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Aug 3, 2026, 01:49 PM
शनि का नक्षत्र परिवर्तन-मेष, कर्क और वृष राशि के लिए एक चेतावनी

शनि का नक्षत्र परिवर्तन-मेष, कर्क और वृष राशि के लिए एक चेतावनी

20 अगस्त को शनि रेवती नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. शनि 9 अक्टूबर तक रेवती नक्षत्र में रहेंगे. बता दें कि यह नक्षत्र परिवर्तन सूर्य और चंद्र ग्रहण के बीच लगने जा रहा है. 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण होगा और फिर 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण लगेगा. यह नक्षत्र बुध से जुड़ा माना जाता है. ज्योतिष में शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना गया है. ज्योतिषविदों का कहना है कि शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर मेष, कर्क और वृश्चिक राशि पर रहेगा. इन तीनों राशि को अक्टूबर माह तक बहुत सावधान रहने की सलाह दी जाती है. रेवती नक्षत्र का स्वामी आपको करियर और आर्थिक मोर्चे पर नुकसान पहुंचा सकता है. मेष राशि वालों को जल्दबाजी से बचना होगा. इस बीच कोई बड़ा जोखिम बिल्कुल न उठाएं. कोई बड़ा निवेश करने से पहले पूरी जानकारी लें. बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला परेशानी बढ़ा सकता है. नौकरी करने वालों पर काम का दबाव बढ़ सकता है. गुस्से पर काबू रखें. छोटी बात को विवाद न बनने दें. सेहत का भी पूरा ध्यान रखें. आर्थिक मोर्चे पर सावधानी से कार्य करें. आय-व्यय में संतुलन स्थापित करना आपके लिए बहुत जरूरी होगा. कर्क राशि के लोगों का मानसिक तनाव बढ़ सकता है. किसी भी बात को जरूरत से ज्यादा न सोचें. नया काम शुरू करने से पहले पूरी तैयारी करें. योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहेगी. रिश्तों में मनमुटाव है तो शांति से बात करें. बातचीत से गलतफहमियां दूर हो सकती हैं. यात्रा में सावधानी रखें. किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा न करें. स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें. वृश्चिक राशि वालों को खर्च पर नियंत्रण रखना होगा. बचत और खर्च के बीच संतुलन बनाकर चलें. पैसों से जुड़ा हर फैसला सोच-समझकर लें. इस दौरान धन का लेन-देन बिल्कुल न करें. रुपए-पैसे के चक्कर में लोगों के साथ विवाद हो सकता है. किसी काम का परिणाम मिलने में समय लग सकता है. ऐसे में धैर्य रखें. बेवजह बहस से बचें. अगर सेहत से जुड़ी कोई परेशानी है तो उसे नजरअंदाज न करें.
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Aug 3, 2026, 12:12 PM
हिंदू राव अस्पताल ने बेहतर रोगी देखभाल के लिए चिकित्सा सुविधाओं का उन्नयन किया

हिंदू राव अस्पताल ने बेहतर रोगी देखभाल के लिए चिकित्सा सुविधाओं का उन्नयन किया

अमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। एमसीडी के हिंदू राव अस्पताल में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण व स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू होने से नेत्र, महिला, बाल व सर्जरी से जुड़े मरीजों को बेहतर, त्वरित व गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा।नेत्र विभाग में ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी), विजुअल फील्ड एनालाइजर, फंडस कैमरा, फेको इमल्सिफिकेशन मशीन व क्रायोएब्लेटर लगाए गए हैं, जिससे ग्लूकोमा, रेटिना व मोतियाबिंद की जांच अधिक सटीक होगी। सर्जरी विभाग को लैप्रोस्कोपी सिस्टम, न्यूमेटिक लिथोट्रिप्टर व सी-आर्म मशीन से सुसज्जित किया गया है, जिससे कम चीरे वाली सर्जरी प्रभावी होगी, दर्द घटेगा व अस्पताल में भर्ती अवधि कम होगी।विज्ञापनमहिलाओं व नवजातों के लिए अत्याधुनिक लेबर रूम व सीटीजी मशीन शुरू की गई है, जिससे प्रसव के दौरान मां व शिशु की बेहतर निगरानी होगी। बच्चों के लिए पीडियाट्रिक स्पाइरोमीटर व फिजियोथेरेपी विभाग में आधुनिक जिम व पुनर्वास सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। इंटीग्रेटेड ब्लड सैंपल कलेक्शन सेंटर से मरीजों को अलग-अलग जगहों पर भटकना नहीं पड़ेगा।विज्ञापनमहापौर प्रवेश वाही ने इन सुविधाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि एमसीडी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक का विस्तार आम नागरिकों को निजी अस्पतालों जैसी गुणवत्तापूर्ण सेवाएं निशुल्क देने के उद्देश्य से है। हिंदू राव अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं अधिक मजबूत होंगी। कार्यक्रम में उपमहापौर मोनिका पंत, स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा व उपाध्यक्ष सत्यपाल सिंह, मनीष चड्ढा, आयुक्त संजीव खिरवार समेत कई पार्षद व अधिकारी मौजूद रहे।
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Aug 3, 2026, 12:00 PM
उच्च यूरिक एसिड के जोखिमः कारण और रोकथाम के तरीके

उच्च यूरिक एसिड के जोखिमः कारण और रोकथाम के तरीके

आजकल यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या बहुत आम हो गई है. यूरिक एसिड शरीर में तब बनता है जब हम प्यूरिन नाम के तत्व वाला खाना खाते हैं और इसे किडनी फिल्टर करके बाहर निकालती है. हालांकि, गलत खाना जैसे तला हुआ और खराब लाइफस्टाइल की वजह से इसकी मात्रा बढ़ जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द और सूजन जैसी परेशानियां हो सकती हैं. आइए जानते हैं इसकी वजहें और बचाव के तरीके. रेड मीट, ऑर्गन मीट जैसे लीवर, किडनी, और सी-फूड में प्यूरिन ज्यादा होता है. शरीर में प्यूरिन टूटने से ही यूरिक एसिड बनता है, इसलिए इनका ज्यादा सेवन यूरिक एसिड का स्तर तेजी से बढ़ा देता है. इसी तरह चीनी से भरपूर ड्रिंक्स, खासकर फ्रुक्टोज वाली कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड जूस भी यूरिक एसिड बढ़ाने में बड़ा रोल निभाते हैं. शराब, खासकर बीयर, प्यूरिन से भरपूर होती है और शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकालने की प्रक्रिया को भी धीमा कर देती है, जिससे यह शरीर में जमा होने लगता है. इसके अलावा पानी कम पीने से किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती और यूरिक एसिड बाहर निकालने में दिक्कत होती है. साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत भी यूरिक एसिड बढ़ने का एक बड़ा कारण है. इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर टॉक्सिन्स को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता. रेड मीट, ऑर्गन मीट और ज्यादा सी-फूड खाने से बचें, इनकी जगह हल्का खाना खाएं. फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने से शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकालने में मदद मिलती है. खीरा, पपीता और सेब जैसी चीजें खासतौर पर फायदेमंद मानी जाती हैं. मीठी चीजों और पैकेज्ड ड्रिंक्स का सेवन जितना हो सके कम करें, इनकी जगह नारियल पानी या नींबू पानी जैसे हेल्दी ऑप्शन चुनें. इसके साथ ही रोज हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, जैसे सुबह टहलना या योगा करना, शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और वजन भी कंट्रोल में रहता है. साथ ही शराब का सेवन कम से कम करें या पूरी तरह बंद कर दें, इससे यूरिक एसिड कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है. अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न महसूस हो रही है, तो यह यूरिक एसिड बढ़ने का संकेत हो सकता है. ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए और उनकी सलाह के अनुसार ही इलाज लेना चाहिए. सही खान-पान और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाकर यूरिक एसिड को काफी हद तक कंट्रोल में रखा जा सकता है, जिससे जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है.
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Aug 3, 2026, 10:02 AM
लापता होने के बाद भारतीय सैनिक बैरक में मृत पाया गया

लापता होने के बाद भारतीय सैनिक बैरक में मृत पाया गया

दीपक कुमार वर्ष 2021 बैच के सिपाही थे और वर्ष 2022 से 10वीं वाहिनी पीएसी, बाराबंकी में तैनात थे। उनकी ड्यूटी महादेवा मेले में लगाई गई थी। शनिवार शाम से वह लापता थे और रविवार सुबह तलाश के दौरान साथी जवानों को उनका शव बैरक में मिला।विज्ञापनBaghpat: अविवाहित युवती ने नाली में बच्ची को दिया जन्म, अधिक रक्तस्राव से मौत; प्रेम प्रसंग का मामला आया सामने
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Aug 3, 2026, 09:07 AM
फल और नट खीरः सावन के दौरान उपवास करने का एक पौष्टिक विकल्प

फल और नट खीरः सावन के दौरान उपवास करने का एक पौष्टिक विकल्प

सावन का महीना शुरू होते ही बाबा भोलेनाथ की भक्ति का माहौल बन जाता है. इस दौरान लोग सोमवार का व्रत रखते हैं और मंदिर जाकर पूजा अर्चना करते हैं. सावन के सोमवार का अपना अलग महत्व भी है. इस व्रत में सादा खाना खाया जाता है, जिसमें अनाज नहीं होता. ऐसे में फ्रूट एंड नट खीर एक बहुत अच्छा ऑप्शन है, जो दूध, मखाने, फल और मेवों से बनती है और व्रत के दौरान शरीर को ताकत भी देती है. आमतौर पर खीर चावल और चीनी से बनाई जाती है, लेकिन व्रत वाली इस खीर में चावल की जगह मखाना डाला जाता है और साथ में ताजे फल व मेवे मिलाए जाते हैं. मखाना कमल के बीज से मिलता है और यह हल्का और पचाने में आसान होता है, इसलिए व्रत के खाने में बरसों से इस्तेमाल होता आ रहा है. मखाने की सबसे अच्छी बात यह है कि यह हमारे शरीर को जरूरी पोषण देता है और व्रत में भी शरीर की एनर्जी को बनाए रखता है. दूध और मखाने से शरीर को कैल्शियम मिलता है, जो हड्डियों के लिए अच्छा है. बादाम, काजू और पिस्ता जैसे मेवे दिल और त्वचा के लिए अच्छे माने जाते हैं. इसमें डाले गए ताजे फल भी शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं. यानी ये खीर सिर्फ स्वाद ही नहीं, सेहत के लिए भी अच्छी है. सबसे पहले घी गर्म करके मखाने को हल्का कुरकुरा होने तक भून लें. आधे मखाने को हल्का सा तोड़ लें और बाकी आधे साबुत ही रहने दें. अब दूध को उबालें और थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाएं. इसमें टूटा हुआ और साबुत मखाना डाल दें, फिर बादाम, काजू, पिस्ता, किशमिश और इलायची पाउडर मिलाएं. खीर को थोड़ा ठंडा होने दें, उसके बाद कटे हुए फल डालें और सबको हल्के हाथों से मिला लें. अगर ठंडा खाना चाहें तो इसे फ्रिज में रख दें, और परोसने से पहले ऊपर से थोड़े और फल-मेवे डालकर सजा दें. इस खीर में दूध, मखाना, फल और मेवे जैसी व्रत वाली चीजें ही डाली जाती हैं, इसलिए यह सावन सोमवार व्रत के लिए बिल्कुल सही है. इसे बिना चीनी के भी बनाया जा सकता है, क्योंकि पके हुए मीठे फलों से ही यह खीर काफी मीठी लगती है, चाहें तो थोड़ा गुड़ भी डाला जा सकता है. इसमें सेब, अनार, केला, अंगूर और चीकू जैसे फल अच्छे लगते हैं, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ इसे और अच्छा भी बनाते हैं.
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Aug 3, 2026, 06:29 AM
कॉपर-टी के साथ गर्भावस्थाः आगे क्या होता है?

कॉपर-टी के साथ गर्भावस्थाः आगे क्या होता है?

प्रेग्नेंसी से बचने के लिए कॉपर-टी को गर्भनिरोध के प्रभावी तरीकों में से एक माना जाता है. इसकी सफलता दर काफी ज्यादा होती है, लेकिन दूसरे गर्भनिरोधक तरीकों की तरह यह भी 100 फीसदी गारंटी नहीं देता. बहुत ही कम मामलों में कॉपर-टी लगे होने के बावजूद महिला प्रेग्नेंट हो सकती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी हो जाए तो क्या होगा और क्या ऐसी प्रेग्नेंसी सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सकती है? मदरहुड हॉस्पिटल्स, सेक्टर-48, नोएडा की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पवना एचएन के मुताबिक, कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी होने पर जल्द मेडिकल जांच की जरूरत होती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में प्रेग्नेंसी में गंभीर समस्या होगी. सही समय पर डॉक्टर से संपर्क और लगातार निगरानी में कई मामलों में स्वस्थ प्रेग्नेंसी संभव हो सकती है. डॉ. पवना के मुताबिक, प्रेग्नेंसी रोकने में कॉपर-टी 99 फीसदी से ज्यादा प्रभावी है. इसके बावजूद कोई भी गर्भनिरोधक तरीका पूरी तरह फुलप्रूफ नहीं होता. बहुत कम मामलों में कॉपर-टी अपनी सही जगह से खिसक सकती है या गर्भाशय से बाहर निकल सकती है. ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी होने की संभावना बन सकती है. कॉपर-टी लगे होने के दौरान प्रेग्नेंसी होना काफी दुर्लभ है, लेकिन ऐसा होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करके मेडिकल जांच करवानी चाहिए, ताकि प्रेग्नेंसी की स्थिति और कॉपर-टी की जगह का पता लगाया जा सके. कॉपर-टी लगे होने के बावजूद प्रेग्नेंसी होने पर कुछ जटिलताओं का खतरा सामान्य प्रेग्नेंसी के मुकाबले ज्यादा हो सकता है. डॉ. पवना के अनुसार, ऐसी स्थिति में मिसकैरेज यानी गर्भपात, गर्भाशय में इंफेक्शन और समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ सकता है. इसी वजह से ऐसी प्रेग्नेंसी में ऑब्स्टेट्रिशियन की निगरानी जरूरी होती है. नियमित जांच के जरिए डॉक्टर प्रेग्नेंसी की स्थिति और संभावित जोखिमों पर नजर रखते हैं. कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी होने पर डॉक्टर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की संभावना की भी जांच करते हैं. एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय के अंदर अपनी सामान्य जगह पर इम्प्लांट होने की बजाय गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगता है. ज्यादातर मामलों में यह फैलोपियन ट्यूब में हो सकता है. यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और इसका तुरंत इलाज जरूरी है. इसलिए कॉपर-टी इस्तेमाल करने वाली महिला का प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए. हर मामले में इसका जवाब एक जैसा नहीं होता. कॉपर-टी निकालनी है या नहीं, इसका फैसला उसकी स्थिति और प्रेग्नेंसी को देखकर डॉक्टर करते हैं. डॉ. पवना के अनुसार, अगर कॉपर-टी के धागे दिखाई दे रहे हों और डॉक्टर को लगे कि इसे सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है तो आमतौर पर प्रेग्नेंसी के शुरुआती चरण में इसे निकालने की सलाह दी जा सकती है. इससे आगे होने वाली कुछ जटिलताओं का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि कॉपर-टी को खुद से निकालने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. इसे निकालना सुरक्षित है या नहीं, इसका फैसला मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर ही कर सकते हैं. कॉपर-टी के बावजूद गर्भ ठहरने का मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकती. डॉ. पवना के मुताबिक, कई महिलाएं ऐसी स्थिति के बाद भी स्वस्थ और फुल टर्म प्रेग्नेंसी पूरी करती हैं. खासकर अगर शुरुआती समय में कॉपर-टी को सुरक्षित तरीके से निकाल दिया जाए और इसके बाद प्रेग्नेंसी की नियमित निगरानी होती रहे तो बेहतर परिणाम की संभावना हो सकती है. शुरुआती एंटीनैटल केयर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. अगर कॉपर-टी लगी हुई है और आपको प्रेग्नेंसी का शक हो रहा है तो प्रेग्नेंसी टेस्ट करने में देरी न करें. टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. इसके अलावा तेज पेट दर्द, वजाइनल ब्लीडिंग, चक्कर आना, बेहोशी, कंधे में दर्द, बुखार या लगातार पेल्विक एरिया में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए. ये लक्षण एक्टोपिक प्रेग्नेंसी या किसी दूसरी गंभीर जटिलता की ओर इशारा कर सकते हैं. कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी दुर्लभ जरूर है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. समय पर जांच से डॉक्टर संभावित समस्या की पहचान जल्दी कर सकते हैं. इसलिए ऐसी स्थिति में घबराने या इंतजार करने की बजाय जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना और उनकी निगरानी में आगे बढ़ना जरूरी है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.
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Aug 3, 2026, 06:11 AM
मेरठ के डॉक्टरों ने लेट्यूस और सलाद खाने से गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी

