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Aaj Tak
Sep 21, 2026, 10:45 AM
शुक्र प्रतिगामीः कुछ राशियों के लिए असफलताओं और वित्तीय दबावों की अवधि

शुक्र प्रतिगामीः कुछ राशियों के लिए असफलताओं और वित्तीय दबावों की अवधि

धन, वैभव और सुखों के प्रदाता शुक्र 3 अक्टूबर को वक्री चाल शुरू करने वाले हैं. यानी इस दिन शुक्र की उल्टी चाल शुरू हो जाएगी, जो कि 14 नवंबर तक जारी रहेगी. ज्योतिष गणना के अनुसार, शुक्र का वक्री होना चार राशियों के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है. इन राशियों को करियर, आर्थिक और सेहत के मोर्चे पर झटका लग सकता है. खर्चों में अनायास बढ़ोतरी होगी और आय में के साधनों पर बुरा असर हो सकता है. आइए जानते हैं किन वक्री शुक्र से किन राशियों को सावधानी बरतनी होगी. शुक्र की वक्री चाल के दौरान भाई-बहन, छोटी यात्राओं, प्रयासों और संवाद से जुड़े मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इस दौरान मेहनत करने के बावजूद परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलने की स्थिति बन सकती है. किसी काम को पूरा करने में अपेक्षा से ज्यादा प्रयास करना पड़ सकता है. साझेदारी या व्यापार से जुड़े मामलों में बातचीत करते समय भी सावधानी रखना जरूरी होगा. वक्री शुक्र आपके खर्च और आर्थिक दबाव को बढ़ावा दे सकता है. इस अवधि में अनावश्यक खर्च बढ़ने की स्थिति बन सकती है. इसलिए पैसों से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी रहेगी. विदेश से जुड़े मामलों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. प्रेम और दांपत्य जीवन में गलतफहमी की स्थिति बन सकती है. खासकर सुख-सुविधाओं या दिखावे पर जरूरत से ज्यादा पैसा खर्च करने से बचना बेहतर रहेगा. शुक्र की वक्री चाल के दौरान नौकरी और कामकाज से जुड़े मामलों में अस्थिरता या काम का दबाव महसूस हो सकता है. वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति भी बन सकती है. बिजनेस करने वालों को महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लेने होंगे. मकर राशि के लिए शुक्र पांचवें और दसवें भाव के स्वामी हैं. ऐसे में परिणाम पूरी तरह नकारात्मक नहीं माने जाएंगे, लेकिन वक्री अवस्था में करियर से जुड़े पुराने मुद्दे दोबारा सामने आ सकते हैं. आपको अचानक होने वाली घटनाओं, बाधाओं और अनिश्चित परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए इस अवधि में बड़े फैसलों को लेकर अतिरिक्त सावधानी रखना जरूरी हो सकता है. निवेश और संयुक्त धन से जुड़े मामलों में सतर्कता बरतनी होगी. ससुराल पक्ष से जुड़े मामलों में भी उतार-चढ़ाव आ सकता है. बड़े आर्थिक फैसले जल्दबाजी में लेने से बचना उचित रहेगा.
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Amar Ujala
Sep 21, 2026, 06:47 AM
डिमेंशियाः सभी उम्र के लोगों के लिए एक बढ़ती हुई चिंता

डिमेंशियाः सभी उम्र के लोगों के लिए एक बढ़ती हुई चिंता

डिमेंशिया केवल याददाश्त को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि सोचने, निर्णय लेने, बातचीत करने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है। सुशीला तिवारी अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. अखिलेश जोशी के अनुसार उनकी ओपीडी में हर रोज छह से सात मरीज अल्जाइमर के आते हैं। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण है। कभी कभार कोई चीज भूलना अल्जाइमर नहीं है जब भूलने की समस्या लगातार बढ़ने लगे और उसका असर रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने लगे तो यह चिंता की बात है। उम्र डिमेंशिया का सबसे बड़ा ज्ञात जोखिम कारक है और बीमारी 65 वर्ष से अधिक उम्र में ज्यादा दिखाई देती है। हालांकि कम उम्र में भी डिमेंशिया हो सकता है। डॉ. अखिलेश जोशी के अनुसार बीपी-शुगर नियंत्रित रखना, धूम्रपान, शराब सेवन, सामाजिक अलगाव, मधुमेह और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल जैसे कारकों के कारण अल्जामर होने का खतरा रहता है। अल्जाइमर का फिलहाल पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है लेकिन नियमित शारीरिक व्यायाम, संतुलित भोजन, सामाजिक रूप से सक्रिय रहने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है। हाल की बातें या घटनाएं बार-बार भूलना, परिचित रास्ते या जगह पर भटक जाना, सामान बार-बार खोना या गलत जगह रखना, बातचीत में सामान्य शब्द याद न आना, व्यवहार या व्यक्तित्व में लगातार बदलाव दिखें या यह समस्या ज्यादा बढ़ रही हो तो न्यूरोलॉजिस्ट या संबंधित चिकित्सक से जांच कराएं।
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Amar Ujala
Sep 21, 2026, 05:05 AM
एनीमिया महामारीः आगरा संभाग में महिलाओं में उच्च प्रसार देखा गया

