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Sep 21, 2026, 09:54 AM
चीनी चिपचिपी और गीली क्यों हो जाती हैः कारण और समाधान को समझना

चीनी चिपचिपी और गीली क्यों हो जाती हैः कारण और समाधान को समझना

चीनी को डिब्बे में रखने के बाद कुछ समय में उसका गीला और चिपचिपा होना काफी आम बात है. कई बार चीनी के दाने आपस में चिपकने लगते हैं और डिब्बे की अंदरूनी सतह पर भी नमी महसूस होती है. इसकी सबसे बड़ी वजह आसपास की हवा में मौजूद नमी होती है. चीनी नमी को आसानी से सोख लेती है, जिसकी वजह से उसके दाने चिपचिपे और गुच्छेदार होने लगते हैं. किचन में चीनी का इस्तेमाल रोजाना चाय, कॉफी, मिठाई और कई दूसरी चीजों में होता है. इसलिए इसे सही तरीके से स्टोर करना जरूरी है. खासकर जब हवा में नमी ज्यादा हो, तब चीनी को खुले या गलत कंटेनर में रखने से वह जल्दी प्रभावित हो सकती है. लेकिन कुछ आसान आदतों को अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है. चीनी के गीले होने का मुख्य कारण नमी का उसके संपर्क में आना है. अगर डिब्बा ठीक से बंद नहीं है, तो बाहर की नम हवा अंदर पहुंच सकती है. धीरे-धीरे चीनी नमी सोखने लगती है और उसके दाने आपस में चिपक जाते हैं. एक और आम गलती गीले चम्मच से चीनी निकालना है. चम्मच पर लगी थोड़ी सी भी नमी चीनी के संपर्क में आते ही उसके दानों को गीला कर सकती है. इसलिए चीनी निकालने के लिए हमेशा पूरी तरह सूखे चम्मच का इस्तेमाल करना चाहिए. चीनी को स्टोर करने के लिए साफ और सूखा कांच का जार इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है. कंटेनर में चीनी भरने से पहले यह जरूर देख लें कि उसमें बिल्कुल भी पानी या नमी न हो. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी के लिए अलग डिब्बा रखना भी सुविधाजनक रहता है. बाकी चीनी को एक अलग साफ कंटेनर में रखा जा सकता है और जरूरत के मुताबिक रोजाना वाले डिब्बे में थोड़ी-थोड़ी मात्रा भर सकते हैं. इससे बार-बार पूरे स्टॉक को खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. चीनी को नमी से बचाने के लिए कुछ चावल के दाने डिब्बे में रखे जा सकते हैं. चावल अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है, जिससे चीनी के दाने सूखे रहने में मदद मिल सकती है. अगर आप चावल को सीधे चीनी में नहीं रखना चाहते, तो उसे एक छोटी साफ कपड़े की पोटली में बांधकर भी डिब्बे में रखा जा सकता है. चीनी को स्टोर करते समय डिब्बे में 4 से 5 लौंग रखने का तरीका भी बताया जाता है. लौंग की खुशबू चींटियों को दूर रखने में मदद कर सकती है और नमी से बचाव में भी उपयोगी मानी जाती है. हालांकि, चीनी के डिब्बे को सबसे पहले अच्छी तरह बंद रखना और उसे सूखी जगह पर रखना ज्यादा जरूरी है. अगर चीनी बार-बार नम हो जाती है, तो डिब्बे में चीनी भरने से पहले नीचे ब्लॉटिंग पेपर की एक साफ शीट रखी जा सकती है. यह अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है और चीनी को सूखा रखने में सहायक हो सकता है. अगर चीनी को लंबे समय तक स्टोर करना है और साथ ही चींटियों से भी बचाना चाहते हैं, तो डिब्बे में 2 से 3 दालचीनी की छड़ियां रखने का विकल्प दिया गया है. एक अन्य तरीका कपूर को जिप-लॉक बैग में अच्छी तरह बंद करके उसे चीनी के कंटेनर में रखना बताया गया है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.
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Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 09:25 AM
ताजमहल के अनूठे दृश्यों वाले पर्यटकों के लिए ताज नेचर वॉक का इको-हट शीर्ष विकल्प बन गया है।

ताजमहल के अनूठे दृश्यों वाले पर्यटकों के लिए ताज नेचर वॉक का इको-हट शीर्ष विकल्प बन गया है।