मेरठ के डॉक्टरों ने लेट्यूस और सलाद खाने से गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी

Health: मेरठ के डॉक्टरों की चेतावनी, पत्ता गोभी और सलाद खाने वाले रहें सावधान, इस गंभीर बीमारी का बढ़ा खतराविज्ञापननिरीक्षण के दौरान टीम दशरथपुर स्थित मोघा होटल पहुंची। अधिकारियों के अनुसार जांच में होटल में प्याज और लहसुन से तैयार भोजन मिला। इसके अलावा परिसर से शराब और बीयर की खाली बोतलें भी बरामद हुईं।विज्ञापनकांवड़ यात्रा के दौरान लागू दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को देखते हुए अधिकारियों ने होटल प्रबंधक अमित को नोटिस जारी किया और होटल को सील कर दिया।अधिकारियों ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ढाबे, होटल या भोजनालय में शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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Aug 3, 2026, 06:05 AM
सावन सोमवर व्रतः आध्यात्मिक विकास और शुद्धि का महीना

सावन सोमवर व्रतः आध्यात्मिक विकास और शुद्धि का महीना

सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और 3 अगस्त 2026 को सावन का पहला सोमवार है। सनातन धर्म में सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व है। माना जाता है कि जो भक्त इस पूरे महीने भक्ति-भाव से सोमवार का व्रत रखते हैं और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं, शिव जी उनके सभी कष्ट दूर कर देते हैं। सावन सोमवार व्रत में पूरी तरह सात्विक और फलाहार भोजन किया जाता है: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। इसके अलावा, शिवलिंग पर गन्ने के रस या दूध से रुद्राभिषेक करने से व्यापार और करियर में तरक्की के नए मार्ग खुलते हैं। वहीं, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सावन के महीने में व्रत रखने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है। सावन के पहले सोमवार पर अमरोहा के मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब, भक्तों ने लगाए हर-हर महादेव के जयकारे सावन सोमवार पूजा 2026: शुभ मुहूर्त, आवश्यक सामग्री और महादेव को प्रसन्न करने के आसान उपाय
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Aug 3, 2026, 06:01 AM
सावन माहः हिंदू कैलेंडर में भक्ति और आत्म-प्रतिबिंब का समय

सावन माहः हिंदू कैलेंडर में भक्ति और आत्म-प्रतिबिंब का समय

सावन का पूरा महीना हिंदू पंचांग में सबसे पवित्र समय माना जाता है। यह समय विशेष रूप से भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित होता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति, घर में सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और धार्मिक प्रगति मिलती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सावन का पूरा महीना केवल उपवास रखने या पूजा करने का समय नहीं होता है, बल्कि यह अपने विचारों, कर्मों और जीवनशैली को सुधारने का भी समय है। इस दौरान शिव मंत्रों का जाप करना, शिवलिंग पर जल व बेलपत्र चढ़ाना, दान करना और खुद पर संयम रखना बहुत शुभ फल देता है। इस दौरान हर राशि के लोगों के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से जीवन में शुभता आती है। यही नहीं आपको इस दौरान कुछ विशेष काम करने से बचना भी चाहिए। आइए आपको बताते हैं उसके बारे में। मेष राशि के लोग प्रथम भाव के प्रभाव को मजबूत करने के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर लाल चंदन मिला हुआ जल चढ़ाएं। आप सावन के प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें। अपनी कुंडली के अनुसार जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहतर समझें। पर्सनल ज्योतिषीय मार्गदर्शन और इनसाइट्स — अभी देखें घर के लोगों से बिना वजह बहस न करें, बिना सोचे-समझे पैसों से जुड़े फैसले न लें और किसी को भी कड़वे शब्द बोलने से बचें। सोमवार को भगवान शिव की पूजा करके सफेद मिठाई का भोग लगाएं। द्वितीय भाव के हित में भगवान शिव को दूध और सफेद फूल चढ़ाएं। सोमवार को सफेद मिठाई या चावल का दान करें और परिवार के साथ समय बिताएं। फालतू की चीजों पर पैसे खर्च न करें और अपनों के साथ व्यवहार में ज्यादा जिद्दीपन न दिखाएं। सोमवार को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को थोड़ी सी चीनी का दान करें। सावन के महीने में तृतीय भाव को बेहतर करने के लिए रोज शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। आज के दिन धार्मिक पुस्तकें पढ़ें और पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सहायता करें। इधर-उधर की बातें न करें, किसी से झूठे वादे न करें और किसी बात को लेकर बहुत ज्यादा न सोचें। बुधवार के दिन भगवान गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं। इस महीने चतुर्थ भाव की शांति के लिए संभव हो तो रुद्राभिषेक कराएं। शिवलिंग पर कच्चा दूध, जल और बेलपत्र चढ़ाएं। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएं। बहुत ज्यादा भावुक होकर फैसले न लें, मन में कोई पुरानी रंजिश न रखें और बिना वजह तनाव न लें। सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें। पंचम भाव के सुधार के लिए रविवार को गेहूं या गुड़ का दान करें। पूरी श्रद्धा और विनम्रता से भगवान शिव की पूजा करें। अपने अंदर अहंकार न आने दें, दूसरों पर अपनी बातें न थोपें और फालतू के गुस्से से दूर रहें। रविवार को सूर्यदेव को जल अर्पित करें और प्रणाम करें। षष्ठ भाव के लिए रोज महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। हरी सब्जियां दान करें और अपने रुके हुए काम समय पर पूरे करें। हर बात का बहुत ज्यादा हिसाब न लगाएं, दूसरों की बुराई न करें और मन में कोई चिंता न पालें। बुधवार के दिन गायों को हरा चारा खिलाएं। सप्तम भाव की शुभता के लिए भगवान शिव को सफेद फूल और चंदन चढ़ाएं। जरूरतमंदों को कपड़े या भोजन दान करें। बिना वजह पैसे खर्च न करें, जरूरी कामों को टालें नहीं और अपने सहयोगियों से विवाद न करें। सोमवार के दिन किसी मंदिर में जाकर खीर चढ़ाएं। अष्टम भाव के शुभ फलों के लिए शिव अभिषेक के समय शहद चढ़ाएं। ध्यान लगाएं और अपने मन को शांत रखें। धार्मिक कामों में हिस्सा लें। किसी से बदला लेने की बात न सोचें, पैसों में जोखिम न लें और किसी से कोई बात न छिपाएं। मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में दीपक जलाएं। नवम भाव को मजबूत करने के लिए हर सोमवार को शिव मंदिर जाएं। सावन में धार्मिक ग्रंथ पढ़ें और अपने गुरुजनों और बड़ों का आशीर्वाद लें। खुद पर बहुत ज्यादा घमंड न करें, घर की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज न करें और झूठे वादे न करें। सोमवार के दिन किसी मंदिर में सफेद मिठाई चढ़ाएं। दशम भाव जिसे कर्म और प्रतिष्ठा का क्षेत्र माना जाता है उसके लिए भगवान शिव के सामने तिल के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल या कंबल का दान करें। अपने मन में नकारात्मक विचार न लाएं, सेहत को नजरअंदाज करके काम न करें और तनाव न लें। शनिवार को शनिदेव के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। एकादश भाव जिसे लाभ और सामाजिक काम का क्षेत्र माना जाता है उसके लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। सावन में दान-पुण्य के काम करें और थोड़ा समय खुद के लिए निकालें। अपनों से दूरी न बनाएं, सेहत को अनदेखा न करें और जल्दबाजी में कहीं पैसा न लगाएं। सोमवार को शिवलिंग पर काले तिल मिलाकर जल चढ़ाएं। द्वादश भाव जिसे अध्यात्म और दान का क्षेत्र माना जाता है उसे मजबूत करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। भगवान शिव को पीले फूल और बेलपत्र चढ़ाएं। सावन के महीने में गरीबों की मदद करें। कामों को कल पर न टालें, पैसों के लेन-देन में किसी पर अंधा भरोसा न करें और बिना सोचे-समझे पैसे न खर्च करें। बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करें। सावन 2026: ये 5 पवित्र व्रत रखने से दूर होंगे दुख-दर्द, मिलेगी सुख-समृद्धि सावन सोमवार पूजा 2026: शुभ मुहूर्त, आवश्यक सामग्री और महादेव को प्रसन्न करने के आसान उपाय
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India TV
Aug 3, 2026, 05:58 AM
चुकंदर के रस के स्वास्थ्य लाभों को उजागर करना

चुकंदर के रस के स्वास्थ्य लाभों को उजागर करना

1/5Image Source : UNSPLASHबीटरूट यानी चुकंदर का इस्तेमाल आमतौर पर सलाद या सैंडविच में करते हैं। लेकिन अगर आप इसका जूस अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो इससे आपकी सेहत को कई फायदे मिल सकते हैं। साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक और एमबीबीएस, एमडी डॉ। बिमल छाजेर ने बता रहे हैं इसके फायदे2/5Image Source : UNSPLASHवजन होता है कम: 100 ग्राम चुकंदर में लगभग कैलोरी 43 कैलोरी होता है। यानी इसमें कार्बोहाइड्रेट कम और फाइबर ज़्यादा होता है इसलिए यह वजन कम करने में बेहद फायदेमंद है। आप इसका सेवन जूस के रूप में करें।3/5Image Source : UNSPLASHएनीमिया में फायदेमंद: बीटरूट आयरन और विटामिन सी के कॉम्बिनेशन से भरपूर है जो एनीमिया में फायदेमंद है। बीटरूट का जूस हीमोग्लोबिन और रेड ब्लड सेल्स को बढ़ने में मदद करते हैं जिससे एनीमिया के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।4/5Image Source : UNSPLASHब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद: बीटरूट में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ब्रेन हेल्थ के लिए लाभकारी है। इसमें मौजूद नाइट्रेट, आयरन, और एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग में खून का बहाव बढ़ाते हैं जिससे मानसिक ऊर्जा भी बेहतर होती है।5/5Image Source : UNSPLASHहाई ब्लड प्रेशर होता है कम: बीटरूट में मौजूद नाइट्रेट ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मददगार है। यह ब्लड वेसल्स को चौड़ा करने में मदद करते हैं जिससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद मिलती है।
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Aug 3, 2026, 05:43 AM
केलेः कुछ अपवादों के साथ एक पौष्टिक फल

केलेः कुछ अपवादों के साथ एक पौष्टिक फल

केला सभी सीजन में आसानी से मिलने वाला फल है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को केले का स्वाद पसंद आता है। भूख मिटाने और शरीर को एनर्जी देने के लिए केला अच्छा फल माना जाता है। केला खाते ही शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। लेकिन क्या केला सभी खा सकते हैं। एम्स ट्रेंड जनरल फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रियंका शेहरावत ने बताया कुछ लोगों को केला खाने से बचना चाहिए। डॉक्टर प्रियंका शेहरावत ने बताया कि केला को आप कैसे भी खा सकते हैं। रोज 1-2 केला खाने से शरीर को अच्छा पोषण मिल जाता है। केला खाने से शरीर को फाइबर और पोटैशियम मिलता है। 1 केला में करीब 400 mg पोटैशियम होता है। पोटैशियम आपकी मसल्स के लिए और नर्व्स के लिए के लिए बहुत जरूरी है। हां लेकिन किडनी के मरीजों को केला खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनके शरीर में पहले से ही पोटैशियम का लेवल हाई होता है। इनकी किडनी पोटैशियम फिल्टर नहीं कर पाती है। ऐसे में केला और नारियल पानी इन लोगों को नहीं पीना चाहिए। आपको अपने पोटैशियम लेवल को मॉनिटर भी करना होता है। लेकिन जिन लोगों को किडनी की समस्या नहीं है वो केला खा सकते हैं। अगर आपको डायबिटीज भी है तो भी 1 केला खा सकते हैं। क्योंकि केले का ग्लाइसेमिक लोड कम होता है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है तो इससे कुछ देर के लिए शुगर बढ़ता है, लेकिन लगातार शुगर हाई नहीं रहता है। अगर आपका शुगर बहुत ज्यादा हाई है और कंट्रोल से बाहर है तो आपको डॉक्टर की बताई डाइट लेनी चाहिए और केला खाने से बचना चाहिए। लेकिन अगर आपकी शुगर कंट्रोल है तो आप 1 छोटा केला खा सकते हैं। अगर आपको बहुत ज्यादा सर्दी-जुकाम या कफ की समस्या है तो केला खाने से बचें। अस्थमा के मरीज को सर्दियों और बारिश में केला नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा ज्यादा केला खाने से कुछ लोगों को पेट में गैस, एसिडिटी हो सकती है। वजन घटाने वालों को भी ज्यादा केला खाने से बचना चाहिए। शरीर में सूजन जैसी महसूस होती है, हो सकता है वाटर रिटेंशन, जानिए इसके कारण और इसे कैसे दूर करें Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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Aug 3, 2026, 02:57 AM
जल धारण को समझनाः कारण, लक्षण और परिणाम

