होती है। मावा और देसी घी के साथ मिलकर लौकी एक ऐसा स्वाद देती है, जो बिल्कुल हलवाई जैसी मिठाई का एहसास कराती है। यही वजह है कि यह मिठाई त्योहारों के साथ-साथ खास मेहमानों के लिए भी परोसी जा सकती है। इसे घीया की बर्फी भी कहा जाता है, जिसका हल्का हरा रंग और मखमली स्वाद हर किसी को पसंद आता है। यह भी पढ़ें:Sattu Chilla Recipe: नाश्ते में ट्राई करें सत्तू चीला, 5 मिनट में तैयार
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Feb 3, 2026, 06:45 AM
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बाजार में तेजी आई और रुपया चढ़ा

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बाजार में तेजी आई और रुपया चढ़ा

India US Trade Deal:भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान ने मंगलवार को बाजार और रुपये दोनों में जबरदस्त उत्साह भर दिया. सोमवार देर रात समझौते की खबर आते ही सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 2,600 अंकों तक उछल गया, जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले 1.2 प्रतिशत की मजबूती के साथ तेजी से चढ़ा. इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर प्रस्तावित 50 प्रतिशत हाई टैरिफ की जगह अब सिर्फ 18 प्रतिशत शुल्क लगाने का ऐलान किया है. इससे खास तौर पर निर्यात-उन्मुख सेक्टरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. मंगलवार, 3 फरवरी की सुबह कपड़ा और चमड़ा क्षेत्र के कई शेयरों में 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई. किन शेयरों में आई तेज़ी बीएसई पर केपीआर मिल्स का शेयर 20 प्रतिशत, गरवारे टेक्निकल फाइबर्स 20 प्रतिशत, वेलस्पन लिविंग 19.85 प्रतिशत, वर्धमान टेक्सटाइल 19.60 प्रतिशत और ट्राइडेंट 19.52 प्रतिशत चढ़ गया. इसके अलावा रेमंड लाइफस्टाइल में 9.56 प्रतिशत और पेज इंडस्ट्रीज में 5.31 प्रतिशत की बढ़त रही. चमड़ा और फुटवियर सेक्टर में भारतीय इंटरनेशनल 10.70 प्रतिशत, मयूर यूनिकोटर्स 7.39 प्रतिशत, बाटा इंडिया 5 प्रतिशत और मेट्रो ब्रांड्स 3.96 प्रतिशत ऊपर रहे. भारत को बड़ी राहतवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी शुल्क में कटौती का स्वागत करते हुए इसे ‘मेड इन इंडिया’ पहल के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताया. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि भारतीय उत्पादों को अब अमेरिका में सिर्फ 18 प्रतिशत का कम जवाबी शुल्क देना होगा. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदीऔर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा. यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई उच्चस्तरीय टेलीफोन बातचीत के बाद संभव हुआ है. इसके बदले भारत ने अमेरिकी वस्तुओं के लिए व्यापार बाधाएं कम करने और ऊर्जा, प्रौद्योगिकी तथा कृषि समेत कई क्षेत्रों में आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है. गौरतलब है कि अमेरिका की तरफ से भारत के ऊपर 50 प्रतिशत का हाई टैरिफ लगाया गया था, जिनमें से 25 प्रतिशत बेस टैरिफ जबकि अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से लगाया गया था. लेकिन भारत ने हाल में रूस से तेल खरीद में कटौती का ऐलान किया था. ऐसे में यह ट्रेड डील बड़ी राहत लेकर आया है. ये भी पढ़ें: इंडिया-यूएस ट्रेड डील और अमेरिकी टैरिफ में भारी कटौती पर एसबीआई चेयरमैन ने दिया ये बड़ा बयान डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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Feb 3, 2026, 06:10 AM
आंतों के स्वास्थ्य को खोलनाः सीधे केले खाने बनाम केले के मिल्कशेक पीने के लाभ

आंतों के स्वास्थ्य को खोलनाः सीधे केले खाने बनाम केले के मिल्कशेक पीने के लाभ

गट हेल्थ को ठीक रखने में फलों को खाना बेस्ट माना जाता है. अधिकतर फल फाइबर से भरपूर होते हैं और ये तत्व हमारे पेट के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में अहम रोल निभाता है. वैसे फलों में कई जरूरी न्यूट्रिएंट्स होते हैं जिससे शरीर को ताकत मिलती है. यहां हम केले को खाने के तरीके पर बात करने जा रहे हैं. ये ऐसा फल है जो हर किसी की सेहत के लिए फायदेमंद साबित होता है. बच्चों को हेल्दी रखने से जिम के बाद डाइट लेनी हो… अमूमन हर किसी के लिए केला एक बेस्ट स्नैक है. मीठा होने की वजह से इसका स्वाद बेहद टेस्टी लगता है और इसे पचाना भी आसान है. इसके अलावा जो लोग वेट लॉस कर रहे हैं उनके लिए भी ये अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे पेट देर तक भरा रहता है. इस तरह हमओवरईटिंगसे भी बच पाते हैं. यहां हम आपको बताने जा रहे हैं गट हेल्थ को ठीक रखने के लिए केले को सीधा खाना सही है या इसका मिल्क शेक पीना बेस्ट है. चलिए आपको बताते हैं बनाना या बनाना शेक में कौन है ज्यादा बेस्ट? जयपुर की आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉक्टर किरण गुप्ता कहती हैंकि केले का किस तरह सेवन करना है ये आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. एक्सपर्ट कहती हैं कि अगर आप जिम या एक्सरसाइज का रूटीन फॉलो करते हैं तो केले का शेक पीना सही है. क्योंकि दूध के साथ पेयर करने के बाद इसे पचाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसलिए फिजिकली एक्टिव होना जरूरी है. लेकिन जो लोग गट हेल्थ को दुरुस्त रखना चाहते हैं वे अगर केले को सीधा खाएं तो बेस्ट रहता है. ये भी पढ़ें:हरी मिर्च से मटर तकगाजर ही नहीं इन 6 सब्जियों से भी बनता है स्वादिष्ट हलवा, जान लें रेसिपी आयुर्वेद के मुताबिक किसी भी चीज को चबाकर खाना सबसे अच्छा रहता है. दरअसल, पाचन क्रिया में चीजों को चबाने का बड़ा रोल है. इसलिए जब आप केले को अच्छे से चबाते हैं तो ये मुंह की लार के साथ मिलता है. इस तरीके से पेट में गया केला दोगुने फायदे पहुंचाता है क्योंकि इस कारण हमारे एंजाइम्स एक्टिव हो जाते हैं. लार के साथ मिलने से केला ठीक से पचता तो है ही साथ ही बॉडी को पूरे न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं. वहीं जब आप स्मूदी या बनाना शेक को पीते हैं तो इस कंडीशन में चबाने जैसा जरूरी प्रोसेस छूट जाता है. इतना ही नहीं केले और दूध की तासीर में फर्क है. दो अलग तासीर वालों चीजों को मिक्स करके उनका सेवन करने से भी कुछ हद तक नुकसान झेलना पड़ सकता है. इस वजह से डाइजेशन स्लो हो सकता है क्योंकि ये शरीर की अग्नि को कमजोर बनाता है. इसके अलावा कफ दोष भी होता है जिससे दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे कोल्ड, कफ, साइनस कंजक्शन और एलर्जी के होने का डर बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब आप बनाना का शेक पीते हैं तो पेट में रिएक्शन होता है. दरअसल, दूध जब पेट में जाता है तो ये हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ रिएक्ट करता है जिससे बॉडी का नेचुरल प्रोसेस बिगड़ता है. सिर्फ दूध को पीने से प्रोटीन मिलता है. लेकिन जब आप इसे केले के साथ लेते हैं तो चीजें बदल जाती हैं. केले में मैलिक एसिड और साइट्रिक एसिड होता है जो ऑर्गेनिक एसिड कहलाते हैं. ये दूध को जल्दी फाड़ देते हैं. अगर दूध पेट में इस तरह रिएक्ट करता है तो डाइजेशन स्लो होता है और शरीर में पोषक तत्वों के सही अवशोषण भी प्रभावित होता है. अगर आप दिनभर में दूध और केले का सेवन करना चाहते हैं तो इसके लिए दूसरा तरीका अपनाएं. एक्सपर्ट कहते हैं कि मील लेने के बाद केले को चबाकर खाएं. इसके दो घंटे बाद एक गिलास दूध पिएं. ये जरूरी नहीं है कि बनाना शेक हर किसी को सूट करें. ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं हो उन्हें केले का शेक एक्सपर्ट की सलाह पर ही पीना चाहिए.
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Feb 3, 2026, 05:59 AM
बुध का कुंभ पारगमनः 3 राशियों के लिए परिवर्तनों को नेविगेट करने के लिए एक गाइड

बुध का कुंभ पारगमनः 3 राशियों के लिए परिवर्तनों को नेविगेट करने के लिए एक गाइड

Budh Gochar February 2026:ज्योतिष शास्त्र में बुद्धि और तर्क के कारक माने जाने वाले ग्रह बुध देव आज अपना स्थान परिवर्तन करने जा रहे हैं. आज यानी 3 फरवरी 2026 की रात 09:52 बजे बुध देव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे. बुध का यह गोचर अगले दो महीनों से भी ज्यादा समय के लिए होने वाला है. बुध देव कुंभ राशि में 11 अप्रैल 2026 की रात 1:16 बजे तक विराजमान रहेंगे. बुध के इस बड़े बदलाव का असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन 3 राशियों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. आइए जानते हैं किन 3 राशि वालों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है. कर्क राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर आठवें भाव में होगा. सावधानी:सेहत को लेकर लापरवाही न बरतें. त्वचा या पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. सलाह:निवेश के मामलों में जल्दबाजी न करें, वरना धन हानि हो सकती है. गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें. वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बुध का गोचर सुख-सुविधाओं में कमी ला सकता है. सावधानी:परिवार में प्रॉपर्टी या किसी पुरानी बात को लेकर विवाद हो सकता है. माता की सेहत का ख्याल रखें. सलाह:कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के साथ अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, आपकी बातों का गलत मतलब निकाला जा सकता है. मीन राशि वालों के लिए बुध का गोचर 12वें भाव में होने जा रहा है, जो खर्चों का भाव है. सावधानी:बेवजह के खर्चों में बढ़ोतरी होगी, जिससे आपका बजट बिगड़ सकता है. विदेश यात्रा या कानूनी मामलों में अड़चनें आ सकती हैं. सलाह:कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह जरूर लें. तनाव की स्थिति बन सकती है. ये भी पढ़ें:बुधदेव 3 फरवरी को करेंगे कुंभ राशि में गोचर, मेष सहित इन राशि वालों का उदय होगा भाग्य Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र के नियमों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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Feb 3, 2026, 05:53 AM
चुकंदर कांजी के साथ चमकती त्वचा प्राप्त करेंः स्वास्थ्य और सुंदरता के लिए एक पारंपरिक विधि

चुकंदर कांजी के साथ चमकती त्वचा प्राप्त करेंः स्वास्थ्य और सुंदरता के लिए एक पारंपरिक विधि

चमकती त्वचा कौन नहीं पाना चाहता है? हर किसी के मन में ये बात आती है कि उनकी त्वचा साफ और अट्रैक्टिव दिखाई दे। यही वजह है कि देश और दुनिया में लोग कोरियन ग्लास स्किन पाने की चाहत में लगे रहते हैं। अगर आपकी भी यही इच्छा है, तो हेल्थ कोच शिवांगी देसाई की चुकंदर वाली कांजी आपको बिल्कुल भी निराश नहीं करेगी। यहां हम आपको चुकंदर की कांजी घर पर बनाने का तरीका बताएंगे, जो त्वचा और सेहत दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इस नुस्खे के बारे में विस्तार से जानने से पहले समझते हैं कि कांजी आखिर क्या है?कांजी क्या है?दरअसल, कांजी कोई आजकल या परसों में आई हुई चीज नहीं है। ये एक पारम्परिक ड्रिंक है, जिसका इस्तेमाल देश में सालों से किया जाता रहा है। इस ड्रिंक को कई सब्जियों और फलों से बनाया जा सकता है, मगर आमतौर पर इसके इंग्रेडिएंट्स मौसम के हिसाब से बदलते हैं।खैर, इस ड्रिंक को फर्मेंटेड ड्रिंक भी कह सकते हैं। ये त्वचा ही नहीं आपकी ओवरऑल सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। आइए अब विस्तार से जान लेते हैं कि हेल्थ कोच शिवांगी देसाई की कांजी बाकी ड्रिंक्स से ज्यादा खास क्यों है?कांजी बनाने में इस्तेमाल सामग्रीचुकंदरकाली मिर्चकाला नमकदेसी घी(नोट: सामग्री की मात्रा जरूरत के हिसाब से तय करें)कांजी बनाने की विधियहकांजीबनाने के लिए आपको सबसे पहले पानी से भरा हुआ एक कांच का जार लेना हैअब इसमें लंबे कटे हुए चुकंदर को डालना है। इसके बाद पिसी हुई राई, काला नमक और चुटकी भर काली मिर्च डालनी हैआखिर में इसमें आपको थोड़ा सा देसी घी भी डालना हैअब इस जार को बंद करके रोजाना 4 से 5 दिन धूप में रखेंआपकी कांजी बनकर तैयार हैकांजी पीने के फायदे?​त्वचा में निखार​बॉडी डिटॉक्स में मददइम्यूनिटी बूस्टगट हेल्थ के लिए फायदेमंदबालों को भी मजबूती देती हैकांजी पीने के फायदे​View this post on InstagramA post shared by Shivangi Desai | Health Coach (@coachshivangidesai)​चुकंदर त्वचा के लिए फायदेमंद कैसे?बता दें कि चुकंदर स्किन केयर का बहुत अहम हिस्सा है। इसमें विटामिन सी, आयरन और एंटी-एक्सीडेंट्स की अच्छी मात्रा होती है। इससे त्वचा को नेचुरल तरीके से चमकदार, सॉफ्ट और जवां बनाया जा सकता है।साथ ही, चुकंदर पिगमेंटेशन, डार्क सर्कल्स औरमुंहासेकम करने में बहुत मददगार साबित होता है। ये शरीर को नेचुरली डिटॉक्स करता है, इससे त्वचा को अंदर से नमी मिलती है और चेहरे पर नेचुरली गुलाबी निखार भी दिखने लगता है।(डिस्क्लेमर: लेख में दिए गए नुस्खे की जानकारी व दावे पूरी तरह से इंस्टाग्राम पर प्रकाशित वीडियो पर आधारित हैं। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। किसी भी तरह के नुस्खे को आजमाने से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)
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Feb 3, 2026, 05:50 AM
आत्म-देखभाल से लेकर सजा तकः संघर्ष वास्तविक है

आत्म-देखभाल से लेकर सजा तकः संघर्ष वास्तविक है

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। "कल से मैं सुबह 5 बजे उठूंगा, एक घंटा योग करूंगा, ग्रीन टी पिऊंगा और फोन को हाथ भी नहीं लगाऊंगा।" सोमवार और मंगलवार तो जैसे-तैसे निकल जाते हैं, लेकिन बुधवार आते-आते यह रूटीन एक सजा जैसा लगने लगता है। यानी जो चीज आपको सुकून देने के लिए थी, वही अब स्ट्रेस की वजह बनना शुरू हो जाती है।
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Feb 3, 2026, 05:27 AM
युवा भारतीयों में जोड़ों का दर्दः एक जीवन शैली महामारी

