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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 02:20 PM


धनत्रयोदशी 2026: समृद्धि और स्वास्थ्य के आनंदमय उत्सव की शुरुआत
Dhanteras 2026: दीपोत्सव का उल्लास शुरू हो गया है। समृद्धि और आरोग्य का पर्व धनतेरस शुक्रवार को परंपरागत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी शनिवार को मनाई जाएगी। इस बार धनतेरस पर खरीदारी के लिए दो दिन का शुभ संयोग बन रहा है। पं. शरदचंद्र मिश्र के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी शुक्रवार को सुबह 11 बजकर सात मिनट के बाद शुरू होकर शनिवार को सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसे में शुक्रवार को 11:07 बजे के बाद से शनिवार को सुबह 10:43 बजे तक खरीदारी की जा सकती है। धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर लोग स्वस्थ और निरोगी जीवन की कामना करते हैं। मान्यता है कि धनतेरस (Dhanteras 2026) पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि प्राणियों के प्राण हरते समय क्या उन्हें दुख होता है। इस पर दूतों ने एक नवविवाहित राजकुमार की मृत्यु का प्रसंग सुनाया। विवाह के चौथे दिन ही राजकुमार के प्राण लेने के दौरान परिवार का करुण विलाप सुनकर वे भी विचलित हो गए थे। दूतों ने यमराज से अकाल मृत्यु से बचने का उपाय पूछा। इस पर यमराज ने बताया कि धनतेरस के दिन उनके निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु व नरक का भय दूर होता है। तभी से धनतेरस पर यमदीप जलाने की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी, इसे रूप चतुर्दशी और छोटी दीपावली भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:31 बजे होगा। त्रयोदशी तिथि सुबह 10:43 बजे तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। चित्रा नक्षत्र शाम 6:20 बजे तक रहेगा, इसके बाद स्वाती नक्षत्र और प्रीति योग का प्रभाव रहेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि प्रातःकाल अभ्यंग स्नान करने से नरक की यातना से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। नरक से मुक्ति की कामना से नरक चतुर्दशी की शाम प्रदोष काल में चार बत्तियों वाला दीपक जलाने का विधान है। इस दिन मंदिर, रसोईघर, घर के मुख्य द्वार, आंगन, बगीचे, देववृक्षों के नीचे तथा नदी और सरोवरों के किनारे दीपक जलाए जाते हैं। यम तर्पण और दीपदान कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है।
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