ताजमहल के पूर्वी गेट से महज सौ मीटर दूर स्थित ताज नेचर वॉक में वन विभाग द्वारा तैयार की गई ईको हट अब पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है। हाल ही में शुरू हुई इस ठहरने की सुविधा पर बुकिंग का रुझान इतना बढ़ गया है कि कई तारीखों पर वेटिंग चल रही है। पर्यटक सुबह की गुलाबी और शाम की सफेद ताज की झलक बालकनी से देखने के लिए कमरे पहले से आरक्षित कराने लगे हैं। विभाग के अनुसार, एक कमरे का किराया चार हजार रुपये प्रति दिन है, जिसमें दो बड़े और 12 साल से छोटे दो बच्चे ठहर सकते हैं। नेचर वाक का टिकट भी इसी में शामिल है। हट में एसी, मिनी फ्रिज, केतली, चाय-काफी, डेंटल किट, नहाने का सामान, मिनरल वाटर और बैठने की जगह जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हीटर अतिरिक्त शुल्क पर मिलता है। रूम सर्विस, हाउसकीपिंग, पावर बैकअप, मुफ्त पार्किंग और वाई-फाई भी प्रदान किया जा रहा है। पार्किंग से हट तक गोल्फ कार्ट और दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था है। सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात रहते हैं। ताज नेचर वाक में वन विभाग द्वारा तैयार की गई ईको हट। इन हटों का निर्माण पर्यावरण के अनुकूल लकड़ी से किया गया है, जिससे कंक्रीट का बोझ नहीं पड़ता। करीब 16 लाख रुपये की लागत से तैयार एक हट तैयार की गई है। यहां से पर्यटकों को ताज के साथ सूर्योदय और सूर्यास्त का प्राकृतिक अनुभव मिल रहा है। शादियों का नया ट्रेंड: वैदिक और बॉलीवुड थीम के साथ डेस्टिनेशन वेडिंग का क्रेज, ताजमहल का शहर बना नया सेंटर डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि हटें शुरू होते ही स्थानीय और बाहर से आने वाले पर्यटकों में दिलचस्पी बढ़ी है। अक्टूबर से अप्रैल तक यह स्थान ईको-टूरिज्म का केंद्र बना रहेगा।
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Aaj Tak
Sep 21, 2026, 09:22 AM
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट कप्तान सोफी मोलिनेक्स ने खिलाड़ियों के बीच संबंधों की अटकलों के बीच टीम के प्रदर्शन को प्राथमिकता दी

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट कप्तान सोफी मोलिनेक्स ने खिलाड़ियों के बीच संबंधों की अटकलों के बीच टीम के प्रदर्शन को प्राथमिकता दी

ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की कप्तान सोफी मोलिनक्स ने टीम की खिलाड़ियों एश्ले गार्डनर और जॉर्जिया वॉल के रिश्ते को लेकर पहली बार अपनी बात रखी है. दोनों के रिश्ते को लेकर काफी चर्चा हो रही है, लेकिन मोलिनक्स ने साफ किया कि ऑस्ट्रेलियाई टीम का ध्यान क्रिकेट और मजबूत टीम माहौल बनाए रखने पर है. सोफी मोलिनक्स के मुताबिक, एश्ले गार्डनर और जॉर्जिया वॉल दोनों अनुभवी और शानदार खिलाड़ी हैं. वह मानती हैं कि दोनों खिलाड़ियों में मैदान पर मिलने वाले ध्यान को संभालने और अपने खेल पर फोकस बनाए रखने की क्षमता है. बता दें कि एश्ले गार्डनर पहले मोनिका राइट के साथ रिश्ते में थीं, लेकिन दोनों के बीच अलगाव हो गया था. राइट ने दावा किया था कि एश्ले गार्डनर का जॉर्जिया वॉल के साथ अफेयर चल रहा है, जिसके कारण यह रिश्ता टूटा. सोफी मोलिनक्स ने कहा कि टीम बाकी खिलाड़ियों की तरह ही एश्ले गार्डनर और जॉर्जिया वॉल का भी समर्थन करेगी. उनका मानना है कि टीम के लिए सबसे जरूरी चीज खिलाड़ियों का प्रदर्शन, मजबूत टीम संस्कृति और सकारात्मक माहौल बनाए रखना है. मोलिनक्स ने कोड स्पोर्ट्स से कहा, 'मुझे लगता है कि वे प्रदर्शन करने में सक्षम होंगी. वे बेहतरीन खिलाड़ी हैं और टीम में कोई बदलाव नहीं होगा. हम उनका भी उसी तरह साथ देंगे जैसे एक-दूसरे का देते हैं. हमारे लिए प्रदर्शन, मजबूत संस्कृति और अच्छा माहौल सबसे महत्वपूर्ण है.' ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम 2026 महिला टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद अब अपने घरेलू सीजन की तैयारी कर रही है. ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया था. अब ऑस्ट्रेलिया को बांग्लादेश महिला टीम के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलनी है. सीरीज के तीनों मुकाबले ब्रिस्बेन के एलन बॉर्डर फील्ड में खेले जाएंगे. पहला वनडे: 9 अक्टूबर दूसरा वनडे: 11 अक्टूबर तीसरा वनडे: 14 अक्टूबर
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ABP News
Sep 21, 2026, 07:24 AM
खिड़की की आवाज़ों को समझनाः कारण और परिणाम