युवा भारतीयों में जोड़ों का दर्दः एक जीवन शैली महामारी

अब जोड़ों का दर्द सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है। हाल के वर्षों में 30 की उम्र के युवा भारतीयों में घुटनों, कूल्हों और कंधों में जकड़न, सूजन और दर्द के मामले तेजी से बढ़े हैं। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अविक भट्टाचार्य (सीके बिरला हॉस्पिटल्स, कोलकाता) के अनुसार, इसकी वजह सिर्फ उम्र नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली है। लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, गलत फुटवियर, बढ़ता वजन और डिहाइड्रेशन - ये सभी आदतें ना सिर्फ जोड़ों पर दबाव डालती हैं बल्कि नसों की सेहत को भी नुकसान पहुंचाती हैं। अगर शुरुआती लक्षणों जैसे पैरों में भारीपन, सूजन या नसों का उभरना नजरअंदाज किया जाए, तो समस्या और गंभीर हो सकती है। अच्छी खबर यह है कि समय रहते छोटी-छोटी लाइफस्टाइल बदलाव अपनाकर जोड़ों और नसों दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। डॉ. भट्टाचार्य के अनुसार, कुछ छोटे लेकिन नियमित बदलाव बड़ा फर्क ला सकते हैं— हेल्थ नोट:30 की उम्र में जॉइंट पेन कोई सामान्य बात नहीं है, लेकिन सही समय पर ध्यान दिया जाए तो इसे कंट्रोल किया जा सकता है। लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव अपनाकर ना सिर्फ दर्द कम किया जा सकता है, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से भी बचाव संभव है। इसके अलावा किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह लें।
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Feb 3, 2026, 05:08 AM
अंडे से परेः एक स्वादिष्ट नाश्ते के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों की खोज

अंडे से परेः एक स्वादिष्ट नाश्ते के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों की खोज

अंडा सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. जब बात हाई-प्रोटीन नाश्ते की आती है, तो सबसे पहले उबला हुआ अंडा ही याद आता है और ये फिटनेस फ्रीक से लेकर डाइट फॉलो करने वालों तक, सबकी पहली पसंद होता है क्योंकि भरपूण पोषण के साथ-साथ ये जल्दी भी बन जाता है. लेकिन सच कहें तो हर रोज एक ही तरह का वही सादा, रबर जैसा उबला अंडा खाना बहुत बोरिंग हो सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंडे से कई ऐसी डिशेज बना सकते हैं जो काफी टेस्टी भी होती हैं. आइए उन डिशेज के बारे में जान लीजिए. अगर आप अपने टेस्ट को बढ़ाना चाहते हैं तो क्लासिक मसाला ऑमलेट से बेहतर कुछ नहीं है. नॉर्मल ऑमलेट के विपरीत मसाला ऑमलेट में बारीक कटे प्याज, हरी मिर्च, टमाटर और चुटकी भर हल्दी और लाल मिर्च पाउडर होता है. एक फूला हुआ, कैफे-स्टाइल ऑमलेट बनाने का राज यह है कि पैन में डालने से पहले अंडे को दूध की कुछ बूंदों के साथ जोर से फेंट लें. फिर इसे टोस्टेड सावरडो या मक्खन वाले पाव के साथ खाएं ताकि आपको मुंबई स्ट्रीट-फूड वाला असली स्वाद मिले. अंडा भुर्जी काफी अच्छी एग डिश है जो खाने में काफी टेस्टी लगती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले जीरा, अदरक-लहसुन का पेस्ट और ढेर सारे प्याज को सुनहरा भूरा होने तक भूनें. फिर कच्चे अंडे फोड़कर डालें और उन्हें तेज आंच पर स्क्रैम्बल करें ताकि वे कुरकुरे, भूरे रंग के हो जाएं.ताजे धनिये की पत्ती और नींबू के रस से गार्निश करें. यह प्रोटीन का पावरहाउस है जो पराठों के साथ या जल्दी से सैंडविच की फिलिंग के तौर पर भी बहुत अच्छा लगता है. शकशुका नॉर्थ अफ्रीकन और मिडिल ईस्टर्न डिश है जिसमें अंडे को सीधे उबलती हुई टमाटर की चटनी में पकाया जाता है, जिसमें शिमला मिर्च, प्याज और पपरिका का फ्लेवर होता है. इस डिश की खूबसूरती इसकी प्रेजेंटेशन में है. इसे सीधे स्किलेट में परोसा जाता है. इसकी जर्दी खट्टे टमाटर की ग्रेवी के साथ मिल जाती है, जिससे एक रिच, डिप करने लायक सॉस बन जाता है.
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Feb 3, 2026, 04:48 AM
महिलाओं में कैंसर के जोखिमः रजोनिवृत्ति के बारे में आपको क्या जानने की आवश्यकता है

महिलाओं में कैंसर के जोखिमः रजोनिवृत्ति के बारे में आपको क्या जानने की आवश्यकता है

Cancer Risks in Women:मेनोपॉज हर महिला के जीवन का एक स्वाभाविक समय है. आमतौर पर यह 45 से 55 साल की उम्र के बीच आता है. इस दौरान पीरियड्स बंद हो जाते हैं और शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं.हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना, नींद न आना, मूड स्विंग्स, थकान, वैजाइनल ड्रायनेस और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं आम हैं. लेकिन, इन बदलावों के साथ एक और अहम बात जुड़ी हैमेनोपॉजके बाद कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. इस बारे में सही जानकारी होना महिलाओं को समय रहते सतर्क और सुरक्षित बना सकता है.मेनोपॉज के बाद कैंसर का खतरा क्यों बढ़ता है?मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन लेवल काफी कम हो जाता है. ये हार्मोन बदलाव कुछ कैंसर, खासकरब्रेस्ट कैंसर, गर्भाशय (यूटेरस) कैंसर और ओवरी कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा उम्र बढ़ना भी अपने आप में कैंसर का एक बड़ा कारण है, क्योंकि समय के साथ शरीर की खराब कोशिकाओं को ठीक करने की क्षमता कम होती जाती है.किन कैंसर पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए?ब्रेस्ट कैंसर:ये मेनोपॉज के बाद महिलाओं में सबसे आम कैंसर. परिवार में कैंसर की हिस्ट्री, मोटापा, शराब का सेवन और कम फिजिकल एक्टिविटी रिस्क बढ़ा सकती है.गर्भाशय (यूटेराइन) कैंसर:यह भी मेनोपॉज़ के बाद ज्यादा देखा जाता है, खासकर उन महिलाओं में जो मोटापे, डायबिटीज या हार्मोन असंतुलन से जूझ रही हों.आंत (बॉवेल) कैंसर:उम्र के साथ इसका खतरा भी बढ़ता है, इसलिए स्क्रीनिंग बहुत जरूरी हो जाती है.लाइफस्टाइल का क्या रोल है?मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ना आम है, लेकिन ज्यादा चर्बी कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है क्योंकि फैट टिश्यू थोड़ी मात्रा में एस्ट्रोजन बनाता है.रेगुलर एक्सरसाइजहरी सब्ज़ियां, फल और साबुत अनाज से भरपूर डाइटशराब सीमित करनाधूम्रपान से दूरीये सभी आदतें कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं.स्क्रीनिंग और शुरुआती लक्षण क्यों जरूरी हैं?रेगुलर चेकअप कई बार जान बचा सकती है. महिलाओं को ब्रेस्ट स्क्रीनिंग जरूर करानी चाहिए और उम्र के अनुसार बॉवेल व सर्वाइकल कैंसर की जांच भी करानी चाहिए.अगर मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग, लंबे समय तक पेट फूलना, लगातार अपच, बिना वजह वजन बढ़ना या घटना जैसे लक्षण दिखें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें.अपनी सेहत की कमान खुद संभालेंअगर परिवार में कैंसर का इतिहास है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको कैंसर जरूर होगा. सही जानकारी, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.अगर आपको कोई शंका है या शरीर के संकेत समझ में नहीं आ रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें.मेनोपॉज के बाद सतर्क रहना डरने की नहीं, समझदारी की निशानी है. सही समय पर कदम उठाकर महिलाएं न सिर्फ कैंसर से बचाव कर सकती हैं, बल्कि एक हेल्दी और आत्मविश्वासी जीवन भी जी सकती हैं.(डॉ. द्वीप जिंदल, सीनियर कंसल्टेंट - फीमेल यूरोलॉजी, गाइनी-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी - इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा)(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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Feb 3, 2026, 04:23 AM
सामान्य विटामिन डी और बी12 के स्तर के बावजूद मांसपेशियों में दर्द के वास्तविक कारणों का पता लगाना

सामान्य विटामिन डी और बी12 के स्तर के बावजूद मांसपेशियों में दर्द के वास्तविक कारणों का पता लगाना

आपके शरीर में विटामिन डी और बी12 का लेवल ठीक है. हड्डियों की कोई बीमारी भी नहीं है, लेकिन फिर भी मसल पेन रहता है तो इसके असली कारणों का पता होना जरूरी है. क्योंकि ये कोई समस्या नहीं है, लेकिन फिर भी अगर दर्द है तो ये परेशानी का कारण बना रहता है. इस समस्या के बारे में जानने के लिए हमने मैक्स हॉस्पिटल में आर्थोपेडिक विभाग में डॉ. अखिलेश यादव से बातचीत की है. डॉ अखिलेश बताते हैं कि इस तरह केमसल पेनके कई कारण होते हैं. इनमें बड़ा कारण यह रहता है कि कई लोग घंटों तक एक ही पोज़िशन में बैठकर काम करते हैं. गलत पोस्चर भी रहता है तो मसल पेन का कारण बनता है. लैपटॉप ये फोन के सामने लगातार झुकी हुई गर्दन और पीठ पर दबाव भी इस दर्द का कारण होता है. इसमें भले ही विटामिन डी से लेकर कैल्शियम नॉर्मल हो, लेकिन ये दर्द बना रहता है. डॉ अखिलेश कहते हैं कि सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन मानसिक तनाव भी इस दर्द का कारण बन सकता है. मानसिक तनाव से हार्मोन का बैंलेंस बिगड़ता है. जिससे मसल्स लगातार टाइट रहती हैं, जो दर्द का कारण बनता है. मानसिक तनाव के साथ साथ अगर नींद की कमी भी है तो भी दर्द होता है क्योंकि जो लोगपूरी नींद नहीं लेते, उनकी मसल्स को रिपेयर होने का समय नहीं मिल पाता है. इससे मसल में दर्द बना रहता है. भले ही विटामिन की कमी न हो, लेकिन शरीर में पानी की कमी से भी मसल पेन हो सकता है. क्योंकि पानी की कमी से शरीर में इलेक्ट्रॉल कम हो जाते हैं. खासतौर पर गर्मी में पसीना ज्यादा निकलने पर यह समस्या बढ़ जाती है. देखा जाता है कि एथलीट्स में मसल पेन की समस्या हो जाती है. भले ही उनमें कैल्शियम से लेकर विटामिन या प्रोटीन सब अच्छा हो. इनमें मसल पेन का कारण पानी की कमी हो सकती है. क्योंकि एथलीट्स में खेलकूद के दौरान ज्यादा पसीना निकलता है. अपने पोश्चर को ठीक रखें और कभी भी 1 घंटे से अधिक समय तक एक ही पोश्चर में न बैठें रोज़ाना हल्की स्ट्रेचिंग दिन में कम से कम 7 से आठ गिलास पानी पीएं 78 घंटे की नींद लें
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Feb 3, 2026, 04:00 AM
केले के आंतों को स्वस्थ रखने वाले लाभः उन्हें कच्चा खाओ या हिला कर मिलाएँ?

केले के आंतों को स्वस्थ रखने वाले लाभः उन्हें कच्चा खाओ या हिला कर मिलाएँ?

गट हेल्थ को ठीक रखने में फलों को खाना बेस्ट माना जाता है. अधिकतर फल फाइबर से भरपूर होते हैं और ये तत्व हमारे पेट के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में अहम रोल निभाता है. वैसे फलों में कई जरूरी न्यूट्रिएंट्स होते हैं जिससे शरीर को ताकत मिलती है. यहां हम केले को खाने के तरीके पर बात करने जा रहे हैं. ये ऐसा फल है जो हर किसी की सेहत के लिए फायदेमंद साबित होता है. बच्चों को हेल्दी रखने से जिम के बाद डाइट लेनी हो… अमूमन हर किसी के लिए केला एक बेस्ट स्नैक है. मीठा होने की वजह से इसका स्वाद बेहद टेस्टी लगता है और इसे पचाना भी आसान है. इसके अलावा जो लोग वेट लॉस कर रहे हैं उनके लिए भी ये अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे पेट देर तक भरा रहता है. इस तरह हम ओवरईटिंग से भी बच पाते हैं. यहां हम आपको बताने जा रहे हैं गट हेल्थ को ठीक रखने के लिए केले को सीधा खाना सही है या इसका मिल्क शेक पीना बेस्ट है. चलिए आपको बताते हैं बनाना या बनाना शेक में कौन है ज्यादा बेस्ट? जयपुर की आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉक्टर किरण गुप्ता कहती हैं कि केले का किस तरह सेवन करना है ये आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. एक्सपर्ट कहती हैं कि अगर आप जिम या एक्सरसाइज का रूटीन फॉलो करते हैं तो केले का शेक पीना सही है. क्योंकि दूध के साथ पेयर करने के बाद इसे पचाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इसलिए फिजिकली एक्टिव होना जरूरी है. लेकिन जो लोग गट हेल्थ को दुरुस्त रखना चाहते हैं वे अगर केले को सीधा खाएं तो बेस्ट रहता है. आयुर्वेद के मुताबिक किसी भी चीज को चबाकर खाना सबसे अच्छा रहता है. दरअसल, पाचन क्रिया में चीजों को चबाने का बड़ा रोल है. इसलिए जब आप केले को अच्छे से चबाते हैं तो ये मुंह की लार के साथ मिलता है. इस तरीके से पेट में गया केला दोगुने फायदे पहुंचाता है क्योंकि इस कारण हमारे एंजाइम्स एक्टिव हो जाते हैं. लार के साथ मिलने से केला ठीक से पचता तो है ही साथ ही बॉडी को पूरे न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं. वहीं जब आप स्मूदी या बनाना शेक को पीते हैं तो इस कंडीशन में चबाने जैसा जरूरी प्रोसेस छूट जाता है. इतना ही नहीं केले और दूध की तासीर में फर्क है. दो अलग तासीर वालों चीजों को मिक्स करके उनका सेवन करने से भी कुछ हद तक नुकसान झेलना पड़ सकता है. इस वजह से डाइजेशन स्लो हो सकता है क्योंकि ये शरीर की अग्नि को कमजोर बनाता है. इसके अलावा कफ दोष भी होता है जिससे दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे कोल्ड, कफ, साइनस कंजक्शन और एलर्जी के होने का डर बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब आप बनाना का शेक पीते हैं तो पेट में रिएक्शन होता है. दरअसल, दूध जब पेट में जाता है तो ये हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ रिएक्ट करता है जिससे बॉडी का नेचुरल प्रोसेस बिगड़ता है. सिर्फ दूध को पीने से प्रोटीन मिलता है. लेकिन जब आप इसे केले के साथ लेते हैं तो चीजें बदल जाती हैं. केले में मैलिक एसिड और साइट्रिक एसिड होता है जो ऑर्गेनिक एसिड कहलाते हैं. ये दूध को जल्दी फाड़ देते हैं. अगर दूध पेट में इस तरह रिएक्ट करता है तो डाइजेशन स्लो होता है और शरीर में पोषक तत्वों के सही अवशोषण भी प्रभावित होता है. अगर आप दिनभर में दूध और केले का सेवन करना चाहते हैं तो इसके लिए दूसरा तरीका अपनाएं. एक्सपर्ट कहते हैं कि मील लेने के बाद केले को चबाकर खाएं. इसके दो घंटे बाद एक गिलास दूध पिएं. ये जरूरी नहीं है कि बनाना शेक हर किसी को सूट करें. ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं हो उन्हें केले का शेक एक्सपर्ट की सलाह पर ही पीना चाहिए.
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Feb 3, 2026, 02:04 AM
घबराहट के हमलों पर काबू पानाः एम्स दिल्ली की डॉ. प्रियंका सहरावत से एक सरल समाधान