जल धारण को समझनाः कारण, लक्षण और परिणाम

जब हमारे शरीर के अंगों में वॉटर रिटेंशन होता है तो हमारे शरीर के कुछ हिस्सों जैसे हाथ, पैर, चेहरे और पेट की मांसपेशियों में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा कहती हैं कि जब हमारा शरीर मिनिरल्स के लेवल को बैलेंस नहीं कर पाता है तो इसकी वजह से शरीर के टिशूज़ में पानी जमा होने लगता है और शरीर के अंग फूलने लगते हैं। ये स्थिति आपके पैरों, एड़ियों और टखनों में भी भयंकर दर्द का कारण बन सकती है। वॉटर रिटेंशन का मतलब है शरीर के अंदरूनी हिस्सों में तरल पदार्थ का जमा होना। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के ऊतकों यानि टिशूज में जरूरत से ज़्यादा पानी जमा हो जाता है। इससे शरीर के कुछ खास हिस्सों, जैसे पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन आ जाती है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा आम है, खासकर हार्मोनल बदलावों के कारण जैसे कि पीरियड्स से पहले या प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा अधिक होता है। इसके अलावा, ज़्यादा नमक खाना, कम पानी पीना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और दिल, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारियां भी इस समस्या का कारण बन सकती हैं। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की समस्या या दिल की बीमारी जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इससे बचने के लिए नमक का सेवन कम करें, खूब पानी पिएं, रोज़ाना हल्की-फुल्की कसरत करें और लंबे समय तक एक ही जगह पर एक ही स्थिति में बैठने से बचें। अगर सूजन बनी रहती है, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्वस्थ दिनचर्या और खान-पान अपनाकर शरीर में पानी जमा होने की समस्या से बचा जा सकता है। डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेदा विशेषज्ञ) ने सुझाव देते हुए इसके लिए कुछ घरेलू उपाय बताए हैं जिन्हें आप अपना सकते हैं। सोडियम का सेवन कम करें और जंक फूड या डिब्बाबंद चीज़ों से बचें। केले, एवोकाडो, हरी सब्ज़ियां, दही और नट्स जैसी चीज़ें खाएं, जो शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखने से टॉक्सिन्स और अतिरिक्त नमक पेशाब के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं। नियमित व्यायाम और टहलने से ब्लड सर्कुलेशन और लिम्फैटिक सिस्टम का काम बेहतर होता है, जिससे सूजन कम होती है। कुलथी का पानी पीना और पार्सले का सेवन करना नैचुरल डाइयूरेटिक का काम करते हैं। ठंडे पानी से नहाना और हल्के हाथों से मालिश करने से भी सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है और सूजन कम हो सकती है। अगर सूजन कम है तो ठंडी सिंकाई करें, कोल्ड थेरेपी का मुख्य मकसद सूजन और तेज़ दर्द को कम करना है। इसके विपरीत, हीट थेरेपी रक्त संचार को बढ़ाती है, जिससे ताज़ा सूजन वाली जगह पर सूजन और बढ़ सकती है और दर्द भी तेज़ हो सकता है। सूजन है तो घबराएं नहीं, आयुर्वेद के अनुसार बताये गए उपचार अपनाएं। गर्दन पर परफ्यूम लगाना बंद कर दें, हो सकता है कैंसर का खतरा, कैम्ब्रिज के Cancer शोधकर्ता ने बताया Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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Aug 2, 2026, 09:17 PM
सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद व्यक्ति अस्पताल में भर्ती

सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद व्यक्ति अस्पताल में भर्ती

तालानगरी की एक फैक्टरी में डाइमेकर के रूप में कार्यरत थाना गांधीपार्क क्षेत्र के मुकुंद नगर एटा चुंगी निवासी ऋषि कुमार शर्मा (48) को सांस लेने में दिक्कत होने पर सोमवार को बघेल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां बीपी की जांच के बाद हाथ में इंजेक्शन लगाया गया। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगाने के कुछ समय बाद हाथ में थक्का जमने से सूजन और संक्रमण बढ़ने लगा। मंगलवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दूसरे नर्सिंग होम में रेफर कर दिया। वहां के चिकित्सकों ने बताया कि संक्रमण काफी फैल चुका है। हाथ काटने तक की नौबत आ गई। इसी बीच रविवार शाम उपचार के दौरान ऋषि की मौत हो गई।विज्ञापनऋषि की मौत के बाद परिजन शव लेकर रात करीब नौ बजे हॉस्पिटल के बाहर पहुंच गए और शव रखकर कुछ देर हंगामा किया। सूचना पर क्वार्सी पुलिस के साथ सीओ तृतीय सर्वम सिंह, सीएमओ रामनाथ सिंह, एसीएमओ दिनेश खत्री आदि पहुंच गए थे। देर रात तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। रात एक बजे परिजनों के रिश्तेदारों को समझाने और उचित कार्रवाई के आश्वासन पर परिजन मान गए। उसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पत्नी कमलेश ने इससे पहले शनिवार को डीएम को शिकायती पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।विज्ञापनसीएमओ को सौंपी मामले की जांचसीओ सिविल लाइंस सर्वम सिंह ने बताया कि परिजनों ने डीएम से शिकायत की थी। जांच के लिए सीएमओ के पास भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं, सीएमओ रामनाथ का कहना है कि बिना पोस्टमार्टम व मेडिकल जांच के कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। यही बात परिवार को समझाई गई।परिजन बोले- डॉक्टर ने स्वीकारी गलती, हमारे पास है वीडियोऋषिपाल पिछले दो वर्ष से कैंसर से पीड़ित थे। उनको इलाज के बीच ही सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर यहां लाया गया था। परिवार का आरोप है कि गलत हाथ में इंजेक्शन लगाने से थक्का जम गया था। उसी थक्के से ह्रदयाघात से मौत हुई है। यह गलती खुद डॉक्टर ने हमसे स्वीकारी थी, इसका वीडियो हमारे पास मौजूद है।- ऋषि पहले से ही कैंसर से पीड़ित थे। परिजन पहले इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले गए थे। वहां इलाज नहीं मिलने पर यहां ले आए थे। इसके बाद दूसरे अस्पताल में ले गए। परिजन फैसले के नाम पर 10 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। सही गलत का फैसला पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर हो जाएगा। सभी आरोप बेबुनियाद है। - डॉ. उमेश बघेल, बघेल हॉस्पिटल क्वार्सी
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Aug 2, 2026, 08:05 PM
दारोह, कांगड़ा में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

दारोह, कांगड़ा में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

डरोह (कांगड़ा)। हिमाचल डायबिटीज स्ट्रोक सोसायटी के सहयोग से भारद्वाज मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पिटल, अरला द्वारा रविवार को बलोह पंचायत में निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर सोसायटी की अध्यक्ष राधिका शर्मा के मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशों में संपन्न हुआ। शिविर में ग्रामीणों के लिए निशुल्क मधुमेह परीक्षण, बीपी, शुगर और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही, चिकित्सकों के परामर्श के बाद जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क दवाइयां भी वितरित की गईं। संवाद
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Aug 2, 2026, 08:05 PM
होम्योपैथी और आयुष पेशेवर डॉक्टरों की कमी के बीच स्वास्थ्य सेवाओं में कमी को पूरा करते हैं

होम्योपैथी और आयुष पेशेवर डॉक्टरों की कमी के बीच स्वास्थ्य सेवाओं में कमी को पूरा करते हैं

1638 मरीजों का इलाज हुआ। सबसे ज्यादा सर्दी, जुकाम, वायरल फीवर के अलावा गले में खरास, पेट दर्द, फंगल इंफेक्शन, आई फ्लू के मरीज इलाज कराने पहुंचे।एलौपैथ चिकित्सक की कमी से होम्योपैथी व आयुष चिकित्सक व फार्मासिस्ट मरीजों का इलाज किया। जयप्रकाश नगर पीएचसी मुरली छपरा पर 63 मरीजों का इलाज किया। प्रभावती देवी सीएचसी जेपी नगर पर डॉ. पवन कुमार सिंह ने 29 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा दी। पीएचसी टोला शिवन राय, न्यू पीएचसी कर्ण छपरा, न्यू पीएचसी बहुआरा पर भी कहीं वार्डबॉय तो कहीं फार्मासिस्ट के नेतृत्व में मरीज़ों का इलाज हुआ।
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Aug 2, 2026, 08:00 PM
भिवानी ने स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए'संडे ऑन साइकिल'कार्यक्रम का आयोजन किया

भिवानी ने स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए'संडे ऑन साइकिल'कार्यक्रम का आयोजन किया

भिवानी। भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र और वैश्य महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को संडे ऑन साइकिल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से आमजन को फिटनेस के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वैश्य महाविद्यालय भिवानी के शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह रहे। उनके नेतृत्व में भारतीय खेल प्राधिकरण खेल प्रशिक्षण केंद्र भिवानी के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और वैश्य महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक साइकिल रैली में भाग लिया। प्रतिभागियों ने पूरे जोश के साथ शहर में साइकिल चलाकर नियमित व्यायाम करने और फिट एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।विज्ञापनकार्यक्रम के समापन पर कुश्ती प्रशिक्षक हरेंद्र सिंह ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि संडे ऑन साइकिल जैसे आयोजन शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ समाज में फिटनेस के प्रति जागरूकता, एकता और सकारात्मक सोच का संदेश देते हैं। उन्होंने नागरिकों से नियमित रूप से ऐसे फिटनेस कार्यक्रमों में भाग लेने का आह्वान किया।विज्ञापन
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Aug 2, 2026, 06:44 PM
जींद में मानसिक स्वास्थ्य शिविर में वरिष्ठ मनोचिकित्सक ने 70 रोगियों की जांच की

जींद में मानसिक स्वास्थ्य शिविर में वरिष्ठ मनोचिकित्सक ने 70 रोगियों की जांच की

जींद। शहर के स्कीम नंबर-6 स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने रविवार को वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक गर्ग की ओर से मानसिक स्वास्थ्य व नशा मुक्ति शिविर में 70 मरीजों की जांच कर उन्हें परामर्श दिया गया। शिविर में तनाव, चिंता, अवसाद, घबराहट, अनिद्रा, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नशे की लत, सिरदर्द, माइग्रेन, मिर्गी और बच्चों की पढ़ाई और व्यवहार संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीज पहुंचे। डॉ. नवीन ने कहा कि जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। ऐसे शिविर लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डॉ. विवेक गर्ग ने कहा कि मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय समस्या है, जिसका समय पर इलाज संभव है। उन्होंने कहा कि सामाजिक झिझक के कारण लोग इलाज में देरी करते हैं, जबकि शुरुआती उपचार से बेहतर परिणाम मिलते हैं। उन्होंने बताया कि अगला निःशुल्क शिविर 9 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक लगाया जाएगा, जिसमें पुराने मरीजों का फॉलोअप और नए मरीजों की जांच की जाएगी।
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Aug 2, 2026, 06:39 PM
पलवल के ओपन जिम जर्जर, उपयोगकर्ताओं के लिए खतरा

पलवल के ओपन जिम जर्जर, उपयोगकर्ताओं के लिए खतरा

पड़तालसंवाद न्यूज एजेंसीपलवल। लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शहर के पार्कों में लगाई गई ओपन जिम अब खुद बदहाली का शिकार हो चुकी हैं। नगर परिषद की अनदेखी के चलते अधिकतर पार्कों में जिम के उपकरण टूटे पड़े हैं। बच्चों के झूले भी जर्जर हालत में हैं। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि शहर के कई प्रमुख पार्कों में न तो ओपन जिम उपयोग के लायक बची हैं और न ही झूले सुरक्षित हैं। ऐसे में लोगों को सुविधा देने के लिए बनाई गई व्यवस्था अब परेशानी और हादसे की आशंका का कारण बन गई हैं।पड़ताल के दौरान लाला लाजपत राय पार्क, गांधी पार्क और शास्त्री पार्क समेत कई पार्कों में ओपन जिम के उपकरण टूटे हुए मिले। कहीं मशीनों के हैंडल गायब थे तो कहीं सीटें और पैडल क्षतिग्रस्त थे। वहीं, बच्चों के झूलों की चेन टूटी हुई मिलीं। कई झूले जंग खाकर खराब हो चुके हैं। इसके बावजूद छोटे-छोटे बच्चे इन्हीं टूटे झूलों पर खेलते दिखाई दिए, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।विज्ञापनस्थानीय लोगों का कहना है कि पार्कों में रोजाना सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग सैर और व्यायाम के लिए आते हैं, लेकिन खराब उपकरणों के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर पार्कों में सुविधाएं तो विकसित कर दी गईं, लेकिन उनका रखरखाव पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।विज्ञापननिवासियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए टूटे झूलों को तुरंत हटाया या ठीक कराया जाना चाहिए। यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।2109 से लगनी हुई थी शुरूशहर के पार्कों में 2019 से ओपन जिम लगनी शुरू हुई थी। इसे स्थापित करने की कीमत क्षेत्रफल पर निर्भर करती है। इसे लगाने में कम से कम 1.5 लाख रुपये की लागत आती है।लोगों से बातचीतसुबह व्यायाम करने आते हैं, लेकिन अधिकतर मशीनें खराब हैं। कई बार शिकायत की, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। -गोलू, निवासीटूटे झूलों पर खेलना पड़ता है। ओपन जिम के उपकरण खराब हैं। जल्द मरम्मत नहीं हुई तो हादसा हो सकता है। -अमित, निवासीपार्क घूमने, बैठने और व्यायाम करने का प्रमुख स्थान हैं, लेकिन इनकी हालत लगातार खराब होती हो रही है। -रमाकांत, निवासीवर्जनपरिषद की ओर से जल्द ही शहर के सभी पार्कों में मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू कराया जाएगा। खराब ओपन जिम के उपकरणों और बच्चों के झूलों को दुरुस्त किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। -कौशल तंवर, जेई, नगर परिषद
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Aug 2, 2026, 05:07 PM
भगवान शिव के प्रसाद के लिए चीनी मुक्त मीठी खीर की विधि

भगवान शिव के प्रसाद के लिए चीनी मुक्त मीठी खीर की विधि

आज सावन का पहला सोमवार है और अगर आप भगवान शिव को कुछ खास भोग लगाना चाहते हैं तो यहां हम आपको शकरकंग की मीठी-मीठी खीर की रेसिपी बता रहे हैं. त्योहारों और व्रत-उपवास के दौरान मीठे में कुछ खास खाने का मन हर किसी का होता है लेकिन चावल या साबूदाना की खीर तो आपने कई बार खाई होगी. अगर आप स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखना चाहते हैं तो शकरकंद की खीर एक बेहतरीन विकल्प है. खास बात है कि यहां हम आपको बिना चीनी और गुड़ वाली खीर की रेसिपी बता रहे हैं. चूंकि शकरकंद प्राकृतिक रूप से मीठी और पोषक तत्वों से भरपूर होती है इसलिए इसमें अलग से बहुत ज्यादा चीनी या गुड़ मिलाने की जरूरत भी नहीं पड़ती और इसमें मेवों की भी प्राकृतिक मिठास होती है जिससे यह काफी मीठी-मीठी और टेस्टी बनती है. मात्र 1 गिलास दूध और कुछ सूखे मेवों के साथ आप घर पर ही बेहद मलाईदार और स्वादिष्ट खीर तैयार कर सकते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने की बहुत ही आसान विधि. शकरकंद को उबालकर छीलें और अच्छी तरह मैश कर लें. इसे उबलते हुए दूध में मिलाएं ताकि खीर में गाढ़ापन आए. कच्ची या उबली शकरकंद को कद्दूकस करके देसी घी में थोड़ा भून लें. फिर इसमें दूध डालकर धीमी आंच पर पकाएं. दूध और शकरकंद के साथ मलाई, मिल्क पाउडर, या कंडेंस्ड मिल्क मिलाया जाता है जिससे यह बहुत जल्दी और रबड़ी जैसी क्रीमी बनती है. लेकिन इसे व्रत में नहीं खा सकते हैं. शकरकंद (Sweet Potato) - 2 मध्यम आकार की (उबली और मैश की हुई) दूध - 1 बड़ा गिलास (फुल क्रीम) ड्राई फ्रूट्स (काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश) - 2-3 बड़े चम्मच (बारीक कटे हुए) इलायची पाउडर - आधा छोटा चम्मच केसर के धागे - 8-10 (वैकल्पिक, खूबसूरत रंग और खुशबू के लिए) देशी घी - 1 छोटा चम्मच सबसे पहले शकरकंद को अच्छी तरह धोकर उबाल लें. जब यह ठंडी हो जाए तो इसके छिलके उतारकर हाथों या मैशर की मदद से अच्छी तरह मैश कर लें. एक भारी तले की कढ़ाई या पैन में 1 छोटा चम्मच देशी घी गरम करें. इसमें कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें और अलग निकाल लें. उसी पैन में 1 गिलास फुल क्रीम दूध डालें और उसे मध्यम आंच पर उबलने दें. दूध को थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाएं. जब दूध में अच्छा उबाल आ जाए, तब इसमें मैश की हुई शकरकंद डालें. इसे लगातार चलाते रहें ताकि दूध में कोई गांठ न पड़े और शकरकंद दूध में पूरी तरह घुल जाए. मिश्रण को 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें, जिससे खीर मलाईदार और गाढ़ी हो जाए. अब इसमें इलायची पाउडर, केसर के धागे और भुने हुए ड्राई फ्रूट्स (थोड़े से सजावट के लिए बचा लें) मिला दें. 2 मिनट और पकाने के बाद गैस बंद कर दें.
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Aug 2, 2026, 02:13 PM
प्राकृतिक त्वचा देखभाल रहस्यः अपनी त्वचा को युवा और सुंदर कैसे बनाए रखें