खिड़की की आवाज़ों को समझनाः कारण और परिणाम

आमतौर पर सामान्य स्थिति में खिड़कियों से किसी तरह की तेज या लगातार आवाज नहीं आनी चाहिए. लेकिन अगर तेज हवा चलने पर खिड़की से सीटी जैसी आवाज सुनाई दे या मौसम बदलने के साथ शीशे या फ्रेम से चटकने और पॉपिंग जैसी आवाज आने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार इसकी वजह बहुत छोटी होती है और घर पर कुछ आसान उपायों से समस्या कम हो सकती है. लेकिन कुछ मामलों में ऐसी आवाज खिड़की की सील, फ्रेम या पुरानी हो चुकी सामग्री में आई परेशानी का संकेत भी हो सकती है. खिड़की से आने वाली हर आवाज का कारण एक जैसा नहीं होता. इसलिए आवाज के प्रकार को समझना जरूरी है. सीटी की आवाज आमतौर पर फ्रेम, सैश या वेदरस्ट्रिपिंग के आसपास मौजूद छोटे गैप से हवा के अंदर आने की वजह से होती है. वहीं, चटकने या पॉपिंग की आवाज अक्सर तापमान बदलने पर खिड़की की अलग-अलग सामग्रियों के फैलने और सिकुड़ने से जुड़ी होती है. अगर हवा चलने पर खिड़की सीटी बजाने जैसी आवाज करती है, तो इसका मतलब हो सकता है कि बाहर की हवा कहीं से अंदर प्रवेश कर रही है. यह समस्या खासकर पुरानी खिड़कियों में ज्यादा देखने को मिल सकती है. समय के साथ वेदरस्ट्रिपिंग खराब हो सकती है, फ्रेम में हल्का बदलाव आ सकता है या लॉक खिड़की को फ्रेम से पूरी तरह कसकर बंद नहीं कर पाता. वेदरस्ट्रिपिंग के खराब होने पर उसमें दरारें पड़ सकती हैं, वह दब सकती है या अपनी जगह से ढीली हो सकती है. इससे खिड़की और फ्रेम के बीच छोटी सी जगह बन जाती है. तेज हवा के दौरान इसी जगह से हवा गुजरने पर सीटी जैसी आवाज सुनाई दे सकती है. कई बार खिड़की का फ्रेम थोड़ा खिसकने या उसके सही तरह से फिट न होने के कारण भी हवा अंदर आ सकती है. इसके अलावा, अगर खिड़की लगाते समय फ्रेम के आसपास सीलिंग ठीक तरीके से नहीं हुई है, तो वहां से भी हवा का रिसाव हो सकता है. सबसे पहले खिड़की की वेदरस्ट्रिपिंग को ध्यान से देखें. अगर उसमें दरार, गैप, ढीलापन या दबने के निशान दिखाई दे रहे हैं, तो उसे बदलने की जरूरत हो सकती है. खराब वेदरस्ट्रिपिंग को बदलने से हवा का रिसाव और उससे होने वाली आवाज दोनों कम हो सकती हैं. इसके बाद खिड़की के लॉक और उसकी फिटिंग को देखें. अगर खिड़की बंद करने के बाद भी वह फ्रेम से पूरी तरह चिपकी हुई महसूस नहीं होती, तो हार्डवेयर या लॉकिंग सिस्टम में एडजस्टमेंट की जरूरत हो सकती है. सही फिटिंग खिड़की की सील को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है. अगर खिड़की और दीवार के बीच कहीं छोटा गैप दिखाई देता है, तो समस्या सिर्फ खिड़की की नहीं हो सकती. ऐसे मामलों में फ्रेम के आसपास की सीलिंग की जांच कराना जरूरी है. छोटे गैप को दोबारा सील करने या री-कॉल्किंग से एयर लीकेज कम किया जा सकता है. हर आवाज हवा के रिसाव की वजह से नहीं होती. अगर खिड़की से पॉपिंग या क्रैकिंग जैसी आवाज आती है, तो इसका कारण तापमान में बदलाव भी हो सकता है. गर्मी और ठंड के साथ खिड़की की कुछ सामग्रियां फैलती और सिकुड़ती हैं. इसी दौरान उनके बीच होने वाली हलचल से आवाज पैदा हो सकती है. यह समस्या खासकर तब ज्यादा महसूस हो सकती है जब बाहर के तापमान में तेजी से बदलाव हो, खिड़की सीधे धूप में हो या मौसम बदल रहा हो. पुरानी या कम गुणवत्ता वाली सामग्री में समय के साथ यह समस्या ज्यादा स्पष्ट हो सकती है. अगर आवाज कभी-कभार आती है और इसके साथ कोई दूसरी परेशानी नहीं है, तो जरूरी नहीं कि यह किसी बड़ी खराबी का संकेत हो. लेकिन अगर आवाज लगातार आती है, तो खिड़की की जांच करना बेहतर है. सबसे पहले ढीले हार्डवेयर को देखें. किसी हिस्से के ढीले होने पर खिड़की के हिलने से आवाज पैदा हो सकती है. इसके अलावा फ्रेम के टेढ़े या मुड़े होने की भी जांच करनी चाहिए. अगर फ्रेम का आकार बदल गया है, तो खिड़की पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. खिड़की के आसपास की इंसुलेशन और सीलिंग भी महत्वपूर्ण है. अगर इंसुलेशन कमजोर है, तो बाहर के तापमान में बदलाव का असर खिड़की की सामग्री पर ज्यादा पड़ सकता है. सिर्फ आवाज आने से हमेशा खिड़की बदलने की जरूरत नहीं होती. लेकिन अगर आवाज के साथ ठंडी या गर्म हवा अंदर आने लगे, शीशों के बीच धुंध या कंडेनसेशन दिखाई दे, खिड़की खोलने-बंद करने में परेशानी हो, फ्रेम टेढ़ा नजर आए या घर के अंदर तापमान असमान रहने लगे, तो समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए. अगर घर की कई खिड़कियों से तेज हवा में सीटी की आवाज आती है, तो यह केवल एक छोटी सीलिंग समस्या नहीं बल्कि पुरानी खिड़कियों की एयरटाइटनेस और इंसुलेशन से जुड़ी परेशानी हो सकती है. ऐसे में बार-बार छोटी मरम्मत कराने के बजाय खिड़कियों की पूरी स्थिति की जांच कराना ज्यादा उपयोगी हो सकता है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.
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Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 05:30 AM
मारुति सुजुकी डिजायर सीएनजी भारत में लॉन्चः कॉम्पैक्ट सेडान प्रेमियों के लिए एक ईंधन-कुशल विकल्प