घबराहट के हमलों पर काबू पानाः एम्स दिल्ली की डॉ. प्रियंका सहरावत से एक सरल समाधान

आजकल लोगों में एंग्जाइटी और पैनिक अटैक आने के मामले काफी बढ़ गए हैं। एंग्जाइटी आपको किसी भी स्थिति, इंसान या बात से हो सकती है। इंसान जब घुटन महसूस करता है और एक ही बात को बार-बार सोचता रहता है तो उसे एंग्जाइटी महसूस होती है। वहीं पैनिक अटैक वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति को बिना किसी रियल फियर के या कारण के बहुत डर महसूस होता है। पैनिक अटैक में आपको घबराहट और सांस लेने में तकलीफ महसूस हो सकती है। इसके अलावा कई लक्षण ऐसे महसूस होते हैं कि जैसे दिल का दौरा पड़ रहा हो। ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं और एक बड़ा आसान सा उपाय कर लें। AIIMS दिल्ली की जनरल फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रियंका सहरावत ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वो बता रही हैं कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार पैनिक अटैक आते हैं, तो कोई भी एक नॉर्मल पेपर बैग आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। जब किसी व्यक्ति को पैनिक अटैक आता है , तो वह बहुत तेजी से सांस लेने लगता है। ऐसे में खून में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड फेफड़ों के जरिए बहुत अधिक मात्रा में बाहर निकल जाती है। इससे शरीर का पीएच संतुलन बिगड़ जाता है। घबराहट, धड़कन तेज होना , सीने या शरीर के अन्य हिस्सों में जकड़न महसूस होना, सीने में भारीपन, सीने के एक तरफ या पीठ में कंधे की मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षणों से यह बदलाव स्पष्ट हो जाता है। कागज का बैग या थैली कैसे मदद करती है अगर कोई व्यक्ति जो डिप्रेशन, एंग्जाइटी या पैनिक अटैक की स्थिति में इन लक्षणों को महसूस करता है, तो कागज का बैग उसके लिए मददगार साबित हो सकता है। आपके पास किसी भी कागज का कोई बैग हो। अब व्यक्ति को बस इतना करना है कि कागज की थैली से अपनी नाक और मुंह को ढक लें और उसे मुंह को कसकर बंद रखें। फिर धीरे-धीरे छह से दस बार सांस अंदर और बाहर लेनी है। कागज का बैग शरीर से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को रोकने में मदद करता है। अगर कार्बन डाइऑक्साइड शरीर में बनी रहती है और खून में इसका लेवल नॉर्मल हो जाता है, तो खून का pH सामान्य हो जाता है और कुछ ही मिनटों में लक्षण गायब हो जाते हैं। हालांकि, डॉक्टर सेहरावत ने यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार पैनिक अटैक आते हैं, तो मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से परामर्श लेना बेहतर है। इससे उन्हें यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इस समस्या से निपटने के लिए दवा से संबंधित और गैर-दवा से संबंधित जीवनशैली में क्या बदलाव आवश्यक हैं। प्राकृतिक फाइबर से भरपूर हैं चिया सीड्स, इस तरह पीने से तेजी से कम होगा वजन, चिया सीड्स का पानी पीने के फायदे Latest Health News
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Feb 3, 2026, 01:00 AM
वजन घटाने के लिए चिया सीड्स का पानी पीने के स्वास्थ्य लाभों को उजागर करना

वजन घटाने के लिए चिया सीड्स का पानी पीने के स्वास्थ्य लाभों को उजागर करना

इंटरनेट के आने के बाद से लोगों में फिटनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है और आजकल हर व्यक्ति हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहता है, जबकि ज्यादातर लोगों की जीवनशैली बहुत अव्यवस्थित हो चुकी है। फिटनेस के लिए लोग कई तरह के उपाय करने लगे है। ऐसा ही असरदार उपाय है चिया सीड्स का पानी पीना। काले रंग का छोटा सा दिखने वाला चिया का बीज कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानते हैं चिया सीड्स का पानी पीने के क्या फायदे हैं और इसे वजन घटाने के लिए कैसे पीना चाहिए? आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ) के अनुसार चिया सीड्स का पानी पीना आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। खासतौर से वजन घटाने के लिए चिया सीड्स फायदेमंद हैं। वजन घटाने में मददगार-चिया सीड्स में प्राकृतिक फाइबर पाए जाते हैं जो भोजन पचाने में मदद करते हैं। अगर आप चिया सीड्स को रात भर पानी में भिगोकर रखते हैं और इसके पानी का सेवन करते हैं तो यह आपको ओवरईटिंग से बचाता है और पेट भरा भरा लगता है। पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है-फाइबर की उपस्थिति के कारण चिया सीड्स आपकी पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है और पेट की समस्या से आराम दिलाता है। इसके सेवन से कब्ज, अपच और एसिडिटी जैसी समस्या में आराम मिलता है और आंतों की नियमित सफाई में मदद मिलती है। शरीर को हाइड्रेटेड रखता है-गर्मियों में जब आपका शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है तब चिया सीड्स का पानी आपको लंबे समय तक पानी की कमी होने से बचाता है। इसके सेवन से शरीर में एनर्जी बनी रहती है और आपको कमजोरी नहीं महसूस होता है। ह्रदय रोगों के लिए लाभकारी-ओमेगा-3 फैटी एसिड के प्राकृतिक स्रोत के रूप में चिया सीड्स का प्रयोग किया जाता है। यह ह्रदय रोगियों के लिए एक औषधि की तरह काम करता है। चिया सीड्स आपके शरीर में जाकर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है और ह्रदय रोगों से आपकी रक्षा करता है। डायबिटीज में फायदेमंद-जिन लोगों को डायबिटीज की शिकायत है उनके लिए चिया सीड्स बहुत फायदेमंद है। यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है और बढ़ने नहीं देता है। लेकिन इसका इस्तेमाल हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। हड्डियों को मजबूत बनाता है-चिया सीड्स में कई तरह के पोषक तत्व जैसे मैग्नीशियम,फॉस्फोरस और कैल्शियम पाया जाता है इसलिए यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। चिया सीड्स को खाने का सही तरीका पानी में भिगोकर खाना ही है। इसके बीजों को सूखा नहीं खाना चाहिए। इसे तैयार करने के लिए पहले एक से दो चम्मच चिया सीड्स को एक गिलास पानी में कम से कम एक घंटे के लिए भिगोकर रख दें या आप चाहें तो इसे रात भर भी भिगोकर रख सकते हैं। जिससे इसमें मौजूद सभी पोषक तत्व पानी द्वारा अवशोषित कर लिया जाए। सुबह उठकर खाली पेट में इसका पानी पीएं। अगर आप इसका स्वाद बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें थोड़ा शहद और नींबू भी मिला सकते हैं। चिया सीड्स का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करें। जिन लोगों को कोई गंभीर बीमारी है या जो महिलाएं गर्भवती हैं, उन्हें इसके प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। सेहत के लिए अमृत से कम नहीं पुदीने का पानी, जान लें कैसे पीना चाहिए, जिससे पुदीना पानी का भरपूर फायदा मिले Latest Health News
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Feb 2, 2026, 11:23 PM
एनर्जी ड्रिंक्सः किडनी के स्वास्थ्य के लिए एक छिपा हुआ खतरा

एनर्जी ड्रिंक्सः किडनी के स्वास्थ्य के लिए एक छिपा हुआ खतरा

आजकल लोगों को सबकुछ फटाफट चाहिए। बाजार में इंस्टेंट एनर्जी के नाम पर मिल रहे एनर्जी ड्रिंक्स इसका ही नतीजा हैं। इनमें से ज्यादातर ड्रिंक्स में बहुत अधिक मात्रा में शुगर और कैफीन होता है। इसलिए इनको पीते ही तुरंत ऊर्जा का एहसास होता है। एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन, शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। सब मिलकर किडनी में इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं। साथ ही किडनी की टॉक्सिन फिल्टर करने की क्षमता को भी डैमेज करते हैं। साउथ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी ने साल 2008 से लेकर 2020 तक एनर्जी ड्रिंक्स के किडनी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर दुनिया भर में हुई स्टडीज को एक साथ रिव्यू किया। यह रिव्यू 15 से ज्यादा साइंटिफिक स्टडीज के हवाले से यह बताता है कि एनर्जी ड्रिंक्स पीने से किडनी पर काम का बोझ बढ़ जाता है। इससे लिवर और हार्ट को भी नुकसान होता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये ड्रिंक्स कई मायनों में शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज एनर्जी ड्रिंक्स से होने वाले नुकसानों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट:डॉ. राजीव गोयल, सीनियर कंसल्टेंट, यूरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम डॉ. यासिर रिजवी, डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- क्या एनर्जी ड्रिंक्स किडनी के लिए शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक हैं? जवाब-हां, कई मामलों में ये ड्रिंक्स शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि इनमें एक साथ बहुत ज्यादा हाई कैफीन, सिंथेटिक शुगर और केमिकल प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। शराब किडनी को डिहाइड्रेट करती है, सोडा शुगर लोड बढ़ाता है, लेकिन एनर्जी ड्रिंक्स इन दोनों का कॉम्बिनेशन हैं। ये एक साथ डिहाइड्रेशन और ब्लड शुगर दोनों बढ़ाते हैं। शुगर लोड का मतलब है, शरीर में एक साथ बहुत अधिक शुगर पहुंचना। ये ड्रिंक्स किडनी पर फिल्ट्रेशन का अतिरिक्त दबाव भी डालते हैं। इससे किडनी सेल्स थक जाती हैं, इंफ्लेमेशन बढ़ता है और डैमेज का रिस्क भी बढ़ता है। सवाल- एनर्जी ड्रिंक्स में ऐसा क्या होता है, जो किडनी सेल्स के लिए टॉक्सिक बन जाता है? जवाब-इनमें हाई फ्रुक्टोज कॉर्न शुगर, कैफीन, टॉरिन (अमीनो एसिड), आर्टिफिशियल स्वीटनर और सोडियम बेंजोएट जैसे केमिकल होते हैं। ये किडनी सेल्स में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जिससे सेल्स कमजोर हो जाती हैं। किडनी का काम खून से टॉक्सिन छानकर बाहर निकालना है, लेकिन इन केमिकल्स को बार-बार फिल्टर करने से किडनी थक जाती हैं। इससे सेल डैमेज, इंफ्लेमेशन और माइक्रो-इंजरी होती है, जो धीरे-धीरे क्रॉनिक किडनी प्रॉब्लम में बदल जाती है। सवाल- हाई फ्रुक्टोज कॉर्न शुगर किडनी में जाकर क्या नुकसान करती है? जवाब-हाई फ्रुक्टोज कॉर्न शुगर से शरीर में ये बदलाव होते हैं- सवाल- क्या एनर्जी ड्रिंक में मौजूद सिंथेटिक शुगर शरीर को धीरे-धीरे जहर की तरह नुकसान पहुंचाती है? जवाब-हां, सिंथेटिक शुगर से शरीर को ये नुकसान होते हैं- सवाल- केमिकल फैक्ट्री में तैयार ड्रिंक पीना किडनी के लिए कितना रिस्की है? जवाब-नेचुरल ड्रिंक्स शरीर में आसानी से पच जाते हैं। इसका मतलब है कि शरीर इन्हें आसानी से ऊर्जा और पोषक तत्वों में बदल लेता है। जबकि फैक्ट्री में बने ड्रिंक्स में दर्जनों सिंथेटिक केमिकल होते हैं। शरीर के पास इनको प्रोसेस करने के लिए कोई सिस्टम नहीं होता है। इसलिए इन्हें फिल्टर करने के लिए शरीर को बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसका सबसे अधिक बोझ किडनी पर पड़ता है। बार-बार ये ड्रिंक्स पीने से किडनी सेल्स में टॉक्सिसिटी बढ़ती है, जिससे इंफ्लेमेशन और नेफ्रॉन डैमेज (किडनी के फिल्टर यूनिट्स में डैमेज) शुरू हो जाता है। शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते, पर धीरे-धीरे नुकसान होता रहता है। सवाल- क्या नियमित एनर्जी ड्रिंक लेने से किडनी में इंफ्लेमेशन बढ़ने लगता है? जवाब-हां, एनर्जी ड्रिंक में मौजूद केमिकल और हाई शुगर देखकर हमारा ब्रेन किडनी सेल्स को रिस्क का सिग्नल भेजता है। इसके बचाव में इम्यून सिस्टम इंफ्लेमेशन शुरू कर देता है। देखा जाए तो यह शरीर द्वारा सेल्फ डिफेंस में शुरू हुई एक प्रक्रिया होती है, लेकिन अगर इंफ्लेमेशन लंबे समय तक बना रहे तो यह क्रॉनिक हो जाता है। इससे फिल्टर यूनिट्स मोटी होने लगती हैं, ब्लड प्यूरिफिकेशन में समस्या होने लगती है और प्रोटीन लीकेज शुरू हो सकता है। लंबे समय तक इंफ्लेमेशन जारी रहे तो किडनी डैमेज हो सकती है। सवाल- किडनी इन ड्रिंक्स को बाहर निकालने के लिए ज्यादा काम क्यों करती है? जवाब-नेचुरल ड्रिंक्स और भोजन से बने वेस्ट को छानने के लिए किडनी को बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ती है। जबकि एनर्जी ड्रिंक में मौजूद केमिकल और सिंथेटिक शुगर को फिल्टर करने के लिए किडनी को सामान्य से ज्यादा बार ब्लड साफ करना पड़ता है। सवाल- एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है? जवाब-कैफीन ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। इससे डिहाइड्रेशन होता है, जिससे खून गाढ़ा हो जाता है। गाढ़े खून को फिल्टर करना किडनी के लिए ज्यादा मुश्किल होता है। हाई ब्लड प्रेशर सीधे किडनी की फिल्टर यूनिट्स को नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक कैफीन इनटेक से किडनी पर स्ट्रेस (हाई बीपी के कारण तनाव) बना रहता है, जो माइक्रो-डैमेज, प्रोटीन लीकेज और आगे चलकर क्रॉनिक किडनी डिजीज का कारण बन सकता है। सवाल- सोडियम बेंजोएट बेंजीन में बदलकर बॉडी के भीतर क्या खतरे पैदा कर सकता है? जवाब-सोडियम बेंजोएट विटामिन C या गर्म वातावरण में बेंजीन में बदल सकता है। बेंजीन एक कार्सिनोजेन है, जो सेल डीएनए को नुकसान पहुंचाता है। यह खून, लिवर और किडनी सेल्स में टॉक्सिसिटी पैदा करता है। किडनी को इसे बाहर निकालना पड़ता है, जिससे टॉक्सिक लोड कई गुना बढ़ जाता है। इससे सेल डैमेज, इंफ्लेमेशन और लंबे एक्सपोजर से कैंसर व किडनी फेल्योर तक का खतरा बढ़ सकता है। सवाल- अगर एनर्जी ड्रिंक्स ऊर्जा या विटामिन्स नहीं देते तो इन्हें पीने के बाद लोग एनर्जेटिक क्यों महसूस करते हैं? जवाब-कैफीन और स्टिमुलेंट ब्रेन के फटीग सिग्नल को ब्लॉक कर देते हैं। स्टिमुलेंट यानी ऐसी चीजें, जो दिमाग और शरीर को उत्तेजित (एक्टिव) कर देती हैं। शरीर थका रहता है, लेकिन दिमाग को वह महसूस नहीं होता। इससे झूठी फुर्ती और अलर्टनेस आती है, पर असली एनर्जी नहीं मिलती। मांसपेशियों और ऑर्गन की थकान बनी रहती है। शरीर अपनी लिमिट से ज्यादा काम करता है, जिससे अंदरूनी स्ट्रेस बढ़ता है। इसका नुकसान किडनी जैसे अंगों को ज्यादा झेलना पड़ता है क्योंकि उनके ऊपर काम का ओवरलोड होता है। सवाल- ब्रेन का फटीग सिग्नल ब्लॉक होने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? जवाब-थकान का सिग्नल बंद होने से शरीर रेस्ट नहीं ले पाता। ओवरवर्क जारी रहता है। इससे हॉर्मोनल बैलेंस बिगड़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है। शरीर के सभी रिपेयर प्रोसेस रुक जाते हैं। सवाल- फाइट ऑर फ्लाइट मोड में रहने से किडनी कैसे धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है? जवाब-इस मोड में शरीर स्ट्रेस हाॅर्मोन रिलीज करता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ते हैं। हाई प्रेशर सीधे किडनी फिल्टर्स को डैमेज करता है। साथ ही ब्लड फ्लो का बैलेंस बिगड़ता है। किडनी लगातार हाई अलर्ट पर काम करती है, आराम नहीं कर पाती है। इससे रिपेयर धीमा पड़ता है और माइक्रो-डैमेज जारी रहता है और किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता घटती जाती है। सवाल- अगर कोई रोज एनर्जी ड्रिंक पीता रहा हो, तो किडनी बचाने के लिए उसे तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब-किडनी को बचाने के लिए करें ये काम- सवाल- थकान होने पर एनर्जी ड्रिंक्स के सुरक्षित विकल्प क्या हो सकते हैं? जवाब-एनर्जी के लिए नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, फल, स्प्राउट्स और किशमिश-अखरोट बेहतर विकल्प हैं। ग्राफिक में 10 सेफ एनर्जी ड्रिंक्स देखिए- इसके अलावा लाइफ स्टाइल में ये बदलाव भी एनर्जी लेवल बढ़ाते हैं। जैसे कि– सवाल- किडनी डैमेज के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें? जवाब-किडनी डैमेज के शुरुआती लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं। इसके लिए क्रिएटिनिन, यूरिन रूटीन और बीपी चेक करवा सकते हैं। इसके कुछ संकेत दिख सकते हैं- ………………ये खबर भी पढ़िएफिजिकल हेल्थ- सिगरेट छोड़ दीजिए, मेमोरी अच्छी हो जाएगी: 45 साल के बाद छोड़ना भी फायदेमंद, स्मोकिंग से होतीं 10 बड़ी बीमारियां हाल ही में हेल्थ जर्नल 'लैंसेट हेल्दी लॉन्गेविटी' में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, 40 के बाद भी अगर आपने सिगरेट पीना छोड़ दिया तो आपकी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता उन लोगों के मुकाबले बेहतर होगी, जो 40 के बाद भी सिगरेट पिए जा रहे हैं। इसलिए अभी भी देर नहीं हुई है।आगे पढ़िए…
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Feb 2, 2026, 08:33 PM
डिजिटल जीवन शैली का उदय बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खतरा है