प्राकृतिक त्वचा देखभाल रहस्यः अपनी त्वचा को युवा और सुंदर कैसे बनाए रखें

बढ़ती उम्र, प्रदूषण और खराब जीवनशैली का सबसे पहला असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है. समय के साथ स्किन का नेचुरल कोलेजन कम होने लगता है, जिससे चेहरे पर झुर्रियां, फाइन लाइंस और स्किन ढीली पड़ने लगती है. लेकिन आजकल कई लोगों को उम्र से पहले ही ये दिक्कतें होने लगी हैं. ऐसे में घबराकर लोग या तो पार्लर के महंगे एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट्स का सहारा लेने लग जाते हैं या फिर महंगी क्रीम, सीरम जैसे प्रोडक्ट्स पर पैसे खर्च करने लगते हैं. इसके बजाय अगर आप अपनी डाइट और लाइफस्टाइल को हेल्दी कर लेते हैं और कुछ प्राकृतिक घरेलू नुस्खों का सहारा लेंते हैं तो आप वक्त से पहले खराब हो रही स्किन को लंबे समय तक सुंदर और जवान रख सकते हैं. चावल का मांड यानी स्टार्च वाला चावल का पानी स्किन को टाइट और ग्लोइंग बनाने के लिए कोरियाई स्किन केयर रूटीन में बहुत ही पॉपुलर है. वहां चावल के पानी और मांड का इस्तेमाल स्किन को अच्छा बनाने में खूब होता है. चावल के पानी या मांड में बादाम का तेल और जोजोबा ऑयल मिलाकर एक ऐसा शक्तिशाली कोलेजन सीरम तैयार किया जा सकता है जो आपकी ढीली स्किन को कसने और चेहरे पर कांच जैसी चमक लाने में बेहद मददगार हो सकता है. आइए जानते हैं इसे बनाने और लगाने का सही तरीका. चावल का मांड: 3-4 बड़े चम्मच (पक्का हुआ या उबले चावल का पानी) बादाम का तेल : 1 छोटा चम्मच (विटामिन-ई से भरपूर) जोजोबा ऑयल : 1 छोटा चम्मच (त्वचा को गहराई से नमी देने के लिए) एलोवेरा जेल - वैकल्पिक बाइंडिंग के लिए): 1 छोटा चम्मच (सीरम को सही टेक्सचर देने के लिए) सबसे पहले थोड़े से चावल को पानी में उबाल लें और उसका गाढ़ा मांड (स्टार्च वाला पानी) छानकर अलग निकाल लें. इसे पूरी तरह ठंडा होने दें. अब एक साफ कांच की कटोरी में 3-4 बड़े चम्मच ठंडा किया हुआ चावल का मांड लें. इसमें 1 छोटा चम्मच बादाम का तेल और 1 छोटा चम्मच जोजोबा ऑयल मिलाएं. मिश्रण को अच्छी तरह फेंटें ताकि सभी चीजें आपस में पूरी तरह घुल-मिलकर एक स्मूथ और लाइट सीरम का रूप ले लें. इस तैयार होममेड कोलेजन सीरम को किसी कांच की ड्रॉपर बोतल में भरकर फ्रिज में रख लें. यह 7 से 10 दिनों तक आसानी से चल जाता है. सीरम लगाने से पहले अपने चेहरे को किसी माइल्ड फेस वॉश से अच्छी तरह धोकर पोंछ लें. ड्रॉपर की मदद से सीरम की 4-5 बूंदें अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं. उंगलियों के पोरो से चेहरे पर सर्कुलर मोशन हल्के हाथों से 2 से 3 मिनट तक मसाज करें, ताकि सीरम त्वचा की गहराई तक समा जाए. सबसे बेहतरीन रिजल्ट के लिए इस सीरम को रात को सोने से पहले लगाएं और रातभर चेहरे पर लगा रहने दें. अगली सुबह सादे पानी से चेहरा धो लें.
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Dainik Jagran
Aug 2, 2026, 02:06 PM
अखरोटः स्वस्थ हृदय के लिए स्वास्थ्य का खजाना

अखरोटः स्वस्थ हृदय के लिए स्वास्थ्य का खजाना

हेल्दी रहने के लिए हम अक्सर कई तरह के सुपरफूड्स की तलाश में रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा नट भी है, जिसे सेहत का खजाना कहा जाता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं अखरोट की। यह सिर्फ स्वाद में ही लाजवाब नहीं है, बल्कि हमारे शरीर को अंदर से फौलादी बनाने और दिमाग को तंदुरुस्त रखने में भी इसका कोई जवाब नहीं है। इसमें मौजूद ओमेगा-3, एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स हमारे पूरे शरीर पर जादुई असर डालते हैं। आइए जानते हैं कि रोजाना थोड़ी-सी मात्रा में अखरोट खाना आपकी सेहत के लिए कैसे वरदान साबित हो सकता है। अखरोट आपके दिल का सच्चा दोस्त है। इसमें भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करता है। इसके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त अगर आप अपनी याददाश्त और दिमागी चुस्ती बढ़ाना चाहते हैं, तो अखरोट बेहतरीन विकल्प है। ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को तेजी से बढ़ाता है। बार-बार भूख लगने की आदत से परेशान हैं? अखरोट को अपनी डाइट में शामिल करें। इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे खाने की इच्छा कम होती है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स आपको भरपूर एनर्जी देने के साथ-साथ वजन को भी संतुलित रखते हैं। अखरोट एंटीऑक्सीडेंट्स का सबसे शानदार सोर्स है। इसमें मौजूद विटामिन-ई और पॉलीफेनॉल्स शरीर में फ्री रैडिकल्स से लड़ते हैं। इसका सीधा फायदा यह होता है कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और स्किन हमेशा हेल्दी रहती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए अखरोट विशेष रूप से लाभकारी है। इसका सेवन करने से शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में बहुत मदद मिलती है। अखरोट में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा, यह उम्र के साथ होने वाली हड्डियों की बीमारी 'ऑस्टियोपोरोसिस' के खतरे को भी कम करता है। अगर आप पेट से जुड़ी समस्याओं से बचे रहना चाहते हैं, तो अखरोट खाना फायदेमंद है । इसमें फाइबर की बहुत अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को एकदम दुरुस्त रखता है और कब्ज जैसी परेशानियों से बचाता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम बात हो गई है। अखरोट में मौजूद मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड चिंता और मेंटल स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। रोजाना 5–6 अखरोट खाने से आपका मूड बेहतर रहता है और रात को नींद भी बहुत सुकून भरी आती है। रोजाना 5 से 7 अखरोट खाने की छोटी सी आदत आपकी ऊर्जा और स्वास्थ्य दोनों को चमत्कारी रूप से बढ़ा सकती है। आयुर्वेद के मुताबिक क्या है सूखे मेवे खाने का सही तरीका? सेहत के लिए संजीवनी हैं ये ड्राई फ्रूट्स हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं है अखरोट, जानिए किन 7 लोगों को इससे बनानी चाहिए दूरी
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Aug 2, 2026, 01:58 PM
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चारधाम यात्रा से पहले श्रीनगर उपजिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चारधाम यात्रा से पहले श्रीनगर उपजिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया

श्रीनगर। चारधाम यात्रा के दौरान मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना असवाल ने रविवार को श्रीनगर उपजिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और आईसीयू का जायजा लिया व स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। सीएमओ ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उपचार, भोजन, पेयजल और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। मरीजों ने समय पर भोजन मिलने और चिकित्सकीय सेवाओं पर संतोष व्यक्त किया। इस पर सीएमओ ने अस्पताल प्रबंधन की सराहना करते हुए व्यवस्थाओं को इसी तरह बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विशेष रूप से चारधाम यात्रा को देखते हुए आईसीयू को पूरी तरह सक्रिय और हर समय तैयार रखने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। साथ ही अस्पताल परिसर और वार्डों में साफ-सफाई की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया। उपजिला चिकित्सालय के प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रचित गर्ग ने सीएमओ को अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, चिकित्सकों की तैनाती, मरीजों की संख्या तथा यात्रा सीजन को लेकर की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।इस अवसर पर डॉ. गोविंद पुजारी, डॉ. समीक्षा वर्मा, डॉ. मारिषा पंवार, डॉ. सचिन चौबे, डॉ. सौरभ समदर, डॉ. जयशंकर सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
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Aug 2, 2026, 12:51 PM
सावन फास्ट रेसिपीः क्रंच मूंगफली के साथ स्वादिष्ट समा चावल चीला

सावन फास्ट रेसिपीः क्रंच मूंगफली के साथ स्वादिष्ट समा चावल चीला

सावन के व्रत में अगर आप एक जैसा फलाहार खाकार बोर हो गए हैं, तो इस बार कुछ नया ट्राई करें। समा के चावल और आलू से बनने वाला यह टेस्टी चीला स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल है। यह रेसिपी कम समय में बन भी जाती है। तो चलिए जानते हैं कैसे बनाएं बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम यह टेस्टी चीला समा चावल -1 कप, भुनी हुई मूंगफली आधा कप, दही 1 कप, भुना हुआ जीरा पाउडर - 1 छोटा चम्मच, धनिया पत्ती आधा कप, हरी मिर्च 2 बड़े चम्मच, अदरक 2 बड़े चम्मच, स्वादानुसार सेंधा नमक, मूंगफली का तेल या घी पहला स्टेप: समा के चावल का चीला बनाने के लिए, सबसे पहले एक कप समा के चावल को अच्छी तरह से धोकर आधे घंटे के लिए भिगोकर रख दें। आधे घंटे के बाद चावल और आधा कप दही डालकर मिक्सर जार में डालकर पीस लें और एकदम स्मूथ बैटर बना लें। अब एक बैटर को एक बड़े बाउल में निकालें। दूसरा स्टेप: अब मूंगफली को भूनकर उसे अच्छी तरह से खुन लें। उसके बाद, चावल के बैटर में खुनी हुई मूंगफली, कद्दूकस किया हुआ आलू, अदरक, सेंधा नमक, हरी धनिया , जीरा पाउडर और बारीक कटी हरी मिर्च को डालकर अच्छे से मिलाएं। आपका बैटर तैयार है। इसे दस मिनट तक सेट होने के लिए रख दें। तीसरा स्टेप: दस मिनट के बाद गैस ऑन करें और उसपर डोसा पैन रखें। जब पैन गर्म हो जाए तो उसे तेल से ग्रीस करें उसपर बैटर को डालकर अच्छी तरह से फैलाएं। इस दौरान गैस की आंच स्लो रखें और दोनों साइड से अच्छी तरह से पका लें। आपका गर्म गर्म चीला बनकर तैयार है। चौथा स्टेप: अब चीला के लिए चटनी बना लें। चटनी के लिए मिक्सर जार में हरी धनिया के साथ एक मिर्च, एक चम्मच मूंगफली, सेंधा नमक और एक चम्मच दही डालें और बारीक पीस लें। आपकी चटनी बनकर तैयार है। गर्म गर्म चीला के साथ चटपटी चटनी सर्वं करें।
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Aug 2, 2026, 11:40 AM
फैटी लिवर को नियंत्रित करनाः स्वस्थ लीवर के लिए जीवन शैली में बदलाव

फैटी लिवर को नियंत्रित करनाः स्वस्थ लीवर के लिए जीवन शैली में बदलाव

फैटी लिवर आज के समय में तेजी से बढ़ने वाली समस्याओं में से एक है। अच्छी बात यह है कि सही लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करके इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। डॉक्टर के अनुसार, अगर आपको फैटी लिवर है तो दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करना भी बेहद जरूरी है। वजन करें कम: अगर आपका फैटी लिवर है, तो सबसे पहले अतिरिक्त वजन कम करने पर ध्यान दें। शरीर के वजन में 5-10% की कमी भी लिवर में जमा फैट को कम करने और सूजन घटाने में मदद कर सकती है। इसके लिए संतुलित आहार और नियमित एक्सरसाइज अपनाएं। शुगरी फूड्स का सेवन न करें: कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, मिठाइयां, केक, कुकीज और रिफाइंड कार्ब्स जैसी चीजों का सेवन कम करें। ज्यादा चीनी और फ्रक्टोज लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। फिजिकली एक्टिव हो जाएं: रोजाना कम से कम 30–45 मिनट तेज चाल से चलना, साइक्लिंग, तैराकी या अन्य एक्सरसाइज करें। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर को कंट्रोल करने में मददगार हो सकती है। इन चीजों को डाइट में करें शामिल: डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फल, नट्स, बीज, ओमेगा-3 से भरपूर खाद्य पदार्थ (जैसे अलसी और अखरोट) और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। साथ ही तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं और पर्याप्त पानी पिएं।
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Aug 2, 2026, 11:38 AM
गढ़वाल विश्वविद्यालय ने मादक पदार्थ विरोधी अभियान'नशा मुक्त युवा, विकास भारत संकल्प अभियान'का आयोजन किया

गढ़वाल विश्वविद्यालय ने मादक पदार्थ विरोधी अभियान'नशा मुक्त युवा, विकास भारत संकल्प अभियान'का आयोजन किया

पौड़ी/थलीसैंण। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के बीजीआर परिसर और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) ने रविवार को 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान' आयोजित किया। परिसर निदेशक प्रो. यूसी गैरोला ने छात्रों से नशा छोड़कर स्वस्थ जीवन अपनाने और अभियान से जुड़ने की अपील की। प्रो. अनूप पांडेय ने नशे के सामाजिक, मानसिक व शारीरिक दुष्प्रभाव बताए, जबकि प्रो. एमसी पुरोहित ने युवाओं को विकसित भारत की आधारशिला बताया। प्रो. एससी गैरोला और डॉ. विक्रम नेगी ने जागरूकता, संवाद, खेलकूद और परामर्श गतिविधियां नियमित आयोजित करने पर जोर दिया। उधर, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ. योगेंद्र चंद्र सिंह ने कहा कि नशामुक्त युवा ही समाज और देश के विकास में प्रभावी योगदान दे सकते हैं। एंटी ड्रग सेल के प्रभारी डॉ. हरिओम रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत संकल्प को सफल बनाने में युवाओं की भूमिका अहम बताई। एनएसएस प्रभारी डॉ. बचन सिंह ने छात्र-छात्राओं को नशा मुक्त भारत के निर्माण की शपथ दिलाई।
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Aug 2, 2026, 10:22 AM
मूंग दाल दही फुल्कीः एक स्वादिष्ट और स्वस्थ शीतकालीन सप्ताहांत की विधि