मारुति सुजुकी डिजायर सीएनजी भारत में लॉन्चः कॉम्पैक्ट सेडान प्रेमियों के लिए एक ईंधन-कुशल विकल्प

भारत में मारुति की ओर से कई सेगमेंट में वाहनों की बिक्री की जाती है। निर्माता की ओर से हाल में ही Maruti Dzire CNG को एएमटी ट्रांसमिशन के साथ लॉन्‍च किया गया है। निर्माता की ओर से ऑफर की गई इस कार से एक किलोग्राम सीएनजी में कितनी माइलेज मिल सकती है। हम आपको इस खबर में बता रहे हैं। मारुति की ओर से हाल में ही कॉम्‍पैक्‍ट सेडान कार के तौर पर ऑफर की जाने वाली डिजायर सीएनजी के एएमटी वर्जन को लॉन्‍च कर दिया है। इस गाड़ी को दो वेरिएंट्स में उपलब्‍ध करवाया गया है। मारुति डिजायर में जेड सीरीज का नया 1.2 लीटर इंजन दिया गया है। इस इंजन से इसे 80 बीएचपी की पावर और 111.7 न्‍यूटन मीटर का टॉर्क मिलता है। जिसके साथ 5स्‍पीड मैनुअल और एएमटी ट्रांसमिशन दिया जाता है। इसमें फैक्‍ट्री फिटेड सीएनजी का विकल्‍प भी मिलता है। सीएनजी एएमटी के साथ इस कार को इस इंजन से 69.75 पीएस की पावर और 101.8 न्‍यूटन मीटर का टॉर्क मिलता है। मारुति डिजायर में एलईडी हेडलाइट्स के साथ ही फॉग लैंप, पार्किंग सेंसर, 360 डिग्री कैमरा, रिवर्स पार्किंग कैमरा, नौ इंच इंफोटेनमेंट सिस्‍टम, एंड्राइड ऑटो, एपल कार प्‍ले, टॉगल बटन के साथ एसी यूनिट, रियर एसी वेंट, सेगमेंट में पहली बार सिंगल पेन सनरूफ जैसे कई फीचर्स को ऑफर किया जा रहा है। हालांकि कुछ फीचर्स की कमी इसमें महसूस होती है, जिसमें फ्रंट आर्म रेस्‍ट और एंबिएंट लाइट शामिल है। मारुति की ओर से डिजायर सीएनजी एएमटी की माइलेज की जानकारी भी सार्वजनिक कर दी गई है। निर्माता की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक डिजायर सीएनजी एएमटी को एक किलोग्राम सीएनजी में 36.47 किलोमीटर तक की माइलेज मिल सकती है। वहीं इस गाड़ी के सीएनजी मैनुअल वर्जन से एक किलोग्राम सीएनजी में 35.63 किलोमीटर तक की माइलेज मिल सकती है। मारुति की डिजायर सीएनजी एएमटी की एक्‍स शोरूम कीमत 8.53 लाख रुपये रखी गई है। इसके टॉप वेरिएंट की एक्‍स शोरूम कीमत 9.53 लाख रुपये है।
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Amar Ujala
Sep 21, 2026, 04:55 AM
एच. आर. टी. सी. ने हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक बस बेड़े का विस्तार किया