एनीमिया महामारीः आगरा संभाग में महिलाओं में उच्च प्रसार देखा गया

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, आगरा मंडल के जिलों में स्थिति बेहद गंभीर है। आगरा जिले में 15-49 वर्ष की 59.4% महिलाएं और 61.8% गर्भवती महिलाएं इससे पीड़ित हैं। मथुरा में 63.0% महिलाएं, मैनपुरी में 57.8% महिलाएं, फिरोजाबाद में 57.1% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। जिला महिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशु ने बताया कि एनीमिया केवल आयरन की कमी से नहीं, बल्कि फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 और विटामिन-ए के अभाव से भी होता है। गर्भावस्था के दौरान यह स्थिति प्रसव पश्चात अत्यधिक रक्तस्राव, मातृ मृत्यु, समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले शिशु के जन्म का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।विज्ञापनजिला अस्पताल की डायटीशियन ललितेश शर्मा ने एनीमिया से बचने के लिए खानपान से जुड़े जरूरी सुझाव दिए हैं। पालक, मेथी, सरसों, चना, राजमा, बाजरा, ज्वार, गुड़, तिल और खजूर का नियमित सेवन करें। नींबू, आंवला, संतरा, अमरूद और टमाटर खाने से शरीर में आयरन का अवशोषण तीन गुना तक बढ़ जाता है। भोजन के तुरंत बाद चाय-कॉफी न लें, इनमें मौजूद टैनिन और फाइटेट्स आयरन के अवशोषण को रोकते हैं। इसके अलावा, दूध और कैल्शियम को सीधे आयरन युक्त भोजन के साथ न लें।विज्ञापन- गर्भावस्था के पांचवें महीने में हीमोग्लोबिन 7.9 ग्राम था। स्वास्थ्यकर्मियों की काउंसिलिंग, उचित आहार और आयरन की गोलियों के नियमित सेवन से आठवें महीने में हीमोग्लोबिन बढ़कर 10 ग्राम हो गया। - आयशा, निवासी बोदला- हीमोग्लोबिन केवल 8 ग्राम था। सही इलाज, पौष्टिक आहार और नियमित दवाओं की मदद से प्रसव के समय हीमोग्लोबिन 12 ग्राम हुआ और उन्होंने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। - मनोरमा, निवासी बोदलामुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत नियमित आयरन की गोलियां बांटने के साथ गंभीर मामलों में आयरन सुक्रोज के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। हालांकि, पोषण युक्त आहार के प्रति जागरूकता की कमी और कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक चुनौतियां इस पर लगाम कसने में बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
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Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:06 AM
अल्जाइमरः भूलने की एक बीमारी, जो बुजुर्गों और मध्यम आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करती है।

अल्जाइमरः भूलने की एक बीमारी, जो बुजुर्गों और मध्यम आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करती है।

बरेली के जिला अस्पताल मनकक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष के मुताबिक अल्जाइमर भूलने की बीमारी है। इसके मरीज कहीं कुछ रखकर भूल जाते हैं, थोड़ी देर पहले कही बातें भी उन्हें याद नहीं रहती हैं। पहले यह बीमारी 70 पार के बुजुर्गों में होती थी लेकिन तनाव से भरी जीवनशैली की वजह से 60 की उम्र में ही लक्षण नजर आ रहे हैं।विज्ञापनदूसरी ओर, कोई वस्तु कहीं रखकर भूल जाएं पर कुछ देर बाद मिलने पर उन्हें रखने की याद आ जाए या कोई बात कुछ समय तक याद न आए तो यह अल्जाइमर्स से नहीं है। अल्जाइसर्म में व्यक्ति बात, वस्तु के साथ चेहरे भी भूलने लगता है, जो बमुश्किल याद आते हैं। मनकक्ष में प्रतिमाह 30-35 अल्जाइमर के मरीज आते हैं, इसमें 70 पार वाले बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है।विज्ञापनबताया कि महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता है। यह हार्मोन दिमाग की कोशिकाओं की रक्षा और सूजन कम करने में मदद करता है। इस कमी अल्जाइमर्स की आशंका बढ़ती है। न्यूरोइंफ्लेमेशन की प्रक्रिया से टॉक्सिक प्रोटीन महिलाओं में ज्यादा बनता है।
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 08:15 PM
एम. सी. आयुक्त ने दक्षता पर चिंताओं के बीच एक्स. ई. एन. को अतिरिक्त प्रभार के साथ निलंबित किया

एम. सी. आयुक्त ने दक्षता पर चिंताओं के बीच एक्स. ई. एन. को अतिरिक्त प्रभार के साथ निलंबित किया