डिजिटल जीवन शैली का उदय बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खतरा है

- बिगड़ी जीवनशैली ने रोका शारीरिक व मानसिक विकास, बच्चे व युवा हो रहे शिकारऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसंवाद न्यूज एजेंसीउधमपुर। डिजिटल दुनिया के साथ बदलती जीवनशैली बड़ों को ही नहीं बल्कि छोटे बच्चों में भी रक्तचाप की समस्या पैदा कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे बच्चों की बिगड़ती जीवनशैली, खानपान की आदतें और मानसिक तनाव प्रमुख कारण हैं।सबसे बड़ा कारण खानपान में असंतुलन है। बच्चे घर के ताजे और पौष्टिक भोजन के बजाय फास्ट फूड, स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इनमें नमक, चीनी और फैट की मात्रा अधिक होती है जो धीरे-धीरे शरीर में ब्लड प्रेशर को बढ़ाने लगती है। संतुलित आहार जैसे फल, हरी सब्जियां, दालें और दूध की कमी बच्चों के शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रही है।विज्ञापनविज्ञापनदूसरा बड़ा कारण है शारीरिक गतिविधियों की कमी। पहले बच्चे खेलकूद में समय बिताते थे। अब मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम्स ने उनकी दिनचर्या बदल दी है। शारीरिक मेहनत न होने से मोटापा बढ़ता है जो आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। कम उम्र में ही बच्चों पर पढ़ाई का दबाव, ऑनलाइन तुलना, लाइक्स और कमेंट्स की चिंता उन्हें तनाव की ओर धकेल रही है। मानसिक तनाव का सीधा असर हार्मोनल संतुलन और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इससे हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि परिवार का वातावरण बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा होता है। घर में तनाव, झगड़े या माता-पिता का अत्यधिक दबाव बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।-------बच्चों को शारीरिक गतिविधियों केसाथ दें पौष्टिक आहार : डाॅ. रैनाजीएमसी उधमपुर के कार्डियोलाजिस्ट व सहायक प्राध्यापक डॉ. मुदसिर मुजमिल के अनुसार बच्चों व युवाओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित आहार और खुलकर बातचीत से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। सुबह जल्दी उठकर व्यायाम और ध्यान करना चाहिए। इससे तनाव की समस्या से राहत मिलती है। युवाओं में सबसे बड़ा बीमारियों का कारण तनाव और खराब जीवनशैली है। इससे हृदय रोग, मोटापा और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याएं जन्म ले रही हैं। समय रहते जागरूकता ही बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाने का सबसे बड़ा उपाय है। बच्चों के लिए रोज कम से कम एक घंटा खेलना या शारीरिक व्यायाम बेहद जरूरी है। उन्हें पाैष्टिक आहार दें। युवाओं को मोबाइल से दूर रहकर धार्मिक कार्यों में रुचि लेनी चाहिए।
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Feb 2, 2026, 08:13 PM
त्रिफल के चमत्कारी लाभों को उजागर करनाः वात संतुलन के लिए एक प्राकृतिक उपचार

त्रिफल के चमत्कारी लाभों को उजागर करनाः वात संतुलन के लिए एक प्राकृतिक उपचार

Triphala Benefits: इंसान की शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वात, पित्त और कफ का बैलेंस रखना जरूरी है. खासकर सर्दियों में अक्सर शरीर में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे ज्वाइंट पेन, हड्डियों की तकलीफ और डाइजेशन सिस्टम में खराब आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि त्रिफला जैसी चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि वात को कंट्रोल करने में बेहद कारगार है. ऐसे में हम आपको त्रिफला के फायदे बताएंगे.. त्रिफला का सेवन करने के फायदेआयुर्वेद में माना गया है कि वात की वृद्धि को रोकना है तो त्रिफला का सेवन वसा के साथ करना लाभकारी होगा. वसा के साथ मिलकर त्रिफला ज्यादा तेजी से काम करता है, जैसे घी के साथ त्रिफला का सेवन. रात के समय एक गिलास गुनगुने पानी में आधा से एक चम्मच त्रिफला और शुद्ध देसी गाय का घी मिलाकर लेना चाहिए. इससे आंतों में चिकनाहट पैदा होती है और विषाक्त पदार्थों को निकालने में आसानी होती है. त्रिफला घृतदूसरा तरीका है 'त्रिफला घृत'. आयुर्वेद में 'त्रिफला घृत' को औषधि माना गया है, जिसमें घी को कई औषधियों के साथ मिलाकर पकाया जाता है. अगर बढ़ते वात दोष से परेशान हैं तो रात के समय 'त्रिफला घृत' का सेवन कर सकते हैं. ये वात को संतुलित करने के साथ पेट से जुड़े रोगों से भी निजात दिलाएगा. अरंडी के तेल के साथ त्रिफलातीसरा तरीका है अरंडी के तेल के साथ त्रिफला का सेवन. वात की वृद्धि के साथ पेट में कब्ज की समस्या परेशान करने लगती है. इसके लिए अरंडी के तेल की कुछ बूंदें त्रिफला चूर्ण के साथ मिलाकर पानी के साथ ली जा सकती हैं. इससे आंतों की गतिशीलता बढ़ती है. ध्यान रखने वाली बात ये है कि सर्दियों में शाम और रात के वक्त वात प्राकृतिक रूप से बढ़ने लगता है और ऐसे में रात का खाना खाने के बाद 2 घंटे के गैप के साथ त्रिफला का सेवन करें. वात बढ़ने से क्या होता है?वात की वृद्धि से शरीर में जकड़न, कब्ज, तनाव, नींद न आने की परेशानी, जोड़ों में दर्द, बेचैनी और शरीर में कंपन पैदा होने लगता है. ये मानसिक थकान से लेकर शारीरिक दर्द तक को बढ़ा देता है.--आईएएनएस Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत या स्किन से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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Feb 2, 2026, 07:51 PM
आयुर्वेदिक आहारः इष्टतम स्वास्थ्य के लिए भोजन के सेवन को संतुलित करना

आयुर्वेदिक आहारः इष्टतम स्वास्थ्य के लिए भोजन के सेवन को संतुलित करना

Ayurvedic Diet: शरीर के लिए खाना ऑक्सीजन की तरह ही जरूरी है, क्योंकि खाने की मात्रा सिर्फ पेट नहीं भरती, बल्कि बॉडी को एनर्जी और ग्रोथ भी देता है. वहीं आयुर्वेद में भी खाना केवल बॉडी की जरूर नहीं माना गया है, बल्कि इसे जीवन को संचालित करने वाला एक अनुशासन माना गया है, क्योंकि खाने की मात्रा जितनी बैलेंस होती है, अग्नि उतनी स्थिर रहती है. हालांकि हमें पता ही नहीं है कि हमारी सेहत के लिए कितना खाना चाहिए? क्या कहता है आयुर्वेद?आयुर्वेद में भी भोजन केवल शरीर की आवश्यकता नहीं माना गया है, बल्कि इसे जीवन को संचालित करने वाला एक अनुशासन कहा गया है क्योंकि भोजन की मात्रा जितनी संतुलित होती है, अग्नि उतनी ही स्थिर रहती है. हालांकि हमें पता ही नहीं है कि कितना भोजन खाना है. क्यों खाते हैं खाना?भोजन को हम शरीर की ऊर्जा के लिए नहीं बल्कि पेट भरने के लिए खाते हैं और ज्यादातर समय तय सीमा से ज्यादा खाकर शरीर को बोझिल बना देते हैं, जिससे आलस, नींद आना, भारीपन, गैस और कब्ज की परेशानी होने लगती है. आयुर्वेद का मानना है कि आमाशय को पूरी तरह भर देना स्वास्थ्य का मार्ग नहीं है. इसके लिए आधा भाग ठोस भोजन के लिए, चौथाई भाग पेय के लिए और चौथाई भाग रिक्त स्थान के लिए रखा जाना चाहिए. इसे भी भोजन की सर्वोत्तम मात्रा माना गया है. कैसे खाएं खाना?आधा भाग ठोस में अनाज, सब्जी और चावल हो सकते हैं, चौथाई भाग पेय में छाछ या गुनगुने पानी को शामिल किया जाता है, जबकि चौथाई भाग रिक्त स्थान को पेट में अग्नि और वायु की गति के संचालन का भाग माना जाता है, जो खाने को सही तरीके से पचाने में मदद करती है. अगर खाना खाने के बाद आलस, नींद आना, भारीपन, गैस और कब्ज की परेशानी होती है तो समझ लीजिए कि तय सीमा से ज्यादा खा लिया है, लेकिन अगर भोजन के बाद शरीर स्थिर बना रहे, मन शांत रहे और खुद 4 घंटे बाद भूख लगने लगे तो ये प्राकृतिक है. सीमित मात्रा में खाने के फायदेभूख लगने पर सीमित मात्रा में खाया गया खाना दवा की तरह काम करता है और सभी अंगों तक पोषक तत्वों को पहुंचाता है. आयुर्वेद में खाने को शरीर के विज्ञान को समझकर खाने के बारे में बताया गया है. कितनी मात्रा में खाना है या कब खाना है जैसे सवालों का जवाब आसानी से मिल जाता है. आयुर्वेद में हमेशा रात के समय हल्का खाना खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि रात के समय शरीर खुद अपनी कोशिकाओं की मरम्मत करने का काम करता है.--आईएएनएस Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत या स्किन से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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Feb 2, 2026, 07:03 PM
बाबा नानक दास फार्मा ने मानधन गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया

बाबा नानक दास फार्मा ने मानधन गांव में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया

मंडी अटेली। गांव मांढ़ण में बाबा नानकदास फार्मा की ओर से आयोजित शिविर में 150 लोगों की स्वास्थ्य की जांच हुई। इस मौके डॉ. नवीन, डॉ. प्रदीप राठौड़ व डॉ. शिल्पा ने शिविर में आए सभी कि स्वास्थ्य जांच कर निशुल्क दवाइयां दी। डॉक्टरों ने बताया कि सर्दी के दौरान कई बीमारियां होती हैं। इसके चलते स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है। वर्तमान समय में स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होना बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से आप तमाम बीमारियों से बचाव कर सकते हैं। इस मौके पर सरपंच सुरेंद्र, योगेश व हेमंत के अलावा अन्य मौजूद थे। संवादऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
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Feb 2, 2026, 04:10 PM
गर्भनिरोधक विकल्पः अस्वास्थ्यकर आदतों वाली महिलाओं के लिए एक चेतावनी नोट