मूंग दाल दही फुल्कीः एक स्वादिष्ट और स्वस्थ शीतकालीन सप्ताहांत की विधि

सर्दियों या वीकेंड के दिनों में कुछ अलग और चटपटा खाने का मन हो, तो पारंपरिक दही वड़ों से हटकर कुछ नया ट्राई करना एक बेहतरीन विकल्प है. अगर आप इस वीकेंड कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद हो, तो मूंग दाल की दही वाली फुल्की आपके लिए एकदम परफेक्ट है. उड़द दाल के भारी-भरकम दही वड़ों की तुलना में यह पचाने में हल्की होती है और मूंग दाल से भरपूर मात्रा में प्रोटीन और दही से कैल्शियम का बेहतरीन लाभ मिलता है. घर पर झटपट और बेहद मुलायम मूंग दाल की दही वाली फुल्की बनाने की आसान रेसिपी नीचे दी गई है: पीली मूंग दाल - 1 कप (4-5 घंटे भीगी हुई) दही - 2-3 कप (फेटा हुआ और थोड़ा गाढ़ा) हरी मिर्च - 2 (बारीक कटी हुई) अदरक - 1 छोटा चम्मच (कद्दूकस किया हुआ) हिंग - एक चुटकी लाल मिर्च पाउडर - आधा छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर - 1 छोटा चम्मच काला नमक और सादा नमक - स्वादानुसार इमली की खट्टी-मीठी चटनी - सजावट के लिए हरी चटनी - स्वाद के अनुसार हरा धनिया - बारीक कटा हुआ तेल - फुल्की तलने के लिए भीगी हुई मूंग दाल का सारा पानी निकाल लें. इसके बाद इसे मिक्सी जार में डालें और बिना ज्यादा पानी मिलाए दरदरा या स्मूथ पेस्ट पीस लें. (ध्यान रखें पेस्ट बहुत ज्यादा पतला नहीं होना चाहिए). पिसी हुई दाल को एक बड़े बाउल में निकालें. इसमें हिंग, अदरक, हरी मिर्च और थोड़ा सा नमक मिलाएं. अब दाल के मिश्रण को हाथ या चम्मच से एक ही दिशा में 4-5 मिनट तक लगातार फेंटें. इससे पेस्ट में हवा भर जाएगी और फुल्की एकदम स्पंजी और मुलायम बनेगी. एक कड़ाही में तेल गर्म करें. मीडियम आंच पर हाथों या चम्मच की मदद से छोटे-छोटे पकौड़े (फुल्की) तेल में छोड़ें. इन्हें सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तल लें. इसके बाद तली हुई फुलकियों को निकालकर 2 मिनट के लिए सादे पानी में डुबोएं और फिर हल्के हाथों से निचोड़कर प्लेट में रख लें. एक बर्तन में फेटा हुआ दही लें, उसमें थोड़ा सा नमक और चीनी (वैकल्पिक) मिलाकर चिकना कर लें. एक सर्विंग प्लेट में निचोड़ी हुई फुलकियां रखें. इसके ऊपर भरपूर मात्रा में ठंडा-ठंडा फेटा हुआ दही डालें. ऊपर से भुना जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, काला नमक, इमली की खट्टी-मीठी चटनी, हरी चटनी और बारीक कटा हरा धनिया डालकर सजाएं. मुंह में घुल जाने वाली यह मूंग दाल की दही वाली फुल्की जब आप वीकेंड पर परिवार को खिलाएंगे, तो हर कोई पारंपरिक दही वड़े भूलकर इसकी तारीफ करेगा. यह स्वाद और सेहत दोनों का एक बेहतरीन मेल है.
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Aug 2, 2026, 07:14 AM
कार्यालय कर्मचारियों के कल्याण के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण

कार्यालय कर्मचारियों के कल्याण के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण

आजकल काम का दबाव, गलत खाना और तनाव लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं. खासकर ऑफिस में काम करने वाले लोगों में दिल की बीमारी, डायबिटीज और मानसिक तनाव के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हाल ही में CII और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म MediBuddy की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जो कर्मचारी साल में तीन बार हेल्थ चेकअप कराते हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत दूसरे लोगों के मुकाबले काफी कम पड़ती है. अगर आप नौकरी करते हैं, तो अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें. समय पर हेल्थ चेकअप कराएं, रिपोर्ट को समझें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें. यह करना आपके लिए जरूरी हैं. छोटी-छोटी अच्छी आदतें भविष्य में बड़ी बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कई लोग हेल्थ चेकअप तो करा लेते हैं, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर की सलाह नहीं लेते. आधे से ज्यादा कर्मचारी जांच के बाद कोई कदम ही नहीं उठाते. ऐसे में बीमारी का खतरा बना रहता है और समय पर इलाज नहीं हो पाता. इसलिए सिर्फ जांच कराना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके बाद सही इलाज और नियमित देखभाल भी जरूरी है. यह भी सामने आया है कि ऑफिस में काम करने वाले लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक और दूसरी दिल की समस्याएं देखने को मिल रही हैं. वहीं, डायबिटीज के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं. लंबे समय तक बैठकर काम करना, तनाव, नींद की कमी और खराब खाना इसकी बड़ी वजह माने जा रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग उम्र के कर्मचारियों की स्वास्थ्य समस्याएं भी अलग हैं. कम उम्र के कर्मचारियों में चिंता और तनाव ज्यादा देखा जा रहा है. वहीं 30 से 40 साल के लोगों में काम का दबाव, थकान और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं. अधिक उम्र के कर्मचारियों में पुरानी बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है. रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर कंपनियां अभी भी कर्मचारियों की सेहत को लेकर शुरुआती तौर पर ही काम कर रही हैं. डॉक्टरों का कहना है कि कंपनियों को केवल हेल्थ चेकअप कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. कर्मचारियों को समय-समय पर डॉक्टर की सलाह, फॉलो-अप और जरूरी मदद भी मिलनी चाहिए.
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Aug 2, 2026, 04:16 AM
मोबाइल की लत'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम'से जुड़ीः गर्दन के स्वास्थ्य के लिए बढ़ती चिंता

मोबाइल की लत'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम'से जुड़ीः गर्दन के स्वास्थ्य के लिए बढ़ती चिंता

आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके हाथ में दिनभर मोबाइल न रहता हो. सुबह उठते ही फोन देखना, घंटों सोशल मीडिया चलाना, ऑनलाइन काम करना, वीडियो देखना और चैटिंग करना अब लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है. यही आदत धीरे-धीरे हमारी सेहत पर भारी पड़ रही है. लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर झुक कर देखने की वजह से गर्दन पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे एक ऐसी समस्या तेजी से बढ़ रही है जिसे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम कहा जाता है. विशेषज्ञ इसे डिजिटल दौर की ऐसी परेशानी मानते हैं, जो समय से पहले गर्दन और रीढ़ की हड्डी को कमजोर बना सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मोबाइल की लत कैसे गर्दन को बूढ़ा बना रही है, टेक्स्ट नेक सिंड्रोम क्या है और इसके लक्षण क्या हैं टेक्स्ट नेक सिंड्रोम गर्दन और सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी एक समस्या है, जो लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन देखने के लिए सिर को आगे झुकाकर रखने से होती है. लगातार गलत पोश्चर में रहने से गर्दन की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और कंधों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने लगता है. सामान्य स्थिति में इंसान के सिर का वजन लगभग 10 से 12 पाउंड माना जाता है, लेकिन जैसे-जैसे सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन पर पड़ने वाला दबाव तेजी से बढ़ जाता है. केवल 15 डिग्री झुकने पर यह दबाव लगभग 27 पाउंड तक पहुंच जाता है, जबकि 60 डिग्री तक सिर झुकाने पर गर्दन को लगभग 60 पाउंड तक का भार महसूस हो सकता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर की बनावट और रीढ़ की हड्डी पर भी असर पड़ सकता है. लगातार मोबाइल देखने की आदत के कारण लोग घंटों तक गर्दन झुकाकर बैठे रहते हैं. इससे गर्दन की मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं और धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. समय के साथ यह दबाव रीढ़ की हड्डी की सामान्य स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है. इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे डिजिटल एजिंग या गर्दन के समय से पहले बूढ़ा होने की समस्या भी मानते हैं. अगर किसी व्यक्ति को टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की समस्या हो रही है तो उसे कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं. जैसे गर्दन में लगातार दर्द और अकड़न, कंधों में दर्द या जकड़न, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, सिरदर्द, गर्दन को घुमाने में परेशानी, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन, हाथों और उंगलियों में सुन्नपन, शरीर के पोश्चर में बदलाव, जैसे झुके हुए कंधे या आगे निकली गर्दन. अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो समस्या और गंभीर हो सकती है. Seasonal Flu: सीजनल फ्लू हो जाए तो क्या खाना चाहिए, किससे होगी फास्ट रिकवरी? विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह मॉडर्न लाइफस्टाइल है. लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करना, घंटों लैपटॉप पर गलत तरीके से बैठकर काम करना, बिना ब्रेक लिए लगातार स्क्रीन देखना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना इस समस्या का मुख्य कारण माना जाता है. खराब एर्गोनॉमिक्स यानी सही बैठने की व्यवस्था न होना भी गर्दन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा देता है. इस समस्या से बचने के लिए सबसे पहले मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करना जरूरी है. मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन को आंखों के बराबर रखने की कोशिश करें. बैठते समय रीढ़ सीधी रखें और कंधों को पीछे की ओर रखें. हर 20 मिनट बाद कुछ सेकंड का ब्रेक लें .गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग भी फायदेमंद हो सकते हैं. Sleeping With Earplugs: कान में ईयरप्लग लगाकर सोते हैं तो हो जाएं सावधान, बढ़ सकता है खतरा
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Aug 2, 2026, 04:05 AM
ज्योतिषीय अंतर्दृष्टिः कुछ राशियों के लिए एक शुभ सप्ताह आगे

ज्योतिषीय अंतर्दृष्टिः कुछ राशियों के लिए एक शुभ सप्ताह आगे

नया सप्ताह शुरू होने वाला है. यह सप्ताह 3 अगस्त से लेकर 9 अगस्त तक रहने वाला है. सप्ताह की शुरुआत सावन के पहले सोमवार के साथ होने जा रही है. टैरो कार्ड रीडर्स की मानें तो यह सप्ताह कुछ राशियों के लिए बहुत ही शुभ रहने वाला है. जबकि कुछ राशियों को करियर और आर्थिक मोर्चे पर सावधानी के साथ कार्य करने होंगे. आइए जानते हैं कि अगस्त का यह नया सप्ताह करियर, प्रेम, स्वास्थ्य और आर्थिक दृष्टि से सभी राशियों के लिए कैसा रहने वाला है. इस सप्ताह छोटी-छोटी बातों पर विवाद हो सकता है. गुस्से पर काबू रखें. रिश्तों में प्यार और समझ बनाए रखें. पैसों के मामले में सोच-समझकर निवेश करें. बजट बनाकर चलें. ऑफिस में सहकर्मियों से मतभेद हो सकते हैं. सेहत अच्छी रखने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाएं. पारिवारिक मामलों को लेकर जीवनसाथी से बहस हो सकती है. खुलकर बात करें. इससे रिश्ते मजबूत होंगे. पैसों के मामले में फिजूल खर्च से बचें. नई साझेदारी शुरू करने से पहले अच्छी तरह सोच लें. ध्यान और मेडिटेशन मानसिक शांति देंगे. प्रेम और वैवाहिक जीवन में तालमेल अच्छा रहेगा. रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी. पैसों के मामले में जल्दबाजी न करें. बचत पर ध्यान दें. नौकरी और कारोबार में धीरे-धीरे अच्छे अवसर मिल सकते हैं. सेहत सामान्य रहेगी. संतुलित दिनचर्या बनाए रखें. घर का माहौल शांत रखने की कोशिश करें. गुस्से से नुकसान हो सकता है. आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं. वाहन खरीदने का विचार बन सकता है. नौकरी को लेकर चिंता बनी रह सकती है. ज्यादा तनाव न लें. ब्लड प्रेशर और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें. प्रेम संबंध मजबूत रहेंगे. परिवार में बातचीत से समस्याएं सुलझेंगी. लंबे समय के निवेश के लिए समय अच्छा माना गया है. नौकरी और कारोबार में सम्मान मिलने के योग हैं. मौसम बदलने से होने वाली बीमारियों से बचें. नियमित व्यायाम करें. जीवनसाथी के साथ यात्रा का योग बन सकता है. इससे रिश्ते मजबूत होंगे. पुराने निवेश का फायदा मिल सकता है. नई संपत्ति या वाहन खरीदते समय सावधानी रखें. ऑफिस में टीमवर्क से सफलता मिलेगी. तनाव कम रखें और पूरी नींद लें. रिश्तों में प्यार और सहयोग बढ़ेगा. अहंकार से दूर रहें. पैसों के मामले में सुरक्षित निवेश करें. बजट बनाकर चलें. नौकरीपेशा लोगों को तरक्की के संकेत मिल सकते हैं. कारोबार में उतार-चढ़ाव रहेगा. खानपान और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें. रिश्तों में गलतफहमियां हो सकती हैं. खुलकर बात करें. इससे विश्वास बढ़ेगा. अनावश्यक खर्च से बचें. इस समय संपत्ति की खरीद-बिक्री से दूरी रखना बेहतर रहेगा. काम को टालें नहीं. शरीर और मन दोनों को आराम दें. प्रेम जीवन में छोटी-छोटी बातों पर बहस हो सकती है. परिवार का साथ मिलेगा. आय में थोड़ा सुधार हो सकता है. खर्च सोच-समझकर करें. ऑफिस की राजनीति से दूर रहें. नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन आपको फिट रखेगा. प्रेम संबंधों में मिठास बढ़ेगी. परिवार के साथ मिलकर समस्याओं का समाधान निकालें. आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं. दोस्तों और परिवार की सलाह फायदेमंद रहेगी. करियर में रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. सेहत सामान्य रहेगी. रिश्तों में साफ और ईमानदार बातचीत करें. इससे पुराने विवाद खत्म हो सकते हैं. आर्थिक मामलों में किसी पुराने निवेश या पुराने दोस्तों की मदद से लाभ मिल सकता है. काम का दबाव बढ़ सकता है. नई हेल्थ रूटीन शुरू करने का अच्छा समय है. प्रेम संबंधों में जल्दबाजी न करें. धैर्य रखने से रिश्ते मजबूत होंगे. अविवाहित लोगों को अच्छे संकेत मिल सकते हैं. आय और खर्च दोनों बने रहेंगे. इसलिए संतुलन जरूरी है. करियर में नए फैसले सोच-समझकर लें. मानसिक शांति बनाए रखें और वर्तमान पर ध्यान दें.
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Amar Ujala
Aug 2, 2026, 02:03 AM
भारत सरकार ने राज्य के अस्पतालों में आयुष चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए धन आवंटित किया

भारत सरकार ने राज्य के अस्पतालों में आयुष चिकित्सा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए धन आवंटित किया