एच. आर. टी. सी. ने हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक बस बेड़े का विस्तार किया

इससे नए रूटों पर परिवहन सुविधा बढ़ने के साथ प्रदूषण कम करने की दिशा में भी निगम के इलेक्ट्रिक परिवहन अभियान को मजबूती मिली है। हरोली ई-डिपो को 10 और ऊना डिपो को सात नई ई-बसें मिली हैं।विज्ञापनइनके आने के बाद ऊना-होशियारपुर-चिंतपूर्णी, ऊना-होशियारपुर-धनेटा, ऊना-होशियारपुर-घनेड़ और ऊना-बद्दी रूटों पर ई-बसों का संचालन बढ़ाया गया है। ऊना-नंगल-नादौन रूट पर भी रविवार से ई-बस सेवा शुरू कर दी गई है।विज्ञापनहरोली बना प्रदेश का पहला ई-बस डिपोहरोली में 2 अगस्त को प्रदेश का पहला ई-बस डिपो शुरू किया गया था। इसके बाद जिले में इलेक्ट्रिक परिवहन के विस्तार की प्रक्रिया तेज हुई। अब 17 नई बसें जुड़ने से ऊना और हरोली डिपो का ई-बस बेड़ा और मजबूत हुआ है।लंबे रूटों पर भी परखी क्षमताएचआरटीसी पहले ही ई-बसों को लंबी दूरी के रूटों पर परख चुका है। हरोली से एआईआईएमएस बिलासपुर-चिंतपूर्णी रूट पर ई-बस का ट्रायल किया गया था। वहीं, हरोली-चंडीगढ़ रूट पर भी इसका संचालन कर लंबी दूरी तय करने की क्षमता जांची गई। एक ई-बस को चार्ज करने में करीब तीन घंटे लगते हैं। इसमें ईंधन के बजाय बिजली का इस्तेमाल होता है।ऊना को 17 नई ई-बसें मिली हैं। इन्हें जरूरत के अनुसार लंबे रूटों पर चलाना शुरू कर दिया है। हरोली ई-डिपो और ऊना डिपो की ई-बसें अधिकतर लंबे रूटों पर दौड़ाई जा रही हैं। - राजेश जोशी, कार्यकारी उपमंडलीय प्रबंधक, एचआरटीसी ऊना
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Amar Ujala
Sep 21, 2026, 01:41 AM
कम दबाव वाले क्षेत्र के मजबूत होने और मध्य प्रदेश में भारी बारिश होने की उम्मीद

कम दबाव वाले क्षेत्र के मजबूत होने और मध्य प्रदेश में भारी बारिश होने की उम्मीद

मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार तक निम्न दाब क्षेत्र उत्तर अंडमान सागर और आसपास बना हुआ था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। अब इसके पश्चिम-उत्तर दिशा में बढ़ने और धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। इसके 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गहरे निम्न दबाव क्षेत्र और 22 सितंबर को और अधिक मजबूत होने का अनुमान है। इसके असर से 23 सितंबर की सुबह से मध्यप्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसके बाद 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।विज्ञापनमौसम विभाग ने 24 सितंबर को छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। यानी मानसून की विदाई से ठीक पहले प्रदेश में एक और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।विज्ञापनयह भी पढ़ें-भोपाल में आरएसएस का एकत्रीकरण: होसबाले बोले-जागृत और संगठित समाज ही देश को आगे बढ़ाएगा, जातिभेद-छुआछूत खत्म होप्रदेश में बारिश का आंकड़ा पिछले कुछ दिनों में तेजी से सुधरा है, लेकिन कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में भी बारिश सामान्य से कम रही है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 5 से 24 प्रतिशत तक बारिश कम है। पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से 5 से 49 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।वहीं, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया,आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है।यह भी पढ़ें-होटल के लिफ्ट में फंसी वरिष्ठ आईएएस की पत्नी: 20 मिनट बाद निकाला, सुरक्षा इंतजामों में मिली कमी,तीन लिफ्ट सीलइस मानसून सीजन में जून की कम बारिश का असर अभी भी आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश के बाद स्थिति में सुधार आया। इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया और कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं। मानसून के आखिरी सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत मौसम तंत्र ने बारिश की कमी को काफी हद तक कम किया, लेकिन जून की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। मध्यप्रदेश में मानसून के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश सामान्य मानी जाती है। अब तक 33.9 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच तक रहती है।
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Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:48 AM
उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदा-बांदी से राहत, आसमान साफ रहने की उम्मीद

उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदा-बांदी से राहत, आसमान साफ रहने की उम्मीद

प्रदेश से मानसून विदा होने जा रहा है। रविवार को उत्तर प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों में बुंदेलखंड और इलाहाबाद के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी ने लोगों को राहत दी। वहीं बाकी के हिस्सों में तेज धूप के साथ मौसम साफ रहा। मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार ने बताया कि दक्षिणी क्षेत्रों में कुछ एक्टिविटी हुई है। हालांकि अभी एक-दो दिन मौसम साफ रहेगा और धूप निकलने के कारण तापमान में बढ़ोत्तरी की संभावना बनी हुई है। चार-पांच दिन के बाद मौसमी परिस्थितियों के बदलने के आधार पर मौसम में परिवर्तन आ सकता है। आज सोमवार को चमकदार धूप के साथ लोगों को गर्मी का अहसास होगा। अब किसी भी जिले में भारी बारिश की संभावना नहीं है।
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 11:30 PM
मानसून गतिविधि भारतीय राज्य में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाती है

मानसून गतिविधि भारतीय राज्य में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाती है

मानसून की सक्रियता के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। बारिश के साथ गर्जन होने की भी संभावना है। ऐसे में पहाड़ी जिलों में आवाजाही करने वाले लोगों को मौसम के मिजाज पर नजर रखने की सलाह दी गई है। राज्य के मैदानी इलाकों में भी बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना बनी हुई है। मौसम में बदलाव के चलते तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।विज्ञापनमौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की विदाई से पहले प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह साफ नहीं रहेगा। 21 से 26 सितंबर तक चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, अल्माेड़ा, नैनीताल, चंपावत जिले के कुछ हिस्सों में गर्जन के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। मानसून विदाई की बात करें तो 25 से 30 सितंबर के बीच प्रदेश से मानसून की विदाई की संभावना है।विज्ञापन
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 09:25 PM
स्मृति हानिः कई कारणों से एक जटिल समस्या