गर्भनिरोधक विकल्पः अस्वास्थ्यकर आदतों वाली महिलाओं के लिए एक चेतावनी नोट

Best Contraceptive in Hindi:अनचाहीप्रेग्नेंसीचिंता का विषय हो सकती है. सही जानकारी और उचित गर्भनिरोधक उपाय अपनाकर इसे प्रभावी रूप से रोका जा सकता है, लेकिन बदलते लाइफस्टाइल का असर महिलाओं की आदतों पर भी दिख रहा है. स्मोकिंग और अल्कोहल पीना अब महिलाओं में भी आम होता जा रहा है. ऐसे में प्रेग्नेंसी को रोकने के लिए हार्मोनल गर्भनिरोधक लेना सही नहीं माना जा सकता है.डॉक्टर अमृता राजदान कौलस्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार जो महिलाएं ड्रिंक करती हैं या जिनके मल्टीपल पार्टनर हैं उन्हें हार्मोनल गर्भनिरोधक लेने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि यह देने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि उनका लिवर ठीक है या नहीं या वह स्मोकिंग या ड्रिंकिंग करती हैं या नहीं.अगर आप स्मोकिंग या ड्रिंकिंग करती हैं और तब हार्मोनल गर्भनिरोधक ले रही हैं, तो डॉक्टर अमृता राजदान के अनुसार स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन हार्मोन्स के डिस्ट्रिब्यूशन और मेटाबोलिज्म को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है. ऐसे में अगर आप इन्हें लेती हैं, तो गर्वनिरोध के बजाय आपके शरीर को कई तरह के साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है. इतना ही नहीं उन्होंने आगे बताया यह आदतें महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं.सबसे अच्छा गर्भनिरोधक कौन सा है? | How To Choose The Right Birth Controlअगर आप अपना लाइफस्टाइल नहीं बदलना चाहती हैं, तो डॉक्टर के मुताबिक आप कॉपर टी या आईयूडी की मदद ले सकती हैं. यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है, इसमें कोई हार्मोन नहीं होता है और यह अपना काम धीरे-धीरे करता है. दूसरा, डॉक्टर ने बताया अगर आपके मुटलिपल पार्टनर हैं, तो कॉन्डम या डाइफ्रैम का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. यह न केवल गर्भनिरोध में मदद कर सकते हैं, बल्कि यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) से भी बचाव करवा सकते हैं.इसे भी पढ़ें:Bujho To Jane: किस देश को कहा जाता है काला सोना?(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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Feb 2, 2026, 02:46 PM
उत्तान मंडुकासन के लाभः योग के माध्यम से गर्दन दर्द, कंधे की कठोरता और पीठ के तनाव से राहत मिलती है।

उत्तान मंडुकासन के लाभः योग के माध्यम से गर्दन दर्द, कंधे की कठोरता और पीठ के तनाव से राहत मिलती है।

Uttana Mandukasana Benefits:लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप पर काम करना, गलत पॉश्चर में बैठना और तनाव भरी दिनचर्या शरीर को धीरे-धीरे थका देती है. ऐसे में गर्दन के दर्द, कंधों की जकड़न या पीठ में खिंचाव जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं. अगर आप भी इस तरह की किसी समस्या से परेशान हैं तो आपको नियमित रूप से उत्तान मंडूकासन करना चाहिए.उत्तान मंडूकासन क्यों करना चाहिए?योग केवल कुछ आसन करने का नाम नहीं है, बल्कि यह जीने की एक कला है, जो हमें अपने शरीर और मन दोनों के साथ संतुलन बनाना सिखाती है. नित्य योग के साथ अगर आप अपनी दिनचर्या को थोड़ा सा अनुशासित कर लें, तो इसका असर बहुत जल्दी महसूस होने लगता है. अगर आप अपने रोजाना के व्यायाम में उत्तान मंडूकासन को शामिल करते हैं, तो यह न सिर्फ शरीर को राहत देता है बल्कि अंदर से नई ऊर्जा भी भर देता है.उत्ताना मंडुकासन के क्या फायदे हैं?उत्तान मंडूकासन खास तौर पर पीठ दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी को खिंचाव देता है और जकड़न को कम करने में मदद करता है, इसके नियमित अभ्यास से ग्रीवा यानी गर्दन से जुड़ी तकलीफों में भी राहत मिल सकती है जो आजकल लगभग हर उम्र के लोगों की समस्या बन चुकी है.कौन सा आसन फेफड़ों को मजबूत रखने में मदद करता है?यह आसन कंधों के आसपास जमी हुई अकड़न को धीरे-धीरे खोलता है, जिससे कंधे हल्के और मुक्त महसूस होते हैं साथ ही, छाती का विस्तार होने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे सांस लेना सहज और गहरा हो जाता है. जब सांस बेहतर होती है, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी अच्छा रहता है और थकान कम महसूस होती है.पेट के लिए कौन सा आसन सबसे अच्छा है?उत्ताना मंडुकासन का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक असर डालता है. पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ने से पाचन क्रिया सक्रिय होती है और गैस, अपच जैसी समस्याओं में लाभ मिल सकता है.इसे भी पढ़ें:Gharelu Nuskhe: भूख न लगती हो तो क्या करना चाहिए? अपनाएं ये उपाय बढ़ जाएगी भूख(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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Feb 2, 2026, 01:00 PM
निरंतरता के मामलेः नींद की अनुसूची और समग्र स्वास्थ्य के बीच का संबंध

निरंतरता के मामलेः नींद की अनुसूची और समग्र स्वास्थ्य के बीच का संबंध

नींद हमारे स्वस्थ रहने में अहम रोल प्ले करती है, इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि रोजाना एक व्यस्क व्यक्ति को कम से कम 7 से 8 घंटे की प्रॉपर नींद लेनी ही चाहिए, लेकिन नई स्टडी कहती है कि सिर्फ 7-8 घंटे की स्लीप लेना ही काफी नहीं होता है, बल्कि ये भी जरूरी है कि आप रोजाना एक ही टाइम पर सोएं. अगर आप भी हर दिन अलग-अलग समय पर सोते हैं तो ये हेल्थ प्रॉब्लम को बढ़ावा देना है. मॉर्डन लाइफस्टाइल में ज्यादातर लोग इररेगुलर स्लीप प्रॉब्लम से गुजर रहे हैं और यही वजह है कि वो कम उम्र में ही कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. इस नई स्टडी को लेकर एक्सपर्ट से जान लेते हैं कि बीमारियों और नींद का क्या कनेक्शन होता है. अलग-अलग टाइम पर सोने से क्या-क्या हेल्थ इशू हो सकते हैं. आज के टाइम में जहां कुछ लोग काम के बोझ के चलते समय पर नहीं सो पाते हैं तो वहीं कुछ लोगों को स्क्रीन स्क्रॉल करते रहने की आदत होती है, इसलिए वो देर रात तक जागते रहते हैं जो पहले ही नुकसानदायक है. ऐसे में अगर आप एक दिन 10, दूसरे दिन 11 और इसी तरह से फ्रीक्वेंटली सोने की टाइमिंग चेंज करते रहते हैं तो इससे भी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है.साइंस जर्नल, हेल्थ डेटा साइंसमें पब्लिश की गई स्टडी में बताया गया है कि 88,461 लोगों पर वियरेबल डिबाइस की मदद से नींद के पैटर्न को ट्रैक किया गया. जिसमें पता चला कि रोजाना अलग-अलग टाइम पर सोने या देर रात तके जागते रहने से बीमारियों का जोखिम बढ़ता है. अब इस बारे में एक्सपर्ट से जान लेते हैं. कैलाश दीपक हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉक्टर बिपिन कुमार शर्मा हाल ही में नेचर मेडिसनल जर्नल में एक स्टडी पब्लिश हुई है. जिसमें एक एआई मॉडल को ट्रेंड किया गया था. जिसमें इस मॉडल को 65 हजार से ज्यादा लोगों के पॉलीसोब्नोग्राफ से ट्रेंड किया गया. पॉलीसोब्नोग्राफ बेसिकली हमारी स्लीप के एनालिसिस की स्टडी को कहते हैं. ये मॉडल अब 130 से ज्यादा डिजीज के रिस्क को हमें बता सकता है. आजकल डॉक्टर वैसे भी स्लीप हाइजीन की बात करते हैं. एडेक्वेट स्लीप के साथ-साथ गुड क्वालिटी ऑफ स्लीप की बात होती है. डॉक्टर बिपिन कुमार शर्मा का कहना है कि नींद हमारे रूटीन का अभिन्न हिस्सा है जो एक नेचुरल प्रोसेस है. ह्यूमन्स अपनी लाइफ का करीब एक तिहाई हिस्सा सोते हुए गुजारते हैं, जो कि नींद हमारे स्वस्थ रहने के लिए जरूरी भी है. अच्छी नींद हमें कई बीमारियों से भी बचाती है. खराब स्लीप की वजह से मोटापा, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, डिमेंशिया, स्ट्रोक, डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती हैं. डॉक्टर कहते हैं कि ये हमारे इम्यून सिस्टम के लिए भी जरूरी है कि अच्छी नींद लें. इनएडीक्वीट स्लीप की वजह से इम्यून सिस्टम कमजोर रहता है, जिससे इनफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. Image:getty अब सवाल उठता है कि कितनी ड्यूरेशन की नींद जरूरी है. एक्सपर्ट कहते हैं कि ऑन एंड एवरेज एडल्ट के लिए 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी है. छोटे बच्चों और टीनएज में ये ड्यूरेशन थोड़ा ज्यादा है. हमें न सिर्फ एडेक्वेट (जरूरत के मुताबिक) नींद लेनी चाहिए, बल्कि एक गुड क्वालिटी स्लीप होनी चाहिए यानी रात में नींद बार-बार न खुले, किसी तरह का कोई डिस्टर्बेंस न हो. यशोदा हॉस्पिटल हैदराबाद के स्पोक्सपर्सन, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी कहते हैं कि हमारे शरीर के अंदर एक बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm) होती है. अगर आप इररेगुलर स्लीप लेते हैं तो इसमें कुछ मिस एलाइनमेंट हो सकता है, जो आपके शरीर के दूसरे सिस्टम पर भी असर डालता है. जैसे उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो हार्मोन रिलेटेड फ्लक्चुएशन हो सकता है. यूजुअली हमारे शरीर में थायराइड हार्मोन, कार्टिसोल, और ग्रोथ हार्मोन अर्ली मॉर्निंग के टाइम पीक पर होते हैं और लेट नाइट में ये लोएस्ट लेवल पर होते हैं, इसलिए खराब नींद हमारे हार्मोन इंबैलेंस से रिलेट करती है. डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी का कहना है कि खराब नींद की वजह से हमारे हंगर हार्मोन (Ghrelin And Leptin) भी बढ़ते हैं. इस वजह से आप जंक फूड और एक्स्ट्रा कैलोरी लेने लगते हैं. इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या भी हो सकती है, जिससे डायबिटीज की संभावना बढ़ती है. ये आपके अंदर इमोशनल डिस्टर्बेंस भी बढ़ाता है जैसे डिप्रेशन एंग्जाइटी और इरिटेबिलिटी और इससे मेमोरी (मेमोरी कंसोलिडेशन कहते हैं) पर भी बुरा असर पड़ता है. अगर आप प्रॉपर नींद नहीं लेते हैं तो आपको डे टू डे एक्टिविटी में प्रॉब्लम हो सकती है. नींद के पैटर्न को सुधारने के लिए रोजाना कोशिश करें कि एक ही टाइम पर बिस्तर पर जाएं. नींद अच्छी आए इसके लिए इवनिंग की कॉफी और चाय को स्किप करें, क्योंकि कैफीन लेने से नींद में रुकावट आ सकती है. इसके अलावा शाम को थोड़ी हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए. आप सोने से पहले गुनगुने पानी से बाथ ले सकते हैं, साथ ही अपना स्क्रीन टाइम रिड्यूस करना चाहिए. ये भी पढ़ें:दवाओं से रहेंगे दूरअपने रूटीन में कर लें बस ये 3 बदलाव, सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए
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Feb 2, 2026, 11:42 AM
शीतकालीन आहार जोखिमः ठंड के मौसम में कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से कैसे बचें

शीतकालीन आहार जोखिमः ठंड के मौसम में कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से कैसे बचें

सर्दियों के मौसम में खानपान में कई बदलाव हो जाते हैं. इस मौसम में लग गर्मियों की तुलना में अधिक खाते हैं. डाइट में तली भुनी चीजों और मीठा भोजन बढ़ जाता है. लेकिन इस मौसम में खानपान का ध्यान रखना जरूरी है. अनजाने में कुछ ऐसा ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए जो तेजी से बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता हो. इस मौसम में क्या चीजें कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकती हैं, इसके बारे में आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने बताया है. पहले ये जान लेते हैं कि इस मौसम मेंकोलेस्ट्रॉलबढ़ने का रिस्क क्यों होता है. डॉ गिरि बताते हैं कि सर्दियों में लोग ज्यादा भोजन करते हैं तो शरीर में कैलोरी भी अधिक जाती है. गर्मियों की तुलना में लोग एक्सरसाइज भी कम ही करते हैं. इन कारणों से शरीर में फैट जमा होने लगता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है. ऐसे में खास सावधानी बरतने की जरूरत है. कुछ फूड आइटम ऐसे हैं जिनको नहीं खानाचाहिए या फिर कम मात्रा में ही खाना ठीक है. ज्यादा घी वाली सब्जियां डॉ सुभाष बताते हैं कि अगर आप किसी भी सब्जी में घी डालते हैं और घी गर्म होता है तो ये नुकसानदेह हो सकता है. इसमें सैचुरेटेड फैट अधिक होता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है. सर्दियों में आपको सीमित मात्रा में घी खाना चाहिए. घी के अलावा सभी तरह की तली-भुनी चीजें जैसे कि समोसा, कचौड़ी या पकौड़े खाने से भी परहेज करें. ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें रिफाइंड तेल का यूज होता है जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉव की मात्रा को बढ़ा सकता है. रेड मीट मौसम कोई भी हो ज्यादा मात्रा में रेड मीट खाना आपकी सेहत को बिगाड़ सकता है. इसमें अधिक मात्रा में फैट और कोलेस्ट्रॉल होता है. ऐसे में इसको कम मात्रा में खाएं. अगर आप हार्ट के मरीज हैं तोइसका सेवन न करने की सलाह दी जाती है. इन चीजों के अलावा आपको सर्दियों में अधिक मात्रा में मीठा खाने से भी बचना चाहिए. रोज़ 30 मिनट वॉक करें हल्की एक्सरसाइज भी ज़रूर करें डाइट में हरे सब्जियां और फलों को शामिल करें कोलेस्ट्रॉल की महीने में एक बार जांच जरूर करा लें सीन में तेज दर्द और हाथ तक जा रहा हो चलते समय सांस फूलना थकान बैचेनी
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Feb 2, 2026, 11:13 AM
उबला हुआ अंडा बनाम आमलेटः वजन घटाने के लिए कौन सा प्रोटीन-समृद्ध विकल्प सबसे अच्छा है?

उबला हुआ अंडा बनाम आमलेटः वजन घटाने के लिए कौन सा प्रोटीन-समृद्ध विकल्प सबसे अच्छा है?