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में अस्पताल में संचालित वेलनेस और पंचकर्म सेवाओं को मजबूत करने के लिए 23 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आउटसोर्स आधार पर तीन स्टाफ नर्सों और चार पंचकर्म थेरेपिस्टों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा अन्य आयुर्वेदिक कॉलेजों से आने वाले बीएएमएस इंटर्न्स के लिए सीटें 8 से बढ़ाकर 16 कर दी गई हैं।विज्ञापनमंत्री ने कहा कि अस्पताल के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए बैजनाथ शिव मंदिर ट्रस्ट और महाकाल मंदिर ट्रस्ट का सहयोग लिया जाएगा, जिससे वार्डों का रखरखाव, गद्दे और गर्म-ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। संस्थान के संसाधन बढ़ाने के लिए दो नई दुकानों, कैफेटेरिया के निर्माण और पीपीपी मोड पर अल्ट्रासाउंड सेवाएं संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है। इस मौके पर उनके साथ बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल भी मौजूद थे।
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ABP News
Aug 2, 2026, 01:40 AM
आईफोन उपयोगकर्ताः छिपी हुई सुविधा के साथ गति की बीमारी को कम करें

आईफोन उपयोगकर्ताः छिपी हुई सुविधा के साथ गति की बीमारी को कम करें

अक्सर देखा गया है कि लोगों को सफर के दौरान चक्कर आने लगते हैं या फिर उल्टी जैसा महसूस होने लगता है. दरअसल, दुनियाभर में लाखों लोग मोशन सिकनेस (Motion Sickness) की समस्या से परेशान रहते हैं. खासकर तब जब सफर के दौरान लोग फोन की स्क्रीन देखते हैं ये परेशानी और बढ़ सकती है. लेकिन अगर आपके पास iPhone है तो इसमें मौजूद एक खास फीचर आपकी इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है. ये फीचर iPhone की सेटिंग्स में छिपा हुआ है और बहुत से यूजर्स को इसकी जानकारी भी नहीं होती. आपको बता दें कि मोशन सिकनेस तब होती है जब हमारा दिमाग आंखों और शरीर से मिलने वाले मैसेज में अंतर महसूस करता है. उदाहरण के लिए, जब आप कार में बैठे हैं और फोन की स्क्रीन देख रहे हैं तो आपकी आंखें महसूस करती हैं कि आप स्टेबल हैं लेकिन शरीर और कान के अंदर मौजूद बैलेंस सिस्टम को पता चलता है कि आप लगातार चल रहे हैं. इन अलग-अलग मैसेजों के कारण दिमाग कंफ्यूज हो जाता है और इससे चक्कर आना, जी मिचलाना, पसीना आना और सिर दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Apple ने iPhone में Vehicle Motion Cues फीचर शामिल किया है. ये फीचर स्क्रीन पर छोटे-छोटे एनिमेटेड डॉट्स दिखाता है जो गाड़ी की स्पीड के हिसाब से चलते हैं. ये डॉट्स आपकी आंखों को ये मैसेज देने में मदद करते हैं कि फोन की स्क्रीन देखने के दौरान भी शरीर स्पीड कर रहा है. इससे आंखों और शरीर के बीच होने वाला कंफ्यूज कम हो सकता है और मोशन सिकनेस के लक्षणों में राहत मिल सकती है. ये फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए काफी काम का है जिन्हें कार या बस में फोन इस्तेमाल करते समय परेशानी होती है. अगर आप इस फीचर को इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें. इसके बाद जब आपका iPhone महसूस करेगा कि आप किसी चलती हुई गाड़ी में हैं तो स्क्रीन के किनारों पर छोटे-छोटे डॉट्स दिखाई देने लगेंगे. Vehicle Motion Cues फीचर iPhone के मोशन सेंसर का इस्तेमाल करता है. जब फोन को पता चलता है कि आप किसी गाड़ी में सफर कर रहे हैं तो ये अपने आप एक्टिव हो सकता है. यूजर इसे हमेशा ऑन रखने या जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने का ऑप्शन चुन सकते हैं. अगर आपको अक्सर सफर के दौरान फोन देखने पर परेशानी होती है तो इसे एक्टिव रखना फायदेमंद हो सकता है. iPhone का ये फीचर Apple यूजर्स के लिए बहुत काम का माना जाता है. लेकिन Android डिवाइस में भी मोशन सिकनेस कम करने के लिए कुछ ऑप्शन मिल सकते हैं. कई एंड्रॉयड फोन में स्क्रीन मोशन कम करने, एनिमेशन घटाने और एक्सेसिबिलिटी फीचर्स मौजूद होते हैं. इसके अलावा सफर के दौरान कुछ आसान ट्रिक्स जैसे खिड़की से बाहर देखना, फोन कम इस्तेमाल करना और आगे की सीट पर बैठना भी मददगार साबित हो सकता है. मोशन सिकनेस से बचने के लिए सिर्फ iPhone की सेटिंग ही काफी नहीं है. आप इन बातों का भी ध्यान रख सकते हैं. स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है. टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं. इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.
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Aug 1, 2026, 09:13 PM
जाट शिक्षा संस्था ने अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया

जाट शिक्षा संस्था ने अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया

शिविर में पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. रमन पसरीजा ने कहा कि बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, धूल और बदलती जीवनशैली फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के प्रमुख कारण हैं। जाट शिक्षण संस्था के प्रधान गुलाब सिंह दिमाना ने कहा कि विद्यार्थियों और कर्मचारियों का अच्छा स्वास्थ्य किसी भी शिक्षण संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने ऐसे स्वास्थ्य शिविरों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर धर्मराज, कपूर सिंह ढाका, जय भगवान, सुनील कुमार फरमाना, डॉ. रामेंदर हुड्डा सहित अन्य मौजूद रहे। संवाद
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Aug 1, 2026, 08:25 PM
मौसम में त्वचा की समस्याएंः फंगल संक्रमण, चकत्ते और एलर्जी

मौसम में त्वचा की समस्याएंः फंगल संक्रमण, चकत्ते और एलर्जी

सवाल : काफी दिनों से खुजली की समस्या है। दाने भी निकल आए। (अनिल कुमार, पुलिस लाइन)जवाब : यह फंगल इंफेक्शन हो सकता है। इस मौसम में अक्सर हो जाता है। दाने क्यों निकल रहे हैं यह देखकर बताया जा सकेगा।सवाल : आंखों के नीचे हल्के दाने हैं। चेहरे पर भी निशान बने हुए। (जहांगीर, कुतुबा)जवाब : चेहरे को साफ पानी से धोएं। चेहरे पर निशान कैसे निकल आए, इसके लिए अस्पताल आना पड़ेगा। जांच के बाद इलाज शुरू होगा।सवाल : जांघों में खुजली रहती है। आराम नहीं मिल रहा। (कस्तूर जैन, मोहल्ला संघियान)जवाब : साफ-सफाई का ध्यान रखें। जहां पर खुजली रहती है, उससे हिस्से को अच्छी तरह से साफ करें। नहाने के बाद भी सूखाकर कपड़े पहनें।सवाल : मेरी बेटी को एलर्जी है, जो मुंह तक आ गई। (सरोज, शारदा नगर)जवाब : यह पसीने की वजह से हो सकती है। इसलिए सूती कपड़े पहनाएं। बर्फ के टुकड़े से सिकाई करें। धूप में जाने न दें।सवाल : शरीर पर लाल चकत्ते बने हुए हैं। (अनिल कुमार, गोवर्धनपुर)जवाब : यह अर्टिकेरिया रोग हो सकता है। इसमें लिए अस्पताल आकर जांच कराएं। इसके बाद इलाज चलेगा।सवाल : बेटे के सिर के बाल सफेद हो रहे। एलर्जी भी रहती है। (सोनिया गुप्ता, कपिल विहार)जवाब : यह पोषक तत्वों की कमी है। बच्चे को फलों और आंवले का सेवन कराएं। खून की जांच कराएं। लोहे की कढ़ाई में खाना बनाएं।सवाल : पूरे शरीर पर बार-बार एलर्जी हो रही है। (लियाकत अली, घानाखंडी, शिवकुमार, पाली)जवाब : यह अर्टिकेरिया रोग हो सकता है। इसका इलाज कम से कम तीन से छह महीने तक लगातार चलता है।सवाल : आंखों के बराबर में कालापन है। गंजेपन की भी शिकायत है। (आमिर हुसैन, नानौता)जवाब : सबसे पहले धूप से बचें। पौष्टिक भोजन खाएं। टीवी, मोबाइल को देर तक न देखें। गंजेपन पोषक तत्वों की कमी से हो सकता है।सवाल : रात के समय शरीर में खुजली रहती है। (मलकित सिंह चौहान, अंबेहटा चांद)जवाब : खून की जांच कराइए। फिलहाल शरीर पर लगाने के लिए कैलामाइन लोशन लगा सकते हैं।सवाल : पत्नी को पेट के आसपास लाल चकत्ते निकल आए। (ललित, राधा विहार)जवाब : यह कई कारणों से हो सकते हैं। इसलिए इसमें कैलामाइन लोशन का लगा सकते हैं।सवाल : तिल के निशान हैं। चेहरे और पैरों पर ज्यादा हैं। (टिकम सिंह, ऑफिसर कॉलोनी)जवाब : धूप से बचें। अगर धूप में बाहर जा रहे हैं तो छाता या कैंप जरूर लगाएं। सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। आंवला और फलों का अधिक सेवन करें।
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Aug 1, 2026, 08:08 PM
मौसमी रोगों के प्रबंधन के लिए लालगंज में स्वस्थ जीवन पर संगोष्ठी आयोजित

मौसमी रोगों के प्रबंधन के लिए लालगंज में स्वस्थ जीवन पर संगोष्ठी आयोजित

लालगंज। सीएचसी लालगंज में शनिवार को स्वस्थ जीवन, सुरक्षित कल : मौसमी बीमारियों के प्रबंधन विषयक विचार गोष्ठी हुई। इसमें चिकित्सकों ने कहा कि बरसात में फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए लोग जागरूक रहें। लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच व उपचार कराएं। फिजिशियन डॉ. योगेश द्विवेदी ने डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार समेत अन्य मौसमी बीमारियों के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी। डॉ शिवम शुक्ला ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए संतुलित दिनचर्या अपनाने सलाह दी। अंत में सेवानिवृत्त वार्ड बॉय अशोक पांडेय को विदाई दी गई। अध्यक्षता अधीक्षक डॉ. मनोज सिंह व संचालन शमीम अहमद ने किया। इस अवसर पर चीफ फार्मासिस्ट एसएन सरोज,एलटी प्रभारी मुकेश सिंह, राजेश श्रीवास्तव, भोला गुप्ता, सुषमा, संदीप, अभिषेक आदि मौजूद रहे।
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Aug 1, 2026, 07:51 PM
शिक्षा अधिकारियों ने नशीली दवाओं और व्यसनों से दूर रहने पर जोर दिया

शिक्षा अधिकारियों ने नशीली दवाओं और व्यसनों से दूर रहने पर जोर दिया

प्राचार्य प्रो. रीना सिंह और मुख्य अतिथि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो.रमोद कुमार मौर्य ने नशा एवं सभी प्रकार के व्यसनों से दूर रहने पर जोर दिया। कहा कि एक व्यक्ति के नशा करने से पूरा परिवार परेशान होता है। युवा शक्ति यदि सकारात्मक दिशा में अपनी ऊर्जा का उपयोग करे तो विकसित भारत का संकल्प शीघ्र साकार हो सकता है। इस दौरान छात्राओं के बीच स्लोगन प्रतियोगिता हुई। जिसमें नशामुक्ति एवं स्वस्थ जीवन पर आधारित प्रभावशाली स्लोगन से जैसे युवा शक्ति का यही है नारा नशामुक्त हो देश हमारा। इस मौके पर डॉ. श्री प्रकाश मिश्रा आदि रहे।
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Aug 1, 2026, 07:35 PM
मधुमेह जागरूकताः विशेषज्ञों ने 30 साल की उम्र के बाद वार्षिक जांच का आग्रह किया

मधुमेह जागरूकताः विशेषज्ञों ने 30 साल की उम्र के बाद वार्षिक जांच का आग्रह किया

बरहनी पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि 30 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक व्यक्ति को हर साल डायबिटीज की जांच अवश्य करानी चाहिए। वर्तमान में हर छह में से एक व्यक्ति मधुमेह से प्रभावित है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे खामोश बीमारी भी कहा जाता है। समय पर जांच, सही जानकारी और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।विज्ञापनउन्होंने बताया कि शरीर में इंसुलिन हार्मोन भोजन से बनने वाले ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने का कार्य करता है। इंसुलिन का पर्याप्त मात्रा में न बनना (टाइप-1) या सही तरीके से कार्य न करना (टाइप-2) रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ा देता है। बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बिना कारण वजन घटना, लगातार थकान महसूस होना और घाव का देर से भरना इसके प्रमुख लक्षण हैं।विज्ञापनइनसेट.....एबीसीडीई मंत्र---------ए (आहार) : थाली का आधा हिस्सा हरी सब्जियां और सलाद, एक चौथाई प्रोटीन तथा एक चौथाई अनाज रखें। मीठे और मैदे से दूरी बनाएं।बी (बॉडी): प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चाल से टहलें या योग करें।सी (चेकअप): समय पर दवा लें और हर तीन महीने में शुगर की जांच कराएं।डी (डी-स्ट्रेस): तनाव से दूर रहें और प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।ई (वजन नियंत्रण): केवल पांच प्रतिशत वजन कम करने से भी ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मिल सकती है मदद।कोट......पीएचसी में मधुमेह की निशुल्क जांच की जाती है। एबीसीडीई आधारित जीवनशैली अपनाने वाले मरीजों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। - डॉ. राजेश कुमार सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बरहनी, पीएचसी।
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Aug 1, 2026, 06:57 PM
शहर में आगामी कार्यक्रमः स्वास्थ्य शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राजनीतिक बैठकें

शहर में आगामी कार्यक्रमः स्वास्थ्य शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राजनीतिक बैठकें

शिविर : कैफी आजमी रोड के पास सुदनीपुर धीराजी देवी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर सुबह 10 बजे।कथा : शहर के सिधारी श्री गौरीशंकर मंदिर परिसर में श्री शिव महापुराण कथा दोपहर 3 बजे।बैठक : ठेकमा बाजार के राम-जानकी मंदिर में भाजपा की बैठक सुबह 10 बजे।पौधरोपण अभियान को लेकर मेजवां फाउंडेशन की ओर से बैठक सुबह 11 बजे।
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Aug 1, 2026, 06:43 PM
फरीदाबाद में एनीमिया महामारी ने गर्भवती महिलाओं को प्रभावित किया

फरीदाबाद में एनीमिया महामारी ने गर्भवती महिलाओं को प्रभावित किया

फरीदाबाद। क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की ओर से पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार न लेने के कारण उनमें खून की कमी (एनीमिया), कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब 40 महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त पहुंच रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित और पोषणयुक्त भोजन मां और शिशु दोनों के स्वस्थ विकास के लिए बेहद जरूरी है। पोषण की कमी से प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है।बीके अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुणा ने बताया कि बदलते मौसम में संक्रमण और अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे समय में गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य जांच पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, दूध, फल, अंडा और आयरन और फोलिक एसिड की दवाओं का नियमित सेवन आवश्यक है।
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Aug 1, 2026, 03:49 PM
जंक फूड का सेवन बच्चों में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है

जंक फूड का सेवन बच्चों में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है

मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद शुक्ला ने बताया कि पहले की अपेक्षा अब अधिक बच्चे जंक फूड के दुष्प्रभाव के साथ ओपीडी में पहुंच रहे हैं। ओपीडी में औसतन दो-तीन बच्चे इसके दुष्प्रभाव से ग्रसित होकर आ रहे हैं। इसका सेवन बच्चों के शरीर पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इसके कारण मोटापा, कब्ज, पेट दर्द, गैस, विटामिन और आयरन की कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे बच्चों के परिजनों को भी जागरूक किया जाता है। कई लोग इससे सतर्क होकर वापस लौटे और फीडबैक भी दिया।विज्ञापनघट रही रोग प्रतिरोधक क्षमताडॉ. आनंद शुक्ला ने बताया कि फास्ट फूड में नमक, चीनी और वसा अधिक होती है, जबकि शरीर के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं। यही वजह है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है। कई बच्चों में कम उम्र में ही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे हैं। कहा कि अभिभावक बच्चों को घर का ताजा और संतुलित भोजन देने की आदत विकसित करें। मौसमी फल, हरी सब्जियां, दूध, दाल और प्रोटीन युक्त भोजन को प्राथमिकता दें। साथ ही बच्चों को प्रतिदिन कम से कम एक घंटे खेल-कूद या अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें और फास्ट फूड को केवल कभी-कभार तक सीमित रखें।
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Aug 1, 2026, 12:52 PM
अद्वितीय'जिम वाली कंवर'यात्रा भक्ति, स्वास्थ्य और मादक पदार्थ विरोधी संदेश को बढ़ावा देती है

अद्वितीय'जिम वाली कंवर'यात्रा भक्ति, स्वास्थ्य और मादक पदार्थ विरोधी संदेश को बढ़ावा देती है

सावन का महीना है और हर तरफ भोलेनाथ के जयकारों के बीच कांवड़ियों का जत्था अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है. लेकिन उत्तर प्रदेश के बागपत में पहुंची एक कांवड़ ने लोगों का ध्यान कुछ ज्यादा ही खींच लिया है. वजह है इसका अनोखा अंदाज. इस कांवड़ में भगवान शिव की प्रतिमा के साथ डंबल, वेट प्लेट और एक्सरसाइज का सामान भी नजर आ रहा है. इसे लोग 'जिम वाली कांवड़' नाम दे रहे हैं. दरअसल, यह अनोखी कांवड़ लेकर हरिद्वार से दिल्ली की ओर निकले हैं दिल्ली पुलिस के जवान अमित उर्फ मिट्ठू मदेरिया. अमित अपनी यात्रा के जरिए सिर्फ भोलेनाथ की भक्ति का संदेश नहीं दे रहे, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रहने और शरीर को फिट रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनकी कांवड़ में एक तरफ शिव की प्रतिमा आस्था का प्रतीक है, तो दूसरी तरफ जिम का सामान मेहनत और फिटनेस का संदेश दे रहा है. अमित के मुताबिक, यह यात्रा हरिद्वार से मुडेला, नजफगढ़, दिल्ली तक जाएगी और इसकी दूरी करीब 250 किलोमीटर है. उन्होंने 22 तारीख को हरिद्वार से गंगाजल उठाया था. अब वह इस सफर को अपने कंधों पर पूरी करने की कोशिश में जुटे हैं. इतनी लंबी दूरी और भारी कांवड़ के बावजूद उनका अभियान लगातार जारी है. अमित का कहना है कि वह इस बार सिर्फ गंगाजल लेकर नहीं चल रहे हैं, बल्कि अपने साथ एक सामाजिक अभियान भी लेकर निकले हैं. उनका यह अभियान नशे के खिलाफ है. उनका मानना है कि आज के समय में युवाओं को नशे की तरफ जाने के बजाय मेहनत, खेल और व्यायाम को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए. ​ अमित का संदेश बिल्कुल साफ है- अगर नशा करना ही है तो मेहनत का नशा कीजिए. उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति मेहनत और एक्सरसाइज को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेता है, तो बाकी नशे अपने आप छूटने लगते हैं. इसी सोच को वह कांवड़ यात्रा के दौरान लोगों तक पहुंचा रहे हैं. यात्रा के दौरान अमित जहां भी रुकते हैं, वहां युवाओं से बातचीत करते हैं और उन्हें फिटनेस के लिए प्रेरित करते हैं. कई जगह युवाओं के साथ दंड-बैठक और दूसरी एक्सरसाइज से जुड़े चैलेंज भी कराए जा रहे हैं. इन गतिविधियों के लिए बाकायदा समय निर्धारित किया जाता है. चुनौती पूरी करने वाले युवाओं को सम्मानित भी किया जाता है. बागपत पहुंचने के बाद अमित की 'जिम वाली कांवड़' लोगों के बीच कौतूहल का विषय बन गई. सड़क से गुजरते लोगों की नजर जैसे ही इस कांवड़ पर पड़ती है, वे रुककर इसे देखने लगते हैं. किसी का ध्यान भगवान शिव की प्रतिमा पर जाता है, तो कोई कांवड़ में रखे डंबल और वेट प्लेट देखकर हैरान रह जाता है. ​ आमतौर पर कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अलग-अलग डिजाइन और सजावट वाली कांवड़ लेकर चलते दिखाई देते हैं, लेकिन अमित की कांवड़ में धार्मिक आस्था के साथ फिटनेस का संदेश जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि यह लोगों के बीच अलग पहचान बना रही है. कांवड़ देखने के लिए आसपास लोगों की भीड़ भी जुट रही है. इस पूरी यात्रा में भक्ति, फिटनेस और सामाजिक जागरूकता तीनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं. कंधों पर भोलेनाथ की प्रतिमा और गंगाजल है, जबकि उसी कांवड़ में युवाओं को व्यायाम के लिए प्रेरित करने वाला सामान भी मौजूद है. अमित का कहना है कि उनका उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि शरीर को मजबूत बनाने और जिंदगी को बेहतर करने के लिए मेहनत का रास्ता अपनाया जा सकता है. दिल्ली पुलिस के जवान अमित उर्फ मिट्ठू मदेरिया का यह सफर आसान नहीं है. हरिद्वार से मुडेला नजफगढ़, दिल्ली तक करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय करनी है. 22 तारीख को जल उठाने के बाद से वह लगातार अपने अभियान के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उनकी कोशिश है कि कांवड़ यात्रा के जरिए ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक नशामुक्ति और फिटनेस का संदेश पहुंचे. ​ अमित कहते हैं कि यह सिर्फ गंगाजल की यात्रा नहीं है. वह इसके साथ एक अभियान लेकर चल रहे हैं. उनका कहना है कि युवाओं को अगर किसी चीज का नशा करना चाहिए तो वह मेहनत का होना चाहिए. मेहनत और व्यायाम की आदत जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकती है और दूसरे नशों से दूर रखने में मदद कर सकती है. हरिद्वार से दिल्ली तक कंधों पर करीब 250 किलोमीटर का सफर, साथ में भगवान शिव की प्रतिमा और जिम का सामान. अमित की यह कांवड़ सावन की यात्रा को एक अलग संदेश दे रही है. आस्था के इस सफर में फिटनेस और नशे के खिलाफ उनकी मुहिम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. इसी वजह से बागपत में पहुंची यह 'जिम वाली कांवड़' हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.
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Aug 1, 2026, 12:14 PM
हरियाणा ने डायटेटिक्स और इंजीनियरिंग इंटर्नशिप कार्यक्रमों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की

हरियाणा ने डायटेटिक्स और इंजीनियरिंग इंटर्नशिप कार्यक्रमों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की

अमर उजाला ब्यूरोचंडीगढ़। हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग ने डाइटीटिक्स एवं न्यूट्रिशन के विद्यार्थियों के लिए तैयार की जा रही इंटर्नशिप नीति और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। इससे दोनों योजनाओं के क्रियान्वयन, समन्वय और निगरानी में तेजी आएगी।महानिदेशक उच्चतर शिक्षा की ओर से जारी आदेशों के अनुसार संयुक्त निदेशक वीणा रानी को डाइटीटिक्स एवं न्यूट्रिशन विद्यार्थियों की इंटर्नशिप नीति के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं संयुक्त निदेशक डॉ. विनीता गुप्ता को इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। दोनों अधिकारी संबंधित विभागों, शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे। योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी, प्रगति की समीक्षा, विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल और सामने आने वाली समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होगी ताकि विद्यार्थियों को समय पर प्रशिक्षण का लाभ मिल सके।
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Aug 1, 2026, 12:10 PM
मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया

मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि प्रतापनगर क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए करीब 80 किलोमीटर दूर जिला चिकित्सालय नई टिहरी जाना पड़ता है। इससे समय, धन का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि मंत्री ने मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान प्रवीण पंवार और बृजमोहन पंवार ने पट्टी ओंण के धनागांव के लिए स्वीकृत सड़क निर्माण में वन भूमि की लंबित स्वीकृति शीघ्र जारी कराने की मांग भी उठाई। संवाद
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Aug 1, 2026, 11:53 AM
यूपी में दो युवाओं का रहस्यमय ढंग से गायब होना

यूपी में दो युवाओं का रहस्यमय ढंग से गायब होना

पुलिस के अनुसार, तनुज (21) निवासी मुरादनगर, जिला गाजियाबाद और किशन (22) निवासी गाजियाबाद यूपी, हरिद्वार से गंगाजल भरकर अपने गंतव्य की ओर लौट रहे थे। शनिवार की दोपहर रास्ते में बढ़ेड़ी राजपूतान गांव के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे दोनों कुछ देर विश्राम करने के लिए बैठ गए। इसी दौरान वहां रखा भारी लोहे का गाटर अचानक खिसककर उनके ऊपर आ गिरा। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।विज्ञापनसूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के साथ चल रहे अन्य कांवड़ यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। क्षेत्राधिकारी संजय चौहान ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।विज्ञापनसाथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे भारी लोहे का गाटर किस परिस्थिति में रखा गया था। वहां सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। मृतकों के परिजनों को भी घटना की सूचना दे दी गई है।
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Amar Ujala
Aug 1, 2026, 11:44 AM
NSA अजीत डोभाल के पिता की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

NSA अजीत डोभाल के पिता की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

यह भी पढ़ें-'आजादी का मतलब मनमानी नहीं': युवाओं से बोले अजित डोभाल- राष्ट्रहित को पहले रखें; अमित शाह ने की NSA की सराहनाविज्ञापनउनके पिता भगवान दीपके ने बताया कि उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टर को घर बुलाया गया। डॉक्टर विशाल लहाने ने मौके पर पहुंचकर उनकी जांच की। डॉक्टर ने बताया कि दीपके का ब्लड प्रेशर थोड़ा कम है। सुबह से उन्हें घबराहट और उल्टी जैसा महसूस हो रहा था। उन्हें दो बार उल्टी हुई है और साथ ही दस्त (लूज मोशन) की भी शिकायत है। डॉक्टर के अनुसार, यह परेशानी तनाव और चिंता की वजह से हो सकती है।विज्ञापनअभिजीत दीपके को IV फ्लूड दी गई है और उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है। डॉक्टर ने कहा कि फिलहाल उन्हें बुखार नहीं है और अगर वे आराम करते हैं तो जल्द ठीक हो सकते हैं। हालांकि, अगर उनकी तबीयत में सुधार नहीं होता है, तो आगे ब्लड टेस्ट किया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर इलाज तय किया जाएगा।यह भी पढ़ें-Mumbai: साइबर ठगी बचाएगी मुंबई पुलिस की यह सलाह, व्हाट्सएप प्राइवेसी के इस ऑप्शन का करना होगा इस्तेमालगौरतलब है कि इससे पहले 25 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दीपके ने बताया था कि उन्हें टायफाइड हुआ है और वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
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Amar Ujala
Aug 1, 2026, 11:08 AM
आदिबाद्री में आयुष आयुर्वेदिक अस्पताल उदलगुड़ी जिले का पहला उत्कृष्टता केंद्र बना

आदिबाद्री में आयुष आयुर्वेदिक अस्पताल उदलगुड़ी जिले का पहला उत्कृष्टता केंद्र बना

संवाद न्यूज एजेंसीआदिबदरी। उत्तराखंड सरकार की पहल पर आदिबदरी का आयुष आयुर्वेदिक चिकित्सालय जिले का पहला उत्कर्ष केंद्र बन गया है। इस केंद्र में अब पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा के साथ कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी।जिला आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डॉ. एस. कुमार त्रिपाठी ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक जनपद में एक आयुर्वेद उत्कर्ष केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसी के तहत इस चिकित्सालय को उन्नत किया गया है। पंचकर्म के लिए पुरुष चिकित्सक पहले से हैं। महिलाओं की पंचकर्म चिकित्सा के लिए शीघ्र ही एक महिला चिकित्सक की नियुक्ति की जाएगी। उत्कर्ष केंद्र के चिकित्साधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने जानकारी दी कि यहां पैथोलॉजी की सुविधा के तहत टाइफाइड, मलेरिया और शुगर की जांच, ईसीजी हो सकेगी। एक्यूप्रेशर और पंचकर्म के आधुनिक उपकरण भी चिकित्सालय में आ गए हैं। गठिया और चर्मरोग का भी यहां इलाज होगा। वहीं चिकित्सालय के उत्कर्ष केंद्र बनने पर आदिबदरी के प्रधान आरती बहुगुणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य नवीन बहुगुणा और भलसों के प्रधान विजय बरमोला सहित व्यापारियों ने खुशी जताई।
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Amar Ujala
Aug 1, 2026, 10:52 AM
जींद स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया

जींद स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया

जींद। स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को ढांडा खेड़ी गांव में मलेरिया आौर मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया। बुखार पीड़ितों की रक्त स्लाइड जांच को भेजी गई। साथ ही कूलर, टंकियों और अन्य जमा पानी में लार्वा की तलाश की गई।सुपरवाइजर राजेश कुमार ने मलेरिया नियंत्रण में आमजन का सहयोग जरूरी बताया। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर जांच व बचाव के उपाय बता रही हैं। स्वास्थ्य कर्मी सुशील शर्मा ने बताया कि मलेरिया के लक्षण बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, उल्टी और थकान हैं। लोगों से घरों में पानी जमा न होने देने और कूलर का पानी बदलने की अपील की। उन्होंने मच्छरदानी उपयोग करने और बुखार होने पर तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी। अभियान में जयवीर सिंह, पवन श्योकंद और कविता शामिल रहे।
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ABP News
Aug 1, 2026, 09:06 AM
मौसमी फ्लू से उबरनाः उचित खाने की आदतों का महत्व