स्मृति हानिः कई कारणों से एक जटिल समस्या

जेएन मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में हर महीने 40 से 45 मरीज याददाश्त कमजोर होने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें 50 से 60 वर्ष की उम्र के मरीजों की संख्या अधिक है। कुछ मामलों में 40 वर्ष के आसपास की उम्र में भी ऐसी परेशानी सामने आ रही है।विज्ञापनएसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद रियाजुद्दीन के अनुसार, याददाश्त कमजोर होने के पीछे उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलाव के अलावा स्ट्रोक (लकवा) समेत कई कारण हो सकते हैं। विभाग में आने वालों में 50 वर्ष की उम्र के करीब 25 और 60 वर्ष की उम्र के 20 मरीज होते हैं। हर महीने एक से दो मरीज करीब 40 वर्ष की उम्र के भी पहुंचते हैं।विज्ञापनउन्होंने बताया कि अल्जाइमर की शुरुआत अक्सर सामान्य लगने वाली भूलों से होती है। हाल की बातचीत भूलना, एक ही सवाल बार-बार पूछना, सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर परिचित रास्तों पर भ्रमित होना, बातचीत में सही शब्द न मिलना और सामान्य निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है।भूलने को उम्र का असर मानकर न टालें :एएमयू के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने बताया कि भूलने को उम्र का असर मानकर न टालें। मरीज की भूल पर उसे डांटने के बजाय परिजनों को धैर्य से पेश आना चाहिए। मरीज की दिनचर्या व्यवस्थित रखने और जरूरी कामों के लिए लिखित संकेत इस्तेमाल करने से मदद मिल सकती है। बाहर जाते समय पहचान और आपातकालीन संपर्क की जानकारी साथ रखना भी उपयोगी है। बीमारी बढ़ने पर मरीज को नहाने, कपड़े पहनने, खाना खाने, दवा लेने और बाहर आने-जाने जैसे सामान्य कामों में भी मदद की जरूरत पड़ सकती है।इन संकेतों को न करें नजरअंदाज :हाल में हुई बातें बार-बार भूलनाएक ही सवाल बार-बार पूछनासामान रखकर उसकी जगह भूल जानापरिचित रास्ते या स्थान पर भ्रमित होनाबातचीत में सही शब्द खोजने में लगातार परेशानीरोजमर्रा के परिचित काम करने में कठिनाईसमय और तारीख को लेकर बार-बार भ्रमित होनासामाजिक गतिविधियों और सामान्य कामों से दूरी बनानाबचाव और रोकथाम के उपायनियमित व्यायाम : योग या हल्का व्यायाम करने से दिमाग तक खून का संचार बेहतर होता है।मानसिक रूप से सक्रिय रहें : नई चीजें सीखें, किताबें पढ़ें, या पहेलियां सुलझाएं जिससे दिमाग की कसरत हो।संतुलित आहार : खाने में हरी सब्जियां, फल और मेवा शामिल करें।बीपी और शुगर का नियंत्रण : उच्च रक्तचाप और शुगर को नियंत्रण में रखें।पर्याप्त नींद और सामाजिक जुड़ाव : रोज पूरी नींद लें और परिवार व दोस्तों के साथ मेल-जोल बनाए रखें।केस-1 : एक ही बात कई बार पूछने लगेसर सैयद नगर के 52 वर्षीय व्यक्ति के परिवार ने शुरुआत में उनकी भूलने की समस्या को उम्र का असर माना। वह कभी चाबी या मोबाइल रखने की जगह भूल जाते थे। बाद में बातचीत याद रखने में परेशानी होने लगी और वह एक ही बात कई बार पूछने लगे। इसके बाद डॉक्टर से सलाह ली गई और उनकी देखभाल व निगरानी शुरू की गई।केस-2 : याद करने के लिए दिमाग पर लगाना पड़ता है जोरजयगंज के 54 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि पहले दो-तीन महीने पुरानी बातें भी आसानी से याद रहती थीं। पिछले करीब एक साल से एक-दो महीने पहले हुई बातें याद नहीं रहतीं। किसी के याद दिलाने पर बात याद आती है, लेकिन इसके लिए दिमाग पर काफी जोर लगाना पड़ता है।
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 08:26 PM
भारत ने प्रतिपूरक वनीकरण कार्यों के लिए डिजिटल आईडी पेश किए

भारत ने प्रतिपूरक वनीकरण कार्यों के लिए डिजिटल आईडी पेश किए

अमर उजाला ब्यूरोदेहरादून। प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) मद से होने वाले हर कार्य की अब डिजिटल आईडी बनाई जाएगी। इससे कार्यों की ऑनलाइन निगरानी के साथ मौके पर उनकी स्थिति का सत्यापन भी किया जा सकेगा। नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।कैंपा के तहत हर साल वन प्रभागों में क्षतिपूरक वनीकरण, वास स्थल सुधार और वनाग्नि नियंत्रण समेत कई कार्य कराए जाते हैं। इन कार्यों के लिए वन विभाग वार्षिक कार्ययोजना तैयार करता है। योजना स्वीकृत होने के बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इसके आधार पर बजट जारी करता है।विज्ञापनअब तक क्षतिपूरक वनीकरण के कार्यों की डिजिटल निगरानी ग्रीन वॉच के माध्यम से होती थी। नई व्यवस्था के तहत कैंपा मद से होने वाले प्रत्येक कार्य की डिजिटल आईडी बनाई जाएगी। संबंधित वन प्रभाग का कर्मचारी परिवेश पोर्टल के माध्यम से आईडी तैयार करेगा।विज्ञापनडिजिटल आईडी में कार्य का स्थान, अक्षांश-देशांतर, कार्य का विवरण, लागत और फोटो दर्ज किए जाएंगे। जीपीएस कोऑर्डिनेट्स के आधार पर सैटेलाइट से संबंधित स्थान को सीधे देखा जा सकेगा। किसी कार्य में कमी की आशंका होने पर मौके का भू-सत्यापन भी कराया जा सकेगा। कैंपा के सीईओ एवं अपर प्रमुख वन संरक्षक बीके गांगटे ने डिजिटल आईडी व्यवस्था शुरू किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इससे कैंपा के कार्यों की निगरानी और बेहतर तरीके से की जा सकेगी।-----कैंपा से होने वाले कार्य पर उठे थे सवालपिछले वर्ष राज्य में कैंपा से होने वाले कार्य पर कैग की रिपोर्ट के बाद सवाल उठे थे। इसमें पौधरोपण के लिए उपयुक्त जगह का चुनाव नहीं करने समेत कई कार्याें पर सवाल उठाया गया था। इसके अलावा राशि को अस्वीकार्य क्रियाकलापों में खर्च किए जाने को भी इंगित किया गया था। रिपोर्ट में एक मजबूत आंतरिक नियंत्रण प्रणाली स्थापित करने और बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की अनुशंसा भी की गई थी।
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 07:07 PM
क्वाक्स पर नहर में चिकित्सा अपशिष्ट फेंकने का आरोप