Boiled Egg Vs Omelette:आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टइल को लेकर लोग काफी जागरूक हो रहे हैं. ऐसे में हेल्दी डाइट हैबिट्स हर व्यक्ति फॉलो करना चाहता है. खासकर फिटनेस और जीम करने वाले लोग अपने प्रोटीन इनटेक को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं और इसकी कमी पूरी करने के लिए डाइट में 'अंडा' जरूर शामिल करते हैं. अंडे को लेकर अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि उबला अंडा खाना ज्यादा फायदेमंद है या ऑमलेट. ऐसे में इस खबर में हम आपको इसके बारे में बताएंगे, साथ ही ये भी बताएंगे कि वेट लॉस और वेट गेन में कैसे अंडा खाना चाहिए. वेट लॉस के लिए क्या है बेहतर?अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं, तो उबला अंडा आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है. उबले अंडे में तेल या मक्शन नहीं होता, इसलिए इसमें कैलोरी कम होती है. ये प्रोटीन से भरपूर होता है, जो पेट को देर तक भरा रखता है और बार-बार भूख नहीं लगते देता. ऐसे में सुबह रोजाना नाश्ते में 1 से 2 उबला अंडा खाने से मेटाबॉलिज्म अच्छा रहता है, इससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है. इसलिए डाइटिंग करने वाले लोगों के लिए उबला अंडा खाना ज्यादा फायदेमंद होता है. वेट गेन के लिए क्या है सही?वहीं दूसरी तरफ अगर आप वेट बढ़ाना चाहते हैं, तो ऑमलेट आपके लिए बेहतर हो सकता है. इसे बनाते समय तेल, मक्खन, प्याज, टमाटर और कभी-कभी चीज का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे इसकी कैलोरी बढ़ जाती है, जो वेट गेन में मदद करती है. ऐसे में वर्कआउट करने वाले लोग जब ऑमलेट खाते हैं, तो उन्हें ज्यादा एनर्जी मिलती है और मसल्स बनाने में भी मदद करता है. सही मात्रा में ऑमलेट खाने से हेल्दी तरीके से वेट बढ़ाया जा सकता है. सेहत के हिसाब से कौन सा है फायदेमंद?सेहत के हिसाब से दोनों ही आपके लिए फायदेमंद है. बस सही तरीके और सही मात्रा में खाना चाहिए. अगर आप कम तेल में ऑमलेट बनाते हैं, तो वो भी आपके लिए हेल्दी हो सकता है. वहीं उबले अंडे रोजाना खाने से बॉडी को जरूरी प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं. हालांकि ये भी ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा अंडे खाना किसी के लिए भी सही नहीं होता. Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत या स्किन से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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Feb 2, 2026, 10:39 AM
घर पर स्वस्थ सोया स्टिक्स नमकीन बनाएँः प्रोटीन से भरपूर नाश्ते के लिए एक सरल विधि

घर पर स्वस्थ सोया स्टिक्स नमकीन बनाएँः प्रोटीन से भरपूर नाश्ते के लिए एक सरल विधि

How To Make Soya Sticks Namkeen In Hindi: शाम की चाय के साथ अगर कुछ कुरकुरा और स्वादिष्ट मिल जाए तो मजा ही आ जाता है। ऐसे में अगर आप रोज-रोज बाजार की नमकीन खाने से बोर हो चुके हैं और कुछ हेल्दी ट्राय करना चाहते हैं, तो सोया स्टिक्स नमकीन एक बढ़िया ऑप्शन हो सकता है। यह सोयाबीन के आटे से बनती है, जो प्रोटीन से भरपूर होती है और सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है। बता दें कि इसे घर पर बहुत ही आसान तरीके से बनाया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं इसे आसानी से बनाने की रेसिपी- सोयाबीन में भरपूर प्रोटीन होता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद है। यह नमकीन न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि बाजार की नमकीन के मुकाबले ज्यादा हेल्दी भी है। यह जरूर पढ़ें:Dal Stuffed Samosa Recipe: शाम की चाय के साथ घर पर बनाएं मूंग दाल के मसाले वाला टेस्टी समोसा, बेहद आसान है रेसिपी
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Feb 2, 2026, 10:11 AM
भारत के सफेदपोश नौकरी बाजार में गैर-आईटी क्षेत्रों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है

भारत के सफेदपोश नौकरी बाजार में गैर-आईटी क्षेत्रों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है

India Job Sector:भारत में व्हाइट कॉलर जॉब्स तेजी से बढ़ रही है. जनवरी 2026 में इसमें 3 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. नॉन आईटी ने तेजी के साथ नौकरियां और रोजगार पैदा किए हैं. भारत में व्हाइट-कॉलर नौकरियों की भर्ती ने साल 2026 की शुरुआत स्थिर रफ्तार के साथ की है. जनवरी महीने में भर्ती में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस बढ़त की सबसे बड़ी वजह नॉन-आईटी सेक्टर और फ्रेशर्स की भर्ती रही. किस सेक्टर्स में बढ़ रहे हैं रोजगार सोमवार को जारी नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-आईटी सेक्टर इस बढ़ोतरी के मुख्य कारण रहे. इसमें बीपीओ/आईटीईएस सेक्टर में 21 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई. वहीं हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल सेक्टर में 15 प्रतिशत से अधिक, इंश्योरेंस सेक्टर में 7 प्रतिशत से ज्यादा और हेल्थकेयर सेक्टर में 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई. रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं उन प्रमुख गैर-आईटी क्षेत्रों में से एक थीं जिनमें गिरावट देखी गई. इसमें सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की गिरावट आई. आईटी का क्या है हाल वहीं, आईटी क्षेत्र में पूरे महीने कोई बदलाव नहीं हुआ और यह लगभग स्थिर रहा. हालांकि, एआई और मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) से जुड़ी नौकरियों में 34 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूत बढ़त देखने को मिली. पिछले तीन महीनों से बीपीओ/आईटीईएस सेक्टर लगातार टॉप 5 सेक्टरों में शामिल रहा है, जहां सालाना आधार पर दो अंकों में ग्रोथ देखी गई है. जनवरी 2026 में बीपीओ/आईटीईएस सेक्टर में कुल भर्ती 21 प्रतिशत बढ़ी. इसमें फ्रेशर्स की भर्ती में 39 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई. वहीं, 13 से 16 साल के अनुभव वाले प्रोफेशनल्स की भर्ती में भी 9 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. इस ग्रोथ में नॉन-मेट्रो शहरों की अहम भूमिका रही. जयपुर में भर्ती 66 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी, जबकि अहमदाबाद में 43 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई.रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों (एमएनसी) ने इस तेजी में बड़ी भूमिका निभाई. इन कंपनियों की भर्ती गतिविधियों में 80 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. नौकरी डॉट कॉम के चीफ बिजनेस ऑफिसर डॉ. पवन गोयल ने कहा कि बीपीओ/आईटीईएस और हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टरों में लगातार सालाना ग्रोथ देखना उत्साहजनक है. इन सेक्टरों ने 2026 की शुरुआत मजबूत और सकारात्मक तरीके से की है. इसके साथ ही भारतीय आईटी एमएनसी की अच्छी परफॉर्मेंस भी जॉब मार्केट के लिए अच्छा संकेत है. भौगोलिक दृष्टि से भर्ती में इस बढ़ोतरी की अगुवाई पुणे ने की, जहां 23 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त रही. इसके बाद चेन्नई में 18 प्रतिशत, बेंगलुरु में 17 प्रतिशत और अहमदाबाद में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इससे साफ है कि दक्षिण भारत के बड़े शहरों के साथ-साथ पश्चिमी भारत के उभरते बाजार भी मजबूत योगदान दे रहे हैं. आईएएनएस
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Feb 2, 2026, 09:54 AM
गर्दन दर्द से राहत-दैनिक योग अभ्यास की शक्ति की खोज

गर्दन दर्द से राहत-दैनिक योग अभ्यास की शक्ति की खोज

Neck Pain Relief Yoga: आज के डिजिटल युग में मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है. घंटों-घंटों तक लैपटॉप पर काम करना, लगातार मोबाइल स्क्रॉल करना, गलत पॉश्चर में बैठना और स्ट्रेसफुल लाइफस्टाइल बॉडी और माइंड को धीरे-धीरे थका देता है. इसका नतीजा ये होता है कि गर्दन के दर्द, कंधों की जकड़न और पीठ में खिंचाव जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं. ऐसे में अगर आप भी इस तरह की किसी समस्या हैं, तो योग आपकी मदद कर सकता है. इस खबर में हम आपको उत्तानमंडूकासन के बारे में बताएंगे, जिसे रोजाना करने से आपको इन समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. योग का शरीर पर असरयोग केवल कुछ आसन करने का नाम नहीं है, बल्कि यह जीने की एक कला है, जो हमें अपने शरीर और मन दोनों के साथ संतुलन बनाना सिखाती है. नित्य योग के साथ अगर आप अपनी दिनचर्या को थोड़ा सा अनुशासित कर लें, तो इसका असर बहुत जल्दी महसूस होने लगता है. अगर आप अपने रोजाना के व्यायाम में उत्तानमंडूकासन को शामिल करते हैं, तो यह न सिर्फ शरीर को राहत देता है बल्कि अंदर से नई ऊर्जा भी भर देता है. किन लोगों के लिए उत्तानमंडूकासन है फायदेमंद?उत्तानमंडूकासन खास तौर पर पीठ दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी को खिंचाव देता है और जकड़न को कम करने में मदद करता है. इसके नियमित अभ्यास से ग्रीवा यानी गर्दन से जुड़ी तकलीफों में भी राहत मिल सकती है जो आजकल लगभग हर उम्र के लोगों की समस्या बन चुकी है. उत्तानमंडूकासन के फायदेयह आसन कंधों के आसपास जमी हुई अकड़न को धीरे-धीरे खोलता है, जिससे कंधे हल्के और मुक्त महसूस होते हैं. साथ ही, छाती का विस्तार होने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे सांस लेना सहज और गहरा हो जाता है. जब सांस बेहतर होती है, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी अच्छा रहता है और थकान कम महसूस होती है. डाइजेशन के लिए बेहद फायदेमंदउत्तानमंडूकासन का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक असर डालता है. पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ने से पाचन क्रिया सक्रिय होती है और गैस, अपच जैसी समस्याओं में लाभ मिल सकता है।--आईएएनएस Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत या स्किन से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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Feb 2, 2026, 09:21 AM
स्वस्थ त्वचा को खोलनाः महंगी क्रीमों से परे एक समग्र दृष्टिकोण

स्वस्थ त्वचा को खोलनाः महंगी क्रीमों से परे एक समग्र दृष्टिकोण

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ महंगी क्रीम और सीरम आपकी स्किन को हेल्दी बनाए रखेंगे, तो आप सिर्फ एक पहलू पर ध्यान दे रहे हैं। दरअसल, हमारी स्किन की हेल्थ इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि हमारा खान-पान सही है या नहीं।
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Feb 2, 2026, 09:00 AM
बेसन दूध के पोषण संबंधी लाभों को खोलेंः सभी उम्र के लिए एक पावर-पैक पेय

बेसन दूध के पोषण संबंधी लाभों को खोलेंः सभी उम्र के लिए एक पावर-पैक पेय

Besan Milk Benefits:आज-कल लोग अपनी लाइफ में सही खानपान पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। सुबह से रात तक की भागदौड़ शरीर में थकान, कमजोरी और एनर्जी की कमी पैदा कर देती है। ऐसे में लोग ऐसे पौष्टिक ड्रिंक की तलाश में रहते हैं जो जल्दी ताकत दे और सेहत को भी मजबूत बनाए। बेसन वाला दूध इसी जरूरत को पूरा करता है। स्वाद में रबड़ी जैसा यह ड्रिंक पीते ही शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है और लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करता है। इसे आप सुबह नाश्ते में या शाम की स्नैक्स के साथ आसानी से शामिल कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं इसे पीने के फायदे और बनाने के तरीके के बारे में... हड्डियों और दांतों को बनाए मजबूत दूध कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूती बना देता है। जब इसमें बेसन मिलाया जाता है, तो इसका असर और ज्यादा बढ़ जाता है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद होता है। डायबिटीज को कंट्रोल करने में सहायक बेसन वाला दूध डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा ऑप्शन माना जाता है। इसमें पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस रखने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे सुबह और शाम लिया जा सकता है। वजन को कंट्रोल करने में मददगार बेसन में प्रोटीन और फाइबर मौजूद होते हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और अनहेल्दी स्नैक्स खाने की इच्छा कम हो जाती है। जो लोग वजन कंट्रोल करना चाहते हैं, उनके लिए यह ड्रिंक काफी फायदेमंद है। स्किन और बालों के लिए फायदेमंद बेसन को स्किन के लिए बेस्ट माना जाता है, लेकिन जब इसे दूध के साथ पिया जाता है तो यह शरीर को अंदर से पोषण देता है। इससे स्किन में नमी बनी रहती है और बाल मजबूत व चमकदार बने रहते हैं। डाइजेशन को बनाए मजबूत फाइबर से भरपूर बेसन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। यह कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। दूध के साथ मिलकर इसके फायदे और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं।
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Feb 2, 2026, 08:46 AM
ऋतिक रोशन की कसरत के बाद की भोजन दिनचर्या-बॉलीवुड के ग्रीक भगवान के फिटनेस नियम की एक झलक

ऋतिक रोशन की कसरत के बाद की भोजन दिनचर्या-बॉलीवुड के ग्रीक भगवान के फिटनेस नियम की एक झलक

Hrithik Roshan Post Workout Meal:बॉलीवुड की दुनिया के ग्रीक गॉड कहलाने वाले ऋतिक रोशन अपनी दमदार बॉडी और डिसिप्लिन लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं. कृष एक्टर जैसी बॉडी हर कोई चाहता है, अक्सर ही एक्टर सोशल मीडिया पर अपनी एक्सरसाइज करते हुए फोटोज और वीडियो फैंस के साथ शेयर करते हैं. हाल ही में उन्होंने अपने पोस्ट-वर्कआउट मील की एक झलक दिखाई, जिसमें देसी और हेल्दी खाने का बेहतरीन कॉम्बिनेशन दिखा. फिटनेस आइकन ऋतिक का यह मील न सिर्फ टेस्टी है, बल्कि शरीर को ताकत और एनर्जी देने वाला भी है. आइए जानते हैं किऋतिक रोशनअपने पोस्ट वर्कआउट में क्या-क्या खाते हैं और इससे शरीर को क्या फायदे मिलते हैं. ऋतिक रोशन ने एक प्लेट की फोटो इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की है, जिसमें ज्वार की रोटी, भिंडी, चुकंदर, बैंगन, पापड़ी और लौकी, एग व्हाइट और दाल नजर आ रहे हैं. ऋतिक के इस मील की सबसे खास चीज है ज्वार की रोटी. ज्वार ग्लूटेन-फ्री अनाज है, जो डाइजेशन में आसान होता है. इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और वजन कंट्रोल करने में मदद करता है. ज्वार की रोटी ब्लड शुगर को भी बैलेंस रखने में मददगार मानी जाती है, इसलिए यहफिटनेसफ्रीक्स की पहली पसंद बन चुकी है.
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Feb 2, 2026, 08:44 AM
हल्दी का दूध बनाने का सही तरीका-इष्टतम स्वास्थ्य लाभों के लिए सामान्य गलतियों से बचना

हल्दी का दूध बनाने का सही तरीका-इष्टतम स्वास्थ्य लाभों के लिए सामान्य गलतियों से बचना