मौसमी फ्लू से उबरनाः उचित खाने की आदतों का महत्व

मौसम बदलते ही कई लोग सीजनल फ्लू की चपेट में आ जाते हैं. इसमें बुखार, सर्दी, खांसी, गले में दर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. लोगों को लगता है कि ऐसा मौसम बदलने की वजह से हो रहा, यह सोचकर वह इसे नजरअंदाज कर देते हैें. जबकि, ऐसा नहीं करना चाहिए. आपको बता दें कि ऐसे समय में सिर्फ दवा ही नहीं, सही खानपान भी जल्दी ठीक होने में मदद करता है. अगर आप भी सीजनल फ्लू से परेशान हैं तो अपनी डाइट में कुछ आसान और हेल्दी चीजें जरूर शामिल करें. सीजनल फ्लू के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है. इसलिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, सूप और गर्म हर्बल ड्रिंक भी पी सकते हैं. इससे शरीर हाइड्रेट रहता है और कमजोरी कम महसूस होती है. फ्लू होने पर तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना खाने से बचना चाहिए. इसकी जगह खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, सादी रोटी और उबली हुई सब्जियां खाएं. ये खाना आसानी से पच जाता है और शरीर को जरूरी पोषण भी देता है. साथ ही आपको बीमार होने से बचाता है. संतरा, मौसम ी, अमरूद, कीवी और पपीता जैसे फल शरीर को विटामिन C देते हैं, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है. साथ ही पालक, गाजर, टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियां भी फायदेमंद मानी जाती हैं. अगर गले में दर्द या नाक बंद है, तो गर्म सब्जियों का सूप. इसको पी सकते हैं. अदरक, तुलसी और काली मिर्च से बना हल्का काढ़ा भी राहत दे सकता है. हालांकि इसे जरूरत से ज्यादा नहीं पीना चाहिए. बीमारी के समय शरीर को ताकत की जरूरत होती है. इसलिए दाल, पनीर, दही, दूध, अंडा या सोया जैसी प्रोटीन वाली चीजें अपनी डाइट में शामिल करें. इससे शरीर जल्दी रिकवर होने में मदद मिल सकती है. फ्लू के दौरान कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, ज्यादा मीठी चीजें और बहुत तला-भुना खाना खाने से बचें. ये शरीर की रिकवरी को धीमा कर सकते हैं. साथ ही पर्याप्त आराम करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें. सीजनल फ्लू में सही खानपान, भरपूर पानी, अच्छी नींद और आराम बहुत जरूरी है. अगर तेज बुखार कई दिनों तक रहे, सांस लेने में परेशानी हो या हालत ज्यादा खराब लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें.
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Aug 1, 2026, 07:59 AM
आयुर्वेदिक नाभि पुराणः त्वचा, बाल और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए एक समग्र स्वास्थ्य उपचार

आयुर्वेदिक नाभि पुराणः त्वचा, बाल और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए एक समग्र स्वास्थ्य उपचार

। गर्भ अवस्था के दौरान एक बच्चा नाभि के जरिए ही अपनी मां से सभी जरूरी पोषक तत्व प्राप्त करता है। हमारे शरीर की लगभग 72,000 नसें नाभि से जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद में नाभि में तेल लगाने जिसे 'नाभि पूरण' या 'पेचोटी थेरेपी' कहा जाता है को बेहद असरदार स्वास्थ्य उपाय माना गया है। नाभि में तेल लगाने से स्वास्थ को कई तरह के फायदे होते हैं। चलिए जानते हैं नाभि में तेल लगाने से क्या क्या फायदे होते हैं और कौन से तेल लगाना चाहिए। नाभि में तेल लगाने से फटे होंठ, रूखी त्वचा और फटी एड़ियों की समस्या से राहत मिलती है। बादाम या नीम का तेल लगाने से कील-मुहांसे, डार्क सर्कल्स और चेहरे का कालापन कम होता है। वहीं अगर नारियल का तेल नाभि में लगाने से बालों का झड़ना कम होता है और उनकी प्राकृतिक चमक लौटती है। सरसों या हींग मिला तेल नाभि में लगाने से गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और पेट दर्द में तुरंत आराम मिलता है। यह पाचन अग्नि को एक्टिव करता है, जिससे खाना सही तरीके से पचता है। रात को सोने से पहले नाभि में तेल लगाने से नर्वस सिस्टम शांत होता है, जिससे तनाव और चिंता कम होती है। यह थेरेपी दिमाग को सुकून देती है, जिससे गहरी और अच्छी नींद आती है। सर्दियों में तिल या सरसों का तेल नाभि में लगाने से जोड़ों का दर्द और शरीर की अकड़न दूर होती है। महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाले पेट और कमर के ऐंठन में तिल का तेल लगाने से काफी आराम मिलता है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है। नाभि में तेल लगाने से आंखों की ड्राईनेस कम होती है और आंखों की रोशनी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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Aug 1, 2026, 06:31 AM
भारत में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में बदलाव देखा जा रहा हैः धूम्रपान न करने वाले, युवा लोग प्रभावित

भारत में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में बदलाव देखा जा रहा हैः धूम्रपान न करने वाले, युवा लोग प्रभावित

हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे मनाया जाता है. लंग कैंसर का नाम सुनते ही सबसे पहले सिगरेट और स्मोकिंग का ख्याल आता है. लंबे समय से स्मोकिंग को लंग कैंसर का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता रहा है. लेकिन भारत में अब इस बीमारी की तस्वीर बदल रही है. डॉक्टरों के मुताबिक, महिलाओं, कम उम्र के लोगों और ऐसे लोगों में भी लंग कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने जिंदगी में कभी सिगरेट नहीं पी. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, लंग कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है. भारत में भी डॉक्टर अब ऐसे मरीजों को देख रहे हैं, जो लंग कैंसर के पारंपरिक हाई रिस्क ग्रुप में शामिल नहीं हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि नॉन-स्मोकर्स को लंग कैंसर क्यों हो रहा है और किन टेस्ट की मदद से बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सकता है? आकाश हेल्थकेयर में रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट और हेड डॉ. अक्षय बुधराजा के मुताबिक, लंग कैंसर के मरीजों की प्रोफाइल में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. डॉ. अक्षय बुधराजा का कहना है कि स्मोकिंग न करने वाली महिलाओं में भी लंग कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं. इसके पीछे इंडोर एयर पॉल्यूशन, खाना पकाने के लिए बायोमास फ्यूल का इस्तेमाल, सेकेंड हैंड स्मोक और काम करने की जगह पर हानिकारक चीजों के संपर्क में आना जैसी वजहें हो सकती हैं. उनके मुताबिक, भारतीय महिलाओं में तंबाकू का इस्तेमाल 10 प्रतिशत से कम है. ऐसे में खराब होती एयर क्वालिटी और घर के अंदर मौजूद पॉल्यूशन को इसकी संभावित वजहों में देखा जा रहा है. डॉ. बुधराजा का कहना है कि अब अस्पतालों में केवल 60 साल से ज्यादा उम्र के ऐसे मरीज नहीं आ रहे, जिन्होंने लंबे समय तक स्मोकिंग की हो. कम उम्र के लोग, महिलाएं और जिंदगी में कभी सिगरेट न पीने वाले लोग भी लंग कैंसर के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं. एयर पॉल्यूशन, काम की जगह पर हानिकारक चीजों का संपर्क और जेनेटिक कारण इसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के मामले सामने आने का मतलब यह नहीं है कि सिगरेट से होने वाला खतरा कम हो गया है. डॉ. अक्षय बुधराजा के मुताबिक, स्मोकिंग करने वालों में नॉन-स्मोकर्स के मुकाबले लंग कैंसर का खतरा करीब 20 गुना ज्यादा हो सकता है. वहीं, खुद सिगरेट न पीने के बावजूद दूसरे लोगों की सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहना यानी सेकेंड हैंड स्मोक भी खतरा बढ़ा सकता है. घर या काम की जगह पर लगातार सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहने वाले लोगों को भी इसका नुकसान हो सकता है. इसके अलावा रेडॉन गैस भी लंग कैंसर का एक रिस्क फैक्टर है. यह घर के अंदर मौजूद हो सकती है और आमतौर पर इसका आसानी से पता नहीं चलता. घर में रेडॉन गैस की मौजूदगी का पता टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है. सिर्फ बाहर का एयर पॉल्यूशन ही नहीं, घर के अंदर की खराब हवा भी लंग्स के लिए नुकसानदायक हो सकती है. खाना बनाने के दौरान लकड़ी, कोयला या दूसरे बायोमास फ्यूल से निकलने वाला धुआं और घर में हवा की आवाजाही ठीक न होना लंबे समय तक लंग्स को प्रभावित कर सकता है. कुछ लोगों को काम के दौरान धूल, धुएं, केमिकल और दूसरी हानिकारक चीजों के संपर्क में रहना पड़ता है. इसे ऑक्यूपेशनल एक्सपोजर कहा जाता है. डॉक्टर इसे भी लंग कैंसर के संभावित रिस्क फैक्टर में शामिल करते हैं. इसके अलावा कुछ लोगों में जेनेटिक कारण भी बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं. भारत में लंग कैंसर के इलाज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बीमारी का देर से पता चलना है. एक्शन कैंसर हॉस्पिटल, दिल्ली के एक्शन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल ऑन्कोलॉजी एंड इम्यूनोथेरेपी के डायरेक्टर डॉ. जे.बी. शर्मा के मुताबिक, करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं, जब लंग कैंसर स्टेज 3 या स्टेज 4 तक पहुंच चुका होता है. इसकी एक बड़ी वजह शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना है. लगातार खांसी, सीने में परेशानी और सांस फूलने जैसे लक्षणों को कई लोग सामान्य इंफेक्शन या पॉल्यूशन से होने वाली एलर्जी समझ लेते हैं. इसी वजह से सही जांच और इलाज शुरू होने में देरी हो सकती है. एक्सपर्ट मुताबिक, लो-डोज सीटी यानी एलडीसीटी स्कैन और मॉलिक्यूलर बायोमार्कर टेस्टिंग जैसी जांच लंग कैंसर को जल्दी पकड़ने में मदद कर सकती हैं. इनकी मदद से कुछ मामलों में ट्यूमर को शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने से पहले पहचाना जा सकता है. हालांकि, हर व्यक्ति को अपने आप एलडीसीटी स्कैन कराने की जरूरत नहीं होती. उम्र, स्मोकिंग हिस्ट्री और दूसरे रिस्क फैक्टर को देखकर डॉक्टर तय कर सकते हैं कि किस व्यक्ति को लंग कैंसर की स्क्रीनिंग की जरूरत है. अगर लंबे समय से खांसी बनी हुई है, सांस लेने में परेशानी हो रही है या सीने में लगातार तकलीफ है तो इसे केवल पॉल्यूशन या सामान्य इंफेक्शन मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु के सीनियर कंसल्टेंट-सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. पलानीअप्पन रामनाथन के मुताबिक, लंग कैंसर का इलाज अब हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं रह गया है. अब कैंसर की खासियत को समझकर मरीज के लिए इलाज तय किया जा सकता है. जीनोमिक प्रोफाइलिंग की मदद से ईजीएफआर, एएलके और आरओएस1 जैसे म्यूटेशन की पहचान की जा सकती है. इनके मिलने पर डॉक्टर कुछ मरीजों को टारगेटेड ओरल थेरेपी दे सकते हैं. वहीं, एडवांस स्टेज के मरीजों में इम्यूनोथेरेपी ने भी इलाज के तरीके को बदला है. इसमें शरीर के इम्यून सिस्टम की मदद से कैंसर सेल्स से लड़ने की कोशिश की जाती है. एक्सपर्ट के मुताबिक, टियर-2 शहरों में केवल जागरूकता की कमी ही परेशानी नहीं है. कैंसर को लेकर लोगों के मन में मौजूद डर भी मरीजों को समय पर डॉक्टर के पास जाने से रोकता है. कई मरीज लंग कैंसर का मतलब निश्चित मौत समझ लेते हैं और इसी डर से इलाज में देरी करते हैं. हालांकि, अब वीडियो-असिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी यानी वीएटीएस और रोबोटिक सर्जरी जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं. क्षेत्रीय अस्पतालों में भी कैंसर के इलाज की सुविधाएं बढ़ने से मरीजों को अपने शहर के करीब बेहतर इलाज मिल सकता है. एडवांस स्टेज में लंग कैंसर केवल लंग्स तक सीमित नहीं रहता. यह शरीर के दूसरे अंगों में भी फैल सकता है. एड्रिनल ग्लैंड्स उन जगहों में शामिल हैं, जहां लंग कैंसर फैल सकता है. बीमारी ज्यादा बढ़ने पर किडनी भी प्रभावित हो सकती है. ऐसे मामलों में अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों को मिलकर मरीज के इलाज की योजना बनानी पड़ती है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.
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Dainik Jagran
Aug 1, 2026, 05:45 AM
सावनः हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए एक पवित्र महीना

सावनः हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए एक पवित्र महीना

इस साल सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हो चुकी है, वहीं सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए श्रावण मास सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि इस दौरान भगवान शिव अपने परिवार समेत पृथ्वी पर निवास करते हैं। जिस कारण वे भक्तों की इच्छाओं को जल्दी पूरा करता है। सावन आते ही लोग पूजा-पाठ के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते हैं, साथ ही खान-पान से जुड़े नियमों का भी पालन करते हैं। माना जाता है कि, श्रावण मास में दही नहीं खाना चाहिए। आइए जानते हैं धार्मिक और आयुर्वेदिक नजरिए से इसके पीछे का कारण? हिंदू धर्म और शिव पुराण के अनुसार, सावन का महीना पूजा, पाठ, जप, तप, संयम और सात्विक जीवन का प्रतीक होता है। इस दौरान व्यक्ति को तामसिक भोजन और आदतों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कई परंपराओं में लोगों का मानना है कि, श्रावण मास के दौरान दही, कड़ी या खट्टी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। बताया जाता है कि, सावन के महीने में भगवान शिव के शिवलिंग पर ठंडी और सात्विक चीजें अर्पित करनी चाहिए और खुद भी भोजन में हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन खाना चाहिए। हरिद्वार से कांवड़ उठाने वाले भक्तों में पहले नंबर पर हरियाणवी 'भोले', इसके बाद यूपी और दिल्ली का नंबर भक्ति की पिच पर 55 नॉट आउट, बाबा वैद्यनाथ धाम के धावक मुजफ्फरपुर के डॉ.गिरि बने युवाओं के प्रेरणा स्रोत महादेव को पाने के लिए माता पार्वती का कठिन तप: पढ़ें सावन सोमवार व्रत की पूरी महिमा 51 किलो की कांवड़ का वजन भी पड़ा हल्का! बुलंदशहर के शिवभक्तों की अनोखी तपस्या देख हर कोई हैरान सावन में स्थापित कर रहे हैं शिवलिंग? तो अभी जान लें ये जरूरी नियम, वरना नहीं मिलेगा महादेव का आशीर्वाद आयुर्वेद में श्रावण मास को वर्षा ऋतु का समय माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी काफी ज्यादा होती है, जिस कारण पाचन शक्ति आम दिनों से कमजोर हो जाती है। बात की दही के सेवन करने की तो, दही स्वभाव से भारी और कफवर्धक माना जाता है। सावन में अधिक मात्रा में दही खाने से गले से जुड़ी समस्या कफ, सर्दी जुकाम या पाचन संबंधी परेशानियां सता सकती हैं। इसी वजह से आयुर्वेद में बरसात के मौसम में विशेषकर रात के समय दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है। सावन मास के दौरान ताजे फल, हरी-भरी सब्जियां, मूंग की दाल, लौकी, तोरी, परवल, घी का सेवन करना सबसे सही माना जाता है। धार्मिक जानकार बताते हैं कि, सावन के महीने में खान-पान के नियमों का असल उद्देश्य सिर्फ धार्मिक अनुशासन नहीं, बल्कि सेहत की रक्षा करना भी है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी सेहत, धार्मिक नियम, परंपरा और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार संतुलित और सात्विक भोजन खाना चाहिए। ऐसा करने से सावन महीने के दौरान शरीर स्वस्थ्य और ऊर्जावान रहता है। मनचाहा जीवनसाथी और अखंड सौभाग्य देने वाले 'सावन सोमवार व्रत' की शुरुआत किसने की थी? शिवपुराण में छिपा है जवाब महादेव को पाने के लिए माता पार्वती का कठिन तप: पढ़ें सावन सोमवार व्रत की पूरी महिमा
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