क्वाक्स पर नहर में चिकित्सा अपशिष्ट फेंकने का आरोप

बरचंद्रपुर निवासी सुक्खड़, गोविंद, नरेश और राजू ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सक्रिय कुछ झोलाछाप इलाज के बाद निकलने वाले मेडिकल कचरे को उचित तरीके से निस्तारित करने के बजाय नहर में फेंक देते हैं। इस्तेमाल की गई सिरिंज से सुई चुभने और संक्रमण का खतरा बना हुआ है। मेडिकल वेस्ट से मिट्टी और जलस्रोत भी प्रभावित हो सकते हैं।विज्ञापनग्रामीणों ने गांव के प्रशासक पर नियमित फॉगिंग न कराने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि फॉगिंग उपकरण खरीदे जाने के बावजूद उनका प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने नहर से मेडिकल वेस्ट हटवाने, कचरा फेंकने वालों की पहचान कर कार्रवाई करने और क्षेत्र में फॉगिंग कराने की मांग की है।विज्ञापनसीएचसी अधीक्षक डॉ. कमलेश कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। सीएचसी से टीम भेजकर जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई भी होगी।
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 06:52 PM
नेपाल में भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़

नेपाल में भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़

ऐसे में धनकुटा, उदयपुर, सिंधुली, खोटांग, ओखलढुंगा, दोलखा, रामेछाप, सिंधुपालचोक, काभ्रेपलांचोक, रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, काठमांडू, भक्तपुर, ललितपुर, बांके और बर्दिया जिलों और आसपास के क्षेत्रों से होकर बहने वाली छोटी नदियों में पानी का बहाव उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।विज्ञापनइन जिलों में आकस्मिक बाढ़ का मध्यम जोखिम रहने का पूर्वानुमान जारी किया गया है। महाशाखा ने देश की कुछ प्रमुख नदियों में भी पानी का बहाव बढ़ने की आशंका जताई है। प्रशासन और स्थानीय लोगों से नदी एवं जलधारा वाले क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की अपील की गई है। संवादविज्ञापन
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Amar Ujala
Sep 20, 2026, 06:47 PM
बिलासपुर के स्कूलों को स्वच्छ और हरित स्कूल मूल्यांकन के लिए पंजीकरण के लिए आमंत्रित किया गया

बिलासपुर के स्कूलों को स्वच्छ और हरित स्कूल मूल्यांकन के लिए पंजीकरण के लिए आमंत्रित किया गया

स्वच्छता, हरियाली, सुरक्षित पेयजल, कचरा प्रबंधन का होगा आकलनसंवाद न्यूज एजेंसीबिलासपुर। स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के लिए जिले के सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्य और प्रभारी 30 सितंबर तक पंजीकरण कर सकते हैं। स्कूलों का पंजीकरण यू-डाइस प्लस कोड के माध्यम से स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग पोर्टल अथवा मोबाइल ऐप पर किया जाएगा।रेटिंग के दौरान स्कूलों में स्वच्छता, हरियाली, सुरक्षित पेयजल, शौचालय, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसी व्यवस्थाओं का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही मिशन लाइफ, पर्यावरण जागरूकता, जल संरक्षण एवं स्वच्छता अभियान, ईको क्लब, चाइल्ड कैबिनेट और जीवन कौशल गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी को भी रेटिंग में शामिल किया जाएगा। स्कूलों को इन गतिविधियों से संबंधित विवरण पोर्टल पर दर्ज करना होगा।विज्ञापनजिला स्तर पर स्कूलों का मूल्यांकन 31 अक्तूबर तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद चयनित विद्यालयों को राज्य स्तर की रेटिंग के लिए नामांकित किया जाएगा। नवंबर में चयनित स्कूलों की सूची जारी किए जाने की संभावना है।विज्ञापनकार्यक्रम के समन्वयक नरबीर चंदेल ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सभी स्कूल समय पर पंजीकरण करवाकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग का उद्देश्य स्कूलों में स्वच्छ, सुरक्षित, स्वस्थ और पर्यावरण अनुकूल वातावरण विकसित करना है। इसके लिए सभी स्कूलों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
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