अंदरूनी चोट को जल्दी ठीक करना हो या अच्छी नींद की हो ख्वाहिश, हल्दी वाला दूध, जिसे गोल्डन मिल्क भी कहा जाता है, पीढ़ियों से कई भारतीय घरों में सोने से पहले पीने की परंपरा बनी हुई है। गले की खराश से राहत देने से लेकर बेहतर नींद में मदद करने तक के लिए, इस पेय को लोग अक्सर घरेलू रामबाण उपाय की तरह देखते हैं। सेहत के लिए हल्दी वाले दूध के अनगिनत फायदों के बावजूद कई बार अनजाने में इसे बनाते समय की गई एक छोटी सी गलती सेहत को फायदों की जगह नुकसान पहुंचाने लगती है। ऐसे में 'गोल्डन मिल्क' के सेहत से जुड़े फायदों का पूरा लाभ उठाने के लिए हमने फोर्टिस हॉस्पिटल (गुड़गांव) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. रिंकेश कुमार बंसल से जानने की कोशिश की आखिर क्या है हल्दी वाला दूध बनाने का सही तरीका और इसे बनाते समय लोग अक्सर क्या गलती करते हैं। KHETIKAKhetika Turmeric Powder 400g | Toxin Free Haldi | Traditional Stone Ground | High Curcumin & Natural Oils | No Artificial Colours | Authentic Taste & Aroma IAgriFarmIagrifarm Black Kali Haldi Root - 450 g/Karumanjal/Black Turmeric/Kali Haldi Root Eagerfit OrganicEagerfit Organic Black Pepper Powder (Kali Mirch Powder) - 100 Gram SANBAG NATURE FARMSANBAG NATURE FARM | Organic Black Pepper Powder | 100g, Pure Ground Black Pepper, Product of India | Sourced from certified organic farms bringing 100% our extraordinary Organic Black Pepper, Grown with utmost care and dedication, this exquisite spice carries flavour and health benefits within its tiny grains. ORGUREOrgure Turmeric Super Blend | Lakadong Turmeric with Black Pepper & A2 Ghee | Helps Curcumin Absorption | Immunity & Wellness Support | Pet Jar | 1Kg Pack GenericRoots & Spices Lakadong Turmeric Powder 250g from Meghlaya |Lab-Tested High Curcumin powder(7-12%) | Pure, Natural Haldi | from Jaintia Hills Meghalaya | Immunity & Anti-Inflammatory Properties Vegan & Gluten-Free | Best For Golden Milk जब हल्दी को अत्यधिक गर्म दूध में डाला जाता है, तो उसके कुछ पोषक तत्व, खासकर कर्क्यूमिन (Curcumin), ज्यादा तापमान की वजह से प्रभावित हो सकते हैं। कर्क्यूमिन हल्दी का मुख्य सक्रिय घटक है, जो सूजन कम करने और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जिम्मेदार होता है। अधिक गर्मी इसके प्रभाव को घटा सकती है, जिससे आपको वह पूरा स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता जिसकी आप उम्मीद करते हैं। हल्दी वाला दूध बनाते समय की जाने वाली दूसरी बड़ी गलती यह है कि इसमें काली मिर्च या हेल्दी फैट को न मिलाना। कर्क्यूमिन शरीर में अपने आप अच्छी तरह अवशोषित नहीं होता। यदि हल्दी वाले दूध में चुटकीभर काली मिर्च (जिसमें पाइपरीन होता है) या घी, नारियल तेल, या फुल-फैट दूध जैसी वसा न हो, तो हल्दी का बड़ा हिस्सा शरीर से बिना ठीक से अवशोषित हुए निकल जाता है। कुछ परिवार यह सोचकर ज्यादा हल्दी डाल देते हैं कि ज्यादा मात्रा का मतलब ज्यादा फायदा होगा। जबकि सच्चाई यह है कि अधिक हल्दी पेट में जलन, गैस या मितली का कारण बन सकती है। खासकर तब अगर आप इसे रोजाना लेते हैं। हल्दी वाला दूध बनाने के लिए दूध को सिर्फ गर्म करें, उबालें नहीं। इसके बाद इसमें ¼ से ½ चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं। इसके बाद एक चुटकी काली मिर्च दूध में जरूर डालें। फिर कुछ बूंदें घी या फुल-फैट दूध का उपयोग करें। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर 2 मिनट रखने के बाद फिर पिएं। स्वाद और फायदे बढ़ाने के लिए अदरक, दालचीनी या शहद (दूध थोड़ा ठंडा होने के बाद) भी मिलाया जा सकता है।
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Feb 2, 2026, 08:39 AM
बजट 2026 में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को बढ़ावा मिला

बजट 2026 में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को बढ़ावा मिला

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2026 में स्वास्थ के क्षेत्र के लिए भी कई घोषणाएं की हैं. इनमें देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निर्माण से लेकर बुजुर्गों के लिए भी खास ऐलान किए गए हैं. बजट 2026 पर अपोलो हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बजट को देश के हेल्थ सिस्टम को मज़बूत करने वाला बताया है. डॉ रेड्डी ने कहा कि बजट में वित्त मंत्री ने जो घोषणाएं की हैं उनसे आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी और रिसर्च में भी काफी फायदा होगा. डॉ. रेड्डी ने कहा किबजटमें पब्लिक हेल्थ कैपेसिटी बढ़ाने, प्रिवेंशन पर ज़ोर देने और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया गया है. बजट में बायो फार्मा शक्ति पहल का भी जिक्र किया गया है. इसकी मदद से भारत के लाइफ साइंसेज़ और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सकता है. इसके तहत नए रिसर्च संस्थानों के साथ-साथ देशभर में 1000 मान्यता प्राप्त क्लीनिकल ट्रायल साइट्स भी विकसित की जाएंगी. इससे मेडिकल के क्षेत्र में रिसर्च और बढेंगी और कई बीमारियों के इलाज की दिशा में भी काम किया जा सकेगा. डॉ. रेड्डी के मुताबिक, यह कदम एडवांस्ड थैरेपीज़ के विकास को तेज़ करेगा और भारत को हेल्थकेयर हब के रूप में और मजबूत बनाएगा. ज्यादा रिसर्च होने से नए इलाज से लेकर खतरनाक बीमारियों की वैक्सीन पर भी काम किया जा सकेगा. डॉ रेड्डी ने कहा कि बजट में मेडिकल टूरिज्म के लिए पांच हब बनाने का भी जिक्र किया गया है. इससे राज्यों में मेडिकल टूरिज्म और बढे़गा. डॉ. रेड्डी ने कहा कि बजट में वित्त मंत्री ने NIMHANS-2 की स्थापना का ऐलान भी किया है. इसके तहत देश में रांची और तेजपुर में नए संस्थान बनेंगे, जिससे मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के अपग्रेडेशन में मदद मिलेगी. इस कदम से मानसिक स्वास्थ्य की खराबी वाले मरीजों को इलाज की और बेहतर सुविधा मिल सकेगी. यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में आ रही किसी भी प्रकार की कमी को दूर करने में भी मदद करेगा. बजट में36 जीवनरक्षक दवाओं को ड्यूटी फ्री करने का फैसला लिया गया है. इससे मरीजों के इलाज का खर्च कम होगा.डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने कहा कि अपोलो हॉस्पिटल्स सरकार के साथ मिलकर इन घोषणाओं को जमीनी स्तर पर बेहतर बनाने के लिए काम करेगा.
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Feb 2, 2026, 06:54 AM
मोना सिंह की फिटनेस यात्राः चोट से ताकत तक

मोना सिंह की फिटनेस यात्राः चोट से ताकत तक

'बॉर्डर 2' का नाम सबकी जुबान पर है. फिल्म को मिलती तारीफों के चलते लोग इसे देखने के लिए थिएटर्स तक खिंचे चले जा रहे हैं. फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन भी चर्चा में हैं. इसके बीच 'बॉर्डर 2' से जुड़े कलाकार भी लगातार सुर्खियों में हैं. फिल्म में लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कलेर (सनी देओल) की पत्नी के रोल में नजर आ रहीं एक्ट्रेस मोना सिंह को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिल रहा है. 22 साल पहले ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ से घर-घर पहचान बनाने वाली मोना आज भी उतनी ही फ्रेश और फिट नजर आती हैं. कुछ समय पहले एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने फिटनेस और डाइट सीक्रेट का खुलासा किया था.शोल्डर इंजरी के बाद शुरू हुआ फिटनेस का सफरमोना सिंहने बताया कि ‘काला पानी’ की शूटिंग के दौरान उन्हें शोल्डर इंजरी हो गई थी. इसके बाद डॉक्टर्स और दोस्तों की सलाह पर उन्होंने योगा और स्ट्रेचिंग शुरू की. धीरे-धीरे प्राणायाम, लाइट योगा और फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज से उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती गई और वजन भी कम हुआ. जैसे-जैसे उनका वजन कम हुआ उन्हें इंस्पिरेशन मिली और उन्हें महज 6 महीने में अपना 15 किलो वजन घटा लिया.घर का बना प्रोटीन बना गेमचेंजरमोना का कहना है कि फिट रहने के लिए लोगों को महंगे सप्लीमेंट्स लेने की जरूरत नहीं होती. उन्होंने एक्सरसाइज के दौरान बाजार से प्रोटीन खरीदने की बजाय घर पर बना नेचुरल प्रोटीन ड्रिंक अपनी डाइट में शामिल किया, जिसने उन्हें वजन घटाने में मदद की और उन्हें एनर्जेटिक रखने में भी मददगार साबित हुआ.मोना सिंह की होममेड प्रोटीन रेसिपीमोना ने बताया कि उन्हें बाजार में मिलने वाला प्रोटीन बिल्कुल भी पसंद नहीं था. ऐसे में उन्होंने घर पर खुद ड्राई फ्रूट्स और सीड्स से प्रोटीन बनाया. उन्होंने अपनी आसान और टेस्टी रेसिपी भी शेयर की, जो खासतौर पर महिलाओं के लिए फायदेमंद है.इंग्रेडिएंट्स बनाने का तरीका: 1. घर का बना प्रोटीन पाउडर बनाने के लिए सभी ड्राई फ्रूट्स और सीड्स को हल्का सा रोस्ट करें.2. अब इन रोस्टेड ड्राई-फ्रूट्स को ठंडा होने दें. जब ये ठंडे हो जाएं तब इन्हें मिक्सी में अच्छे से पीस लें.
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Feb 2, 2026, 06:46 AM
त्रिफल के स्वास्थ्य लाभों को उजागर करनाः इष्टतम कल्याण के लिए वात दोष को संतुलित करना।

त्रिफल के स्वास्थ्य लाभों को उजागर करनाः इष्टतम कल्याण के लिए वात दोष को संतुलित करना।

Triphala Health Benefits: मानव शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन दोषों का संतुलित रहना बहुत जरूरी है, जिसमें वात, पित्त और कफ शामिल है. सर्दियों में प्राकृतिक रूप से शरीर में वातदोषकी वृद्धि होती है औरजोड़ों में दर्द, पेट से जुड़ी समस्या और हड्डियों से जुड़े रोग परेशान करने लगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक आयुर्वेदिक औषधि वात दोष को संतुलित करने में सहायक है? हम बात कर रहे हैं त्रिफला की, जो सिर्फ पेट से जुड़ी समस्याओं से नहीं बल्कि वात को संतुलित करती है. हालांकि, इसके सेवन करने का तरीका भी इसे प्रभावित करता है.कैसे करें त्रिफला का सेवन- (How To Consume Triphala)आयुर्वेद में माना गया है कि वात की वृद्धि को रोकना है तोत्रिफलाका सेवन वसा के साथ करना लाभकारी होगा. वसा के साथ मिलकर त्रिफला ज्यादा तेजी से काम करता है, जैसे घी के साथ त्रिफला का सेवन. रात के समय एक गिलास गुनगुने पानी में आधा से एक चम्मच त्रिफला और शुद्ध देसी गाय का घी मिलाकर लेना चाहिए. इससे आंतों में चिकनाहट पैदा होती है और विषाक्त पदार्थों को निकालने में आसानी होती है.दूसरा तरीका है 'त्रिफला घृत'. आयुर्वेद में 'त्रिफला घृत' को औषधि माना गया है, जिसमें घी को कई औषधियों के साथ मिलाकर पकाया जाता है. अगर बढ़ते वात दोष से परेशान हैं तो रात के समय 'त्रिफला घृत' का सेवन कर सकते हैं. ये वात को संतुलित करने के साथ पेट से जुड़े रोगों से भी निजात दिलाएगा.तीसरा तरीका है अरंडी के तेल के साथ त्रिफला का सेवन. वात की वृद्धि के साथ पेट में कब्ज की समस्या परेशान करने लगती है. इसके लिए अरंडी के तेल की कुछ बूंदें त्रिफला चूर्ण के साथ मिलाकर पानी के साथ ली जा सकती हैं. इससे आंतों की गतिशीलता बढ़ती है. ध्यान रखने वाली बात ये है कि सर्दियों में शाम और रात के वक्त वात प्राकृतिक रूप से बढ़ने लगता है और ऐसे में रात का खाना खाने के बाद 2 घंटे के गैप के साथ त्रिफला का सेवन करें.वात बढ़ने से होने वाली परेशानियां-वात की वृद्धि से शरीर में जकड़न, कब्ज, तनाव, नींद न आने की परेशानी, जोड़ों में दर्द, बेचैनी और शरीर में कंपन पैदा होने लगता है. ये मानसिक थकान से लेकर शारीरिक दर्द तक को बढ़ा देता है.ये भी पढ़ें-Helmet and Hair Loss: क्या हेलमेट पहनने से बाल झड़ते हैं, क्या करें कि बाल झड़ना बंद हो जाएंGurudev Sri Sri Ravi Shankar on NDTV: Stress, Anxiety, से लेकर Relationship, Spirituality तक हर बात(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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Feb 2, 2026, 06:29 AM
छिपी हुई आदतें जो हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाती हैंः एक वेक-अप कॉल

छिपी हुई आदतें जो हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाती हैंः एक वेक-अप कॉल