इनमें से एक एडिशनल चार्ज वाले एक्सईएन को निगम कमिश्नर ने हाल ही में सस्पेंड कर दिया। इसके बाद रेगुलर एक्सईएन अमित शर्मा के पास तीन डिवीजन-1, 3 और 4 की जिम्मेदारी आ गई है। इन डिवीजनों में पानी की सप्लाई, वॉटर स्टोरेज, स्टॉर्म वाटर, सीवर और टर्शियरी से जुड़े काम आते हैं।विज्ञापनएक अधिकारी के पास तीन डिवीजनों की जिम्मेदारी होने से फील्ड निरीक्षण, शिकायतों के निपटारे और तकनीकी फाइलों की निगरानी प्रभावित हो रही है। वहीं रेगुलर एक्सईएन योगेश अग्रवाल के पास एक्सईएन पब्लिक हेल्थ के साथ एक्सईएन वर्क्स एंड एस्टेब्लिशमेंट और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पब्लिक हेल्थ का अतिरिक्त कार्यभार भी है।विज्ञापनविभाग में तीन एसडीओ गौरव पाल, राजबीर सिंह और यशपाल शर्मा को एडिशनल चार्ज देकर एक्सईएन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं तीन जेई अनुराग, अमित जांगड़ा और पराग को एसडीओ का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। यानी कई अधिकारियों को अपने मूल पद के साथ दूसरे पद की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है।इंजीनियरों की कमी का असर शहर के जमीनी कामों में भी नजर आ रहा है। सेक्टर-28 में 18 अगस्त को ब्रिक स्टॉर्म वाटर ड्रेन टूटने से सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। करीब एक महीने बाद भी इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। स्टॉर्म वाटर ड्रेन की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी पर अतिरिक्त काम का बोझ होने से फील्ड मॉनिटरिंग और मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित होने का असर यहां दिखाई दे रहा है।विभाग में इंजीनियरों की कमी दूर करने के लिए निगम ने अब प्रशासन से डेपुटेशन पर चार एक्सईएन और एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इनमें तीन एक्सईएन पब्लिक हेल्थ और एक एक्सईएन वर्क्स एंड एस्टेब्लिशमेंट के लिए मांगा गया है। इसके अलावा एक एसई पब्लिक हेल्थ के लिए मांगा गया है।अधिकारियों के आने से अतिरिक्त चार्ज कम करने और अलग-अलग डिवीजनों की नियमित मॉनिटरिंग मजबूत होने की उम्मीद है। जॉइंट कमिश्नर डॉ. हिमांशु गुप्ता ने कहा कि पब्लिक हेल्थ में चार एक्सईएन और एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर डेपुटेशन पर भरे जाने हैं। इसके लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 07:30 PM
स्वास्थ्य मेले में पीएचसी धम्मौर और पीएचसी छीतेपट्टी में 30 से अधिक रोगियों का इलाज किया गया

स्वास्थ्य मेले में पीएचसी धम्मौर और पीएचसी छीतेपट्टी में 30 से अधिक रोगियों का इलाज किया गया

केस-1स्थान- पीएचसी धम्मौरसमय- 12:30 बजेमरीजों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणधम्मौर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धम्मौर में चिकित्सक शारका बीबी ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के बाद उन्हें दवाएं भी वितरित की गईं। अल्पी मिश्रा का पुरवा निवासी रामादेवी ने बुखार की शिकायत बताई। परवरभार निवासी संदीप ने भी बुखार और खांसी की समस्या बताई। मधुसुदनपुर निवासी रामभजन ने इन्हीं समस्याओं के लिए उपचार कराया। मनियारपुर निवासी मदनलाल को एंटी रैबीज का टीका लगाया गया। मेले में बुखार और खांसी जैसी सामान्य बीमारियों का उपचार किया गया। फार्मासिस्ट विजय नारायण मिश्र, लैब टेक्नीशियन दिनेश कुमार और स्टाफ नर्स रहनुमा बानो मौजूद थे।विज्ञापन--केस- 2स्थान- पीएचसी छीतेपट्टीसमय- 1:00 बजे12 मरीजों की करवाई गई मलेरिया जांचदोस्तपुर। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य आरोग्य मेला में एक बजे तक कुल 36 मरीजों ने अपना इलाज कराया। अधिकांश मरीज बुखार से पीड़ित थे। 12 मरीजों की हीमोग्लोबिन, मलेरिया और टाइफाइड की जांच की गई। डॉ. देवनारायण निषाद ने बताया कि ज्यादातर मरीज मलेरिया बुखार से ग्रस्त थे। 12 मरीजों की मलेरिया जांच भी की गई। रेहाना, पूजा, साधना, सूरज, सूबेदार सिंह, फिरोज, गयाप्रसाद और कमर जहां जैसे मरीज ठंड और बुखार से पीड़ित मिले।
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