अक्सर लोगों को लगता है कि दिल की बीमारियां केवल खराब खानपान के चलते ही होती हैं लेकिन शायद आपको पता नहीं कि कई मामलों में दिल को चोट आपकी कुछ आदतों और गलतियों से भी लगती है. ये चोट ऐसी होती है कि दिल तनाव में चला जाता है और चुपके से स्ट्रोक, हाई बीपी से लेकर हार्ट अटैक तक का खतरा बढ़ने लगता है. ज़्यादातर मामलों में दिल पर पड़ने वाला तनाव धीरे-धीरे बढ़ता है और हमारी रोज की आदतों, सोच और अनदेखी की वजह से बीमारी के खतरे बढ़ जाते हैं. अक्सर हमें पता नहीं होता है कि कुछ आम लेकिन लगातार की जाने वाली गलतियां हृदय पर ऐसा दबाव डालती हैं, जिसका असर वर्षों बाद हार्ट अटैक, हाई बीपी या स्ट्रोक के रूप में सामने आता है. LATEST Attention passengers! Mumbai train services to be affected b GST 2.0 boosts big Navratri sales for Hyundai, Maruti Suzuki Kartik Aaryan makes HUGE investment in Mumbai, buys property PM Modi dials Russian PM Putin over Ukraine strategy amid Tr BAD news for India Pharma, US President Donald Trump slaps 1 Attention passengers! Mumbai train services to be affected b GST 2.0 boosts big Navratri sales for Hyundai, Maruti Suzuki Kartik Aaryan makes HUGE investment in Mumbai, buys property PM Modi dials Russian PM Putin over Ukraine strategy amid Tr BAD news for India Pharma, US President Donald Trump slaps 1 तो चलिए जाने कि वो गलतियां या आदतें कौन सी हैं जिनसे दिल तनाव में आकर अंदर ही अंदर कमजोर बनता जाता है. लगातार तनाव को नॉर्मल समझ लेना अगर आप अक्सर तनाव में रहते हैं और आपको लगता है कि ये तनाव केवल आपके दिमाग तक सीमित है तो यही भूल है आपकी. अक्सर ये तनाव चुपके से दिल को कष्ट देता है. लंबे समय तक तनाव बना रहे तो शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ाता है, जिसकी वजह से दिल की धड़कन असामान्य होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता जाता है और इससे धमनियों पर दबाव पड़ता है. जो लोग कहते हैं वह स्ट्रेस में रहकर भी काम कर लेते हैं हूँ”, उन्हीं में हार्ट-इश्यूज़ का रिस्क ज़्यादा देखा गया है. नींद को कमज़ोरी समझना अगर आपको लगता है कि नींद न आना केवल आपके मूड को ही खराब करता है तो नहीं, ये आपके दिल को भी नुकसान देता है. ये बात समझ लें कि कम नींद सिर्फ थकान नहीं लाती, बल्कि दिल को रिकवरी टाइम से वंचित कर देती है. 6 घंटे से कम नींद लेने वालों में आपको हार्ट रेट वेरिएबिलिटी घटी मिलेगी और इनमें सूजन का रिस्क भी होता है जिससे हार्ट डिज़ीज़ का रिस्क बढ़ता है. बैठी-बैठी ज़िंदगी और ज़ीरो मूवमेंट एक्सरसाइज़ न करना भी एक बुरी आदत है. दिन भर बैठे रहना. अगर आप जिम नहीं जाते या एक्सरसाइज नहीं करते तो समझ लें दिल के लिए ये खतरे की घंटी है. लगातार बैठने रहने से ब्लड सर्कुलेशन स्लो होता है और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है. इससे दिल पर लोड बढ़ता है इसलिए हर घंटे थोड़ा चलने आदत डाल लें. मैं पतला हूं सोचकर जांच न कराना दिल वजन नहीं, लाइफस्टाइल देखता है. बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि पतले शरीर वाले लोग दिल की बीमारी से सुरक्षित हैं. जबकि छुपा हुआ फैट (Visceral Fat), हाई कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन रेजिस्टेंस पतले लोगों में भी पाया जाता है. हार्ट हेल्थ का वजन से सीधा रिश्ता नहीं, बल्कि आदतों से गहरा कनेक्शन है. इमोशनल ओवरलोड लेकर सब कुछ दिल में दबा लेना दिल भावनाओं का भी बोझ उठाने की आदत आपके दिल को कमजोर और तनान देती है ये तो आप समझ गए होंगे लेकि क्या आपको पता है लगातार दुख, गुस्सा, अपराधबोध या अकेलापन भी दिल पर मानसिक दबाव डालता है. रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक भावनाएं दबाने से हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ता है. सामाजिक कनेक्शन की कमी दिल को कमजोर बनाती है. इसलिए समझ लें कि दिल सिर्फ खून नहीं, भावनाएं भी संभालता है. क्यों ज़रूरी है अभी सचेत होना? आज हार्ट डिज़ीज़ सिर्फ बुज़ुर्गों की बीमारी नहीं रही. 30–45 उम्र के लोगों में भी दिल से जुड़ी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं. कारण एक ही है छोटी-छोटी गलतियों को सालों तक दोहराना. दिल को दवा नहीं, समझदारी चाहिए दिल पर तनाव अचानक नहीं पड़ता. यह हमारी रोज़ की आदतों का नतीजा होता है. अगर समय रहते इन 5 गलतियों को पहचाना जाए, तो हार्ट डिज़ीज़ का रिस्क काफी हद तक कम हो सकता है. इसलिए दवाइयों से पहले लाइफस्टाइल ही इलाज करें. अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारेगूगल,फेसबुक,x,इंस्टाग्राम,यूट्यूबऔरवॉट्सऐपकम्युनिटी से
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Feb 2, 2026, 05:34 AM
प्राकृतिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनाः रोग को हराने का एक मार्ग

प्राकृतिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनाः रोग को हराने का एक मार्ग

आज की दुनिया तेज रफ़्तार है, हर कोई भाग रहा है वक्त के पीछे, काम के पीछे, जिंदगी के पीछे, लेकिन एक चीज की स्पीड उससे भी ज्यादा है। वो है 'बीमारी' हम मेडिकल इंश्योरेंस करवाते हैं। अस्पताल ढूंढ़ते हैं और दवाइयों की कीमत गिनते हैं। टेस्ट रिपोर्ट्स में मार्कर चेक करते हैं और सब एहतियात लेते हैं कि बीमारी को हरा सकें। लेकिन कुदरत की जो नेमतें मुफ्त में मिली हैं उन्हें नज़रंदाज़ करते हैं। जी हां, सेहत किसी मशीन में नहीं है सेहत इसी हवा में है, धूप में है, इसी गहरी सांस में है। सवाल ये नहीं कि इस बजट में दवा कितनी सस्ती हुई, सवाल ये है क्या हम बीमारी को शरीर में दाखिल होने से रोक पा रहे हैं? क्योंकि जब इलाज शुरू होता है, तब तक नुकसान हो चुका होता है। लेकिन जब जीवनशैली सुधरती है, तो बीमारी आने की जुर्रत ही नहीं करती। और यही वजह है कि आज हम बात कर रहे हैं उस सेहत की जो अस्पतालों में नहीं, पार्क की वॉक में छुपी है, सांस लेने के सही तरीके में छुपी है और हेल्दी लाइफ जीने के सलीके में छुपी है। जी हां हरियाली, बाग बगीचे और पेड़ पौधे, ये इलाज है, ये दवा है और ये तरीका है लंबी उम्र जीने का। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को रोकने का। इसे 'फॉरेस्ट बेदिंग' कहते हैं। जापान में इसे 'शिनरिन-यो' कहते हैं। ये अपनी पांचों इंद्रियों-सेंसरी सेंस के जरिए जंगल को महसूस करने की प्रक्रिया है। इसमें सबसे पहले है सूरज की रोशनी और हरी पत्तियां को देखना। दूसरा पेड़ों से निकलने वाले कार्बन कम्पाउंड्स को सूंघना। तीसरा पक्षियों की आवाज, हवा की सरसराहट को सुनना। चौथा पेड़ और मिट्टी को छूना और आखिर में ताजी साफ हवा को महसूस करना। इन्हीं कुदरती चीज़ों में छुपी है 'नेचुरल किलर सेल्स' जो शरीर में बनने वाली कैंसर कोशिकाओं और वायरस को शुरुआत में ही खत्म कर देती हैं। बड़ी बात ये कि सिर्फ एक दिन, हरे भरे जंगल में बिताने से इम्यून सिस्टम कई हफ्तों तक मजबूत रहता है। यही वजह है जापान में जहां ग्रीनरी में घूमने की आदत ज्यादा हैं वहां फेफड़े, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर से मौत की रेशियो भी कम है। दरअसल आज सबसे बड़ा जहर 'टेक्नो स्ट्रेस' है। मोबाइल, स्क्रीन, शोर इन सबने इंसान की इम्यूनिटी को कमजोर कर दिया है और ऐसे में जंगल की शांति, इस शोर से बाहर निकलने का सबसे आसान-सस्ता तरीका है। मतलब दवा तो तभी चाहिए जब बीमारी आए, लेकिन अगर हर रोज थोड़ी हरियाली, थोड़ी हवा, थोडा सुकून जिंदगी में शामिल हो जाए, तो शायद दवा की जरूरत पड़े ही ना। आइये स्वामी रामदेव से जानते हैं बीमारियों को शरीर में दाखिल होने से कैसे रोकें। कैंसर की पहचान अगर सही वक्त पर कर ली जाए तो इससे मरीज की जान बचाना आसान हो जाता है। शुरुआती स्टेज में ठीक होने के चांस भी ज्यादा रहते हैं। 70% लोगों का कैंसर लास्ट स्टेज में डिटेक्ट होता है। हर 9 में से एक पर कैंसर का खतरा मंडरा रहा है। ऑक्सफॉर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में करीब 40% महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की गिरफ्त में हैं। 10 साल में डेथ रेट में कमी तो आई है लेकिन कैंसर तेजी से पैर पसार रहा है। सर्वाइवल रेट 70% तक पहुंचा है। 1 गिलास पानी में घोलकर पी लें आंवला चूर्ण, मिलेंगे फायदे ही फायदे, बीमारियां रहेंगी दूर Latest Health News
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Feb 2, 2026, 05:29 AM
केट डेनियल की वजन घटाने की यात्राः मानसिक शक्ति और स्वस्थ आदतें सफलता की कुंजी

केट डेनियल की वजन घटाने की यात्राः मानसिक शक्ति और स्वस्थ आदतें सफलता की कुंजी

वजन घटाने के लिए अक्सर डाइट, कैलोरी काउंटिंग और एक्सरसाइज पर जोर दिया जाता है. लेकिन कई लोग उस जर्नी के दौरान देखते हैं कि ये जर्नी जितनी आसान लगती है, उतनी आसान है नहीं. आपको अपनी ईटिंग हैबिट्स और लाइफस्टाइल बदलने के लिए मेंटली रूप से मजबूत होना पड़ता है, उसके बाद ही आप वजन कम कर पाते हैं. कुछ समय पहले एक लेडी केट डेनियल ने अपना करीब 70 किलो वजन कम किया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर बताया है कि इतने वेट लॉस के लिए उन्होंने कौन-कौन सी बेसिक चीजों को ध्यान रखा जिससे उन्हें यहां तक पहुंचने में मदद मिली. घर का खाना खायाडेनियल ने बताया कि हमेशावेट लॉसकी शुरुआत किचन से होती है. वह बाहर का जंक फूड काफी खाती थीं इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपनी इस आदत को सुधारा और बाहर का खाना बंद किया. उन्होंने घर पर कुकिंग करना शुरू की और उसी को अपनी डाइट में शामिल किया. पोर्शन कंट्रोल किया डेनियल का मानना है कि आप क्या खा रहे हैं, उससे ज्यादा जरूरी यह है कि आप कितना खा रहे हैं. उन्होंने 'पोर्शन कंट्रोल' यानी कम मात्रा में खाने की तकनीक अपनाई. एक बार अधिक खाने की जगह उन्होंने कई छोटी-छोटी मील खानी शुरू कीं जिससे मेटाबॉलिज्म भी बेहतर हुआ और डाइजेशन सुधरा.
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Feb 2, 2026, 05:23 AM
विटामिन डी की कमीः भारतीय आबादी में बढ़ती चिंता

विटामिन डी की कमीः भारतीय आबादी में बढ़ती चिंता

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।विटामिन-डी की कमी आज एक बेहद आम समस्या बन गई है, जिससे भारत की बड़ी जनसंख्या परेशान है। इसके कारण थकान, बाल झड़ना, हड्डियों में दर्द जैसे लक्षण (Vitamin-D Deficiency Symptoms) नजर आते हैं। ऐसे में कई लोग डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स लेना शुरू तो कर देते हैं, लेकिन बाद में जब वे ब्लड टेस्ट करवाते हैं, तो भी विटामिन-डी का लेवल का कम ही बना रहता है।
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Feb 2, 2026, 03:46 AM
महिलाओं के लिए 5 अभिनव उपकरणः स्वास्थ्य, संगठन और सुविधा में वृद्धि

महिलाओं के लिए 5 अभिनव उपकरणः स्वास्थ्य, संगठन और सुविधा में वृद्धि

5 Best Gadgets For Female:टेक्नोलॉजी अब सिर्फ काम की चीज नहीं रही, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने का बड़ा साधन बन चुकी है. खास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई ऐसे गैजेट्स आए हैं जो महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं. हेल्थ, फिटनेस, किचन मैनेजमेंट और पर्सनल केयर तक, हर क्षेत्र में स्मार्ट डिवाइस मदद कर रहे हैं. यहां हम ऐसे 5 गैजेट्स के बारे में बता रहे हैं जो सुविधा और स्मार्ट लाइफस्टाइल दोनों को सपोर्ट करते हैं. पोर्टेबल कॉर्डलेस हीटिंग पैड महिलाओं के लिए हेल्थ और कम्फर्ट से जुड़ा बेहद उपयोगी गैजेट है. पीरियड्स के दौरान दर्द या शरीर में जकड़न होने पर यह काफी मददगार हो सकता है. ज्यादातर डिवाइस में अलग-अलग हीट लेवल और मसाज मोड मिलते हैं. कॉर्डलेस होने की वजह से इसे कहीं भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. घर, ऑफिस या यात्रा के दौरान भी यह राहत देने वाला छोटा लेकिन काम का डिवाइस है. लेबल मेकर मशीन भी काफी मददगार डिवाइस है, इससे कंटेनर, फाइल, बॉक्स और स्टोरेज आइटम पर साफ और टिकाऊ लेबल लगाए जा सकते हैं. जिन महिलाओं को चीजें सही जगह पर और पहचान के साथ रखना पसंद है, उनके लिए यह बढ़िया टूल है. किचन स्टोरेज से लेकर स्टडी और हॉल तक इसका उपयोग हो सकता है. इससे समय भी बचता है और चीजें ढूंढना आसान हो जाता है. टच स्क्रीन वैनिटी मिरर ब्यूटी और पर्सनल केयर के लिए स्मार्ट अपग्रेड माना जाता है. इसमें LED लाइट और डिमेबल ब्राइटनेस कंट्रोल मिलता है, जिससे अलग-अलग लाइट कंडीशन में चेहरा साफ दिखता है. मेकअप, स्किन केयर या क्लोज डिटेल देखने के लिए यह काफी मददगार होता है. टच कंट्रोल के कारण इसका इस्तेमाल आसान रहता है. जो लोग डिटेल ग्रूमिंग पर ध्यान देते हैं, उनके लिए यह अच्छा निवेश माना जाता है. ज्वैलरी क्लीनर एक ऐसा स्मार्ट गैजेट है जो घर पर ही अंगूठियों, घड़ियों और दूसरी ज्वेलरी को साफ करना आसान बना देता है. आमतौर पर गहनों की अच्छे से सफाई कराने के लिए जौहरी के पास जाना पड़ता है, जो काफी खर्चीला भी हो सकता है. लेकिन इस डिवाइस से वही काम मिनटों में हो सकता है. यह मशीन अल्ट्रासोनिक तरंगों की मदद से गहनों की दरारों और बारीक हिस्सों से भी गंदगी हटाती है और बिना ज्यादा मेहनत के ज्वेलरी दोबारा चमकदार दिखने लगती है. यानी यह भी एक उपयोगी गैजेट्स बन जाता है. स्मार्टवॉच अब सिर्फ समय देखने का उपकरण नहीं बल्कि पर्सनल हेल्थ ट्रैकर बन चुकी है. इसमें फिटनेस ट्रैकिंग, हार्ट रेट मॉनिटरिंग, स्लीप डेटा और एक्टिविटी रिकॉर्ड जैसी सुविधाएं मिलती हैं. कई मॉडल में महिलाओं के लिए खास हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स जैसे पीरियड ट्रैकर की सुविधा भी मिलती है. यह फीचर महिलाओं के लिए काफी यूजफुल होता है. जो लोग फिटनेस और हेल्थ डेटा पर नजर रखना चाहते हैं, उनके लिए यह उपयोगी गैजेट है. डिस्क्लेमर:हालांकि इन गैजेट्स को महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन बनाया गया है, लेकिन इनका उपयोग किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है. सुविधा, हेल्थ और मैनेजमेंट से जुड़े ये डिवाइस जेंडर से ज्यादा जरूरत पर आधारित हैं. ये भी पढे़ं:2026 के 5 सबसे दमदार Foldable Phones, जेब में रहेंगे फिट, मूवी लवर्स के लिए हैं बेस्ट
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